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प्रेगनेंसी डाइट चार्ट एक से नौ महीने तक क्या क्या खाएं

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला के खान पान का बहुत महत्व होता है क्योंकि महिला का खान पान ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे केवल पेट भरे और उसमे किसी तरह के पोषक तत्व न हो। बल्कि प्रेगनेंसी के समय महिला का खान पान ऐसा होना चाहिए जिसमे हर तरह के न्यूट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में हो, और जिसके कारण प्रेगनेंसी के समय महिला को फिट रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके। क्योंकि यदि महिला भरपूर मात्रा में पोषक तत्व नहीं लेती है तो इसके कारण प्रेगनेंसी से जुडी समस्याएँ होने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास से जुडी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी के एक से नौ महीने की डाइट

आपको प्रेग्नेंसी के एक से नौ महीने तक क्या क्या खाना चाहिए और आपकी डाइट कैसी होनी चाहिए, जिससे आपको प्रेगनेंसी के समय आने वाली परेशानियों को कम करने के साथ शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके, आइये विस्तार से जानते हैं।

फल और सब्जियां

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने आपको फलों और सब्जियों का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए, क्योंकि इनमे भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते हैं। और आपको ध्यान रखना चाहिए की मौसमी फल और सब्जियों का सेवन करें, कुछ भी खाने से पहले उन्हें अच्छे से धोएं ताकि किसी तरह के इन्फेक्शन का खतरा न रहें, कच्ची सब्जियां कभी न खाएं अच्छे से पकाने के बाद उनका सेवन करें।

हाइड्रेट रहें

पानी का सेवन भी प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने भरपूर करना चाहिए क्योंकि यह न केवल आपकी बॉडी को एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करता है। बल्कि आपके शरीर से विषैले पदार्थो को बाहर निकालकर आपको स्वस्थ और फिट बनाएं रखने में भी मदद करता है।

आयरन युक्त आहार

बहुत सी महिलाओं को प्रेगनेंसी के आखिरी महीनो में आयरन की कमी के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के पूरे नौ महिला आपको आयरन से भरपूर आहार जैसे अनार, हरी सब्जियां, आदि का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए।

कैफीन न लें

प्रेगनेंसी के दौरान आपको कैफीन युक्त पदार्थ जैसे चाय, कॉफ़ी आदि का अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण आपको गैस व् एसिडिटी की समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान परेशान होना पड़ सकता है।

कैल्शियम और प्रोटीन

शिशु की हड्डियों, कोशिकाओं के बेहतर विकास के लिए महिला को कैल्शियम व् प्रोटीन का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। यदि महिला प्रेगनेंसी में इनका भरपूर सेवन करती है तो शिशु की हड्डियों को मजबूत करने के साथ महिला को भी फिट रखता है।

अन्य पोषक तत्व

आयोडीन, फोलिक एसिड, फाइबर, विटामिन आदि ऐसे बहुत से पोषक तत्व हैं जो नियमित मात्रा में गर्भवती महिला को लेने चाहिए, और इन्हे अपने आहार में सम्मिलित करना चाहिए। ऐसा करने से प्रेगनेंसी के दौरान महिला फिट रहती है, और शिशु का बेहतर विकास होता रहता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में डाइट से जुड़े कुछ खास टिप्स जिनसे शिशु का बेहतर विकास होने के साथ महिला को भी प्रेगनेंसी का पूरा समय फिट रहने में मदद मिलती है।

महिलाओं में ब्रैस्ट कैंसर होने के ये हैं कारण

कैंसर का नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं और उन्हें जीवन के प्रति निराशा होने लगती है, ब्रैस्ट कैंसर की सम्भावना पुरुषो में न के बराबर और महिलाओ में अधिक पाई जाती है, परन्तु इससे जुडी एक अच्छी बात यह है की आप इसका इलाज करवा सकते है, और इसके ठीक होने के चांस भी अधिक होते हैं, यदि इसका पहले या दूसरे चरण में ही पता चल जाएँ तो इसका इलाज काफी आसान हो जाता है, इसके लिए जरुरी है की आपको इसक बारे में जानकारी हो, तो आइये आज हम आपको ब्रैस्ट कैंसर से जुड़े कुछ अहम तथ्य बताते है, जैसे की इसके कारण, लक्षण आदि।

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स्तन कैंसर के लक्षण क्या होते है:-

  • आपके ब्रैस्ट या बाँह के नीचे गाँठ का अनुभव होना।
  • स्तन से कुछ तरल रस जैसे पदार्थ का निकलना।
  • ब्रैस्ट में होने वाली सूजन भी ब्रैस्ट कैंसर का कारण हो सकती है।
  • स्तन को दबाने पर दर्द का अनुभव न होना।
  • निपल्स का मुड़ जाना या स्तन के आकार में बदलाव आना।

स्तन कैंसर के क्या कारण होते हैं:-

शारीरिक श्रम न करना:-

जो महिलाएं व्यायाम आदि नहीं करती है, और सारा दिन किसी भी तरह का शारीरिक श्रम नहीं करती है, उन्हें स्तन कैंसर की आशंका सबसे अधिक होती है।

पीरियड्स और मेनोपॉज़ से जुडी समस्या होने पर:-

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जिन लड़कियों को समय से पहले माहवारी शुरू हो जाती है, जैसे की बारह वर्ष की उम्र से भी पहले, और मेनोपॉज़ भी पचपन के आस पास हो जाता है, उन महिलाओ को भी ब्रैस्ट कैंसर के कारण परेशान होना पड़ सकता है।

मोटापा अधिक होना:-

वजन का अधिक होना भी ब्रैस्ट कैंसर का कारण होता है, क्योंकि फैट सेल्स आपके शरीर में एस्ट्रोजन का स्त्राव आपके शरीर में अधिक करने लगते है, और ये समस्या आपको रजोनिवृति के बाद परेशान कर सकती है।

धूम्रपान व् अल्कोहल का सेवन अधिक मात्रा में करना:-

नशीले पदार्थो में भी ऐसे तत्व पाएं जाते है जो आपके शरीर को धीरे धीरे बीमारियों की चपेट में ले जाते है, और खासकर जो महिलाएं इनका सेवन अधिक मात्रा में करती है उन्हें ब्रैस्ट कैंसर होने की सम्भावना भी बढ़ जाती है।

बढ़ती उम्र:-

आपकी अधिक उम्र भी आपको ब्रैस्ट कैंसर का रोगी बना सकती है, वैसे यह चालीस से साथ वर्ष की आयु की महिलाओं में बहुत तेजी से फैलता है, इसके अलावा यह आपको चालीस से पहले या साथ के बाद भी हो सकता है।

तनाव के कारण:-

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तनाव होने के कारण आपके शरीर में कोशिकाएं और जीन्स सुस्त अवस्था में पड़े रहते है, जिसके कारण आपके शरीर में बीमारियां बढ़ने लगती है, और ऐसे में ही कैंसर कोशिकाएं भी विकसित होती है, और इसके कारण आपके इम्यून सिस्टम पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है, इसीलिए आपको तनाव से दूर रहना चाहिए।

अधिक भारी स्तन होने पर:-

ज्यादा भारी स्तन भी आपको ब्रैस्ट कैंसर का रोगी बना सकते है, क्योंकि ऐसा होने पर आपके ब्रैस्ट में वसा कनेक्टिव टिश्यू अधिक हो जाते है, जिसके कारण आपको ये समस्या हो सकती है।

प्रेगनेंसी और स्तनपान:-

जो महिलाएं ज्यादा उम्र जैसे की तीस के बाद माँ बनने की सोचती है, या उससे भी ज्यादा देरी करती है, उनमे ब्रैस्ट कैंसर की आशंका बढ़ जाती है, लेकिन जो महिलाएं कम से कम चाह माह तक अपने शिशु को स्तनपान करवाती है, उनमे ब्रैस्ट कैंसर होने की आशंका बहुत कम होती है।

अनुवांशिक कारण भी हो सकते हैं:-

यदि आपके घर में जाइए की माता पिता का यदि ऐसा कोई इतिहास है तो उनके कारण आपके जो जीन्स आते है तो उसके प्रभाव से आपको भी ब्रैस्ट कैंसर की समस्या हो सकती है।

आपका गलत खान पान:-

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असंतुलित खानपान लगभग 40% कैंसर में एक अहम कारण होता है, क्योंकि जो महिलाएं कैरोटिनॉइड, सल्फोरेफेन और लाइकोपीन की अधिकता वाली डाइट लेती हैं उनमें ब्रैस्ट कैंसर की आशंका कम हो जाती है, इसीलिए महिलाओ को अपने आहार का भरपूर मात्रा में और इन पोषक तत्वों से युक्त लेना चाहिए, ताकि आपको इस समस्या के कारण परेशान न होना पड़े, इसके लिए आप हरी पत्तेदार सब्ज़ियों, पीली और लाल सब्ज़ियों, फलों, दालों और साबुत अनाज में ये तत्व पाये जाते हैं।

हॉर्मोन का असंतुलन होना:-

किसी भी कारण शरीर में यदि हॉर्मोन की उथल पुथल होती है तो इसके कारण आपके शरीर में हॉर्मोन असंतुलित होने लग जाते है, इसके अलावा हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थैरेपी भी इस रिस्क को बढ़ावा देती है।

विकिरणों के संपर्क में आने से:-

शरीर जब विकिरणों के संपर्क में आता है, तो भी आपके शरीर में बहुत से परिवर्तन होते है जिसके कारण आपको ये समस्या हो सकती है, जैसे की बहुत अधिक धूप की अल्ट्रा वॉइलेट किरणों के संपर्क में रहना, आदि।

स्तन कैंसर की सम्भावना को कम करने के लिए कुछ उपाय:-

काली चाय का सेवन करें:-

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काली चाय एक ऐसा पदार्थ है जो हर घर में बड़ी ही आसानी से मिल जाता है, और काली चाय का सेवन करने से आपकी इस समस्या को कम किया जा सकता है, क्योंकि इसमें एपि गैलो कैटेचिन गैलेट नाम का एक रसायन मौजूद होता है, जो ब्रैस्ट में ट्यूमर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है, परन्तु इस बात का खास ध्यान रखें की बिलकुल गरम काली चाय का सेवन भी न करें, क्योंकि यह आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है, गुनगुना होने पर ही इसका सेवन करें।

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खट्टे फलों का सेवन करें:-

खट्टे फलों में फाइटोकेमिकल्स भरपूर पाए जाते हैं, जो आपके ब्रैस्ट में ही नहीं बल्कि आपके शरीर में भी कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकते हैं, और यदि आप नियमित इनका सेवन करते है तो यह कैंसर की कोशिकाओं को आपके शरीर में विकसित ही नहीं होने देते हैं, और इसके लिए आप मौसम्बी, संतरें, पीच, नाशपाती, अंगूर सेब आदि का सेवन कर सकते है।

दूध और दही का सेवन भरपूर मात्रा में करें:-

दूध और दही में विटामिन डी भरपूर होता है, जो आपके ब्रैस्ट में कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है, इसीलिए इससे बचने के लिए आपको दूध और दही का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

ग्रीन टी का सेवन करें:-

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ग्रीन में भी ऐसे गुण होते है जो आपको ब्रैस्ट कैंसर से बचाव करने में मदद करते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक गिलास पानी में ग्रीन टी की कुछ पत्तियां उबालें, उसके बाद इन्हे जब तक उबालते रहें जब तक की पानी आधा न रह जाएँ, और उसके बाद छानकर इसके सेवन दिन में कम से कम दो बार करें आपको फायदा जरूर मिलेगा।

गेहूं की घास का सेवन करें:-

गेहूं की घास ब्रैस्ट कैंसर के रोगियों के लिए सबसे अच्छा खाद्य पदार्थ होती है, क्योंकि यह आपके शरीर में कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकती है, जिससे आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत होने में मदद मिलती है, साथ ही यह आपके शरीर से सभी अवांछित और विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में आपकी मदद करती है।

स्तन कैंसर से बचने के ने उपाय:-

  • नशीले पदार्थ जैसे अल्कोहल और धूम्रपान का सेवन न करें।
  • लहसुन का सेवन करने से आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत होने व् आपके शरीर में कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है।
  • शारीरिक श्रम अधिक करें, व्यायाम आदि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
  • रेड मीट का सेवन कम से कम करें।
  • नमक का सेवन कम से कम करें।
  • गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन यदि करते है तो इसके बारे में डॉक्टर से राय लें।
  • सूरज की तेज किरणों के प्रभाव से बचें।

तो ये हैं स्तन कैंसर के लक्षण, कारण व् उससे बचने के उपाय, और आपको इसके बारे में पूरी जानकारी होनिओ चाहिए, ताकि आप इसके बारे में दुसरो को बता सकें, क्योंकि जितना जल्दी इस बारे में लोगो को पता चलता है, उतना ही जल्दी इससे बचाव करने में मदद मिलती है, इसके अलावा आपको अपने आप को फिट रखने व् किसी भी तरह की बिमारी से बचाव के लिए अपनी दिनचर्या को सही करके रखना चाहिए।

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डिलीवरी होने वाली है क्या निशानी है?

डिलीवरी का समय

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने गर्भवती महिला के लिए बहुत से नए अनुभवों से भरे हुए होते है, इस दौरान ख़ुशी का अनुभव होने के साथ महिला के मन में तरह तरह के सवाल भी होते हैं। और जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है वैसे वैसे महिला की चिंता और भी बढ़ जाती है, खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बनने जा रही होती है उन्हें तनाव जैसी समस्या भी हो सकती है। लेकिन इस दौरान तनाव के कारण परेशानी बढ़ सकती है, ऐसे में जितना हो सके गर्भवती महिला को धैर्य से काम लेना चाहिए। क्योंकि प्रसव होने से पहले बॉडी कुछ संकेत देती है, जिन्हे पहचानकर आप जान सकते हैं की प्रसव का समय नजदीक है, साथ ही प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में समय समय पर डॉक्टर से भी राय लेते रहना चाहिए।

प्रसव के लक्षण

डिलीवरी होने वाली है इसके कुछ लक्षण पहले से ही बॉडी देने लगती है, और इन्ही निशानी को देखकर गर्भवती महिला अंदाजा लगा सकती है की डिलीवरी होने का समय पास आ गया है, और तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। तो लीजिये आज हम आपको विस्तार से बताने जा रहे हैं की डिलीवरी होने से पहले बॉडी कौन कौन से संकेत देती है।

पेट के निचले हिस्से की तरफ भार

यदि महिला को पेट और सीने के पास हल्कापन महसूस हो और साथ ही पेट के निचले हिस्से की तरग भार अधिक महसूस हो, तो इसका मतलब शिशु गर्भ के निचले हिस्से में आने लगा है, और वो अपनी डिलीवरी की सही पोजीशन में आ चूका है। तो यह इस बात का संकेत होता है की डिलीवरी अब किसी भी समय हो सकती है।

संकुचन अधिक होना

पेट में हल्के दर्द या संकुचन का अनुभव होना, और फिर दर्द या संकुचन का अधिक बढ़ जाना, शुरुआत में धीरे ऐसा महसूस हो और बाद में अधिक संकुचन यदि गर्भवती महिला को महसूस हो तो यह भी प्रसव का समय नजदीक आने का संकेत होता है।

रक्त के दाग

प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में जब गर्भ में शिशु गर्भाशय के साथ जुड़ता है तो कई बार रक्त के दाग महसूस हो सकते हैं, वैसे ही जब गर्भाशय ग्रीवा अपने आप को प्रसव के लिए तैयार करती है, तो भी रक्त के दाग महसूस हो सकते हैं। और प्रेगनेंसी के आख्रिरी महीने में ऐसा होना भी डिलीवरी का समय पास आने का लक्षण होता है।

एमनियोटिक फ्लूड

गर्भ में शिशु एमनियोटिक फ्लूड में ही होता है, जो गर्भ में शिशु की मूवमेंट को आसान बनाने में मदद करती है। साथ ही यदि डिलीवरी का समय पास आने पर कभी महिला को प्राइवेट पार्ट से यूरिन की तरह आता हुआ यदि सफ़ेद, गाढ़ा चिपचिपा पदार्थ महसूस हो, या उसमे रक्त की बूंदे भी हो तो बिल्कुल देरी न करते हुए जितना जल्दी हो सके डॉक्टर के पास जाना चाहिए, क्योंकि यह इस बात की और इशारा करता है की शिशु गर्भ से बाहर आने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

नींद और बेचैनी

प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में गर्भवती महिला यदि बहुत अधिक नींद आये और सोने का मन करे, लेकिन नींद आने पर भी बेचैनी सी अधिक महसूस हो। साथ ही कमजोरी का अहसास भी अधिक होने लगे तो यह भी गर्भवती महिला को लेबर पेन शुरू होने का लक्षण हो सकता है।

पेट से जुडी समस्या

पेट का खराब रहना, कब्ज़ अधिक होना, या फिर डायरिया जैसी समस्या से प्रेग्नेंट महिला का प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में परेशान होना भी डिलीवरी का समय पास आने का संकेत होता है, ऐसे में इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

मांसपेशियों में खिंचाव

यदि गर्भवती महिला को कमर, पेट के निचले हिस्से, जांघो, जोड़ो, की मांसपेशियों में खिंचाव अधिक महसूस हो तो यह लक्षण भी शिशु के इस दुनिया में आने का समय हो गया है इस बात की और इशारा करता है।

भावनात्मक बदलाव

शिशु के जन्म से पहले गर्भ से ही माँ और शिशु का रिश्ता जुड़ जाता है ऐसे में कुछ लोग ऐसा भी कहते हैं, की महिला को अंदर से महसूस होने लगता है की शिशु जन्म के लिए तैयार है। कई महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण इस दौरान अधिक चिड़चिड़ापन और गुस्सा भी आने लग सकता है। ऐसे में यदि महिला को ऐसे अहसास हो तो महिला को समझ जाना चाहिए की अब वो पल बहुत करीब है जब उसकी नन्ही जान उसके हाथों में आने वाली है।

तो यह हैं कुछ खास संकेत जो डिलीवरी होने से पहले महिला के शरीर में दिखाई देते हैं, ऐसे में गर्भवती महिला को इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। और ऐसे में आराम से काम लेने चाहिए और जल्दी से जल्दी डॉक्टर के पास जाना चाहिए। इसके अलावा डिलीवरी के बाद हॉस्पिटल में जाने वाले सामान को पहले से ही तैयार रख लेना चाहिए ताकि डिलीवरी का समय पास आने पर आपको किसी और बात की चिंता भी न करनी पड़े।

प्रेगनेंसी में पोहा खाने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान डाइट में अच्छी अच्छी चीजों को शामिल करने की सलाह दी जाती है जो की पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान फयदेमंद भी हो। आज इस आर्टिकल में हम एक ऐसी ही खाने की चीज के बारे में बात करने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला के लिए बेहतरीन नाश्ता और एक स्वादिष्ट स्नैक के रूप में डाइट में शामिल की जा सकती है और वो है पोहा।

यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और सोच रही हैं की प्रेगनेंसी में पोहा खाएं या नहीं, तो इसका जवाब है हाँ, गर्भावस्था के सौरान पोहा का सेवन किया जा सकता है। और पोहा का स्वाद और इसमें पोषक तत्वों की मात्रा को बढ़ाने के लिए आप इसमें ढेर सारी सब्जियों को भी मिक्स कर सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में पोहा खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

पोषक तत्वों से भरपूर नाश्ता है

प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा नाश्ता करने की सलाह दी जाती है जिससे महिला का केवल पेट न भरें बल्कि जिससे महिला को भरपूर ऊर्जा मिलें। तो ऐसे नाश्ते के लिए पोहा बेहतरीन विकल्प होता है क्योंकि पोहा कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है जो महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करता है।

आयरन से भरपूर

पोहा आयरन से भी भरपूर होता है जो गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है। साथ ही इससे शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। ऐसे में गर्भवती महिला को पोहा का सेवन जरूर करना चाहिए।

विटामिन और एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर

पोहा विटामिन्स व् एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता जो गर्भवती महिला की इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है। और जब गर्भवती महिला की इम्युनिटी स्ट्रांग होती है तो गर्भवती महिला को और शिशु को प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण व् बिमारियों से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

पाचन तंत्र करता है बेहतर काम

पोहा में फाइबर प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भवती महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करता है। साथ ही प्रेग्नेंट महिला को होने वाली कब्ज़, अपच, एसिडिटी जैसी परेशानियों से प्रेगनेंसी के दौरान बचाने में मदद करता है।

वजन रहता है नियंत्रित

पोहा खाने से गर्भवती महिला का मेटाबोलिज्म रेट सही रहता है। पाचन तंत्र सही रहता है जिससे गर्भवती महिला का वजन जरुरत से ज्यादा नहीं बढ़ता है और वजन को संतुलित रहने में मदद मिलती है।

ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है

पोहा का सेवन करने से ब्लड में शुगर लेवल को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को जेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। ब्लड शुगर लेवल कण्ट्रोल रहने के साथ पोहा खाने से ब्लड प्रैशर भी नियंत्रित रहता है।

पोषक तत्व होते हैं भरपूर

पोहा में तो पोषक तत्व होते ही हैं लेकिन यदि आप ढेर सारी सब्जियां मिलाकर पोहा बनाती हैं तो इसमें पोषक तत्वों की मात्रा भी दुगुनी हो जाती है जो गर्भवती महिला के साथ भ्रूण के लिए भी फायदेमंद हो जाता है। ऐसे में शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को सही रखने के लिए प्रेग्नेंट महिला पोहा में ढेर सारी सब्जियां मिलाकर उसका सेवन कर सकती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान पोहा खाने के कुछ बेहतरीन फायदे, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो कभी कभी आपको पोहा भी जरूर खाना चाहिए। ताकि आपके मुँह का स्वाद भी बदल जाये और आपको पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में मिल सके। जिससे आपको और आपके बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

Benefits of eating Poha in Pregnancy

प्रेग्नेंट महिला अंडा खाने से पहले यह जरूर चेक करें

प्रेगनेंसी के दौरान खाने के अलावा गर्भवती महिला को और भी खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। जो की गर्भवती महिला व् बच्चे के लिए फायदेमंद होते है। और ऐसा ही एक खाद्य पदार्थ है अंडा, अंडा प्रोटीन, कैलोरी, ओमेगा 3 फैटी एसिड, Choline व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला को फिट व् एनर्जी से भरपूर रखने के साथ बच्चे के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करते हैं।

लेकिन प्रेग्नेंट महिला को अंडा खाने के फायदे तभी मिलते हैं, जब गर्भवती महिला सही तरीके से अंडे का सेवन करती है। क्योंकि अंडा खाते समय यदि कुछ बातों का ध्यान न रखा जाये तो इससे माँ व् बच्चे को सेहत सम्बन्धी परेशानियां हो सकती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला अंडा खाने से पहले क्या चेक करना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

ध्यान रखें की बहुत दिनों का रखा अंडा तो नहीं है

कुछ लोग घर में अण्डों की पूरी ट्रे लाकर रख देते हैं ऐसे में कभी उनका इस्तेमाल हो जाता है तो कभी वो अंडे बहुत दिनों तक रखें भी रहते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को अंडे का सेवन करने से पहले देख लेना चाहिए की कहीं जो अंडे घर में रखे है वो ज्यादा पुराने तो नहीं है। और यदि पुराने हैं तो दूकान से जाकर ताजे अंडे लाएं क्योंकि दूकान पर तो अंडे आकर बिकते रहते हैं तो आपको वहां से ताजे अंडे मिल जायेंगे। लेकिन घर में ज्यादा दिनों के रखे अंडो का सेवन गर्भवती महिला को करना चाहिए।

अंडो को चेक करने के लिए पानी में डालकर देखें

गर्भवती महिला जब भी अंडे का सेवन करती है तो उन्हें खाने के लिए इस्तेमाल करने से पहले कच्चे अंडे को पानी में डालकर देखें यदि अंडा पानी में डूब जाता है। तो यह इस बात की और संकेत करता है की आप जो अंडा खाने वाले हैं वो सही है लेकिन यदि अंडा पानी में तैरने लगता है तो वो अंडा खराब होता है।

उबालने के बाद अंडे को चेक करें

ऑमलेट बनाने से, अंडे की भुर्जी बनाने से अंडा आसानी से पक जाता है लेकिन अंडा उबालने में यदि जल्दी की जाएँ तो कई बार अंडा अच्छे से नहीं पकता है। और यदि किसी भी रूप में यदि महिला अंडे को अच्छे से पकाकर उसका सेवन नहीं करती है तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला को पेट में दर्द, उल्टी, दस्त जैसी परेशानियां हो जाती है।

साफ़ अंडे लाएं

जब भी आप दूकान पर या कहीं भी अंडे लेने जाते हैं तो कुछ अंडो के ऊपर खून के निशान या कुछ गंदे पदार्थ चिपके हुए से होते हैं। तो ऐसे में आपको उन अंडो का सेवन नहीं करना चाहिए। बल्कि आपको साफ साफ अंडो को लेना चाहिए।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनका ध्यान अंडो को खाने से पहले प्रेग्नेंट महिला को रखना चाहिए। ताकि अंडो का सेवन करने के बेहतरीन फायदे माँ व् बच्चे को मिल सके और किसी भी तरह की सेहत सम्बन्धी परेशानी महिला या बच्चे को न हो। इसके अलावा अंडो का सेवन प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही से प्रेग्नेंट महिला को करना चाहिए।

गर्मियों में मखाने खाने के क्या फायदे होते हैं प्रेग्नेंट महिला के लिए

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। चाहे वो महिला के किसी काम को करने से जुडी हो, डॉक्टरी जांच से जुडी हो या खान पान से जुडी हो। इसके अलावा भी हर छोटी से छोटी बात का अच्छे से ध्यान रखना जरुरी होता है। लेकिन साथ ही खान पान में महिला को हर वो चीज शामिल करने की सलाह दी जाती है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होती है। तो आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी में गर्मियों के दौरान मखाने खाने से गर्भवती महिला व् बच्चे को कौन से फायदे मिलते हैं उस बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्मी के कारण होने वाली परेशानी से मिलता है निजात: गर्मी के कारण बेचैनी, नींद न आने की समस्या, घबराहट महसूस होना जैसी परेशानी गर्भवती महिला को अधिक हो सकती है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला मखाने का सेवन करती है तो महिला को इन सभी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

आयरन की कमी होती है पूरी: प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के लिए और माँ के पेट में पल रहे बच्चे के बेहतर विकास के लिए गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की मात्रा का सही होना बहुत जरुरी होता है। ऐसे में मखाने खाने से प्रेग्नेंट महिला को बॉडी में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने, प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स को दूर करने, एनीमिया से बचे रहने, बच्चे के बेहतर विकास जैसे फायदे मिलते हैं। इसके अलावा मखाने का सेवन करने से बॉडी में रेड ब्लड सेल्स को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

बच्चे के विकास के लिए मिलता है फोलेट: फोलेट शिशु की रीढ़ की हड्डी के बेहतर विकास, मस्तिष्क के बेहतर विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। और मखाने में फोलेट की मात्रा मौजूद होती है ऐसे में मखाने से शिशु को भरपूर फोलेट मिलता है। जिससे शिशु के बेहतर विकास होने के साथ जन्म के समय शिशु को होने वाली समस्याओं से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर: मखाने का सेवन करने गर्भवती महिला के ब्लड प्रैशर को सही रखने में भी मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला के ब्लड प्रैशर के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

एंटी ऑक्सीडेंट गुण: मखाने में एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होने के कारण यह गर्भवती महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ने में मदद करते हैं। जिससे माँ और बच्चा दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

कैल्शियम और विटामिन डी: हड्डियों के बेहतर विकास के लिए जरुरी कैल्शियम व् विटामिन डी की मात्रा भी मखाने में मौजूद होती है। ऐसे में गर्भवती महिला की हड्डियों की मजबूती के साथ बच्चे की हड्डियों के बेहतर विकास के लिए भी गर्भवती महिला द्वारा मखाने का सेवन करना फायदेमंद होता है।

शुगर कण्ट्रोल: प्रेगनेंसी के दौरान महिला को गेस्टेशनल शुगर जैसी समस्या होने का खतरा रहता है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला मखाने का सेवन करती है तो इससे ब्लड में शुगर के लेवल को मेन्टेन रखने में मद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला इस परेशानी से बच सकती है। इसके अलावा यदि प्रेग्नेंट महिला शुगर से ग्रसित है तो मखाने का सेवन करने से शुगर को कण्ट्रोल रहने में मदद मिलती है।

पोटैशियम: मखाने में पोटैशियम की मात्रा भी मौजूद होती है जो गर्भवती महिला की स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होती है। ऐसे में मखाने का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्किन से जुडी परेशानियां जैसे की मुहांसे आदि से बचे रहने में मदद मिलती है।

यदि गर्मियों का मौसम है और आप भी माँ बनने का बेहतरीन अनुभव ले रही है तो आपको भी मखाने का सेवन जरूर करना चाहिए। ताकि आपको और आपके बच्चे दोनों को फायदा मिल सके।

बवासीर होने के कारण

बवासीर एक ऐसी समस्या है जिसके कारण व्यक्ति बहुत अधिक परेशान हो जाता है, यह गुदा में होने वाला एक रोग है, जो दो तरह से व्यक्ति को हो जाता है, आंतरिक और बाहरी, इस रोग के होने पर व्यक्ति के गुदा मार्ग से खून निकलता है, और कई बार यह समस्या इतनी बढ़ जाती है, की गुदा मार्ग में मस्से भी हो जाते है, और जब आप मल पास करने के लिए जाते है, तो वह मस्से भी बाहर आ जाते है, गुदा आपकी बड़ी आंत का निचला हिस्सा होता है, जो बाहर की और खुलता है, और आप उसमे से मल को पास करते है, और बवासीर गुदा में होने वाली समस्या है, इस कारण मल पास करते समय व्यक्ति को बहुत अधिक पीड़ा होती है, तो आइये जानते है की बवासीर के क्या कारण होते है, और क्या लक्षण होते हैं।

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बवासीर के क्या लक्षण होते हैं:-

  • गुदा के आस पास किसी गांठ या मस्से का होना बवासीर का संकेत होता है।
  • यदि आपको मल त्याग करते समय अधिक कठिनाई होती है, और साथ की मल त्याग करते समय खून भी आता है तो यह भी बवासीर का लक्षण होता है।
  • आपकी गुदा से बलगम जैसे स्त्राव का निकलना पाइल्स का लक्षण होता है।
  • गुदा मार्ग में अधिक खुजली का होना या रुक रुक कर खुजली होना भी सी का संकेत है।

बवासीर के क्या कारण होते है:-

कब्ज़ के कारण:-

बवासीर होने का सबसे बड़ा कारण होता है व्यक्ति को कब्ज़ की परेशानी होना, कब्ज़ होने के कारण व्यक्ति मल पास करते समय बहुत अधिक जोर लगाना पड़ता है, जिसके कारण गुदा की नसों और उसके आस पास के हिस्सों पर दबाव पड़ने लगता है, जिसके कारण आपको ये परेशानी हो सकती है, इसीलिए आपको इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के कारण:-

प्रेगनेंसी के दौरान पाइल्स का होना आम बात होती है, क्योंकि जैसे जैसे शिशु का आकर बढ़ता है, वैसे वैसे आपके पेट में निकले हिस्से में दबाव पड़ता है, जिससे नसों में खिंचाव उत्पन्न होता है, और आपको ये समस्या हो जाती है, इसके अलावा शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव की वजह से भी आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

उम्र के कारण:-

कैसे जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, वैसे वैसे गुदा नलिका के अंदर का भगा कमजोर पड़ने लगता है, जिसके कारण आपको बवासीर जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

अधिक वजन उठाने के कारण:-

यदि आप व्यायाम आदि करते है, रोजमर्रा की जिंदगी में भारी वजन को उठाते है, तो वजन उठाते समय आपको अपनी सांस को रोकना पड़ता है, जिससे गुदा पर शारीरिक रूप से तनाव उत्त्पन्न होता है, और नसों में सूजन होने लगती है, और आपको इस समस्या का सामना करना पड़ता है, साथ ही अधिक खड़े रहने और एक ही जगह बैठे रहने के कारण भी आपकी नसों पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण आपको ये समस्या हो सकती है।

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अनुवांशिकता के कारण:-

बवासीर होने के कारण अनुवांशिकता भी हो सकती है, इसके प्रभाव के कारण आपकी नसें भी कमजोर हो सकती है, जिसके कारण आपको बवासीर जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

अधिक मसालें वाले भोजन के कारण:-

यदि आप नियमित ऐसा आहार लेते हैं जिसमे मसाले भरपूर मात्रा में होते हैं, इसके कारण भी आपकी नसों पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण उनमे सूजन हो सकती है, और सूजन के कारण आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

अधिक वजन का होना:-

यदि आपका वजन अधिक होता है, जिससे आपके पेट का दबाव आपके निचले हिस्से पर पड़ता है, और आपकी नसों में खिंचाव उत्त्पन्न होता है, जिसके कारण आपको पाइल्स की समस्या हो सकती है।

अधिक देर तक मल पास न करने के कारण:-

कई लोगो की आदत होती है की वो मल के आने पर उसे पास नहीं करते है, बल्कि रोक कर रखते है, जिसके कारण आपकी गुदा मार्ग की नसों में खिंचाव उत्त्पन होता है, और उसके बाद दर्द भी होने लगता है, और आपको पाइल्स की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।

नशीले पदार्थो का सेवन करना:-

अधिक शराब, तम्बाकू, धूम्रपान भी आपके शरीर पर बुरा प्रभाव डालते है, जिसके कारण आपकी नसें कमजोर होने लगती है, और आपके स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है, और आपको इस परेशानी का भी सामना करना पड़ सकता है।

बवासीर से बचने के कुछ घरेलू इलाज:-

  • यदि आप नियमित मूली का सेवन करते हैं या मूली का रस पीते हैं तो आपको इससे बचने में मदद मिलती है।
  • दही या छाछ के साथ कच्चे प्याज़ का सेवन करने से भी आपको फायदा मिलता है।
  • गुड़ और हरड़ को एक साथ खाने पर आपको इस समस्या से आराम मिलता है।
  • यदि आप नियमित छाछ में जीरा और अजवाइन मिलाकर उसका सेवन करते हैं तो भी आपको फायदा मिलता है।
  • सहजन और आक के पत्तों का लेप बनाकर मस्सो पर लगाने से आपको राहत मिलती है।
  • अधिक मसालें वाले भोजन का सेवन न करके स्वस्थ संतुलित व् पोष्टिकाहर का सेवन करने से आपको फायदा मिलता है।
  • पपीता, अंगूर, जैसे फलों का सेवन नियमित रूप से करने पर आपको फायदा मिलता है।
  • ऐसे पदार्थो का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए जिनसे आपको कब्ज़ बनती हो।

तो ये हैं कुछ कारण, लक्षण, और उपाय बवासीर से बचने के लिए, यदि आपको अधिक समस्या हो तो इसे एक बार डॉक्टर को भी जरूर दिखाना चाहिए।

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कम पानी पीने से क्या नुकसान होते हैं?

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कम पानी पीने से क्या नुकसान होते हैं, जिस तरह आपके फिट रहने के लिए आपका खाना खाना, व्यायाम करना, खुश रहना जरुरी है। उसी तरह फिट रहने के लिए आपका भरपूर पानी पीना भी जरुरी होता है। इसीलिए हर व्यक्ति को एक दिन में कम से कम आठ गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। प्रेग्नेंट महिला को इससे ज्यादा पानी पीना चाहिए। क्योंकि पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से बॉडी को फिट रखने, बीमारियों से सुरक्षित रखने, इम्युनिटी बढ़ाने, आदि में मदद मिलती है। साथ ही पानी पीने से आपकी बॉडी को तुरंत एनर्जी मिलती है। लेकिन यदि आप पानी का सेवन कम करते हैं तो इसके कारण आपको बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की कम पानी पीने से कौन कौन से नुकसान होते हैं।

कम पानी पीने से होता है पाचन तंत्र होता है कमजोर

  • पानी कम पीने के कारण पाचन तंत्र कमजोर पड़ सकता है।
  • जिसके कारण आपको एसिडिटी, अपच, कब्ज़, खाना हज़म करने में दिक्कत, व् पेट से सम्बंधित अन्य परेशानियां हो सकती है।

थकान व् कमजोरी

  • यदि पानी का कम सेवन किया जाएँ तो इसके कारण बॉडी में एनर्जी की कमी होने लगती है।
  • जिसके कारण आपको थकान व् कमजोरी की समस्या अधिक हो सकती है।
  • साथ ही थकान व कमजोरी की समस्या के अधिक होने के कारण आपको तनाव जैसी समस्या भी हो सकती है।

बॉडी में दर्द

  • कई बार आपको सिर दर्द, जोड़ो में दर्द व् बॉडी के अन्य हिस्सों में दर्द की समस्या हो सकती है।
  • और बॉडी पार्ट्स में दर्द होने की समस्या का एक कारण आपका पानी कम पीना हो सकता है।

कम पानी पीने से बढ़ सकता है वजन

  • पानी का सेवन कम करने के कारण पाचन क्रिया से जुडी समस्याएँ होने लगती है।
  • जिसके कारण मेटाबोलिज्म कम हो सकता है।
  • और मेटाबोलिज्म रेट कम होने के कारण आपके वजन में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

बीमारियों का होता है खतरा

  • पानी का भरपूर सेवन करने से बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थ यूरिन व पसीने की मदद से आपके शरीर से बाहर निकलते रहते हैं।
  • लेकिन पानी का सेवन कम करने के कारण यह विषैले पदार्थ आपकी बॉडी से बाहर नहीं निकल पाते हैं।
  • जिसके कारण आपको बहुत सी शारीरिक बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

कम पानी पीने से होता है खून गाढ़ा

  • पानी का सेवन कम करने के कारण बॉडी में खून गाढ़ा होने लगता है।
  • और खून का अधिक गाढ़ा होना आपकी सेहत के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है।
  • जैसे की खून गाढ़ा होने के कारण बॉडी के सभी अंगो तक खून का संचार अच्छे से नहीं हो पाता है।
  • जैसे की हदय तक ब्लड अच्छे से नहीं पहुँच पाता है जिसके कारण हदय सम्बन्धी समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।

स्किन से जुडी समस्या

  • पानी का भरपूर सेवन करने से स्किन को खूबसूरत बनाने व स्किन की कोमलता को बरकरार रखने में मदद मिलती है।
  • लेकिन यदि आप पानी का भरपूर सेवन नहीं करती हैं।
  • तो इसके कारण स्किन डल पड़ने लगती है, स्किन सूखी होने लगती है, यहां तक की दाने आदि की समस्या भी आपको हो सकती है।

मुँह से जुडी समस्याएं

  • पानी का सेवन कम करने के कारण आपको होंठों के सूखने, जीभ के सूखने जैसी समस्या भी हो सकती है।
  • साथ ही इसके कारण आपके मुँह से बदबू आने की परेशानी भी सकती है।
  • जिसके कारण आपको लोगो के सामने शर्मिंदा होना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो कम पानी का सेवन करने के कारण आपको हो सकते हैं। ऐसे में यदि आप स्वस्थ रहना चाहते हैं और इन परेशानियों से बचे रहना चाहते हैं तो जितना हो सके आपको पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। हो सके तो सुबह उठकर आपको एक गिलास गुनगुना पानी भी जरूर पीना चाहिए।

डिलीवरी रूम में डॉक्टर क्या-क्या बातें करती है?

डिलीवरी से जुड़े टिप्स

गर्भावस्था का नौवां महीना पास आते आते गर्भवती महिला के दिमाग में डिलीवरी को लेकर तरह तरह की बातें घूमने लगती है। जैसे की डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन, नोर्मल हुई तो कितना दर्द होगा, सिजेरियन होगी तो कैसा महसूस होगा, डिलीवरी के असर शिशु पर तो नहीं पड़ेगा, डिलीवरी रूम का अनुभव कैसा होगा आदि। लेकिन डिलीवरी को लेकर परेशान होने से कुछ नहीं होता है बल्कि आपका मानसिक रूप से परेशान होना आपके स्वास्थ्य और शिशु के विकास पर असर डाल सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को कोशिश करनी चाहिए की वो एक्टिव रहे, खाने पीने का अच्छे से ध्यान रखे, आयरन की कमी बॉडी में न होने दे, तनाव न लें, डॉक्टर के संपर्क में रहे आदि। इन टिप्स का ध्यान रखने से डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकती है।

डिलीवरी रूम में डॉक्टर किस तरह की बातें करती हैं?

डिलीवरी रूम के अंदर जाने के बाद क्या होगा क्या नहीं इसे लेकर भी गर्भवती महिला परेशान हो सकती है। और डिलीवरी रूम के अंदर जाने के बाद डॉक्टर क्या बातें करते हैं इसे लेकर भी गर्भवती महिला के मन में सवाल आ सकता है। तो लीजिए आज हम आपको डिलीवरी रूम के अंदर डॉक्टर क्या बातें करते हैं इससे जुडी कुछ बातें बताने जा रहे हैं।

गर्भवती महिला की सेहत से जुडी बातें

डिलीवरी के लिए जब महिला को अंदर लेकर जाते हैं तो सबसे पहले डॉक्टर्स महिला का ब्लड प्रैशर, पल्स आदि नोट करने के लिए कहते हैं, और यह लगातार कण्ट्रोल में रखा जाता है ताकि डिलीवरी के दौरान ब्लड प्रैशर के घटने या बढ़ने के कारण होने वाली परेशानी को कण्ट्रोल करने में मदद मिल सके।

धैर्य रखने के लिए

डॉक्टर लेबर पेन से जूझ रही महिला को धैर्य रखने की सलाह देते हैं, क्योंकि जितना महिला परेशान होती है उतना ही ज्यादा महिला की डिलीवरी में आने वाली मुश्किलें बढ़ सकती है, ऐसे में डॉक्टर महिला को धैर्य रखकर दिमाग को शांत रखने की सलाह देते हैं। और महिला जितना अपने ऊपर कण्ट्रोल रखती है उतना ही डिलीवरी में आसानी होने में मदद मिलती है।

पुश करने के लिए

जितना गर्भवती महिला अपने आप को पुश करती है, जितना जोर लगाती है उतना ही डिलीवरी को आसानी से होने में मदद मिलती है। इसीलिए जब तक डिलीवरी नहीं हो जाती है तब तक डिलीवरी रूम के अंदर डॉक्टर लगातार महिला को पुश करने यानी जोर लगाने के लिए कहती है ताकि डिलीवरी जल्द से जल्द हो सके।

आत्मविश्वास

दर्द से जूझ रही गर्भवती महिला को आत्मविश्वास टूट सकता है साथ ही घबराहट व् दर्द के कारण महिला अपने आप को टूटता हुआ महसूस करती है। लेकिन डॉक्टर लगातार महिला को हिम्मत देते हुए उसका आत्मविश्वास बढ़ाते हुए की कुछ नहीं होगा हिम्मत रखो अभी हो जायेगा इस तरह की बातें करते हुए आत्मविश्वास को बनाएं रखने में मदद करती है।

शिशु

डॉक्टर्स महिला को शिशु के बारे में सोचने के लिए कहते हैं और उसके बाद जैसे ही महिला की डिलीवरी हो जाती है वैसे ही गर्भनाल से शिशु को अलग करने के बाद शिशु को साफ़ सफाई के लिए भेज दिया जाता है, और महिला को डॉक्टर द्वारा बताया जाता है की उनके घर में ख़ुशी आई है। और सब कुछ ठीक है इस तरह डॉक्टर महिला को राहत महसूस करवाने में मदद करती है।

तो यह हैं कुछ बातें जो डिलीवरी रूम में डॉक्टर द्वारा महिला के साथ की जाती है। ऐसे में डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों से बचने के लिए चाहिए की महिला कुछ भी गलत न सोचें बल्कि सब अच्छा ही होगा इस बारे में सोचें। इसके अलावा प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में महिला को डॉक्टर से राय लेते रहने के साथ डिलीवरी के बारे में जानकारी इक्कठे करते रहने चाहिए ताकि महिला को प्रसव के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिल सके।

फेसबुक पर अगर आपने भी ये डाल रखा है तो तुरंत हटा दे नहीं तो मुसीबत हो सकती है!

आजकल किसे अच्छा नहीं लगता है फेसबुक से जुड़े रहना, अपना वाल अपडेट करना, पर शायद आपको ये नहीं पता कि ये आपको मुसीबत में डाल सकता है. इसलिए समझदारी इसी में है कि आप इन बातों को भूल कर भी कभी अपडेट नही करें, सोशल मीडिया पर हमें किन चीजों को जगह देनी चाहिए और किन चीजों को नहीं, यह जानना भी बहुत जरूरी है। हम यहां आपको ऐसी ही कुछ चीजों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें आपको अपने सोशल मीडिया से तुरंत हटा देना चाहिए। नहीं तो आप बुरे फंस सकते है

अपना फ़ोन नंबर और पता :

आजकल देखा गया है कि लोग अपना फ़ोन नंबर और पता सोशल मीडिया पर डाल देते है और ये सोचते है कि कोई लड़की/लड़का जिसे आप पसंद करते हैं, वह आपका नंबर देखकर मेसेज भेजेगा। या तो आपके परिवार के सदस्य को आपका नंबर आसानी से मिल जायेगा! क्या आपको पता है कि आपके मोबाइल नंबर का मिसयूज हो सकता है। आज से छह साल पहले जब फेसबुक आपसे कहता था कि आपका फोन नंबर आपकी सिक्यॉरिटी के लिए जरूरी है, तब यह सही था, लेकिन अब यह जरूरी नहीं है। इसलिए आप फेसबुक प्रोफाइल की पर्सनल डिटेल से फोन नंबर और पता हटा लीजिए। चाहे आपने अपने वाल पर हि अपडेट क्यों ना किये हो!

शराब या सिगरेट पीते फोटो :

फेसबुक पर अक्सर लोग नाइटआउट (पब, डिस्क) पिकनिक या दोस्तों के साथ किये मौज मस्ती की फोटो डालते हैं, लेकिन आपको यह बात नहीं भूलनी चहिए कि फेसबुक की आपकी प्रिवेसी सेटिंग को हैक भी किया जा सकता है। ऐसे में आपके इंटरनेट सेवी पैरंट्स ये फोटो देखेंगे तो उन्हें निराशा होगी। शराब पीते हुए आपकी फोटो या तो दोस्तों के साथ गलत किये मौज मस्ती ड्रीम जॉब के आड़े भी आ सकती है। या तो आपकी शादी में रुकावट आ सकती है. या तो लोगो को आपके गलत आदते के बारे में पता चल जाएग. कई कंपनियां एंप्लॉयी को जॉब देने से पहले सोशल मीडिया पर उसका बैकग्राउंड चेक करती हैं। या तो शादी के पहले भी लड़का लड़की का प्रोफाइल चेक कर के ये पता लगाने कि कोशिश करते है कि आपके दोस्त कौन कौन है और आपकी आदत क्या क्या है. इसलिए ऐसी फोटो डालने से बचना चाहिए।

डेट ऑफ बर्थ :

शायद आप जानते होंगे कि आजकल बैंक और दुसरे संस्थान में वेरिफिकेसन में आपका जन्म तारीख का इस्तेमाल होता है. अगर आपने फ़ोन नंबर घर का पता जन्म तारीख सब कुछ पब्लिक में डाल दिए है तो आप खुद हि सोच लीजिये आपके साथ क्या हो सकता है! इसलिए अगर आपने अपना डेट ऑफ़ बर्थ डाल रखा है तो तुरंत हि हटा दे. नहीं तो आप मिस यूज हो सकते है.

लोकेशन अपडेट :

कुछ लोग जहा जहा जाते है वह वह का लोकेसन अपडेट करते रहते है, शायद आप भूल गए है कि इसका फायदा कुछ असामाजिक तत्व उठा सकते है. या तो आपके घर में चोरी हो सकती है. क्यों कि लोगो को पता है कि अभी आप कहा है.

बॉस को फ्रेंड लिस्ट में रखना:

अगर आपने भी अपने बॉस को फ्रेंड लिस्ट में रखा हुआ है तो आप कि एक्टिविटी आपकी नौकरी छुडवा सकती है. ऐसा कई बार हुआ है कि आपकी ओपिनियन आपको मुसीबत में डाल सकती है.

एक्स बॉय फ्रेंड गर्ल फ्रेंड या रिलेशन :

ये तो कतई नहीं करें, अगर आपका एक्स आपको कितना भी कहे कि फ्रेंड लिस्ट में ऐड करने तो कभी नहीं करें नहीं तो आप बिना बुलाये मुसीबत मोल ले लेंगे और आपकी रिलेशन शिप में एक नया मोड़ आ जायेगा और आपकी हसी ख़ुशी ज़िन्दगी बर्बाद हो जाएगी. तो दोस्तों कभी भी पुराने रिलेशन को ऐड नहीं करें तो आप खुश रहेंगे.

किसी और कि भावनाओ को आहत करने बाले पोस्ट :

आप अपने फेस बुक या किसी भी सोशल मीडिया पर कुछ भी ऐसा नहीं डालें जिससे किस कि भावनाओ को ठेस पहुचे, हो सकता है आप क़ानूनी कारवाही में भी फंस सकते है.

शालीनता बनाये रखे :

आप फेसबुक पर शालीनता बनाये रखे, कभी भी कुछ ऐसा फोटो और मूवी क्लिप नहीं डाले जिससे आपकी मानसिकता कि पता चलता हो. नहीं तो आपके अच्छे दोस्त दूर हो जायेगे और हो सकता है इस कारण भी आप मुसीबत मोल ले सकते है.

तो आपके लिए ऊपर दिए गए कुछ सूत्र है जिससे आप कुछ सबक लेंगे और अपना कुछ ऐसा वैसा फेस बुक पर पोस्ट नहीं करेंगे.