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क्या है हेयर स्पा का सही तरीक़ा? जानें हेयर स्पा का घरेलू तरीक़ा।

Hair Spa : बालों की समस्या आज के समय की सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है, जिसका असर बच्चों से लेकर बड़े लोगों में भी देखने को मिल रहा है। इसका कारण शहर का प्रदूषण, धूल, धुआं और दूषित भोजन व पानी है। इन सबके कारण सिर से लेकर पांव तक की त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है। रूखी त्वचा से डैंड्रफ और बालों से संबंधित अन्य रोग होते हैं, जो बाद में चर्म रोग का कारण भी बन सकते हैं।
प्रत्येक महिला स्वस्थ, सुंदर व लम्बे बाल चाहती है, पर आज के माहौल में हर महिला किसी न किसी हेयर प्रॉब्लम से परेशान है। बाल छोटे हों या बड़े, समस्या तो आती ही है। जैसे कि बालों का दो मुंहा होना, झड़ना, बेजान होना, बीच से टूटना, पतला होना इत्यादि। इन समस्याओं के समाधान के लिए वो तरह तरह के शैम्पू, तेल और कंडीशनर का इस्तेमाल करती रहती हैं। इसके अलावा पार्लर जाके महँगे महँगे हेयर स्पा भी लेती हैं। आज कल के इस प्रदूषण भरे वातावरण और धूल मिट्टी से बालों को बचाने के लिए इनकी विशेष देखभाल की बहुत ज़रूरत होती है, लेकिन हमेशा पार्लर जाके हेयर स्पा लेने का समय नहीं होता और उसपर ढेर सारा ख़र्चा भी होता है। लेकिन अब आप अपना समय और पैसे दोनों ही बचा सकती हैं और घर पर आसानी से हेयर स्पा ले सकती हैं।

पहले हम आपको बताएँगे कि बाल ख़राब होते क्यूँ हैं –

सही डाइट न होना :- शरीर के साथ-साथ बालों के लिए भी सही संतुलित डाइट बहुत जरूरी है। आजकल लोग ऐसा खाना कम ही खाते हैं, जिसमें प्रोटीन, विटामिन और मिनरल हो। खाना समय से नहीं खाया जाता और इस तरह खाया जाता है कि बस पेट भर जाए। इनका प्रभाव हमारे बालों पर भी पड़ता है।

प्रदूषण और मौसम का असर :- बालों पर धूल, गंदगी, धुआं, धूप इत्यादि का असर पड़ता है। मौसम का भी असर पड़ता है। यदि बरसात है तो अलग तरीके से बालों की देखभाल की जाएगी, गरमी में अधिक पसीना और चिप चिप होती है तो बालों का उस हिसाब से ध्यान रखना पड़ेगा और सर्दी है तो अलग तरीके से। इसके अलावा बालों की संरचना के हिसाब से शैंपू का प्रयोग न होना भी एक मुख्य कारण है।

जेनेटिक व कुछ बीमारियों का प्रभाव :- बालों की समस्याओं का दूसरा प्रमुख कारण जेनेटिक यानि की आनुवंशिक व कुछ बीमारियां हैं जैसे- थाइरॉयड, मधुमेह, एनीमिया, हमेशा जुकाम रहना आदि। कभी-कभी लंबी बीमारी में खाई जाने वाली दवाओं के चलते भी बाल झडऩे लगते हैं।

बालों का बदलता फैशन :- कपड़ों के नित नए बदलते फैशन की तरह हमारे बाल भी फैशन से अछूते नहीं रहे हैं। कभी कर्ली हेयर का दौर है तो कभी स्ट्रेट हेयर का व कभी नेचुरल हेयर का। बालों के रंगों में भी नए-नए प्रयोग हो रहे हैं। इसके अलावा जहां दो चार बाल सफेद हुए नहीं, तुरंत डाई या कलर करवा लेना। बाजार में विभिन्न ब्रांडों के कलर मौजूद हैं। परंतु इन हेयर कलर में अमोनिया होता है, जो कि बालों के लिए बेहद हानिकारक है।

अब हम आपको बताएँगे घर पर बालों को स्पा करने का सही तरीक़ा क्या है –

कैसे करें शुरूआत?
हेयर स्पा ट्रीटमेंट में कई मसाज थैरेपीज़ आते हैं। आप अपने बालों के टेक्सचर (texture) के हिसाब से इसे चुन लें। आमतौर पर हेयर स्पा ट्रीटमेंट में चार से पांच स्टेप्स होते हैं, जिसमें पहले ऑयलिंग करते हैं यानि की ऑयल से मसाज, फिर स्ट्रीमिंग, फिर बालों को माइल्ड शैम्पू से धोना और फिर हेयर मास्क का इस्तेमाल करना।

स्टेप 1 – करें ऑयल से मसाज
अपने बालों को पोषण देने का सबसे अच्छा तरीका है इन्हें किसी अच्छे पोषण वाले ऑयल से मसाज करना, ताकि बालों की जड़ें मज़बूत बने और रूखापन खत्म हो जाए। बालों में मसाज करने के लिये आप अपने मन अनुसार तेल का चयन कर सकती हैं। अगर आपके बाल साधारण क़िस्म के हैं तो आपके लिये नारियल, बादाम या फिर जैतून का तेल अच्‍छा होगा। अगर बाल रूखे या ऑइली हैं तो आप बादाम तेल का प्रयेाग कर सकती हैं। आप इनमें से कोई भी तेल इस्तेमाल कर सकती हैं, या चाहें तो नारियल तेल, बादाम का तेल और ज़ैतून के तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर इस्तेमाल कर सकती हैं। बालों की मसाज करने के लिए, सबसे पहले तेल गरम करें, फिर उससे बालों की जड़ों की 10 से 15 मिनट तक मसाज करें। इससे सिर में ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ता है।

स्टेप 2 – स्टीमिंग
बालों को दो तरह से स्‍टीम दिया जा सकता है। एक तो आप बाजार से ऐसा स्‍टीमर खरीदें जो खास बालों को स्‍टीम देने के लिये ही बना हो, जैसा कि आपने पार्लर में देखा होगा। इसे बस ऑन करना होता है और स्टीम बनने लगती है और फिर बालों को 10-12 मिनट तक स्‍टीम देना है। ध्‍यान रखें कि बालों में अच्‍छी तरह से तेल लगा होना चाहिये।
बालों को दूसरी विधि से स्‍टीम देने का तरीका बेहद आसान है, जिसमें आपके बिल्‍कुल भी पैसे खर्च नहीं  होंगे। सबसे पहले पानी उबालें, उसमें तौलिया डुबोएँ और निचोड़ दें। फिर तौलिये को बालों में लपेट दें और 15 मिनट तक ऐसे ही रहने दें। इससे बालों में लगा हुआ तेल आसानी से सिर के अंदर चला जाएगा और बालों की जड़ों को ज़रूरी पोषण मिलेगा।

स्टेप 3 – शैम्पू करना
अगला स्टेप है बालों की अच्छे से धुलाई। बालों को स्‍टीम देने के बाद उन्‍हें अच्‍छी तरह से साफ करना है। अपने बालों के texture के हिसाब से कोई अच्छा शैम्पू चुने। शैम्पू लगा कर बालों को दो तीन मिनट तक रेस्ट दें ताकि बालों से तेल अच्छी तरह निकल जाए। फिर साफ़ पानी से धो दें। बालों को शैंपू से धो कर उसमें कंडीशनर लगाएँ।

स्टेप 4 – हेयर मास्क
शैम्पू के बाद बालों में लगाइए हेयर मास्‍क। बालों में हेयर मास्‍क लगाना काफी जरुरी है। आपको दुकानों में कई तरह के हेयर मास्‍क मिल जाएंगे। अगर आप घर पर ही हेयर मास्‍क बनाना चाहती हैं तो अंडा या फिर केला सबसे बेहतरीन ऑपशन होंगे।
कमजोर और हल्के बालों को घना बनाने के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी है। प्रोटीन हेयर मास्क बनाने के लिए दो पके केले, दो अंडे की पीली जर्दी, तीन चम्मच शहद और ऑलिव ऑयल। इनको मिलाकर बालों पर लगाएं और एक घंटे के ‌लिए छोड़ दें। फिर ठंडे पानी से साफ करें।
अगर आपके बाल घुंघराले हैं और संभाले नहीं संभलते हैं तो इसके लिए भी हेयर मास्क घर पर तैयार कर सकते हैं। आधा कप मैपल सिरप, दो केले, चार चम्मच नींबू का रस, एक चौथाई कप ऑलिव ऑयल और दो चम्मच मैदा मिलाएं। इन्हें हल्का गर्म कर लें। बालों पर लगाकर शावर कैप से ढंक लें और 45 मिनट तक छोड़ दें। फिर पानी से साफ करें।
रूखे बालों को सिल्की सॉफ्ट बनाने के लिए किसी भी तेल में 1 टेबलस्पून शहद मिलाएं और बालों में अच्छी तरह लगाएं। 1 घंटे बाद शैम्पू कर लें। 1 अंडे में 3 टेबलस्पून शहद डालकर फेंटें। इसे स्कैल्प और बालों पर लगाएं। आधे-एक घंटे बाद साफ़ कर लें।

स्टेप 5 – डबल क्‍लीनिंग
हेयर मास्‍क लगाने के बाद बालों को दोबारा शैम्पू से धोना ना भूलें। इस दौरान शैंपू थोड़ा कम ही लगाएँ और कंडिशनर ज़रूर लगाएँ।

लीजिए हो गया घर बैठे बैठे आपका हेयर स्‍पा।

प्रेगनेंसी में ड्रमस्टिक या सहजन खाने के फायदे

गर्भावस्था में हर महिला को सेहतमंद भोजन का सेवन करना चाहिए। जिससे की गर्भवती महिला और शिशु को सभी जरुरी पोषक तत्व मिल सके। आजकल जब के हमारे आसपास के वातावरण में खतरनाक बीमारिया फैली हुई है और प्रदूषण से कई तरह की परेशानिया हो सकती है। तो गर्भवती महिला के लिए और भी जरुरी है जाता है के वह ऐसा भोजन ले जो के सिर्फ उसके शिशु का ही विकास ना करे बल्कि भोजन ऐसा होना चाहिए जो विकास के साथ साथ बिमारियों से भी दूर रखता हो। 

ड्रमस्टिक यानी के सहजन के बारे में तो आपने सुना ही होगा, यह एक ऐसी सब्जी है जिसे सिर्फ इसके नुट्रिएंट्स के लिए ही इस्तेमाल नहीं किया जाता है बल्कि इसे पानी को शुध्द करने और हर्बल दवाइया बनाने में और बहुत सी बीमारियों से दूर रखने के भी काम आता है।

सहजन में बहुत से विटामिन्स, मिनरल्स और जरुरी पोषक तत्व पाए जाते है। गर्भवस्था में सहजन का सेवन महिला और शिशु दोनों के विकास के लिए ही बहुत जरुरी है। आइये जानते है सहजन को खाने के क्या क्या फायदे है और इसमें क्या नुट्रिएंट्स वैल्यू भी है। 

उलटी और जी मचलना या घबराना 

गर्भावस्था में सहजन के सेवन से सुबह के समय होने वाली उलटी, घबराहट आदि में राहत मिलती है। सहजन का नियमित सेवन गर्भवती महिला को मॉर्निंग सिकनेस से भी दूर रखता है और साथ ही एक्टिव और फ्रेश रहने में भी मदद करता है।

ब्लड शुगर

सहजन ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के भी बहुत काम आती है। डायबिटिक के मरीज को ड्रमस्टिक के सेवन की सलाह दी जाती है। अगर गर्भवती महिला ड्रमस्टिक का रोजाना सेवन करती है तो गर्भावस्था में होने वाली ब्लड शुगर का खतरा कम हो जाता है।

एनीमिया 

गर्भावस्था में अक्सर महिलाओं को ब्लड की कमी हो जाती है। ब्लड की कमी ज्यादातर आयरन की कमी के कारण होती है। सहजन में आयरन भरपूर मात्रा में होता है। यदि गर्भवती महिला सहजन का नियमित सेवन करती है तो आयरन की कमी पूरी होकर एनिमिक प्रॉब्लम खत्म हो जाती है।

इन्फेक्शन 

ड्रमस्टिक एंटी माइक्रोबियल के गुणों से भरपूर होता है। यह हमे थ्रोट इन्फेक्शन से भी बचाता है। आजकल के मौसम में गर्भवती महिलाओं को गले का इन्फेक्शन बहुत आसानी से हो सकता है। इसीलिए रोजाना सहजन का सेवन करे जिससे इन्फेक्शन से बचे रहेंगे।

सहजन में मौजूद औषधीय गुण हमे पेट में होने वाले इन्फेक्शन से भी बचाते है। गर्भावस्था में पाचन शक्ति कमजोर होने के कारण पेट संबंधित बहुत से परेशानिया होने लगती है। पर सहजन का सेवन इन सभी बिमारियों से हमे बचता है।

रेस्पिरेटरी पॉरब्लम्स

साँस से संबंधित परेशानिया जैसे की साँस फूलना, अस्थमा आदि या फिर चेस्ट इन्फेक्शन। सहजन का नियमित सेवन हमे सभी रेस्पिरेटरी प्रोब्लेम्स से भी बचाता है। ड्रमस्टिक को आप सब्जी या सूप दोनों में इसका सेवन कर सकते है।

डिलीवरी 

सहजन का नियमित सेवन डिलीवरी के समय का दर्द को कम करता है। इसके अतिरिक्त डिलीवरी में और डिलीवरी के बाद होने वाले कम्प्लीकेशन के खतरे को भी कम करता है।  

हड्डियां 

सहजन में मौजूद कैल्शियम, आयरन और मिनरल्स गर्भवती महिला और उसके भूर्ण की हड्डियों का विकास कर उन्हें मजबूत बनाते है। इसके सेवन से शिशु की हड्डियों को भरपूर मात्रा में कैल्शियम मिलता है।  

इम्युनिटी 

सहजन की पत्तियों को विटामिन ए का बहुत अच्छा स्रोत माना जाता है। सहजन की सिर्फ 100 ग्राम पत्तियों में रोजाना लिए जाने वाले पोषक तत्वों की तुलना में 200 प्रतिशत से भी ज्यादा नुट्रिएंट्स मिलते है। विटामिन ए एक ऐसा एंटीऑक्सीडेंट तत्व होता है जो हमारे सेल्स को डैमेज से बचाता है, हमारे आँखों की दृष्टि को बढ़ाता है, त्वचा को अच्छा करने के साथ साथ इम्युनिटी पावर को भी बढ़ाता है।  

पुरुषों के पेट की चर्बी कम करने के तरीके

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आप यही सोचते होंगे की महिला का बढ़ता वजन उनके लिए कितनी बड़ी समस्या होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं की पुरुषों की निकली हुई तोंद, पेट पर जमी चर्बी उनके लिए भी बहुत बड़ी परेशानी होती है। और अधिकतर पुरुष इस समस्या से परेशान होते हैं। खासकर वो पुरुष जो एक ही जगह पर पूरा दिन बैठे रहते हैं। लेकिन बढ़ा हुआ पेट पुरुषों की पर्सनैल्टी पर बुरा प्रभाव डालता है। इससे कम उम्र में ही वो अधिक उम्र के लगने लगते हैं।

और शर्ट के बटन से बाहर निकलती हुई तोंद उन्हें हास्य का विषय भी बना सकती है। ऐसे में पुरुषों को बढ़ी हुई तोंद को कम करने के लिए कुछ न कुछ उपाय जरूर करने चाहिए। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ आसान टिप्स बताने जा रहें हैं जो पुरुषों के पेट की चर्बी को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं। लेकिन ऐसा तभी होगा जब पुरुष इन टिप्स को ट्राई करते हैं।

खान पान का रखें ध्यान

  • पुरुषों का ज्यादातर यही होता है की सुबह भर पेट एक ही बार में नाश्ता करके घर से निकलें फिर दोपहर में भोजन करते हैं।
  • लेकिन एक ही बार में पेट भर कर खाना खाना फिर दूसरे मील में बहुत ज्यादा अंतराल का होना ही पेट की चर्बी को बढ़ाता है।
  • ऐसे में इस परेशानी से निजात के लिए पुरुषों को अपनी डाइट में थोड़ा बदलाव करना चाहिए।
  • जैसे की घर से हल्का नाश्ता करके निकलें, फिर थोड़ी देर बाद कुछ फ्रूट साथ लेकर जाएँ उसका सेवन करें।
  • खाने में ज्यादा समय का गैप न रखें दोपहर के भोजन का एक सही समय निर्धारित करें।
  • खाने को जल्दबाज़ी में नहीं अच्छे से चबाकर, धीरे धीरे खाएं।
  • रात का आहार लेते ही सोएं नहीं, बल्कि थोड़ी वॉक करें।
  • रात के खाने में ज्यादा मसाले, बाहर के खाने को खाने की बजाय घर में हल्के व् ताजे बने आहार का सेवन करें।
  • दिन में कभी बाहर खाने की इच्छा हो तो अपनी इस आदत पर कण्ट्रोल करें।
  • खाने की इन आदतों का ध्यान यदि पुरुष रखते हैं तो इससे पुरुषों के पेट की चर्बी को कम करने में मदद मिलती है।

स्नैक्स की जगह खाएं ड्राई फ्रूट्स या फल

  • पुरुषों को बाहर का खाना खाने की ज्यादा आदत होती है और किसी भी समय वो बाहर स्नैक्स खाने के लिए तैयार रहते हैं।
  • लेकिन पेट की चर्बी को कम करने के लिए पुरुषों को अपनी इस आदत में बदलाव लाना चाहिए।
  • और जब भी स्नैक्स खाने की इच्छा हो तो ड्राई फ्रूट्स या फलों का सेवन करना चाहिए।
  • ऐसा करने से भी पेट की चर्बी को कम करने में मदद मिल सकती है।

व्यायाम जरूर करें

  • माना की पुरुषों के पास अपने लिए कम समय होता है।
  • लेकिन आपको अपनी पर्सनैल्टी को बढ़ाने के लिए अपना अच्छे से ध्यान जरूर रखना चाहिए।
  • और इसके लिए सबसे जरुरी है की पुरुष एक दिन में कम से कम आधा घंटा व्यायाम जरूर करें।
  • जिससे उन्हें फिट रहने में मदद मिल सके।
  • और इसके लिए पुरुषों को पुश अप्स करने चाहिए।
  • साइकिलिंग करनी चाहिए, जॉगिंग करनी चाहिए, आदि।
  • इसके अलावा आप चाहे तो योगासन जैसे की कपाल भाति आदि कर सकते हैं।
  • इससे भी पेट की चर्बी को कम करने में मदद मिलती है।

पुरुषों के पेट की चर्बी कम करने के लिए ग्रीन टी पीएं

  • ऑफिस में बैठे बैठे, शॉप आदि पर काम करते हुए चाय पीने की लत सी लग जाती है।
  • लेकिन यदि आपको अपने पेट की चर्बी को कम करना है तो आपको अपनी इस आदत में बदलाव करना चाहिए।
  • और चाय की जगह ग्रीन टी का सेवन करना चाहिए।
  • क्योंकि ग्रीन टी का सेवन करने से मेटाबोलिज्म बेहतर रहता है।
  • ग्रीन टी में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं।
  • जिससे पेट की चर्बी को धीरे धीरे कम करने में मदद मिलती है।

पानी पीएं भरपूर

  • पेट की चर्बी को कम करने के लिए पुरुषों को दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी जरूर पीना चाहिए।
  • और ताजा पानी पीने की बजाय सुबह उठकर एक गिलास गुनगुना पानी पीना चाहिए।
  • रात का खाना खाने के बाद एक गिलास गर्म पानी पीएं।
  • गर्म पानी पीने से पेट पर जमी चर्बी को कम करने में मदद मिलती है, साथ ही पानी का भरपूर सेवन करने से बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थों को बहार निकालने में मदद मिलती है।

पुरुषों के पेट की चर्बी कम करने के लिए नींद लें भरपूर

  • पर्याप्त नींद लेना स्वस्थ रहने के लिए जरुरी होता है।
  • और बॉडी को फिट रखने, मानसिक रूप से रिलैक्स रहने के लिए भी नींद भरपूर लेना जरुरी होता है।
  • तो पुरुषों को भी बॉडी को फिट रखने के लिए भरपूर नींद लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने से पुरुषों को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सकती है। यदि आप भी अपनी बढ़ी हुई तोंद से परेशान हैं तो सोचिये नहीं बल्कि जल्द से जल्द इन टिप्स का इस्तेमाल करें। आपको अपनी बढ़ी हुई तोंद को कम करने व् अपनी पर्सनैलिटी को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

घर में विंड चाइम लगाने के फायदे

Wind Chimes Benefits & Tips

घर में विंड चाइम लगाने के फायदे, Wind Chimes benefits in Fengshui and vastu, Vastu ke ansuar wind chime ke fayde, Wind Chime के लाभ वस्तु और फेंगशुई में,घर के द्वार पर  Wind Chime लगाने से क्या होता है, घर में  Wind Chime लगाने के क्या क्या लाभ है, Wind Chime से सौभाग्य कैसे मिलता है, Wind Chime कैसे खरीदे, विंड चाइम की फोटो, खूबसूरत Wind Chime 

हम लोग अक्सर अपने घरों में कुछ ऐसी चीजें रखते है जो घर में लक, सौभाग्य, समृद्धि का प्रतिक मानी जाती है जैसे की – लाफिंग बुद्धा, श्री गणेश की छोटी प्रतिमा, मनी प्लांट आदि। ये सभी कुछ ऐसी वस्तुएं है जिन्हे घर में रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। और इन्ही कुछ लकी चीजों में से एक है विंड चाइम (जिसे अक्सर लोग विंड चैन के नाम से भी पुकारते है)।

फेंगशुई की जानकारी या समझ रखने लोग विंड चाइम और उसके कार्य को अच्छी तरह जानते है। इतना ही नहीं वास्तुशास्त्र में भी विंड चाइम का बेहद खास महत्व बताया गया है। लेकिन फेंगशुई एक नामी चीनी साइंस है अब भारत में भी अपनी पकड़ मजबूत करने लगी है। जिस तरह वास्तु शास्त्र में आइना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है उसी प्रकार फेंगशुई की दुनिया में विंड चाइम बहुत महत्वपूर्ण वस्तु के रूप में गिनी जाती है।

विंड चाइम का उद्भव प्राचीन काल में ही हो गया था, लेकिन उन्हें पहचान बहुत बाद में मिली। कहा जाता है मंदिर के बाहर लगने वाले विंड बेल के रूप में भारत में ही इनका उद्भव हुआ। जिसके बाद दक्षिणी भारत, चीन और बाली से होते हुए यह तिब्बत तक पहुंचे।

माना जाता है विंड चाइम में एक बेहद खास पॉजिटिव एनर्जी होती है, जो परिवार में लक और प्रोग्रेस लाती है। इसे घर में लगाया जाए या दुकान-ऑफिस में, अगर उससे जजूदि महत्वपूर्ण बातें और उसके फायदों को ध्यान में रखा जाए तो उसके शुभ परिणाम मिलते है। तो आइये जानते है विंड चाइम से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य।

विंड चाइम से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य :-

1. विंड चाइम और दिशा :

समान्यतौर पर विंड चाइम लकड़ी, लोहे और अलग-अलग धातु से बनाई जाती है लेकिन किस व्यक्ति के लिए कौन सी धातु की विंड चाइम बेहतर होगी इस बात पर निर्भर करता है की आपको उसे किस जगह और कहाँ टांगना है।

2. दिशा के अनुसार :

घर के पश्चिम और उत्तर दिशा में धातु से बनी विंड चाइम अच्छी होती है जबकि पूर्व और दक्षिणी दिशा में लकड़ी और मिटटी से बने विंड चाइम बेस्ट होते है।

3. आवाज :

विंड चाइम का लक उस धातु की आवाज पर निर्भर करता है। वासी आज कल कई तरह के दसिग्नस और धातुओं के विंड चाइम बाजार में मौजूद है जो देखने में तो सुन्दर लगते है लेकिन या तो उनमे आवाज नहीं होती या उनकी आवाज कानो को बहुत अधिक चुभती है।

4. मीठी आवाज :

घर में गुडलक और तरक्की के लिए लाइ जाने वाली विंड चाइम की आवाज का ध्यान रखना बेहद जरुरी है। अगर आप इसका गुडलक पाना चाहते है तो ऐसे विंड चाइम लें जिसकी आवाज मीठी हो। बिना आवाज वाली या भद्दी आवाज वाली विंड चाइम किसी काम की नहीं।

5. रॉड की संख्या :

अक्सर विंड चाइम रॉड्स में आती है जिसमे कई रॉड्स होती है। आप अलग अलग नम्बर की रॉड वाले विंड चाइम को अलग अलग कामों के लिए घर में ला सकते है। प्रत्येक मनोकामना पूर्णकरने के लिए अलग अलग संख्या की रॉड्स वाली विंड चाइम बाजार में मौजूद है।

6. गुडलक के लिए :

फेंगशुई के अनुसार, घर-दुकान से बैड लक दूर करने और वहां गुड़ लक लाने के लिए 7 या 8 रॉड वाली विंड चाइम लेना सबसे बेहतर होता है।

7. बीमारियां :

अगर घर में लम्बे समय से बीमारियां चल रही है तो आप उसे दूर करना चाहते है या किसी बीमारी से बचाव के लिए 5 रॉड वाली विंड चाइम लगाना बेहतर ऑप्शन है।

8. बैडरूम के लिए :

घर में रहने वाले लोगों के बीच प्यार और अपनापन बढ़ाने के लिए बैडरूम में खिड़की के आस पास 9 रॉड वाली विंड चाइम लगाना सबसे अच्छा माना जाता है।

9. लड़ाई झगड़े :

घर या दुकान में शांति बनाने के लिए या लड़ाई झगड़ों को खत्म करने के लिए 2 से 3 रॉड वाली विंड चाइम सबसे अच्छी मानी जाती है। घर में हो रहे रोज रोज के कलेश से बचने के लिए भी आप इस विंड चाइम का प्रयोग कर सकते है।

10. टांगने का तरीके :

अगर आपके घर या ऑफिस में एक ही लाइन में तीन दरवाजे है तो आपको बीच में 5 रॉड वाली Wind Chime टांगनी चाहिए। इससे रोग या किसी भी प्रकार की विपदा घर पर नहीं आती।

11. आकार और स्थान :

अगर आप विंड चाइम को घर के भीतर टांगना चाहते है तो उसके लिए बहुत बड़ी विंड चाइम न लें, जबकि अगर आपको उसे घर के बाहर या किसी बहुत बड़े कमरे में टांगना हो तो छोटी Wind Chime उचित नहीं। सामान्यतौर पर इसे घर के बाहर ही टांगा जाता है ताकि जब हवा चले तो वह हिले और उसकी मधुर आवाज आये।

12. धातु की विंड चाइम :

घर के प्रवेश द्वार में धातु से बने चाइम टांगने से घर जीवंत और भरापूरा होता है। मिट्टी से बनी Wind Chime, जिनमें 2 या 9 रॉड होती हैं, संबंधों को मधुर बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है। घर के दक्षिण-पश्चिमी भाग में इन्हें टांगना आपसी संबंधों में सौभाग्य लाता है।

13. टीचर का सपोर्ट :

अध्यापक की ओर से स्पोर्ट पाने के लिए 6 या 7 रॉड वाली धातु से बनी चाइम को घर के उत्तर-पश्चिमी भाग में टांगना लाभकारी सिद्ध होता है।

बेबी को गर्भ में हिचकी कब और क्यों आती है?

हिचकी लेना एक आम शारीरिक प्रक्रिया होती है और यह बच्चों से लेकर बड़ो तक सभी को आ सकती है। लेकिन क्या आप जानते हैं की गर्भ में पल रहा बच्चा भी हिचकी लेता है? यदि नहीं तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भ में शिशु के हिचकी लेने से जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में बात करने जा रहें हैं। प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद से ही गर्भ में शिशु का विकास महीने दर दर महीने बढ़ता रहता है। और यह विकास शिशु के वजन बढ़ने, शिशु के अंग बनने, शिशु के अंगों के विकास से जुड़ा होता है। गर्भ में शिशु का हलचल करना शिशु के विकास को दर्शाता है। ऐसे में शिशु के हिचकी लेने का क्या कारण होता है और शिशु कब हिचकी लेता है आइये जानते हैं।

बच्चा क्यों लेता है गर्भ में हिचकी?

गर्भ में शिशु के हिचकी के लेने के कई कारण होते हैं और यह सभी कारण शिशु के विकास से जुड़े हुए ही होते हैं। जिसकी वजह से शिशु गर्भ में हिचकी लेता है। जैसे की:

गर्भ में शिशु का विकास सही से हो रहा है

माँ के पेट में बच्चे का हिचकी लेना इस बात की और भी इशारा करता है की गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो रहा है। और गर्भ में पल रहा शिशु बिल्कुल स्वस्थ है।

फेफड़ों का विकास

गर्भ में शिशु का हिचकी लेना शिशु के फेफड़ों के बेहतर विकास में मदद करता है जिससे जन्म लेने के बाद शिशु के फेफड़ें अच्छे से काम कर सकें। और जन्म के बाद शिशु को सांस लेने में किसी भी तरह की परेशानी न हो।

गर्भनाल का फंसना

गर्भ में घूमते हुए बच्चे कई बार गर्भनाल को अपने ऊपर लपेट लेते हैं वैसे ही गर्भनाल कभी कभी गले में भी अटक जाती है। खासकर पहली और दूसरी तिमाही बच्चे ऐसा अधिक करते हैं। और जब बच्चा गले में गर्भनाल को लपेट लेता है तो इस कारण भी बच्चे को हिचकी आने लगती है।

शिशु गर्भ में हिचकी लेना कब शुरू करता है?

वैसे तो प्रेगनेंसी के आठवें नौवें हफ्ते में ही शिशु गर्भ में हिचकी लेना शुरू कर देता है। परन्तु शुरुआत में महिला को यह महसूस नहीं होती है। उसके बाद धीरे धीरे जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे शिशु हिचकी कब लेता है महिला को समझ आने लगता है।

कैसे समझें कि गर्भ में शिशु ले रहा है हिचकी?

शिशु कब हिचकी ले रहा है इसे समझने के लिए जब आपको गर्भ में हलचल महसूस हो तो आप एक जगह पर बैठ जाएँ। यदि आपको पेट में अलग अलग जगह पर हलचल हो रही है या शिशु मूव करता हुआ महसूस हो रहा है तो यह शिशु का किक मारना होता है। जबकि यदि शिशु एक ही जगह पर हलचल करता हुआ महसूस हो तो इसका मतलब होता है की शिशु हिचकी ले रहा है।

इसके अलावा एक और तरीका है जिससे आप यह जान सकते हैं की शिशु हिचकी ले रहा है या हलचल कर रहा है। शिशु द्वारा हिचकी लेना और किक मारने दोनों ही स्थिति में मां के पेट में ऐंठन या पेट में दर्द महसूस होने लगता है। लेकिन जब गर्भ में शिशु हिचकी लेता है तो इस दौरान सिर्फ कुछ ही सेकंड के लिए महिला को पेट में ऐंठन और पेट दर्द की समस्या होती है। वहीं जब शिशु जब पेट में किक मारता है तो महिला को थोड़ी थोड़ी देर पर यह दर्द जारी रह सकता है।

क्या गर्भ में शिशु का हिचकी लेना आम बात है?

जी हाँ, वैसे तो गर्भ में शिशु का हिचकी लेना आम बात होती है। लेकिन यदि आपको ऐसा महसूस हो रहा है की एक दिन में बार बार शिशु हिचकी ले रहा है और बहुत ज्यादा हिचकी ले रहा है। तो आपको इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि इसका मतलब हो सकता है की शायद शिशु की गर्दन में गर्भनाल लिपट गई है या शिशु को कोई दिक्कत हो रही है। ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

तो यह है गर्भ में शिशु के हिचकी लेने से जुडी कुछ जानकारी, और यह जानकारी सभी प्रेग्नेंट महिलाओं को होनी चाहिए। ताकि गर्भ में पल रहें शिशु को कोई भी परेशानी न हो और उसका विकास अच्छे से हो सके।

सनबर्न : धुप से काली हुई त्वचा को ऐसे ठीक करें!

महिला हो या लड़की सभी के लिए अपनी त्वचा बेहद महत्वपूर्ण होती है लेकिन कई बार किन्ही कारणों की वजह से उनकी त्वचा में कई तरह की परेशानियाँ उत्पन्न होने लगती है. जिनमे से एक है सनबर्न, जिसके होने का कारण धुप की हानिकारक किरणें होती है. हालाँकि सभी अपनी-अपनी सूझ बुझ के अनुसार खुद को धुप की किरणों से बचा कर चलते है लेकिन फिर भी जाने अनजाने धुप आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा ही देती है.

जिसका सीधा प्रभाव हमारी त्वचा की रंगत पर पड़ता है. लेकिन आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी के चलते हम अक्सर अपनी इस रंगत को सामान्य करना भूल जाते है जिसके चलते धीरे धीरे त्वचा का रंग डार्क होने लगता है. ऐसे तो साल के किसी भी मौसम में ये समस्या देखने को मिल जाती है लेकिन गर्मियों के दिनों में लगभग हर कोई व्यक्ति इससे परेशान दिखाई देता है.

क्योंकि इस दौरान धुप बहुत तेज़ होती है और ऐसे समय में धुप में त्वचा को ढकने के लिए कपडे पहनना बहुत ही मुश्किल हो जाता है. सर्दियों में तो कपडे पहनकर हम खुद को धुप के प्रकोप से बचा लेते है लेकिन गर्मियों में ऐसा करना थोडा मुश्किल हो जाता है.

जिसके चलते हमारी त्वचा का रंग डार्क हो जाता है. जो हमारी खूबसूरती को तो प्रभावित करती ही है साथ-साथ हमारे व्यक्तित्व पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है. ऐसे में खुद को इस समस्या से बचाना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है. आपमें से भी बहुत सी ऐसी महिलाएं होंगी जिनकी त्वचा अक्सर गर्मियों मे काली पड़ने लगती है. और हो न हो उसे ठीक करने के लिए भी आप बहुत सी कास्मेटिक का प्रयोग करती होंगी.

माना आज कल बाज़ार में बहुत दी कॉस्मेटिक क्रीम है जो अआपकी टेन त्वचा को ठीक करने का दावा करती है लेकिन उनमे से केवल कुछ को छोड़कर अन्य सभी अपने इस कार्य में असफल रहती है. कई बार तो इन क्रीम्स का विपरीत प्रभाव भी हो जाता है जिसके बाद समस्या और भी गम्भीर हो जाती है.

ऐसे में आपको चाहिए की आप किसी ऐसे उपाय का इस्तेमाल करें जो आपकी त्वचा के रंग को निखारने के साथ-साथ उसे किसी तरह का नुकसान भी न पहुंचाए. धुप से झुलसी त्वचा “सनबर्न” से परेशान अधिकतर लोगो के यही सवाल होते है की धुप से झुलसी त्वचा को ठीक कैसे करें? धुप में त्वचा खराब हो गई है उसे ठीक करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? और इससे बचने के घरेलू उपचार क्या है?

इसीलिए आज हम आपको उन सभी घरेलु उपायों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से सनबर्न की समस्या को ठीक किया जा सकता है. क्योंकि ये उपाय पूरी तरह घरेलु उत्पादों से बने है तो इनके कोई हानिकारक दुष्परिणाम भी नहीं है. तो आइए जानते है क्या है सनबर्न की समस्या से छुटकारा पाने के उपाय!

सनबर्न की समस्या :-

किसी भी समस्या के उपायों को जानने से पूर्व ये जानना आवश्यक है की ये समस्या होती क्या है और कैसे उत्पन्न होती है. धुप की किरणों की वजह से त्वचा का झुलसना या टैन होना सनबर्न कहलाता है जब त्वचा का रंग उस पर धुप पड़ने की वजह से खराब हो जाये. ऐसी स्थिति में त्वचा का रंग सामान्य रंग से अधिक गहरा का काला होने लगता है.

अधिकतर ये समस्या लम्बे समय तक सूरज की किरणों के सम्पर्क में रहने से उत्पन्न होती है. क्योंकि धुप में रहने की वजह से त्वचा में मेलेनिन का अत्यधिक निर्माण होने लगता है जो त्वचा का रंग गहरा करने के लिए उत्तरदायी होता है.

त्वचा के झुलसने का मुख्य कारण अधिक देर तक सूरज के संपर्क में रहना होता है. लेकिन इसके अतिरिक्त भी कुछ कारण है जिनकी वजह से ये समस्या उत्पन्न होती है. जैसे की कुछ केमिकल पदार्थो का प्रयोग करने से भी त्वचा में टैनिंग की समस्या हो सकती है. हालाँकि, धुप की किरणों के सम्पर्क में रहना हमारे लिए फायदेमंद है क्योंकि इससे शरीर को विटामिन डी मिलता है लेकिन अधिक देर तक धुप में रहना आपके लिए ठीक नहीं.

कच्ची हल्दी और दूध पीने के फायदे

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Benefits of Turmeric and Milk

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हल्दी भारतियों मसालों में से एक सबसे महत्वपूर्ण मसाला है जिसका प्रयोग हर घर में समान रूप से किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है की इस भारतीय मसाले को आयुर्वेद में भी एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। जी हां, आयुर्वेद में हल्दी को दर्द निवारक, एंटी बैक्टीरियल, एंटी बायोटिक और दर्द निवारक के रूप में जाना जाता है। इसके सेवन से शरीर की सभी समस्याएं दूर हो जाती है।

इतना ही नहीं, इसके लेप को लगाने से त्वचा की छोटी मोटी चोट भी ठीक हो जाती है। इसके सेवन से हड्डियां तो मजबूत होती ही है साथ साथ शरीर के अंदर पनप रहे कई रोग भी दूर हो जाते है। त्वचा, पेट और शरीर के कई रोगों के घरेलू उपचार के रूप में हल्दी का प्रयोग किया जाता है। वास्तव में हल्दी को आप जैसा देखते है वो वैसे नहीं होती वो एक तरह की गांठ होती है जिसे पीसकर हल्दी पाउडर बनाया जाता है।

वैसे तो हल्दी का इस्तेमाल खान पान की अधिकतर चीजों में किया जाता है लेकिन क्या आप जानते है की कुछ और चीजें है जिनके साथ कच्ची हल्दी का सेवन करने से बहुत लाभ होता है। दूध भी उन्ही चीजों में से एक है। दूध के प्राकृतिक गुणों को कौन नहीं जानता।

लेकिन अगर दूध और कच्ची हल्दी को एक साथ मिलाकर पीया जाए तो शरीर के सब रोगों से बचा जा सकता है और अपने स्वास्थ्य व् स्किन को भी बेहतर बनाया जा सकता है। आज हम आपको दूध में कच्ची हल्दी डालकर पीने के फायदे बताने जा रहे है जिसके बाद आप भी भली भांति जान जाएंगे की यह छोटी सी गांठ और एक ग्लास दूध आपके लिए कितना फायदेमंद हो सकता है।

कच्ची हल्दी वाला दूध कैसे बनायें :

सबसे पहले एक इंच हल्दी का टुकड़ा लें और एक ग्लास दूध में डाल दें। अब दूध को किसी बर्तन में डालकर 15 मिनट तक उबाल लें। उसके बाद दूध से हल्दी छान लें। दूध को ठंडा करें और उसे पियें।

दूध में कच्ची हल्दी मिलाकर पीने के फायदे :-

1. सांस से संबंधी बीमारियां :

हल्दी वाले दूध में एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते है जो शरीर में मौजूद जीवाणुओं और बैक्टीरिया पर अटैक करके संक्रमण को फैलने से रोकते है। इसमें मौजूद गुण श्वास संबंधी बिमारियों के उपचार में मदद करते है। क्योंकि इसकी तासीर बहुत गर्म होती है जो यह फेफड़े और साइन्स की जकड़न में तुरंत आराम देती है। अस्थमा और ब्रान्काइटिस के लिए यह एक फायदेमंद उपचार है।

2. कैंसर :

जलन और सूजन को कम करने के साथ साथ यह स्तन, त्वचा, फेफड़े, प्रोस्टेट और बड़ी आंत यानी colon के कैंसर को रोकता है। हल्दी कैंसर सेल्स से DNA को होने वाले नुकसान को भी रोकती है और कीमोथेरेपी के प्रभावों को कम करती है।

3. नींद :

गर्म दूध में कच्ची हल्दी मिलाने से उसमे ट्रिप्टोफैन नामक एमिनो एसिड बनता है जो अच्छी और गहरी नींद लाने में मदद करता है।

4. सर्दी और खांसी :दूध और कच्ची हल्दी पीने के फायदे

अपने एंटी बैक्टीरियल और एंटी बायोटिक गुणों के कारण हल्दी वाला दूध सर्दी और खांसी के बेहतर उपचार में मदद करता है। साथ ही इनके कारण होने वाली समस्याएं जैसे गले में खराश, जुखाम, और बदन दर्द आदि से ही तुरंत राहत दिलाती है।

5. गठिया :

गठिया की समस्या के लिए कच्ची हल्दी वाली दूध को बहुत अच्छा माना जाता है। घरेलू नुस्खों के मुताबिक गर्म दूध में कच्ची हल्दी मिलाकर पीने से गठिया के कारण होने वाली सूजन में आराम मिलता है। यह जोड़ो और मांसपेशियों को लचीला बनाकर उनकी ऐंठन को कम करता है जिससे दर्द भी कम होता है।

6. दर्द :

हल्दी वाले दूध से किसी भी तरह की पीड़ा और दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलता है। यह दूध रीढ़ की हड्डी और शरीर में मौजूद जोड़ों को भी मजबूत बनाता है।

7. एंटी ऑक्सीडेंट :

दूध में कच्ची हल्दी मिलाकर पीने से फ्री रेडिकल्स की समस्या दूर होती है। क्योंकि यह एंटी-ऑक्सीडेंट का बेहतरीन स्रोत्र है जो त्वचा संबंधी कई बिमारियों को ठीक करने में भी मदद करता है।

8. ब्लड प्यूरीफायर :

आयुर्वेद में हल्दी वाले दूध को एक बेहतर ब्लड प्यूरीफायर माना जाता है। यह शरीर में ब्लड के रेगुलेशन को बेहतर बनाता है। यह रक्त को पतला करके और लिम्फ तंत्र और रक्त वाहिकाओं की गंदगी को साफ़ करता है।

9. यकृत को बेहतर करें :

दूध में कच्ची हल्दी मिलाकर पीने से यकृत विषमुक्त हो जाता है और साथ ही रक्त को प्यूरीफाय करता है। साथ ही यह यकृत को भी मजबूत बनाता है।

10. हड्डियों के लिए :

हल्दी वाला दूध कैल्शियम का बेहतर स्रोत्र होता है जो की हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए जरुरी होता है। इसके साथ ही यह स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है। हल्दी वाले दूध को पीने से हड्डियों को नुकसान भी नहीं होता और अन्य बिमारियों में भी कमी आती है।

11. पाचन संबंधी समस्याएं :turmeric milk

कच्ची हल्दी वाला दूध एक बेहतर एंटी-सेप्टिक होता है और साथ-साथ आंतों के स्वस्थ बनाता है और पेट के अल्सर और कोलाइटिस का उपचार करता है। इसके सेवन से अल्सर, डायरिया और अपच की समस्या नहीं होती।

12. माहवारी की समस्या :

हल्दी वाला दूध माहवारी में होने वाले दर्द में राहत दिलाता है। सामान्य प्रसव, प्रसव के बाद सुधार, बेहतर दूध उत्पादन और अंडाशय की सिकुड़न के लिए गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन करना चाहिए।

13. लाल त्वचा :

हल्दी वाले दूध का सेवन करने से या उसे स्किन पर लगाने से लाल चक्क्ते या लाल दाने नहीं होते। रुई में हल्दी वाले दूध को भिगोकर प्रभावित हिस्से पर 15 मिनट के लिए लगाएं और बाद में साफ कर लें। इससे समस्या दूर होगी और त्वचा में निखार आएगा।

14. वजन :

दूध में कच्ची हल्दी मिलाकर पीने से शरीर में वसा कम होता है जो की वजन बढ़ाने का मुख्य कारण होता है। यह वजन कम करने में भी मदद करता है। इसलिए इस दूध का सेवन जरूर करें।

15. एक्ज़ीमा :

एक्ज़ीमा के उपचार के लिए रोजाना एक ग्लास हल्दी के दूध का सेवन करना चाहिए।

समय से पहले बाल सफ़ेद होने से ऐसे रोकें

बालों का सफ़ेद होना

हर किसी की चाहत होती है की उसके बाल हमेशा घने, काले, चमकदार रहे। लेकिन एक उम्र के साथ बाल काले से धीरे धीरे सफ़ेद होने लगते हैं, और यह ठीक भी है। लेकिन यदि बाल समय से पहले सफ़ेद होने लग जाये तो यह एक चिंता का विषय होता है, क्योंकि जवानी में ही यदि बुढ़ापा दिखने लगे तो यह आपको परेशान कर सकता है। साथ ही आपको यह जानकर भी हैरानी होगी की बालों के सफ़ेद होने का कारण भी और कोई नहीं बल्कि आप खुद ही होते है। क्योंकि गलत आदतों, लाइफस्टाइल के चलते आप अपनी बॉडी की केयर नहीं करते जिसके कारण बालों की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने वाले मेलेनिन की कमी बालों में होने लगती है। और इस वजह से समय से पहले बालों में सफेदी दिखने की समस्या आपको हो सकती है।

बालों के समय से पहले सफ़ेद होने के कारण

  • तनाव लेने के कारण कई लोगो को बाल समय से पहले सफ़ेद होने की समस्या हो सकती है।
  • बॉडी में विटामिन्स की कमी के कारण भी मेलेनिन की कमी हो सकती है, जिसके कारण बाल सफ़ेद हो सकते है।
  • जो लोग संतुलित आहार को छोड़ जंक फ़ूड, तेलीय आहार का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं, तो इसके कारण भी बॉडी में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, जिसके कारें बॉडी से सम्बंधित समस्या होने के साथ बाल भी समय से पहले सफ़ेद हो सकते हैं।
  • बालों में अधिक केमिकल का इस्तेमाल करने पर भी बालों पर गलत असर पड़ता है जिसके कारण बालों के सफ़ेद होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • नशे का सेवन जैसे की धूम्रपान करने या शराब पीने के कारण भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • जेनेटिक कारण जैसे की यदि किसी के माँ या पिता को समय से पहले बाल सफ़ेद होने की समस्या थी तो यह उन्हें भी हो सकती है।
  • यदि आप थायरॉइड जैसी किसी शारीरिक बिमारी से जूझ रही है तो इसके कारण भी समय से पहले बालों के सफ़ेद होने की समस्या हो सकती है।

समय से पहले बालों को सफ़ेद होने से बचाने के लिए अपनाएँ यह टिप्स

बालों का समय से पहले सफ़ेद होना आपको अपनी उम्र के लोगो के सामने ही अंकल होने जैसी फीलिंग दिलवा सकता है। ऐसे में बालों को समय से पहले सफ़ेद होने से बचाने के लिए आपको कुछ न कुछ जरूर करना चाहिए। तो लीजिये आज हम आपको कुछ ऐसे ही आसान टिप्स बताने जा रहे हैं जो समय से पहले बालों के सफ़ेद होने जैसी परेशानी से बचाने में आपको मदद करते हैं।

जीवनशैली में बदलाव

सबसे पहले तो आपको अपने लाइफस्टाइल, खान पान में बदलाव करना चाहिए। जैसे की नशे का सेवन नहीं करना चाहिए, तनाव से बचना चाहिए, अपने आहार में पोषक तत्वों को भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए, आदि। इससे आपकी बॉडी को फिट रहने में मदद मिलती है, साथ ही आपके बालों को भी पोषण मिलता है। जिससे आपको बॉडी और बालों से सम्बंधित समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

बालों को पोषण

बालों से जुडी कोई भी परेशानी हो उससे बचने के लिए जरुरी होता है की बालों को आप भरपूर पोषण दें, जैसे की बालों में मसाज करें, बालों के लिए ज्यादा केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें, विटामिन्स का सेवन भरपूर मात्रा में करें जिससे बालों में मेलेनिन को बरकरार रखने में मदद मिल सके, आदि। ऐसे में इन सभी बातों का अच्छे से ध्यान रखने और बालों को भरपूर पोषण देने से आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

मेथी और मेहँदी

मेहँदी में मेथी का पाउडर, थोड़ी सी छाछ, थोड़ा सा नारियल का तेल और पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को अपने बालों में लगाकर छोड़ दें, महीने में दो बार इस उपाय को करें ऐसा करने से आपको समय से पहले बालों के सफ़ेद होने की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

आंवला

आंवला बालों के लिए वरदान होता है यदि ऐसा कहा जाये तो यह बिल्कुल गलत नहीं होगा, इस उपाय को करने के लिए आप दो चम्मच आंवला पाउडर लें, उसमे एक चम्मच तिल को पीसकर, गुड़हल के फूल की पत्तियों को पीसकर, थोड़ा पानी और थोड़ा सा नारियल तेल डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस पेस्ट को अच्छे से अपने बालों को स्कैल्प पर लगाएं, सूखने के बाद इसे साफ पानी से धो दें। हफ्ते में दो बार इस उपाय को करने से आपको फायदा मिलता है। इसके अलावा आंवले का सेवन करने से और आंवले का जूस पीने से भी बालों की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने में मदद मिलती है।

प्याज़

प्याज़ को पीसकर उसका रस निकाल लें, अब इस रस को बालों और स्कैल्प पर अच्छे से लगाएं सूखने के बाद बालों को धो लें। हफ्ते में दो से तीन बार इस उपाय को करें इससे आपको बालों से जुडी हर समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

करी पत्ते

आधा कटोरी नारियल के तेल में थोड़े से करी पत्ते डालकर अच्छे से पका लें, और अब इस तेल को छान लें। तेल के ठंडा होने पर इस तेल से अपने बालों की अच्छे से मसाज करें, ऐसा हफ्ते में दो बार नियमित रूप से करें इस उपाय को करने से बालों के समय से पहले सफ़ेद होने की समस्या से बचने में मदद मिलती है।

दही और टमाटर

थोड़े से दही में टमाटर को पीसकर मिक्स कर लें, उसमे बाद इसमें एक चम्मच निम्बू का रस और एक चम्मच नीलगिरि का तेल मिक्स करें। अब इन सब चीजों को अच्छे से मिक्स करके अपने बालों में लगाएं। और आधे घंटे के लिए छोड़ दें, उसके बाद बालों को धो लें, हफ्ते में दो बार इस उपाय को करने से भी बालों को समय से पहले सफ़ेद होने की समस्या से बचाने में मदद मिलती है।

नारियल तेल

आंवले के होते छोटे टुकड़े करके आधा कटोरी नारियल के तेल में डालकर अच्छे से पका लें, उसके बाद इस तेल को छान लें, छानने के बाद इस के ठंडा होने पर अच्छे से बालों की मसाज करें। ऐसा हफ्ते में दो बार करें इस उपाय को करने से समय से पहले बालों को सफ़ेद होने की समस्या से बचाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से समय से पहले बालों के सफ़ेद होने जैसी परेशानी से बचने में मदद मिलती है। ऐसे में यदि आपको भी यह समस्या है तो ऊपर दिए गए टिप्स में से किसी भी एक उपाय को नियमित कुछ दिनों तक करने से आपको इस परेशानी का समाधान करने में मदद मिलेगी।

पीरियड्स के रंग से जाने अपना हाल

पीरियड्स हर महिला हो होने वाली एक आम समस्या है, इस दौरान महिलाओ के प्राइवेट पार्ट से ब्लड का फ्लो होता है, और कई महिलाओ को इस समस्या पेट या कमर आदि में दर्द की समस्या भी रहती है, साथ ही कई बार आपके ब्लड फ्लो के कलर में बदलाव भी होता है, लेकिन सभी महिलाओ के साथ एक जैसा हो ऐसा कोई जरुरी नहीं है, इसके अलावा आप पीरियड्स के दौरान आने वाले ब्लड के कलर को देखकर जान सकती है, की उसके आने के क्या कारण होते है, कही वो किसी बिमारी का संकेत तो नहीं है, क्या आप भी पीरियड्स के रंग को देखकर जानना चाहती हैं की आपका हाल क्या है यदि हाँ तो आइये आज हम आपको बताते है की पीरियड्स के दौरान आने वाले ब्लड के रंग का क्या मतलब होता है।

इन्हें भी पढ़ें:- पीरियड्स में साफ़ सफाई का ध्यान ऐसे रखें! और इन्फेक्शन से बचें

भूरा ( brown ) रंग हो तो:-

यदि पीरियड्स के दौरान आने वाला ब्लड ब्राउन कलर का होता है तो इसका मतलब होता है, की वो खून पुराना है, और वो काफी समय से आपके गर्भाशय में संग्रहित था, और अब आपको पीरियड्स के दौरान आ रहा है, ऐसा रंग अक्सर पीरियड्स के समय सुबह होने वाले ब्लड फ्लो में देखा जाता है।

लाल ( red ) रंग हो तो:-

लाल रंग का मतलब होता है की यह खून अभी अभी ताजा निर्मित हुआ है, और जो आपको पीरियड के समय आ रहा है, साथ ही यह अधिक गाढ़ा नहीं होता है, और न ही इसके रक्त के थक्के आदि कुछ होते है, यह नार्मल पीरियड का ब्लड फ्लो होता है।

काला या ग्रे रंग आये तो:-

जब आपको यूटेरस में इंफेक्‍शन या मिसकैरेज यानी गर्भपात की संभावना होती है तो पीरियड्स के दौरान आपको काला या ग्रे रंग के खून का प्रवाह होता है, और यदि ऐसा होता है तो इसे बिलकुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए, हालांकि यदि ऐसा आपको पीरियड के आखिरी दिन में थोड़ा आये तो इतना डरने वाली बात नहीं होती है, लेकिन यदि शुरुआत में ऐसा हो तो आपको तुरंत डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

नारंगी रंग क्यों आता है:-

नारंगी रंग के पीरियड्स के समय आने का कारण आपके गर्भाशय का ग्रीवा के साथ मिलने के कारण होता है, लेकिन जितना हो सकें इसके अधिक आने पर इसे भी अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि कई बार यह भी आपको इन्फेक्शन का संकेत देता है।

मध्‍यम लाल या क्रैनबेरी कलर के आने का कारण:-

पीरियड्स के लिए मध्‍यम लाल या क्रैनबेरी कलर एक स्‍वस्‍थ और अच्‍छा रंग माना जाता है, अधिकतर यह रंग पीरियड के दूसरे दिन दिखाई देता है, और एक्‍सपर्ट्स कहते हैं कि जिन्‍हें लंबी पीरियड साइकिल होती है, उनके पीरियड्स में यह रंग अधिक देखने को मिलता है, साथ ही बाद में यह क्रैनबेरी शेड बदल कर थोड़ा डार्क हो जाता है, जो कि एक नॉमर्ल बात है, इसीलिए इसे लेकर परेशान होने की जरुरत नहीं होती है।

तो ये है ब्लड फ्लो के कुछ रंग जो आपको पीरियड्स के दौरान आ सकते हैं इसीलिए जितना हो सकें इनका ध्यान रखना चाहिए कही इसके कारण आपको कोई समस्या न हो।

इन्हें भी पढ़ें:- पीरियड्स के दर्द से परेशान है? ये करें और दर्द को कहे बाय बाय

दीमक को घर से कैसे भगाएं

दीमक का घर में होना आपके घर में मौजूद लकड़ी के सामान के लिए बहुत हानिकारक होता है। क्योंकि यह कब आपके सामान में लगकर फ़ैल जाती है आपको शायद पता भी नहीं चलता है। क्योंकि यह आपके सामान को अंदर से धीरे धीरे खोखला कर देती है। वैसे तो हर मौसम में दीमक घर में फ़ैल सकती है। लेकिन अधिकतर दीमक बरसात के मौसम में लगने का खतरा ज्यादा होता है। क्योंकि बरसात में मौसम में लकड़ी के सामान में सीलन आने का खतरा अधिक होता है और सीलन वाली जगह पर दीमक बहुत जल्दी लगती है। लेकिन यह कोई ऐसी समस्या नहीं है की जिससे निजात न पाया जा सके। तो आइये आज इस आर्टिकल में कुछ ऐसे ही टिप्स बताने जा रहे हैं। जो आपके घर से दीमक को हटाने में मदद करते हैं।

लकड़ी को दीमक से बचाने के लिए इस्तेमाल करें कड़वी चीजें

  • दीमक को कड़वी चीजें या कड़वी स्मेल बिल्कुल भी पसंद नहीं होती है।
  • ऐसे में कड़वी चीजों के रस को उन जगह पर छिड़काव करें जहां दीमक लगी हुई है।
  • जैसे की नीम, करेला आदि के रस का छिड़काव करें ऐसा करने से दीमक से निजात मिलता है।

नमक

  • दीमक को खत्म करने के लिए नमक का इस्तेमाल करना भी एक बेहतरीन विकल्प है।
  • जहां पर दीमक लगी हुई है वहां पर नमक डाल दें।
  • ऐसा करने से दीमक गलकर धीरे धीरे खत्म हो जाती है।

लकड़ी को दीमक से बचाने के लिए इस्तेमाल करें लाल मिर्च पाउडर

  • दीमक को खत्म करने के लिए लाल मिर्च का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
  • जहां पर दीमक है वहां पर लाल मिर्च पाउडर डाल दें।
  • ऐसा करने से भी दीमक से निजात पाने में मदद मिलती है।

बोरिक एसिड

  • यदि आपके घर में दीमक अपनी जगह बना रही है तो उस जगह पर बोरिक एसिड डालें।
  • ऐसा करने से भी दीमक की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

संतरे का तेल

  • संतरे के तेल का इस्तेमाल करने से भी दीमक से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • इसके लिए जहां जहां आपके घर में दीमक है वहां पर संतरे के तेल का छिड़काव करें।
  • ऐसा करने से दीमक से निजात पाने में मदद मिलती है।

लकड़ी को दीमक से बचाने के लिए इस्तेमाल करें मिट्टी का तेल

  • मिट्टी के तेल की महक बहुत ही तेज होती है।
  • ऐसे में लकड़ी पर मिट्टी के तेल का स्प्रे करने से भी दीमक से बचाव करने में मदद मिलती है।

धूप

  • जिस समय धूप निकली हो उस समय घर के खिड़कियाँ दरवाज़े खोल देने चाहिए।
  • ऐसा करने से घर में सीलन की समस्या नहीं होती है जिससे दीमक से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • साथ ही यदि किसी चीज में दीमक लग गई है तो उसे दो चार दिन तक नियमित धूप दिखाएं।
  • ऐसा करने से दीमक की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • साथ ही कभी कभी घर की खिड़कियाँ आदि खोल देनी चाहिए क्योंकि इससे घर के अंदर बाहर हवा पास होती है जिससे सीलन की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है और दीमक से भी बचाव होता है।

पेस्ट कण्ट्रोल

  • समय समय पर घर में पेस्ट कण्ट्रोल करवाएं।
  • ऐसा करवाने से घर में दीमक के साथ अन्य कीड़ों से बचाने में भी मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से घर में लगने वाली दीमक की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती हैं। तो यदि आपके घर में भी दीमक है तो आप इनमे से किसी भी टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।