Home Blog Page 226

मर्दों के लिए गोरा होने की टिप्स

स्त्री हो या पुरुष आजकल हर कोई अपनी सेहत और अपनी स्किन को लेकर सजग हो गए है। जहाँ एक तरफ महिलाएं अपने बढ़ते पेट को कम करने के लिए योगा व्यायाम आदि करने लगी है वहीं पुरुष भी अपनी डल और मुरझाई हुई स्किन को ग्लोइंग बनाने के प्रयासों में लगे रहते है। जिसके लिए वे जाने अनजाने कुछ ऐसे प्रोडक्ट्स का यूज कर बैठते है जो उनकी स्किन को निखारने की बजाय और अधिक बेजान बना देते है। आजकल बाजार में इस तरह के ढेरों ऐसे प्रोडक्ट मौजूद है जो स्किन को कुछ ही दिनों में गोरा करने का दावा करते है लेकिन प्रयोग करने के पश्चात् उनका स्किन पर नकारात्मक प्रभाव सामने आते है। जिसका कारण उनमे मौजूद केमिकल्स होते है।मर्दों के लिए गोरा होने की टिप्स

लड़कियां तो फिर भी बहुत जाँच परख करने के बाद किसी प्रोडक्ट को यूज करती है लेकिन लड़के हमेशा इनके चुनाव में गलत कर बैठते है। लड़कों की स्किन लड़कियों से अलग होती है ऐसे में लड़कियों वाली फेयरनेस क्रीम आपकी स्किन को बेजान और काला बनाने का काम करेगी। माना आजकल गोरापन बहुत जरुरी है लेकिन उसके लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल करना ठीक नहीं। इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसी आसान घरेलू टिप्स बताने जा रहे है जिनकी मदद से कुछ ही हफ़्तों में आपकी स्किन पहले से अधिक गोरी और साफ़ हो जाएगी। और इसके लिए आपको बहुत से पैसे खर्च करने ककी भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

मर्दों के लिए गोरा होने के घरेलू उपाय :-

1. हल्दी :

हल्दी स्किन के रंग को साफ़ करने में काफी मददगार होती है और साथ ही त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक तत्वों को भी साफ़ करने का काम करती है। गोरापन पाने के लिए थोड़े से जैतून के तेल में हल्दी मिलाएं और उसका लेप अपने चेहरे पर लगाएं। 20 मिनट तक रखें और फिर गर्म पानी से चेहरा साफ़ कर लें। नियमित इस्तेमाल से स्किन का रंग बेहतर हो जाएगा।

2. मुल्तानी मिट्टी :

स्किन की रंगत निखारने के लिए मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग कई सदियों से किया जाता आ रहा है। वैसे तो इसका प्रयोग अधिकतर महिलाएं ही करती है परंतु पुरुष भी अपनी स्किन को गोरा बनाने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते है। प्रयोग के लिए गुलाबजल और प्राकृतिक चंदन पाउडर के साथ मुल्तानी मिट्टी मिलाकर पैक बना लें। अब इस पैक को अपने चेहरे और गले पर लगायें। पूरी तरह सुख जाने के बाद गुनगुने पानी से अपना फेस धो लें।

3. नींबू और टमाटर :

अगर त्वचा टैनिंग या प्रदुषण के कारण काली हुई है तो ये उपाय काफी लाभकारी होता है। इसके लिए एक पका हुआ टमाटर लें और उसे पीसकर लेप बना लें, अब इसमें एक चम्मच नींबू का रस मिलाएं। अच्छे से मिलाने के बाद इस पैक को फेस के हर हिस्से में अच्छे से लगायें और 20 मिनट तक रहने दें। उसके बाद ठंडे पानी से चेहरा साफ़ कर लें। इसका प्रयोग 15 दिनों तक लगातार करना होगा तभी स्किन पर फर्क आएगा।

4. कच्चा दूध :मर्दों के लिए घरेलू फेस पैक

स्किन को गोरा करने के लिए रोजाना रात को सोने से पहले अपने पुरे फेस पर कच्चा दूध लगायें। ऐसा करने से स्किन को नमी तो मिलेगी ही साथ-साथ दूध के पोषक तत्व भी मिलेंगे जो स्किन को सॉफ्ट बनाने में मदद करेंगे। बेहतर परिणामों के लिए कुछ हफ़्तों तक नियमित रूप से इस उपाय का इस्तेमाल करते रहे।

5. बेसन :

बेसन त्वचा को गोरा बनाने के साथ साथ एक्स्फोलिएट करने का काम करता है। इसके लिए बेसन को दही, नींबू के रस और हल्दी के साथ मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं। इससे स्किन की खूबसूरती बढ़ेगी और टैनिंग की समस्या भी दूर होगी।

6. कच्चा आलू :

कच्चे आलू में ब्लीचिंग गुण पाए जाते है जो त्वचा के कालेपन को दूर करके उसे गोरा करने में मदद करते है। मर्दों की स्किन को गोरा करने के लिए एक आलू लें और उसकी पतली-पतली स्लाइसेस कर लें। अब इन स्लाइसेस तो या तो अपने चेहरे पर रख लें या उन्हें रगड़ें। कुछ देर तक रखने या रगड़ने के बाद आलू हटा दें और चेहरा ऐसे ही रहने दें। उसके बाद गर्म पानी से पूरा चेहरा धो लें। कुछ ही दिनों में त्वचा चमकने लगेगी।

7. नींबू और पुदीने का रस :

मर्दों की त्वचा को गोरा करने के लिए आधा चम्मच नींबू के रस में 2 चम्मच पुदीने का रस मिलाएं। अब इस मिश्रण से अपना चेहरा साफ़ करें। २० मिनट तक फेस ऐसे ही रहने दें। उसके बाद पानी से साफ़ कर लें। कुछ हफ़्तों तक लगातार प्रयोग करने से स्किन में फर्क दिखने लगेगा और आपकी त्वचा गोरी हो जाएगी।

मर्दों की त्वचा गोरा करने की टिप्स :-

इसके अलावा कुछ सामान्य टिप्स भी है जिनका ध्यान रखकर मर्द अपनी स्किन को गोरा बना सकते है।

चेहरा धोएं :

अपनी स्किन को गोरा और चमकदार बनाने के लिए रोजाना दिन में कम से कम दो बार अपना चेहरा साफ़ करें। फेस धोने के लिए ऐसे फेस वाश का इस्तेमाल करें जिसमे एलोवेरा या नींबू हो।

टोनर का प्रयोग :

बाहर जाने के कारण स्किन पर बहुत सी अशुद्धियाँ इकट्ठी हो जाती है। जिसके कारण खुजली, त्वचा में लालीपन, जलन आदि की समस्या होने लगती है। ऐसे में टोनर का इस्तेमाल करके इससे छुटकारा पाया जा सकता है।

पानी पियें :

स्किन को स्वस्थ रखने के लिए अधिक से अधिक मात्रा में पानी का सेवन करें। क्योंकि त्वचा को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना बहुत जरुरी है।

व्यायाम :

व्यायाम करने से केवल शरीर ही नहीं अपितु स्किन भी हेल्थी रहती है। और स्किन को गोरा करने के लिए स्किन का हेल्थी होना बहुत जरुरी होता है। इसीलिए रोजाना 10 मिनट से आधे घंटे तक व्यायाम करें।

भरपूर नींद लें :

त्वचा को बेहतर बनाने के लिए केवल व्यायाम से बात नहीं बनेगी। इसके लिए आपको भरपूर नींद भी लेनी होगी। क्योंकि अधूरी नींद के कारण थकान, कमजोरी और आँखों के नीचे काले घेरे आ जाते है। जो स्किन और स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं इसलिए पूरी नींद लें।

सूरज की रोशनी से बचें :

सूरज की तेज रोशनी स्किन को काफी नुकसान पहुंचाती है। जिसके कारण स्किन रुखी और बेजान हो जाती है। इसलिए सूरज की रोशनी के सीधे संपर्क में आने से बचें। अगर धूप के समय कहीं बाहर जाना भी पड़े तो सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल करें या अपने चेहरे और स्किन को ढक कर रखें।

खान-पान पर ध्यान दें :

स्किन को गोरा करने के लिए अन्य चीजों के साथ-साथ अपने खान-पान का ध्यान रखना भी बेहद जरुरी है। क्योंकि गोरी त्वचा पाने के लिए सिर्फ फेस पैक और मास्क पर निर्भर रहना ठीक नहीं। इसके लिए शरीर को अंदरूनी पोषण भी देना पड़ेगा जो आपके खाने से मिलेगा। इसलिए सही और संतुलित भोजन का सेवन करें बाहर का खाना खाने से बचें और फ़ास्ट फ़ूड तो बिलकुल भी नहीं छूएं।

तो ये थे कुछ सामान्य घरेलू टिप्स और उपाय जिनकी मदद से मर्दों की स्किन को गोरा बनाया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहें उपरोक्त बताएं गए सभी उपायों में से आपको केवल एक का चयन करना है। अगर आप एक ही साथ सभी उपायों का इस्तेमाल करने लगे तो स्किन पर नाकरात्मक प्रभाव आ सकते है इसलिए सभी में से केवल एक ही उपाय का प्रयोग करें। अगर वह काम नहीं करे तो अगले उपाय का इस्तेमाल करें।

डिलीवरी से पहले पानी की थैली फट जाए तो क्या करें?

प्रेगनेंसी के दौरान पानी की थैली का फटना डिलीवरी होने का एक अहम लक्षण होता है। यदि यह प्रेगनेंसी के सेंतीस हफ़्तों के बाद के बाद तो होता है तो बहुत अच्छी बात होती है लेकिन यदि यह समय से पहले हो जाता है तो यह समय से पहले डिलीवरी का लक्षण होता है। ऐसे में महिला को पानी की थैली फटने के कारण किसी भी तरह की परेशानी न हो इसके लिए महिला को इसके बारे में सही जानकारी होना बहुत जरुरी है। जैसे की:

पानी की थैली फटने का क्या मतलब होता है?

गर्भाशय में शिशु एक फ्लूड में होता है जिसे एमनियोटिक फ्लूड कहा जाता है। और वो द्रव जिस झिल्ली से चारों और से ढका हुआ होता है उसे पानी की थैली कहते हैं। और जब यह थैली फटती है तो प्राइवेट पार्ट से द्रव निकलता हुआ महसूस होता है। और यह द्रव जैसे जैसे बाहर निकलता है वैसे वैसे गर्भाशय में संकुचन होना शुरू हो जाता है यानी की महिला को लेबर पेन शुरू हो जाती है। और इसी प्रक्रिया को प्रेगनेंसी में पानी की थैली का फटना कहा जाता है।

पानी की थैली फटने पर कैसा महसूस होता है?

प्राइवेट पार्ट में गीलापन अधिक महसूस होता है। लेकिन यदि थैली थोड़ी सी फटी है तो इसका पता लगने में महिला को समय लगता है। लेकिन कई बार फ्लूड ज्यादा निकलने लगता है और आपको पेंटी गीली महसूस हो सकती है।

डिलीवरी का समय पास आने से पहले पानी की थैली फटने के क्या कारण होते हैं?

  • डिलीवरी का समय पास आने पर पानी की थैली आपने आप ही फट जाती है।
  • गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होने के कारण आपको ऐसा सेंतीस हफ़्तों से पहले ही महसूस हो सकता है।
  • गर्भाशय में संक्रमण, महिला के पेट पर चोट आदि लगने के कारण भी ऐसा हो सकता है और डिलीवरी का समय पास आने से पहले यदि ऐसा होता है। तो इसका मतलब होता है की महिला की डिलीवरी समय से पहले होगी जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है।
  • धूम्रपान करने वाली महिलाओं के साथ ऐसा होता है।
  • गर्भाशय की झिल्ली कमजोर होने के कारण।
  • प्रेगनेंसी के दौरान अच्छी केयर न मिलने के कारण।
  • यदि पहली डिलीवरी समय से पहले हुई है तो भी ऐसा हो सकता है।

पानी की थैली फटने पर क्या करना चाहिए

  • जैसे ही महिला की पानी की थैली फट जाती है और महिला को पता चलता है तो महिला को घबराना नहीं चाहिए। बल्कि घर के सदस्यों को जो आपके घर में है उन्हें बुलाना चाहिए और डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
  • उसके बाद जितना जल्दी हो सके महिला को डॉक्टर के पास पहुँच जाना चाहिए क्योंकि पानी की थैली के फटने के बाद इसे ज्यादा समय के लिए अनदेखा करने पर बच्चे के संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • यदि आपको फ्लूड तेजी से निकल रहा है तो जल्दी से डॉक्टर के पास पहुंचें क्योंकि गर्भाशय में फ्लूड की कमी होने के कारण बच्चे को दिक्कत हो सकती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में पानी की थैली फटने पर गर्भवती महिला को क्या करना चाहिए। उससे जुड़े कुछ टिप्स, साथ ही जिस तरह प्रेगनेंसी की शुरुआत से महिला प्रेगनेंसी से जुडी जानकारी एकत्रित करती है। वैसे ही महिला को प्रसव की जानकारी भी इक्कठी करनी चाहिए ताकि प्रसव के समय महिला को किसी भी तरह की दिक्कत न हो।

ट्रैवेलिंग करते समय गर्भ में शिशु को कौन-कौन सी दिक्कत आ सकती है?

प्रेगनेंसी में ऐसे बहुत से काम होते हैं जो महिला को नहीं करने चाहिए क्योंकि उनके कारण गर्भ में शिशु पर बुरा असर पड़ सकता है। जैसे की भारी सामान उठाना व् सरकाना, झुककर काम करना, पेट पर दबाव पड़ने वाला काम करना, जिन कामों को करने से पेट पर झटका लगने का खतरा हो जैसे की ट्रैवेलिंग, आदि। यदि महिला ऐसे काम करती है तो इनके कारण गर्भ में शिशु पर बुरा असर पड़ सकता है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में ट्रैवेलिंग करने से जुड़े कुछ हानिकारक प्रभाव बता रहे हैं जो पेट में शिशु पर पड़ सकते हैं। जैसे की:

सीट बेल्ट के कारण हो सकती है बच्चे को दिक्कत

यदि आप अपनी कार में ट्रेवल कर रही हैं और आपने सीट बेल्ट लगा रखी है तो इसके कारण पेट पर दबाव पड़ता है। और यह दबाव गर्भ में शिशु को परेशान करता है। जिसके कारण शिशु गर्भ में असहज महसूस कर सकता है।

झटका लगने का होता है खतरा

प्रेग्नेंट महिला यदि कार, बस आदि में ट्रेवल करती है। तो इनमे ट्रैवेलिंग करने पर महिला को झटका लग सकता है जैसे की ब्रेक लगने पर, ब्रेकर क्रॉस करने पर, आदि, जिसके कारण गर्भ पर बुरा प्रभाव पड़ता है। साथ ही झटका लगने के कारण महिला को पेट में दर्द जैसी समस्या भी हो सकती है।

एक ही पोजीशन में बहुत देर बैठने के कारण हो सकती है परेशानी

ट्रैवेलिंग के दौरान महिला को बहुत देर तक एक ही पोजीशन में बैठना पड़ता है जिसके कारण महिला को परेशानी का अनुभव होती है। और जब महिला को परेशानी का अनुभव होता है तो जाहिर सी बात है गर्भ में शिशु की परेशानी महसूस करता है। क्योंकि बहुत देर तक महिला पीठ को सीधा करके तो नहीं बैठ सकती है और न ही आप बस या कार में अच्छे से लेट सकती है। ऐसे में महिला पीठ झुकाकर बैठती है जिसके कारण पेट दब सकता है।

बाहर का खाना कर सकता है नुकसान

आप कितनी भी कोशिश कर लें जब आप ट्रैवेलिंग करते है तो बाहर का खाना जरूर खाते हैं। और प्रेग्नेंट महिला यदि ऐसा करती है तो इसके कारण महिला को दिक्कत हो सकती है जिसके कारण बच्चे को भी परेशान होना पड़ता है।

प्रदूषण के कारण नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को ऐसी किसी भी जगह पर न जाने की सलाह दी जाती है जहां पर प्रदूषण हो ऐसे में यदि आप बस में सफर करती है तो आप प्रदूषण के संपर्क में आती है। और जब आप सांस लेती है तो शरीर में विषैले कण प्रवेश कर सकते हैं। जिनके बुरे प्रभाव के कारण गर्भवती महिला के साथ बच्चे को भी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि यह विषैले कम महिला को इन्फेक्शन से ग्रसित कर सकते हैं।

पानी की कमी के कारण हो सकती है शिशु को दिक्कत

प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर महिलाओं को उल्टी की समस्या का सामना करना पड़ता है और जब महिला ट्रैवेलिंग कर रही हो तो महिला को यह परेशानी अधिक हो सकती है। और उल्टी अधिक करने के कारण महिला के शरीर में पानी की कमी हो सकती है जिसका असर बच्चे पर भी पड़ता है। और गर्भ में बच्चे को दिक्कत महसूस होती है।

गर्मी के कारण हो सकती है दिक्कत

यदि गर्भवती महिला गर्मी के मौसम में ट्रैवेलिंग करती है तो महिला को ज्यादा दिक्कत हो सकती है। और इसके कारण गर्भ में शिशु भी दिक्कत महसूस कर सकता है।

तो यह हैं कुछ हानिकारक प्रभाव जो ट्रैवेलिंग के कारण शिशु पर पड़ते हैं। ऐसे में शिशु को स्वस्थ रखने के लिए और ऐसी कोई भी दिक्कत शिशु को न हो इससे बचने के लिए महिला को जितना सके प्रेगनेंसी में दूर की यात्रा नहीं करनी चाहिए। फिर चाहे वो कार में हो, बस में हो या प्लेन में हो।

प्रेगनेंसी में खाने का मन क्यों नहीं करता है? जानिए

प्रेगनेंसी में खाने का मन क्यों नहीं करता है, गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए बहुत ही सुखद अहसास होता है। लेकिन इस दौरान महिला बहुत सी शारीरिक परेशानियों से भी गुजर सकती है। जैसे की महिला को उल्टी आना, जी मिचलाना, बॉडी में दर्द, पेट व् पीठ में दर्द, कब्ज़ व् एसिडिटी की समस्या, भूख से जुडी परेशानी, आदि हो सकती है। और ऐसा जरुरी नहीं होता है की हर प्रेग्नेंट महिला को एक ही जैसी समस्या हो। बल्कि यह हर प्रेग्नेंट महिला के शरीर में होने वाले आंतरिक बदलाव पर निर्भर करता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान भूख न लगने की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं। की आखिर क्यों गर्भवती महिला को भूख नहीं लगती है।

प्रेग्नेंट महिला को भूख न लगने का कारण

गर्भवती महिला के शरीर में प्रेगनेंसी के दौरान बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं। जिनके कारण महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपने अंदर कुछ ऐसे बदलाव महसूस करती है जो उसे पहले कभी महसूस नहीं हुए हैं। जैसे की जो महिलाएं खाने की इतनी शौकीन होती है कई बार प्रेगनेंसी के दौरान उनकी भूख ही मर जाती है। और प्रेग्नेंट महिला को भूख न लगने के कई कारण हो सकते हैं। आइये अब जानते हैं वो कारण कौन से हैं।

प्रेगनेंसी में खाने का मन न करने का कारण है हार्मोनल बदलाव

  • गर्भावस्था के समय लगातार महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं।
  • और बॉडी में होने वाले बदलाव के कारण महिला की भूख पर असर पड़ता है।
  • जैसे की हो सकता है की प्रेग्नेंट महिला को भूख न लगे या फिर हो सकता है की ज्यादा भूख लगने लग जाये।

उल्टी की समस्या

  • बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान उल्टी होने की समस्या से परेशान रहती है।
  • ऐसे में कुछ भी खाते ही महिला को उल्टी न आये इसी डर में महिला की खाने की इच्छा में कमी आ सकती है।
  • और प्रेगनेंसी में महिला को भूख न लगने की समस्या हो सकती है।

प्रेगनेंसी में खाने का मन न करने का कारण है खाने की पसंद नापसंद में बदलाव

  • प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले बदलाव के कारण महिला की खाने की पसंद नापसंद में बदलाव आ सकता है।
  • जिसके कारण यदि महिला को खाने में कुछ ऐसा मिले जो की महिला को नापसंद हो तो इसके कारण भी महिला को भूख न लगने या भूख में कमी की परेशानी हो सकती है।

गंध से परेशानी

  • कुछ गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान सब्ज़ी, दाल, रोटी बनने आदि की गंध के कारण परेशान हो सकती है।
  • और जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान इस समस्या से परेशान होती है।
  • उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान कुछ भी न खाने की परेशानी हो सकती है।
  • और यदि महिला अच्छे से खाना नहीं खाती है तो इसके कारण भी महिला की भूख में कमी आ सकती है।

क्या सभी प्रेग्नेंट महिलाओं को भूख में कमी की परेशानी होती हैं?

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं होता है की यदि एक गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान भूख नहीं लगती है। तो दूसरी गर्भवती महिला को भी न लगे। बल्कि यह महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव व् जीभ के स्वाद पर निर्भर करता है की प्रेग्नेंट महिला में भूख की कमी की समस्या हो जाती है। या प्रेग्नेंट महिला पहले की अपेक्षा अधिक खाना शुरू कर देती है।

प्रेगनेंसी में खाने का मन न करने पर महिला को क्या करना चाहिए

गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी के दौरान अपने खान पान का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। साथ ही गर्भवती महिला को अपनी डाइट को समय से और जरुरत के अनुसार लेना चाहिए। क्योंकि यदि महिला अपने खान पान में किसी भी तरह की लापरवाही करती है तो इसके कारण महिला की स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां बढ़ने के साथ बच्चे के विकास में भी कमी आ सकती है। ऐसे में महिला को भूख बढ़ाने के लिए कुछ टिप्स का इस्तेमाल करना चाहिए। जैसे की

  • खाने की मात्रा कम लें लेकिन उसमे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होने चाहिए।
  • एक साथ पूरा आहार लेने की बजाय थोड़ा थोड़ा करके खाएं, यानी की हर दो से तीन घंटे में कुछ खाएं।
  • अपनी पसंद का कुछ खाएं, लेकिन ध्यान रखें की वह प्रेगनेंसी के दौरान आपको नुकसान न पहुंचाए।
  • आंवले का मुरब्बा खाएं, आंवले का अचार या चटनी खाये इससे भूख को बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान भूख न लगने के कारण व् भूख बढ़ाने के टिप्स। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी में खान पान के दौरान बरती गई लापरवाही महिला के साथ शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकती है।

अक्सर नौवें महीने में प्रेग्नेंट महिला को यह दिक्कतें आती हैं?

प्रेगनेंसी का नौवां महिला बहुत ही खास होता है क्योंकि अब कुछ ही दिनों के बाद आपका शिशु आपके हाथों में आने वाला होता है। लेकिन यह पल जितना ख़ुशी का होता है उतना ही इस दौरान महिला को कुछ दिक्कतें भी आ सकती है। और इस दौरान महिला को किसी तरह की कोई दिक्कत न हो उससे बचने के लिए महिला को अपना पहले से भी ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि इस समय महिला यदि किसी तरह की लापरवाही करती है तो इससे डिलीवरी में दिक्कत आने के साथ शिशु को परेशानी होने का भी खतरा होता है, क्योंकि शिशु का विकास भी इस समय पूरी तरह हो चूका होता है।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को कौन सी दिक्कतें हो सकती है

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के नौवें महीने में तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को कौन कौन सी दिक्कतें आ सकती है।

वजन

प्रेगनेंसी के नौवें महीने महिला का वजन ग्यारह से सोलह किलोग्राम तक बढ़ सकता है, और साथ ही महिला का पेट भी बाहर की तरफ निकल जाता है। ऐसे में वजन के बढ़ने के कारण प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को उठने, बैठने, सोने, आदि में दिक़्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस कारण कोई दिक्कत न हो इसके लिए महिला को अपने उठने बैठने का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

ब्रेस्ट में रिसाव

गर्भावस्था के नौवें महीने में कुछ महिलाओं को ब्रेस्ट से कुछ तरल पदार्थ निकलता हुआ महसूस हो सकता है। जो की कोलोस्ट्रोम होता है, इसके कारण महिला को गीलापन महसूस हो सकता है जिसके कारण महिला थोड़ी दिक्कत का अनुभव कर सकती है।

यूरिन

पेट का आकार बढ़ने के कारण पेट के निचले दबाव ज्यादा महसूस हो सकता है, जिसके कारण बार बार यूरिन आने की समस्या हो सकती है। और बार बार बाथरूम में जाने के कारण महिला को बहुत ज्यादा परेशानी का अनुभव हो सकता है।

कब्ज़

प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी गर्भवती महिलाएं कब्ज़ की समस्या से परेशान रहती है। लेकिन प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में वजन बढ़ने के कारण पाचन क्रिया बहुत धीमी पड़ सकती है जिसके कारण कब्ज़ की समस्या की अधिक परेशानी हो सकती है।

रक्त स्त्राव

कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के नौवें महीने में प्राइवेट पार्ट से हल्का फुल्का स्त्राव हो सकता है और इसके साथ कई बार महिला को रक्त के धब्बे भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसा होना बहुत ही सामान्य बात होती है लेकिन यदि महिला को डिस्चार्ज के साथ बदबू भी महसूस हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह इन्फेक्शन का लक्षण हो सकता है।

पीठ में दर्द

वजन बढ़ने के कारण पेट के भार को सँभालने के लिए रीढ़ की हड्डी का सपोर्ट लगता है। ऐसे में इस कारण मांसपेशियों में खिंचाव भी अधिक महसूस हो सकता है। जिसके कारण प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में पीठ में दर्द की समस्या हो सकती है।

पेट में दर्द

गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट के आस पास की और पेल्विक एरिया की मांसपेशियों में खिंचाव होने के कारण महिला को पेट में हल्के फुल्के दर्द का अहसास होता है। लेकिन यदि दर्द का अनुभव अधिक हो या तेजी से हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह प्रसव का लक्षण हो सकता है।

सूजन

वजन बढ़ने के कारण सिर से पैरों तक ब्लड फ्लो बेहतर तरीके से न होने के कारण बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में पैरों में सूजन की समस्या से भी परेशान हो सकती है। कुछ महिलाओं के हाथों और मुँह पर भी सूजन की समस्या हो सकती है।

सोने में दिक्कत

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में गर्भवती महिला को सोने में भी दिक्कत का अनुभव हो सकता है। वजन बढ़ने के कारण महिला न तो सीधा सो सकती है क्योंकि इससे गर्भ में शिशु को दिक्कत हो सकती है, साथ ही करवट लेकर सोने में भी महिला को कई बार परेशानी का अनुभव हो सकता है।

तो यह हैं कुछ समस्या जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के नौवें महीने में हो सकती है, ऐसे में महिला को ज्यादा दिक्कत न हो इसके लिए अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा यदि महिला को प्रेगनेंसी के नौवें महीने में असहज लक्षण महसूस होता है तो इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला के लिए आदर्श पति की क्या होती है जिम्मेवारियां

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे विकास की जिम्मेवारी पूरी तरह से महिला की होती है क्योंकि बच्चा अपने विकास के लिए पूरी तरह से अपनी माँ पर निर्भर करता है। लेकिन इस दौरान महिला अपना अच्छे से ध्यान रखती है तभी तो बच्चे का विकास भी अच्छे से होता है। ऐसे में महिला की अच्छे से केयर हो इसकी पूरी जिम्मेवारी महिला के साथ उसके पति की भी होती है।

क्योंकि बच्चा तो उन दोनों का ही होता है। और यदि गर्भवती महिला को अपने पति का साथ मिल जाता है तो प्रेगनेंसी में आने वाली आधी परेशानियां तो वैसे ही खत्म हो जाती है। तो यदि आप भी बाप बनने वाले हैं, और आपको अपनी गर्भवती पत्नी का कैसे ख्याल रखना चाहिए और आपकी क्या जिम्मेवारियां होती है इस बारे में आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको बताने जा रहे हैं।

महिला के मन में क्या चल रहा है इसे जानने की कोशिश करें

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से महिला में मानसिक व् भावनात्मक रूप से भी बदलाव आते हैं। और कई बार प्रेगनेंसी को लेकर महिलाएं घबरा भी जाती है। जिसकी वजह से महिला को दिक्कत हो सकती है ऐसे में उनके पार्टनर का यह कर्तव्य बनता है की वो अपनी पत्नी के मन में क्या चल रहा है उसे जानने की कोशिश करें। ताकि उसे मानसिक रूप से होने वाली परेशानी से बचाने में मदद मिल सके।

उनके साथ समय बिताएं

घर के सदस्य यदि प्रेग्नेंट महिला के साथ होते भी हैं तो महिला को उतना सपोर्ट नहीं मिलता है जितना प्रेग्नेंट महिला को तब मिलता है जब उनका पति साथ होता है। ऐसे में आपकी पत्नी की प्रेगनेंसी में आपको अपनी पत्नी के साथ जितना समय हो सके उतना बिताना चाहिए। और उनसे बातें करनी चाहिए, उन्हें खुश रखना चाहिए, उनके साथ वाक पर जाना चाहिए, आदि। यदि आप ऐसा करते हैं तो देखिएगा आपकी पत्नी को प्रेगनेंसी में पॉजिटिव रहने में मदद मिलती है जिससे माँ व् बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं।

घर के कामों में करें मदद

घर के कुछ ऐसे काम होते हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को नहीं करने चाहिए। जैसे की बाथरूम साफ करना, भारी चीजें उठाना, झुककर काम करना, ज्यादा देर खड़े रहकर करने वाले काम, झाड़ू, पोछा लगाना, आदि। तो ऐसे काम करने के लिए आपको घर में नौकरानी लगानी चाहिए। इसके अलावा अन्य काम जो भी घर के महिला करती है उसमे आपको महिला का हाथ जरूर बटाना चाहिए ऐसा करने से भी आप प्रेगनेंसी के दौरान अपनी पत्नी की मदद कर सकते हैं।

महिला के अनुभव को जानें

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत से नए नए अनुभव का अहसास होता है। आपको अपनी पत्नी से पूछना चाहिए की उन्हें क्या अनुभव हो रहा है, महिला के पेट पर हाथ लगाकर बच्चे की हलचल को महसूस करें, आदि। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को बहुत अच्छा लगता है।

महिला को सकारात्मक रहने में मदद करें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में बाहरी रूप से बहुत से बदलाव महसूस होते हैं जिनके कारण महिला को ऐसा लगता है की महिला अब सूंदर नहीं रही, उनका वजन बढ़ रहा है, स्किन पर खिंचाव के निशान बन रहे हैं, आदि। तो ऐसे में पति की यह जिमेवारी बनती है वो अपनी पत्नी को सकारात्मक रहने में मदद करें उन्हें बताए की प्रेगनेंसी में वो और भी ज्यादा खूबसूरत हो गई है, और जो बदलाव महिला के शरीर में आ रहे वो डिलीवरी के बाद ठीक हो जायेंगे। इसे आपकी पत्नी को अच्छा महसूस होगा और महिला को सकारात्मक रहने में मदद मिलेगी।

महिला की खाने की इच्छा को पूरा करें

गर्भावस्था के दौरान यदि आपकी पत्नी का कुछ खाने का मन करता है तो महिला की इच्छा को बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ न करें। यदि सिमित मात्रा में उस चीज को खाने से कोई समस्या नहीं है तो महिला की खाने की इच्छा को जरूर पूरा करें।

अपने सुनने की क्षमता में सुधार लाएं

यदि आप अधिकतर अपनी पत्नी की बातों को कम सुनते हैं तो प्रेगनेंसी के दौरान अपनी इस आदत को सुधारें। और अपनी प्रेग्नेंट पत्नी की ख़ुशी के लिए उनकी बातों को सुनने की आदत डालें।

अपनी पार्टनर की तकलीफ को कम करने की कोशिश करें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है जैसे की शरीर में दर्द, पैरों में सूजन, आदि। तो प्रेगनेंसी के दौरान एक आदर्श पति की यह जिम्मेवारी बनती है की वो अपनी पत्नी की तकलीफ को कम करने की कोशिश करें। और इसके लिए आप उनकी मसाज करें या अन्य जिस भी चीज से महिला को आराम महसूस होता है वैसा करें।

सही समय पर जांच

एक आदर्श पति की प्रेग्नेंट महिला के लिए यह भी जिम्मेवारी होती है की वो अपनी पति को सही समय पर डॉक्टर के पास लेकर जाए। उसकी सभी जांच करवाएं डॉक्टर जैसा कहे वैसा करने में उनका साथ दें, ऐसा करके भी आप प्रेगनेंसी के दौरान अपनी पत्नी का साथ दे सकते हैं।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो एक आदर्श पति को अपनी पत्नी की प्रेगनेंसी के दौरान ध्यान रखने चाहिए। ताकि महिला को प्रेगनेंसी के दौरान और ज्यादा फिट, स्वस्थ और खुश रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी के दौरान गर्मियों में चाय के नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिलाओं को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है। और खान पान का ध्यान मौसम के अनुसार भी रखना चाहिये, जैसे की सर्दियों में ठन्डे खान पान से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। वैसे ही गर्मियों में भी खाने पीने को लेकर कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे की चाय का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए, और केवल चाय ही नहीं बल्कि कॉफ़ी, पाउडर कॉफी, फिल्टर कॉफी, एस्प्रेसो आदि का सेवन भी कम करना चाहिए। क्योंकि गर्मियों में इनका सेवन केवल गर्भवती महिला के लिए ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में भी बाधा बन सकता है। लेकिन चाय का सेवन करने से हो सकता है गर्भवती महिला को थकान, दर्द आदि की समस्या से निजात मिलता हो, लेकिन यह उतनी ही नुकसानदायक भी होती है। तो लीजिये आज हम आपको गर्मियों में चाय का अधिक सेवन करने से कौन कौन से नुकसान हो सकता है।

गर्भपात

चाय में कैफीन की मात्रा बहुत अधिक होती है ऐसे में गर्मियों में चाय का सेवन करने से शरीर में गर्मी बढ़ती है, साथ ही कैफीन का बुरा असर भी बॉडी पर पड़ता है। जिसके कारण गर्भवती महिला को गर्भपात जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

गैस व् एसिडिटी

पेट में गर्मी बढ़ने के कारण गैस व् एसिडिटी की समस्या के होने का खतरा रहता है। और चाय का सेवन गर्मियों में करने से पेट में गर्मी बढ़ सकती है, इसीलिए चाय की जगह ठंडक पहुंचाने वाले पेय पदार्थ जैसे की निम्बू पानी, शरबत आदि का सेवन करना चाहिए।

शिशु के वजन में कमी

हर महिला चाहती है की उसके गर्भ में पल रहे शिशु का विकास बेहतर तरीके से हो और शिशु हष्ट पुष्ट रहे। लेकिन इसके लिए जरुरी होता है की महिला ऐसी चीजों का सेवन कम करे या न करे जिससे शिशु के विकास में कमी आए। और यदि महिला गर्मियों में या कभी भी चाय का सेवन अधिक करती है तो इसके कारण शिशु के वजन में कमी जैसी परेशानी का सामना महिला को करना पड़ सकता है।

गर्मी का अधिक अहसास

प्रेगनेंसी में बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण परेशानी, गर्मी के कारण हो रही परेशानी का सामना महिला को करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला चाय का सेवन करती है तो इससे बॉडी का तापमान बढ़ सकता है जिसके कारण अधिक गर्मी का अहसास हो सकता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्मियों में गर्भवती महिला को चाय पीने के कारण हो सकते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को चाहिए की वह गर्मियों में चाय का सेवन अधिक मात्रा न करें, क्योंकि न तो इसमें पोषक तत्व होते हैं बल्कि यह बॉडी को नुकसान भी पहुंचा सकती है। साथ ही महिला का यदि चाय पीने का या कॉफ़ी पीने का मन है तो बहुत थोड़ी मात्रा में इसका सेवन करना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें की भूलकर भी खाली पेट चाय का सेवन नहीं करना चाहिए।

बालों में रूखापन होने के कारण और इलाज

खूबसूरत दिखने के लिए केवल आपके चेहरे की ही ख़ूबसूरती मायने नहीं रखती है। बल्कि इसके लिए आपके बालों का भी आकर्षक होना जरुरी होता है। चमकदार, मुलायम, और रेशमी बाल आपकी पर्सनैल्टी को और भी बड़ा देते है। लेकिन किसी भी चीज को खूबसूरत बनाएं रखने के लिए जरुरी है की आप उसकी अच्छे से देखभाल करे। लेकिन यदि आप ऐसा नहीं करते है तो इसके कारण आपको परेशानी उठानी पड़ सकती है। ऐसे ही बालों की अच्छे से केयर न करने पर कई बार बालों के रूखेपन का सामना आपको करना पड़ सकता है।

बालों के रूखेपन के कारण सर में डैंड्रफ और खुजली आदि की भी परेशानी सामने आ सकती है। बालों के रूखे होने का सबसे बड़ा कारण होता है की आप उसे अच्छे से पोषण नहीं देते हैं, जिस तरह पौधे पर फूल लगने के लिए पानी जरुरी होता है, उसी तरह बालों के पोषण के लिए आयल से मसाज जरूर करनी चाहिए। इसके अलावा और भी कई कारण हैं जिसकी वजह से बालों के रूखेपन की समस्या का सामना आपको करना पड़ सकता है तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की बालों के रूखेपन के क्या कारण होते है और इसका क्या इलाज है।

बालों के रूखेपन के कारण:-

  • नियमित बालों को धोने से बाल रूखे होने लगते है।
  • यदि आप अपने बालों में अच्छे से मसाज नहीं करते है, और हमेशा आपके बाल सूखे रहते है तो इसके कारण भी यह समस्या हो सकती है।
  • बालों को अधिक समय तक न धोने के कारण बालों में मिट्टी के कण होने के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • बालों में अधिक केमिकल का इस्तेमाल करने पर भी यह समस्या हो सकती है।
  • इलेक्ट्रिकल उपकरणों का इस्तेमाल करने के कारण भी यह परेशानी हो सकती है।
  • हर समय बालों को खुला रखने से धूप के बुरे प्रभाव के कारण भी बाल रूखे होने लगते है।
  • गरम पानी से बालों को धोने के कारण भी बाल रूखे होने लगते हैं।
  • गीले बालों में कंघी करने के कारण भी बालों में रूखापन आने लगता है।

बालों के रूखेपन को दूर करने का इलाज:-

एलोवेरा का प्रयोग करें:-

एलोवेरा का प्रयोग न केवल आपको बालों से जुडी परेशानी को दूर करने के लिए बल्कि अपने चेहरे की ख़ूबसूरती के लिए भी कर सकते है। इसका इस्तेमाल करने के लिए आप एलोवेरा के पत्ते को तोड़ कर, उसके अंदर के भाग को अलग करके अच्छे से पीस कर, अपने बालों में जड़ से नीचे की और अच्छे से लगाएं। और एक घंटे बाद शैम्पू से अपने बालों को धो लें ऐसा कुछ दिनों तक हफ्ते में दो बार करे।

निम्बू का प्रयोग करें:-

निम्बू के रस का इस्तेमाल करने से भी आपको बालों के रूखेपन को दूर करने में मदद मिलती है। इसके लिए आप एक निम्बू का रस निकालकर उसमे थोड़ा पानी मिलाएं, और उसके बाद तेल की तरह इसे अच्छे से अपने पूरे बालों में लगाएं। और एक घंटे बाद सर धो लें, हफ्ते में तीन बार इस उपाय को करे। आपको अपने बालों में इसका असर दिखने लगेगा।

बियर का प्रयोग करें:-

बियर भी आपके बालों को रेशमी बनाने में आपकी मदद करती है इसके लिए आप जब भी अपने बालों को धोएं। उसके बाद अपने बालों को नीचे लटकाकर आधा कप बियर में दो कप पानी मिलाकर उसे अच्छे से अपने बालों में डालें, और पांच मिनट तक रहने के बाद पानी से बालों को धो लें। इससे भी आपको अपने बालों के रूखेपन को दूर करने में मदद मिलेगी। या आप मार्किट में मिलने वाले बियर शैम्पू का भी इस्तेमाल कर सकती है।

अंडे का इस्तेमाल करें:-

बालों की चमक और उन्हें प्राकृतिक रूप से मुलायम बनाने में अंडा भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए आप अपने बालों के अनुसार एक या दो अंडे लेकर उन्हें अच्छे से फैट लें, उसके बाद अच्छे से मास्क बनाकर इन्हे अपने पूरे बालों में लगाएं। और बालों को बांधकर शावर कैप से ढक लें। और आधे घंटे बाद बालों को धो लें इससे आपके बालों में उसी समय इसका असर दिखाई देगा हफ्ते में एक बार भी इस उपाय को करने पर आपके बालों के रूखेपन को दूर करने में मदद मिलेगी।

मसाज करें:-

बालों को अच्छे से पोषण देने के लिए जरुरी है की आप अपने बालों में मसाज जरूर करें। इसे करने के लिए आप जिस दिन भी आपने सर धोना हो उससे एक रात पहले अच्छे से अपने बालों में तेल लगाएं। इससे आपके बालों को अच्छे से पोषण मिलेगा। और यदि आप नियमित ऐसा करते है तो इससे आपके बालों को अच्छे से पोषण मिलने के साथ प्राकृतिक रूप से चमकदार और मुलायम रहते है।

दही का प्रयोग करें:-

बालों के रूखेपन को दूर करने के लिए दही भी एक आसान और अच्छा उपाय है। इसके लिए आप एक कटोरी दही में एक चुटकी फिटकरी का चूर्ण, और आधा चम्मच हल्दी डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। उसके बाद इस पेस्ट को अच्छे से अपने बालों में लगाएं और आधे घंटे के लिए छोड़ दें। उसके बाद अच्छे से शैम्पू की मदद से अच्छे से अपने बालों को धो लें। इस उपाय को हफ्ते में दो बार करें आपके बालों का रूखापन दूर होने में आपको मदद मिलेगी।

शहद का इस्तेमाल करें:-

बालों को सिल्की और चमकदार बनाने के लिए शहद भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप दो कप गरम पानी में एक चम्मच शहद डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। उसके बाद गुनगुना रहने पर इसे अच्छे से अपने पूरे बालों में लगाएं और आधे घंटे के लिए बालों में ही छोड़ दे। और उसके बाद अपने बालों को धो लें, हफ्ते में दो बार इस उपाय को कुछ दिनों तक करने से आपको फायदा मिलता है।

बेसन और कच्चा दूध का प्रयोग करें:-

कच्चे दूध और बेसन का इस्तेमाल आपने अपने चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए तो बहुत बार किया होगा। लेकिन आप इसका इस्तेमाल करके अपने बालों को भी सिल्की बना सकते है इसके लिए आप एक कटोरी कच्चे दूध में दो या तीन चम्मच बेसन मिलाकर पतला पेस्ट तैयार करें, उसके बाद इसे अच्छे से अपने पूरे बालों में लगाएं, और आधे घंटे बाद अपने बालों को अच्छे से धो लें। हफ्ते में दी बाद इस उपाय को करने से आपके बालों को मुलायम बनाने में मदद मिलेगी।

बालों का रूखापन दूर करने के अन्य टिप्स:-

  • भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करें।
  • बाहर जाते समय बालों को भी ढककर जाएँ।
  • बालों के लिए ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल न करें।
  • नियमित सर धोने की बजाय दो या तीन दिन के अंतराल में बालों को धोएं।
  • गीले बालों में कंघी न करें।
  • ज्यादा इलेक्ट्रिकल उपकरणों का इस्तेमाल बालों पर न करें।
  • बालों को अधिक समय तक सूखे न रहने दें किसी भी अच्छे हेयर आयल का इस्तेमाल करके बालों की मसाज करें।
  • संतुलित आहार लेने से भी आपके बालों को पोषण मिलता है।
  • लस्सी से अपने बालों को धोएं इससे भी आपके बालों को मुलायम बनाने में मदद मिलती है।
  • बालों के लिए अच्छे और हर्बल शैम्पू का इस्तेमाल करें।

तो ऊपर दिए गए कारणों की वजह से आपको बालाओं के रूखेपन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए आपको अपने बालों की अच्छे से केयर करनी चाहिए और बालों के रूखेपन को दूर करने के लिए ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल करके इस समस्या से निजात पाना चाहिए। और अपने बालों को खूबसूरत और चमकदार बनाना चाहिए।

वीट का इस्तेमाल कैसे करें?

How to Use Veet Hair removal Cream : शरीर के अनचाहे बाल निकालने के लिए आजकल बाज़ार में बहुत से तरीके उपलब्ध है जिनमे से हेयर रिमूवल क्रीम और वैक्सिंग को सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। वीट (veet) अनचाहे बालों को हटाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली हेयर रिमूवल क्रीम और वैक्स स्ट्रिप्स का उत्पादन करने वाला ब्रांड है। जिसका वर्तमान में बहुत बड़े स्तर पर प्रयोग किया जाता है।

हेयर रिमूवल क्रीम में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते है जो बालों को जड़ों को गला देते है और बाल आसानी से निकल जाते है। जबकि वैक्सिंग में बालों को जड़ समेत निकाल लिया जाता है। वैसे तो यह एक कॉस्मेटिक ब्रांड का लेकिन इसके दोनों प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल किया जाता है। परंतु इसे इस्तेमाल करने से बहुत से जोखिम और नुकसान भी हैं। इसीलिए यहाँ हम आपको वीट का इस्तेमाल करने का तरीका बता रहे है जिसकी मदद से सुरक्षित तरीके से अनचाहे बालों से छुटकारा पाया जा सकता है।

पहला तरीका : हेयर रिमूवल क्रीम

वीट हेयर रिमूवल क्रीम का इस्तेमाल कैसे करें?

अनचाहे बालों से छुटकारा पाने के लिए हेयर रिमूवल क्रीम को सबसे बेहतर माना जाता है। क्योंकि इसके इस्तेमाल से मात्र 3 मिनट में बाल निकल जाते है। जबकि अन्य तरीकों में इससे ज्यादा समय लगता है। यहाँ हम आपको वीट हेयर रिमूवल क्रीम इस्तेमाल करने के बारे में बता रहे है।

1. पैच टेस्ट :

किसी भी नयी चीज के इस्तेमाल से पूर्व उसका स्किन पर पैच टेस्ट कर लेना चाहिए। ताकि यह पता लगाया जा सके की कहीं स्किन पर वह नकारात्मक प्रभाव तो नहीं दे रही। इसके लिए त्वाचा के एक छोटे से हिस्से पर क्रीम की थोड़ी सी मात्रा लगायें। और 24 घंटे तक इंतजार करें और देखें की कहीं उस क्रीम से कोई एलर्जी तो नहीं हो रही।

ध्यान रखने योग्य बातें :
  • यदि आपकी स्किन में कोई डिसऑर्डर है और आप उसके लिए दवाएं ले रहे है तो क्रीम के इस्तेमाल से पूर्व डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। क्योंकि हो सकता है इस स्थिति में क्रीम स्किन पर रिएक्शन कर जाए।
  • अगर पैच टेस्ट के बाद स्किन में कोई जलन नहीं हो रही है तो आप क्रीम का इस्तेमाल कर सकते है।
  • अगर पूरी डब्बी की क्रीम का रंग एक जैसा नहीं है या उसकी पैकिंग क्षतिग्रस्त है तो क्रीम का इस्तेमाल बिलकुल न करें।
  • ध्यान रहें, क्रीम कभी भी किसी धातु या कपडे के संपर्क में ना आए। क्योंकि ऐसा होने से वह वस्तु खराब हो सकती है या कपडे का रंग उड़ सकता है। और अगर गलती से क्रीम के संपर्क में कोई चीज आ गयी है तो उसे तुरंत पानी से साफ़ कर दें।
  • वीट क्रीम को बच्चों की पहुँच से दूर रखें।

2. क्रीम का इस्तेमाल करें :

24 घंटे तक देखने के बाद थोड़ी सी क्रीम अपनी हथेली पर लें। क्रीम की मात्रा उतनी ही लें जितनी की उस स्थान के लिए पर्याप्त हो।

ध्यान रखने योग्य बात :
  • क्रीम को आँखों के संपर्क में आने से बचाएं। यदि गलत से आँख में क्रीम चली गयी है तो उसे तुरंत पानी से धोएं। अगर पानी से भी आराम न मिले तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

3. क्रीम को लगायें :

अप क्रीम को उस स्थान पर लगायें और उस क्रीम के साथ आने वाले स्पैचुला (spatula) की मदद से क्रीम को पुरे बालों पर ढक दें। ध्यान रहें क्रीम सभी बालों पर एकसमान लगनी चाहिए।

ध्यान रखने योग्य बातें :
  • क्रीम लगाते समय ध्यान रखे की उसे केवल त्वचा के ऊपर ही लगाएं। इसे रगड़कर रोमछिद्रों पर लगाने की आवश्यकता नहीं है।
  • इस क्रीम का इस्तेमाल केवल पाँव, हाथ, अंडरआर्म और बिकिनी लाइन के लिए करें। चेहरे, छाती, सिर, और गुप्तांगों पर इसका इस्तेमाल न करें। ऐसा करने से त्वचा में जलन और एलर्जी हो सकती है। यदि गलती से स्किन पर क्रीम लग जाए तो उसे अच्छे से साफ़ कर लें और डॉक्टर से परामर्श लें।
  • वीट क्रीम को तिल, घाव के निशान, जली हुई त्वचा पर इस्तेमाल नहीं करें। इसके अलावा शरीर के जिस भाग पर क्रीम का इस्तेमाल पहले से ही किया जा चुका हो उस स्थान पर अगले 72 घंटों तक इस क्रीम का इस्तेमाल नहीं करें।
  • कटी हुई और सूजन वाली जगह पर क्रीम का इस्तेमाल नहीं करें।
  • गर्म पानी से नहाने के बाद भी क्रीम का इस्तेमाल नहीं करें क्योंकि क्रीम में केमिकल होता है जिससे त्वचा पर जलन हो सकती है।

4. समय का ध्यान रखें :वीट का इस्तेमाल

त्वचा पर क्रीम लगाने के बाद समय का खास ध्यान रखें। क्योंकि अधिक देर तक क्रीम त्वचा पर लगे रहने से गंभीर जलन हो सकती है। इसके लिए क्रीम को केवल 3 मिनट तक ही रहने दें।

ध्यान रखने योग्य बात :
  • यदि क्रीम लगाने के कुछ समय बाद ही पीड़ा या जलन का अनुभव होने लगे तो तुरंत क्रीम को हटा दें और शरीर के उस हिस्से को बहुत सारे पानी से धोएं। अगर इसके बाद भी जलन से राहत न मिले तो डॉक्टर से संपर्क करें।
  • इसके अलावा सेंसिटिव स्किन वाले भी इस क्रीम के इस्तेमाल से बचें क्योंकि इसमें केमिकल होते है जो स्किन पर बुरा प्रभाव डाल सकते है।

5. क्रीम हटाएं :

क्रीम हटाने के लिए उसके साथ आने वाले स्पैचुला की मदद लें। इसके लिए क्रीम लगाने की विपरीत दिशा में स्पैचुला को यूज करें जिस तरह क्रीम लगाने के लिए किया था। अगर स्पैचुला से बाल नहीं निकल रहे है तो उसकी जगह मुलायम स्पंज या किसी साफ़ कपडे का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। क्रीम को ज्यादा से ज्यादा केवल 6 मिनट तक ही (यदि जरूरत लगे तो) त्वचा पर लगा छोड़ सकते है। इससे अधिक देर तक रखना जलन का कारण बन सकता है।

6. त्वचा साफ़ करें :

उसके बाद त्वचा को हलके गर्म पानी से धोकर साफ कर लें। इसके लिए शावर लेना बेहतर रहेगा। वैसे आप स्पंज की मदद से भी क्रीम साफ़ कर सकते है।

7. टॉवल से पोंछे :

गर्म पानी से शावर लेने के बाद एक बार त्वचा के उस हिस्से को टॉवल से साफ़ करें। लेकिन यह बहुत धीरे-धीरे करें क्योंकि क्रीम के कारण अभी भी स्किन सेंसिटिव है।

ध्यान रखने योग्य बातें :
  • क्रीम के दोबारा इस्तेमाल के बीच कम से कम 72 घंटों का अंतराल रखें। इससे त्वचा में जलन नहीं होगी।
  • क्रीम के इस्तेमाल के बाद उस हिस्से पर अगले 24 घंटों तक किसी भी क्रीम, परफ्यूम आदि का इस्तेमाल नहीं करें और ना ही धूप में सेंके। ऐसा करने से त्वचा में समस्या हो सकती है।

अन्य ध्यान रखने योग्य बातें :

  • क्रीम का इस्तेमाल कभी भी कटी हुई और जली हुई त्वचा पर नहीं करना चाहिए। इससे अधिक जलन हो सकती है।
  • क्रीम इस्तेमाल करने से पहले ही यह सुनिश्चित कर लें की आपके पास पर्याप्त क्रीम है या नहीं।
  • वैसे आजकल वीट स्प्रे में भी उपलब्ध है जो सामान्य ट्यूब और बोतल की तुलना में बहुत आसान है।
  • क्रीम को हाथ में अधिक मात्रा में न लें। इससे अधिक वेस्टेज होगी।
  • एक बार इस्तेमाल के बाद क्रीम को फेंके नहीं। यदि बालों की मोटाई पतली है तो आप इसका दोबारा इस्तेमाल कर सकती है।

प्रेगनेंसी में जामुन खाना चाहिए या नहीं

गर्भावस्था ने जामुन

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला की जीभ के स्वाद में परिवर्तन आना काफी आम बात होती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला का कभी कुछ अलग खाने का मन करता है। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को अपने खान पान में बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि गर्भवती महिला के खान पान का पूरा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है, इसीलिए हर एक चीज के सेवन से पहले महिला के मन में यह आना की प्रेगनेंसी के दौरान जो गर्भवती महिला खा रही है उसका सेवन लाभदायक है या नुकसानदायक बहुत ही आम बात होती है। ऐसे ही कई गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान जामुन का सेवन करना चाहिए या नहीं इस बारे में भी जानने की इच्छा रखती है, क्योंकि जामुन एक ऐसा फल है जो मार्किट में थोड़े समय के लिए हो आता है और स्वाद में खट्टा मीठा व् रसीला होने के कारण गर्भवती महिला की इसे खाने की इच्छा हो सकती है। तो इसका जवाब होता है हाँ, गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान जामुन का सेवन कर सकती है।

प्रेगनेंसी में जामुन खाने के फायदे

जामुन में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स, आयरन, कैल्शियम, जैसे पोषक तत्व प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा जामुन का सेवन करने से गर्भवती महिला को और भी बहुत से फायदे मिलते हैं, तो आइये उन फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

विटामिन सी

विटामिन सी जो की एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट है जामुन में भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। ऐसे में जामुन का सेवन करने से गर्भवती महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने यानी इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में मदद मिलती है, जिससे गर्भावस्था के दौरान संक्रमण के खतरे से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

पाचन

जामुन का सेवन करने से गर्भवती महिला को पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद मिलती है। साथ ही इससे पेट सम्बन्धी समस्या जैसे कब्ज़, गैस, अल्सर जैसी परेशानी से बचाव होता है। इसके अलावा गर्भवती महिला की पाचन क्रिया जितनी दुरुस्त होती है उतने ही अच्छे तरीके से गर्भवती महिला पोषक तत्वों का सेवन कर सकती है।

आयरन

आयरन की अधिकता होने के कारण गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को मेन्टेन रखने में मदद मिलती है। ऐसे में गर्भवती महिला को पर्याप्त आयरन के लिए जामुन को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। साथ ही आयरन का बॉडी में भरपूर होना गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने, गर्भ में शिशु के सम्पूर्ण विकास, डिलीवरी के दौरान आने वाली समस्या से बचाव, एनीमिया जैसी समस्या से गर्भवती महिला को सुरक्षित रखने में मदद करता है।

पोटैशियम

जामुन में मौजूद पोटैशियम गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान दिल से सम्बंधित समस्या से बचाव करने के साथ ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है। जिससे ब्लड प्रैशर में उतार चढ़ाव के कारण गर्भवती महिला को होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

कैल्शियम

कैल्शियम भी जामुन में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती देने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद करता है। जिससे गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली थकान व् कमजोरी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड फ्लो

जामुन का सेवन करने से गर्भवती महिला को बॉडी में ब्लड फ्लो के कारण होने वाली परेशानी जैसे की सूजन आदि की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि जामुन रक्त वाहिकाओं में से रक्त के प्रवाह को बेहतर तरीके से होने में मदद करता है। जो की प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए भी बहुत जरुरी होता है।

डाइबिटीज़

लो ग्लाइकेमिक इंडेक्स होने के कारण जामुन का सेवन करने से ब्लड में शुगर के लेवल को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान गेस्टेशनल डाइबिटीज़ के खतरे को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही यदि कोई गर्भवती महिला शुगर की समस्या से परेशान है तो उसे भी जामुन का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि इससे शुगर को कण्ट्रोल में रहने और शुगर के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

मुँह के लिए

एंटी बैक्टेरियल गुणों से भरपूर होने के कारण जामुन का सेवन करने से मुँह व् दांतों से सम्बंधित समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है, साथ ही मुँह के साफ़ रहने के कारण इन्फेक्शन के खतरे को कम करने में भी मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान जामुन का सेवन करने से मिलते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला की यदि जामुन का सेवन करने की इच्छा हो तो गर्भवती महिला कर सकती है, ताकि इन सभी फायदों से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को ही स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।