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क्या गर्मियों में बादाम खा सकती है प्रेग्नेंट महिला?

प्रेगनेंसी के दौरान बादाम का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि बादाम में प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन्स व् अन्य मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। लेकिन बादाम का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है की जरुरत से ज्यादा बादाम का सेवन न किया जाये। क्योंकि बादाम की तासीर गर्म होती है ऐसे में जरुरत से ज्यादा प्रेगनेंसी में बादाम का सेवन करने से महिला को दिक्कत हो सकती है। इसके साथ यदि आप प्रेग्नेंट हैं और गर्मियों का मौसम चल रहा तो बादाम का सेवन करना प्रेग्नेंट महिला के लिए फायदेमंद होगा या नुकसानदायक इसके बारे में जानना भी बहुत जरुरी होता है।

क्या गर्भवती महिला गर्मियों में बादाम का सेवन कर सकती है?

जी हाँ, यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आप गर्मी के मौसम में भी बादाम का सेवन कर सकती हैं। लेकिन बादाम के खाने के तरीके का ध्यान रखना जरुरी होता है। जैसे की आपको बादाम का सेवन करने से पहले रात को बादाम को भिगोकर रख देना चाहिए। उसके बाद सुबह उठकर आप दो चार बादाम खा सकती है। या फिर दो तीन बादाम को दूध में पीसकर उस दूध को पी सकती है।

इसके आलावा, खीर, हलवा आदि बनाकर उसमे भी बादाम डालकर आप उसका सेवन कर सकती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखे की एक दिन में तीन या चार बादाम से ज्यादा खाने से बचे। ताकि प्रेग्नेंट महिला को बादाम खाने से किसी भी तरह का नुकसान न हो। और बादाम खाने के बेहतरीन फायदे भी प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे को मिल सके।

प्रेगनेंसी में बादाम खाने के फायदे

  • यदि प्रेग्नेंट महिला बादाम का सेवन करती है तो इससे महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।
  • बादाम का सेवन करने से बच्चे के विकास के लिए जरुरी फोलिक एसिड मिलता है जो बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास को बढ़ाने में मदद करता है।
  • डाइट्री फाइबर से भरपूर होने के कारण बादाम का सेवन करने से गर्भवती महिला की पाचन क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है जिससे कब्ज़, भूख में कमी जैसी परेशानियों से प्रेग्नेंट महिला को निजात मिलता है।
  • बादाम का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला का वजन जरुरत से ज्यादा नहीं बढ़ता है।

गर्मियों में बादाम खाने से हो सकते हैं प्रेग्नेंट महिला को यह नुकसान

  • बादाम की तासीर गर्म होने के कारण जरुरत से ज्यादा बादाम खाने पर प्रेग्नेंट महिला के गर्भाशय में संकुचन हो सकता है जिसके कारण गर्भपात या ब्लीडिंग होने का खतरा हो सकता है।
  • बादाम का अधिक सेवन गर्मियों में पाचन क्षमता पर बुरा असर डाल सकता है जिसके कारण दस्त, उल्टी जैसी दिक्कात अधिक हो सकती है।

तो यह हैं गर्मियों में गर्भवती महिला के बादाम का सेवन करने से जुड़े कुछ खास टिप्स, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि गर्मी के मौसम में बादाम का सेवन करने से आपको किसी भी तरह का नुकसान न हो।

महिलाओ में होने वाले तनाव के कारण?

तनाव की समस्या किसी को भी हो सकती है, किसी को अपने बॉस को खुश करने के कारण, किसी को अपने रिजल्ट की वजह से, तो किसी को शारीरिक कारणों के कारण, तनाव का मुख्य कारण होता है जब कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाता है, या उसके मन की कोई इच्छा पूरी नहीं होती है, तो व्यक्ति इस बात को अपने दिल के साथ दिमाग पर भी हावी कर लेता है, जिसके कारण आपको ये समस्या हो सकती है, और महिलाओ में तनाव के कारण पुरुषो के मुकाबले अलग होते है।

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महिलाओ में तनाव का एक मुख्य कारण होता है, शरीर में हॉर्मोन का अधिक उत्पादन, और महिलाओ पर समाजिक रूप से भी बहुत जिम्मेवारियां होती है, जिसके कारण आपको ये समस्या हो सकती है, साथ ही पुरुषो के मुकाबले महिलाओ में जीन्स, और उनकी मानसिकता भी पुरुषो के मुकाबले अधिक होती है, और ऐसा भी जरुरी नहीं है की सभी महिलाओ में तनाव के एक ही कारण हो, ये सभी महिलाओ की परेशानी पर निर्भर करता है, और तनाव होने के कारण महिलाओ के स्वभाव में भी बहुत परिवर्तन आता है, और यदि इस तनाव का समय पर उपचार न किया जाएँ तो इसके कारण महिलाओ को काफी परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है, तो आइये आज हम आपको बताते है की महिलाओ में तनाव के क्या क्या कारण हो सकते है, और इससे निजात पाने के लिए जितना जल्दी हो सकें आपको उपचार भी करना चाहिए।

प्रेगनेंसी और बांझपन की समस्या के कारण:-

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प्रेगनेंसी के समय महिला के शरीर में लगातार हॉर्मोन में परिवर्तन आता है, जिसके कारण महिला काफी परेशान हो जाती है, साथ ही शुरूआती दिनों में गर्भपात के खतरे के कारण भी महिलाएं तनाव में आ जाती है, और खासकर वो महिलायें जो की पहली बार माँ बनने जा रही होती है, परन्तु तनाव से उनकी परेशानी कम नहीं होती है, बल्कि बढ़ सकती है। इसके अलावा जो महिला माँ नहीं बन सकती है, या उनके माँ बनने में परेशानिया आ रही है, तो ये बातें महिलाओ के दिमाग पर हावी होने लगती है जिसके कारण भी महिलाएं तनाव में आ जाती है।

मेनोपॉज़ होने पर:-

हर महिला इस दौर से गुजरती है, परन्तु ये वो समय होता है जब महिला का मासिक चक्र रुक जाता है, साथ ही महिला के रिप्रोडक्शन ऑर्गन में भी बदलाव आता है, और कहा जाएँ तो महिला के शरीर अंदर से बहुत बहुत बदलाव आता है, जिसके कारण महिला अपने शरीर में होने वाले बदलाव के कारण बहुत ज्यादा परेशान हो जाती है और उसे तनाव होने लगता है।

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जॉब और घर दोनों सँभालने के कारण:-

कई महिलाएं ऐसी भी होती है, जिनके ऊपर घर और जॉब दोनों की जिम्मेवारी होती है, ऐसे में महिला को न तो अपने लिए समय मिलता है, और हर समय महिला परेशान ही रहती है, जिसके कारण दोनों में यदि तालमेल नहीं बैठता है तो महिला इसके कारण दिमागी रूप से परेशान रहने लगती है, जिसके कारण तनाव की समस्या उत्त्पन हो जाती है।

स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने के कारण:-

कई महिलाएं जो की शारीरिक परेशानियों से जूझ रही होती है, उन्हें भी तनाव हो सकता है, जैसे की कोई बिमारी या फिर गलत चीजों की लत को छोड़ने पर होने वाली समस्या, के कारण भी महिलाएं तनाव में आ जाती है, यदि महिला को कोई बिमारी है तो उसे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, और गलत चीजों की लत हैं तो उन्हें कभी भी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए, और जितना जल्दी हो सकें आपको उन्हें छोड़ देना चाहिए।

बॉडी इमेज खराब होने के कारण:-

आप तो जानते ही है, की महिलाओ को खूबसूरत दिखने के कितना शौक होता है, ऐसे में यदि महिला का वजन बढ़ जाएँ, या उसकी ख़ूबसूरती खराब होने लग जाएँ तो कई महिलाएं इसके लिए भी बहुत परेशान हो जाती है, इसके लिए महिलाओ को तनाव में आने से अच्छा है की वो अपने वजन को घटायें, इसके कारण उनकी बॉडी इमेज में धीरे धीरे सुधार आएगा, और उनकी पर्सनैलिटी अपने आप अच्छी हो जाएगी।

महिलाओ के लिए तनाव से बचने के उपाय:-

  • अपने काम करने के तरीको में बदलाव लाना चाहिए, और रोजाना अपने काम में कुछ न कुछ अलग करने की कोशिश करनी चाहिए।
  • काम करते समय या जब भी आपको अच्छा महसूस न हो रहा हो तो आप संगीत का सहारा भी ले सकती है।
  • व्यायाम व् योगासन का सहारा भी आप इस समस्या से निजात पाने के लिए ले सकती है, क्योंकि इसके कारण आपको बॉडी में खून का संचार अच्छे से होता है, जिसके कारण आपको तनाव से राहत मिलने में मदद मिलती है।
  • ब्लोग्स जर्नल आदि लिखें, नहीं तो अपने लिए कुछ समय निकाल कर अपनी पसंद का कोई काम करें।
  • अपने सहेलियों से मिलें, और यदि वो आपकी ख़ास है तो आप उनसे भी अपनी परेशानी को शेयर करके इस समस्या का समाधान कर सकती है।
  • संतुलित व् पौष्टिक आहार का सेवन करें, और कुकिंग का शौक है तो नई नई रेसिपी शेयर करें।
  • यदि आपको कोई शारीरिक परेशानी है तो समय पर उसका इलाज करवाएं, ताकि आपको इस परेशानी से राहत मिल सकें।
  • ज्यादा मात्रा में कैफीन का सेवन न करें, इसके कारण आपकी परेशानी हल नहीं होती है।
  • नींद को पर्याप्त मात्रा में लें, यदि रात को नींद पूरी नहीं होती है तो अपने घर के सभी काम खत्म करने के बाद अपने शरीर को आराम दें।

तो ये कुछ कारण है जिनकी वजह से महिलाओ को तनाव होता है, साथ ही महिलाओ को इससे बचने के लिए जरुरी होता है की जो भी कोई बात हो यदि वि उसे लेकर परेशान हो रही हो तो उसे उस बात को अपने साथी के साथ शेयर करना चाहिए, या खुद उसका हल निकालना चाहिए ताकि उसके कारण महिला को कोई परेशानी न हो, और साथ ही महिला तनाव से बचने के लिए ऊपर दिए गए उपाय का भी आप इस्तेमाल कर सकते है, क्योंकि इनके कारण आपको तनाव से निजात पाने और खुश रहने में मदद मिलती है।

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प्रेगनेंसी में पेट का जरुरत से ज्यादा बड़ा दिखना या छोटा दिखना क्या खतरे की निशानी है?

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गर्भावस्था में बड़ा पेट दिखने के कारण, प्रेगनेंसी में छोटा पेट दिखने के कारण, प्रेगनेंसी में जरुरत से ज्यादा बड़ा या छोटा पेट दिखना क्या खतरे की निशानी है?, गर्भावस्था में ज्यादा बड़ा पेट क्यों निकलता है?

गर्भावस्था सभी महिलाओं के लिए अनमोल समय होता है। नए शिशु के आने का इन्तजार हर परेशानी, दर्द और तकलीफ से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। प्रेगनेंसी के दौरान हमारे शरीर में बहुत सारे अलग अलग बदलाव होते है। जैसे की हमारा वेट बढ़ना, पेट बाहर निकलना और कई सारे हार्मोन्स बदलाव। इन सभी बदलावों के बावजूद हम अपने शिशु के आने का बेसब्री से इंतज़ार करते है।

प्रेगनेंसी के पुरे समय में हम बहुत सारी कारण,चिंताओं से भी घिरे रहते है। जैसे की क्या खाना सही है, क्या खाना नुकसानदायक है, पेट का ज्यादा बड़ा दिखना सही है या नहीं, पेट का छोटा दिखना भी परेशानी सा लगता है।

क्या गर्भावस्था में पेट का ज्यादा बड़ा या छोटा दिखना खतरे की निशानी है?

सबसे पहले हमे यह जानना होगा की पेट के बड़े या छोटे दिखने के क्या कारण है।

प्रेगनेंसी में जरुरत से ज्यादा बड़ा पेट दिखने के कारण :

गर्भावस्था में जरुरत से ज्यादा बड़े पेट दिखने बहुत से कारण होते है। आइये जानते है किन कारणों से ज्यादा पेट बाहर दिखता है।

एमनियोटिक फ्लूइड :

  • एमनियोटिक फ्लूइड गर्भ में बच्चे के चारों और होता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान पेट का साइज की बार इस फ्लूइड पर भी निर्भर करता है।
  • जब महिलाओं के शरीर में एमनियोटिक फ्लूइड बढ़ने लगता है तो पेट का आकार भी बढ़ने लगता है।

BMI :

  • Body Mass Index को BMI कहा जाता है।
  • इसका मतलब हाइट के अकॉर्डिंग आपका वजन कितना है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला का BMI ज्यादा है तो आपका पेट भी ज्यादा बाहर दिखेगा।

शारीरिक संरचना :

  • हर महिला की शारीरिक संरचना अलग होती है।
  • कहने का मतलब कोई लम्बा या कोई छोटी हाइट का होता है।
  • अक्सर यह देखने में आया है की जिन लोगो की हाइट कम होती है उनका पेट ज्यादा बाहर निकलता है।
  • क्योंकि पेट में शिशु को फैलने की ज्यादा जगह नहीं मिल पाती ऐसे में पेट बाहर की तरफ ज्यादा निकलता है।
  • महिला की हिप बोन कम चौड़ी होने पर भी ज्यादा पेट बाहर निकलता है।

बच्चे का वेट :

  • शिशु का ज्यादा वेट होने पर भी गर्भावस्था में जरुरत से ज्यादा पेट बाहर निकलता है।

दूसरी बार गर्भावस्था :

  • जब कोई महिला दूसरी बार माँ बनती है तब भी पेट ज्यादा बाहर आता है।
  • दूसरी बार की प्रेगनेंसी में पहले से ही मांसपेशियां खिचांव होता है दूसरी बार वह पहले से बड़े आकार में खींचती है।
  • जिसके कारण पेट पहले की तुलना में ज्यादा बड़ा होता है।

शिशु की पोजीशन

  • पेट का आकार शिशु की पोजीशन पर भी निर्भर करता है।
  • कई बार आखिरी के तीन महीनो में शिशु गर्भ में अपनी पोजीशन बदल लेता है।
  • जिसके कारण पेट का आकर बढ़ने लगता है।

डायबिटिक :

  • कुछ महिलाओ को गर्भावस्था में डायबिटीज हो जाती है।
  • डायबिटीज के कारण भी गर्भवती महिला का पेट जरुरत से ज्यादा बाहर निकलता है।

प्रेगनेंसी में कम छोटा पेट दिखने के कारण :

कुछ महिलाओं का पेट बिलकुल ना के बराबर दिखता है। यहां तक के कई बार तो पता भी नहीं चलता के महिला गर्भवती है। आइये जानते है गर्भावस्था में कम पेट निकलने के कारण।

एमनियोटिक फ्लूइड :

  • जैसा की हमने पहले भी बताया है के प्रेगनेंसी में पेट का बाहर निकलना एमनियोटिक फ्लूइड पर निर्भर करता है।
  • यदि गर्भवती महिला के अंदर एमनियोटिक फ्लूइड की मात्रा कम है तो पेट कम ही बाहर दिखेगा।
  • एमनियोटिक फ्लूइड की 1 लीटर से ज्यादा मात्रा होने पर ही पेट बाहर निकलता है।

शारीरिक संरचना :

  • जिन महिलाओं का कद लम्बा होता है प्रेगनेंसी में उनका पेट कम निकलता है।
  • यदि गर्भवती महिला की हिप बोन चौड़ी है तब भी शिशु को फैलाव की जगह मिल जाती है।
  • जिसके कारण कम पेट बाहर निकलता है।

 शिशु का वजन :

  • गर्भ में पल रहे शिशु के कम वजन के कारण भी पेट बाहर नहीं निकलता है।

BMI :

  • BMI कम होने के कारण भी गर्भवती महिला का पेट कम बाहर निकलता है।
  • मतलब जिन महिलाओं का पहले से कम वेट है उनका पेट भी कम ही बाहर निकलता है।

हर  गर्भवती महिला के जरुरत से ज्यादा पेट बाहर और जरुरत से कम निकलने के अपने अलग अलग कारण हो सकते है। पर इनमे से कोई भी ऐसा कारण नहीं है जिसके कारण आपको या आपके शिशु को कोई खतरा हो। हर महिला के जेनेटिक हिस्टरी पर भी निर्भर करता है के उनका पेट बाहर ज्यादा निकलता है या नहीं।

इन सभी कारणों को जानकर आप समझ ही गए होंगे की गर्भावस्था में जरुरत से ज्यादा पेट बाहर निकलना  या नहीं निकलना खतरे की निशानी नहीं है।

रंग गोरा करने का उबटन ऐसे बनाएं और लगाएं

रंग गोरा करने का उबटन, उबटन बनाने की विधि, घर में ऐसे बनाएं उबटन, उबटन का स्क्रब बनाने का तरीका, चेहरे पर उबटन कैसे लगाएं, उबटन लगाने के फायदे, उबटन के लिए क्या क्या सामग्री चाहिए

चेहरे की ख़ूबसूरती को निखारने के लिए पुराने समय से ही उबटन का प्रयोग किया जाता है। शादी के समय भी हल्दी का उबटन लगाया जाता है ताकि दुल्हन और दूल्हे दोनों के चेहरे की चमक को और भी निखार सकें। उबटन का इस्तेमाल करने से न केवल चेहरे पर निखार आता है बल्कि इससे चेहरे पर होने वाली परेशानियां जैसे की दाग धब्बे, मुहांसे, झाइयां आदि को दूर करने में मदद मिलती है। आप यदि उबटन का इस्तेमाल हफ्ते में एक बार चेहरे के लिए करते हैं तो इससे आपके चेहरे की प्राकृतिक ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद मिलती है। उबटन को आप आसानी से ही घर में बना सकते हैं। तो आइये आज हम आपको बताते हैं की आप घर में किस तरह उबटन बना सकते हैं, जिससे आपके चेहरे को गोरा करने में मदद मिलती है।

रंग गोरा करने के लिए ऐसे बनाएं उबटन

रंग गोरा करने के लिए आप अपने घर पर आसानी से उबटन बना सकते हैं। घर में बना उबटन आपके चेहरे को गोरा करने में बहुत असरदार होता है, और गोरा करने के साथ यह आपकी स्किन से जुडी परेशानियों को भी दूर करने में आपकी मदद करता है। यदि आप हफ्ते में एक या दो बार भी चेहरे के लिए उबटन का इस्तेमाल करते है। तो इसका फ़र्क़ आपको अपने चेहरे पर जरूर दिखाई देता है। तो आइये अब जानते हैं की घर पर आप रंग गोरा करने का उबटन, स्क्रब, और मॉइस्चराइजर किस तरह बना सकते हैं।

उबटन बनाने की विधि

उबटन को बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़ी कटोरी लें, उसके बाद उसमें एक चम्मच चन्दन पाउडर, दो चम्मच बेसन, और आधा चम्मच हल्दी का मिक्स करें। उसके बाद इसका पेस्ट तैयार करने के लिए इसमें कच्चा दूध मिलाएं, दूध की मात्रा आप इतनी ड़ालें की न तो पेस्ट अधिक पतला हो और न ही अधिक गाढ़ा हो। पेस्ट ऐसा होना चाहिए जो मास्क की तरह आपके चेहरे पर लग जाए। उसके बाद इसे अपने चेहरे और गर्दन पर अच्छे से लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें, और आराम से लेट जाएँ, यदि आप चाहे तो अपनी आँखों पर खीरे की स्लाइसेस को काटकर भी रख सकती है। सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें। इसके बाद चेहरे के लिए न तो साबुन और न ही फेस वॉश का इस्तेमाल करें। और आप इसका इस्तेमाल हफ्ते में दो से तीन बार कर सकते हैं इससे चेहरे को गोरा बनाने के साथ स्किन से जुडी परेशानियों का भी हल मिलता है।

घर में बनाएं उबटन का फेस स्क्रब

चेहरे की ख़ूबसूरती को बनाएं रखने के लिए हफ्ते में कम से कम दो बार स्क्रब करना चाहिए। ऐसा करने से चेहरे की मृत कोशिकाओं को हटाकर चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद मिलती है। घर में स्क्रब बनाने के लिए एक बड़ी कटोरी में 1 चम्मच ओटमील, 3 चम्मच बेसन, 2 चम्मच चंदन पाउडर, आधा चम्मच हल्‍दी, 2 चम्मच पिसा खीरा, या खीरे का रस, अच्छे से मिक्स करके एक पेस्ट तैयार करें। अब इसे अच्छे से चेहरे पर लगाकर गोलाई में मसाज करें, खासकर जहां ब्लैकहेड्स सबसे ज्यादा होते हैं, ऐसा पांच से दस मिनट तक करें और उसके बाद साफ़ पानी से मुँह को धो लें।

उबटन लगाने की विधि

  • सबसे पहले चेहरे को साफ पानी से धो लें।
  • साफ़ पानी से धोने के बाद चेहरे को अच्छे से सुखाएं।
  • सुखाने के बाद चेहरे पर उबटन का प्रयोग करें, और जब तक उबटन सूखता नहीं है आराम से लेटे रहना चाहिए, और बोलना या हंसना नहीं चाहिए, इससे चेहरे पर झुर्रियां पड़ने की सम्भावना होती है।
  • सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धोकर अच्छे से मुलायम कपडे से चेहरे को साफ़ करें, आपको उबटन का असर जरूर दिखाई देगा।
  • उबटन का इस्तेमाल करने के बाद चेहरे के लिए किसी भी फेस वॉश या साबुन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • उबटन का प्रयोग हफ्ते में कम से कम दो बार जरूर करना चाहिए।
  • जब भी आपको चेहरे पर उबटन लगाना हो तो इसे ताजा ही बनाएं, और इसे बनाकर फ्रिज आदि में न रखें। क्योंकि ताजा उबटन ही ज्यादा असरदार होता है।

तो यह है घर में उबटन बनाने की विधि, और इसे लगाने की विधि, उबटन लगाने से आपके चेहरे को प्राकृतिक रूप से सूंदर और गोरा बनाने में मदद मिलती है। इसके अलावा आप घर में और बहुत सी तरह के उबटन भी बना सकते हैं जैसे की मुल्तानी मिट्टी का उबटन, घर में बनाएं किसी भी उबटन से आपके चेहरे के ग्लो को बढ़ाने में मदद मिलती है। और चेहरे पर से ब्लैकहेड्स आदि निकालने के लिए आप स्क्रब का इस्तेमाल भी कर सकते हैं और उसे घर पर बनाने की विधि भी ऊपर बताई गई है।

डिलीवरी के बाद बॉडी को ऐसे शेप में लाएं

डिलीवरी के बाद बॉडी को ऐसे शेप में लाएं, प्रसव के बाद स्लिम ट्रिम होने के टिप्स, शिशु के जन्म के बाद ऐसे रहे फिट, डिलीवरी के बाद वजन घटाने के टिप्स, Fitness tips after delivery

डिलीवरी के बाद ज्यादातर महिलाओं को ऐसा लगता है की अब उनका बॉडी शेप खराब हो गया है, और अब वो वापिस उस शेप में नहीं आ सकती है। कई महिलाओं को तो तो लगता है उनकी ख़ूबसूरती कम हो गई है जिसके कारण वो तनाव में भी आ जाती है। लेकिन यह सच नहीं है जबकि आप अपने मातृत्व के सुखद अहसास को एन्जॉय करने के साथ अपनी ख़ूबसूरती को बरकरार रख सकती है, और अपनी बॉडी को भी परफेक्ट शेप में ला सकती है। लेकिन डिलीवरी के तुरंत बाद आपको ज्यादा व्यायाम या शरीर पर जोर आदि नहीं देना चाहिए, क्योंकि उस दौरान शरीर काफी कमजोर होता है। साथ ही शिशु भी पूरी तरह से महिला पर ही निर्भर करता है। तो आइये अब जानते हैं की डिलीवरी के बाद फिट रहने के लिए आपको कौन से टिप्स इस्तेमाल करने चाहिए।

स्तनपान करवाएं

प्रसव के तुरंत बाद आप किसी तरह का व्यायाम व् डाइट नहीं कर सकती है, लेकिन फिर भी आपकी कैलोरी बर्न होती है। और कैलोरी के बर्न होने का कारण शिशु का स्तनपान करना होता है। जितना ज्यादा आप शिशु को स्तनपान करवाती है उतना ही आपको जल्दी फिट होने में मदद मिलती है। कुछ महिलाएं ऐसा भी सोचती है की शिशु को स्तनपान करवाने से उनके ब्रेस्ट का शेप खराब होता है। यह सच है शिशु के लिए स्तन में दूध आने से स्तन ढीले हो जाते हैं लेकिन जैसे ही शिशु स्तनपान करना बंद करता है वैसे ही ब्रेस्ट अपने शेप में आने लगता है। तो यदि आप भी डिलीवरी के बाद फिट रहने चाहते हैं तो शिशु को स्तनपान जरूर करवाएं।

पौष्टिक आहार लें

डिलीवरी के बाद आपको डाइट नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपने आहार में भरपूर पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए, और समय पर भोजन करना चाहिए। ऐसा करने से पंचन तंत्र दुरुस्त रहता है और मेटाबोलिज्म भी बेहतर होता है, जिससे आपको फिट रहने में मदद मिलती है। अपने आहार में सूखे मेवे, साबुत अनाज, दाल, फलों, हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें। इससे आपको फिट रहने के साथ शिशु को भी बेहतर पोषण देने में मदद मिलती है।

पानी

दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन करने के साथ जूस आदि भी भरपूर लें। दिन में दो से तीन बार गुनगुने पानी सेवन करें, इससे न केवल आपको आराम महसूस होगा बल्कि बॉडी में जमा होने वाले वसा को कम करने में मदद मिलेगी। जिससे आपको वजन बढ़ने जैसी समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

वॉक करें

डिलीवरी होने के एक महीने बाद हल्का वॉक करना शुरू करें खासकर खाना खाने के बाद, ऐसा करने से खाने को जल्दी हज़म होने में मदद मिलेगी। साथ ही बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होने लगेगा जिससे आपको फिट होने में मदद मिलेगी।

तनाव न लें

प्रेगनेंसी के बाद कुछ महिलाएं तनाव में आ जाती है जो उनके शरीर पर दुष्प्रभाव डालता है। तनाव के कारण भी महिला का वजन बढ़ सकता है, ऐसे में आपको तनाव मुक्त रहना चाहिए और अपने शिशु के साथ इस अहसास को एन्जॉय करना चाहिए।

बेल्ट का इस्तेमाल करें

प्रेगनेंसी के बाद बेल्ट का इस्तेमाल भी महिला को पेट के लिए जरूर करना चाहिए, इससे न केवल महिला को पीठ दर्द से आराम मिलता है या उठने बैठने में आसानी होती है। बल्कि त्वचा के ढीलेपन को दूर भी करने में मदद मिलती है जिससे बॉडी को शेप में लाने में फायदा होता है।

नींद ले भरपूर

प्रसव के बाद महिला की नींद में कमी आना आम बात होती है क्योंकि शिशु के उठने या सोने का कोई समय नहीं होता है। ऐसे में महिला को चाहिए की जब भी शिशु सोये वो उसके साथ सो जाए, लेकिन अपनी नींद को पूरा करना चाहिए। ऐसा करने से आपको तनाव से राहत मिलती है, बॉडी में एनर्जी रहती है, मेटाबोलिज्म बेहतर होता है जिससे आपको डिलीवरी के बाद फिट होने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ तरीके जिनका इस्तेमाल करने से आप माँ बनने के बाद भी अपनी बॉडी शेप को मेन्टेन कर सकती है। लेकिन शुरुआत में ज्यादा अपने शरीर पर जोर न डालें, क्योंकि इसके कारण आपको परेशानी का अनुभव हो सकता है। और सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं को एक बार पहले डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

ये लक्षण बताएंगे की आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं

ये लक्षण बताएंगे की आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं, प्रेगनेंसी के लक्षण, गर्भावस्था के लक्षण, ये हैं प्रेग्नेंट होने के लक्षण, अगर आप गर्भवती हैं तो बॉडी में दिखाई देते हैं यह लक्षण, Pregnancy Symptoms

प्रेगनेंसी होने पर बॉडी में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसके कारण बॉडी शारीरिक रूप से बहुत जल्दी प्रभावित होती है, साथ ही इसका असर आपके स्वाद, व्यवहार, मूड आदि पर भी दिखाई देता है। जैसे की हो सकता है की आप खाने में जिस चीज को पसंद नहीं करती हैं, आपको वही चीज खाने की इच्छा होती है, किसी चीज के प्रति आकर्षण बढ़ जाता है, आदि। गर्भवस्था के लक्षण हर महिला में एक ही जैसे दिखाई दे ऐसा भी कोई जरुरी नहीं होता है। क्योंकि यह हर महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है। साथ ही यदि आप गर्भवती है तो इसका कोई एक लक्षण शरीर में नहीं दिखाई देता है बल्कि ऐसे बहुत से लक्षण हैं जो बताते हैं आप गर्भवती हैं या नहीं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की यदि आप गर्भवती हैं तो आपकी बॉडी कौन कौन से संकेत देती है।

मासिक धर्म हो जाता है बंद

गर्भावस्था का मुख्य लक्षण होता है, की महिला के पीरियड्स का मिस होना। ऐसे में यदि महिला का पीरियड्स मिस हुए एक हफ्ता हो जाता है तो महिला को प्रेगनेंसी किट की मदद से चेक करना चाहिए की कहीं महिला गर्भवती तो नहीं है। और यदि टेस्ट करने पर रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो इस टेस्ट को दो दिन रूककर करना चाहिए, यदि फिर भी रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आती है तो आपको डॉक्टर से आपको बात करनी चाहिए, और पीरियड्स न आने का कारण पता करना चाहिए। और यदि आपकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो भी आपको तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

मॉर्निंग सिकनेस

ज्यादातर महिलाओं को प्रेगनेंसी होने पर उनकी बॉडी में मॉर्निंग सिकनेस का लक्षण दिखाई दे सकता है। और इसके कारण सुबह उठने में दिक्कत, थकान का अनुभव, मुँह के स्वाद का अजीब सा महसूस होना आदि हो सकता है।

पाचन सम्बन्धी परेशानी

कब्ज़, भूख न लगना, गैस, एसिडिटी आदि की समस्या होना भी प्रेगनेंसी की शुरुआत होने का एक आम लक्षण होता है। और इन पाचन सम्बन्धी समस्या का कारण भी बॉडी में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव होते हैं।

ब्रेस्ट में परिवर्तन

ब्रेस्ट में कड़ापन महसूस होना, निप्पल के रंग में बदलाव आना, सूजन व् दर्द महसूस होना भी प्रेगनेंसी के शुरुआत में होना आम बात होती है। और यदि आप गर्भवती है तो दुग्ध ग्रंथियों के उत्तको का फैलाव होने के कारण भी आपको ब्रेस्ट में भारीपन आदि महसूस हो सकता है।

उल्टी व् जी मिचलाना

ज्यादातर महिलाओं को प्रेगनेंसी की शुरुआत में उल्टी व् जी मिचलाने जैसी समस्या हो सकती है। और कुछ महिलाओं को यह समस्या प्रेगनेंसी के तीन महीने तक रहती है तो कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के पुरे नौ महीने इस समस्या से परेशान रहती है।

सिर में दर्द व् चक्कर

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव, बॉडी में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन का स्तर बढ़ने के कारण महिला को सिर में दर्द, चक्कर जैसी समस्या भी हो सकती है, और यदि आपको भी ऐसा महसूस हो रहा है तो हो सकता है की आप प्रेग्नेंट हो। सिर में दर्द और चक्कर आने का एक कारण बॉडी में ब्लड फ्लो का तेजी से होना भी हो सकता है।

पसंद में बदलाव

मूड स्विंग्स होना, खाने की पसंद नापसंद में बदलाव आना, किसी चीज की महक के प्रति आकर्षण बढ़ना, जो चीज आप पसंद नहीं करते थे अचानक से उस चीज के प्रति आकर्षण होना, आदि भी प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों के लक्षण होते हैं।

बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होना

बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण किडनी अधिक सक्रिय हो जाती है, जिसके कारण महिला की बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है। ऐसे में यदि आपको भी ऐसी कोई समस्या हो तो पीरियड्स मिस होने के बाद आपको जरूर प्रेगनेंसी टेस्ट करके देखना चाहिए।

थकान व् कमजोरी

बहुत जल्दी थकान होना, कमजोरी का अनुभव होना, या बिना किसी काम को किये भी थका हुआ सा महसूस करना भी प्रेगनेंसी का एक आम लक्षण होता है। ऐसे में यदि आपको भी ऐसा महसूस हो तो हो सकता है की आपक गर्भ ठहर गया है।

पेट में हल्का दर्द

गर्भाशय में भ्रूण के बनने के कारण पेट के आस पास की मांसपेशियों पर उसका असर पड़ सकता है, जिसके कारण पीठ में हल्का दर्द, पेट में हल्का दर्द, पेट के निचले हिस्से में दर्द का अनुभव होना आम बात होती है।

स्पॉटिंग होना

स्पॉटिंग का मतलब होता है की महिला को पीरियड्स न आये लेकिन फिर भी खून के धब्बे लगे तो यह भी महिला के प्रेग्नैंक्ट होने का एक लक्षण होता है। क्योंकि इसका कारण जब भ्रूण गर्भाशय में प्रत्यारोपित होता है तो कई बार महिला को हल्की ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है।

बॉडी के तापमान में बदलाव

शरीर के तापमान का बढ़ना, बुखार सा महसूस होना, घबराहट महसूस होना, नींद न आना आदि भी प्रेगनेंसी का ही एक लक्षण हो सकता है। लेकिन यदि तापमान ज्यादा हो तो एक बार डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो आपकी बॉडी प्रेगनेंसी होने पर देती है, ऐसे में यदि आपके शरीर में भी इनमे से कोई लक्षण दिखाई दे तो हो सकता है की आपका गर्भ ठहर गया है। इसके अलावा आपको पीरियड्स मिस होने के बाद कन्फर्म करने के लिए की आप गर्भवती हैं या नहीं इसके लिए एक बार प्रेगनेंसी किट से टेस्ट जरूर करना चाहिए। ताकि आपको सही परिणाम मिल सके, यदि आपका परिणाम पॉजिटिव अत है तो आपको डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए। और यदि नेगेटिव आता है तो भी डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि आपको पीरियड्स मिस होने के कारण का पता चल सके।

बवासीर में खून रोकने के उपाय

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बवासीर को पाइल्स और हेमोर्रोइड्स के नाम से भी जाना जाता है। यह एक बिमारी होती है जो की गुदा द्वार में होती है, जिसके होने के कारण मल पास करते समय दर्द के साथ खून आने की समस्या भी शुरू हो जाती है। पहले यह समस्या अधिक उम्र के लोगो को हुआ करती थी लेकिन आज कल बदलती जीवनशैली और गलत आदतों के कारण बच्चे और जवान सभी इससे परेशान हो जाते है। तो आइये अब जानते हैं की पाइल्स होने के क्या क्या कारण हो सकते हैं और खूनी बवासीर से बचने के लिए आप क्या कर सकते हैं।

बवासीर होने के कारण

  • यदि आपके घर में किसी को यह समस्या होती है तो आपको भी इससे परेशान होना पड़ सकता है।
  • खान पान में लापरवाही अधिक तेल मसाले वाला भोजन खाने के कारण भी आपको बवासीर जैसी बीमारी हो सकती है।
  • फिटनेस का ध्यान न रखना, मोटापा होना आदि भी इस बिमारी को बुलावा देता है।
  • जंक फ़ूड का सेवन अधिक करने पर भी बवासीर की समस्या हो सकती है।
  • जिन लोगो को कब्ज़ की समस्या अधिक रहती है उन्हें भी बवासीर होने की सम्भावना होती है।
  • जो लोग ज्यादा देर तक हमेशा एक ही स्थान पर बैठे रहते हैं उन्हें बवासीर की समस्या बहुत जल्दी होती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान गुदा द्वार के आस पास की नसों पर दबाव पड़ता हैं, जिसके कारण महिलाओं को यह समस्या हो सकती है।
  • धूम्रपान, शराब, तम्बाकू आदि का सेवन करने वाले लोगो को भी यह समस्या हो सकती है।
  • उम्र बढ़ने के साथ नसों में खिंचाव बढ़ने के कारण कई बाद आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • जो लोग अधिक देर तक मल को रोककर रखते हैं उन्हें भी यह परेशानी हो सकती है।

बवासीर के लक्षण क्या क्या होते हैं

  • मल पास करते समय गुदा द्वार में दर्द का होना और खून का आना
  • बार बार कब्ज़ की समस्या से परेशान रहना
  • भूख में कमी आना
  • शरीर में कमजोरी महसूस करना
  • खुजली की समस्या अधिक रहना खास कर गुदा द्वार में
  • एसिडिटी की समस्या अधिक रहना

खूनी बवासीर से बचने के उपाय

बवासीर में खून का आना बहुत परेशानी भरा हो सकता है। ऐसे में इस समस्या के ज्यादा होने पर आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, और साथ ही आप चाहे तो कुछ उपाय घर पर भी करके इस समस्या से निजात पा सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की बवासीर में आने वाले खून की समस्या से बचने के लिए आप क्या क्या कर सकते हैं।

अंजीर

अंजीर का इस्तेमाल करने से आपको बवासीर में आने वाले खून की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप दो सूखे अंजीर को रात भर के लिए पानी में भिगोकर रख दें, उसके बाद सुबह उठकर उन अंजीर का सेवन करें। साथ ही उसके बाद कम से कम एक घंटे तक कुछ भी न खाएं न पीएं ऐसा दो से तीन दिन तक करने पर ही इसका फायदा दिखाई देगा।

छाछ

खूनी बवासीर से बचने के लिए छाछ का सेवन भी बहुत फायदेमंद होता है, इसके लिए आप दोपहर के भोजन के साथ एक गिलास छाछ में थोड़ा सा सेंधा नमक और थोड़ी सी पीसी हुई अजवाइन मिलाएं। उसके बाद भोजन के साथ उसका सेवन करें ऐसा करने से आपको आराम मिलेगा, साथ ही इसका सेवन करने से जो बवासीर के मस्से खत्म हो जाते है वो दुबारा भी नहीं होते हैं।

नारियल की जटा

यह एक ऐसा उपाय है जो कितनी भी पुरानी पाइल्स की समस्या हो उसे एक से दो दिन में ही खत्म करने में मदद करता है। इस उपाय को करने के लिए आप नारियल की जटा को पूरी तरह से जला कर उसकी राख को इक्कट्ठा कर लीजिए, उसके बाद इसे एक शीशी में डालकर रखें। और एक दिन में तीन बार तीन ग्राम दही या छाछ में डालकर लें। आपको बहुत फायदा मिलेगा और किसी भी तरह का रक्तस्त्राव हो उसे ठीक करने के लिए यह उपाय बहुत उपयोगी है। साथ ही इस बात का ध्यान भी रखें की दही या छाछ ताज़ी होनी चाहिए खट्टी दही या छाछ का सेवन नहीं करना चाहिए।

कच्चा प्याज

कच्चा प्याज भी बवासीर की समस्या से बचने के लिए एक आसान उपाय होता है, यदि आप नियमित कच्चे प्याज के साथ छाछ का सेवन करते हैं तो आपको इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।

काले तिल

खूनी बवासीर से बचने के लिए आप यदि काले तिल का सेवन ताजे मक्खन के साथ दिन में दो बार करते हैं तो आपको खूनी बवासीर की समस्या से निजात पाने में बहुत तेजी से मदद मिलती है।

मूली का रस

मूली का सेवन और मूली का रस पीने से भी आपको बवासीर की समस्या से बचने में मदद मिलती है। आप सलाद में मूली का सेवन करने के साथ दिन में दो बार मूली का रस पीते हैं तो आपको बहुत जल्दी इसका असर देखने को मिलता है।

इसबगोल

इसबगोल की भूसी भी बवासीर से बचने का एक आसान और सरल उपाय होता है, इसके लिए आप पानी या दूध में दो चम्मच इसबगोल की भूसी मिलाकर दिन में दो बार इसका सेवन करें आपको इसका फायदा जरूर मिलेगा।

निम्बू

निम्बू भी खूनी बवासीर से बचने में आपकी मदद करता है, इसके लिए आप एक निम्बू को दो हिस्सों में काट लें, उसके बाद उस पर चार से पांच ग्राम कत्था छिड़क दें। अब रात भर के लिए इन निम्बू के टुकड़ो को छत पर रख दें, और सुबह उठकर इन दोनों निम्बू के टुकड़ों को अच्छे से चूस लें, ऐसा कम से कम पांच से छह दिन तक करें। इस उपाय को करने से आपको खूनी बवासीर की समस्या से राहत मिलती है।

बवासीर से बचने के कुछ टिप्स

  • ज्यादा देर तक एक ही स्थान पर न बैठें।
  • फलों का भरपूर मात्रा में सेवन करें खासकर जिनमे फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जैसर की पपीता, आम आदि।
  • नशे का सेवन न करें।
  • जिन चीजों को खाने से आपको कब्ज़ बनती है उनका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • जंक फ़ूड, ज्यादा तेल मसालें वाले खाने से परहेज करें, क्योंकि इनका अधिक सेवन भी बवासीर का कारण बनता है।
  • यदि आपको मल में से खून आता है तो इसका इलाज तुरंत करना चाहिए।
  • व्यायाम व् योगासन करना चाहिए।
  • ताजा फलों का रस पीना चाहिए
  • पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ उपाय जिसके इस्तेमाल से आप खूनी बवासीर की समस्या से राहत पा सकते हैं। इसके अलावा इस समस्या से बचने के लिए आपको अपनी जीवनशैली को सही रखना चाहिए, जैसे व्यायाम आदि करने शरीर की फिटनेस का ध्यान रखना चाहिए, अपने खान पान में ज्यादा तेज मसालों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जंक फ़ूड का अधिक सेवन करने की बजाय संतुलित व् पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए।

मसूड़ों की बीमारी और उनके घरेलू उपचार!

आजकल के समय में दांतों और मसूड़ों से संबंधित परेशानियों का होना आम होता जा रहा है। जिसका मुख्य कारण दांतों की ठीक प्रकार से साफ़-सफाई न करना होता है। मसूड़ों की बीमारियाँ बहुत दर्दनाक होती है। और उससे पीढित व्यक्ति काफी परेशान रहता है। क्योंकि वो न तो ठीक से खा पाता है और न ही ठीक से बोल पाता है। इसीलिए आज हम आपको मसूड़ों से जुडी बीमारियाँ और उसे घरेलू उपचारों के बारे में बताने जा रहे है।

मनुष्य का शरीर बेहद नाजुक होता है। उसमे हुई छोटी सी समस्या भी काफी तकलीफ देह होती है। फिर चाहे वो समस्या चोट लगने की हो या स्वास्थ्य की। लेकिन सभी समस्याओं में सबके अधिक दर्द दांतों और मुंह से जुडी समस्या देती है। क्योंकि इन समस्याओं में आप न तो कुछ खा पाते है और न ही ठीक से बोल पाते है। पहले के समय की तो कही नहीं जा सकती लेकिन आजकल के समय में दांतों और मुंह में होने वाली परेशानियाँ आम होती जा रही है। 5 में से हर 2 व्यक्ति इस तरह की समस्या से पीढित दिखाई देते है।

किसी को दांत में कीड़े लगने की समस्या है तो किसी को दांत में तेज दर्द की। लेकिन इसके अलावा भी एक बीमारी है जो हमारे मुंह से संबंधित होती है। और वो है मसूड़ों की बीमारियाँ। दांतों की समस्या से परेशान व्यक्ति को मसूड़ों से जुडी बीमारियाँ होना आम बात है। लेकिन आजकल के खाने और व्यस्त दिनचर्या के चलते आम लोगों में भी ये समस्या देखने को मिलती है।

मसूड़ों में बीमारी होना काफी दर्दनाक होता है क्योंकि इसमें होने वाली तकलीफ के लिए आप कुछ कर भी नहीं सकते। दरअसल ये एक तरह का इन्फेक्शन होता है जो दांतों के ऊपर से शुरू होकर नीचे हड्डियों तक फ़ैल जाता है और उसके कारण दांत टूटकर निकल जाते है। सामान्य तौर पर मसूड़ों की बिमारियों की दो स्टेज होती है। जिसमे अगर पहली स्टेज पर ही इसका पता चल जाए तो इसके कारण होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।मसूड़ों में तकलीफ है ये करें

लेकिन सभी को इस बीमारी और इलाज के बारे में पता नहीं होता। जिसके चलते वे अपनी इस बीमारी से जूजते रहते है। इसीलिए आज हम आपको मसूड़ों की बिमारियों और उसके घरेलू इलाज के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपनी इस समस्या से निजात पा सकेंगे। और इन उपायों के लिए आपको बहुत से पैसे खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं है। और न ही कहीं बाहर जाने की जरुरत है क्योंकि ये सभी उपाय आपके घर में ही मौजूद है। तो देर किस बात की, आइए जानते है मसूड़ों की बीमारी और उसके घरेलू इलाज!!

मसूड़ों की बीमारियाँ :- 

मसूड़ों की बिमारियों के कारण : 

मसूड़ों की बिमारियां होने के कई कारण हो सकते है। लेकिन दांतों पर प्लाक होना इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण होता है। ये बैक्टीरिया की पतली पार्ट होती है जो लगातार दांतों पर जमती रहती है और अगर इसे साफ़ न किया जाए तो बैक्टीरिया मसूड़ों में सुजन पैदा कर सकते है। बाद में मसूड़े दांतों से अलग होने लगते है। और प्लाक मसूड़ों के नीचे तक फ़ैल जाता है। इस स्थिति के बाद धीरे धीरे मसूड़ों में सुजन बढ़ने लगती है और मसूड़ों की हड्डियाँ गलने लगती है।रोजाना ब्रश करें

इसके अलावा मसूड़ों की बीमारी के दुसरे कारण भी हो सकते है। जैसे- मुंह, दांत और मसूड़ों की अच्छी तरह से सफाई न करने से, लगातार दवाइयों का सेवन करने से जिसके कारण शरीर की बिमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है, वायरल इन्फेक्शन, तनाव, डायबिटीज का बढ़ना, शराब व् तम्बाकू आदि का अधिक सेवन करना और गर्भावस्था के दौरान हॉर्मोन की गड़बड़ी के कारण।

तो अगर आप इनमे से एक भी आदत का शिकार है तो अपनी उस आदत को तुरंत बदल दीजिए। क्योंकि आगे चलकर यही आदत आपके मसूड़ों की बिमारियों का कारण बन सकती है।

मसूड़ों की बीमारी के लक्षण :

मसूड़ों की बिमारियों की पहली स्टेज को गिंगिविटीज़ कहा जाता है। जिसके लक्षण इन प्रकार है-

  • मसूड़ों का लाल होना,
  • उनमे सुजन और दर्द होना,
  • ब्रश करते समय मसूड़ों से खून आना,
  • मसूड़ों का दांतों के ऊपर निकल जाना,
  • लगातार सांसों से बदबू आना।

(गर्भवती महिलाओं को गिंगिविटीज़ की समस्या होना आम बात है। इसीलिए उन्हें अपनी सेहत और दांतों का खास ख्याल रखना चाहिए।)

मसूड़ों की बीमारी की दूसरी स्टेज बहुत तकलीफ़देह होती है। इस स्थिति के कुछ लक्षण इस प्रकार है-मसूड़ों से खून आना

  • मसूड़ों और दांतों के बीच मवाद बनना,
  • दांतों का गिरना,
  • दांतों और मसूड़ों के बीच काफी अंतर होना,
  • खाने को काटते समय सभी दांतों की स्थिति में बदलाव आना।

मसूड़ों की बीमारी से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय :-

1. नीम :

दांतों में ब्रश करने के लिए नीम की टहनी का इस्तेमाल करना काफी लाभदायक होता है। इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल और एंटी माइक्रोबियल गुण मुंह में मौजूद सभी बैक्टीरिया को समाप्त कर बीमारी के खतरे को बढ़ने से रोकते है। आम भाषा में इसे दातुन भी कहा जाता है। इतना ही नहीं इसकी इनी खूबियों के कारण उसे आयुर्वेद में भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।

मसूड़ों की समस्या के लिए पानी में नीम की कुछ पत्तियों को डालकर उबाल लें। ठंडा होने के पश्चात् दिन में तीन से चार बार इस पानी से कुल्ला करें। ये आपके दांतों और मसूड़ों से सभी बैक्टीरिया को समाप्त करके बिमारियों को दूर रखने में मदद करेगा।

2. मुलैठी  :

मुलैठी अर्थात लिकोराइस की जड़ में लिकोराइसाइडिन और लिकोराइसोफ्लेविन ए नामक तत्व पाए जाते है जो ओरल कैविटी को बढ़ने से रोकते है। साथ ही सांसों की बदबू से छुटकारा पाने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसके लिए मुलैठी के पाउडर को एक चुटकी ने लेकर अपने प्रभावित दांतों पर लगाएं। आप चाहे तो इस पाउडर का इस्तेमाल रोजाना ब्रश करने के लिए भी कर सकते है। इससे आपके मसूड़ों की बिमारियों में तो राहत मिलेगी ही साथ-साथ दांत भी मजबूत होंगे।

3. तुलसी :tulsi ke upyog

तुलसी का प्रयोग लगभग हर घर में किया जाता है लेकिन क्या आप जानते है की इसकी मदद से आप अपने मसूड़ों से जुडी बिमारियों को भी दूर कर सकते है। तुलसी की पत्तियों में मौजूद औषधीय गुण मुंह में मौजूद सभी बैक्टीरिया को समाप्त करने में मदद करते है। इसके अलावा ये एक प्राकृतिक एंटी बायोटिक भी है जिसके इस्तेमाल से मसूड़ों की समस्याओं को रोकने में मदद मिलती है। जबकि इसकी एंटी बैक्टीरियल प्रॉपर्टी दांतों से प्लाक और सांसों की बदबू से छुटकारा दिलाने में भी मदद करती है।

यदि आपको भी मसूड़ों से संबंधित समस्याएं है तो उनसे निपटने के लिए रोजाना तुलसी के कुछ पत्तों को चबाएं। ये आपको फ्रेशनेस देने के साथ-साथ दांतों को बैक्टीरिया रहित रखने में भी मदद करेगा।

4. गूगल :

गूगल यानी लोबान, का प्रयोग अधिकतर पूजा आदि कार्यों में किया जाता है लेकिन क्या आप जानते की इसका इस्तेमाल बहुत सीओ आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में भी किया जाता है। दरअसल, इसमें कई एंटी इंफ्लेमेटरी तत्व पाए जाते है जो बैक्टीरिया के निर्माण और प्लाक को जमने से रोकते है। इसके अलावा भी इसमें कई फायदेमंद तत्व होते है जो मुंह और मसूड़ों से संबंधित समस्यायों को दूर करने में मदद करते है।

यदि आप भी अक्सर मसूड़ों से जुडी समस्यायों से परेशान रहते है तो इसके लिए एक ग्लास पानी में आधा चम्मच लोबान मिलाएं। अब इसका इस्तेमाल माउथवाश की तरह करें। दिन में 2-3 बार इस पानी का कुल्ला करने से आपके मसूड़े स्वस्थ रहेंगे। साथ ही उनमे किसी प्रकार का इन्फेक्शन भी नहीं होगा।

5. लौंग :लौंग का तेल

मसूड़ों की समस्यायों से छुटकारा पाने के लिए प्रयोग किये जाने वाले सभी उपायों में से लौंग सबसे अधिक प्रभावशाली और फायदेमंद मानी जाती है। क्योंकि इसमें ईजीनॉल नामक एक तत्व पाया जाता है जो एक बेहतर शक्तिशाली एंटीसेप्टिक और एनलगेसिक के रूप में कार्य करता है। साथ ही इसमें मौजूद अन्य तत्व मसूड़ों से दर्द में राहत देने में भी मदद करते है।

अगर आपके मसूड़ों में भी दर्द हो रहा है तो उसके लिए दर्द वाले स्थान पर लौंग का तेल लगायें। इससे दर्द में तुरंत आराम मिलेगा। इसके अलावा ये आपके मुंह में बैक्टीरियल ग्रोथ और उससे संबंधित समस्यायों को दूर करने में भी मदद करेगा। आप चाहे तो सीधे लौंग को पीसकर भी अपने मसूड़ों पर लगा सकते है। ये भी फायदा करेगा।

तो ये थे कुछ घरेलू उपाय जिनकी मदद से आप मसूड़ों की बिमारियों से छुटकारा पा सकते है। लेकिन ये उपाय केवल इंस्टेंट आराम देने तक ही आपकी मदद कर सकते है। समस्या को पूरी तरह खत्म करने के लिए आपको डेंटिस्ट के पास जाना पड़ेगा। इसके लिए किसी अच्छे डेंटिस्ट को ही चुने। क्योंकि आपके दांत बहुत अनमोल है।

जुराबों और पैरों में से बदबू आती है? ये है उपाय

क्या आपकी भी जुराबो में से दुर्गन्ध आती है? क्या आपको भी कही जूते खोलते हुए शर्मिंदगी का अहसास होता है? क्या सर्दी हो चाहे गर्मी आपको पैरो में से दुर्गन्ध आती है? इसका कारण होता है, पैरो में से अधिक पसीने का आना, और पैरो की साफ़ सफाई न रखने के कारण पैरो में जीवाणुओ की उत्त्पत्ति होती है, जिसके कारण जब आप जूते और जुराबे पहनते है, तो उसमे पसीने के एकत्रित होने के कारण पैरो में पसीना आने लगता है, और जो धीरे धीरे बदबू में बदल जाता है, और उसके बाद जैसे ही आप जूतों को उतारते है तो कई बार आपका कुत्ता भी आपके पास बैठा भी पसंद नहीं करता है,

तो आइये आज हम आपको इस समस्या से बचने के लिए कुछ टिप्स देने जा रहे है, जिनकी मदद से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, और साथ ही इसके कारण आपको दुसरो के सामने शर्मिंदा भी नहीं होना पड़ता, परंतु आपको इन तरीको का इस्तेमाल नियमित रूप से करना पड़ता है, और धीरे धीरे ये आपकी दिनचर्या का अंग बन जाता है, और आपको इस समस्या से भी राहत पाने में मदद मिलती है। जैसे की आपको अपने पैरो को साफ़ रखना चाहिए, गरम पानी से पैरो को धोना चाहिए, सेब के सिरके का इस्तेमाल कर सकते है, इसके अलावा और भी कई उपाय है, तो आइये अब इन तरीको को विस्तार से जानते है।

अपने पैरो और जुराबो को साफ़ रखें:-

पैरो और जुराबो में आने वाली दुर्गन्ध को दूर करने के लिए आप सबसे पहले अपने पैरो की साफ़ सफाई और जुराबो की साफ़ सफाई पर ध्यान दें, इसके लिए आप रोजाना जूतों को उतारने के बाद अपने पैरो को अच्छे से साफ़ करें, और इसके बाद आप अपने जूतों को भी कभी कभी धूप में रखें, ऐसा करने से जूतों की दुर्गंध भी दूर होगी, और यदि आपको इसके कारण ज्यादा परेशानी होती है, तो आपको नियमित रूप से इस तरीके का इस्तेमाल करना चाहिए।

चाय पत्ती का इस्तेमाल करें:-

चाय पत्ती का इस्तेमाल करने से आपको पैरो में आने वाली बदबू की समस्या से राहत मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक खुले बर्तन में गरम पाँव डालें, और उसके बाद आप इसमें चाय पत्ती या टी बैग्स को डालें, ऐसा करने से पत्ती उस पानी में अपना असर छोड़ देगी, और पानी के गरम रहने तक आप उसमे अपने पैरो को भिगो कर रखें, और उसके बाद आप अपने पैरो को अच्छे से सुखाएं, नियमित रूप से इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपको पैरो में दुर्गन्ध की समस्या से राहत मिलती है।

पाउडर का इस्तेमाल करें:-

पैरो में ज्यादा पसीना आने के कारण ही आपकी जुराबो में से भी बदबू आने लगती है, इसके लिए आप जब भी जुराबे पहनने लगते है, तो इससे पहले आप अपने हाथो पर पाउडर को रखें और उसे अच्छे से अपने पैरो में लगाएं, ऐसा करने से आपके पिरो में पसीना कम आता है, और पैरो में से आने वाली दुर्गन्ध से राहत मिलती है।

सेब के सिरके में पैरो को डुबोकर रखें:-

इस उपचार को करने से भी आपको जुराबे में से आने वाली दुर्गंध से राहत मिलती है, इसके लिए आप पानी में सेब के सिरके को मिलाकर कुछ समय तक मिलाकर उसमे अपने पैरो को डुबोकर रखें, और उसके बाद पैरो को निकाल कर अच्छे से सुखाएं, इसके अलावा आप चाहे तो अपनी जुराबो को भी सेब के सिरके वाले पानी में उछाल सकते है, आपको इस तरीके को एक बार इस्तेमाल करके जरूर देखना चाहिए।

चावल के पानी का इस्तेमाल करें:-

इस उपचार को करने के लिए आप चावल को आधे घंटे तक पानी में भिगोकर रखें, अब चावल को इसमें से छान कर इस पानी में अपने पैरो को थोड़ी देर भिगो कर रखें, ऐसा करने के बाद आप अपने पैरो को पानी में से निकालें, और थोड़ी देर तक सुखाएं, ऐसा करने से भी आपको पैरो में आने वाली दुर्गन्ध की समस्या से राहत मिलती है।

अपने पैरो को स्क्रब करें:-

कई बार पैरो पर मृत कोशिकाओं के जमाव के कारण भी पैरो में से दुर्गन्ध आने लगती है, क्योंकि जब भी आप नहाने के लिए जाते है तो अपने पैरो की साफ़ सफाई पर इतना ध्यान नहीं देते है, जिसका कारण आपको पैरो में बदबू से जुडी समस्या हो जाती है, तो इसके लिए आपको अपने पैरो को स्क्रब करना चाहिए, इसके कारण आपको अपने पैरो की मृत कोशिकाओं हो हटाने में मदद मिलती है, और आप इसे रोज नहीं बल्कि हफ्ते या दस दिन में एक बार भी करते है, तो भी आपको इससे राहत मिलने में मदद मिलती है।

सैनिटायजर का उपयोग करें:-

पैरो में कई बार बैक्टरिया के जमाव के कारण भी पैरो में से दुर्गन्ध आने की समस्या हो जाती है, तो इसके लिए आप सैनिटायजर का उपयोग भी कर सकते है, इससे बचने के लिए आप रोजाना जुराबे पहनने से पहले सैनिटायजर का उपयोग करें, इसके प्रयोग से आपको बैक्टेरिया को खत्म करने में मदद मिलती है।

बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें:-

बेकिंग सोडा को सीधा पैरो में घिस कर या गरम पानी में बेकिंग सोडा को डाल कर भी आप इसमें अपने पैरो को रख सकते है, और उसके बाद अपने पैरो को बाहर निकालें, ऐसा करने से आपको पैरो में आने वाली दुर्गन्ध से राहत मिलती है। आप इसे हफ्ते में दो से तीन बार भी करते है, तो इससे मिलने वाले फायदों को आप अच्छे से उठा सकते है।

जुराबो की साफ़ सफाई ध्यान रखें:-

यदि आपकी जुराबो में से बदबू आने की समस्या है, तो आप नियमित रूप से अपनी जुराबो को बदलना चाहिए, इसके अलावा आप जब भी जुराबो को धोते है, तो उन्हें उल्टा कर लेना चाहिए, ताकि अंदर होने वाले बैक्टेरिया की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। और आपके पैरो में से यदि ज्यादा दुर्गन्ध आती है, तो आपको नायलॉन की जगह कॉटन या वूल वाली सॉक्स पहननी चाहिए। और जुराबो के अलावा आपको अपने जूतों को भी वाश करना चाहिए।

ब्लीच का इस्तेमाल करें:-

इसके लिए आप हफ्ते में एक बार तीन से चार लीटर पानी में ब्लीच को डालें, और अपने पैरो को उसमे भिगो कर रखें, ऐसा करने के बाद अपने पैरो को बाहर निकाले, और आपके पैरो को अच्छे से सुखाएं, और यदि आपके पैर इसके कारण सुख महसूस करते है, आप अपने पैरो पर तेल लगा सकते है, या मॉइस्चराइज कर सकते है, इससे भी आपको पैरो में से आने वाली दुर्गन्ध की समस्या से राहत मिलती है।

नमक वाले पानी का इस्तेमाल करें:-

रोजाना नियम से रात को सोने से पहले यदि आप गरम पानी में नमक डालने के बाद उसे 15 से 20 मिनट तक अपने पैरो को रखते है, और उसके बाद पैरो को अच्छे से बाहर मिकाल कर सूखा लेते है, तो आपको पैरो में आने वाली दुर्गन्ध की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, और इसके कारण आपके पैर में दर्द सूजन के साथ पैरो को ताजा महसूस भी होता है।

जीवाणूरौधी साबुन का इस्तेमाल करें:-

जिन व्यक्ति के पैरो में से दुर्गन्ध आती है, उन्हें अपने पैरो की साफ़ सफाई के लिए जीवाणूरौधी साबुन का इस्तेमाल करें, ऐसा करने से आपको पैरो में उत्त्पन्न होने वाले जीवाणुओ को ख़त्म करने में मदद मिलती है, जिससे आपके पैरो में से आने वाली बदबू की समस्या से राहत मिलती है।

अदरक और निम्बू का इस्तेमाल करें:-

अदरक और निम्बू दोनों में ही जीवाणुरौधी गुण पाएं जाते है, तो इसका इस्तेमाल करने से भी आपको पैरो के साथ जुराबो में आने वाली बदबू से भी राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप अदरक और निम्बू को छिलके के साथ पीस कर एक पेस्ट तैयार करें, और हफ्ते में कम से कम तीन बार आप इसे अपने पैरो पर लगाकर अच्छे से मसाज करें, और उसके बाद आप गरम पानी से अपने पैरो को धोएं, ऐसा करने से भी आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

तो ये कुछ तरीके है जिनका इस्तेमाल करके आप पैरो में आने वाली बदबू के साथ जुराबो में से आने वाली गंध की समस्या से भी राहत पा सकते है, इससे बचने के लिए आप फिटकरी के पानी का भी इस्तेमाल कर सकते है, परंतु आपको ये तरीके नियमित रूप से ही इस्तेमाल करने चाहिए, ताकि आपको इससे राहत मिल सकें, इसके अलावा आपको अपने नाखुनो की साफ़ सफाई का ही ध्यान रखना चाहिए, तो आपको इस समस्या के कारण लोगो के सामने शर्मिंदा भी नहीं होना पड़ेगा, और इससे राहत भी मिल जाएगी।

 

गर्मी का मौसम और गर्भावस्था क्या-क्या ध्यान रखें

गर्मियों में प्रेगनेंसी

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में मौसम गर्मियों का हो तो प्रेग्नेंट महिला को ज्यादा परेशानी का अनुभव हो सकता है। साथ ही इस दौरान अपनी केयर भी ज्यादा बेहतर तरीके से करनी पड़ती है, खाने से लेकर घर से बाहर निकलने तक का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि पसीने के कारण परेशानी, लू के कारण होने वाली समस्या, खाने पीने की चीजों का ध्यान रखना आदि बहुत सी बातों का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है।

इसीलिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपनी बेहतर तरीके से केयर करने की सलाह दी जाती है ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। तो गर्भवती महिला को गर्मी के कारण होने वाली परेशानी को कम करने के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, गर्भवती महिला को गर्मी में कारण क्या क्या परेशानियां होती है, डिलीवरी होने पर किस तरह अपना ध्यान रखना चाहिए, आदि के बारे में आइये विस्तार से जानते हैं।

गर्मियों में प्रेग्नेंट महिला को होने वाली परेशानियां

  • गर्मी का अनुभव अधिक होने पर गर्भवती महिला को ब्लड प्रैशर की समस्या से जूझना पड़ सकता है।
  • गर्भवती महिला को गर्मियों में अधिक ठंडा खाने की इच्छा हो सकती है, और यदि महिला ठंडी चीजों का सेवन अधिक मात्रा में करती है तो इसके कारण गर्भवती महिला को सूजन की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।
  • पानी का भरपूर सेवन न करने की वजह से महिला को डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है।
  • धूप अधिक होने के कारण स्किन से जुडी समस्या, सिर में दर्द, थकान, कमजोरी आदि का अनुभव भी हो सकता है।
  • कपड़ो को लेकर महिला को परेशानी हो सकती है।
  • गर्मी में पसीना आने के कारण गर्भवती महिला को दिक्कत का अनुभव करना पड़ सकता है।
  • जिन गर्भवती महिला की स्किन नाजुक होती है गर्मी के कारण उन्हें स्किन से जुडी समस्या भी हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला को गर्मी से राहत के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए

यदि कोई महिला गर्मियों में प्रेगनेंसी का आनंद गर्मी के कारण नहीं ले पा रही हैं, तो आज हम कुछ ऐसे खास टिप्स बताने जा रहे हैं जो गर्मियों में गर्भवती महिला गर्मी से होने वाली परेशानी से बचाने में मदद करते हैं।

घर को रखें ठंडा

प्रेग्नेंट महिला को गर्मी से निजात पाने के लिए सबसे पहले घर को ठंडा रखने की कोशिश करनी चाहिए इसके लिए घर में ए सी है या कूलर है उसे दिन में थोड़ी देर चलाकर रखना चाहिए, ताकि घर की छत और दीवारों को ठंडा रहने में मदद मिल सके। घर की खिड़कियों आदि पर परदे लगाने चाहिए जिससे घर में धूप के कारण गर्मी के अहसास को कम करने में मदद मिल सके। और जिस जगह पर आप सोते हैं वहां सोने की जगह पर भी सूती चादर का ही इस्तेमाल करें।

नमक से बचें

गर्भवती महिला को गर्मियों में खाने में नमक का कम इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि नमक का सेवन अधिक करने से गर्भवती महिला को सूजन की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है। साथ ही खाने में कम नमक का इस्तेमाल करने से ब्लड प्रैशर जैसी परेशानी से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

रेडी टू इट

रेडी टू इट यानी की जो खाना पैक किया हुआ आता है केवल उसे गरम करने की जरुरत पड़ती है, ऐसे खाने का सेवन भी गर्मियों में गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें सोडियम की मात्रा अधिक होती है जो गर्मियों के मौसम में गर्भवती महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

जंक फ़ूड

गर्मी में गर्भवती महिला को जंक फ़ूड, ज्यादा मसालेदार, तेलीय आहार के सेवन से भी बचना चाहिए, क्योंकि इसके सेवन से महिला को गर्मी में पेट से जुडी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और गर्भवती महिला को अपनी डाइट में हल्के आहार को शामिल करना चाहिए जो गर्भवती महिला की सेहत और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में किसी भी तरह की समस्या न लाए, और वह आहार पोषक तत्वों से भी भरपूर हो।

पहनावा

प्रेग्नेंट महिला को गर्मी की समस्या से बचने के लिए अपने पहनावे का भी खास ध्यान रखना चाहिए। गर्भवती महिला को सूती, खुले, आरामदायक और हल्के रंग के कपड़ो का चुनाव करना चाहिए। क्योंकि सूती कपडे पसीने को सोख लेते हैं जिससे महिला को गर्मी की परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। साथ ही गर्भवती महिला को जूते चप्पल भी पूरी तरह से बंद नहीं पहनने चाहिए, बल्कि आगे से खुले हुए पहनने चाहिए ताकि बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से हो सके ऐसा करने से पैरों में हवा लगती रहेगी और महिला को पैरों में सूजन जैसी परेशानी से बचने में मदद मिलेगी।

तरल पदार्थ

डिहाइड्रेशन के कारण होने वाली परेशानी से बचने के लिए और शरीर को ठंडा रखने के लिए गर्भवती महिला को तरल पदार्थो का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। क्योंकि यदि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो इसके कारण गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और तरल पदार्थ की मात्रा को भरपूर रखने के लिए गर्भवती महिला ताजे फलों के रस, नारियल पानी, निम्बू पानी, और दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।

नहाएं

गर्मी की समस्या से बचने के लिए दिन में दो बार गर्भवती महिला को जरूर नहाना चाहिए, हर दूसरे से तीसरे दिन बालों को भी जरूर धोना चाहिए। क्योंकि इससे गर्भवती महिला के शरीर को ठंडक का अहसास होता है जिससे गर्मी से बचने में मदद मिलती है।

धूप में निकलते समय ध्यान रखें

वैसे तो गर्भवती महिला को धूप में निकलने से बचना चाहिए, लेकिन यदि कभी कहीं जाना भी पड़ता है, तो छाता, चश्मा, सूती चुन्नी, सनस्क्रीन को बॉडी पर लगाकर, पानी की बोतल साथ लेकर घर से निकलना चाहिए। ताकि गर्मी के कारण होने वाली परेशानी से गर्भवती महिला को बचाने में मदद मिल सके, और जितना हो सके सीधी धूप में चलने से बचना चाहिए।

आहार का ध्यान रखें

सबसे जरुरी टिप्स जो की गर्भवती महिला को जरूर ध्यान रखना चाहिए, गर्मी के कारण कई बार गर्भवती महिला की खाने की इच्छा नहीं होती है, लेकिन महिला को खान पान में लापरवाही नहीं करनी चाहिए क्योकि इसके कारण गर्भवती महिला की परेशानी बढ़ सकती है। साथ ही महिला को अपने आहार में ज्यादा मसालों का प्रयोग न करते हुए हल्के, संतुलित, ताजे, पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। गर्मी से बचने के लिए रसदार फलों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

गर्मियों में डिलीवरी होने पर इन बातों का ध्यान रखें

  • गर्मियों में डिलीवरी होने पर गर्भवती महिला गर्मी से बचने के लिए ए सी का इस्तेमाल न करें, साथ ही कूलर या पंखे के सीधे भी संपर्क में नहीं आना चाहिए। और यदि आप पंखे के नीचे या कूलर के आगे सोती है तो अपने शरीर को अच्छे से ढक कर रखना चाहिए। साथ ही शिशु भी माँ के गर्भ में एक निश्चित तापमान में होता है ऐसे में शिशु को सीधे ए सी में सुला देने से से शिशु को भी परेशानी हो सकती है। इसीलिए कम से कम बीस दिन से एक महीने तक महीने तक इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।
  • खाने की चीजों में हल्के आहार जैसे की उबली हुई दालें, खिचड़ी, दलिया आदि का सेवन करें, जो की पचाने में आसान हो। और शिशु को भी कोई समस्या न हो, क्योंकि यदि आप तेज मसाले, तेलीय आहार का सेवन करती है तो इसके कारण डिलीवरी के बाद महिला और शिशु दोनों को पेट में गर्मी बढ़ने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • खाने में ठंडी चीजे जैसे की ठंडा पानी, ठंडा खाना, आइस क्रीम आदि के सेवन से भी महिला को नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण महिला को रिकवर होने में समय लग सकता है, साथ ही ठंडी चीजों का सेवन अधिक करने के कारण महिला को पेट के अधिक बाहर आने जैसी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।
  • गर्भवती महिला को डिलीवरी के बाद गर्मी से निजात पाने के लिए और जल्दी रिकवर होने के लिए बॉडी को भरपूर आराम देना चाहिए।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला को जरूर रखना चाहिए, इन टिप्स का इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को गर्मी के कारण होने वाली परेशानी से बचने में मदद मिलती है। इसके अलावा यदि गर्भवती महिला को कोई और शारीरिक परेशानी होती है तो एक बार डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।