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दूसरी बार माँ बन रही हैं तो प्रेगनेंसी में यह लक्षण होंगे

प्रेगनेंसी हर महिला के लिए बहुत ही बेहतरीन अनुभव होता है और पहली प्रेगनेंसी के दौरान महिला बहुत से ऐसे अनुभव करती है। जो थोड़े परेशानी भरे तो कुछ बहुत खुशनुमा होते हैं। लेकिन दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला उतना परेशान नहीं होती है जितना की पहली प्रेगनेंसी के दौरान होती है या फिर परेशानियां पहली प्रेगनेंसी से ज्यादा भी हो सकती है।

इसके अलावा पहली प्रेगनेंसी के समय महिला को बहुत सी चीजों का पता नहीं होता है जबकि दूसरी प्रेगनेंसी में बहुत सी चीजें पता चल जाती है। साथ ही दूसरी प्रेगनेंसी में महिला शरीर में कुछ ऐसे लक्षणों को महसूस करती है जो प्रेग्नेंट महिला को पहली प्रेगनेंसी में नहीं होते हैं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको दूसरी प्रेगनेंसी में महिला को शरीर में कौन से लक्षण महसूस होते हैं उस बारे में बताने जा रहे हैं।

थकान होती है ज्यादा

पहले बच्चे की जरूरतों को पूरा करने के साथ उसकी केयर का पूरा ध्यान रखना और साथ ही आपका गर्भवती होना, ऐसे में आपको थकान की परेशानी पहली प्रेगनेंसी की अपेक्षा ज्यादा होती है। क्योंकि पहली प्रेगनेंसी के दौरान आपको पहले बच्चे की केयर को लेकर ऐसी दिक्कत नहीं होती है। और तब आपका पूरा ध्यान सिर्फ अपनी केयर पर ही होता है।

पेट के निचले हिस्से पर ज्यादा भार महसूस होना

पहले बच्चे के जन्म लेने के बाद यूटेरस के आस पास की मांसपेशियों में ढीलापन आ जाता है। जिसके कारण पहली प्रेगनेंसी में जितना मजबूती से मसल्स स्पोर्ट करती है उतना दूसरी प्रेगनेंसी में नहीं कर पाती है। जिसकी वजह से पेट के निचले हिस्से में गर्भवती महिला को भार ज्यादा महसूस होता है। ऐसे में दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला चाहे तो मेटरनिटी बेल्ट का इस्तेमाल कर सकती हैं।

पेट का जल्दी बाहर आना

मांसपशियों में आये ढीलेपन के कारण दूसरी प्रेगनेंसी में आपका पेट जल्दी बाहर की तरफ निकलता है। जैसे जैसे बच्चे का विकास होता है उतना ही जल्दी पेट बाहर निकलता है।

ब्रेस्ट में बदलाव

बच्चे को स्तनपान करवाने के कारण ब्रेस्ट में थोड़ा ढीलापन आना बहुत आम बात होती है। आप ऐसा भी कह सकते हैं की पहली प्रेगनेंसी के बाद ब्रेस्ट थोड़ी नाजुक भी हो जाती है। जिसके कारण दूसरी प्रेगनेंसी में ब्रेस्ट को छूने पर ज्यादा दर्द, सूजन, भारीपन आदि महसूस होता है।

शिशु की हलचल

पहली प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में शिशु की हलचल को समझने में महिला को थोड़ा समय लग सकता है। जबकि दूसरी प्रेगनेंसी में महिला को शिशु की हलचल का आराम से पता चल जाता है।

डिलीवरी टाइम में कमी

जब महिला की पहली डिलीवरी होती है तो महिला को प्रसव में थोड़ा ज्यादा समय लगता है। लेकिन दूसरी प्रेगनेंसी में महिला को पहली बार बच्चे के जन्म में जितना समय लगा था उससे कम समय लगता है। क्योंकि बच्चेदानी का मुँह आराम से खुल जाता है।

पीठ में दर्द

पहली बार माँ बनने पर यदि आपको थोड़ी बहुत पीठ में दर्द की समस्या थी तो वो दूसरी बार माँ बनने पर बढ़ सकती है। क्योंकि दूसरी बार प्रेगनेंसी होने पर पेट जल्दी बाहर निकलता है।

ब्रेस्टफीडिंग में नहीं होती दिक्कत

पहले बच्चे के जन्म के बाद अधिकतर महिलाएं बच्चे को दूध पिलाने में परेशानियों का सामना करती है। साथ ही बच्चे को कब और कितना दूध पिलाएं इस बारे में भी महिला को समझने में दिक्कत होती है। जबकि दूसरी बार बच्चे को जन्म देने पर महिला को इन सभी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो दूसरी प्रेगनेंसी में महिला को शरीर में महसूस होते हैं। तो यदि आप भी दूसरी बार माँ बन रही है तो आप भी बॉडी में होने वाले इन लक्षणों महसूस कर सकती है।

गर्भवती महिला को ये सब चीजें नहीं देखनी चाहिए

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प्रेगनेंसी के दौरान आपके आस पास के माहौल का भी गर्भ में पल रहे शिशु पर गहरा असर पड़ता है, जैसे की आप क्या देख रही है, क्या सुन रही है, आदि। ऐसे में ऐसी बहुत सी चीजें है जिन्हे आपको प्रेगनेंसी के दौरान नहीं देखना चाहिए, क्योंकि इसका गर्भ में पल रहे शिशु पर उल्टा असर पड़ सकता हैं। और कोई भी गर्भवती महिला यह नहीं चाहती है उसके गर्भ में पल रहे शिशु पर कोई भी बुरा प्रभाव पड़े, बल्कि वो हमेशा शिशु हष्ट पुष्ट को इसी के लिए सोचती है। तो आइये आज हम आपको बताते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को किन किन चीजों को नहीं देखना चाहिए।

हॉरर मूवी और सीरियल

यदि आप हॉरर मूवी या सीरियल प्रेगनेंसी के दौरान देखते है, तो इसके कारण शिशु भी गर्भ में बेचैन हो सकता है, और इसका बुरा प्रभाव शिशु की मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है ऐसे में इन्हे देखने से प्रेगनेंसी के दौरान बचना चाहिए।

हिंसा या लड़ाई

यदि आप टीवी में कोई हिंसा वाली मूवी या कोई न्यूज़ देखती है, तो उसे भी नहीं देखना चाहिए। साथ ही यदि आपके आस पास भी कहीं पर लड़ाई हो रही है तो आपको ऐसी जगह पर नहीं जाना चाहिए, क्योंकि शिशु पर इसका गलत प्रभाव पड़ सकता है।

डेड बॉडी

ऐसा पुराने समय से ही माना जाता है की कभी भी गर्भावस्था के दौरान महिला को किसी मरे हुए व्यक्ति को नहीं देखना चाहिए, क्योंकि इसके कारण शिशु के विकास पर बुरा असर पड़ सकता है खासकर उसका मानसिक विकास ज्यादा प्रभावित होता है।

एक्सीडेंट या मृत्यु वाले दृश्य

यदि आप कोई एक्सीडेंट या मृत्यु की खबरे सुनती है, तो इसके कारण आपके मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है जिससे आपका मन विचलित हो सकता है जो शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में यदि टीवी में ऐसा कुछ आ रहा हो या कोई इस बारे में बातें कर रहा हो तो न तो उसे देखना चाहिए और न ही सुनना चाहिए।

ग्रहण

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ग्रहण के समय न तो कुछ खाना चाहिए, न पीना चाहिए, न कुछ काटना चाहिए, न खुजली करनी चाहिए, और न ही ग्रहण को देखना चाहिए, क्योंकि इसका प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर जरूर पड़ता है। ऐसे में यदि ग्रहण का समय हो तो आपको अपने घर में ही रहना चाहिए।

तनाव

जहां भी तनाव का अहसास हो या कोई ऐसी बात कर रहा हो जिससे आपका मन विचलित हो जाये ऐसी जगह पर भी नहीं बैठना चाहिए, और न ही अपने आप को मानसिक रूप से परेशां करना चाहिए। क्योंकि तनाव के कारण महिला को प्रेगनेंसी के समय बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ चीजें जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को नहीं देखनी चाहिए और न ही सुननी चाहिए क्योंकि इनका बुरा प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ सकता है। ऐसे में जितना हो सकें खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए और अपने मन को अच्छी चीजों में लगाना चाहिए।

गर्मियों में गर्भ को ठंडक पहुंचाने के लिए यह करें

गर्भ में शिशु

प्रेगनेंसी के दौरान गर्मियों का मौसम आने पर गर्भवती महिला को बहुत ज्यादा परेशानी का अनुभव होता है। लेकिन क्या आपने सोचा है की जिस तरह गर्भवती महिला को गर्मी के कारण परेशानी होती है क्या उसी तरह गर्भ में शिशु भी गर्मी को महसूस करता है? ऐसा हो सकता है क्योंकि जब गर्भवती महिला द्वारा की गई हर गतिविधि से गर्भ में पल रहा शिशु प्रभावित होता है, वैसे ही हो सकता है अधिक गर्मी के कारण शिशु को भी परेशानी अनुभव करे। इसीलिए गर्भ को गर्मी में ठंडक का अहसास देने के लिए गर्भवती महिला को कुछ न कुछ जरूर करना चाहिए।

गर्मियों में गर्भ को ठंडक पहुंचाने के लिए अपनाएँ यह टिप्स

गर्भवती महिला जिस तरह गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अपने खान पान से लेकर अपने उठने, बैठने तक का ध्यान रखती है। उसी तरह गर्भ को ठंडक पहुंचाने के लिए महिला क्या क्या टिप्स इस्तेमाल कर सकती है आइये जानते हैं।

तरल पदार्थो का सेवन

डिहाइड्रेशन की समस्या गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए ही परेशानी का कारण बन सकती है। साथ ही पानी की कमी के कारण गर्मी का अहसास भी अधिक हो सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ को ठंडा रखने के लिए पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए, इसके अलावा आप जूस, नारियल पानी, निम्बू पानी, आदि का सेवन भी कर सकती है। ऐसा करने से डिहाइड्रेशन की समस्या से बचने के साथ गर्भ को ठंडक पहुंचाने में भी मदद मिलती है।

घर को रखे ठंडा

घर में अधिक गर्मी का होना भी गर्मियों में परेशानी को बढ़ा सकता है, ऐसे में घर को ठंडा रखने की कोशिश करनी चाहिए। और घर को ठंडा रखने के लिए धूप के समय घर के सभी खिड़कियाँ दरवाज़े बंद रखने चाहिए, परदे लगाने चाहिए, ताकि धूप के कारण गर्मी न बढे। साथ ही ए सी या कूलर को थोड़ी थोड़ी देर बाद चलाते रहना चाहिए ताकि घर की दीवारों और छत को ठंडा रहने में मदद मिल सके। इससे प्रेग्नेंट महिला को ठंडक का अहसास मिलेगा जिससे गर्भ को ठंडक पहुंचाने में भी मदद मिलती है।

पैरों को दे आराम

गर्भ को ठंडा रखने के लिए गर्भवती महिला को दिन में एक बार एक बाल्टी या टब में ठंडा पानी डालें। उसमे थोड़ी सेर अपने पैरों को रखें, इससे बॉडी को ठंडक का अहसास मिलेगा।

नहाएं

गर्भवती महिला को दिन में दो बार जरूर नहाना चाहिए और हो सके तो तो हर दूसरे ये तीसरे दिन बालों को भी धोना चाहिए। ऐसा करने से गर्मी में भी ठंडक के अहसास को बरकरार रखने में मदद मिलती है।

लौकी

लौकी की स्लाइसेस को काटकर पैरों के तलवे पर रगड़ें, इससे भी गर्भवती महिला को गर्मी से निजात पाने में मदद मिलती है। और बॉडी को ठंडक पहुंचाने में मदद मिलती है जिससे गर्भ में भी ठंडक का अहसास पहुँचता है।

हिना

हिना भी गर्मी से राहत पाने का एक आसान उपाय है, इसके लिए आप हिना का लेप बनाकर अपने बालों में लगाएं और थोड़ी देर बाद बालों को धो दें। ऐसा करने से सर को ठंडक मिलती है जो पूरे शरीर को ठंडक पहुंचाने में मदद करती है।

गुलाब जल

दो हिस्से गुलाबजल और एक हिस्सा पानी का मिलाकर एक स्प्रे बॉटल में डालकर फ्रिज में रख दें, और गर्मी के महसूस होने पर इस मिश्रण को अपने मुँह पर अपने हाथों आदि पर छिड़कें। इसकी खुशबू और ठंडक से गर्भ को भी ठंडक का अहसास करवाने में मदद मिलती है।

फल खाएं

गर्मी में हमेशा ठंडा खाने की इच्छा होती है, लेकिन हमेशा ठंडी चीजों का सेवन करने से गर्भवती महिला को सूजन जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गर्मी में ठंडक का अहसास करने के लिए फलों, खीरा, ककड़ी, गाजर आदि को थोड़ी देर फ्रिज में रखने के बाद उसका सेवन करें। ऐसा करने से गर्भवती महिला को गर्मी से राहत पाने के साथ गर्भ को ठंडक पहुंचाने में भी मदद मिलती है।

सैर करें

सुबह के ठन्डे मौसम और ठंडी हवा में सैर करने से भी गर्मी में बॉडी को ठंडक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। इसीलिए गर्भवती महिला चाहे तो सुबह या शाम को ठन्डे समय पार्क में प्रकृति के अनुभव को लेते हुए भी गर्मी से राहत पा सकती है, जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को भी फायदा पहुंचाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से गर्मियों के मौसन में गर्भवती महिला को गर्भ को ठंडक पहुंचाने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी गर्भवती है तो गर्मी से होने वाली परेशानी से बचने के लिए इन आसान टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है।

दिवाली पर यह घर में रहने न दें नहीं तो लक्ष्मी नहीं आएगी

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दिवाली से पहले हर कोई अपने घर की साफ़ सफाई में लग जाता है, और अपने घर में होने वाले अनावश्यक सामान को घर के बाहर कर देता है। ताकि माँ लक्ष्मी की कृपा उन पर हो, तो आज हम दिवाली पर आपको किन चीजों को अपने घर में नहीं रखना चाहिए, और जिनसे आपको आर्थिक तंगी से जुडी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। उनके बारे में बताने जा रहें हैं तो इस बार आप भी यदि चाहते हैं की माँ लक्ष्मी आपके घर में आए तो इन चीजों को अपने घर में न रखें। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की इस दिवाली आपको कौन कौन सी चीजे अपने घर में नहीं रखनी चाहिए।

फटे पुराने कपडे

ज्यादातर लोगो के घर में इस्तेमाल न किये जाने वाले या फटे हुए पुराने कपडे, चादर आदि रखे होते है, जो की घर में नकारात्मक ऊर्जा का काम करते हैं। ऐसे में दिवाली से पहले आपको अपने घर से इन कपड़ो को निकाल देना चाहिए आप चाहे तो इन्हे दान कर सकते हैं या घर के काम में इस्तेमाल कर सकते हैं।

खंडित मूर्तियां

दिवाली के दिन आपके घर में माँ लक्ष्मी आती है ऐसे में आपके घर में यदि खंडित भगवान की मूर्तियां या फोटो आदि है तो उन्हें प्रवाह कर देना चाहिए क्योंकि यह बहुत अशुभ मानी जाती हैं। और इसके कारण आपको आर्थिक नुकसान हो सकता है।

फटा हुआ पर्स या तिजोरी

फटा हुआ पर्स या तिजोरी भी आपकी आर्थिक तंगी का कारण हो सकती है, ऐसे में आपको दिवाली से पहले अपने पर्स को बदल लेना चाहिए और अपनी तिजोरी की मरम्मत करवा लेनी चाहिए।

घर का कबाड़ा

घर में जो कुछ की कबाड़ होता है अक्सर हम उसे अपने घर के कोनो में या छत पर जमा कर देते हैं, जो की घर में नेगेटिविटी का कारण होता है, साथ ही इसके कारण घर के सदस्यों में भी नकारत्मकता आती है। ऐसे में आपको दिवाली से पहले अपने घर या घर की छत पर जुड़े इस कबाड़े को घर से बाहर निकल देना चाहिए।

नग, पत्थर, ताबीज आदि

कुछ लो अपने घर में इस्तेमाल न किए जाने वाली नग की अंगूठी, पत्थर, ताबीज, आदि रखते हैं, ऐसा नहीं करना चाहिए और दिवाली से पहले यदि यह आपके इस्तेमाल के नहीं हैं तो इन्हे आपको प्रवाह कर देना चाहिए।

टूट फूटी चीजें

टूटी फूटी अलमारी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, या अन्य कोई सामान जो घर में टूटा पड़ा हो उसे भी दिवाली से पहले घर में से बाहर कर देना चाहिए, क्योंकि यदि आप इन्हे घर में रखते हैं तो ऐसा करने से घर में वास्तु दोष आता है और साथ ही माँ लक्ष्मी का आगमन भी नहीं होता है और आपको आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

मकड़ी का जाला

दिवाली से पहले घर की साफ सफाई अच्छे से करनी चाहिए और साथ ही आपको मकड़ी के जाले अच्छे से साफ़ करने चाहिए क्योंकि मकड़ी का जाला नेगेटिविटी का संकेत होता है। और यदि आप इन्हे साफ़ नहीं करते है तो आपको माँ लक्ष्मी की कृपा से वंचित रहना पड़ सकता है।

टूटा सोफा या कुर्सी

दिवाली से पहले आपको अपने घर या दूकान में मौजूद टूटे सोफे या कुर्सी को भी बाहर कर देना चाहिए या फिर आपको उसे ठीक करवा लेना चाहिए। क्योंकि यह भी आपकी आर्थिक समस्या को बढ़ा सकते हैं।

दिवाली पर इन चीजों को भी घर में न रखें

  • खूंखार जानवर की कोई फोटो अपने घर में नहीं लगाना चाहिए।
  • नुकीले पौधों का फोटो या पौधे भी अपने घर में नहीं रखने चाहिए।
  • डूबती हुई नाव का फोटो।
  • ताजमहल का फोटो या कोई मूर्ति आदि भी अपने घर में न रखें।
  • फवारे आदि की फोटो को भी अपने घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि यह सब नकारत्मकता के प्रतीक होते हैं।

तो यह हैं कुछ चीजें जो आपको दिवाली से पहले अपने घर से बाहर कर देनी चाहिए ताकि इस दिवाली माँ लक्ष्मी आपके घर में विराजमान हो और साथ ही आपकी सभी आर्थिक समस्याओं को दूर होने में मदद मिले और आपके घर में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहे।

पेशाब में खून आना

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मनुष्य का शरीर बेहद संवेदनशील होता है जिसके कारण वह कभी भी किसी भी रोग से ग्रस्त हो सकता है। इनमे से कुछ रोग जीवन को संकट में पहुंचाते है तो कुछ हमेशा के लिए तकलीफ दे जाते है। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के शरीर में कुछ भी आसामान्य होता है तो उसे तुरंत जाँच करवानी चाहिए, ताकि समस्या बढ़े नहीं।

क्योंकि अक्सर देखा गया है की लोग छोटी बीमारी समझकर उसपर ध्यान नहीं देते जिसके बाद समय बढ़ने के साथ साथ वह बीमारी भी बढ़ने लगती है। कई बार तो ये बीमारियां जानलेवा भी हो सकती है। जैसे की कैंसर, टी बी आदि।

इन्ही में से एक समस्या है पेशाब से जुडी समस्याएं। बहुत से लोगों को पेशाब के दौरान बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन वे उसे सामान्य बात समझकर अनदेखा कर देते है जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह बीमारी निकट भविष्य में किसी बड़ी समस्या का कारण बन सकती है।

अगर आपके पेशाब में जलब हो रही हो या उसमे से खून आ रहा हो, तो देर न करें और तुरंत डॉक्टरी जाँच करवाएं। वैसे तो यह कोई जानलेवा बीमारी नहीं है लेकिन समय पर ध्यान न देने से यह खतरनाक सिद्ध हो सकती है। पेशाब में खून आने के कई कारण हो सकते है, लेकिन इसमें डॉक्टरी सलाह लेने के बाद ही कारण जानकर इलाज करवाना चाहिए।

पेशाब करते समय खून आना यदि बंद न हो तो देर किये बिना डॉक्टर के पास जाएँ। जाँच कराएं और जरुरी इलाज लें। बता दें, यह समस्या पुरुष और महिला किसी को भी हो सकती है। आगे हम आपको पेशाब में खून आने के कारण बता रहे है।

पेशाब में खून आने के निम्नलिखित कारण हो सकते है :-

1. यूरिन इन्फेक्शन / यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन :

महिलाओं में यह बहुत आम समस्या होती है। मूत्र मार्ग में संक्रमण होने के कारण इस परेशानी का होना आम है। इसके कारण उन्हें बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जैसे मूत्र के दौरान खुजली, जलन आदि। लेकिन कई बार जलन के साथ साथ खून भी आने लगता
है।

2. गुर्दे की पथरी :

कई बार गुर्दे की पथरी के कारण भी यह समस्या होने लगती है। अगर किसी व्यक्ति के गुर्दे में पथरी होती है तो पेशाब में से खून आने लगता है। क्योंकि पथरी के कारण पेशाब की प्रक्रिया में रुकावटें आती है। ऐसा नहीं है की ये एक लाइलाज बीमारी है। अपितु इसका इलाज संभव है, इसलिए समय गवाएं बिना डॉक्टर से समपर्क करें। अगर सर्जरी की आवश्यकता है तो वह भी करवा लें।

3. गुर्दे या पित्ताशय में ट्यूमर :

गुर्दे या पित्ताशय में ट्यूमर होने के कारण भी पेशाब से खून आने लगता है। इस स्थिति में अन्य उपाय करने से बेहतर है डॉक्टरों द्वारा की जाने वाली सर्जरी की मदद लेकर इसका इलाज करें। ट्यूमर खत्म होने के बाद खून आना भी बंद हो जाएगा।

4. ग्‍लोमेरूलोनेफ‍िरिटिस या ग्‍लोमेरूलर नेफीरिटिस :

पेशाब करते समय या मल करते समय खून आने का सबसे आम कारण यही होता है। बढ़ते बच्चो और छोटे बच्चों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। लेकिन कई बार बड़े भी इस समस्या का शिकार हो जाते है। ऐसे में डॉक्टरी सलाह से इलाज करवाएं।

5. सिस्टिक ग्रोथ :

महिलाओं में सिस्ट की वृद्धि होना आम बात है। दरअसल यह है दर्दनाक बिमारी होती है जिसके कारण पेशाब करते समय खून आने लगता है। समान्यतौर पर सिस्ट, गुर्दे में बढ़ता है जिसके कारण पेशाब करते समय हल्का दर्द और जलन होती है। और कुछ समय बाद खून भी आने लगता है।

6. कैंसर :

अगर मूत्र में खून या खून के थक्के आने लगे तो हो सकता है मूत्र की थैली में कैंसर हो।यह मूत्र की थैली की सेल में होता है। कैंसर के कारण इस घाव से लगातार खून का स्त्राव होता रहता है। जब खून अधिक मात्रा में खून की थैली में एकत्रित हो जाता है तो पेशाब आना बंद हो जाता है। ऐसे में तुरंत इलाज करवाना उचित उपाय है।

इसके अतिरिक्त कई बार, कुछ अनुवांशिक कारणों के चलते भी पेशाब करते समय दिक्कतें आने लगती है। सिकल सेल रोग, हाईमैच्‍यूरिया और असामान्‍य मासिक चक्र के कारण भी पेशाब में खून आने लगता है। परन्तु सिर्फ बीमारी के बारे में  जानने से बात नहीं बनेगी, समस्या कितनी ही छोटी क्यों न हो सही समय पर इलाज करवाना हो बेहतर उपाय है। ताकि भविष्य में किसी गंभीर समस्या का सामना न करना पड़े।

 

प्रेगनेंसी में चॉकलेट खाने के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान बेहतर खान पान बहुत जरुरी होता है और कई बार इसके कारण प्रेगनेंसी में अपनी पसंद की खाने की चीजों से परहेज भी करना पड़ता है। ऐसे में कई बार महिलाओं की चॉकलेट खाने की इच्छा होती है, लेकिन ज्यादा मीठा भी प्रेगनेंसी के दौरान नुकसानदायक न हो इसके लिए महिला चॉकलेट के सेवन से परहेज करती है। लेकिन जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान चॉकलेट का सेवन करना चाहती है उनके लिए खुशखबरी है। क्योंकि रिसर्च के अनुसार प्रेगनेंसी के दौरान महिला चॉकलेट का सेवन कर सकती है और इसके सेवन से गर्भवती महिला को फायदा मिलता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान चॉकलेट का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

एंटी ऑक्सीडेंट्स से होती है भरपूर

चॉकलेट का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा को भरपूर रखने में में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को फ्री रेडिकल्स के कारण होने वाली परेशानी से बचाने में मदद मिलती है।

दिल को रखता है सेहतमंद

गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान चॉकलेट का सेवन करती है तो ऐसा करने से प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के दिल को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है, जिससे महिला को हदय सम्बन्धित समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है।

कोलेस्ट्रॉल होता है कण्ट्रोल

डार्क चॉकलेट में मीठे और फैट की मात्रा कम होती है जिसके कारण यह गर्भवती महिला के शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद करती है।

तनाव होता है कम

प्रेगनेंसी के दौरान तनाव गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है, लेकिन चॉकलेट का सेवन करने से महिला को तनाव से निजात मिलता है और मूड को फ्रैश रहने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर को रखता है मेंटेन

ब्लड प्रैशर की समस्या से भी कुछ गर्भवती महिलाएं परेशान रहती हैं, और इस परेशानी का अधिक होना प्रेगनेंसी के दौरान नुकसादायक भी हो सकता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला यदि डार्क चॉकलेट का सेवन करती है तो इससे ब्लड प्रैशर को मेंटेन रहने में मदद मिलती है।

ब्लड फ्लो को बनाता है बेहतर

कोकोआ से बनी चॉकलेट का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में ब्लड फ्लो को बेहतर करने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को फिट रहने के साथ गर्भ में पल रहे भ्रूण तक भी ब्लड का फ्लो बेहतर तरीके से करने में मदद मिलती है।

मैग्नीशियम और आयरन से होता है भरपूर

डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम और आयरन भरपूर मात्रा में होता है, आयरन गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को भरपूर बनाएं रखता है। जिससे गर्भवती महिला के शरीर में खून की नहीं होती है, और मैग्नीशियम गर्भवती महिले के शरीर में मेटाबोलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान चॉकलेट का सेवन करना से मिलते है, लेकिन यदि महिला को शुगर जैसी कोई परेशानी है तो इसके सेवन से परहेज करना चाहिए। और यदि कोई समस्या नहीं है तो गर्भवती महिला प्रेगनेंसी में चॉकलेट का मज़ा उठा सकती है, और साथ ही इससे मिलने वाले फायदे भी ले सकती है।

Hindi Video : Benefits of Chocolate in Pregnancy

Benefits of Eating Chocolate in Pregnancy

प्रेगनेंसी में काले अंगूर क्यों नहीं खाने चाहिए?

प्रेगनेंसी में काले अंगूर खाने चाहिए या नहीं, प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जहां महिला को अपने खान पान का न केवल अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। बल्कि किसी भी चीज को खाने से पहले यह जानना जरुरी होता है। की प्रेगनेंसी के दौरान उस चीज का सेवन करना भी चाहिए या नहीं। क्योंकि सही खान पान जहां गर्भवती महिला व् भ्रूण के लिए फायदेमंद हो सकता है। वहीँ गलत खान पान के कारण प्रेग्नेंट महिला व् शिशु की सेहत को नुकसान भी पहुँच सकता है।

साथ ही प्रेग्नेंट महिला को कुछ चीजें जैसे की कच्चा पपीता, अधिक मात्रा में कैफीन, अल्कोहल, अनानास, चाइनीज़ फ़ूड, मर्करी युक्त मछली, आदि का सेवन करने की मनाही होती है। ऐसे में खान पान को लेकर मन में सवाल आना जरुरी होता है। और इस समय जितनी सतर्कता बरतनी जरुरी होती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में काले अंगूर को लेकर बात करने जा रहे हैं। की प्रेगनेंसी के दौरान काले अंगूर का सेवन करना चाहिए या नहीं।

प्रेगनेंसी में काले अंगूर का सेवन करना चाहिए या नहीं

गर्भावस्था के दौरान काले अंगूर का सेवन का सेवन न करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि काले अंगूर में रेसर्विट्रॉल की मात्रा मौजूद होती है। जो की एक हानिकारक पदार्थ होता है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा काले अंगूर का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को और भी दिक्कतें हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में काले अंगूर का सेवन करने से कौन सी परेशानियां हो सकती है।

पाचन तंत्र होता है कमजोर

  • काले अंगूर को खाने पर उसका छिलका पचाने में प्रेग्नेंट महिला को दिक्कत हो सकती है।
  • जिसके कारण महिला को पाचन तंत्र से जुडी समस्या हो सकती है।
  • और पाचन तंत्र कमजोर होने के कारण महिला को पेट सम्बन्धी अन्य परेशानियां हो सकती है।

प्रेगनेंसी में काले अंगूर का सेवन करने से हो सकती है एसिडिटी

  • अंगूर अम्लीय होते हैं और यदि अंगूर खट्टे हो तो ज्यादा अम्लीय हो जाते हैं।
  • ऐसे में काले अंगूर का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को एसिडिटी, खट्टे डकार, सीने में जलन, उल्टी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

डायरिया

  • काले अंगूर का सेवन करने से पेट में गर्माहट बढ़ जाती है।
  • जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को दस्त जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • जिससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
  • और शरीर में पानी की कमी होने के कारण गर्भवती महिला की परेशानियां बढ़ सकती है।

प्रेगनेंसी में काले अंगूर का सेवन करने से हो सकता है हार्मोनल असंतुलन

  • रेसर्विट्रॉल की मात्रा काले अंगूर में मौजूद होती है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला यदि काले अंगूर का सेवन करती है तो इसके कारण बॉडी में हार्मोनल असंतुलन हो सकता है।
  • और बॉडी में हार्मोनल असंतुलन होने के कारण महिला को दिक्कत हो सकती है।

समय पूर्व प्रसव

  • काले अंगूर का सेवन प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में अधिक करने से गर्भाशय में संकुचन का खतरा रहता है।
  • जिसके कारण महिला की समय से पहले डिलीवरी होने का डर बढ़ जाता है।

ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को जितना हो सके अंगूर का सेवन करने से बचना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला या शिशु किसी को भी सेहत सम्बन्धी परेशानी न हो। कभी प्रेग्नेंट महिला का मन हो तो एक दो काले अंगूर का सेवन महिला कर सकती है।

समय से पहले डिलीवरी से बचने के तरीके

समय से पहले डिलीवरी

कई बार प्रेगनेंसी में अधिक परेशानियों के कारण, शिशु के विकास में कमी होने पर, गर्भवती महिला द्वारा की गई लापरवाही के कारण प्रीटर्म लेबर जैसी परेशानी का सामना महिला को करना पड़ सकता है। समय से पहले शिशु का जन्म होने के कारण शिशु भी कमजोर होता है, साथ ही उसे स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और आज कल यह समस्या बहुत अधिक देखने को मिलती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान हर तरह की सावधानी बरतनी चाहिए जिससे शिशु का विकास बेहतर होने के साथ समय से पहले शिशु के जन्म जैसी परेशानी से निजात पाने में भी मदद मिल सके।

प्रीटर्म लेबर की समस्या से बचने के टिप्स

अड़तीस से चालीस हफ्ते के बाद शिशु का जन्म होना ही डिलीवरी का सही समय होता है। लेकिन कई बार कुछ परेशानियों के कारण समय से पहले ही शिशु का जन्म हो जाता है, ऐसे में प्रीटर्म लेबर की समस्या से बचने के लिए प्रेगनेंसी में किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए आइये जानते हैं।

आहार में सावधानी

आपने यह तो हमेशा सुना होगा की प्रेगनेंसी में ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिससे गर्भ में शिशु का बेहतर विकास होने के साथ गर्भवती महिला को भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। लेकिन ऐसे आहार का सेवन करने के साथ सही समय पर आहार लेना भी बहुत जरुरी होता है ताकि बॉडी में एनर्जी की कमी न हो और स्वास्थ्य को फिट रहने में मदद मिल सके। हर दो घंटे के गैप पर गर्भवती महिला को कुछ न कुछ जरूर खाना चाहिए, और केवल दाल रोटी ही नहीं बल्कि फल, सलाद, नट्स, जूस आदि का सेवन भी करना चाहिए।

खाने की चीजों पर दे ध्यान

कुछ ऐसे आहार भी होते हैं जो प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में गर्भपात और बाद में ब्लीडिंग व् गर्भाशय में संकुचन को पैदा कर सकते हैं। क्योंकि इनमे मौजूद रसायन गर्भाशय पर प्रैशर डालकर ब्लीडिंग जैसी परेशानी उत्पन्न कर सकता है, जिसके कारण संकुचन बढ़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को इन आहार के सेवन से परहेज करना चाहिए जैसे की कच्चा पपीता, अनानास, अल्कोहल आदि।

मिनरल्स

गर्भ में शिशु के विकास में कमी भी समय पूर्व प्रसव होने का कारण बन सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के समय कैल्शियम, आयरन, फोलिक एसिड, प्रोटीन व् अन्य मिनरल्स का भरपूर सेवन करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला को फिट रहने के साथ गर्भ में शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से हो सके।

पानी पीएं

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए, ताकि डिहाइड्रेशन की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके। क्योंकि डिहाइड्रेशन की समस्या गर्भवती महिला को होती है तो यह भी समय पूर्व प्रसव का कारण बन सकती है।

यूरिन पास करें

गर्भवती महिला को यूरिन को रोककर नहीं रखना चाहिए जब भी यूरिन आये उसे पास करना चाहिए। क्योंकि यूरिन को रोककर रखने से गर्भाशय पर दबाव पड़ता है जिसके कारण संकुचन हो सकता है और समय पूर्व प्रसव का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

नियंत्रित वजन

प्रेगनेंसी में महिला का वजन बढ़ना आम बात होती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की वजन बहुत ज्यादा बढ़ने लग जाए। ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि यदि महिला का वजन बहुत तेजी से बढ़ता है तो इसके कारण भी डिलीवरी समय से पहले हो सकती है। साथ ही यदि महिला का वजन बहुत कम होता है तो इसके कारण भी समय से पहले डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं।

भारी सामान

गर्भावस्था के दौरान महिला को भारी सामान न उठाने की सलाह दी जाती है साथ ही सामान को सरकाना आदि भी नहीं चाहिए। क्योंकि इसके कारण प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने जहां मिसकैरिज के चांस बढ़ जाते हैं वहीँ बाद में ब्लीडिंग, या पेट पर अधिक जोर पड़ने के कारण दर्द की समस्या बढ़ सकती है।

दांतों से सम्बंधित समस्या

हो सकता है की आपको यह बात जानकार हैरानी हो लेकिन डॉक्टर्स के अनुसार गर्भवती महिला को यदि मसूड़े या दांतों से सम्बंधित समस्या होती है। तो ऐसे में भी असमय प्रसव होने का खतरा रहता है।

शिशु का विकास

गर्भ में भ्रूण के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए ओमेगा 3 फैटी एसिड का सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि यदि गर्भ में शिशु का बेहतर विकास नहीं होता है तो इसके कारण भी समय पूर्व प्रसव का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

तनाव

तनाव भी समय से पहले डिलीवरी होने का कारण हो सकता है क्योंकि यदि गर्भवती महिला अधिक तनाव में रहती है तो इसके कारण गर्भाशय के मुँह के खुलने का खतरा रहता है। ऐसे में स्वस्थ प्रेगनेंसी के लिए, शिशु के बेहतर विकास के लिए और समय से पहले डिलीवरी की परेशानी से बचने के लिए गर्भवती महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए।

नियमित जांच

बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेग्नेंट महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को समय पर डॉक्टर से जांच करवाते रहना चाहिए ताकि कोई समस्या हो तो उसका अच्छे से इलाज हो सके जिससे समय से पहले डिलीवरी होने की समस्या से बचने में मदद मिल सके।

खून की कमी

खून की कमी को बॉडी में पूरा रखने के लिए आयरन युक्त आहार का जरूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि यदि गर्भवती महिला की बॉडी में यदि खून की की कमी होती है तो इसके कारण डिलीवरी के दौरान परेशानी आने के साथ शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। साथ ही खून की कमी होने के कारण प्रीटर्म लेबर होने के चांस भी बढ़ जाते हैं।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला को रखना चाहिए क्योंकि इन टिप्स का ध्यान रखने से गर्भवती महिला को समय पूर्व प्रसव होने जैसी परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।

तेज दिमाग का बच्चा चाहिए तो यह खाएं

गर्भ में शिशु का दिमाग

हर गर्भवती महिला चाहती है की उसका होने वाला शिशु गोरा व् खूबसूरत होने के साथ बुद्धिमान भी हो। और इसके लिए शिशु के जन्म के बाद ही नहीं बल्कि गर्भ में ही शिशु के मानसिक विकास के लिए महिला तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। क्योंकि जिस तरह से शिशु का शारीरिक विकास गर्भ से ही शुरू हो जाता है उसी तरह शिशु मानसिक विकास भी गर्भ से ही शुरू हो जाता है। तेज दिमाग और बुद्धिमान शिशु को जन्म देने के लिए प्रेग्नेंट महिला को अपने स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रखना चाहिए, तनाव नहीं लेना चाहिए बल्कि खुश रहना चाहिए, मैडिटेशन करनी चाहिए, गलत विचारों को अपने दिमाग में नहीं आने देना चाहिए, गर्भ में शिशु से बातें करनी चाहिए, खान पान में उन चीजों को शामिल करना चाहिए जिनसे दिमाग तेज होता है, आदि, इन सभी टिप्स का ध्यान रखने से गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग को तेज करने में मदद मिलती है।

तेज दिमाग वाले शिशु को जन्म देने के लिए प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए

गर्भवती महिला का खान पान प्रेगनेंसी के दौरान बहुत अधिक महत्व रखता है क्योंकि इससे न केवल शिशु का शारीरिक विकास बेहतर होता है बल्कि शिशु के दिमाग को भी तेज होने में मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की शिशु का दिमाग तेज हो इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को अपनी डाइट में किन किन चीजों को शामिल करना चाहिए।

अंडा

अंडा पोषक तत्वों से भरपूर होता है जो प्रेग्नेंट महिला को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में भी मदद करता है। साथ ही आयरन, प्रोटीन, फैट, cholin जैसे पोषक तत्व भी अंडे में भरपूर होते हैं जो गर्भ में शिशु के मस्तिष्क को तेज बनाने में मदद करते हैं, खासकर cholin नामक तत्व शिशु के मानसिक विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। और इसकी कमी के कारण शिशु के मानसिक विकास में कमी भी आ सकती है, इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को अपनी डाइट में अंडे को जरूर शामिल करना चाहिए साथ ही सफ़ेद और पीला दोनों हिस्सों का सेवन करना चाहिए।

एवोकाडो

दिमाग का 60% हिस्सा वसा से बना है ऐसे में दिमाग के विकास के लिए जिस मोनोअनसेचुरेटेड फैट की जरूरत होती है वह एवोकाडो में भरपूर मात्रा में होता है। इसीलिए गर्भवती महिला चाहे तो प्रेगनेंसी के दौरान एवोकाडो का सेवन भी कर सकती है क्योंकि इससे दिमाग के विकास को तेज होने में मदद मिलती है।

दही

प्रोटीन से भरपूर दही का सेवन करने से गर्भ में शिशु के दिमाग की कोशिकाओं की सरंचना को बेहतर होने में मदद मिलती है। जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग के विकास बेहतर तरीके से होता है।

पालक

आयरन, प्रोटीन, विटामिन, फाइबर जैसे पोषक तत्वों से भरपूर पालक शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक होती है। साथ ही इसमें मौजूद फोलेट डी एन ए और सेल्स सरंचना को बेहतर तरीके से होने में मदद करता है, जो शिशु के दिमाग के विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए की पालक को पूरी तरह से गलाकार प्रेग्नेंट महिला को नहीं खाना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से इसमें मौजूद फोलेट खत्म हो जाता है और पालक को खाने का कोई फायदा नहीं होता है।

मछली

फिश का सेवन करना भी प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद करती है। साथ गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग के विकास के लिए गर्भवती महिला को फैट युक्त मछली का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए क्योंकि दिमाग के बेहतर विकास के लिए फैट का बॉडी में भरपूर मात्रा में होना बहुत जरुरी होता हैं, साथ ही इसका सेवन करने से जन्म के समय शिशु के मानसिक विकास में होने दिक्कत से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

दालें

दालों में कैल्शियम, आयरन, फोलिक एसिड, प्रोटीन, फोलेट जैसे मिनरल्स से भरपूर दालों का सेवन भी गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि यह सभी पोषक तत्व न केवल शिशु के शारीरिक विकास को बेहतर बनाने में मदद करते हैं बल्कि इनके सेवन से गर्भ में शिशु के मानसिक विकास को भी तेजी से होने में मदद मिलती है।

बादाम

अक्सर आपने सुना होगा की शिशु के ही नहीं बल्कि हर कोई दिमाग को तेज करने के लिए और यादाश्त को बढ़ाने के लिए बादाम खाने की सलाह देता है। इसी तरह गर्भवती महिला को भी प्रेगनेंसी के दौरान बादाम खाने की सलाह दी जाती है क्योंकि इसमें न्यूट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो शिशु के दिमाग को तेज करने में मदद करते हैं।

अख़रोट

विटामिन्स, प्रोटीन, एनर्जी, फाइबर, ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर अखरोट का आकार बिल्कुल दिमाग की तरह ही होता है। ऐसे में गर्भवती महिला यदि अखरोट का सेवन करती है तो यह सभी पोषक तत्व गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग की सरंचना को बेहतर करने में मदद करता हैं।

कद्दू के बीज

गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए गर्भवती महिला को कद्दू के बीजों का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि इसमें भी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में विद्यमान होते हैं।

फल

केला, संतरा, सेब, जामुन, आम आदि फल फोलेट, विटामिन, प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला यदि अपनी डाइट में इन्हे शामिल करती है तो इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है। ऐसे में शिशु के दिमाग को तेज करने के लिए और शारीरिक विकास को बढ़ाने के लिए गर्भवती महिला को इन फलों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

दूध

दूध का सेवन भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए क्योंकि इसमें भी कैल्शियम, प्रोटीन आदि की मात्रा भरपूर होती है। जो गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करती है।

तो यह हैं कुछ आहार जिनका सेवन करने से गर्भवती महिला को गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग के विकास को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके अलावा गर्भवती महिला का प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहना व् स्वस्थ रहना भी गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करता है।

धूप में बैठने पर त्वचा और सिर चुनचुनाहट होने के कारण

गर्मी के मौसम में तो नहीं लेकिन सर्दी के मौसम में धूप में बैठने की इच्छा होती है। और कई बार किसी कारण धूप में ज्यादा देर खड़ा रहना पड़ सकता है। धूप में इतनी देर रहने के कारण त्वचा या सिर की स्किन में एक अलग सी चुनचुनाहट सी महसूस होती है। जिसके कारण आपको खुजली की समस्या भी हो सकती है। लेकिन अपने कभी सोचा है की आखिर आपकी स्किन और सिर में ऐसा क्यों महसूस होता है। तो लीजिये आज हम आपको इसके बारे में बताने जा रहें हैं।

सिर और स्किन में चुनचुनाहट होने के कारण

यदि कभी आप धूप में ज्यादा देर बैठ या खड़े हो जाते हैं। तो धूप से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणें आपकी स्किन के संपर्क में आती है। और सिर यदि ढका हुआ न हो तो सिर भी गर्म सा महसूस होने लगता है। और स्किन पर भी अजीब या महसूस होने लगता है। व् स्किन के कलर में भी फ़र्क़ आने लगता है।

क्योंकि सिर की स्किन व् आपकी बॉडी की स्किन बहुत ही कोमल होती है। ऐसे में इन किरणों के संपर्क में आने के बाद त्वचा गर्म व् रूखी महसूस होने लगती है। और आपको अजीब सी चुनचुनाहट महसूस हो सकती है। जिसके कारण स्किन पर आपको खुजली भी महसूस हो सकती है।

गर्मी व् सर्दी में स्किन पर होने वाली खुजली से बचाव के उपाय

यदि आपको भी सिर में चुनचुनाहट महसूस होती है। और इसके कारण खुजली होने के कारण दिक्कत होती है। तो ऐसे में इस परेशानी से बचाव के लिए आप कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

त्वचा में चुनचुनाहट से बचाव के लिए इस्तेमाल करें निम्बू का रस

  • निम्बू के रस में एंटी बैक्टेरियल गुण होते हैं।
  • जो आपको इस परेशानी से बचाव करने में मदद कर सकते हैं।
  • इसीलिए आप नहाने से पहले सिर व् स्किन पर निम्बू का रस लगाएं आपको जरूर फायदा मिलेगा।

बेकिंग सोडा

  • बेकिंग सोडा में पानी मिलाकर एक पतला पेस्ट बनाएं।
  • उसके बाद उसे स्किन व् सिर में लगाने पर भी आपको इस परेशानी से निजात मिल सकता है।

तुलसी

  • तुलसी के पत्तों को एक बड़े बर्तन में पानी लेकर उबाल लें।
  • अब इस पानी को अपने नहाने वाले पानी में मिलाकर नहाएं। सिर भी धोएं।
  • तुलसी में मौजूद एंटी फंगल और एंटी बैक्टेरियल गुण आपको इस परेशानी से बचाने में मदद करते हैं।

त्वचा में चुनचुनाहट से बचाव के लिए इस्तेमाल करें नारियल का तेल

  • नारियल के तेल का इस्तेमाल स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है।
  • अगर आपको सिर या स्किन में चुनचुनाहट या खुजली की समस्या होती है तो आप नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

धूप में निकलने से पहले यह करें

  • धूप में निकलने से पहले स्किन पर सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें।
  • और सिर को ढक कर रखें ऐसा करने से भी आपको इस परेशानी से निजात मिल सकता है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको स्किन व् सिर में होने वाली चुनचुनाहट की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।