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ओवुलेशन पीरियड जानने का क्या तरीका है

ओवुलेशन पीरियड वो समय होता है जब महिलाओं की प्रजनन क्षमता सबसे अधिक होती है। और इस समय में यदि महिला और पुरुष आपस में सम्बन्ध बनाते हैं तो महिला के गर्भधारण होने के चांस बढ़ जाते हैं। लेकिन ओवुलेशन पीरियड कौन सा दिन होता है? ओवुलेशन पीरियड को जानने का क्या तरीका है? इसे लेकर अधिकतर महिलाओं को सही जानकारी नहीं होती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको ओवुलेशन से जुडी सम्पूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं।

ओवुलेशन पीरियड क्या होता है?

महिला के एक मासिक धर्म के खत्म होने के बाद और दूसरे मासिक धर्म की शुरुआत के बीच में एक ऐसा समय आता हैं जब महिला के अंडकोष में रखा अंडा पुरुष के शुक्राणु से मिलने के लिए पूरी तरह तैयार होता है, और इस पीरियड को ओवुलेशन पीरियड कहा जाता है। और इस दौरान प्रेगनेंसी के चांस सबसे अधिक होते हैं, क्योंकि इस समय महिला के अंडकोष से निकल कर अंडे फैलोपियन ट्यूब से गर्भाशय तक पहुँचते हैं। और जो अंडा निषेचित होता है वो फैलोपियन ट्यूब द्वारा गर्भाशय में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है।

ओवुलेशन पीरियड कब होता है?

एक मासिक धर्म का चक्र अठाइस दिन का होता है, ऐसे में दूसरा मासिक धर्म जब शुरू होने वाला होता है उससे बारह या चौदह दिन पहले का जो समय होता है। या फिर आप कह सकते हैं की पहले मासिक धर्म की शुरुआत के पहले दिन से गिनते हुए जो बारह से सोलह दिन का समय होता है वो ओवुलेशन पीरियड होता है। जिन महिलाओं के पीरियड्स रेगुलर होते हैं उन्हें अपने ओवुलेशन पीरियड को समझने में आसानी होती है। जबकि जिन महिलाओं के पीरियड्स आगे पीछे हो जाते हैं उन्हें ओवुलेशन पीरियड के बारे में जानने में थोड़ी परेशानी हो सकती है।

ओवुलेशन पीरियड जानने के तरीके

यदि आपको भी ओवुलेशन पीरियड की सही जानकारी लेनी हैं तो कुछ तरीके हैं जिनसे आप आसानी से ओवुलेशन पीरियड के बारे में जान सकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की ओवुलेशन पीरियड को जानने के तरीके:-

ओवुलेशन किट

जिस तरह प्रेगनेंसी का पता करने के लिए आजकल मार्किट में आसानी से किट मिल जाती है। उसी तरह ओवुलेशन पीरियड को जानने के लिए भी मार्किट में किट मिलती है। और यह एक नहीं बल्कि कई तरह की होती है जैसे की पेशाब से जांच करने वाली किट, लार से जांच करने वाली किट, तो आइये सबसे पहले पेशाब से जांच करने वाली किट के इस्तेमाल के बारे में जानते हैं। पेशाब से जांच करने वाली किट में महिला को एक स्ट्रिप को यूरिन में रखना है या यूरिन की कुछ बुँदे उस स्ट्रिप पर डालनी है।

यदि स्ट्रिप का रंग गहरा होता है तो यह ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन के स्तर को दर्शाता है यदि स्ट्रिप का रंग हल्का है तो समझ जाइये की अभी ओवुलेशन पीरियड नहीं है। और जितना ज्यादा स्ट्रिप का रंग गहरा होता जाता है तो यह ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन के उच्च स्तर को दर्शाता है जो यह बताता हैं की ओवुलेशन पीरियड पास है। इसके अलावा दूसरा टेस्ट लार के माध्यम से होता है। इस टेस्ट किट में एक छोटा पोर्टेबल माइक्रोस्कोप होता है, जिसमे आपको अपनी लार का उपयोग करना पड़ता है।

बॉडी में अधिक एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्तर अधिक होने पर आपकी लार में नमक की मात्रा बढ़ जाती है। और सूखा नमक फर्न के आकार के क्रिस्टल जैसा दिखता है। और ओवुलेशन पीरियड शुरू होने से एक या दो दिन पहले या उसके एक दो दिन बाद तक फर्न नजर आते हैं। ऐसे में यदि आपको भी इस माइक्रोस्कोप के माध्यम से फ़र्न दिखाई देते हैं तो यह आपका ओवुलेशन पीरियड होता है।

ओवुलेशन कैलकुलेटर

ओवुलेशन कैलकुलेटर एक और ऐसा तरीका है जिससे ओवुलेशन पीरियड की जानकारी मिल सकती है। यह कैलकुलेटर ऑनलाइन भी आपको मिल जाता है इसके इस्तेमाल के लिए आपको इसमें आपको अपने पिछले मासिक धर्म चक्र के पहले दिन और दूसरे पीरियड आने के एक दिन पहले की तारीख डालनी पड़ती है। उसके बाद जब आप इन तारीखों को दर्ज करते हैं, तो कैलकुलेटर आपके ओवुलेशन पीरियड को दिखाता है।

कैलेंडर का इस्तेमाल

यदि आपके पीरियड्स सही समय पर आते हैं तो आप कैलेंडर का इस्तेमाल करके भी अपने ओवुलेशन पीरियड के बारे में जान सकते हैं। इसके लिए आप आपको जब पीरियड्स आते हैं तो उस दिन से गिनते है जो बारह से सोलह दिन का समय होता है उसी के बीच आपका ओवुलेशन पीरियड होता है। लेकिन यदि आपके पीरियड्स रेगुलर नहीं होते हैं तो आपको ओवुलेशन पीरियड जानने में दिक्कत हो सकती है।

तो यह हैं ओवुलेशन पीरियड से जुडी जानकारी, यदि आप भी अपने ओवुलेशन पीरियड के बारे में जानना चाहती है तो आप भी इन टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन यदि आपको फिर भी अपने सही ओवुलेशन का पता नहीं चल पा रहा है तो इसके लिए एक बार आपको डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

पेट में बेबी उल्टा हो जाए तो क्या करना चाहिए

गर्भ में शिशु

गर्भ में शिशु अपनी ही दुनिया में होता है लेकिन उसका विकास पूरी तरह से गर्भवती महिला पर निर्भर करता है। क्योंकि जो भी महिला खाती है, सोचती है उन सभी चीजों का असर शिशु पर पड़ता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अपनी सेहत और स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। साथ ही कई बार प्रेग्नेंट महिला द्वारा की गई लापरवाही के कारण शिशु के विकास में कमी, इन्फेक्शन की समस्या, खून की कमी के कारण होने वाली परेशानी का शिशु को सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ कई बार गर्भ में शिशु की पोजीशन में बदलाव होने के कारण शिशु के उल्टे होने की समस्या भी हो सकती है।

शिशु के गर्भ में उल्टे होने के कारण

गर्भ में शिशु के उल्टे होने का कारण शिशु का गर्भ में अपने आप ही पोजीशन का बदलना हो सकता है, क्योंकि शिशु का आकार जब छोटा होता या बड़ा होता तो वो अपनी मर्ज़ी से ही गर्भ में घूमता है। उस पर आपका कोई जोर नहीं होता है, ऐसे में शिशु और माँ दोनों को कोई नुकसान न हो इसके लिए गर्भवती महिला को डॉक्टर्स पूरे आराम की सलाह देते हैं। लेकिन फिर भी कई बार गर्भ में शिशु के उल्टे होने की दिक्कत सामने आती है, साथ ही ऐसा भी नहीं है की शिशु उसके बाद अपनी पोजीशन बदल नहीं सकता है क्योंकि कुछ केस ऐसे भी देखने को मिलते हैं जहां डिलीवरी होने का समय पास आने तक शिशु अपनी सही पोजीशन में आ जाता है।

गर्भ में शिशु के उल्टे होने पर डिलीवरी

डिलीवरी को लेकर हर प्रेग्नेंट महिला में मन यह उलझन रहती है की उसकी डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन, ऐसे में यदि आपकी प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं है तो नोर्मल डिलीवरी होने के चांस होते हैं। लेकिन यदि प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स हैं या गर्भ में शिशु उल्टा है तो ऐसे में नोर्मल डिलीवरी का चांस लेने के कारण शिशु और महिला दोनों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की गर्भनाल के दबने के कारण शिशु तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती है, शिशु के मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है, शिशु के कूल्हे व् जांघ की हड्डी से जुडी परेशानी हो सकती है, आदि। इसीलिए डॉक्टर्स से इस मामले में राय लेना बहुत जरुरी होता है, और ज्यादातर डॉक्टर्स शिशु के गर्भ में उल्टा होने पर सिजेरियन डिलीवरी की ही राय देते हैं।

शिशु के गर्भ में उल्टा होने पर क्या करना चाहिए

यदि आप अल्ट्रासॉउन्ड के माध्यम से या डॉक्टरी जांच के दौरान यह पता चला है की आपका शिशु गर्भ में उल्टा है तो आपको कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की शिशु के गर्भ में उल्टा होने पर क्या करना चाहिए।

डॉक्टर से राय

यदि प्रेगनेंसी के पहले या दूसरे अल्ट्रासॉउन्ड के दौरान या जांच के समय आपको पता चलता है की गर्भ में शिशु की पोजीशन उल्टी है तो आपको डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए, क्योंकि शिशु का आकर कम होने के कारण शिशु की पोजीशन में बदलाव लाने के लिए आप क्या कर सकती है। इसके लिए डॉक्टर आपको बेहतर तरीके से राय दे सकते हैं।

एक्सरसाइज

कुछ ऐसी एक्सरसाइज होती है जिन्हे यदि गर्भवती महिला गर्भ में शिशु के उल्टे होने पर करती है तो इससे गर्भ में शिशु की पोजीशन की सही करने में मदद मिलती है। ऐसे में इन एक्सरसाइज के बारे में एक बार डॉक्टर से बात करनी चाहिए और डिलीवरी का समय पास आने तक इन्हे नियमित रूप से करना चाहिए।

एक्टिव रहें

यदि गर्भवती महिला एक्टिव रहती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु को बेहतर मूवमेंट करने में मदद मिलती है, जिससे उसकी पोजीशन में बदलाव आने के चांस बढ़ सकते हैं, लेकिन इस बात का धयान रखें की पेट पर किसी भी तरह का दबाव या जोर न पड़े।

तनाव न लें

शिशु की गर्भ में पोजीशन को जानने के बाद महिला को तनाव लेने से बचना चाहिए, क्योंकि तनाव गर्भवती महिला और गर्भ में शिशु की मुश्किलों को बढ़ा सकता है। गर्भ में शिशु को कोई समस्या न हो, डिलीवरी के दौरान महिल को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े इसके लिए गर्भवती महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए, और जितना हो सके खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए।

एक्सटर्नल सफालिक वर्शन

इस प्रक्रिया को CVC के नाम से जाना जाता है, इसका इस्तेमाल भी गर्भ में शिशु की पोजीशन को सही करने के लिए किये जाता है। यदि गर्भवती महिला व्यायाम नहीं कर पाती है इस प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियों का सामना करती है तो ऐसे में डॉक्टर एक्सटर्नल सफालिक वर्शन नामक प्रक्रिया की सलाह भी देते है। और इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर अपने हाथों से महिला के पेट के बाहर से ही बच्चे को सीधा करने की कोशिश करते है और यह सब डॉक्टर प्रेगनेंसी के आखिरी हफ़्तों में करते है, और ऐसा भी जरुरी नहीं होता है की इससे यह सही हो जाएगा।

तो यह हैं गर्भ में शिशु की पोजीशन से जुडी कुछ बातें ऐसे में यदि आप गर्भवती है और आप भी गर्भ में शिशु की पोजीशन को लेकर चिंतित है। तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान अपनी बेहतर तरीके से केयर करनी चाहिए ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

बढ़ते वजन से परेशान हैं? आज ही शुरू करें यह दिनचर्या

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मोटापे और शरीर के बढ़ते वजन का सबसे बड़ा कारण आपकी खराब दिनचर्या होती है। क्योंकि यदि न आपके सोने का समय न उठने का समय है, खाने के प्रति आप लापवाही करते हैं, पौष्टिक आहार लेने बजाय जंक फ़ूड का सेवन करते है, किसी भी तरह का व्यायाम नहीं करते हैं, आदि। तो ऐसे में आपकी बॉडी की फिटनेस पर बुरा प्रभाव पड़ता है। क्योंकि अधिक तेलीय खाना खाने के कारण आपके शरीर में कैलोरी बढ़ती है, और व्यायाम न करने के कारण वो खत्म नहीं होती है। जिसके कारण वो धीरे धीरे चर्बी में बदलने लगती है और आपका वजन बढ़ने लगता है। और शरीर में बढ़ती चर्बी अकेली नहीं होती है बल्कि यह बहुत सी बीमारियों को भी शरीर में आमंत्रित करती है।

बढ़ते वजन को कम करने के लिए इन टिप्स का ध्यान रखें

बढ़ते वजन के कारण न केवल आपको शारीरिक रूप से परेशानी होती है बल्कि इसके कारण आपकी पर्सनैल्टी पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। और बढ़ते वजन का कारण आपकी खराब जीवनशैली और गलत दिनचर्या होती है। तो आइये अब हम आपको बताते हैं की वजन को कम करने के लिए आपकी दिनचर्या कैसी होनी चाहिए।

समय से उठें

यदि आपको फिट रहना है, वजन कम करना है, तो इसके लिए सबसे जरुरी है की आप सुबह समय से उठने की आदत डालें, ऐसा करने से आपको अपनी दिनचर्या को सही करने में मदद मिलेगी। और जब आपकी दिनचर्या सही होगी तो आपके सभी काम सही समय से होंगे जिससे आपके वजन को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही सुबह समय से उठने से आपको और भी बहुत से फायदे मिलते है।

व्यायाम करें

शरीर में होने वाली एक्स्ट्रा कैलोरी को बर्न करने के लिए बहुत जरुरी है की आप व्यायाम करें। और सुबह उठने के बाद आपको आधा घंटा व्यायाम जरूर करना चाहिए, जैसे की दौड़ लगानी चाहिए, साइकिलिंग करनी चाहिए, पुशअप्स लगाने चाहिए, आदि। नियमित यदि आप ऐसा करते है तो इससे आपकी बॉडी को फिट रहने में मदद मिलती है, साथ ही आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी भी बहुत फायदे होते हैं।

आहार में न करें लापरवाही

यदि आप अपने आहार का सेवन सही ढंग से और सही समय से नहीं करते हैं तो इसका असर भी आपको बहुत बुरी तरह से प्रभावित करता है, जिसके कारण आपको वजन बढ़ने की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है। ऐसे में यदि आप चाहते हैं की आपका वजन नियंत्रित रहे तो इसके लिए आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप दिन में तीन बड़े मील लेने की जगह छह छोटे मील लें, खाने के समय में ज्यादा गैप न रखें, खाने को अच्छे से चबाकर खाएं, ताजा व् पौष्टिक तत्वों से भरे आहार का सेवन करें।

पानी का करें भरपूर सेवन

पानी का भरपूर सेवन करने से आपके शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं, व् यह आपको ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करता है। साथ ही पानी का भरपूर सेवन करने से आपके शरीर में मौजूद एक्स्ट्रा कैलोरी को भी कम करने में मदद मिलती है। इसके लिए आप सुबह उठकर दो गिलास पानी जरूर पीएं, इससे आपके मेटाबोलिज्म को बेहतर होने में मदद मिलती है जिससे आपका वजन सही रहता है। इसके अलावा आपको वजन कम करने के लिए दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।

जंक फ़ूड से रखें दूरी

आज कल का युवा वर्ग हो या बच्चे जंक फ़ूड के बहुत अधिक शौकीन होते है, और जंक फ़ूड मोटापे और वजन बढ़ने का सबसे बड़ा कारण होता है। ऐसे में आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप जंक फ़ूड का सेवन न करें क्योंकि इसमें बहुत अधिक मात्रा में बैड कोलेस्ट्रॉल, वसा और अधिक कैलोरी होती है जो की बहुत नुकसानदायक होती है और इसका सेवन अधिक करने से आपका वजन तेजी से बढ़ने लगता है। इसीलिए बढ़ते वजन को कम करने के लिए आपको जंक फ़ूड का सेवन कम करना चाहिए।

स्नैक्स भी हैं जरुरी

खाने में ज्यादा लम्बा अंतराल नहीं रखना चाहिए यह भी मोटापे का एक कारण होता है ऐसे में दिन में दो बार स्नैक्स का सेवन जरूर करना चाहिए। स्नैक्स में आप ग्रीन सलाद या फ्रूट सलाद बनाकर खा सकते हैं।

रात का खाना खाएं जल्दी

वजन बढ़ने का सबसे बड़ा कारण होता है की आपके भोजन का अच्छे से हज़म न होना और ज्यादातर यह समस्या रात के भोजन की वजह से होती है। क्योंकि लोग रात का खाना खाते ही सो जाते हैं। ऐसे में आपको अपना वजन कम करने के लिए चाहिए की आप रात को सोने से कम से कम दो घंटे पहले भोजन कर लें, और जितना हो सके रात का आहार हल्का लें। और खाना खाने के बाद पांच से दस मिनट वॉक जरूर करें यदि आप आप नियमित ऐसा करते हैं तो इससे आपके वजन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

ग्रीन टी पीएं

ग्रीन टी भी आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होने के साथ आपके मेटाबोलिज्म रेट को बेहतर करने में मदद मिलती है। जिससे आपका वजन कंट्रोल में रहता है इसीलिए आपको दिन में दो कप ग्रीन टी का सेवन जरूर करना चाहिए, और ध्यान रहें की खाना खाने के बाद तुरंत बाद इसका सेवन न करें। खाना खाने के आधे घंटे बाद इसका सेवन करें दिन में दो कप ग्रीन टी भी आपकी वजन से जुडी परेशानी को हल करने में मदद करती है।

नींद ले भरपूर

जो लोग नींद के प्रति लापरवाही करते है इससे उनके मेटाबोलिज्म पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जिसके कारण उनका वजन बढ़ने लगता है इसीलिए बढ़ते वजन को कम करने, फ्रैश और फिट रहने के लिए जरुरी है की आप एक दिन में कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लें। भरपूर नींद लेने से आपको पूरा दिन फ्रेश महसूस होता है और आप ऊर्जा से भरपूर रहते हैं।

बढ़ते वजन को कम करने के लिए इन बातों का ध्यान रखें

  • अपने आहार में न तो ज्यादा मीठे का सेवन करें और नमक की भी पर्याप्त मात्रा लें।
  • तनाव न लें, क्योंकि तनाव भी आपके शरीर से जुडी परेशानियों का कारण होता है।
  • घर में बनाएं खाने में भी ज्यादा मसालों का उपयोग न करें।
  • नशे से रखें दूरी क्योंकि शराब पीने से भी वजन में बढ़ोतरी होती है।
  • खाना खाने के बाद थोड़ा वॉक जरूर करें, और खाना खाने के बाद कभी भी तुरंत न सोएं।
  • ग्रीन सलाद का सेवन जरूर करें।
  • दो से तीन गिलास गुनगुना पानी दिन में जरूर पीएं।
  • रात को समय से सोएं ताकि समय से उठ सकें जिससे आपको सही दिनचर्या बनाने में मदद मिल सके।

तो यह है कुछ खास टिप्स जिन्हे यदि आप अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं। तो ऐसा करने से आपको बढ़ते वजन की समस्या से छुटकारा मिलने के साथ फिट रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की यदि आप अपनी दिनचर्या को सही रखते है तो ऐसा करने से आपको बहुत सी शारीरिक परेशानियों से दूर रहने में मदद मिलती है जिससे आप स्वस्थ रहते हैं।

लड़का या लड़की होने का एक कारण तनाव भी हो सकता है?

लड़का या लड़की ऐसे जानें, प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जहां महिला को अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखने के साथ खुश रहने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के साथ भ्रूण को भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली शारीरिक परेशानियों व् बॉडी में रहे बदलाव के कारण प्रेग्नेंट महिला तनाव में आ सकती है।

और प्रेगनेंसी के दौरान तनाव प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है। साथ ही इसके कारण शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास पर भी असर पड़ सकता है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा एक नई रिसर्च में भ्रूण लड़का है या लड़की इसे प्रेग्नेंट महिला के तनाव से जोड़ा जा रहा है।

यानी की जिस तरह से बहुत लोग प्रेग्नेंट महिला के शरीर में हो रहे बदलाव को देखकर अंदाजा लगा लेते हैं। की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की उसी तरह प्रेग्नेंट महिला के तनाव लेने से भी यह अनुमान लगाया जा सकता है। की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की है। तो आइये अब इसे जुडी बातों को विस्तार से जानते हैं।

तनाव से कैसे पता चलता है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की?

भ्रूण लड़का या लड़की

एक रिसर्च के अनुसार ऐसा माना जाता है की तनाव का सबसे ज्यादा असर प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में पड़ता है। और इसी समय में भ्रूण के शरीर के सभी अंगो की आकृतियां बनने के साथ शिशु का लिंग निर्धारण भी होता है। लेकिन इसके बारे में प्रेग्नेंट महिला को पता नहीं चलता है, क्योंकि वह बदलाव बॉडी के अंदर हो रहे होते हैं।

वैसे शिशु के लिंग की जांच करवाना एक कानूनी अपराध है। लेकिन इसका अंदाज़ा लगाना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। खासकर घर के बड़े बुजुर्ग तो अक्सर इसका अंदाजा लगते रहते हैं।वैसे ही गर्भावस्था के दौरान यदि प्रेग्नेंट महिला तनाव लेती है तो इसे देखकर भी बताया जा सकता है की पैदा होने वाला शिशु लड़का होगा या लड़की।

जैसे की यदि प्रेग्नेंट महिला बहुत अधिक तनाव में रहती है तो इसके कारण भ्रूण के लड़का होने की दर घट जाती है और लड़की होने के चांस बढ़ जाते हैं। और यदि महिला खुश रहती है प्रेगनेंसी के दौरान मानसिक रूप से रिलैक्स रहती है तो इससे भ्रूण के लड़का होने की दर बढ़ जाती है और लड़की होने के चांस घट जाते हैं।

गर्भावस्था में तनाव लेने के नुकसान

प्रेग्नेंट महिला को गर्भावस्था के दौरान तनाव न लेने और मानसिक रूप से रिलैक्स रहने की सलाह दी जाती है। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला का तनाव लेना प्रेग्नेंट महिला की मुश्किलों को बढ़ाने के साथ भ्रूण के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान तनाव लेने से कौन से नुकसान हो सकते हैं।

  • गर्भवती महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती है।
  • तनाव लेने के कारण महिला की भूख कम भी हो सकती है और भूख बढ़ भी सकती है और दोनों ही प्रेग्नेंट महिला की सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है।
  • तनाव के कारण महिला आलस अधिक महसूस करती है।
  • बहुत ज्यादा चिड़चिड़ापन व् गुस्सा गर्भवती महिला को आ सकता है।
  • भ्रूण के शारीरिक व् मानसिक व् मानसिक विकास में कमी का एक कारण प्रेग्नेंट महिला का तनाव लेना भी हो सकता है।
  • प्रेग्नेंट महिला के तनाव लेने के कारण समय से पहले डिलीवरी होने के चांस भी बढ़ जाते हैं।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान तनाव लेने से लिंग का कैसे पता चलता है। उससे जुडी जानकारी व् प्रनन्सी के दौरान तनाव के कारण कौन से नुकसान हो सकते हैं। तो इन परेशानियों से गर्भवती महिला व् भ्रूण को बचाव मिल सके इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को तनाव लेने से बचना चाहिए।

माहवारी (period) नहीं होने के क्या कारण होते हैं

महिलाओ को पीरियड्स आना एक सामान्य प्रक्रिया है, जो हर हर महीने 28 दिनों के चक्र के बाद दुबारा होती है। पीरियड्स के दौरान महिलाओ के प्राइवेट पार्ट से रक्त का प्रवाह होता है। ऐसे में यदि कभी पीरियड मिस हो जाता है तो महिलाओ के दिमाग में सबसे पहली बात यही आती है की कहीं वो प्रेग्नेंट तो नहीं हो गई है। और पीरियड्स मिस होने के बाद ज्यादा से ज्यादा दस दिनों बाद आपको पता चल जाता है की आप प्रेग्नेंट है या नहीं। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट नहीं है तो पीरियड क्यों मिस हुआ है?

पीरियड्स मिस होने पर आपको इसमें लापवाही न करते हुए तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। पीरियड्स महिला को गर्भावस्था के दौरान भी नहीं होते है, इसके अलावा पीरियड्स न होने के कई और कारण भी हो सकते है, जैसे की डिलीवरी के बाद शिशु को स्तनपान करवाने के दौरान, मानसिक तनाव के कारण व् अन्य। तो आइये आज हम आपको विस्तार से बताते हैं की पीरियड्स मिस होने के कौन कौन से कारण होते है।

पीरियड्स मिस होने के कौन कौन से कारण होते है:-

वजन में बदलाव आने के कारण:-

यदि आपका वजन या तो तेजी से बढ़ता है या घटने लगता है तो ऐसे में भी आपको पीरियड्स मिस होने की परेशानी होती है। क्योंकि इसके कारण दिमाग की एक ग्रंथि पर इसका प्रभाव पड़ता है, जो की आपकी बॉडी की गतिविधियों को नियंत्रित करती है। जब आपका वजन कम होता है तो पर्याप्त मात्रा में एस्ट्रोजन का स्त्राव नहीं होता है,

जो की गर्भाशय की परत बनाने के लिए जरुरी होता है, और जब आपका वजन अधिक बढ़ जाता है तो इससे अधिक मात्रा में एस्ट्रोजन का स्त्राव होता है, जिसके कारण आपको पहले तो ज्यादा पीरियड आने लगता है,और उसके बाद पीरियड्स मिस होने की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

दवाइयों के साइड इफ़ेक्ट के कारण:-

जो महिलाएं गर्भपात के लिए अधिक दवाइयों का सेवन करती है, इस किसी अन्य बिमारी के लिए अधिक दवाइया लेती है, तो इसके कारण भी उनका मासिक धर्म प्रभावित होता है। जिसके कारण उन्हें पीरियड्स न आने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा कीमोथेरपी की दवाइयों का सेवन करने से भी आपकी माहवारी से जुडी परेशानी हो सकती है।

मानसिक तनाव के कारण:-

आप यदि किसी भी परेशानी की वजह से तनाव लेते है तो इसका सीधा असर आपके दिमाग की गतिविधियों पर पड़ता है। जो की आपकी पूरी बॉडी की गतिविधियों को नियंत्रित करती है। और यदि आप तनाव लेते है तो इसके कारण आपके पीरियड्स भी प्रभावित होते है। जिसके कारण कई बार उनके लेट या फिर न होने की परेशानी का सामना आपको करना पड़ता है।

ब्रेस्टफीडिंग (स्तनपान) के कारण:-

माहवारी के न होने का एक कारण शिशु को स्तनपान करवाना भी हो सकता है। यदि डिलीवरी के बाद आपको पीरियड्स नहीं आते है तो इसका ये मतलब बिलकुल नहीं होता है की आप दुबारा प्रेग्नेंट है। बल्कि यदि बच्चा दूध पीना बंद कर दे, और फिर भी आपको पीरियड्स न आए तो आपके लिए परेशानी हो सकती है, इसके लिए आपको अपने डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।

मेनोपॉज़ की अवस्था में:-

यह एक ऐसी स्थति है जिसके बाद हर महिला को पीरियड्स आने बंद हो जाते है। कई महिलाओ को यह चालीस साल की उम्र के बाद तो कई महिलाओ को उसके बाद भी यह समस्या होती है। इसमें घबराने वाली बात नहीं होती है क्योंकि यह भी एक शारीरिक प्रक्रिया होती है।

ज्यादा व्यायाम करने के कारण:-

अपनी बॉडी को फिट रखने के लिए व्यायाम करना बहुत जरुरी होता है। लेकिन यदि आप बहुत अधिक व्यायाम करते है तो कई बार इसके कारण एस्ट्रोजन का स्तर पूरा नहीं हो पाता है। जिसके कारण आपको पीरियड्स मिस होने की या देरी से होने की परेशानी का सामना आपको करना पड़ सकता है।

थायरॉयड की समस्या होने पर:-

थायरॉयड हमारे शरीर में होने वाली एक ग्रंथि होती है। जो हमारे शरीर में मेटाबोलिज्म को नियंत्रित करने में मदद करती है। यदि आपको यह समस्या होती है तो इसके कारण आपके पीरियड्स भी प्रभावित होते है, यह उस बात पर भी निर्भर करना है की आपको वजन बढ़ने वाला या कम होने वाला थायरॉयड है। तो इसके कारण भी आपको पीरियड्स मिस होने की परेशानी हो सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान:-

पीरियड्स न आने पर ही महिलाओ को लगता है की वो प्रेग्नेंट है। यदि महिला प्रेग्नेंट होती है तो नौ महीने तक महिलाओ को यह समस्या नहीं होती है। और डिलीवरी के तुरंत बाद ही महिलाओ को पीरियड आता है, और इस समय बहुत ब्लीडिंग होने के साथ यह काफी दिन तक होता है।

तो ये है कुछ कारण जिनकी वजह से आपको माहवारी नहीं आती है। लेकिन यदि आपको पीरियड्स समय से नहीं आते है, या रक्त का ज्यादा प्रवाह होता है, या ज्यादा दिनों तक ब्लीडिंग होती है, तो पीरियड्स से जुडी इन परेशानियों को भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, और एक बार इस बारे में डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।

शादी के बाद मोटी होने के क्या कारण होते है?

Reasons Of Weight Gain After Marriage

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आपने अक्सर ये देखा और सुना होगा की लड़कियों का वजन शादी के बाद बढ़ जाता है। फिर भले ही शादी से पहले वो कितनी ही कसरत और योग करती हो। अक्सर पतली लड़कियों के लिए घर की दादी माँ भी कहती है की ‘इसका वजन शादी के बाद बढ़ेगा’। लेकिन क्या वाकई ऐसा होता है? शायद हाँ।

आपके आसपास भी किसी लड़की या लड़के की शादी हुई होगी। और कुछ समय बाद ही आपने देखा भी होगा शादी के कुछ दिनों बाद ही लड़कियों और बहुओं के वजन में एक खास अंतर आ जाता है। लेकिन इसकी वजह क्या होती है इस बारे में कोई नहीं जानता। कोई इसे लाढ-प्यार का नतीजा मानता है तो कोई इसके लिए अपनी दिचर्या को दोष देने लगता है। जबकि इसके अलावा भी बहुत से ऐसे कारण होते है जो शादी के बाद आपका वजन बढ़ाने के लिए उत्तरदायी होती है।शादी के बाद मोटा होने के कारण

और आज हम इसी पहलु पर बात करने जा रहे है की आखिर शादी के बाद अचानक लड़कियों के वजन में इतना बदलाव क्यों आ जाता है? क्यों शादी के कुछ महीनों बाद लड़कियां मोटी हो जाती है? तो आइये विस्तार से जानते है उन कारणों के बारे में –

शादी के बाद लड़कियों का वजन क्यों बढ़ जाता है?

1. हॉर्मोनल बदलाव :

शादी के बाद लड़कियां एक नए रिश्ते में बंध जाती है। जिसके बाद उनपर काफी सारी जिम्मेदारियां आ जाती है। जिनमे से एक है पत्नी की जिम्मेदारी। शादी के बाद आपके जीवन में बहुत से बदलाव आते है। जिसके चलते आपके शरीर में भी कई हॉर्मोनल बदलाव भी आते है। शादी के बाद लड़कियां बहुत खुश रहने लगती है। शायद इसलिए भी इस दौरान लड़कियां मोटी हो जाती है।

2. भावनाएं :

किसी संबंध में आने के पश्चात् आपके भीतर किसी तरह की हिचकिचाहट नहीं रहती। जिससे आप काफी रिलैक्स फील करने लगती है। इमोशनल ईटिंग की बात करें तो यह दो बातों पर निभर है। 1 – जरुरत से ज्यादा ख़ुशी और 2 – जरुरत से ज्यादा दुःख। आपका खान पान ही एक मात्र ऐसा जरिया है जो आपके मन की भावनाओं को व्यक्त करता है। शादी के बाद ख़ुशी के कारण लड़कियां अक्सर अपने खान पान पर ध्यान नहीं दे पाती। जिससे उनका लगातार बढ़ने लगता है। जो सीधे सीधे बताता है की वे काफी खुश है।

3. नई जिंदगी :

शादी के बाद से लड़कियों की पूरी लाइफ चेंज हो जाती है। शादी से पहले तो सभी अपने खान पान का विशेष ध्यान रखती है। क्यूंकि शादी के दिन उन्हें स्लिम ट्रिम और फिट जो दिखना होता है। लेकिन शादी के बाद वे अपनी डाइटिंग पर ध्यान देना भूल जाती है। जिसके चलते उनका वजन बढ़ने लगता है। अगर पति और पत्नी दोनों जॉब कर रहे है तो उस स्थिति में वीकेंड पर आप बाहर का खाना खाना पसंद करते है जो सीधे सीधे आपके वजन को बढ़ाने का काम करता है।

4. भाग दौड़ से आजादी :

आपको याद होगा जब आपकी शादी होने वाली थी या होने वाली है तो आप कितनी भाग दौड़ करती है। यहाँ जाना वहां जाना, यहाँ से शॉपिंग करना उस दूकान में जाना। कहा कहाँ नहीं जाते। अपने इलाके की हर दूकान आप जरुर घुमती है। ऊपर से घरवालों के काम अलग। कभी इस रस्म के लिए उधर जाना है तो कभी ये काम के लिए इधर जाना है। इस बीच न चाहते हुए भी आपका वजन सामान्य से 2-3 किलो तो कम हो ही जाता है। और शादी के बाद आपको इन सभी झंझटों को छुटकारा मिल जाता है। जिसके बाद जैसे ही आप अपनी सामान्य लाइफ जीने लगती है तो आपका वजन फिर से पहले की तरह हो जाता है।

5. दिनचर्या बदलना :happy mood

अपने घर पर आप भले ही सुबह कितने ही बजे जागती होंगी लेकिन ससुराल में आकर आपका सारा टाइम टेबल चेंज हो जाता है। सुबह जल्दी जागना फिर समय से नहाना, खाना बनाना, घर का काम काज। इस बीच आपको पता भी नहीं लगता और आपकी कसरत भी होती रहती है। साथ ही आपके जीवन में एक परफेक्ट दिनचर्या भी बन जाती है। जो शायद शादी से पहले नहीं थी। ऐसे में वजन बढ़ना बहुत मामूली बात है।

6. खाने पीने की आदत :

अपने घर में सभी लड़कियां बिंदास लाइफ जीती है जबकि सुसराल आकर उन्हें हर नियम का पालन करना होता है। जिसमे एक नियम खान पान से भी रिलेटेड होता है। भले ही आप अपने घर में 10 बजे खाना खाती हो लेकिन ससुराल में आपका खाना उसी समय होगा जो वहां पहले से निर्धारित है। इसके अलावा नई नवेली दुल्हन को हर कोई स्पेशल ट्रीटमेंट देने का प्रयास करता है फिर चाहे वो उनके पति है या उनके ससुराल वाले। ऐसे में आपको तरह तरह की स्पेशल डिशेस खाना को मिलती है। जिसके बात आपका वजन तो बढेगा ही।

7. ये भी है कारण :

शादी वाले दिन हर लड़की बहुत आकर्षक दिखना चाहती है। जिसके लिए वेह काफी महीने पहले से ही कसरत व्यायाम आदि करना शुरू कर देती है। लेकिन शादी होने के बाद अक्सर कसरत और व्यायाम के लिए टाइम नहीं मिल पाता जिसके चलते आपका वजन बढ़ने लगता है। इसके अलावा लगातार मिलने वाली बधाइयों की ख़ुशी से भी आपका वजन बढ़ जाता है। अब तो आप समझ ही गयी होंगी की आखिर शादी के बाद लड़कियों का वजन अचानक क्यों बढ़ जाता है।

अगर आपका वजन भी कुछ बढ़ गया है और आप उसे घटाने के बारे में सोच-सोच कर परेशान हो रही है तो टेंशन न लें क्योंकि थोडा समय बीत जाने के बाद आपका वजन अपने आप ही नियंत्रण में आ जाएगा। जिससे आप पहले की तरह स्लिम ट्रिम और आकर्षक दिखने लगेंगी।

शादी के कितने दिनों बाद बेबी प्लान करना चाहिए

शादी के कितने दिनों बाद बेबी प्लान करना चाहिए, बेबी प्लान करने की सही उम्र क्या होती है, शादी के बाद कब करें बेबी प्लान, शिशु के जन्म के लिए शादी के बाद कब करें तैयारी, Baby planning after Marriage

शिशु का जन्म माँ बाप दोनों के लिए ही बहुत ख़ुशी का समय होता है। लेकिन आज के समय में ज्यादातर कपल शादी के थोड़े समय बाद ही बच्चे की प्लानिंग करते हैं, क्योंकि शादी के बाद एन्जॉय करने के साथ यदि वो अभी शिशु की जिम्मेवारी उठाने के काबिल नहीं समझते हैं तो वो बच्चे की प्लानिंग नहीं करते हैं। और केवल लडकियां ही नहीं बल्कि आजकल पुरुष भी चाहते हैं की जब तक वो पूरी तरह से बच्चे की जिम्मेवारी नहीं उठा सकते तब तक शिशु को प्लान न करें। लेकिन क्या आप जानते हैं की शिशु के जन्म लेने के लिए भी एक सही समय होता है।

और यह इस बात पर निर्भर करता है की आप शादी कब करते हैं, जैसे की यदि आप बीस साल की उम्र में शादी कर लेते हैं तो आप तीन चार साल बाद भी बच्चा प्लान कर सकते हैं। लेकिन यदि आप शादी तीस की उम्र में करते हैं तो उसके बाद शिशु की प्लानिंग में देरी आपके लिए परेशानी का कारण बन सकती है। क्योंकि रिसर्च के अनुसार बचा पैदा करने की सही उम्र तेईस से पच्चीस होती है। ऐसा इसीलिए क्योंकि इस समय शुक्राणु अच्छे से परिपक्व होते हैं जो प्रेगनेंसी के लिए परफेक्ट होते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की शादी के बाद बच्चा कब प्लान करना चाहिए।

उम्र का रखे ध्यान

आज कल लडकियां माँ बनने से घबराती हैं क्योंकि उन्हें लगता है की शायद अभी वो इस जिम्मेवारी को उठाने लायक नहीं है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ हॉर्मोन का स्तर भी गिरने लगता है, साथ ही अंडाशय में अंडे बनने भी उम्र के साथ कम होने लगते हैं। ऐसे में पच्चीस साल की उम्र तक यदि आप शादी हो जाती है, तो आपको प्रेगनेंसी का निर्णय ले लेना चाहिए। और यदि इससे अधिक जैसे की अठाइस या तीस वर्ष की उम्र में शादी होती है तो आपको प्रेगनेंसी के लिए ज्यादा देरी नहीं करनी चाहिए। हां लेकिन यदि आप कम उम्र जैसे की बीस या बाइस की उम्र में शादी होती है तो आप थोड़ा रुक सकती हैं।

पार्टनर का भी रखें ध्यान

केवल महिला की उम्र ही मायने नहीं रखती है, बल्कि पुरुष की उम्र भी मायने रखती है। यदि दोनों पार्टनर में उम्र का ज्यादा गैप हो तो भी आपको देरी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि पुरुष के शुक्राणु की क्वालिटी भी धीरे धीरे कम होने लगती है। और उनका हॉर्मोन का स्तर भी गिरने लगता है। जिसके कारण बाद में महिला को प्रेगनेंसी न होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए शादी के बाद बच्चा प्लान करने में इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए।

शादी की उम्र के अनुसार बेबी प्लान करते समय इन बातों का रखे ध्यान

  • यदि आप शादी बीस की उम्र के आस पास होती है तो आप थोड़ा समय ले सकती है, और बेबी प्लानिंग के लिए इंतेज़ार कर सकती है।
  • पच्चीस से तीस की उम्र में शादी होने के बाद आपको आपको ज्यादा देरी न करते हुए जल्दी से जल्दी बेबी प्लान करना चाहिए।
  • तीस की उम्र में यदि आपकी शादी होती है या पेंतीस की उम्र में होती है या इससे भी ज्यादा उम्र में होती है, तो आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप अपने शरीर की जांच अच्छे से करवाए, और उसके बाद जितना जल्दी हो सके शिशु प्लान करें। क्योंकि इस दौरान शुक्राणु की बेहतर क्वालिटी न होने के कारण और हॉर्मोन का स्तर गिरने के कारण जन्म लेने वाले शिशु को दिक्कत हो सकती है।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान आपको शादी के बाद बेबी प्लान करते समय रखना चाहिए। और शादी के बाद बेबी प्लान के लिए आपकी बॉडी की फिटनेस और आपकी उम्र मायने रखती है इसीलिए दोनों का ध्यान रखते हुए आपको बेबी प्लान करना चाहिए।

गर्भवती महिला गोरा और क्यूट बच्चा होने के लिए ये चीजें खाएं

Foods to Eat During Pregnancy To Get A Fair Baby : हर महिला के लिए वो मूमेंट सबसे ज्यादा खास होता है जब उसे पता चलता है की उसकी कोख में एक नन्ही सी जान पल रही है। मातृत्व का ये एहसास किसी भी एहसास से सबसे बड़ा होता है शायद इसलिए शिशु के गर्भ में आते ही माँ उसकी देखभाल के बारे में सोचने लगती हैं?

हर माँ यही चाहती है की उनका आने वाला बेबी बाल गोपाल की तरह क्यूट और गोरा हो। जिसके लिए वे काफी मेहनत भी करती है। डॉक्टर भी इसके लिए गर्भवती महिला को अपने खान-पान पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। आज हम आपको उन्ही कुछ खाने की चीजों के बारे में बता रहे हैं जिन्हे खाने से आपका आने वाला बच्चा गोरा और क्यूट पैदा होगा।

बच्चा क्यूट और गोरा पैदा हो इसके लिए क्या खाएं?

(Pregnancy Food To Get Fair Baby)

1. नारियल :

गर्भावस्था के दौरान नारियल खाने से होने वाला बच्चा गोरा पैदा होता है। क्योंकि इसमें बहुत से तत्व पाए जाते है जो बच्चे की त्वचा की रंगत को निखारने का काम करते है। इसे खाने से तनाव भी कम होता है और नींद अच्छी आती है।

2. बादाम :

रोजाना भीगे हुए बादाम खाने से भी बच्चा सुंदर और क्यूट पैदा होता है। इससे केवल बच्चे की स्किन ही नहीं बल्कि हेल्थ भी अच्छी होती है। और ये बच्चे के साथ साथ माँ के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।

3. केसर वाला दूध :

गर्भावस्था के दौरान रोजाना थोड़ी सी केसर दूध में उबालकर पीने से बच्चे की स्किन मुलायम होती है और वह गोरा पैदा होता है। लेकिन इसका अधिक सेवन बच्चे और माँ दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है इसलिए सिमित मात्रा में ही इस दूध का सेवन करें।

4. अंडा :

अगर आप अंडा खाती है तो ये आपके बच्चे के लिए अच्छा होगा। कहा जाता है दूसरी तिमाही में रोजाना अंडे का सफ़ेद भाग खाने से बच्चे का रंग गोरा होता है। और उसका शारीरिक विकास भी अच्छी तरह होता है।

5. संतरा :Santra Khaye

संतरे में विटामिन सी के गुण और एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते है जो त्वचा को गोरा करते है। नियमित रूप से रसीले संतरे का सेवन करने से होने वाला बच्चा गोरा और स्वस्थ होता है और उसका इम्यून सिस्टम भी स्ट्रांग होता है।

6. हरी सब्जियां :

गर्भवती स्त्रियों को अधिक से अधिक हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए, इससे बच्चे का रंग गोरा होता है। इनमे आयरन की अच्छी मात्रा पाई जाती है जिसकी गर्भवती महिला को बहुत आवश्यकता होती है।

7. अनार का जूस :

अनार का जूस पीने से भी गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत में निखार आता है, अनार में आयरन भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है इसलिए यह माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है।

8. देसी घी :

प्रेगनेंसी के दौरान देसी घी खाने से डिलीवरी में आसानी होती है और बच्चे का स्वास्थ्य और रंग अच्छा होता है। इसीलिए इस समय में देसी घी का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

9. अंगूर :

अंगूर का नियमित सेवन करने से भी होने वाले बच्चे का रंग गोरा होता है। लेकिन ध्यान रखें इसकी सही मात्रा का सेवन करना ही स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है।

10. आंवले का मुरब्बा :

रोजाना दिन में दो बार दो आंवले का मुरब्बा खाने से भी होने वाले बच्चे का रंग साफ़ होता है और उसका स्वास्थ भी बेहतर होता है।

अगर गर्भवती महिला ऊपर बताये गए खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन करेंगी तो निश्चित रूप से उनका होने वाला बच्चा गोरा और क्यूट पैदा होगा। लेकिन ध्यान रहे किसी भी चीज का अधिक सेवन करने से बचें और सीमित मात्रा में ही खाएं। और ये मात्रा अपने डॉक्टर से सलाह करके तय करें आपके और आपके बच्चा का स्वास्थ अच्छा रहेगा।

सर्दियों में क्या आपका चेहरा खुरदरा और रुखा हो गया है? अपनाए ये फेस पैक!

Winter Gharelu Face Pack : सर्दियाँ आते ही हाथ, पैर, और चेहरा का रंगत खराब हो जाता है। क्यों की हमारी त्वचा काफी रुखी और ड्राई हो जाती है। और चेहरे का रंग उड़ जाता है। इसे में लोग तरह तरह के उपाय अपनाने लगते हैं। और फिर ठीक होने की वजाय ख़राब हो जाता है। आज मैं आपको सर्दियों में अपनी त्वचा की रंगत को खोने से बचाने के लिए कुछ टिप्स बता रहे हैं, आप घर पर ही इसका फेसपैक बना कर इस समस्या से समाधान पा सकेंगे।

Dry Skin

१. शहद और मलाई

आप एक चम्मच शहद और दो चम्मच मलाई एक कटोरी में ले कर दोनों को अच्छी तरह से मिला लें। और फिर अपना चेहरा साफ़ पानी से धोकर हलके हलके से मालिस करें। करीब पंद्रह से २५ मिनट बाद आप अपने चेहरे को फिर साफ़ पानी से धो लें, ऐसा आप रोज दो बार करें। आपका चेहरा इन सर्दियों में भी चमक उठेगा और आपके चेहरे की रंगत भी बदल जाएगी।

२. मलाई, हलकीऔर बेसन

आप एक छोटी कटोरी में दो चमच्च मलाई और एक चमच्च बेसन और आधी चमच्च हल्दी ले कर अच्छी तरह से मिला लें। फिर अपने चेहरे को साफ़ पानी से धोकर हलके हाथ से अपने चेहरे गर्दन पर मसाज करें। आपकी डेड स्किन उतर जाएगी और चेहरा ग्लो करने लगेगा। बाद में आप कोल्ड क्रीम लगा लें ताकि चेहरे पर बेसन से होने वाले खिचाव को कम करेगा और फिर आपका चेहरा मुलायम और कोमल हो जायेगा।

३. मलाई और गुलाब की पंखुड़ी

दो चम्मच मलाई में एक चमच्च गुलाब पंखुड़ी को अच्छी तरह से मिला लें, फिर अपने चेहरे को साफ़ पानी से धोने के बाद हल्के हाथ से मालिश करें। आप खुद देखेंगे की आपका चेहरा खिला हां दिखने लगेगा। आप दिन में दो बार मलाई और गुलाब की पखुडी से मसाज करें और कम से कम पंद्रह मिनट तक रखें तभी ये फायदा करेगा।

४. चन्दन का पाउडर, मलाई और गुलाब जल

Dry Skin Honey and Chndan

एक चम्मच चन्दन का पाउडर में गुलाब जल और मलाई मिलाकर अपने चेहरे पे हलके हाथ से मालिश करें। आप अपने चेहरे और गर्दन पर लगा कर करीब १५ मिनट तक छोड़ दें। फिर साफ़ पानी से अपना चेहरा धो लें आप देखेंगे की धीरे धीरे आपका चेहरा खिल उठेगा।

आप ऊपर दिए गए टिप्स को करीब १५ दिनों तक इस्तेमाल करें आप खुद ही हैरान हो जायेंगे। आपका चेहरा खिल उठेगा और दाग धब्बे गायब हो जायंगे और आपका चेहरा मुलायम हो जाएगा। चेहरे पर निखार आते ही आपको कॉम्प्लीमेंट में मिलने लगेगा।
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मुँह के छाले का देसी और रामबाण इलाज

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मुँह में होने वाले छालें होते तो छोटे है, परन्तु इसके कारण परेशान बहुत होना पड़ता है, इसके कारण खाने पीने के साथ कई बार मुँह में दर्द के कारण बोलने में भी परेशानी का अनुभव होता है, ये छाले सफ़ेद व् लाल रंग के होते है, इसके कारण व्यक्ति बहुत परेशान हो जाता है, इसके उपचार के लिए डॉक्टर भी दवा तो देते है, परन्तु वो भी धीरे धीरे ही असर करती है, मुँह में छालें जीभ के नीचे, होंठ के ऊपरी हिस्से में हो जाते है, और यदि इसका ढंग से इलाज न किया जाएँ तो आपको बार बार इस परेशानी से झूझना पड़ सकता है।

muh ke chaale

मुँह में छालें होने के कई कारण हो सकते है, शरीर में होने वाले हॉर्मोन के बदलाव के कारण आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जिन लोगो को पाचन तंत्र से जुडी परेशानी होती है, या जो लोग ज्यादा मसालें और तले हुए भोजन का सेवन करते है, इसके अलावा और भी कई कारण हो सकते है, और ये कोई ऐसी परेशानी ऐसी भी नहीं है, की जिसका इलाज न हो, बल्कि इसके कई देसी और रामबाण इलाज है जिसके कारण आपको इस समस्या को खत्म करने में मदद मिलती है, जैसे की नारियल के दूध का इस्तेमाल करके, तुलसी, धनिया, मैथी आदि का प्रयोग करके भी आप इस परेशानी से राहत पा सकते है, तो आइये पहले विस्तार से मुँह में होने वाले छालों की समस्या के कारण जानते है और उसके बाद इसके उपचार के बारे में चर्चा करते है।

मुँह में छालें होने के कारण:-

  • जिन लोगो को पंचन तंत्र से सम्बंधित समस्या जैसे कब्ज़, या अपज जैसी समस्या रहती है उन्हें इस परेशानी का सामना करना पड़ता है।
  • बॉडी में विटामिन डी की कमी के कारण भी आपको मुँह में छालों की समस्या होती है।
  • जो लोग सिगरेट का अधिक सेवन करते है उन्हें मुँह में होने वाले छालों की समस्या के कारण परेशान होना पड़ता है।
  • ज्यादा मसालों का सेवन करने से भी आपको ये परेशानी हो सकती है।
  • खट्टी चीजों का सेवन अधिक मात्रा में करने से भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

नारियल के दूध का इस्तेमाल करें:-

coconut milk

नारियल के दूध में थोड़ा सा शहद मिलाकर मुँह के छालों पर लगाने से या इसकी मसाज करने से आराम मिलता है, और साथ ही यदि आपको दर्द महसूस होता है, तो इससे भी राहत मिलने में मदद मिलती है, आप इस उपचार को दिन में कम से कम तीन से चार बार करते है, तो ये अपना असर जल्दी दिखता है, इसके अलावा आप चाहे तो नारियल के दूध से दिन में तीन से चार बार कुल्ला भी कर सकते है।

तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल करें:-

तुलसी के पत्ते किसी औषधि से कम नहीं होते है, इसके इस्तेमाल से आपको मुँह के छालों की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप तुलसी के तीन से चार पत्तों को अच्छे से चबा कर ऊपर से दो घूंट पानी का सेवन कर लें, इस उपचार को आप दिन में दो समय सुबह और शाम को कर सकते है, इसके कारण मुँह के छालों की समस्या के साथ मुँह से आने वाली बदबू भी दूर होती है।

हल्दी का इस्तेमाल करें:-

हल्दी का इस्तेमाल करने से किसी भी घाव को आसानी से भरने में मदद मिलती है, और मुँह में छाले की समस्या के उपचार के लिए आप एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच हल्दी का डालें, और उसके बाद अच्छे से इससे कुल्ला करें, दिन में कई बार ऐसा करने से आपको मुँह में होने वाले छालों की समस्या से राहत मिलती है।

धनिये का इस्तेमाल करें:-

धनिये का इस्तेमाल करने से भी आपको मुँह के छालों की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप धनिये के पत्ती और उसके तने को पीस कर उसका रस निकाल लें, उसके बाद रुई की मदद से इस रस को अपने छालों पर दिन में तीन से चार बार लगाएं, यदि आप ऐसा करते है, तो आपको इस परेशानी से जल्द राहत मिलने में मदद मिलती है।

एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करें:-

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एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करने से भी आपको मुँह में होने वाले छालों की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसमें मौजूद एंटी बैक्टेरियल प्रॉपर्टीज आपके मुँह में होने वाले बैक्टेरिया को खत्म करके छालों की समस्या से राहत दिलाने में मदद करती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एलोवेरा जैल या फिर इसके जूस को अच्छे से अपने मुँह में छालों पर लगाएं, इसके कारण मुँह के छालों के साथ यदि दर्द भी है, तो उस परेशानी से भी राहत मिलेगी।

शहद का इस्तेमाल करें:-

शहद भी मुँह के छालों की समस्या से राहत दिलाने में आपकी मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप शहद को रुई को मदद से अपने छालों पर लगाएं, या फिर अपनी ऊँगली से अच्छे से मसाज करें, ऐसा दिन में दो से तीन बार करने पर आपको अच्छा महसूस होता है।

मुलेठी का इस्तेमाल करें:-

मुलेठी में भी एन्टी इन्फ्लैमटोरी गुण मौजूद होते है, जो मुँह के छालों के साथ दर्द की परेशानी से भी निजात दिलाते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप थोड़ी सी मुलेठी को पीस लें और उसके बाद इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर अच्छे से अपने छालों पर लगाएं, ऐसा करने से आपको आराम मिलेगा, साथ ही हल्दी वाले दूध में भी मुलेठी का पाउडर मिलाकर पीने से मुँह के छालों की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

मैथी का इस्तेमाल करें:-

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मैथी का इस्तेमाल करने से भी आपको इस परेशानी से राहत मिलने में मदद मिलती है, इसके उपचार के लिए आप मैथी के थोड़े पत्ते लेकर पानी में उबाल लें, उसके बाद इस पानी को छान कर ठंडा होने के लिए रख दें, उसके बाद दिन में सात से आठ बार इस पानी से कुल्ला करें, इसके कारण आपके छालें सूखने लग जाएंगे, और साथ ही दर्द से भी राहत पाने में मदद मिलती है।

मुँह के छालों की समस्या से राहत के अन्य उपचार:-

  • बेकिंग सोडा में थोड़ा सा पानी मिलाकर इसे अपने छालों पर लगाएं, इस उपचार को करते समय आपको थोड़ी जलन महसूस हो सकती है, परन्तु इसके कारण आपको मुँह के छालों की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • आइस क्यूब से छालों की सिकाई करने पर भी आपको आराम महसूस होता है।
  • मुँह में छालें होने पर ग्लिसरीन का इस्तेमाल करने से भी मुँह के छालें ठीक हो जाते है।
  • अमरुद के रस को छालों पर दिन में तीन से चार बार लगाने पर भी आपको राहत मिलती है।
  • रात के खाने के बाद एक छोटी सी हरड़ चूसें इसके कारण भी आपको मुँह के छालों की समस्या से राहत पान में मदद मिलती है।
  • टमाटर के रस को पानी में मिलाकर कुल्ला करने से भी आपको मुँह के छालों की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, साथ ही टमाटर का सेवन अधिक मात्रा में करने से भी आपको आराम मिलता है।
  • हल्दी वाले दूध का सेवन करने से भी आपको मुँह के छालों की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • दो ग्राम भुना हुआ सुहागा पीस कर उसमें ग्लिसरीन मिलाकर होंठो पर लगाने से भी आपको मुँह के छालों की समस्या से राहत मिलती है।

तो ये है कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको मुँह में होने वाले छालों की समस्या से रहता पाने में मदद मिलती है, इसके अलावा जिन लोगो को इस समस्या से बार बार झूझना पड़ता है वो जितना हो सकें धूम्रपान व् तम्बाकू के सेवन से परहेज करें, ज्यादा तले और मसालेदार भोजन का सेवन अधिक मात्रा में न करें, ब्रश भी मुलायम सा इस्तेमाल करें, पानी का सेवन भरपूर करें, विटामिन बी का सेवन अधिक मात्रा में करें, ऐसा करने से उन्हें मुँह में होने वाले छालों की परेशानी से राहत मिलेगी, और साथ ही बार बार इस समस्या का सामना भी नहीं करना पड़ेगा।

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