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Chest Pain: पुरूषों में चेस्ट पेन (Chest Pain) के कारण और उपाय

सीने में दर्द की समस्या बहुत ही आम समस्या है। इसके कई कारण हो सकते हैं। जादातर लोग सीने में दर्द उठने पर सोचते है कि उनको हार्ट अटैक आ गया है पर ऐसा सोचना गलत है। विभिन्न कारणों से सीने में दर्द होता है। हार्ट अटैक उन सभी कारणों में से एक कारण है।

सीने में दर्द के लक्षण-

  • सीने में जकड़न होना,
  • साँस लेने में तकलीफ होना, छोटी या कम साँस आना
  • सीने में तेज चुभने वाला दर्द जिसमे दर्द ही लहरें बनती है, कंधे, जबड़े और हाथो तक जाती है
  • बार बार आने जाने वाला दर्द जो कुछ कुछ मिनटों तक रहता है
  • छाती में जकड़न tightness और खिंचाव squeezing होना
  • घबराहट की वजह से सीने में पसीना आना

सीने में दर्द के कारण (Reasons of Chest Pain)

  • प्ल्यूराइटिस Pleurisy (छाती की अन्धरुनी दीवार में सूजन)- इस कारण भी छाती में दर्द हो सकता है। इसे मेडिकल टर्म में प्ल्यूराइटिस कहा जाता है। इसमें फेफड़े के उपरी सतह पर सूजन आ जाती है। साँस लेने में बहुत तकलीफ होती है। साँस लेते वक्त हवा सूजन वाली सतह (झिल्ली) से रगड़ खाती है। इस वजह से असहनीय दर्द मरीज को होता है। इस अवस्था में डॉक्टर से तुरंत परामर्श लेना चाहिये।
  • पेट के रोग- इसमे पेट में गैस बन जाने पर छाती की तरह जाती है और दर्द पैदा करती है। पेट में अल्सर के कारण भी ऐसा होता है। पित्त की थैली में बनी गैस भी छाती की तरफ जाकर दर्द पैदा करती है।
  • दिल की धमनियों में दर्द – इसे मेडिकल भाषा में पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज (Peripheral Vascular Disease )कहते है। इस रोग में दिल तक और मस्तिष्क तक जाने वाली धमनियों में खून का संचरण बाधित हो जाता है जिससे सीने में तेज दर्द उठता है। इसमें हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
  • GERD गैस्ट्रो रोग- इसे Gastroesophageal reflux disease कहते है। इसमें बदहजमी होती है और अम्लीय पदार्थ वाला भोजन पेट से मुंह के रास्ते बाहर दौड़ता है जैसा उलटी में होता है। इसमें सीने में तेज जलन होती है। सीने में दर्द उठता है, मुंह में बुरा स्वाद पैदा होता है।
  • निमोनिया (Pneumonia)- इस रोग में फेफड़ों में सूजन आ जाती है। सीने में तेज दर्द होता है, बुखार, साँस लेने में तकलीफ होती है। यह जीवाणु जनित रोग है।
  • उच्च रक्तचाप- फेफड़ों और ह्रदय तक जाने वाली धमनियों में जब खून का प्रेशर बढ़ जाता है तो सीने में दर्द होता है। इसे Pulmonary hypertension कहते है। इसमें साँस आना बंद हो जाती है या छोटी साँस मरीज ले पाता है, थकावट, सीने में दर्द, पैरों में सूजन, तेज ह्रदय गति इसके लक्षण है।
  • फेफड़ों के रोग- इस रोग में धमनियों मे थक्का जम जाता है जिस वजह से ऊतकों में खून का प्रवाह बाधित हो जाता है, साँस लेने में दिक्कत होती है और मरीज के सीने में दर्द होने लग जाता है।
  • एंजाइना (angina)- इस रोग में हृदय में खून का प्रवाह बहुत कम हो जाता है। इससे मरीज को सीने में जकड़न tightness, भारीपन squeezing, जलन और दर्द महसूस होता है। जी मितलाता है और थकावट लगती है, पसीना, चक्कर आता है। बेचैनी होती है। इसका दर्द 5 से 10 मिनट तक रहता है।
  • तनाव और स्ट्रेस- कभी कभी कोई बड़ा सदमा लग जाने से या किसी चीज से बहुत अधिक डर जाने पर सीने में दर्द होने लग जाता है। हाई ब्लड प्रेशर भी इसके लिए जिम्मेदार है। इसे panic attack के नाम से भी जाना जाता है।

सीने में दर्द से बचने के उपाय-

  • रोज व्यायाम करें- दिल से जुडी बीमारियों से बचने के लिए डॉक्टर कम से कम 25 मिनट टहलने, पैदल चलने को कहते है। शारीरिक व्यायाम बहुत जरूरी है। कम से कम 30 से 40 मिनट व्यायाम करना चाहिये। इसमें तेज कदमों से चलना, खेल खेलना जिसमे जादा कैलोरी खर्च हो। जैसे क्रिकेट, फ़ुटबाल, टेनिस, बैडमिंटन जैसे खेल खेलना चाहिये। लिफ्ट के स्थान पर सीढ़ियों का इस्तेमाल करना चाहिये। इससे आपके शरीर में धमनियों में खून का प्रवाह सही तरीके से होगा।
  • धूम्रपान न करें- धूम्रपान हृदय सम्बन्धी रोगों को बढ़ा देता है। इसे तुरंत छोड़ दें।
  • सही आहार लें- हृदय के रोगों से बचने के लिए फाइबर युक्त आहार जैसे—साबुत अनाज, चोकर से युक्त रोटियां, फलियाँ, अलसी दालों, बींस, राजमा, लोबिया आदि खाना चाहिये। अधिक कैलोरी, हाई कोलेस्ट्रोल वाला खाना नही खाना चाहिये। खाने में कम नमक का सेवन करना चाहिये। उपर से नमक डालने की आदत बंद कर देनी चाहिये।
  • आलस्यभरी जीवन शैली का त्याग करें- हृदय से जुडी बीमारियों से बचने के लिए आलस्य का त्याग करना चाहिये। गाडी या कार से जाने की जगह पैदल जाये या साईकिल का प्रयोग करें। लिफ्ट के स्थान पर सीढ़ियों से जायें। घर में नौकरों को रखने की जगह खुद जादा से जादा काम करे जिससे आपके शरीर का व्यायाम हो जायें। मशीन से कपड़े धोने की जगह हाथ से काम करें। कुल मिलाकर अपने शरीर को गतिशील बनायें।
  • लहसुन, अदरक, मेंथी का सेवन करें- लहसुन का सेवन ह्रदय के सभी रोगों को दूर करता है। इसका नियमित सेवन करना चाहिये। रोज सुबह लहसुन की 2 कच्छी कलियों का सेवन करना चाहिये। 1 कप गर्म पानी में 1 चम्मच लहसुन का रस मिलाकर भी ले सकते है। हृदय के रोगों में अदरक की चाय भी बहुत लाभकारी है। रोज सुबह कच्चा अदरक खाना चाहिये। अदरक को पानी में उबालकर भी पिया जा सटा है। मेथी का सेवन जरुर करें।
  • हल्दी, तुलसी का सेवन करें- हल्दी का नियमित तौर पर सेवन भोजन में करना चाहिये। एक गिलास दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर गर्म ही पीना चाहिये। इससे सीने में दर्द में आराम पहुँचता है। तुलसी का सेवन दिल के रोगियों को जरुर करना चाहिये। आधा कप गर्म पानी में 10 से 20 ml तुलसी का रस मिलाकर सुबह खाली पेट पीना चाहिये। तुलसी की करीब 10 पत्तियों को चबाकर खाना चाहिये। इसकी चाय भी बनाकर पी सकते है।

निष्कर्ष: आज के लेख में हमने आपको सीने में दर्द के सभी कारण और उपाय बतायें है। सीने में दर्द आपको इमरजेंसी वार्ड में पहुँचाने के लिए काफी है। इसमें कितनी पीढ़ा होती है ये वही समझ सकता है जिसको ये दर्द हुआ हो। इसे नजरअंदाज बिलकुल नही करना चाहिये। जादातर मामलों में सर्दी, जुकाम, बदहजमी, गैस, कफ से बचना चाहिये क्यूंकि ये ही सीने में दर्द को पैदा करते है। हालत गम्भीर होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। आज का लेख आपको कैसा लगा, जरुर बतायें।

गर्मियों में ऐसे रखें अपने शरीर को तरोताजा

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शरीर को तरोताजा रखने की टिप्स

गर्मियों के मौसम में चिलचिलाती धूप और उमस बहुत परेशान करती है। धूप की गर्मी के कारण शरीर का सारा पानी पसीने के रूप में बाहर निकल जाता है। जिसके कारण कमजोरी और थकान महसूस होने लगती है। गर्मियों के दिनों में अक्सर लोगों को ज्यादा खाना खाने का भी मन नहीं करता। जिसके चलते शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा नहीं मिल पाती। और परिणामस्वरूप हम अपने दैनिक कार्य भी थकान और सुस्ती से करने लगते हैं।

गर्मी के दिनों में थकान, सुस्ती और चिडचिड़पन होना सामान्य है। लेकिन जॉब करने वालो के लिए ये संभव नहीं। काम करने के लिए शरीर को पूर्ण ऊर्जा देना आवश्यक है। और ये तभी संभव है जब शरीर तरोताजा हो। आज हम आपको कुछ तरीके बता रहे हैं जिनकी मदद से गर्मियों में तरोताजा रहने में मदद मिलेगी। इन उपायों को फॉलो करके गर्मियों के दिनों में भी ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलेगी।

गर्मियों में शरीर को तरोताजा रखने के उपाय

उचित आहार लें

गर्मियों के दिनों में अक्सर गर्मी की वजह से लोग खाना-पीना छोड़ देते हैं। जो बिलकुल भी ठीक नहीं है। गर्मियों के दिनों में अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है और वो ऊर्जा भोजन से मिलती है। ऊर्जा की कमी के कारण थकावट और तनाव जैसी समस्याएं होने लगती है। इसीलिए उचित आहार लें। गर्मियों के दिनों में रस वाले फल, जूस, नारियल पानी, रिफ्रेशमेंट ड्रिंक, दालें, सब्जियां, रोटी, दही, दूध आदि सभी का उचित मात्रा में सेवन करें। इससे शरीर ऊर्जा से भरपूर रहेगा। और थकावट नहीं होगी।

तनाव न लें

शरीर में होने वाले आधी से ज्यादा समस्याएं तनाव के कारण होती है। अगर आप तनाव लेते हैं, या किसी चिंता से परेशान रहते हैं तो यह आपको शारीरिक और मानसिक थकान दे सकता है। और थकान के कारण काम में मन नहीं लगता। और शरीर की ऊर्जा भी कम होने लगती है। इसलिए तनाव बिलकुल भी नहीं लें और खुश रहें। इससे आप गुड फील होगा।

भरपूर नींद लें

कई बार नींद की कमी भी शरीर की थकान का कारण बनती है। अगर नींद पूरी ना हो तो दिनभर कमजोरी और थकावट महसूस होती है। खासकर गर्मियों के दिनों में। इससे बचने के लिए जरुरी है की आप पूरी नींद लें। स्वस्थ और पुरे दिन तरोताजा रहने के लिए 7 से 8 घंटे की नींद की जरूरत होती है। तरोताजा रहने के लिए समय पर सोएं और नींद पूरी होने पर ही उठें। इससे शरीर में ताजगी बनी रहेगी।

काम करते समय

गर्मियों के दिनों में अक्सर काम करते हुए थकान होने लगती है। कई देर तक काम करने के बाद शरीर में ऊर्जा खत्म होने लगती है। ऐसे में अगर आप बीच-बीच में ब्रेक लेते रहेंगे तो खुद को तरोताजा रखने में मदद मिलेगी। इसके लिए आप लंच ब्रेक के अलावा भी एक-दो ब्रेक बीच में लें। इससे काम में मन लगेगा और शरीर भी तरोताजा रहेगा।

व्यायाम करें

रोजाना 30 मिनट का योग आपके मन और शरीर को ऊर्जा से भरपूर बनाए रखने में मदद करता है। नियमित रूप से योग या एक्सरसाइज करने से शरीर में एंडोर्फिन नामक हॉर्मोन ठीक रहता है। जिससे शरीर में खून का दौरान तेज होने लगता है और शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में रहने से शरीर में एनर्जी भी बढ़ जाती है।

सूरज की रौशनी

गर्मियों में भले ही सूरज की चिलचिलाती धूप किसी को अच्छी नहीं लगती। लेकिन क्या आप जानते हैं, सूर्योदय के समय 10 मिनट की हल्की धूप से आप दिनभर तरोताजा रह सकते हैं। जी हाँ, रोजाना सुबह सूर्योदय के समय धूप लेना स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इससे शरीर के सभी अंग सुचारु रूप से काम करने लगते हैं और थकावट नहीं रहती।

ये ध्यान रखें

एक अच्छा और एनर्जी से भरपूर दिन बिताने के लिए रात में सोते समय किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का इस्तेमाल नहीं करें। बहुत से लोग बिना काम के रात में मोबाइल और लैपटॉप यूज करके सोते हैं। जो ठीक नहीं हैं। क्यूंकि इन उपकरणों से निकलने वाला प्रकाश दिमाग को बेहतर नींद के लिए प्रिपेयर नहीं कर पाता। जिससे नींद नहीं आती और अगले दिन जब जागते हैं तो नींद पूरी नहीं होती। इसीलिए अगर कोई काम नहीं है तो बेवजह इनका इस्तेमाल रात को सोने से पहले न करें।

तो दोस्तों, ये कुछ खास टिप्स हैं जिनकी मदद से गर्मियों के दिनों में खुद को तरोताजा रखने में मदद मिलेगी। अगर आप नियमित रूप से इन उपायों का प्रयोग करेंगे तो दिनभर ऊर्जा से भरपूर रहेंगे और काम में मदद मिलेगी।

यह खाने से मिसकैरिज होता है

यह खाने से मिसकैरिज होता है, प्रेगनेंसी मातृत्व का अहसास महिला को करवाने का एक प्यारा सा अनुभव होता है। और यह अहसास शिशु के जन्म से पहले ही महिला और शिशु को आपस में जोड़ देता है। प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी के समय कुछ भी करने से पहले केवल यही सोचती है की क्या करने से शिशु को फायदा मिलता है और कौन सी चीजें शिशु को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए महिला को अपने खान पान का भी अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

और इसके कारण कई बार महिला को अपने पसंदीदा भोजन को छोड़ना भी पड़ सकता है। क्योंकि कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन करने की प्रेगनेंसी में मनाही होती है। ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि वह खाद्य पदार्थ शिशु के विकास में कमी का कारण हो सकते हैं और कई बार उनके कारण महिला का गर्भपात होने का खतरा भी रहता है।

प्रेगनेंसी में क्या खाने से मिसकैरिज होता है

गर्भावस्था के दौरान कौन से ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनका सेवन नहीं करना चाहिए और जिनका सेवन करने से मिसकैरिज का खतरा होता है। आइये इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं।

कच्चा मांस व् कच्चे अंडे

  • गर्भवती महिला को कच्चे अंडे व् कच्चा मांस प्रेगनेंसी के दौरान बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि इसमें वायरस, बैक्टेरिया (लिस्टेरिया, साल्मोनेला) आदि मौजूद होते हैं।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी होने की समस्या का खतरा होने के साथ गर्भनाल के माध्यम से शिशु को भी नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है।
  • जिसकी वजह से गर्भपात होने के चांस बढ़ सकते है।

यह खाने से मिसकैरिज होता है सी फ़ूड

  • प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला उन मछलियों का सेवन कर सकती है जिनमे मर्करी की मात्रा मौजूद नहीं होती है।
  • लेकिन उन मछलियों जिनमे की मर्करी की मात्रा अधिक होती है जैसे की शार्क, स्वोर्डफ़िश, किंग मैकेरल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि इन मछलियों का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क व् तंत्रिका तंत्र के विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
  • साथ ही इन मछलियों का सेवन करने से गर्भपात होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

कैफीन

  • गर्भावस्था के समय प्रेग्नेंट महिला को कैफीन का सेवन सिमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है।
  • क्योंकि कैफीन का अधिक सेवन जन्म के समय शिशु के वजन में कमी, समय पूर्व प्रसव और प्रेगनेंसी की शुरुआत में गर्भपात का कारण बन सकता है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को चाय, कॉफ़ी, कोल्ड कॉफ़ी आदि का सेवन अधिक मात्रा में करने से बचना चाहिए।

शराब

  • प्रेग्नेंट महिला यदि शराब का सेवन करती है तो इसका असर गर्भनाल के रास्ते शिशु तक पहुँच सकता है।
  • साथ ही शराब का सेवन करने से शिशु तक पोषक तत्व, ऑक्सीजन आदि पहुँचने में दिक्कत हो सकती है।
  • जिसके कारण शिशु के विकास में बाधा उत्पन्न हो सकती है और मिसकैरिज होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
  • साथ ही यदि शिशु जन्म लेता है तो जन्म के समय शिशु के वजन में कमी, शिशु के मानसिक विकास में कमी जैसी दिक्कतें हो सकती है।

यह खाने से मिसकैरिज होता है इमली

  • प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण जीभ का स्वाद बदल सकता है।
  • जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला का खट्टा खाने का मन कर सकता है।
  • लेकिन प्रेग्नेंट महिला को अपनी इस इच्छा पर थोड़ा कण्ट्रोल करके रखना चाहिए।
  • क्योंकि इमली का सेवन अधिक करने के कारण प्रेग्नेंट महिला के शरीर में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन के स्तर के उत्पादन में कमी आ सकती है।
  • जिसके कारण मिसकैरिज, समय पूर्व प्रसव जैसी समस्या, शिशु को जन्म दोष आदि होने का खतरा बढ़ जाता है।

यह खाने से मिसकैरिज होता है कच्चा पपीता

  • पपीता पोषक तत्वों की खान होता है लेकिन गर्भवती महिला को पपीते का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • क्योंकि पपीते में लेटेक्स की मात्रा मौजूद होती है जिसमे पपैन नामक एंजाइम होता है।
  • और यह एंजाइम प्रेग्नेंट महिला के शरीर में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन के स्तर को बाधित करता करता है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन के स्तर में कमी आती है जिसके कारण मिसकैरिज का खतरा बढ़ जाता है।

अनार

  • गर्भावस्था के शुरूआती समय में अनार के बीज लेने से गर्भपात होने की संभावना बढ़ सकती है।
  • क्योंकि अनार के बीज में बीटा साइटोस्टेरॉल की मात्रा अधिक होती है जो गर्भाशय के संकुचन का कारण बन सकता है।
  • और प्रेगनेंसी के शुरूआती समय समय गर्भाशय में संकुचन का होना गर्भपात का खतरा उत्पन्न कर सकता है।
  • ऐसे में प्रेगनेंसी में जरुरत से ज्यादा अनार का सेवन गर्भवती महिला को करने से बचना चाहिए।

यह खाने से मिसकैरिज होता है अनानास

  • गर्भवती महिला को अनानास का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान करने से बचना चाहिए।
  • क्योंकि अनानास में ब्रोमेलिन नामक एंजाइम होता है जो गर्भाशय की ग्रीवा को नरम कर सकता है।
  • जिसके कारण मिसकैरिज होने का खतरा बढ़ सकता है।

बिना धुलें फल व् सब्जियां

  • गर्भवती महिला को खाने के लिए प्रयोग में लाने से पहले सब्जियों व् फलों को अच्छे से धोना चाहिए।
  • क्योंकि फलों व् सब्जियों की सतह पर हानिकारक बैक्टेरिया का जमाव हो सकता है।
  • और यह हानिकारक बैक्टेरिया गर्भवती महिला के शरीर में प्रवेश करके गर्भवती महिला व् शिशु दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को गर्भपात जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिनका सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इनका सेवन करने से मिसकैरिज का खतरा रहता है। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के लिए और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए प्रेग्नेंट महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए।

टीनएज ब्रा चुनते समय किन बातों का ध्यान रखे

टीनएज ब्रा चुनते समय किन बातो को ध्यान में रखे?, ब्रा पहनने के सही उम्र, टीनेजर्स ब्रा के लिए क्या क्या ध्यान रखें ?

14 साल की उम्र यानी टीनएज, ये एक ऐसा समय होता है जब लड़कियों को बहुत से शारीरिक बदलावों से गुजरना पड़ता है।

टीनएज में हर लड़की को सही फिटिंग की प्रोब्लेम्स आनी शुरू हो जाती है।

बढ़ती उम्र में हमारी ब्रैस्ट भी बढ़ने लगती है। यही उम्र होती है जिसमें हमारी माँ हमारी दोस्त बन जाती है।

टीनजर्स की माएं भी उनकी फिटिंग और साइज का ध्यान रखती है।

ऐसे में ब्रा का साइज चुनने के लिए माँ और टीनजर्स बहुत सी बातों का ध्यान रखना पड़ता है।

तो आईये जानते है वो सभी बातें जो टीनएज ब्रा लेते समय हमे ध्यान रखनी है।

सही उम्र

  • ब्रा पहनने का सहीं समय लड़कियों के बॉडी स्टक्चर पर निर्भर करता है।
  • वैसे 14 साल की उम्र में ही ब्रैस्ट बढ़ने लगती है। इसी उम्र में ब्रा पहननी  शुरू करनी चाहिए।
  • कई केसेस में लड़कियों को 11-12 साल की उम्र में पीरियड्स आने शुरू हो जाते है। उनकी ब्रैस्ट जल्दी डेवेलप होने लगती है।
  •  ऐसे में 11-12 साल की उम्र में ही ब्रा चुन लेनी चाहिए।
  • जिन टीनएज की बॉडी हैवी होती है उन्ही भी 11 साल की उम्र में ब्रा पहननी चाहिए।

सही फिटिंग

  • 11 से 13 साल की उम्र में अगर आप ब्रा चुन रहे हां तो स्पोर्ट ब्रा, क्रॉप टॉप ब्रा, टीशर्ट, स्लिप्स या कैमिसोल ब्रा ले सकते है।क्योंकि इस उम्र में टिशूज़ पूरी तरह विकसित नहीं होते।
  • अगर आपकी बॉडी लाइट वेट है तो भी आप स्पोर्ट ब्रा चुन सकते है।
  • शुरूआती समय में पैडेड ब्रा का इस्तेमाल न करें।
  • ब्रा चुनते समय कप साइज का भी ध्यान रखे।

सही साइज

  • 14 की उम्र में कप साइज विकसित होने लगते है।
  • ऐसे में हर एक सप्ताह में ब्रैस्ट का मेज़रमेंट लेते रहना चाहिए।
  • मेज़रमेंट लेते समय ब्रैस्ट के ऊपर के भाग और निचे का भी माप लेना चाहिए।
  • अगर ओड नंबर आये तो इवन नंबर की ब्रा आप ले सकते है, जैसे की 27 माप आने पर 28 नंबर की ब्रा चुन सकते है।

आशा है के टीनएजर्स और उनकी माताओं के लिए ये लेख सहायक होगा।

हेयर ट्रांसप्लांट के फ़ायदे और नुकसान

आज कल मेडिकल साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है की हर चीज का समाधान उनके पास है, चाहे फिर वो आपकी ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए सर्जरी की बात हो या फिर आपके गंजेपन को दूर करने के लिए हेयर ट्रांसप्लांट करवाने की, जिन लोगो के बाद झड़ जाते है, या उनकी ग्रोथ होती ही नहीं है,ऐसे लोग अपने गंजेपन से परेशान होकर तरह तरह की दवाइयों आदि का इस्तेमाल करने लगते है, तो उनके लिए मेडिकल साइंस ने हेयर ट्रांसप्लांट की सुविधा बनाई है, जिससे वो अपने बालों को घना बना सकते है, और गंजेपन को दूर करके अपनी पर्सनैलिटी को भी निखार सकते है।

इन्हें भी पढ़ें:- महिलाओ में गंजेपन की समस्या का इलाज

hair

ब लोगो के मन में ये सवाल भी आता है की क्या ये प्रक्रिया सुरक्षित है या नहीं तो इसका जवाब है की ये सुरक्षित है, परन्तु यदि इसे किसी अनुभवी डॉक्टर और अच्छी जगह से करवाया गया हो, लेकिन ये भी सच ही है की यदि किसी चीज के फायदे होते है, तो नुकसान भी होते है, इसीलिए एक तो ऐसी कामो में अपनी केयर बहुत अधिक करनी पड़ती है, इसके अलावा आपको कोई भी परेशानी हो तो अनदेखा किये बिना डॉक्टर को भी दिखाना चाहिए, तो आइये अब हम आपको बताते है की ये हेयर ट्रांसप्लांट कैसे किया जाता है, और इसके क्या फायदे और क्या नुकसान होते है।

कैसे की जाती है हेयर ट्रांसप्लांट सर्जरी:-

हेयर ट्रांसप्लांट के लिए एक डॉक्टर नहीं बल्कि पूरी टीम काम करती है, सबसे पहले इसमें डॉक्टर्स द्वारा आपकी त्वचा की साफ़ सफाई की जाती है, और उसके बाद जहां आपको ट्रांसप्लांट करना है उस जगह को इंजेक्शन के माध्यम से सुन्न कर दिया जाता है, उसके बाद डॉक्टर दो प्रक्रिया में इस ट्रांसप्लांट को करते हैं एक है यूनिट स्ट्रिप सर्जरी यानी ( एफ यू एस एस)और फोलिक्यूलर यूनिट एक्सट्रैक्शन (एफ यू ई), यह प्रक्रिया कम से कम चार से छह घंटे तक चलती है और इसमें आपको एनेस्थेसिया इंजेक्शन देते है जिससे आपके सर में क्या हो रहा है इस बारे में आपको कुछ भी पता नहीं चलता है।

हेयर ट्रांसप्लांट करवाने के फायदे:-

गंजेपन का समाधान होता है:-

men hair fall

गंजेपन के कारण व्यक्ति अपना आत्मविश्वास कम होने लगता है, साथ ही इसके कारण कई बार उसे अपने दोस्तों के बीच में हास्य का विषय भी बनना पड़ता है, तो उनकी इस परेशानी के समाधान के लिए हेयर ट्रांसप्लांट एक अच्छा उपाय होता है, जिसके कारण उन्हें अपनी इस परेशानी से निजात पाकर उनकी पर्सनैलिटी में निखार लाने में मदद मिलती है।

आपकी लुक बेहतर बनती है:-

अच्छे और चमकदार बाल आपकी पर्सनैलिटी को बढ़ाने में आपकी मदद करते है, साथ ही यदि आपके बाल घने होते है तो इसके कारण आपके लुक को भी बेहतर बनने में मदद मिलती है, इसीलिए यदि आप भी अपने बालों से जुडी समस्या से परेशान है तो इसके समाधान के लिए यदि आप चाहे तो हेयर ट्रांसप्लांट का सहारा ले सकते है।

हेयर ट्रांसप्लांट से होने वाले नुकसान:-

रक्तस्त्राव और इन्फेक्शन हो सकता है:-

यदि आप किसी ऐसे सर्जन से हेयर ट्रांसप्लांट करवा रहे है तो कई बार कम जानकारी के कारण आपके स्कैल्प में से रक्तस्त्राव हो सकता है, इसके अलावा यदि आप अच्छी जगह से सर्जरी नहीं करवाते है या वो डॉक्टर आपको गंदे या पहले इस्तेमाल किये हुए उपकरण का इस्तेमाल करता है, तो इसके कारण आपको सर में इन्फेक्शन की समस्या भी हो सकती है।

बाल पतले होने लग जाते है:-

hair fall

कई बार ऐसा होता है की सर्जरी करवाने पर आपके कुछ बाल सही से नहीं लग पाते है, जिसके कारण बाद में वह कमजोर होकर झड़ने लग जाते है, और बाल पतले होने लगते है।

खुजली की समस्या हो जाती है:-

ट्रांप्लांट के बाद होने वाली खुजली की समस्या के कारण आपको परेशान होना पड़ सकता है, इसका कारण होता है की आपके सर में पपड़ी का जमना, जो की शैम्पू से बालों को धोने पर साफ़ हो जाती है, इसीलिए इससे बचने के लिए आपको अपने सर की साफ़ सफाई का ध्यान देना चाहिए और यदि खुजली अधिक हो तो इस बारे में डॉक्टर से भी राय जरूर लेनी चाहिए।

घाव भी हो जाते है:-

घाव की समस्या हर उस रोगी को नहीं होती है जो की हेयर ट्रांसप्लांट करवाते है, बल्कि यह समस्या उनको होती है जो सट्रिप प्‍लान्‍टेशन का सहारा लेते है, कई बार यह घाव भयंकर हो सकता है, खास कर जब आपका हेयर स्टाइल शार्ट होता है।

अल्सर की समस्या हो जाती है:-

यह समस्या जब हो जाती है जब आपके बालों की जड़ें डैमेज होने लगती है, और त्वचा एक दम से अंदर की और धंसने लगती है, यह एक पिम्पल के आकार का होता है, और इतना खतरनाक भी नहीं होता है, लेकिन आपको इसे इग्नोर न करते हुए डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए।

सूजन की समस्या हो जाती है:-

यह परेशानी भी हर किसी को नहीं होती है, जिनकी स्कैल्प की स्किन टोन खराब होती है उन्हें ये परेशानी हो सकती है, हालाँकि डॉक्टर से राय लेकर ये समस्या दूर की जा सकती है, परन्तु यदि सूजन ज्यादा हो तो यह आपके माथे पर भी साफ़ दिखाई देने लगती है।

रक्त का प्रवाह होने लगता है:-

वैसे तो हेयर ट्रांसप्लांट करवाते समय ब्लीडिंग नहीं होती है, परन्तु कुछ रोगियों के सर पर ज्यादा दबाव की वजह से ये समस्या हो सकती है, और यह आम बात होती है।

दर्द का अनुभव होता है:-

हेयर ट्रांसप्लांट के बाद दर्द का अनुभव होना आम बात होती है, और समय के साथ यह कम होता चला जाता है, इसीलिए इसे लेकर परेशान नहीं होना चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें:- गंजेपन की समस्या का समाधान कैसे करे

सिर का सुन्न होना:-

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हेयर ट्रांसप्लांट के कुछ समय बाद तक आपका सर सुन्न रहता है और समय के साथ ठीक हो जाता है, परन्तु यदि ऐसा न हो तो इस बारे में आपको डॉक्टर को जरूर बताना चाहिए।

हेयर ट्रांसप्लांट करवाने से पहले ध्यान देने योग्य बातें:-

एक्सपर्ट की राय जरूर लें:-

हेयर ट्रांसप्लांट को कई लोग बहुत सस्ते में लेते है, लेकिन इसके बुरे प्रभाव को लेकर उन्हें बाद में परेशानी का अनुभव करना पड़ता है, इससे बचने के लिए आपको हेयर ट्रांसप्लांट करवाने से पहले एक अच्छे से सर्जन की राय लेनी चाहिए, ताकि आपको इसके बारे में अच्छे से पता चल सकें।

सभी एक्सपर्ट क्वालिफाइड नहीं होते हैं:-

आपको हर गली में ऐसे सलून मिल जाएंगे जो आपको इस तकनीक के बारे में राय देंगे, लेकिन यह एक दर्दनाक प्रक्रिया होने के साथ काफी महंगी भी होती हैं, तो इसीलिए इस काम में समझौता न करते हुए आपको इस बारे में किसी एक्सपर्ट के पास या सर्टिफाइड डर्मटालोजिस्ट से ही मिलना चाहिए।

विज्ञापनों पर ज्यादा ध्यान न दें:-

हेयर ट्रांसप्लांट के बारे में आप अखबार में या रोड पर लगे किसी पेम्पलेट में कम दाम देखकर बिलकुल भी उन पर भरोसा न करें, क्योंकि यह आपके लिए नुकसानदायक हो सकते है, क्योंकि हर सस्ती चीज बढ़िया हो ऐसा जरुरी नहीं होता है।

क्लिनिक की जांच पड़ताल करें:-

आपको इस प्रक्रिया को जहां पर करवाना है वह के बारे में अच्छे से जानकारी लें, और साथ ही वहां के डॉक्टर्स के बारे में जानकारी लें, और किसी ऐसे पेशेंट से मिले जो वहां पर हेयर ट्रांसप्लांट करवा चूका हो, ताकि आपको अच्छे से इस बारे में पता चल सकें।

तो ये है कुछ जानकारी हेयर ट्रांसप्लांट के बारे में, की यदि आप इसे करवाते है तो आपको इससे क्या क्या फायदा होता है, और क्या क्या नुकसान होता है, इसके अलावा आपको हेयर ट्रांसप्लांट करवाते समय किस किस चीज के बारे में अच्छे से जानकारी इक्कठा करनी चाहिए ताकि आपको कोई नुकसान न हो।

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ब्रेस्टफीडिंग करवाने से ये फायदे होते हैं

ब्रेस्टफीडिंग को शिशुओं के लिए सर्वोत्तम आहार बताया गया है, इससे शिशु के विकास में मदद मिलने के साथ शिशु को रोगो से लड़ने के लिए भी सक्षम बनाने में मदद मिलती है, और स्तनपान करवाने से केवल शिशु को ही नहीं बल्कि महिला को भी बहुत से फायदे मिलते हैं, जैसे की महिला को ब्रैस्ट कैंसर, गर्भाशय कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव मिलता है, महिला का वजन कम होता है, आदि इसके अलावा और भी कई फायदे होते है जो महिलाओ को मिलते है, लेकिन कुछ महिलाएं ऐसा भी सोचती हैं की स्तनपान करवाने से उनका फिगर खराब हो जाएगा, जबकि सतपान करवाने से आपके शरीर में होने वाली अतिरिक्त कैलोरी को बर्न किया जा सकता है, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की स्तनपान करवाने से महिला को कौन कौन से फायदे होते हैं।

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स्तनपान करवाने वाली महिला का वजन कम होता है:-

स्तनपान के दौरान शिशु में पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर करने के लिए और महिला को स्वस्थ रहने के लिए कैलोरीज़ का सेवन अधिक मात्रा में करना पड़ता है, जिससे उनके वजन में बढ़ोतरी होती है, लेकिन स्तनपान करवाने से महिला के शरीर में होने वाली अतिरिक्त कैलोरी बर्न हो जाती है, जिससे प्राकृतिक ढंग से महिला के वजन को कम करने में मदद मिलती है।

कैंसर का खतरा कम होता है:-

जो महिला अपने शिशु को भरपूर मात्रा में स्तनपान करवाती है उसे स्तन कैंसर और गर्भाशय कैंसर का खतरा कम होता है, क्योंकि यह शरीर में उन ग्रंथियों को फैलने से रोकता है जो की कैंसर का कारण बनती है।

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प्राकृतिक गर्भनिरोधक का काम करता है:-

जितने समय तक महिला दिन रात शिशु को केवल अपना दूध पिलाती है, उतने समय तक महिला को पीरियड्स नहीं आते हैं, जिससे महिला के गर्भवती होने के चांस भी कम होते हैं, और जैसे जैसे महिला शिशु को स्तनपान करवाना कम कर देती है, वैसे ही उसके शरीर में हॉर्मोन परिवर्तन के कारण महिला को पीरियड्स आने शुरू हो जाते है, जिससे ओवुलेशन चक्र शुरू हो जाता है, तो आप यह भी कह सकते है की स्तनपान महिलाओ के लिए प्राकृतिक गर्भनिरोधक का काम करता है।

ब्रैस्ट का शेप सही रहता है:-

कई महिलाएं शिशु को स्तनपान इसलिए करवाना छुड़वा देती हैं क्योंकि उन्हें लगता है की ब्रेस्टफीडिंग करवाने से उनका ब्रेअस्शपे खराब हो जाएगा, जभी यह बिलकुल गलत होता है, ब्रेस्टफीडिंग करवाने से महिला के स्तन शेप में रहते है, क्योंकि जब स्तनों में दूध आता है तो आपको स्तन भारी महसूस होते हैं, लेकिन जैसे ही आप स्तनपान छुड़वाती हैं वैसे ही आपके ब्रैस्ट धीरे धीरे शेप में आने लगता है, इससे शिशु को भरपूर पोषण भी मिलता है और आपको भी फायदा होता है।

हदय सम्बन्धी समस्या कम होती है:-

रिसर्च में यह बात साफ़ की गई है की जो महिलाएं अपने शिशु को भरपूर मात्रा में स्तनपान करवाती हैं, उन महिलाओ को हार्ट अटैक, और स्ट्रोक का खतरा सामान्य महिलाओ से दस प्रतिशत तक कम होता है, जो की बहुत फायदेमंद होता है, इससे महिला के हदय को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

मधुमेह के खतरे को कम करता है:-

मधुमेह एक ऐसी समस्या जो महिला और शिशु दोनों को ही परेशान कर सकती है, लेकिन यदि आप अपने शिशु को स्तनपान भरपूर मात्रा में करवाती हैं, तो इससे आपके शिशु और आपको दोनों को ही मधुमेह के रोग होने के चांस कम होते है, और इससे बचाव करने में भी मदद मिलती है।

सर्जरी के दर्द को कम करने में मदद मिलती है:-

जिन महिलाओ को सिजेरियन डिलीवरी होती है, तो उन्हें सर्जरी के दर्द के कारण तीन से चार महीने तक परेशान रहना पड़ता है, लेकिन यदि महिला शिशु को नियमित स्तनपान करवाती है तो ऐसा करने से महिला को सर्जरी के दर्द से राहत पाने में जल्दी मदद मिलती है, इसीलिए जल्दी रिकवर होने के लिए महिला को शिशु स्तनपान जरूर करवाना चाहिए।

तो ये हैं कुछ फायदे जो आपको स्तनपान करवाने से होते है, यदि आप भी इस डर से की कही आपका फिगर खराब न हो जाएँ शिशु को स्तनपान नहीं करवाती है, इससे शिशु के विकास में तो फ़र्क़ आता है साथ ही आपको भी स्तनपान करवाने के फायदे नहीं मिलते है, तो शिशु को कम से कम छह महीने तक माँ का दूध पर्याप्त मात्रा में दें।

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पांच तरीके का काढ़ा जो खांसी दूर करता है

मौसम के बदलाव के साथ, इम्युनिटी कमजोर होने के कारण सर्दी खांसी जैसी परेशानी हो सकती है। लेकिन इन परेशानियों को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि सर्दी खांसी का बढ़ना सीने में दर्द, गले में इन्फेक्शन, भूख में कमी जैसी परेशानियों को बढ़ा सकता है। ऐसे में डॉक्टर से चेक करवाना और दवाई का सेवन करना जरुरी हो जाता है ताकि आपको जल्द से जल्द इस परेशानी से निजात मिल सके। लेकिन सर्दी खांसी की समस्या के लिए हमेशा डॉक्टर के पास जाया जाये ऐसा जरुरी नहीं होता है।

क्योंकि बहुत से ऐसे घरेलू उपचार होते हैं जिनके सेवन से न केवल खांसी को दूर करने में मदद मिलती है। बल्कि इम्युनिटी भी बढ़ती है, और इस समस्या से बचने का सबसे आसान घरेलू उपचार होता है की आप काढ़ा बनाएं। साथ ही काढ़ा बनाने के लिए जिन जिन चीजों की जरुरत होती है वो हर घर में बहुत आसानी से मिल भी जाती हैं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे पांच काढ़ा के बारे में बताने जा रहे हैं। जो सर्दी, खांसी को दूर करने में बहुत फायदेमंद होते हैं।

तुलसी, काली मिर्च और लौंग से बना काढ़ा

इस काढ़े को बनाने के लिए आप एक बर्तन में दो से तीन कप पानी डाल लें। उसके बाद इसमें तीन या चार लौंग, आठ दस तुलसी के पत्ते, एक से डेढ़ चम्मच कद्दूकस किया हुआ अदरक और छह सात काली मिर्च डाल दें। अब इस बर्तन को गैस पर रखकर धीमी आंच पर अच्छे से उबलने के लिए छोड़ दें। उसके बाद जब यह पानी उबाल खाकर आधा रह जाता है, तक गुनगुना रहने पर आप इसका सेवन करें। बनाने में आसान होने के साथ यह काढ़ा सेहत के लिए बहुत फायदेमंद भी होता है।

इलायची, अदरक, चाय पत्ती, गुड़ से बना काढ़ा

अब इस काढ़े को बनाने के लिए एक बर्तन में दो से ढाई कप पानी डालकर गैस पर रखें, और पानी के गर्म होने पर इसमें काढ़ा बनाने के लिए सामान डालें। सबसे पहले आप इसमें दो से तीन लौंग डालें जिन्हे आप पहले से ही अच्छे से पीस लें, काली तुलसी का एक पत्ता डालें, एक चम्मच कद्दूकस किया हुआ अदरक डालें, दो तीन इलायची को पीसकर डालें, चार से पांच काली मिर्च डालें, दो चुटकी भर चाय पत्ती, और स्वादानुसार गुड़ मिलाएं। अब सामान डालने के बाद इसे अच्छे से उबाल लें, और जब पानी आधा रह जाये तो इस पानी को छानकर इसका सेवन करें।

शहद और इलायची से बना काढ़ा

एक गिलास पानी में आधा चम्मच इलायची पाउडर डालकर पानी को अच्छे से उबाल लें, पानी के आधा रहने पर इसमें एक चम्मच शहद मिलाएं। अब गुनगुना रहने पर पानी का सेवन करें, दिन में दो बार इस काढ़े का सेवन करने से आपको बहुत जल्दी फायदा मिलता है।

गेहूं की भूसी और लौंग का काढ़ा

इस काढ़े को बनाने के लिए आपको थोड़ी सी यानी दस ग्राम के आस पास गेहूं की भूसी जिसे की कुछ लोग तूड़ा भी कहते हैं वो चाहिए होती है। इस काढ़े को बनाने के लिए सबसे पहले आपको एक बर्तन में दो कप पानी डालकर गैस पर रखें और गैस ऑन कर दें, फिर गेहूं की भूसी और तीन चार लौंग को पीसकर इसमें डाल दें। पानी के आधे रहने पर गैस बंद कर काढ़े और छान लें, अब इसमें काला या सफ़ेद कोई भी नमक स्वादानुसार डाल लें। गुनगुने रहने पर इसका सेवन करें।

लौंग और तुलसी का काढ़ा

सबसे पहले एक बर्तन में दो कप पानी में डालकर उबाल लें, उसके बाद उसमे आठ दस तुलसी की पत्तियां, और चार या पांच लौंग पीसकर उबाल दें। फिर जब तक पानी आधा न रह जाए तब तक पानी को उबालते रहें। फिर जब पानी उबल कर आधा रह जाये तो उसके बाद पानी को छानकर इसमें थोड़ा सा काला नमक मिलाएं और इसका सेवन करें।

तो यह हैं पांच बेहतरीन काढ़े जो खांसी की समस्या को दूर करने में मदद करते हैं। यदि आप, आपके बच्चे या घर के किसी सदस्य को सर्दी, खांसी, इन्फेक्शन आदि की परेशानी है तो आप भी इन्हे घर में बनाकर इस परेशानी से निजात पा सकते हैं।

पहले महीने की प्रेगनेंसी में क्या होता है?

प्रेगनेंसी के पहले महीने की शुरुआत वो नहीं होती है जब आप घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट करती हैं बल्कि सही मायने में प्रेगनेंसी का पहला महीना आपके आखिरी महीने के पीरियड होने की तिथि से ही शुरू हो जाता है। क्योंकि पीरियड्स की आखिरी तिथि से ही आपकी प्रेगनेंसी के नौ महीने को कैलकुलेट करके आपकी डिलीवरी की तिथि का अनुमान लगाया जाता है। और जब आप पीरियड्स के मिस होने के बाद प्रेगनेंसी टेस्ट करती है तो वह आपकी प्रेगनेंसी के दूसरे महीने की शुरुआत होती है। तो अब आप यह सोच रही होंगी तो फिर प्रेगनेंसी के पहले महीने में क्या होता है। तो इसे सोचकर आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है क्योंकि आज हम आपको प्रेगनेंसी के पहले महीने में क्या होता है इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था का पहला महीना

  • सबसे पहले पीरियड खत्म होने के बाद बॉडी में एस्ट्रोजन हॉर्मोन गर्भाशय के आस पास खून से युक्त उत्तको की परत बनाने की शुरुआत करने लगता है, और बॉडी में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन का स्तर बढ़ने लगता है। जिससे अंडाशय में अंडे परिपक्व होने लगते हैं।
  • प्रेगनेंसी के पहले महीने में पीरियड्स खत्म होने के बाद ग्यारह से अठारह दिन के बीच के समय को ओवुलेशन पीरियड कहा जाता है। और उस दौरान अंडाशय में से अंडे परिपक्व होकर बाहर निकलते हैं।
  • और फिर यह अंडे फैलोपियन ट्यूब में आ जाते हैं इस प्रक्रिया को डिम्बोत्सर्जन कहा जाता है, और उसके बाद अंडे शुक्राणु द्वारा निषेचित होने का इंतज़ार करते हैं।
  • ऐसे में इस दौरान यदि महिला और पुरुष के बीच बेहतर सम्बन्ध बनता है तो शुक्राणु के अंडे तक पहुँचने के चांस बढ़ जाते हैं। क्योंकि एक बार सम्बन्ध बनाने के दौरान बीस से साठ करोड़ शुक्राणु निकलते हैं लेकिन कुछ ही अंडे तक पहुँचने का लम्बा सफर तय कर पाते हैं।
  • उसके बाद यदि कोई शुक्राणु अंडे से जाकर मिल जाता है तो उसे निषेचन की क्रिया कहते हैं, यह प्रेगनेंसी के पहले महीने में होती है।
  • उसके बाद यदि आपको अगले महीने पीरियड्स मिस हो जाता है तो आप अपने घर पर ही प्रेगनेंसी किट की मदद से जांच करके चेक कर सकते हैं की आपका गर्भ ठहरा है या नहीं।

प्रेगनेंसी के पहले महीने के लक्षण

जैसे ही निषेचन की प्रक्रिया बॉडी में होती है, वैसे ही बॉडी में हार्मोनल बदलाव होने शुरू हो जाते है। और इन बदलाव के कारण महिला को कुछ शारीरिक परेशानियों का अनुभव हो सकता है जो की प्रेगनेंसी के लक्षण के रूप में दिखाई देते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के पहले महीने में बॉडी में कौन कौन से बदलाव आते हैं।

  • मूड स्विंग्स हो सकते हैं।
  • मॉर्निंग सिकनेस यानी सुबह उठते समय कमजोरी, सिर दर्द महसूस होना।
  • हल्का खून का दाग लगना।
  • मुँह का स्वाद अजीब होना।
  • कुछ महिलाओं को इस दौरान सपने अधिक आ सकते हैं।
  • यूरिन से जुडी परेशानी होना।
  • उल्टी व् जी मिचलाना।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के पहले महीने से जुडी कुछ जानकारी, ऐसे में यदि आप गर्भधारण का प्रयास कर रही हैं तो पीरियड्स मिस होने के बाद पहले महीने में भी अपनी अच्छे से केयर करनी चाहिए ताकि गर्भधारण में कोई दिक्कत न आए।

क्या आपके आधे से ज्यादा बाल झड़ गए हैं? तो ये करें बाल वापिस आ जायेंगे

बाल का झड़ना आज कल बहुत ही आम समस्या हो गई है, और ये समस्या केवल महिलाओ के साथ ही नहीं बल्कि पुरुषों के साथ भी है, और बालों का झड़ने के कारण आपकी पर्सनैल्टी पर भी असर पड़ता है, यदि पुरुषों के सिर से ज्यादा बाल झड़ने लग जाएँ, तो उन्हें गंजेपन और महिलाओ की छोटी तो किसी झाड़ू से कम नहीं रह जाती है, परंतु ये कोई ऐसी समस्या नहीं है, की जिसका कोई इलाज़ न हो तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलु टिप्स बताते है जो आपकी इस समस्या का समाधान करने में मदद करेंगे।

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hair fall

बालों से आपकी पर्सनैल्टी को और भी निखर कर सामने आने में मदद मिलती है, परतु गलत खान पान, ज्यादा केमिकल के इस्तेमाल, प्रदुषण और बालों की अच्छे से केयर न करने के कारण बाल झड़ना शुरू हो जाते है, और इनके कारण महिलाएं और पुरुष दोनों ही परेशान भी हो जाते है, और इस समस्या से निजत पाने के लिए मार्किट में आयें प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने लगते है, परतु क्या आप  जानते है की उनमे और भी केमिकल होता है, और कोई भी हेयर प्रोडक्ट आपको किसी तरह की कोई गारंटी भी नहीं देता है, और कई बार तो ये आपके बालों पर उल्टा असर भी दिखाते है।

बालों का झड़ना कोई ऐसी समस्या भी नहीं है जिसका कोई इलाज न हो, बल्कि कुछ घरेलू नुस्खो का इस्तेमाल करके आप आसानी से इस समस्या से राहत पा सकते है, इसके अलावा आपको अपने बालों के लिए अपने खान पान के साथ उनकी केयर पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि बालों को भी आपके शरीर की ही तरह देखभाल की जरुरत होती है, यदि आप इसे अच्छे से पोषण नहीं देंगे तो आपको बालों से सम्बंधित समस्या हो जाती है, इस समस्या से राहत पाने के लिए आइये आज हम आपको कुछ घरेलू उपचार बताने जा रहे है जो आपकी इस समस्या का समाधान करके आपके बालों को घना बनाने में मदद करेंगे।

अमरुद के पत्तो का इस्तेमाल करें:-

अमरुद के स्वाद का मज़ा तो आप लेते है, परन्तु इसके पत्तों को आप फेक देते है, क्या आप जानते है की अमरुद के पत्तों का इस्तेमाल करके आप अपने बाल झड़ने की समस्या से राहत पा सकते है, इसके लिए आप अमरुद के पत्तों को धोकर अच्छे से पानी में उबाल लें, और पानी को जब तक उबाले जब तक की वो आधे से कम न रह जाएँ, उसके बाद इस पानी को आप ठंडा करके एक बोतल में रख लें, उसके बाद एक हफ्ते म दो से तीन बार अच्छे से इस पानी को अपने बालों में ऊपर से नीचे तक लगाएँ, और कुछ घंटो के लिए छोड़ दें, उसके बाद किसी भी शैम्पू से सिर को धो लें, ऐसा करने से आपके बालों को झड़ने की समस्या से आराम मिलेगा।

नारियल के तेल का इस्तेमाल करें:-

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नारियल के तेल का इस्तेमाल करने से भी आप झड़ते बालों की समस्या से राहत पा सकते है, क्योंकि इसमें प्रोटीन, फैट, आयरन, और पोटैशियम होता है, जो आपके बालों को मजबूत करने में मदद करता है, इसके साथ यदि आप कच्चे नारियल को अच्छे से पीस कर उसमे थोडा सा दूध और पानी मिलाकर अच्छे से अपने बालों में मसाज़ करते है, और इसे रात भर के लिए ऐसे ही अपने बालों में छोड़ देते है, और सुबह सिर को धोते है, तो इसके कारण भी आपके बालों को झड़ने से रोकने में मदद मिलेगी।

अंडे का इस्तेमाल करें:-

बालों को अच्छे से पोषण  देने के लिए सल्फ़र बहुत जरुरी होता है, जो की अंडे में विद्यमान होता है, जो की आपके बालों को झड़ने से रोकने में मदद करता है, और सल्फ़र के साथ इसमें प्रोटीन, आयोडीन, फोस्फोरस, आयरन और जिंक भी होता है, जो की आपके बालों को अच्छे से पोषण देने के लिए बहुत जरुरी होता है, यदि आप अंडे के तरल भाग को निकाल कर इसे ओलिव आयल के साथ अच्छे से मिक्स करके बालों में छोड़ दें, और सूखने के बाद अपने बालों को शैम्पू की मदद से धो लें, ऐसा करने से भी आपको बालों के झड़ने की समस्या से राहत मिलने में मदद मिलती है।

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प्याज का रस इस्तेमाल करें:-

प्याज़ बालों से जुडी सभी समस्या के लिए बहुत असरदार होता है, चाहे फिर वो बालों से जुडी रुसी की समस्या हो, या फिर बालों के झड़ने की और इसके लिए आपको अच्छे से प्याज़ को पीस कर अपने बालों में लगाकर थोड़े समय के लिए छोड़ दें, और उसके बाद जब ये सुख जाएँ तो किसी माइल्ड शैम्पू का इस्तेमाल करके अपने बालों को धो लें, ऐसा करने से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। इसके साथ यदि आपके कही से बाल उड़ गये है या गंजेपन की समस्या है तो ये वहा पर भी बाल उगाने में मदद करता है।

गुडहल के फूलों का इस्तेमाल करें:-

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गुडहल के फूलों का इस्तेमाल पुदीने की पत्तियों के साथ मिलाकर करने से आपको बालों के झड़ने की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप गुडहल के फूल और पुदीने की पत्तियों को अच्छे से पीस कर पानी को मिलाने के बाद एक लेप तैयार करें, और इसे अपने बालों में लगाएँ और सूखने के बाद अपने बालों को अच्छे से धो लें, ऐसा हफ्ते में दो बार करने से आपको बालों के झड़ने की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, और साथ ही इसके कारण आपके बाल सफ़ेद भी नहीं होते है।

जैतून के तेल का इस्तेमाल करें:-

जैतून के तेल का इस्तेमाल करने से भी आपको बालों के झड़ने की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप गरम जैतून के तेल में एक चम्मच शहद, और एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाएं, और एक पेस्ट तैयार करें, और नहाने से पन्द्रह मिनट पहले आप इसे अच्छे से अपने बालों में लगाएँ, और अपने बालों को उसके बाद गरम पानी से धो लें, कुछ ही दिनों के इस्तेमाल के बाद आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

मैथी के बीजो का इस्तेमाल करें:-

मैथी के बीजों का इस्तेमाल करने से भी आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप मैथी के बीजों को रात को पानी में भिगो कर रख दें, और सुबह उठने के बाद इन बीजो को पानी से निकाल कर अच्छे से पीस कर लेप तैयार करें, अब इस लेप को अच्छे से अपने बालों में लगाएँ, और सूखने के बाद अच्छे से अप्मने बालों को धो लें, ऐसा करने से आपको थोड़े ही दिनों में इस समस्या से राहत पाने और अपने बालों को घना करने में मदद मिलती है।

आंवले का इस्तेमाल करें:-

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आंवले को बालों के लिए सबसे कारगर और बेहतरीन इलाज माना जाता है, क्योंकि इसमें कुछ ऐसे एंटी ऑक्सीडेंट पाएं जाते है, जो आपके बालों से जुडी हर एक समस्या का समाधान करके बालों को घना और चमकदार बनाने में मदद करते है, इसके लिए आप आंवले के तेल से बालों में मसाज, आंवले के पाउडर का लेप बालों में लगाकर या फिर आंवले को पानी में उबाल कर उसे ठंडा करके बालों को धोने से आपको बालों के झड़ने की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

बालों को झड़ने से बचाने के अन्य घरेलु उपाय:-

  • रात को ताँबे के बर्तन में पानी को रखें, उतर सुबह उठ कर इस पानी का सेवन आधा चम्मच आवला चूर्ण के साथ करें, ऐसा करने से आपको बालों के झड़ने की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • दालचीनी पाउडर वे शहद को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, और उसके बाद इस पेस्ट को बालों में लगाएं ऐसा करने से भी आपको बालों को झड़ने की समस्या से राहत मिलती है।
  • कलौंजी को पीस कर पानी में मिला लें, और इस पानी से कुछ दिन तक बालों को अच्छे से धो लें, इस उपचार से भी इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • नीम की पत्तियो और आंवलें के चूर्ण को पानी में डाल कर उबाल लें, और सप्ताह में कम से कम एक बार अपने सिर को जरुर धोएं, ऐसा करने से आपको बालों के झड़ने की समस्या से राहत पाने में मदद मिलते है।
  • धनिये के रस को बालों की जड़ों में लगाने से बालों के झड़ने की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • गाजर के रस को बालों में लगाने से बालों को झड़ने से बचाने से रहत मिलती है।
  • आंवले का सेवन करने से भी आपके बालों को मजबूत बनने में मदद मिलती है।संतुलित व् पोष्टिक आहार लेने से भी आपको बालों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

तो ये कुछ बेहतरीन उपाय है जिनका इस्तेमाल करके आप अपने बालों को झड़ने की समस्या से राहत दिलाने के साथ बालों को घना भी बना सकते है, परंतु इसके साथ आपको अपने खान पान और अपनी दिनचर्या में भी बदलाव लाना चाहिए, जैसे की बालों को पोषण देने के लिए अच्छे से अपने बालों में मसाज करनी चाहिए, अच्छे से शैम्पू का इस्तेमाल करना चाहिए, ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, ऐसे ही कुछ तरीको का इस्तेमाल करके आपको बालों के झड़ने की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

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पेट की चर्बी को ऐसे कम करें

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पेट की चर्बी कम करना

वर्तमान की आधुनिक जीवनशैली और खान-पान में बदलाव के कारण अधिकतर लोग अपने बढ़ते वजन को लेकर परेशान रहते हैं। लेकिन मोटापा भी कई प्रकार के होते हैं। कुछ लोग सिर से पांव तक मोटे होते हैं यानी पूरा शरीर वजनदार होता है। जबकि कुछ लोग सिर्फ पेट से मोटे होते हैं। ऐसे लोगों का पेट बाहर की तरफ निकला हुआ होता है। जिसके कारण कई बार शर्मिंदा होना पड़ता है।

अगर आप भी अपने बढे हुए पेट की वजह से अक्सर शर्मिंदा होते हैं तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है क्यूंकि आज हम आपको पेट की चर्बी कम करने के उपाय बता रहे हैं। इन टिप्स की मदद से कुछ ही दिनों में पेट की चर्बी कम होने लगेगी।

पेट पर चर्बी होने के कारण

किसी भी समस्या का उपाय जानने से पूर्व उसके कारण जान लेना जरुरी है। ताकि उन कारणों का ध्यान रखकर भविष्य में समस्या को बढ़ने से रोका जा सके।

  • अनुवंशिता
  • कमजोर पाचन तंत्र
  • शरीर में हार्मोनल बदलाव
  • तनाव / स्ट्रेस
  • कुछ विशेष बिमारियों के कारण
  • मांसपेशियों में ढीलापन होने के कारण।
  • गलत तरीके से बैठने पर
  • बहुत कम पैदल चलना
  • सभी काम बैठकर करना
  • जरूरत से ज्यादा काम करना

ये कुछ कारण हैं जिनकी वजह से पेट पर चर्बी बढ़ने लगती हैं। अब जानते हैं, पेट की चर्बी को कम कैसे करें?

पेट की चर्बी कम करने के लिए क्या करें?

यहाँ हम आपको कुछ खास टिप्स बता रहे हैं। जिनकी मदद से पेट की चर्बी को कम किया जा सकता है।

रोज दौड़े

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दौड़ बहुत फायदेमंद होती है। दौड़ लगाने से ना केवल शरीर में रक्त संचार अच्छी तरह से होता है, बल्कि हृदय भी सही तरीके से काम करता है जिससे कैलोरी बर्न होती है। नियमित रूप से दौड़ लगाने से चर्बी कम करने में मदद मिलती है। शुरुवात में थोड़ा दौड़े और बाद में समय के साथ गति और दुरी भी बढ़ा दें।

स्विमिंग करें

अगर आपके आस-पास स्विमिंग पूल या ऐसी कोई व्यवस्था है जहाँ आप स्विमिंग कर सकते हैं तो पेट कम करने का ये तरीका सबसे बेहतर उपाय है। तैराकी करने से ना सिर्फ वजन कम होता है बल्कि शरीर भी शेप में आ जाता है। पेट की चर्बी कम करने के लिए हफ्ते में एक या दो बार स्विमिंग करें। अगर आप तैराकी नहीं जानते हैं तो किसी ट्रेनर से सीखे और करें।

साइकिलिंग करें

पेट की चर्बी करने के लिए रोजाना साइकिलिंग करें। साइकिलिंग करने से ना सिर्फ पेट की चर्बी कम होती है बल्कि पैरों, और जांघों की भी एक्सरसाइज होती है जिससे उस हिस्से की चर्बी भी शेप में आ जाती है। साइकिल चलाने से शरीर की अतिरिक्त चर्बी और कैलोरी भी बर्न होती है। जिससे हृदय और स्वास्थ्य सही रहते हैं।

पैदल चलें

अगर आप ऊपर बताए गए उपाय नहीं कर सकते तो रोजाना सुबह-शाम आधा घंटा पैदल जरूर चलें। इससे शरीर के सभी पार्ट्स सही तरीके से मूव करने लगते हैं जिससे शरीर पर मौजूद बेकार चर्बी कम होने लगती है। संभव हो तो, तेज कदमों से चलें। इससे पेट की चर्बी जल्दी कम हो जाएगी।

योग करें

इन सब उपायों के साथ-साथ हलके योग और व्यायाम भी करें। इससे शरीर के सभी अंग रूप से काम करेंगे और शरीर में ऊर्जा बनी रहेगी। योग व् व्यायाम करने से वजन नियंत्रित करने में बहुत मदद मिलती है। अगर आप रोजाना सुबह आधा घंटा निकालकर योग या व्यायाम करेंगे तो कुछ ही हफ़्तों में फर्क दिखने लगेगा। इसके लिए आप नौकासन, बालासन, अनुलोम-विलोम, कपालभाती, सेतुबंध योगासन कर सकते है।

पेट की चर्बी कम करने के लिए क्या खाएं और क्या नहीं?

एक्सरसाइज के साथ-साथ खान-पान पर ध्यान देना भी जरुरी है। अब हम आपको बताते हैं की वजन कम करने के लिए क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?

सुबह जगने के बाद

पेट की चर्बी कम करने के लिए सबसे पहले सुबह उठने के बाद करीब दो गिलास गुनगुना पानी पियें ताकि पेट अच्छे से साफ हो जाए। शौच से निवृत होने के बाद एक ग्लास गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीएं। शोध के अनुसार, नींबू पानी पीने से वजन और चर्बी कम होती है।

नाश्ते से पहले

नाश्ता करने से 15 मिनट पहले 5-6 बादाम खाएं। बादाम को रातभर पानी में भिगोकर रखें और सुबह छिलका उतारकर खाएं। इससे शरीर को सबसे जरुरी पोषक तत्व मिल जाएंगे और भूख भी कम लगेगी। बादाम में फाइबर होता है जो भूख को मिटाता है।

नाश्ता

नाश्ते में आप दही और उसके साथ दो चपाती लें। आप चाहे तो ब्राउन ब्रेड भी खा सकते हैं। इसपर पर बादाम का बटर लगा सकते हैं। इसकी जगह एक कटोरी ओट्स खा सकते हैं।

दो घंटे बाद

नाश्ते के कम से कम 2 घंटे बाद कोई फल खा लें। आप कई फलों का सलाद बनाकर भी खा सकते हैं।

दोपहर का खाना

खाने से पहले सब्जियों का सलाद खा लें। इससे शरीर को अतिरिक्त फाइबर मिलेगा। सलाद के बाद एक या दो रोटी के साथ सब्जी या उबली दाल ले सकते हैं। अगर नॉन-वेज खाते हैं तो मछली का एक टुकड़ा का सकते हैं। कोशिश करें की खाना एक बजे तक खा लें। इससे लेट करना आपके लिए ठीक नहीं।

शाम के समय

डिनर से पहले और शाम को करीब पांच बजे एक फल या एक ग्लास बिना मलाई का दूध पी लें। इसकी जगह आप ग्रीन टी या नारियल पानी भी पी सकते हैं।

रात का खाना

डिनर में आप हमेशा हल्का भोजन खाएं। रत में हैवी फ़ूड लेना सही नहीं। कोशिश करें रात आठ बजे तक भोजन कर लें। आप सूप, रोटी, सब्जी खाएं।

ये डाइट प्लान पेट की चर्बी कम करने में बहुत फायदेमंद रहेगा। इसके साथ-साथ आप ध्यान रखें की ज्यादा मीठा और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ नहीं खाएं। चावल, नूडल्स, पास्ता, ब्रेड आदि का सेवन कम से कम करें। तम्बाकू, शराब व् सिगरेट से परहेज करें, ये चर्बी कम करने की बजाए उसे और बढ़ा सकते हैं।

दोस्तों, पेट की चर्बी कोई ऐसी बड़ी समस्या नहीं है जिसे दूर ना किया जा सके। इसके लिए बस सही दिनचर्या और नियमित व्यायाम करने की जरूरत है। इन टिप्स की मदद से आप अपने पेट की चर्बी को कुछ ही दिनों में कम कर सकते हैं।