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गर्दन और पीठ की डार्क स्किन के लिए 10 घरेलु उपाय!

गर्दन और पीठ का कालापन दूर कैसे करें :- आज के ज़माने में हर लड़की सुन्दर बनने की चाह रखती है जिसके लिए वे क्या कुछ नहीं करती महंगे से महंगे कॉस्मेटिक्स का प्रयोग करती है, पार्लर जाती है और न जाने क्या-क्या? लेकिन ये सब कुछ वे केवल अपने चेहरे को सुन्दर बनाने के लिए करती है. और अपने शरीर के सबसे अहम् भाग यानी पीठ और गर्दन को भूल जाती है. जो रोजाना की धुप और धूल मिटटी के कारण काली हो जाती है.

माना आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अपने शरीर पर पूर्ण ध्यान देना किसी के लिए भी संभव नहीं है लेकिन यदि आप वाकई में सुन्दर और खूबसूरत दिखना चाहती है तो आपको अपने लिए थोड़ा समय निकालना होगा.

तरह-तरह के कॉस्मेटिक्स और विभिन्न उपायों का प्रयोग करके हम अपने चेहरे को तो सुन्दर बना सकते है लेकिन हमारी गर्दन वो तो वैसी की वैसे ही रहती है. शायद आप नहीं जानती लेकिन यदि आपका चेहरा साफ़ सुथरा और खूबसूरत हो और आपकी गर्दन काली हो तो ये आपके व्यक्तित्व पर अच्छा प्रभाव नहीं डालता वही दूसरी ओर यदि आपके चेहरे के साथ-साथ आपकी गर्दन और पीठ भी साफ सुथरी और गोरी हो तो क्या कहने.

पहले के समय में पीठ के कालेपन पर इतना गौर नहीं किया जाता था लेकिन आज कल के फैशन के दौर में तरह-तरह की डिजाइनर ड्रेसेस आ गयी है जिनमे बैकलेस ड्रेसेस भी सम्मिलित है. अब जरा सोचिये यदि आप किसी पार्टी में एक बैकलेस ड्रेस पहन कर गयी है और आपकी पीठ काली है तो ये कैसा लगेगा. जाहिर सी बात है खराब. इसीलिए अपने चेहरे के साथ-साथ अपनी पीठ और अपनी गर्दन के कालेपन को दूर करने के लिए भी कुछ प्रयास करे.

इसके लिए जरूरी नहीं की आप महंगे कॉस्मेटिक्स का प्रयोग करे. आप कुछ सामान्य घरेलू उपायों का प्रयोग करके भी इस समस्या से छुटकारा पा सकती है. तो आईये आज हम आपको उन्ही कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताते है जिनकी मदद से आप अपनी काली गर्दन और काली पीठ को भी आसानी से गोरा बना सकती है.

गर्दन और पीठ के कालेपन को दूर करने के उपायgardan-ka-kalapan

1. ककड़ी का रस :

ककड़ी का प्रयोग अक्सर सलाद के रूप में किया जाता है लेकिन क्या आप जानती है की इसका प्रयोग करके आप अपनी काली गर्दन को भी गोरा बना सकती है. जी हां, इसका रस त्वचा में चमक लाने का काम करता है. और साथ ही उसे निखारने में भी मदद करता है.
इसके लिए कद्दूकस की हुई ककड़ी या उसके रस को अपनी गर्दन पर लगाएं. हलके हाथो से मसाज करने के बाद गुलाब जल से इसे साफ़ कर ले. कुछ प्रयोगों के बाद गर्दन के रंग में फर्क आएगा.

2. आलू :

जी हां, आलू, आपके खाने में स्वाद बढ़ाने वाले आलू भी आपकी इस समस्या को हल करने में आपकी मदद कर सकते है. क्योंकि आलू में ब्लीचिंग के गुण पाए जाते है जो त्वचा के कालेपन को साफ़ करके उसे अंदर से निखारने में मदद करते है.
इसके लिए पिसे हुए आलू, कद्दूकस किये हुए आलू या कटे हुए आलू को गर्दन और पीठ के उस हिस्से में लगाएं जहा की त्वचा काली हो गयी है. कुछ देर बाद पानी से साफ़ कर लें.

3. नींबू का रस :

नींबू में पाए जाने वाले ब्लीचिंग गुण न केवल आपकी त्वचा के कालेपन को दूर करते है अपितु उसे निखारने में भी मदद करते है. इसके लिए नींबू के रस और गुलाब जल की बराबर मात्रा लें. अब इस मिश्रण को अपनी गर्दन अर्पित पर लगाएं. कम से कम 1 महीने तक इस विधि का प्रयोग हर रात करें. आकि त्वचा में आया निखार आप खुद महसूस करेंगी.

4. एलोवेरा जेल :

त्वचा से सम्बन्धित समस्याओ का निवारण करने के लिए ये सबसे बेहतर और लाभकारी उपाय है. कालेपन की समस्या में ये न केवल गहरे धब्बो को हल्का करता है अपितु त्वचा में निखार लाने में भी मदद करता है. इसके लिए एलोवेरा जेल की एक परत अपनी गर्दन और पीठ के काले हिस्से पर लगा लें और कुछ देर लगे रहने दें. बाद में पानी से इसे साफ़ कर लें. धीरे-धीरे त्वचा का कालापन साफ़ होने लगेगा.

5. बादाम का तेल :बादाम तेल

इसके लिए बादाम के तेल को गर्म करके और त्वचा के उस हिस्से में लगाएं जहा कालापन हो. इस उपाय का प्रयोग एक महीने तक लगातार करते रहे. स्किन में निखार तो आएगा ही साथ-साथ रक्त का परिसंचरण भी बेहतर तरीके से होगा.

6. संतरे का गुदा :

इसमें मौजूद vitamin C के कारण ये त्वचा को निखारने में मदद करता है. इसके साथ ही गहरे दाग-धब्बो को मिटाने के लिए भी ये एक बेहतर उपाय है. इसके लिए संतरे के गूदे के पाउडर को दूध के साथ मिला लें. अब इसे अपनी गर्दन पर लगाएं. कुछ देर तक रखने के बाद उसे साफ़ पानी से धो लें. आपकी त्वचा साफ़ होने लगेगी.

7. शहद और टमाटर :

शहद त्वचा को मॉइश्चराइज़ करने में मदद करता है जबकि टमाटर उसे निखारने में मदद करता है. सोचिये यदि इन दोनों लाभकारी पदार्थो को एक साथ मिलाकर प्रयोग में लाया जाये तो क्या कहने. इन दोनों को प्रयोग में लाने के लिए शहद और टमाटर को एक साथ मिक्स करके मिश्रण बना लें. अब इस मिश्रण को अपनी गर्दन और पीठ पर लगाएं. 20 मिनट के लिए इसे लगे रहने दे और बाद में साफ़ पानी से धो लें. अच्छे परिणामो के लिए रोजाना इसका प्रयोग करे. फायदा मिलेगा.

8. दही :

त्वचा के कालेपन को दूर करने के लिए दही का प्रयोग करना भी बहुत लाभकारी होता है. क्योंकि इसमें एक प्राकृतिक अम्ल पाया जाता है जो त्वचा से दाग-धब्बो को हटाने के साथ-साथ त्वचा को नमी प्रदान करने में भी मदद करता है. dahi
इसका प्रयोग करने के लिए सामान्य दही को अपनी गर्दन और पीठ के काले हिस्से में लगा कर कुछ देर तक ऐसे ही रहने दे. बाद में साफ़ पानी से धो लें. 2 हफ़्तों के लगातार प्रयोग से आपकी स्किन में निखार आ जायेगा.

9. दलिया :

त्वचा के कालेपन को दूर करने के लिए exfoliation भी एक बेहतर उपाय है. इसके लिए आप दलिये का प्रयोग कर सकती है. क्योकि ये त्वचा की ऊपरी परत को साफ़ करके साफ़ परत को बाहर लाने में मदद करता है. इसके निर्माण के लिए दही, शहद और दलिये को एक साथ मिलाकर एक दरदरा मिश्रण बना लें. अब इस मिश्रण से अपनी गर्दन और पीठ को अच्छे से साफ़ कर लें. आपकी स्किन का कालापन दूर होने लगेगा.

10. जैतून का तेल :

सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं अपितु आपकी त्वचा के लिए भी जैतून का तेल बहुत लाभकारी होता है. ये त्वचा को प्राकृतिक रूप से नमी प्रदान करके उसे पोषण देने का भी काम करता है. इसीलिए त्वचा के कालेपन की समस्या ने भी इसका प्रयोग किया जा सकता है. इसके लिए थोड़े से जैतून का तेल में नींबू का रस मिला लें. अच्छे से मिलाने के बाद उसे अपनी गर्दन और पीठ के काले हिस्से में लगाएं. 20 मिनट तक ऐसे ही रहने दे और फिर पानी से धो लें.

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सूनी गोद में गूंजेगी किलकारियां! ये है तरीके

माँ बनना हर महिला के लिए बड़े ही सौभाग्य की बात होती है, परन्तु कई बार महिला को किसी शारीरिक समस्या के होने के कारण, मासिक धर्म में होने वाली अनियमितता के कारण, या पति पत्नी के करीबी सम्बन्ध सही न होने का असर भी महिला के गर्भधारण पर पड़ता है, इसके अलावा यदि महिला को मासिक तनाव होता है तो इसके कारण भी गर्भाधारण में समस्या आती है, और इसके कारण महिला के अंदर और भी निराशाजनक भावना पैदा हो जाती है।

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किसी भी महिला को अच्छा नहीं लगता है की बहुत सी कोशिश करने पर भी उसका गर्भधारण नहीं हो रहा है, ऐसे में महिलाओ को निराशा को छोड़ कर इस बात का पता करना चाहिए, की उन्हें ऐसी परेशानी क्यों हो रही है, जैसे की उन्हें अपनी अच्छे से जांच करवानी चाहिए, अपने पति का भी चेक अप करवाना चाहिए, यदि महिला को प्रेगनेंसी नहीं हो रही है तो उसे अपने ओवुलेशन पीरियड का भी ध्यान रखना चाहिए, इसके अलावा और भी कई तरीके है जिनसे आप माँ बनने का सुःख पा सकती है, और आपकी भी सूनी गोद में किलकारियां गूंज सकती है, तो आइये जानते है की वो तरीके कौन कौन से है।

शारीरिक परेशानी होने पर उसका इलाज करवाएं:-

कई बार महिलाओ को गर्भाशय से सम्बंधित समस्या होने पर या किसी बिमारी आदि के कारण भी प्रेग्नेंट होने में समस्या का सामना करना पड़ सकता है, इसके लिए जरुरी है यदि आपको लम्बे समय से प्रेगनेंसी न होने के कारण हताश होना पड़ रहा है, तो इसके इलाज के लिए आपको एक बार अपनी शारीरिक जांच करवानी चाहिए यदि इसके कारण आपकी गोद सूनी है, तो इस समस्या का समाधान करके आपको भी ये ख़ुशी मिल सकती है।

मासिक धर्म में परेशानी होने पर:-

कई महिलाओ को मासिक धर्म से जुडी परेशानी होती है,जैसे की इसका अनियमित होना, माहवारी कम या ज्यादा होना, इसके कारण भी महिला के गर्भ को ठहरने में परेशानी होती है, इसके अलावा कई महिलाओ को ओवुलेशन पीरियड के बारे में भी पता नहीं होता है, इस समय सम्बन्ध बनाने से भी महिलाओ के गर्भवती होने के चांस सबसे ज्यादा होता है, इसीलिए यदि आपको गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो इस पीरियड का ध्यान रखना चाहिए।

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन:-

जो महिलाएं प्रेग्नेंट नहीं हो सकती है, आज कल उनकी इस समस्या का मेडिकल में आसान सा इलाज उपलब्ध है, जिसे करने से आपके घर में भी बच्चे की किलकारियां गूंज सकती है, इस प्रक्रिया में महिला के गर्भाशय के बाहर शुक्रा* णुओं द्वारा अंडे का निषेचन किया जाता है, और उसके बाद उसे फिर से महिला के गर्भाशय में रखा जाता है, जिसके कारण महिला को माँ बनने का अनुभव मिलता है, यदि आपको लगता है की आप माँ नहीं बन सकती है, तो इस बारे में आप एक बार अपने डॉक्टर से इसके बारे में राय ले सकते है।

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सेरोगेसी से महिला बन सकती है माँ:-

सेरोगेसी भी आज कल एक माध्यम है जिसके कारण आपको अपने घर में बच्चे की किलकारियां सुनाई देती है, इसमें यदि महिला माँ नहीं बन सकती है, तो किसी और के गर्भ का सहारा लेकर वो अपने बच्चे को जन्म दे सकती है, इस बारे में भी आप चाहे तो अपने डॉक्टर से राय ले सकते है, और आप चाहे तो किसी अपनी या डॉक्टर द्वारा बताई गई महिला की मदद से अपन घर में एक नन्हे मेहमान को ला सकते है।

फैलोपियन टयुब से जुडी परेशानी का समाधान करके:-

महिला के अं *डाणु और पुरुष के शु* क्राणु के द्वारा होने वाली निषेचन की प्रक्रिया फैलोपियन टयुब में ही होती है,लेकिन यदि आपको इससे जुडी कोई समस्या है या आपकी फैलोपियन टयुब बंद है, तो इस समस्या का इलाज करवाने या इसका समाधान करवाने के लिए आपको एक बार डॉक्टर से अच्छे से अपनी जांच करवानी चाहिए।

पुरुष भी करवाएं अपना चेक अप:-

जरुअरी नहीं है की महिला यदि गर्भवती नहीं हो रही है तो इसका कारण हमेशा महिला में ही कोई कमी होती है ऐसा हो बल्कि कई बार पुरुषो में भी कमी होती है, इसीलिए यदि आपको भी ऐसी कोई समस्या है, तो इसके इलाज के लिए जरुरी है की महिला के सारः पुरुष भी अच्छे से अपने शरीर की जांच करवाएं और यदि उनके शरीर में कोई कमी है तो इस समस्या का समाधान करके अपने आप को इस ख़ुशी के लिए तैयार करें।

तो ये कुछ तरीके है जिनका इस्तेमाल करके आप भी अपने घर में अपने घर में नन्हे मेहमान को आमंत्रित कर सकते है, और यदि आपको ऐसी कोई परेशानी है तो जितना जल्दी हो सकें आपको इस समस्या के समाधान के लिए डॉक्टर से राय लेनी चाहिए ताकि आपको भी इस ख़ुशी का अनुभव हो सकें।

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सोते समय लार गिरना कारण और उपाय

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नींद में मुंह से लार गिरने के कारण और उपाय

बहुत से लोगों को आपने देखना होगा की रात में सोते समय उनके मुंह से लार गिरती है, जो वैसे तो आम बात है लेकिन कई स्थितियों में यह गंभीर बिमारी का संकेत भी हो सकती है। इसीलिए आज हम आपको रात को सोते समय मुंह से लार गिरने के कारण और उपायों के बारे में बता रहे हैं।

रात को सोते समय मुंह से लार क्यों गिरती है?

डॉक्टरों के अनुसार, लार बहने की समस्या को Sialorrhea कहते हैं, जो मुख्यतः उन शिशुओं में होती है जिनके दांत निकल रहे होते हैं। इसके अतिरिक्त यह समस्या उन बच्चों को भी होती है जिन्हे मांसपेशियों और तंत्रिका से संबंधित कोई परेशानी हो।

सोते समय मुंह से लार गिरने के कारण

दरअसल शरीर में लार बनाने वाले बहुत से ग्लैंड्स होते हैं। और जागते समय की तुलना में सोते समय ये ग्लैंड्स अधिक लार का निर्माण करते हैं। इसलिए जब हम जागे होते हैं और लार बहती नहीं क्योंकि हम उसे निगल लेते हैं जबकि रात में जब हम नींद में होते हैं तो हमारे शरीर के सभी अंग विश्राम अवस्था में होते हैं। और हम लार को निगलना भूल जाते हैं। जिसके कारण मुंह से लार बहने लगती है।

सोते समय लार अधिकतर तभी बहती है जब या तो हम करवट लेकर सो रहे होते हैं या पेट के बल सो रहे होते हैं। पीठ के बल सोने से लार बहुत ही कम बहती है। क्योंकि पीठ के बल सोने पर लार अपने आप गले से होकर निगल जाती है। जबकि करवट लेकर और पेट के बल सोने पर ऐसा नहीं होता।

मुंह से लार गिरने के अन्य कारण

इस कारण के अलावा खाने पीने की चीजों से एलर्जी और कुछ दवाओं के कारण भी मुंह से अधिक लार का निर्माण होता है जिसके कारण अक्सर सोते समय मुंह से लार बहने लगती है।

एलर्जी 

यदि किसी व्यक्ति को नाक से संबंधित कोई एलर्जी हैं तो हो सकता है उनके ग्लैंड्स अधिक लार का निर्माण करें। इसके अतिरिक्त कुछ तरह की खाने-पीने की चीजों के कारण होने वाली एलर्जी भी इस समस्या का कारण हो सकती है।

एसिडिटी 

वैज्ञानिकों के अनुसार, पेट में एसिडिटी या पेट संबंधी कोई विकार होने के कारण भी मुंह में अधिक लार बनने लगती है और जब हम सोते है तो वो बहने लगती है।

साइनस इंफेक्शन 

साइनस एक तरह की श्वास संबंधी विकार है तो ऊपरी श्वास नालिका में होता है। इसके कारण व्यक्ति को सांस लेने और निगलने में परेशानी होती है। इस विकार के होने की स्थिति में लार जमा होने के कारण वो बहने लगती है। इसके अतिरिक्त फ्लू होने पर नाक बंद होने के कारण जब हम मुंह से सांस लेते हैं तो ऐसे में अक्सर मुंह से लार बहने लगती है।

टोंसिल्स से जुडी समस्या 

हमारे गले के पीछे टॉन्सिल्स ग्लैंड्स होते हैं जिनमे सूजन आ जाने के कारण टोंसिलइटिस हो सकता है। ऐसे में सूजन के कारण गले का रास्ता छोटा हो जाता है जिसके कारण लार गले में नहीं उतर पाती और परिणामस्वरूप मुंह से लार बहने लगती है।

सोते समय डर जाना 

बहुत से लोगों को सोते समय डर लगने की समस्या होती है। और कई बार इस समस्या के कारण भी सोते समय मुंह से लार से बहने लगती है। युवाओं में ये समस्या अधिकतर साइकोपैथोलॉजिकल कारण से होती है। ऐसा अक्सर उनके भावनातक तनाव, ड्रग्स लेने, एल्कोहल लेने और नींद की कमी के कारण भी मुंह से लार गिरने लगती है।

इसके अलावा कई बार नींद से जुडी बिमारियों जैसे नींद में चलना, नींद में बातें करना, नींद में रोना आदि के कारण भी लार बहने लगती है।

ड्रग्स व दवाएं 

उपरोक्त कारणों के अलावा कोई रेगुलर दवाएं या ड्रग्स लेने के कारण भी सोते हुए मुंह से लार बहनें लगती है।

सोते समय मुंह से लार गिरने के उपाय

यहाँ हम कुछ घरेलू उपाय बता रहे हैं जिनकी मदद से इस समस्या से कुछ हद तक छुटकारा पाया जा सकता है। लेकिन यदि इन सब उपायों के बाद भी समस्या ठीक न हो तो आप डॉक्टर से कंसल्ट करें।

तुलसी के पत्ते 

यदि किसी व्यक्ति से मुंह से सोते समय लार बहती है तो उन्हें देर से पचने वाले भोजन को खाने से दूर रहना चाहिए। और पेट को साफ़ रखना चाहिए। समस्या से निजात के लिए रोजाना २ से ३ तुलसी के पत्तों को चबाएं और फिर पानी पी लें।

फिटकरी 

सोते समय लार बहने की समस्या होने पर पानी में फिटकरी घोलकर उससे कुल्ला करें। लार की समस्या ठीक हो जाएगी।

दालचीनी 

लार बहने की समस्या होने पर दालचीनी की चाय फायदेमंद होती है। इसके लिए दालचीनी को पानी में डालकर अच्छे से उबाल लें और छानकर शहद डालकर पी लें।

आंवला पाउडर 

सोते समय मुंह से लार बहने की समस्या होने पर खाने के तुरंत बाद गुनगुने पानी से आंवला पाउडर खाने से परेशानी में राहत मिलती है। यह उपाय एसिडिटी से भी राहत दिलाता है।

सुहागा 

लार गिरने की समस्या में 500 मिली. पानी में 125 ग्राम सुहागा डालकर गरारे करने से समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। साथ ही कुल्ला करने से भी समस्या ठीक हो जाएगी।

अब आप अच्छी तरह समझ गए होंगे की रात को सोते समय मुंह से लार गिरने के क्या कारण होते हैं और उनका क्या इलाज हैं। बस नियमित रूप से इन उपायों का इस्तेमाल करते समय आपकी समस्या कुछ ही समय में दूर हो जाएगी।

पुरुषों में नसों की कमजोरी दूर करने के घरेलू उपाय

नसों की कमजोरी, पुरुषों में नसों का ढीलापन एक ऐसी समस्या है जिसके बारे में पुरुष खुलकर बात नहीं कर पाते हैं। लेकिन यह एक ऐसी समस्या है जो पुरुष और उसके पार्टनर के बीच समस्या खड़ी कर सकती है। क्योंकि इसके कारण पुरुष का सम्बन्ध बनाने का दिल नहीं करता है। या फिर ऐसा कहें की पुरुष अपनी पार्टनर को सम्बन्ध बनाते समय खुश नहीं कर पाता है। और इसी कारण हो सकता है की आपकी पार्टनर और आपके रिश्ते पर बुरा असर पड़े। तो लीजिये आज हम इस परेशानी से बचाव के लिए कुछ आसान घरेलू उपचार बताने जा रहें हैं।

पुरुषों में नसों की कमजोरी के कारण

  • मानसिक रूप से परेशानी होना।
  • शारीरिक समस्या से ग्रसित होना।
  • सम्बन्ध बनाने की इच्छा की कमी।
  • गलत आदतें व् गलत दिनचर्या।

पुरुषों में नसों के ढीलेपन को दूर करने के उपाय

नसों के ढीलेपन की समस्या को पुरुष को छुपाना नहीं चाहिए। बल्कि इसके लिए उपचार करने चाहिए। ताकि आप अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध को अच्छे से एन्जॉय कर सकें। तो लीजिये आज हम आपको पुरुषों में नसों के ढीलेपन को दूर करने के कुछ आसान उपचार बताने जा रहें हैं।

तनाव

  • नसों में कमजोरी का एक कारण तनाव भी हो सकता है।
  • ऐसे में यदि आप तनाव नहीं लेते हैं और अपने आप को खुश रखते हैं।
  • तो इससे बॉडी में हार्मोनल बैलेंस रहता है जिससे आपको इस परेशानी से बचें रहने में मदद मिलती है।

नसों की कमजोरी को दूर करने के लिए रखें साफ़ सफाई

प्राइवेट पार्ट में गंदगी के जमाव के कारण भी नसों में ढीलेपन की समस्या हो सकती है। क्योंकि इसके कारण प्राइवेट पार्ट में ब्लड फ्लो सही से नहीं हो पाता है। और ब्लड फ्लो सही से न होने के कारण नसों में ढीलापन आ सकता है। ऐसे में इस परेशानी से बचाव के लिए प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान रखें।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रखें नसों की कमजोरी को दूर करने के लिए

कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने के कारण भी नसों में ढीलापन आ सकता है। ऐसे में इस परेशानी से बचाव के लिए कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल करके रखना चाहिए। और कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल करने के लिए मीठा, जंक फ़ूड आदि नहीं खाना चाहिए।

आहार

  • हरी सब्जियां, फल, ड्राई फ्रूट, दालें, लौंग, अंडे, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • यदि आप पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करते हैं। तो इससे भी पुरुषों को नसों के ढीलेपन की समस्या से बचें रहने में मदद मिलती है।

मिर्च

  • हरी व् लाल मिर्च को अपने आहार में जरूर शामिल करना चाहिए।
  • क्योंकि इससे ब्लड फ्लो को बेहतर रखने में मदद मिलती है।
  • और ब्लड फ्लो बॉडी में सही से होने पर नसों के ढीलेपन की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

योगा व् व्यायाम

  • नसों में कमजोरी को दूर करने के लिए पुरुष को योगा व् व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
  • ऐसा करने से बॉडी में ब्लड फ्लो को सही से होने में मदद मिलती है।
  • जिससे नसों में ढीलेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो पुरुषों की नसों में ढीलेपन को दूर करने में मदद करते हैं। तो यदि आप भी इस समस्या से परेशान हैं। तो आप भी इन टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही इसके लिए हो सके तो एक बार डॉक्टर से भी राय लें।

आठवें और नौवें महीने में गर्भ में शिशु की हलचल नहीं होना

प्रेगनेंसी महिला के लिए एक बहुत ही खूबसूरत समय होता है क्योंकि महिला पूरे नौ महीने तक एक नन्ही सी जान को गर्भ में रखती है, और फिर उसे जन्म देती है। गर्भावस्था महिला के लिए जहां बहुत से अनुभव से भरपूर होता है वहीँ महिला को बहुत सी जटिलताओं का सामना भी प्रेगनेंसी के दौरान करना पड़ सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिला को बहुत सी सावधानियों को बरतने की सलाह दी जाती है ताकि महिला और शिशु को प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिल सके। गर्भ में शिशु के विकास को जानने के लिए हर गर्भवती महिला बहुत उत्साहित रहती है इसीलिए गर्भ में शिशु की हलचल का महिला बेसब्री से इंतज़ार भी करती है।

क्योंकि गर्भ में शिशु की हलचल का होना न केवल महिला के मातृत्व के अहसास को बढ़ाता है बल्कि शिशु का गर्भ में हलचल करना शिशु के बेहतर विकास की और इशारा भी करता है। और गर्भ में शिशु अठारह से बीस हफ्ते के आस पास हलचल करनी शुरू कर देता है। शुरुआत में यह हलचल महिला को थोड़ी कम लेकिन जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे हलचल ज्यादा समय के लिए महसूस होने लगती है। पहली बार माँ बन रही महिलाओं के लिए शिशु की हलचल को समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। गर्भ में शिशु की हलचल का होना बहुत जरुरी होता है क्योंकि इसी से आपको यह जानने में मदद मिलती है की गर्भ में शिशु स्वस्थ है, और उसका विकास अच्छे से हो रहा है।

आठवें या नौवें महीने में शिशु की गर्भ में हलचल न होना

आठवें या नौवें महीने में शिशु का आकार बढ़ने के कारण गर्भाशय में घूमने के लिए कम जगह मिलती है। ऐसे में इन महीनों में गर्भवती महिला को शिशु की हलचल ज्यादा महसूस होने के साथ अधिक समय के लिए महसूस हो सकती है। और इस दौरान शिशु के अंगो का विकास भी हो चूका होता है ऐसे में शिशु बाहर की तेज आवाज़ सुनकर या तेज रौशनी के गर्भ में पड़ने पर अपनी प्रतिक्रिया भी देते हैं। नहीं नहीं वो बोलकर नहीं बताते हैं बल्कि ऐसा होने पर शिशु की मोवेमेंट ज्यादा बढ़ने लगती है। लेकिन कई बार ऐसा हो सकता है की गर्भ में शिशु की हलचल गर्भवती महिला को महसूस न हो, ऐसे में घबराने की कोई बात नहीं होती है।

क्योंकि कई बार शिशु थोड़ी देर के लिए हलचल बंद कर सकता है। और यदि आपको ऐसा महसूस की शिशु गर्भ में हलचल नहीं कर रहा है तो आप ठंडा पानी पीएं, थोड़ी तेज आवाज़ में गाने सुनें, आराम से लेटें, करवट बदलें। यदि ऐसा करने पर भी कुछ न हो और ऐसा करते हुए आपको एक या डेढ़ घंटे का समय बीत गया है तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि लम्बे समय के लिए गर्भ में शिशु की हलचल का न होना शिशु के लिए किसी खतरे का संकेत हो सकता है। ऐसे में जितना जल्दी हो सके आपको डॉक्टर के पास पहुँच जाना चाहिए।

तो यह हैं गर्भ में शिशु की हलचल से जुडी बातें, शिशु की हलचल के अलावा यदि प्रेग्नेंट महिला को बॉडी में कोई भी असामान्य लक्षण महसूस होता है तो भी उसे अनदेखा किये बिना तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए। ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली किसी भी परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में खड़े होकर पानी पीने के नुकसान

प्रेग्नेंट महिला के लिए पानी का सही मात्रा में सेवन करना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि गर्भवती महिला के हाइड्रेट रहने से प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने के साथ गर्भ में बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। लेकिन पानी पीते वक्त कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है ताकि आपको पानी पीने के केवल फायदे मिल सके और किसी तरह का नुकसान न हो। जैसे की फिल्टर्ड पानी या पानी को उबालने के बाद ठंडा करके पानी का सेवन करना चाहिए, खड़े होकर पानी नहीं पीना चाहिए, आदि। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को खड़े होकर पानी पीने से कौन से नुकसान हो सकते हैं उस बारे में बताने जा रहे हैं।

प्यास ज्यादा लगती है

वैसे तो पानी पीना सेहत के लिए अच्छा होता है लेकिन यदि जरुरत से ज्यादा पानी का सेवन किया जाये तो उससे स्वास्थ्य को नुकसान भी पहुँच सकता है। और यदि आप खड़ी होकर पानी पीती है तो इससे आपकी प्यास अच्छे से नहीं बुझती है। और आपकी बार बार पानी पीने की इच्छा हो सकती है। और जरुरत से ज्यादा पानी पीने प्रेग्नेंट महिला को परेशान कर सकता है जैसे की बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होना, भूख में कमी आना, डायरिया की समस्या होना, आदि।

इन्फेक्शन का खतरा

खड़े होकर पानी पीने से पानी तेजी से नीचे की और बहकर चला जाता है जिससे बॉडी से विषैले पदार्थ अच्छे से नहीं निकलते हैं। और प्रेग्नेंट महिला को किडनी इन्फेक्शन, यूरिन इन्फेक्शन जैसी परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

पेट से जुडी समस्या

यदि प्रेग्नेंट महिला खड़े होकर पानी पीती है तो इससे फ़ूड पाइप से पानी तेजी से नीचे बहकर चला जाता है। जिससे पेट के आस पास के अंगो को नुकसान पहुँचता है क्योंकि पानी बहुत तेजी से उन अंगो पर जोर डालता है। जिससे पाचन तंत्र को भी नुकसान पहुँचता है और प्रेग्नेंट महिला को पेट से जुडी परेशानियों जैसे की अपच, आदि का सामना करना पड़ता है।

जोड़ो में दर्द

खड़े होकर पानी पीने से जोड़ो के आस पास तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है जिसके कारण गर्भवती महिला को जोड़ो में दर्द जैसी परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

बॉडी में एसिड की मात्रा कम नहीं होती

पानी का भरपूर सेवन करने से साथ सही तरीके से पानी का सेवन करने से बॉडी में मौजूद एसिड को बाहर निकालने में मदद मिलती है। जिससे पेट में गैस, खट्टी डकार, सीने में जलन जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला खड़ी होकर पानी पीती है तो इससे गर्भवती महिला की यह समस्या बढ़ सकती है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्भवती महिला को खड़े होकर पानी पीने से हो सकते हैं। तो यदि आप भी माँ बनने वाली हैं और आप चाहती है की आपको ऐसी कोई परेशानी न हो। तो इससे बचने के लिए आपको आराम से एक जगह बैठकर पानी पीना चाहिए साथ ही आराम से पानी पीना चाहिए। पानी के अलावा भी गर्भवती महिला यदि किसी भी तरल पदार्थ का सेवन करती है तो उसे बैठकर भी पीना चाहिए।

क्या आपको भी ज्यादा सर्दी (ठंड) लगती है?

Jyada Thand Lagna

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सर्दियों का मौसम आते ही लोगों की कंपकपी छूटने लगती है। नहाने, हाथ धोने, फेस धोने जैसे सभी कामों में बहुत ही ठंड लगती है। जो की सही भी है क्योंकि इस समय वातावरण का तापमान बहुत कम होता है जिसके कारण हमें बहुत ठंड लगती है। परन्तु कुछ लोग होते है जिन्हे कुछ ज्यादा ही ठंड लगती है। इस तरह के लोगों को हर समय ठंड लगने का अनुभव होता रहता है।

जिसे लोग आम बात समझकर छोड़ देते है। लेकिन क्या आप जानते है की हर समय ठंड का एहसास होना आम बात नहीं है, यह कई बिमारियों का कारण भी हो सकता है। क्योंकि ऐसी बहुत सी बीमारियां है जिनमे व्यक्ति को हर समय ठंड का अनुभव होता रहता है।ज्यादा सर्दी लगने की ये है वजह

सर्दियों में ठंड सभी को लगती है लेकिन अगर आपको हर समय ठंड लगती है तो यह खराब सेहत का संकेत हो सकता है। शरीर के इम्यून सिस्टम ठीक से काम नहीं करने की वजह से भी यह परेशानी हो सकती है। यहाँ हम आपको ज्यादा ठंड लगने के कुछ विशिष्ट कारणों के बारे में बताने जा रहे है।

ज्यादा सर्दी लगने के ये कारण हो सकते है :-

1. एनीमिया :

अगर आपको गुर्दे की बिमारी है, तो एनीमिया के कारण आपको गर्मियों में भी ठंड लग सकती है। दरअसल यह एक गुर्दे का संक्रमण होता है जिसके कारण आपको ज्यादा ठंड लगती है और बुखार आ जाता है।

2. हाइपोथाइराइड :hypothairaidism

हाइपोथाइराइड के लक्षणों में अधिक ठंड लगना भी सम्मिलित है। इसके कारण थाइराइड ग्रंथि का थाइरॉक्सिन हॉर्मोन के निर्माण में कमी आ जाती है। यह रोग अक्सर थाइराइड ग्रंथि के स्थाई तौर पर नष्ट हो जाने की वजह से होता है। इसके अलावा यह ऑटोइम्यूनिटी की वजह से भी होता है।

3. डायबिटीज :

डायबिटीज के मरीजों को भी ज्यादा ठंड लगती है। इसका कारण यह बिमारी ही होती है। जब पैंक्रियाज नामक ग्लैंड शरीर में इन्सुलिन बनाना कम कर देता है या बंद कर देता है तो यह बीमारी हो जाती है।

4. एनोरेक्सिया :

शरीर से चर्बी खत्म हो जाने के कारण भी व्यक्ति को अधिक सर्दी लगने की शिकायत रहती है। कैलोरी से बचने के लिए शरीर का तापमान कम हो जाता है। यह एक गंभीर मानसिक रोग है जिसमे अस्वस्थता और मृत्युदरें अन्य किसी मानसिक रोग जितनी हो होती है। इस बीमारी में लोग खाना खाना भी छोड़ देते है।

5. आयरन की कमी :

ऊर्जा की कमी, वजन बढ़ने के साथ-साथ ठंड सहन न होना और त्वचा रूखी होने के कारण आयरन की कमी भी हो जाती है। यह शरीर में हीमोग्लोबिन का निर्माण होता है जो ऑक्सीजन को पुरे शरीर में विशेषकर फेफड़ों तक पहुंचाने में सहायता करता है।

6. नींद न पूरी होना :sleeping in office

बहुत कम नींद लेने का प्रभाव सेहत और एकाग्रता दोनों पर पड़ता है। सामान्य स्थितियों में एक व्यक्ति को 7 से 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए। अस्त व्यस्त दिनचर्या के कारण लोग अक्सर अपने शरीर की सबसे मुख्य जरूरत को अनदेखा कर देते है जिसके कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ये आपके मेटाबोलिज्म को भी कम करती है।

7. डिहाइड्रेशन :

प्रत्येक व्यक्ति को भरपूर पानी का सेवन करना चाहिए, विशेषकर तब जब आप कहीं बाहर काम करते है या बहुत अधिक शारीरिक परिश्रम करते है। क्योंकि शरीर में पानी की कमी होने से इलेक्ट्रोल्य्सिस कम होने लगते है जिससे थकावट होती है। प्यास लगने से पहले ही पानी पीने की आदत डालें। क्योंकि जब आपको प्यास लगती है तो इसका अर्थ है की आपके शरीर में पानी की कमी हो चुकी है और अब उसे पानी की आवश्यकता है।

प्रेगनेंसी में खून की कमी है तो इसके लिए क्या करें?

गर्भावस्था में खून की कमी

शरीर में खून की कमी का मतलब होता है की शरीर लाल रक्त कोशिकाएं यानी रेड ब्लड सेल्स का कम बनना या हीमोग्लोबिन के स्तर में गिरावट आना, साथ ही खून की कमी को एनीमिया के नाम से भी जाना जाता है। प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में अतिरिक्त रक्त की जरुरत होती है ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके। प्रेगनेंसी के दौरान ग्यारह ग्राम तक ब्लड की मात्रा सामान्य मानी जाती है। और यदि बॉडी में इससे कम रक्त होता है तो प्रेगनेंसी के दौरान यह काफी परेशानी खड़ी कर सकता है। इसीलिए डॉक्टर्स भी प्रेगनेंसी के दौरान आयरन युक्त आहार का सेवन करने की सलाह देने के साथ आयरन की दवाई का सेवन भी करने के लिए कहते हैं। और बॉडी में खून की कमी को पूरा करने के लिए केवल आयरन ही नहीं बल्कि फोलिक एसिड, बिटामिन बी12 का सेवन भी भरपूर मात्रा में करने की सलाह दी जाती है।

प्रेगनेंसी में खून की कमी होने के कारण

  • कम उम्र में माँ बनने के कारण यह परेशानी सामने आ सकती है।
  • महिला में खून की कमी होने के कारण गर्भधारण के बाद बॉडी में आयरन के स्तर में ज्यादा कमी आने लगती है।
  • खान पान में कमी, पोषक तत्वों का सेवन न करने के कारण भी गर्भवती महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान शिशु के विकास के लिए अधिक रक्त की जरुरत होती है ऐसे में भी महिला के शरीर में खून की कमी की समस्या हो सकती हैं इसीलिए डॉक्टर महिला को आयरन की दवाई का सेवन करने की सलाह देते हैं।

प्रेगनेंसी में खून की कमी को दूर करने के लिए क्या करें

गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी होने के कारण बॉडी में दर्द, सिर दर्द व् चक्कर, शिशु के विकास में कमी, डिलीवरी के दौरान परेशानी, थकान व् कमजोरी जैसी परेशानियों का सामना गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है। तो लीजिये प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को इन परेशानियों का सामना न करना पड़े, और बॉडी में खून की मात्रा को पर्याप्त बनाए रखने के लिए क्या करना चाहिए आइये विस्तार से जानते हैं।

सेब

प्रेग्नेंट महिला को सेब को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए क्योंकि इसमें आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। जो गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को दूर करने में मदद करता है। साथ ही इसमें विटामिन सी की मात्रा भी पर्याप्त होती है जो महिला को रोगो से लड़ने में मदद करता है।

हरी पत्तेदार सब्जियां

पालक, ब्रोकली, मेथी, जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि इसमें आयरन के साथ फोलेट और फोलिक एसिड भी भरपूर मात्रा में होता है। जिससे खून की कमी की समस्या को दूर होने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।

अनार

अनार का सेवन करने से भी हीमोग्लोबिन के स्तर को बॉडी में बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके लिए नियमित रूप से गर्भवती महिला को एक अनार का सेवन जरूर करना चाहिए। आप चाहे तो अनार के दानो के साथ जूस के रूप में भी इसका सेवन कर सकती है। लेकिन जूस का अधिक सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि जूस में कैलोरीज़ की मात्रा अधिक होती है जिसके कारण महिला को वजन बढ़ने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

चुकंदर

चुकंदर का सेवन करने से भी बॉडी में रेड ब्लड सेल्स को बढ़ाने के साथ हीमोग्लोबिन के स्तर को सामान्य रखने में मदद मिलती है। आप इसे सलाद, जूस, आदि किसी भी रूप में ले सकती है साथ ही इसे अपनी डाइट में नियमित रूप से गर्भवती महिला को जरूर शामिल करना चाहिए।

काले चने

काले चने में भी आयरन भरपूर होता है और आयरन के साथ अन्य पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होते हैं। इसीलिए गर्भवती महिला चाहे तो काले चने का सेवन भी कर सकती है।

केला

केले में आयरन मौजूद होता है साथ ही इसका सेवन करने से गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। इसीलिए नियमित रूप से प्रेगनेंसी के दौरान केले का सेवन करना भी फायदेमंद हो सकता है।

नॉन वेज

चिकन, मछली आदि का सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो यह आयरन, फोलेट, विटामिन्स जैसे पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होता है। और इसका सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को कभी आयरन की कमी के कारण होने वाली दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता है।

सूखे मेवे

सूखे मेवे जैसे बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट आदि में भी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते है। ऐसे में इनका सेवन करने से भी प्रेग्नेंट महिला को खून की कमी के कारण होने वाली दिक्कत से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही महिला चाहे तो खजूर का सेवन भी कर सकती है क्योकि इसमें भी आयरन प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है। लेकिन एक बात का ध्यान रखें की पर्याप्त मात्रा में इनका सेवन करें क्योंकि इनकी तासीर गर्म होने के कारण महिला को परेशानी भी हो सकती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाली खून की कमी को दूर करने में मदद मिलती है। साथ ही डॉक्टर द्वारा बताई गई आयरन की दवाई का सेवन भी नियमित रूप से जरूर करना चाहिए ताकि आपको किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही आप चाहे तो किसी भी चीज का सेवन करने से पहले उसके लिए एक बार डॉक्टर से जरूर राय ले सकती है।

हैरानी होगी अगर आप जान जाएंगे मछली खाने के इतने फायदे होते है

Machli Khane ke Fayde : अगर आप नॉन-वेजिटेरियन खाना खाते है तो हो न हो आप मछली भी जरूर खाते होंगे। क्योंकि इसका स्वाद तो बेमिसाल होता ही है साथ-साथ इसे खाने के और भी कई फायदे होते हैं। मछली बहुत ही पौष्टिक और गुणों से भरपूर भोजन है जिसमें कई तरह के पोषक तत्व जैसे प्रोटीन, विटामिन, ओमेगा 3 फैटी एसिड आदि मौजूद होते है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होते हैं।

बिहार, पश्चिम बंगाल और असम के लोग मछली को बड़े चाव से खाते हैं। बंगाली लोगों का फेवरिट भोजन मछली है। और ये लोग इसका बहुत अधिक सेवन करते है इसलिए उनका दिमाग बहुत तेज चलता है और स्ट्रांग रहता है। ये न केवल शारीरिक बल प्रदान करती है अपितु मानसिक स्वास्थ को भी बेहतर बनाती है।

ये एक ऐसा भोजन है जिसका सेवन करने से शरीर को लगभग सभी पोषक तत्व एक ही बार में मिल जाते है। मछली का सेवन करने के और भी कई फायदे होते है जिनके बारे में सभी नहीं जानते इसलिए यहाँ हम आपको मछली खाने के फायदों के बारे में बता रहे हैं।

मछली खाने के क्या फायदे होते हैं?

बालों के लिए : Fish For Hairs

अच्छे और लंबे बाल पाने के लिए मछली का सेवन करना बहुत लाभकारी होता है। मछली का सेवन करने से बाल घने, मुलायम और मजबूत होते हैं। मछली में ओमेगा 3 पाया जाता है जो बालों के साथ-साथ स्किन के लिए भी लाभकारी होता है। इसके लिए मछली को उबालकर या बेक करके खाना चाहिए।

आँखों के लिए : Fish For Eyes

आजकल छोटी उम्र के बच्चों में आँखों से संबंधित समस्याएं होना आम हो गया है। जिसकी वजह से कम दिखाई देना, रात में धुंधला दिखाई देना, आँखों से पानी आना, नजरें कमजोर हो गई हैं। इस वजह से छोटी उम्र में ही बच्चों को चश्मे लगाने पड़ते हैं। जिसका कारण पोषक तत्वों की कमी का होना होता है। खाने में ओमेगा 3 फैटी एसिड सम्मिलित करने पर ये सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। और मछली में यह भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जिससे ये सभी परेशानी भी दूर होती है और आँखों की रोशनी भी तेज होती है।

दिमाग के लिए : Fish For Brain

बच्चे का दिमाग तेज और शार्प करने के लिए उन्हें नियमित रूप से मछली का सेवन कराना चाहिए। क्योंकि मछली में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करते हैं और याददाश्त हो तेज करने का काम करते हैं। भूलने की बिमारी से ग्रसित व्यक्ति को भी मछली का सेवन करना चाहिए।

हाई ब्लड प्रेशर के लिए : Fish For High Blood Pressure

हाई बीपी की समस्या में नियमित रूप से मछली का सेवन करना चाहिए। क्योंकि हाई बीपी में रोगी किसी अन्य मांसाहार का सेवन नहीं कर सकतें। वे मछली का सेवन इसीलिए कर सकते हैं क्योंकि इसमें फैट कम होता है। और इसके सेवन से कोलेस्टरोल भी नहीं बढ़ता। मछली से दिल और मांसपेशियां स्वस्थ रहती है। दिल से रोगों से दूर रहने के लिए भी मछली का सेवन करना चाहिए।

अन्य फायदे : Benefits of Eating Fish

  • डिप्रेशन से जूझ से लोगों को भी मछली का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद तत्व अवसाद को कम करते हैं।
  • हार्ट अटैक के खतरे को कम करने के लिए मछली का सेवन करना चाहिए।
  • जो पुरुष खाने में मछली का सेवन करते है उनके स्पर्म स्वस्थ और सक्रिय होते हैं।
  • सेहत और खूबसूरती के लिए भी मछली खाना लाभकारी होता है।

कैंसर के खतरे को भी कम करती है : Fish Benefit For Cancer

जो लोग मछली का अधिक सेवन करते है उनकी तुलना में सामान्य लोगों को कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, मछली खाने से कैंसर का खतरा कम होता है। मछली में ओमेगा 3 फैटी एसिड की अधिक मात्रा होती है जो कैंसर सेल को बढ़ने से रोकती है। मुख्य रूप से टूना और सैल्मन मछलियां इस स्थिति में फायदेमंद होती है। यह मछली स्तन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, अंडाशय के कैंसर की संभावना को कम करती है। इसलिए इन मछलियों को अपने खाने में जरूर शामिल करना चाहिए।

गर्भावस्था में ज्यादा नमक खाने से क्या होता है?

नमक हमारी डाइट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। नमक से सोडियम मिलता है सोडियम हमारे शरीर के तरल और पी एच् बैलेंस को बनाये रखता है। नमक का कार्य गर्भावस्था के दौरान भी इतना ही जरुरी होता है क्योंकि यह भ्रूण के विकास में भी मदद करता है। लेकिन नमक की अति होने से गर्भावस्था में बहुत गंभीर समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।

गर्भावस्था के दौरान नमक की मात्रा

अब आपके मन में सबसे पहले यह सवाल उठेगा की नमक की कितनी मात्रा लेनी चाहिए जिससे वह अधिक मात्रा में हमारे शरीर में ना पहुंच सके। नमक का सेवन गर्भवस्था में एक नियमित मात्रा में किया जाना चाहिए, नमक की मात्रा ना तो बहुत ज्यादा होनी चाहिए और ना ही बहुत कम। गर्भावस्था के दौरान एक दिन में कम से कम शरीर में 3.8 ग्राम नमक शरीर में जरूर जाना चाहिए। इससे कम मात्रा में नमक खाने से भी नुक्सान हो सकता है। और ध्यान रखिये अगर गर्भावस्था के दौरान किसी का बहुत ज्यादा नमकीन चीजे खाने का मन करता है तो भी नमक की मात्रा 5 ग्राम से ऊपर ना पहुंच पाए।

नमक की अति से होने वाले नुकसान

एक कहावत के अनुसार यह माना जाता है के किसी भी चीज की अति बुरी होती है। और यह कहावत नमक के बारे में बिलकुल सही बैठती है। आइये जानते है गर्भावस्था में नमक की मात्रा अधिक खाने से क्या नुक्सान हो सकते है।

सूजन

प्रेगनेंसी में जरुरत से ज्यादा नमक का सेवन करने से शरीर में अत्यधिक मात्रा में तरल बनने लगता है जिसके परिणामस्वरूप हाथो, पैरो और मुँह पर सूजन होने लगती है। कई बार बहुत अधिक नमक के सेवन से हमारी किडनी पर भी इसका असर पड़ता है।

हाई ब्लड प्रेशर

अत्यधिक मात्रा में नमक के सेवन से हाई ब्लड प्रेशर की भी समस्या हो जाती है। गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति नुक्सान देह होती है। हाई ब्लड प्रेशर के कारण माँ और शिशु दोनों का ही स्वास्थ्य प्रभावित होता है।

डिलीवरी

प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी चीज से नुक्सान सीधा शिशु और उसके जन्म को प्रभावित करता है। इसी प्रकार नमक का अधिक सेवन करने से समस्य से पूर्व डिलीवरी होने का खतरा बढ़ जाता है इस स्थिति को प्रीक्लैम्प्सिआ के नाम से भी जाना जाता है।

कैल्शियम

गर्भावस्था के दौरान अधिक मात्रा में नमक खाने से एक बहुत बड़ा नुक्सान होता है वो है कैल्शियम का। शरीर में नमक की अधिकता होने से शरीर का कैल्शियम पेशाब के रस्ते बाहर निकल जाता है। इससे माँ की हड्डियां बहुत कमजोर हो जाती है और शिशु की हड्डियों का विकास ठीक से नहीं हो पाता है।

किडनी का विकास

2011 में हुई एक रिसर्च के अनुसार बहुत अधिक नमक के सेवन से माँ और शिशु की किडनी पर इसका बहुत असर पड़ता है। इसके अधिक सेवन से शिशु की किडनी का अच्छे से विकास भी नहीं हो पाता है।

इन सभी नुक़्सानो को जानने के बाद तो आप समझ ही गए होंगे की नमक की अधिकता होने से माँ और शिशु की सेहत पर कितना असर पड़ता है। अब आपको यह भी जानना जरुरी है के घर की बनी चीजों और भोजन से तो भले ही आपके शरीर तक बहुत कम नमक पहुंचता हो पर बाजार में मिलने वाली चीजों में बहुत अधिक मात्रा में नमक का इस्तेमाल होता है। और अक्सर हम बाजार के प्रदार्थो की तरफ ज्यादा आकर्षित होता है।

आइये अधिक नमक के सेवन से बचने के लिए जान लीजिये की कौन सी चीजों में बहुत अधिक नमक की मात्रा पायी जाती है।

  • बाजार में मिलने वाली मिठ्ठी चीजों में भी नमक का इस्तेमाल होता है जैसे की एनर्जी ड्रिंक्स।
  • कॉर्न फलैक्स में भी सोडियम की अधिकतम मात्रा पायी जाती है।
  • सॉसेस यानी की बाजार में मिलने वाली मीठी और नमकीन चटनी में नमक की बहुत अधिकता होती है।
  • सबसे हैरानी की बात यह है के एक छोटे से चिप्स के पैकेट में ही 6 से 7 ग्राम नमक होता है। जो आपके पुरे दिन की नमक के जरुरत को पूरा करता है।
  • सुबह सुबह अक्सर हममे से कुछ लोग अपने दिन की शुरुआत ब्रेड या बन खाकर करते है पर उनमे भी सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है।

गर्भावस्था के दौरान बाहर की बनी चीजों का सेवन करने से बचे और घर में ही कम नमक वाली चीजों का सेवन करे। जिससे आपकी और शिशु की सेहत सही रहे।