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जॉन्डिस (पीलिया) से बचाव और उपाय

Jaundice ke karan aur bachav ke upay :- गर्मियां और बरसात का मौसम आते है पीलिया की समस्या बढ़ने लगती है। जप हेपेटाइटिस ए और ई के वायरस के इंफेक्शन से होता है। इस बिमारी में लिवर में सूजन आ जाती है। जिसका मुख्य कारण दूषित खान-पान होता है। मुख्य रूप से पानी!

पीलिया होने पर त्वचा, म्यूकस मेम्ब्रेन और आंखों का सफ़ेद हिस्सा पीला पड़ जाता है। युरिन गहरे रंग का हो जाता है। त्वचा और आँखों का रंग भी पीला हो जाता है लेकिन इसका पीलापन, बिलीरुबिन के स्तर पर निर्भर करता है। बिलीरुबिन खून में पाया जाने वाला पीले रंग का वेस्ट (बेकार तत्व) होता है। इसका लेवल मॉडरेट होने पर रंग पीला और बहुत ज्यादा ब्राउन हो जाता है।

इसके अलावा बुखार, कमजोरी, थकान, भूख की कमी, वजन में कमी, उल्टी होना, हलके रंग की पोटी आना, पेट दर्द करना, कब्ज होना, सिर दर्द, शरीर में जलन होना आदि पीलिया के मुख्य लक्षण है।जॉन्डिस पीलिया से बचाव

एक सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर के मुताबिक, लिवर में सूजन या बाइल डक्ट (पित्त वाहिनी) में कोई रुकावट आ जाने पर जब शरीर बिलीरुबिन को प्रोसेस कर शरीर से बाहर नहीं निकाल पाता, तो पीलिया हो जाता है। इसे ‘इक्ट्रस’ भी कहते है। लिवर खून में से बेकार चीजों को बाहर निकालने का काम करता है। जब बिलीरुबिन लिवर में पहुंचता है, तो उसके साथ दूसरे केमिकल भी जुड़ जाते है। जिसे conjugated बिलीरुबिन कहते है।

लिवर से Digestive जूस (बाइल) निकलता है और तब conjugated बिलीरुबिन बाइल में मिलकर शरीर से बाहर निकल जाता है। बिलीरुबिन की वजह से पोटी का रंग ब्राउन होता है।

पीलिया में जोखिम के क्या कारण होते है?

पीलिया शरीर में छिपी किसी बिमारी का संकेत भी हो सकता है। और यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। यह लिवर या बाइल डक्ट में सूजन आने, हीमोलिटिक एनीमिया, गिलबर्ट्स सिंड्रोम, कोलेस्टेटिक, क्रिगलर नज्जर सिंड्रोम आदि में से कोई भी इसका कारण हो सकता है।

इनके अलावा स्यूडो जॉन्डिस में भी त्वचा पीले रंग की हो जाती है। यह गाजर, सीताफल या खरबूजे की अधिक मात्रा खाने से बीटा केरोटिन की अधिकता से होता है, ना की बिलीरुबिन की अधिकता है।

पीलिया के प्रकार :-

प्री-हिपेटिक पीलिया या हेमोलिटिक पीलिया :

लाल रक्त कोशिकाओं के समय से पहले तेजी से टूटने से बिलीरुबिन की मात्रा के अत्यधिक बढ़ जाने से होता है। लम्बे समय तक मलेरिया के बने रहने, थैलेसीमिया, स्किल सेल एनीमिया, गिल्बर्ट सिंड्रोम आयर एनी कई अनुवांशिक कारणों से हो सकता है।

हेपटोसेलुलर जॉन्डिस :

लिवर की कोशिकाओं में यह पीलिया शराब ज्यादा पीने और कुछ दवाओं के लिवर को नुकसान पहुंचाने के कारण होता है।

पोस्ट हिपेटिक जॉन्डिस :

बाइल डक्ट (पित्त नली) में रुकावट के कारण बिलीरुबिन बढ़ जाता है जिसके यूरिन में फैलने से उसका रंग पीला हो जाता है। इसे पोस्ट हिपेटिक जॉन्डिस कहते है।

हेपेटाइटिस के वायरस :-

हेपेटाइटिस का वायरस 5 तरह का होता है – ए, बी, सी, डी और ई। हेपेटाइटिस ए और ई खाने पीने की दूषित चीजों से होता है। यह दूषित पानी पीने, दूषित पानी से जमी बर्फ मिला जूस पीने, दूषित चीजें खाने या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहने से हो जाता है। हेपेटाइटिस बी और सी ब्लड ट्रांसफ्यूजन, संक्रमित सुई से इंजेक्शन लगाने और सेक्सुअल संबंधों से होता है। हेपेटाइटिस डी वायरस सिर्फ बी के साथ अटैक करता है लेकिन हमेशा नहीं।

छोटे बच्चों में ज्यादा पीलिया हेपेटाइटिस ए और बड़ों में हेपेटाइटिस ई की वजह से होता है। प्रेगनेंसी में हेपेटाइटिस ई हो जाए तो बहुत समस्याएं हो जाती है इसीलिए गर्भावस्था में खाने पीने पर बहुत खास ध्यान देना चाहिए।

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गर्भ में शिशु का दिल, लिवर, किडनी कमजोर होने से ऐसे बचाएं

गर्भ में पल रहे शिशु का विकास पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है ऐसे में महिला द्वारा बरती गई थोड़ी सी लापरवाही माँ व् बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा असर डाल सकती है। खसकर इसका बुरा असर गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। ऐसे में शिशु के अंग जैसे दिल, लिवर, किडनी आदि कमजोर हो सकते हैं। लेकिन प्रेग्नेंट महिला चाहे तो गर्भ में शिशु को इन सभी परेशानियों से बचा सकती है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भ में शिशु का दिल, लिवर, किडनी कमजोर होने से गर्भवती महिला कैसे बचा सकती है।

खून की कमी न हो

प्रेगनेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिला को अपने शरीर में खून की कमी नहीं होने देनी चाहिए। क्योंकि खून की कमी होने के कारण भी बच्चे के दिल, लिवर, किडनी आदि के कमजोर होने की सम्भावना अधिक होती है। ऐसे में बॉडी में खून की कमी को पूरा करने के लिए गर्भवती महिला को आयरन से भरपूर चीजों का सेवन करना चाहिए। ताकि बच्चे के सभी अंगों के विकास को बेहतर होने के साथ अंगो की मजबूती को बरकरार रहने में मदद मिल सके।

ब्लड फ्लो में रूकावट को दूर करें

गर्भावस्था में शरीर में ब्लड फ्लो सही न होने के कारण भी शिशु तक ब्लड, ऑक्सीजन, पोषक तत्व आदि सही तरीके से नहीं पहुँच पाते हैं। जिसकी वजह से शिशु के अंग कमजोर हो सकते हैं ऐसे में बॉडी में ब्लड फ्लो को सही रखने के लिए गर्भवती महिला थोड़ा व्यायाम व् योगासन करना चाहिए। ताकि गर्भ में बच्चे तक उसकी जरुरत की चीजे पहुंचाई जा सके और बच्चे के विकास में कोई कमी न आये।

पानी का भरपूर सेवन करें

प्रेग्नेंट महिला को गलती से प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में तरल पदार्थों की कमी नहीं होने देनी चाहिए। क्योंकि तरल पदार्थों की कमी होने के कारण एमनियोटिक फ्लूड में कमी आती है जिससे गर्भ में शिशु के विकास में कमी आती है। ऐसे में गर्भ में शिशु बिल्कुल स्वस्थ रहे उसे कोई परेशानी न हो, उसका विकास अच्छे से हो इसके लिए गर्भवती महिला को पानी के साथ अन्य तरल पदार्थों का भी प्रेगनेंसी में भरपूर सेवन करना चाहिए।

तनाव नहीं लें

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला मानसिक रूप से परेशान रहती है तो इसके कारण शरीर की सभी क्रियाओं पर बुरा असर पड़ता है। सतह ही गर्भ में शिशु का विकास भी प्रभावित होता है जिससे जन्म के समय शिशु में शारीरिक या मानसिक रूप से कमी आने का खतरा होता है। ऐसे में बच्चे को शारीरिक या मानसिक रूप से कोई कमी न हो शिशु के सभी अंगों का विकास अच्छे से हो सके इसके लिए गर्भवती महिला को तनाव लेने से बचना चाहिए।

नशे से दूरी

प्रेग्नेंट महिला यदि किसी भी तरह के नशे का सेवन करती है जैसे की शराब पीती है, तो शराब की एक बून्द भी शिशु तक पहुंचकर शिशु के विकास को बुरी तरह प्रभावित करती है। जिससे शिशु के अंगो की बनावट में कमी आने के साथ शिशु के अंग कमजोर हो सकते हैं। ऐसे में शिशु के अंगों से जुडी हर परेशानी से बचने के लिए महिला को नशे का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

जरुरी जांच

गर्भावस्था के दौरान महिला को डॉक्टर से अपनी सभी जरुरी जांचें करवा लेनी चाहिए और अल्ट्रासॉउन्ड समय से करवाना चाहिए। ताकि यदि गर्भ में बच्चे के विकास से जुडी कोई परेशानी भी हो तो डॉक्टर्स द्वारा साथ की साथ ही उस परेशानी का इलाज हो जाये और गर्भ में शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान रखने से प्रेग्नेंट महिला गर्भ में शिशु का दिल, लिवर, किडनी व् अन्य बॉडी पार्ट्स को कमजोर होने से बचा सकती है। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको व् आपके बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा तेल मसालें खाने से क्यों बचना चाहिए

प्रेगनेंसी में तेल मसालों का अधिक सेवन करने से क्यों बचना चाहिए, गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव का असर केवल महिला की सेहत पर ही नहीं बल्कि स्वाद पर भी पड़ता है। जैसे की प्रेग्नेंट महिला का कई बार कुछ न कुछ अलग खाने का मन करता है और इसे क्रेविंग कहा जाता है। कुछ महिलाओं का प्रेगनेंसी के दौरान खट्टा खाने का मन करता है। तो कुछ का मीठा, कई महिलाएं अधिक मसाले व् तेल युक्त आहार का सेवन करना पसंद करती है।

लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान खान पान में की गई थोड़ी सी लापरवाही केवल महिला के स्वास्थ्य को ही नहीं बल्कि शिशु की सेहत पर भी नकारात्मक असर डाल सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को खान पान में सावधानी बरतना बहुत जरुरी होता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में प्रेग्नेंट महिला को अधिक तेल मसाले युक्त आहार का सेवन करने से क्यों बचना चाहिए इस बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में तेल मसालों का अधिक सेवन करने से हो सकता है पाचन तंत्र कमजोर

  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण पाचन क्रिया पर असर पड़ता है।
  • ऐसे में अधिक तेल मसाले युक्त आहार का सेवन करने से खाने को अच्छे से हज़म करने में प्रेग्नेंट महिला को दिक्कत हो सकती है।
  • जिसके कारण पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है।
  • जिससे गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियां अधिक होने का खतरा रहता है।

एसिडिटी

  • पाचन तंत्र के कमजोर होने के कारण गर्भवती महिला को खाना हज़म में करने में दिक्कत हो सकती है।
  • जिसके कारण पेट में गैस, कब्ज़ की समस्या, खट्टी डकार, सीने में जलन जैसी परेशानी हो सकती है।
  • ऐसे में इन परेशानियों से बचाव के लिए कम तेल मसाले और पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन प्रेग्नेंट महिला को करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में तेल मसालों का अधिक सेवन करने से हो सकता है गले में इन्फेक्शन

  • ज्यादा तेल मसाले वाले आहार का सेवन करने से गर्भवती महिला को गले में इन्फेक्शन की समस्या भी सकती है।
  • और प्रेगनेंसी के दौरान ऐसी परेशानी का होना प्रेग्नेंट महिला की दिक्कतों को बढ़ा सकता है।

बवासीर की समस्या

  • वजन बढ़ने के कारण, कब्ज़ के कारण प्रेग्नेंट महिला के पेट के निचले हिस्से की मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है।
  • जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को बवासीर जैसी परेशानी होने का खतरा रहता है।
  • ऐसे में यदि गर्भवती महिला ज्यादा तेल मसाले वाले आहार का सेवन करती है।
  • तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला की यह दिक्कत बढ़ सकती है।

वजन बढ़ सकता है

  • अधिक तेल युक्त आहार का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर पर चर्बी का जमाव अधिक हो सकता है।
  • जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ने का खतरा रहता है।
  • और जरुरत से ज्यादा प्रेग्नेंट महिला का वजन बढ़ना प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को बढ़ा सकता है।

पानी की कमी

  • अधिक ऑयली व् मसालेदार आहार का सेवन करने से शरीर में पानी की कमी होने का खतरा हो सकता है।
  • जिसके कारण गर्भवती महिला को सूजन की समस्या हो सकती है।
  • साथ ही महिला को पानी की कमी के कारण होने वाली अन्य दिक्कतों का प्रेगनेंसी के दौरान सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां जो प्रेग्नेंट महिला को अधिक तेल मसाले का सेवन करने से हो सकती है। ऐसे में इन परेशानियों से बचाव के लिए साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने और भ्रूण के बेहतर विकास के लिए प्रेगनेंसी के दौरान अधिक तेल मसाले का सेवन करने से बचना चाहिए।

डिलीवरी के बाद महिला को क्या-क्या खाना चाहिए?

डिलीवरी के बाद महिला का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है साथ ही बच्चे का विकास डिलीवरी के बाद भी महिला पर ही निर्भर करता है। ऐसे में महिला जिस तरह प्रेगनेंसी के दौरान अपने खान पान का ध्यान रखती थी वैसे ही डिलीवरी के बाद भी महिला को अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करने में मदद मिल सके साथ ही बच्चे का विकास भी अच्छे से हो। तो आइये अब जानते हैं की डिलीवरी के बाद महिला को किन किन चीजों का सेवन जरूर करना चाहिए।

डेयरी उत्पाद

डिलीवरी के बाद महिला को दूध व् दूध से बनी चीजों का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि यह कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन्स का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं। जो महिला की हड्डियों व् मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद करते हैं। जिससे डिलीवरी के बाद महिला जल्दी स्वस्थ होती है साथ ही डेयरी उत्पाद का भरपूर सेवन करने से ब्रेस्टमिल्क को बढ़ाने में मदद मिलती है। जिससे बच्चे का विकास भी अच्छे से होता है।

दालें

दालों का सेवन भी डिलीवरी के बाद महिला को भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि दालें प्रोटीन, आयरन, फाइबर, विटामिन का बेहतरीन स्त्रोत होती है। जो डिलीवरी के बाद महिला को होने वाली परेशानियों को कम करने के साथ महिला को फिट करने में भी मदद करते हैं। साथ ही मूंग दाल, राजमा, आदि का सेवन करने से शिशु के लिए दूध के उत्पादन को बढ़ाने में भी मदद मिलती है जिससे बच्चे का विकास भी अच्छे से होता है।

हरी सब्जियां

हरी सब्जियों में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, फाइबर, पोटैशियम व् अन्य मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। ऐसे में डिलीवरी के बाद यदि महिला को हरी सब्जियों का सेवन करती है। तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को यह सभी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं। जो माँ व् बच्चे दोनों को फिट रखने में मदद करते हैं।

ड्राई फ्रूट्स के लड्डू

ड्राई फ्रूट्स पोषक तत्वों की खान होते हैं ऐसे में डिलीवरी के बाद महिला को ड्राई फ्रूट्स का भरपूर सेवन करना चाहिए। और इसके फायदे को बढ़ाने के लिए आपको घी में आटा, गोंद, ड्राई फ्रूट्स आदि को मिक्स करके लड्डू बनाकर खाना चाहिए। डिलीवरी के बाद महिला यदि रोजाना एक गिलास दूध के साथ इन लड्डूओं का सेवन करती है। तो ऐसा करने से भी गर्भवती महिला को बहुत जल्दी फिट होने में मदद मिलती है साथ ही बच्चे के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व बच्चे तक भी पहुँचते हैं। इसके अलावा महिला को रोजाना बादाम का सेवन तो जरूर करना चाहिए।

अंडे

अंडे प्रोटीन का सबसे बेहतरीन स्त्रोत होते हैं ऐसे में अंडे का सेवन यदि डिलीवरी के बाद महिला करती है तो इससे कोशिकाओं को मजबूत होने व् कोशिकाओं की मरम्मत होने में मदद मिलती है। साथ ही इसमें मौजूद पोषक तत्व बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। ऐसे में रोजाना महिला को उबले अंडे, अंडे की भुर्जी, ऑमलेट आदि बनाकर अंडे का सेवन जरूर करना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें की अंडा अच्छे से पका हुआ हो।

नॉन वेज

चिकन, जिन मछली में मर्करी की मात्रा मौजूद नहीं होती वो मछली, आदि का सेवन भी डिलीवरी के बाद महिला कर सकती है। और इनका सेवन करने से डिलीवरी के बाद महिला को बहुत जल्दी फिट होने में मदद मिलती है।

मेथी के दाने

मेथी के दानों में कैल्शियम, आयरन, विटामिन व् अन्य खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। जो डिलीवरी के बाद जोड़ों के दर्द, पीठ दर्द, व् बॉडी के किसी अन्य हिस्से में दर्द की समस्या से राहत दिलाने में मदद करती है साथ ही महिला को जल्दी फिट होने में भी मदद मिलती है। मेथी का पाउडर बनाकर, मेथी को दानों के रूप में, मेथी का पानी आदि के रूप में सेवन कर सकते हैं।

अजवायन

डिलीवरी के बाद अजवायन का सेवन भी महिला को करना चाहिए। क्योंकि डिलीवरी के बाद महिला को गैस और अपच की समस्या अधिक हो सकती है और अजवायन का सेवन महिला को समस्या से राहत दिलाता है। क्योंकि इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीसेप्टिक गुण भी होते हैं। साथ ही इससे शिशु को भी पेट में गैस आदि की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

फलों का सेवन

संतरे, निम्बू, जैसे फलों का सेवन भी डिलीवरी के बाद महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि यह विटामिन सी का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं जो डिलीवरी के बाद महिला व् बच्चे को इन्फेक्शन से बचाव करने व् बॉडी के सभी अंगो तक ब्लड पहुंचाने में बहुत मदद करते हैं। साथ ही इनमे पानी की मात्रा की अधिकता भी होती है जो महिला के शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं।

ओट्स

ओट्स का सेवन भी डिलीवरी के बाद महिला को नाश्ते में या स्नैक्स के रूप में जरूर करना चाहिए। क्योंकि ओट्स फाइबर, आयरन जैसे पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होता है जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है।

तरल पदार्थ

खाने के साथ डिलीवरी के बाद महिला को शरीर में पानी की कमी भी नहीं होने देनी चाहिए। और इसके लिए महिला को आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ, जूस, नारियल पानी आदि का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ आहार जिन्हे अपनी डाइट में डिलीवरी के बाद महिला को जरूर शामिल करना चाहिए। यह सभी खाद्य पदार्थ डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी से जल्दी फिट करने में मदद करने के साथ बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

छाछ गर्भवती महिला के लिए कितनी जरुरी है जानिए

प्रेगनेंसी में गर्भवती महिला के लिए छाछ पीना सही है या नहीं, इसके बारे में छाछ का सेवन करने से पहले प्रेग्नेंट महिला को पता होना चाहिए। ताकि माँ और बच्चे को किसी भी तरह का नुकसान न हो। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपकी छाछ पीने की इच्छा हो रही है तो आप बिना किसी डर के छाछ का सेवन कर सकती है। क्योंकि छाछ में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन्स व् अन्य मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते है। जो प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं, और छाछ का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को बहुत से सेहत सम्बन्धी फायदे भी मिलते हैं। तो आइये आज हम आपको प्रेगनेंसी में छाछ का सेवन करने से कौन से फायदे होते हैं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

ऊर्जा मिलती है: प्रोटीन, पोटैशियम, विटामिन्स जैसे मिनरल्स से भरपूर होने के कारण छाछ का सेवन करने से गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को एक्टिव रहने में मदद मिलती है और महिला के एक्टिव रहने से बच्चे के बेहतर विकास भी मदद मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल रहता है कण्ट्रोल: छाछ का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला के शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला के हदय को स्वस्थ रहने में भी फायदा पहुँचता है।

पाचन क्रिया रहती है दुरुस्त: अधिकतर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी में कब्ज़, एसिडिटी व् अन्य पाचन क्रिया से जुडी परेशानियों के कारण दिक्कत महसूस कर सकती है। लेकिन यदि रोजाना प्रेग्नेंट महिला खाने के साथ छाछ में काला नमक, भुना हुआ जीरा, अजवाइन आदि डालकर पीती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला की पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा यदि बिना कुछ डाले भी प्रेग्नेंट महिला रोजाना खाने के साथ छाछ पीती है तो इससे भी महिला की पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है।

वजन रहता है नियंत्रित: प्रेगनेंसी के दौरान वजन का बढ़ना अच्छी बात होती है लेकिन यदि वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ जाये तो इससे महिला को परेशानी भी हो सकती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला रोजाना छाछ का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। क्योंकि छाछ में कैलोरी और फैट की की मात्रा कम होती है जिससे वजन को सही रखने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर: प्रेगनेंसी के दौरान कई बार ब्लड प्रैशर के घटने या बढ़ने के कारण गर्भवती महिला को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला छाछ का सेवन करती है तो छाछ में मौजूद बायोएक्टिव प्रोटीन, एंटी वायरल गुणों के कारण ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

कैल्शियम: छाछ कैल्शियम का भी बेहतरीन स्त्रोत होती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला यदि छाछ का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला की हड्डियों को मजबूती मिलने के साथ पेट में पल रहे बच्चे की हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

विषैले पदार्थों को बाहर निकालती है: छह का सेवन करने से बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में फायदा मिलता है और माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

पेट से जुडी समस्या: यदि प्रेग्नेंट महिला को भूख में कमी, पेट टाइट महसूस होना, पेट में जलन मसहूस होना, दस्त, जैसी परेशानियां होती है। तो इसके लिए यदि गर्भवती महिला दही से बनी छाछ का सेवन करती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को इन सभी परेशानियों से राहत पाने में मदद मिलती है।

प्रेग्नेंट महिला को कब छाछ का सेवन नहीं करना चाहिए

  • यदि गर्भवती महिला को स्किन से जुडी कोई समस्या होती है।
  • खांसी, जुखाम, गले में इन्फेक्शन जैसी समस्या होने पर।
  • रात के समय छाछ का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • बुखार आदि होने पर भी छाछ का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो इन फायदों के लिए प्रेगनेंसी के दौरान छाछ का सेवन करना जरुरी होता है। यदि आप भी माँ बनने वाली है तो खाने का जायका बढ़ाने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के लिए आपको भी छाछ का सेवन जरूर करना चाहिए।

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प्रेगनेंसी में परवल खाने के फायदे और नुकसान

गर्भावस्था के दौरान अधिकतर सभी सब्जियों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में कुछ ऐसी सब्जियां होती है जो शायद आपने पहले कभी न ट्राई की हो लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान न केवल उन सब्जियों का सेवन आपके लिए फायदेमंद होता है। बल्कि वह सब्जियां खाने में भी स्वादिष्ट होती है। और ऐसी ही एक सब्ज़ी है परवल, परवल दिखने में एक छोटे खीरे की तरह होता है, साथ ही परवल में विटामिन्स, मैग्नीशियम, फाइबर जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भावस्था के दौरान महिला व् बच्चे को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को परवल का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

फाइबर

प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादातर गर्भवती महिलाओं को अपच, कब्ज़, गैस, सीने में जलन, पेट में जलन, खट्टी डकार जैसी परेशानियां होती है। और इसका कारण होता है पाचन क्रिया का अच्छे से काम न करना, ऐसे में गर्भवती महिला को इस परेशानी से राहत के लिए फाइबर युक्त आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है। और परवल फाइबर से भरपूर होता है, इसीलिए गर्भवती महिला यदि परवल का सेवन करती है तो पाचन क्रिया धीमे पड़ने के कारण होने वाली सभी परेशानियों से गर्भवती महिला को निजात पाने में मदद मिलती है।

विटामिन सी

गर्भावस्था के दौरान महिला की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है जिसके कारण गर्भवती महिला को संक्रमण होने का खतरा रहता है। ऐसे में परवल का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि परवल में विटामिन सी मौजूद होता है जो की एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट होता है और महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है। विटामिन सी अलावा विटामिन बी 1, विटामिन बी 2, विटामिन ए भी परवल में मौजूद होते हैं जो माँ व् बच्चे को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल होता है कण्ट्रोल

गर्भावस्था के दौरान परवल का सेवन करने से बॉडी में कोलेस्ट्रॉल को कम करने और ब्लड में शुगर के लेवल को सही रखने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को कोलेस्ट्रॉल बढ़ने या गेस्टेशनल शुगर जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

कैल्शियम व् मैग्नीशियम

परवल में कैल्शियम व् मैग्नीशियम की भी कुछ मात्रा मौजूद होती है ऐसे में गर्भवती महिला के लिए परवल का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि इससे गर्भवती महिला की हड्डियों को पोषण मिलता है साथ ही गर्भ में पल रहे बच्चे के शारीरिक विकास को बेहतर करने में फायदा होता है।

एंटी ऑक्सीडेंट्स

परवल में एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने में मदद करते हैं। जिससे झाइयां, दाग धब्बे जैसी परेशानी से प्रेग्नेंट महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

पेन किलर की तरह काम करता है

गर्वस्थ के दौरान गर्भवती महिला को बॉडी पार्ट्स, जोड़ो आदि में दर्द की समस्या रहती है ऐसे में परवल का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि परवल गर्भवती महिला के लिए पेन किलर का काम करता है।

ब्लड में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकालता है

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थ माँ व् बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला परवल का सेवन करती है तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को बॉडी में विषैले पदार्थों के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि परवल का सेवन करने से ब्लड में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है।

वजन रहता है नियंत्रित

गर्भावस्था के दौरान जरुरत से ज्यादा वजन बढ़ना माँ व् बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है। लेकिन परवल का सेवन करने से गर्भवती महिला को वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में परवल खाने के नुकसान

गर्भावस्था में परवल खाने से गर्भवती महिला या बच्चे को कोई भी नुकसान नहीं होता है। लेकिन गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की जरुरत से ज्यादा परवल का सेवन प्रेग्नेंट महिला न करे क्योंकि किसी भी चीज का ज्यादा सेवन करने से पेट से जुडी समस्या हो सकती है, गले सड़े परवल महिला खाने में इस्तेमाल न करें, अच्छे से परवल को धोने के बाद ही खाने के लिए महिला इसे खाने के लिए प्रयोग करें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान परवल खाने से क्या फायदे या नुकसान गर्भवती महिला को होते हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और परवल की सब्ज़ी खाना चाहती है तो अपने मनपसंद तरीके से परवल की सब्ज़ी बनाकर उसका सेवन कर सकती है।

क्या प्रेगनेंसी में माहवारी आती है?

प्रेगनेंसी में रक्तस्त्राव

यदि आपको हर महीने पीरियड्स समय से आते हैं और इस महीने ऐसा नहीं हुआ है तो यह गर्भधारण का लक्षण हो सकता है। ऐसे में पीरियड्स न आने के एक हफ्ते बाद महिला को घर पर ही जरूर चेक करके देखना चाहिए की वो गर्भवती तो नहीं है, यदि आपका परिणाम पॉजिटिव है तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए। और यदि नहीं तो दो तीन दिन रूककर दुबारा टेस्ट करना चाहिए और यदि फिर भी नेगेटिव आता है तो भी आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए। प्रेगनेंसी के दौरान महिला के मन में तरह तरह के सवाल आते हैं और उनमे से एक सवाल यह होता है की क्या प्रेगनेंसी के दौरान रक्तस्त्राव हो सकता है? तो इसके लिए सबसे पहले यह जानना जरुरी होता है की रक्तस्त्राव कितना हो रहा है।

रक्तस्त्राव से कैसे पता चलता है की यह पीरियड्स है या नहीं?

यदि आपके टेस्ट में परिणाम पॉजिटिव आया है की आप गर्भवती हैं तो ऐसे में प्रेगनेंसी की शुरुआत में हल्का फुल्का खून का धब्बा लगना आम बात होती है। क्योंकि यह खून के धब्बे पीरियड्स होने का संकेत नहीं होते हैं बल्कि महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु के बाद जब अंडा निषेचित हो जाता है और उसके बाद यह निषेचित अंडा फैलोपियन ट्यूब से जाकर गर्भाशय में प्रत्यारोपित होता है। तो इस प्रत्यारोपण के दौरान महिला को खून के धब्बे लगना आम बात होती है। लेकिन यदि आपको खून के धब्बे लगने के साथ पेट या पेट के निचले हिस्से में असेहिनीय दर्द हो रहा है तो यह दो चीजों की तरफ इशारा करता है।

पहला पेट में तेज दर्द होने के साथ स्पॉटिंग की समस्या का होना एक्टोपिक प्रेगनेंसी का लक्षण हो सकता है। एक्टोपिक प्रेगनेंसी के दौरान निषेचित अंडा गर्भाशय की जगह फैलोपियन ट्यूब में ही प्रत्यारोपित हो जाता है। इसके अलावा पेट में तेज दर्द के साथ रक्तस्त्राव का होना गर्भपात का लक्षण भी हो सकता है। ऐसे में महिला को चाहिए की दोनों में से कोई भी दिक्कत हो उसके लिए जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से मिलें, और जल्दी से अपना इलाज करवाना चाहिए ताकि महिला को सेहत और स्वास्थ्य सम्बन्धी ज्यादा परेशानी न हो। कई महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण होने के कारण भी स्पॉटिंग की समस्या हो सकती है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान रक्तस्त्राव से जुडी कुछ बातें, इसके अलावा प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे पेट पर किसी भी तरह का जोर पड़े। क्योंकि पेट पर जोर पड़ने के कारण महिला को ब्लीडिंग की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, साथ ही महिला का गर्भपात होने का खतरा भी रहता है।

मानसिक बिमारी क्या होती है? क्या है इससे बचने के उपाय

मानसिक बिमारी को डिप्रेशन या तनाव भी कहा जाता है। आज कल इस भागदौड़ वाले समय में एक दूसरे से आगे निकलने की टेंशन, घर से जुडी कोई परेशानी, शादीशुदा जीवन में होने वाली परेशानी, व् अन्य किसी भी परेशानी को यदि व्यक्ति अपने दिमाग पर हावी होने देता है। तो इसके कारण वो मानसिक बिमारी का शिकार हो जाता है और यह समस्या केवल बड़ो में ही नहीं बल्कि छोटे बच्चों में भी देखने को मिलती है। और इस समस्या को दूर करने के लिए अपनों का साथ बहुत जरुरी होता है।

अब आप ये जानना चाहते होंगे की कैसे पता करें की व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार है या नहीं। इसके कई लक्षण होते हैं, जैसे की व्यक्ति को अकेला रहने की आदत होना, कभी कभी व्यक्ति का बहुत ज्यादा बोलना तो कभी बिलकुल बात करना बंद कर देना, भूख कम लगना, बहुत अधिक सोना या फिर अनिंद्रा की समस्या होना, नशे का सेवन करना आदि। ऐसे बहुत से लक्षण है जिनसे आप पता कर सकते है की व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार है। तो आइये जानते है की इससे बचने के लिए आप क्या कर सकते है।

मानसिक बिमारी के लक्षण:-

  • ज्यादा नींद आना और कई बार सारा दिन और रात नींद न आना।
  • हर समय सर में दर्द व् पीठ दर्द की समस्या से परेशान रहना।
  • अधिक चिड़चिड़ापन होना।
  • अकेला रहना और किसी से भी बात करने का मन न करना।
  • एकाग्रता की कमी होना यानी किसी काम में अच्छे से दिमाग न लगा पाना।
  • केवल सामने वाले पर ही नहीं अपने आप पर भी गुस्सा करना मानसिक बिमारी का लक्षण है।
  • डर लगना
  • पेट से सम्बंधित परेशानी ज्यादा रहना।
  • सेक्स में रूचि न रहना।
  • बुरे ख्याल आना।
  • दिमागी रूप से हमेशा थके रहना, जिससे की निर्णय लेने की क्षमता नहीं रहती।
  • ऐसी चीजों के बारे में सोचना या देखना जो सच में नहीं है।

तनाव के कारण:-

  • बदलती जीवनशैली भी तनाव का कारण होती है।
  • शारीरिक रूप से किसी बिमारी से परेशान होने पर।
  • किसी बहुत करीबी द्वारा धोखा मिलने पर।
  • काम की टेंशन को अपने ऊपर हावी होने देने के कारण।
  • नींद की कमी के कारण भी आपको स्ट्रेस हो सकता है।
  • रिलेशन खराब होने के कारण भी आपको ये परेशानी हो सकती है।
  • किसी भी बात को दिल से ज्यादा दिमाग से लगाने पर भी तनाव होता है।
  • आर्थिक रूप से परेशानी होने के कारण।
  • नौकरी या अपने काम को लेकर परेशानी होना।

मानसिक बीमारी दूर करने के उपाय:-

अपनी फीलिंग को व्यक्त करें:-

कई बार आपकी लाइफ में बहुत कुछ हो रहा होता है जिसे आप किसी के साथ शेयर नहीं करते है। जो की गलत होता है क्योंकि इसके कारण आपके दिमाग पर जोर पड़ता है। ऐसे में आपकी खुश हो या गम हो आपको अपने अपनों या दोस्तों के साथ शेयर करना चाहिए इससे आपको फायदा मिलता है। साथ ही कई बार आपकी मुश्किलों का हल ढूंढने में भी मदद मिलती है।

सकरात्मक सोच:-

पॉजिटिव सोच हमेशा आपको आगे लेकर जाती है। क्योंकि यदि आपको कोई भी परेशानी होगी तो आपकी सोच सही होने के कारण आपको उसे सुलझाने में मदद मिलती है। जिससे आपको न तो तनाव होता है और आपकी समस्या का समाधान भी मिल जाता है।

व्यायाम व् मैडिटेशन करें:-

व्यायाम करने से न केवल आपकी बॉडी फिट रहती है, बल्कि आपको तनाव को दूर करने में भी मदद मिलती है। इसके साथ आपको मैडिटेशन भी करना चाहिए क्योंकि आपके दिमाग को शांत करने और आपके तनाव को दूर करने का यह सबसे आसान और सरल उपाय होता है। आप चाहे तो मैडिटेशन क्लास भी ज्वाइन कर सकते है।

अपने इंटरेस्ट की चीज करें:-

कई बार एक ही तरह लाइफ के चलने के कारण भी व्यक्ति परेशान हो जाता है। ऐसे में जरुरी है की वो अपने दिमाग को रिलैक्स करने के लिए अपनी पसंद की हॉबी का कुछ करें। जैसे की गेम्स आदि खेले, पेंटिंग लिखे, आदि। ऐसा करने से भी उनके दिमाग को फ्रेश होने में मदद मिलती है।

बुक्स पड़ें:-

किताबे पड़ने से न केवल आपका तनाव से दूरी मिलती है। बल्कि ऐसा करने से आपको बहुत कुछ न्य सीखने को भी मिलता है, मोटीवेट करने वाली बुक्स को पड़ने से आपको अपनी लाइफ में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। साथ ही इसके कारण आपको कई बार आपकी मुश्किलों और परेशानियों को दूर करने का हल भी मिल जाता है।

अपने दोस्तों के साथ और परिवार के साथ समय बिताएं:-

कोई भी परेशानी हो यदि उसमे अपनों का साथ मिल जाता है तो उसे हल करना और भी आसान हो जाता है। इसीलिए मानसिक तनाव को दूर करने के लिए आपको अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताना चाहिए और उनके साथ समय बिताना चाहिए। इससे आपको तनाव को दूर करने और अपने आपको खुश रखने में मदद मिलती है।

नींद लें:-

एक व्यक्ति को दिन में कम से कम आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए। इससे आपके दिमाग को फ्रैश और आपको ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। साथ ही सोते समय अपने फ़ोन को बैड से दूर रखना चाहिए। और सोने के लिए आरामदायक स्थान का चुनाव करना चाहिए।

म्यूजिक सी दोस्ती करें:-

आपके तनाव को दूर करने का सबसे आसान उपाय होता है, की आप म्यूजिक से दोस्ती करे। लेकिन गाने सुनते हुए इस बात का ध्यान रखें की गाने सैड न हो। क्योंकि इससे तो आप और परेशान हो सकते हैं। ऐसे गाने सुने जिनसे आपका मन खुश हो, और ध्यान को तनाव से हटाने में मदद मिलती है।

केले का सेवन करें:-

आप शायद यकीन नहीं करेंगे की केला केवल आपके शरीर को ही मजबूत नहीं करता है। बल्कि इससे आपको तनाव दूर करने में मदद मिलती है। इसीलिए यदि आपको मानसिक रूप से परेशान है तो आपको इससे राहत के लिए केले का सेवन करना चाहिए।

मानसिक बीमारी को दूर करने के अन्य टिप्स:-

  • अपने आहार के साथ लापवाही न करें, भरपूर व् पौष्टिक आहार का सेवन करें।
  • नशे का सेवन न करें, और बुरी आदतों से दूरी बनाकर रखें।
  • आध्यात्म से भी आपको मानसिक रूप से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • दिमाग को फ्रैश करने के लिए बाहर घूमने का प्रोग्राम बनाएं।
  • रोजाना दिन में थोड़ी देर ध्यान करें और चुप रहें।
  • हंसने वाली और आपको खुश रखने वाली चीजों से जुड़े।
  • योगा करने से भी आपके दिमाग को फ्रेश रहने में मदद मिलते है।
  • अपनी दिनचर्या को सही करें, और सुबह जल्दी उठने की कोशिश करें।
  • अपने लिए समय निकालें और अपनी चाह को भी पूरा करें।
  • न कहने की आदत डालें, क्योंकि यदि आप किसी को मना नहीं करते हैं तो इसके कारण कई बार आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

तो यदि आप या आपका कोई भी करीबी इस परेशानी से जूझ रहा है, तो ऐसे में आपको उनका साथ देना चाहिए। उन्हें खुश रखने की कोशिश करनी चाहिए, डॉक्टर से बात करनी चाहिए। ताकि इस समस्या से बचाव होने में मदद मिल सकें। क्योंकि इस समस्या के बढ़ने पर कई बार व्यक्ति गलत कदम भी उठा लेते है। तो ऐसे में आपको उनका दुगुना ध्यान रखना चाहिए।

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प्राइवेट पार्ट में फुंसी होने के कारण और इलाज

फुंसी एक ऐसी परेशानी होती है जो बॉडी के किसी भी हिस्से पर हो सकती है। जैसे की चेहरे, कमर, पीठ, चेस्ट, प्राइवेट पार्ट, आदि। तो आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्राइवेट पार्ट पर होने वाली फुंसी की समस्या को लेकर बात करने जा रहे हैं। यदि किसी महिला या पुरुष को प्राइवेट पार्ट पर फुंसी की समस्या हो जाती है। तो इसका सबसे अहम कारण होता है की स्किन में तेल ग्रथियाँ मौजूद होती हैं जिनके कारण आपको फुंसी की समस्या हो सकती है। इसके अलावा ऐसे और भी कई कारण होते हैं जिनकी वजह से प्राइवेट पार्ट पर फुंसी हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्राइवेट पार्ट पर फुंसी होने के क्या कारण होते हैं। और आप किस प्रकार इस समस्या से निजात पा सकते है।

प्राइवेट पार्ट पर फुंसी होने के कारण

यदि किसी महिला या पुरुष को प्राइवेट पार्ट पर फुंसी हो जाती है। तो समस्या के क्या कारण हो सकते हैं आइये जानते हैं।

हार्मोनल बदलाव

  • पीरियड्स या प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं।
  • और बॉडी में होने वाले हार्मोनल अंसतुलन के कारण प्राइवेट पार्ट की स्किन के आस पास बेड बैक्टेरिया का उत्पादन होने लगता है साथ ही डेड स्किन का जमाव होने लगता है।
  • जिसके कारण प्राइवेट पार्ट पर दाने या फुंसी निकलने की समस्या हो सकती है।

साफ़ सफाई न रखना

  • यदि कोई महिला या पुरुष अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रखता है।
  • जैसे की यूरिन पास करने या मल पास करने के बाद अच्छे से प्राइवेट पार्ट को साफ़ नहीं करता है।
  • अंडरवीअर साफ़ नहीं पहनता है, तो ऐसे में प्राइवेट पार्ट के आस पास बेड बैक्टेरिया का उत्पादन होने लगता है।
  • जिस कारण प्राइवेट पार्ट पर फुंसी की समस्या हो सकती है।

पसीना

  • गर्मियों के मौसम में बॉडी से खूब पसीना निकलता है ऐसे में पसीने के कारण त्वचा पर डेड स्किन की एक परत बन जाती है।
  • जिसमे बेड बैक्टेरिया पनप सकता है और यदि ऐसा होता है तो भी आपको फुंसी की समस्या हो सकती है।

बहुत ज्यादा टाइट कपडे पहनना

  • यदि आप बहुत ज्यादा टाइट अंडरवीअर, जीन्स, आदि पहनते हैं।
  • तो इसके कारण उस एरिया को नमी नहीं मिल पाती है।
  • जिसके कारण स्किन सूखी पड़ने लगती है और फुंसी की समस्या हो सकती है।

प्राइवेट पार्ट में फुंसी होने के कारण है वैक्सिंग

  • गर्म वैक्स करवाने के कारण भी स्किन पर बेड बैक्टेरिया पनपने लगता है।
  • जिसके कारण महिला को प्राइवेट एरिया पर फुंसी की समस्या हो सकती है।

केमिकल का इस्तेमाल

  • यदि आप प्राइवेट एरिया के लिए खुशबूदार प्रोडक्ट्स, क्रीम, साबुन, आदि का इस्तेमाल करते हैं।
  • तो उस एरिया पर एलर्जी होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • जिस कारण प्राइवेट एरिया पर फुंसी, दाने निकलना, खुजली होना जैसी समस्या हो सकती है।

प्राइवेट पार्ट में फुंसी होने के कारण है रेज़र का इस्तेमाल

  • अधिकतर महिलाएं प्राइवेट पार्ट के अनचाहे बालों को हटाने के लिए रेज़र का इस्तेमाल करती हैं।
  • लेकिन बार बार एक ही रेज़र का इस्तेमाल करने से, रेज़र को बिना धोये इस्तेमाल करने से, किसी और का रेज़र इस्तेमाल करने से प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन का खतरा रहता है।
  • साथ ही इस कारण प्राइवेट पार्ट में फुंसी आदि होने की परेशानी भी हो सकती है।

सम्बन्ध बनाते समय की गई गलती

  • यदि सम्बन्ध बनाते समय महिला या पुरुष साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रखते हैं।
  • तो इस कारण भी फुंसी आदि होने का खतरा रहता है।
  • साथ ही कई बारे महिला या पुरुष को सम्बन्ध बनाते समय इस्तेमाल की गई सुरक्षा से भी एलर्जी हो सकती है जिस कारण फुंसी की समस्या हो सकती है।

खान पान

  • जो महिला या पुरुष बहुत अधिक मात्रा में मीठे, मिर्च मसाले से भरपूर आहार का सेवन करता है।
  • उन्हें भी प्राइवेट एरिया में फुंसी की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

प्राइवेट पार्ट में फुंसी का इलाज

प्राइवेट पार्ट में फुंसी की समस्या से बचे रहने के लिए आपको कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। यदि आप इन बातों का ध्यान रखते हैं तो आपको प्राइवेट पार्ट में फुंसी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

  • केमिकल वाले उत्पादों के इस्तेमाल से बचें।
  • प्राइवेट एरिया की साफ़ सफाई का ध्यान रखें।
  • सम्बन्ध बनाते समय सफाई का पूरा ध्यान रखें।
  • बाथरूम जाने के बाद प्राइवेट पार्ट को पानी से अच्छे से साफ़ करें।
  • पीरियड्स के दौरान ज्यादा ध्यान रखने पैड आदि समय से बदलें।
  • एक रेज़र का दो या तीन बार ही इस्तेमाल करें और हर बार इस्तेमाल करने से पहले रेज़र को गर्म पानी में धोएं।
  • ज्यादा मिर्च मसालें, मीठा का सेवन करने से बचें।
  • सूती अंडरवीअर पहने, ज्यादा टाइट कपडे न पहने।
  • नारियल का तेल, टी ट्री आयल, सेब के सिरके आदि से प्राइवेट एरिया को साफ़ करें आपको फुंसी को खत्म करने में मदद मिलेगी।

तो यह हैं कुछ कारण व् इलाज जिनकी वजह से प्राइवेट पार्ट पर फुंसी की समस्या हो सकती है। साथ ही इस समस्या से बचने के लिए कुछ इलाज व् सावधानियां भी बताई गई है। ऐसे में आपको ऐसी कोई परेशानी न हो इसके लिए आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

गर्भवती महिलाओं को इन विटामिन्स की बहुत जरुरत होती है

जब महिला माँ बनने वाली होती है, तो उसे अपनी दुगुनी केयर की जरुरत पड़ती है, क्योंकि गर्भ में पल रहा शिशु भी अपने विकास के लिए पूरी तरह अपनी माँ पर ही निर्भर करता है, इस दौरान महिला के शरीर को बहुत से पोषक तत्वों की जरुरत होती है, जैसे की विटामिन, मैग्नीशियम, सेलेनियम आयरन, फोलिक एसिड आदि, यदि महिला में इन सब पोषक तत्वों की कमी होती है, तो इसके कारण महिला को तो प्रेगनेंसी में परेशानियों का सामना करना पड़ता है, साथ ही उसकी डिलीवरी के समय भी दिक्कत उत्त्पन्न हो सकती है, और यही नहीं बल्कि इन पोषक तत्वों की कमी के कारण शिशु पर भी प्रभाव पड़ता है।

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यदि प्रेगनेंट महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होती है, तो इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी उसके विकास में कमी आती है, और प्रेगनेंसी का निर्णय ही महिला को तब लेना चाहिए जब वो शारीरिक रूप से फिट हो और उसके शरीर में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में हो, ताकि उसे प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियों का सामना न करना पड़ें, तो आइये आज हम आपको बताते हैं की प्रेग्नेंसी के समय महिला को कौन कौन से विटामिन्स भरपूर मात्रा में चाहिए होते है जिससे माँ और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

विटामिन B 12 की होती है जरुरत:-

वैसे तो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हर प्रकार के विटामिन भी जरुरत होती है, लेकिन डॉक्टर्स के अनुसार माँ और बच्चे दोनों को ही स्वस्थ रहने के लिए एक गर्भवती महिला को 2.5 मिलीग्राम विटामिन बी 12 की जरुरत होती है, और इसका सेवन केवल प्रेगनेंसी में ही नहीं बल्कि उससे तीन महीने पहले ही शुरू कर देना चाहिए, इसके लिए आपको अंडा, मांस, मछली, आलू, पनीर, दूध आदि का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

आयोडीन का सेवन भी है पर्याप्त मात्रा में जरुरी:-

प्रेगनेंसी में महिला को आयोडीन का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए, क्योंकि एक रिसर्च के अनुसार एक तिहाई महिलाएं आयोडीन की कमी से पीड़ित है, और यदि गर्भवती महिला के इसकी कमी होती है, तो इसके कारण गर्भ में पैराहे बच्चे की सोचने समझने की शक्ति पर बुरा असर पड़ता है, इसीलिए प्रेगनेंसी में महिलाओ को आयोडीन को अपने आहार में भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए।

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मैग्नीशियम भी है प्रेगनेंसी में जरुरी:-

गर्भवती महिला में कम से कम 270 मिलीग्राम मैग्नीशियम की जरुरत होती है, और यदि महिला के शरीर में इसकी कमी होती है तो इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में समस्या आती है, और साथ ही महिला को भी ब्लड प्रैशर की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है, इसीलिए महिलाओ को प्रेगनेंसी में अपनी डाइट में मैग्नीशियम युक्त आहार को जरूर शामिल करना चाहिए, और इसके लिए आप एवोकाडो, सोयाबीन, ब्राउन राइस, आलू आदि का सेवन कर सकते हैं।

फोलिक एसिड का करें सेवन:-

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फोलिक एसिड का सेवन भी केवल प्रेगनेंसी में ही नहीं बल्कि उससे तीन महीने पहले ही लेना शुरू कर देना चाहिए, इससे आपके बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, साथ ही यह प्रेगनेंसी में महिला के लिए लिए जाने वाले पोषक तत्वों में से एक है, और प्रेगनेंसी में एक दिन में महिला को 200 मिलीग्राम फोलिक एसिड का सेवन
जरुरी होता है, इसके लिए आप अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियों, सभी तरह के फल, आलू और अंडे आदि को शामिल करें, इससे महिला और आने वाले शिशु दोनों को ही फायदा मिलता है।

आयरन भी चाहिए भरपूर मात्रा में:-

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला के शरीर में खून की कमी हो जाती है तो इसके कारण उसे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, साथ ही इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में भी समस्या उत्त्पन्न हो जाती है, एक दिन में गर्भवती महिला को कम से कम 14.8 मिलीग्राम आयरन की जरुरत होती है, और इसकी कमीको पूरा करने के लिए आपको ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसमे आयरन भरपूर मात्रा में हो, इसके लिए आप हरी सब्जियों के साथ नट्स, मांस, अनार, गाजर, और पर्याप्त मात्रा में दालों का सेवन भी कर सकती हैं, इससे गर्भ में पल रहे शिशु में भी खून की कमी नहीं होती है, जिससे उसे स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

विटामिन डी का सेवन भी पर्याप्त मात्रा में करें:-

प्रेगनेंसी के समय यदि आप विटामिन डी का सेवन भरपूर मात्रा में करती हैं, तो इसके कारण आपके बच्चे को भरपूर ताकत और पोषण मिलने में मदद मिलती है, और साथ ही एक गर्भवती महिला को भी एक दिन में 10 एमसीजी विटामिन डी की जरुरत होती है, इसीलिए आपको तेलयुक्त मछली, अनाज और अंडे आदि एक सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए और साथ ही दिन में कम से कम पंद्रह मिनट तक धूप में भी खड़े रहना या घूमना चाहिए इससे भी आपकी बॉडी में विटामिन डी की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

सेलेनियम भी है प्रेगनेंसी में जरूरी:-

जिस महिला में सेलेनियम की कमी होती है डॉक्टर्स के अनुसार उनका गर्भपात होने का चांस सबसे ज्यादा होता है, प्रेगनेंट महिला को 60 एमसीजी सेलेनियम तो वहीँ स्तनपान करवाने वाली महिला को कम से कम 75 एमसीजी सेलेनियम की जरुरत होती है, इसीलिए गर्भवती महिला को ऐसे आहार का सेवन भी भरपूर करना चाहिए जिसमे सेलेनियम भरपूर मात्रा में हो, ताकि उन्हें गर्भपात का खतरा न रहे और गर्भ में पल रहे शिशु और प्रेगनेंट महिला दोनों को ही स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

तो ये हैं कुछ पोषक तत्व जिनकी प्रेगनेंसी में महिलाओ को बहुत ज्यादा जरुरत होती है, इसके साथ प्रेगनेंट महिला को 3 मिलीग्राम थायमिन, 20 मिलीग्राम नियासिन, 10 मिलीग्राम विटामिन ई और 15 मिलीग्राम जिंक, आदि पोषक तत्वों की भी जरुरत होती है, यदि आपके शरीर में ये भरपूर होते है, तो प्रेगनेंट महिला और उसके गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, इसके अलावा आप चाहे तो इस बारे में एक बार डॉक्टर्स से भी राय ले सकते है।

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