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10 सुपरफूड जो दूध पिलाने वाली महिला को जरूर खाने चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान ही नहीं बल्कि जन्म के कुछ समय बाद तक भी बच्चा अपने आहार व् अपने विकास के लिए अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। और माँ का अपने बच्चे को दूध पिलाना महिला के मातृत्व के अहसास को बढ़ाने में मदद करता है साथ ही माँ और बच्चे का लगाव भी आपस में बढ़ता है। साथ ही माँ का दूध बच्चे को बिमारियों से बचाव करने में भी मदद करता है। लेकिन डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में बहुत कमजोरी आ जाती है।

ऐसे माँ शरीर में आइए कमजोरी को दूर करने के लिए और बच्चे के लिए दूध के उत्पादन को बढ़ाने के लिए दूध पिलाने वाली महिला को कुछ सुपरफूड को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। तो आज इस आर्टिकल में दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए ऐसे 10 सुपरफूड बताने जा रहे हैं जो महिला को फिट करने व् बच्चे के लिए दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करते हैं।

ड्राई फ्रूट्स के लड्डू

डिलीवरी के बाद महिला को आटे को घी में भूनकर उसमे सही तरह के ड्राई फ्रूट्स, तिल, गोंद, आदि डालकर लड्डू बनवाकर खाने चाहिए। और इन लड्डू की एक गिलास गुनगुने दूध के साथ खाना चाहिए। यह लड्डू डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के साथ बच्चे के लिए दूध की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिलती है।

हरी पत्तेदार सब्जियां

हरी पत्तेदार सब्जियों में आयरन, कैल्शियम, फोलेट, विटामिन्स, बीटा कैरोटीन आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी फिट होने के साथ दूध का उत्पादन बढ़ाने व् दूध में मौजूद पोषक तत्वों को बढ़ाने में मदद करता है।

दालें

स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के लिए दालें व् फलियां भी सुपरफूड होती है। क्योंकि दालों में विटामिन्स, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, फाइबर जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। जो महिला को फिट रखने के साथ बच्चे के विकास के लिए सभी जरुरी पोषक तत्व भी शिशु तक पहुंचाते हैं।

दूध के साथ मेवे

मेवे भी पोषक तत्वों की खान होते हैं जिनमे कैलोरीज़, विटामिन्स, आयरन, एंटीऑक्सीडेंट्स सभी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। ऐसे में मेवे खाने से भी डिलीवरी के बाद महिला को फिट रहने व् दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलती है। और मेवे के फायदे को बढ़ाने के लिए आपको इन्हे दूध में मिलाकर इनका सेवन करना चाहिए।

ओट्स व् दलिया

ओट्स व् दलिया भी स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के लिए सुपरफूड होता है। क्योंकि दलिया में आयरन, कैल्शियम, विटामिन बी जैसे पोषक तत्व होते हैं। वहीँ ओट्स फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत होता है, वहीँ इसमें पोषक तत्वों की मात्रा को बढ़ाने के लिए आप इसमें सब्जियां आदि डालकर या दूध में इसे बनाकर इसका सेवन कर सकती है।

अंडे

अंडे में प्रोटीन, विटामिन बी 12, विटामिन डी, राइबोफ्लेविन, फोलेट जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो स्तनपान करवाने वाली महिला व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

मेथी के बीज

मेथी के बीजों में ओमेगा 3 फैटी एसिड,आयरन, कैल्श्यिम, व् अन्य विटामिन्स भरपूर मात्रा में होते है। ऐसे में दूध पिलाने वाली महिला को मेथी के बीजों का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि इससे महिला को फिट होने व् बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिलती है। इसका इस्तेमाल महिला आटे में मिलाकर परांठे, पूरी या सब्ज़ी आदि में डालकर कर सकती है। यदि आप चाहे तो इसे पीसकर पाउडर के रूप में भी इस्तेमाल कर सकती है।

सौंफ

स्तनपान करवाने वाली महिला के लिए सौंफ का सेवन करना भी बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि सौंफ का सेवन करने से महिला की पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने, बच्चे को पेट सम्बन्धी परेशानी से बचे रहने व् स्तनों में दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलती है।

गाजर

स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को गाजर का जूस, सलाद, सब्ज़ी किसी भी रूप में गाजर का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि गाजर ब्रेस्टफीड को बढ़ाने के साथ बच्चे के बेहतर विकास करने में भी मदद करता है।

कच्चा प्याज़

डिलीवरी के बाद स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को अपने आहार के साथ कच्चे प्याज़ का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि कच्चे प्याज़ का सेवन करने से स्तनों में दूध की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आहार जो दूध पिलाने वाली महिला के लिए सुपरफूड होते हैं जो महिला को फिट करने के साथ बच्चे के लिए दूध के उत्पादन को बढ़ाने में भी मदद करते हैं।

कान में से कीड़ा कैसे निकालें

कान में से कीड़ा कैसे निकालें, गर्मी के मौसम में शाम के समय ठंडी हवा के लिए तो सर्दी में धूप के लिए अक्सर लोग घर से बाहर या छत पर बैठ जाते हैं। साथ ही आज कल प्रदूषण भी इतना है लेकिन इसके बावजूद भी लोग घरों के बाहर घूमना फिरना बहुत पसंद करते हैं। ऐसे में प्रदूषण के कारण, हवा के कणों के कारण आपको बहुत सी परेशानियां होने का खतरा रहता है।

और उन्ही में से एक परेशानी के बारे में आज इस आर्टिकल में हम आपसे बात करने जा रहे हैं। और वो है कान में कीड़ा घुसने की समस्या, कई बार खुले में सोने के कारण या बैठने के कारण कोई मक्खी, मच्छर, चींटी या कोई अन्य छोटा जीव यदि आपके कान में चला जाता है। अचनाक से कान में झनझनाहट सी महसूस होती है जो इस बात का संकेत देती की की शायद कान में कुछ चला गया है।

ऐसे में आपको जैसे ही पता चलता है की कान में कुछ चला गया है और बिना किसी हड़बड़ी के आप कुछ आसान से टिप्स इस्तेमाल करते हैं। तो आपको आसानी से इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की कान में से कीड़ा बाहर निकालने के लिए आप क्या क्या कर सकते हैं। लेकिन उससे पहले जानते हैं की कान में कीड़ा जाने पर क्या नहीं करना चाहिए।

कान में कीड़ा जाने पर ऐसा करने बचें

  • कान में ऊँगली न डालें।
  • ज्यादा हिले डुलें नहीं और न ही घबराएं।
  • सुई, माचिस की तीली, रुई आदि का इस्तेमाल कान के लिए करने से बचें।
  • तेजी से सिर न हिलाएं।

कान में से कीड़ा निकालने के उपाय

यदि आपके कान में आपको ऐसा महसूस हो रहा है की कुछ चला गया है तो आप कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके आसानी से इस समस्या से निजात पा सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

तेल का इस्तेमाल

  • जैतून, सरसों, बादाम या अन्य किसी तेल को हल्का गर्म करके कान में डालें।
  • और कान को ऊपर से पूरा भर दें, और गर्दन और दूसरी तरफ झुककर रखें, ऐसा करने से कीड़ा तैर कर ऊपर आ जायेगा।
  • अब जिस कान में कीड़ा गया है उस कान को नीचे की तरफ झुका लें।
  • जैसे तेल बाहर निकलेगा कीड़ा भी बाहर आ जायेगा।

फिटकरी

  • थोड़े से पानी में चुटकी भर फिटकरी को पीसकर मिलाएं।
  • फिटकरी के पूरी तरह पानी में घुल जाने पर इस पानी को कान में डालें।
  • और दो मिनट बाद कान को नीचे की और झुकाएं।
  • आपके कान में से कीड़े के साथ मैल भी बाहर निकल जाएगी।

पुदीना

  • पुदीने की खुशबू बहुत तेज होती है जो की कीड़ो को पसंद नहीं होती है।
  • ऐसे में आप थोड़ी सी पुदीने की पत्तियों को पीसकर उनका रस निकाल लें।
  • अब इस रस को कान में डालें, दो मिनट बाद कान को नीचे की और झुकाएं और रुई की मदद से साफ़ कर दें।

नमक का पानी

  • पानी में थोड़ा सा नमक घोलकर जिस कान में कीड़ा गया है उस कान में डालें।
  • उसके बाद अपनी गर्दन को दूसरी तरफ मोड़ कर रखें।
  • ताकि पानी बाहर न निकलें, अब गर्दन को तिरछा करें।
  • जो कुछ भी कान में होगा बाहर निकल जायेगा।
  • नमक का पानी नहीं तो पानी को थोड़ा गुनगुना करने के बाद भी आप कान में डाल सकते हैं।

कपूर का पानी

  • थोड़े से पानी में थोड़ा सा कपूर घोलकर कान में डालें।
  • उसके बाद बाहर से कान को पकड़कर झटकायें।
  • उसके बाद कान को दूसरी तरफ झुका लें।
  • ऐसा करने से कान के कीड़े को आसानी से बाहर निकालने में मदद मिलती है।

कान में से कीड़ा निकालने के उपचार करने के बाद यह करें

  • अपने कान को ऊपर की तरफ रखें और सूरज की रौशनी दिखाएं।
  • कान को हिलाएं डुलाएँ नहीं।
  • आप उपचार करने पर कान में ऊँगली नहीं डालें कीड़े को अपने आप बाहर आने दें।
  • कीड़ा जब ऊपर की तरफ आ जाए, तो कीड़े को चिमटी से पकड़कर बाहर निकाल दें।
  • कान को साफ सूखे, सूती कपडे से पोछें।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको कान में से कीड़ा बाहर निकालने में मदद मिलती है। यदि आपके साथ भी कभी ऐसा होता है तो घबराने की बजाय जल्दी से उपचार करना चाहिए। ताकि आपको किसी भी तरह की दिक्कत न हो।

डिलीवरी डेट निकल जाने पर क्या करें?

डिलीवरी होने का सही समय

डिलीवरी होने की तिथि को प्रेग्नेंट महिला की आखिरी माहवारी के पहले दिन में चालीस हफ्ते जोड़कर कैलकुलेट किया जाता है। लेकिन डॉक्टर्स डिलीवरी डेट को अल्ट्रासॉउन्ड स्कैन देखकर सही तरीके से बता सकते हैं। और यह आपकी कैलकुलेट की गई डेट से दो चार दिन आगे पीछे हो सकती है। ज्यादातर शिशु गर्भावस्था के 37वें हफ्ते से 41वें हफ्ते के बीच जन्म लेते हैं। लेकिन यदि प्रेगनेंसी में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स के कारण महिला को समय से पहले ही प्रसव पीड़ा शुरू हो जाती है, या गर्भ में जुड़वाँ या ज्यादा शिशु होते हैं तो भी महिला की डिलीवरी समय से पहले भी हो सकती है। लेकिन कई बार महिला को डिलीवरी डेट निकल जाने पर भी प्रसव पीड़ा नहीं होती है।

ऐसे में महिला को घबराने की कोई जरुरत नहीं होती है, क्योंकि डिलीवरी डेट को ही शिशु जन्म ले ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है, बल्कि यह दो चार दिन कम ज्यादा भी हो सकती है, बस इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। और जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से मिलना चाहिए, ताकि इसके आगे क्या करना है इसके बारे में डॉक्टर आपको अच्छे से बता सके। ऐसा होने पर महिला परेशानी का अनुभव कर सकती है, और चाह सकती है की जितना जल्दी हो सके डिलीवरी जल्दी से जल्दी हो। लेकिन जल्दबाज़ी के चक्कर में महिला को किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि यदि महिला किसी भी तरह की लापरवाही करती है तो इसके कारण महिला को या गर्भ में शिशु को खतरा हो सकता है। तो आइये अब जानते हैं डिलीवरी डेट निकल जाने पर क्या करना चाहिए।

डिलीवरी डेट निकल जाने पर यह करें

प्रेगनेंसी के नौ महीने बीत जाने के बाद भी यदि महिला को प्रसव पीड़ा शुरू नहीं होती है या प्रसव पीड़ा का कोई लक्षण नहीं दिखाई देता है। तो महिला को जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से मिलना चाहिए, क्योंकि डिलीवरी की डेट निकल जाने के बाद ज्यादा समय शिशु का गर्भ में रहना नुकसानदायक हो सकता है। क्योंकि कई बार शिशु गर्भ में ही मल पास कर देते हैं, या शिशु का वजन बढ़ने के कारण गर्भ में शिशु का दिक्कत हो सकती है। ऐसे में ऐसी कोई परेशानी न हो इसके लिए डॉक्टर से राय लेना बहुत जरुरी होता है। और यदि महिला को प्रसव पीड़ा नहीं होती है, तो डॉक्टर प्रसव पीड़ा को शुरू करवाने की कोशिश करते हैं।

लेबर पेन को शुरू करवाने के लिए महिला को आर्टिफिशल तरीके से दर्द पैदा करने की कोशिश भी की जाती है। और यदि फिर भी महिला को दर्द नहीं होता है तो डॉक्टर्स भी महिला को सिजेरियन डिलीवरी करवाने की सलाह देते हैं। क्योंकि गर्भ में शिशु का डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद अधिक समय तक रहना महिला को परेशान कर सकता है साथ ही इससे शिशु को दिक्कत होने का खतरा भी रहता है। इसके अलावा इस समय महिला को शिशु की हलचल का भी गर्भ में पूरा ध्यान रखना चाहिए, की शिशु अच्छे से हलचल कर रहा है या नहीं। यदि नहीं तो इसके लिए महिला को तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

तो यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आपको प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में प्रसव पीड़ा को पैदा करने के लिए कुछ नुस्खों का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। ताकि डिलीवरी के दौरान महिला को किसी भी तरह की परेशानी न हो। और यदि प्रसव पीड़ा न हो तो ऊपर दिए गए टिप्स का ध्यान रखना चाहिए, ताकि महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के टिप्स

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इम्युनिटी बढ़ाने के लिए क्या करें?

स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति का इम्यून सिस्टम मजबूत रहना बहुत आवश्यक होता है। इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) हमारे शरीर को रोगों से बचाने में मदद करती है। लेकिन वर्तमान की आधुनिक जीवनशैली, गलत खान-पान और अस्त-व्यस्त दिनचर्या इम्यून सिस्टम पर काफी बुरा असर डाल है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता के कम हो जाने से शरीर को बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। क्यूंकि रोग प्रतिरोधक क्षमता हानिकारक रोगाणुओं से शरीर को बचाने का काम करती है और जब यह क्षमता कम हो जाती है तो वे रोगाणु शरीर में प्रवेश करने लगते हैं जिससे बीमारियां हमें घेर लेती हैं। ऐसे में जरुरी हैं की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखें। ताकि गंभीर बिमारियों से बचा जा सके। आज हम आपको इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के कुछ टिप्स दे रहे हैं। इनकी मदद से आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर सकते हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता / इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के टिप्स

स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए सबसे जरुरी हैं की स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। इम्युनिटी कमजोर होने का सबसे बड़ा कारण हमारी जीवनशैली ही होती है। गलत खान-पान, गलत आदतें, पूरी नींद नहीं लेना, शरीर अस्वस्थ रहना, व्यायाम नहीं करना आदि कुछ ऐसी गलतियां हैं जिनके कारण इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। इसलिए जरुरी है की पहले इन आदतों को सुधारें।

पानी की भरपूर मात्रा

पानी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए बहुत फायदेमंद होता है। भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करने से किडनी सही तरिके से काम करती है जिससे शरीर के सभी टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं। शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं शरीर स्वस्थ हो जाता है। इसीलिए भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करें।

पर्याप्त नींद लें

शोध के अनुसार, पर्याप्त नींद नहीं लेने के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली पर बुरा असर पड़ता है। क्यूंकि मस्तिष्क को सही ढंग से काम करने के लिए 6 से 8 घंटे की नींद लेना बहुत जरुरी होता है। और इसी नींद के बीच शरीर की कोशिकाएं रिपेयर होती हैं। अगर आप भरपूर नींद नहीं लेंगे तो इम्यून सिस्टम को दोबारा कार्य करने में परेशानी होगी और परिणामस्वरूप बिनारियाँ आपको घेर लेंगी। इसलिए पूरी नींद लें।

स्वस्थ आहार लें

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए स्वस्थ आहार लेना बहुत जरुरी होता है। पौष्टिक आहार न केवल शरीर को पोषक तत्व प्रदान करता है बल्कि इम्युनिटी भी बढ़ाता है। इसलिए संतुलित आहार लें, जिसमे फल, सब्जियां, अनाज और बाकी सभी पोषक तत्व संतुलित मात्रा में हो। कोई भी खाना स्किप नहीं करें, नाश्ता हो या दोपहर का लंच समय से खाएं। खाने के लिए ज्यादा देरी नहीं करें।

साफ-सफाई का ध्यान रखें

इम्युनिटी बढ़ाने के लिए आपको अपने आस-पास साफ-सफाई का खास ध्यान रखना होगा। क्यूंकि गंदगी के सम्पर्क में आने से संक्रमण होने का खतरा बना रहता है। इसीलिए फल-सब्जियों को खाने या पकाने से पहले अच्छी तरह धोकर साफ़ कर लें, खाना खाने और बनाने से पहले हाथों को अच्छी तरह साफ कर लें। इसके साथ-साथ अपने शरीर और कपड़ों की साफ-सफाई का भी ध्यान रखें।

तनाव से बचें

शरीर में होने वाली ज्यादातर परेशानियां तनाव के कारण होती है। तनाव लेने से पाचन तंत्र पर असर पड़ता है जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर होने लगता है। शोध के अनुसार, तनाव लेने से शरीर में कोर्टिसोल हॉर्मोन का स्त्राव होता है जो मोटापा, हृदय रोग, कैंसर व् अन्य बिमारियों का खतरा बढ़ाता है। इसलिए तनाव से बचें। जितना हो सके खुश रहें और हमेशा हंसते रहें इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है।

योग करें

योग और प्राणायाम व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं। शरीर के स्वस्थ रहने से इम्युनिटी बढ़ाने में मदद मिलती है। इसलिए रोजाना योग या प्राणायाम अवश्य करें।

वसायुक्त आहार

अधिक वसा का सेवन करने से इम्युनिटी कमजोर होती है। लेकिन शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उचित मात्रा में वसा का सेवन करना जरुरी होता है। इसलिए जरुरी हैं की संतुलित मात्रा में वसा का सेवन करें और मछली के तेल में यह पाया जाता है।

जिंक का सेवन

इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जिंक बहुत फायदेमंद मिनरल होता है। यह एंटी-बॉडीज, टी सेल्स और वाइट ब्लड सेल्स को बढ़ाकर इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करता है। शरीर में जिंक की कमी होने पर बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी शरीर को रोगी बना देते हैं। जिंक उम्र बढ़ने के साथ कमजोर होने वाली प्रक्रिया को भी धीमा करता है। इसलिए आहार में अधिक से अधिक जिंक युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।

वजन नियंत्रित करें

मोटापा, प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्य करने की प्रक्रिया के बीच बाधा उत्पन्न करता है जिससे उसकी गति प्रभावित होती है। शरीर को स्वस्थ रहने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली का सही ढंग से काम करना बहुत जरुरी होता है। अगर इम्यून सिस्टम धीरे काम करेगा को संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अगर इम्युनिटी मजबूत करनी है तो पहले मोटापा कम करें।

ये चीजें खाएं

इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए आहार में भी कुछ परिवर्तन करने होंगे। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार लें। नीचे कुछ खाद्य पदार्थों की सूची दी गयी है, इम्युनिटी बढ़ाने के लिए इन चीजों को खाएं –

  • कच्चा लहसुन
  • दही
  • ओट्स
  • विटामिन डी लेने के लिए धूप में बैठें
  • विटामिन सी युक्त फल जैसे नींबू, संतरा, आंवला, कीवी खाएं।
  • सब्जियों में मेथी, पालक, गाजर, टमाटर खूब खाएं।
  • सेब, अंगूर, केला, तरबूज का सेवन करें।
  • खीरा
  • मूली
  • चुकंदर (बीटरूट)
  • हरा धनिया
  • शहद
  • तुलसी के पत्ते
  • ड्राई फ्रूट्स खूब खाएं।
  • सभी प्रकार की दालें
  • सोयाबीन
  • बीन्स
  • अलसी
  • तिल
  • ग्रीन टी पीएं
  • फ़ूड मशरूम खाएं।
  • दालचीनी, हल्दी का सेवन करें।

इन सब चीजों का सेवन करके इम्युनिटी को बढ़ाया जा सकता है। ये कुछ सामान्य टिप्स हैं जिन्हे अपनाकर इम्युनिटी को बढ़ाया जा सकता है।

प्रेग्नेंट महिला को सरसों का साग खाना चाहिए या नहीं

गर्भावस्था के दौरान महिला जितने ज्यादा हेल्दी आहार को अपनी डाइट में शामिल करती है उतना ही प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। तो लीजिये आज हम आपको एक ऐसे ही हेल्दी आहार के बारे में बताने जा रहे हैं और वो है सरसों का साग, बहुत सी गर्भवती महिलाएं साग को लेकर सोच सकती है की प्रेगनेंसी में इसे खाना चाहिए या नहीं? तो इसका जवाब है हाँ, प्रेगनेंसी के दौरान महिला सरसों के साग का सेवन कर सकती है। सरसों का साग सर्दियों के मौसम में अधिकतर लोग खाना पसंद करते हैं, और सर्दियों के ही मौसम में लगभग हर हरी सब्ज़ी आपको मार्किट में आसानी से मिल भी जाती है। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और सर्दियों का मौसम है तो आप भी सरसों के साग का लुत्फ़ उठा सकती है।

प्रेगनेंसी में सरसों का साग खाने के फायदे

कैल्शियम, आयरन, फोलिक एसिड, पोटैशियम, फाइबर, एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर सरसों के साग का सेवन गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है। और यह सभी पोषक तत्व यदि प्रेग्नेंट महिला को भरपूर मात्रा में मिलते हैं तो इससे न केवल गर्भवती महिला को बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान सरसों का साग खाने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

फाइबर

सरसों के साग में फाइबर की मात्रा मौजूद होती है ऐसे में इसका सेवन करने से गर्भवती महिला को पाचन क्रिया से सम्बंधित समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। जिससे महिला को खाना न पचने, गैस, कब्ज़ जैसी परेशानी से भी राहत पाने में मदद मिलती है।

वजन

वजन का जरुरत से ज्यादा बढ़ना गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी हानिकारक हो सकता है। और सरसों का साग खाने से गर्भवती महिला की पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के साथ मेटाबोलिज्म रेट को सही रखने में मदद मिलती है क्योंकि साग में फाइबर की मात्रा मौजूद होती है। जिससे गर्भवती महिला के वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

विटामिन K

उल्टी व् जी मिचलाने की समस्या का होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। लेकिन इस समस्या के अधिक होने के कारण प्रेग्नेंट महिला बहुत ज्यादा परेशानी का अनुभव कर सकती है। लेकिन सरसों के साग का सेवन करने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकती है। क्योंकि साग में मौजूद विटामिन के इस समस्या से बचाव के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

एंटी ऑक्सीडेंट

सरसों के साग में एंटी ऑक्सीडेंट व् सल्फर की मात्रा मौजूद होती है जो गर्भवती महिला के शरीर में न तो विषैले पदार्थो का जमाव होने देती है, और साथ ही विषैले पदार्थो को शरीर से बाहर निकालने में भी मदद करती है। जिससे गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को बीमारियों से सुरक्षित रहने और स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

गेस्टेशनल शुगर

साग का सेवन करने से गर्भवती महिला के ब्लड में शुगर के लेवल को सही रखने में भी मदद मिलती है जिससे गर्भवती महिला को गेस्टेशनल शुगर जैसी परेशानी से बचे रहने में भी मदद मिलती है। साथ ही यदि कोई महिला डाइबिटीज़ की समस्या से परेशान है तो महिला को शुगर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

कैल्शियम

कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर सरसों के साग का सेवन यदि प्रेग्नेंट महिला करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला की हड्डियों कोई मजबूत रहने, जोड़ो में दर्द की समस्या से बचाव, शरीर के हिस्सों में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही इससे गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल

सरसों के साग का सेवन करने से गर्भवती महिला को कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही सरसों के साग का सेवन करने से हदय को स्वस्थ रहने में भी फायदा मिलता है।

ओमेगा 3 फैटी एसिड

ओमेगा 3 फैटी एसिड, विटामिन k जैसे पोषक तत्व सरसों के साग के मौजूद होते हैं। और यह पोषक तत्व गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली सूजन की परेशानी से निजात दिलाने में मदद करते हैं।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को साग का सेवन करने से मिलते हैं ऐसे में यदि आप भी गर्भवती है तो आप भी साग का सेवन कर सकती है। क्योंकि इससे प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करके गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने व् गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के दौरान आँखों के नीचे काले घेरे क्यों हो जाते हैं

प्रेगनेंसी में डार्क सर्कल, प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जहां महिला बहुत सी शारीरिक परेशानियों व् बहुत से शारीरिक बदलावों का अनुभव करती है। क्योंकि इस दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव तेजी से हो रहे होते हैं जिसके कारण ऐसा हो सकता है। और प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले इन बदलाव का असर शारीरिक रूप से दिखाई देने के साथ महिला की स्किन पर भी दिखाई दे सकता है। जैसे की कुछ गर्भवती महिला महिलाओं को चेहरे पर दाग धब्बे, आँखों के नीचे काले घेरे आदि की परेशानी हो सकती है। और इसमें कोई घबराने की बात नहीं होती है। प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा होना बहुत आम बात होती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान काले घेरे क्यों होते हैं और इससे बचाव के लिए महिला क्या कर सकती है। इस बारे में जानते हैं।

प्रेगनेंसी में काले घेरे होने के कारण

कुछ गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान आँखों के नीचे काले घेरे महसूस कर सकती है। और प्रेगनेंसी में आँखों के नीचे काले घेरे होने का कोई एक कारण नहीं होता है। बल्कि ऐसे कई कारण होते हैं जिनकी वजह से यह दिक्कत हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में आँखों के नीचे काले घेरे होने के क्या क्या कारण हो सकते हैं।

मेलेनिन का जमाव

  • प्रेगनेंसी के दौरान चेहरे की स्किन पर मेलेनिन के जमाव के कारण ऐसा हो सकता है।
  • और चेहरे की स्किन पर जब मेलेनिन का जमाव होता है।
  • तो सबसे ज्यादा पिगमेंटेशन आँखों के निचले हिस्से में इकठ्ठा होने लगता है।
  • जिसके कारण आँखों के नीचे काले घेरे उभर कर सामने आ सकते हैं।

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण

  • गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव तेजी से होते हैं।
  • जो बॉडी को अलग अलग तरह से प्रभावित करते हैं।
  • और इसका असर रक्त वाहिकाओं पर भी पड़ता है, जो बॉडी में ब्लड फ्लो को बेहतर तरीके से होने में मदद करती हैं।
  • लेकिन कई बार ब्लड फ्लो अच्छे से न होने के कारण एक जगह पर अत्यधिक रक्त का जमाव हो जाता है।
  • और आँखों के नीचे की त्वचा बहुत ही संवेदनशील व् पतली होती है।
  • जिसके कारण आँखों के नीचे जमा हुआ रक्त काले घेरों के रूप में दिखाई दे सकता है।

प्रेगनेंसी में डार्क सर्कल होने का कारण है व्यायाम की कमी

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को आराम के साथ हल्का फुल्का व्यायाम भी जरूर करना चाहिए।
  • क्योंकि व्यायाम करने से बॉडी में रक्त में ऑक्सीजन के प्रवाह को अच्छे से होने में मदद मिलती है।
  • लेकिन यदि महिला व्यायाम नहीं करती है तो इसके कारण बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं पाता है।
  • जिसके कारण स्किन पर काले या नीले धब्बे दिखाई दे सकते हैं।
  • और इसी कारण महिला की आँखों के नीचे काले घेरे की समस्या प्रेगनेंसी के दौरान हो सकती है।

सूजन

  • प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से न होने के कारण गर्भवती महिला को सूजन की समस्या सकती है।
  • और बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से न होने के कारण बॉडी में कई हिस्सों में रक्त इकठ्ठा होने लगता है।
  • जिसके कारण व् धब्बों के रूप में महसूस हो सकता है।
  • ऐसे में आँखों के नीचे की स्किन बहुत ही पतली और संवेदनशील होती है।
  • जिसके कारण यह धब्बे आपको काले घेरे की तरह दिखाई दे सकते हैं।

प्रेगनेंसी में डार्क सर्कल होने का कारण है नींद में कमी

  • गर्भावस्था के दौरान खान पान के साथ गर्भवती महिला को भरपूर आराम करने और नींद लेने की सलाह भी दी जाती है।
  • क्योंकि भरपूर नींद लेने से प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
  • लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला नींद भरपूर मात्रा में नहीं लेती है।
  • तो इसका असर आपकी खूबसूरत आँखों पर पड़ सकता है।
  • जिसके कारण आँखों के नीचे काले घेरे की समस्या हो सकती है।

तनाव

  • बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव और परेशानियों के कारण तनाव में आ जाती है।
  • और प्रेग्नेंट महिला यदि तनाव अधिक लेती है तो इसके कारण भी आँखों के नीचे काले घेरे की समस्या महिला को हो सकती है।

प्रेगनेंसी में डार्क सर्कल होने का कारण है पोषक तत्वों की कमी

  • यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन नहीं करती है।
  • तो इसके कारण महिला के स्वास्थ्य, शिशु के विकास पर बुरा असर पड़ने के साथ त्वचा पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
  • और स्किन को पर्याप्त पोषण न मिलने के कारण गर्भवती महिला को आँखों के नीचे काले घेरे की समस्या हो सकती है।

पानी की कमी

  • प्रेग्नेंट महिला के शरीर पानी की कमी का होना महिला के लिए बहुत सी परेशानियों को बढ़ा सकता है।
  • पानी की कमी होने के कारण प्रेग्नेंट महिला को काले घेरे की समस्या तो नहीं होती है।
  • लेकिन इसके कारण महिला को सूजन की समस्या हो सकती है।
  • और प्रेगनेंसी के दौरान सूजन की समस्या होने के कारण आँखों के नीचे काले घेरे की समस्या हो सकती है।

प्रेगनेंसी में डार्क सर्कल की समस्या से बचने के टिप्स

  • पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें।
  • बॉडी में पानी की कमी न होने दें, आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ, नारियल पानी, जूस आदि का भी भरपूर सेवन करें।
  • तनाव लेने से बचें जितना हो सके प्रेगनेंसी में खुश रहें।
  • नींद में बिल्कुल भी लापरवाही न करें, भरपूर नींद लें।
  • नियमित थोड़ा बहुत व्यायाम, योगासन या मैडिटेशन जरूर करें।
  • रात को सोने से पहले आँखों के नीचे बादाम का तेल लगाएं।
  • खीरा, आलू के स्लाइसेस काटकर आँखों पर थोड़ी देर रखकर रेस्ट लें।
  • सोने से पहले रुई की मदद से आँखों के नीचे गुलाबजल लगाएं।
  • ताजे दूध की मलाई डार्क सर्कल पर लगाएं।

तो यह हैं गर्भावस्था के दौरान आँखों के नीचे होने वाले काले घेरे के कारण व् उस समस्या से निजात पाने के कुछ आसान टिप्स। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो प्रेगनेंसी के दौरान इन बातों का ध्यान रखें ताकि आपकी आँखों की ख़ूबसूरती और आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

घरेलू हिंसा क्या होती है और इसके क़ानूनी उपाय क्या है?

वास्तव में आज हमारे देश, समाज और परिवार में घरेलू हिंसा की जड़ें इतनी गहराई तक चली गयी है की उन्हें काट पाना काफी मुश्किल होता जा रहा है। जिसके चलते आये दिन हमें ऐसे बहुत से उदाहरण और लोग देखने को मिलते है जो घरेलू हिंसा का या तो समर्थन करते है या खुद उसमे भागीदार होते है। जिसका कारण है लोगों की सोच। अक्सर आपने भी देखा होगा की बहुत से पति ऐसे होते है जो बेवजह अपनी पत्नी से मारपीट करते है या उनके साथ दुर्व्यवहार करते है।

ऐसे लोग महिलाओं की इज़्ज़त नहीं करते और न ही उन्हें सम्मान देते है। बहुत सी महिलाएं घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश ही नहीं करती जिसके कारण दिनों दिन यह बढ़ती ही जाती है। घरेलू हिंसा के मुख्य कारण परिवार और समाज में फ़ैल रही ईर्ष्या, द्वेष, अहंकार, अपमान और विद्रोह होता है। परिवार में हो रही हिंसा का शिकार केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि वृद्ध और बच्चे भी बन जाते है। बस फर्क इतना होता है की महिलाएं शारीरिक परेशानी झेलती है और बच्चे व् वृद्ध मानसिक परेशानी का सामना करते है।घरेलू हिंसा क्या होती है

हमारे देश के लोगों की पिछड़ी हुई सोच और उनके दकियानूसी विचार महिला को हमेशा नाजुक और कमजोर समझते है, उनके मुताबिक पति को पत्नी पर हाथ उठाने का अधिकार शादी के बाद मिल जाता है। जिससे छुटकारा पाने के लिए भारत की संसद ने “घरेलु हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005” एक अधिनियम बनाया जिसका उद्देश्य घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को बचाना और उन्हें सुरक्षा प्रदान करना है।

लेकिन बहुत सी महिलाओं को इस कानून के बारे में या तो पता नहीं है या वे जानना नहीं चाहती? यहाँ हम आपको घरेलू हिंसा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों और उसके क़ानूनी उपायों के बारे में बताने जा रहे है। जिसकी मदद से आप खुद को भी घरेलू हिंसा से बचा सकती है। लेकिन उसके लिए पहले आपको घरेलू हिंसा के विभिन्न रूपों को जान लेना चाहिए। क्योंकि महिलाएं पति द्वारा पीटने को ही घरेलू हिंसा समझती है जबकि इसके अलावा भी घरेलू हिंसा के और बहुत से रूप है।

क्या है घरेलू हिंसा के विभिन्न रूप?

घर के पुरुष द्वारा महिलाओं पर की जाने वाले घरेलू हिंसा केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि आर्थिक, मानसिक और यौनिक भी होती है। जिसके बारे में महिलाएं सोचती ही नहीं।

यौनिक हिंसा :

पुरुष द्वारा घर की महिला के साथ जबरदस्ती यौन संबंध बनाना, बाल यौन अत्याचार, अश्लील साहित्य या किसी अन्य सामग्री को देखने या पढ़ने के लिए मजबूर करना, महिला की मर्यादा को किसी भी प्रकार से हानि पहुंचाना या अन्य यौनिक दुर्व्यवहार करना आदि यौन हिंसा के उदाहरण है।

शारीरिक हिंसा :

इस हिंसा के बारे में सभी बहुत भली भांति जानते है। लेकिन जानकारी के लिए बता दें – मारपीट करना, थप्पड़ मारना, ठोकर मारना, दांत काटना, मुक्का मारना, धक्का देना, लात मारना या किसी अन्य तरीके से महिला को शारीरिक चोट पहुंचाना आदि शारीरिक हिंसा के उदाहरण है।

मानसिक हिंसा :

बहुत से लोग महिलाओं को मारते पीटते नहीं लेकिन वे उसे इतनी ज्यादा मानसिक पीड़ा देते है के वे अपने हालातो पर मजबूर हो जाती है। मानसिक हिंसा में गाली गलौच करना, कलंक लगाना, बुराई करना, मजाक उड़ाना, दहेज आदि के लिए अपमानित करना, बच्चा या बेटा न होने पर ताना देना, शिक्षा या नौकरी में अवरोध उत्पन्न करना, बाहर जाने या किसी व्यक्ति से मिलने के लिए रोकना, अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने या नहीं करने पर दबाब डालना, आत्महत्या की धमकी देना आदि सम्मिलित है।

आर्थिक हिंसा :

ये अक्सर वे ही पुरुष करते है जो या तो ठीक से कमा नहीं पाते या उन्हें नौकरी करने में कोई रूचि नहीं होती। ऐसे पुरुष अप्पने जीवनयापन की वस्तुएं भी महिला के वेतन से खरीदते है। घर में खाने, कपडे, दवाई आदि का खर्च नहीं देना या अगर घर में है तो उनका उपयोग नहीं करने देना, घर का किराया नहीं देना, घर से जबरदस्ती महिला को निकाल देना, नौकरी कर रही महिला का वेतन ले लेना, नौकरी नहीं करने देना, बिलो का भुगतान नहीं करना, घर के किसी भी मौद्रिक कार्य में अपना सहयोग नहीं देना, महिला का वेतन छीनकर शराब आदि पीना आर्थिक हिंसा के उदाहरण है।

किस प्रकार कोई महिला इस कानून के तहत सुरक्षा प्राप्त कर सकती है?

1. शिकायत :

कोई भी महिला सुरक्षा अधिकारी की मदद से या सीधे न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। सम्पर्क के लिए वे फ़ोन कॉल या पत्र की मदद भी ले सकती है। वह चाहे तो पुलिस, स्वयंसेवी संस्था या पड़ोसी की मदद से भी शिकायत दर्ज करा सकती है।

2. न्यायिक आदेश :

शिकायत दर्ज होने के बाद न्यायिक दंडाधिकारी पीड़िता के पक्ष में सुरक्षा अधिकारी को आदेश देता है। इस आदेश के आधार पर पीड़िता को आवश्यकता के अनुसार राहत और सहायता प्रदान की जाती है।

3. सुरक्षा :

सुरक्षा देने के पश्चात् सुरक्षा अधिकारी पीड़िता महिला के पक्ष में मदद और सुरक्षा की पुष्टि करता है। इस कार्य के लिए सुरक्षा अधिकारी सेवा प्रदाता और पुलिस की सेवा ले सकते है।

किसको सुरक्षा देता है यह कानून?

यह कानून परिवार की उन सभी महिलाओं को सुरक्षा देती है जो किसी भी रूप में घर से संबंधित होती है। फिर चाहे वो माँ हो या पत्नी, बहन हो या बेटी। इसके अलावा महिला को किसी भी संबंध से घर में रहती हो उसको भी यह कानून सुरक्षा प्रदान करता है।

किसी तरह से कानून पीढ़ी महिला को सुरक्षा प्रदान करता है?

घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज होने के पश्चात कानून तरह-तरह से पीड़ित महिला की मदद करता है जिससे उसे पूरा सहयोग और मदद मिल सके।

1. स्वास्थ्य सुविधा :

अक्सर घरेलू हिंसा के दौरान महिला चोटिल या घायल हो जाती है जिसे नियंत्रित करने के लिए डॉक्टरी सलाह की आवश्यकता होती है। कानून महिलाओं को यह स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने में मदद करता है।

2. आवास का अधिकार :

घरेलू हिंसा का केस दर्ज हो जाने के बाद अक्सर ससुराल वाले पीड़िता को घर से बाहर निकाल देते है। ऐसे में ये कानून महिलों को घर में आवास का अधिकार प्रदान करता है।

3. आर्थिक सहयोग :

घरेलू हिंसा के केस पर निर्णय आने तक और उसके बाद महिला पूरी तरह असहाय हो जाती है जिसके कारण उसकी आर्थिक स्थिति खराब होने लगती है। लेकिन यह कानून पुरुष को महिला की सभी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उत्तरदायी होता है।

4. आरोपी से सुरक्षा :

घरेलू हिंसा करने वाला व्यक्ति कभी शांत नहीं बैठता वे हमेशा महिला को किसी न किसी रूप में परेशान करता रहता है। ऐसे में यह कानून महिला को आरोपी से सुरक्षा प्रदान करता है।

5. पारिवारिक परामर्श :

शिकायत के बाद हर पहलु को अच्छी तरह जांचा परखा जाता है जिसमे लड़के और लड़की से पूरी पूछताछ की जाती है और उनसे सभी विषयों से जानकारी ली जाती है। जिससे पता लगाया जा सके की समस्या की जड़ क्या है?

6. क़ानूनी सहयोग :

अति गंभीर समस्या होने पर महिला को क़ानूनी सहयोग भी प्रदान किया जाता है जिसकी मदद से वे अपने पक्ष को मजबूत कर सकती है।

अस्थायी आवासीय व्यवस्था एवं बाल सेवा :

परिणाम होने तक या उसके बाद अगर महिला को पुरुष से अलग किया जाता है तो पीड़िता को अस्थाई आवासीय व्यवस्था एवं बाल सेवा में रहने के लिए स्थान दिया जाता है।

अब तो आप समझ गयी होंगी की घरेलू हिंसा बर्दाश्त करने वाली नहीं बल्कि विरोध करने वाली चीज है। अगर आपके या किसी भी करीबी महिला के साथ घरेलू हिंसा होती है तो इस कानून के बारे में बताये और इस अत्याचार को सहना बंद करें।

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गर्दन पर काली धारियां पड़ रही है? ये है उपाय

आज के समय में प्रदूषण इतना बढ़ गया है की जरा सा अपनी त्वचा का ध्यान न रखें तो, कोई न कोई समस्या हो ही जाती है, जैसे आप खुद ही सोचिये की ग्रां पर पड़ने वाली काली धारियां इसका कारण प्रदूषण के कारण मृत कोशिकाओं का बढ़ना ही है, इसके अलावा जो लोग अपने खान पान के प्रति भी लापरवाह होते है, उन्हें भी ये समस्या परेशान कर सकती है, और इसका एक और कारण होता है वो ये की जितनी देखभाल आप अपने चेहरे की करते है, उतना ध्यान आप अपनी गर्दन पर तो नहीं देते है, और जिसके कारण आपकी गर्दन पर काली धारियों की समस्या धीरे धीरे शुरू हो जाती है।

इसी कारण आपको त्वचा से सम्बंधित इस परेशानी का सामना करना पड़ता है, परंतु ये कोई ऐसी समस्या नहीं है की जिसे आप ठीक नहीं कर सकते है, बल्कि आप कुछ ही दिनों के नियमित इस्तेमाल से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, जैसे की यदि आप रोजाना जिस तरह अपने चेहरे को मॉइस्चराइज करते है, यदि आप अपनी गर्दन को भी करें, तो आपको इस समस्या का सामना ही न करना पढ़ें, इके अलावा आप ऐसे बहुत से तरीके है जिनके नियमित इस्तेमाल से गर्दन पर होने वाली काली धारियों की समस्या से राहत पा सकते है। तो आइये विस्तार से जानते है वो टिप्स जो आपकी इस समस्या के समाधान में आपकी मदद करते है।

गुलाबजल और हल्दी के पैक का इस्तेमाल करें:-

अपने चेहरे की त्वचा पर निखार लाने के लिए तो लोग इसका बहुत इस्तेमाल करते है, परंतु शायद आप ये नहीं जानते है की इसका इस्तेमाल करने से आप गर्दन पर पड़ रही काली धारियां और झुर्रियों से भी निजात पा सकते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक चम्मच शहद में एक चुटकी हल्दी, और और एक चम्मच गुलाबजल डालें, उसके बाद इसे अच्छे से मिलाएं, जहां पर आपको ज्यादा काली धारियां दीख रही है, उस हिस्से पर इस पैक को अच्छे से लगाएं और दस मिनट रहने के बाद हलके गुनगुने पानी से साफ़ करें, इसके इस्तेमाल से आपको गर्दन के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।।

अंडे का इस्तेमाल करें:-

egg

एंड का इस्तेमाल करके भी आप इस समस्या से राहत पा सकते है इसके इस्तेमाल के लिए आप अंडे को फोड़ कर उसके तरल भाग को अलग कर लें, और इसमें से पीले भाग को अलग निकाल लें, और अब बचे हुए सफ़ेद भाग में एक चम्मच बादाम का तेल डालें, और इसे अच्छे से फेटे, जब तक पूरा मिश्रण एक रंग का न हो जाएँ, अब इसे उस स्थान पर लगाएं जहा आपको काली धारियां दीख रही है, इससे आपकी उन धारियों के कालेपन को दूर करने के साथ त्वचा को सामान्य होने में भी मदद मिलेगी।

आलू के पैक का इस्तेमाल करें:-

आलू के पैक को तैयार करने के लिए आप एक आलू के छिलके को उतारकर टुकड़ो में काट लें, उसके बाद आप इन टुकड़ो पर निम्बू का रस डालें, उसके बाद आप इसे ग्राइंडर की मदद से पीस लें, अब इसे अपनी गर्दन के उस भाग पर लगाएं जहा आपको काली धारियों की समस्या है, और इसे लगाने के बाद आप कम से कम आधे घंटे के लिए इसे वही पर लगे रहने दे, और उसके बाद इसे हलके गुनगुने पानी से साफ़ कर लें, ऐसा करने से आपको इस समस्या से राहत मिलती है।

पपीते के पैक का इस्तेमाल करें:-

पीते के पैक का इस्तेमाल करने से भी आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप ध्यान रखें की आप ताजे और और पके हुए पपीते का ही चुनाव करें, इसके इस्तेमाल के लिए आप सबसे पहले पपीते को छील कर उसे अच्छे से पीस लें, इसे आप चम्मच या ब्लेंडर की मदद से भी पीस सकते है, इसके बाद आप इसे गर्दन के उस हिसे में लगाएं जहा पर काली धारियां है, ऐसा करने के दस मिनट बाद तक आप इसे अपने गर्दन पर ही रहने दे, और उसके बाद आप हलके गुनगुने पानी से इसे साफ कर दें, ऐसा करने से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

अनानास का इस्तेमाल करें:-

ananas

अनानास का इस्तेमाल करने से भी आपको गर्दन पर काली धारियों को ठीक करने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप अनानास का कुछ भाग लेकर उसमे से उसके रस को निकाल लें, इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स गर्दन पर होने वाली काली धारियों की समस्या से निजात दिलाने में आपकी मदद करते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप अनानास के रस में रुई के गोले को भिगोकर इसे अपनी गर्दन पर अच्छे से लगाएं और इसके सूखने तक इसे वही रहने दें, ऐसा करने से आपको गर्दन पर होने वाली काली धारियों की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

गर्दन का व्यायाम करें:-

गर्दन में आई धारियों से निजात पाने के लिए आप गर्दन का व्यायाम भी कर सकते है, इसके लिए आप अपनी गर्दन को कभी आगे तो कभी पीछे की तरफ झुकाएं, ऐसा दिन में सुबह शाम कम से कम दस से १५ मिनट के लिए करें ऐसा करने से आपकी गर्दन में आई धारियों को खुलने में मदद मिलती है, और इसके कालेपन को दूर करने के लिए आप नीबू के रस, पैक्स, एलोवेरा जैल आदि का इस्तेमाल भी कर सकती है। आपको इससे जरूर फायदा होगा परंतु तब जब आप इसे नियमित रूप से करते है।

पोषक तत्वो का सेवन करें:-

यदि आपके शरीर में जरुरी मिनरल्स की कमी हो जाती है तो इसके कारण भी आपकी त्वचा ढीली पड़ जाती है, और इसके बीच धारियां भी पड़ने लगती है, और इसके कारण इन धारियों के बाच में सफाई न होने के कारण कालापन होने लगता है, इसीलिए यदि आप भी इस समस्या से राहत पाना चाहते है, तो इससे बचने के लिए आप हरी सब्जियों, फलो और भी जरुरी पोषक तत्व जो आपके शरीर को चाहिए होते है, उसका सेवन भरपूर मात्रा में करें, ऐसा करने से आपको इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है।

तेल से मसाज करें:-

गर्दन पर आने वाली धारियों की समस्या से बचने के लिए तेल की मसाज करने से आपको बहुत फायदा मिल सकता है, इससे आपकी त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने के साथ त्वचा में आने वाली धारियों की समस्या से निजात पाने में भी मदद मिलती है, इसके लिए आप जैतून, बादाम, नारियल, टी ट्री तेल आदि को हल्का गरम करके अपनी गर्दन को आगे की तरफ झुकाकर अच्छे से मसाज करें, ऐसा करने से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

शहद का इस्तेमाल करें:-

शहद का इस्तेमाल करने से भी आपको गर्दन के बीच पड़ने वाली धारियों की समस्या के साथ गर्दन के कालेपन को दूर करने में भी बहुत मदद मिलती है, इसके लिए आप शहद को अच्छे से अपनी गर्दन पर लगाएं और हलके हाथो से मसाज करें, ये एक स्क्रब की तरह काम करके आपकी इस समस्या को दूर करती है, इसके बाद आप इसे कुछ समय के लिए अपनी गर्दन पर ही छोड़ दें और थोड़ी देर बाद हलके गुनगुने पानी की मदद से इसे अच्छे से साफ़ करें, ऐसा करने से आपको गर्दन पर होने वाली काली धारियों की समस्या से राहत मिलती है।

तो ये कुछ तरीके है जिनका इस्तेमाल करके आप गर्दन पर होने वाली काली धारियों की समस्या से राहत पा सकते है, इसके अलावा आप एलोवेरा, दही, अच्छे सनस्क्रीन का इस्तेमाल करके, अपनी त्वचा को मॉइस्चराइज करके भी इस समस्या से राहत पाना चाहते है तो आपको इन तरीको का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

कितनी मुश्किल होती है डिलीवरी के समय

प्रेग्नेंट महिला क्या सोचती है डिलीवरी को लेकर

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला के लिए उतार चढ़ाव से भरे होने के साथ नयी भावनाओं नए उत्साह से भी भरे होते हैं। क्योंकि गर्भ में शिशु को लेकर महिला नए नए सपने संजोती है, और बेसब्री से अपने घर में आने वाले मेहमान के बारे में सोचती है। लेकिन जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है वैसे वैसे महिला के मन में तरह तरह के सवाल आ सकते हैं। जैसे की महिला की डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन, डिलीवरी के दौरान ज्यादा दर्द तो नहीं होगा, जन्म के समय शिशु को किसी तरह की परेशान तो नहीं होगी, प्रसव होने वाला है इसका पता कैसे चलेगा, आदि। खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है उन्हें यह सवाल ज्यादा परेशान कर सकते हैं।

कुछ महिलाएं तो इस दौरान तावान में भी आ जाती है, लेकिन तनाव से महिला की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती है। ऐसे में हर गर्भवती महिला को अपने स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रखने की कोशिश करनी चाहिए ताकि महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। डिलीवरी को लेकर हर महिला की सोच भी अलग अलग हो सकती है, जैसे की कुछ महिलाएं नार्मल डिलीवरी को बेहतर मानती है, तो कुछ महिलाएं सिजेरियन डिलीवरी द्वारा अपने शिशु को जन्म देने को सही मानती हैं। लेकिन आपके सोचने से कुछ भी नहीं होता है क्योंकि डिलीवरी किस तरह से होगी इसके बारे में सही समय पर ही डॉक्टर द्वारा आपको बताया जाता है। लेकिन यदि महिलाएं अपने आप ही सिजेरियन द्वारा शिशु को जन्म देना चाहती है तो वो भी ऐसा कर सकती है।

नोर्मल डिलीवरी

सामान्य प्रसव को बहुत सी महिलाएं बेहतर मानती है क्योंकि इस दौरान एक बार दर्द द्वारा शिशु का जन्म तो होता है लेकिन प्रसव के बाद बहुत जल्दी महिला को फिट होने में भी मदद मिलती है। साथ ही इस दौरान जन्म के समय शिशु के स्वस्थ होने के चांस ज्यादा होते हैं। सामान्य प्रसव में भी महिला को टाँके आ सकते हैं, लेकिन फिर भी नोर्मल डिलीवरी में महिला को दिक्क़तें डिलीवरी के बाद कम ही होती है। लेकिन कुछ महिलाएं नोर्मल डिलीवरी में होने वाले दर्द को लेकर घबरा भी जाती है इसीलिए नोर्मल डिलीवरी द्वारा वह शिशु को जन्म नहीं देना चाहती हैं, लेकिन सच तो यह हैं की डॉक्टर्स भी नोर्मल डिलीवरी को ही शिशु को जन्म देने के लिए बेहतर विकल्प मानते हैं। लेकिन इस डिलीवरी में महिला को दर्द बहुत अधिक होता है, जो असहनीय होता है।

सिजेरियन डिलीवरी

प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स हो, प्रेग्नेंट महिला के गर्भ में एक से ज्यादा शिशु हो, गर्भ में शिशु को किसी तरह की दिक्कत हो, गर्भ में शिशु मल कर दे, महिला सिजेरियन डिलीवरी चाहती हो, आदि ऐसी कुछ स्थिति के होने पार ही डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी के लिए बोल सकते हैं। साथ ही सिजेरियन डिलीवरी के दौरान तो महिला को किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है। लेकिन सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को फिट होने में ज्यादा समय लग सकता है। साथ ही ऐसा भी माना जाता है की सिजेरियन डिलीवरी द्वारा जन्म लेने वाले बच्चों को इन्फेक्शन आदि होने का खतरा भी अधिक होता है।

प्रसव के संकेत

एक ही दम से आपको प्रसव हो जाये ऐसा भी नहीं होता है बल्कि प्रसव से पहले आपकी बॉडी कुछ संकेत देती है। जिससे आपको पता चलता है की अब शिशु के जन्म होने का समय करीब आ गया है। और यह लक्षण कुछ परेशानियों के रूप में बॉडी में महसूस हो सकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी से पहले बॉडी क्या संकेत देती है।

  • पेट में दर्द का अहसास होना, यह दर्द कभी अधिक तो कभी कम हो सकता है या कभी रुक रुक कर इसका अहसास होता है।
  • पेट के निचले हिस्से, पीठ व् कमर की मांससपेशियों में खिंचाव का अनुभव अधिक होना।
  • पेट के निचले हिस्से में भार का अधिक अनुभव होना।
  • उल्टियों की समस्या का अधिक बढ़ना।
  • बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होना।
  • एमनियोटिक बैग के फटने के कारण यूरिन की तरह गाढ़े चिपचिपे पदार्थ का बाहर निकलना।
  • मूड स्विंग्स की समस्या बढ़ना।

तो यह हैं डिलीवरी के दौरान महिला को कैसा महसूस होता है और कौन सी परेशानियां होती है उससे जुडी कुछ जानकारी। ऐसे में पहली बार माँ बनने वाली महिला को प्रसव को लेकर कोई दिक्कत न हो इसके लिए महिला को प्रसव से जुडी सारी जानकारी को इक्क्ठा करना चाहिए। इसके अलावा प्रसव का समय पास आने पर डॉक्टर से भी राय लेते रहना चाहिए।

डिलीवरी के बाद मालिश करना बहुत जरुरी होता है! ये फायदे होते है

प्रेगनेंसी महिला के लिए जितना खास और नया अनुभव होता है, उतना ही बदलाव डिलीवरी के बाद भी महिला को देखने को मिलता है, क्योंकि अब उसे अपने साथ अपने शिशु का भी अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है, लेकिन अपने शिशु का अच्छे से ध्यान वो तभी रख पाती है, जब वो खुद फिट रहती है, इसीलिए महिलाओ के लिए डिलीवरी के बाद मालिश बहुत जरुरी होती है, क्योंकि मालिश करवाने से महिला केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी फिट रहती है, मालिश करवाने से महिला को डिलीवरी के बाद जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है, लेकिन इस बात का ध्यान रखना चाहिए की नार्मल डिलीवरी के बाद मालिश को जल्दी शुरू किया जा सकता है, जबकि सिजेरियन डिलीवरी के बाद कम से कम बीस से पच्चीस दिन का अंतराल रखना चाहिए, तो आइये अब विस्तार से जानते है की डिलीवरी के बाद मालिश करवाने से महिला को और कौन कौन से फायदे होते है।

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आराम मिलता है:-

डिलीवरी के बाद महिला को केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से आराम के लिए भी मालिश करवानी बहुत जरुरी होती है, क्योंकि डिलीवरी के बाद शरीर में आए बदलाव, और पूरा दिन शिशु की देखभाल के कारण महिला बहुत थक जाती है, और यदि वो मालिश करवाती है तो इससे न केवल उसे शारीरिक रूप से आराम मिलता है, बल्कि वो मानसिक रूप से भी राहत महसूस करती है।

ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है:-

शरीर को फिट रखने के लिए बहुत जरूरी होता है की आपकी बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन अच्छे से होना चाहिए, और डिलीवरी के बाद मालिश करने से आपके शरीर में ऑक्सीजन का फ्लो भी अच्छे से होता है, जिससे आपका ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है।

दर्द से राहत मिलती है:-

प्रसव के बाद शरीर में काफी कमजोरी आ जाती है, और शरीर के अंगो में भी दर्द रहता है, जैसे की जॉइंट पेन, पैरों में, पीठ में, दर्द होता है, और मसाज करवाने से महिला को इस दर्द से राहत पाने में मदद मिलती है, क्योंकि इससे उनके बॉडी पार्ट्स रिलैक्स महसूस करते है, और यदि आप रात के समय मसाज करके सोते है, तो आपको ज्यादा राहत मिलती है।

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कसाव आता है:-

गर्भावस्था के पूरे समय महिला का पेट बढ़ता रहता है, जिससे उसकी स्किन डिलीवरी के बाद ढीली पड़ने लग जाती है, और यदि वो मालिश करवाती है तो इससे उसकी स्किन में कसाव लाने में मदद मिलती है, जिससे उसकी बॉडी शेप बिलकुल वैसे होने में मदद मिलती है, जैसे की प्रेगनेंसी से पहले होती है।

वजन कम करने में मदद मिलती है:-

डिलीवरी के बाद अधिकतर महिलाओ का वजन बढ़ जाता है, और वजन बढ़ना किसी भी महिला को पसंद नहीं होता है, क्योंकि इसके कारण उनकी ख़ूबसूरती पर बुरा असर पड़ता है, लेकिन यदि डिलीवरी के बाद आप नियमित मसाज करते है, तो इससे आपके शरीर पर जमी चर्बी बर्न होती है, आपका पेट कम होता है, और आपके फिगर को मेन्टेन रहने में मदद मिलती है।

दूध का उत्पादन बढ़ता है:-

मालिश करने से आपके साथ शिशु को भी फायदा मिलता है, क्योंकि इसके कारण शरीर में प्रोलैक्‍टीन की मात्रा बढ़ती है, और यदि आप अपने ब्रैस्ट की मसाज करती है, तो इससे ब्रैस्ट की बंद नलिकाएं खुल जाती हैं, जिससे आपके दूध का उत्पादन बढ़ता है, और शिशु के विकास में भी मदद मिलती है।

स्ट्रेच मार्क्स कम होते है:-

डिलीवरी के बाद पेट, पेडू, और जांघो के आस पास स्ट्रेच मार्क्स पड़ जाते है, और यदि आप किसी प्राकृतिक तेल का इस्तेमाल करके नियमित उन स्ट्रेच मार्क्स पर मसाज करते हैं, तो आपको इस समस्या से निजात पाने और अपनी स्किन से हर तरह के दाग धब्बे हटाने में मदद मिलती है।

तनाव से राहत मिलती है:-

डिलीवरी के बाद महिला को एक दम से अपने अंदर इतने बदलाव और साथ ही शिशु की देखभाल वो अच्छे से कर पाएगी या नहीं इसकी इतनी परेशानी हो जाती है, जिसके कारण वो तनाव में भी आ जाती है, इससे निजात पाने में भी मालिश महिला के लिए बहुत लाभदायक होती है, ऐसा करने से महिलाको रिलैक्स महसूस होता है, जिससे वो मानसिक रूप से राहत महसूस करती है।

तो ये हैं कुछ फायदे जो महिला को डिलीवरी के बाद मालिश करवाने से होते है, साथ ही महिला को डिलीवरी के बाद अपने साथ अपने शिशु की देखभाल का भी ध्यान रखना पड़ता है, इसके लिए जरुरी है की वो वो अपने स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान रखें, इसके लिए प्रसूति को मालिश के साथ अपने खान पान का भी ध्यान रखना चाहिए।

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