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सिजेरियन के बाद निशान ऐसे दूर करें

माँ बनना किसी भी महिला के लिए सबसे सुखद अहसास होता है। ऐसे में जिन महिलाओ की सी सेक्शन यानी सिजेरियन डिलीवरी होती है उन्हें नार्मल डिलीवरी से ज्यादा केयर की जरुरत होती है। ऐसे ही नार्मल डिलीवरी वाली महिलाओ को टांको की समस्या कम होती है। जबकि सी सेक्शन डिलीवरी वाली महिलाओ को पूरा कट लगाया जाता है। जिसका निशान अलग ही दिखाया जाता है। और इन टांको को अच्छे से ठीक होने में थोड़ा समय लगता है।

लेकिन टांको के ठीक होने के बाद भी यह अपना निशान छोड़ देते हैं। ऐसे में महिलाओ को यह अच्छा नहीं लगता है क्योंकि इसका निशान चाहे न दिखे लेकिन अपना आप को ही भद्दा लगता है। ऐसे में इस निशान को हटाने के लिए महिला तरह तरह की क्रीम आदि का इस्तेमाल करती है। जो की महंगी होने के साथ कई बार इतनी असरदार भी नहीं होती है। तो आइये आज हम आपको सिजेरियन डिलीवरी के निशान को हटाने के असरदार और आसान उपाय बताते है।

सी सेक्शन यानी सिजेरियन का निशान हटाने के उपाय:-

शहद और निम्बू:-

इस उपाय को करने के लिए सो चम्मच शहद एक कटोरी में लें, और उसके बाद इसमें एक निम्बू का रस मिलाकर अच्छे से मिक्स करें। उसके बाद इसे अच्छे से अपने सी सेक्शन के निशान पर लगाएं, और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें, जहां निम्बू निशान को खत्म करने में मदद करता है वही शहद के इस्तेमाल से स्किन को नमि मिलती है। थोड़ी देर बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके इसे साफ़ कर दें। ऐसा नियमित करने से आपको फायदा मिलेगा।

लैवेंडर और टी ट्री ऑयल:-

दोनों तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर हल्के हाथों से सी सेक्शन पर मसाज करें। और उसे आधे घंटे के लिए छोड़ दें और फिर साफ कर दें। ऐसा दिन में एक बार करें, ऐसा नियमित करने से आपको सी सेक्शन का निशान हटाने में मदद मिलती है।

कोकोआ बटर:-

कोकोआ बटर से नियमित इस निशान पर हल्के हाथों से मसाज करते हुए लगाएं। और इसे थोड़ी देर के लिए लगे रहने दें, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स आपके इस निशान को हल्का करने में मदद करते है। थोड़ी देर बाद इसे हल्के गुनगुने पानी से साफ़ कर दें, नियमित दिन में एक बार इस उपाय को करने से आपको सी सेक्शन के इस निशान को हटाने में मदद मिलती है।

एलोवेरा:-

एलोवेरा न केवल आपकी स्किन की खूबसूरती को बढ़ाने में मदद करता है। बल्कि इससे आपकी स्किन पर होने वाले सभी दाग धब्बो से निजात पाने में भी मदद मिलती है, इसके लिए आप एलोवेरा के गुद्दे को निकाल कर इसे अपने निशान पर लगाएं और थोड़ी देर के लिए लगे रहने दें। ऐसा दिन में दो बार कुछ दिन तक करें इस उपाय को करने से आपके सिजेरियन के निशान को हल्का करने में मदद मिलती है।

सेब का सिरका:-

सेब के सिरके को पानी में में मिलाकर अच्छे से बार बार अपने निशान पर लगाएं। उसके थोड़ी देर बाद इसे गुनगुने पानी से साफ़ कर लें, ऐसा कुछ दिनों तक नियमित करें इससे भी आपके सी सेक्शन के निशान को हल्का होने में मदद मिलती है। लेकिन ज्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल न करें और न ही ज्यादा जोर से रगड़े।

जैतून और नारियल का तेल:-

जैतून और नारियल के तेल को बराबर मात्रा में मिलाएं और इसे अच्छे से अपने सी सेक्शन के निशान पर लगाएं। ऐसा दिन में दो बार नियमित करें इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपका निशान धीरे धीरे हल्का होने लगेगा। और आपकी स्किन को भी अच्छे से कोमल बने रहने में मदद मिलेगी। परन्तु इस बात का ध्यान रखें की ज्यादा तेजी से मसाज न करें।

आहार का ध्यान रखें:-

यदि आपका खान पान अच्छा है, आप अपने खाने में सभी तरह के पोषक तत्वों का भरपूर सेवन करते हैं। तो इससे भी आपकी स्किन को भरपूर पोषण मिलता है, और आपके इस निशान को हल्के होने में मदद मिलती है। इसीलिए इस निशान को ठीक करने के लिए आपको अपने खान पान का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

तो यदि आप भी यह सोच रहे है की आप किस प्रकार इस निशान से राहत पा सकते है, तो आप भी ऊपर दिए गए किसी भी तरीके का इस्तेमाल नियमित करें। आपको जरूर फायदा होगा, इसके अलावा आप चाहे तो सर्जरी करवाकर भी इस निशान से हमेशा के लिए कम समय में राहत पा सकते है। यह तरीका थोड़ा महंगा होता है लेकिन बहुत जल्दी आपकी समस्या का समाधान भी इससे हो जाता है।

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इस समय प्रेगनेंसी में बिल्कुल भी सम्बन्ध नहीं बनाएं

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं की सम्बन्ध बनाने की इच्छा में वृद्धि हो जाती है। तो कुछ महिलाओं का सम्बन्ध बनाने का मन ही नहीं करता है। लेकिन यदि आपकी प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत नहीं है तो आप अपने पार्टनर के साथ पूरी सावधानी से सम्बन्ध बना सकती है। परन्तु प्रेगनेंसी में बहुत से बदलाव आते हैं, बहुत सी परेशानियां आती है, और कुछ केस में डॉक्टर भी समबन्ध न बनाने की सलाह देते हैं। तो आज हम इस आर्टिकल में आपको प्रेगनेंसी में कब महिला को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए उस बारे में बताने जा रहे हैं।

ब्लीडिंग की समस्या होने पर

कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। यदि आपको यह परेशानी प्रेगनेंसी के दौरान हो रही है। तो ऐसे में आपको सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

पहले गर्भपात हुआ हो

यदि आपका पहले गर्भपात हुआ है तो भी आपको प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। क्योंकि गर्भपात होने के कारण गर्भाशय की ग्रीवा कमजोर हो जाती है जिससे फिर से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।

गर्भ में एक से ज्यादा शिशु हो

गर्भ में एक से ज्यादा शिशु के होने पर भी आपको सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। क्योंकि इसके कारण सम्बन्ध बनाने में दिक्कत होने के साथ प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानियां भी बढ़ जाती है।

गर्भ में शिशु का भार नीचे की तरफ अधिक हो

गर्भ में कुछ बच्चों का भार पेल्विक एरिया की तरफ ज्यादा होता है। और यदि आपके साथ भी ऐसा है तो आपको प्रेगनेंसी में सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि इस केस में सम्बन्ध बनाने के कारण गर्भाशय पर चोट लगने का खतरा ज्यादा होता है जिससे बच्चे को परेशानी महसूस होती है।

ज्यादा उम्र में गर्भधारण किया हो

कुछ महिलाएं ज्यादा उम्र में गर्भधारण करती है। और अधिक उम्र में गर्भधारण करने पर प्रेगनेंसी में कम्प्लीकेशन का खतरा भी ज्यादा होता है। ऐसे में सम्बन्ध बनाने से परेशानियां बढ़ सकती है। इसीलिए अधिक उम्र में गर्भधारण करने पर भी प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

गर्भधारण में बहुत परेशानी हुई हो

यदि आपको गर्भधारण करने में बहुत परेशानी हुई है। तो ऐसे केस में भी आपको प्रेगनेंसी के दौरान कोई परेशानी न हो इससे बचने के लिए प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

पेट में दर्द महसूस होने पर

गर्भवती महिला को यदि पेट में दर्द जैसी समस्या अधिक रहती है या सम्बन्ध बनाने के बाद पेट में दर्द रहता है। तो ऐसे केस में भी गर्भवती महिला को सम्बन्ध बनाने से परहेज करना चाहिए।

इन्फेक्शन होने पर

गर्भवती महिला या गर्भवती महिला के पार्टनर दोनों में से किसी एक को भी प्रेगनेंसी के दौरान इन्फेक्शन होता है। तो ऐसा होने पर आपको गलती से भी सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि इसके कारण आपके साथ बच्चे को भी दिक्कत हो सकती है।

महिला का सम्बन्ध बनाने का मन न हो

सम्बन्ध बनाने के लिए दोनों पार्टनर की रजामंदी होनी जरुरी होती है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला की सम्बन्ध बनाने की इच्छा नहीं है तो महिला को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि जबरदस्ती सम्बन्ध बनाने से आपकी दिक्कत बढ़ सकती है।

जब एमनियोटिक फ्लूड का रिसाव हो

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में यदि महिला के प्राइवेट पार्ट से एमनियोटिक फ्लूड थोड़ा थोड़ा निकलता हुआ महसूस हो। तो ऐसे में भी गर्भवती महिला को अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

डॉक्टर के मना करने पर

यदि प्रेग्नेंट महिला को डॉक्टर ने सम्बन्ध बनाने की मनाही की है तो बिना डॉक्टर की सलाह के गलती से भी प्रेग्नेंट महिला को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

तो यह हैं कुछ शारीरिक परेशानियां व् बदलाव जिनके होने पर पर आपको प्रेगनेंसी के दौरान अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि यदि आप इन परेशानियों के होने पर अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाती हैं तो आपको दिक्कत होने के खतरा ज्यादा होता है।

प्रेग्नेंट महिला के लिए 5 चेतावनियां

प्रेगनेंसी के दौरान महिला कैसा महसूस करती है वह केवल एक महिला ही बयान कर सकती है। क्योंकि इस दौरान महिला एक नहीं बल्कि कई इमोशंस के साथ जुडी होती है। इस समय जहां महिला को बच्चे के गर्भ में आने की ख़ुशी होती है वहीँ शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण हो रही दिक्कत की वजह से महिला को परेशानी भी होती है। लेकिन इन सब के होने के बाद भी महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ख्याल रखना चाहिए।

और बॉडी में महसूस होने वाले किसी भी असहज लक्षण को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि इस दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही का महिला व् बच्चे पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। और यह लक्षण महिला के लिए चेतावनी होते हैं। तो आज इस आर्टिकल में हम ऐसी 5 चेतावनियां बताने जा रहे हैं जिन्हे महिला को बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए।

ब्लीडिंग

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग हो, चाहे थोड़ी हो या ज्यादा हो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में यदि थोड़ी ज्यादा ब्लीडिंग हो जाये तो यह गर्भपात का लक्षण होता है। वहीँ प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में ब्लीडिंग की समस्या का होना समय से पहले बच्चे के जन्म होने के खतरे का संकेत होता है।

खून की कमी

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला के शरीर में खून की कमी के लक्षण जैसे की कमजोरी, थकान, नाख़ून व् आँखों का पीला होना, आदि मसहूस हो या डॉक्टर द्वारा महिला को बताया जाये की महिला के शरीर में खून की कमी है तो महिला को इसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की कमी होने के कारण महिला की प्रेगनेंसी के दौरान परेशानियां, बच्चे के विकास में कमी, समय से पहले बच्चे का जन्म होना, डिलीवरी के समय दिक्कत आदि की समस्या हो सकती है।

पेट पीठ में तेज दर्द

गर्भवती महिला को यदि प्रेगनेंसी के दौरान पेट, पेट के निचले हिस्से में, पीठ में दर्द की समस्या अधिक हो तो इसे महिला को बिल्कुल अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह बच्चे के जन्म होने का संकेत होता है। यदि यह दर्द आपको डिलीवरी डेट के आस पास हो या डिलीवरी डेट से पहले हो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

सूजन

प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में सूजन होना आम बात होती है और अधिकतर महिलाएं प्रेगनेंसी के समय इस परेशानी का सामना करती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला को बहुत ज्यादा सूजन की समस्या हो पैरों के साथ हाथों, मुँह आदि पर भी सूजन महसूस हो। तो महिला को इस लक्षण को अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा होना शरीर में किसी बीमारी का संकेत हो सकता है।

बच्चे की हलचल

गर्भ में शिशु की मूवमेंट शिशु के स्वस्थ होने की तरफ इशारा करती है। ऐसे में गर्भ में शिशु हलचल कर रहा है या नहीं, महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए। यदि गर्भवती महिला को कभी ऐसा महसूस हो की गर्भ में शिशु हलचल नहीं कर रहा है तो महिला को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि गर्भ में शिशु की हलचल का न होना गर्भ में शिशु के होने वाले खतरे की और इशारा करता है।

तो यह हैं कुछ चेतावनियां जो प्रेग्नेंट महिला को यदि शरीर में महसूस हो तो महिला को बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि इन्हे अनदेखा करना माँ व् बच्चे दोनों पर बहुत बुरा असर डाल सकता है।

बच्चा जब पेट में होता है तो क्या हरकत करता है!!

शिशु को महसूस माँ केवल तभी नहीं करती है जब जो जन्म लेता है, बल्कि वो गर्भ में होने का अहसास भी अपनी माँ को करवाता है, और जैसे ही किसी महिला को पता चलता है की वो माँ बनने वाली है, तभी से वो अपने शिशु से भावनात्मक रूप से जुड़ जाती है, और महिला अपने बच्चे के साथ हर किसी से नौ महीने ज्यादा समय बिताती है, शुरुआत के तीन से चार महीनो में शिशु की केवल धड़कन ही सुनाई देती है, और वो भी डॉक्टर्स अपनी मशीन से आपको सुनाते है, लेकिन उसके बाद धीरे धीरे शिशु के अंगो का विकास होने लगता है, हाथ, पैर, आँखे, और सभी अंग भी पांच महीने में पूरी तरह से विकसित हो जाते है, और उसके बाद बच्चा घूमता है, अपने हाथ पैर मारता है, तो महिला को उसका आभास होता है।

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infant moment

बच्चा केवल यही नहीं बल्कि गर्भ में हिचकी लेना, अंगूठा चूसना, आँखे खोलना, यहां तक की बच्चा आप क्या बोलते है, उसे सुनता भी है, और जैसे ही कई बार वो तेज आवाज़ सुनता है तो चौंक भी जाता है, इसीलिए तो कहा जाता है की गर्भ में शिशु से बातें करनी चाहिए ताकि उनपर अच्छा असर पड़े और शिशु बुद्धिमान हो, इसके अलावा बच्चा लाइट की रौशनी को भी महसूस कर सकता है, आदि भी करता है, लेकिन वो आपको दिखाई नहीं देती है, क्या आप भी माँ बनने वाली है? और जानना चाहती है की गर्भ में शिशु कौन  सी हरकते करता है, तो आज हम आपको इसी बारे में कुछ बातें बताना चाहते है, तो लीजिये विस्तार से जानते है की गर्भ में शिशु कौन कौन सी हरकत करता है।

बच्चा मुड़ने और चौंकने लगता है:-

बच्चे गर्भ के अंदर क्या करते है इस बात को जानने के लिए माँ हमेशा उत्सुक रहती है, तो लगभग सात से आठ सप्ताह का बच्चा गर्भ में सामान्य हरकते करना शुरू कर देता है, जैसे की वो मुड़ने लग जाता है, और चौंकने लगता है।

बच्चा हिचकी लेता है:-

नौ सप्ताह तक आते आते बच्चा गर्भ में हिचकी लेना शुरू कर देता है, इसके साथ बच्चा चूसने और निगलने भी लग जाता है, साथ ही अपने हाथ पाँव भी हिलाने लग जाता है, परन्तु अभी ये हरकते वो इतनी तेजी से नहीं करता है की गर्भ में आप उसे महसूस कर सकें लेकिन धीरे धीरे जैसे बच्चा गर्भ में बढ़ता है, वैसे वैसे आप उसे महसूस भी कर पाते है।

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अपने चेहरे से सम्बंधित हरकते करता है:-

दसवें हफ्ते में बच्चा अपने सर को घुमाने लगता है, साथ ही वो अपना जबड़ा भी खोल लेता है, साथ ही अपने चेहरे को छूने के लिए हाथ भी बढ़ाने की कोशिश करता है, और अंगड़ाई भी लेनी शुरू कर देता है।

बच्चा आपकी बातें भी सुनता है:-

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बच्चे का मानसिक रूप से विकास गर्भ में ही शुरू हो जाता है, साथ ही बच्चे की सुनने की शक्ति भी बढ़ जाती है, आप जो भी बच्चे को कहते है उसे सुनाई देता है, इसीलिए बच्चे को अच्छे अच्छे श्लोक कहानियां आदि सुनानी चाहिए, ताकि उस पर अच्छा असर पड़े और जब भी आप शोर या तेज आवाज़ के पास जाते है, तो वो घबरा भी जाता है, इसीलिए ऐसे समय पर बच्चे को ज्यादा शोर आदि से दूर रखना चाहिए, और यदि आप बच्चे को अच्छी अच्छी चीजे बताते है तो उसका मानसिक विकास होने में भी मदद मिलती है।

बच्चा मुस्कुराने लगता है:-

आपको जानकर हैरानी होगी की गर्भ में भी आपका बच्चा मुस्कुराता है, और यह हरकत बच्चा चौबीसवें हफ्ते तक आते तक शुरू कर देता है, साथ ही आप उसके घूमने को भी ज्यादा महसूस करने लगते है।

बच्चा घूमने लगता है:-

जैसे जैसे बच्चा पांच महीने का होता है, तो वो अच्छे से घूमने लगता है, और सबसे अच्छी बात तो यह होती है की आप इसे महसूस भी कर सकते है, साथ ही बच्चा कई बार लाते भी मारता है, और ऐसा आपको ज्यादातर सुबह और और शाम के समय आप महसूस कर सकते है, इसके साथ जैसे जैसे महिला डिलीवरी के पास आती है वैसे वैसे बच्चे की हरकते और भी अच्छे से पता चलती है।

तो ये है कुछ अनमोल पल जो शिशु गर्भ में बिताता है, और अपने होने का अनुभव अपनी माँ को करवाता रहता है, इसके साथ यदि आप चाहते है की आपका शिशु स्वस्थ और बुद्धिमान, हो तो आपको अपने स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान देना चाहिए क्योंकि गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है, यदि आप अपना ध्यान अच्छे से रखती है, तो इससे आपके शिशु पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।

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गर्भावस्था के दौरान इन खतरों से सावधान रहें

गर्भावस्था के दौरान इन खतरों से सावधान रहें, प्रेगनेंसी के दौरान इन समस्याओं को न करें अनदेखा, गर्भवती महिला इन लक्षणों को न करे नज़रअंदाज़, गर्भवती महिला के लिए टिप्स, गर्भवती महिला इन खतरों से रहे सावधान

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को बहुत सी शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे की तनाव, उल्टियां, भूख की कमी, पसंद में बदलाव, अनिंद्रा, वजन में बढ़ोतरी, मॉर्निंग सिकनेस, आदि। और इसके साथ नौ महीने तक गर्भवती महिला को और भी परेशानियां हो सकती है जिन्हे गर्भवती महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि कई बार महिला द्वारा की गई लापरवाही शुरुआत में जहां गर्भपात का कारण बन सकती है, वहीं इसके कारण गर्भवती महिला को स्वास्थ्य से जुडी समस्या होने के साथ गर्भ में शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। कुछ महिलाओं को समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। तो लजिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं की गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किन खतरों से सचेत रहना चाहिए।

तनाव से बचें

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला का तनाव लेना गर्भपात का कारण बन सकता है, और यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान मानसिक रूप से बहुत अधिक परेशान रहती है तो इसके कारण शिशु के विकास में कमी होने साथ प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को इन परेशानियों से बचाव के लिए प्रेगनेंसी के समय को खुलकर एन्जॉय करना चाहिए, साथ ही अपनी केयर भी अच्छे से करनी चाहिए, और तनाव लेने की बजाय खुश रहना चाहिए।

अधिक उल्टी खड़ी कर सकती है परेशानी

गर्भवती महिला को उल्टी का आना आम बात होती है, कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के शुरूआती तीन महीनों में यह समस्या होती है तो कुछ महिलाएं पूरे नौ महीने तक इससे परेशान रहती है। ऐसे में जिन महिलाओं को ज्यादा उल्टी आती है इसे इग्नोर न करते हुए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि इसके कारण बॉडी में पोषक तत्वों की कमी, पानी की कमी, पेट में खिंचाव व् दर्द, कमजोरी, आदि की समस्या हो सकती है। जिसके कारण गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने के समस्या होने के साथ शिशु के विकास में कमी जैसी परेशानी हो सकती है।

प्राइवेट पार्ट से पानी का आना

सफ़ेद पानी का आना बहुत ही आम बात होती है लेकिन यदि यह पानी बहुत अधिक आये, यूरिन की तरह आये, प्राइवेट पार्ट से बदबू महसूस हो, तो आपको इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए। और जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से राय लेनी चाहिए, क्योंकि हो सकता है की पानी की थैली फट गई हो, और शिशु का जन्म होने वाला हो साथ ही बदबू अधिक आने पर प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन हो गया हो, तो इसे अनदेखा न करें।

फ्लू से बचें

यदि आपको बहुत ज्यादा उल्टी, दस्त, खांसी, जुखाम, नाक का बहना, गले में दर्द, सर्दी, आदि महसूस हो तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह फ्लू के लक्षण हो सकते हैं, क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव के कारण हो सकता है की इम्यून सिस्टम में कमजोरी आ जाए जिससे आपको फ्लू होने का खतरा बढ़ जाए, ऐसे में इस लक्षणों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, और किसी भी परेशानी के होने पर घर में दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए, डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

खून की कमी

प्रेगनेंसी में बॉडी में खून की कमी का होना गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए परेशानी का कारण हो सकती है साथ ही इसके कारण एनीमिया की समस्या, डिलीवरी के दौरान परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में ब्लड टेस्ट करवाने पर यदि आपको खून की कमी लगे तो आपको आयरन युक्त आहार लेने के साथ आपको आयरन की दवाई का सेवन भी समय से करना चाहिए।

ब्लीडिंग

प्रेगनेंसी के दौरान प्राइवेट पार्ट से खून का निकलना शुरूआती दिनों में गर्भपात का लक्षण हो सकता है, ऐसे में यदि आपको शुरूआती दिनों में यदि दाग भी लगे तो भी एक बार डॉक्टर को जरूर चेक करवाना चाहिए।

पेट में दर्द

यदि गर्भवती महिला को पेट में बहुत दर्द, सुस्ती, आँखों से धुंधला दिखना, आदि लक्षण दिखाई दें, तो इसे भी गर्भवती महिला को इग्नोर नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह एक्टोपिक प्रेगनेंसी का लक्षण हो सकता है। इसमें अंडा गर्भ से बाहर जैसे की फैलोपियन ट्यूब में निषेचित होकर वहीं बढ़ने लगता है जो की महिला के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। ऐसे में यदि गर्भधारण के बाद आपको मासिक धर्म जैसा पेट में दर्द महसूस हो, पेट के निचले हिस्से में दर्द ही तो इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

फीटल किक पर ध्यान दें

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में शिशु की हलचल का अनुभव गर्भवती महिला के लिए बहुत खास होता है। शुरुआत में आपको यह हलचल थोड़ा कम महसूस होती है, लेकिन जैसे जैसे शिशु का विकास होता है वैसे वैसे यह हलचल बढ़ने लग जाती है। लेकिन कभी आपको ऐसा महसूस हो की गर्भ में शिशु अच्छे से नहीं घूम रहा है, या बहुत देर तक शिशु हलचल न करें, तो इसका कारण शिशु को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन का न मिल पाना हो सकता है। ऐसे में इसे गलती से भी अनदेखा नहीं करना चाहिए और जितना जल्दी हो सके इसके लिए डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ खास लक्षण जिन्हे प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण गर्भवती महिला के साथ शिशु को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने के लिए अपने खान पान, नींद, डॉक्टर से जांच, खुश रहने आदि का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

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Problems During Pregnancy

गर्भावस्था में ये जांच करवाना बहुत जरुरी होता है

प्रेगनेंसी महिला के लिए खास और सुखद अनुभव होता है और हर महिला चाहती है की प्रेगनेंसी के दौरान शिशु और महिला दोनों की स्वस्थ रहे। ताकि प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की कोई समस्या न आ सके। इससे बचने के लिए महिला को कुछ टेस्ट भी जरूर करवाने चाहिए ताकि महिला स्वस्थ रह सकें। और यदि कोई समस्या है तो उसके कारण शिशु पर कोई असर न पड़े। इसके अलावा शिशु गर्भ में क्या कर रहा है उसका विकास किस तरह से हो रहा है इसकी जांच भी महिला को करवानी चाहिए। क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं? यदि हां तो इन टेस्ट को आपको जरूर करवाना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान कौन कौन सी जांच करवाना बहुत जरुरी होता है।

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प्रेगनेंसी में दौरान ये जांच जरूर करवाएं:-

अल्ट्रासॉउन्ड करवाएं:-

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद आपको दूसरे महीने में फिर पांचवे और नौवे महीने में अल्ट्रासाउंड जरूर करवाना चाहिए। ताकि आपको शिशु की गतिविधियों के बारे में जानने में मदद मिल सकें। उसके बाद आपको पांचवे महीने में अल्ट्रासॉउन्ड करवाना चाहिए इसमें आपको शिशु के अंगो के विकास के बारे में बताया जाता है। और नौवे महीने के अल्ट्रासॉउन्ड में शिशु की गर्भ में क्या पोजीशन है इसके बारे मे पता चलता है। बाकी इसके अलावा आप अपने डॉक्टर से भी इस बारे में राय जरूर लें।

ब्लड टेस्ट:-

प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड टेस्ट भी जरूर करवाना चाहिए। क्योंकि इससे शरीर में हीमोग्लोबिन कम तो नहीं है इसके बारे में पता चलता है। और साथ ही ब्लड में किसी तरह का इन्फेक्शन तो नहीं है इस बारे में भी पता चलता है। क्योंकि ब्लड में इन्फेक्शन के होने के कारण शिशु पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसीलिए आपको ब्लड टेस्ट जरूर करवाना चाहिए ताकि आपके ब्लड की अच्छे से जांच हो सके और इसके कारण किसी तरह की कोई परेशानी न हो।

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यूरिन टेस्ट करवाएं:-

प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन में इन्फेक्शन होना आम बात होती है। लेकिन आपको इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए बल्कि इसे समय से करवाना चाहिए। और यदि आपको इन्फेक्शन है तो इसका इलाज भी करवाना चाहिए क्योंकि इससे आपको इन्फेक्शन का खतरा होता है जो शिशु को भी प्रभावित कर सकता है इसीलिए इसे बिलकुल भी नज़रअंदाज़ न करें।

थायरॉयड टेस्ट:-

गर्भावस्था के दौरान थायरॉयड का टेस्ट करवाना भी बहुत जरुरी होता है। क्योंकि थायरॉयड की समस्या यदि गर्भवती महिला को होती है तो इसके कारण शिशु को भी सूजन की समस्या हो सकती है। इसीलिए इस टेस्ट को जरूर करवाएं।

तो ये हैं वो टेस्ट जिन्हे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान जरूर करवाना चाहिए। टेस्ट करवाने के साथ महिला को सभी दवाइयाँ और इंजेक्शन भी समय पर लगवाने चाहिए ताकि शिशु को किसी तरह की कोई परेशानी न हो सकें। यदि आप सभी जांच समय पर करवाती है और कोई समस्या होती है तो उसका इलाज भी समय पर हो जाता है। तो इससे महिला और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, साथ ही शिशु के गर्भ में होने वाले विकास के बारे में भी पता चल जाता है।

नोट: इसके अलावा और भी टेस्ट के बारे में आप अपने डॉक्टर से राय ले सकते हैं।

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घर पर उबटन बनाने के तरीके

Homemade Ubtan for Ladies

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उबटन भारतीय संस्कृति का अभिन्न और प्राचीन हिस्सा है। जिसकी मदद से त्वचा पर मौजूद गंदगी और डेड सेल्स को निकाला जाता था। ये बात तो हम सभी जानते है की पहले एक समय में एक्सफोलिएटर नहीं हुआ करते थे और न ही किसी तरह की ग्लोइंग क्रीम हुआ करती थी। लेकिन फिर भी उस समय की महिलाएं कितनी सुंदर और बेदाग हुआ करती थी।

जिसका कारण है घरेलू तरीके और घर पर बने उबटन जिनकी मदद से त्वचा संबंधी कई समस्यायों को आसानी से दूर किया जा सकता है। जी हां, पहले की महिलाएं सुन्दरता और गोरा निखार पाने के लिए घर पर मौजूद वस्तुओं से उबटन बनाकर उनका प्रयोग करती थी जबकि आजकल की महिलाएं केवल कास्मेटिक की ओर ही आकर्षित होती है।ubtan

आपको यह जानकर बहुत ख़ुशी होगी की गोरा निखार देने वाले इन उबटन को आप घर पर रोजाना प्रयोग होने वाली सामग्रियों से आसानी से बना सकती है। क्योंकि यह सभी घरेलू प्रोडक्ट है तो इनका त्वचा पर कोई साइड इफ़ेक्ट भी नही होता। साबुन की तुलना में इसका प्रयोग आपके लिए लाभकारी हो सकता है। आप उसे बिना किसी परेशानी रोजाना भी लगा सकती है। इससे त्वचा स्निग्ध, जवान और खुबसुरत बनी रहती है।

उबटन के नियमित इस्तेमाल से आप बढती उम्र की निशानियों को भी रोक सकती है। लाभ के तौर पर सोचा जाए तो उबटन किसी भी अन्य कॉस्मेटिक की तुलना में सस्ता और बहुत फायदेमंद तरीका है त्वचा को जवान और सुंदर बनाये रखने का। इसीलिए आज हम आपको कुछ घरेलू उबटनों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप भी अपनी त्वचा में नया निखार पा सकती है।

घर पर बने उबटन जो निखारें आपकी त्वचा :-

1. बेसन का उबटन :

इस उब टन की मदद से स्किन पर मौजूद गंदगी और दाग धब्बे दुर होते है। साथ ही स्किन में होने वाली अलग अलग तरह की समस्याएं जैसे रैशेस और जलन आदि की समस्या भी नहीं होती।

=> इसके लिए दो बड़े चम्मच बेसन, एक चम्मच सरसों का तेल, थोडा सा दूध, एक चुटकी हल्दी को मिलाकर एक गाढ़ा लेप तैयार कर लें। अब इस लेप को स्किन पर लगायें और सूखने के बाद हाथों से रगड़-रगड़ कर छुडाएं। इसे त्वचा की गंदगी साफ़ हो जाएगी और स्किन में नई चमक आएगी।besan face pack

=> बेसन में कच्चा दूध और गुलाबजल मिलाकर भी उबटन बनाया जा सकता है।

=> एक चम्मच बेसन, एक चम्मच खीरे के रस और आधा चम्मच शहद को मिलाकर स्किन पर लगायें और सूखने के बाद हाथ से मलते हुए छुड़ा लें।

=> हरसिंगार के फुल और गुलाब के फूल पीस लें और उन्हें बेसन और दूध में मिलाकर उब टन तैयार कर लें। चेहरे पर लगायें और सूखने के बाद साफ़ कर लें। स्किन चमकने लगेगी।

2. जौ का उबटन :

=> दो बड़े चम्मच जौ का आटा, एक चम्मच ग्लिसरीन, आधा चम्मच सरसों तेल, आधा चम्मच गुलाबजल को मिलाकर एक लेप तैयार कर लें। अब इस लेप को अपने चेहरे पर लगायें और सूखे के बाद रगड़-रगड़ कर छुड़ा लें। इससे आपकी स्किन चमकने लगेगी।

=> जौ के आटे में दही मिलाकर अपने चेहरे पर लगायें। कुछ मिनट के बाद उसे गुनगुने पानी से साफ़ कर लें।

=> जौके आटे में चन्दन पाउडर, केसर और दूध मिलाकर उबटन बनायें और उसे अपने चेहरे पर लगायें। कुछ देर रखने के बाद उसे साफ कर लें।

3. मैदा का उबटन :

=> इस उबटन के लिए दो बड़े चमच मैदा, आधा चम्मच सरसों तेल और आधा चम्मच मिलाकर मिलाकर पेस्ट बनायें। अब इसे अपनी स्किन पर लगायें। हलके से मालिश करते हुए उसे छुड़ा लें। ये उबटन अनचाहे बालों को दूर करने में भी मदद करता है।face pack

=> मैदा को दूध में भिगों दें। फिर उसमे गुलाब की पत्तिय मिलाकर पीस लें। इसका प्रयोग अपनी स्किन पर करें। स्किन दमकने लगेगी।

4. उड़द का उबटन :

=> बिना छिलके वाली उड़द की दाल का बारीक़ पाउडर बना कर उसका दो चम्मच पाउडर, एक चम्मच तेल, एक चम्मच दूध, 10 बूंद गुलाबजल को मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इसका इस्तेमाल अपनी स्किन पर करें। कुछ देर रखने के बाद मालिश करते हुए उसे छुड़ा लें। स्किन को मुलायम करने और चमकाने के लिए यह बहुत अच्छा उबटन है।

5. गुलाब का उबटन :

=> इसके लिए आधा चम्मच मैदा, आधा चम्मच ग्लिसरीन, 2 चम्मच ताजा गुलाब की पिसी हुई पत्तियां और एक चम्मच गुलाबजल को मिलाकर पीस लें। अब इसे अपने शरीर पर लगायें। कुछ देर रखने के बाद रगड़ते हुए उसे साफ़ कर लें। स्किन महकने के साथ साथ दमकने भी लगेगी।

6. मसूर की दाल का उबटन :

=> इस उबटन के लिए मसूर की दाल, गुलाब के फूल की पत्तियां और चन्दन पाउडर को दूध में भिगो दें। भीगकर फूल जाने के बाद इन्हें पीस लें। अब इस पेस्ट को अपने फेस पर लगायें। कुछ देर रखने के बाद उसे मलकर छुड़ा दें।गुनगुने पानी से साफ करें। गर्मी के मौसम में ये उबटन आपको ठंडक देने में मदद करेगा।

बच्चा होने के बाद महिला में आने वाले बदलाव

बच्चा होने के बाद महिला में आने वाले बदलाव:-

जैसे ही महिला गर्भवती होती हैं| वैसे ही उसके शरीर में परिवर्तन आने स्वाभाविक होते हैं| जरुरी नहीं हैं की हर महिला में एक जैसे परिवर्तन आये| परिवर्तन हर महिला के हॉर्मोन्स पर निर्भर करता हैं| वैसे ही जब बच्चा पैदा हो जाता हैं, तब भी महिला में कई सारे परिवर्तन आते हैं| जैसे की आँखों के नीचे कालापन आना, खून की कमी हो जाना, स्ट्रेचमार्क्स की समस्या उत्तपन होना, वजन का बदन, अचानक से पेट पर चर्बी जम जाना| ऐसे बहुत से परिवर्तन हैं जो महिला में आते हैं|

पर ये ऐसी समस्या नहीं होती हैं की जिसका समाधान न हो| इस समस्या का समाधान भी हो सकता हैं| परंतु जैसे ही बच्चा हो जाता हैं, तुरंत इसके लिए उपचार करने के लिए अपने शरीर के साथ लापरवाही नहीं करनी चाहिए| क्योंकि कहा जाता हैं की बच्चा होने के बाद माँ का दूसरा जनम होता हैं| इसीलिए थोड़ा समय बहुत आराम से बच्चे की पूरी केयर के साथ निकालना चाहिए| तो आइये जानते हैं बच्चा होने के बाद महिला में कौन-कौन से बदलाव आते हैं| और उन्हें ठीक करने के लिए क्या-क्या उपाय हैं|

बच्चा होने के बाद आने वाले बदलाव व् उनके उपाय:-

स्ट्रेचमार्क्स की समस्या व् उसे खत्म करने के उपाय:-

स्ट्रेचमार्क्स की समस्या महिलाओ को पेट पर होती हैं| गर्भावस्था के अलावा वज़न का अचानक बढ़ना या घटना, आनुवांशिक कारक, हॉर्मोन्स में बदलाव तनाव और शरीर की अवस्था में बदलाव की वजह से भी स्ट्रेच मार्क्स होते हैं| स्ट्रेच मार्क्स त्वचा पर महीन रेखाओं के रूप में दिखते हैं| स्ट्रेचमार्क्स शरीर के अन्य भाग जैसे जाँघों, हाथों के ऊपरी भाग, कूल्हों और अन्य भागों पर भी हो सकते हैं| तथा इनको रोहन के उपाय इस प्रकार हैं|

  • स्ट्रैचमार्क्स को दूर करने के लिए वनस्पति तेल से मसाज करनी चाहिए| और ये हर घर में मिल भी जाता हैं|
  • अंडे का प्रयोग करे, 2 कच्चे अंडे लें और उन्हें तोड़कर अंडे का सफ़ेद भाग अलग कर लें, उसके बाद अब इसे स्ट्रेच मार्क्स से प्रभावित भाग पर लगाएं, और सूखने के बाद धो ले|
  • विटामिन इ का तेल इस्तेमाल करे, इसके लिए रोजाना 15 से 20 मिनट तक अपने स्ट्रेच मार्क्स पर विटामिन इ के तेल से मालिश करें| यह तेल स्ट्रेच मार्क्स को कम करता है और खत्म भी कर सकता हैं|
  • स्ट्रैचमार्क्स से प्रभावित भागों पर नींबू का रस निचोड़कर लगाएं| इसे 10 मिनट तक लगाकर रखें एवं उसके बाद गरम पानी से धो लें|
  • चीनी का प्रयोग करके भी इससे निजात पाया जा सकता हैं| 1 चम्मच चीनी में बादाम का तेल और नींबू के रस की कुछ बूँदें मिलाकर उसे स्ट्रेच मार्क्स पर लगाने से काफी प्रभावी असर होता है|
  • एलोवेरा जेल या एलोवेरा के अंदर का गुदा निकल कर स्ट्रैचमार्क्स से प्रभावित अंगो पर लगाए|
  • आलू के रस का प्रयोग करे|
  • पानी भरपूर मात्रा में पीएं|
  • इन सबका इस्तेमाल आप रोजाना करे तो आपको स्ट्रैचमार्क्स की समस्या से निजात मिल सकता हैं|

पेट की चर्बी की समस्या व् उसके लिए समाधान:-

बच्चा होने के महिलाये ज्यादातर पेट की चर्बी से परेशान हो जाती हैं| क्योंकि उन्हें लगता हैं की वो पहले जैसी खूबसूरत नहीं रही हैं| इसीलिए वो तरह तरह के प्रयत्न करने लगती हैं| परंतु ये समस्या ऐसी नहीं हैं की जिसका कोई समाधान न हो| और पेट की चर्बी घटाने के लिए आपको क्या करना चाहिए आइये हम आपको बताते हैं|

  • संतुलित आहार ले, बाहर का खाना व् ज्यादा मसले वाले भोजन का सेवन न करे|
  • दिन में कम से कम ८ घंटे की नींद जरूर ले|
  • सुबह समय से उठ कर व्यायाम या फिर योगासन जरूर करे|
  • पानी को भरपूर मात्रा में पीये| ग्रीन टिया का सेवन करे|
  • ओमेगा ३ फैटी एसिड का सेवन करे ये भी पेट की चाबी घटाने में मदद करता हैं| और मची में इसकी मात्रा सबसे अधिक पायी जाती हैं|
  • कम से कम मीठे का सेवन करे| और कैलोरी कम से कम ले|

वजन बढ़ने की समस्या होना व् इससे बचने के उपाय :-

बच्चा होने के बाद महिलाओ को लगता हैं की उनका वजन बढ़ने लग गया हैं| जिसके कारण वजन बढ़ने की समस्या से निजात पाने के लिए वो तरह तरह के उपाय करती हैं| आइये हम आपको बताते हैं की वजन बढ़ने की समस्या से निजात पाने के लिए आपको क्या करना चाहिए|

  • वजन बढ़ने की समस्या से निजात पाने के लिए करे व्यायाम करे|
  • यदि आप वजन घटना चाहती हैं तो तीनो समय संतुलित आहार खाना शुरू करे|
  • वजन बढ़ने की समस्या से छुटकारा पाने के लिए जितना हो सके उतना पैदल चाहे|
  • वजन घटना चाहते हैं तो मसालेदार भोजन का करे त्याग|
  • खाना खाने के बाद करे गुनगुने पानी का सेवन|

आँखों के नीचे काले घेरे आने की समस्या और उसका समाधान:-

जैसे ही बच्चा होता हैं, वैसे ही हमारी त्वचा में काफी सरे बदलाव आते हैं उनमे से एक हैं आँखों के नीचे काले घेरे आने की समस्या और आइये जानते हैं उससे बचने के उपाय|

  • खीरे का प्रयोग करे, खीरे को गोल काट कर उसे थोड़े समय के लिए आँखों के ऊपर रखे|
  • बादाम के तेल से मसाज करे|
  • टमाटर का गुद्दा निकल कर उसका प्रयोग करे|
  • कच्चे आलू का इस्तेमाल करे|
  • टी बैग्स का प्रयोग करे|

स्तनों में ढीलापन आने की समस्या और उसका समाधान:-

बच्चा होने के बाद कई बार जब बच्चा दूध पीता हैं तो स्तन ढीले हो जाते हैं| जो औरत की खूबसूरती को काम करते हैं| तो आइये जानते हैं इस समस्या का समाधान|

  • व्यायाम करने से होता हैं स्तनों का ढीलापन दूर|
  • अदरक के प्रयोग से होता हैं स्तनों का ढीलापन की समस्या से निजात|
  • सर्जरी करवाने से होता हैं स्तनों का ढीलापन दूर|
  • अंडे का सफ़ेद हिस्सा खाने से होता हैं स्तनों का ढीलेपन समाप्त|
  • नीम हल्दी और शहद का काढ़ा बना कर पीने से होता हैं स्तनों का ढीलापन दूर|

झुर्रियों की समस्या व् उसका समाधान:-

बच्चा होने के बाद कई बार चेहरे पर झुर्रिया भी आ जाती हैं जिसके कारण कई बार आपकी उम्र ज्यादा लगती हैं| और चेहरा भी अपने आकर्षण खो देता हैं| और महिलाये अपने आप को कम समझने लगती हैं| इससे बचने के लिए आपको क्या करना चाइये आइये आपको बताते हैं|

महिला में आने वाले बदलाव
प्रेगनेंसी में मुँह पर झाइयां नहीं आएँगी अगर यह करेंगे तो

  • शहद का प्रयोग करके झुर्रियों की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता हैं|
  • जैतून व् नारियल के तेल का इस्तेमाल करके पाया जाता हैं इस समस्या से निजात|
  • खीरे का प्रयोग करके भी आप झुर्रियों से छुटकारा पाया जा सकता हैं|
  • टमाटर का प्रयोग करके भी इस समस्या से निजात पाया जा सकता हैं|

तो ये हैं कुछ बदलाव जो महिला में बच्चा होने के बाद आते हैं| व् उनसे बचने के उपाय भी हैं| इसके आलावा कई बार महिला के शरीर में खून की कमी भी हो जाती हैं| जिसके लिए आपको सही समय पर आहार व् संतुलित आहार लेना चाहिए|

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बाल कमजोर क्यों हो जाते हैं?

Baal Kamjor Hone Ke Karan : बालों का झड़ना या बालों का कमजोर होना एक ऐसी समस्या है जो कब किसके बालों में होने लगे पता ही नहीं चलता। कुछ लोग इसे प्रदुषण का प्रभाव मानते है तो कुछ इसे हेयर स्टाइलिंग का परिणाम बताते है। जो काफी हद तक ठीक भी है। लेकिन आमतौर पर होने वाली इस समस्या का केवल एक ही कारण नहीं होता बल्कि और भी कई कारण होते है जिनकी वजह से बाल कमजोर होने लगते हैं। इसलिए किसी के बाल काफी मात्रा में झड़ने लगते है तो किसी के बाल पतले हो जाते हैं।

परन्तु बालों के कमजोर होने के पीछे मुख्यतः क्या कारण होता है इसके बारे में बहुत हो कम लोग जान पाते हैं। इसलिए यहां हम आपको बालों के कमजोर होने के कारणों के बारे में बता रहे हैं। क्योंकि कारण पता रहेगा तो समस्या को सावधानी बरतते हुए आसानी से ठीक किया जा सकेगा। तो आइये जानते है बाल किन कारणों की वजह से कमजोर होकर टूटने लगते हैं।

बाल कमजोर होने के क्या कारण होते हैं?

Baal Patle Hone Ke Karan – वैसे तो बालों के कमजोर होने और टूटने के बहुत से कारण होते हैं, लेकिन उनमे से कुछ मुख्य कारण होते है जो अक्सर बाल कमजोर होने की वजह होते है। यहाँ हम आपको उन्ही कारणों के बारे में बता रहे हैं।

1. अनुवांशिकता के कारण :

बहुत से लोगों के बाल अनुवांशिक कारणों से कमजोर होने लगते है। अर्थात अगर किसी के परिवार के अन्य सदस्यों के बाल कमजोर हुए तो हो सकता है अन्य सदस्यों में भी यह समस्या हो जाए।

बचाव – इससे बचने के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता। लेकिन सही आहार और बेहतर लाइफस्टाइल अपनाकर कुछ हद तक बालों को कमजोर होने से बचाया जा सकता है।

2. फंगल इंफेक्शन :

बहुत बार साफ़-सफाई ना रखने के कारण स्कैल्प में फंगल इंफेक्शन हो जाता है जिसकी वजह से बाल कमजोर होकर टूटने लगते है। कई बार इसके कारण बालों में डैंड्रफ की समस्या भी हो जाती है जिसे छुटकारा पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

बचाव – इस समस्या से बचने के लिए आपको साफ़-सफाई का खास ध्यान देना होगा। और साथ-साथ बालों के पोषण पर ध्यान देना होगा। अगर आप रेगुलर ऑइलिंग करते है तो भी इस समस्या से बचा जा सकता है।

3. हीट उपकरणों का प्रयोग :

अगर आप अपने बालों को स्टाइल करने के लिए हीट उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं तो इनसे बालों को काफी नुकसान पहुंचता है। इन उपकरणों में – हेयर ड्रायर, कर्लिंग आयरन, स्ट्रैटनर, हेयर स्टाइलिंग उपकरण आदि सम्मिलित हैं। जो बालों को हीट की मदद से कर्ल, स्ट्रैट करते है और सुखाते हैं। कई बार इनके इस्तेमाल से भी बाल कमजोर होकर टूटने लगते हैं।

बचाव – बालों को सुखाने के लिए ड्रायर का इस्तेमाल ना करें। जितना हो सके हेयर स्टाइलिंग आयरन का इस्तेमाल ना करें। अगर करना ही है तो पहले बालों में हेयर प्रोटेक्टिंग स्प्रे और जेल जरूर लगा लें।

4. हेयर कलर :

हेयर कलर में बहुत से केमिकल मिले होते हैं, जो बालों को बहुत नुकसान पहुंचाते है। लेकिन अधिकतर लोग फिर भी इनका इस्तेमाल करते है। कभी-कभी हेयर डाई का इस्तेमाल करना नुकसानदेह नहीं होता। लेकिन अगर बार-बार हेयर डाई का प्रयोग किया जाए तो बाल कमजोर होने लगे हैं।

बचाव – सफ़ेद बालों को छुपाने के लिए हेयर डाई का कम से कम प्रयोग करें। अगर मेहंदी लगाते है तो उसे ही लगाएं क्योंकि ये बालों को रंगने के साथ-साथ मजबूत और मुलायम भी बनती है।

5. गर्म पानी :

गर्म पानी से बाल धोने उन्हें खुद कमजोर बनाने जैसा है। अच्छे हेयर स्टाइलिस्ट का कहना है की बालों को गुनगुने पानी से धोया जा सकता है लेकिन गर्म पानी बालों के लिए अच्छा नहीं। यह उनसे प्राकृतिक नमी छीन लेता है और उन्हें कमजोर कर देता है।

बचाव – गर्म पानी का इस्तेमाल बाल धोने के लिए ना करें और ठंडे पानी का इस्तेमाल करें।

6. रोजाना बाल धोने से :

हफ्ते में केवल 2 बार बाल धोने की सलाह दी जाती है। अगर आप रोजाना या हर एक दिन के गैप पर बल धोते है तो हो सकता है जल्द ही आपके बाल कमजोर हो जाएं। क्योंकि बार-बार बाल धोने से उनमे मौजूद प्राकृतिक आयल निकल जाता है, जिससे वे रूखे और बेजान होकर कमजोर होने लगते हैं।

बचाव – हफ्ते में केवल 2 बार बाल धोएं। और रेगुलर ऑइलिंग करें।

7. बाल बांधने का तरीका :

आपका बाल बांधने का तरीका भी काफी हद तक बालों की हेल्थ को प्रभावित करता है। अगर आप अपने बालों को कसकर या केवल एक तरफ स्टाइल करके बांधती है तो इससे बालों की जड़ों पर काफी दबाब पड़ता है जिसकी वजह से वे खींचने लगते हैं। और परिणामस्वरूप बाल कमजोर हो जाते हैं।

बचाव – बालों को कसकर ना बांधे और उन्हें नार्मल स्टाइल करें। ज्यादा स्टाइल बनाने से बाल टूट भी सकते हैं।

8. तौलिया से रगड़ना :

बहुत से लोग बाल धोने के बाद उन्हें सुखाने के लिए रगड़ते है, इसके आलावा कॉटन के तकिए पर सोने से भी बालों में घर्षण होता है जिसके कारण बाल कमजोर हो जाते है। क्योंकि तौलिया केवल पानी वाली नमी ही नहीं अपितु बालों की प्राकृतिक नमी भी छीन लेती है।

बचाव – बालों को कभी भी तौलिया से रगड़कर नहीं सुखाएं और ना ही कॉटन के तकिये पर सोएं। अगर आप कैप या टोपी पहनने के शौक़ीन है तो उसे पहनना भी छोड़ दें ये बालों को काफी नुकसान पहुंचाते हैं।

बाल कमजोर होने के अन्य कारण :

इसके अलावा भी कुछ कारण है जिनकी वजह से बाल कमजोर होने लगते हैं। वे कारण निम्न है –

  • खराब हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से।
  • बॉडी में हॉरमोनल बदलाव के कारण।
  • थायराइड के कारण।
  • टाइफाइड या किसी वायरल संक्रमण के कारण भी बाल कमजोर हो जाते हैं।
  • एनेस्थीसिया या किसी सर्जरी के बाद।
  • गर्भावस्था के दौरान ली जाने वाली दवाओं के कारण।
  • कंट्रासेप्टिक दवाओं का अधिक सेवन करने से भी बाल कमजोर हो जाते हैं।
  • अत्यधिक तनाव लेना।
  • मीनोपॉज के बाद भी बाल कमजोर हो जाते हैं।

तो ये थे कुछ कारण जिनकी वजह से हमारे बाल कमजोर हो जाते है और कमजोर होकर टूटने लगते हैं। अगर आपके साथ भी ऐसी कोई समस्या है तो तुरंत उसका उपाय करें और बालों को झड़ने से बचाएं।

सनस्क्रीन आपके शरीर के लिए इतना खतरनाक होता है

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महिलाओं के लिए उनकी खूबसूरती और सुंदरता से बढ़कर और कुछ नहीं। और इसी खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए वे तरह तरह के प्रोडक्ट्स और ब्यूटी उत्पादों का प्रयोग करती है। ऐसे तो इन सभी को पूरी जाँच और टेस्ट के बाद फाइनल किया जाता है। लेकिन फिर भी इनमे से बहुत से प्रोडक्ट ऐसे है जिनके इस्तेमाल से व्यक्ति के स्वास्थ्य और स्किन पर प्रभाव पड़ता है जबकि उन प्रोडक्ट्स में कोई खराबी नहीं होती।

इन्हीं प्रोडक्ट्स में से एक है सनस्क्रीन। आज के समय में सनस्क्रीन का बहुत बड़े स्तर पर प्रयोग किया जा रहा है। छोटी उम्र के बच्चो से लेकर अधिक उम्र की महिलाएं सभी इसका इस्तेमाल करती है। ऐसे तो त्वचा के लिए ये प्रोडक्ट बहुत ही लाभकारी होता है क्योंकि इसे लगाने से बाद धुप की हानिकारक किरणे त्वचा पर नहीं पड़ती जिससे त्वचा को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता। साथ ही त्वचा में होने वाली समस्याएं भी नहीं होती।lgaa rhe hai sunscren

परन्तु क्या आप जानते है? की इसके रेगुलर यूज़ से आपकी हड्डियों पर कितना बुरा प्रभाव पड़ता है। सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल हर कोई बाहर जाने से पहले करता है। बाहर से तो हम त्वचा को बचा लेते है लेकिन आंतरिक तौर पर ये लोशन हमारी हड्डियों को कमजोर करता है। इसके अलावा भी सनस्क्रीन लगाने से बहुत से नुकसान होते है जिनके बारे में आज हम आपको बता रहे है। हो सकता है इन परिणामो को जानने के बाद आप भी सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना छोड़ दें।

सनस्क्रीन लगाने के दुष्परिणाम :-

1. हड्डियों के लिए :

शायद आप नहीं जानती लेकिन अधिक सनस्क्रीन लगाने से हमारी सूर्य की किरणों को अवशोषित करने की क्षमता कम हो जाती है। जिसके चलते हमारा शरीर विटामिन D ग्रहण नहीं कर पाता। और विटामिन D हड्डियों के लिए कितना जरुरी है ये तो हम सभी भली भांति जानते है। हाल में हुए एक रिसर्च में पाया गया है की नियमित और अधिक मात्रा में सनस्क्रीन लगाने पर हमारे शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है। सनस्क्रीन त्वचा की सूर्य की किरणें अवशोषित करने की क्षमता कम कर देता है जिससे शरीर में जरूरत के मुताबिक विटामिन डी नहीं बन पाता है। और हड्डियां कमजोर होने लगती है।

2. त्वचा में जलन :

त्वचा में जलन होती है तो इसे पढ़े : त्वचा में जलन के कारण और उपचार

इसमें मौजूद केमिकल बहुत तेज होते है और अधिकतर इसका इस्तेमाल फेस पर ही किया जाता है। ऐसे में आँखों में जलन और त्वचा में जलन की समस्या भी हो सकती है। अगर आप पहली बार सनस्क्रीन लगा रही है और जलन कम नहीं हो रही है तो उसे तुरंत साफ़ कर दें।

3. स्किन एलर्जी :

केवल कुछ सनस्क्रीन को छोड़कर अन्य सभी में केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में इनका इस्तेमाल करने से त्वचा में खुजली, सूजन और एलर्जी की समस्या हो सकती है। तो अगर आपकी त्वचा में भी ऐसी समस्याएं है तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें।

4. रूखी त्वचा :

बहुत से लोगों की शिकायत रहती है की सनस्क्रीन लगाने के बाद उनकी त्वचा रूखी हो जाती है। अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ है तो तुरंत इसका इस्तेमाल करना बंद कर दें।

5. एक्ने में समस्या :

अगर आपके चेहरे पर पहले से ही एक्ने है और आप उसपर सनस्क्रीन का इस्तेमाल करती है तो स्थिति को और भी खराब कर सकते है। क्योंकि इसमें मिलाएं जाने वाले केमिकल त्वचा के लिए अच्छे नहीं होते जिसके कारण मुहांसे बढ़ भी सकते है।

एक्ने से छुटकारा पाने के लिये यह पढ़े : मुहांसे से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय

6. रैशेस :

ये समस्या हर उस कॉस्मेटिक की देन होती है जिसमे केमिकल आदि का इस्तेमाल किया जाता है। और सनस्क्रीन में केमिकल का इस्तेमाल होता ही है। ऐसे में इसका प्रयोग करना स्किन के लिए कुछ हानिकारक हो सकता है विशेषकर सेंसिटिव त्वचा के लिए। इसीलिए थोड़ा संभलकर।