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IVF की जरुरत कब होती है?

हर महिला के लिए माँ बनना उसकी जिंदगी के बेहतरीन लम्हो में से एक होता है। लेकिन कई बार महिला और पुरुष के बहुत कोशिश करने के बाद भी महिला का गर्भधारण नहीं हो पाता है। ऐसे में महिलाओं द्वारा IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) जो की मेडिकल द्वारा दी गई एक सुविधा है। उसका इस्तेमाल करके महिला का गर्भधारण किया जाता है। जिससे महिला को गर्भधारण करने में मदद मिलती है। अधिकतर लोगो ने इसके बारे में सुना होगा, और आजकल तो बहुत जगह इसके लिए स्पेशल हॉस्पिटल भी खुल गए हैं। लेकिन यह प्रक्रिया क्या होती है इसके बारे में शायद कम लोग ही जानते हैं। तो आइये अब जानते हैं की IVF क्या होता है, और कब IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) की जरुरत होती है।

IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) क्या होता है?

यह एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमे महिला के अंडाशय से अंडे को बाहर निकाल लेते हैं, और उसी तरह पुरुष का शुक्राणु भी ले लेते हैं। फिर बाहर दोनों की निषेचन प्रक्रिया को करवाकर अंडे को फिर से महिला के गर्भाशय में स्थापित किया जाता है। जिससे महिला का गर्भधारण होने में मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की IVF कैसे किया जाता है।

  • सबसे पहले पुरुष के शुक्राणु को लैब में साफ़ किया जाता है।
  • जिसमे सक्रिय यानी अच्छे और असक्रिय यानी बेकार शुक्राणुओं को अलग किया जाता है।
  • उसके बाद इंजेक्शन के ज़रिए महिला के अंडाशय से अंडे को बाहर निकालकर फ्रीज किया जाता है।
  • फिर लैब में पेट्री डिश में अंडे के ऊपर सक्रिय शुक्राणु को रखा जाता है।
  • और उन्हें छोड़ दिया जाता है ताकि प्राकृतिक रूप से निषेचन हो सके।
  • उसके बाद प्रजनन यानी की अंडे और शुक्राणु को साथ रखने पर लगभग तीसरे दिन तक भ्रूण तैयार हो जाता है।
  • फिर कैथिटर जो एक लचकदार नली की तरह दिखता है, उसकी मदद से महिला के गर्भाशय में भ्रूण को प्रत्यारोपित किया जाता है।
  • कुछ केस में तीसरे दिन की जगह पांचवें दिन ऐसा किया जाता है क्योंकि 5 दिन वाले भ्रूण में बेहतर प्रेगनेंसी होने के चांस बढ़ जाते हैं।

कब किया जाता है IVF?

यह प्रक्रिया महिला या पुरुष में प्रजनन क्षमता से जुडी समस्याएँ होने पर किया जाता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की IVF कब किया जाता है।

पुरुष के शुक्राणुओं में कमी होने पर

यदि किसी पुरुष के शुक्राणु की गुणवत्ता अच्छी नहीं है, शुक्राणु की संख्या में कमी है, शुक्राणु का आकार या गति सही नहीं है, तो इसके कारण यह प्रक्रिया की जाती है। क्योंकि पुरुष के शुक्राणुओं से जुडी समस्या होने पर पुरुष के शुक्राणु और महिला के अंडे का मिलन अच्छे से नहीं हो पाता है। जिसके कारण महिला के गर्भधारण में समस्या आ सकती है।

महिला के शुक्राणु में कमी होने पर

महिला की किसी एक परेशानी के कारण नहीं बल्कि ऐसी बहुत परेशानियां होती है जिसके कारण महिला का गर्भधारण नहीं हो पाता है। और महिला को आईवीएफ के माध्यम से गर्भधारण की जरुरत पड़ती है। तो आइये अब जानते हैं की महिला को कब आईवीएफ की जरुरत पड़ती है।

पीरियड्स: यदि महिला को पीरियड्स समय पर नहीं आते हैं, कभी ज्यादा तो कभी कम पीरियड आते हैं, पीरियड्स के दौरान अधिक दर्द व् ब्लीडिंग की समस्या होती है, तो इसके कारण महिला को गर्भधारण में समस्या आ सकती है। साथ ही समय पर पीरियड न आने के लिए सही ओवुलेशन पीरियड का पता नहीं चल पाता है जिसके कारण महिला का गर्भ नहीं ठहर पाता है।

अंडो का विकास: कई बार महिला के अंडाशय में रखे अंडो का विकास अच्छे से नहीं हो पाता है जिसके कारण महिला को गर्भधारण से जुडी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कई बार महिला को इंजेक्शन लगाकर अंडाशय में रखे अंडो का सही विकास होने में मदद मिलती है।

फैलोपियन ट्यूब में कमी: यदि किसी महिला की फैलोपियन ट्यूब बंद है, या फैलोपियन ट्यूब में कोई और परेशानी है। तो इसके कारण भी महिला का गर्भधारण नहीं हो पाता है।

IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) से शिशु के कोई दिक्कत तो नहीं होती है?

बहुत से लोग ऐसा सोचते हैं की IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) द्वारा जन्म लेने वाले बच्चों के विकास में कुछ कमी रह जाती है, जबकि ऐसा नहीं है। क्योंकि यह बच्चे भी एक सामान्य गर्भधारण की तरह माँ के गर्भाशय में ही विकसित होते हैं। और शिशु का विकास पूरी तरह से महिला पर ही निर्भर करता है। ऐसे में यह सोचना गलत होगा की IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) द्वारा जन्म लेने वाले शिशु में कुछ कमी होती है।

तो यह है IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) से जुडी बातें, तो यदि आप भी गर्भधारण से जुडी परेशानियों का सामना कर रही हैं तो आपको भी एक बार डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए। हो सकता है की आपको भी आसानी से गर्भधारण में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में नाख़ून बड़े रखने पर गर्भ को क्या नुकसान होता है

महिलाओं को सूंदर दिखने की चाहत हमेशा ही रहती है। इसीलिए महिलाएं अपनी ख़ूबसूरती का ध्यान अच्छे से रखती है। ऐसे ही हाथों की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए महिलाओं को लम्बे नाख़ून रखने का भी शौक होता है। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपका नाख़ून लम्बे रखने का शौक गर्भ में पल रहे बच्चे पर बुरा असर डाल सकता है। अब आप यह सोच रही होंगी की नाख़ून कैसे बच्चे को नुकसान पहुंचा सकते हैं? तो आइये अब आपके इसी सवाल का जवाब जानते हैं।

कैसे पहुंचाते हैं नाख़ून गर्भ को नुकसान?

हाथों की साफ सफाई का ध्यान न रखने पर नाख़ून में बेड बैक्टेरिया पनपने लगता है। फिर जब आप उन्ही नाखूनों से खाना कहती है तो यह बैक्टेरिया आपके हाथों से आपके मुँह में और खाने के साथ आपके शरीर में पहुँच जाता है। और और महिला के शरीर से ही अन्य पोषक तत्वों के साथ यह बैक्टेरिया जब यह शिशु तक पहुँचता है तो उसके बाद शिशु इससे प्रभावित होता है। और शिशु को दिक्कत होने का खतरा रहता है।

नाख़ून लम्बे रखने से शिशु को कौन से नुकसान होते हैं?

गर्भवती महिला यदि नाख़ून लम्बे रखती है तो इससे गर्भ में बच्चे को नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है। जिससे शिशु को दिक्कत महसूस हो सकती है जैसे की:

इन्फेक्शन का रहता है खतरा

नाख़ून में मौजूद बैक्टेरिया जब गर्भ में शिशु तक पहुँचता है तो इसके कारण शिशु को बेड बैक्टेरिया प्रभावित करता है। जिससे शिशु को इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।

वजन में कमी

शिशु यदि बैक्टेरियल इन्फेक्शन से ग्रसित हो जाता है तो इसके कारण जन्म के समय शिशु के विकास में कमी जैसी समस्या हो सकती है। साथ ही यदि महिला को इन्फेक्शन ज्यादा हो जाता है तो इसके कारण समय से पहले डिलीवरी होने के खतरा भी रहता है।

तो यह हैं कुछ हानिकारक प्रभाव जो गर्भ में पल रहे शिशु पर महिला के नाख़ून के बड़े होने के कारण पड़ते है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने नाखूनों को काटकर रखना चाहिए और हाथों की साफ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि माँ व् बच्चे दोनों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो।

प्रेगनेंसी में गुस्सा ज्यादा क्यों आता है?

गर्भावस्था के दौरान महिला शरीर में होने वाले बदलाव के साथ मूड में बदलाव होने की समस्या से भी परेशान हो सकती है। जैसे की कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान गुस्सा बहुत आता है। लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है की ऐसा हर गर्भवती महिला के साथ हो। क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपको भी गुस्सा अधिक आता है? यदि हाँ, तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भवती महिला को गुस्सा क्यों आता है, गुस्से आने के कारण महिला को क्या परेशानी होती है और बच्चे पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है उस बारे में बताने जा हैं।

प्रेगनेंसी में गुस्सा आने के कारण

गर्भवती महिला को गुस्सा आने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं। जिसकी वजह से गर्भवती महिला को गुस्सा आता है। जैसे की:

हार्मोनल बदलाव की वजह से

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं। और बॉडी में इन हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेग्नेंट महिला को मूड स्विंग्स की समस्या भी हो सकती है। और मूड स्विंग्स होने के कारण प्रेग्नेंट महिला को बहुत ज्यादा गुस्सा व् चिड़चिड़ाहट महसूस होती है। साथ ही कई बार तो प्रेग्नेंट महिला बिना किसी बात के भी गुस्सा करने लग जाती है।

प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानियों के कारण

गर्भावस्था के दौरान शारीरिक परेशानियों के बढ़ने के कारण प्रेग्नेंट महिला को बहुत ज्यादा दिक्कत होती है। ऐसे में शारीरिक परेशानियों के बढ़ने के कारण भी गर्भवती महिला को बहुत ज्यादा गुस्सा आ सकता है।

तनाव से ग्रसित होने के कारण

बहुत सी प्रेग्नेंट महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले शारीरिक व् मानसिक बदलाव के कारण तनाव में आ जाती है। और तनाव से ग्रसित होने के कारण प्रेग्नेंट महिला को कभी बहुत ज्यादा गुस्सा तो कभी बहुत ज्यादा ख़ुशी महसूस होती है।

गर्भावस्था में किसी चीज को लेकर डरने के कारण

गर्भ में बच्चे का विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं, जन्म के समय बच्चे को कोई दिक्कत तो नहीं होगी, डिलीवरी के समय कोई परेशानी तो नहीं होगी आदि। यह सभी सवाल प्रेग्नेंट महिला के मन में चलते रहते हैं। जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला डर जाती है। ऐसे में कई बार यह डर प्रेग्नेंट महिला के गुस्से के रूप में बाहर आता है।

घर का माहौल

यदि प्रेग्नेंट महिला के घर का माहौल सही नहीं है या महिला की अपने पार्टनर के साथ बहस होती है। तो इसके कारण भी गर्भवती महिला को गुस्सा आने की समस्या हो सकती है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए जरुरी है की आप अपने घर के माहौल को सही रखें।

क्या गुस्सा गर्भवती महिला के लिए नुकसानदायक होता है?

गर्भवती महिला को यदि गुस्सा आये और वो उसे जाहिर कर दे तो ऐसा करने से महिला हल्का महसूस करती है। लेकिन यदि महिला को गुस्सा हद से ज्यादा आये साथ ही महिला उस गुस्से को जाहिर करने की बजाय अपने मन में दबा ले। तो ऐसा करना प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत नुकसानदायक होता है। जिसके कारण महिला को को सिर दर्द, शरीर में दर्द, है ब्लड प्रैशर, पाचन क्रिया से जुडी समस्या का सामना महिला को करना पड़ सकता है। साथ ही प्रेगनेंसी में ज्यादा गुस्सा आना प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स को भी बढ़ा देता है।

गुस्सा आने के कारण बच्चे पर कोई असर पड़ता है?

गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे के बीच ऐसा सम्बन्ध होता है और वो आपस में ऐसे जुड़े होते हैं जिससे बच्चा अपनी माँ को होने वाले सभी परेशानियों का अनुभव, मन में चल रही बातों का अनुभव, माँ की आवाज़ व् हाथों के स्पर्श का अनुभव, खुशी और गुस्से को भी महसूस कर लेता है। साथ ही गर्भवती महिला के बहुत अधिक गुस्सा करने के कारण बच्चे को बहुत सी परेशानियां हो सकती हैं। जैसे की:

  • बच्चे के वजन में कमी।
  • समय से पहले बच्चे का जन्म।
  • बच्चे के मानसिक विकास में कमी।
  • शिशु को भविष्य में तनाव जैसी परेशानी का होना।

प्रेगनेंसी में गुस्से से बचने के टिप्स

  • अपने आहार का ध्यान रखें।
  • अपनी पसंद का काम करें।
  • व्यायाम, योगासन, मैडिटेशन करें।
  • अपनी पसंद के काम को करने का आनंद लें।
  • मालिश करवाएं।
  • यदि आपसे कोई बहस कर रहा है या जहां लड़ाई हो रही है उस जगह से दूरी बनाएं।
  • टीवी फ़ोन आदि में भी लड़ाई वाले कार्यक्रम न देखें।
  • अपने रूटीन का ध्यान रखें।
  • अपने मन में आ रही बातों को शेयर करें।
  • गुस्से से बचने के लिए भरपूर आराम करें।
  • मन में गलत विचारों को न लाएं।
  • यदि आपको बहुत ज्यादा गुस्सा व् चिड़चिड़ापन होता है तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से बात करें।

ऐसे में यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको जितना हो सके प्रेगनेंसी में पॉजिटिव रहने की कोशिश करनी चाहिए। ताकि आपको व् आपके बच्चे को गुस्से के कारण होने वाले परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

गर्मियों में नारियल पानी पीने के फायदे गर्भावस्था में

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गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए और इसके लिए केवल पानी ही नहीं बल्कि अन्य तरल पदार्थ जैसे की फलों का रस, निम्बू पानी, नारियल पानी आदि का सेवन करना उत्तम रहता है। तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी में नारियल पानी का सेवन करने के कुछ बेहतरीन फायदे बताने जा रहे हैं, जो केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते है। नारियल पानी पोषक तत्वों से भरपूर होता है, यह प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के साथ महिला को एनर्जी से भरपूर रखने और प्रेगनेंसी में होने वाली बहुत सी परेशानियों से बचाव करने में मदद करता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में नारियल पानी पीने से कौन से फायदे मिलते हैं।

बॉडी को जरुरी इलेक्ट्रोलाइट्स देता है

प्रेगनेंसी के दौरान इलेक्ट्रोलाइट्स की जरुरत बॉडी को ज्यादा होती है क्योंकि मॉर्निंग सिकनेस, उल्टी, मतली, आदि की समस्या महिला को होती है। और नारियल पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे खनिज, सोडियम, कैल्शियम, पोटेशियम और फास्फोरस, आदि भरपूर होते हैं जो बॉडी को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करते हैं, इन परेशानियों से रहत दिलाने में मदद करते हैं। साथ ही इनसे मांसपेशियों को भी आराम मिलता है, शरीर के पीएच स्तर को बनाए रखने और ब्लड प्रैशर को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं।

ठंडक का अहसास

नारियल पानी ठंडा होता है जिसे पीने के बाद गर्मी से राहत मिलती है, ऐसे में गर्मियों के यह गर्भवती महिला को ठंडक पहुंचाने के साथ बॉडी को डिहाइड्रेशन की समस्या से सुरक्षित रखने में भी मदद करता है।

संक्रमण से बचाव

नारियल पानी विटामिन, खनिज, मिनरल्स, एंटीऑक्सिडेंट आदि से भरपूर होता है जो की प्रतरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं और हानिकारक बैक्टीरिया के कारण होने वाले इन्फेक्शन, फ्लू, एचआईवी जैसे संक्रमणों से बचाव करता है, और बॉडी में गुड़ बैक्टेरिया को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने में मदद मिलती है। और नारियल पानी का सेवन करने से बॉडी में मौजूद सभी टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं जिससे यूरिन इन्फेक्शन जैसी समस्या से भी प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहने में मदद मिलती है।

दिल के लिए है बेहतर

नारियल पानी पीने से पोटेशियम, मैग्नीशियम, लॉरिक एसिड जैसे पोषक तत्व बॉडी को मिलते हैं, जो की ब्लड प्रैशर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। साथ ही यह बॉडी में गुड़ कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं और ब्लड फ्लो को बेहतर करने में मदद करता है। नियमीय गर्भवती महिला यदि एक गिलास नारियल पानी का सेवन करती है तो इससे तनाव कम होता है, रक्तचाप सुधरता है जिससे हार्ट को हेल्दी रहने में मदद मिलती है।

वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है

प्रेगनेंसी के दौरान वजन का बढ़ना सामान्य बात होती है लेकिन आवश्यकता से अधिक वजन का बढ़ना गर्भवती महिला की परेशानी को बढ़ा सकता है। और नारियल पानी में फैट और कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है, को प्रेगनेंसी के समय पोषक तत्व बॉडी को भरपूर देने के साथ वजन को नियंत्रित रखने में मदद करता है।

कब्ज से निजात

प्रेगनेंसी में बॉडी में हार्मोनल परिवर्तन के कारण कब्ज और अपच जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में नारियल पानी जो की फाइबर से भरपूर होता है उसका सेवन करने से पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद है, पाचन को बढ़ावा मिलता है, पीएच स्तर को नियंत्रित रखने में मदद मिलने के साथ कब्ज़ जैसी समस्या से राहत मिलती है। साथ ही इसके सेवन से बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद मिलती है।

गेस्टेशनल डाइबिटीज़ के खतरे को कम करता है

गर्भावस्था के दौरान रक्त में ग्लूकोस की मात्रा बढ़ने के कारण गेस्टेशनल डाइबिटीज़ का खतरा बना रहता है। ऐसे में नारियल पानी का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है, क्योंकि यह ब्लड में ग्लूकोज़ के लेवल को मेन्टेन रखने में मदद करता है।

शिशु का विकास होता है बेहतर

नारियल पानी में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं और यदि गर्भवती महिला इसका सेवन करती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं। जिससे गर्भ में शिशु तक भी बेहतर पोषण पहुँचाने में मदद मिलती है और शिशु का शारीरिक विकास बेहतर तरीके से होता है।

एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रखता है

गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा का सही होना बहुत जरुरी होता है और नारियल पानी का सेवन करने से एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को पर्याप्त बनाए रखने के साथ बॉडी में रक्त की मात्रा और ब्लड फ्लो को बेहतर रखने में मदद मिलती है।

एनर्जी ड्रिंक

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान थकावट, कमजोरी का अहसास होना आम बात होती है। ऐसे में नारियल पानी गर्भवती महिला के लिए एनर्जी ड्रिंक का काम करती है। क्योंकि यह बॉडी में पानी की कमी को पूरा करने के साह मांसपेशियों को आराम पहुंचाने में मदद करती है जिससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेगनेंसी के दौरान नारियल पानी का सेवन करने से मिलते है। ऐसे में गर्भवती महिला को नारियल पानी का सेवन जरूर करना चाहिए। और नारियल पानी का सेवन करने से सबसे सही समय सुबह का होता है, क्योंकि इस दौरान आपका पेट खाली होता है, तो इलेक्ट्रोलाइट्स और पोषक तत्व आसानी से अवशोषित हो सकते हैं। वैसे आपका जब मन चाहे आप तभी नारियल पानी का सेवन कर सकते है, और गर्मियों में तो दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करना चाहिए।

कैस्टर आयल के फायदे

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कैस्टर आयल यानी अरंडी का तेल, यह अरंडी के पौधे के बीज से निकलता है। कैस्टर का पौधा भारत और अफ्रीका के ही कुछ जंगलों में मिलता है। कैस्टर आयल का रंग हल्का सुनहरे रंग का होता है।

पुराने समय से ही कैस्टर आयल को दवाइयों और स्किन केयर प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल किया जाता है। कैस्टर आयल को दालों को प्रिज़र्व करने के लिए भी युस किया जाता है। कैस्टर आयल से बहुत सारे लाभ मिलते है।

कैस्टर आयल के फायदे

अरंडी के तेल को त्वचा और बालों को सुंदर बनाए के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। आइये जानते है के अरंडी के तेल से क्या क्या फायदे मिलते है।

 बालों के लिए लाभकारी:

  • कैस्टर आयल को बालों के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है।
  • अरंडी के तेल को जड़ो में लगाने से त्वचा का पी एच बैलेंस होता है जिससे रुसी यानि डैंड्रफ खत्म होता है।
  • कैस्टर आयल का प्रयोग बालों को झड़ने से भी रोकता है।
  • यदि आपके बाल झड़ते हो तो अरंडी के तेल का इस्तेमाल जरूर करें।
  • कैस्टर आयल विटामिन इ से भरपूर होता है, इसके तेल की बालों में मसाज करने से बालों की खोई हुई चमक वापस आती है।
  • अरंडी के तेल की मसाज करने से बाल लम्बे और घने भी होते है।
  • प्रदूषण के कारण यदि आपके बालों में कोई समस्या हो तो कैस्टर आयल का इस्तेमाल करें।
  • कैस्टर आयल बहुत सारी हेयर मेडिसिन्स में भी इस्तेमाल किया जाता है।
  • इसमें हेयर कंडीशनर के गुण भी शामिल होते है।
  • यह आपको बालों को मुलायम भी बनता है।
  • कैस्टर आयल के इस्तेमाल से बालों का सफेद होना भी रुक जाता है।
  • बालों के प्राकृतिक रंग को बचाये रखने में यह आपकी मदद करता है।

त्वचा के लिए गुणकारी औषधि:

  • रूखी त्वचा के लिए अरंडी का तेल एक रामबाण के रूप में काम करता है।
  • यह तेल त्वचा को मॉइस्चराइज़ कर उसे मुलायम बनाता है।
  • इसके प्रयोग से आपके स्किन की नमी बनी रहती है।
  • जिन लोगों के बहुत ज्यादा मस्सें और तिल है वह अरंडी के तेल का इस्तेमाल जरूर करें।
  • इसके इस्तेमाल से कुछ ही महीनों में तिल और मस्सें बिलकुल साफ़ हो जायेंगे।
  • कई लोगों को ऑयली स्किन और मुहांसो का सामना करना पड़ता है।
  • ऑयली स्किन वालों को किसी भी तेल का इस्तेमाल की मनाही होती है।
  • पर अरंडी का तेल ऑयली स्किन वालों के लिए भी बहुत लाभकारी है।
  • इसका इतेमाल से त्वचा के सभी मुहांसे दूर हो जायेंगे।
  • कैस्टर आयल में एंटी एजिंग तत्व भरपूर मात्रा में होते है।
  • अरंडी के तेल का नियमित इस्तेमाल आपके चेहरे से बढ़ती उम्र की निशान और झुर्रियां खत्म करता है।
  • यह आपकी त्वचा को हाइड्रेट करके सॉफ्ट और जवां बनाता है।
  • कैस्टर आयल की रोजाना मालिश करने से स्ट्रेच मार्क्स खत्म हो जाते है।
  • अरंडी का तेल फैटी एसिड तत्वों से भरपूर होता है।
  • इसका नियमित इस्तेमाल आपके चेहरे के सभी दाग धब्बों को साफ़ करता है।
  • आँखों की निचे डार्क सर्कल्स होने पर भी कैस्टर आयल का इस्तेमाल करें।
  • कैस्टर आयल की मालिश डार्क सर्कल्स को जड़ से खत्म करता है।
  • फटे होंठो के लिए भी कैस्टर आयल बहुत ही फायदेमंद है।
  • कैस्टर आयल फटे होंठो को ठीक करने के साथ उनकी गुलाबी रंगत भी लाने के काम आता है।

सेहतमंद रहने के लिए अरंडी का तेल:

  • कैस्टर आयल एंटी इन्फ्लामेट्री और एंटी बैक्टीरियल के गुणों से भरपूर है।
  • इसका इस्तेमाल अच्छे सेहत और स्वस्थ रहने के लिए भी किया जाता है।
  • कब्ज जैसी समस्या को कैस्टर आयल ठीक करने के काम आता है।
  • जिन लोगों को गठियाँ का रोग हो वह इसकी नियमित मालिश जरूर करवाए।
  • कैस्टर आयल दर्द को खींचने के काम भी आता है।
  • अरंडी का तेल पैरो और हाथों की सूजन भी कम करता है।
  • इसमें एंटीसेप्टिक के गुण भी होते है।
  • यह किसी घाव, चोट या खरोच को भरने के काम भी आता है।
  • एक रिसर्च के अनुसार बहुत सी एंटीसेप्टिक क्रीम में कैस्टर आयल का प्रयोग किया जाता है।
  • कैस्टर आयल को नारियल तेल की दुगनी मात्रा में मिलाकर दाद पर लगाने से उसका इलाज होता है।
  • नेचुरोपैथी के अनुसार कैस्टर आयल इम्युनिटी बढ़ाने में भी मददगार होता है।
  • कैस्टर आयल विटामिन इ और फैटी एसिड होते है जो आँखों की गन्दगी साफ़ करने के लिए लाभकारी होते है।
  • डेंटिस्ट के अनुसार अरंडी का तेल मुँह के बैक्टीरिया और दुर्गंध दूर करने के काम आता है।
  • इस तेल की मालिश कमर दर्द में भी आराम दिलाती है।

दाढ़ी बढ़ाने के लिए:

  • जिन लोगों की दाढ़ी कम आती या नहीं आती है वह कैस्टर आयल को प्रयोग करें।
  • कैस्टर आयल को जैतून और बादाम के तेल के साथ मिलाकर दाढ़ी पर लगाने से हेयर ग्रोथ अच्छी होगी।

देखा आपने कैस्टर आयल के कितने फायदे है और साथ यह बहुत महंगा भी नहीं है। आसानी से आपको किसी भी मेडिकल स्टोर पर मिल जाएगा।

क्या आपको नींद नहीं आती है? करें ये उपाय

क्या आप रात को नींद न आने की समस्या से परेशान हैं? एक बार सोने के बाद जब आपकी नींद खुलती है तो दुबारा सोने में आपको परेशानी होती है? यदि हाँ तो यह भी एक समस्या ही है, क्योंकि अपने शरीर को हष्ट पुष्ट रखने के लिए जितना आपका खान पान जरुरी है, उतनी ही आपकी नींद भी, व्यक्ति को स्वस्थ व् ऊर्जा से भरपूर रहने के लिए दिन में कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए, कहते है की जब आप कड़ी मेहनत करते हैं तो आपको बहुत अच्छी नींद आती है, लेकिन आज कल पूरा दिन भागदौड़ करने के बाद भी रात को अच्छे से नींद आना मुश्किल होता है, इसका कारण आपकी तनावपूर्ण जिंदगी और बदलती जीवनशैली है, यदि आप भरपूर नींद नहीं लेते है तो इसका असर शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी आपकी सेहत पर पड़ता है, तो आइये आज हम आपकी इस समस्या का समाधान करके बेहतर नींद लेने के लिए आपको कुछ टिप्स बताने जा रहें है।

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नींद न आने के कारण:-

  • व्यक्ति के तनाव में होने के कारण ये समस्या हो सकती है।
  • नशीले पदार्थ जैसे शराब, सिगरेट, तम्बाकू का अधिक सेवन भी आपकी नींद पर बुरा प्रभाव डालता है।
  • सोने से पहले कैफीन का सेवन करना।
  • टीवी या लैपटॉप के आगे बैठे रहने के कारण।
  • इनसोम्निया यह नींद न आने की बिमारी होती है, इसके कारण भी आपको ये समस्या हो सकती है।
  • वजन का अधिक होना भी अनिंद्रा का कारण होता है।

सोने का समय बनाएं:-

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नींद न आने का सबसे बड़ा कारण होता है की आपका नियमित एक ही समय से नहीं सोते है, जिसके कारण आप यदि लेते सोते हैं तो भी आपको नींद आने में परेशानी होती है, साथ ही जल्दी सोने पर भी ऐसा ही होता है, चाहे आप दिन में कितने ही व्यस्त थे लेकिन अपने सोने के समय को न बदलें, यदि आप नियमित समय से सोते हैं तो आपकी नींद का चक्र संतुलित हो जाता है, जिसके कारण आपको नींद न आने की समस्या से छुटकारा मिलता है।

चाय कॉफ़ी का सेवन न करें:-

कई लोगो की आदत होती है की सोने से पहले चाय या कॉफ़ी का सेवन करते हैं जिसके कारण उन्हें परेशानी होती है, इसलिए यदि बेहतर नींद लेनी है तो आपको अपनी इस आदत को बदलना चाहिए हां यदि आप चाहे तो एक गिलास गरम दूध का सेवन रात को सोने से आधे घंटे पहले कर सकते है, इससे आपको बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।

टीवी लैपटॉप से रखें दूरी:-

रात को देर तक टीवी देखने की आदत के कारण भी आपको नींद से जुडी समस्या हो सकती है, साथ ही यदि आपको लैपटॉप से जुड़ा कोई काम है तो उसे रात की जगह आपको सुबह समय से उठकर करना चाहिए इससे आपकी नींद भी पूरी हो जाती है, साथ ही सुबह आपका माइंड फ्रेश होता है जिससे आपको अपने काम को बेहतर तरीके से करने में मदद मिलती है।

इन्हें भी पढ़ें:- अच्छी और गहरी नींद के लिए ये करना बहुत जरुरी है!

बैडरूम को साफ सुथरा रखें:-

मन की शान्ति और बेहतर नींद के लिए जरुरी होता है की आप अपने सोने के स्थान को बिलकुल साफ़ रखें, क्योंकि सोने के लिए यदि आरामदायक जगह होती है, साथ ही स्वच्छ कमरा आपके मन को भी शांत रखने में मदद करता है, जिससे आपको बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।

अपने तलवो की मसाज करें:-

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काम से आने के बाद अच्छे से अपने हाथों पैरों को पानी से साफ़ करके भोजन का सेवन करें, और उसके बाद अच्छे से अपने तलवो की मसाज करें, इसे आपकी बॉडी में रक्त प्रवाह अच्छे से होता है, साथ ही आपकी थकान को भी दूर करने में मदद मिलती है, जिससे आपको बेहतर नींद आती है, इसके लिए आप किसी भी तेल का इस्तेमाल कर सकते है।

अधिक तेलीय व् मसालेदार भोजन का सेवन न करें:-

बेहतर नींद के लिए आपको रात को सोते समय संतुलित व् हलके भोजन का सेवन करना चाहिए, जिसे आपको पचाने में आसानी हो, यदि आप रात को अधिक मसालें वाला और तेलीय भोजन का सेवन करते हैं तो ऐसा करने से आपको भोजन को पचाने में मुश्किल होती है, साथ ही पेट में गैस और एसिडिटी की समस्या भी हो जाती है, जिससे आपको ढंग से नींद नहीं आती है।

व्यायाम व् योगासन करें:-

यदि आप नियमित सुबह उठकर आधा घंटे व्यायाम और योग करते हैं तो ऐसा करने से आपको पूरा दिन फ्रेश रहने में मदद मिलती है, साथ ही इसका असर आपकी नींद पर भी पड़ता है, जिससे आपको अच्छी और बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है, और हो सकें तो रात को भी सोने से पहले आपको थोड़ी सेर वॉक करनी चाहिए इससे भी आपको नींद बेहतर लेने में मदद मिलती है।

शराब के सेवन से बचें:-

रात को सोने से पहले यदि आप अधिक शराब का सेवन करते हैं तो ऐसा करने से भी आपकी नींद पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि इससे आपके रूटीन पर बुरा प्रभाव पड़ने के साथ आपकी सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण आपको अनिंद्र की समस्या हो सकती है, इसीलिए जितना हो सकें इससे बचें, साथ ही ने प्रकार के नशे जैसे धुम्रपान, तंबाकू आदि के सेवन से भी आपको परहेज रखना चाहिए।

अपने वजन को नियंत्रित रखें:-

अधिक वजन भी आपके लिए अनिंद्रा का कारण बढ़ सकता है, क्योंकि मोटापा आने के कारण आपके शरीर में और भी बहुत सी बीमारियाँ भी आ जाती है, जिनका आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, और आपकी अनिंद्रा की समस्या का कारण भी बन सकता है, इसीलिए इससे बचने के लिए जितना हो सकें अपने वजन को कण्ट्रोल में रखना चाहिए।

तो ये हैं कुछ टिप्स जिन्हे यदि आप अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं तो ऐसा करने से आपको अच्छी और बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है, साथ ही आप शारीरिक और मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहते हैं।

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जल्दी माँ बनना है तो ये जरूर पढ़ें!

गर्भधारण नहीं होने के क्या कारण होते हैं, माँ बनने के लिए क्या करें, प्रेग्नेंसी में दिक्क्त क्यों आती है, गर्भधारण करने के उपाय, Maa banne ke liye kya kare, Pregnant hone ke upay, Pregnancy me deri, जल्दी प्रेग्नेंट होने के लिए क्या करें, गर्भवती होने के उपाय, गर्भधारण के लिए क्या करना चाहिए?


शीघ्र गर्भवती होने के लिए क्या करें?

गर्भवती होना हर महिला का सपना होता है। हर कोई चाहती हैं की वो भी माँ बनें गर्भावस्था के पलों को महसूस करें। लेकिन कई महिलाओं को बेबी होने में काफी समय लग जाता है। कई बार ट्राई करने के बाद भी वो माँ नहीं बन पाती हैं। क्या कारण होता है कर गर्भधारण में देरी क्यों होती है आज हम वही बता रहे हैं।

गर्भधारण में देरी होने के कई कारण होते हैं। कुछ तो शारीरिक परेशानियां होती है और कुछ अपनी गलतियां होती हैं। पर अगर सही तरीके से प्लानिंग की जाए तो बेबी होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। बेबी होने की सही उम्र 22 से 33 साल तक होती है, यह पहला फेज होता है। फिर दूसरा फेज आता है 33 से 38 साल तक और तीसरा फेज 39 से 44 साल तक होता है।

22 साल से 33 साल तक बेबी होने में कोई परेशानी नहीं होती है। यानी अगर किसी की शादी तीस में भी हो रही है तो भी बेबी होने में कोई दिक्क्त नहीं है। पर कुछ लोग बेबी प्लानिंग को लेकर डिले करते हैं। ज्यादा डिले होने के बाद परेशानियां आने लगती हैं। 22 साल से 33 साल के बीच नार्मल तरीके से कंसीव हो जाता है। अगर उम्र इससे ज्यादा है और बेबी नहीं हो रहा है तो डॉक्टर की मदद लें।

कंसीव होने में समस्याएं क्यों आती हैं?

बाकी समस्यायों के साथ-साथ उम्र बढ़ने के कारण भी कई सारी समस्याएं आ जाती हैं। जैसे – अंडे का कम बनना, अंडे का हेल्दी नहीं होना, ट्यूब में कोई दिक्क्त होना, पुरुष के शुक्राणु का स्वस्थ नहीं होना, अगर ये सारी समस्याएं हैं तो गर्भधारण में दिक्क्त होती है।

दूसरा कारण होता है सही समय पर संबंध नहीं बनाना। गर्भधारण के लिए सही समय पर संबंध बनाना बहुत जरुरी है। क्यूंकि अगर अंडे का शुक्राणु से निषेचन नहीं होगा तो गर्भधारण में दिक्क्त आएगी। महिला का जब फर्टाइल पीरियड होता है उस समय अगर संबंध बनाया जाए तो गर्भधारण के चांसेस बढ़ जाते हैं।

गर्भधारण का सही समय कब होता है?

महिला का ओवुलेशन पीरियड जिसको फर्टाइल पीरियड भी कहते हैं, गर्भधारण के लिए महिला और पुरुष को उस समय संबंध बनाना चाहिए। ओवुलेशन पीरियड मेंस शुरू होने की तारीख से 14 दिन से 18 दिन के बीच होता है। अगर ये 14 से 18 दिन के बीच संबंध बनाया जाए तो गर्भधारण के अस्सी परसेंट चांस होते हैं। आप इस डेट को दो दिन आगे-पीछे कर सकती हैं। क्यूंकि सबका मासिक चक्र एक जैसा नहीं होता।

गर्भधारण करने के लिए क्या करें?

गर्भधारण के लिए जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है वो आपका शरीर और खान-पान है। अगर आप हेल्दी है, कोई बीमारी नहीं है, कमजोरी नहीं है, खून की कमी नहीं है, और चिंता नहीं करती हैं तो गर्भधारण में कोई परेशानी नहीं होगी। अगर आप इन समस्यायों से जूझ रही हैं खान पान ठीक नहीं है दिनभर चिंता करती हैं, किसी बीमारी से ग्रसित हैं, आपकी दिनचर्या सही नहीं है, आप पति-पत्नी समय पर संबंध नहीं बनाते हैं या बहुत ज्यादा गैप होता है तो गर्भधारण में समस्या हो सकती है।

आप समझ गयी होंगी की क्या वजह होती है गर्भधारण नहीं होने की। अगर आप माँ बनना चाह रही हैं तो यहाँ बताई गयी बातों का ध्यान रखें। डॉक्टर से मिलें, और चेकअप करवाती रहें क्यूंकि कई बार छोटी-मोटी कमियो की वजह से भी माँ बनने में देरी हो जाती है।

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माँ बनना चाहती हैं तो ये करें

फ़ूड जो तुरंत गर्भ में बेबी को नुकसान पहुंचाता है

प्रेगनेंसी के दौरान सभी महिलाएं उस आहार को खाना पसंद करती है जिससे शिशु को फायदा पहुँचता है। क्योंकि हर माँ के लिए उसके शिशु का विकास सबसे पहले होता है। और गर्भवती महिला उन चीजों से दूरी बना लेती है जो गर्भ में शिशु को नुकसान पहुंचाती है। फिर चाहे वो खाद्य पदार्थ महिला के पसंदीदा ही क्यों न हो। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे ही खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन गर्भवती महिला को बिल्कुल नहीं करना चाहिए। क्योंकि उनका सेवन करने से गर्भ में बच्चे को तुरंत नुकसान पहुँचता है।

कच्चा पपीता

कच्चे पपीते में लेटेक्स की मात्रा मात्रा मौजूद होती है जो की गर्भ में पल रहे शिशु पर बहुत बुरा असर डालती है। यहना तक की कच्चा पपीता खाने या इसके जूस का सेवन करने से गर्भपात भी हो जाता है।

अनानास

अनानास का सेवन करने की भी प्रेगनेंसी के दौरान मनाही होती है क्योंकि अनानास में मौजूद तत्व गर्भ पर बहुत बुरा असर डालते हैं। और अनानास का सेवन करने के कारण महिला का गर्भपात तक हो जाता है।

सी फ़ूड

सी फ़ूड खासकर जिनमे मर्करी की मात्रा अधिक होती है उन चीजों का सेवन करने से भी बच्चे को नुकसान पहुँचता है। जिसके कारण शिशु के शारीरिक विकास में कमी आने के साथ गर्भपात, समय से पहले बच्चे के जन्म जैसी परेशानियां हो जाती है।

अंकुरित चीजें

हानिकारक बैक्टेरिया की मौजूदगी होने के कारण अंकुरित चीजों का सेवन करने के कारण भी बच्चे के विकास में कमी आ जाती है। क्योंकि हानिकारक बैक्टेरिया शिशु के संपर्क में आने के बाद शिशु के विकास में बाधा पैदा करता है।

कच्चा दूध व् उससे बनी चीजें

गर्भवती महिला यदि कच्चे दूध या कच्चे दूध से बनी चीजें जैसे की पनीर आदि का सेवन करती है तो इसके कारण गर्भ में बच्चे पर बहुत बुरा असर पड़ता है। क्योंकि कच्चे दूध में हानिकारक बैक्टेरिया मौजूद होता है जो शिशु के मानसिक व् शारीरिक विकास में कमी पैदा करता है।

जंक फ़ूड

बाहर का खाना, चाऊमीन, पिज़्ज़ा, बर्गर, आदि का सेवन करने की भी गर्भवती महिला को मनाही होती है। क्योंकि इन चीजों में पोषक तत्वों की कमी होती है साथ ही इन्हे बनाने में कुछ ऐसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है जो गर्भ में शिशु के विकास को रोक सकती है।

कैफीन

चाय, कॉफ़ी, काली चाय, ग्रीन टी आदि का अधिक मात्रा में सेवन भी शिशु के विकास बहुत बुरा असर डालता है। और कैफीन का अधिक सेवन करने से बच्चे के शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक विकास में भी कमी आती है।

नशीले पदार्थ

नशीले पदार्थ जैसे की धूम्रपान, अल्कोहल आदि का सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो इसका बुरा असर गर्भनाल के रास्ते शिशु पर पड़ता है। जिसकी वजह से शिशु के वजन में कमी, समय से पहले बच्चे का जन्म, शिशु के दिमाग में कमी जैसी दिक्कतें हो जाती है।

दवाइयों का सेवन

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला डॉक्टर से बिना पूछे किसी भी दवाई का सेवन करती है तो उस दवाई का बुरा असर भी शिशु पर पड़ता है। जिसकी वजह से शिशु को दिक्कत होती है।

बिना धुले फल व् सब्जियां

प्रेग्नेंट महिला को बिना धुले फल व् सब्जियों का सेवन भी नहीं नहीं करना चाहिए। क्योंकि बिना धुले फल व् सब्जियों पर हानिकारक बैक्टेरिया मौजूद होता है। जो गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है इसके अलावा बहुत देर से कटा रखा हुआ सलाद या फलों का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि उसके कारण भी शिशु को नुकसान पहुँचता है।

कच्चा अंडा व् कच्चा मास

कच्चे अंडे या कच्चे मास का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें साल्मोनेला, लिस्टेरिया जैसे हानिकारक बैक्टेरिया मौजूद होते हैं। जो गर्भनाल के माध्यम से शिशु तक पहुंचकर शिशु को नुकसान पहुंचाते हैं।

डिब्बाबंद आहार

प्रेग्नेंट महिला को डिब्बाबंद आहार चाहे वो जूस हो या कोई खाद्य पदार्थ उसका सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि ज्यादा दिनों तक उन चीजों की क़्वालिटी को बेहतर रखने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। और यह केमिकल गर्भ में शिशु पर बहुत बुरा असर डाल सकता है।

करेले के बीज

गर्भावस्था के दौरान करेले का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन गर्भवती महिला को करेले का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की गर्भवती महिला करेले के बीज या कड़वे करेले का सेवन न करें क्योंकि इसका सेवन करने से गर्भ में शिशु पर बुरा असर पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिनका सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो उसका सेवन करने से गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुँचता है। ऐसे में गर्भवती महिला को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह का नुकसान न हो।

प्रेगनेंसी में घबराहट होने के कारण और उपाय

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को शरीर में बहुत से अलग अलग लक्षण महसूस होते हैं। जिनमे से गर्भवती महिला को घबराहट महसूस होना, दिल बेचैन होना आम बात होती है। लेकिन घबराहट महसूस होना केवल प्रेगनेंसी का एक लक्षण ही नहीं है बल्कि कुछ केस में यह परेशानी का कारण भी बन जाता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में घबराहट होने के कारण व् घबराहट से बचने के कुछ आसान उपाय बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में घबराहट महसूस होने के कारण

हार्मोनल बदलाव: प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं जिसकी वजह से मस्तिष्क की क्रियाएं भी प्रभावित होती है। और मस्तिष्क की क्रियाओं के प्रभावित होने के कारण महिला को घबराहट महसूस होती है।

भावनाओं के कारण: गर्भावस्था महिला के लिए एक बेहतरीन अनुभव होता है लेकिन गर्भ में शिशु के विकास को लेकर अधिकतर सभी गर्भवती महिला बहुत ज्यादा परेशान हो सकती है या डर सकती है। और पहली बार माँ बन रही महिलाएं इसका ज्यादा अनुभव कर सकती है। ऐसे में ज्यादा परेशान होने के कारण डर के कारण भी महिला को घबराहट महसूस होती है।

तनाव के कारण: जो गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान तनाव से ग्रसित होती है उन महिलाओं को भी घबराहट अधिक महसूस होती है।

लौ ब्लड प्रैशर: प्रेगनेंसी के दौरान जिन महिलाओं को लौ ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या होती है उन महिलाओं को भी यह परेशानी होती है।

थकावट होने के कारण: गर्भवती महिला यदि जरुरत से ज्यादा काम करती है या बहुत तेजी से काम करती है। तो इसके कारण महिला को ज्यादा थकावट महसूस होती है और ज्यादा थकने के कारण महिला को घबराहट महसूस होती है।

सांस फूलने के कारण: गर्भावस्था के दौरान अधिकतर महिलाएं साँस फूलने जैसी परेशानी का सामना करती है। और साँस फूलने के कारण भी महिला को घबराहट महसूस होती है।

दवाइयों का सेवन: प्रेगनेंसी के दौरान यदि किसी वजह से गर्भवती महिला को दवाइयों का अधिक सेवन करना पड़ता है तो इस कारण भी महिला को अधिक घबराहट महसूस हो सकती है।

गर्भावस्था में घबराहट दूर करने के टिप्स

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला घबराहट की समस्या से परेशान है तो कुछ आसान टिप्स का ध्यान रखकर गर्भवती महिला इस समस्या से निजात पा सकती है। तो आइये अब जानते हैं वो टिप्स कौन से हैं:

मैडिटेशन या योगासन

मैडिटेशन करने से शांत रहने में मदद मिलती है, आपका मस्तिष्क अच्छे से काम करता है, तनाव दूर होता है, आदि। ऐसे में गर्भवती महिला यदि मैडिटेशन करती है तो महिला को यह सभी फायदे मिलते हैं जिससे घबराहट दूर होती है। मैडिटेशन के साथ योगासन करने से भी आपको और आपके मस्तिष्क को रिलैक्स रहने में मदद मिलती है। ऐसे गर्भवती महिला को घबराहट को दूर करने के लिए मैडिटेशन या योगासन जरूर करना चाहिए।

काम करते समय ध्यान रखें

घबराहट के एक कारण आपके शरीर का ज्यादा थका हुआ होना भी होता है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात पाने के लिए इस बता का ध्यान रखना है की महिला अपने शरीर को जरुरत से ज्यादा न थकाएं। जो भी काम करे महिला आराम से करें, यदि किसी काम को करने में महिला को थकावट महसूस हो रही है तो थोड़ा आराम करें फिर अपना काम करें, ऐसा करने से महिला को थकावट नहीं होगी। जिससे घबराहट जैसी परेशानी से बचे रहने में महिला को मदद मिलेगी।

ज्यादा नहीं सोचें

प्रेगनेंसी के दौरान बच्चे की केयर के लिए सोचना अच्छी बात होती है। लेकिन बच्चे के विकास को लेकर, शारीरिक परेशानियों के बारे में सोच सोच कर, नेगेटिव बातों को सोचकर, आप अपनी मुश्किलों को खुद ही बढ़ा लेती है। जिससे आपको अधिक घबराहट होती है ऐसे में इस परेशानी से निजात पाने के लिए आपको प्रेगनेंसी में सकारात्मक रहना चाहिए और अपने आप को स्वस्थ रखना चाहिए।

पौष्टिक आहार लें

गर्भवती महिला अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखें। पौष्टिक व् पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करें। ऐसा करने से आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी। और जितना आप स्वस्थ रहेंगी उतना ही प्रेगनेंसी के दौरान आपकी दिक्कतों को कम करने में मदद मिलेगी।

हाइड्रेट रहें

घबराहट को दूर करने के लिए गर्भवती महिला पानी का भरपूर सेवन करें। क्योंकि पानी का भरपूर सेवन करने से व् अन्य तरल पदार्थों का सेवन भरपूर मात्रा में करने से गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है। जिससे घबराहट को दूर करने में मदद मिलती है।

नींद ले भरपूर

प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों के कारण या वैसे किसी अन्य कारण की वजह से गर्भवती महिला यदि भरपूर आराम नहीं करती है नींद पूरी नहीं लेती है। तो इसकी वजह से भी महिला को घबराहट महसूस होती है। ऐसे में घबराहट को दूर करने के लिए प्रेग्नेंट महिला को अपनी नींद पूरी लेनी चाहिए।

अकेली न रहें

कुछ गर्भवती महिलाएं अकेली रहती है और अकेलापन उनकी घबराहट की समस्या को बढ़ा देता हैं। क्योंकि अकेले रहने के कारण दिमाग में सौ तरह के विचार आते हैं। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान घबराहट से बचने के लिए अकेले न रहे बल्कि अपना यह खूबसूरत समय अपने परिवार के साथ बिताएं।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान घबराहट महसूस होने के कारण व् इस परेशानी से बचने के कुछ आसान टिप्स, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपको भी यह दिक्कत है। तो आपको भी इन टिप्स का ध्यान रखना है ताकि आपको इस परेशानी से बचे रहने और अपनी प्रेगनेंसी को अच्छे से एन्जॉय करने में मदद मिल सके। इसके अलावा घबराहट की समस्या अधिक होने पर डॉक्टर से मिलें।

मुंह में बार-बार पानी आने की समस्या

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कई लोगों को सोते समय मुंह से लार आती है। ऐसा हर किसी के साथ नहीं होता। बच्चों में इसका होना आम है लेकिन अगर ये समस्या बड़ों में हो तो हो सकता है ये किसी गंभीर बिमारी का संकेत हो। सोते हुए मुंह से लार निकलना आम बात है लेकिन हर समय लार बनना किसी परेशानी से कम नहीं है।

दरअसल हमारे शरीर में लार बनाने वाले कुछ ग्लैंड होते है जो जागने की चलने में रात को सोते समय अधिक सक्रीय होते है। इसीलिए सोते समय लार का सबसे अधिक निर्माण होता है। आपके मन में यह प्रश्न अवश्य उठ रहा होगा की जागते हुए ऐसा क्यों नहीं होता। जिसका कारण है की जब जागते हुए आपके मुंह में लार बनती है तो आप उसे निगल लेते है। लेकिन रात के समय आप निंद्रा अवस्था में होते है जिसके कारण लार बहने लगती है।

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लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है की लार तभी निकलती है जब आप करवट लेकर सोते है। पीठ के बल लेटने से लार कभी नहीं निकलती। लेकिन कर बार इसकी वजह से बहुत सी समस्यायों और शर्म का सामना करना पड़ता है। तो अगर आपके मुंह में भी बार बार पानी (लार) आता है तो आज हम आपको कुछ घरेलू उपाय बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप इस समस्या से निजात पा सकेंगे।

मुंह में बार-बार पानी आने के कारण :-

शरीर में लार बनाने के लिए कुछ विशेष ग्लांड्स होते है तो जागते समय की तुलना में रात को सोते समय अधिक सक्रिय होते है। लार बहने और मुंह में बार बार पानी आने के कई कारण हो सकते है जैसे –

  • कुछ खाने पीने की चीजों से होने वाली एलर्जी।
  • रात तो सोते समय मुंह से साँस लेना।
  • एंटीडिप्रेसेंट और दवाओं का सेवन करना।
  • पेट में कीड़े होना।
  • इन्फेक्शन और अपच की समस्या।

मुंह में बार बार पानी आने का घरेलू इलाज :-

1. एनिमा क्रिया अपनायें :

अगर आपके मुँह में बार बार पानी आता है तो देर से पचने वाले भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके बदले जल्दी और आसानी से पचने वाले भोजन का सेवन करना चाहिए। गर्भवती स्त्री के मुंह में अधिक लार आने पर उसे अपना पेट साफ़ रखना चाहिए। इसके लिए ये एनिमा प्रक्रिया का प्रयोग कर सकती है।

2. तुलसी के पत्ते :tulsi

तुलसी के 2 से 3 पत्तो को चबाने के बाद थोड़ा पानी पी लें। ऐसे कम से कम दिन में 3-4 बार करें। इसे उपाय से अधिक लार बहने में मदद मिलेगी। तुलसी के पत्ते लार के pH को पुनः निर्माण करके उन्हें संतुलित करके मुंह के अंदर हो रही है रिएक्शन को थीक करते है। जिससे सलाइवा कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

3. फिटकरी :

इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए फिटकरी भी बेहद लाभकारी उपाय है। इसके लिए फिटकरी को पानी में मिलाकर उससे कुल्ला करें। ऐसा करने से मुंह में लार आना बंद हो जाएगी। भोजन के बाद आधा चम्मच सौंफ और एक लौंग का सेवन करें इससे पाचन क्रिया में सुधर होगा।

4. सुहागा और शहद :

500 मिलीलीटर पानी में 125 ग्राम सुहागा मिलाकर गरारे करने और बीच-बीच में कुल्ला करने से मुंह में अधिक लार आना (लार श्राव) बंद हो जाता है। इसके अलावा सुहागे को शहद में मिलाकर रखें और जीभ और मुंह के अंदर के चालों पर दिन में 3-4 बार लगाएं। इससे छाले के कारण आने वाली लार और कब्ज की समस्या दूर होगी।