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यह सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है गर्मियों में गर्भवती महिलाओं के लिए

यह सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है गर्मियों में गर्भवती महिलाओं के लिए, गर्मी में गर्भवती महिला को क्या खाना चाहिए, प्रेग्नेंट महिला को गर्मी से होने वाली परेशानी से बचाने के टिप्स, गर्मियों में गर्भवती महिला इन बातों का ध्यान रखे

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, और यदि गर्मी का मौसम हो तो महिला की परेशानी और भी बढ़ जाती है। क्योंकि पसीने का आना, गर्मी लगना, किसी शारीरिक समस्या के कारण परेशान होना, बढे हुए पेट के कारण परेशानी आदि महिला को और भी ज्यादा परेशान कर देती है। ऐसे में गर्मी में गर्भवती महिला को क्या करना चाहिए जिससे गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचाव करने के साथ गर्मियों में भी ठंडक का अहसास मिल सके। तो लीजिये आज हम आपको बताते है की गर्मियों में गर्भवती महिला के लिए क्या सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।

हल्का आहार लें

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का बेहतर तरीके से ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि खान पान पोषक तत्वों से भरपूर होता है तभी गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपने आहार में ज्यादा मसाले तेल आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह गर्मी में आपको ज्यादा गर्मी कर सकते हैं जिससे पेट सम्बन्धी समस्या भी अधिक होती है। ऐसे में जितना हो सके हल्का भोजन करना चाहिए, और हरी सब्जियों, दालों, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। साथ ही खाने में नमक का अधिक सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण हाई ब्लड प्रैशर, सूजन जैसी परेशानी हो सकती है, इसीलिए उपयुक्त मात्रा में ही नमक का सेवन करना चाहिए।

चने का सत्तू

गर्मियों में ठंडक का अहसास देने के साथ चने का सत्तू पौष्टिक तत्व जैसे की फाइबर, प्रोटीन, आदि से भरपूर भी होता है। इसके सेवन से गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है, कब्ज़ एसिडिटी की समस्या से राहत मिलती है, आदि। ऐसे में गर्मी से राहत के साथ इसके फायदे उठाने के लिए भी गर्मियों में चने के सत्तू का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है।

फल

फलों का सेवन करने से बॉडी को पोषक तत्व मिलने के साथ गर्मी में होने वाली डिहाइड्रेशन की समस्या से बचाव करने में भी मदद मिलती है। ऐसे में गर्भवती महिला को गर्मियों में तरबूज, संतरे, आम, लीची, कीनू, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। आप चाहे तो इनके जूस का सेवन भी कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें की ताजे और मौसमी फलों का ही सेवन काना चाहिए।

तरल पदार्थो का सेवन

गर्मियों में गर्भवती महिला को फिट रहने के लिए और एनर्जी से भरपूर रहने के लिए तरल पदार्थो का भरपूर सेवन कारण चाहिए। क्योंकि तरल पदार्थो का भरपूर सेवन करने से गर्मियों में ठंडक मिलने के साथ डिहाइड्रेशन की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है। इसके लिए आप दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ, नारियल पानी, जूस, निम्बू पानी, आदि का सेवन भी कर सकते है।

कॉटन के कपडे पहने

गर्भवती महिला को गर्मी से बचने के लिए गर्मियों में सिंथेटिक कपडे नहीं पहनने चाहिए बल्कि सूती कपडे पहनने चाहिए, साथ ही यह खुले और आरामदायक भी होने चाहिए। ऐसे कपडे पहनने से आपको गर्मी से बचाव करने में मदद मिलती है। क्योंकि सूती कपडे में गर्मी कम लगती है साथ ही पसीने भी यह अच्छे से सोख लेता है जिसके कारण चिपचिपा या आधी पसीने के कारण होने वाली परेशानी से भी आपको निजात मिलता है।

ठन्डे पानी से नहाए

गर्मी से बचने के लिए सुबह शाम जरूर नहाए, और ऐसा भी नहीं है की आपको ज्यादा गर्मी लगती है तो आप बार बार नहाते ही रहे। क्योंकि इससे बॉडी के तापमान में बदलाव आ सकता है। ऐसे में गर्मी से राहत के लिए दिन में दो बार ठन्डे पानी से जरूर नहाए, और एक दिन छोड़कर अपने बालों को भी जरूर धोएं, इससे आपको ठंडक का अहसास होता है।

अपने कमरे का रखें ध्यान

यदि आपके कमरे में सीधी सूरज की रौशनी आती है, तो आपको वहां पर कोई ऐसा पर्दा अदि लगाना चाहिए, जिससे सूरज की रौशनी न आये। क्योंकि इससे कमरे की दीवार अधिक गर्म हो जाती है जिससे आपको ज्यादा गर्मी लग सकती है। शाम के समय खिड़कियां आदि थोड़ी देर के लिए खोल देनी चाहिए, ताकि कमरे के तापमान को सही रहने में मदद मिल सके। और बेड पर बिछाने के लिए भी आपको कॉटन की चादर का ही इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही आपके घर में यदि ए सी या कूलर है, तो उनका इस्तेमाल घर में ठंडक को बनाये रखने के लिए जरूर करना चाहिए।

स्विमिंग करें

गर्मी से निजात पाने के लिए गर्भवती महिला चाहे तो हफ्ते में एक बार स्विमिंग भी कर सकती है। क्योंकि यह गर्भवती महिला के लिए एक बेहतरीन व्यायाम होता है जो की प्रेग्नेंट लेडी को स्वस्थ रखने के साथ गर्मी से निजात दिलाने में भी मदद करता है।

तो यह है कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल गर्मियों में गर्भवती महिला कर सकती है जिससे उसे अधिक गर्मी के कारण होने वाली परेशानियों से बचाव करने में मदद मिलती है। साथ ही गर्मी में कारण होने वाली परेशानी को लेकर गर्भवती महिला को अपनी सेहत से किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

गर्भ में शिशु निरोग ऐसे रहेगा

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला अपना अच्छे से ध्यान रखती है क्योंकि उसे पता होता है की महिला अच्छा करे या बुरा उसका असर केवल महिला पर ही नहीं बल्कि बच्चे पर भी पड़ेगा। ऐसे में गर्भवती महिला को हर कोई यह राय भी देता है की महिला प्रेगनेंसी में क्या करे, क्या खाएं जिससे गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर विकास होने के साथ बच्चे को बीमारियों से बचे रहने में मदद मिलेगी। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिला के लिए कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं जो प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रखने के साथ बच्चे के बेहतर विकास व् गर्भ में बच्चे को बिमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

पोषक तत्वों से भरपूर ले आहार

प्रेग्नेंट महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार जैसे की कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन्स व् अन्य मिनरल्स से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। क्योंकि यह सभी पोषक तत्व गर्भनाल के माध्यम से शिशु तक पहुँचते हैं जिससे शिशु का विकास बेहतर तरीके से होता है। और जब शिशु का विकास अच्छे से होता है तो शिशु को बिमारियों से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

खून की कमी न होने दें

गर्भावस्था के दौरान महिला को शरीर में खून की कमी नहीं होने देनी चाहिए। क्योंकि खून की कमी होने के कारण शिशु के विकास के लिए पर्याप्त रक्त संचार शिशु तक नहीं हो पाता है। जिसके कारण शिशु के विकास में कमी व् जन्म के समय शिशु को दिक्कत होने का खतरा रहता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को आयरन युक्त आहार का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। जैसे की हरी सब्जियां, गाजर, चुकंदर, आंवला, संतरा, सेब, अनार आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

इम्युनिटी बढ़ाने वाले आहार खाएं

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को ऐसे आहार को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए जिससे महिला की इम्युनिटी बढ़ती है साथ ही गर्भ में शिशु की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। जिससे गर्भ में शिशु को बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है। और इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए गर्भवती महिला हरी सब्जियां, आंवला, निम्बू आदि का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है।

भीड़भाड़, शोर शराबे से दूर रहें

भीड़भाड़, शोर शराबे, प्रदूषण वाली जगह से गर्भवती महिला को दूर रहना चाहिए। क्योंकि इसके कारण प्रेग्नेंट महिला के संक्रमित होने का खतरा रहता है साथ ही शिशु के अंगों के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है। और यदि गर्भवती महिला को संक्रमण होता है तो उससे शिशु भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में शिशु को स्वस्थ रखने के लिए प्रेग्नेंट महिला को भीड़भाड़, शोर शराबे, प्रदूषण वाली जगह पर जाने से बचना चाहिए।

नशीले पदार्थों का सेवन न करें

नशीले पदार्थों के सेवन से भी गर्भवती महिला को परहेज करना चाहिए क्योंकि इनका बुरा प्रभाव गर्भनाल के माध्यम से शिशु को प्रभावित करता है। जिसके कारण शिशु के शारीरिक व् मानसिक बीमारी से पीड़ित होने का खतरा बढ़ता है साथ ही गर्भपात, समय से पहले बच्चे के जन्म जैसी दिक्कतें भी हो सकती है। ऐसे में यदि आप चाहती है की आप एक स्वस्थ शिशु को जन्म दें तो इसके लिए गर्भवती महिला को नशीले पदार्थों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने से बचना चाहिए।

तनाव न लें और खुश रहें

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए बल्कि जितना हो सके खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि जब प्रेग्नेंट महिला तनाव लेती है तो इससे महिला का मस्तिष्क बुरी तरह प्रभावित होता है और शरीर की क्रियाओं पर बुरा असर पड़ता है। और शरीर की क्रियाओं के बेहतर तरीके से काम न करने के कारण बच्चे का विकास भी प्रभावित होता है। जिसकी वजह से बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास से जुडी समस्या हो सकती है। ऐसे में यदि आप चाहती है की आपके बच्चे को ऐसी कोई परेशानी न हो तो इसके लिए गर्भवती महिला को किसी भी तरह का तनाव नहीं लेना चाहिए। और गर्भावस्था में जितना हो सके खुश रहना चाहिए।

केमिकल युक्त चीजों के इस्तेमाल से बचें

प्रेग्नेंट महिला का होने वाला बच्चा बिल्कुल स्वस्थ हो इसके लिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह के केमिकल के इस्तेमाल से बचना चाहिए। जैसे की मेक अप प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल न करें, खुशबूदार साबुन क्रीम आदि का इस्तेमाल न करें, घर की साफ़ सफाई का इस्तेमाल करने से बचे, आदि। क्योंकि यह सभी केमिकल गर्भवती महिला की स्किन के संपर्क में आने के कारण महिला के शरीर में पहुंचकर बच्चे के विकास पर बुरा असर डाल सकते हैं।

व्यायाम, मैडिटेशन, योगासन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं

गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए व् अपने होने वाले बच्चे को बिमारियों से सुरक्षित रखने के लिए व्यायाम, योगासन, मैडिटेशन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। क्योंकि व्यायाम व् योगासन महिला को खुश रखने बॉडी में ब्लड फ्लो को बेहतर करने, महिला को एक्टिव रखने में मदद करते हैं जिससे बच्चे का विकास भी अच्छे से होता है और बच्चा स्वस्थ रहता है। मैडिटेशन करने से गर्भवती महिला को दिमागी रूप से रिलैक्स रहने में मदद मिलती है जिससे माँ व् बच्चा दोनों मानसिक रूप से भी फिट रहते हैं।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान रखने से गर्भ में पल रहे शिशु को बिमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है। साथ ही शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास भी बेहतर तरीके से होता है।

पुरुषो के चेहरे से डार्क सर्कल दूर करने के उपाय

सिर्फ महिलाएं को ही नहीं बल्कि पुरुषो को भी अपने ब्यूटी ट्रीटमेंट की जरुरत होती है, कई बार तनाव, या सारा दिन लैपटॉप पर काम, नींद पूरी न होने के कारण और अनियमित खान पान के कारण, पुरुषो की आँखों के नीचे काले घेरे बन जाते है, जिसके कारण वो पुरुषो के चेहरे को और भी डार्क बना देते है, तो आइये आज हम आपको पुरुषो की आँखों के नीचे डार्क सर्कल की समस्या से निजात पाने के लिए कुछ टिप्स देने जा रहे है।

पुरुषो को भी हैंडसम लगने के लिए अपनी ख़ूबसूरती का ध्यान रखना चाहिए, परंतु ऑफिस का काम, सारा दिन भागा दौड़ी, रौशनी के सामने बैठना, नींद पूरी न होना, हॉर्मोन्स में बदलाव आना, प्रदुषण के कारण पुरुषो को डार्क सर्कल की समस्या हो जाती है, जिसके कारण पुरुषो के आकर्षण में कमी आती है, और साथ ही इस समस्या के लिए बाजार में कई उत्पाद भी मजबूत है, परंतु कई बार स्किन को सूट न करने के डर से पुरुष इनका इस्तेमाल नहीं करते है, परंतु अब आपको घबराने की बिलकुल भी जरुरत नहीं है, क्योंकि आज हम आपको कुछ इसे टिप्स बताने जा रहे है, जो आपको अपने आँखों के नीचे डार्क सर्कल को हटाने में मदद करते है, और साथ ही आपकी ख़ूबसूरती पर भी इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ता है।

आँखों के नीचे डार्क सर्कल होने के कारण:-

  • नींद को भरपुर न लेने के कारण आँखों के नीचे डार्क सर्कल की समस्या हो जाती है।
  • दे रात तक टीवी देखने या लैपटॉप पर काम करने के कारण भी आपको डार्क सर्कल की समस्या हो सकती है।
  • जो लोग पानी कम चाय या कॉफ़ी का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं, उन्हें भी डार्क सर्कल की समस्या हो जाती है।
  • नशीले पदार्थो के सेवन और धूम्रपान करने के कारण भी आपको डार्क सर्कल की समस्या हो जाती है।

टमाटर का उपयोग करें:-

tomato

टमाटर का उपयोग करने से आपको आँखों के नीचे होने वाले डार्क सर्कल की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप टमाटर के गुद्दे को निकाल कर पीस लें, और उसके बाद इसमें कुछ बुँदे नीम के रस की मिला लें, ऐसा करने के बाद आप अपनी आँखों के नीचे इसे लगाएं, और दस मिनट बाद धो दें, इस उपचार को थोड़े दिन करने से आपको जल्द फायदा मिलता है।

आलू के रस का इस्तेमाल करें:-

आलू के रस का इस्तेमाल करने से भी आप आँखों के नीचे डार्क सर्कल से राहत पा सकते है, इसके लिए आप आलू को कद्दूकस करके उसका रस निकाल लें, और उसके बाद इसमें कुछ बुँदे निम्बू के रस की मिलाएं, और उसके बाद रुई की मदद से इसे अपने डार्क सर्कल पर लगाएं , ऐसा करने से भी आपको कुछ ही दिनों में डार्क सर्कल की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

टी बैग्स का इस्तेमाल करें:-

टी बैग्स का इस्तेमाल करने से भी आप आसानी से डार्क सर्कल की समस्या से राहत पा सकती है, इसके उपचार के लिए दो टी बैग को पानी में डाल कर ठंडा होने के लिए पानी में रख दें, और उसके बाद इन टी बैग को अपनी आँखों पर रखें, ऐसा करने के बाद दस मिनट के लिए आप लेट जाएँ, इससे आपकी आँखों को आराम मिलेगा, और यदि आप इसे नियमित रूप से करते है, तो आपको डार्क सर्कल से भी छुटकारा मिल जायेगा।

संतरे के छिलको का इस्तेमाल करें:-

orange peel

संतरे के छिलको का इस्तेमाल करने से भी आपको आँखों के नीचे डार्क सर्कल की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके उपचार के लिए आप संतरे के छिलको धूप में सूखा लें, और उसके बाद इसे पीस कर पाउडर तैयार कर लें, ऐसा करने के बाद आपको थोड़े से पाउडर में कुछ बुँदे गुलाब जल की मिलाकर इसे अपनी आँखों के नीचे लगाएं, ऐसा करने से आपको डार्क सर्कल से राहत पाने में मदद मिलती है।

कच्चे दूध का इस्तेमाल करें:-

कच्चे दूध का इस्तेमाल करने से भी आपको आँखों के नीचे होने वाले डार्क सर्कल की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप कच्चे दूध को ठंडा होने के लिएफ्रीज़ में रख दें, और उसके बाद रुई की मदद से आँखों के नीचे लगाएं जहाँ डार्क सर्कल है, इस उपाय को दिन में दो बार करने से आपको डार्क सर्कल की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

बादाम के तेल से मसाज करें:-

बादाम के तेल का इस्तेमाल करके भी आप प्राकृतिक रूप से आपकी आँखों के नीचे काले घेरे की समस्या को खत्म करने में मदद करता है, और इसके नियमित प्रयोग से इसमें होने वाला विटामिन सी जसद से डार्क सक्ले को साफ़ कर देता है, इसके इस्तेमाल के लिए रुई से या हाथों की मदद से अच्छे से आँखों के नीचे मसाज करें, और थोड़ी देर के लिए ऐसे ही छोड़ दें, ऐसा करने से आपको इस समस्या से राहत मिलती है, और यदि आप इसे रात के समय करते है, तो पूरी रात के लिए ही इसे अपनी आँखों के नीचे लगे रहने दें।

खीरे का इस्तेमाल करें:-

खीरे का इस्तेमाल करने से भी आप आँखों के नीचे होने वाली डार्क सर्कल की समस्या से राहत पा सकते है, इसके इस्तेमाल के लिए आप खीरे की स्लाइसेस काट लें, और उसके बाद इसे ठन्डे होने के लिए फ्रिज़ में रख दें, और उसके बाद आप इसे अपनी आँखों पर दस से पंद्रह मिनट के लिए रखें, और उसके बाद अपने चेहरे को गुनगुने पानी से साफ़ कर लें, ऐसा करने से आपको डार्क सर्कल की समस्या से राहत मिलेगी।

इसके अलावा आप खीरे को कद्दूकस करके उसका रस निकाल लें, और उसके बाद इसे भी ठंडा होने के लिए फ्रिज़ में रख दें, और उसके बाद इसमें कुछ बुँदे निम्बू के रस की मिलाएं, और रुई की मदद से डार्क सर्कल पर लगाएं, और पंद्रह मिनट के बाद अपने चेहरे को साफ़ करें, ऐसा करने से आपको अपने चेहरे से डार्क सर्कल को हटाने में मदद मिलती है, यदि आप इस उपाय को हफ्ते में दो बार भी करते है तो भी आपको इससे फायदा मिलने में मदद मिलती है।gulabjal

गुलाबजल का इस्तेमाल करें:-

गुलाबजल में भी कुछ ऐसे एंटी ऑक्सीडेंट्स होते है जिसके कारण आपको अपने चेहरे की चमक को बढ़ाने में मदद करते है, ये आपकी स्किन के मरे हुए उत्तको को जगाने में मदद करती है, और साथ ही डेड स्किन भी निकालती है, और आप इसे डार्क सर्कल को खत्म करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते है, इसके लिए आप रुई की मदद से थोड़ी देर के लिए गुलाब जल को अपने डार्क सर्कल पर लगाएं, और थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी से अपने चेहरे को साफ़ करें, ऐसा करने से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

पुदीने की पत्तियो का इस्तेमाल करें:-

पुदीने की पत्तियो का इस्तेमाल करने से भी आप डार्क सर्कल की समस्या से राहत पा सकती है, इसके उपचार के लिए आप कुछ पुदीने की पत्तियो को पीस कर उसमे थोड़ा निम्बू मिला लें, और अब इस पेस्ट को अपने डार्क सर्कल पर अच्छे से लगाएं, इसके बाद आप अपने चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें, ऐसा करने से आपको असर जरूर दिखाई देता है, और आपको डार्क सर्कल की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

तो ये कुछ उपाय हो जिनकी मदद से आप अपनी आँखों के नीचे होने वाले डार्क सर्कल की समस्या से त्राहाट प् आसकते है, इसके अलावा आपको देर रात टीवी या लैपटॉप पर नहीं बैठना चाहिए, दिन में तीन से चार बार ऊनी आँखों को ठन्डे पानी से धोना चाहिए, ऐसा करने से भी आपकी आँखों को आराम मिलता है, और सबसे जरुरी होता है, की आप पूरी और बेहतर नींद लें, ऐसा करने से आपको डार्क सर्कल की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

पेट्रोलियम जेली क्या होता है? और इसके क्या-क्या उपयोग है?

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पेट्रोलियम जेली के फायदे  :- वैसलीन का नाम तो आप सभी ने सुना होगा और हो न हो कभी न कभी इस प्रयोग भी किया होगा. बचपन से लेकर बड़े होने तक सर्दियों में सभी के साथ रहने वाली आवश्यक वस्तु है Petroleum Jelly. जी हां, वैसलीन पेट्रोलियम जेली हाइड्रोकार्बनों से बना एक अर्ध ठोस मिश्रण है जिसे घाव ठीक करने से लेकर सामान्य चोट के लिए मरहम के रूप में प्रयोग किया जाता है.

इसे सफ़ेद पेट्रोलियम, कोमल पैराफिन और बहु-हाइड्रोकार्बन भी कहा जाता है. त्वचा के रूखेपन से लेकर होंठो के फटने तक सभी समस्याओ को ठीक करने में सक्षम वैसलीन पेट्रोलियम जेली आसानी से मिलने वाले एक सामान्य घरेलु औषधि है.

सर्दियों के मौसम में चलने वाले सर्द हवाएं आपके त्वचा से सारी नमी सोख लेती है जिससे त्वचा शुष्क और रूखी होकर फटने लगती है. यही स्थिति आपके होंठो और आपकी एड़ियों के साथ भी होती है. ऐसे में उन्ह अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है. परन्तु आज कल की व्यस्त दिनचर्या में किसी के पास इतना समय नहीं है की वे अपनी त्वचा को पूरा समय दे पाए. ऐसे में वैसलीन पेट्रोलियम उनके लिए बेहद लाभकारी सिद्ध हो सकती है.

जी हां, वैसलीन में मौजूद गुण न केवल त्वचा में नमी को बनाये रखते है अपितु उसे रूखेपन से बचा कर मुलायम बनाने में भी मदद करते है. ऐसे तो अधिकतर सर्दियों में इसका प्रयोग किया जाता है लेकिन गर्मियों में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है. वैसलीन एक पेट्रोएलुम बेस्ड जेल है जिसका उपयोग घरेलू चिकित्साओं, सौंदर्य प्रसाधनों और घरेलू कार्यो में किया जाता है लेकिन क्या आप जानते है की इसके अतिरिक्त और भी कई उपयोग है इस जेल के. जिनकी मदद से हम अपनी तमाम समस्याओ को आसानी से ठीक कर सकते है.

इसके अतिरिक्त रूखी, बेजान और शुष्क त्वचा व् होंठो को ठीक करने के लिए भी आप वैसलीन पेट्रोलियम जेली का इस्तेमाल कर सकते है. ये तो आप सभी जानते होंगे की पेट्रोलियम जेली त्वचा को मॉइश्चराइज़ करती है लेकिन क्या आप जानते है की त्वचा की देखभाल के अतिरिक्त और भी कई उपयोग है इस जेली के. जी हां, आपकी इसी अधूरी जानकारी को पूरा करने के लिए आज हम पेट्रोलियम जेली के बारे में कुछ ऐसे तथ्य बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपनी अन्य समस्याओ को भी आसानी से हल कर सकते है.

पेट्रोलियम जेली के उपयोग

1. लिप स्क्रब के रूप में :

सर्दियों के मौसम में होंठो पर केवल लिप बाम लगाने से बात नहीं बनेगी इसके लिए अपने होंठो पर वैसलीन लिप स्क्रब करने की भी जरुरत है. इसके लिए आपको बहुत से पैसे खर्च करने की आवश्यकता नहीं है.
बस थोड़ी से चीनी और वैसलीन को एक साथ मिलाकर उससे अपने होंठो पर स्क्रब करें. अच्छे परिणामो के लिए गोलाई में स्क्रब करें. उसके बाद होंठो को साफ़ करके उनपर लिम बाम लगा लें. आपके होंठ बाहर जाने के लिए तैयार है.

2. फटी एड़ियों के लिए :

फटी एड़ियों को ठीक करने के सबसे बेहतर ट्रीटमेंट्स में से एक है वैसलीन पेट्रोलियम जेली जो आपकी एड़ियों को ठीक करके उन्हें मुलायम बनाती है. इसके लिए रात को सोते समय अपनी एड़ियों पर वैसलीन की एक परत लगाएं और जुराब पहन कर सो जाएँ.
पेट्रोलियम जेली में मौजूद आयल आपकी एड़ियों में नमी को बनाये रखने में मदद करेगा जिससे एड़िया लम्बे समय तक मुलायम बनी रहे.

3. क्यूटिकल्स की देखभाल :

रूखी और बेजान क्यूटिकल्स को रिपेयर करने और सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका है वैसलीन. जिसकी सलाह मुलायम हाथो के लिए भी दी जाती है. इसके लिए रोजाना रात सोने जाने से पूर्व अपने नाखूनों के आस पास की त्वचा और नाखूनों पर वैसलीन से मसाज करें, उसके बाद ग्लव्स पहन लें. अगली सुबह आप पाएंगे की आपके हाथ मुलायम और नाख़ून शाइनी हो गए है.rukhi-twacha-k-liye-vasleen

दरअसल हमारे क्यूटिकल्स हमारी त्वचा की ही तरह कुछ प्रोटीन्स से बने होते है और जब वे अपनी नमी खोने लगते है तो वे रूखे और फटने लगते है. वैसलीन की पतली और तेलीय परत उनकी नमी को बनाये रखने में मदद करती है और साथ ही उन्हें रूखेपन और फटने से भी बचाती है.

4. छिली हुई त्वचा को ठीक करे :

रगड़कर छिली त्वचा को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम जेली सबसे लोकप्रिय और बेहतर उपाय है. जो सर्दियों में दौड़ने आदि के कारण लगी रगड़ को ठीक करने में मदद करती है. इसके लिए बहुत थोड़ी से पेट्रोलियम जेली रगड़ी हुई त्वचा पर लगाएं. इससे आपको आराम मिलेगा.

5. त्वचा को हाइलाइट करे :

वैसलीन की बहुत थोड़ी सी मात्रा आपके गालो और आपकी ब्रो की हड्डियों को इफेक्टिव लुक देने में मदद करेगी. ग्लोइंग और बेहतर त्वचा पाने का ये सबसे सस्ता और अच्छा उपाय है.

6. कोहनी के लिए :

सर्दियों में कोहनी आदि का कालापन और उनका रूखापन एक आम समस्या है. लेकिन क्या आप जानते है की पेट्रोलियम जेली इस समस्या को भी ठीक करने में आपकी मदद कर सकती है. इसके लिए रोजाना रात सोने से पहले अपनी रूखी कोहनी पर थोड़ी सी वैसलीन से मसाज करें. ये उन्हें मुलायम करने में मदद करेगी.

7. कान में Earring पहनने पर होने वाले दर्द के लिए :

यदि आप भी नियमित रूप से earrings नहीं पहनती है तो हो न हो, जब भी आप earrings पहनती होगी तो ये आपके लिए दर्दनाक साबित होता होगा. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि पेट्रोलियम जेली का एक उपयोग ये भी है. जब भी आप earring पहने तो अपने कानो के छेद में थोड़ी सी वैसलीन लगा लें. और उसके बाद earring पहने. बिना दर्द के बलिया पहनने का ये सबसे अच्छा तरीका है.

8. बालों को Defrizze करे :

यदि आपके बालों के साथ भी यही समस्या है तो अपनी हथेलियों में थोड़ी सी वैसलीन पेट्रोलियम जेली लें और अब इसे अपने बालों में लगाएं. ये आपके बालों को defrizze करने में मदद करेगी. लेकिन हां, अधिक मात्रा में वैसलीन न लें ये आपके बालों को ग्रीसी बना सकती है. दो मुँहे बालों की समस्या के लिए भी इसका प्रयोग किया जा सकता है.

9. फंसे दराज़ खोले :

यदि आपके घर में भी ऐसी कोई दराज़ है जिससे खोलने के लिए अभी तक बहुत प्रयास किये जा चुके है तो एक बार उस बंद दराज़ को खोलने के लिए वैसलीन पेट्रोलियम जेली का इस्तेमाल करके देखें. आपकी दराज़ आसानी से खुल जाएगी.

10. नकली पलकों के लिए :

अगर आप भी नकली पलकों का प्रयोग करती है और अक्सर उन्हें निकालने में तकलीफ होती है तो समझ लीजिये की अब ऐसा नहीं होगा. क्योंकि वैसलीन नकली पलकों को निकालने में भी मदद करती है. इसके लिए रुई के एक फोहे में थोड़ी से वैसलीन लगा कर उसे नकली पलकों पर लगाएं. कुछ देर ऐसे हो रहने दे और बाद में गर्म पानी से साफ़ कर लें.

11. लिपस्टिक के दागों को हटाए :

क्या आपके दांतो पर अक्सर लिपस्टिक के निशान लग जाते है. अगर हां तो परेशान न हो. अपनी इस समस्या से निजात पाने के लिए किसी भी डार्क लिपस्टिक को लगाने से पहले अपने दांतो पर थोड़ी सी पेट्रोलियम जेली लगा लें. ये आपके दांतो पर लगने वाले लिपस्टिक के दागों की समस्या को हल करेगा.vaselin-on-lisp

12. आइब्रो के लिए :

क्या आपकी आइब्रो भी अक्सर टेढ़ी मेढ़ी और मुड़ी हुई रहती है तो चिंता न करे. अपनी आइब्रो पर वैसलीन लगाएं और पाएं बेहतर लुक.

13. ज़िप को ठीक करे :

यदि आपकी ज़िप भी अक्सर अटक जाती है और कोशिशें करने पर भी ठीक नहीं होती? तो अपनी अटकी हुई ज़िप की दोनों ओर वैसलीन लगाएं ज़िप अपने आप ठीक हो जाएगी.

14. आग के लिए :

वैसलीन के इस उपयोग को शायद आप भी नहीं जानते होंगे. जी हां, वैसलीन की मदद से आग भी जलाई जा सकती है. यदि आप भी अपने दोस्तों के साथ कहीं बाहर कैंप पर जा रहे है तो एक रुई के फोहे को वैसलीन पेट्रोलियम जेली में डिप करके आग जला दें. ये आग को बढ़ाने का सबसे आसान और सस्ता उपाय है.

15. नेल पोलिश का बोतल खोले :

क्या अक्सर आपकी नेल पोलिश की बोतल जाम हो जाती है और खुलती नही? तो अब से उसकी गर्दन पर हलकी सी पेट्रोलियम जेली लगाएं. ये बोतल की गर्दन पर जमी नेल पोलिश को साफ़ करने में मदद करती है जिससे वो आसानी से खुल जाती है.

16. परफ्यूम अधिक देर तक चले :

कहीं भी जाने और परफ्यूम लगाने से पूर्व अपनी कलाई और गर्दन पर थोड़ी सी पेट्रोलियम जेली लगा लें. ये आपके परफ्यूम की खुशबु को लम्बे समय तक बरकरार रखने में मदद करेगी.

17. मेकअप हटाए :

थोड़ी सी पेट्रोलियम जेली आपके आई मेकअप को कुछ ही मिनटों में उतारने में मदद कर सकती है. लेकिन यदि किसी तरह की कोई जलन या समस्या हो तो उसे तुरंत साफ़ कर देना चाहिए.

18. मेहंदी के दाग़ :

अक्सर बालों में मेहंदी लगाने के दौरान हमारी त्वचा पर भी मेहंदी के निशान रह जाते है. उससे बचने के लिए बालों में मेहंदी लगाने से पूर्व अपनी गर्दन, माथे और त्वचा के उन हिस्सो जहा मेहंदी के निशान लगने की संभावना रहती है पर पेट्रोलियम जेली लगा लें. आपकी त्वचा पर कोई दाग़ नहीं रहेगा.

19. पर्स व् बैग में लगे दाग़ :

सिर्फ त्वचा ही नहीं बल्कि आपके पर्स और बैग की देखभाल करने में भी वैसलीन सक्षम है. यदि आपके बैग में भी किसी तरह का कोई दाग़-धब्बा लग गया है तो उस पर किसी wipe की मदद से वैसलीन लगाएं और दाग़ को रगड़े. आपका बैग पहले की तरह साफ़ हो जायेगा.

20. नहाने के लिये :

यदि आप भी नहाने का असल मजा लेना चाहती है तो वैसलीन पेट्रोलियम जेली में थोड़ा सा समुंद्री नमक मिलाकर उससे शरीर की मसाज करें. और उसके बाद गुनगुने पानी से नहा लें. ऐसा करने से आप पहले से अधिक फ्रेश और रेशमी नरम अहसास महसूस करेंगी.

तो ये थे वैसलीन पेट्रोलियम जेल के कुछ अन्य उपयोग जिनकी मदद से आप अपनी त्वचा के अतिरिक्त और भी वस्तुयों और समानों की देखभाल कर सकते है.

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डिलीवरी के बाद क्या-क्या खाना चाहिए

गर्भावस्था के बाद का आहार: डिलीवरी के बाद क्या-क्या खाना चाहिए:-

डिलीवरी से पहले और बाद दोनों के समय में महिला को अपने खाने-पीने का ध्यान रखना चाहिए| कई महिलाएं डिलीवरी होने के बाद अपने खाने-पीने का ध्यान उतनी अच्छी तरह से नहीं रखती हैं| जिस तरह से उन्हें रखना चाहिए| ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योकि डिलीवरी के बाद शरीर में बहुत कमजोरी आ जाती हैं| और डिलीवरी के बाद बच्चे को भी दूध पिलाना होता हैं| ऐसे में यदि महिला अपना ध्यान नहीं रखती हैं, तो उसका सीधा असर बच्चे की सेहत पर पड़ता हैं|

नार्मल डिलीवरी और सिजेरियन डिलीवरी के खाने में बहुत फ़र्क़ होता हैं| सिजेरियन डिलीवरी होने के बाद महिलाओ को खान-पान में ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती हैं| यदि महिलाएं अपने खाने-पीने का ध्यान नहीं रखती हैं, तो ऐसा करने से एक टाइम के बाद उनके शरीर में कमजोरी आने लगती है| जो मां और बच्चे दोनों के लिए समस्या पैदा कर सकती है| क्योकि बच्चे को दूध पिलाने से उसे सभी पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं|गर्भावस्था के बाद का आहार टिप्स

एक्सपर्ट्स भी मानते हैं और डॉक्टर भी ये सलाह देते हैं की, नई मां बनी महिलाओं को लगभग एक साल तक बच्चे को ब्रेस्टफीड कराना होता है, क्योंकि इससे बच्चा रोगों से मुक्त रहता हैं| इसलिए उन्हें अपने खानपान का पूरा ध्यान रखना चाहिए| ऐसा करने से मां और बच्चा दोनों ही कई खतरनाक बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं| आइये जानते हैं की डिलीवरी के बाद महिलाओ को क्या खाना चाहिए, और बच्चे के पोषण के लिए क्या करना चाहिए|

डिलीवरी के बाद महिलाओ को क्या-क्या खाना चाहिए:-

अंडे का सेवन करे:-

डिलीवरी के बाद महिलाओ को सभी तरह के मिनरल्स की जरुरत होती हैं| ऐसे में आपको वो सभी पोषक तत्व खाने चाहिए जिससे आपको ये सब मिल सके| डिलीवरी के बाद महिलाओं को प्रोटीन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है| और उसके लिए अंडा इसका सबसे अच्छा स्त्रोत हैं| अंडे में भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता हैं| इससे शरीर को ताकत मिलती है और यह विटामिन डी की कमी को भी दूर करता है|

ओट्स और दलिया का सेवन करे:-

ओट्स फाइबर का अच्छा स्त्रोत होने के साथ ही आयरन की जरूरत पूरी करने में भी बहुत उपयोगी है| और ओट्स में कार्बोहाइड्रट, प्रोटीन, विटामिन भी भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं| महिलाओ को इसका सेवन डिलीवरी के बाद जरूर करना चाहिए, यदि आपका इसका स्वाद बढ़ाने के लिए इसे फ्रूट्स या सब्जियां मिलाना चाहती हैं तो आप वो भी कर सकती हैं| परंतु इसका सेवन जरूर करना चाहिए|

पालक का सेवन करे:-

पालक में आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं| इसके साथ ही ये विटामिन ए का भी अच्छा स्त्रोत माना जाता है| आप इसे जूस, सब्जी, सलाद किसी भी तरह से अपनी डाइट में शामिल कर सकती है| इसका सेवन करने से आपको स्वस्थ रहने में व् शरीर को ऊर्जा प्राप्त करने में मदद मिलेगी|

दूध का सेवन अधिक मात्रा में करे:-

दूध को एक संपूर्ण आहार माना जाता है| इसमें विटामिन डी, बी और प्रोटीन होने के साथ ही बहुत से पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं|और दूध का सेवन करने से स्तनपान करने वाली महिला के स्तनों में वृद्धि होती हैं| जिससे बच्चे को भी भरपूर पोषण मिलता हैं| इसके साथ ही इसमें मौजूद कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाने में मुख्य भूमिका निभाता है|

बादाम का प्रयोग करे:-

नई मां को अपनी डाइट में बादाम इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है| क्योंकि इसे विटामिन ई का स्त्रोत होने के कारण इसमें मिलने वाला ओमेगा 3 मां और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है| और इसमें कार्बोहाइड्रेट्स, फाइबर, विटामिन B12 and E और बहुत से मिनरल्स जैसे मैग्नीशियम, कॉपर, मैंगनीज, पोटैशियम, कैल्शियम और जिंक भी भरपूर मात्रा में पाया जाता हैं| और महिलाएं बादाम मिल्क या फिर बादाम का हलवा बनाकर भी इसका सेवन कर सकते हैं|

हरी सब्जियों का सेवन करे:-

डिलीवरी के बाद महिला को बहुत से पोषक तत्वो की जरुरत होती हैं| उनमे से एक आयरन भी हैं| और हरी सब्जियों में आयरन की मात्रा भरपूर पायी जाती हैं| इसके लिए आप परवल, टिंडा, कमल ककड़ी, पालक बीन्स, मैथी, आदि का सेवन कर सकते हैं या फिर मौसम के हिसाब से आने वाली हरी सब्जियों को आप भरपूर मात्रा में ले सकते हैं| ये महिला और बच्चे दोनों के लिए लाभदायक होता हैं|

दालों का सेवन करे:-

दालों में प्रोटीन की मात्रा भरपूर होती हैं| इसीलिए डिलीवरी के बाद आपको दालों में सबसे ज्यादा मूंग, और मसूर की दाल का सेवन करना चाहिए| आप चाहे तो इसका हलवा बनाकर भी इसका सेवन कर सकते हैं| मूंग माँ के स्तनों में दूध की वृद्धि करने में भी मदद करता हैं| ये महिला और बच्चे दोनों के लिए लाभदायक होता हैं|

मैथी का प्रयोग करे:-

मैथी में आयरन, कैल्शियम, विटामिन और मिनरल्स आदि होते हैं| मैथी दूध बनाने वाली ग्रंथियों के लिए एक अच्छी प्रेरक है| साथ ही मैथी में ये भी गन होता हैं की ये डिलीवरी के बाद होने वाले जोड़ो के दर्द से भी आराम दिलाता हैं| मैथी में फाइटोएस्ट्रोजन नामक पदार्थ पाया जाता है, जो कि स्तनों में दूध की मात्रा को बढ़ाने का काम करता है| ये माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता हैं|

सौंफ और दालचीनी का प्रयोग करे:-

सौंफ और दालचीनी भी स्तनों के उत्पादन में बहुत लाभकारी है| साथ ही सौंफ बच्चों को पेट में होने वाले दर्द में फायदा करती है| साथ ही यदि नई-नई मां अगर दालचीनी का उपयोग करती है तो इससे बच्चे के लिए स्तनों में दूध का स्वाद अच्छा होता है, जो बच्चे को भी पसंद आता है| और बच्चा यदि ऊपर का दूध पीता है तो, सौंफ उबाल कर भी दूध का प्रयोग कर सकते हैं|

जीरा का इस्तेमाल करे:-

शरीर में दूध के उत्पादन को बढ़ाने का काम जीरा भी करता है| जो बच्चे के लिए बहुत ही लाभकारी होता हैं| और साथ ही यह खाना पचाने में मदद तो करता ही है, साथ ही कब्ज, एसिडिटी और सूजन को भी कम करता है। आपको बता दें कि जीरे में आयरन की भी भरपूर मात्रा होती है, जो महिला को डिलीवरी के बाद ऊर्जा देने का काम भी करती है|

सोंठ का सेवन करे:-

सोंठ में फाइबर, विटामिन B6 and E, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, सेलेनियम और मैंगनीज होता हैं| और सोंठ का इस्तेमाल भी डिलीवरी के बाद महिला के लिए बहुत ही अच्छा होता हैं| इसका इस्तेमाल आप दालों को बनाकर उसमे डाल कर भी कर सकती हैं| साथ ही डिलीवरी के बाद महिला के लिए सोंठ के लड्डू भी बहुत बनाये जाते हैं|

तो ये सब महिलाओ को डिलीवरी के बाद खाना चाहिए, जिससे की बच्चा और उसकी माँ दोनों की स्वस्थ रह सके| और यदि महिला डिलीवरी के बाद खाने-पीने का ध्यान रखती हैं तो, आने वाले समय में उसे किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता हैं| डिलीवरी के बाद कहा जाता है औरत का नया जन्म होता हैं, ऐसे में महिला के शरीर को सभी पोषक तत्वो की जरुरत होती हैं| इसीलिए आपको इन सब बातो का ध्यान रखना चाहिए|

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प्रेगनेंसी के आठवें महीने में खान पान क्या होना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान जिस बात पर सबसे ध्यान देना चाहिए वो है खान पान, यदि प्रेग्नेंट महिला का खान पान अच्छा होता है। तो इससे प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने, प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने, माँ के पेट में पल रहे बच्चे के विकास को बेहतर करने में मदद मिलती है। ऐसे में कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन, पोटैशियम, विटामिन, फाइबर व् अन्य मिनरल्स युक्त आहार का सेवन गर्भवती महिला को अपनी डाइट में जरूर करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के हर महीने में खान पान में थोड़ा थोड़ा बदलाव करते रहना चाहिए ताकि महिला व् बच्चे को पर्याप्त मात्रा में व् जरुरी पोषण मिल सके। तो आइये इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के आठवें महीने के खान पान के बारे में बताने जा रहे हैं। जैसे की गर्भवती महिला व् बच्चे के लिए इस महीने में क्या खाना सबसे अच्छा होता है और क्या खाना खतरनाक हो सकता है।

गर्भावस्था के आठवें महीने में क्या खाएं

यदि आप माँ बनने वाली है और आपकी प्रेगनेंसी का आठवां महिला शुरू होने वाला है या चल रहा है। तो आपको नीचे दिए गए खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

मछली

मछली आयरन का बहुत ही बेहतरीन स्त्रोत होती है और आठवें व् नौवें महीने में गर्भवती महिला को आयरन की पर्याप्त मात्रा में जरुरत होती है। ऐसे में यदि आप नॉन वेज खा लेती है तो आपको मछली का सेवन जरूर करना चाहिए। आयरन के अलावा मछली में प्रोटीन व् अन्य मिनरल्स भी मौजूद होते हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होते हैं। ऐसे में मछली का सेवन करने से गर्भवती महिला को खून की कमी के कारण होने वाली समस्या से बचने के साथ बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। लेकिन मछली का सेवन करते समय इस बात का ध्यान रखें की जिन मछलियों में मर्करी की मात्रा अधिक होती है उनका सेवन न करें।

दूध व् दूध से बने पदार्थ

गर्भावस्था के आठवें महीने में दूध व् दूध से बने पदार्थ का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि दूध कैल्शियम, प्रोटीन, पोटैशियम, विटामिन व् अन्य मिनरल्स का बेहतरीन स्त्रोत होता है। जो माँ के स्वास्थ्य को बेहतर रखने के साथ बच्चे के विकास को तेजी से करने में भी मदद करते हैं। ऐसे में दूध, दही व् अन्य दूध से बनी चीजों का सेवन प्रेगनेंसी के आठवें महीने में जरूर करना चाहिए।

सिट्रस फल

संतरा, मौसम्बी, आंवला, जैसे रसदार फल फाइबर व् विटामिन सी का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं। जो आठवें महीने में गर्भवती महिला को वजन बढ़ने के कारण होने वाली कब्ज़, एसिडिटी से बचाने के साथ संक्रमण से बचाने में भी मदद करते हैं। साथ ही इन फलों का सेवन करने से बॉडी को हाइड्रेट रहने और गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रहने में भी मदद मिलती है। इसके अलावा विटामिन सी बॉडी के सभी पार्ट्स में ब्लड को अवशोषित करने में भी मदद करता है जिससे गर्भवती महिला खून की कमी के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

हरी पत्तेदार सब्जियां

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में गर्भवती महिला को हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि यह आयरन, फाइबर, विटामिन, पोटैशियम, फोलिक एसिड, कैल्शियम का बेहतरीन स्त्रोत होती है। जो बॉडी में खून की कमी को दूर करने, पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने, बच्चे के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करते हैं, आदि।

ओमेगा 3 फैटी एसिड

जरुरत के अनुसार गर्भवती महिला को आठवें महीने में वसा का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि इस दौरान शिशु के शारीरिक के साथ दिमाग का विकास भी तेजी से हो रहा होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को वसा का सेवन जरूर करना चाहिए। और इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को मछली, अंडे, पीनट बटर, ड्राई फ्रूट्स आदि का सेवन जरूर करना चाहिए।

केला

आठवें महीने में गर्भवती महिला को बॉडी में एनर्जी के साथ पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के लिए फाइबर की भी जरुरत होती है। और केला कार्बोहाइड्रेट व् फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को केले का सेवन आठवें महीने में जरूर करना चाहिए ताकि प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने व् कब्ज़, एसिडिटी जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

पानी पीएं भरपूर

गर्भावस्था के आठवें महीने में गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। एक दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। इसके अलावा बॉडी में तरल पदार्थों की कमी न हो इससे बचने के लिए जूस, नारियल पानी, शरबत, निम्बू पानी आदि का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में गर्भवती महिला को क्या नहीं खाना चाहिए

गर्भावस्था के आठवें महिला में कुछ ऐसे आहार है जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला को गलती से भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि उनका सेवन करने से माँ व् बच्चे दोनों को परेशानी हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिला को आठवें महीने में क्या नहीं खाना चाहिए।

कैफीन: प्रेगनेंसी के आठवें महीने में गर्भवती महिला को कैफीन युक्त पदार्थ जैसे की चाय, कॉफ़ी, चॉकलेट आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि कैफीन का सेवन करने से समय से पहले डिलीवरी, बच्चे के वजन में कमी, बच्चे के दिमागी विकास में कमी जैसी परेशानियां हो सकती है।

जंक फ़ूड: गर्भवती महिला को आठवें महीने में बाहर का खाना जैसे पिज़्ज़ा, बर्गर, चाऊमीन, तले व् मसालेदार आदि का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि यह सब आहार न तो पोषक तत्वों से भरपूर होता है बल्कि इसके सेवन से प्रेग्नेंट महिला की परेशानियां बढ़ सकती है।

नशीले पदार्थ: नशीले पदार्थ जैसे की अल्कोहल, धूम्रपान आदि का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी, जन्म से पहले शिशु का जन्म, प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स आदि बढ़ सकती है।

कच्चा अंडा या मास: गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के आठवें ही नहीं बल्कि किसी भी महीने में कच्चे अंडे या मास का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि कच्चे अंडे या मास में साल्मोनेला, व् अन्य बैड बैक्टेरिया मौजूद होते हैं। जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को संक्रमण, बच्चे के विकास में कमी जैसी परेशानियों को बढ़ा सकता है।

मर्करी युक्त मछली: गर्भवती महिला को मर्करी युक्त मछली का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह माँ के साथ बच्चे पर भी बुरा प्रभाव डाल सकती है।

गैर पॉश्चयरयुक्त दूध: गैर पॉश्चयरयुक्त दूध में लिस्टेरिया, व् अन्य बैड बैक्टेरिया मौजूद होते हैं जो माँ व् बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को गलती से भी गैर पॉश्चयरयुक्त दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के आठवें महीने में खान पान से जुड़े कुछ खास टिप्स यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला को आठवें महीने में आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स से बचे रहने में मदद मिल सके।

गर्भ में शिशु को गोरा करने के लिए प्रेग्नेंट महिला खाए यह तीन फल

गर्भावस्था में शिशु का रंग गोरा

जन्म के बाद नहीं बल्कि गर्भ से ही महिला शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को बेहतर करने की तैयारी में लग जाती है। क्योंकि हर महिला चाहती है की उसके गर्भ में पल रहा शिशु सूंदर, बुद्धिमान व् गोरा हो और गर्भ में शिशु के विकास में किसी भी तरह की कमी न आए। और इसके लिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपने खान पान से लेकर अपनी छोटी छोटी चीजों का अच्छे से ध्यान रखती है। और घर के सदस्य हो या रिश्तेदार हर कोई आपको प्रेगनेंसी के दौरान अपनी अपनी राय देता है। जैसे की कुछ लोग महिला के लक्षण को देखकर यह अंदाज़ा लगाते हैं की गर्भ में पल रहा शिशु बेटा है या बेटी, वहीँ कुछ सदस्य गर्भ में पल रहा शिशु गोरा हो इसके लिए अपने खान पान में कुछ चीजों को शामिल करने की सलाह देते हैं।

गर्भ में पल रहा शिशु गोरा हो इसके लिए गर्भवती महिला खाएं यह फल

गर्भ में पल रहे शिशु का विकास पूरी तरह से महिला पर निर्भर करता है और शिशु को गर्भनाल के माध्यम से शिशु के लिए जरुरी सभी पोषक तत्व भी पहुंचाए जाते हैं। तो लीजिये अब जानते हैं की वो कौन से तीन फल है जिनका सेवन यदि प्रेग्नेंट महिला करती है तो उससे शिशु की रंगत में निखार लाने में मदद मिलती है।

संतरा

खट्टा मीठा स्वाद होने के साथ विटामिन सी जैसे पोषक तत्वों से भरपूर संतरा प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पसंद आ सकता है। साथ ही इसमें पानी की मात्रा भी अधिक होती है जिससे प्रेग्नेंट महिला को पानी की कमी के कारण होने वाली परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा संतरे में मौजूद विटामिन सी और भरपूर पानी शिशु की स्किन को भी पोषण पहुंचाता है, जिससे स्किन को निखारने में मदद मिलती है। इसीलिए गर्भवती महिला को नियमित एक संतरा खाने की सलाह भी दी जाती है।

अंगूर

पर्याप्त मात्रा में अंगूर का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को न केवल स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदा मिलता है। बल्कि इससे गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत में निखार लाने में मदद मिलती है। क्योंकि अंगूर में मौजूद अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड प्रेग्नेंट महिला के स्वास्थ्य और शिशु की रंगत को गोरा करने दोनों के लिए फायदेमंद होता है। इसीलिए गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत को निखारने के लिए पर्याप्त मात्रा में नियमित गर्भवती महिला अंगूर का सेवन कर सकती है।

नारियल

नारियल में भी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो न केवल गर्भवती महिला के लिए बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होते है। नारियल का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक विकास के साथ शिशु की स्किन टोन को भी सुधारने में मदद मिलती है। इसीलिए गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत में निखार लाने के लिए प्रेग्नेंट महिला नारियल का सेवन भी कर सकती है, इसके अलावा महिला चाहे तो नारियल पानी का सेवन भी भरपूर मात्रा में कर सकते हैं।

तो यह हैं वो तीन फल जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला यदि करती है तो इससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक विकास और शिशु की स्किन टोन को निखारने में भी मदद मिलती है।

इन टिप्स से छुपाएं बढ़ती उम्र का असर!

सुंदर, आकर्षक और खुबसूरत स्किन किसे अच्छी नहीं लगती लेकिन बढ़ती उम्र और वर्तमान के वातावरण के आगे किसी की भी खुबसूरती बरकरार नहीं रह पाती। आप कितनी ही कोशिशे क्यों न कर लें, कितने ही महंगे कॉस्मेटिक का इस्तेमाल कर लें। बढ़ती उम्र की निशानियाँ छुपाएँ नहीं छिपती। जिसका कारण होता है समय पर स्किन की सही देखभाल नहीं करना। जी हां, यदि समय रहते स्किन पर ध्यान नहीं दिया जाए तो आगे चलकर स्किन में समस्याएं होने लगती है।

इसलिए 30 से पहले ही अपनी स्किन की सही और उचित देखभाल करना शुरू कर देना चाहिए। ऐसा करने से 30 के बाद आपकी स्किन पर बढती उम्र की निशानियों का असर कम हो जाता है। इतना ही नहीं अगर आप सही समय से अपनी स्किन को उचित देखभाल करने लगेंगी तो 30 के बाद आपको स्किन के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। यहाँ हम आपको कुछ ऐसी ही टिप्स बता रहे है जिनकी मदद से आपकी स्किन पर बढती उम्र की निशानियों का असर कम हो जाएगा और आप अधिक समय तक जवान बनी रहेंगी। लेकिन ध्यान रहे, ये रूटीन आपको नियमित रूप से फॉलो करना होगा। एक या 2 दिन के इस्तेमाल से कोई खास असर नहीं दिखाई देगा।

30 की उम्र के बाद भी जवां और खुबसूरत दिखने की टिप्स :-

1. चेहरे की सफाई :

स्किन की अच्छी सेहत के लिए उसकी नियमित सफाई करना आवश्यक है। इसलिए रोजाना सुबह अपना चेहरा अच्छे से साफ़ करें। साथ ही अगर आप मेकअप लगाती है तो रात के समय पूरा मेकअप हटाकर सोएं और उस समय भी चेहरे को अच्छे से साफ़ करें। ऐसा करने से कोई भी बाहरी प्रोडक्ट आपकी स्किन को हानि नहीं पहुंचा पाएगा।

2. कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का चुनाव :

आज के समय में शायद ही कोई ऐसी महिला होगी जों कॉस्मेटिक का इस्तेमाल नहीं करती होगी। लेकिन ये बात बहुत कम महिलाएं जानती है की कॉस्मेटिक में बहुत से केमिकल और हानिकारक तत्व मिलाएं जाते है जो स्किन को प्रभावित करते है। इसलिए इनके चुनाव में हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए। कभी भी सस्ते और एक्सपायर डेट वाले कॉस्मेटिक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इतना ही नहीं प्रोडक्ट्स का चुनाव हमेशा अपनी स्किन टाइप के अनुसार ही करें। क्योंकि गलत स्किन पर गलत प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से भी चेहरा समय से पहला बुढा दिखने लगता है।

3. एक्सफोलिएट (स्क्रबिंग) करना न भूलें :

त्वचा में बढती उम्र की निशानियों के दिखने का एक कारण स्किन में मौजूद डेड सेल्स भी होते है जिन्हें निकालने के लिए एक्सफोलिएशन बेहतर तरीका है। यह स्किन से डेड सेल्स को निकालने नए सेल्स को जीवित करने में मदद करता है और साथ ही स्किन की सफाई भी करता है। इसके लिए आप दिन की बजाय रात के समय एक्सफोलिएशन करें। क्योंकि रात के समय यह अच्छे से काम करता है। रुखी स्किन में हफ्ते में 1 बार और ऑयली या एक्ने-प्रोन स्किन में हफ्ते में दो बार स्क्रब करना जरुरी होता है।

4. स्किन को बेहतर बनाएं :

स्किन को बेहतर बनाने के लिए खास देखभाल की आवश्यकता होगी। जिसके लिए रोजाना नहाने के बाद हलकी गीली स्किन पर ही अच्छा मोइस्चराइज़र लगाएं। वैसे आप चाहे तो एप्रीकॉट आयल भी लगा सकती है। यह स्किन में समाकर उसे रुखा नहीं होने देते। जिससे वह लंबे समय तक चमकदार बनी रहती है।

5. तनाव है समस्या की जड़ :

शायद आप नहीं जानती लेकिन कई बार कम उम्र में भी बढती उम्र की निशानियाँ दिखने लगती है। जिसका मुख्य कारण है तनाव! जी हां, तनाव आपकी स्किन को समय से पहला ही बूढा बना देता है। जिससे आपकी उम्र अधिक दिखने लगती है। वास्तव में तनाव लेने से शरीर हानिकारक हार्मोन पैदा करने लगता है जो मुहांसे और स्किन संबंधी अन्य समस्यायों का कारण बनता है। इसलिए तनाव न लें।

6. रुखी त्वचा से बचें :

सर्दियों में चलने वाली सर्द हवाएं और गर्मियों की लू स्किन से उनकी प्राकृतिक नमी छीन लेती है जिससे स्किन रुखी हो जाती है और वह बेजान दिखने लगती है। विशेषकर उन महिलाओं की जो कामकाज के लिए अक्सर बाहर ही रहती है। अगर आप भी उन्ही में से एक है तो उसके लिए आप छोटे से उपाय का इस्तेमाल कर सकती है। जिसके लिए किसी भी एसेंशियल आयल (जैसे-बादाम तेल, विटामिन इ आयल, तिल का तेल) की 4 से 5 बूंदे 2 मग पानी में डालकर शरीर पर डाल लें। ऐसा करने से स्किन पर एक मोइस्चराइजिंग परत बन जाएगी जो स्किन को रुखा नहीं होने देगी।

7. धुप से बचना भी है जरुरी :

सूर्य की UV रेज़ स्किन को बहुत नुकसान पहुंचाती है जिसके कारण स्किन बर्न और रैशेस आदि की समस्या होने लगती है। जिससे बचने के लिए आप UVA/UVB सनस्क्रीन का इस्तेमाल कर सकती है। सिर्फ गर्मियों में ही नहीं बल्कि बरसात और सर्दियों में भी। ये स्किन पर एक प्रोटेक्टिव लेयर बना देती है। जिससे सूर्य की किरणें और बाहरी वातावरण स्किन को प्रभावित नहीं कर पाता। लेकिन ध्यान रहें बाहर से आने के बाद फेस अवश्य धो लें।

8. पानी का सेवन करें :

ये बात हम सभी भली भांति जानते है की त्वचा को अंदरूनी रूप से स्वस्थ बनाने के लिए अधिक से अधिक पानी का सेवन करना चाहिए। क्योंकि पानी स्किन को आंतरिक रूप से नमी पहुंचाता है जिससे स्किन चमकदार और स्वस्थ होती है। बेहतर परिणामों के लिए आप इसमें नींबू का रस भी मिला सकती है। इसके साथ ही हेल्थी और संतुलित भोजन का सेवन करें। इसके अलावा रोजाना 15 से 20 मिनट की योग करें।

9. नट्स भी है जरुरी :

प्रसिद्ध डर्मेटोलॉजिस्ट की माने तो नाश्ते में बादाम, काजू और अखरोट आदि नट्स का सेवन करने से बढती उम्र की निशानियां कम होती है। इननट्स में फैटी एसिड पाए जाते है जो झुर्रियों, फाइन लाइन्स और दाग-धब्बों को दूर करने में मदद करते है।

तो ये थी कुछ टिप्स जिनकी मदद से बढती उम्र की निशानियों के असर को कम किया जा सकता है वो भी बिना अधिक खर्चे के।


इन टिप्स से छुपाएं बढ़ती उम्र का असर, बढ़ती उम्र की निशानियों को दूर करने के तरीके, 30 की उम्र के बाद स्किन को जवां बनाए रखने के तरीके, कैसे रखें 30 के बाद स्किन को जवां, स्किन पर बढ़ती उम्र की निशानियों को छुपाएं, बढती उम्र को कम कर देंगे ये उपाय, बढ़ती उम्र का असर छुपाने के तरीके हिंदी में

प्रेग्नेंट महिला को साबूदाना खाने के फायदे

प्रेगनेंसी में साबूदाना खाने के फायदे, सफ़ेद मोतियों की तरह दिखने वाला साबूदाना जितना छोटा और हल्का होता है उतना ही ज्यादा स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद भी होता है। और गर्भवती महिलाएं भी साबूदाने का सेवन कर सकती हैं। क्योंकि साबूदाने में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो न केवल गर्भवती महिला के लिए बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी फायदेमंद होते हैं।

इसके अलावा यदि प्रेग्नेंट महिला साबूदाने का सेवन करती है तो इससे प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली बहुत सी परेशानियों को भी दूर करने में भी मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में साबूदाना खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

प्रेगनेंसी में साबूदाना खाने से मिलता है कार्बोहाइड्रेट

  • साबूदाने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा मौजूद होती है जो बॉडी को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करता है।
  • ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला साबूदाने का सेवन करती है।
  • तो इससे प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।
  • साथ ही प्रेग्नेंट महिला को थकान, कमजोरी जैसी परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

कैल्शियम

  • साबूदाने के कैल्शियम, विटामिन के जैसे पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं।
  • जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत रखने के साथ शिशु की हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।
  • ऐसे में महिला को अपने आप को फिट रखने और शिशु के शारीरिक विकास को बेहतर करने के लिए प्रेगनेंसी में साबूदाने का सेवन जरूर करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में साबूदाना खाने से मिलता है पोटैशियम

  • बहुत सी गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या के कारण परेशान हो सकती है।
  • लेकिन साबूदाने का सेवन करने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सकता है।
  • क्योंकि साबूदाने में पोटैशियम की मात्रा मौजूद होती है जो ब्लड फ्लो को सही रखने के साथ ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने में भी मदद करती है।
  • इसके अलावा साबूदाने का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को हदय सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

फोलिक एसिड

  • साबूदाने में फोलिक एसिड की मात्रा भी मौजूद होती है।
  • जो की माँ के पेट में पल रहे बच्चे के विकास के लिए बहुत जरुरी होता है।
  • ऐसे में साबूदाने का सेवन यदि प्रेग्नेंट महिला करती है।
  • तो इससे शिशु के विकास को बढ़ाने के साथ शिशु को जन्म के समय होने वाली परेशानियों से भी बचाने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में साबूदाना खाने से पाचन रहता है दुरुस्त

  • पाचन क्रिया के धीमे पड़ने के कारण प्रेग्नेंट महिला पेट में गैस, कब्ज़ जैसी परेशानियों से पूरी प्रेगनेंसी के दौरान परेशान रह सकती है।
  • लेकिन साबूदाने का सेवन करने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सकती है।
  • क्योंकि साबूदाना हल्का होता है जिसे पचाने में बहुत आसानी होती है।
  • और प्रेग्नेंट महिला को पेट सम्बंधित परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

वजन

  • यदि कोई गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान वजन सही से न बढ़ने के कारण परेशान होती है।
  • तो ऐसे में साबूदाना खाने से महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सकती है।
  • क्योंकि साबूदाना में कैलोरी प्रेग्नेंट महिला के वजन को सही से बचाने में मदद करती है।
  • जिससे वजन कम होने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली दिक्क़तों को कम करने में मदद मिलती है।

शरीर का तापमान

  • साबूदाने का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
  • जिससे बॉडी के तापमान में होने वाले बदलाव के कारण होने वाली दिक़्कतों से प्रेग्नेंट महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो प्रेग्नेंट महिला को साबूदाने का सेवन करने से मिलते हैं। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी साबूदाने का सेवन कर सकती है ताकि आपको और आपके बच्चे दोनों को साबूदाने के फायदे मिल सके।

इन लक्षणों को देखकर पता चलेगा नोर्मल डिलीवरी है या नहीं

इन लक्षणों को देखकर पता चलेगा नोर्मल डिलीवरी है या नहीं, नोर्मल डिलीवरी होने के क्या लक्षण होते हैं, नोर्मल डिलीवरी के लक्षण, Symptoms of normal delivery

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का स्वस्थ रहना नोर्मल डिलीवरी का लक्षण होता है, यदि महिला प्रेगनेंसी के पूरे समय अपने खान पान, अपनी बॉडी का अच्छे से ध्यान रखती है तो इससे महिला के नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ जाते हैं। जब महिला गर्भवती होती है तो उसके मन में नई उम्मीद के साथ बहुत से सवाल भी होते हैं, जो की शिशु के विकास से जुड़े होने के साथ डिलीवरी से भी जुड़े होते हैं। खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बनती है उन्हें इस बात की ज्यादा उत्सुकता होती है की उन्हें कैसे पता चलेगा की शिशु अब जन्म लेने वाला है, और उनकी डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन। तो आइये आज हम आपको ऐसे ही कुछ लक्षण बताने जा रहें हैं जिनसे आपको पता चलेगा की आपकी नोर्मल डिलीवरी होगी या नहीं।

नोर्मल डिलीवरी क्या होती है?

प्राकृतिक रूप से जब शिशु अपने आप महिला के गर्भाशय से बाहर आता है तो इसे नोर्मल डिलीवरी कहा जाता है। नोर्मल डिलीवरी महिला और शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर होती है। लेकिन इसमें महिला को एक बार बहुत दर्द सहन भी करना पड़ता है, कई बार नोर्मल डिलीवरी के बाद भी महिला को दो तीन टाँके लगाएं जाते हैं। तो आइये अब जानते हैं की नोर्मल डिलीवरी के लक्षण क्या होते हैं।

पेट के निचले हिस्से में दबाव

नोर्मल डिलीवरी ला सबसे पहला संकेत होता है जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है वैसे वैसे पेट के निचले हिस्से में दबाव अधिक महसूस होने लगता है। क्योंकि शिशु जन्म के लिए बाहर आने के लिए अपनी सही पोजीशन में आ जाता है ऐसे में पेट के निचले हिस्से में अधिक दबाव का महसूस होना किसी भी समय होने वाली डिलीवरी का संकेत देता है।

बार बार यूरिन आना

जब शिशु नीचे की तरफ आने लगता है तो इसके कारण पेल्विक की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। जिसके कारण ब्लैडर में भी सिकुड़न आ जाती है जिसके कारण महिला को बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है।

ब्रैस्ट में सूजन

जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है वैसे वैसे यदि महिला को अपने ब्रैस्ट में ज्यादा भारीपन या सूजन महसूस होती है तो यह भी नोर्मल डिलीवरी होने का लक्षण होता है।

पेट से जुडी समस्या

महिला को यदि पेट में ऐंठन, दस्त जैसी समस्या भी नौवें महीने में आकर अधिक होने लगती है तो इसके कारण भी पेट पर दबाव पड़ता है जिसके कारण शिशु नीचे की और आने लगता है और नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं ऐसे में यदि आपको भी ऐसी समस्या हो तो यह नोर्मल डिलीवरी का ही एक लक्षण होता है।

पीठ व् पेट में दर्द

यदि महिला को थोड़ी थोड़ी देर बाद पेट में दर्द या पीठ के नीचले हिस्से में दर्द का अनुभव होता रहता है, तो यह भी शिशु के गर्भ में अपनी सही पोजीशन लेने के कारण दबाव महसूस होने की वजह से होता है। और यदि आपको ऐसा होता है तो समझ जाइये की आपकी डिलीवरी का समय आ गया है।

प्राइवेट पार्ट से पानी निकलना

यदि महिला के प्राइवेट पार्ट से पानी अधिक निकलने लगता है, तो हो सकता है की बेबी बैग फट गया है ऐसा होना भी नोर्मल डिलीवरी का संकेत होता है क्योंकि शिशु गर्भ में एमनियोटिक द्रव में ही होता है। और यदि आपको ऐसा लगे की प्राइवेट पार्ट से ज्यादा पानी आ रहा है तो आपको बिना देर किये तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि यदि पानी खत्म हो जाता है तो शिशु को गर्भ में परेशानी हो सकती है।

प्राइवेट पार्ट से तरल पदार्थ ज्यादा निकलना

यदि प्रेगनेंसी के नौवें महीने में आपको प्राइवेट पार्ट से गुलाबी, रक्त की तरह या सफ़ेद रंग का तरल पदार्थ ज्यादा निकलता है तो यह भी नोर्मल डिलीवरी होने का संकेत होता है।

तो यह हैं कुछ खास लक्षण जिन्हे देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं की आपकी नोर्मल डिलीवरी है या नहीं। इसके अलावा यदि नौवें महीने में आपको किसी भी तरह की असुविधा होती है, तो आपको लापरवाही नहीं करनी चाहिए और बिना देरी किये तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।