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गोरा होने के घरेलू आसान उपाय

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बिना कॉस्मेटिक के रंग गोरा करने के उपाय

गोरी, निखरी और बेदाग़ त्वचा सभी की पहली पसंद होती है। लेकिन वर्तमान के बढ़ते प्रदुषण और अस्त-व्यस्त दिनचर्या के चलते लोग अपनी स्किन पर ध्यान नहीं दे पाते। जिसके कारण स्किन पर दाग-धब्बे हो जाते है और धूप के कारण त्वचा काली होने लगती है। जो चेहरे की खूबसूरती को खराब कर देते है। त्वचा में टैनिंग के कारण उस पर लगाया मेकअप भी अजीब दिखने लगता है।

गोरा रंग ना सिर्फ पर्सनालिटी को निखारता है बल्कि हमारी खूबसूरती में भी चार चाँद लगाता है। लेकिन इसके लिए कास्मेटिक का इस्तेमाल करना स्किन के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। क्योंकि इनमे बहुत सारे केमिकल होते हैं जो स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए यहाँ हम आपको कुछ ऐसे आसान घरेलू उपायों के बारे में बता रहे हैं जिन्हे अपनाकर आपकी स्किन ग्लोइंग, हेल्थी, फेयर और खिली-खिली हो जाएगी। तो आइये जानते है उन चमत्कारी उपायों के बारे में।

गोरा होने के उपाय

ध्यान रखने योग्य बातें

त्वचा को गोरा और निखरी हुई बनाने के लिए आपको इन उपायों का इस्तेमाल नियमित रूप से रोजाना करना होगा। तभी जाकर उपाय पूरी तरह काम कर पाएंगे। अगर किसी भी उपाय के प्रयोग के बाद त्वचा में इरिटेशन और जलन हो तो उस उपाय का प्रयोग तुरंत बंद कर दें। और हां, एक बार में एक ही उपाय का इस्तेमाल करते रहे, हर बार अलग-अलग उपायों का इस्तेमाल करने से त्वचा में रिएक्शन हो सकता है।

हल्दी

त्वचा को गोरा करने के लिए हल्दी बहुत लाभकारी होती है। इसमें मौजूद तत्व स्किन टोन को निखारने में मदद करते हैं। हल्दी से स्किन में चमक और कसाव भी आता है। प्रयोग के लिए हल्दी पाउडर और नींबू का रस मिलाकर पेस्ट बना लें। उसके बाद 15 मिनट तक पैक को फेस पर लगाएं रखें। उसके बाद पानी से फेस धो लें। हफ्ते में 2 से 3 बार इसका इस्तेमाल करें। त्वचा निखरने लगेगी। सेंसिटिव पेस्ट में पानी भी मिला लें।

गुलाबजल

गुलाबजल में विटामिन और एंटी ऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा मौजूद होती है जो त्वचा को कोमल, मुलायम और सॉफ्ट बनाने में मदद करता है। इसके अलावा यह स्किन को टोन करके डेड स्किन निकालने में भी मदद करता है। प्रयोग के लिए चार चम्मच जई को आधे घंटे के लिए गुनगुने पानी में भिगो दें। आधे घंटे बाद जई को पानी से निकालकर उसमे गुलाबजल और आधा चम्मच दही मिला लें। सभी को अच्छे से मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं और 20 मिनट तक लगे रहने दें। बाद में पानी से चेहरा साफ़ कर लें। इसके साथ-साथ रोजाना दिन में दो बार गुलाबजल का इस्तेमाल करें।

नींबू

नींबू में मौजूद विटामिन सी और ब्लीचिंग गुण स्किन के बैक्टीरिया को समाप्त करने के साथ साथ त्वचा को निखारने और गोरा बनाने में भी मदद करते हैं। यह त्वचा के दागों को दूर करने का भी काम करता है। प्रयोग के लिए स्किन पर 10 मिनट के लिए नींबू का रस लगाएं और बाद में ठंडे पानी से चेहरा धो लें। सेंसिटिव स्किन वाले नींबू के रस में थोड़ा पानी मिला लें। इसके अलावा लेमन का इस्तेमाल करने के बाद धुप के संपर्क में आने से बचें।

बेसन

बेसन स्किन को गोरा करने से बेहतर उपायों में से एक है। यह त्वचा के लिए स्क्रबर के रूप में कार्य करता है और टैनिंग को दूर करके दाग-धब्बों को हटाने में भी मदद करता है। गोरा होने के लिए बेसन में थोड़ी सी हल्दी और पानी मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर अच्छे से लगाएं। कुछ देर रखें और उसके बाद गुनगुने पानी की छींटे मारकर हल्के हाथों से रगड़ते हुए पैक छुड़ा दें। बाद में चेहरा अच्छे से साफ कर लें। स्किन दमकने लगेगी।

एलोवेरा

गोरा होने के लिए एलोवेरा जेल को डायरेक्ट अपने फेस पर लगाएं और कुछ देर तक मसाज करते रहें। मसाज के बाद 20 से 30 मिनट तक रहें और उसके बाद साफ़ पानी से चेहरा साफ़ कर लें। रोजाना इस्तेमाल से त्वचा की सभी अशुद्धियाँ दूर हो जाएंगी और स्किन निखरने लगेगी।

चावल का पाउडर

त्वचा को गोरा करने के लिए कच्चे चावलों को मिक्सी में डालकर दरदरा होने तक पीस लें। उसके बाद 2 चम्मच पाउडर में 2 चम्मच दूध मिलाकर स्मूथ पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट का इस्तेमाल अपने चेहरे पर करें। लगभग आधे घंटे तक रखें और उसके बाद पानी से चेहरा साफ कर लें। हफ्ते में 2 से 3 दिन इस्तेमाल से त्वचा में निखार आने लगेगा।

टमाटर

टमाटर में मौजूद तत्व त्वचा की टैनिंग को दूर करके उसे गोरा करने में मदद करते हैं और साथ ही डेड स्किन को भी हटाने में मदद करते हैं। गोरा होने के लिए 2 टमाटर को मिक्सी में पीस लें। अब इसमें 2 चम्मच नींबू का रस मिलाएं। पेस्ट बनाने के बाद इसे अपनी त्वचा पर लगाएं। 20 मिनट तक रखें और उसके बाद पानी से चेहरा साफ़ कर लें। इस उपाय का इस्तेमाल तब तक करते रहे जब तक त्वचा बेहतर ना हो जाए।

तो ये थे कुछ उपाय, जिनकी मदद से आप बिना कॉस्मेटिक के त्वचा को गोरा कर सकते हैं। तो अब आप भी केमिकल युक्त उत्पादों का इस्तेमाल करने की बजाए घर की गुणकारी सामग्रियों का कुछ दिनों तक उपयोग करें और त्वचा को बेहतर बनाएं।

कोहनी का कालापन दूर करने के घरेलु उपाय

जितना आप अपने चेहरे को जितना सुन्दर रखतीं हैं क्या आपके हाथ और पैर भी उतने ही सुन्दर होते है। आप कहेंगे हां।  क्योंकि आप तो वैसे ही अपने शरीर की सफाई करते है जैसे अपने चेहरे की देखभाल और सफाई  करते है। हमारे शरीर के सभी अंग उतने ही महत्वपूर्ण और उतने ही सुन्दर होते है जितने की हम अपने चेहरे को अहमियत देते है।

गर्मी आने ही वाली है। और गर्मी के दिनों में सब लोग ज्यादातर शॉर्ट्स और स्लीवलेस कपडे पहनना पसंद करते है। पर जब आप ये कपडे पहनते है तब अचानक निगाह कोहनी पर जाती है और हमे लगता है की कोहनी कितन काली हो गई है। जबकि रोज़ ही सफाई ठीक से की जाती है। समय पर नहाना और सब तरह से।

तो आज इस आर्टिकल के जरिये ये जानते है की कोहनी की सफाई कैसे करें और कैसे हटाएं कोहनी का कालापन इसके लिए जानते है घरेलू नुस्खे

कोहनी का कालापन हटाने के घरेलु उपाय

नारियल तेल Coconut Oil 

नारियल का तेल तो जैसे स्किन के लिए वरदान से काम नहीं है। ये स्किन को नरिशमेंट तो देता है और स्किन के डेथ सेल्स को भी निकलता है। नारियल के तेल में कुछ बुँदे नींबू के रस की मिलाकर लगाने से कालापन धीरे धीरे ख़तम हो जाता है।  नहाने के बाद नारियल तेल को नार्मल लोशन की तरह लगाएं। जहा कालापन है कोहनी में या घुटनो पर वह इसकी ३ से ४ मिनट तक मालिश करें और छोड़ दें। दिन में ३ बार ऐसा करें तो जरूर फायदा होगा।

नींबू  Lemon 

नींबू मे विटामिन सी जैसे तत्व होते हैं जो स्किन की रंगत को निखारने में मदद करते है। एक नेचुरल ब्लीच है जो स्किन को लाइट करने का काम करता है। इसको थोड़ा सा शहद मिलाकर अपनी कोहनिओं पर रगड़ना चाहिए। और जब भी आप निम्बू का इस्तेमाल शरीर पर कभी भी इस तरह करें तो कुछ समय के लिए आप धूप में जाने से बचें।

दही Curd 

दही भी बहुत उपयोगी होता हैं, इसमे लेक्टिक एसिड होता है जो स्किन टोन को लाइट करता है। दही के साथ कुछ बुँदे सफ़ेद सिरके की मिला लीजिए। उसके बाद उसे मसाज की तरह कुछ टाइम के लिए कोहनी पर लगते हुए रगड़े। और फिर गुनगुने पानी से धो ले जब वो सूख जाये।

चीनी Sugar 

जी हां चीनी भी एक अच्छा स्त्रोत है कालेपन को दूर करने का।  इसके लिए आप थोड़ी से चीनी को लेकर उसमे कुछ बूंदें ऑलिव आयल की मिलाकर अपनी कोहनी पर रगड़े। आप देखेंगे की कोहनी का कालापन धीरे धीरे निकल जायेगा।

बेकिन सोडा Baking Soda 

बेकिन सोडा एक क्लीन्ज़र की तरह काम करता है। इसमे दूध मिलकर कोहनी पर लगाए। फिर इसे गुनगुने पानी से धो लें। बेकिन सोडा भी कालेपन को अच्छी तरह से निकाल देता है।

आलू Potato

कच्चे आलू को आधा बीच में से काट कर कालेपन पर लगाए। कच्चा आलू कोहनी पर लगाएं आलू में कुदरती तौर पर ब्लीच होता है। जो कालेपन को जड़ से निकाल देता है।

एलोवेरा Aloe-Vera

एलोवेरा प्राकर्तिक जैल के रूप में काम करता है। कालेपन पर एलोवेरा जैल को लगाए। एलोवेरा जैल को निकाल कर अपनी कोहनी पर लगाएं और आप देखेंगे की आपकी कोहनी का कालापन आराम से निकल गया है।

खीरा Cucumber  

खीरे का उपयोग भी अच्छा होता है। इसके लिए आप खीरे के रस में निम्बू का रस मिलकर लगाएं।

हल्दी Turmeric

हल्दी एक एंटीसेप्टिक का काम करता है। इसके लिए आप हल्दी में थोड़ा सा बेसन मिलाकर कालेपन पर लगाएं।  और स्क्रब की तरह लगाएं।

तो ये थे कुछ उपाय जिनसे आप आराम से अपनी कोहनी के कालेपन को दूर कर सकते है। ये इन्हें आप जरूर आजमाए।

गर्भावस्था में कब्ज़ होने पर क्या करें?

प्रेगनेंसी जहां एक महिला के लिए बहुत ही ख़ुशी का अनुभव होता है। वहीँ साथ ही गर्भवती महिला को इस दौरान बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। और अधिकतर महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ की समस्या का सामना जरूर करती है। और कब्ज़ की समस्या होने के कारण महिला को सीने में जलन, पेट में गैस, उल्टी आने का मन होना, खट्टी डकार, जीभ के स्वाद में गड़बड़ी जैसी समस्या भी हो सकती है।

लेकिन यह कोई ऐसी दिक्कत नहीं है की जिसका कोई समाधान न हो। बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला अपने खान पान व् अन्य कुछ छोटी छोटी बातों का ध्यान रखती है तो इससे कब्ज़ की समस्या दूर हो सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में कब्ज़ होने के क्या कारण होते हैं और प्रेग्नेंट महिला किस प्रकार इस परेशानी से निजात पा सकती है।

प्रेगनेंसी में कब्ज़ होने के कारण

गर्भावस्था के दौरान महिला को किसी एक कारण की वजह से ही कब्ज़ की परेशानी नहीं होती है। बल्कि इसके कई कारण हो सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं प्रेगनेंसी में कब्ज़ होने के क्या कारण हो सकते हैं।

बॉडी में हार्मोनल बदलाव: गर्भावस्था के दौरान बॉडी में लगातार हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं। और इन्ही हॉर्मोनल बदलाव के साथ बॉडी में प्रोजेस्ट्रोन का स्तर बढ़ सकता है, जिसकी वजह से कब्ज़ की समस्या हो सकती है।

पानी की कमी: गर्भवती महिला यदि पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन नहीं करती है तो शरीर में पानी की कमी होने के कारण भी कब्ज़ की समस्या हो सकती है।

आहार के कारण: यदि गर्भवती महिला अपने आहार में फाइबर युक्त चीजों का सेवन कम करती है तो इस कारण भी प्रेग्नेंट महिला की पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है। जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को कब्ज़ जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

दवाइयों के कारण: आयरन व् अन्य दवाइयां जो महिला प्रेगनेंसी में ले रही होती है कई बार उन दवाइयों के असर के कारण भी महिला को यह दिक्कत हो सकती है।

शारीरिक श्रम में कमी: प्रेगनेंसी के दौरान आराम करना बहुत जरुरी होता है। लेकिन यदि गर्भवती महिला हमेशा रेस्ट ही करती रहती है तो इसके कारण भी शरीर की क्रियाओं पर असर पड़ सकता है। जिसके कारण पाचन क्रिया पर असर पड़ने की वजह से महिला को कब्ज़ जैसी दिक्कत हो सकती है।

शारीरिक बीमारी: यदि प्रेग्नेंट महिला डाइबिटीज़, हदय सम्बन्धी समस्या या अन्य किसी शारीरिक बिमारी से पीड़ित होती है। तो इसके कारण भी महिला को कब्ज़ जैसी दिक्कत प्रेगनेंसी के दौरान अधिक हो सकती है।

प्रेगनेंसी में कब्ज़ से निजात पाने के टिप्स

गर्भावस्था के दौरान कब्ज़ की समस्या होना आम बात होती है लेकिन यदि महिला कुछ आसान टिप्स का ध्यान रखती है। तो इससे गर्भवती महिला को कब्ज़ से राहत पाने में मदद मिल सकती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में कब्ज़ से राहत पाने के कुछ आसान टिप्स कौन से हैं।

फाइबर युक्त आहार

हरी सब्जियां, संतरा, निम्बू, आंवला, दही, दलिया, दालें, सेब आदि जिन खाद्य पदार्थों में फाइबर की मात्रा मौजूद होती है। प्रेग्नेंट महिला को उनमे में किसी न किसी खाद्य पदार्थ का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि फाइबर युक्त आहार का सेवन करने से गर्भवती महिला की पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। जिससे कब्ज़ व् अन्य पेट सम्बन्धी परेशानियों से महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

तरल पदार्थ

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पानी व् अन्य तरल पदार्थों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से गर्भवती महिला को कब्ज़ की परेशानी से राहत मिलने के साथ अन्य शारीरिक परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है। और इसके लिए दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ नारियल पानी, फलों के रस आदि का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। इसके अलावा निम्बू पानी पीने से भी कब्ज़ से बहुत जल्दी निजात पाने में मदद मिलती है।

दही या छाछ

नियमित प्रेग्नेंट महिला को एक कटोरी दही या छाछ का सेवन भी भोजन के साथ जरूर करना चाहिए। क्योंकि दही या छाछ पेट के लिए बहुत अच्छी होती है, साथ ही दही खाने से खाने को अच्छे से हज़म होने में मदद मिलती है। जिससे कब्ज़ जैसी परेशानी से प्रेग्नेंट महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

खट्टे फल

संतरा, निम्बू, मौसम्बी, आंवला, जैसे फलों का सेवन भी कब्ज़ से राहत पाने में मदद करता है। ऐसे में रोजाना किसी न किसी फल का सेवन जरूर करना चाहिए।

सेंधा नमक

खाने को बनाने के लिए सफ़ेद नमक की बजाय सेंधा नमक का इस्तेमाल करें। सेंधा नमक खाने से पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को इस बचने में मदद मिलती है।

व्यायाम

थोड़ा बहुत व्यायाम करने व् योगासन करने से भी पेट की मांसपेशियों को आराम मिलता है। जिससे पेट में गैस, कब्ज़ जैसी परेशानियों से राहत पाने में मदद मिलती है।

खाने का तरीका

कब्ज़ से निजात पाने के लिए आपको अपने खाने के तरीके पर भी ध्यान देना चाहिए। जैसे की खाने को अच्छे से चबाकर खाना चाहिए। एक ही बार में पेट भरकर खाने से अच्छा थोड़ा थोड़ा करके थोड़ी थोड़ी देर में खाएं। ऐसा करने से खाने को अच्छे से हज़म होने में मदद मिलती है। जिससे कब्ज़ आदि की परेशानी से प्रेग्नेंट महिला को रहत पाने में मदद मिलती है।

तो यह है प्रेगनेंसी में कब्ज़ होने के कारण व् उससे निजात पाने के आसान टिप्स, ऐसे में यदि आप भी माँ बनने वाली है। और आप भी पेट सम्बन्धी दिक्कत से परेशान हैं तो इन आसान टिप्स का इस्तेमाल करके आप आसानी से इस समस्या से निजात पा सकती है।

प्रेगनेंसी के अंतिम दिनों में रखे यह सावधानियां

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प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला के शरीर में बहुत से उतार चढ़ाव आते हैं। लेकिन प्रेगनेंसी का पहला और आखिरी महीना महिला के लिए सबसे ज्यादा अहम होता है। इस दौरान महिला को अपना सबसे ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि शुरूआती दिनों में जहां गर्भपात का डर होता है वहीँ अंतिम दिनों में की गई लापरवाही गर्भ में पल रहे शिशु और महिला की सेहत पर बहुत बुरा प्रभाव डाल सकती है, साथ ही ऑपरेशन होने की सम्भावना भी हो जाती है। इस दौरान महिला का वजन अधिक होने के कारण महिला को परेशानी हो सकती है लेकिन उसे अपना दुगुना ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में कौन कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए।

उठने, बैठने, चलने का ध्यान रखें

वजन अधिक हो जाने के कारण महिला को उठने बैठने में परेशानी हो सकती है, ऐसे में महिला को उठते बैठते समय सहारा लेना चाहिए। चलते समय ज्यादा तेजी नहीं करनी चाहिए, हाई हील्स नहीं पहननी चाहिए, ज्यादा सीढ़ियां नहीं चढ़नी चाहिए, आदि। क्योंकि ऐसा करने से गर्भ में शिशु को परेशानी का अनुभव होने के साथ महिला को भी थकावट हो सकती है।

खाने में न करें लापरवाही

वैसे तो प्रेगनेंसी का पूरा समय खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, लेकिन आखिरी महीने में शिशु का विकास तेजी से होता है, जिसके लिए पोषक तत्व भरपूर चाहिए होते हैं। साथ ही यदि महिला अपने खान पान का ध्यान न रखें तो महिला के शरीर में कमजोरी या अन्य कोई समस्या हो सकती है जिसके कारण नोर्मल डिलीवरी के चांस भी कम हो जाते हैं। इसीलिए शिशु के बेहतर विकास और महिला को स्वस्थ रहने के लिए प्रेगनेंसी के आखिरी दिनों में खान पान के साथ लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

शरीर पर ज्यादा जोर न डालें

प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में महिला का एक्टिव रहना जरुरी होता है, ताकि शिशु भी एक्टिव रह सके। लेकिन कुछ महिलाएं नोर्मल डिलीवरी के चक्कर में अपने शरीर पर जोर डालने लगती है, लेकिन आपको ऐसा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यदि आप शरीर पर जोर डालती हैं तो इसके कारण शिशु को परेशानी हो सकती है, साथ ही आपको भी किसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए।

सोते समय रखें ध्यान

वजन बढ़ने के कारण प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में सोने में समस्या हो सकती है। ऐसे में आपको उल्टा होकर या सीधे होकर नहीं सोना चाहिए, क्योंकि उल्टा होकर सोने से जहां पेट पर जोर पड़ता है, वहीँ सीधे होकर सोने से ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है। ऐसे में आपको करवट लेकर सोना चाहिए, खासकर बाईं तरफ करवट लेकर सोना चाहिए यह प्रेगनेंसी के दौरान सोने के लिए सबसे आरामदयाक पोजीशन होती है। और एक दिन में आठ से दस घंटे जरूर सोना चाहिए।

दर्द और प्राइवेट पार्ट से स्त्राव होने का ध्यान रखें

पेट में हल्का दर्द होना प्रेगनेंसी में आम बात होती है, लेकिन यदि आपको ऐसा लगे की पेट या पीठ में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है। तो यह लेबर पेन का लक्षण हो सकता है, साथ ही यदि प्राइवेट पार्ट से यदि पानी जैसा अधिक स्त्राव हो या ब्लड के दाग लगे तो इसे भी इग्नोर नहीं करना चाहिए और जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि यह एक लक्षण होता है जो बताता है की अब नन्हा मेहमान आपके हाथों में आने वाला है।

डॉक्टर के संपर्क में रहें

प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में आपको डॉक्टर से लगातार संपर्क में रहना चाहिए, और अपनी डिलीवरी डेट का ध्यान रखना चाहिए। यदि डिलीवरी डेट से पहले कोई परेशानी हो या डिलीवरी डेट जाने के बाद भी आपको कुछ महसूस न हो तो ऐसे में आपको देरी न करते हुए डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान आपको प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में जरूर रखना चाहिए। इसके अलावा आपको एक बैग भी तैयार करके रखना चाहिए जिसमे की डिलीवरी के बाद आपको हॉस्पिटल में किन किन चीजों की जरुरत है वो सामान उसमे हो। साथ ही कोई भी परेशानी होते ही देरी न करते हुए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ताकि माँ और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

यूट्यूब विडिओ –

गर्भावस्था के अंतिम दिनों की सावधानियां? डिलीवरी का समय नजदीक आने पर महिला इन बातों का ध्यान रखें

प्रेगनेंसी में मूंग की दाल खाने के फायदे

स्वास्थ्य और सेहत को सही रखने के लिए दालों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि दालें फाइबर, आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन व् अन्य मिनरल्स से भरपूर होती है। और बात जब प्रेगनेंसी की हो तो प्रेग्नेंट महिला को एक समय की डाइट में एक कटोरी किसी न किसी दाल का सेवन जरूर करना चाहिए। आज इस आर्टिकल में हम आपसे मूंग दाल के बेहतरीन फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं जो मूंग दाल का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को मिलते हैं।

फाइबर

मूंग दाल में फाइबर प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है साथ ही यह खाने में भी बहुत हल्की होती है। जिसे पचाने में प्रेग्नेंट महिला को कोई परेशानी नहीं होती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। और कब्ज़, एसिडिटी जैसी परेशानियों से गर्भवती महिला को दूर रहने में मदद मिलती है।

शुगर रहता है कण्ट्रोल

मूंग दाल का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड में शुगर के लेवल को सही रखने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान जेस्टेशनल शुगर से बचे रहने में मदद मिलती है और यदि महिला मधुमेह से पीड़ित होती है तो मधुमेह के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि मूंग दाल खाने से शुगर कण्ट्रोल रहती है।

इम्युनिटी बढ़ती है

मूंग दाल में एंटी माइक्रोबियल, एंटी ऑक्सीडेंट्स, एंटी फंगल गुण मौजूद होते हैं। जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला की इम्युनिटी को मजबूत करके महिला को संक्रमण व् बिमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

फोलेट

फोलेट एक अहम पोषक तत्व होता है जो गर्भावस्था के दौरान शिशु के बेहतर विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। और मूंग दाल में फोलेट की मात्रा में मौजूद होती है। जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक में मदद करता है।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल

प्रेगनेंसी के दौरान मूंग दाल का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रहने में मदद मिलती है। साथ ही मूंग दाल का सेवन करने से हदय को स्वस्थ रहने में भी मदद मिलती है।

वजन

मूंग दाल में कैलोरीज़ की मात्रा कम होती है ऐसे में मूंग दाल का सेवन करने से पोषक तत्व तो भरपूर मिलते ही हैं साथ ही इससे वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है। जिससे गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ने के कारण होने वाली परेशानियों से प्रेग्नेंट महिलाओं को बचे रहने में मदद मिलती है।

आयरन

मूंग दाल में आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जिससे गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने के साथ खून की कमी के कारण होने वाली अन्य परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

प्रोटीन

मूंग दाल में प्रोटीन भी प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जो प्रेगनेंसी के दौरान मसल्स को मजबूत रखने में मदद करता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी पेन, जोड़ो में दर्द की समस्या से निजात पाने के साथ शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में मदद भी मिलती है।

स्किन के लिए है फायदेमंद

स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदों के साथ मूंग दाल का सेवन करने से स्किन की ख़ूबसूरती को बनाएं रखने में भी मदद मिलती है। क्योंकि मूंग दाल में एंटी ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।

ब्लड प्रैशर रहता है कण्ट्रोल

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाएं ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या से भी परेशान रहती हैं लेकिन यदि महिला मूंग दाल का सेवन करती है तो ऐसा करने से मूंग दाल की परेशानी से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो मूंग दाल का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को मिलते हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बेहतरीन फायदों के बारे में पता होना चाहिए। ताकि आपको और आपके होने वाले शिशु को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। मूंग की दाल खाने के साथ महिला दाल का सूप, हलवा, पापड़ आदि भी प्रेग्नेंट महिला खा सकती है।

Benefits of Mung Daal in Pregnancy

 

गर्भ के पहले तीन महीनो में ये बिलकुल न खाएं

प्रेगनेंसी के बारे में जैसे ही आपको या आपके परिवार वालों को पता चलता है, तो हर कोई अपना एक्सपीरियंस और सलाह देने लगता है, ऐसे में हर कोई अलग अलग अनुभव बताता है, जिसके कारण महिला कंफ्यूज हो जाती है, किसकी बात माने और किसकी बात न माने, और पहले तीन महीने महिला के लिए बहुत अहम होते भी है, और थोड़ी सी लापरवाही कई बार गर्भपात का कारण भी बन जाती है, क्योंकि इस दौरान शरीर में बहुत तेजी से हार्मोनल परिवर्तन भी आते है, साथ ही महिला के स्वभाव में परिवर्तन, शारीरिक रूप से बदलाव, मानसिक रूप से चिडचिडापन होना आम बात होती है,

इन्हें भी पढ़ें:- प्रेगनेंसी में पहले तीन महीने तक ये सावधानी बरतें

 pregnancy eating

ऐसे में महिला को धैर्य से काम लेना चाहिए, और महिला के पति को भी उसका अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, इस अलावा महिला को अपने स्वास्थ्य का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, जैसे की अपने खान पान का पर पूरा ध्यान देना चाहिए क्योंकि प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने यदि आप गरम चीजो, विटामिन सी युक्त आहार, कच्ची सब्जियों आदि का सेवन करते है तो आपको परेशानी का अनुभव करना पड़ता है, साथ ही कई बार गर्भपात या अन्य कोई परेशानी हो जाती है, तो आइये आज हम आपको बताते हैं की प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने आपको क्या क्या नहीं खाना चाहिए।

कच्चे पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए:-

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने ही नहीं बल्कि हो सकें तो प्रेगनेंसी के पूरे समय आपको कच्चे पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण यदि आप इसका सेवन करते है तो गर्भपात का खतरा बना रहता है।

दवाइयों का सेवन न करे:-

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प्रेगनेंसी के शुरुआती समय में शरीर के अंगो में दर्द रहना, या उलटी आदि की समस्या होना आम बात होती है, ऐसे में इससे राहत के लिए आपको किसी भी तरह की दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि गर्भनाल के रास्ते रक्त के माध्यम से बच्चे तक उसके पहुँचने की आशंका रहती है, जो शिशु पर गलत प्रभाव डाल सकती है, यदि आपको अधिक परेशानी है तो भी बिना डॉक्टर की राय के किसी भी तरह की दवाई का सेवन न करें।

कच्चे मास, अंडे आदि का सेवन न करें:-

प्रेगनेंसी के खासकर पहले तीन महीने आपको कच्चे अंडे, मास, पनीर आदि का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यदि आप इसका सेवन करते है तो इसके मौजूद गंदे तत्व आपके शरीर में प्रवेश कर जाते है जिसके कारण आपको परेशानी का अनुभव होता है।

ज्यादा तला भुना न खाएं:-

इस समय जितना हो सकें आपको ज्यादा तला भुना खाने से बचना चाहिए क्योंकि यदि आप अधिक तले भुने खाने का सेवन करते है, तो इसके कारण आपको पेट में जलन, गैस आदि की समस्या हो जाती है, इसीलिए आपको ज्यादा तले भुने और मसालेदार भोजन का सेवन करने की बजाय हलके और पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए।

बासी भोजन का सेवन न करें:-

बासी व् फ्रिज में रखे हुए ठन्डे भोजन का सेवन भी आपको नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से आपको उस भोजन को पचाने में समस्या होती है, जिसके कारण आपको बाद में पेट दर्द आदि भी होने लग जाता है, और उसमे किसी तरह के पोषक तत्व भी नहीं होते है जिसके कारण वो आपकी सेहत को नुकसान ही पहुंचाता है।

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कटहल व् अनानास का सेवन न करें:-

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प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने खासकर आपको कटहल व् अनानास या उसके रस का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें भी विटामिन सी की अधिकता होने के कारण इसके सेवन से गर्भपात का खतरा बना रहता है।

डिब्बा बंद चीजों का:-

आपको इस दौरान डिब्बा बंद चीजों के सेवन को नज़रअंदाज़ करना चाहिए, जैसे की डिब्बा बंद जूस, ने आहार आदि, क्योंकि इनमे मिलावट होती है,और जो केमिकल इन्हे बनाने में इस्तेमाल किया जाता है, वो कई बार आपको और शिशु के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।

सी फ़ूड न खाएं:-

सी फ़ूड के सेवन से भी आपको परहेज करना चाहे, यदि आप खाना चाहते हैतो मछली का सेवन कर सकते है, और वो अच्छी तरह से पकाई हुई, क्योंकि सी फ़ूड का सेवन बच्चे के दिमाग पर बुरा असर डालता है, और उसे कमजोर बना देता है, इसीलिए शिशु के मानसिक रूप से विकास के लिए इससे दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

इलायची का सेवन न करें:-

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इन दिनों में आपको इलायची का सेवन नहीं करना चाहिए, न ही चाय में, और न ही अन्य किसी चीज में क्योंकि यदि आप इलायची का सेवन अधिक मात्रा में करते है, तो इससे भी आपको गर्भपात का खतरा रहता है।

ड्राई फ्रूट्स से परहेज करें:-

ड्राई फ्रूट्स की तासीर भी गरम होती है, इसके लिए यदि आप प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में इसका सेवन अधिक मात्रा में करते है, तो इससे भी आपके गर्भपात के चांस बढ़ जाते है, इसीलिए आपको गर्भपात की समस्या से बचने के लिए ड्राई फ्रूट्स का सेवन नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनो के लिए अन्य टिप्स:-

  • दाल, पनीर, अंडा, सोयाबीन, दूध, दही, पालक, गुड़, अनार, चना, पोहा, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • फल व् हरी सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।
  • हर दो से तीन घंटे के अंतराल में कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए।
  • पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • ओमेगा-3 और ओमेगा-6 से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए इससे गर्भ में पल रहे शिशु का तेजी से विकास होने में मदद मिलती है।
  • फलों के रस, सलाद, आदि का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीने ये बिल्कुल न करें:-

  • भारी वजन न उठाएं।
  • लम्बी यात्रा से परहेज करें।
  • ज्यादा ड्राइविंग को भी नज़रअंदाज़ करें।
  • हील्स यानि ज्यादा ऊंचे सैंडल्स को न पहने।
  • ज्यादा व्यायाम न करें।
  • डांस आदि न करें।
  • झुककर या पेट के बल कोई भी काम न करें।

तो ये कुछ आहार हैं जिन्हे प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में बिल्कुल नहीं खाना चाहिए साथ ही जो आपको खाना चाहिए इस बारे में भी बताया गया है, पहली तिमाही महिला के लिए बहुत कठिन होता है, क्योंकि इस दौरान महिला बहुत से नए बदलाव से गुजरती है।

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10 गलतियां जो प्रेगनेंसी में नहीं करनी चाहिए

10 गलतियां जो प्रेगनेंसी में नहीं करनी चाहिए, प्रेगनेंसी में भूलकर भी न करें यह काम, गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करनी चाहिए यह गलतियां, गर्भावस्था के लिए टिप्स, प्रेगनेंसी के दौरान ध्यान देने योग्य बातें

गर्भवस्था किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन लम्हा होता है, क्योंकि उसके गर्भ में एक नन्ही जान होती है, जो महिला को उसकी जिंदगी के सबसे खूबसूरत अनुभव का अहसास करवाती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने के लिए और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए महिला को चाहिए की प्रेगनेंसी के दौरान उसके लिए क्या सही है और क्या नहीं इसका अच्छे से ध्यान रखा जाए। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान की गई थोड़ी सी लापरवाही गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। तो आज हम आपको कुछ ऐसे काम बताने जा रहे हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला को नहीं करने चाहिए, क्योंकि यह गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु पर भी नकारात्मक असर डाल सकते हैं।

डाइट न करें

प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का बहुत अधिक महत्व होता है, क्योंकि इसी के जरिये बॉडी में पोषक तत्वों की मात्रा पूरी होती है जो गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करती है। यदि आप खान पान में किसी तरह की लापरवाही करती है, या वजन बढ़ने के डर से डाइट करने की सोच रही हैं तो आपको ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान आपकी परेशानी बढ़ सकती है और शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है।

तनाव

हार्मोनल बदलाव का होना, प्रेगनेंसी में शारीरिक परेशानियों का होना आम बात होती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इन बातों को लेकर बिल्कुल भी तनाव नहीं लेना चाहिए, बल्कि प्रेगनेंसी में होने वाले अनुभव को एन्जॉय करना चाहिए। क्योंकि तनाव के कारण गर्भवती महिला के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँच सकता है, साथ ही इसके कारण गर्भपात होने का खतरा भी रहता है, साथ ही शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में भी कमी आ सकती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को तनाव नहीं लेना चाहिए, बल्कि खुश रहना चाहिए।

ज्यादा भागदौड़

यदि आप गर्भवती है तो आपको इस बात का खास ध्यान देना चाहिए की आप ज्यादा भागदौड़ न करें, क्योंकि इससे आपको कमजोरी व् थकान की समस्या हो सकती है। साथ ही ज्यादा भागदौड़ शुरुआत के दिनों में महिला के गर्भपात का कारण भी बन सकती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को आराम करना चाहिए, और जो भी काम करें उसमे तेजी न करें बल्कि आराम से हर काम को करना चाहिए।

पेट पर जोर न डालें

गर्भवती महिला को कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिसके कारण उसके पेट पर जोर पड़े जैसे की भारी सामान उठाना आदि, क्योंकि यदि गर्भवती महिला के पेट पर जोर पड़ता है। तो इसके कारण गर्भवती महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पेट में दर्द जैसी समस्या होने के साथ शिशु को गर्भ में परेशानी का अनुभव हो सकता है।

दवाइयों का सेवन

डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों के अलावा बिना डॉक्टर से पूछें गर्भवती महिला को किसी भी तरह की दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह गर्भनाल के रास्ते शिशु तक पहुंचकर शिशु को नुकसान पहुंचा सकती है, इसीलिए गर्भवती महिला को इस बात का खास ध्यान देना चाहिए। और यदि कोई परेशानी ज्यादा है तो इसके लिए आपको एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

प्रदूषण व् भीड़भाड़ में न जाएँ

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अधिक प्रदूषण वाले स्थान, ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगह पर नहीं जाना चाहिए। क्योंकि इसके कारण वायरल इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है, जिसके कारण शिशु शारीरिक विकास के साथ मानसिक रूप से भी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। इसके कारण शिशु के बोलने व् सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है।

नशीली चीजों का सेवन

गर्भवती महिला को भूलकर भी प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह के नशे जैसे की धूम्रपान या अल्कोहल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह भी गर्भनाल के रास्ते शिशु तक पहुंचकर शिशु के विकास पर नकारात्मक असर डाल सकते है।

गलत तरीके से न सोए

गर्भवती महिला को सोते समय भी ध्यान रखना चाहिए की महिला गलत तरीके से न सोए। यानी की यदि महिला सीधा होकर सोती है तो इसके कारण बॉडी में ब्लड फ्लो में रूकावट आ सकती है, साथ ही उल्टा होकर सोने से पेट पर दबाव पड़ता है जिसके कारण शिशु परेशानी अनुभव कर सकता है। इसीलिए महिला को करवट लेकर सोना चाहिए, और करवट भी बदल बदल कर सोना चाहिए।

पानी की कमी

महिला को पानी की कमी को भी शरीर में नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि यदि गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी होती है तो इसके कारण सूजन, गैस, कमजोरी जैसी समस्या का महिला को सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए।

डॉक्टर से जांच में लापरवाही

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को समय समय पर अपनी जांच जरूर करवानी चाहिए, और कोई भी परेशानी होने पर उसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए और उसके लिए डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ गलतियां जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करनी चाहिए क्योंकि यदि गर्भवती महिला ऐसी गलतियां करती है तो ऐसा करने के कारण न केवल गर्भवती महिला स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि इसक कारण शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने के लिए और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए महिला को इन गलतियों को नहीं करना चाहिए।

ब्लैक कॉफ़ी पीने के फायदे

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आज के समय में लोग दिन भर काम करते-करते अक्सर बहुत थक जाते है जिसे मिटाने के लिए वे शाम की चाय या कॉफ़ी की मदद लेते है। कोई नॉर्मोल कॉफ़ी की डिमांड करता है तो कोई ब्लैक कॉफ़ी की। कहने को इन दोनों में ही कोको पाई जाती है जो थकान मिटाने में मदद करती है लेकिन दोनों में से ब्लैक कॉफ़ी को अधिक हेल्थी माना जाता है। इसमें कैलोरी की बहुत कम मात्रा होती है जबकि कैल्शियम और पोटैशियम अच्छी मात्रा में पाए जाते है।

इसके अलावा भी इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते है जो कैंसर की रोकथाम करने में लाभदायक होते है। विशेषज्ञों की माने तो आप एक दिन में दो कप बिना शक़्कर की ब्लैक कफ पी सकते है इसके कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है।

साथ ही यह आपके हृदय के लिए भी बहुत लाभकारी होती है। ब्लैक कॉफी व्यक्ति के नर्वस सिस्टम को भी दुरुस्त रखती है और लोगों में आत्महत्या की संभावना को कम करती है। एक एथलिट के लिए भी ब्लैक कॉफी बहुत लाभकारी होती है।

इतना ही नहीं ब्लैक कॉफी शरीर में मौजूद एक्स्ट्रा फैट को कम करके स्फूर्ति बनाए रखती है और साथ ही टाइप 2 डायबिटीज के रिस्क को भी कम करती है। मधुमेह के रोगी बिना शक़्कर की ब्लैक कॉफी पीकर इसे नियंत्रित कर सकते है। वजन घटाने के लिए दो कैप बिना चीनी की ब्लैक कॉफ़ी पियें बहुत लाभ होगा।

क्या आप भी गर्म चाय पीते है? अगर हां, तो जान ले यें नुकसान

दरअसल, ब्लैक कॉफ़ी में 60% पोषक तत्व, 20% विटामिन, 10% कैलोरी और 10% मिनरल्स पाए जाते है जो शरीर को ताकत देते है। इसमें मौजूद कैफीन शरीर के लिए बहुत लाभकारी होता है। लेकिन अगर लिमिट से अधिक सेवन किया जाए तो ये नुकसानदेह भी हो सकती है। इसलिए रोजाना केवल 2 कप ब्लैक कॉफ़ी ही पियें। अगर आप इसे बिना शक़्कर के पियेंगे तो और भी लाभ मिलेगा।

ब्लैक कॉफ़ी पीने के फायदे :-

1. दिमाग के लिए :brain power

ब्लैक कॉफ़ी हमारे मस्तिष्क के लिए बेहद लाभकारी होती है। इसमें मौजूद गुण दिमाग के लिए बहुत अच्छे होते है। दिमाग की सतर्कता और यादाश्त को बढ़ाने के लिए इसका सेवन करना अत्यंत लाभकारी होता है। यह नर्वस सिस्टम को एक्टिव रखने में भी मदद आकृति है जिससे व्यक्ति पागलपन की बीमारी का शिकार नहीं बनता।

2. इंटेलिजेंस :

कॉफ़ी में मौजूद कैफीन साइकोएक्टिव होती है जो बॉडी में मिलकर मूड को बेहतर करने में मदद देती है। साथ ही यह थकान के समय में ऊर्जा देने में भी मदद करती है। अगर आपको कभी ऑफिस में काम करते हुए थकान महसूस हो तो एक कप कॉफ़ी पी लें और देखिये जादू।

3. पेट के लिए :

कॉफ़ी एक डाई-युरेटिक बेवरेज है जिसको पीने के बाद आपको बार बार पेशाब आए है। इसलिए ब्लैक कॉफ़ी पीने से शरीर के सभी टॉक्सिन्स और बैक्टीरिया बाहर निकल जाते है और पेट साफ़ रहता है। लेकिन बिना शक़्कर की कॉफ़ी ही लाभकारी होती है।

4. वजन के लिए :

तेजी से वजन घटाना हो सकता है नुकसानदेह!

बिना चीनी की ब्लैक कॉफ़ी पीने से वजन घटाने में मदद मिलती है। यह शरीर के मेटाबॉल्ज़िम को 50 प्रतिशत तक बढ़ा देती है जिससे आपको वर्कआउट करने में मदद मिलती है। क्योंकि ब्लैक कॉफ़ी पेट साफ़ रखने में भी मदद करती है तो वजन घटाने में अपने आप सहायता मिल जाती है।

5. हृदय रोग :

ब्लैक कॉफ़ी पीने से हृदय को लाभ मिलता है लेकिन केवल तभी जब आप उसे बिना चीनी के पीते है। जी हां, बिना चीनी की ब्लैक कॉफ़ी हृदय को लाभ देने के साथ साथ शरीर में सूजन को भी कम करती है। जिससे cardiovascular disease यानी हृदय रोगों की संभावना कम होती है।

6. एंटी ऑक्सीडेंट :

ब्लैक कॉफ़ी में एंटी ऑक्सीडेंट्स की बहुत अच्छी मात्रा पाई जाती है। इस कॉफ़ी का एक कप पीने से आपको विटामिन बी 2, बी 3 और बी 5, मैंगनीज, मैग्नीशियम और पोटेशियम आदि मिलता है। लेकिन इसे बिना शक़्कर के पीना अधिक लाभकारी होता है।

7. मधुमेह :

जैसा की हमने आपको पहले बताया था की ब्लैक कॉफ़ी पीने से टाइप 2 डायबिटीज का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। इसे पीने से मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है। अगर आपके यहाँ भी कोई इससे परेशान है तो एक बार बिना चीनी की ब्लैक कॉफ़ी का प्रयोग करके देखें।

8. कैंसर :

इतना ही नहीं बिना शक़्कर की कॉफ़ी अब तक की सबसे बड़ी लाइलाज बिमारी कैंसर को भी दूर रखने में मदद करती है। जी हां, ब्लैक कॉफ़ी में एंटी कैंसर गुण पाए जाते है जो कोलोरेक्टल कैंसर के खतरे को कम करते है। साथ ही लीवर के कैंसर से भी यह बचाने में मदद करती है।

9. उम्र के लिए :

बिना शक़्कर की कॉफ़ी पीने से दिमाग और शरीर हमेशा यंग रहता है। ब्लैक कॉफ़ी में मौजूद कैफीन से डोपामाइन का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में इसका सेवन करने से पार्किसंस जैसी बिमारियों से भी बचा जा सकता है।

10. ख़ुशी के लिए :

कॉफ़ी पीने से मूड बहुत अच्छा हो जाता है लेकिन अगर वह ब्लैक कॉफ़ी हो तो बात ही कुछ और है। एक कप कॉफ़ी आपके मूड को अच्छा करने में मदद कर सकती है। इसे पीने से डिप्रेशन जैसी समस्या से लड़ा जा सकता है।

नियमित त्वचा की देखभाल के लिए ये करें!

Skin Care Program for Ladies and Girls 

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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं अक्सर अपनी खूबसूरती पर ध्यान देना भूल जाती है। मेकअप करना तो सभी को याद रहता है लेकिन त्वचा की भीतरी देखभाल में हमेशा लापरवाही होती है। जिसके कारण दिनों दिन आपकी स्किन बेजान और डिहाइड्रेट होने लगती है। शरीर के अन्य हिस्सों को तो फिर भी कपडे पहनकर छुपाया जा सकता है लेकिन फेस? उसका क्या करें?

क्योंकि फेस महिलाओं की खूबसूरती का वो अभिन्न हिस्सा है जिसे चाहकर भी अलग नहीं किया जा सकता। इसलिए तो इसे सवारने के लिए आप कितने सारे मेकअप प्रोडक्ट्स का यूज करती है। जबकि कई बार ये मेकअप प्रोडक्ट ही आपकी स्किन के खराब होने का कारण बनते है। हम जानते है आज के समय में मेकअप के बिना बाहर निकलना थोड़ा मुश्किल है।thnd me skin ki dekhbhal

लेकिन अगर गौर किया जाए तो आप मेकअप के बिना भी खुद को सुन्दर और ब्यूटीफुल दिखा सकती है। जी हां, अगर आपकी स्किन पहले से ही खूबसूरत और हाइड्रेट होगी तो आपको किसी भी तरह के मेकअप की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा ब्यूटी पार्लर जाकर भी आप अपनी स्किन ट्रीटमेंट करवा सकती है। लेकिन इस बिज़ी शिड्यूल में पार्लर के लिए समय निकाल पाना काफी मुश्किल है।

ऐसे में आप चाहे तो कुछ ब्यूटी ट्रीटमेंट्स है जिन्हे आप खुद अपने घर पर भी घर सकती है और पार्लर जैसा निखार पा सकती है। लेकिन इसके लिए आपको रोजाना यूज होने वाले ब्यूटी प्रोडक्ट्स के अलावा कुछ और नए व् असरदार ब्यूटी प्रोडक्ट्स की आवश्यकता होगी। जिन्हे आप अपनी पास की कॉस्मेटिक शॉप से खरीद सकती है। तो आइये जानते है क्या है वे ट्रीटमेंट्स –

नियमित त्वचा की देखभाल करने का तरीका :-

1. स्किन सॉफ्टनर :

यह एक तरह का लोशन होता है जो स्किन केयर में सभी अधिक प्रयोग किया जाता है। इसे आप बाजार में किसी भी अच्छी कॉस्मेटिक की दूकान से खरीद सकती है। लेकिन ध्यान रहे इसकी क्वालिटी अच्छी होनी चाहिए और वे एक्सपायर डेट वाला नहीं होना चाहिए। इसके लिए फेस पर सीरम लगाने से पूर्व स्किन सॉफ्टनर लगाएं। इसमें मौजूद तत्व और चीजें त्वचा पर गहराई से असर डालती है और उसे बेटर बनाने में मदद करती है।

2. स्क्रब :

डेड स्किन सेल को निकालने और डार्क पैचेज को रिमूव करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। वास्तव में त्वचा के ऊपरी हिस्से पर बहुत अधिक मृत कोशिकाएं इकट्ठी हो जाती है। जो रोमछिद्रों को बंद कर देती है। और जब रोमछिद्र बंद हो जाते है तो त्वचा में तरह तरह की समस्याएं होने लगती है। इसके अलावा फेस पर अन्य प्रोडक्ट भी अपना कार्य ठीक से नहीं कर पाते। जैसे अगर किसी लोशन का काम स्किन को हाइड्रेट करना है तो इसके कारण वे स्किन को हाइड्रेट नहीं कर पायेगा क्योंकि रोमछिद्र तो बंद है। इसलिए 10 से 15 दिन के भीतर एक बात स्क्रब जरूर करें।

3. क्रीम मसाज :

मसाज करने से चेहरे की मासपेशियां उत्तेजित हो जाती है जिससे फेस पर एक नया ग्लो और चमक आती है। इसलिए रोजाना हलके हाथों से अपने फेस की मसाज किया करें। इसके लिए उंगलियों से हल्का दबाब देते है फेस की मसाज करें। मसाज करने से स्किन में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है और ऑक्सीजन सेल्स तक पहुंचती है जिसे त्वचा में एक नई जान आ जाती है। इसके लिए आप किसी फेस आयल या फेस क्रीम की मदद ले सकती है। लेकिन ध्यान रहे मसाज करते समय स्ट्रोक हमेशा ऊपर की ओर ही होना चाहिए। इससे त्वचा में कसाव भी आता है।

4. ब्यूटी स्टेप्स :

आप चाहे कितने ही अच्छे ब्यूटी प्रोडक्ट क्यों न ले आएं, लेकिन अगर आप उनका सही तरीके और सही स्टेप्स से न यूज किया जाए तो उनक असर उतना प्रभावकारी नहीं रहता। अर्थात जिस प्रकार क्लींजिंग, टोनिंग और फॉर मॉइस्चराइज़िंग की जाती है उसी प्रकार हर ब्यूटी प्रोडक्ट को स्टेप्स के अकॉर्डिंग यूज करना चाहिए। जैसे दिन के लिए आप सनस्क्रीन लगाने से पूर्व फेस पर मॉइस्चराइज़र जरूर लगाएं। रात में सोने से पहले फेस पर नाईट क्रीम लगाएं। और उसके बाद आई क्रीम और फिर लिप बाम लगाएं।

5. मॉइस्चराइज़िंग :

फेस को हाइड्रेट रखने और स्वस्थ रखने के लिए उसकी मॉइस्चराइज़िंग करना बेहद जरूरी होता है। क्योंकि अगर आप फेस वाश करने के बाद उस पर क्रीम नहीं लगेंगी तो आपका फेस रुखा और बेजान दिखने लगेगा। जो आपकी पर्सनालिटी के लिए ठीक नहीं। इसीलिए हमेशा फेस वाश करने के बाद फेस पर मॉइश्चराइज़र जरूर लगाएं और कहीं बाहर से आने के बाद अपना फेस अच्छे से वाश करें।

6. मेकअप हो ऐसा :

जब भी बात स्किन केयर की आती है तो लड़कियां मेकअप के बारे में सोचने लगती है। जबकि ये मेकअप उनकी स्किन को खराब करने का काम करता है। अगर आप ऊपर बताये गए रूटीन्स को फॉलो कर रही है तो उसके साथ मेकअप का यूज आपकी स्किन के लिए हानिकारक हो सकता है। अगर आपको लगाना ही है तो बहुत ही लाइट और हल्का मेकअप करें। और फेस पर ज्यादा चीजों का इस्तेमाल नहीं करें। आप अपनी आँखों और लिप्स पर दिल खोलकर मेकअप कर सकती है।

तो ये थी कुछ टिप्स जिनकी मदद से आप अपनी त्वचा की नियमित देखभाल कर सकती है। लेकिन ध्यान रहे इन सब चीजों के अलावा आपको अपने खान पान का भी ध्यान रखना होगा ताकि स्किन को पूरी तरह बेस्ट बना सके।

पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में क्या फ़र्क़ होता है

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए सबसे सुखद और खास अनुभव होता है। क्योंकि यह केवल प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानियों से ही नहीं बल्कि बहुत से नए अनुभव से भी भरा होता है। जैसे की पहली बार बच्चे की हार्टबीट को अल्ट्रासाउंड के माध्यम से महसूस करना, बच्चे का विकास किस प्रकार हो रहा है यह जानने की उत्सुकता का होना, शिशु द्वारा गर्भ में हलचल करना, आदि। साथ ही महिला प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियों से भी गुजरती है इसीलिए तो कहा जाता है की महिला के लिए किसी शिशु को जन्म देना किसी जंग से कम नहीं होता है, और एक तरह से न केवल महिला एक नन्ही जान को जन्म देती है बल्कि यह महिला के लिए भी उसके दूसरे जन्म की तरह होता है।

लेकिन पहली बार जब महिला गर्भवती होती है तो उसमे एक अलग ही उत्साह के साथ डर भी देखने को मिलता है जबकि महिला जब दूसरी या तीसरी बार प्रेग्नेंट होती है। तो ऐसे में महिला में न तो वो डर दिखाई देता है और उत्सुकता भी पहले के मुकाबले कम हो जाती है। साथ ही पहली बार प्रेगनेंसी के दौरान महिला शिशु के लिए क्या सही है या नहीं इस बारे में जानकारी लेती रहती है। लेकिन जब दूसरी बार महिला इस अनुभव से गुजरती है तो उसे इन सब चीजों के बारे में पता होता है। इसके अलावा और भी बहुत सी चीजे है जो महिला पहली प्रेगनेंसी में करती है लेकिन दूसरी प्रेगनेंसी में ये सब कम देखा जाता है। तो आइये अब जानते हैं की महिला की पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में क्या फ़र्क़ होता है।

महिला की पहली और दूसरी प्रेगनेंसी में क्या फ़र्क़ होता है:-

महिला का गर्भवती होना उसकी जिंदगी का सबसे खास लम्हा होता है क्योंकि एक नन्हा मेहमान उनकी जिंदगी को रोशन करने के लिए आता है। ऐसे में जब महिला पहली बार प्रेग्नेंट होती है और जब दूसरी बार प्रेग्नेंट होती है तो उसमे कुछ फ़र्क़ देखा जाता है क्या आप भी जानने के लिए उत्सुक हैं की वो फ़र्क़ क्या होता है।

राय कम लेती है:-

पहली प्रेगनेंसी के दौरान महिला सभी से पूछती है चाहे वो उनकी माँ हो या सास भाभी हो या ननंद की प्रेगनेंसी के समय क्या सही होता है क्या नहीं। लेकिन जब महिला दूसरी बार माँ बनती है तो उसे ज्यादातर जानकारी होती है की गर्भावस्था में क्या चीज महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए सही है या नहीं है। तो ऐसे में दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला राय कम लेती है।

डर कम होता है:-

जब महिला पहली बार माँ बनने जा रही होती है तो कहीं न कहीं उसके मन में डर रहता है की उसकी थोड़ी सी लापरवाही उसे और उसके शिशु को किसी तरह का नुकसान न पहुंचा दें, लेबर पेन को लेकर डर होता है या सिजेरियन डिलीवरी को लेकर मन में डर होता है। लेकिन दूसरी बार महिला को देखा जाता है की उसमे इस चीज को लेकर डर कम होता है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान और प्रसव के दौरान उसे अपना ख्याल कैसे रखना है इससे वो अवगत हो जाती है।

उत्साह भी होता है कम:-

शिशु के आने के ख्याल से ही मन में नई उमंगें उठने लगती है। बच्चे के हर पहले अहसास के लिए महिला बहुत उत्साहित रहती है। लेकिन देखा जाता है की दूसरी बार माँ बनने का उत्साह महिला में थोड़ा कम हो जाता है हालांकि शिशु के आने की ख़ुशी उतनी ही होती है। लेकिन महिला पहली प्रेगनेंसी में जिस तरह से हर पल के लिए उत्साहित रहती है दूसरी प्रेगनेंसी में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है।

खान पान को लेकर कम सतर्क होती है:-

महिला जो भी खाती है वो शिशु को भी मिलता है, उसी से उसके बेहतर विकास में मदद मिलती है। ऐसे में पहली प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादातर महिलाएं हर एक चीज के लिए डॉक्टर से राय लेती है की उनके लिए क्या खाना सही है और क्या नहीं। जबकि दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान महिलाएं खान पान को लेकर कम सतर्क रहती हैं और वो खाती है जो उनका मन करता है। बस वो खान पान के प्रति लापरवाही नहीं करती है, लेकिन दूसरी प्रेगनेंसी में वो खान पान के लिए डॉक्टर से कम राय लेती है।

किताबे कम पढ़ती है:-

पहले शिशु के आने पर महिला से कोई लापवाही न हो इसके लिए महिला शिशु के स्वास्थ्य से लेकर उसके खान पान के लिए बहुत सी किताबे और ब्लोग्स आदि को पड़ती है। जिससे उन्हें नवजात की गर्भ में और जन्म के बाद किस तरह केयर की जाए इसका पता चल सके। लेकिन दूसरी बार महिलाओ का यह शौक भी कम हो जाता है क्योंकि पहले शिशु की केयर करने के बाद तो वो खुद दूसरों को राय देना शुरू कर देती है, की नवजात शिशु की केयर करने के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, और उसके लिए क्या सही होता है और क्या सही नहीं होता है।

क्या सही है क्या नहीं इसके बारे में पता चल जाता है:-

प्रेगनेंसी के दौरान महिला बहुत से नए अनुभव से गुजरती है, ऐसे में पहली बार महसूस होने वाले हर लक्षण के लिए महिला दूसरों से पूछती है और घबरा जाती है। लेकिन दूसरी बार की प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा कुछ भी नहीं होता है क्योंकि महिला प्रेगनेंसी में होने वाले सभी बदलाव का अनुभव ले चुकी होती है। जिससे उसे पता चल जाता है की प्रेगनेंसी के दौरान उसके लिए क्या चीज सामान्य है और क्या उसे नुकसान पहुंचा सकती है। और उसे डिलीवरी के समय किस तरह महसूस होता है इस बारे में भी पता चल जाता है।

तो यह हैं कुछ फ़र्क़ जो की महिला में पहली और दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान देखने को मिलते हैं। लेकिन प्रेगनेंसी को लेकर ख़ुशी उतनी ही होती है क्योंकि शिशु के आने से आपका परिवार पूरा होता है, साथ ही घर में आने वाला नन्हा मेहमान सभी के चेहरों पर मुस्कुराहट लता है। और घर की खुशियों को बढ़ाता है लेकिन महिला में पहली प्रेगनेंसी के दौरान और दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान थोड़ा फ़र्क़ देखा जाता है, क्योंकि पहली प्रेगनेंसी में महिला को ज्यादा जानकारी नहीं होती है जबकि दूसरी प्रेगनेंसी में महिला बहुत सी चीजों के बारे में जान जाती है।