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सनबर्न से काली हुई त्वचा को ठीक करने के घरेलू उपाय

Sunburn Remedies in hindi : सनबर्न, गर्मियों में मौसम में होने वाली सबसे आम त्वचा संबंधी समस्या है। जो अक्सर अधिक देर तक धूप के संपर्क में रहने के कारण होती है। सनबर्न के कारण स्किन में डार्क पैचेज, कालापन, मुहांसे, डार्क स्पॉट और टैनिंग की समस्या होने लगती है। गर्मियों में सामान्य तापमान बहुत अधिक होता है जिसके कारण वायु में शुष्कता आ जाती है। और इस शुष्कता की वजह से स्किन फटने भी लगती है। इसके अलावा धूप की तेज किरणें भी स्किन को नुकसान पहुंचाती है।

गर्मियों के दिनों में चेहरे को कवर करने के बाद भी टैनिंग हो ही जाती है। परन्तु जब यह टैनिंग स्किन को काला करने लगे तो वाकई समस्या का विषय बन जाती है। सनबर्न के कारण स्किन पर रेड पैचेज और रैशेस भी होने लगते है। वैसे तो कुछ मेडिकेटिड क्रीम है जिनकी मदद से इन रैशेस और पैचेज को ठीक किया जा सकता है लेकिन वे काफी महंगी आती है। और दूसरी तरफ उनके इस्तेमाल से साइड-इफ़ेक्ट का खतरा भी बना रहता है। अगर आपकी स्किन भी सनबर्न के कारण काली और टैन हो गई है तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि यहाँ हम आपको सनबर्न से काली हुई त्वचा को ठीक करने के कुछ घरेलू उपाय बता रहे है!

सनबर्न क्या है?

किसी भी समस्या को दूर करने से पहले उसके बारे में जान लेना चाहिए ताकि उसे जड़ से ठीक किया जा सकते है। दरअसल तेज धूप के कारण स्किन झुलसने लगती है जिसकी वजह से वह हलकी सांवले या लाल रंग की हो जाती है, मेडिकल भाषा में इसे ही सनबर्न कहा जाता है। अगर आपके साथ भी यह समस्या है तो घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह कोई बड़ी समस्या नहीं है, इसे आप बड़ी आसानी से छोटे मोटे घरेलू उपाय करके ठीक कर सकते है। यहाँ हम आपको उन्ही घरेलू उपायों के बारे में बता रहे है –

सनबर्न से काली हुई त्वचा को ठीक करने के उपाय :-

1. बेकिंग सोडा :

अगर स्किन धूप में झुलस गयी है तो बेकिंग सोडा में पानी मिलाकर थोडा गाढ़ा पेस्ट बना लें। अब इसे त्वचा के प्रभावित हिस्से पर लगाएं। आप चाहे तो बेकिंग सोडा को नहाने के पानी में मिलाकर भी इस्तेमाल कर सकते है। ऐसा करने से भी धूप में झुलसी हुई त्वचा सही हो जाती है।

2. सेब का सिरका :

सेब का सिरका भी इस समस्या को ठीक करने में मददगार होता है। इसके लिए सेब के सिरके की कुछ बुँदे एक कटोरी पानी में डाल लें और उस पानी को रुई से अपनी स्किन पर लगाएं। सनबर्न ठीक हो जाएगा और स्किन की प्राकृतिक रंगत भी वापस आ जाएगी।

3. नारियल का तेल और कपूर :

सनबर्न को दूर करने के लिए नारियल तेल बहुत ही बेहतर उपाय है। इसके इस्तेमाल से स्किन की रंगत तो निखरती ही है साथ-साथ झुलसी हुई त्वचा भी ठीक होती है। इसके लिए नारियल तेल में थोडा सा कपूर मिलाकर त्वचा के प्रभावित हिस्से पर लगाएं। कुछ ही प्रयोगों में स्किन की समस्या पूरी तरह ठीक हो जाएगी।

4. ठंडा दही :

दही में प्रोबायोटिक्स, कैल्शियम, प्रोटीन और जिंक आदि पाए जाते है जो स्किन का ग्लो बढाने के साथ-साथ त्वचा की कोमलता को भी बढ़ाते है। और तासीर से ठंडी होने के कारण यह झुलसी हुई स्किन को भी आराम पहुंचाती है। इसके लिए फ्रिज की ठंडी दही लें और उसे अपनी त्वचा के प्रभावित हिस्सों पर लगायें। कुछ देर रखने के बाद पानी से साफ़ कर लें।

5. एलोवेरा :

इसे हर समस्या का रामबाण माना जाता है। त्वचा से लेकर बालों तक हर तरह की समस्या एलोवेरा के प्रयोग से ठीक की जा सकती है। इसके लिए एलोवेरा जेल की पत्ती तोड़कर उसमे से जेल निकालकर प्रभावित त्वचा पर लगाएं। आप चाहे तो इस जेल से फेस पैक बनाकर भी स्किन के लिए प्रयोग कर सकते है। कुछ ही दिनों में स्किन सामान्य हो जाएगी।

6. संतरे का छिलका :

संतरे के छिलके में मौजूद गुण स्किन की समस्यायों को दूर करके उसकी रंगत सुधारने में मदद करते है। सनबर्न हो जाने पर संतरे के छिलकों को दूध में पीसकर अपने त्वचा के प्रभावित हिस्से पर लगायें। इसके प्रयोग से टैनिंग, दाग-धब्बे, झुर्रियां, मुहांसे और झाइयां तो दूर होंगी ही साथ साथ स्किन का कलर भी बिलकुल साफ़ हो जाएगा।

7. शहद और नींबू :

त्वचा के धूप में झुलस जाने के बाद काफी जलन होती है जिसे शांत करने के लिए शहद और नींबू के रस की मदद ली जा सकती है। इसके प्रयोग से त्वचा की सभी अशुद्धियाँ साफ़ हो जाती है और त्वचा पहले से बेहतर दिखने लगती है।

8. आइस क्यूब :

त्वचा के झुलसने के बाद तुरंत प्रभाव प्राप्त करने के लिए आइस क्यूब से बेहतर कुछ नहीं हो सकता। इसके लिए त्वचा के प्रभावित हिस्से पर फ्रिज पर निकली आइस क्यूब को हलके हाथों से मलें। थोड़ी जलन होगी लेकिन बाद में यह शांत हो जाएगी। इसके प्रयोग से स्किन टाइट भी होती है और स्किन में ग्लो भी आता है।

9. मुल्तानी मिट्टी :

फेस के लिए घरेलू नुस्खों में मुल्तानी मिट्टी का नाम सबसे ऊपर आता है। यह स्किन के लिए बहुत लाभकारी होती है। सनबर्न होने पर मुल्तानी मिट्टी को दूध में मिलाकर लेप बना लें और लेप को अपनी स्किन पर लगायें। सूखने के बाद त्वचा को ठंडे पानी से साफ़ कर लें। इसके प्रयोग से न केवल स्किन की गंदगी साफ़ होगी अपितु स्किन टोन में भी फर्क आएगा।

तो ये थे कुछ घरेलू उपाय जिनकी मदद से धुप में झुलसी हुई त्वचा (सनबर्न) को आसानी से घर बैठे ठीक किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे सेंसिटिव स्किन वाले नींबू युक्त पैक आदि से दूर रहें। क्योंकि आपकी स्किन पर यह रिएक्शन कर सकता है।

प्रसव के 10 लक्षण

डिलीवरी से पहले बॉडी में आने वाले परिवर्तन

प्रसव गर्भावस्था का वो पल होता है जब नौ महीने के लम्बे इंतज़ार के बाद महिला गर्भ में पल रहे शिशु को अपने हाथों में लेकर, सीने से लगाकर मातृत्व के अहसास का करीब से अनुभव करती है। ऐसे में जैसे जैसे डिलीवरी का समय पास आता है वैसे वैसे डिलीवरी को लेकर महिला के मन में तरह के सवाल घूमने लगते हैं। लेकिन ऐसे में घबराना या तनाव लेना महिला की मुश्किलों को बढ़ा सकता है, क्योंकि डिलीवरी एक दम से नहीं हो जाती है बल्कि इससे पहले बॉडी कुछ संकेत देती है, बॉडी में परिवर्तन होने शुरू होते है, जिससे आपको पता चल सकता है की आपकी डिलीवरी का समय पास आने वाला है। और यदि लेबर को लेकर महिला मानसिक रूप से अधिक तनाव लेती है तो यह गर्भवती महिला के साथ गर्भ में शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में महिला को तनाव लेने की बजाय बॉडी में होने वाले परिवर्तन को देखना चाहिए और समझना चाहिए ताकि लेबर को आसान बनाने में मदद मिल सके।

प्रसव के लक्षण

डिलीवरी का समय पास आने पर बॉडी में कुछ ऐसे लक्षण महसूस होते है, जो इस बात की और इशारा करते हैं की डिलीवरी होने वाली है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रसव शुरू होने से होने बॉडी में क्या क्या लक्षण महसूस होते हैं।

पेट से जुडी समस्या

यदि गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के आखिरी समय में कब्ज़, दस्त, उल्टी आदि की समस्या अधिक होने लगे, तो यह इस बात का इशारा होता है की अब प्रसव किसी भी समय हो सकता है। साथ ही इस दौरान अधिक दस्त व् उल्टी की समस्या को अनदेखा न करते हुए इसके लिए एक बार डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।

पेट व् कमर में दर्द

शिशु का आकार बढ़ने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान कमर या हल्के पेट दर्द की समस्या से गर्भवती महिला का परेशान रहना बहुत ही आम बात होती है। लेकिन यदि यह दर्द बढ़ने लगे तो यह प्रसव का समय पास आने का लक्षण हो सकता है। ख़ास कर यदि पेट में दर्द पहले कम हो फिर ज्यादा हो, और बार बार ऐसा हो तो इसका मतलब अब किसी भी समय शिशु जन्म ले सकता है, क्योंकि यह दर्द लेबर पेन की शुरुआत होने की और इशारा करता है।

शिशु का नीचे आना

प्रेगनेंसी के आठवें महीने के आखिरी या नौवें महीने के आस पास शिशु गर्भ में अपनी सही पोजीशन में आ जाता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला को पेट के निचले हिस्से यानी की पेल्विक एरिया के आस पास भार मसहूस हो, और पेट व् सीने के आस पास हल्कापन महसूस हो तो यह भी प्रसव के प्रमुख लक्षणों में से एक होता है।

संकुचन

संकुचन का होना प्रसव का एक अहम लक्षण होता है, खासकर जब महिला को ऐसा महसूस हो की गर्भाशय में संकुचन की गति बढ़ रही है। तो इसका मतलब होता है की आपका हॉस्पिटल जाने का समय आ गया है और अब किसी भी समय आपका नन्हा मेहमान आपकी दुनिया में शामिल हो सकता है।

खून

इम्प्लांटेशन यानी की जब प्रेगनेंसी की शुरुआत में भ्रूण गर्भाशय की दीवार के साथ जुड़ता है तो महिला को हल्की स्पॉटिंग की समस्या हो सकती है। ऐसे ही यदि गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में भी म्यूकस के साथ हल्के खून के धब्बे दिखाई दें तो यह भी प्रसव का समय पास आने का लक्षण हो सकता है।

पानी की थैली

शिशु माँ के पेट में एमनियोटिक फ्लूइड में होता है जिसे पानी की थैली भी कहा जाता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला को प्राइवेट पार्ट से गाढ़ा, सफ़ेद, चिपचिपा पदार्थ बहुत अधिक मात्रा में आता हुआ महसूस हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह इस बात की और संकेत करता है की शिशु आपकी दुनिया में शामिल होने के लिए बिल्कुल तैयार है और अब किसी भी समय उसका जन्म हो सकता है।

मांपेशियों में खिंचाव

यदि गर्भवती महिला को पेट, कमर, जांघो, जोड़ी की मांसपेशियों में अधिक खिंचाव का अनुभव हो तो यह भी गर्भवती महिला की प्रसव पीड़ा के शुरू होने का संकेत देता है। और मांसपेशियों के साथ खिंचाव का अधिक अनुभव और दर्द का अहसास हो तो जल्द से जल्द एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

महिला में भावनात्मक बदलाव

यदि महिला को मूड स्विंग्स अधिक होने लगे जैसे की गुस्सा व् चिड़चिड़ापन अधिक महसूस होने लगे, महिला शिशु के आने की तैयारियों में जुट जाए, शिशु के लिए जरुरी सामान इक्कठा करने लगे, तो महिला में अचानक आये इस भावनात्मक बदलाव का मतलब भी प्रसव का समय पास आने का संकेत हो सकता है।

नींद

प्रसव का समय पास आने पर महिला की नींद भी बढ़ जाती है लेकिन वजन बढ़ने के कारण, बैचनी का अनुभव होने पर महिला पर्याप्त नींद लेने में असमर्थ रहती है। ऐसा होना भी गर्भवती महिला की बॉडी का संकेत देना होता है की डिलीवरी अब किसी भी समय हो सकती है या लेबर पेन शुरू होने का संकेत होता है।

वजन

डिलीवरी का समय पास आने पर महिला के वजन का अचानक से बढ़ जाना या घट जाना भी प्रसव पीड़ा का संकेत होता है। और इस तरह से वजन बढ़ने या घटने के कारण गर्भ में पल रहे शिशु पर किसी भी तरह का बुरा असर नहीं पड़ता है।

तो यह हैं वो लक्षण जो महिला की डिलीवरी का समय पास आने वाला है इस बात की और इशारा करते है। ऐसे में महिला को इनमे से कोई भी लक्षण महसूस हो तो बिना देरी किये जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से मिलना चाहिए। ताकि किसी भी तरह की परेशानी से बचने, गर्भवती महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

स्किन पर पिम्पल होने के कारण

स्किन पर पिम्पल की समस्या से आज कल टीनएजर्स बहुत परेशान रहते है, इन्हे मुहांसे भी कहा जाता है। चेहरे पर पिम्पल का होना आपको काफी परेशान कर सकता है क्योंकि न तो यह देखने में अच्छा लगते है, और कई बार इसमें दर्द व् पस की परेशानी भी हो जाती है। और चेहरे पर पिम्पल होने के बाद इस परेशान का बार बार आना जाना लगा ही रहता है। और इनसे बचने के लिए कई लडकियां व् लड़के महंगी क्रीम या मेकअप का सहारा भी लेते है।

बार बार मेकअप करना चेहरे की स्किन पर गलत प्रभाव भी डाल सकता है, साथ ही महंगी क्रीम का इस्तेमाल भी कई बात उतना असरदार नहीं होता है। क्या आप भी पिम्पल की समस्या से परेशान है? यदि हाँ तो इसके उपाय को जानने से पहले जरुरी है की इसके कारण क्या होते है इसके बारे में पता होना चाहिए ताकि इनसे बचने में आपको मदद मिल सकें। तो आइये आज हम आपको विस्तार से बताते है की स्किन पर पिम्पल होने के क्या कारण होते है और आप किस प्रकार इस समस्या से बच सकते है।

स्किन पर पिम्पल होने के कारण:-

ऑयली स्किन:-

जिन लोगो की स्किन ऑयली होती है, उन्हें यह परेशानी हो सकती है। क्योंकि स्किन पर होने वाला ऑयल स्किन पर होने वाले छिद्रो को बंद कर देता है जिसके कारण पिम्पल होने लगते है।

स्किन की साफ़ सफाई न रखना:-

जब भी आप कहीं बाहर जाते है तो मिट्टी का जमाव आपकी स्किन पर होता है, ऐसे में यदि आप बाहर से आने पर अपने चेहरे को पानी या फेस वॉश से अच्छे से साफ़ नहीं करते है। तो यह आपकी स्किन पर विपरीत प्रभाव डालती है जिसके कारण पिम्पल होने लगते है।

दवाइयां:-

अधिक दवाइयों के सेवन से आपको बार बार इस समस्या का सामना करना पड़ता है। क्योंकि ज्यादा एंटीबायोटिक दवाइयों के सेवन से शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते है जिसके कारण आपको पिम्पल का होना आम बात होती है।

स्किन पोर्स बंद होने के कारण:-

स्किन पर छोटे छोटे छिद्र होते है जो आपकी स्किन को अच्छे से पोषित करने में मदद करते है लेकिन यदि आपके स्किन पोर्स बंद हो जाते है जिसके कारण आपको पिम्पल होने लगते है। इसीलिए चेहरे के लिए आपको क्लींजिंग, मॉइस्चराइजिंग आदि का इस्तेमाल करते रहना चाहिए।

डैंड्रफ:-

बालों में होने वाला डैंड्रफ भी आपकी स्किन पर बुरा प्रभाव डालता है जिसके कारण आपको स्किन पर पिपंले आदि होने लगते है।

डिप्रेशन:-

आपके शरीर मैं होने वाली आधी से ज्यादा परेशानियों का कारण तनाव होता है। और तनाव होने के कारण ही आपकी स्किन पर पिम्पल भी हो सकते है।

खान पान में लापरवाही:-

जो लोग ज्यादा तेलीय खाना खाते है, बाहर का ज्यादा खाना खाते है तो इसके कारण भी आपकी स्किन को अच्छे से पोषण नहीं मिलता है जिसके कारण आपको पिम्पल की समस्या हो सकती है। इसीलिए यह समस्या टीनएज में ज्यादा इसीलिए देखी जाती है क्योंकि पढाई आदि के कारण खान पान में पर वो ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते है।

हार्मोनल बदलाव के कारण:-

शरीर में हॉर्मल बदलाव होना आम बात होती है जैसे की लडकियां जब टीनएज में आने लगती है तो शरीर में बहुत से बदलाव होते है, पीरियड्स के दौरान, प्रेगनेंसी के दौरान, आदि भी यह परिवर्तन शरीर में होते है जिसके कारण चेहरे पर पिम्पल होना आम बात होती है।

पेट से सम्बंधित परेशानी:-

यदि आपकी पाचन क्रिया सही नहीं है, जैसे की आपको हमेशा कब्ज़, गैस आदि की परेशानी रहती है तो इससे भी आपकी स्किन पर प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण पिम्पल आदि की समस्या हो जाती है।

अधिक केमिकल का इस्तेमाल:-

चेहरे की साफ़ सफाई के लिए आप बहुत सी चीजों का इस्तेमाल करते है लेकिन अधिक मात्रा में यदि आप केमिकल युक्त पदार्थो का इतेमाल करते है तो भी आपको चेहरे पर पिम्पल की समस्या हो सकती है।

पिम्पल से छुटकारा पाने के टिप्स:-

टमाटर और खीरे का प्रयोग:-

आधा खीरा और एक टमाटर को अच्छे से पीस कर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद इसे मास्क की तरह चेहरे पर लगाएं। और थोड़ी देर के लिए इसे चेहरे पर छोड़ दें, और उसके बाद ठन्डे पानी से चेहरे को धो लें। ऐसा नियमित करने से न केवल पिम्पल दूर होते है बल्कि आपके चेहरे को ग्लोइंग बनाने में भी मदद मिलती है।

बेसन और दूध:-

घर में बेसन हमेशा मिल जाता है, और यह आपके पिम्पल को दूर भगाने का एक असरदार उपाय है। इसके लिए आप दो चम्मच बेसन में कच्चा दूध मिलाकर एक पतला पेस्ट तैयार करें, आप चाहे तो इसमें दो तीन बूंदे निम्बू के रस की भी मिलाएं। उसके बाद इस पेस्ट को अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद साफ़ पानी से धो लें। हफ्ते में दो से तीन बार इस उपाय को करने से आपको चेहरे को क्लीन करने में मदद मिलती है।

एलोवेरा:-

ताजा एलोवेरा का पत्ता तोड़कर उसका छिलका उतार कर उसमे से जैल निकाल लें। उसके बाद इसे अच्छे से पीसकर इससे चेहरे पर दो मिनट मसाज करें, और उसके बाद इसे चेहरे पर सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद साफ़ पानी से इसे धो लें, ऐसा नियमित करने से आपको चेहरे से पिम्पल को खत्म करने में मदद मिलती है।

बेकिंग सोडा:-

आधा चम्मच बेकिंग सोडा में थोड़ा सा गुलाबजल मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद उस पेस्ट को अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं। और सूखने के बाद ठन्डे पानी की मदद से अपने चेहरे को धो लें। हफ्ते में एक या दो बार इस उपाय को करने से आपको चेहरे को पिम्पल फ्री करने में फायदा होता है।

आलू का रस:-

आलू को क्रश करके उसका रस निकाल लें, और रुई की मदद से इसे अपने चेहरे पर लगाएं ऐसा दो तीन बार करें। नियमित इस उपाय को करने से न केवल आपकी स्किन ग्लोइंग बनती है। बल्कि ऐसा करने से पिम्पल के साथ झुर्रियों को दूर करने में भी फायदा मिलता है। आप चाहे तो आलू को छीलकर उसकी स्लाइसेस काटकर भी इससे चेहरे पर मसाज कर सकते है।

शहद और निम्बू:-

एक चम्मच शहद में एक निम्बू का रस निकालकर उसे अच्छे से मिक्स करें, उसके बाद इसे चेहरे पर लगाएं। थोड़ी देर चेहरे पर लगे रहने के बाद गुनगुने पानी की मदद से चेहरे को साफ़ कर दें। इस तरीके को हफ्ते में तीन से चार बार करें इससे चाहे की साफ सफाई करने में मदद मिलती है जिससे स्किन पोर्स खोलने में मदद मिलती है और पिम्पल की समस्या से राहत मिलती है।

स्किन से पिम्पल को खत्म करने के अन्य उपाय:-

  • कच्चे दूध को रुई की मदद से दिन में तीन से चार बार चेहरे पर लगाएं, इससे पिम्पल को दूर करने के साथ चेहरे को ग्लोइंग भी बनाया जा सकता है।
  • एक कटोरी में एक चम्मच चावल का आटा, थोड़ा सा कच्चा दूध और थोड़ी सी ग्रीन टी मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर चेहरे पर लगाएं।
  • खीरे की स्लाइसेस काटकर चेहरे पर लगाने से भी आपको पिम्पल को दूर करने में फायदा मिलता है।
  • भरपूर नींद न लेने के कारण भी पिम्पल की परेशानी होती है इसीलिए एक दिन में कम से कम आठ घंटे की नींद आपको जरूर लेनी चाहिए।
  • अपने खान पान में आपको संतुलित व् पौष्टिक आहार को शामिल करना चाहिए जिससे स्किन को भी पोषण मिल सकें।
  • स्किन की साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए कहीं से भी आने पर चेहरे को साफ पानी से जरूर धोना चाहिए।
  • टी ट्री ऑयल की कुछ बूंदे चेहरे पर लगाएं इससे भी चेहरे से पिम्पल को दूर करने में मदद मिलती है।
  • मुल्तानी मिट्टी, चन्दन पाउडर, और गुलाबजल का पेस्ट चेहरे पर लगाने से भी आपको फायदा मिलता है।
  • अंडे को फैट कर चेहरे पर लगाने से भी स्किन से जुडी परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है।

तो यदि आप भी पिम्पल से परेशान है तो आपको भी अपनी स्किन की अच्छे से देखभाल करनी चाहिए ताकि आपको इस समस्या से बचाव में मदद मिल सकें। साथ ही यदि आपके चेहरे पर पिम्पल हैं तो आपको इनसे बचने के लिए ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल करना चाहिए। ताकि आपको इस परेशानी को खत्म करके अपनी स्किन को साफ़ और ग्लोइंग बनाने में मदद मिल सकें।

गर्भधारण करने के बाद इन आदतों से दूर रहें अगर स्वस्थ बच्चा चाहते हैं तो

सभी गर्भवती महिलाएं चाहती हैं की गर्भ में शिशु और डिलीवरी के बाद शिशु हष्ट पुष्ट हो, तंदरुस्त हो और बुद्धिमान हो। और इसके लिए जरुरी होता है की महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखे। जैसे की अपने खान पान का, अपने स्वास्थ्य का क्योंकि गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह से गर्भवती महिला पर ही निर्भर करता है। इसीलिए तो कहा जाता है की स्वस्थ महिला के गर्भ में स्वस्थ शिशु का निवास होता है। और ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। और कुछ आदतों से तो बिल्कुल दूर रहना चाहिए यदि महिला चाहती है की उसके गर्भ में स्वस्थ शिशु का निवास हो।

प्रेगनेंसी में महिला को इन आदतों से रखनी चाहिए दूरी:- प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना दुगुना ध्यान देना चाहिए क्योंकि इससे गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। तो आज हम उन्ही आदतों की बात करने जा रहें है जिनसे यदि महिला प्रेगनेंसी में दूरी बनाएं रखती है तो डिलीवरी के बाद उसे स्वस्थ शिशु को जन्म देने में मदद मिलती है।

खान पान की लापरवाही न करें:- स्वस्थ रहने के लिए सबसे जरुरी होता है की आप भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों का सेवन करें। और इसके लिए आपको अपने आहार के साथ बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। यदि आपकी ऐसी आदत है तो प्रेगनेंसी के समय आपको अपने आहार को समय से लेना चाहिए, साथ ही जंक फ़ूड को छोड़कर पोषक तत्वों से भरपूर आहार जैसे दालें, हरी सब्जियां, फल आदि का सेवन भरपूर करना चाहिए।

तनाव न लें:- गर्भपात का एक कारण आपका तनाव भी हो सकता है साथ ही यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान यदि तनाव में रहते है। तो इसके कारण शिशु के मानसिक विकास व् शारीरिक विकास पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान आपको तनाव न लेते हुए हमेशा खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए।

नशा न करें:- नशा न केवल आपकी सेहत के लिए हानिकारक होता है बल्कि इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में यदि आप धूम्रपान या अल्कोहल का सेवन करते हैं तो प्रेगनेंसी के दौरान आपको इन सब चीजों के सेवन से परहेज रखना चाहिए व् शिशु के जन्म के बाद भी किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए।

अधिक व्यायाम न करें:- प्रेगनेंसी के दौरान थोड़ा बहुत व्यायाम करना अच्छी बात होती है। लेकिन यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान भी अपनी फिटनेस के लिए अधिक व्यायाम करती है। तो यह आपके लिए और गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान आपको अधिक व्यायाम न करें और आपकी इस आदत को बदल दें।

सही तरीके से सोएं:- कई महिलाओं की आदत होती है की वो उल्टी होकर सोती हैं उन्हें अपनी इस आदत में सुधार करना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी में पेट के भार सोने से आपको परेशानी हो सकती है। साथ ही आपको बिल्कुल सीधा भी न सोना चाहिए, क्योंकि इससे बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं होता है। इसीलिए प्रेगनेंसी में पूरा समय आपको करवट लेकर ही सोना चाहिए। साथ ही महिला को भरपूर नींद भी लेनी चाहिए, और यदि रत को नींद पूरी नहीं होती है तो आप दोपहर के समय भी सो सकती हैं।

डॉक्टर से राय लें:- प्रेगनेंसी के समय आपको डॉक्टर से समय समय पर राय लेते रहना चाहिए। और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इससे आपको गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के बारे में पता चलता रहता है। और साथ ही आपको भी किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका आपको प्रेगनेंसी के दौरान ध्यान रखना चाहते हैं यदि आप अपनी इन आदतों में बदलाव लाते हैं तो इनसे आपको गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। साथ ही आपको अपने डॉक्टर से भी एक बार जरूर राय लेनी चाहिए की प्रेगनेंसी में आपको किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए जिनसे आपको शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सकें।

प्रेग्नेंट होना चाहती हैं? तो ये योगा और एक्सरसाइज करें

शादी करने से यदि महिला का अस्तित्व पूरा होता है, तो महिला सम्पूर्ण तब होती है जब वो शिशु को जन्म देती है, आपने देखा होगा की शादी के बाद सभी आपसे मज़ाक करने लगते है की खुशखबरी कब दे रही हो, और ऐसे में यदि एक या दो साल तक बच्चा न हो तो तरह तरह की धारणाएं भी बना लेते है, बेशक आप अभी बच्चे का निर्णय नहीं लेना चाहते है, इसके अलावा कई दम्पति ऐसे भी होते है जो अपने परिवार को आगे बढ़ाना चाहते है लेकिन ऐसा नहीं हो पाता है, और ऐसा भी जरूरी नहीं है की केवल महिला को ही कोई समस्या हो बल्कि कई बार पुरुषो में होने वाली कमी के कारण भी आपको ये समस्या हो सकती है।

इन्हें भी पढ़ें:- सूनी गोद में गूंजेगी किलकारियां! ये है तरीके

इसके अलावा कई बार महिलाओ की ओवरीज़ में अंडा बनता है, है, तो कई बार वो निषेचित नहीं हो पाता है, जिसके कारण महिला का गर्भ नहीं ठहर पाता है, क्या आप भी इस समस्या से परेशान है, और इसके लिए डॉक्टर्स के चक्कर काट रहीं है, क्योंकि अंडे का निषेचन सही से होना ही नहीं, फैलोपियन ट्यूब में खराबी, गर्भाशय से जुडी समस्या , स्पर्म काउंट से सम्बंधित परेशानी होने के कारण भी कई बार महिला का गर्भ नहीं ठहर पाता है, तो आइये आज हम आपको प्रेग्नेंट होने के लिए कुछ योगासन और आयुर्वेदिक उपाय बताने जा रहे है, जिन्हे यदि आप नियमित करती है तो आपकी इस समस्या का हल होने में मदद मिल सकती है।

प्रेगनेंट होने के लिए करें यह योगासन:-

कपालभाति:-

यह प्राणायाम काफी आसान होने के साथ आपके लिए काफी फायदेमंद भी हैं इसे करने से आपके शरीर की बंद या सुचारु रूप से काम न करने वाली कोशिकाओं को मदद करता है, और नियमित सुबह महिला और पुरुष दोनों को ही कम से कम पंद्रह मिनट के लिए इसे जरूर करना चाहिए, तो आइये जानते है कपालभाति करने की विधि।

कैसे करें:-

  • इसे करने के लिए आप मुद्रा में बैठे अपनी आँखों को बांध करके अपने शरीर को ढीला छोड़ दें।
  • उसके बाद अपनी दोनों नॉस्ट्रिल से सांस लें, जिससे की आपका पेट फूल जाएँ, और उसके बाद अपने पेट की मांसपेशियों को बल से सिकोड़ते हुए सांस को छोड़ दें।
  • और बार बार ऐसा करें, उसके बाद आपको पेट सांस लेने के लिए ज्यादा जोर भी नहीं लगाना पड़ेगा।
  • इस क्रिया से आपके पेट से अआप्का पेट फूलता और सिकुड़ता है जिससे आपके शरीर के साथ पेट की कोशिकाओं को भी सुचारु रूप से काम करने में मदद मिलती है।

शीर्षासन:-

शीर्षासन

सिर के बल किए जाने वाले योगा को शीर्षासन कहा जाता है, यह काफी मुश्किल होता है इसीलिए हर कोई इसे आसानी से नहीं कर पाता है, लेकिन इससे आपके स्वास्थ्य को सही करने के साथ आपकी ख़ूबसूरती को भी बढ़ाने में मदद मिलती है, साथ ही यह निसंतान दम्पतियों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है, आइये जानते है की इसे कैसे करना चाहिए।

कैसे करें:-

  • इसे करने के लिए सबसे पहले एक साफ़, समतल जगह का चयन करें।
  • उसके बाद आप उस जगह पर कोई दरी या कंबल बिछा लें।
  • उसके बाद वज्रासन में बैठे, और इस बात का ध्यान रखें की जब आप आगे की और झुकें तो आपके पास जगह हो।
  • उसके बाद आगे की और झुकते हुए अपनी कोहनियो को आगे की और टिका लें, और अपनी उँगलियों को जोड़ लें।
  • अब अपनी सिर को अपनी हथेलियों के मध्य रखें, और अपनी सांस को सामान्य रखें।
  • उसके बाद अपने सिर को जमीं पर टिकाएं, और धीरे धीरे अपना अपने शरीर को उठाते हुए अपना सारा भार अपने शरीर पर दें, इस अवस्था को ही शीर्षासन कहा जाता है।

इन्हें भी पढ़ें:- IVF क्या होता है? क्या ये माँ बनने का सही तरीक़ा है? 

बाह्य प्राणायाम:-

इस प्राणायाम में आपको अपनी सांस बाहर की तरफ छोड़नी होती है, इसीलिए इसे बाह्य प्राणायाम कहा जाता है, इसे करने से भी आपको प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है, तो आइये जानते है की आप इसे किस प्रकार कर सकते हैं।

कैसे करें:-

  • इसे करने के लिए आप साफ़ और समतल जगह पर चटाई आदि बिछाकर पद्मासन, सुखासन की अवस्था में बैठ जाएँ।
  • उसके बाद अपने मध्यपट को नीचे की और झुकाएं, और साँस फूलाने की कोशिश करें।
  • उसके बाद तेजी से सांस छोड़े, और अपने पेट पर जोर दें।
  • उसके बाद धीरे-धीरे अपनी छाती को ठोड़ी लगाने की कोशिश करे, साथ ही अपने पेट को हल्के हाथो से दबाकर साँस बाहर निकलने की कोशिश करते रहे, और थोड़ी देर तक इसी अवस्था में रुकें।
  • आखिर में अपने मध्यपट को धीरे धीरे छोड़ें, और हल्का महसूस होने दें।

सर्वांगासन:-

सर्वांगासन

सर्वांगासन करने से भी आपको माँ बनने में आने वाली परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है, साथ ही यह आपके पूरे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है, इसीलिए इसे सर्वांगसन कहा जाता है, आइये जानते है की इसे कैसे किया जाता है।

कैसे करें:-

  • इसे करने के लिए एक समतल साफ़ जगह का चुनाव करें, और दरी बिचारकर पीठ के बल लेट जाएँ।
  • अपने दोनों पैरों को एक दूसरे के आस पास रखें, और अपने हाथों को सीधा धरती पर रखें।
  • उसके बाद अपने मुँह को आकाश की और रखें।
  • उसके बाद अपनी आँखों को बंद करें और अपने शरीर को ढीला छोड़ दें।
  • फिर गहरी सांस लें, और अपने पैरों को ऊपर की और उठाएं, याद रखें की आपके पैर मुड़े नहीं।
  • पैरों के साथ अपनी कमर को भी ऊपर उठाने की कोशिश करें।
  • अपनी कमर को उठाएं के लिए अपने हाथों का सहारा लें, और साथ ही अपनी कोहनियों को धरती पर टिकाएं रखें।
  • पैर और कमर को उतना ऊपर उठाएं, की गर्दन के साथ बाकी शरीर का समकोण तैयार हो जाएँ।
  • उसके बाद अपनी क्षमता अनुसार आप ऐसे रहें और फिर धीरे धीरे वापिस आएं।

प्रेगनेंट होने के लिए व्यायाम:-

यदि आपको प्रेगनेंसी नहीं हो रही है तो आपको व्यायाम को अपनी दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाना चाहिए, ऐसा करने से आपको अपने शरीर को फिट रखने में मदद मिलती है, जिससे आपके शरीर में होने वाली बीमारियों को दूर होने में मदद मिलती है, इसके लिए आपको कम से कम आधे घंटे तक वाक करनी चाहिए, साथ ही अन्य व्यायाम भी करने चाहिए, नियमित व्यायाम करने से आपको जरूर फायदे मिलेगा।

प्रेगनेंट होने के लिए आयुर्वेदिक उपाय:-

पुरुषो के लिए आयुर्वेदिक उपाय:-

सौ ग्राम अश्वगंधा, शतावर, कौंच, और सफ़ेद मूसली लेकर, उन्हें अच्छे से पीस कर एक बारीक पाउडर बना लें, उसके बाद नियमित सुबह शाम इस पाउडर को एक चम्मच दूध के साथ लें, उन्हें फायदा होगा।

महिलाओं के लिए आयुर्वेदिक उपाय:-

यदि महिलाओ को मासिक धरम से जुडी परेशानी है तो दशमूलारिश का नियमित सेवन करें, उनकी इस परेशानी को दूर होने में मदद मिलती है, इसके अलावा एक चम्मच फलघृत को सुबह और एक चम्मच शाम को दूध के साथ लें उन्हें फायदा मिलेगा।

तो ये कुछ आयुर्वेदिक उपाय है, और कुछ योगासन है जिनके इस्तेमाल से आपको प्रेगनेंट होने में मदद मिल सकती है, साथ ही आपको अपने खान पान, डॉक्टर से जांच आदि भी करवाते रहना चाहिए ताकि यदि कोई कोई और परेशानी हो तो उसके बारे में भी आपको पता चल सकें, और समय रहते उस परेशानी का समाधान हो, साथ ही आपको माँ बाप बनने की ख़ुशी भी मिल सकें।

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ग्रीन टी नुकसान करती है या फायदा? जाने इसके फायदे और नुकसान

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ग्रीन टी भी आज कल लोगो के पसंदीदा पेय पदार्थो में से एक है क्योंकि इसमें मौजूद एंटी वायरल, एंटी बैक्टेरियल, जीवाणुरोधी गुणों के कारण यह लोगो को बहुत फायदा करती है, कई लोग इसका इस्तेमाल अपने वजन को कम करने के लिए तो कुछ अपने चेहरे की रंगत को निखारने के लिए भी करते हैं, लेकिन आपने यह तो सुना होगा की यदि कोई चीज आपके लिए फायदेमंद होती है तो उसके कुछ नुकसान भी होते हैं, कुछ लोग ऐसे भी है जो इसे गलत समय पर पीते हैं इसीलिए भी यह उनको नुकसान करती है, तो आइये अजा हम आपको ग्रीन टी के कुछ फायदे और नुकसान बताने जा रहें हैं साथ ही इसे पीने का सही समय कौन सा होता है इसके बारे में भी बात करेंगे।

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ग्रीन टी के क्या फायदे होते हैं:-

ग्रीन टी आपका वजन कम करने में मदद करता है:-

यह बात कई रिसर्च में भी सामने आई है की ग्रीन टी का सेवन करने से आपके वजन को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है, क्योंकि इससे आपके शरीर में मेटाबोलिज्म को बेहतर बनाने के साथ शरीर में मौजूद अतिरिक्त कैलोरी को भी बर्न करने में मदद मिलती है, जिससे आपके शरीर में जमी अतिरिक्त चर्बी को कम होने में मदद मिलती है, आप इसे बिना शुगर के या फिर निम्बू का रस मिलाकर इस्तेमाल करें और अधिक फायदा मिलता है।

शुगर के रोगियों के लिए है फायदेमंद:-

ग्रीन का सेवन करने से शुगर के रोगियों को बहुत फायदा होता है, क्योंकि इसके सेवन से उनके रक्त में शर्करा की मात्रा का संतुलन बनाएं रखने में मदद करता है, इसमें मौजूद पॉलीफेनोल्स, और पोलीसच्चराइड्स दोनों ही शुगर के रोगी के लिए फायदेमंद होते हैं, इसीलिए मधुमेह के रोगियों को इसका सेवन जरूर करना चाहिए और वो भी बिना शुगर के इससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

कोलेस्ट्रॉल को कम करती है:-

आपके शरीर में दो तरह का कोलेस्ट्रॉल होता हैं गुड और बैड कोलेस्ट्रॉल, ग्रीन टी का सेवन करने से आपके शरीर में गुड और बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा में संतुलन बनाएं रखने में मदद मिलती है, साथ ही बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद मिलती है, जिससे आपका हार्ट हैल्थी रहता है और साथ ही ब्लड में भी वसा की मात्रा भी नियंत्रित रहती है।

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कैंसर से बचाव करने में मदद करती है:-

ऐसा रिसर्च में साबित किया गया है की नियमित ग्रीन टी का सेवन करने से कैंसर से बचाव करने में मदद मिलती है, ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण विटामिन इ से चौबीस गुना और विटामिन सी से सौ गुना अधिक प्रभावी होते हैं, जो की आपको ब्रैस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, पेट के कैंसर, गर्भाशय व् अग्नाशय के कैंसर से बचाव करने में मदद करते हैं, इसीलिए अपने शरीर को कैंसर से बचाने के लिए आपको ग्रीन टी का सेवन जरूर करना चाहिए।

हड्डियों को मजबूत करने में मदद करती है:-

ग्रीन टी का सेवन करने से आपकी हड्डियों को मजबूत करने में मदद मिलती है,क्योंकि इसमें उच्च मात्रा में फ्लोराइड होता है जो आपकी हड्डियों में फ्रैक्चर के जोखिम को कम करता है, साथ ही नई कोशिकाओं का निर्माण करता है जो की हड्डियों के लिए आवश्यक होती है, और हड्डियों के घनत्व को भी बढ़ाने में आपकी मदद करती है, साथ ही हड्डियों में सूजन की समस्या से राहत दिलाने में भी आपकी मदद करती है, इसीलिए अपनी हड्डियों की मजबूती को बरकरार रखने के लिए आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

सांस की बदबू की समस्या से निजात दिलाने में मदद करता है:-

सांस की बदबू से कई लोग परेशान होते हैं लेकिन ग्रीन टी उन लोगो की समस्या का हल निकालने में मदद करती है, क्योंकि इसमें मौजूद एंटी बैक्टेरियल गुण आपके गले में होने वाले बैड बैक्टेरिया को खत्म करने में मदद करती है जिससे आपको इस समस्या से निजात मिलता है, इससे राहत पाने के लिए आपको ग्रीन टी को उबाल कर उसे ठंडा करके उससे दिन में तीन से चार बार कुल्ला करना चाहिए आपको इसका असर जरूर दिखाई देगा।

ग्रीन टी आपकी त्वचा में लाए निखार:-

ग्रीन टी का सेवन करने से आपकी त्वचा में भी निखार लाने में मदद मिलती है, साथ ही इसका इस्तेमाल बहुत से ब्यूटी कॉस्मेटिक को बनाने में किया जाता है, ग्रीन टी का सेवन करने से आपके शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद मिलती है, जिससे आपकी त्वचा को भी पोषण मिलता है और आपके चेहरे पर निखार लाने में मदद मिलती है।

बालों के लिए भी वरदान है ग्रीन टी:-

बालों से जुडी बहुत सी समस्याओ का समाधान करने में ग्रीन टी आपकी बहुत मदद करती है, इसके नियमित सेवन से आपके बालों की लम्बाई को बढ़ने में मदद मिलती है, और साथ ही यदि आप ग्रीन टी बनाकर सर धोने के बाद दस मिनट के लिए अच्छे से अपने पूरे बालों में लगा लें, और उसके बाद दस मिनट के लिए छोड़ दे, और फिर साफ़ पानी से धो लें, इससे आपके बालों के रूखेपन को दूर करने, रुसी की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

ग्रीन टी के नुकसान:-

  • ग्रीन टी में टैनिन मौजूद होता है जो आपके लिए पेट दर्द या कब्ज की वजह बन सकता है।
  • और जिन लोगों के पेट में अल्सर या फिर एसिडिटी की परेशानी ज्यादा रहती हो उन्हें ग्रीन टी को अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए।
  • अगर आप एनीमिया की समस्या से परेशान हैं तो ग्रीन टी को ज्यादा पीने से आपकी परेशानी बढ़ सकती है, ऐसे में आप खाने के साथ ग्रीन टी या अन्य किसी चाय और कॉफ़ी का सेवन भी न करें।
  • ग्रीन टी में कैफीन होता है, और कैफीन ज्यादा मात्रा में लेने से शरीर में कैल्शियम अच्छे से अब्ज़ॉर्ब नहीं हो पाता है, जिसके कारण ऑस्टियोपॉरोरिस का खतरा बढ़ जाता है।
  • गर्भावस्था के दौरान या स्तनपान कराने वाली महिला को एक या दो कप ही इसका सेवन करना चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद कैफीन आपके शिशु तक पहुँचता है जो उसके लिए नुकसानदायक होता है।
  • ग्रीन टी का सेवन अधिक मात्रा में करने से खाने में मौजूद नॉन हीम आयरन अच्छे से आपकी बॉडी अब्ज़ॉर्ब नहीं कर पाती है, लेकिन यदि आप अपनी ग्रीन टी में निम्बू को मिक्स करते हैं तो ये समस्या नहीं होती है।

ग्रीन टी पीने का सही और गलत समय कौन सा है:-

  • सुबह सुबह उठकर आपको ग्रीन टी का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • नाश्ते या लंच के साथ ग्रीन टी का सेवन नहीं करना चाहिए, बल्कि आप चाहे तो नाश्ता करने के एक घंटे बाद या लंच करने के बाद आप ग्रीन टी का सेवन कर सकते है।
  • यदि आप नियमित सुबह उठकर व्यायाम करते हैं तो फ्रेश होने के बाद और व्यायाम करने के आधे घंटे पहले आप ग्रीन टी का सेवन कर सकते हैं, क्योंकि यह आपका स्टेमिना बढ़ाने में मदद करती है।
  • देर रत भी ग्रीन टी का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें मौजूद कैफीन आपके लिए अनिंद्रा की समस्या का कारण बन सकता है।

तो ये हैं कुछ फायदे और नुकसान जो आपको ग्रीन टी का सेवन करने से होते है, इसीलिए किसी भी चीज का सेवन उचित मात्रा में ही करना चाहिए यदि आपने ग्रीन टी का सेवन करना है तो दिन में दो या तीन कप लें, लेकिन वो भी सही समय पर क्योंकि गलत समय पर ली गई ग्रीन टी भी आपके लिए नुकसानदायक होती है।

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प्रेगनेंसी में अजवायन खाने के फायदे

अजवायन भारतीय व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाने वाला एक मसाला है। और यह अपने औषधीय गुणों के कारण शरीर से सम्बंधित परेशानियों से निजात पाने में भी मदद करता है। लेकिन गर्भवती महिला को इसका सेवन करना चाहिए या नहीं इसके बारे में जानने के बाद ही महिला को इसका सेवन करना चाहिए। तो इसका जवाब है, हाँ गर्भवती महिला चाहे तो ज्यादा नहीं लेकिन सिमित मात्रा में अजवायन का सेवन कर सकती है। क्योंकि अजवाइन में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला को बहुत सी सेहत सम्बन्धी परेशानियों से बचाव करने में मदद करते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की अजवायन का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को कौन से फायदे मिलते हैं।

कब्ज़ से मिलता है निजात

प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ एक ऐसी परेशानी है जिससे अधिकतर गर्भवती महिलाएं परेशान रहती है। और यह समस्या प्रेगनेंसी की पहली और तीसरी तिमाही में महिला को अधिक हो सकती है। लेकिन अजवाइन में थोड़ा सा नमक मिलाकर गुनगुने पानी के साथ लेने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से बहुत जल्दी राहत पाने में मदद मिलती है।

पाचन क्रिया होती है बेहतर

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण, गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण गर्भवती महिला की पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को पेट फूलना, एसिडिटी होना, खाने का हज़म न होना, सीने में जलन महसूस होना जैसी परेशानी होती है। लेकिन अजवायन का सेवन करने से गर्भवती महिला को इन सभी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलता है।

कोलेस्ट्रॉल होता है कण्ट्रोल

गर्भवती महिला को कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान परेशानी का अनुभव अधिक करना पड़ता है। और यदि प्रेग्नेंट महिला को कोई ऐसी दिक्कत होती है। तो इससे निजात पाने के लिए अजवायन का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद होता है।

खांसी जुखाम से राहत

यदि गर्भवती महिला को खांसी जुखाम की समस्या अधिक होती है तो इस समस्या से राहत पाने के लिए भी अजवाइन का सेवन करने से गर्भवती महिला को फायदा मिलता है। और यदि महिला को कफ की समस्या होती है तो भी अजवायन का सेवन फायदेमंद होता है।

उल्टी से मिलती है राहत

प्रेगनेंसी के दौरान उल्टी और जी मिचलाना जैसी परेशानी होना भी आम बात होती है। ऐसे में अजवायन का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा अजवायन का सेवन करने से उल्टी से निजात पाने के साथ भूख बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

ब्लड फ्लो होता है बेहतर

अजवाइन का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में ब्लड फ्लो को बेहतर होने में मदद मिलती है। जो गर्भवती महिला और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही अजवायन का सेवन करने से ब्लड में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में भी मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को अजवायन का सेवन करने से मिलते हैं। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी इन फायदों के लिए प्रेगनेंसी में कभी कभार अजवायन का सेवन कर सकते हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की ज्यादा मात्रा में अजवायन का सेवन न करें। क्योंकि अजवायन की तासीर गर्म होती है जिससे माँ व् बच्चे को दिक्कत हो सकती है।

पेट में अगर बच्चा अगर मूव नहीं कर रहा है तो यह तरीके अपनाएँ

गर्भ में शिशु की हलचल गर्भवती महिला के लिए उसकी प्रेगनेंसी के सबसे अनोखा और बेहतरीन अनुभव होता है। क्योंकि बच्चे की हलचल से महिला पेट में बच्चे को और ज्यादा करीब से महसूस करती है। प्रेगनेंसी के पांचवें महीने में महिला बच्चे की हलचल को महसूस कर सकती है। लेकिन जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती हैं उन्हें बच्चे की हलचल को समझने में थोड़ा समय लग सकता है। जबकि दूसरी बार माँ बन रही महिलाओं को इसका अनुभव आसानी से हो जाता है। लेकिन फ़िक्र न करें, पहली बार माँ बन रही महिलाएं भी इसे जल्दी समझ जाती है।

जैसे जैसे बच्चे का विकास गर्भ में बढ़ता है जाता है वैसे वैसे शिशु गर्भ में ज्यादा हलचल करने लगता है। साथ ही धीरे धीरे महिला को यह हलचल ज्यादा समय के लिए महसूस होती है। लेकिन शिशु एक दिन में कितनी बार हलचल करेगा इसका सही से पता लगाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। पर आप चाहे तो गर्भावस्था के दौरान शिशु गर्भ में कितनी बार हलचल करता है इसे गिन सकते हैं। ऐसा करने से प्रेगनेंसी में आपका रोमांच बढ़ने में भी मदद मिलती है। लेकिन कई बार ऐसा होता है की गर्भ में शिशु हलचल कम करता है या बहुत देर तक शिशु की हलचल महसूस नहीं होती है।

गर्भ में शिशु की हलचल न होने पर क्या करें?

गर्भ में बच्चा जब हलचल करता है तो हो आप उसे महसूस कर सकती है। लेकिन कई बार जब आप किसी काम में लगी होती है तो हो सकता है आपको हलचल महसूस न हो। ऐसे में बच्चे की हलचल महसूस न होने पर कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके आप बच्चे की हलचल महसूस कर सकती है। आइये अब जानते हैं वो टिप्स कौन से हैं।

कुछ खाएं

यदि आपको ऐसा लग रहा है की बहुत देर हो गई है और बच्चा गर्भ में हलचल नहीं कर रहा है। तो आपको कुछ तीखा व् चटपटा खाना चाहिए। क्योंकि आपके खाने का स्वाद बच्चे तक पहुँचता है। और जब बच्चा उस स्वाद को महसूस करता है। तो हो सकता है की वो आपको अपनी हलचल के माध्यम से उस पर प्रतिक्रिया दें।

आराम से शांति से लेटें

कई बार काम करते रहने के कारण आपको बच्चे की मूवमेंट का अहसास नहीं होता है। या हो सकता है की बच्चा गर्भ में आराम कर रहा हो। ऐसे में बच्चे की हलचल महसूस करने के लिए आप आराम से शांति से लेट जाएँ। ऐसे में हो सकता है की जब आपको शांति से लेटें और बच्चा बाहर की कोई प्रतिक्रिया न महसूस करे। और ऐसा होने पर बच्चा गर्भ में मूवमेंट करना शुरू कर दें।

ठंडा पानी पीएं

बच्चे की मूवमेंट को महसूस करने के लिए आप ठंडा पानी पीएं। अब आप सोच रही होंगी की ठंडा पानी पीने से क्या होगा? जब आप ठंडा पानी पीएंगी तो इससे एमनियोटिक फ्लूड के तापमान में फ़र्क़ आएगा। और एमनियोटिक फ्लूड के तापमान में फ़र्क़ आने से बच्चा गर्भ में मूवमेंट करेगा।

शोर में जाएँ

गर्भ में बच्चे की सुनने की क्षमता का विकास भी लगातार होता रहता है। और ऐसा माना जाता है की जब बच्चा गर्भ में तेज आवाज़े सुनता है तो चौक जाता है। जिससे वो अपनी प्रतिक्रिया देता है ऐसे में यदि आप तेज आवाज़ में आने सुने या किसी चीज को पटक दें। तो ऐसा करने से हो सकता है बच्चा चौक कर मूव करें।

यदि बच्चे की मूवमेंट न हो तो?

बहुत कोशिश करने के बाद भी यदि बच्चे की गर्भ में बिल्कुल भी मूवमेंट महसूस नहीं हो रही है। तो इसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। और तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि गर्भ में शिशु का ज्यादा समय तक मूव न करना परेशानी खड़ी कर सकता है। खासकर इसका कारण गर्भ में बच्चे को खतरा होना होता है।

तो यह है गर्भ में शिशु की मूवमेंट से जुड़े कुछ टिप्स, ऐसे में आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान बच्चे की मूवमेंट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि बच्चे की हलचल में महसूस न होने के कारण आपको या बच्चे को किसी तरह की परेशानी न हो।

गर्भवती महिलाओं को सोते समय नहीं करनी चाहिए यह गलतियां

प्रेगनेंसी में सोने का तरीका, प्रेगनेंसी टिप्स, प्रेग्नेंट महिला सोते समय रखे इन बातों का ध्यान, Sleeping tips for Pregnant Women

प्रेगनेंसी महिला के लिए बहुत ही अनोखा और खास समय होता है, जिसमे महिला को अपना बहुत अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। महिला को अपने खान पान से लेकर उठने, बैठने, सोने का भी अच्छे से ख्याल रखना पड़ता है, और ऐसा इसीलिए महिला करती है ताकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को और गर्भ में पल रहे शिशु को कोई परेशानी न हो और उन्हें स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें। तो आज हम प्रेगनेंसी के समय महिला को सोते समय क्या क्या गलतियां नहीं करनी चाहिए इस बारे में बताने जा रहें हैं।

पेट के बल न सोएं

गर्भवती महिला को पेट के बल नहीं सोना चाहिए क्योंकि इससे सारा वजन पेट पर पड़ता है, जिसके कारण पेट पर बहुत अधिक दबाव बनता है। और इससे गर्भ में पल रहे शिशु को परेशानी का अनुभव हो सकता है, ऐसे में यह गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बहुत खतरनाक होता है।

सीधा न सोएं

समय के साथ जैसे जैसे महिला का पेट का आकार बढ़ने लगता है तो महिला को सीधा भी नहीं सोना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ता है। क्योंकि पैरों से रक्त का प्रवाह अच्छे से नहीं हो पाता है। जिसके कारण आपको सोकर उठने के बाद चक्कर, पैरों में सूजन आदि की समस्या से परेशान होना पड़ सकता है।

दायीं तरफ करवट लेकर न सोएं

यदि आप पूरी रात दायीं तरफ करवट लेकर सोती है, तो इससे आपके लिवर पर दबाव पड़ता है जिसके कारण शिशु को पर्याप्त मात्रा में पोषण और ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। और इससे बॉडी में होने वाले ब्लड सर्कुलेशन पर भी बुरा असर पड़ता है। और यदि आप ऐसे करवट लेकर सोती है तो आपको बीच बीच में करवट लेते रहना चाहिए ताकि एक ही जगह दबाव न बना रहे।

बायीं तरफ करवट लेकर सोएं

उल्टे हाथ की तरफ करवट लेकर सोना प्रेगनेंसी के दौरान सबसे सही पोजीशन होती है। इससे बच्चे के पोषण में कोई कमी नहीं आती है और साथ ही बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर तरीके से होता है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सोते समय ध्यान रखना चाहिए जिससे गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह की परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके।

विडिओ गर्भवती महिलाओं को सोते समय ये गलतियां नहीं करनी चाहिए

मेहंदी लगाने की सही विधि से ही बाल लम्बे, घने, मुलायम और चमकीले बनेंगे

अच्छे और लम्बे बालों से महिलाओं की खूबसूरती में चार चाँद लग जाते है। वहीं दूसरी तरफ छोटे, रूखे और बेजान बाल उनकी खूबसूरती को खराब भी कर सकते है। ऐसे में बालों का सुन्दर और अच्छा दिखना बेहद जरुरी है। पहले के समय में सुन्दर बालों के लिए अधिक मेहनत करने की आवश्यकता नहीं होती थी। क्योंकि उनके बाल पहले से ही सुन्दर होते थे।

लेकिन आजकल के धूल और प्रदुषण भरे वातावरण में बालों की सुंदरता को बरकरार रख पाना काफी मुश्किल हो जाता है। और घर से बाहर निकलने वाली महिलाओं के लिए तो लगभग असंभव ही है। हालाँकि वे सभी इसके लिए अथक संभव प्रयास करती है। लेकिन सभी के प्रयास सफल नहीं हो पाते।

ऐसे में घर पर मौजूद उत्पादों का प्रयोग करना ही बेहतर होगा। इसके लिए आप मेहंदी का प्रयोग कर सकती है। सस्ती, टिकाऊ और बेहतर परिणाम देने वाली हिना के दुष्परिणाम भी बहुत कम देखने को मिलते है। इसीलिए आज हम आपको बालों में मेहंदी लगाने के तरीके से लेकर उसके फायदे और उसमे किन चीजों को मिलाकर प्रयोग करें सबके बारे में बताने जा रहे है।

मेहंदी लगाने के फायदे :

मेहंदी बालों के बहुत लाभदायक होती है। और इसे लगाने से ढेरों फायदे है जिनके बारे में आगे हम आपको विस्तार से बता रहे है।

यह पढ़े : बाल झड़ रहे है? क्या करें?

  • बालों का झड़ना रोके।
  • डैंड्रफ की समस्या में फायदा मिलता है।
  • सफ़ेद बालों को छुपाने का बेहतर उपाय।
  • बालों को कंडीशन करे।
  • जड़ों को मजबूत करने में मदद करे।
  • बालों को कलर करने का आसान तरीका।
  • बालों का रूखापन दूर करे।
  • हलके घुंघराले बालों को सीधा करने में मददगार।
  • स्कैल्प को साफ़ करे।

बालों में मेहंदी कैसे लगाएं :-

घर पर बालों में मेहंदी लगाने के लिए आपको कुछ जरुरी चीजों की आवश्यकता होगी। इसके लिए मेहंदी, पानी, मेहंदी घोलने के लिए पात्र, हाथो को रंग से बचाने के लिए दस्ताने, पेट्रोलियम जेली या तेल, एक तौलिया, मेहंदी लगाने के लिए ब्रश, बालों को कवर करने के लिए शॉवर कैप, एक चम्मच और अपनी जरूरत के अनुसार मेहंदी में घोलने के लिए अन्य चीजें। इन चीजों में कॉफ़ी या चाय पत्ती का पानी, अंडा, सरसो तेल, निम्बू का पानी, दही और मेथी के बीज आदि सम्मिलित है।

बालों में मेहंदी लगाने से पूर्व एक बात का ध्यान रखें की आपके बालों में तेल न लगा हो। क्योंकि तेल लगे बालों में मेहंदी का रंग अच्छी तरह से नहीं आता। अगर बालों में तेल लगा हो तो पहले उन्हें शैम्पू करके अच्छे से साफ़ कर लें। और बाद में मेहंदी लगाएं।

मेहंदी लगाने के लिए सबसे पहले मेहंदी को लोहे के बर्तन में डालकर उसमे आवश्यकतानुसार पानी मिला लें। और अच्छे से घोलें। अब कुछ देर के लिए उसे ऐसे ही रखे रहने दें। अब अपने माथे और बालों के आसपास के हिस्सों पर वैसलीन या तेल लगा लें। इससे मेहंदी का रंग आपकी त्वचा पर नहीं लगेगा।

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अब अपने हाथों में दस्ताने पहन लें और मेहंदी को दोबारा अच्छे से चम्मच से हिलाएं। अब ब्रश की मदद से मेहंदी लगाना शुरू करें। आप अपनी इच्छानुसार बालों में मेहंदी लगा सकते है। आप चाहे तो इसके लिए पार्लर वाली की सहायता भी ले सकती है।

जब सभी बालों में अच्छे से मेहंदी लग जाए तो सर पर शावर कैप पहन लें। ये मेहंदी को कड़ा होने से बचाएगा जिससे बालों को साफ़ करने में आसानी होगी। 3 से 4 घंटे रखने के बाद बालों को धो लें। लेकिन शैम्पू से बाल 24 घंटे बाद ही धोएं। क्यूंकि मेहंदी गाढ़ा रंग देने में थोड़ा समय लेती है।

आप अपनी इच्छानुसार किसी भी अन्य पदार्थ को मेहंदी में मिलाकर लगा सकती है। लेकिन बहुत सारे पदार्थों का एक साथ इस्तेमाल न करें। एक समय में केवल एक का इस्तेमाल करना बेहतर होगा। और हां किसी हानिकारक उत्पाद के प्रयोग से भी बचें। अन्यथा ये आपके बालों को नुकसान पहुंचा सकते है।

ध्यान रखने योग्य बातें :-

  • मेहंदी को हमेशा लोहे के बर्तन या कड़ाही में ही घोलें। इससे ये अच्छा रंग देती है।
  • बेहतर परिणाम के लिए मेहंदी को 4 से 5 घंटे तक लगाएं रखे।
  • मिश्रण को अच्छा बनाने के लिए गुनगुने पानी का प्रयोग करें।
  • अच्छा रंग पाने के लिए बालों को शावर कैप से ढकें।
  • बालों को चमकदार और रेशमी बनाने के लिए उन्हें गुनगुने पानी से धोएं।
  • घुंघराले बालों के लिए मेहंदी में दही और अंडा मिलाकर प्रयोग करें।
  • सर्दी जुखाम, बुखार आदि के दौरान मेहंदी न लगाएं।