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शिशु की धड़कन कैसे सुन सकते हैं गर्भ में?

प्रेगनेंसी के दौरान ऐसे बहुत से अनुभव होते हैं जो एक महिला के लिए बहुत खास होते हैं। जैसे की बच्चे के दिल की धड़कन आना, गर्भ में शिशु का हलचल करना, बाहर की चीजों को लेकर कई बार शिशु का हलचल करके प्रतिक्रिया देना, आदि। और इन सभी अनुभवों से महिला की प्रेगनेंसी बहुत ही अनोखी बन जाती है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान महिला गर्भ में पल रहे शिशु के दिल की धड़कन को कैसे सुन सकती है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भ में शिशु का दिल कब धड़कना शुरू करता है?

माँ के पेट में बच्चे का विकास पूरे नौ महीने तक धीरे धीरे होता रहता है और सबसे पहले माँ के गर्भ में शिशु का दिल धड़कना शुरू करता है। प्रेगनेंसी के पांचवें हफ्ते के आखिर में या छठे हफ्ते तक शिशु का दिल धड़कना शुरू कर देता है। और डॉक्टर्स भी प्रेगनेंसी के दूसरे महीने की शुरुआत में महिला को अल्ट्रासॉउन्ड करवाने के लिए बोल सकते हैं। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान पहला अल्ट्रासॉउन्ड शिशु के दिल की धड़कन को जानने के लिए ही किया जाता है।

कैसे सुन सकते हैं गर्भ में शिशु के दिल की धड़कन

गर्भ में पल रहे शिशु के दिल की धड़कन को सुनने के लिए आप अपनी डॉक्टर को बोल सकती है और वो पहले अल्ट्रासॉउन्ड के दौरान ही आपको बच्चे के दिल की धड़कन सुना देती है। और ऐसा नहीं है की उसके बाद आप बच्चे के दिल की धड़कन नहीं सुन सकती है बल्कि आप उसके बाद जब भी डॉक्टर्स के पास रूटीन चेकअप के लिए जाती है।

उतनी बार आप शिशु के दिल की धड़कन सुन सकती है। और आपको शिशु के दिल की धड़कन डॉप्लर की मदद से सुनाई जाती है। साथ ही आपके अलावा और कोई भी आपके घर का सदस्य यदि बच्चे के दिल की धड़कन को सुनना चाहता है तो वह भी डॉप्लर की मदद से बच्चे के दिल की धड़कन को सुन सकता है।

यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आप भी गर्भ में पल रहे शिशु के दिल की धड़कन को सुन सकती हैं। इसके अलावा सभी शिशु के दिल की धड़कन एक समय पर आये ऐसा जरुरी नहीं होता है ऐसे में यदि पहले अल्ट्रासॉउन्ड के दौरान शिशु के दिल की धड़कन का पता नहीं चलता है तो आपको डॉक्टर दूसरा अल्ट्रासॉउन्ड करवाने के लिए बोल सकते हैं।

प्रेग्नेंट महिला को अपने डॉक्टर से यह 10 बातें जरूर पूछनी चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान महिला के लिए बहुत जरुरी होता है की महिला अपने लिए एक ऐसे डॉक्टर का चुनाव करें जिसके साथ महिला आराम से बात कर सके साथ ही अपने आप और अपनी प्रेगनेंसी से जुडी सभी बातों को खुलकर कर सकें। और इसके लिए प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के साथ सबसे पहले महिला को एक अच्छी डॉक्टर को ढूंढ़ना चाहिए। उसके बाद महिला को उस डॉक्टर की हिस्ट्री के बारे में जानना चाहिए ताकि महिला को पूरा यकीन हो सके की यह महिला और बच्चे दोनों के लिए पूरी प्रेगनेंसी के दौरान बेस्ट है।

और इसका अंदाजा महिला चाहे तो अपनी डॉक्टर के साथ पहली बातचीत में ही लगा सकती है क्योंकि ऐसे बहुत से सवाल होते हैं जो प्रेग्नेंट महिला को अपनी डॉक्टर से प्रेगनेंसी की शुरुआत में जरूर पूछने चाहिए। यदि आपको अपनी डॉक्टर की बातों से और अपने सवालों के जवाबों से पूरी तरह संतुष्टि मिलती है। तो इसका मतलब यह होता है की वह आपके लिए सही है तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को अपने डॉक्टर से कौन 10 बातें जरूर पूछनी चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

सबसे पहले महिला को यह पूछना चाहिए की डिलीवरी भी वही डॉक्टर करेंगी या नहीं

कई बार ऐसा होता है की पूरी प्रेगनेंसी के दौरान आप जिस डॉक्टर के पास जाती है वो डिलीवरी के समय आपको कहीं और जाने के लिए कहतें हैं। ऐसे में आपको प्रेगनेंसी की शुरुआत में अपनी डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए की डिलीवरी भी आप ही करेंगी। ताकि आपको बाद में किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो।

कौन सी दवाइयां और वैक्सीन लेनी है

महिला को दवाइयों व् टीकाकरण के बारे में पूछ लेना चाहिए इसके अलावा डॉक्टर्स आपको सभी टेस्ट के बारे में भी बताते हैं। ऐसे में महिला को सही समय पर टीकाकरण करवाना चाहिए दवाइयों का सेवन करना चाहिए ताकि महिला को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो साथ ही आपको अल्ट्रासॉउन्ड के बारे में भी पूछना चाहिए।

महिला का वजन कितना बढ़ेगा

गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन बढ़ेगा ऐसा होना सही है लेकिन कितना वजन बढ़ना सही है और कितना वजन नहीं होना चाहिए इसके बारे में भी पूछना चाहिए।

कब तक आप काम कर सकती हैं

गर्भवती महिला यदि बाहर जॉब करती है तो महिला को काम करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और कब तक महिला अपनी जॉब कर सकती है या महिला को जॉब छोड़ देनी चाहिए इससे जुडी जानकारी भी महिला को लेनी चाहिए। इसके साथ महिला को घर के कौन से काम करने चाहिए और कौन से नहीं इसके बारे में भी महिला को जानकारी लेनी चाहिए।

कौन से लक्षण प्रेगनेंसी के दौरान नोर्मल है

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को शरीर में बहुत से लक्षण महसूस होते हैं। ऐसे में कौन से लक्षण नोर्मल होते हैं और किन्हे महिला को गंभीरता से लेना चाहिए इसके बारे में भी महिला को डॉक्टर से जरूर पूछना चाहिए।

क्या खाएं क्या नहीं

प्रेगनेंसी में खान पान का बहुत अधिक महत्व होता है ऐसे में गर्भवती महिला को डॉक्टर से यह भी जरूर पूछना चाहिए की गर्भावस्था के दौरान महिला क्या खा सकती है और क्या नहीं। क्योंकि खान पान से जुडी जितनी सही जानकारी महिला के पास होगी उतना ही माँ और बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी।

व्यायाम

गर्भावस्था के दौरान व्यायाम करना सेफ है या नहीं, कौन सा व्यायाम सेफ हैं, कब तक महिला व्यायाम कर सकती है, इससे जुड़े सवाल भी महिला को अपनी डॉक्टर से जरूर पूछने चाहिए।

सम्बन्ध बनाएं या नहीं

प्रेगनेंसी के दौरान आपके पार्टनर के साथ आपको सम्बन्ध बनाना चाहिए या नहीं, सम्बन्ध बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, कब सम्बन्ध बनाना सुरक्षित नहीं है, इन सभी से जुड़े सवालों को भी महिला को अपनी डॉक्टर से जरूर पूछने चाहिए क्योंकि यह एक ऐसा विषय है जिसके बारे में अधिकतर कपल डॉक्टर से खुलकर बता नहीं करते हैं जो की गलत है।

क्या करें नहीं नहीं

प्रेगनेंसी के दौरान महिला क्या कर सकती है और किन कामों से महिला को बिल्कुल दूरी बना लेनी चाहिए इसे लेकर भी महिला को डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए। क्योंकि इन्ही छोटी छोटी बातों का ध्यान नहीं रखने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

डिलीवरी के बारे में पूछें

डॉक्टर से अपनी डिलीवरी के बारे में भी पूछें की नोर्मल डिलीवरी होने के कितने चांस हैं, डिलीवरी में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं आये इसके लिए क्या करें, आदि। डिलीवरी की अनुमानित तिथि के बारे में भी डॉक्टर से पूछें।

तो यह हैं वो दस सवाल जो गर्भवती महिला को अपनी डॉक्टर से जरूर पूछने चाहिए, ताकि महिला को प्रेगनेंसी को समझने में आसानी मिल सके साथ ही एक ऐसी डॉक्टर मिल सके जो प्रेगनेंसी के दौरान उनकी पूरी तरह से मदद कर सके।

Questions ask to your doctor during Pregnancy

इन कारणों से गर्भ में शिशु को परेशानी होती है?

गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह से अपनी माँ पर निर्भर करता है इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह भी दी जाती है ताकि गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ रहे। ऐसे में जितना अच्छे से महिला प्रेगनेंसी के दौरान केयर करती है उतना ही फायदा माँ व् बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को मिलता है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु को कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला के पास यह जानकारी होना भी जरुरी होता है की कौन कौन सी चीजों से गर्भ में शिशु को परेशानी हो सकती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान किन कारणों से गर्भ में शिशु को परेशानी होती है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

पोषण की कमी के कारण

गर्भावस्था के दौरान महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने की सलाह दी जाती है जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिल सके। लेकिन यदि महिला पोषक तत्वों से भरपूर डाइट नहीं लेती है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है। जिसकी वजह से गर्भ में शिशु परेशानी का अनुभव कर सकता है।

पेट पर दबाव पड़ने की वजह से

गर्भ में शिशु एमनियोटिक फ्लूड में बिल्कुल सेफ होता है लेकिन यदि महिला पेट पर अधिक दबाव डालती है या ऐसा कोई काम करती है जिसकी वजह से पेट पर दबाव पड़ने के साथ झटका आदि लगने का खतरा होता है। तो इनकी वजह से भी गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है परेशानी का अनुभव कर सकता है।

प्रदूषित वातावरण

प्रदूषित वातावरण का भी सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है यदि महिला ऐसी जगह पर जाती है जहां भीड़भाड़ व् बहुत ज्यादा प्रदूषण होता है। तो ऐसी जगह जाने पर महिला को इन्फेक्शन, आपकी सांस लेने के माध्यम से धुआं आदि शरीर में जाने के कारण सेहत पर बहुत उल्टा प्रभाव पड़ता है। और इनके उल्टे प्रभाव से गर्भवती महिला को दिक्कत होने के साथ गर्भ में शिशु को दिक्कत होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

गलत खान पान

प्रेगनेंसी के समय महिला को ताजा, संतुलित व् पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन महिला इसकी बजाय यदि जंक फ़ूड, ज्यादा मसाले और तेल वाले आहार, बासी व् ठन्डे भोजन का सेवन करती है। तो इसकी वजह से गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने का खतरा रहता है। जिसके कारण शिशु के विकास में कमी आ सकती है और शिशु को दिक्कत हो सकती है।

नींद में कमी के कारण

गर्भवती महिला यदि समय से सोती नहीं है या नींद पूरी नहीं लेती है तो इसके कारण महिला की शारीरिक के साथ मानसिक रूप से परेशानी बढ़ने का भी खतरा रहता है। और प्रेगनेंसी के दौरान जब महिला किसी दिक्कत का सामना करती है तो उसका असर शिशु पर पड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में महिला के नींद पूरी न लेने के कारण भी गर्भ में शिशु को परेशानी का अनुभव होता है।

तेज आवाज़ के कारण

गर्भ में दूसरी तिमाही के आखिर तक शिशु की सुनने की क्षमता में थोड़ी वृद्धि होने लगती है। ऐसे में यदि महिला तेज आवाज़ वाली जगह पर रहती है। तो शिशु तेज आवाज़ सुनकर चौंक जाता है घबरा जाता है जिसकी वजह से शिशु असहज महसूस करके ज्यादा हलचल करने लग जाता है। साथ ही ज्यादा तेज आवाज़ होने के कारण शिशु के सुनने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है।

स्ट्रैस

गर्भावस्था के समय कुछ महिलाएं स्ट्रैस की समस्या से परेशान रहती है इसका कारण होता है की महिला प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली दिक्कतों व् प्रेगनेंसी व् बच्चे के बारे में ज्यादा सोच सोच कर मानसिक रूप से परेशान रहती है। और इस चक्कर में महिला को शारीरिक रूप से भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। और जब महिला को शारीरिक रूप से और मानसिक रूप से दिक्कत होती है तो गर्भ में शिशु को भी परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

नशीली चीजों का सेवन करने के कारण

प्रेग्नेंट महिला यदि धूम्रपान, शराब, जरुरत से ज्यादा कैफीन आदि का सेवन करती है तो इनके कारण भी गर्भ में शिशु को बहुत ज्यादा दिक्कत होने का खतरा रहता है।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनकी वजह से गर्भ में शिशु को परेशानी का अनुभव हो सकता है ऐसे में गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला ऐसी कोई भी हरकत नहीं करे जिससे गर्भ में शिशु को परेशानी का अनुभव हो।

होंठ फटने के मुख्य कारण और देसी उपाय

चेहरे की सुंदरता को बढ़ाने में आपके चेहरे का हर हिस्सा एक अहम रोल अदा करता है जैसे की आपकी आँखे आपके चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाती है, नाक की शेप अच्छी होने पर चेहरे की ख़ूबसूरती और भी बढ़ जाती है। उसी तरह आपके होंठ और आपकी मुस्कान भी आपके चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद करते हैं। इसीलिए जरुरी होता है की आप अपने चेहरे की स्किन के साथ अपने होंठों का भी अच्छे से ख्याल रखें।

क्योंकि कई बार होंठों का अच्छे से ख्याल न रखने पर आपके होंठ फटने लगते हैं। होंठों के फटने का कारण होंठ की स्किन का रूखापन होता है और कई बार इसमें से खून भी आने लगता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको होंठ फटने के क्या कारण होते हैं और आप किस तरह देसी तरीकों का इस्तेमाल करके अपने होंठों की इस समस्या से बचाने के साथ उन्हें गुलाबी रख सकते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

होंठ फटने के कारण

  • सर्दियों में स्किन में रूखापन आना आम बात होती है ऐसे में स्किन में रूखेपन की समस्या होने के साथ होंठों में भी रूखापन आ सकता है।
  • शुष्क हवा के मौसम में भी आपको यह समस्या हो सकती है।
  • जो लोग पूरा दिन ए सी में रहते हैं उन्हें भी डी हाइड्रेशन की समस्या हो सकती है जिसकी वजह से होंठ फटने लगते हैं।
  • अल्कोहल का सेवन करें वाले लोगो को यह समस्या होना बहुत आम बात होती है।
  • ज्यादा खट्टी चीजें खाने से डी हाइड्रेशन की समस्या हो जाती है ऐसे में जो लोग खट्टी चीजें अधिक खाते हैं उन्हें भी यह समस्या हो सकती है।
  • शरीर में पानी की कमी के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
  • यदि आप ऐसा सोचते हैं की होंठ पर बार बार जीभ लगाने से उनकी नमी बनी रहती है तो आपका ऐसा सोचना बिल्कुल गलत होता है क्योंकि ऐसा करने की आदत जिन लोगो की होती है उन्हें होंठों के फटने की समस्या अधिक होती है।

होंठ फटने की समस्या से बचाव के आसान घरेलू टिप्स

यदि किसी को होंठ फटने की समस्या होती है तो उन्हें बिल्कुल परेशान होने की जरुरत नहीं है क्योंकि अब आगे हम आपको ऐसे कुछ आसान देसी तरीके बताने जा रहे हैं जिन्हे ट्राई करने से आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकती है।

मलाई

मलाई को होंठों पर लगाकर दो से तीन मिनट तक मसाज करें और हो सकें तो ऐसा रोजाना करें। क्योंकि ऐसा करने से यदि आपके होंठ फटे हुए हैं तो ठीक हो जायेंगे नहीं तो आपके होंठों को हमेशा नरम और मुलायम रहने में मदद मिलेगी।

बादाम का तेल

रोजाना रात को सोने से पहले ऊँगली की मदद से दो तीन बूंदे बादाम तेल की होंठों पर लगाएं और मसाज करें। ऐसा करने से आपके फटे होंठ ठीक हो जायेंगे साथ ही आपके होंठों को गुलाबी रहने में मदद मिलेगी।

कच्ची हल्दी

कच्ची हल्दी को पीसकर होंठों पर लगाएं ऐसा करने से भी आपको फटे होंठों की समस्या से निजात मिलता है। इसके अलावा यदि आप सूखी हल्दी में भी थोड़ा दूध मिलाकर होंठों पर लगाते हैं तो भी आपको फायदा मिलता है।

शहद

शहद को फटे होंठों पर लगाने से भी आपको इस समस्या से निजात मिलता है। साथ ही शहद होंठ में आई दरारों को भरने में भी मदद करता है।

नारियल तेल

स्किन के लिए नारियल तेल किसी वरदान से कम नहीं नारियल तेल का इस्तेमाल करने से आपको बहुत सी स्किन सम्बन्धी समस्याओं से बचे रहने में मदद मिलती है। ऐसे में आप यदि फटे होंठों की समस्या से निजात पाना चाहते हैं तो आपको रात को सोने से पहले ऊँगली पर थोड़ा नारियल तेल लगाकर होंठ की आराम से मसाज करनी चाहिए ऐसा दो चार दिन करने से आपको इस परेशानी से निजात पाने में जरूर मदद मिलेगी।

घी और नमक

थोड़े से घी में नमक मिलाएं उसके बाद उस मिश्रण को थोड़ा होंठों पर और नाभि पर लगाएं इससे आपको फटे होंठों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

सरसों का तेल

सरसों के तेल में थोड़ी हल्दी मिलाएं उसके बाद इस मिश्रण को होंठों पर लगाएं साथ ही थोड़ा सा मिश्रण नाभि में भी लगाएं ऐसा करने से भी आपको इस परेशानी से निजात मिलती है। इसके अलावा यदि आप अपनी नाभि में दो बून्द सरसों के तेल की रोजाना डालते हैं तो इससे होंठों को मुलायम और गुलाबी रहने में मदद मिलती है।

शिया बटर

यदि आपके घर में शिया बटर हैं तो उसे होंठों पर लगाएं क्योंकि इसका इस्तेमाल करने से भी आपको फटे होंठों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

गुलाब के फूल की पत्तियां

गुलाब के फूल की पत्तियों को पीसकर उसमे थोड़ी ग्लिसरीन मिलाएं उसके बाद इस मिश्रण को होंठों पर लगाएं। इस मिश्रण को लगाने से भी आपको फटे होंठों की समस्या से निजात मिलता है।

मक्खन

घर में निकाले हुए मक्खन में दो तीन रेशे केसर के मिलाएं उसके बाद इस मिश्रण को मिक्स करके होंठों पर मसाज करें ऐसा करने से भी होंठों को मुलायम रहने में मदद मिलती है।

एलोवेरा जैल

स्किन सम्बन्धी समस्याओं को दूर करने के लिए एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करना भी बहुत फायदेमंद होता है ऐसे में आप फटे होंठों की समस्या से निजात पाने के लिए भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप दिन में कभी भी थोड़ा सा एलोवेरा जैल लेकर होंठों लगाएं और थोड़ी देर के लिए इसे छोड़ दें। उसके थोड़ी देर बार होंठों को साफ़ कर लें आपको इसका असर खुद दिखाई दे जायेगा।

गुलाब जल

रात को सोने से पहले गुलाब जल को होंठों पर लगाएं ऐसा करने से आपको फटे होंठों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

हाइड्रेट रहें

दिन भर में पानी का भरपूर सेवन करें क्योंकि पानी का भरपूर सेवन करने से शरीर हाइड्रेट रहता है जिससे आपकी स्किन को नमी से भरपूर रहने में मदद मिलती है और आपको होंठ या स्किन में रूखेपन की समस्या नहीं होती है।

लिप बाम

आज कल मार्किट में अलग अलग लिप बाम मिलते हैं जो आपके होंठों की केयर करने में आपकी मद डकारते हैं ऐसे में आप चाहे तो उनकी मदद से भी अपने होंठों की नमी को बरकरार रख सकते हैं।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से होंठों की नमी को बरकरार रहने में मदद मिलती है। यदि आपको भी यह समस्या है तो आप भी इनमे से किसी भी टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि आपके होंठों की नमी को बरकरार रहने और आपकी मुस्कान को और भी खूबसूरत रहने में मदद मिल सकें।

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प्रेगनेंसी के दौरान यह काम करने से शिशु को गर्भ में गंभीर चोट लग सकती है?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह से अपनी माँ पर निर्भर करता है। इसीलिए तो कहा जाता है की प्रेगनेंसी बहुत ही नाजुक समय होता है। क्योंकि अब महिला को केवल अपना ध्यान नहीं रखना होता है बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु की केयर भी करनी होती है। ऐसे में यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला किसी भी तरह की लापरवाही करती है तो इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है।

ऐसे में गर्भावस्था के दौरान जरुरी होता है की महिला अपना अच्छे से ध्यान रखें ताकि गर्भ में शिशु के विकास में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आये। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे काम के बारे में बताने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला को नहीं करने चाहिए। क्योंकि उन्हें करने से गर्भ में पल रहे शिशु को गंभीर चोट लगने का खतरा रहता है।

पेट पर दबाव डालने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान किसी कारण यदि पेट पर दबाव पड़ता है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु को दिक्कत होती है। ऐसे में यदि महिला झुककर काम करती है, पेट को किसी चीज से सटकर काम करती है, पैरों के भार बैठकर काम करती है, किचन शेल्फ से सटकर काम करती है, भारी सामान उठाने के कारण, भारी चीजों को सरकाने के कारण, आदि तो इन सभी में महिला के पेट पर दबाव पड़ने का खतरा रहता है। और जब महिला के पेट पर दाबाव पड़ता है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु को चोट पहुँचने का खतरा रहता है।

तेजी से सीढ़ियां उतरने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सीढ़ियां ज्यादा चढ़ने व् उतरने के लिए मना किया जाता है क्योंकि इसके कारण पेट पर झटका आदि लगने का खतरा होता है। खासकर महिला को तेजी से तो बिल्कुल भी सीढ़ियां चढ़नी या उतरनी नहीं चाहिए। क्योंकि तेजी से सीढ़ियां चढ़ने व् उतरने के कारण गिरने का खतरा रहता है, पेट में झटके लग सकते हैं, जिसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को चोट लगने का खतरा होता है।

सम्बन्ध बनाने के कारण

गर्भ में शिशु एमनियोटिक फ्लूड में बिल्कुल सेफ होता है ऐसे में गर्भावस्था के दौरान यदि पूरी सुरक्षा का ध्यान रखा जाये तो प्रेग्नेंट महिला इस दौरान सम्बन्ध बना सकती है। लेकिन यदि सम्बन्ध बनाने में किसी तरह की लापरवाही की जाती है जैसे की ज्यादा तेजी की जाती है, पेट पर दबाव डाला जाता है, कोई नया एक्सपेरिमेंट किया जाता है तो इसके कारण गर्भ में शिशु को चोट लगने का खतरा होता है।

ज्यादा उछल कूद करने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को उठने बैठने में ज्यादा तेजी नहीं करनी चाहिए बल्कि किसी चीजे का सहारा लेकर आराम से बैठना चाहिए ताकि महिला को कोई दिक्कत नहीं हो। ऐसे में यदि कोई महिला बैठने उठने में तेजी करती है, ज्यादा उछल कूद करती है, बिना सोचें समझें कभी भी झुक जाती है तो इस कारण महिला के पेट पर असर पड़ता है जिसके कारण गर्भ में शिशु असहज महसूस करता है साथ ही शिशु को गर्भ में चोट लगने का खतरा होता है।

जरुरत से ज्यादा एक्सरसाइज करने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को थोड़ा बहुत व्यायाम जरूर करना चाहिए क्योंकि व्यायाम करना, योगा करना महिला के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन यदि महिला बिना सोचें समझें कोई भी एक्सरसाइज या योगा करती है और जरुरत से ज्यादा योगा व् एक्सरसाइज करती है तो इसके कारण गर्भ में शिशु को चोट पहुंचने का खतरा रहता है।

गिरने के कारण

यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला चलते फिरते समय या काम करते समय अपना अच्छे से ध्यान नहीं रखती है। और गिर जाती है तो इस कारण गर्भवती महिला को पेट पर चोट लगने का खतरा होता है जिसका नुकसान गर्भ में पल रहे शिशु को होता है। यहां तक की पेट के बल गिरने के कारण गर्भपात व् समय से पहले डिलीवरी जैसी परेशानी होने का भी खतरा होता है।

तेज आवाज़ में रहने के कारण

गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी धीरे धीरे बढ़ता है और विकास बढ़ने के साथ शिशु की सुनने की क्षमता भी बढ़ती है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला बहुत तेज आवाज़ में गाने सुनती है या ऐसी किसी जगह पर अधिक जाती है जहां पर शोर अधिक होता है। तो इस कारण शिशु की सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है।

नशीले पदार्थों का सेवन

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला किसी भी तरह के नशीले पदार्थों जैसे की धूम्रपान, अल्कोहल आदि का सेवन करती है या ऐसी किसी जगह पर जाती है जहां इसका सेवन हो रहा होता है। तो इनका बुरा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है जिसके कारण शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में कमी आने का खतरा होता है।

ट्रेवल करना

प्रेगनेंसी के समय महिला को यात्रा करने की मनाही होती है। क्योंकि यात्रा करते समय किसी भी तरह का झटका आदि लगने के कारण पेट पर चोट लगने का खतरा होता है। जिसकी वजह से गर्भपात, ब्लीडिंग जैसी समस्या महिला को हो सकती है।

ऊँचे हील पहनने के कारण

गर्भावस्था के दौरान महिला को आरामदायक जूते चप्पल पहनने की सलाह दी जाती है। क्योंकि ऊँची हील वाले जूते चप्पल पहनने के कारण महिला के गिरने का खतरा होता है जिसकी वजह से महिला को नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है। और जब महिला गिर जाती है तो महिला के पेट पर चोट लगने का खतरा होता है जिस कारण बच्चे को भी चोट लग सकती है। यहां तक की गर्भपात और समय पूर्व प्रसव होने जैसी समस्या भी हो सकती है।

गलत पोजीशन में सोने के कारण

गर्भावस्था के दौरान गलत पोजीशन जैसे की पेट के बल सोने के कारण, लम्बे समय तक दाईं और करवट लेकर सोने के कारण भी पेट पर दबाव बढ़ जाता है। जिसके कारण गर्भ में शिशु को चोट लगने का खतरा होता है।

तो यह हैं कुछ काम जो प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चहिये क्योंकि इन्हे करने से गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में दिक्कत आने का खतरा रहता है। साथ ही जितना हो सके महिला प्रेगनेंसी के दौरान अच्छे से ध्यान रखें ताकि महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।

समय से पहले बेबी इस वजह से होता है?

गर्भ में शिशु का विकास सम्पूर्ण तरीके से होना बहुत जरुरी होता है क्योंकि यदि गर्भ में शिशु के विकास में कमी होती है तो इसके कारण जन्म के बाद शिशु को बहुत परेशानी हो सकती है। जैसे की शिशु के वजन में कमी हो सकती है, शिशु के किसी अंग के विकास में कमी आ सकती है, शिशु का मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है, शिशु के विकास में कमी होने के कारण जन्म के बाद इन्हे बहुत ज्यादा एक्स्ट्रा केयर की जरुरत पड़ती है, आदि।

ऐसे में जरुरी होता है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपना अच्छे से ध्यान रखे, खान पान में लापरवाही नहीं करें, टेंशन नहीं लें, आदि। यदि महिला इन टिप्स का ध्यान रखती है तो माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं। लेकिन कई बार न चाहते हुए भी महिला को समय से पहले ही प्रसव पीड़ा शुरू हो जाती है या महिला का प्रसव करना पड़ता है। और ऐसा होने पर शिशु को दिक्कत होने का खतरा बढ़ जाता है।

क्या होता है समय से पहले प्रसव?

शिशु का जन्म यदि प्रेगनेंसी के सैंतीसवें हफ्ते के बाद से लेकर इकतालीसवें हफ्ते के बीच में होता है तो यह प्रसव का सही समय होता है। लेकिन यदि बच्चे का जन्म सैंतीसवें हफ्ते से पहले हो जाता है तो इसे समय से पहले प्रसव होना या फिर प्री टर्म लेबर कहते हैं और इस दौरान होने वाले बच्चे को प्रीमैच्योर बेबी कहा जाता है।

किन कारणों की वजह से होती है समय से पहले डिलीवरी?

यदि महिला को समय से पहले डिलीवरी हो जाती है तो ऐसा होने के कई कारण हो सकते हैं। हर महिला को समय से पहले डिलीवरी होने का एक ही कारण नहीं होता है। तो आइये अब जानते हैं की समय से पहले डिलीवरी होने के क्या क्या क्या कारण होते हैं।

जुड़वां बच्चे

यदि महिला के गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होते हैं तो ऐसे केस में अधिकतर महिलाओं की डिलीवरी समय से पहले हो जाती है। ऐसे में उसके बाद बच्चों को थोड़े दिनों के लिए नर्सरी में भी रखा जा सकता है ताकि बच्चों को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो और यह समय से पहले डिलीवरी होने का बहुत ही आम कारण होता है।

गर्भपात

कुछ महिलाओं को गर्भधारण के दौरान बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कुछ महिलाओं का गर्भपात भी बार बार हो चूका होता है। जिन महिलाओं को यह समस्या होती है उन महिलाओं को भी समय से पहले प्रसव होने की आशंका रहती है। ऐसे में आप यह कह सकते हैं की बार बार गर्भपात का होना भी समय से पहले डिलीवरी होने का कारण बन सकता है।

हार्मोनल असंतुलन

शरीर में हार्मोनल असंतुलन होना भी आपके शरीर में बिमारियों को बढ़ा सकता है आपकी शारीरिक परेशानियों को बढ़ा सकता है। ऐसे में यदि प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला हार्मोनल असंतुलन की समस्या से परेशान है तो इसकी वजह से भी समय से पहले डिलीवरी हो सकती है।

गर्भाशय की ग्रीवा का कमजोर होना

यदि गर्भवती महिला की गर्भाशय की ग्रीवा कमजोर होती है तो इसकी वजह से प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही महिला को बेड रेस्ट की सलाह दी जाती है। क्योंकि ऐसे में महिला का गर्भपात या समय से पहले डिलीवरी होने की आशंका अधिक होती है। इसके अलावा कुछ महिलाओं के बच्चे का भार शुरुआत से ही नीचे की तरफ अधिक होता है उन महिलाओं का भी समय से पहले डिलीवरी होने का चांस होता है।

तनाव

यदि गर्भावस्था के दौरान महिला मानसिक रूप से अधिक परेशान रहती है तो इसका बुरा असर महिला व् बच्चे दोनों की सेहत पर पड़ता है। इसके अलावा महिला को गर्भपात, समय से पहले या बाद में डिलीवरी होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

बैक्टेरियल इन्फेक्शन

प्रेग्नेंट महिला यदि वजाइनल इन्फेक्शन की समस्या से जूझ रही है तो यह इन्फेक्शन भी लेबर को प्रेरित कर सकता है जिसकी वजह से महिला को समय से पहले डिलीवरी होने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

रक्तस्त्राव यानी ब्लीडिंग होना

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं को पूरे नौ महीने तक ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। यदि किसी महिला के साथ ऐसा होता है तो ब्लीडिंग भी प्रसव को प्रेरित कर सकती है जिसकी वजह से महिला को समय से पहले डिलीवरी हो सकती है।

पानी की थैली का जल्दी फटना

गर्भाशय में शिशु एक पानी की थैली में होता है और पानी की थैली का फटना इस बात का संकेत होता है की बच्चा अब पैदा होने वाला है। ऐसे में यदि पानी की थैली समय से पहले ही फट जाती है तो इसका मतलब होता है की महिला की डिलीवरी समय से पहले हो रही है।

गलत आदतें

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला बहुत ज्यादा धूम्रपान या शराब पीती है तो इसके कारण भी महिला को समय से पहले डिलीवरी हो सकती है। साथ ही धूम्रपान व् शराब का असर इतना खराब होता है की होने वाला शिशु शारीरिक व् मानसिक दोनों रूप से बहुत कमजोर हो सकता है।

सम्बन्ध

वैसे स्वस्थ प्रेगनेंसी होने पर कपल सम्बन्ध बना सकता है लेकिन इस दौरान पूरी सावधानी का ध्यान रखना जरुरी होता है। ताकि माँ या बच्चे को कोई दिक्कत नहीं हो ऐसे में यदि सम्बन्ध बनाते समय यदि कपल सावधानी नहीं बरतता है तो इसकी वजह से गर्भाशय पर चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है जिसकी वजह से महिला को दर्द हो सकता है और प्रसव प्रेरित हो सकता है।

वजन

गर्भावस्था के दौरान महिला के वजन का कम या ज्यादा होना भी समय से पहले डिलीवरी होने का कारण हो सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने वजन का भी ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला का वजन न तो बहुत ज्यादा हो और न हो बहुत कम हो।

शारीरिक रूप से अधिक काम करना

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला ऐसे काम करती है जिन्हे करने से महिला के पेट पर दबाव अधिक बढ़ जाता है। जैसे की भारी वजन उठाना, ज्यादा खड़े रहकर काम करना, पेट के बल या झुककर काम करना, आदि। तो ऐसे कुछ काम करने से भी समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा बढ़ जाता है।

समय से पहले डिलीवरी होने पर शिशु को होने वाली दिक्कत

यदि महिला की डिलीवरी समय से पहले हो जाती है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु का विकास प्रभावित हो सकता है। जैसे की:

  • शिशु को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
  • जन्म के बाद शिशु के वजन में कमी जैसी समस्या होती है।
  • शिशु को जन्म दोष होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • जन्म के बाद शिशु को कुछ दिनों तक नर्सरी में रखना पड़ सकता है ताकि शिशु की सेहत सही हो सकें।
  • शिशु की केयर के लिए बहुत ही ज्यादा सावधानी का ध्यान रखना पड़ सकता है।
  • जन्म के बाद शिशु को एनीमिया, पीलिया जैसी परेशानी हो सकती है।
  • शिशु की इम्युनिटी कमजोर होने के कारण शिशु को इन्फेक्शन होने का खतरा भी अधिक हो जाता है।

समय से पहले डिलीवरी से बचाव के उपाय

वैसे तो यदि आपको पेन शुरू हो गया है तो उसे रोका नहीं जा सकता यही लेकिन यदि आप चाहते हैं की आपको समय से पहले डिलीवरी नहीं हो और शिशु भी स्वस्थ रहें। तो इसके लिए आपको पूरी प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से प्रेगनेंसी में आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स को कम करने में मदद मिलती है जिससे समय से पहले डिलीवरी होने के चांस भी कम हो जाते हैं।

तो यह हैं समय से पहले डिलीवरी होने के कारण व् उससे जुडी जानकारी, हर एक गर्भवती महिला को इस समस्या से बारे में भी पूरी जानकारी होनी चाहिए ताकि महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखे जिससे महिला को इस समस्या का सामना नहीं करना पड़े।

प्रेगनेंसी में ज्यादा फ़ोन इस्तेमाल करने पर क्या-क्या होता है?

स्मार्टफोन आज के समय एक ऐसी चीज है जिसका इस्तेमाल छोटे से लेकर बड़े तक सभी करते हैं। और ऐसा कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा की स्मार्टफोन आज के समय में लोगो की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है जिसके बिना शायद लोगो का दिन न तो शुरू होता है और न ही खत्म होता है।

लेकिन यह तो आप जानते ही हैं की किसी भी चीज का यदि जरुरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जाये तो वह आपके लिए फायदेमंद कम और नुकसानदायक ज्यादा बन जाती है। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेग्नेंट महिला के ज्यादा फ़ोन इस्तेमाल करने से क्या- क्या दिक्कत हो सकती है उसके बारे में बात करने जा रहे हैं।

अनिंद्रा की समस्या

गर्भवती महिला के ज्यादा फ़ोन इस्तेमाल करने के कारण महिला को नींद से जुडी समस्या आ सकती है। जैसे की महिला यदि रात के समय ज्यादा फ़ोन देखती है तो इससे महिला की नींद का समय चला जाता है जिसके बाद महिला को सोने में दिक्कत हो सकती है। साथ ही महिला की नींद न पूरी होने के कारण महिला को और ज्यादा परेशानी होती है। साथ ही महिला की नींद पूरी न होने के कारण शिशु का विकास भी प्रभावित होता है जिसकी वजह से शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ सकता है।

मानसिक रूप से पड़ता है असर

फ़ोन का ज्यादा इस्तेमाल करने के कारण महिला का स्वास्थ्य मानसिक रूप से प्रभावित होता है जिसके कारण महिला को स्ट्रैस जैसी परेशानी हो सकती है। और स्ट्रैस का बुरा असर माँ व् बच्चे दोनों के शारीरिक व् मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित करता है।

आँखों पर पड़ता है असर

फ़ोन का ज्यादा इस्तेमाल करने के कारण गर्भवती महिला की आँखों की रौशनी पर भी बुरा असर पड़ता है। जिसकी वजह से महिला को आँखों का लाल होना, आँखों से पानी आने की समस्या हो सकती है।

सिर दर्द

फ़ोन का ज्यादा इस्तेमाल करने के कारण गर्भवती महिला को सिर दर्द जैसी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है। और सिर दर्द की परेशानी अधिक होने पर महिला को चक्कर आने, नींद नहीं आने, चिड़चिड़ाहट, जैसी दिक्कत भी हो सकती है।

गर्भपात व् समय से पहले डिलीवरी का खतरा

ऐसा माना जाता है की फ़ोन का इस्तेमाल ज्यादा करने से उससे निकलने वाली बुरी किरणे शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकती है। जिसकी वजह से गर्भवती महिला को गर्भपात व् समय से पहले डिलीवरी जैसी समस्या होने का खतरा रहता है।

खाने पीने में लापरवाही होने के कारण दिक्कत

फ़ोन का इस्तेमाल करते समय महिला खान पान समय से नहीं ले पाती है जिसकी वजह से महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। साथ ही फ़ोन का इस्तेमाल करते समय कई बार ऐसा भी हो जाता है की आप जरुरत से ज्यादा खा लेती है ऐसे में ज्यादा वजन बढ़ सकता है। ऐसे में वजन बढ़ना और शरीर में पोषक तत्वों की कमी होना दोनों ही गर्भावस्था के दौरान खतरे को बढ़ा सकते हैं।

शिशु के विकास पर असर

गर्भवती महिला की सेहत पर यदि किसी तरह का बुरा असर पड़ता है तो इसका प्रभाव गर्भ में शिशु पर भी पड़ सकता है। जैसे की फ़ोन का ज्यादा इस्तेमाल करने के कारण यदि महिला नींद में कमी, तनाव, जैसी दिक्कत होती है तो इससे शिशु का विकास भी प्रभावित होता है। ऐसे में शिशु के विकास में कोई दिक्कत न हो इसके लिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान फ़ोन का ज्यादा इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो फ़ोन का ज्यादा इस्तेमाल करने के कारण माँ व् बच्चे को हो सकते हैं। ऐसे में इन सभी नुकसान से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को जितना हो सके प्रेगनेंसी के दौरान फ़ोन के ज्यादा इस्तेमाल से बचना चाहिए।

Harmful effects of using phone during pregnancy

डैंड्रफ से निजात पाने के घरेलू तरीके

कई बार बालों की जड़ में सफ़ेद सफ़ेद छोटे छोटे कण जमने लगते हैं उन्हें डैंड्रफ या रुसी कहा जाता है। सर्दियों के मौसम में यह समस्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है। इसके कारण सिर में खुजली अधिक होने लगती है साथ ही जब भी आप कंघी करते हैं तो यह पार्टिकल्स बालों के ऊपर ही दिखें लगते हैं जो काफी गंदे लगते हैं। लेकिन यह कोई ऐसी परेशानी नहीं है जिसका कोई इलाज नहीं हो।

बल्कि कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करने से आप इस समस्या से राहत पा सकते हैं और इसके लिए आपको कहीं बाहर से कोई महंगी चीज खरीदने की भी जरुरत नहीं है। क्योंकि घर में मौजूद कुछ चीजों का इस्तेमाल करने से ही आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं। तो आइये अब डैंड्रफ हटाने के कुछ घरेलू नुस्खे जानते हैं।

डैंड्रफ होने के कारण

  • जिन लोगो की स्किन ज्यादा ऑयली या फिर रूखी होती है उन्हें यह समस्या हो सकती है।
  • बालों के लिए केमिकल युक्त चीजों का अधिक इस्तेमाल करने के कारण ऐसा हो सकता है।
  • यदि आपको सिर की स्किन से जुडी कोई समस्या ही तो भी यह परेशानी हो सकती है।
  • बालों को अच्छे से पोषण न मिल पाने के कारण भी यह दिक्कत हो सकती है।
  • तनाव होने के कारण भी यह दिक्कत हो सकती है।

डैंड्रफ से निजात पाने के टिप्स

यदि आप भी बालों में डैंड्रफ की समस्या से परेशान है तो घबराइए नहीं क्योंकि इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही कुछ आसान घरेलू टिप्स टिप्स बताने जा रहे हैं जो आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद करते हैं। जैसे की:

शहद और निम्बू का इस्तेमाल करें

शहद और निम्बू के मिश्रण इस्तेमाल करने से डैंड्रफ की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके लिए आप दो से तीन चम्मच शहद में एक निम्बू का रस मिलाएं उसके बाद इसे अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस पेस्ट को बालों की जड़ में लगाएं और दस से पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें। उसके बाद सिर धो लें ऐसा हफ्ते में एक बार जरूर करें। क्योंकि ऐसा करने से बहुत जल्दी आपको डैंड्रफ की समस्या से बचे रहने में मदद मिलेगी।

दही

बालों के दही बहुत ज्यादा फायदेमंद होती है इसका इस्तेमाल बालों के लिए करने से बालों को सिल्की व् चमकदार रखने में मदद मिलती है। साथ ही दही का इस्तेमाल करने से रुसी की समस्या से भी निजात पाई जा सकती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप दही में निम्बू के रस की कुछ बूंदे डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। फिर इस मिश्रण को स्कैल्प पर लगाएं और आधे घंटे के लिए छोड़ दें।उसके बाद वबालों को धो लें। ऐसा हफ्ते दस दिन के एक बार जरूर करें आपको इसका असर जरूर दिखाई देगा।

सेब का सिरका

डैंड्रफ की समस्या से बचे रहने के लिए सेब के सिरके का इस्तेमाल करना भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप सेब के सिरके और पानी को बराबर मात्रा में लें। उसके बाद इस मिश्रण को बालों की जब में अच्छे से लगाकर हलके हाथों से मसाज करें और पंद्रह से बीस मिनट के बालों में ही छोड़ दें। उसके बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके बालों को धो दें। ऐसा करने से भी आपको डैंड्रफ की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

नारियल का तेल

जिस दिन भी अपने सिर धोना हो उससे एक घंटे पहले आप गुनगुने नारियल तेल में कुछ बूंदे निम्बू के रस की मिला लें। उसके बाद आप इस मिश्रण को बालों की जड़ में लगाएं साथ ही हल्के हाथों से मसाज करें फिर एक से डेढ़ घंटे बाद सिर को धो लें। ऐसा करने से आपको डैंड्रफ की समस्या से बचाव के साथ बालों को सिल्की व् शाइनी बनाये रखने में भी मदद मिलती है। साथ ही आप चाहे तो केवल नारियल के तेल को गुनगुना करके बालों में लगा सकते हैं ऐसा करने से भी आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

नीम का तेल

नीम का तेल एंटी बैक्टेरियल गुणों से भरपूर होता है जो डैंड्रफ की समस्या से आपको बहुत जल्दी निजात दिलाने में मदद करता है। ऐसे में नीम के तेल को आप बालों की जड़ में लगाएं और कुछ देर बाद बालों को धो लें ऐसा हफ्ते में कम से कम दो बार करें। ऐसा करने से आपको बहुत जल्दी बालों में होने वाले डैंड्रफ की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

लहसुन और शहद

सबसे पहले थोड़ी लहसुन की कलियाँ, दो लौंग को अच्छे से पीस लें उसके बाद इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें। ऐसा करने के बाद आप इस पेस्ट को बालों की जड़ में लगाएं और दस से पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें। उसके बाद आप शैम्पू व् गुनगुने पानी का इस्तेमाल करके बालों को धो लें। क्योंकि लहसुन की गंध तेज होती है तो इसे हटाने के लिए बालों को अच्छे से धोएं। ऐसा करने से आपको डैंड्रफ की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

संतरे के छिलके

संतरे के छिलकों को सुखाकर उसका पाउडर बनाएं उसके बाद एक से दो चम्मच पाउडर में निम्बू का रस मिलाकर एक पतला मिश्रण तैयार करें। अब इस मिश्रण को स्कैल्प पर लगाएं और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। उसके बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके बालों को धो लें इस उपचार को करने से भी डैंड्रफ की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

गुनगुने तेल की मसाज

सरसों तेल, टिल का तेल, टी ट्री आयल या अन्य किसी आयल का इस्तेमाल करके हफ्ते में दो बार बालों की मसाज करें और बाद में बालों को अच्छे से वाश करें। ऐसा करने से भी भी रुसी की समस्या से छुटकारा पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से आप डैंड्रफ की समस्या से निजात पा सकते हैं। इसके अलावा पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने व् हफ्ते में दो से तीन बार बालों में तेल लगाने से भी इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा यदि रुसी की समस्या ज्यादा हो तो आपको डॉक्टर से भी मिलना चाहिए

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प्रेगनेंसी में ताकत बढ़ाने के लिए क्या खाएं?

गर्भावस्था के दौरान महिला का एनर्जी से भरपूर रहना बहुत जरुरी होता है क्योंकि महिला जितना एनर्जी से भरपूर रहती है। उतना ही महिला को स्वस्थ रहने में और प्रेगनेंसी को एन्जॉय करने में मदद मिलती है। साथ ही जब महिला एनर्जी से भरपूर रहती है तो गर्भ में पल रहा शिशु भी स्वस्थ व् एक्टिव रहता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम अआप्को प्रेग्नेंट महिला के लिए ऐसे ही टिप्स बताने जा रहे हैं को गर्भवती महिला को ताकत यानी एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करते हैं।

कैल्शियम युक्त आहार

कैल्शियम हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है जिससे थकान व् कमजोरी जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक विकास के लिए भी कैल्शियम एक अहम पोषक तत्व होता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान ताकत बढ़ाने के लिए महिला को कैल्शियम से भरपूर डाइट जरूर लेनी चाहिए। और इसके लिए गर्भवती महिला दूध, दही, सोया, मछली, हरी सब्जियां, तरह तरह के फल, आदि का सेवन कर सकती है।

आयरन युक्त डाइट

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में खून की कमी होने के कारण माँ और बच्चे दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही महिला को ज्यादा शारीरिक परेशानियां होने के साथ डिलीवरी के समय भी कॉम्प्लीकेशन्स आने का खतरा रहता है। ऐसे में महिला को इन सभी परेशानियों को दूर करने और ताकत से भरपूर रहने के लिए आयरन से भरपूर डाइट का भी सेवन करना चाहिए। और आयरन के लिए प्रेग्नेंट महिला हरी सब्जियां, नॉन वेज, कद्दू के बीज, सेब, अनार जैसे फलों का सेवन भरपूर मात्रा में कर सकती है।

प्रोटीन लें

प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं को पोषण पहुंचाने में मदद करता है जिससे गर्भवती महिला को ताकत मिलती है। साथ ही प्रोटीन गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में भी मदद करता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को एनर्जी से भरपूर रहने के लिए प्रोटीन युक्त डाइट जरूर लेनी चाहिए। और प्रोटीन के लिए महिला दही, दालें व् फलियां, ड्राई फ्रूट्स, फलों और सब्जियों आदि का सेवन कर सकती है।

विटामिन

गर्भावस्था के दौरान विटामिन्स से भरपूर डाइट भी महिला को जरूर लेनी चाहिए। क्योंकि विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन के गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बहुत जरुरी होते हैं। इसके अलावा यह बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं जो महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं। जिससे गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रहने के साथ प्रेगनेंसी के दौरान बिमारियों व् संक्रमण से बचे रहने में भी मदद मिलती है। और विटामिन्स के लिए प्रेग्नेंट महिला फलों सब्जियों, दालों, नॉन वेज, ड्राई फ्रूट्स आदि का भरपूर सेवन कर सकती है।

हाइड्रेट रहें

प्रेग्नेंट महिला को शरीर में ताकत बढ़ाने के लिए तरल पदार्थों का सेवन भी भरपूर करना चाहिए। ऐसे में महिला को दिन भर में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ नारियल पानी, जूस, छाछ आदि का सेवन भी करना चाहिए। जिससे बॉडी हाइड्रेट रहने और शरीर में ताकत बनी रहे।

थोड़ी एक्सरसाइज भी है जरुरी

सारा दिन एक ही जगह बैठे रहने, सोते रहने से भी शरीर में आलस बढ़ जाता है और एनर्जी कम होती है। ऐसे में शरीर में एनर्जी भरपूर रहे इसके लिए गर्भवती महिला को दिन भर में थोड़ी देर वॉक, योगा आदि जरूर करना चाहिए।

खुश रहें

प्रेग्नेंट महिला को एनर्जी से भरपूर रहने के लिए खुश रहना चाहिए। क्योंकि जितना महिला खुश रहती है उतना ही महिला स्वस्थ रहती है और हमेशा बॉडी में ताकत को बरकरार रखने में मदद मिलती है।

नींद लें भरपूर

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में ताकत को बढ़ाने के लिए जितना खान पान का ध्यान रखना जरुरी होता है उतना ही जरुरी महिला के लिए नींद लेना होता है। ऐसे में महिला को शरीर में ताकत बढ़ाने के लिये नींद भरपूर लेनी चाहिए। साथ ही सोते समय इस बता का ध्यान रखें की आप रात को समय से सो जाएँ और सुबह समय से उठें।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे फॉलो करने से प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में ताकत को बढ़ाने में मदद मिलती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इन टिप्स को जरूर फॉलो करना चाहिए। इसके अलावा महिला को अपनी सभी जांच, टीकाकरण समय से करवाना चाहिए और समय से दवाइयां लेनी चाहिए। ताकि महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

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सम्बन्ध बनाने के बाद पेट में दर्द क्यों होता है?

सम्बन्ध बनाना महिला और पुरुष के रिश्ते का एक अहम पहलु है लेकिन कोई भी इसके ऊपर खुलकर बात करने से डरता है। क्योंकि ऐसा माना जाता है यह पति पत्नी के बीच की ही बात होती है लेकिन क्या आप जानते हैं की कई महिलाओं को सम्बन्ध बनाने के दौरान दिक्कतें भी हो सकती है और यदि महिला उन दिक्कतों के बारे में बात नहीं करें तो उनकी परेशानी बढ़ सकती है।

साथ ही यदि महिला को कोई दिक्कत होती है तो उसके बाद महिला के सम्बन्ध बनाने की इच्छा में कमी आ सकती है। जिसकी वजह से महिला और पुरुष के शादीशुदा जीवन में कलह बढ़ जाता है। इसीलिए हमेशा नहीं लेकिन दिक्कत होने पर तो महिला को इसके बारे में बात जरूर करनी चाहिए जैसे की कुछ महिलाओं को सम्बन्ध बनाने के बाद पेट में दर्द होता है।

वैसे शुरुआत में तो अधिकतर सभी महिलाओं को पेट या फिर प्राइवेट पार्ट में दर्द महसूस होता है लेकिन धीरे धीरे यह ठीक होने लगता है। परन्तु कुछ महिलायें हमेशा इस दर्द से गुजरती है। ऐसे में जरुरी है की महिला अपनी इस समस्या को अनदेखा नहीं करें क्योंकि यह बहुत नुकसानदायक भी साबित हो सकती है।

क्यों होता है सम्बन्ध बनाने के बाद दर्द?

जब महिला और पुरुष दोनों शारीरिक रूप से एक दूसरे के पास आते हैं तो इससे केवल उनके शारीरिक सुख ही नहीं मिलता है बल्कि इससे उनके मानसिक रूप से, शारीरिक रूप से, इमोशनली फिट रहने में मदद मिलती है। ऐसे में सम्बन्ध बनाने के दौरान यदि महिला को कोई दिक्कत होती है तो आपको उसका इलाज जरूर करवाना चाहिए। ताकि आपके रिश्ते व् स्वास्थ्य दोनों को सही रहने में मदद मिल सकें। तो आइये अब जानते हैं की आखिर कुछ महिलाओं को सम्बन्ध बनाने के बाद दर्द क्यों होता है।

सिस्ट के कारण

सिस्ट का मतलब होता है जब महिला के अंडाशय से अंडे बाहर निकलते हैं तो कुछ अंडे बाहर निकलने की बजाय ट्यूब में ही चिपक जानते हैं जो सिस्ट का रूप ले लेते हैं। और यदि किसी महिला की ओवरी में सिस्ट हो जाते हैं तो उन महिलाओं को सम्बन्ध बनाने के बाद पेट में दर्द की समस्या हो सकती है।

गलत पोजीशन

सम्बन्ध बनाने के साथ उसे एन्जॉय करना भी जरुरी होता है और इसी एन्जॉयमेंट के लिए कपल एक नहीं अलग अलग पोजीशन को ट्राई करके सम्बन्ध बनाने की कोशिश करते हैं। लेकिन कई बार नयेपन के चक्कर में कुछ गलती हो जाती है जिसकी वजह से महिला को पेट दर्द की दिक्कत होने के साथ पुरुष के प्राइवेट पार्ट में भी दर्द हो जाता है।

प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन

यदि महिला को प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन हैं, यूरिन इन्फेक्शन है और ऐसा होने के बाद भी महिला सम्बन्ध बनाती है तो इससे महिला की परेशानी बढ़ सकती है। जिसकी वजह से योनि में खुजली जलन बढ़ने के साथ पेट में दर्द भी हो जाता है।

योनि में सूखापन

जिन महिलाओं के प्राइवेट पार्ट में ड्राइनेस यानी सूखापन होता है उन महिलाओं को भी सम्बन्ध बनाते समय दर्द हो सकता है। जिन महिलाओं को यह समस्या होती है उन महिलाओं की समय के साथ सम्बन्ध बनाने की इच्छा में कमी भी आने लगती है।

रसौली

कुछ महिलाओं को गर्भाशय में रसौली की समस्या भी होती है। और जिन महिलाओं को यह समस्या होती है उन महिलाओं को भी सम्बन्ध बनाने के बाद पेट दर्द की समस्या हो सकती है।

सम्बन्ध बनाते समय की गई गलतियां

अधिकतर लोग यही कहते हैं की सम्बन्ध बनाते समय जोश में रहना जरुरी होता है तभी तो आपको इसका असली आनंद आता है। लेकिन सच तो यह हैं की सम्बन्ध बनाते समय जोश के साथ होश में रहना भी उतना ही जरुरी है। क्योंकि ज्यादा जोश में कई बार आपसे गलती हो जाती है जैसे की बहुत ज्यादा तेजी होने लगती है और महिला के अंदरूनी हिस्सों को दिक्कत पहुँच सकती है। और जो लोग जो पुरुष ऐसा करते हैं उन्ही के पार्टनर्स को इस वजह से पेट में दर्द जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

पीरियड्स के दौरान

वैसे माना जाता है की पीरियड्स के दौरान सम्बन्ध बनाने से महिला को पेट में ऐंठन, दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। लेकिन हर केस में ऐसा ही हो यह सही नहीं है, बल्कि कुछ केस में ऐसा भी होता है की जब महिला पीरियड्स के दौरान सम्बन्ध बनाती है तो इसकी वजह से महिला को पेल्विक एरिया व् पेट में दर्द की समस्या बढ़ जाती है।

मेनोपोज़

जिन महिलाओं की मेनोपोज़ की उम्र होती है वो महिलाएं सम्बन्ध बनाने के बाद होने वाले दर्द की समस्या से परेशान रह सकती है। या फिर महिला को यदि मेनोपोज़ हो गया है तो भी महिला को यह दिक्कत हो सकती है।

जबरदस्ती होने पर

यदि आपका सम्बन्ध बनाने का मन नहीं है लेकिन फिर भी आप अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाने के लिए तैयार हो जाती है ऐसे में महिला जब भावनात्मक रूप से तैयार नहीं होती है। तो ऐसी कंडीशन में भी महिला सम्बन्ध बनाने के बाद दर्द का अनुभव कर सकती है।

निष्कर्ष: जिन महिलाओं को सम्बन्ध बनाने के बाद पेट दर्द होता है तो इसका कोई छोटा कारण नहीं होता है बल्कि इसे अनदेखा करने से आपकी दिक्कत बढ़ सकती है। ऐसे में जिन महिलाओं को सम्बन्ध बनाने के बाद पेट दर्द होता है उन्हें एक बार अपनी जांच जरूर करवानी चाहिए।

तो यह हैं सम्बन्ध बनाने के बाद पेट दर्द होने के कारण, यदि आपको भी यह दिक्कत है तो ऊपर बताई गई बातों का अच्छे से ध्यान रखें ताकि आपकी सेहत को कोई दिक्कत न पहुंचें।

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