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प्रेगनेंसी में घीया कब नुकसान करता है

गर्भावस्था के दौरान महिला के लिए बहुत जरुरी है की महिला अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखें। क्योंकि महिला जितने अच्छे से अपनी डाइट का ध्यान रखती है उतना ही गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर रहती है जिससे गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को फायदा मिलता है। लेकिन साथ ही महिला को किसी भी चीज का सेवन करने से पहले उसकी पूरी जानकारी भी लेनी चाहिए जैसे की महिला को क्या खाना चाहिए, कितनी मात्रा में खाना चाहिए, खाते समय किन किन सावधानियों को बरतना चाहिए। ताकि महिला जो भी खा पी रही है उससे माँ व् बच्चे को फायदा ही मिलें किसी तरह का नुकसान नहीं हो। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान लौकी यानी घीया के सेवन के बारे में बात करने जा रहे हैं।

क्या प्रेगनेंसी के दौरान लौकी का सेवन करना चाहिए?

जी हाँ, प्रेग्नेंट महिला लौकी का सेवन कर सकती है क्योंकि लौकी में मौजूद पोषक तत्व माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। यदि महिला घीया का सेवन करती है तो इसकी वजह से महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी शारीरिक परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में लौकी खाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान महिला यदि लौकी का सेवन करती है तो इससे महिला को एक नहीं बल्कि कई सेहत सम्बन्धी फायदे मिलते हैं। जैसे की:

  • लौकी का सेवन करने से गर्भवती महिला को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • गर्भवती महिला यदि घीया का सेवन करती है तो इससे महिला के ब्लड शुगर लेवल को सामान्य रहने में मदद मिलती है जिससे महिला को जेस्टेशनल शुगर की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान लौकी का सेवन करने से महिला के शरीर में विटामिन्स की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है जिससे महिला की इम्युनिटी बढ़ती है और माँ व् बच्चे को बिमारियों व् संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।
  • लौकी में फोलेट भी मौजूद होता है और फोलेट प्रेगनेंसी के दौरान एक अहम पोषक तत्व होता है जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है। जैसे की फोलेट युक्त डाइट लेने से महिला को मिसकैरिज, समय से पहले डिलीवरी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है साथ ही फोलेट शिशु के मानसिक विकास को बेहतर करने के साथ रीढ़ की हड्डी के बेहतर विकास में भी मदद करता है।
  • घीया फाइबर का भी बेहतरीन स्त्रोत होता है और प्रेगनेंसी के दौरान फाइबर युक्त डाइट लेने से महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़, एसिडिटी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। ऐसे में महिला को चाहे घीया कितनी भी नापसंद हो लेकिन इन फायदों के लिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान घीया का सेवन जरूर करना चाहिए।
  • जिन गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान पाइल्स की समस्या रहती है उनके लिए लौकी का सेवन फायदेमंद होता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण शरीर का तापमान ज्यादा हो सकता है लेकिन लौकी का सेवन करने से महिला के शरीर के तापमान को सही रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में घीया कब नुकसान करता है?

गर्भावस्था के दौरान घीया का सेवन बहुत फायदेमंद होता है लेकिन कुछ केस में महिला को घीया का सेवन करने से नुकसान भी पहुँच सकता है। ऐसे में महिला को घीया का सेवन करते समय शयन रखना चाहिए जैसे की:

कड़वी घीया नहीं खानी चाहिए

गर्भवती महिला कड़वी घीया का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे गर्भवती महिला को फ़ूड पॉइज़निंग हो सकती है। जिसकी वजह से महिला को उल्टी, दस्त जैसी समस्या भी बढ़ सकती है। इस समस्या से बचने के लिए महिला को घीया का सेवन स्वयं करने से पहले किसी को टेस्ट करवाना चाहिए ताकि महिला को यह दिक्कत नहीं हो।

लौकी का जूस

लौकी के जूस को वजन कम करने के लिए पीया जाता है ऐसे में गर्भवती महिला को लौकी के जूस का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला के वजन में कमी होती है तो इसकी वजह से गर्भवती महिला व् शिशु दोनों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

लौकी से एलर्जी हो

यदि प्रेग्नेंट महिला को लौकी खाने से किसी तरह की एलर्जी हो या फिर प्रेगनेंसी के दौरान लौकी खाने की वजह से कोई दिक्कत हो तो भी महिला को लौकी का सेवन नुकसान पहुंचा सकता है।

गर्भवती महिला को लौकी का सेवन करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • महिला को बिना अच्छे से धोए लौकी का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि बिना धुली सब्जियों का सेवन करने से संक्रमण का खतरा होता है।
  • यदि घीया पर कोई दाग हो या छेद आदि हो तो महिला को उस घीया को नहीं खाना चाहिए।
  • हमेशा ताज़ी लौकी को खरीद कर ही खाने में प्रयोग करें साथ ही हो सके तो छोटी लौकी लाएं क्योंकि वो ज्यादा स्वादिष्ट होती है।
  • यदि डॉक्टर आपको लौकी का जूस पीने के लिए कहते हैं तो ध्यान रखें की आप लौकी का जूस किसी भी अन्य फल सब्ज़ी के जूस के साथ मिक्स करके नहीं पीएं।
  • हो सके तो लौकी को खाने में प्रयोग लाने से पहले से किसी से टेस्ट करवा लें की वो कड़वी तो नहीं है।

किस तरह कर सकते हैं लौकी का खाने में प्रयोग?

  • लौकी का हलवा बना सकते हैं।
  • चने की दाल के साथ मिक्स करके इसे खा सकते हैं।
  • लौकी के कोफ्ते भी बनाएं जा सकते हैं।
  • फ्राई सा स्टफ करके भी लौकी का सेवन कर सकते हैं।
  • साम्भर बनाकर भी घीया का सेवन किया जा सकता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान घीया का सेवन कब नुकसान करता है साथ ही प्रेगनेंसी में घीया के सेवन से जुडी सम्पूर्ण जानकारी। यदि आप भी माँ बनने वाली है और घीया आप नहीं खाती है तो आप इन बेहतरीन फायदों के लिए सिमित मात्रा में घीया को अपनी डाइट का हिस्सा बना सकती है।

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क्या प्रेगनेंसी में व्रत कर सकते हैं?

हिन्दू धर्म में पूजा पाठ व्रत करने आदि का बहुत महत्व होता है। साथ ही लोग ऐसा मानते हैं की पूजा पाठ करने व्रत करने आदि से सभी देवी देवताओं की कृपा दृष्टि उनपर बनी रहती है। इसके अलावा नवरात्रि व्रत, जन्माष्टमी, शिवरात्रि आदि बहुत से महत्वपूर्ण व्रत भी सालभर में आते हैं जिन्हे लोग रखते भी है। कुछ लोग सभी व्रत करते हैं तो कुछ अपनी आस्था अनुसार व्रत करते हैं। ऐसे में जब महिला प्रेग्नेंट होती है तो उसे मन में यह सवाल जरूर आता की वो प्रेगनेंसी के दौरान व्रत कर सकती है या नहीं?

आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान व्रत रखना सही है या गलत, उसके बारे में बात करने के साथ प्रेग्नेंट महिला को यदि कोई व्रत रखना है तो उन्हें किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उसके बारे में भी बताएंगे। क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं? और आप भी प्रेगनेंसी से पहले बहुत व्रत रखती थी और अब सोच रही हैं की व्रत रखें या नहीं? तो आइये आपके इन्ही सवालों के जवाब के बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या प्रेगनेंसी में व्रत रखना सेफ होता है?

सारी जिंदगी वैसे तो महिलाएं व्रत कर सकती है ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला व्रत छोड़ना भी चाहे तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है। क्योंकि यदि महिला स्वस्थ रहेगी तो कभी भी व्रत कर लेंगी। लेकिन हिन्दू धर्म में लोग अपनी आस्था को सबसे आगे रखते हैं जैसे की अधिकतर महिलाएं चाहे किसी भी हालात में हो और करवाचौथ का व्रत जाए तो महिलाएं जरूर रखती है क्योंकि यह उनके सुहाग की लम्बी उम्र के लिए होता है।

साथ ही कुछ महिलाएं जो शुरुआत से नवरात्रि, जन्माष्टमी आदि का व्रत करती है तो वो इन व्रत को प्रेगनेंसी के दौरान भी छोड़ना नहीं चाहती है। ऐसे में उनके मन में सवाल आता है की क्या प्रेगनेंसी के दौरान व्रत करना उनके व् उनके बच्चे की सेहत के लिए सेफ है या नहीं? तो इसका जवाब है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला का व्रत रखना सेफ होता है क्योंकि यदि महिला पूरी तरह से सेफ है तो व्रत रखने में महिला को कोई दिक्कत नहीं है।

लेकिन व्रत रखने से पहले एक बार डॉक्टर की राय लेना जरुरी होता है। इसके साथ कुछ कंडीशंस में महिला को व्रत न रखने की सलाह दी जाती है। और इसके अलावा व्रत के दौरान महिला को बहुत सी बातों का ध्यान रखने के लिए भी कहा जाता है। तो आइये अब आगे जानते हैं की महिला को कब व्रत नहीं रखना चाहिए और व्रत रखने पर किन किन बातों का ध्यान रखना महिला के लिए जरुरी होता है।

प्रेग्नेंट महिला को कब व्रत नहीं रखना चाहिए?

ऐसा नहीं है की हर गर्भवती महिला व्रत रख सकती है बल्कि कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान व्रत बिल्कुल नहीं कर सकती है। जैसे की यदि:

  • गर्भवती महिला को यदि शारीरिक परेशानियां प्रेगनेंसी के दौरान अधिक होती है, प्रेगनेंसी में डॉक्टर द्वारा दिक्कत बताई गई है तो ऐसी हालत में महिला को व्रत नहीं करना चाहिए।
  • प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में व्रत नहीं रखना चाहिए क्योंकि इस दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को घबराहट, चिड़चिड़ाहट, उल्टियां अधिक होना, जी मिचलाना जैसी समस्या अधिक हो सकती है। ऐसे में व्रत रखने के कारण महिला दिक्कतें बढ़ सकती है।
  • प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में भी महिला को व्रत रखने से बचना चाहिए क्योंकि इस दौरान शिशु का विकास दुगुनी तेजी से होता है और व्रत के दौरान तो ज्यादा कुछ खा नहीं सकते हैं। ऐसे में शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण शिशु का विकास प्रभावित हो सकता है साथ ही शारीरिक परेशानियां भी बढ़ सकती है।
  • यदि किसी व्रत में आपको बिना खाएं पीएं पूरा दिन रहना है तो गर्भवती महिला को उन व्रत को करने से भी बचना चाहिए।
  • डॉक्टर द्वारा आपको यदि व्रत न रखने की सलाह दी जाये तो आपको उस सलाह को भी मानना चाहिए और व्रत नहीं रखना चाहिए।

व्रत रखने पर गर्भवती महिला रखें इन बातों का ध्यान

प्रेगनेंसी के दौरान महिला यदि व्रत रखती है तो महिला को कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए ताकि महिला को व्रत के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं हो। तो आइये अब उन टिप्स के बारे में विस्तार से जानते हैं।

  • प्रेग्नेंट महिला को ऐसा कोई व्रत नहीं रखना चाहिए जिसमे आपको पूरा दिन भूखा प्यासा रहना हो। करवाचौथ के व्रत में भी महिला को खानी सुनने के बाद चाय या पानी और साथ ही फलाहार का सेवन भी जरूर करना चाहिए।
  • व्रत रखने पर महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए ताकि बॉडी में पानी की कमी के कारण कोई दिक्कत नहीं हो और शरीर में एनर्जी को बरकरार रहने में मदद मिल सकें।
  • व्रत का खाना ज्यादातर मीठा, तला भुना ही होता है ऐसे में महिला को कोशिश करनी चाहिए की महिला ज्यादा मीठा व् तला भुना खाने से बचे क्योंकि इसकी वजह से महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • थोड़ी थोड़ी देर में महिला को पानी, नारियल पानी, छाछ, फल आदि का सेवन करते रहना चाहिए ताकि शरीर में एनर्जी को बरकरार रहने में मदद मिल सकें।
  • व्रत के दौरान महिला को आराम भी जरूर करना चाहिए।
  • यदि व्रत रखने के दौरान महिला को किसी भी तरह की परेशानी का अनुभव होता है तो महिला को उस व्रत को वही रोक देना चाहिए।
  • व्रत के दौरान बाहर से मिलने वाले व्रत के खाने का सेवन करने से बचें।
  • कुछ महिलाएं व्रत के दौरान ज्यादा चाय पीने लगती हैं लेकिन चाय का ज्यादा सेवन गर्भवती महिला और शिशु दोनों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है ऐसे में महिला को ज्यादा चाय कॉफ़ी का सेवन करने से बचना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान महिला को व्रत करना चाहिए न नहीं करना चाहिए उससे जुडी जानकारी, साथ ही व्रत के दौरान महिला को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उससे जुडी जानकारी, यदि आप भी माँ बनने वाली है और व्रत रखने के बारे में सोच रही है तो आपको इन सभी बातों के बारे में पता होना चाहिए।

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प्रेगनेंसी में संगीत सुनने के फायदे? और कैसा संगीत सुनना चाहिए

हर कोई अलग अलग तरीके का संगीत सुनना पसंद करता है जैसे की कुछ लोग लाउड यानी की तेज म्यूजिक सुनना पसंद करते हैं, कुछ लोग धीमा संगीत सुनना पसंद करते हैं, तो कुछ लॉफ सैड संगीत सुनना भी पसंद करते हैं। साथ ही हर किसी का संगीत सुनने का कारण भी अलग हो सकता है जैसे की कुछ लोग अपने मूड को अच्छा करने के लिए संगीत सुनते हैं, कुछ लोग तनाव से राहत पाने के लिए संगीत सुनते हैं, तो कुछ एन्जॉय करने के लिए संगीत सुनते हैं, आदि।

लेकिन इन सभी बातों को जानने के बाद यह बात तो साबित हो जाती है की संगीत किसी दवाई से कम नहीं होता है और बहुत फायदेमंद होता है। ऐसे ही संगीत सुनना प्रेगनेंसी के दौरान भी फायदेमंद होता है यदि गर्भवती महिला संगीत सुनती है तो इससे गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी फायदे मिलता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की प्रेगनेंसी में संगीत सुनने से क्या-क्या फायदे मिलते हैं और किस तरीके का संगीत गर्भवती महिला को सुनना चाहिए।

प्रेगनेंसी में संगीत सुनने के फायदे

गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान यदि संगीत सुनना चाहती है तो महिला और शिशु दोनों के लिए सेफ होता है। साथ ही संगीत सुनने से माँ व् बच्चे को बहुत से फायदे भी मिलते हैं। जैसे की:

स्ट्रेस से राहत

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाएं बहुत ज्यादा स्ट्रेस ले लेती है जिसकी वजह से महिला और शिशु दोनों को नुकसान पहुँच सकता है। लेकिन यदि महिला संगीत सुनती है तो इसे महिला को मानसिक रूप से रिलैक्स रहने में मदद मिलती है। और तनाव दूर होने के साथ महिला संगीत सुनने से खुश रहती है।

ब्लड प्रैशर रहता है कण्ट्रोल

प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी महिलाएं हाई ब्लड प्रैशर की समस्या का शिकार हो जाती है और हाई ब्लड प्रैशर के कारण माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है। लेकिन संगीत सुनने से महिला को शांत रहने में मदद मिलती है जिससे ब्लड प्रैशर भी कण्ट्रोल रहता है और प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हदय सम्बन्धी समस्याओं से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

इमोशनल रूप से महिला होती है स्ट्रांग

प्रेगनेंसी के दौरान महिला शारीरिक व् मानसिक रूप से बदलाव महसूस करने के साथ शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण इमोशनल रूप से भी थोड़ा परेशान महसूस कर सकती है। लेकिन संगीत सुनने से गर्भवती महिला इमोशनल रूप से मजबूत होती है।

मूड होता है बेहतर

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला में मूड स्विंग्स की समस्या भी देखने को मिलती है। जिसके कारण महिला का स्वाभाव चिड़चिड़ा महसूस हो सकता है, महिला अचानक ही रोने लगती है तो कभी गुस्सा भी हो जाती है। ऐसे में गर्भवती महिला यदि संगीत सुनती है तो इससे महिला के मूड को बेहतर रहने में मदद मिलती है साथ ही महिला खुश भी रहती है।

बेबी मूवमेंट में आता है सुधार

गर्भ में शिशु के बढ़ते विकास के साथ शिशु की सुनने की क्षमता भी बढ़ती है ऐसे में शिशु बाहर की आवाज़ों को सुनने लगता है। और जब शिशु बाहर की आवाज़ों को सुनता है तो इस पर शिशु प्रतिक्रिया भी देता है जिससे शिशु की मूवमेंट बढ़ती है। लेकिन शिशु को ज्यादा तेज आवाज़ में संगीत सुनाने से बचना चाहिए।

शिशु का मानसिक व् शारीरिक विकास बढ़ता है

संगीत सुनने से गर्भ में शिशु को एक्टिव रहने में मदद मिलती है। और गर्भ में शिशु जब एक्टिव रहता है तो इससे शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास तेजी से होता है।

प्रेगनेंसी के दौरान कितनी देर संगीत सुनना चाहिए?

गर्भावस्था के समय महिला को आधे से एक घंटे तक संगीत सुनना चाहिए। क्योंकि गर्भ में शिशु का भी सोने उठने का समय होता है। साथ ही सभी चीजें सिमित मात्रा में हो तभी फायदा मिलता है। साथ ही इसे आपका होने वाला शिशु बुद्धिमान व् स्मार्ट पैदा होता है।

प्रेग्नेंट महिला को किस तरह का म्यूजिक सुनना चाहिए?

गर्भवती महिला को ज्यादा तेज, चीखने वाला म्यूजिक नहीं सुनना चाहिए साथ ही ज्यादा तेज आवाज़ में भी गर्भवती महिला को संगीत नहीं सुनना चाहिए। यदि महिला संगीत सुनती है तो महिला को धीमा और कम आवाज़ में संगीत सुनना चाहिए साथ ही गर्भवती महिला को उदास करने वाला संगीत भी नहीं सुनना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान संगीत सुनने के फायदे, यदि आप भी गर्भवती है तो आपको भी अपने और अपने बच्चे दोनों के फायदे के लिए थोड़ी देर संगीत जरूर सुनना चाहिए। इसके अलावा ध्यान रखें की लम्बे समय तक हैडफ़ोन लगाकर गाने सुनने से बचे क्योंकि इससे आपके सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है।

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स्पर्म काउंट बढ़ाने के तरीके?

स्पर्म काउंट कम होने की समस्या आज कल बहुत से पुरुषों में देखने को मिलती है। इसीलिए तो आज के समय में यदि कोई महिला गर्भधारण नहीं होने के कारण परेशान है। तो इसका कारण महिला के शरीर में होने वाली परेशानी ही नहीं बल्कि पुरुष में होने वाली दिक्कत भी हो सकती है। क्योंकि यदि पुरुष के शुक्राणु की कमी होती है तो यह परेशानियां होना आम बात होती है।

साथ ही आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग इतना तनाव लेते हैं, लोगो का खान पान सही नहीं है, गलत लत के लोग शिकार है तो यह सब भी स्पर्म काउंट के ऊपर बुरा प्रभाव डालते हैं और इसी कारण लोग अपनी शादीशुदा जिंदगी में भी दिक्कतों का सामना करते हैं। क्या आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। यदि हाँ, तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको स्पर्म काउंट बढ़ाने के कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं।

मसूर दाल

मसूर दाल में फोलिक एसिड भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद करता है। और स्पर्म काउंट के बढ़ने से पुरुषों की प्रजनन क्षमता भी बेहतर होती है। जिससे पुरुषों को अपनी शादीशुदा लाइफ को बेहतर तरीके से एन्जॉय करने में मदद मिलती है।

लहसुन

लहसुन का सेवन करने से भी स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद मिलती है। क्योंकि लहसुन में जिंक की मात्रा अधिक होती है। और जिंक स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद करता है। जिंक युक्त अन्य पदार्थ जैसे की तिल, मूंगफली, ओट्स, बीन्स आदि का सेवन करने से भी स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद मिलती है।

केला

यह एक ऐसा फल है जो आपको पूरे बारह महीने मार्किट में मिल जाता है और इस फल का सेवन करने से आपको एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है। ऐसे में जब आप एनर्जी से भरपूर रहते हैं तो इसका असर स्पर्म काउंट पर भी पड़ता है। और केले का सेवन करने से स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद मिलती है साथ ही स्पर्म काउंट की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

डार्क चॉकलेट

डार्क चॉकलेट खाने से टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन को बढ़ाने में मदद मिलती है। और टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन शुक्राणु की संख्या को बढ़ाने में मदद करता है। ऐसे में पुरुष चाहे तो दूध में चॉकलेट पाउडर मिलाकर या वैसे ही डार्क चॉकलेट का सेवन कर सकते हैं।

शतावरी

हरी सब्जियों में शतावरी का नाम भी आता है और हरी सब्जियां पोषक तत्वों की खान होती है। ऐसे में यदि हफ्ते में तीन से चार बार यदि आप शतावरी का सेवन करते हैं। तो इससे स्पर्म काउंट को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलती है।

अश्वगंधा

अश्वगंधा का नाम आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों में लिया जाता है और आयुर्वेद के अनुसार अश्वगंधा का इस्तेमाल करने से बहुत से सेहत सम्बन्धी फायदे भी मिलते हैं। साथ ही अश्वगंधा का सेवन करने से स्पर्म काउंट की संख्या को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। ऐसे में यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं तो आप भी इसका सेवन कर सकते हैं क्योंकि इससे शुक्राणु से जुडी समस्या को आप आसानी से दूर कर सकते हैं।

बेरीज़

स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी यानी जामुन, क्रैनबेरी आदि खाने से भी स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसीलिए आप चाहे तो इनमे से किसी भी बेरी का सेवन कर सकते हैं।

अंडे

विटामिन ई और प्रोटीन से भरपूर अंडे स्वस्थ शुक्राणुओं की संख्या को बढ़ाने में मदद करते हैं साथ ही अंडे का सेवन करने से प्रजनन क्षमता को कम करने वाले फ्री रेेडिकल्स से लड़ने में भी मदद मिलती है। ऐसे में जो पुरुष इस समस्या से जूझ रहे होते हैं उन्हें नियमित दो अंडे का सेवन जरूर करना चाहिए।

कद्दू के बीज

ओमेगा फैटी एसिड से भरपूर कद्दू के बीज स्पर्म काउंट को बढ़ाने में बहुत फायदेमंद होते हैं क्योंकि इससे पुरुष के प्राइवेट पार्ट में ब्लड फ्लो बेहतर होने के साथ टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। जिससे शुक्राणुओं की संख्या व् गुणवत्ता बेहतर होने के साथ प्रजनन क्षमता भी बेहतर होती है।

पालक, ब्रोकली व् अन्य हरी सब्जियां

स्पर्म काउंट बढ़ाने के लिए पालक, ब्रोकली, व् अन्य हरी सब्जियों का भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि इनमे विटामिन ए, एंटी ऑक्सीडेंट्स, फोलेट आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद करते हैं।

अखरोट

अखरोट में ओमेगा फैटी एसिड उचित मात्रा में मौजूद होता है। और ओमेगा फैटी एसिड स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद करता है ऐसे में यदि आप नियमित रूप से अखरोट या भीगे हुए अखरोट का सेवन करते हैं तो इससे भी स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद मिलती है।

योगासन व् व्यायाम

योगासन व् व्यायाम करने से आपको शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। ऐसे में यदि आप योगासन व् व्यायाम करते हैं तो इसका फायदा भी आपको मिलता है जिससे आपके स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद मिलती है।

स्ट्रेस से बचें

तनाव यानी स्ट्रेस स्पर्म काउंट व् उसकी गुणवत्ता में कमी आने का अहम कारण हो सकता है। ऐसे में आपको स्ट्रेस लेने से बचना चाहिए और खुश रहना चाहिए ताकि आपको इस समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकें।

स्पर्म काउंट बढ़ाने के अन्य तरीके

  • स्टीम बाथ, सोना बाथ आदि लेने से बचे क्योंकि इससे शरीर में गर्मी बढ़ती है जिसकी वजह से आपको स्पर्म से जुडी समस्या का सामना करना पड़ सालता है।
  • ज्यादा टाइट अंडरवेयर नहीं पहनें।
  • पैंट की जेब में मोबाइल नहीं रखें।
  • जांघो पर ज्यादा लैपटॉप रखकर काम नहीं करें क्योंकि इससे निकलने वाली गर्मी भी आपको शुक्राणु की कमी की समस्या से ग्रसित कर सकती है।
  • अल्कोहल, सिगरेट व् अन्य नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करें।
  • सोया मिल्क का सेवन नहीं करें क्योंकि इसकी वजह से शुक्राणु में कमी की समस्या आ सकती है।
  • जरुरत से ज्यादा चाय कॉफ़ी का सेवन नहीं करें क्योंकि इससे भी शुक्राणु में कमी की समस्या आ सकती है।
  • रात के समय ज्यादा टाइट कायदे पहनकर नहीं सोएं।
  • एक चम्मच शहद के रस में एक चम्मच अदरक व् एक चम्मच प्याज का रस मिलाकर पीएं इससे स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • नियमित रूप से चुटकी भर जायफल पाउडर पानी के साथ लें ऐसा करने से भी शुक्राणु की गुणवत्ता को बेहतर करने में मदद मिलती है।
  • रात भर के लिए तीन चार बादाम पानी में भिगोकर रखें उसके बाद सुबह उन बादाम को छीलकर उनका पेस्ट बनाएं और फिर उसे एक गिलास दूध में डालकर उबाल लें फिर इसमें मिश्री व् एक चम्मच देसी घी मिलाकर पीएं। ऐसा करने से भी शुक्राणु की गुणवत्ता को बेहतर करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो स्पर्म काउंट को बढ़ाने में आपकी मदद करते हैं। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं तो आप भी इन टिप्स को ट्राई कर सकते हैं। इसके अलावा ज्यादा दिक्कत होने पर आपको एक बार डॉक्टर से भी राय लेनी चाहिए।

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प्रेग्नेंट होते ही यह सब खाने का मन करता है?

माँ बनना हर महिला के जीवन का सबसे बड़ा बदलाव होने के साथ सबसे बड़ा सपना भी होता है। और हर महिला अपने जीवन में इस अनुभव का अहसास जरूर करना चाहती है। उसके बाद जब महिला गर्भधारण करती है तो प्रेगनेंसी के पहले दिन से लेकर आखिरी दिन तक महिला अपने शरीर में बहुत से बदलाव का अनुभव करती है।

महिला के उठने, बैठने, खाने, पीने, चलने, आदि सभी तरीकों में बदलाव आ जाता है। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेग्नेंट महिला के खाने की इच्छा के बारे में बात करने जा रहे हैं की आखिर प्रेग्नेंट होते ही क्या चीजें खाने का मन करता है।

प्रेग्नेंट होते ही क्या खाने का मन करता है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं। ऐसे में इन बदलाव का असर महिला की जीभ के स्वाद पर भी असर पड़ता है। जिसकी वजह से महिला का प्रेगनेंसी के दौरान अलग अलग चीजों का सेवन करने का मन कर सकता है।

साथ ही कई बार महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान उन चीजों का स्वाद पसंद आने लगता है जो महिला पहले बिल्कुल भी नहीं खाती थी। और इस दौरान महिला अपनी पसंदीदा चीजों को देखना भी पसंद नहीं करती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला का क्या खाने का मन कर सकता है।

खट्टा खाने की इच्छा

अधिकतर महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान खट्टा खाने की तलब होने लगती है और कई महिलाएं तो इमली को अपने पास रखना ही शुरू कर देती है। लेकिन महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला ज्यादा खट्टा नहीं खाएं क्योंकि इसकी वजह से शरीर में पानी की कमी होने की समस्या हो सकती है।

मीठा

ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नहीं है की हर गर्भवती महिला का एक ही तरह का खाना खाने का मन करे। जिस तरह कई महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान खट्टा खाने की इच्छा बढ़ जाती है उसी प्रकार कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान मीठा खाने की इच्छा अधिक होती है। लेकिन महिला को मीठा भी जरुरत से ज्यादा नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान जेस्टेशनल डाइबिटीज़ होने का खतरा रहता है।

चटपटा व् मसालेदार

कुछ महिलाओं का प्रेगनेंसी के दौरान जीभ का स्वाद कड़वा हो जाता है ऐसे में उनकी जब भी खाने की इच्छा होती है तो महिला का चटपटा व् मसालेदार खाने का मन करता है। लेकिन महिला को जरुरत से ज्यादा चटपटा व् मसालेदार खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि ऐसा खाना खाने से महिला को कब्ज़, एसिडिटी, सीने में जलन जैसी समस्या होने का खतरा अधिक होता है।

स्ट्रीट फ़ूड

गर्भावस्था के दौरान महिला का स्ट्रीट फ़ूड खाने का मन भी अधिक कर सकता है लेकिन महिला को बाहर का खाना खाने से बचना चाहिए। क्योंकि आप नहीं जानते हैं की वह खाना कितना पुराना होता है और उन्हें बनाने के लिए किन किन कर कैसी कैसी चीजों का इस्तेमाल किया गया है।

चॉकलेट

कुछ गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान डार्क चॉकलेट खाने की इच्छा हो सकती है लेकिन महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला बहुत ही कम मात्रा में इसका सेवन करें। क्योंकि डार्क चॉकलेट में कैफीन की मात्रा की अधिकता होती है और कैफीन गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में रुकावट आ सकती है।

आइसक्रीम

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ सकता है। ऐसे में महिला को ठंडी चीजें जैसे की आइसक्रीम आदि खाने की इच्छा अधिक हो सकती है।

अचार

अधिकतर गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान आम का अचार, निम्बू का खट्टा मीठा अचार आदि खाने की इच्छा अधिक हो सकती है। लेकिन महिला को जरुरत से ज्यादा इन चीजों का सेवन नहीं काकर्ण चाहिए।

तो यह हैं कुछ चीजें जिन्हे खाने का मन प्रेगनेंसी के दौरान महिला का हो सकता है और इन सभी चीजों का सेवन गर्भवती महिला सिमित मात्रा में कर सकती है लेकिन जरुरत से ज्यादा महिला को इन चीजों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

Food cravings during pregnancy

गर्भ में शिशु को कब- कब भूख लगती है और महिला को कैसा महसूस होता है?

गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु का विकास पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है और शिशु के विकास के लिए जिन जिन चीजों की, पोषक तत्वों की, जरुरत होती है वह गर्भनाल की मदद से शिशु तक पहुचायें जाते हैं। और यह सभी शिशु को जब मिलते हैं तो इससे शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास को तेजी से होने में मदद मिलती है।

उसके बाद जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है तो शिशु बहुत सी चीजों को महसूस भी करने लगता है जैसे की शिशु बाहर की आवाज़ों को सुनने लगता है, शिशु को रौशनी का पता लगने लगता हैं, पेट पर हाथ फेरने पर शिशु उसे भी महसूस कर सकता है, गर्भ में शिशु को खाद्य पदार्थों के स्वाद के बारे में पता चलता है, आदि। आज इस आर्टिकल में हम आपको शिशु को भूख कब लगती है और शिशु को भूख लगने पर महिला को कैसा महसूस होता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

महिला को भी महसूस होती है भूख

प्रेगनेंसी के दौरान महिला जो भी खाती पीती है वो सब शिशु तक भी पहुँचता है। साथ ही ऐसा माना जाता है की जब शिशु को चीजों का स्वाद पता चलने लगता है और जो भी स्वाद बच्चे को अच्छा लगता है और महिला उस खाद्य पदार्थ को खाती है तो शिशु को अच्छा लगता है। और गर्भ में शिशु तेज हलचल करने लगता है क्योंकि वह उस स्वाद के प्रति अपनी प्रतिक्रिया अपनी हलचल के माध्यम से देता है।

साथ ही जब शिशु को भूख लगती है तो महिला को भी भूख महसूस हो सकती है यानी की महिला का कुछ खाने का मन करता है। और भूख लगने पर जब महिला से बिल्कुल भी इंतज़ार नहीं हो तो इसका मतलब यह हो सकता है की गर्भ में शिशु को भी बहुत तेज भूख लगती है। साथ ही यदि महिला का यदि कुछ अलग यानी की खट्टा, मीठा, चटपटा खाने का मन करे तो आपको यह भी समझ सकते हैं की बच्चे का यह खाने का मन कर रहा है।

पेट में उथल पुथल अधिक होना

गर्भ में पल रहा शिशु जब भूखा होता है तो इस दौरान शिशु गर्भ में ज्यादा हलचल भी कर सकता है। ऐसे में जब महिला को शिशु की हलचल जब ज्यादा महसूस हो तो महिला को कुछ खाकर या पीकर देखना चाहिए। हो सकता है की आपके खाने या पीने के बाद गर्भ में शिशु शांत हो जाये। यदि ऐसा हो जाये तो समझ जाइये की गर्भ में शिशु को भूख लग रही थी इसीलिए शिशु ज्यादा हलचल कर रहा था।

अचानक से महिला का कुछ खाने का मन करें

यह तो आप जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में अलग अलग लक्षण महसूस होते हैं जो की पहले महिला को कभी महसूस नहीं हुए। जैसे की अचानक से महिला का कुछ खाने का मन करें, बहुत तेजी से भूख लगे, कुछ मीठा या खाता खाने की क्रेविंग बहुत ज्यादा हो, आदि। यदि महिला को ऐसे कुछ लक्षण महसूस हो तो महिला को समझ जाना चाहिए की गर्भ में शिशु को भूख लगी है।

तो यह हैं वो लक्षण जो महिला को गर्भ में शिशु को भूख लगने पर महसूस हो सकते हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए ताकि गर्भ में आपके शिशु को भूख लगने पर आप उसे समय से खाने के लिए पहुंचा सके जिससे गर्भ में शिशु का विकास अच्छे तरीके से होने में मदद मिल सके।

Why curd should not be eaten during pregnancy

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जब शिशु के गाल फटने लगे तो यह जरूर करें?

सर्दी का मौसम आते ही स्किन थोड़ी शुष्क यानी की रूखी हो जाती है। और स्किन का रूखापन बढ़ने के कारण स्किन फटने लगती है जिसके कारण हल्का हल्का दर्द भी महसूस हो सकता है। और जब बात छोटे बच्चे की हो तो उसकी स्किन के लिए एक्स्ट्रा केयर की जरुरत पड़ती है। क्योंकि बच्चों की स्किन बहुत ही कोमल व् नाजुक होती है।

अब सर्दियों का मौसम ही चल रहा है और यदि आपके घर में भी कोई छोटा बच्चा है तो बच्चे को इस समस्या से सुरक्षित रखने के लिए और यदि बच्चा इस समस्या से परेशान है तो इस समस्या के इलाज के लिए आपको कुछ आसान टिप्स को ट्राई करना चाहिए। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे ही आसान टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो शिशु के फटे गाल की समस्या को दूर करने में आपकी मदद करते हैं।

नारियल तेल

फटे गाल की समस्या को दूर करने के लिए नारियल तेल का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होते हैं। शिशु के रात को सोने के बाद शिशु को आप गालों पर नारियल का तेल लगाएं इसके अलावा आप शिशु की नाभि पर भी नारियल का तेल लगाएं। रात के साथ दिन में भी शिशु की मालिश करते समय थोड़ी देर के लिए नारियल तेल शिशु के गाल पर लगाएं। ऐसा रोजाना करें इससे शिशु के गाल सही रहेंगे इसके अलावा नाभि पर तेल लगाने से शरीर के अन्य हिस्सों की स्किन को भी सॉफ्ट रहने में मदद मिलती है।

मॉइस्चराइजर

सर्दियों के मौसम में शिशु की स्किन की कोमलता को बरकरार रखने के लिए रोजाना शिशु के नहाने के बाद उसे मॉइस्चराइजर लगाएं। ऐसा करने से भी शिशु के फटे गाल की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

देसी घी

देसी घी जितना खाने में फायदेमंद होता है उतना ही फायदेमंद यह स्किन के लिए भी होता है। ऐसे में आप शिशु के रात को सोने के बाद शिशु के गाल पर देसी घी लगाएं साथ ही शिशु की मालिश भी देसी घी से करें। ऐसा करने से भी शिशु की स्किन को पोषण मिलता है और शिशु को होने वाली इस परेशानी को दूर करने में मदद मिलती है।

मलाई

शिशु के फटे गाल की समस्या को दूर करने के लिए मलाई का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद होता है। इसके लिए आप शिशु के गाल पर मलाई लगाएं और मसाज करें। ऐसा करने से भी शिशु के फटे गाल की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

ग्लिसरीन

शिशु के गाल फटने की समस्या को दूर करने के लिए ग्लिसरीन का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है। थोड़ी सी ग्लिसरीन रात को सोने के बाद शिशु के गाल पर लगाएं ऐसा कुछ दिन करने से शिशु की इस समस्या को पूरी तरह से दूर करने में मदद मिलती है।

मालिश

शिशु की रोजाना किसी अच्छे से तेल से मालिश करें ऐसा करने से शिशु की त्वचा को पोषण मिलता है जिससे शिशु की स्किन फटने जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

बादाम तेल और दही

थोड़ी सी दही में बादाम तेल की बूंदें मिलाकर शिशु के फटे गाल पर लगाएं। और थोड़ी देर बाद शिशु का मुँह साफ़ कर दें ऐसा करने से भी शिशु की फटे गाल की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

गुलाब जल

गुलाब जल भी स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होती है ऐसे में आप ग्लिसरीन में गुलाब जल की कूंच बूंदें मिलाकर बच्चे की स्किन पर लगाएं। ऐसा करने से शिशु के फटे गाल की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

ठंडी हवा व् ज्यादा धूप से शिशु को दूर रखें

शिशु को फटे गाल की समस्या से सुरक्षित रखने के लिए आप शिशु को ठंडी हवा व् ज्यादा धूप में नहीं रखें ऐसा करने से शिशु की स्किन सम्बन्धी समस्या बढ़ सकती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से आप नन्हे शिशु के फटे गाल व् स्किन को कोमल व् मुलायम रख सकते हैं। इसके अलावा शिशु को ठण्ड से भी बचाकर रखना चाहिए ताकि शिशु को सर्दी की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके।

क्या प्रेगनेंसी के दौरान आपको बार-बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है? यह दिक्कत हो सकती है

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और ऐसा होना बहुत ही आम बात होती है लेकिन गर्भवती महिला के लिए यह जानना बहुत जरुरी होता है की कब तक आपको होने वाली परेशानी आम होती है और कब वह आपको नुकसान पहुंचा सकती है। जैसे की गर्भावस्था के दौरान उल्टियों की समस्या का होना आम बात होती है लेकिन यदि उल्टियां ज्यादा होने लग जाएँ तो इसके कारण शरीर में पानी की कमी, थकावट, कमजोरी, शरीर में पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्या महिला को हो सकती है।

साथ ही उल्टियां अधिक होने पर पेट पर भी ज्यादा जोर पड़ता है जो गर्भवती महिला और शिशु की सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। वैसे ही बहुत सी गर्भवती महिलाओं को ज्यादा यूरिन पास करने की इच्छा का होने की समस्या हो सकती है। ऐसे में इस समस्या को लेकर महिला को घबराना नहीं चाहिए लेकिन यदि महिला को यूरिन करते समय कोई दिक्कत हो या जरुरत से ज्यादा यूरिन पास करने की इच्छा हो तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से संपर्क करना जरुरी होता है। क्योंकि बार बार बार यूरिन आने की समस्या होना आम बात होती है लेकिन जरुरत से ज्यादा यदि यह समस्या हो तो महिला को दिक्कत होने का खतरा होता है।

गर्भावस्था में बार बार यूरिन आने के कारण

  • प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते है साथ ही उनके स्तर में भी उतार चढ़ाव होता है और प्रोजेस्ट्रोन और HCG हॉर्मोन का स्तर प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ता है जिसके कारण महिला को यूरिन अधिक पास करने की इच्छा हो सकती है ।
  • गर्भावस्था की पहली तिमाही में हार्मोनल बदलाव तेजी से होने के कारण किडनी का काम बढ़ जाता है जिसके कारण यूरिन पास करने की इच्छा ज्यादा हो सकती है।
  • गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है जिसकी वजह से यूरिन करने की इच्छा में बढ़ोतरी होती है।
  • जो गर्भवती महिलाएं कैफीन अधिक मात्रा में लेती है उन्हें भी यह समस्या हो सकती है।

बार बार यूरिन आने की समस्या होने पर यह दिक्कत हो सकती है?

ऐसा नहीं है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को केवल इन्ही कारणों की वजह से बार बार यूरिन आने की समस्या होती बल्कि ऐसे और भी कारण है जिनकी वजह से महिला को यह समस्या हो सकती है। साथ ही वह कारण महिला की शारीरिक समस्या से जुड़े होते हैं। तो आइये अब जानते हैं की बार बार यूरिन आने की समस्या होने पर क्या दिक्कत हो सकती है।

यूरिन इन्फेक्शन

गर्भावस्था के दौरान बार बार यूरिन आने की समस्या होने का कारण यूरिन इन्फेक्शन हो सकता है और ऐसा होने पर महिला को बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होने के साथ यूरिन पास करने समय दर्द, जलन, बदबू, यूरिन के रंग में बदलाव आदि भी महसूस हो सकता है। ऐसे में बिना लापरवाही किए गर्भवती महिला को एक बार डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

जेस्टेशनल डाइबिटीज़

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के ब्लड में शुगर लेवल बढ़ने के कारण महिला को जेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और यदि कोई महिला जेस्टेशनल डाइबिटीज़ से ग्रसित हो जाती है तो महिला को बार बार यूरिन आने की समस्या हो सकती है।

पथरी

यदि गर्भवती महिला को किडनी में पथरी की समस्या होती है तो इस कारण भी गर्भवती महिला को बार बार यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है।

ऐसे में यदि गर्भवती महिला को बार बार यूरिन आने की समस्या हो तो इसे अनदेखा नहीं करें बल्कि एक बार डॉक्टर से मिलें और जांच करवाएं। ताकि यदि कोई समस्या हो तो उसका इलाज हो सके और माँ व् बच्चे को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो।

Frequent urination problem in pregnancy

रात के समय प्रेग्नेंट महिला को क्या-क्या नहीं खाना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को होने वाली परेशानियों से बचे रहने के लिए और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए जरुरी होता है की गर्भवती महिला छोटी से छोटी बात का अच्छे से ध्यान रखें। क्योंकि जितना ज्यादा अच्छे से महिला अपना ध्यान रखती है उतना ही ज्यादा माँ व् बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सबसे ज्यादा अपने का ध्यान रखने की जरुरत होती है जैसे की महिला को क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए, किस समय कौन सी चीज खाने से फायदा मिलता है और क्या चीज खाने से नुकसान हो सकता है, आदि।

क्योंकि बेहतर खान पान व् सही समय से लिया गया आहार माँ व् बच्चे दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान फायदा पहुंचाने में मदद करता हैं। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए खान पान से जुड़े टिप्स शेयर करने जा रहे हैं। और वो टिप्स है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को रात के समय किन किन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए।

जिन खाद्य पदार्थों को खाने से एसिडिटी होती है

प्रेगनेंसी के दौरान पाचन क्रिया थोड़ा धीमे काम करती है क्योंकि वजन बढ़ने और शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण पाचन तंत्र प्रभावित होता है। ऐसे में महिला को थोड़ा थोड़ा खाना चाहिए और उन खाद्य पदार्थों को खाना चाहिए जिन्हे पचाने में महिला को आसानी हो। खासकर रात के खाने का महिला को सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए और उन खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए जिन्हे खाने से महिला को गैस बनती है एसिडिटी होती है। साथ ही रात को सोने से कम से कम दो घंटे पहले अपना खान खा लेना चाहिए ताकि खाने को हज़म करने में आसानी हो।

दही

दही की तासीर ठंडी होती है जिसकी वजह से रात के समय यदि महिला इसका सेवन करती है तो इसकी वजह से महिला को सर्दी, गले में खराश जैसी समस्या होने का खतरा होता है। इसके अलावा रात के समय दही का सेवन करने से इसे हज़म करने में दिक्कत होती है जिसकी वजह से महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी का साम,न भी करना पड़ सकता है।

हैवी खाना

चाहे आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं हैं आपको रात को हमेशा हैवी खाना खाने से बचना चाहिए क्योंकि हैवी खाना जैसे की ज्यादा मसाले व् तेलीय आहार खाने से उसे हज़म करने में दिक्कत होती है। जिसके कारण महिला को पेट में दर्द, गैस, खट्टी डकार, उल्टी आदि की समस्या होने का खतरा होता है।

ठंडा दूध

गर्भवती महिला को ठंडा दूध पीने से भी बचना चाहिए क्योंकि इसके कारण भी गर्भवती महिला को पेट में गैस जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

फल

खट्टे फल या किसी अन्य फल का सेवन भी रात के समय करने से बचना चाहिए। क्योंकि फलों को हज़म करने में समय लगता है ऐसे में रात के समय यदि महिला फलों का सेवन करती है तो उनके हज़म न होने के कारण महिला को पेट सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा खट्टे फल खाने के कारण गले में खराश जैसी समस्या होने का खतरा भी होता है।

बासी खाना

यदि दोपहर का खाना बच गया है तो गर्भवती महिला को रात के समय उस खाने को खाने से बचना चाहिए। और अपने लिए थोड़ा ताजा और हेल्दी फ़ूड बनाना चाहिए। क्योंकि बासी खाना खाने से गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी समस्या होने का खतरा होता है।

ठंडी चीजें

रात के समय महिला को आइस क्रीम, ठंडा पानी, जैसी अन्य ठंडी चीजों का सेवन करने से भी बचना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला को सर्दी, खांसी व् अन्य सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा हो सकता है।

तो यह हैं वो खाद्य पदार्थ जिनका सेवन रात के समय प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए क्योंकि इन्हे खाने से महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा होता है। और यदि महिला की सेहत सम्बन्धी परेशानियां बढ़ती है तो इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ सकता है। ऐसे में माँ और बच्चा दोनों में से किसी को भी कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को रात के समय इन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

What should a pregnant woman not eat at night