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प्रेग्नेंट महिला को नवरात्रि में किन- किन चीजों से बचना चाहिए?

नवरात्रि के पावन दिनों की शुरुआत अब होने वाली है देश के अधिकतर हिस्सों में नवरात्रि को एक पर्व त्यौहार की तरह मनाया जाता है। जहां माता के भक्त उनके लिए अपनी आस्था, विश्वास और प्यार को व्यक्त करते हैं। अधिकतर लोग घट स्थापना करते हैं, खेत्री बीजते हैं, अखंड ज्योत जलाते हैं, पूरे नौ दिन तक माता के नाम के उपवास भी करते हैं। फिर अष्टमी या नवमी के दिन घर में कन्या भोज रखकर अपने व्रत को खोलते हैं। कुछ गर्भवती महिलाएं भी नवरात्रि के दिनों में व्रत रखने की इच्छा जताती है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को व्रत रखना चाहिए या नहीं और महिला को इन दिनों में किन किन चीजों से बचना चाहिए आइये उसके बारे में जानते हैं।

क्या गर्भवती महिला को नवरात्रि का व्रत रखना चाहिए?

वैसे प्रेगनेंसी कोई बिमारी नहीं है की आप उसमे व्रत न कर सकें लेकिन नवरात्रि के व्रत नौ दिन के होते हैं ऐसे में महिला को अन्न नहीं खाना होता है, एक समय खाना खाना होता है और वो भी कुट्टू, आलू, साबूदाना आदि का, कुछ महिलाएं इन दिनों में दवाइयों का सेवन भी नहीं करती है, आदि। ऐसे में यदि महिला व्रत करती है तो इसके लिए डॉक्टर से पहले राय लेनी चाहिए की आप व्रत रख सकती हैं या नहीं।

पहले तो डॉक्टर्स ही आपको नौ दिन की लगातार फास्टिंग नहीं करने की सलाह देते हैं चाहे आप स्वस्थ हैं या नहीं हैं, उसके बाद व्रत रखने पर खाने में अन्न की जगह कुट्टू का सेवन किया जाता है जिसकी तासीर गर्म होती है। फिर प्रेगनेंसी में यदि जरुरी विटामिन्स का सेवन नहीं किया गया तो उससे भी माँ व् बच्चे की सेहत को नुकसान पहुँच सकता है। साथ ही व्रत के दिन में ज्यादा मीठा, तला भुना आहार ज्यादा खाया जाता है।

ऐसे में महिला व् शिशु को कोई परेशानी नहीं हो इसके लिए महिला को नवरात्रि के उपवास करने से बचना चाहिए। लेकिन यदि फिर भी महिला का मन है तो डॉक्टर्स से राय लेने के बाद महिला एक या दो दिन का उपवास कर सकती है। और उन दिनों के उपवास में भी महिला को नवरात्रि के दिनों में सावधानी बरतनी चाहिए ताकि माँ या बच्चे की सेहत को नुक्सान नहीं हो।

प्रेग्नेंट महिला को नवरात्रि के दिनों में क्या करने से बचना चाहिए?

गर्भवती महिला के लिए सबसे पहले अपनी और अपने बच्चे की सेहत होनी चाहिए और उसके बाद कुछ और होना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें। तो आइये अब जानते हैं की नवरात्रि के दिनों में क्या नहीं करना चाहिए।

पहली तिमाही में न करें व्रत

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही बहुत ज्यादा अहम होती है ऐसे में यदि नवरात्रि के व्रत पहली तिमाही में आ रहे हैं तो महिला को व्रत गलती से भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इस दौरान महिला के शरीर में तेजी से हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं साथ ही शिशु का शुरूआती विकास हो रहा होता है और ऐसे में यदि महिला व्रत रखती है भूखी प्यासी रहती है तो इससे महिला और शिशु को ही नुकसान पहुँचता है।

व्रत के खाने से परहेज करें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का अलग अलग चीजें खाने का मन हो सकता है ऐसे में नवरात्रि के दिनों में तो अलग अलग फल, व्रत में खाया जाने वाला खाना, चिप्स, नमकीन, तली भुनी चीजें आदि घर में या तो बाहर से लाई जाती है या घर में बनाई जाती है। और महिला की उन्हें खाने की इच्छा भी हो सकती है लेकिन महिला को अपनी इच्छा पर थोड़ा कण्ट्रोल करना चाहिए हाँ महिला फल खा सकती है, लेकिन व्रत का खाना, चिप्स, नमकीन, मीठी चीजें आदि महिला को नहीं खानी चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी में पाचन क्रिया थोड़ा धीमे काम करती है जिसकी वजह से महिला को पेट सम्बन्धी समस्या अधिक हो सकती है जैसे की एसिडिटी, सीने में जलन आदि हो सकती है।

भीड़भाड़ में जाने से बचें

नवरात्रि के दिनों में मेले लगना, सत्संग कीर्तन आदि का बुलावा आना आम बात होती है लेकिन प्रेग्नेंट महिला को ज्यादा भीड़भाड़ में, ज्यादा शोर आदि में जाने से बचना चाहिए। क्योंकि ज्यादा भीड़भाड़ में जाने के कारण इन्फेक्शन, गिरने, झटका लगने आदि का खतरा होता है साथ ही कीर्तन में जाने पर लम्बे समय तक एक ही जगह पर बैठना पड़ता है, जिससे महिला को कमर दर्द, पैरों में दर्द आदि की समस्या हो जाती है। साथ ही ऐसी जगह पर शोर भी अधिक होता है जिससे गर्भ में शिशु की सुनने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में महिला को ऐसी जगह पर जाने से भी बचना चाहिए।

भूखे प्यासे रहने वाला व्रत नहीं करें

कुछ लोग केवल पानी पर, जूस पर, एक समय फलाहार पर व्रत रखते हैं लेकिन गर्भवती महिला को ऐसा करने से बचना चाहिए। क्योंकि यदि गर्भवती महिला ऐसा करती है तो इससे गर्भवती महिला और शिशु दोनों की सेहत को नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है। साथ ही यदि महिला व्रत करती भी है तो महिला को थोड़े थोड़े समय बाद फल खाने चाहिए, पानी भरपूर पीना चाहिए, नारियल पानी पीना चाहिए आदि।

टोने टोटके से बचें

इन दिनों में लोग टोना टोटका भी करते हैं ऐसे में महिला जब भी घर से बाहर जाती है तो महिला को सड़क पर सावधानी से चलना चाहिए। साथ ही महिला को अपने पास लोहे की चीज, माचिस, लहसुन की काली आदि रखनी चाहिए, क्योंकि ऐसा माना जाता है की इन चीजों को पास रखने से टोना टोटका असर नहीं करता है।

दिक्कत होने पर भी व्रत नहीं करें

यदि गर्भवती महिला ने व्रत कर लिया है और व्रत रखने के बाद महिला को किसी तरह की दिक्कत हो रही है तो महिला को उस दिक्कत को अनदेखा न करते हुए अपनी सेहत के बारे में सोचना चाहिए। और व्रत खोल लेना चाहिए क्योंकि व्रत तो आप अगली बारे रख सकती है लेकिन यदि शिशु या आपको दिक्कत हो जाएगी तो क्या होगा।

नज़र से बच कर रहें

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत से लोग मिलते हैं जो महिला के चेहरे पर आये प्रेगनेंसी ग्लो की बात करते हैं, पेट को लेकर बात करते हैं, कई बार कुछ चीजों को लेकर महिला को टोक भी देते हैं जैसे की महिला को कुछ खाते या पीते समय टोक देते हैं। तो इसकी वजह से महिला को नज़र लग जाती है और त्यौहारों के समय नज़र लगने का खतरा ज्यादा होता है और यह तो आप जानते ही हैं की नवरात्रि किसी त्यौहार से कम नहीं होती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को नज़र से बच कर रहना चाहिए और रोजाना अपनी नज़र उतारते रहना चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो नवरात्रि के दिनों में गर्भवती महिला को याद रखने चाहिए ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की की सेहत को ही किसी भी तरह का नुकसान नहीं हो।

What things should a pregnant woman avoid during Navratri

प्रेगनेंसी में यह गलतियां नहीं करें?

गर्भावस्था महिला के लिए बहुत अहम समय होता है और इस दौरान पूरे नौ महीने गर्भवती महिला को अपना बहुत ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है। क्योंकि यदि महिला अपना अच्छे से ध्यान रखती है तो इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

साथ ही इस दौरान महिला को छोटी छोटी बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला किसी भी तरह की गलती नहीं करें। क्योंकि इस दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकती है। तो आइये अब हम ऐसी कुछ गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला को नहीं करनी चाहिए।

प्रेगनेंसी और प्रसव की जानकारी नहीं लेना

गर्भवस्था की प्लानिंग करने से पहले या गर्भावस्था की शुरुआत से ही महिला को प्रेगनेंसी और प्रसव से जुडी जानकारी इक्कट्ठी कर लेनी शुरू कर देनी चाहिए। क्योंकि इससे प्रेगनेंसी और प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है। ऐसे में महिला को ऐसा करने में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

खान पान में लापरवाही

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खान पान में किसी तरह की लारपवाही नहीं करनी चाहिए जैसे की महिला को डाइट नहीं करनी चाहिए, जंक फ़ूड नहीं खाना चाहिए, मसालेदार व् तली हुई चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए, बासी ठंडा गला सड़ा आहार नहीं लेना चाहिए, आदि। साथ ही ऐसी किसी भी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए जिससे गर्भपात या बच्चे के विकास रुकने का खतरा हो जैसे की कच्चा पपीता, करेले के बीज, आदि।

ट्रैवल

गर्भावस्था के दौरान यात्रा करने की मनाही होती है क्योंकि ऐसा करने से झटका आदि लगने के कारण गर्भ को नुकसान पहुँचने का खतरा होता है। और यदि कभी ट्रैवल करना पड़े तो बिना डॉक्टर की सलाह के ट्रैवल नहीं करना चाहिए।

दवाइयों का सेवन

गर्भावस्था के दौरान जो दवाइयां डॉक्टर्स ने बताई है उन दवाइयों का सेवन गर्भवती महिला कर सकती है। लेकिन गर्भवती महिला को ऐसी किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए जिसका सेवन आपको डॉक्टर ने नहीं कहा है जैसे की सिर दर्द की दवाई या अन्य कोई पेन किलर आदि। क्योंकि यह दवाइयां गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा असर डाल सकती है।

जरुरत से ज्यादा व्यायाम

गर्भावस्था के दौरान थोड़ा बहुत व्यायाम जरूर करना चाहिए क्योंकि इससे महिला के स्वास्थ्य को बेहतर रहने में मदद मिलती है लेकिन जरुरत से ज्यादा व्यायाम गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसकी वजह से गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा असर पड़ सकता है।

घर के काम

प्रेगनेंसी के दौरान महिला घर में थोड़े बहुत काम कर सकती है लेकिन महिला को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे महिला के पेट पर किसी तरह का दबाव पड़े। जैसे की महिला को टॉयलेट साफ़ करने से बचना चाहिए, पैरों के भार बैठकर पोछा लगाने से बचना चाहिए, पानी में काम करने से बचना चाहिए, ज्यादा देर खड़े होकर जिस काम को करना पड़े उससे बचना चाहिए, आदि।

गलत पोजीशन में नहीं सोना चाहिए

प्रेग्नेंट महिला को गलत पोजीशन में नहीं सोना चाहिए जैसे की सीधा होकर नहीं सोना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से महिला को पीठ में दर्द की समस्या हो सकती है, पेट के बल नहीं सोना चाहिए इसकी वजह से पेट पर दबाव पड़ सकता है।

टेंशन नहीं लेनी चाहिए

गर्भावस्था के दौरान महिला को टेंशन नहीं लेनी चाहिए और किसी भी तरह के नेगेटिव विचारों को मन में नहीं आने देना चाहिए। क्योंकि इनकी वजह से माँ और बच्चे दोनों की सेहत पर गलत असर पड़ता है।

प्रदूषण वाली जगह पर नहीं जाना चाहिए

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ऐसी जगह पर नहीं जाना चाहिए जहां पर धूल मिट्टी अधिक हो क्योंकि इससे हानिकारक बैक्टेरिया व् वायरस हवा के माध्यम से आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं जिसकी वजह से शिशु के विकास पर बुरा असर पड़ सकता है साथ ही महिला को भी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने का खतरा होता है।

मच्छर मारने का स्प्रे इस्तेमाल नहीं करें

गर्भावस्था के दौरान हो सके तो आपको मच्छर मारने का स्प्रे घर में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें केमिकल बहुत अधिक होती है। और यह आपके सांस लेने के जरिये आपकी स्किन में संपर्क में आने के कारण शरीर में प्रवेश कर सकता है जिसकी वजह से बच्चे के विकास में रूकावट होने का खतरा हो सकता है।

कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल

गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला को कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल भी कम करना चाहिए। क्योंकि कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में केमिकल की अधिकता होती है जो स्किन के संपर्क में आने के बाद शरीर में प्रवेश कर सकता है। और इसके कारण बच्चे के विकास में दिक्कत आने का खतरा हो सकता है।

ज्यादा तेज म्यूजिक

प्रेगनेंसी के दौरान म्यूजिक सुनने से महिला को तनाव को कम करने में मदद मिलती है लेकिन महिला को ज्यादा तेज आवाज़ में म्यूजिक नहीं सुनना चाहिए। साथ ही ऐसी किसी भी जगह पर नहीं जाना चाहिए जहां आवाज़ ज्यादा हो। क्योंकि ज्यादा तेज आवाज़ के कारण गर्भ में शिशु की सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है जिसके कारण गर्भ में शिशु के विकास में दिक्कत होने का खतरा होता है।

गलत पोजीशन में उठना बैठना

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आराम से उठना या बैठना चाहिए। क्योंकि यदि गर्भवती महिला गलत पोजीशन में उठती बैठती है या ज्यादा तेजी से उठती बैठती है तो इसके कारण गर्भवती महिला को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

नींद में लापरवाही

जिस तरह प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए अच्छे से डाइट लेना जरुरी होता है उसी तरह गर्भवती महिला के लिए नींद लेना भी जरुरी होता है। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपनी नींद अच्छे से लेनी चाहिए। और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। क्योंकि यदि महिला नींद भरपूर नहीं लेती है तो इसकी वजह से महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने का खतरा रहता है जिसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

नशीले पदार्थों का सेवन

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को किसी भी तरह के नशीले पदार्थ जैसे धूम्रपान, अल्कोहल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा महिला को कैफीन का सेवन भी जरुरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से शिशु के विकास में दिक्कत होने का खतरा होता है साथ ही समय पूर्व प्रसव होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

बेबी बम्प पर ध्यान नहीं देना

गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने बेबी बम्प का ध्यान रखना चाहिए की वह बढ़ रहा है या उतना ही है साथ ही गर्भ में बच्चे की मूवमेंट पर भी महिला को ध्यान देना चाहिए। क्योंकि कई बार गर्भ में शिशु की हलचल कम हो जाती है या बिल्कुल नहीं होती है जो की खतरे का संकेत होता है।

तो यह हैं कुछ गलतियां जो गर्भवती महिला को नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इनकी वजह से माँ और बच्चा दोनों को दिक्कत होने का खतरा रहता है। यदि आप भी माँ बनने वाले है तो आप भी इन गलतियों को करने से बचे ताकि आपको और आपके होने वाले शिशु दोनों को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

Do not make these mistakes during Pregnancy

आयरन से भरपूर यह 10 चीजें जरूर खाएं प्रेगनेंसी में?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में दुगुने पोषक तत्वों की जरुरत होती है क्योंकि गर्भ में पल रहा शिशु भी अपनी माँ के शरीर से ही अपने विकास के लिए जरुरी पोषक तत्वों को प्राप्त करता है। और आयरन एक ऐसा ही पोषक तत्व होता है जो गर्भवती महिला के स्वास्थ्य और गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी होती है।

तो इसकी वजह से न केवल गर्भवती महिला की शारीरिक समस्याएँ बढ़ने लगती है बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास भी प्रभावित होता है। ऐसे में महिला या शिशु को आयरन की कमी के कारण कोई समस्या नहीं हो इसके लिए गर्भवती महिला को आयरन से भरपूर पोषक तत्वों का भरपूर सेवन करना चाहिए। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही दस आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान आयरन की कमी के कारण होने वाली दिक्कतें

  • खून की कमी के कारण शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी आ सकती है।
  • जन्म के समय शिशु के वजन में कमी, जन्म दोष आदि होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी होने के कारण महिला को थकान, कमजोरी, सिर दर्द, बॉडी पेन व् अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • प्रसव के दौरान महिला को दिक्कतें अधिक हो सकती है।
  • शरीर में खून की कमी होने के कारण नोर्मल डिलीवरी होने के चांस कम होते हैं और सिजेरियन डिलीवरी होने के चांस अधिक हो जाते हैं।

प्रेग्नेंट महिला आयरन के लिए क्या खाएं

बहुत से ऐसे आहार होते हैं जिनमे आयरन की अधिकता होती है ऐसे में उन खाद्य पदार्थों को यदि प्रेगनेंसी के दौरान अपनी डाइट का हिस्सा बनाया जाये तो इससे शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। तो आइये अब उन खाद्य पदार्थों के बारे में जानते हैं।

पालक

पालक आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होता है साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान पालक का सेवन करना सेफ भी होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को पालक का सेवन सब्ज़ी, रायता, पराठे आदि के रूप में जरूर करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिल सके इसके अलावा पालक में कैल्शियम, प्रोटीन जैसे पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं जो प्रेग्नेंट महिला और शिशु के लिए जरुरी होते हैं। साथ ही पालक के अलावा अन्य हरी सब्जियां भी आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होती है ऐसे में महिला चाहे तो उनका सेवन भी कर सकती है।

अनार

अनार के दाने दिखने में बेशक छोटे हो लेकिन आयरन इनमे प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला अनार फल के रूप में खाती है या इसका जूस पीती है दोनों ही तरीकों से गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। साथ ही अनार में फाइबर भी प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है ऐसे में अनार का सेवन करने से गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी समस्या से बचे रहने और वजन नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

अनाज

अनाज में भी आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है ऐसे में गर्भवती महिला को रोजाना अपने आहार में अनाज का सेवन करना चाहिए। क्योंकि इससे गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की मात्रा सही रहने के साथ महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में भी मदद मिलती है।

दालें

गर्भवती महिला लगभग हर दाल का सेवन कर सकती है और दिन के एक समय की डाइट में महिला को रोजाना एक दाल जरूर खानी चाहिए। क्योंकि दाल का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की मात्रा सही रहने के साथ कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन्स व् अन्य मिनरल्स की मात्रा भी सही रहने में मदद मिलती है। जिससे महिला के शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा सही रहती है और प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चा दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

ड्राई फ्रूट्स

बादाम, अखरोट, किशमिश, खजूर जैसे ड्राई फ्रूट्स का सेवन सिमित मात्रा में गर्भवती महिला कर सकती है। क्योंकि इनका सेवन करना प्रेगनेंसी के दौरान सेफ होता है साथ ही इनमे प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन, पोटैशियम, मैग्नीशियम आदि होने के साथ आयरन भी मौजूद होता है। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए सेफ होते हैं।

फिश

यदि आप फिश खा लेती है तो यह आयरन का सबसे बेहतरीन स्त्रोत होती है ऐसे में गर्भवती महिला चाहे तो शरीर में आयरन की मात्रा को सही रखने के लिए हफ्ते में एक या दो बार फिश का सेवन कर सकती है। लेकिन ध्यान रखें की फिश में मर्करी की मात्रा भी मौजूद होती है जो गर्भ में शिशु के लिए सही नहीं होती है। ऐसे में फिश का सेवन करते समय आप ध्यान रखें की आप उस फिश का सेवन करें जिसमे मर्करी की मात्रा मौजूद नहीं हो। फिश के अलावा चिकन में भी आयरन भरपूर मात्रा में होता है यदि आप फिश नहीं खाती और चिकन खाती है तो आप उसका सेवन कर सकती है लेकिन ध्यान रखें की कच्चा या आधा पका हुआ चिकन खाने से बचें। क्योंकि इससे आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा अधिक होता है।

अंडा

प्रेगनेंसी के दौरान पहली तिमाही को छोड़कर गर्भवती महिला को रोजाना एक या दो अंडे खाने की सलाह दी जाती है। क्योंकि अंडा माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है साथ ही अंडा आयरन का भी स्त्रोत होता है ऐसे में शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने के लिए भी अंडे का सेवन फायदेमंद होता है। लेकिन ध्यान रखें की प्रेगनेंसी के दौरान कच्चे अंडे का सेवन करने से बचे क्योंकि कच्चे अंडे का सेवन करना गर्भवती महिला व् शिशु दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

अमरुद

अमरुद का सेवन करने से भी गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। साथ ही अमरुद जितना ज्यादा पका हुआ होता है उतना ही ज्यादा फायदेमंद भी होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने के लिए अमरुद का सेवन भी कर सकती है। लेकिन ध्यान रखें की अमरुद को अच्छे से धोकर खाएं व् अमरुद में चेक कर लें की कीड़ा नहीं हो।

सेब

सेब भी एक ऐसा फल है जिसका सेवन यदि प्रेगनेंसी के दौरान किया जाये तो इससे शरीर में होने वाली आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। ऐसे में गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान एक सेब का सेवन रोजाना कर सकती है इससे महिला को स्वस्थ रहने और शरीर में होने वाली आयरन की कमी की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलेगी।

चुकंदर

प्रेग्नेंट महिला शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने के लिए चुकंदर का सेवन भी कर सकती है क्योंकि चुकंदर का सेवन करने से शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ता है। चुकंदर के अलावा गाजर का सेवन करने से भी शरीर में आयरन की मात्रा को सही रखने में मदद मिलती है।

तो यह हैं वो 10 पोषक तत्व जिनका सेवन गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने के लिए कर सकती है। इसके अलावा डॉक्टर्स द्वारा भी प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने के लिए दवाइयां दी जाती है ऐसे में गर्भवती महिला को उन दवाइयों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। साथ ही निम्बू, जामुन, जैसे और भी खाद्य पदार्थ होते हैं जिनका सेवन करने से महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद मिल सकती है ऐसे में महिला को उनका सेवन भी करना चाहिए।

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प्रेगनेंसी के छठे महीने में क्या-क्या होता है?

प्रेगनेंसी के छठे महीने का मतलब है की महिला की प्रेगनेंसी के दूसरे ट्राइमेस्टर को खत्म होने में केवल एक ही महीना बचा है। जिस तरह प्रेगनेंसी के हर महीने में महिला को अपने शरीर में कुछ अलग देखने को मिलता है कुछ नए बदलाव महसूस होते हैं वैसे ही प्रेगनेंसी के छठे महीने में भी महिला को कुछ न कुछ बदलाव जरूर महसूस होता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की प्रेगनेंसी के छठे महीने में महिला को क्या क्या महसूस होता है।

गर्भावस्था के छठे महीने के लक्षण

प्रेगनेंसी के छठे महीने में शरीर में होने वाले बदलाव के कारण महिला को कौन कौन से लक्षण या बदलाव महसूस हो सकते हैं आइये जानते हैं।

पेट का साइज

छठे महीने में महिला का पेट अब बाहर की तरफ थोड़ा और दिखने लगता है और अब हर कोई आसानी से अंदाजा भी लगा सकता है की आप प्रेग्नेंट हैं।

सूजन

पेट का आकार बढ़ने के साथ महिला के वजन में भी इस दौरान बढ़ोतरी हो जाती है ऐसे में महिला को पैरों में सूजन महसूस हो सकती है और धीरे धीरे यह और भी बढ़ सकती है।

भूख में बढ़ोतरी

प्रेगनेंसी के छठे महीने में महिला की शारीरिक परेशानियां कम होने के साथ शिशु का विकास भी बढ़ जाता है ऐसे में महिला को पहले की अपेक्षा ज्यादा भूख लग सकती है। ऐसे में महिला के लिए जरुरी होता है की वो अपनी बेहतर हेल्थ और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखें लेकिन जरुरत से ज्यादा भी न खाएं। क्योंकि जरुरत से ज्यादा खाना भी गर्भवती महिला के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

पीठ में दर्द

छठे महीने में पेट का आकार बढ़ने के कारण पीठ की मांसपेशियों में भी खिंचवा बढ़ सकता है। जिसकी वजह से महिला को पीठ में दर्द की समस्या भी अधिक हो सकती है।

कब्ज़

बच्चे का वजन बढ़ने का साथ पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ता है जिसकी वजह से पाचन क्रिया थोड़ा धीमे काम कर सकती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के छठे महीने में महिला को कब्ज़ जैसी परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।

गर्भावस्था के छठे महीने में गर्भ में शिशु में होने वाले बदलाव

  • इस दौरान गर्भ में शिशु की हलचल महिला को थोड़े ज्यादा समय के लिए और अच्छे से महसूस होती है।
  • महिला के पेट का आकार बढ़ने के साथ पेट पर खिंचाव के निशान और नाभि बाहर की तरफ उभरी हुई महसूस होती है।
  • छठे महीने में महिला का वजन भी थोड़ा बढ़ जाता है।
  • कुछ महिलाओं को बाला झड़ने, मुहाँसें, मसूड़ों से खून आने जैसी समस्या बनी रह सकती है।
  • इस दौरान पेट या पेट के निचले हिस्से में महिला को हल्का दर्द रह सकता है लेकिन दर्द यदि ज्यादा हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के छठे महीने में बच्चे का विकास

इस दौरान बच्चे के सभी अंग विकसित हो चुके होते हैं, बच्चे की लम्बाई व् वजन भी बढ़ जाता है और अल्ट्रासॉउन्ड में देखने पर आपको वो बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह दिखता है। इस दौरान बच्चे की सुनने की क्षमता भी काम करने लगती है और आपका शिशु बाहर की चीजों को सुनकर उस पर प्रतिक्रिया भी देना शुरू करता है और वो यह प्रतिक्रिया अपनी हलचल के माध्यम से देता है।

गर्भावस्था के छठे महीने में अपना ध्यान कैसे रखें?

  • वजन बढ़ने के कारण महिला को इस दौरान थोड़ी परेशानी हो सकती है ऐसे में महिला को अपने उठने, बैठने, सोने की पोजीशन का ध्यान रखना चाहिए।
  • व्यायाम जरूर करना चाहिए व्यायाम नहीं तो थोड़ी देर टहलना जरूर चाहिए।
  • खान पान में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
  • तनाव से दूर रहकर अपने आप को खुश रखने की कोशिश करनी चाहिए।
  • इस दौरान शरीर में आयरन की कमी नहीं हो इसके लिए आयरन युक्त डाइट भरपूर लेनी चाहिए।
  • नींद भरपूर लें रात में सोने के साथ दिन भर में भी एक घंटा जरूर आराम करें।

प्रेगनेंसी के छठे महीने में क्या खाएं?

गर्भावस्था के छठे महीने से शिशु का शारीरिक विकास और तेजी से होता है ऐसे में जरुरी होता है की महिला अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखें। ताकि माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। ऐसे में महिला को छठे महीने में क्या खाना चाहिए आइये जानते हैं।

  • महिला को फाइबर युक्त डाइट संतरे, केले आदि को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए ताकि महिला को कब्ज़ आदि से छुटकारा पाने में मदद मिल सके।
  • आयरन युक्त डाइट जैसे की अनार, सेब, हरी सब्जियां, आदि भरपूर लेनी चाहिए ताकि शरीर में खून की कमी नहीं हो।
  • कैल्शियम व् प्रोटीन युक्त डाइट जैसे की डेयरी प्रोडक्ट्स, ड्राई फ्रूट्स आदि भरपूर मात्रा में लेने चाहिए ताकि शरीर में कैल्शियम व् प्रोटीन की मात्रा को सही रहने में मदद मिल सके।
  • इसके अलावा महिला को अन्य पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने के साथ सही समय से अपनी डाइट लेनी चाहिए।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला अंडे व् नॉन वेज खाती है तो महिला को उसे भी अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए।
  • खाने के साथ महिला को तरल पदार्थों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए ताकि महिला के शरीर में पानी की कमी नहीं हो।

प्रेगनेंसी के छठे महीने में महिला क्या नहीं खाएं?

  • प्रेग्नेंट महिला को जरुरत से ज्यादा नहीं खाना चाहिए।
  • कच्चा अंडा, कच्चा नॉन वेज, नहीं खाना चाहिए।
  • बिना धुले फल व् सब्जियां नहीं खानी चाहिए।
  • डिब्बाबंद आहार, पैकेट वाला जूस आदि नहीं खाना पीना नहीं चाहिए।
  • ज्यादा मसालेदार, तेलीय आहार, जंक फ़ूड आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी के छठे महीने में महिला को क्या बदलाव महसूस होते हैं, क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, उससे जुड़े टिप्स। यदि आपका भी प्रेगनेंसी का छठा महीना चल रहा है तो आपको भी खान पान से जुड़े इन टिप्स का ध्यान रखना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे दोनों को फायदा मिल सकें। इसके अलावा महिला को अपना रूटीन चेकअप भी समय से करवाना चाहिए।

Changes during sixth month of pregnancy

प्रेगनेंसी में सबसे पौष्टिक ब्रेकफास्ट यानि नाश्ता क्या होता है?

नाश्ता यानि की दिन का पहला आहार, दिन का पहला आहार जितना हेल्दी होता है, पोषक तत्वों से भरपूर होता है उतना ही आपको सारा दिन एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है। खासकर जब बात प्रेग्नेंट महिला की हो तो दिन के पहले आहार में महिला को जितना हो सके पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करना चाहिए। क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं? यदि हाँ तो आपको भी अपने नाश्ते का ध्यान रखना चाहिए।

ऐसे में गर्भवती महिला अपने पौष्टिक नाश्ते में किन किन चीजों को शामिल कर सकती है, कौन कौन सी चीजें माँ व् बच्चे के लिए फायदेमंद हैं, यदि आप इनके बारे में नहीं जानती है। तो घबराइए नहीं, क्योंकि आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में सबसे पौष्टिक ब्रेकफास्ट क्या होता है और आप किन किन चीजों को उसमे शामिल कर सकती है उसके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।

डेयरी प्रोडक्ट्स

नाश्ते में दूध, दही या अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स को जरूर शामिल करना चाहिए। क्योंकि डेयरी प्रोडक्ट्स प्रोटीन, कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं जो माँ व् बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन महिला ध्यान रखें की यदि महिला दूध पी रही है तो महिला को दही नहीं खानी चाहिए और यदि महिला दही खा रही है तो महिला को दूध नहीं पीना चाहिए।

फ्रूट्स

सुबह के नाश्ते में फलों को भी आप शामिल कर सकते हैं क्योंकि फलों में पोषक तत्व भरपूर होते हैं साथ ही इससे शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा को सही रहने में भी मदद मिलती है। ऐसे में सेब, अनार, केला, व् अन्य फलों का सेवन महिला नाश्ते में कर सकती है। फलों का सेवन करने के साथ महिला चाहे तो फलों का ताजा जूस निकालकर भी उसका सेवन कर सकती है।

अंडा

यदि गर्भवती महिला अंडे का सेवन कर लेती है तो अंडा एक सुपरफूड होता है जो महिला को स्वस्थ रखने के साथ बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास को बेहतर करने में मदद करता है। ऐसे में महिला नाश्ते में अंडे का सेवन भी कर सकती है और महिला चाहे तो उबले अंडे, ऑमलेट, अंडे की भुर्जी आदि के रूप में अंडा खा सकती है।

ओट्स या दलिया

ढेर सारी सब्जियां डालकर ओट्स या दलिया का सेवन भी गर्भवती महिला नाश्ते में कर सकती है। क्योंकि ओट्स व् दलिया वैसे ही महिला की सेहत के लिए फायदेमंद होता है ऐसे में ढेर सारी सब्जियों को शामिल करने से इसका फायदा दुगुना बढ़ जाता है। इसीलिए नाश्ते में यदि महिला का मन है तो महिला अपने मन व् टेस्ट अनुसार दलिया व् ओट्स बनाकर उनका सेवन भी कर सकती है।

ड्राई फ्रूट्स

नाश्ते में बादाम, अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स को भी महिला शामिल कर सकती है क्योंकि बादाम व् अखरोट माँ व् बच्चे दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। साथ ही यह महिला के लिए नाश्ता नहीं होता है बल्कि महिला नाश्ते के साथ इनका सेवन कर सकती है ताकि महिला और बच्चे को दुगुना फायदा मिल सके।

पानी

नाश्ते में खाने का अच्छे से ध्यान रखने के साथ एक बात का और ध्यान रखना चाहिए की महिला जितना हो सके उतना पानी भी पीएं। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान जितना पोषक तत्वों से भरपूर खान पान जरुरी होता है उतना ही महिला के लिए शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा को सही रखना भी जरुरी होता है।

सुबह के नाश्ते में खाई जाने वाली अन्य चीजें

सुबह के नाश्ते में प्रेग्नेंट महिला इडली साम्भर, उपमा, पोहा, सदाबूदाना, पराठा, ढोकला, आदि चीजों का सेवन भी कर सकती है। क्योंकि यह सब भी प्रेग्नेंट महिला के बेहतरीन नाश्ते के लिए बेहतरीन विकल्प होती है। साथ ही इन सभी में पोषक तत्वों की मात्रा को बढ़ाने के लिए आप अलग अलग सब्जियों को इनमे शामिल कर सकते हैं।

नाश्ते में रखें इन बातों का ध्यान

  • सुबह उठने के बाद नाश्ते में ज्यादा देरी नहीं करें।
  • नाश्ते में कैफीन यानी चाय कॉफ़ी का सेवन करने से बचें।
  • ताजा नाश्ता ही खाएं।
  • कच्ची व् अधपकी चीजों का सेवन करने से बचें।
  • जरुरत से ज्यादा मीठी चीजों का सेवन नाश्ते में नहीं करें।
  • जितनी भूख हो उतना ही खाएं जरुरत से ज्यादा नहीं खाएं।
  • मसालेदार चीजों का सेवन करने से बचें।

तो यह हैं वो खाद्य पदार्थ जिन्हे अपने नाश्ते में गर्भवती महिला को जरूर शामिल करना चाहिए। क्योंकि यह सभी चीजें हेल्दी होने के साथ माँ व् बच्चे के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इसके अलावा दिन का पहला आहार महिला को समय से यानी की सुबह उठने के एक घंटे के भीतर ले लेना चाहिए। ताकि उसके बाद पूरे दिन का खान पान का रूटीन सही हो सके साथ ही शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो।

Healthy breakfast for pregnant women

Baby Development from First Week till Birth

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पहले हप्ते से जन्म तक शिशु का विकास ऐसे होता है, गर्भ में शिशु का विकास, पहले हफ्ते से शिशु के जन्म तक का सफर वीडियो

From the first week till delivery, following your baby’s growth is an emotional adventure that makes you wonder and feel eager. Your child starts a magnificent journey of growth and development from the moment of conception, going from a small collection of cells to a fully developed human being.

You get to see the amazing developments occurring within your womb every week, from the formation of tiny fingers and toes to the growth of crucial organs like the heart and brain. Observing your baby’s development can make you cry and fill you with an uncontrollable amount of love and awe for the life that is developing inside of you.

Watch the live video of Baby Development from First Week till Birth, पहले हप्ते से जन्म तक शिशु का विकास ऐसे होता है

बेबी गर्भनाल में कब फंसता है?

गर्भ में शिशु का विकास पूरी तरह से महिला पर निर्भर करता है और जैसे जैसे महिला की प्रेगनेंसी आगे बढ़ती है। वैसे वैसे गर्भ में शिशु का विकास भी बढ़ता है जैसे की पहले शिशु के दिल की धड़कन आती है, फिर शिशु के अंगो की आकृतियाँ बननी शुरू हो जाती है, उसके बाद उन अंगों का धीरे धीरे विकास भी बढ़ता है। और जब गर्भ में शिशु का विकास बढ़ता है तो गर्भ में शिशु का विकास महिला को महसूस भी होता है अब आप सोच रहे होंगे की ऐसा कैसे होता है?

तो इसका जवाब है की गर्भ में शिशु का हलचल करना इस बात का संकेत होता है की गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो रहा है और शिशु स्वस्थ है। साथ ही प्रेगनेंसी के चौथे महीने के आखिर या पांचवें महीने की शुरुआत में महिला को गर्भ में शिशु की मूवमेंट पता चलने है और गर्भ में शिशु का मूवमेंट करना प्रेगनेंसी का एक बेहतरीन अनुभव होता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भ में शिशु द्वारा गर्भ में की जाने वाली एक हरकत के बारे में बताने जा रहे हैं की आखिर शिशु गर्भ में गर्भनाल में कब फंस जाता है।

गर्भनाल में कब फंसता है शिशु?

जब गर्भ में शिशु मूवमेंट कर रहा होता है तो कई बार ऐसा होता है की शिशु गर्भनाल को अपने ऊपर लपेट लेता है। और फिर मूवमेंट करता हुआ शिशु उससे बाहर भी निकल जाता है। लेकिन कई बार ऐसा होता है की गर्भ में शिशु गर्भनाल को गर्दन में लपेट लेता है। और एक नहीं बल्कि कई बार उसे लपेट लेता हैं, शरीर पर यदि गर्भनाल लिपट जाती है तो उससे शिशु फिर भी बाहर निकल जाता है। लेकिन यदि शिशु गर्दन में एक से ज्यादा बार गर्भनाल को लपेट लेता है तो कई बार शिशु उसमे से निकल नहीं पाता है। तो इसका मतलब यह हैं की शिशु गर्भनाल में तक फंसता है जब वो गर्भ में हलचल कर रहा होता है।

क्या गर्भनाल को गर्दन में लपेटने के कारण शिशु को कोई नुकसान होता है?

जी हाँ, गर्भ में जब शिशु गर्भनाल को एक से ज्यादा बार अपने ऊपर तक लपेट लेता है तो इसके कारण शिशु के विकास में कमी आने का खतरा हो जाता है क्योंकि गर्भनाल के माध्यम से ही शिशु तक ऑक्सीजन, ब्लड, पोषक तत्व आदि पहुँचते हैं। और गर्भनाल जब शिशु लपेट लेता हैं तो यह सभी चीजें शिशु तक अच्छे से पहुँच नहीं पाती है। इसके अलावा गर्भ में शिशु के गर्भनाल लपेट लेने के कारण महिला की सिजेरियन डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं।

तो यह है गर्भ में शिशु के गर्भनाल लपेटने के कारण व् उसके कारण होने वाले नुकसान से जुडी जानकारी, साथ ही ऐसा जरुरी नहीं है की हर एक शिशु गर्भ में गर्भनाल को लपेट ले और उसमे फंस जाए। इस बात को लेकर घबराये नहीं बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान आप अपना अच्छे से ध्यान रखें ताकि आपको और आपके होने वाले शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

खून की कमी नहीं होगी प्रेगनेंसी में जरूर खाएं यह चीजें

गर्भधारण होने के तुरंत बाद से ही महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव तेजी से होने लगते हैं, शिशु के विकास के लिए सभी जरुरी चीजें पहुंचाने वाली गर्भनाल विकसित होने लगती है, महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने लगती है, आदि। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान महिला का शरीर दुगुनी तेजी से काम करने लगता है क्योंकि अब महिला अकेली नहीं होती है बल्कि महिला के गर्भ में एक नन्ही जान भी पल रही होती है जो पूरी तरह से महिला पर ही निर्भर करती है। ऐसे में इस दौरान महिला के शरीर में खून की जरुरत भी बढ़ जाती है इसीलिए डॉक्टर्स भी महिला को आयरन युक्त डाइट के साथ आयरन की गोलियां खाने की सलाह भी देते हैं।

साथ ही यदि महिला के शरीर में खून की कमी हो जाती है तो इसके कारण माँ और बच्चे दोनों को सेहत सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही कुछ आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों के सेवन के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए। ताकि महिला के शरीर में खून की कमी नहीं हो और गर्भ में शिशु के विकास को पूरा होने के मदद मिल सके। लेकिन उससे पहले जानते हैं की शरीर में खून की कमी होने के कारण महिला को किस तरह की दिक्कतें हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की कमी होने पर क्या दिक्कत होती है?

  • थकान व् कमजोरी की समस्या होती है।
  • खून की कमी होने के कारण शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन अच्छे से नहीं पहुँच पाती है जिसकी वजह से महिला और बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।
  • सांस लेने में तकलीफ की समस्या हो सकती है।
  • घबराहट ज्यादा महसूस हो सकती है।
  • सिर दर्द व् चक्कर साथ ही बेहोशी की समस्या हो सकती है।
  • गर्भ में शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी होने का खतरा होता है।
  • समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा हो सकता है।
  • डिलीवरी के समय कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ने के साथ सिजेरियन डिलीवरी के चांस अधिक होते हैं।
  • बॉडी पेन, जॉइंट पेन की समस्या महिला को अधिक होती है।

प्रेगनेंसी में शरीर में खून की कमी पूरा करने के लिए यह खाएं

यदि आप माँ बनने वाले हैं तो शरीर में खून की कमी को पूरा रखने के लिए महिला को अपनी डाइट में किन किन चीजों को शामिल करना चाहिए आइये उसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

ड्राई फ्रूट्स

आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होने के कारण ड्राई फ्रूट्स का सेवन करने से शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। लेकिन प्रेग्नेंट महिला सिमित मात्रा में ही ड्राई फ्रूट्स का सेवन करें।

खट्टे फल

खट्टे फल विटामिन सी का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं जो शरीर में सभी अंगों में आयरन की अच्छे से अवशोषित करने में मदद करते हैं। जिससे प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

पालक

पालक का सेवन करने से शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है क्योंकि पालक आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होती है। पालक के अलावा अन्य हरी सब्जियों में भी आयरन प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जिससे महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

गाजर और चुकंदर

प्रेग्नेंट महिला को शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए गाजर, चुकंदर आदि के जूस या फिर सलाद के रूप में इनका सेवन करना चाहिए। क्योंकि इन दोनों में ही आयरन मौजूद होता है और यह दोनों ही गर्भवती महिला के लिए सेफ होता है।

अंडा

शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए महिला अंडे का सेवन भी कर सकती है। इससे महिला को आयरन के साथ अन्य जरुरी पोषक तत्व भी मिलते हैं जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

नॉन वेज

गर्भवती महिला शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए चिकन, मछली, आदि का सेवन भी कर सकती है। लेकिन ध्यान रखें की बासी या अच्छे से न पका हुआ नॉन वेज नहीं खाएं क्योंकि इसकी वजह से महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

कच्चे केले

कच्चे केले का सेवन करने से भी गर्भवती महिला के शरीर खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। कच्चे केले का महिला चिप्स या सब्ज़ी बनाकर सेवन कर सकती है।

खजूर

खजूर में भी आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है ऐसे में शरीर में खून की कमी को पूरा करने के लिए महिला को रोजाना खजूर का सेवन भी जरूर करना चाहिए।

लोहे की कढ़ाई

गर्भावस्था के दौरान जितना हो सके महिला को लोहे की कढ़ाई में सब्जियों को बनाकर उनका सेवन करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से भोजन में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को खून की कमी के कारण होने वाली समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खाद्य पदाथ जिनका सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है। इसके अलावा अनार, सेब, मटर व् अन्य फल और सब्जियां भी है जिनका सेवन करने से महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में क्या करने से शिशु बुद्धिमान होता है?

जैसे ही महिला की प्रेगनेंसी की न्यूज़ कन्फर्म होती है वैसे ही महिला अपने वाले शिशु के लिए सपने संजोना शुरू कर देती है। और हर गर्भवती महिला यही चाहती है की उसका होना वाला शिशु स्वस्थ, हष्ट पुष्ट व् बुद्धिमान हो। और यदि महिला ऐसा चाहती है तो इसके लिए महिला को ही कुछ करना चाहिए। जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

क्योंकि गर्भ में पल रहे शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास प्रेगनेंसी के दौरान अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिला को कुछ ऐसे टिप्स बताने जा रहे हैं जो यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान फॉलो करती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के दिमागी विकास को बढ़ाने में मदद मिलती है। जिससे आपका होने वाला शिशु बुद्दिमान होता है।

डाइट का रखें ध्यान

गर्भावस्था के दौरान खान पान का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है क्योंकि बेहतर खान पान गर्भवती महिला को फिट रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करता है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान उन चीजों का भरपूर सेवन करना चाहिए जिससे शिशु के दिमागी विकास को बेहतर करने में मदद मिल सके। और इसके लिए महिला को बादाम, अखरोट, हरी सब्जियां व् फल, अंडे, चिकन, डेयरी प्रोडक्ट्स आदि का सेवन करना चाहिए।

नींद ले भरपूर

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भरपूर नींद लेनी चाहिए क्योंकि इससे महिला को हेल्दी, फ्रैश, एक्टिव रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा यदि महिला भरपूर नींद लेती है तो इससे शिशु भी हेल्दी रहता है जिससे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।

शिशु से करें बातें

यदि आप चाहती है की आपका होने वाला शिशु बुद्धिमान हो तो आपको गर्भ में पल रहे शिशु से बातें करनी चाहिए, पेट पर हाथ फेरना चाहिए क्योंकि शिशु की सुनने की क्षमता बढ़ने के साथ शिशु बाहर की आवाज़ों को महसूस करता है साथ ही महिला के अहसास का भी अनुभव करता है। जिससे शिशु को एक्टिव रहने में मदद मिलती है और गर्भ में शिशु जितना एक्टिव रहता है उतना ही गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ाने में मदद मिलती है।

टेंशन नहीं लें

गर्भावस्था के दौरान महिला को बिल्कुल भी टेंशन नहीं लेनी चाहिए क्योंकि इससे गर्भ में पल रहे शिशु के मानसिक विकास में कमी आ सकती है। और जितना हो सके महिला को खुश रहना चाहिए इससे शिशु के मानसिक विकास को बढ़ाने में मदद मिलती है।

वजन नियंत्रित रखें

प्रेगनेंसी के दौरान जरुरत से ज्यादा वजन बढ़ने के कारण महिला की डिलीवरी समय से पहले होने का खतरा रहता है। और समय से पहले यदि महिला की डिलीवरी होती है तो इसकी वजह से शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में कमी आने का खतरा होता है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपने वजन को नियंत्रित रखना चाहिए जिससे समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा कम हो और शिशु के बेहतर मानसिक विकास में मदद मिल सके।

एक्सरसाइज करें

गर्भ में पल रहे शिशु के दिमागी विकास को बेहतर करने के लिए महिला को थोड़ी देर व्यायाम योगा आदि भी करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है जिससे शिशु तक ब्लड अच्छे से पहुँचता है और ब्लड के माध्यम से ऑक्सीजन का फ्लो अच्छे से होता है जो शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ाने में मदद करता है।

नशीले पदार्थों से दूरी

प्रेग्नेंट महिला यदि नशीले पदार्थों का सेवन करती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को नुकसान पहुँचता है। ऐसे में शिशु के बेहतर मानसिक विकास के लिए महिला को नशीले पदार्थों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए और ऐसी जगह पर बिल्कुल नहीं जाना चाहिए जहां कोई इनका सेवन कर रहा हो।

सही समय पर जांच

प्रेगनेंसी के दौरान महिला हेल्दी रहे और गर्भ में पल रहे शिशु का विकास अच्छे से हो इसके लिए महिला को समय पर अपनी जांच करवानी चाहिए। और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का समय से सेवन करना चाहिए यदि महिला ऐसा करती है तो इससे महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे प्रेगनेंसी के दौरान फॉलो करने से गर्भवती महिला को अपने शिशु के दिमागी विकास को बढ़ाने में मदद मिलती है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो गर्भ में पल रहे शिशु के दिमागी विकास को बढ़ाने के लिए आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान इन टिप्स को जरूर फॉलो करना चाहिए।

Tips for smart baby born

प्रेगनेंसी में सुबह का नाश्ता देरी से करने के नुकसान

प्रेग्नेंट महिला के लिए अपनी डाइट का ध्यान रखना बहुत ज्यादा जरुरी होता है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला अकेली नहीं होती है बल्कि उसके गर्भ में पल रही जान भी महिला पर ही निर्भर करती है। ऐसे में महिला के लिए जरुरी होता है की दिन भर में लिए जाने वाली हर डाइट का ध्यान महिला अच्छे से रखें और उनमे भरपूर पोषक तत्वों से युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें।

ताकि महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी भरपूर पोषक तत्व मिलें जिससे शिशु का विकास अच्छे से हो। खासकर दिन का पहला मील यानी की नाश्ता महिला को सुबह समय से उठकर कर लेना चाहिए क्योंकि रात भर के लम्बे गैप के बाद वो दिन का पहला आहार होता है। साथ ही नाश्ता महिला को भरपेट करने के साथ पोषक तत्वों से युक्त करना चाहिए।

क्योंकि दिन का पहला आहार आप अच्छे से लेती हैं तो इससे आपको दिन भर एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि आप नाश्ता समय से नहीं करती है या नाश्ता स्किप कर देती है तो इसकी वजह से महिला और शिशु दोनों को शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की प्रेगनेंसी में सुबह का नाश्ता देरी से करने से महिला और शिशु को क्या क्या नुकसान होते हैं।

थकान व् कमजोरी

नाश्ता दिन का पहला आहार होता है और यदि हम अपना नाश्ता समय से करते हैं और भरपूर पोषक तत्वों से युक्त करते हैं तो उससे हमे दिन भर के लिए एक्टिव रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि नाश्ता देरी से किया जाये तो इसकी वजह से आपके शरीर में कमजोरी महसूस होती है आप थके हुए से महसूस करते हैं। और जब बात गर्भवती महिला की हो तो महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को वैसे ही थकावट व् कमजोरी महसूस हो सकती है ऐसे में महिला यदि नाश्ता भी देरी से करेगी तो महिला को और ज्यादा थकावट व् कमजोरी का अहसास हो सकता है।

ऊर्जा की कमी

नाश्ता समय से करने पर और पोषक तत्वों से भरपूर करने पर हमे उससे दिन भर के लिए ऊर्जा मिलती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला नाश्ते में देरी करती है तो इसकी वजह से महिला के शरीर में ऊर्जा की कमी रहती है और महिला सुस्त महसूस कर सकती है। साथ ही जब महिला को समय से पोषक तत्व नहीं मिलते हैं तो वो शिशु को भी नहीं मिलते हैं जिससे गर्भ में शिशु भी ज्यादा एक्टिव नहीं रहता है और सुस्त महसूस कर सकता है।

पेट सम्बन्धी समस्या

जब रात भर के बाद गर्भवती महिला नाश्ता देरी से करेगी तो महिला को भूख भी ज्यादा लगी होगी ऐसे में महिला जरुरत से ज्यादा खा सकती है। और प्रेगनेंसी के दौरान महिला की पाचन क्रिया थोड़ा धीमे काम करती है ऐसे में ज्यादा खा लेने के कारण भोजन को हज़म करने में परेशानी हो सकती है जिसकी वजह से महिला को पेट सम्बन्धी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी नहीं हो इसके लिए महिला को समय से और थोड़ा थोड़ा करके खाना चाहिए।

वजन बढ़ने का खतरा

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला नाश्ता देरी से करती है और उसके बाद जरुरत से ज्यादा खा लेती है तो इसके कारण महिला को वजन बढ़ने जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। और प्रेगनेंसी के दौरान वजन का जरुरत से ज्यादा बढ़ना माँ और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है।

शिशु के विकास में कमी

नाश्ता देरी से करने के कारण महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने का भी खतरा रहता है जिसकी वजह से शिशु को भरपूर पोषक तत्व नहीं मिलते हैं। और शिशु को भरपूर पोषक तत्व नहीं मिलने के कारण शिशु के विकास में कमी होने का भी खतरा रहता है।

समय से पहले डिलीवरी का खतरा

नाश्ता देरी से करना एक गलत आदत होती है और यदि प्रेग्नेंट महिला हमेशा यह गलती करती है तो इसकी वजह से माँ और बच्चे दोनों को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने का खतरा रहता है। और प्रेगनेंसी के दौरान यदि दिक्कतें अधिक होने लग जाये तो इसकी वजह से महिला को गर्भपात व् समय से पहले डिलीवरी जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो नाश्ता देरी से करने के कारण प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को हो सकते हैं। ऐसे में इन परेशानियों से बचे रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला को अपना नाश्ता समय से कर लेना चाहिए। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो ध्यान रखें की सुबह उठने के एक से डेढ़ घंटे के अंदर नाश्ता कर लें और नाश्ते में पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करें।

Harmful effects of having late breakfast in pregnancy