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सर्दियों में पुरानी चोट में होने वाले दर्द से बचने के उपाय

कभी कभार कुछ काम करते हुए, एक्सीडेंट की वजह से, कहीं गिरने के कारण, या किसी अन्य कारण शरीर में चोट लग जाती है। उसके बाद इलाज करने पर वह चोट ठीक भी हो जाती है। लेकिन जैसे ही सर्दी का मौसम आता है वैसे ही उस चोट के कारण पुराना दर्द वापिस से आपको परेशान करने लगता है। खासकर जब चोट सर्दी की हो तो आपको ज्यादा दिक्कत हो सकती है क्योंकि सर्दी के मौसम में लगी चोट का दर्द ज्यादा महसूस होता है।

साथ ही यदि चोट घुटनों, हड्डी, कोहनी, कंधे, रीढ़ की हड्डी में हो तो कई बार दर्द असहनीय भी हो जाता है। ऐसे में सर्दी के मौसम में दर्द बढ़ने के कारण बहुत ज्यादा परेशानी भी होती है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको सर्दी में पुरानी चोट के उभरे दर्द की समस्या से निजात पाने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

डाइट ले बेहतर

सर्दियों के मौसम में ऐसी डाइट लें जिससे शरीर को भरपूर पोषक तत्व मिलें, शरीर गर्म रहें, इम्युनिटी मजबूत रहें। क्योंकि ऐसी डाइट लेने से शरीर को ऊर्जा से भरपूर रहने व् सर्दियों में होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। जिससे दर्द की समस्या से भी बचाव होता है। ऐसे में आपको ड्राई फ्रूट्स, खजूर, हल्दी वाला दूध, गुड़, बाजरा, हरी सब्जियां, संतरा किन्नू जैसे फल, अदरक, लहसुन, आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

पानी पीएं भरपूर

सर्दियों के मौसम में प्यास कम लगती है जिसकी वजह से पानी का सेवन कम किया जाता है। और ऐसा करने के कारण मांसपशियों में सख्ती आ जाती है जिसकी वजह से दर्द की समस्या बढ़ जाती है। ऐसे में सर्दियों के मौसम में दर्द से बचाव के लिए पानी का सेवन भरपूर करें और हो सकें तो गुनगुना पानी पीएं इससे आपको दर्द से आराम भी मिलेगा और संक्रमण के खतरे से बचे रहने में भी मदद मिलेगी।

गर्म पानी से नहाएं

सर्दियों के मौसम में गर्म पानी से नहाएं इससे शरीर की सिकाई भी हो जाती है और ठण्ड से बचे रहने में भी मदद मिलती है। और जब शरीर की सिकाई होती है तो इससे दर्द में भी आराम पहुँचता है। ध्यान रखें की नहाकर तुरंत हवा में नहीं जाएँ क्योंकि इससे दर्द बढ़ सकता है।

धूप में बैठे

सर्दियों के मौसम में जितनी देर हो सके उतना देर धूप में जरूर बैठें क्योंकि धूप से शरीर में भरपूर विटामिन डी मिलता है जिससे हड्डियों को पोषण मिलता है। और सर्दियों में हड्डियां जितनी ज्यादा स्ट्रांग रहती है उतना ही दर्द से बचे रहने में फायदा मिलता है।

व्यायाम भी है जरुरी

सर्दियों के मौसम में व्यायाम करने का मन थोड़ा कम ही करता है जिसकी वजह से वजन बढ़ने, शरीर में दर्द जैसी समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में यदि सर्दियों में आप दर्द की समस्या से बचना चाहते हैं तो इसके लिए थोड़ी देर व्यायाम जरूर करें इससे शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होगा, वजन नियंत्रित रहेगा, मांसपेशियों को खुलने में मदद मिलेगी जिससे दर्द से बचे रहने में फायदा होगा।

मालिश

सर्दियों के मौसम में सुबह नहाने से एक घंटा पहले या रात को सोने से पहले शरीर की या केवल उन हिस्सों की गुनगुने तेल से मालिश करें जहां पर आपको दर्द होता है। ऐसा करने से शरीर में गर्मी आएगी, हड्डियों को आराम पहुंचेगा, ब्लड फ्लो अच्छे से होगा, आदि जिससे सर्दियों में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलेगी। ध्यान रखें की मालिश करने के बाद भी शरीर को खुला नहीं छोड़े क्योंकि इससे कोई फायदा नहीं होगा बल्कि आपको ठण्ड लगने का खतरा हो सकता है।

पहनावा सही रखें

सर्दियों के मौसम में दर्द की समस्या से बचे रहने के लिए अपना पहनावा सही रखें। यानी की ठण्ड से बचे रहने की पूरी तैयारी रखें और उन कपड़ों को पहनें जिनसे शरीर गरम रहें साथ ही टोपी, जुराबे आदि भी पहनकर रखें। क्योंकि ठण्ड से जितना आप बचे रहेंगे उतना ही आपको दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

चोट को ढककर रखें

यदि आपको जोड़ो में दर्द की समस्या है तो पूरी सर्दी उन्हें ढककर रखें या उन पर गर्म पट्टी बांधें जिससे उस जगह पर ठण्ड नहीं लगें। जितना वो जगह ठण्ड से बची रहती है उतना ही आपको दर्द से बचे रहने में मदद मिलती हैं।

ज्यादा देर एक पोजीशन में नहीं बैठें

सर्दियों के मौसम में ज्यादा देर एक ही पोजीशन में न रहे क्योंकि इससे शरीर में अकड़न आ जाती है जिसकी वजह से दर्द की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में थोड़ी थोड़ी देर में मूव करते रहना चाहिए या अपनी बैठने लेटने आदि की पोजीशन बदलते रहना चाहिए।

ध्यान रखें: सर्दियों में दर्द की समस्या से बचे रहने के लिए जरुरत से ज्यादा पेन किलर का सेवन नहीं करें क्योंकि जरुरत से ज्यादा पेन किलर का सेवन करने से शरीर पर बुरा असर पड़ता है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने पर आपको सर्दी के मौसम में पुरानी चोट के कारण उभरे हुए दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सकती है। यदि आपको भी सर्दी के मौसम में ऐसी समस्या होती है तो आप भी इन टिप्स को ट्राई कर सकते हैं आपको जरूर फायदा मिलेगा।

प्रेगनेंसी का सबसे मुश्किल वक्त कौन सा होता है?

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला के लिए उतार चढ़ाव से भरे होते हैं क्योंकि इस दौरान महिला शारीरिक परेशानियों का सामना करती है, मानसिक रूप से भी परेशान हो सकती है, शारीरिक बदलाव का महिला अनुभव करती है, आदि। साथ ही इस दौरान महिला को बहुत से नए अनुभव भी होते हैं जैसे की गर्भ में पल रहे शिशु की धड़कन महिला डॉप्लर की मदद से सुनती है, गर्भ में शिशु के किक मारने का अहसास महिला लेती है, आदि।

ऐसे में महिला अपनी गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित रहे और गर्भ में पल रहे शिशु का विकास अच्छे से हो इसके लिए महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी का समय महिला के लिए बहुत ही नाजुक होता है इस समय बरती गई थोड़ी सी लापरवाही माँ व् बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। तो आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी का सबसे मुश्किल समय कौन सा होता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था का सबसे मुश्किल समय कौन सा होता है?

प्रेगनेंसी के दौरान पूरे नौ महीने ही महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए लेकिन यदि सबसे मुश्किल समय की यदि बात की जाये तो महिला के लिए कौन सा समय सबसे मुश्किल समस्या होता है, आइये जानते हैं।

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही

गर्भावस्था की पहली तिमाही में शिशु के अंगो की आकृतियां बन रही होती है, महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव तेजी से हो रहे होते हैं, महिला को शारीरिक परेशानियां अधिक हो सकती है, आदि। ऐसे में महिला शारीरिक रूप से परेशान होने के साथ मानसिक रूप से भी परेशानी का अनुभव कर सकती है।

साथ ही इस दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही गर्भपात, ब्लीडिंग, शिशु के अंगों के विकास में कमी जैसी समस्या खड़ी कर सकती है। ऐसे में यदि ऐसा कहा जाए की प्रेगनेंसी की पहली तिमाही महिला के लिए सबसे मुश्किल होती है तो यह गलत नहीं होगा।

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में महिला का पेट बाहर की और ज्यादा निकला हुआ होता है, वजन बढ़ने के कारण महिला को उठने बैठने में समस्या हो सकती है, पैरों में सूजन, बार बार यूरिन पास करने जैसी समस्या भी महिला को हो सकती है। ऐसे में यदि महिला किसी भी काम को करने में तेजी करती है तो इसकी वजह से पेट पर दबाव बढ़ने व् झटका लगने का खतरा बढ़ जाता है।

जिसकी वजह से समय से पहले डिलीवरी, डिलीवरी में कॉम्प्लीकेशन्स जैसी समस्याभी हो सकती है। इसीलिए प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही भी महिला के लिए बहुत अहम होती है और यह भी महिला के लिए सबसे मुश्किल वक्त होता है। इसके अलावा प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में बहुत ज्यादा धैर्य रखने की जरुरत होती है ताकि इस समय को आसान बनाने में मदद मिल सके।

कॉम्प्लीकेशन्स होना

यदि किसी गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही कॉम्प्लीकेशन्स है, बहुत मुश्किल से महिला ने गर्भधारण क्या है, अधिक उम्र में गर्भधारण हुआ है तो उन प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने सबसे मुश्किल समय होता है। ऐसे केस में महिला को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई काम नहीं करना चाहिए साथ ही जितना हो सके महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आराम ही करना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी का सबसे मुश्किल समय कौन सा होता है उससे जुड़े टिप्स, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी यह जानकारी होनी चाहिए। ताकि आप किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करें जिससे गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को हर परेशानी से सुरक्षित रहने में मदद मिल सके।

कितने महीने में प्रेग्नेंट महिला का पेट दिखने लगता है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में बहुत से बदलाव होते हैं जैसे की ब्रेस्ट साइज में बदलाव आना, वजन का बढ़ना, स्किन में बदलाव आना, पेट का बाहर की तरफ निकलना, आदि। और पेट निकलने को लेकर तो बहुत सी गर्भवती महिलाएं उत्साहित होती है खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बनने का अनुभव लेती है उन्हें तो सबसे ज्यादा उत्साह होता है। क्योंकि इससे उन्हें गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के बारे में पता चलता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान महिला का पेट कब दिखने लगता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान पेट बाहर की तरफ कब दिखाई देता है?

प्रेगनेंसी के दौरान शुरूआती दो तीन महीनों में शिशु का आकार काफी छोटा होता है ऐसे में महिला का पेट बाहर की तरफ दिखाई नहीं देता है। लेकिन उसके बाद जैसे जैसे गर्भ में शिशु का आकार बढ़ता है वैसे वैसे महिला का पेट बाहर की और निकलने लगता है।

साथ ही प्रेग्नेंट महिला का पेट दिखना उनकी कद काठी पर भी निर्भर करता है। जैसे की महिला की हाइट यदि कम है तो महिला का पेट तीसरे महीने में भी थोड़ा सा बढ़ा हुआ महसूस हो सकता है। लेकिन जिन महिलाओं को हाइट लम्बी होती है उन महिलाओं का दूसरी तिमाही में भी पेट उतना बढ़ा हुआ महसूस नहीं होता है।

इसके अलावा महिला के पेट का आकार कम दिखाई देगा या ज्यादा दिखाई देगा यह पहली और दूसरी प्रेगनेंसी पर भी निर्भर करता है। जैसे की यदि महिला की पहली प्रेगनेंसी है तो महिला का पेट बाहर की थोड़ा लेट निकला हुआ महसूस होता है। जबकि दूसरी प्रेगनेंसी में महिला को पेट का आकार जल्दी बाहर निकला हुआ महसूस होता है।

साथ ही यदि महीने और हफ़्तों के बारे में बात करें तो प्रेग्नेंट महिला का पेट प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में बाहर निकलने लगता है। यानी की प्रेगनेंसी के बाहरवें से सोहलवें हफ्ते में पेट बाहर की तरफ निकलने लगता है। और उसके बाद जैसे जैसे बच्चे का विकास बढ़ता है वैसे वैसे गर्भाशय का आकार बढ़ता है जिससे पेट बाहर की तरफ निकलने लगता है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान महिला का पेट बाहर कब निकलने लगता है उससे जुडी जानकारी, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी यह पता होना चाहिए। ताकि पेट के बाहर ज्यादा निकलने या न निकलने की वजह से आप परेशान नहीं हो और आपको उसका सही कारण पता चल सके।

सर्दियों में गर्भ में पल रहे शिशु का बचाव ऐसे करें?

जब भी कोई महिला गर्भवती होती है तो उसे हर कोई एक बात जरूर कहता है की उसे प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि महिला जितना अच्छे से अपना ध्यान रखती है उतना ही बच्चा अच्छे से विकसित होता है और गर्भ में स्वस्थ रहता है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बदलते मौसम के साथ अपने रहन सहन के तरीके में भी बदलाव करना चाहिए।

क्योंकि बदलते मौसम के साथ यदि सेहत का ध्यान नहीं रखा जाये तो इसके कारण महिला को दिक्कत हो सकती है। और जब महिला को दिक्कत होती है तो इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ सकता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

इम्युनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें

गर्भावस्था के दौरान महिला की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। ऐसे में महिला को उन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिनसे महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिल सके। खासकर सर्दियों के मौसम में खांसी, जुखाम, ठण्ड लगने के कारण दिक्कत होने का खतरा महिला को अधिक होता है ऐसे में महिला को दिक्कत होने पर बच्चे को भी दिक्कत हो सकती है। ऐसे में इस समस्या से बचाव के लिए महिला को सर्दियों के दौरान अपने खान पान में उन चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए जिनसे महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिल सके। जैसे की लहसुन, सेब, हरी सब्जियां, अदरक, संतरा आदि।

पहनावा सही रखें

सर्दियों के मौसम में महिला को अपने हाथों पैरों को ढक कर रखना चाहिए। और गर्म कपडे पहन कर रखने चाहिए इससे महिला के शरीर में गर्माहट रहती है। जिससे सर्दी से बचे रहने और सर्दियों में होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

ठंडी चीजों का सेवन नहीं करें

सर्दियों के मौसम में जिन चीजों की तासीर ठंडी होती है उन चीजों का सेवन महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला को ठण्ड लगने का खतरा होता है और महिला को ठण्ड लगने के कारण बच्चे को भी दिक्कत होने का खतरा होता है। ऐसे में महिला को इन चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए जैसे की दही की तासीर ठंडी होती है तो सर्दियों के मौसम में महिला को ज्यादा दही छाछ का सेवन नहीं करना चाहिए।

थोड़ी देर धूप जरूर लें

सर्दी के मौसम में महिला को थोड़ी देर धूप में भी जरूर बैठना चाहिए क्योंकि इससे महिला को ठण्ड से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही इससे महिला और बच्चे को विटामिन डी भी भरपूर मिलता है। जो महिला के स्वास्थ्य और बच्चे के बेहतर विकास में मदद करता है।

केसर वाला दूध पीएं

सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला को रोजाना रात को सोने से पहले केसर वाला दूध पीना चाहिए। क्योंकि केसर वाला दूध माँ के साथ बच्चे के लिए भी फायदेमंद होता है। साथ ही केसर दूध का सेवन करने से माँ व् बच्चे को सर्दियों में होने वाली परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

अंडा खाएं

सर्दियों के मौसम में महिला को अंडा भी जरूर खाना चाहिए क्योंकि अंडा खाने से महिला के शरीर को गर्माहट मिलती है जिससे महिला के साथ शिशु को भी सर्दियों में होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा अंडा खाने से गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में भी मदद मिलती है।

नॉन वेज खाएं

यदि कोई गर्भवती महिला नॉन वेज खाती है तो सर्दियों के मौसम में महिला को नॉन वेज जरूर खाना चाहिए। क्योंकि इससे गर्भवती महिला को सर्दियों के मौसम में ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

पानी का भरपूर सेवन करें

सर्दियों में प्यास कम ही लगती है ऐसे में यदि गर्भवती महिला पानी का सेवन कम करती है। तो इससे महिला की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या बढ़ने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की दिक्कतें भी बढ़ सकती है। ऐसे में इस समस्या से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को सर्दी के मौसम में भी पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए।

ज्यादा चाय कॉफ़ी नहीं पीएं

सर्दियों के मौसम में महिला की चाय कॉफ़ी का सेवन करने की इच्छा में बढ़ोतरी हो सकती है लेकिन गर्भवती महिला को अपनी इस इच्छा पर नियंत्रण रखना चाहिए। क्योंकि चाय कॉफ़ी में कैफीन की अधिकता हो सकती है और कैफीन गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर बुरा असर डाल सकता है। ऐसे में बच्चे के बेहतर विकास के लिए चाय कॉफ़ी का जरुरत से ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए।

डॉक्टर के संपर्क में रहें

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को को कुछ भी दिक्कत हो, कुछ समझ नहीं आये तो ऐसे में महिला को डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि डॉक्टर से बात करने पर महिला को हर दिक्कत से बचे रहने में मदद मिलती है सतह ही कोई दिक्कत होती है तो समय से उस समस्या का इलाज हो जाता है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान रखने से गर्भवती महिला को सर्दियों के मौसम में अपने आप को और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा महिला को डॉक्टर्स द्वारा बताई गई जांच, रूटीन चेकअप आदि समय से करवाना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। और कोई दिक्कत हो तो उसका समय से पता चल सके और इलाज हो सके।

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नोर्मल डिलीवरी नहीं होने देती यह दस आदतें

गर्भावस्था हर महिला के लिए बेहद खास समय होता है क्योंकि इस दौरान महिला अपने गर्भ में एक नन्हे शिशु का पालन पोषण करती है। और बहुत से ऐसे अनुभव करती है जो महिला के लिए बहुत ही खास और अलग होते हैं। ऐसे में नौ महीने गर्भ में शिशु को गर्भ में सुरक्षित रखने के बाद हर महिला यही सोचती है की अब महिला की डिलीवरी भी सही तरीके से हो जाये।

ताकि बच्चे को किसी भी तरीके की दिक्कत नहीं हो साथ ही अधिकतर महिलाएं यही चाहती है की वो सामान्य प्रसव हो। लेकिन कई बार प्रेग्नेंट महिला की गलत आदतों के कारण नोर्मल डिलीवरी नहीं हो पाती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला की कौन सी गलत आदतों के कारण नोर्मल डिलीवरी नहीं हो पाती है।

जरुरत से ज्यादा खाना

प्रेगनेंसी के दौरान खाना बहुत जरुरी होता है लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है महिला जरुरत से ज्यादा खाएं। क्योंकि महिला यदि जरुरत से ज्यादा खाने का सेवन करती है तो इसकी वजह से महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता है। और वजन का जरुरत से ज्यादा बढ़ना महिला की डिलीवरी में दिक्कत बढ़ा सकता है।

वजन में कमी

जिस तरह जरुरत से ज्यादा वजन का होना नोर्मल डिलीवरी के चांस को कम करता है उसी तरह वजन का कम होना भी डिलीवरी में दिक्कतों को बढ़ा सकता है।

टेंशन लेना

गर्भवती महिला का शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के साथ मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी जरुरी होता है। ऐसे में यदि महिला टेंशन लेती है, हमेशा नेगेटिव चीजों के बारे में सोचती है। तो इसका असर महिला और बच्चे दोनों की सेहत को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। जिससे प्रेगनेंसी के साथ डिलीवरी में भी कॉम्प्लीकेशन्स आ सकती है।

एक्टिव नहीं रहना

गर्भावस्था के दौरान महिला को थोड़ी देर व्यायाम, योगा जरूर करना चाहिए यदि महिला यह सभी नहीं कर सकती है तो थोड़ी देर टहलना जरूर चाहिए। लेकिन यदि महिला ऐसा कुछ नहीं करती है और एक्टिव रहने की बजाय सारा दिन सोती रहती है, आलस करती है तो इससे भी सामान्य प्रसव होने के चांस कम होते हैं। परन्तु यदि डॉक्टर ने आराम करने की सलाह दी है तो आपको आराम ही करना चाहिए।

डाइट अच्छे से नहीं लेना

गर्भवती महिला यदि पोषक तत्वों से भरपूर डाइट नहीं लेती है, समय पर खाना नहीं खाती है, गलत खाद्य पदार्थों का सेवन करती है। तो इससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिससे माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और डिलीवरी में दिक्कत होने के चांस बढ़ते हैं।

पानी का भरपूर सेवन नहीं करना

गर्भावस्था के दौरान महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि इससे शरीर हाइड्रेट रहता है। जिससे महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है साथ ही गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा भी सही रहती है। लेकिन यदि महिला तरल पदार्थों का भरपूर सेवन नहीं करती है तो इससे प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ती है साथ ही एमनियोटिक फ्लूड पर भी असर पड़ सकता है। और इन्ही परेशानियों के कारण नोर्मल डिलीवरी होने के चांस कम होते हैं।

नशीले पदार्थों का सेवन

यदि गर्भवती महिला नशीले पदार्थ जैसे की धूम्रपान, अल्कोहल आदि का सेवन करती है तो इसके कारण गर्भ में बच्चे के वजन में कमी, समय से पहले डिलीवरी जैसी दिक्कतें आने के साथ नोर्मल डिलीवरी न होने का खतरा भी हो सकता है।

कैफीन का सेवन

कुछ महिलाओं को चाय कॉफ़ी पीने की बहुत आदत होती है लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को जरुरत से ज्यादा चाय कॉफ़ी का सेवन न करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इनमे कैफीन की अधिकता होती है जो बच्चे के वजन में कमी, विकास में कमी का कारण बन सकती है। जिसकी वजह से महिला को नोर्मल डिलीवरी में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

जरुरत से ज्यादा सोना

गर्भावस्था के दौरान महिला को भरपूर नींद लेनी चाहिए क्योंकि इससे महिला और बच्चे दोनों को फायदा मिलता है। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है की महिला सारा दिन सोती रहे क्योंकि जरुरत से ज्यादा सोना सेहत पर बुरा प्रभाव डालता है जिससे प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ती है। और नोर्मल डिलीवरी होने के चांस कम होते हैं।

लापरवाही करना

प्रेगनेंसी के दौरान ऐसे बहुत से काम होते हैं जिन्हे नहीं करना चाहिए क्योंकि उन्हें करने से माँ और बच्चे को दिक्कत हो सकती है। जैसे की वजन उठाना, यात्रा करना, डॉक्टर के बिना पूछे दवाइयों का सेवन, गलत खान पान, आदि। लेकिन यदि महिला ऐसा करती है तो इसके कारण माँ और बच्चे दोनों को दिक्कत होती है और प्रेगनेंसी में दिक्कतें बढ़ती है। जिसकी वजह से सामान्य प्रसव होने के चांस कम होते हैं।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला की नोर्मल डिलीवरी नहीं हो पाती है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आप चाहती है की आपका प्रसव सामान्य हो तो प्रेगनेंसी के दौरान आपको इन गलतियों को करने से बचना चाहिए। इसके अलावा प्रेगनेंसी की शुरुआत से लेकर आखिर तक अपना अच्छे से ध्यान रखें ताकि आपको और आपके बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके और जितना आप स्वस्थ रहती है उतना ही आपके प्रसव और प्रेगनेंसी को आसान बनाने में मदद मिलती है।

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प्रेगनेंसी के 6 सुपर फूड्स

प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि जितना अच्छे से महिला अपनी डाइट लेती है, जितने ज्यादा पोषक तत्वों को अपनी डाइट में शामिल करती है, जितना सही मात्रा में डाइट लेती है, उतना ही महिला के शरीर में पोषक तत्व सही रहते हैं। और जब शरीर में पोषक तत्व सही मात्रा में होते हैं तो इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

साथ ही गर्भ में पल रहा शिशु भी अपने विकास के लिए अपनी माँ पर निर्भर करता है ऐसे में जितना महिला फिट रहती है उतना ही शिशु के विकास को बेहतर होने में भी मदद मिलती है। तो आइये इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के छह सुपर फूड्स शेयर करने जा रहे हैं जिनका सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

डेयरी प्रोडक्ट्स

डेयरी प्रोडक्ट्स में दूध, दही, पनीर, घी, व् अन्य सामान जो दूध से बना होता है वो आता है। और इन सभी में कैल्शियम, प्रोटीन, फैटी एसिड, आयरन जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला व् शिशु की हड्डियों व् मांसपेशियों को तंदरुस्त रखने में मदद करते हैं। साथ ही फैटी एसिड शिशु के दिमाग के बेहतर विकास में भी मदद करता है। ऐसे में डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए।

फ्रूट्स

फलों का सेवन करना प्रेगनेंसी के दौरान बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें विटामिन्स, डाइट्री फाइबर, आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड, जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और हर फल का अपना अलग फायदा होता है। ऐसे में फलों का सेवन करने से गर्भवती महिला व् शिशु दोनों को फायदा मिलता है इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फलों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। साथ ही फलों में पानी की भी अधिकता होती है जिससे शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा को सही रखने में मदद मिलती है।

हरी पत्तेदार व् अन्य सब्जियां

सब्जियां भी प्रेगनेंसी के दौरान सुपरफूड की तरह काम करती है खासकर हरी सब्जियां तो पोषक तत्वों की खान होती है। इनमे आयरन, फोलिक एसिड, प्रोटीन, फाइबर जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला को हेल्दी रखने के साथ गर्भ में पल शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करते हैं। ऐसे में हरी सब्जियां जैसे की पालक, मेथी, सरसों आदि का सेवन करने साथ महिला को गाजर, मटर, आदि का सेवन भी जरूर करना चाहिए।

दालें

राजमा, उडद, काबुली चना, मूंग दाल, लाल मसूर दाल आदि को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। क्योंकि यह फाइबर, कैल्शियम, आयरन, फोलिक एसिड, जिंक, प्रोटीन आदि के पावरहाउस हैं जो माँ व् बच्चे दोनों को हेल्दी रखने में मदद करते हैं। जहां फाइबर पेट संबंधी परेशानियों से बचाता है, वहां प्रोटीन से ऊर्जा प्राप्त होती है और मांसपेशियों को मजबूत रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा और भी फायदे दालों का सेवन करने से मिलते हैं

ड्राई फ्रूट्स

ड्राई फ्रूट्स का सेवन भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए लेकिन प्रेगनेंसी की पहली तिमाही के बाद इनका सेवन शुरू करना चाहिए। ड्राई फ्रूट्स का सेवन करने से आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक, पोटैशियम जैसे सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला को मिलते हैं जिससे माँ व् शिशु दोनों को हेल्दी रहने में मदद मिलती है। आप चाहे तो ड्राई फ्रूट्स को रातभर के लिए पानी में भिगोकर रखें और उसके बाद सुबह उठकर उनका सेवन करें।

अंडा व् नॉन वेज

गर्भावस्था के दौरान दूसरी तिमाही से महिला को अपनी डाइट में अंडे व् नॉन वेज को भी शामिल करना चाहिए। क्योंकि अंडे व् नॉन वेज में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। अंडे में प्रोटीन, फैट, कोलिन नामक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। तो वहीँ नॉन वेज में प्रोटीन, आयरन जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला व् शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को अंडा व् नॉन वेज जैसे सुपरफूड को प्रेगनेंसी के दौरान अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाना चाहिए।

तो यह हैं वो सुपरफूड्स जो गर्भवती महिला को जरूर खाने चाहिए क्योंकि इन सभी का सेवन करने से गर्भवती महिला व् शिशु दोनों को पोषण मिलता है। इसके अलावा गर्भवती महिला को अन्य सभी हेल्दी फूड्स का सेवन करना चाहिए जिससे माँ व् बच्चे दोनों को फायदा मिलें। लेकिन ध्यान रखें की सिमित मात्रा में ही सेवन करें क्योंकि सिमित मात्रा में ही किसी भी चीज का सेवन करने से फायदा मिलता है।

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ये हैं 100% सटीक लड़का होने के लक्षण?

हर महिला की प्रेगनेंसी अलग अलग होती है ऐसे में हर महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपने शरीर में अलग अलग लक्षणों का अनुभव कर सकती है। और प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में महसूस होने वाले इन्ही लक्षणों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है की गर्भ में लड़का है या लड़की है। वैसे इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है की गर्भ में लड़का है या लड़की क्योंकि आपके आने वाला नन्हा शिशु हमेशा घर में खुशियां हो लेकर आता है।

लेकिन फिर भी कुछ महिलाओं को लड़के की चाहत होती है तो कुछ को लड़कियों की, ऐसे में यदि आप जानना चाहते हैं की गर्भ में लड़का है या लड़की तो आप शरीर में महसूस होने वाले लक्षणों से जान सकते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको गर्भ में पल रहा शिशु एक नन्हा राजकुमार है तो महिला को कौन कौन से लक्षण महसूस हो सकते हैं उसके बारे में बताने का रहे हैं।

चलते समय महिला कौन सा पैर उठाती है

एक बार नहीं बल्कि कई बार आप इस बात को नोटिस करें की गर्भवती महिला उठते समय कौन से पैर को सबसे पहले आगे रखती है यदि महिला दाहिने पैर को आगे रखती है। तो यह लक्षण इस बात की और इशारा करता है की गर्भ में पल रहा शिशु बेटा है। इसके अलावा यदि बैठकर उठते समय भी महिला दाहिने हाथ से उठने की कोशिश करती है तो यह भी गर्भ में लड़का होने का लक्षण होता है।

मनपसंद चीजें

यदि महिला पुरुष संगत की चीजें जैसे की केला, आम, सेब, जैसी चीजों को पसंद करती है तो यह भी गर्भ में लड़का होने का संकेत होता है। लेकिन यदि महिला लीची, तोरी, लौकी, अरबी जैसी चीजों को पसंद करती है तो यह गर्भ में लड़की होने का संकेत होता है।

गर्भ में शिशु की हलचल

यदि गर्भ में पल रहा शिशु की हलचल आपको थोड़ा लेट महसूस होना शुरू होती है तो यह भी गर्भ में लड़का होने का लक्षण होता है। इसके अलावा यदि आपको गर्भ में शिशु की हलचल दाहिने हिस्से में ज्यादा महसूस होती है तो यह भी गर्भ में लड़का होने का लक्षण होता है।

शिशु का भार

यदि गर्भ में महिला को शिशु का भार दाहिने हिस्से में ज्यादा महसूस होता है तो इसका मतलब होता है की आपके गर्भ में पल रहा शिशु आने आने वाला नन्हा राजकुमार है। इसके कारण आपको दाहिने पैर में ज्यादा दर्द की समस्या आदि भी हो सकती है।

ब्रेस्ट साइज

यदि प्रेग्नेंट महिला का दाहिना स्तन बाएं स्तन से बड़ा होता है और निप्पल का रंग भी ज्यादा गहरा हो जाता है तो यह लक्षण भी गर्भ में लड़का होने की तरफ इशारा करता है।

भूख ज्यादा लगना

जिन गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा भूख लगती है उन महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु के लड़का होने के चांस अधिक होते हैं।

मॉर्निंग सिकनेस

जिन गर्भवती महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस की समस्या अधिक महसूस नहीं होती है तो महिला का यह लक्षण गर्भ में लड़का होने की तरफ इशारा करता है।

बालों की ख़ूबसूरती

यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला के बाल झड़ने की जगह खूबसूरत और चमकदार हो जाये तो यह लक्षण इस बात की और इशारा करता है की महिला के गर्भ में पल रहा शिशु बेटा है।

खाने का स्वाद

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला के खाने के स्वाद की इच्छा में भी बदलाव आता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला का खट्टा या नकीं चीजें खाने का मन अधिक करता है तो यह लक्षण इस बात की और इशारा करता है की महिला के गर्भ में पल रहा शिशु एक लड़का है।

बेबी बम्प

यदि प्रेग्नेंट महिला के पेट का निचला हिस्सा फूला हुआ या उभरा हुआ है तो यह लक्षण इस बात की और इशारा करता है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है।

पैर ठन्डे रूखे हाथ

यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला के पैर ठन्डे और हाथ रूखे रहते हैं तो यह लक्षण भी गर्भ में लड़का होने की और संकेत करता है।

सोने की पोजीशन

प्रेगनेंसी के दौरान महिला किस पोजीशन में सो रही है इस बात यह भी यह जानने में मदद मिलती है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़की है या लड़का है। ऐसे में यदि प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला बाईं और करवट लेकर सोना पसंद करती है और महिला इस पोजीशन में आराम से सो भी जाती है तो यह लक्षण गर्भ में लड़का होने की तरफ इशारा करता है।

शिशु के दिल की धड़कन

यदि गर्भ में पल रहे शिशु के दिल की धड़कन एक मिनट में 140 से कम है तो यह लक्षण इस बात की और इशारा करता है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है।

मूड स्विंग्स

प्रेगनेंसी के दौरान मूड स्विंग्स होना आम बात होती है ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला को मूड स्विंग्स अधिक नहीं होता है और महिला का मूड सामान्य रहता है तो यह लक्षण गर्भ में बेटा होने की तरफ इशारा करता है।

यूरिन का रंग

प्रेगनेंसी के दौरान महिला यूरिन के रंग को देखकर भी इस बात का अंदाजा लगा सकती है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला के यूरिन का रंग डार्क यैलो हो जाता है तो यह गर्भ में लड़का होने का संकेत होता है।

स्किन

यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला की स्किन में ज्यादा कोई बदलाव नहीं आता है या फिर महिला की स्किन पहले से ज्यादा ग्लोइंग हो जाती है तो यह गर्भ में बेटा होने का लक्षण होता है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो गर्भ में पल रहा शिशु आपका किंग यानी लड़का है इस बात की और संकेत करते हैं। वैसे आप इन लक्षणों को देखकर केवल अंदाजा लगा सकते हैं क्या पता आपका अंदाजा सही हो जाये क्योंकि पुराने समय में बुजुर्ग लोग इन्ही लक्षणों को देखकर आने वाला शिशु के बारे में बताया करते थे।

इस गलती से प्रेगनेंसी में यह दिक्कत हो सकती है?

प्रेगनेंसी महिला के लिए बहुत ही खुशियों से भरा समय होने के साथ बहुत ही नाजुक समय भी होता है। क्योंकि इस दौरान महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं, महिला को बहुत सी दिक्कतें हो सकती है, कई महिलाएं तो मानसिक रूप से भी दिक्कत का अनुभव कर सकती है, आदि। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत जरुरी होता है की महिला अपना अच्छे से ध्यान रखें ताकि माँ व् बच्चे दोनों को शारीरिक रूप से फिट रहने में मदद मिल सकें।

यदि महिला फिर भी अपना ध्यान नहीं रखती है और गलती करती है तो इसकी वजह से महिला को दिक्कत होने के साथ शिशु के विकास पर भी बुरा असर पड़ सकता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में कौन सी गलती करने पर क्या नुकसान हो सकता है इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

खान पान में लापरवाही करने पर हो सकती है यह दिक्कत

गर्भावस्था के समय खान पान का सबसे अधिक महत्व होता है और यदि महिला खान पान का अच्छे से ध्यान रखें तो इससे गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि महिला खाना पीना समय से नहीं लेती है, हेल्दी फ़ूड की जगह जो खाना नहीं खाना चाहिए उनका सेवन करती है जैसे की कच्चा दूध, जंक फ़ूड, बाहर का खाना, पपीता, अनानास, आदि। तो इससे महिला की सेहत के साथ साथ शिशु की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है। ऐसे में महिला को अपने और अपने बच्चे के स्वास्थ्य को सही रखने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान अपने खान पान में बिल्कुल भी गलती नहीं करनी चाहिए।

भागदौड़ करने के कारण होती है परेशानी

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ज्यादा भागादौड़ी करना, सीढ़ियां चढ़ना, तेजी से चलना, जरुरत से ज्यादा शरीर को थकाने वाले काम करने आदि की मनाही होती है। क्योंकि इन सभी काम को करने की वजह से गर्भ पर बुरा असर पड़ सकता है साथ ही महिला को भी सेहत सम्बन्धी दिक्कत होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में महिला को इन सभी कामों को गलती से भी नहीं करना चाहिए।

भारी सामान उठाने या पेट के बल काम करने के कारण होने वाली दिक्कत

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भारी सामान उठाने, पेट के बल काम करने आदि की मनाही होती है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला भारी सामान उठाती है, सरकाती है, तो इसकी वजह से गर्भवती महिला और शिशु दोनों को दिक्कत होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा पेट के बल काम करने के कारण भी गर्भ में पल रहे शिशु को दिक्कत हो सकती है यहां तक की प्रेगनेंसी की शुरुआत में पेट के बल ज्यादा कमा करने से गर्भपात तक का खतरा होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को गलती से भी यह गलती नहीं करनी चाहिए।

शरीर का तापमान बढ़ने के कारण होने वाली दिक्कत

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को ज्यादा धूप में घूमने, गर्म पाने से नहाने, सोना बाथ लेने आदि की गलती भी नहीं करनी चाहिए क्योंकि यदि महिला यह गलती करती है। तो इसकी वजह से महिला के शरीर का तापमान बढ़ सकता है। जिसकी वजह से गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को दिक्कत का अनुभव करना पड़ सकता है क्योंकि इससे गर्भपात, समय से पहले डिलीवरी होने जैसी समस्या हो सकती है।

नशीले पदार्थों का सेवन करने के कारण होती है यह दिक्कत

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को किसी भी तरह के नशे का सेवन करने की गलती नहीं करनी चाहिए क्योंकि नशीले पदार्थों का असर गर्भनाल के रास्ते शिशु तक पहुँचता है। और उससे शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास रुकने का खतरा बढ़ जाता है ऐसे में महिला को न तो नशे का सेवन करना चाहिए और न ही ऐसी जगह पर जाना चाहिए जहां कोई इसका सेवन कर रहा हो। साथ ही महिला को कैफीन युक्त चीजें जैसे की चाय कॉफ़ी आदि का सेवन भी अधिक करने की गलती भी नहीं करनी चाहिए।

ट्रैवेलिंग करने के कारण होने वाली परेशानी

गर्भावस्था के दौरान महिला को यात्रा करने की भी मनाही होती है क्योंकि यात्रा के दौरान झटका लगने के कारण, लम्बे समय तक एक ही पोजीशन में बैठने के कारण महिला को दिक्कत हो सकती है। लेकिन यदि महिला को पता होने के बाद भी महिला यह गलती करती है तो इसका बुरा परिणाम महिला और शिशु दोनों को भुगतना पड़ सकता है।

दवाइयों का सेवन करने के कारण होती है दिक्कत

गर्भावस्था से पहले यदि आपको कोई भी शारीरिक समस्या होती थी तो आप उसे ठीक करने के लिए अपनी मर्ज़ी से कभी भी दवाई का सेवन कर लेती थी। लेकिन प्रेग्नेंट होने के बाद महिला यदि बिना डॉक्टरी परामर्श के दवाइयों का सेवन करती है तो इसका बुरा असर माँ व् बच्चे की सेहत पर पड़ सकता है।

सम्बन्ध बनाने के कारण हो सकती है दिक्कत

स्वस्थ प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाना सेफ होता है लेकिन यदि आपको डॉक्टर ने प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने से मना किया है। तो ऐसे में आपको सम्बन्ध बनाने की गलती नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इसकी वजह से प्रेगनेंसी में आने वाली दिक्कतें बढ़ सकती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सम्बन्ध बनाने, सम्बन्ध बनाते समय लापरवाही करने आदि के कारण भी महिला को दिक्कत हो सकती है।

गलत पोजीशन में में सोने से होती है परेशानी

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपनी बहुत सी आदतों में बदलाव करने की जरुरत होती है क्योंकि महिला कि कुछ आदतें प्रेगनेंसी के लिए सही नहीं होती है। जैसे की महिला के सोने की पोजीशन यदि महिला पहले सीधी होकर पेट के बल होकर सो जाती थी तो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना होता है क्योंकि यह पोजीशन प्रेगनेंसी के दौरान सही नहीं होती है। और यदि महिला इन पोजीशन में सोती है तो महिला को पीठ दर्द, गर्भ में शिशु को दिक्कत आदि होने का खतरा रहता है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान यदि सोने की सही पोजीशन की बता की जाये तो बाईं और करवट लेकर सोना सबसे अच्छी पोजीशन है इसे माँ या बच्चे दोनों को कोई दिक्कत नहीं होती है।

नकारात्मक सोच के कारण होती है यह दिक्कत

शारीरिक रूप से स्वस्थ रहना गर्भवती महिला के लिए जितना जरुरी है उतना ही गर्भवती महिला के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ रहना भी जरुरी है। ऐसे में यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान सकारात्मक रहने की बजाय हमेशा नेगेटिव विचारों के बारे में सोचती रहती है। तो इसकी वजह से महिला तनाव की शिकार हो जाती है जिसका बुरा असर प्रेग्नेंट महिला की सेहत, बच्चे के विकास दोनों पर पड़ता है।

शरीर में पानी की कमी के कारण हो सकती है यह दिक्कत

गर्भवती महिला को दिन भर में आठ से दस गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है साथ ही नारियल पानी, निम्बू पानी, जूस आदि लेने की सलाह भी दी जाती है। क्योंकि शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा यदि पूरी हो तो इससे भी प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली दिक्कतों को कुछ हद तक कम करने व् महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि महिला पानी व् अन्य तरल पदार्थों का सेवन नहीं करती है तो इसकी वजह से शरीर में पानी की कमी हो जाती है और इसका बुरा असर माँ व् बच्चे दोनों की सेहत पर देखने को मिल सकता है। ऐसे में जरुरी है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपने शरीर में पानी की कमी बिल्कुल भी नहीं होने दें।

खुजली करने के कारण हो सकती है दिक्कत

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण स्किन पर भी असर पड़ता है जिसकी वजह से स्किन ड्राई यानी स्किन में सूखापन आने लगता है। जिसकी वजह से खुजली होना आम बात होती है खासकर पेट के आस पास खजुली होना आम बात है। लेकिन महिला को पेट पर कोई क्रीम आदि लगा लेनी चाहिए जिससे महिला को यह दिक्कत नहीं हो क्योंकि यदि महिला खुजली अधिक करती है तो इसकी वजह से रैशेस, जलन, स्ट्रेचमार्क्स ज्यादा होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में महिला को खुजली करने की गलती नहीं करनी चाहिए।

समय पर जांच नहीं करवाने पर भी हो सकती है दिक्कत

गर्भावस्था के दौरान महिला को समय पर अपना रूटीन चेकअप करवाने, टीकाकरण करवाने, डॉक्टर द्वारा बताए गए विटामिन्स आदि लेने की सलाह दी जाती है। क्योंकि यह सभी चीजें माँ व् बच्चे दोनों के स्वस्थ रहने के लिए जरुरी होती है। लेकिन यदि कोई गर्भवती महिला टीकाकरण नहीं करवाती है, विटामिन्स नहीं लेती है, समय समय पर अपने स्वास्थ्य की जांच नहीं करवाती है तो इसकी वजह से माँ व् बच्चे की सेहत को नुकसान पहुँचने का खतरा बढ़ जाता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्भवती महिला को लापरवाही करने पर हो सकते हैं ऐसे में महिला को अपने आप को फिट रखने और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रखने के लिए इन गलतियों को करने से बचना चाहिए। इसके अलावा महिला को किसी भी दिक्कत के होने पर एक बार डॉक्टर से बात जरूर करनी चाहिए ताकि महिला को प्रेगनेंसी को समझने में आसानी हो सके।

करवा चौथ 2021 कब है? और करवा चौथ 2021 का शुभ मुहूर्त

करवा चौथ का व्रत किसी त्यौहार से कम नहीं होता है। करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है। हिन्दू धर्म में करवा चौथ के व्रत को बहुत ही महत्व दिया जाता है इस दिन सुहागन औरतें अपने पति की लम्बी उम्र के लिए पूरा दिन भूखा रहकर उपवास करती है।

फिर रात के समय चाँद को अर्ध्य देकर अपना व्रत खोलती है। करवा चौथ का व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। सुहागन औरतों के साथ कुँवारी लडकियां भी अपने मनपसंद जीवनसाथी की इच्छा को पूर्ण करने के लिए इस व्रत को करती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में करवा चौथ की पूजा विधि व् साल 2021 में करवा चौथ कब है और शुभ मुहूर्त कौन सा है उसके बारे में जानते हैं।

साल 2021 में करवा चौथ कब है और शुभ मुहूर्त

  • करवा चौथ 2021 तिथि और वार : 24 अक्टूबर 2021 दिन रव‍िवार
  • पक्ष: कृष्ण पक्ष
  • तिथि: चतुर्थी
  • नक्षत्र: रोहिणी
  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 24 अक्टूबर 2021 सुबह 03:01 से शुरू होगी।
  • चतुर्थी तिथि समापन: 25 अक्टूबर 2021 के सुबह 05:43 को समाप्त होगी।
  • करवा चौथ 2021 पूजा का शुभ मुहूर्त: 24 अक्टूबर 2021 को शाम 05:43 से लेकर 06:59 तक पूजा का शुभ मुहूर्त है।
  • राहु काल: 16:18:41 से 17:43:11 तक
  • अभिजीत मुहूर्त: 11:42:40 से 12:27:43 तक
  • करवा चौथ 2021 पर चंद्रोदय होने का समय: 24 अक्टूबर 2021 यानी करवा चौथ के दिन चांद रात को 08:07 पर उदय होगा।

करवा चौथ पूजा विधि

  • इस व्रत के दिन महिला सुबह सूरज उगने से पहले अपने सास द्वारा दी गई सरगी लेती है सरगी में महिलाओं के लिए खाने पीने के साथ श्रृंगार का सामान भी होता है हो एक सास द्वारा अपनी बहु को दिया जाता है।
  • फिर उसके बाद समय से नहा धोकर दुल्हन की तरह सोलह श्रृंगार करके महिलाएं तैयार होती है।
  • फिर अपने मंदिर में पूजा पाठ करती है।
  • उसके बाद पूजा के शुभ मुहूर्त पर करवा माता की कथा सुनती है और करवा माता से अपने पति की लम्बी उम्र के लिए प्रार्थना करती है।
  • ऐसा करने के बाद महिला चाँद का इंतज़ार करती है और फिर जब चाँद निकलता है तो चाँद को अर्ध्य देकर, छलनी में से चाँद और अपने पति का चेहरा देखती है।
  • पूजा पूर्ण होने के बाद अपने पति के पैर छूती हैं और पानी ग्रहण करती है।

तो यह हैं करवा चौथ 2021 कब है, क्या शुभ मुहूर्त है, चाँद निकलने का क्या समय है उससे जुडी जानकारी। करवा चौथ करने की पूजा विधि भी आपको बताई गई है ताकि आपके व्रत को अच्छे से सम्पूर्ण होने में मदद मिल सके।

करेले खा सकते हैं प्रेगनेंसी में? जानिए फायदे और नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं। ऐसे में महिला को अपने आप को स्वस्थ रखने के लिए और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए अपने खान पान, रहन सहन, लाइफ स्टाइल आदि में बहुत से बदलाव लाने पड़ते हैं। और सबसे ज्यादा बदलाव की जरुरत महिला को अपने खान पान में करने पड़ते हैं।

क्योंकि प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए, कितनी मात्रा में खाना चाहिए, किस चीज के खाने के बाद कौन सी चीज खानी चाहिए, आदि बहुत सी बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है। साथ ही बेहतर खान पान माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है।

आज इस आर्टिकल में हम करेले के सेवन के बारे में बात करने जा रहे हैं। की प्रेगनेंसी के दौरान करेला सेफ हैं या नहीं? यदि करेला खाना सेफ हैं तो इससे कौन से फायदे मिलते हैं? और यदि करेला खाना सेफ नहीं है तो इसकी वजह से कौन से नुकसान हो सकते हैं?

क्या प्रेगनेंसी में करेला खाना सेफ होता है?

करेले के बारे में बात की जाए तो करेला पोषक तत्वों से भरपूर होता है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन कुछ लोग यह भी कहते हैं की करेले का सेवन करना प्रेगनेंसी के दौरान सेफ नहीं होता है। क्योंकि करेले में खासकर करेले के बीजों में कुछ ऐसे केमिकल मौजूद होते हैं जो गर्भ में शिशु के विकास में बाधा बनते हैं।

ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान करेला खाने से गर्भपात, समय से पहले डिलीवरी व् अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां होने का खतरा भी अधिक होता है। तो यदि गर्भावस्था के दौरान करेला खाने की बात की जाये तो महिला को माँ और बच्चे को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को करेले का सेवन नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान करेला खाने के नुकसान

प्रेग्नेंट महिला यदि करेले का सेवन करती है तो इसकी वजह से महिला को बहुत से नुकसान हो सकते हैं साथ ही इसका बुरा असर बच्चे पर भी पड़ता है। जैसे की:

पेट सम्बन्धी परेशानी

गर्भावस्था में करेले का सेवन करने के कारण महिला को दस्त, पेट फूलना, एसिडिटी, पेट में ऐंठन जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

लौ ब्लड प्रैशर

गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रैशर की समस्या होने के कारण माँ और बच्चे दोनों को दिक्कत होने का खतरा होता है। ऐसे में महिला को केरेले का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि करेले का सेवन करने से लौ ब्लड प्रैशर की समस्या होने का खतरा रहता है।

एनीमिया

प्रेग्नेंट महिला यदि करेले का सेवन करती है तो इसके कारण लाल रख कोशिकाओं के नष्ट होने का खतरा होता है जिसकी वजह से गर्भवती महिला को एनीमिया जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और गर्भवती महिला को एनीमिया की समस्या का होना माँ और बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा प्रभाव डालता है।

गर्भपात

करेले के बीजों में कुछ ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो गर्भाशय को नुकसान पहुंचा सकते हैं साथ ही उनके कारण बच्चे के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है। जिसके कारण गर्भवती महिला के मिसकैरिज होने का खतरा होता है।

समय से पहले डिलीवरी होना

करेले का सेवन करने के कारण महिला की डिलीवरी के समय से पहले होने का खतरा भी होता है। जिसकी वजह से शिशु के वजन में कमी, शिशु को जन्म दोष जैसी समस्या होने का खतरा भी होता है।

दूध बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है बुरा असर

बच्चा जब माँ के पेट में होता है तभी से ब्रेस्ट में शिशु के लिए दूध बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला करेले का सेवन करती है तो इसकी वजह से दूध बनने की प्रक्रिया में रूकावट आती है। जिसकी वजह से बच्चे के लिए पर्याप्त दूध तैयार नहीं हो पाता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो करेले का सेवन करने के कारण गर्भवती महिला को हो सकते हैं। इसके अलावा यदि कोई महिला गर्भधारण के लिए ट्राई कर रही है तो उन्हें भी करेले का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि करेले का सेवन करने के कारण उनकी माँ बनने की इच्छा में रूकावट आ सकती है।

Bitter Gourd during Pregnancy