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प्रेगनेंसी में पेशाब में जलन होने के कारण और उपाय

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प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिलाओं को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है जिसमे से यूरिन में जलन महसूस होना भी एक समस्या है। जिन गर्भवती महिलाओं को यह समस्या होती है उन महिलाओं को इस समस्या को अनदेखा नहीं करना चाहिए। और इसका उपचार करना चाहिए क्योंकि इस समस्या को अनदेखा करने के कारण महिला को गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान पेशाब में जलन महसूस होने की समस्या के कारण व् इस परेशानी से बचने के उपचार बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान पेशाब में जलन होने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पेशाब करते समय यदि जलन महसूस होती है तो इस परेशानी का कोई एक कारण नहीं होता है। बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते है जिनकी वजह से महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को पेशाब में जलन महसूस होने की समस्या हो सकती है।
  • गर्भवती महिला के शरीर में यदि पानी की कमी होती है तो इस कारण महिला को यह परेशानी होती है।
  • बहुत ज्यादा मीठा खाने वाली गर्भवती महिलाओं को यह दिक्कत हो सकती है।
  • यूरिन में इन्फेक्शन होने के कारण इस समस्या का सामना करना पड़ता है।
  • यदि गर्भवती महिला को यूरिन आता है लेकिन महिला उसे रोककर रखती है तो इस कारण भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ता है।
  • जो गर्भवती महिलाएं पथरी की समस्या से परेशान होती है उन महिलाओं को भी यह समस्या हो सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान पेशाब में जलन महसूस होने की समस्या से बचाव के उपाय

प्रेग्नेंट महिला को यदि प्रेगनेंसी में कभी पेशाब करते समय जलन महसूस होती है तो महिला कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके इस परेशानी से बच सकती है। जैसे की:

पानी पीएं भरपूर

गर्भावस्था के दौरान महिला को स्वस्थ रहने के लिए और बच्चे के बेहतर विकास के लिए पानी का भरपूर सेवन करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में यदि महिला भरपूर पानी का सेवन करती है तो इससे महिला और बच्चा स्वस्थ रहते हैं। साथ ही पानी का भरपूर सेवन करने से यूरिन व् पसीने के माध्यम से हानिकारक बैक्टेरिया शरीर से बाहर निकल जाता है जिससे महिला को पेशाब में जलन और यूरिन इन्फेक्शन की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

फलों का करें सेवन

फलों का भरपूर सेवन करने से भी महिला को पेशाब में जलन की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इस समस्या से बचाव के लिए प्रेग्नेंट महिला को खासकर विटामिन सी युक्त फलों जैसे की निम्बू, संतरा, आंवला आदि का सेवन करना चाहिए। विटामिन सी युक्त फलों का सेवन करने से शरीर में से बैड बैक्टेरिया खत्म होता है और गुड़ बैक्टेरिया बढ़ता है जिससे महिला को इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। विटामिन सी युक्त फलों के साथ महिला अन्य फलों का सेवन भी कर सकती है।

दही

पेशाब में जलन की समस्या से बचाव के लिए प्रेग्नेंट महिला को दही का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि दही में गुड़ बैक्टेरिया मौजूद होता है जो बैड बैक्टेरिया को बॉडी से बाहर करने में मदद करता है।

नारियल पानी

यूरिन में जलन की समस्या से बचाव के लिए नारियल पानी का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि नारियल पानी में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं।

यूरिन रोककर नहीं रखें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला की यूरिन पास करने की इच्छा अधिक हो सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला की जब भी यूरिन पास करने की इच्छा हो तो महिला यूरिन पास करके आये। ताकि महिला को इन्फेक्शन जैसी परेशानी नहीं हो।

डॉक्टर को दिखाएं

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को यूरिन पास करते समय दर्द, जलन, बदबू आदि महसूस होती है तो महिला को इस लक्षण को अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा होने का कारण यूरिन इन्फेक्शन होता है जिसे अनदेखा करने से माँ और बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है। ऐसे में महिला को जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान पेशाब में होने वाली जलन के कारण व् इस परेशानी से बचे रहने के उपाय, तो यदि आप प्रेग्नेंट है और आपको भी ऐसी कोई परेशानी हो रही है। तो आप भी इन आसान टिप्स को ट्राई करके इस परेशानी से निजात पा सकते हैं।

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प्रेगनेंसी में बालों में मेहंदी सही होता है या नहीं?

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हर छोटी से छोटी बात पर ध्यान रखने की जरुरत होती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही गर्भवती महिला और शिशु दोनों पर बुरा प्रभाव डाल सकती है। इसीलिए गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने खान पान, पहनावे, ब्यूटी प्रोडक्ट्स आदि सभी में थोड़ा थोड़ा बदलाव करने की जरुरत होती है ताकि गर्भवती महिला और बच्चे दोनों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचें।

ऐसे में जब महिला किसी शादी, पार्टी या अन्य किसी जगह पर जाती है तो महिलाओं को हाथों और बालों में मेहँदी लगाने का बहुत शौक होता है। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो मेहंदी का इस्तेमाल करने से पहले इस बात का जानना बहुत जरुरी होता है की गर्भवती महिला को मेहंदी का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं? तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान महिला को मेहँदी का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं इस बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

गर्भवती महिला मेहँदी का इस्तेमाल बालों के लिए करें या नहीं?

आजकल मार्किट में मिलने वाली मेहँदी में बहुत से केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में ऐसी मेहंदी को हाथों या बालों में लगाने के कारण ये केमिकल स्किन के संपर्क में आने के बाद शरीर में पहुँच सकता है।

जिसकी वजह से माँ और बच्चे दोनों को नुकसान पहुँच सकता है। साथ ही मेहँदी लगवाने के लिए महिला को आरामदायक पोजीशन में बैठने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। जिसके कारण भी महिला को परेशानी हो सकती है।

ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को केमिकल वाली मेहँदी, हेयर डाई आदि का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। लेकिन यदि महिला बालों में मेहँदी लगाना चाहती है तो महिला मेहँदी के पत्तों को पीसकर मेहँदी बनाकर या हर्बल मेहँदी का इस्तेमाल कर सकती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बालों के लिए मेहँदी का इस्तेमाल करने से जुड़े टिप्स, साथ ही महिला को यदि सर्दी जुखाम है, ठण्ड का मौसम चल रहा है, तो महिला को मेहँदी लगाने से बचना चाहिए क्योंकि इसके कारण महिला की सर्दी की समस्या बढ़ सकती है।

क्योंकि मेहँदी की तासीर ठंडी होतो है। इसके अलावा मेहँदी में अंडा, पत्ती आदि भी महिला को नहीं मिलाना चाहिए। क्योंकि अंडे में मौजूद बैक्टेरिया महिला की सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। साथ ही आप चाहे तो मेहँदी का इस्तेमाल करने से पहले एक बार डॉक्टर से भी राय ले सकते हैं।

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प्रेगनेंसी में पैदल चलने के फायदे और नुकसान

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गर्भावस्था के दौरान महिला को एक्टिव रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि महिला जितना एक्टिव रहती है उतना ही महिला को होने वाली परेशानियां कम होती है, महिला स्वस्थ रहती है, बच्चे का विकास अच्छे से होता है आदि। ऐसे में एक्टिव रहने के लिए महिला को दिनभर में थोड़ा व्यायाम जरूर करना चाहिए। लेकिन यदि महिला व्यायाम नहीं करना चाहती है तो थोड़ी देर वाक यानि टहल सकती है। और ऐसा महिला प्रेगनेंसी के पहले दिन से ही शुरू कर सकती है।

क्योंकि पैदल चलने से गर्भवती महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की महिला जरुरत से ज्यादा वाक करे क्योंकि जरुरत से ज्यादा वाक करने की वजह से महिला को नुकसान भी हो सकता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान पैदल चलने के बेहतरीन फायदे और जरुरत से ज्यादा पैदल चलने के नुकसान के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में पैदल चलने के फायदे

गर्भवती महिला यदि दिन भर में आधा घंटा वाक कर लेती है या जितनी देर महिला आराम से वाक कर सकती है उतनी वाक करती है यानी की पैदल चलती है। तो इसे गर्भवती महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं जैसे की:

व्यायाम हो जाता है

गर्भावस्था के दौरान महिला को थोड़ा बहुत व्यायाम करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि व्यायाम करने से महिला को एक्टिव रहने में मदद मिलती है साथ ही महिला स्वस्थ भी रहती है। ऐसे में पैदल चलना भी महिला के लिए व्यायाम ही होता है जिससे महिला को फिट व् स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

वजन रहता है नियंत्रित

पैदल चलने से गर्भवती महिला का वजन भी कण्ट्रोल रहता है जिससे महिला का वजन प्रेगनेंसी के दौरान जरुरत से ज्यादा नहीं बढ़ता है।

ब्लड फ्लो होता है बेहतर

पैदल चलने से महिला की मांसपेशियां टोन होती है साथ ही सिर से पैरों तक ब्लड फ्लो भी अच्छे से होता है। और प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होना गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

जेस्टेशनल शुगर से बचाव

ऐसा माना जाता है की रोजाना वाक करने से ब्लड में शुगर के लेवल को सामान्य रखने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली शुगर की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर रहता है कण्ट्रोल

नियमित रूप से वाक करने से गर्भवती महिला के ब्लड प्रैशर को कंट्रोल रहने में मदद मिलती है। जिससे महिला को कोलेस्ट्रॉल व् हदय सम्बन्धी समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहने में मदद मिलती है।

मानसिक रूप से भी महिला रहती है रिलैक्स

जब भी महिला वाक करने जाती है तो महिला अलग अलग लोगो से मिलती है, बातें करती है, जिससे महिला को तनाव जैसी समस्या से बचे रहने और खुश रहने में मदद मिलती है।

शारीरिक परेशानियों से मिलता है आराम

वाक करने से प्रेग्नेंट महिला को कब्ज़, खाना हज़म न होने, मॉर्निंग सिकनेस, आलस अधिक आना, अनिंद्रा, ऐंठन, पैरों में दर्द, बेचैनी जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

बच्चा भी रहता है स्वस्थ

पैदल चलने से प्रेगनेंसी के दौरान केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी फायदा मिलता है। जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

प्रसव में होती है आसानी

वाक करने से गर्भवती महिला के पेल्विक एरिया की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है, बच्चे को जन्म लेने की सही पोजीशन में आने में मदद मिलती है। जिससे महिला के सामान्य प्रसव के चांस बढ़ाने में मदद मिलती है।

गर्भावस्था में पैदल चलने के नुकसान

प्रेग्नेंट महिला यदि ज्यादा तेजी से चलती है, जरुरत से ज्यादा चलती है तो इसकी वजह से प्रेग्नेंट महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। जैसे की:

घुटनों में दर्द

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ जाता है ऐसे में महिला यदि जरुरत से ज्यादा चलती है तो इसके कारण महिला के पेट के निचे के हिस्से जैसे की पैरों और घुटनों पर दबाव ज्यादा पड़ता है। जिसकी वजह से गर्भवती महिला को ज्यादा पैदल चलने की वजह से घुटनों में दर्द की समस्या हो सकती है।

सूजन बढ़ सकती है

जरुरत से ज्यादा पैदल चलने या ज्यादा पैदल चलने के कारण गर्भवती महिला के पैरों में सूजन और पैरों में दर्द की समस्या बढ़ सकती है। क्योंकि ज्यादा चलने के कारण पैरों पर दबाव अधिक पड़ता है।

ब्लीडिंग

यदि महिला जरुरत से ज्यादा पैदल चलती है तो इस कारण प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को ब्लीडिंग का खतरा भी रहता है। साथ ही तीसरी तिमाही में समय से पहले डिलीवरी होने के खतरा भी हो सकता है। ऐसे में महिला को ज्यादा तेजी या जरुरत से ज्यादा नहीं चलना चाहिए।

थकान

गर्भवती महिला यदि जरुरत से ज्यादा चलती है तो इस वजह से महिला को थकान अधिक महसूस होती है। और प्रेगनेंसी के दौरान जरुरत से ज्यादा थकान का होना माँ और बच्चे दोनों की सेहत के लिए हानिकारक होता है।

सांस फूलने की समस्या

कुछ गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान सांस फूलने व् सांस लेने में दिक्कत की परेशानी होती है। ऐसे में महिला यदि जरुरत से ज्यादा पैदल चलती है या जरुरत से ज्यादा वाक करती है। तो इस कारण महिला को सांस लेने में दिक्कत होना व् सांस फूलने की समस्या अधिक हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला को पैदल चलते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • गर्भवती महिला को ज्यादा तेजी से नहीं चलना चाहिए।
  • ऐसी जगह पर पैदल चलने से बचना चाहिए जहां रोड टूटा हुआ हो, पत्थर या ढलान आदि हो क्योंकि ऐसी जगह पर महिला के गिरने का खतरा होता है।
  • गर्भवती महिला को यदि चलते समय थकान महसूस हो रही हो या सांस फूल रही है तो महिला को बैठकर आराम करना चाहिए।
  • पैदल चलते समय महिला को आरामदायक चप्पल व् जूते पहनने चाहिए।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला को डॉक्टर ने बैड रेस्ट की सलाह दी हो तो महिला को बैड रेस्ट ही करना चाहिए और वाक भी नहीं करनी चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में पैदल चलने के कुछ फायदे और कुछ नुकसान, ऐसे में गर्भवती महिला को पैदल चलने के भरपूर फायदे मिलें इसके लिए महिला को उतना ही पैदल चलना चाहिए जितना महिला से चला जाये। साथ ही महिला को जरुरत से ज्यादा नहीं चलना चाहिए जिससे महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ जाये।

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प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला खाएं यह 10 चीजें

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गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में महिला को अपनी सेहत व् स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि इस दौरान गर्भ में शिशु का विकास तेजी से हो रहा होता है, महिला का शरीर डिलीवरी के लिए तैयार होता है साथ इस दौरान किसी भी तरह की लापरवाही समय से पहले बच्चे के जन्म की समस्या का कारण बन सकती है।

ऐसे में प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को अपने खान पान का सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए ताकि बच्चे का विकास अच्छे से हो और महिला के शरीर को डिलीवरी के लिए तैयार करने में मदद मिल सके। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे 10 खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं जो प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को जरूर खाने चाहिए।

हरी सब्जियां

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में प्रेग्नेंट महिला को हरी सब्जियां जैसे की पालक, मेथी आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि इनमे आयरन, फाइबर, फोलेट जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास और शिशु को जन्मदोष से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

देसी घी

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में महिला को देसी घी का भी रोजाना सेवन करना चाहिए। क्योंकि देसी घी गर्भवती महिला के शरीर को प्रसव के लिए तैयार करने, महिला के शरीर को मजबूत रखने, प्रसव के दौरान होने वाली तकलीफों को कम करने, बच्चे के बेहतर विकास करने में मदद करता है।

नट्स

नट्स यानी ड्राई फ्रूट्स प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को ड्राई फ्रूट्स का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि इनमे प्रोटीन, ओमेगा फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

दालें और फलियां

प्रेगनेंसी के आखिरी महीनों में महिला दालों और फलियां को अपनी डाइट में अहम जगह देनी चाहिए। और रोजाना किसी न किसी दाल का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि दालें प्रोटीन, फाइबर से भरपूर होती है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होती है।

फल

गर्भावस्था के तीसरे ट्राइमेस्टर में महिला मौसम में आने वाले फलों का सेवन भी भरपूर करना चाहिए। क्योंकि फलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं जो महिला को हेल्दी रखने और बच्चे के बेहतर विकास में मदद करते हैं।

डेयरी प्रोडक्ट्स

कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को तीसरी तिमाही में जरूर करना चाहिए। क्योंकि इससे महिला को शारीरिक रूप से मजबूती मिलती है और बच्चे का शारीरिक विकास अच्छे से होता है। इसीलिए रोजाना, दूध, दही, छाछ का सेवन महिला को जरूर करना चाहिए।

अंडा

यदि प्रेग्नेंट महिला अंडा का सेवन करती है तो गर्भवती महिला प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में अंडा खा सकती है। क्योंकि अंडा खाने से महिला को एनर्जी से भरपूर रहने, बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिलती है। अंडे का सेवन करते समय ध्यान रखें की अंडा अच्छे से पका हुआ हो साथ ही अंडा

नॉन वेज

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में महिला चिकन, मछली आदि का सेवन भी कर सकती है। चिकन व् मछली में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। साथ ही इनका सेवन करने से महिला का शरीर मजबूत होता है जिससे डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानी को कम करने और बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

खजूर

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में महिला को खजूर भी जरूर खाने चाहिए। क्योंकि खजूर खाने से महिला के शरीर में खून की कमी पूरी होती है, महिला को एनर्जी मिलती है, प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है, आदि।

साबुत अनाज

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को ओट्स, दलिया आदि का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि इनका सेवन करने से महिला को प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं वो 10 खाद्य पदार्थ जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में जरूर खाने चाहिए ताकि गर्भवती महिला स्वस्थ रहे और गर्भ में शिशु का विकास बेहतर तरीके से हो सके साथ ही महिला की डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिल सके।

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एक से नौ महीने तक प्रेग्नेंट महिला के शरीर में कौन-कौन से बदलाव आते हैं?

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गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में बहुत से परिवर्तन होते हैं और ऐसा नहीं है की यह सभी परिवर्तन एक ही बार में हो जाते हैं। बल्कि प्रेगनेंसी के हर हफ्ते हर महीने महिला अपने शरीर में होने वाले बहुत से बदलाव का अनुभव करती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान एक से नौ महीने तक कौन कौन से शारीरिक बदलाव का अनुभव करती है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

पीरियड्स

गर्भावस्था कन्फर्म होने के बाद से ही महिला को पीरियड्स आने बंद हो जाते हैं। और पीरियड्स का मिस होना ही प्रेगनेंसी का पहला लक्षण होता है। लेकिन कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान स्पॉटिंग यानि की हलके खून के धब्बे लगने की समस्या हो सकती है। परन्तु यदि महिला को ब्लीडिंग ज्यादा हो तो यह खतरे का संकेत होता है।

ब्रेस्ट में बदलाव

गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने ब्रेस्ट में भी बदलाव महसूस होता है। जिसकी वजह से ब्रेस्ट कड़े, टाइट, सूजे व् उभरे हुए महसूस होते हैं। साथ ही महिला को ब्रेस्ट में दर्द भी महसूस हो सकता है।

वजन

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला का वजन पंद्रह से सोलह किलो बढ़ सकता है। और यदि गर्भ में शिशु एक से ज्यादा हो तो महिला का वजन और भी ज्यादा बढ़ सकता है।

पेट का आकार

गर्भावस्था के महीने जैसे जैसे आगे बढ़ते हैं वैसे वैसे गर्भ में शिशु का विकास बढ़ता है और गर्भ में शिशु का विकास बढ़ने के साथ गर्भाशय का आकार भी बढ़ता है। जिसकी वजह से महिला के पेट का आकार भी बढ़ता है।

खान पान से जुड़े बदलाव

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं के खाने की इच्छा में बढ़ोतरी हो सकती है तो कुछ महिलाओं का खाने का मन नहीं करता है। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और महिला को न तो जरुरत से ज्यादा खाना चाहिए और न ही जरुरत से कम खाना चाहिए।

थकान व् कमजोरी

प्रेगनेंसी के समय महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या का होना भी आम बात होती है। और इसका कारण आराम में कमी, शरीर में पोषक तत्वों की कमी, जरुरत से ज्यादा महिला का काम करना, वजन बढ़ने के कारण आदि हो सकते हैं। और इस समस्या से अधिकतर गर्भवती महिलाएं परेशान भी रहती है।

यूरिन ज्यादा आना

आम लोगो की अपेक्षा प्रेग्नेंट महिला को यूरिन ज्यादा पास करने की इच्छा होती है क्योंकि गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है। जिस वजह से जल्दी जल्दी यूरिन पास करने की इच्छा होती है।

सांस लेने में दिक्कत

कुछ गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान सांस फूलने की समस्या या सांस लेने में कठिनाई का सामना भी करना पड़ सकता है। और इसका कारण महिला का वजन बढ़ना हो सकता है।

शारीरिक परेशानियां

गर्भावस्था के दौरान प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही महिला को कुछ न कुछ शारीरिक परेशानी का होना भी लगा रहता है। जैसे की महिला को उल्टियां, जी मिचलाना, बॉडी पेन, कमजोरी, मूड स्विंग्स की समस्या लगी रहती है।

सूजन

गर्भवती महिलाओं को हाथों, पैरों में सूजन की समस्या भी हो सकती है। और यह समस्या अधिकतर प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को हो सकती है।

दर्द महसूस होना

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से, शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण, जरुरत से ज्यादा शरीर पर दबाव डालने की वजह से दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और यह दर्द महिला को सिर, पैर, घुटनों, जोड़ो, कमर, पेट में महसूस हो सकता है।

स्किन से जुड़े बदलाव

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं को स्किन पर दाग धब्बे, मुहांसे, झाइयां, स्किन में रूखापन जैसी समस्या भी हो सकती है। साथ ही कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान खुजली की समस्या का सामना भी कर सकती है।

बैली बटन में फैलाव

जैसे जैसे प्रेग्नेंट महिला के पेट का आकार बढ़ता है वैसे वैसे बैली बटन में भी फैलाव बढ़ने लगता है और इसमें घबराने की कोई बात नहीं होती है। क्योंकि यह डिलीवरी के बड़ा अपने आप ही सही हो जाता है।

उठने बैठने सोने में दिक्कत

गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन बढ़ने की वजह से, पेट बाहर आने की वजह से महिला को उठने बैठने, सोने में दिक्कत होती है।

तो यह हैं कुछ बदलाव जो प्रेगनेंसी के एक से नौ महीने के बीच महिला को अपने शरीर में महसूस होते हैं। और शरीर में होने वाले इन बदलाव के कारण महिला को घबराने की बात नहीं होती है। क्योंकि ऐसा होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। साथ ही महिला को इस दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में किसी भी तरह की कमी नहीं आए।

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गर्भ में बेबी क्या पसंद करता है?

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माँ के गर्भ में शिशु का विकास जैसे जैसे बढ़ता है वैसे वैसे शिशु चीजों को महसूस करने लगता है। जैसे की शिशु की सुनने की क्षमता बढ़ने लगती है तो तेज आवाज़ होने पर शिशु की हलचल गर्भ में बढ़ने लगती है। जिसकी वजह से गर्भ में शिशु चौंक जाता है या डर भी सकता है। साथ ही कुछ ऐसी चीजें भी हो जो गर्भ में शिशु को बहुत पसंद होती है।

ऐसे में यदि आप माँ बनने वाली हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए बहुत फायदेमंद है। क्योंकि इस आर्टिकल में हम उन सभी चीजों के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं जो गर्भ में शिशु को बहुत पसंद होती है और जिससे शिशु खुश होता है। क्या आप भी उनके बारे में जानना चाहती है? यदि हाना तो आइये अब उनके बारे में जानते हैं।

माँ का अहसास

प्रेग्नेंट महिला जब अपने पेट पर कभी कभी हाथ फेरती है तो शिशु उस टच को महसूस करता है और गर्भ में शिशु बहुत खुश होता है। और माँ द्वारा दिया गया यह अहसास शिशु को गर्भ में बहुत पसंद होता है। यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको भी कभी कभी ऐसा जरूर करना चाहिए।

बातें करना और कहानियां सुनना

गर्भ में शिशु की सुनने की क्षमता का विकास होने के साथ शिशु बाहर की आवाज़ों को सुनने लगता है और कई बार उस पर अपनी प्रतिक्रिया भी देता है और यह प्रतिक्रिया शिशु अपनी हलचल के माध्यम से देता है। ऐसे में जब प्रेग्नेंट महिला अपने गर्भ में पल रहे बच्चे से बातें करती है या बोल बोल कर कहानियां सुनाती है तो यह शिशु को बहुत पसंद होता है। और ऐसा करने से गर्भ में ही शिशु अपनी माँ की आवाज़ को पहचानने लगता है जिससे माँ और बच्चे का रिश्ता और मजबूत होता है।

संगीत

माँ के गर्भ में शिशु को धीमी आवाज़ में बजने वाला संगीत भी पसंद होता है और शिशु इसे सुनकर बहुत खुश भी होता है। लेकिन ध्यान रखें की ज्यादा तेज आवाज़ में संगीत नहीं सुनने क्योंकि इससे शिशु की सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है।

खाने का स्वाद

प्रेगनेंसी के दौरान महिला अलग अलग तरीके की चीजों का सेवन करती है ऐसे में यदि आप कुछ खाती है तो उसका स्वाद शिशु तक भी पहुँचता है। और यदि शिशु को उसका स्वाद पसंद आता है तो शिशु बहुत खुश होता है और उसे पसंद करता है।

प्रेग्नेंट महिला का खुश रहना

गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास पूरी तरह से माँ पर ही निर्भर करता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला खुश होती है तो गर्भ में बच्चे भी खुश रहता है और उसका विकास अच्छे से होता है। और माँ खुश रहना गर्भ में बच्चे को बहुत पसंद होता है।

तो यह हैं कुछ चीजें जिन्हे गर्भ में शिशु बहुत पसंद करता है और शिशु खुश भी रहता है। ऐसे में यदि आप भी चाहती है की आपके गर्भ में पल रहा शिशु भी खुश रहे तो आपको भी इन बातों का प्रेगनेंसी के दौरान शयन रखना चाहिए।

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प्रेगनेंसी में घी ज्यादा फायदेमंद है या मक्खन?

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सेहतमंद रहने के लिए घी और मक्खन दोनों का सेवन फायदेमंद होता है। साथ ही इनका इस्तेमाल खाने में करने से खाने का जायका और भी बढ़ जाता है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान घी का सेवन ज्यादा फायदेमंद होता है या मक्खन का सेवन, इसके बारे में बात करने जा रहे हैं। और यह जरुरी भी है क्योंकि गर्भावस्था महिला के लिए ऐसा समय होता है जहां जो चीजें माँ और बच्चे दोनों के लिए ज्यादा फायदेमंद होती है उन्हें ही महिला को अपने खान पान में शामिल करने की सलाह दी जाती है।

प्रेग्नेंट महिला के लिए घी या मक्खन किसका सेवन है ज्यादा फायदेमंद?

मक्खन और घी दोनों ही दूध से बनते हैं लेकिन मक्खन को जब पिघला कर पकाया जाता है तो उसमे से घी निकलता है। प्रेगनेंसी के दौरान वैसे तो महिला घी और मक्खन दोनों का सेवन कर सकती है। लेकिन जब बात ज्यादा फायदे की आती है तो प्रेगनेंसी के दौरान घी का सेवन करना गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को मक्खन का सेवन करने की बजाय घी को अपनी डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए। तो आइये अब प्रेगनेंसी में घी का सेवन करने से कौन कौन से बेहतरीन फायदे मिलते हैं उसके बारे में जानते हैं।

गर्भावस्था में घी का सेवन करने के फायदे

गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी में नियमित रूप से जरुरत के अनुसार घी का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला और बच्चे दोनों को फायदे मिलते हैं। जैसे की:

डाइज़ेशन बेहतर होता है

घी का सेवन करने से महिला को खाना हज़म करने में दिक्कत नहीं होती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को कब्ज़, गैस जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

इम्युनिटी स्ट्रांग होती है

घी का सेवन करने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ और बच्चे दोनों को बिमारियों व् संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।

कमजोरी दूर होती है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कमजोरी थकान जैसी परेशानियां हो सकती है। लेकिन घी का सेवन करने से महिला की इन परेशानियों को दूर करने में मदद मिलती है। क्योंकि घी का सेवन करने से महिला को जरुरी पोषण मिलता है जिससे महिला ऊर्जा से भरपूर रहती है।

कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल

घी खाने से शरीर में बाद कोलेस्ट्रॉल कम होता है जिससे महिला को कोलेस्ट्रॉल से जुडी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलता है।

वजन

जिन गर्भवती महिलाओं का वजन कम होता है उन्हें अपनी डाइट में घी का सेवन जरूर करना चाहिए ताकि माँ और बच्चे दोनों क वजन सही रहने में मदद मिल सके।

हड्डियों के लिए है फायदेमंद

घी में विटामिन k2 मौजूद होता है जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत रखने के साथ गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

प्रसव आसान होता है

प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में घी का सेवन करने से महिला को प्रसव पीड़ा की शुरुआत करने में मदद मिलती है जिससे सामान्य डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में घी या मक्खन किसका सेवन ज्यादा फायदेमंद है उससे जुड़े टिप्स, साथ ही प्रेगनेंसी में घी का सेवन करने के फायदे। लेकिन ध्यान रखें महिला सिमित मात्रा में ही घी का सेवन करें, वजन ज्यादा हो तो घी का सेवन नहीं करें, सर्दी में कफ की समस्या हो तो भी घी का सेवन नहीं करें, क्योंकि इनके कारण आपको दिक्कत हो सकती है।

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इन चीजों को खाने से शिशु का विकास बेहतर होता है?

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला इस बात का सबसे ज्यादा ध्यान रखती है की गर्भ में पल रहे शिशु का विकास अच्छे से हो। और शिशु के बेहतर विकास के लिए सबसे जरुरी है की महिला अपने खान पान का ध्यान अच्छे से रखें। क्योंकि यदि महिला अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखती है तो महिला के आहार में मौजूद पोषक तत्व शिशु को भरपूर मात्रा में मिलते हैं। जिससे शिशु का विकास बेहतर तरीके से होता है तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन करने से शिशु का विकास अच्छे से होने में मदद मिलती है।

डेयरी प्रोडक्ट्स

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे की दूध, दही, पनीर आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि इनमे कैल्शियम और प्रोटीन की अधिकता होती है। जो शिशु के शारीरिक विकास के साथ मानसिक विकास को भी बेहतर करने में मदद करते हैं।

हरी सब्जियां

प्रेग्नेंट महिला को हरी सब्जियों जैसे की पालक, मेथी, सरसों, बथुआ आदि का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि हरी सब्जियों में आयरन, फोलेट भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। जो शिशु के विकास को बेहतर करने के साथ शिशु को जन्मदोष से भी सुरक्षित रखने में भी मदद करते हैं।

दालें

प्रोटीन, आयरन व् अन्य मिनरल्स से भरपूर दालों का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि इससे शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास को बेहतर करने में मदद मिलती है।

फल

फल स्वादिष्ट होने के साथ पोषक तत्व से भी भरपूर होते हैं ऐसे में फलों का सेवन भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। ताकि फलों में मौजूद पोषक तत्व शिशु को भी मिलें जिससे शिशु का विकास गर्भ में अच्छे तरीके से हो। फलों में महिला को अमरुद, केला, सेब, अनार, कीवी, संतरा आदि का सेवन जरूर करना चाहिए।

बादाम, अखरोट व् अन्य ड्राई फ्रूट्स

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को ड्राई फ्रूट्स का भी सेवन करना चाहिए। खासकर बादाम और अखरोट का सेवन तो महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि इसमें प्रोटीन, विटामिन्स ओमेगा 3 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो गर्भ में शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को बेहतर करने में मदद करते हैं।

अंडा

गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए प्रेग्नेंट महिला को अंडा भी जरूर खाना चाहिए। और हो सके तो अंडे को ऑमलेट या किसी अन्य रूप में खाने की बजाय उबाल कर खाएं। लेकिन अंडे का सेवन करने से पहले ध्यान रखें की अंडा कच्चा या आधा पका हुआ नहीं हो नहीं तो इसकी वजह से बच्चे के विकास पर गलत असर भी पड़ सकता है।

मछली या नॉन वेज

प्रेग्नेंट महिला यदि नॉन वेज खा लेती है तो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान नॉन वेज या मछली का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि मछली और नॉनवेज का सेवन करने से गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास को बेहतर करने में मदद मिलती है।

घी

प्रेगनेंसी के दौरान रोजाना महिला को रोटी पर लगाकर या सब्ज़ी में डालकर कम से कम दो चम्मच घी का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि घी का सेवन करने से भी गर्भ में शिशु के विकास को बेहतर करने में मदद मिलती है।

तरल पदार्थ

गर्भ में बच्चे के बेहतर विकास के लिए खाने का ध्यान रखने के साथ महिला को शरीर में तरल पदार्थों की कमी भी नहीं होने देनी चाहिए। और इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को एक दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ नारियल पानी, जूस, निम्बू पानी आदि का भी सेवन करना चाहिए। क्योंकि शरीर में तरल पदार्थ भरपूर होने से गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा सही रहती है जिससे जिससे गर्भ में शिशु का विकास भी बेहतर होता है।

प्रीनेटल विटामिन्स

प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर्स महिला को कुछ दवाइयों का सेवन करने की सलाह देते हैं। प्रेग्नेंट महिला को उन दवाइयों का सेवन भी सही समय से करना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो और बच्चे का विकास भी बेहतर तरीके से हो सके।

तो यदि आप भी माँ बनने वाली है और चाहती है की आपका शिशु भी हष्ट पुष्ट और बुद्धिमान हो तो आपको भी इन खाद्य पदार्थों का सेवन भरपूर करना चाहिए। इसके अलावा महिला को डॉक्टर से भी इस बारे में सलाह जरूर लेनी चाहिए ताकि बच्चे के शारीरिक व् मानसिक विकास में किसी भी तरह की कमी न रहे।

Pregnancy diet for healthy baby

प्रेग्नेंट महिला को पहली तिमाही में यह 10 फूड जरूर खाने चाहिए?

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला के ऊपर अपने और अपने शिशु के पोषण की दुगुनी जिम्मेवारी हो जाती है। ऐसे में प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही महिला को अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को सामान्य से ज्यादा 300 कैलोरी की जरुरत होती है। ऐसे में जरुरी होता है की महिला पोषक तत्वों से भरपूर डाइट ले ताकि महिला भी स्वस्थ रहें और बच्चे का विकास भी अच्छे से हो। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे 10 फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में जरूर खानी चाहिए।

डेयरी प्रोडक्ट्स

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को दूध दही और अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि डेयरी प्रोडक्ट्स में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है जो शिशु की हड्डियों के विकास को बेहतर करने और महिला की हड्डियों को पोषण पहुंचाने में मदद करता है। जिससे बच्चे का विकास अच्छे से होता है और महिला की शारीरिक परेशानियां कम होती है।

दालें व् फलियां

दालें व् फलियां प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत होती है जो शिशु की कोशिकाओं के बेहतर विकास में मदद करती है। जिससे शिशु का सम्पूर्ण शुरूआती विकास बेहतर होता है। साथ ही दालों का सेवन महिला के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

हरी सब्जियां

हरी सब्जियां जैसे की पालक, सरसों आदि आयरन, फोलेट, फाइबर व् अन्य पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होती है। और यह सभी पोषक तत्व शिशु के विकास को बेहतर करने में मदद करते हैं साथ ही महिला की प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में होने वाली परेशानियों को कम करने में मदद करते हैं।

फल

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को फलों का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि फलों में भी पोषक तत्व जैसे की कैल्शियम, आयरन, फाइबर, आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

अंडा

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला चाहे तो अंडे का सेवन भी कर सकती है अंडा फैट, प्रोटीन, कैल्शियम का बेहतरीन स्त्रोत होता है। जो शिशु के शुरूआती विकास को बेहतर करने में मदद करता है।

साबुत अनाज

साबुत अनाज जैसे की गेहूं, ओट्स, मक्का, दलिया आदि का सेवन भी महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में जरूर करना चाहिए। क्योंकि इनमे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

सलाद

गर्भावस्था की की पहली तिमाही में महिला को सब्जियों व् फलों के सलाद का भी भरपूर करना चाहिए। इससे महिला का पाचन तंत्र भी अच्छे से काम करता है और महिला और बच्चे को जरुरी पोषक तत्व भी मिलते हैं।

अन्य सब्जियां

हरी सब्जियों के अलावा महिला को अन्य सब्जियां जैसे की मटर, गाजर, निम्बू, गोभी, शलगम, मशरूम, टमाटर, आलू आदि का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि यह सभी सब्जियां भी पोषक तत्वों से भरपूर होती है।

ड्राई फ्रूट्स

ज्यादा नहीं लेकिन बादाम, अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स का सेवन भी प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को जरूर करना चाहिए। और हो सके तो रात भर भिगोने के बाद सुबह के नाश्ते में इन्हे खाना चाहिए।

नॉन वेज

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला चाहे तो हफ्ते में एक या दो बार थोड़ा बहुत नॉन वेज भी ले सकती है। क्योंकि इससे शिशु के शुरूआती विकास को बेहतर करने में मदद मिलती है। नॉन वेज का सेवन करते समय महिला इस बात का ध्यान रखें की महिला कच्चे नॉन वेज, बिना साफ़ सफाई के नॉन वेज, अधपके नॉन वेज का सेवन नहीं करें।

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में क्या नहीं खाएं

बेहतर खानपान के साथ इस बात का ध्यान भी प्रेग्नेंट महिला को जरूर रखना चाहिए की प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला क्या नहीं खाएं। ताकि माँ और बच्चे को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। तो प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में कच्चा पपीता, अनानास, अंगूर, कच्चा अंडा, कच्चा मास, बिना धुले फल व् सब्जियां, बासी व् ठंडा खाना, डिब्बाबंद फ़ूड, मर्करी युक्त मछली, बैंगन, जंक फ़ूड, ज्यादा तेल मसाले वाले आहार, जिन चीजों की तासीर गर्म होती है, ज्यादा चाय कॉफ़ी और चॉकलेट आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं वो 10 फ़ूड जो प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को जरूर खाने चाहिए। यदि महिला इन फूड्स को अपनी डाइट में शामिल करती है तो इससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। साथ ही बच्चे के शुरूआती विकास को भी बेहतर होने में मदद मिलती है।

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जब प्रेग्नेंट महिला उदास रहती है तो बच्चे की हार्टबीट पर क्या प्रभाव पड़ता है?

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प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला बहुत सी शारीरिक परेशानियों से गुजरती है। साथ ही कुछ महिलाएं मानसिक रूप से भी परेशानी का सामना करती है जिसकी वजह से महिला को तनाव होना, मूड सम्बन्धी बदलाव जैसे की चिड़चिड़ाहट होना, गुस्सा आना, उदास रहना जैसी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान तनाव का सामना करती है या उदास रहती है।

उन महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे पर तनाव का बुरा असर पड़ता है। और यह असर बच्चे के ऊपर शारीरिक व् मानसिक रूप से पड़ सकता है साथ ही इससे बच्चे की हार्टबीट पर भी असर पड़ता है। आज इस आर्टिकल में हम आपसे गर्भवती महिला के तनाव लेने या उदास रहने पर बच्चे की हार्टबीट पर क्या प्रभाव पड़ता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भ में शिशु की हार्टबीट कब आती है?

गर्भावस्था कन्फर्म होने के बाद पांचवें या छठे हफ्ते में महिला को अल्ट्रासॉउन्ड करवाने की सलाह दी जाती है। जिसमे शिशु की हार्टबीट का पता लगाया जाता है। ज्यादातर शिशु की छटवें हफ्ते में हार्टबीट आ जाती है और यदि कुछ बच्चों की हार्टबीट नहीं आती है। तो सातवें हफ्ते तक बच्चे की हार्टबीट जरूर आ जाती है।

माँ के तनाव लेने या उदास रहने पर बच्चे पर क्या असर पड़ता है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला बहुत से शारीरिक बदलाव, शारीरिक परेशानियां, मानसिक परेशानियां आदि से गुजरती है। जिसकी वजह से कुछ महिलाएं तनाव में आ जाती है और तनाव के कारण महिला उदास रहने लगती है कुछ महिलाएं तो बच्चे के जन्म के बाद भी तनाव का शिकार हो सकती है। ऐसे में जब प्रेग्नेंट महिला तनाव का शिकार होती है तो इससे महिला की स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां बढ़ सकती है और मानसिक रूप से तो महिला ज्यादा परेशान हो जाती है।

साथ ही इसके कारण गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास भी इससे प्रभावित होता है। जिसकी वजह से बच्चा शारीरिक रूप से कमजोर होने के साथ दिमागी रूप से भी कमजोर हो सकता है साथ ही ऐसे बच्चों की हार्टबीट भी स्वस्थ बच्चों की अपेक्षा ज्यादा बढ़ जाती है। और यह समस्या बच्चों को गर्भ में होने के साथ जन्म के साथ भी हो सकती है। इसके अलावा जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद भी तनाव की समस्या से जूझ रही होती है।

उन महिलाओं के बच्चे स्वस्थ माओं के बच्चों की अपेक्षा ज्यादा चिड़चिड़े, ज्यादा रोने वाले, गुस्से वाले भी हो जाते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला यदि चाहती है की उसके बच्चे को ऐसी कोई दिक्कत नहीं हो तो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद अपने आप को खुश रखने की कोशिश करनी चाहिए। ताकि माँ और बच्चा दोनों ही स्वस्थ रहें।

तो यह हैं गर्भवती महिला के उदास रहने पर बच्चे की हार्टबीट पर क्या असर पड़ता है उससे जुडी जानकारी। यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आप भी इन बातों का ध्यान रखें ताकि आपके बच्चे को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके और उसका विकास प्रेगनेंसी के दौरान और जन्म के बाद अच्छे से हो।