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समय से पहले पानी की थैली (Baby Bag) फटने से ऐसे बचाएं

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प्रेगनेंसी के दौरान शिशु गर्भ में एक तरल पदार्थ में होता है जिसे की एमनियोटिक फ्लूड कहा जाता है और जिस थैली में यह फ्लूड होता है उसे पानी की थैली या बेबी बैग कहा जाता है। एमनियोटिक फ्लूड की मदद से गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है और शिशु सुरक्षित भी रहता है। साथ ही जब यह एमनियोटिक फ्लूड प्राइवेट पार्ट से बाहर निकलने लगता है तो इसका मतलब होता है की प्रसव होने वाला है क्योंकि पानी की थैली फट चुकी है।

लेकिन यदि यह थैली समय से पहले फट जाती है तो इसकी वजह से डिलीवरी समय से पहले हो जाती है जो की बच्चे के विकास के लिए सही नहीं होता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम गर्भावस्था के दौरान ध्यान रखने वाली छोटी छोटी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जो समय से पहले पानी की थैली फटने की समस्या से आपको सुरक्षित रखने में मदद करती है।

किन महिलाओं को होती है समय से पहले पानी की थैली फटने की समस्या?

  • जो महिलाएं अल्कोहल या धूम्रपान का सेवन करती है।
  • जिन महिलाओं को यौन संक्रमण की समस्या हो।
  • प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय या प्राइवेट पार्ट में होने वाले संक्रमण के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
  • गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग की समस्या जिन महिलाओं को रहती है उनकी पानी की थैली समय से पहले फटने की सम्भावना अधिक होती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला के वजन में कमी होना भी इस समस्या का कारण हो सकता है।
  • गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
  • जिन गर्भवती महिलाओं की पहले समय से पहले डिलीवरी हुई हो उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • यदि प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स अधिक हो तो भी इस परेशानी के होने का खतरा अधिक होता है।

प्रेगनेंसी में समय से पहले पानी की थैली फटने से ऐसे बचाएं

गर्भावस्था के समय पानी की थैली यदि समय से फट जाये तो इसके कारण गर्भवती महिला व् बच्चे को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। जैसे की:

संक्रमण से बचें

गर्भावस्था के दौरान महिला प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखें ताकि महिला को प्राइवेट पार्ट या गर्भाशय में किसी तरह का संक्रमण नहीं हो और महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

पोषक तत्वों से भरपूर ले आहार

शरीर में पोषक तत्वों की कमी होना और प्रेग्नेंट महिला के वजन में कमी होने के कारण भी महिला को यह समस्या हो सकती है। ऐसे में इस परेशानी से बचे रहने के लिए महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए और वजन सही रखना चाहिए। ताकि महिला को समय से पहले पानी की थैली फटने की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके।

लापरवाही से बचें

गर्भावस्था के दौरान बरती गई लापरवाहियों के कारण भी इस परेशानी के होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में इस परेशानी से बचे रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला को गर्भावस्था के दौरान किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। साथ ही महिला भरपूर आराम भी करें क्योंकि जितना ज्यादा महिला आराम करती है उतना ही गर्भावस्था के दौरान महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करें

कैफीन का अधिक सेवन करने से, धूम्रपान करने पर, अल्कोहल का सेवन अधिक करने की वजह से प्रेग्नेंट महिला की पानी की थैली समय से पहले फटने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए और नशीले पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए।

डॉक्टर से नियमित जांच

गर्भावस्था के दौरान होने वाली समस्याओं से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को डॉक्टर से नियमित जांच करवानी चाहिए। ताकि यदि कोई समस्या हो तो उसका साथ के साथ ही समाधान हो जाये। यदि प्रेग्नेंट महिला अपनी जांच समय से करवाती है, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का सेवन समय से करती है। तो इससे प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

गर्भावस्था के समय पानी की थैली फटने पर क्या करें?

यदि महिला की पानी की थैली फट जाती है तो महिला को जल्द से जल्द डॉक्टर से बात कर हॉस्पिटल पहुँच जाना चाहिए। क्योंकि थैली फटने के बाद आपकी क्या कंडीशन है उसके बारे में सही से आपको डॉक्टर ही बता पाते हैं। ऐसे में यदि आप देरी करते हैं तो थैली का पानी खत्म होने पर गर्भ में शिशु को दिक्कत होने का खतरा होता है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान प्रेगनेंसी के दौरान रखने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही महिला को गर्भावस्था के दौरान अपने खान पान, रहन सहन का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि गर्भवती महिला और बच्चे को कोई भी दिक्कत नहीं हो।

प्रेगनेंसी में नाभि में दर्द होने और नाभि के बाहर आने के कारण

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में बहुत से बदलाव होते हैं। जैसे की पेट का बाहर आना, वजन बढ़ना, हाथों पैरों पर सूजन होना, ब्रेस्ट के आकार में बदलाव होना, हिप्स का बाहर निकलना, नाभि में बदलाव होना, आदि। और ऐसा होना गर्भावस्था के दौरान आम बात होती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान नाभि में होने वाले बदलाव के बारे में बात करने जा रहे हैं। जैसे की गर्भावस्था के दौरान महिला के पेट का आकार बढ़ता है वैसे वैसे नाभि बाहर की और उभरी हुई नज़र आ सकती है।

गर्भावस्था में नाभि के बाहर आने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान नाभि के बाहर आने का कारण गर्भाशय का बढ़ना होता है। जैसे जैसे गर्भाशय का अकार बढ़ता जाता है वैसे वैसे नाभि थोड़ी बाहर की तरफ उभरी हुई नज़र आती है। और इसे लेकर महिला को घबराने की जरुरत नहीं होती है क्योंकि ऐसा होना गर्भावस्था के दौरान आम बात होती है। लेकिन यदि महिला को नाभि से जुडी कोई समस्या है जैसे की दर्द है, खुजली की समस्या है तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

गर्भावस्था में नाभि में दर्द होने के कारण

  • गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण नाभि के आस पास की मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ता है जिसकी वजह से महिला को दर्द महसूस हो सकता है।
  • जो महिलाएं नाभि पर छेद करवाती है उन्हें यह समस्या हो सकती है।
  • यदि महिला को स्किन इन्फेक्शन यानी के नाभि के आस पास खुजली व् जलन की समस्या होती है तो भी महिला को नाभि में दर्द महसूस हो सकता है।

नाभि में दर्द की समस्या से बचने के उपाय

  • खुजली जलन के कारण होने वाले दर्द से बचने के लिए महिला को नाभि के आस पास लोशन लगाना चाहिए जिससे खुजली और जलन से राहत मिल सकें।
  • पेट के लिए बेल्ट का इस्तेमाल करें इससे पेट को स्पोर्ट मिलता है जिससे मांसपशियों में खिंचाव कम होता है और महिला को दर्द से आराम मिलता है।
  • टी ट्री आयल, नारियल के तेल आदि को नाभि के आस पास लगाएं आपको आराम मिलेगा।
  • करवट लेकर सोने से नाभि पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिलती है जिससे महिला को आराम महसूस होता है।

क्या नाभि और गर्भ में पल रहे शिशु का कोई कनेक्शन होता है?

जी हाँ, नाभि वो होती है जिसे आप गर्भनाल कहते हैं जो सीधा शिशु से जुडी होती है और इसी के माध्यम से शिशु के विकास के लिए सभी जरुरी पोषक तत्व, ऑक्सीजन, खून आदि शिशु तक पहुंचाया जाता है। लेकिन यदि नाभि में दर्द होता है तो इसका कोई असर शिशु पर नहीं पड़ता है।

लेकिन यदि स्किन इन्फेक्शन हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके बढ़ने से हो सकता है की बच्चे को दिक्कत महसूस हो। क्योंकि यदि आप तेजी से खुजली करते हैं तो इसके कारण पेट पर दबाव पड़ सकता है जिसकी वजह से बच्चे को दिक्कत महसूस हो सकती है।

गर्भावस्था में नाभि में दर्द होने पर डॉक्टर से कब मिलें?

प्रेगनेंसी में समय यदि आपको हल्का फुल्का नाभि में दर्द हो रहा है तो कोई बात नहीं लेकिन यदि आप असहनीय दर्द हो रहा है, बुखार, उल्टी, बहुत ज्यादा नाभि में खुजली जलन की समस्या हो रही है तो महिला को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में नाभि में दर्द होने के कारण व् नाभि में होने वाले बदलाव के कारण, तो ऐसे में यदि आप भी नाभि में हो रहे बदलाव के कारण परेशान हो रहे हैं तो आपको बिल्कुल परेशान होने की जरुरत नहीं है। साथ ही नाभि में होने वाले दर्द या किसी अन्य असहज लक्षण के महसूस होने पर इसे अनदेखा भी नहीं करें।

सर्दियों में प्रेग्नेंट महिला का रूटीन क्या होना चाहिए?

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प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक महिला को अपना ध्यान अच्छे से रखने की सलाह दी जाती है। साथ ही महिला को अपनी बहुत आदतों, खान पान, दिनचर्या आदि में भी बदलाव लाना जरुरी होता है। साथ ही यदि प्रेगनेंसी के दौरान यदि मौसम में बदलाव हो रहा है तो मौसम के अनुसार महिला को अपने रूटीन में बदलाव करना चाहिए।

क्योंकि मौसम के अनुसार महिला जितने अच्छे से अपने रूटीन को फॉलो करती है। उतना ही प्रेग्नेंट महिला और होने वाले बच्चे को मौसम में बदलाव होने के कारण होने वाली परेशानियों से बचने और स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भवती महिला का सर्दियों में रूटीन कैसा होना चाहिए उस बारे में बताने जा रहे हैं।

खान पान का रखें ध्यान

सर्दियों के मौसम में मार्किट में हरी सब्जियां, गाजर, मटर, रंग बिरंगे फल आदि मौजूद होते हैं। और यह सभी विटामिन्स, प्रोटीन, आयरन, फोलेट आदि के बेहतरीन स्त्रोत होते हैं। जो गर्भवती महिला और होने वाले बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। ऐसे में जरुरी है की महिला सुबह के नाश्ते से लेकर रात तक के आहार को समय से लें। जैसे की:

  • सुबह के नाश्ते में महिला दो अंडे, साबुत अनाज, सब्जियों से बना दलिया, फलों का रस, दूध आदि अपनी मनपसंद का कोई भी आहार ले सकती है। और ध्यान रखें की सोकर उठने के एक घंटे के अंदर आप नाश्ता कर लें।
  • नाश्ता करने के एक से डेढ़ घंटे बाद आपको संतरा, किन्नू, कीवी, अनार जैसे फलों का सेवन करना चाहिए।
  • उसके बाद दोपहर के खाने में आप हरी सब्जी जरूर खाएं।
  • शाम के नाश्ते में भी आप अपनी पसंद का सूप या चाय के साथ कुछ खा पी सकते हैं।
  • उसके बाद रात के आहार में किसी न किसी दाल का सेवन जरूर करें और उसके साथ चपाती खाएं साथ ही दाल में डालकर और रोटी पर लगाकर एक से दो चम्मच घी जरूर खाएं।
  • याद रखें की रोजाना अपनी डाइट में थोड़ा थोड़ा बदलाव करें और छोटे छोटे मील लें ताकि भोजन को पचाने में आसानी हो और आपको भरपूर पोषण मिल सकें।
  • डाइट लेते समय एक बात का ध्यान रखें की प्रेगनेंसी में खाना खाने का मतलब पेट भरना नहीं होता है बल्कि शरीर में पोषक तत्वों की कमी न हो इसका ध्यान रखना जरुरी होता है।

हाइड्रेट रहें

सर्दियों के मौसम में प्यास कम ही लगती है लेकिन आपको ध्यान रखना है की एक दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी का सेवन आप जरूर करें। और जरुरी नहीं है की हाइड्रेट रहने के लिए आप पानी ही पीएं बल्कि आप नारियल पानी, फलों का रस, दूध आदि का सेवन भी कर सकती है। इसके अलावा ध्यान रखें की आप किसी भी पीने की चीज में बर्फ डालकर, फ्रिज से तुरंत निकालकर उसे न पीएं। साथ ही जब भी पानी पीएं तो उसे थोड़ा गुनगुना कर लें।

धूप भी है जरुरी

सर्दियों में सर्दी से बचाव के लिए गर्भवती महिला थोड़ी देर धूप में भी जरूर बैठें। क्योंकि धूप में बैठने से महिला को विटामिन डी मिलता है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए अच्छा होता है। साथ ही धूप में बैठने से महिला को सर्दी से बचे रहने में मदद मिलती है। लेकिन एक बात का ध्यान रखें की लम्बे समय तक धूप में नहीं बैठें खासकर जब धूप बहुत ज्यादा तेज हो।

व्यायाम योगासन भी है जरुरी

सर्दियों में आलस और सुस्ती होना आम बात होती है। ऐसे में महिला को सर्दियों में थोड़ी देर व्यायाम व् योगासन जरूर करना चाहिए और इसे नियमित करना चाहिए इससे महिला की हेल्थ अच्छी रहती है साथ ही सुस्ती व् आलस भी दूर होता है। व्यायाम व् योगासन करते समय इस बात का ध्यान रखें की आप ऐसी कोई भी गलती नहीं करें या लापरवाही नहीं करें जिससे आपको कोई दिक्कत हो।

भरपूर लें नींद

सेहत व् स्वास्थ्य को सही रखने के लिए बहुत जरुरी होता है की महिला भरपूर नींद लें। ऐसे में सर्दियों के मौसम में स्वस्थ रहने के लिए अपने रूटीन में भरपूर नींद को भी गर्भवती महिला को जरूर शामिल करना चाहिए।

सर्दी से बचाव के लिए प्रेग्नेंट महिला इन बातों का ध्यान रखें

  • ठंडी चीजों का सेवन नहीं करें।
  • कैफीन युक्त पदार्थ जैसे की चाय कॉफ़ी का अधिक सेवन नहीं करें।
  • अल्कोहल का सेवन और धूम्रपान नहीं करें।
  • पहनावे का ध्यान रखें गर्म कपडे पहन कर रखें।
  • बासी चीजों का सेवन नहीं करें साथ ही जरुरत से ज्यादा अधिक तला भुना नहीं खाएं।
  • गुनगुने पानी से नहाएं न तो ज्यादा ठंडा और न ही ज्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल नहाने के लिए करें।
  • साफ़ सफाई का ध्यान रखें।
  • खाने पीने सोने आदि में लापरवाही नहीं करें।
  • सर्दियों में स्किन से जुडी समस्या होने का खतरा अधिक होता है ऐसे में स्किन को पोषण पहुंचाने के लिए महिला को मॉइस्चराइजर आदि का इस्तेमाल करना चाहिए।

बता यह है सर्दियों में गर्भवती महिला का रूटीन कैसा होना चाहिए उससे जुड़े कुछ टिप्स, यदि आप भी माँ बनने वाली हैं और सर्दियों का मौसम चल रहा है तो आपको भी इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको सर्दियों के मौसम में स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

Routine for pregnant women in winter season

प्रेगनेंसी में सेंधा नमक खाना क्यों जरुरी होता है?

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गर्भावस्था के समय महिला बहुत को बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है क्योंकि महिला जितनी ज्यादा सावधानी बरतती है। उतना ही ज्यादा प्रेग्नेंट महिला और होने वाले शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। साथ ही गर्भावस्था के दौरान महिला को अपनी बहुत सी आदतों, खान पान आदि में बदलाव की सलाह भी दी जाती है।

क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान सही खान पान गर्भावस्था के दौरान आने वाली परेशानियों को कम कर सकता है। आज इस आर्टिकल में भी हम गर्भावस्था के खान पान से जुडी सलाह ही देने जा रहे हैं। और वो सलाह है की प्रेग्नेंट महिला को गर्भावस्था के दौरान सफ़ेद नमक का सेवन करने की बजाय सेंधा नमक का सेवन करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में सेंधा नमक क्यों खाएं?

यदि आप माँ बनने वाली हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद नमक का सेवन करने की बजाय सेंधा नमक का सेवन करें। क्योंकि सेंधा नमक में मौजूद गुण प्रेग्नेंट महिला की बहुत सी शारीरिक परेशानियों को हल करने में मदद करते हैं, स्वस्थ रखने में मदद करते हैं, आदि। साथ ही सेंधा नमक सफ़ेद नमक की बजाय प्रेग्नेंट महिला को ज्यादा फायदे पहुंचाता है।

गर्भावस्था में सेंधा नमक खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि सेंधा नमक का सेवन करती है। तो इससे गर्भवती महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं। आइये अब उन फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

बढ़ती है इम्युनिटी

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। और इम्युनिटी कमजोर होने के कारण महिला को संक्रमण व् बीमारियां होने का खतरा अधिक होता है। लेकिन यदि महिला अपनी डाइट में सेंधा नमक को शामिल करती है तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी को मजबूत होती है जिससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

डाइज़ेशन के लिए है बेहतर

गर्भावस्था के समय अधिकतर गर्भवती महिलाएं पाचन तंत्र से जुडी समस्याओं से परेशान रहती है। लेकिन यदि महिला सेंधा नमक का सेवन करती है तो इससे पाचन तंत्र को सही रहने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को अपच, गैस, कब्ज़, जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर रहता है नियंत्रित

गर्भावस्था के समय ब्लड प्रैशर का ऊपर नीचे होना आम बात होती है। लेकिन यदि महिला का ब्लड प्रैशर बहुत ज्यादा हाई रहता है तो इसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत होने का खतरा होता है। ऐसे में महिला यदि सेंधा नमक का सेवन करती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला के ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

वजन रहता है नियंत्रित

गर्भावस्था के दौरान वजन का ज्यादा बढ़ना माँ व् बच्चे दोनों के लिए हानिकारक होता है। ऐसे में वजन को नियंत्रित रखने के लिए सेंधा नमक का सेवन महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि सेंधा नमक का सेवन करने से डाइज़ेशन बेहतर होता है, मेटाबोलिज्म सही रहता है जिससे प्रेग्नेंट महिला का वजन नियंत्रित रहता है।

मसल क्रैम्प की समस्या से होता है बचाव

गर्भवती महिला को कई बार नसों में खिंचाव महसूस होता है जिसके कारण अचानक से हाथ पैर में दर्द होने लगता है। जिससे महिला को परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। ऐसे में सेंधा नमक का सेवन करने से महिला को इस परेशानी को हल करने में मदद मिलती है।

जेस्टेशनल शुगर का खतरा होता है कम

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को ब्लड शुगर लेवल बढ़ने के कारण जेस्टेशनल शुगर होने का खतरा रहता है। लेकिन यदि महिला सेंधा नमक का सेवन करती है तो महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि सेंधा नमक खाने से ब्लड में शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को सेंधा नमक का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को मिलते हैं। इसीलिए गर्भावस्था के दौरान जितना हो सके अपने खाने में महिला को सेंधा नमक का इस्तेमाल ही करना चाहिए।

बार-बार गर्भपात हो जाता है तो यह करें?

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प्रेगनेंसी हर महिला के लिए बहुत ही बेहतरीन अहसास होता है लेकिन गर्भपात महिला के लिए दर्दनाक होने के साथ बहुत ही ज्यादा परेशान कर देने वाला अनुभव होता है। खासकर जब महिला प्रेगनेंसी के लिए ट्राई कर रही हो और महिला का गर्भपात हो जाये। कुछ महिलाएं जो बच्चा नहीं चाहती है वो दवाई खाकर या डॉक्टर की मदद से गर्भपात करवाती है। और कुछ महिलाओं का गर्भ अपने आप ही गिर जाता है। साथ ही कुछ ऐसे भी होते हैं जहां महिला का एक के बाद एक गर्भपात हो जाता है। आज इस आर्टिकल में हम आपसे बार बार गर्भपात होने के कारण व् उसके उपाय के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं।

क्यों हो जाता है बार बार गर्भपात

  • जिन महिलाओं को शुगर, थायरॉयड जैसी शारीरिक बीमारियां होती है उनका गर्भ गिरने का खतरा अधिक होता है।
  • जो महिलाएं PCOD की समस्या से ग्रसित होती है उन महिलाओं का भी बार बार गर्भपात हो जाता है।
  • महिला या पुरुष यदि किसी एक के भी क्रोमोसोम में असंतुलन होता है तो इस कारण भी बार बार गर्भपात हो जाता है।
  • महिला शरीर में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन के स्तर में कमी का होना भी इस समस्या का कारण होता है।
  • बच्चे दानी का कमजोर होना या बच्चे दानी में गाँठ होने के कारण भी महिला का बार बार गर्भपात हो जाता है।
  • बॉडी में हार्मोनल इम्बैलेंस होना भी इस समस्या का कारण होता है।
  • इम्युनिटी से जुडी समस्या होने के कारण भी महिला को यह समस्या हो सकती है।
  • जो महिलाएं बहुत ज्यादा धूम्रपान करती है उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • यदि कोई महिला पैंतीस इस उससे ज्यादा उम्र के बाद गर्भधारण की कोशिश करती है उनका गर्भपात होने का खतरा बहुत अधिक होता है।
  • जो महिलाएं प्राइवेट पार्ट में संक्रमण की समस्या से जूझ रही होती है उनका गर्भ भी बार बार गिर सकता है।
  • जिन महिलाओं के गर्भाशय का आकार सही नहीं होता है उन्हें भी यह दिक्कत हो सकती है क्योंकि इस कारण गर्भाशय में भ्रूण का प्रत्यारोपण नहीं हो पाता है।
  • जो महिलाएं घर में गर्भपात के लिए बार बार गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती है उन्हें भी यह परेशानी हो सकती है।

बार बार गर्भपात की समस्या से बचने के टिप्स

यदि किसी महिला को बारे बार गर्भपात हो रहा है तो महिला को कुछ टिप्स का ध्यान रखना चाहिए। जिनसे महिला को इस परेशानी से बचने और आसानी से गर्भधारण करने में मदद मिल सकती है।

डॉक्टर से करवाएं जांच

सबसे पहले तो महिला और पुरुष दोनों को डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। जिससे की किस शारीरिक समस्या की वजह से आपको यह दिक्कत हो रही है उसका पता लगाया जा सके और उसका इलाज हो। जैसे की संक्रमण है, शुगर या थायरॉयड है, क्रोमोसोम से जुडी समस्या है, बच्चेदानी से जुडी परेशानी है, PCOD है, आदि। और उसके बाद डॉक्टर की सलाह के लेने पर महिला गर्भाधारण को ट्राई करें।

कंसीव करने से पहले ही तैयारी करें शुरू

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के तीन से छह महीने पहले ही महिला को फोलिक एसिड व् अन्य विटामिन्स का सेवन करना शुरू कर देना चाहिए साथ ही टीकाकरण भी करना चाहिए। जिससे की प्रेगनेंसी में आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स को कम करने में मदद मिल सके।

गर्भधारण की सही उम्र का ध्यान रखें

यदि आप चाहती है की आपको प्रेगनेंसी में कोई परेशानी नहीं हो, बार बार गर्भपात नहीं हो तो इसके लिए आपको प्रेगनेंसी के लिए अपनी सही उम्र का ध्यान रखना चाहिए।

जीवनशैली में बदलाव

बार बार गर्भपात की समस्या से बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव करना बहुत जरुरी होता है। जैसे की महिला को नींद भरपूर लेनी चाहिए, पोषक तत्वों से युक्त डाइट लेनी चाहिए, योगासन करना चाहिए, खुश रहना चाहिए तनाव नहीं लेना चाहिए, नशीली चीजें जैसे की धूम्रपान अल्कोहल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए, रूटीन चेकअप करवाना चाहिए, आदि।

गर्भपात के तुरंत बाद न करें गर्भधारण

यदि कोई महिला गर्भपात के तुरंत बाद गर्भधारण की कोशिश करती है तो इस कारण महिला का गर्भ गिरने का खतरा अधिक होता है। ऐसे में यदि महिला गर्भपात होने के बाद जब तक पूरी फिट न हो जाएँ तब तक कंसीव करने की कोशिश नहीं करें। और कंसीव करने से पहले एक बार डॉक्टर से जांच करवाएं।

बार बार गर्भपात की समस्या से बचने के घरेलू नुस्खें

  • हींग का सेवन अपने खाद्य पदार्थों में करें इससे गर्भपात का खतरा कम होता है।
  • एक गिलास दूध में एक गाजर का जूस मिलाकर उबालें और उसके आधा रह जाने पर नियमित करें इससे भी गर्भपात का खतरा कम होता है।
  • पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें जैसे की हरी सब्जियों, दालों, साबुत अनाज, फलों आदि का भरपूर सेवन करें।
  • जिन महिलाओं का गर्भपात बार बार हो जाता है उनके लिए लौकी का जूस पीना या लौकी की सब्ज़ी रोजाना खाना बहुत फायदेमंद होता है।
  • गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करें जैसे की भारी सामान नहीं उठाएं, पेट के भार कोई काम नहीं करें, यात्रा नहीं करें, डॉक्टर से बिना पूछें दवाइयों का सेवन नहीं करें, आदि यदि महिला इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखती है तो इससे महिला को गर्भपात से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • पुदीना, पपीता, अनानास व् अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचे जिनका सेवन करने के कारण गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।

तो यह हैं बार बार गर्भपात होने के कारण व् उसे बचने के टिप्स, यदि आपको भी यह समस्या है तो आपको भी डॉक्टर से जल्द से जल्द मिलना चाहिए। और इन टिप्स को ध्यान रखते हुए डॉक्टर से अपना ट्रीटमेंट शुरू करवाना चाहिए ताकि आपको भी प्रेगनेंसी के अनोखे अनुयभाव को महसूस करने में मदद मिल सके।

ठण्ड में त्वचा काली पड़ गई है? अपनाएँ यह टिप्स

सर्दियों का मौसम आते ही सर्द हवाएं चलने लगती है और ठण्ड से बचाव के लिए धूप में बैठना सभी की पहली पसंद होता है। ऐसे में धूप में बैठने के कारण, त्वचा पर धूल मिट्टी का जमाव होने के कारण, त्वचा की नमी खोने के कारण स्किन डल पड़ने लगती है। और त्वचा के डल होने के कारण त्वचा का रंग भी काला पड़ने लगता है। कुछ लोगो को स्किन फटने जैसी समस्या भी हो जाती है। लेकिन घबराएं नहीं क्योंकि आयन सभी समस्याओं से बचाव के लिए आप कुछ आसान टिप्स को ट्राई कर सकती हैं। जैसे की:

आलू का रस

आलू का रस सर्दी के मौसम में काली पड़ी त्वचा को निखारने के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप आलू को कद्दूकस करके उस रस निकाल लें। और अब उस रस को रुई की मदद से अपने चेहरे पर लगाएं। आप चाहे तो आलू की स्लाइस को भी चेहरे पर रगड़ सकते हैं।

हल्दी और बेसन

एक कटोरी में एक चम्मच बेसन, आधा चम्मच हल्दी, दो तीन बूंदे निम्बू का रस और मलाई डालकर एक पतला पेस्ट बनाएं। पेस्ट बनाने के बाद अब उस पेस्ट को मास्क के रूप में चेहरे पर लगाएं। सूखने के बाद साफ़ पानी से धो लें, ऐसा हफ्ते में दो बार करें। इस उपाय को ट्राई करने से सर्दी के मौसम में भी आपके चेहरे की ख़ूबसूरती को बरकरार रहने में मदद मिलेगी।

एलोवेरा

चेहरे की ख़ूबसूरती बढ़ाने की बात हो, चेहरे का रंग निखारने की बात हो और एलोवेरा का नाम नहीं आए ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। रोजाना रात को सोने से पहले एलोवेरा जैल को चेहरे पर लगाएं और रात भर के लिए इसे चेहरे पर छोड़ दें। उसके बाद सुबह उठकर चेहरे को धो लें। ऐसा करने से सर्दी में चेहरे की नमी को बरकरार रहने, चेहरे की रंगत को निखारने आदि में मदद मिलती है।

दही

नहाने से पंद्रह मिनट पहले दही को अपने चेहरे पर लगाएं। और उसके बाद चेहरे को धो दें। ऐसा करने से भी सर्दियों में चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद मिलती है।

खीरा

खीरे को पीसकर उसका पेस्ट तैयार करें उसके बाद इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। चेहरे पर इस पेस्ट को पंद्रह से बीस मिनट के लिए लगे रहने दें। उसके बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो दें। ऐसा करने से भी सर्दियों में चेहरे के कालेपन को दूर कर चेहरे को निखारने में मदद मिलती है।

गुलाबजल

रोजाना रात को सोने से पहले रुई की मदद से चेहरे पर गुलाबजल लगाएं इससे चेहरे पर जमी धूल मिट्टी की परत हट जाती है। और सुबह उठकर चेहरे को धो लें ऐसा करने से चेहरे के निखार को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

शहद

शहद स्किन को कोमल बनाने के साथ स्किन को निखारने में भी मदद करता है। ऐसे में सर्दियों के मौसम में एक चम्मच शहद को सचेहरे पर लगाएं और दस से पंद्रह मिनट बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें। ऐसा करने से सर्दियों में त्वचा के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो सर्दियों में आपकी त्वचा के कालेपन को दूर कर त्वचा को निखारने में मदद करते हैं। तो यदि आप भी सर्दियों में स्किन के डल होने के कारण परेशान हैं तो आप भी इन आसान टिप्स को ट्राई कर इस परेशानी से निजात पा सकते हैं। और सर्दियों में भी दमति हुई त्वचा पा सकते हैं।

गर्भवती महिला को आँखों से धुंधला दिखाई देने के कारण और उपाय

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गर्भावस्था के समय महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की बॉडी में पेन होना, उल्टियां, सिर दर्द और चक्कर आना, पेट में दर्द, वजन बढ़ना, ब्रेस्ट पेन, आदि। साथ ही कुछ महिलाओं को आँखों से धुंधला दिखाई देने की समस्या भी हो जाती है जिसके कारण महिला को परेशानी का अनुभव अधिक हो सकता है।

लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है की हर प्रेग्नेंट महिला को यह दिक्कत हो। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में आँखों से धुंधला क्यों दिखाई देता है साथ ही इस समस्या से बचाव के लिए आप क्या कर सकते हैं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में आँखों से धुंधला दिखाई देने के कारण

प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी में आँखों से यदि धुंधला दिखाई देता है तो इस परेशानी का कोई एक कारण नहीं होता है। बल्कि ऐसे कई कारण हो सकते हैं जिसकी वजह से महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की:

हार्मोनल बदलाव: प्रेगनेंसी के समय शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं जिनका असर आँखों पर भी पड़ सकता है और महिला को यह दिक्कत हो सकती है।

हाई ब्लड प्रैशर: जिन प्रेग्नेंट महिलाओं को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या होती है उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

जेस्टेशनल शुगर: गर्भावस्था के दौरान होने वाली जेस्टेशनल शुगर के कारण आँखों से जुडी रक्त वाहिकाओं पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है जिस वजह से महिला को आँखों से धुंधला दिखाई देने की समस्या हो सकती है।

सिर दर्द व् चक्कर: जिन प्रेग्नेंट महिला को सिर में अधिक दर्द होता है चक्कर आते है उन महिलाओं को भी आँखों से धुंधला दिखाई देने की समस्या हो सकती है।

ब्लड फ्लो: गर्भावस्था के दौरान बॉडी में ब्लड फ्लो और तरल पदार्थों का निर्माण बढ़ जाता है जिस कारण आँखों की रेटिना पर दबाव बढ़ता है और महिला को आँखों से धुंधला दिखाई देने की समस्या होती है।

आँखों में सूखापन: यदि प्रेग्नेंट महिला की आँखों में नमी कम होने लगती है तो इस कारण भी प्रेग्नेंट महिला को आँखों से धुंधला दिखाई देना शुरू हो जाता है।

गर्भावस्था में आँखों से धुंधला दिखाई देने की समस्या से बचाव के टिप्स

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपको आँखों से धुंधला दिखाई देने की समस्या हो रही है। तो कुछ आसान टिप्स को ट्राई करने से आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सकती है। जैसे की:

  • बाहर जाने पर आँखों पर चश्मा पहनें।
  • ज्यादा लम्बे समय के लिए टीवी या लैपटॉप नहीं चलाएं।
  • ठन्डे पानी से आँखों को धोएं।
  • भरपूर आराम करें।
  • ऐसा आहार लें जिससे ब्लड शुगर लेवल कण्ट्रोल में रहें और आपको इस समस्या से बचे रहने में मद मिल सकें।
  • ब्लड प्रैशर चेक करवाते रहे और डॉक्टर यदि ब्लड प्रैशर से बचाव के लिए कुछ कहें तो उन सभी टिप्स को फॉलो करें।
  • डॉक्टर से पूछने के बाद आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल करें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान धुंधला दिखाई देने के कारण व् इस परेशानी से बचाव के कुछ उपचार, तो यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपको भी यह दिक्कत है तो घबराएं नहीं। क्योंकि प्रसव के बाद अपने आप ही यह समस्या ठीक हो जाती है।

पिम्पल्स के काले दाग धब्बे ऐसे हटाएँ?

खूबसूरत चेहरा हर किसी की चाहत होता है। और चेहरे पर होने वाला एक पिम्पल भी आपकी रात की नींद को उड़ा देता है। खासकर लडकियां तो अपने चेहरे का अपने पूरे शरीर से ज्यादा ख्याल रखती हैं। लेकिन कई बार चेहरे पर पिम्पल हो जाते हैं और इसका कारण स्किन का ऑयली होना, धूल मिट्टी का चेहरे पर जमाव होना, आदि हो सकते हैं। और यदि कुछ तरीको का इस्तेमाल किया जाये तो इनसे निजात भी पाया जा सकता है।

लेकिन यदि आप पिम्पल पर बार बार हाथ लगाते हैं या पिम्पल को फोड़ देते हैं तो इसके कारण वह पिम्पल चेहरे पर निशान छोड़ देते हैं। जो धीरे धीरे काले दिखाई देने लगते हैं और इसके कारण चेहरा और भी भद्दा दिखाई देने लगता है। क्या आपके चेहरे पर भी काले काले निशान हैं? यदि हाँ, तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको चेहरे पर पिम्पल के कारण होने वाले काले निशान को हटाने के कुछ उपाय बताने जा रहे हैं।

एलोवेरा जैल

स्किन से जुडी समस्याओं को दूर करने के लिए एलोवेरा जैल एक असरदार उपाय है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक चम्मच एलोवेरा जैल लें और उँगलियों की मदद से चेहरे पर लगाएं। और फिर दो से चार मिनट चेहरे पर मसाज करते हुए उसे चेहरे पर बीस से पच्चीस मिनट के लिए छोड़ दें या फिर रात को सोने से पहले चेहरे पर लगाएं और सुबह उठकर इसे धो दें।

निम्बू

चेहरे से दाग धब्बे हटाने के लिए निम्बू का इस्तेमाल करना भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक कटोरी में एक चम्मच निम्बू के रस में आधा चम्मच पानी मिलाकर डाल दें। अब इसे मिक्स करके रुई की मदद से इसे चेहरे पर लगाएं सूखने के बाद इसे दोबारा लगाएं ऐसा दो से तीन बार करें। उसके बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो दें।

शहद

चेहरे पर होने वाले काले दाग की समस्या से बचाव के लिए शहद का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद होता है।इसके इस्तेमाल के लिए आप शहद को चेहरे पर होने वाले काले दाग पर लगाएं। और पंद्रह से बीस मिनट बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें, ऐसा रोजाना करें आपको इसका असर दिखाई देगा।

कच्चा दूध

कच्चा दूध चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों के इलाज के लिए बेहतरीन विकल्प है। इसके इस्तेमाल के लिए आप दो चम्मच कच्चे दूध को कटोरी में डालें और रुई की मदद से इसे पांच से छह बार चेहरे पर लगाएं। जैसे की एक बार लगाएं, सूख जाये तो दोबारा लगाएं। उसके बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें और ऐसा रात को कर रही है तो सुबह उठकर चेहरे को धो लें।

आलू का रस

आलू का रस इस्तेमाल करने से भी चेहरे पर पिपंल के कारण होने वाले काले दाग की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप आलू को कद्दूकस करके उसका रस निकाल लें और फिर उसे रुई की मदद से चेहरे पर लगाएं। या फिर आप आलू की स्लाइस काटकर उससे चेहरे पर मसाज करें।

चन्दन पाउडर

एक कटोरी में दो चम्मच चन्दन पाउडर लें और उसके बाद उसमे दो से तीन चम्मच कच्चा दूध मिलाकर एक लेप तैयार करें। उसके बाद इस लेप को मास्क की तरह चेहरे पर लगाएं। सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें और ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।

हल्दी और मलाई

एक कटोरी में आधा चम्मच हल्दी, आधा चम्मच बेसन और मलाई डालकर एक लेप बनाएं अब इस लेप को अपने चेहरे पर लगाएं और उसके बाद चेहरे को सूखने के लिए छोड़ दें। फिर गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें हर दूसरे दिन ऐसा करें आपको इसका असर बहुत जल्दी अपने चेहरे पर दिखाई देगा।

संतरे के छिलके

संतरे के छिलकों को सुखाकर उसका पाउडर बना लें उसके बाद एक कटोरी में दो चम्मच पाउडर लें। फिर इसमें जरुरत के अनुसार गुलाबजल मिलाएं और इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं सूखने के बाद इसे धो दें। ऐसा करने से भी आपको इस परेशानी से निजात मिलता है।

खीरे का रस

खीरे को कद्दूकस करके उसका रस निकाल लें। उसके बाद इस रस को रुई की मदद से अपने चेहरे पर लगाएं और दस से पंद्रह मिनट के लिए इसे चेहरे पर छोड़ दें। उसके बाद साफ़ पानी से चेहरे को धो लें।

पपीता

पपीते के कुछ स्लाइसेस को अच्छे से पीस लें और उसके बाद इसे चेहरे पर लगाएं। चेहरे पर लगाने के बीस मिनट बाद इसे साफ़ कर दें ऐसा करने से भी आपको पिम्पल के कारण होने वाले काले दाग की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

लहसुन और प्याज

आज तक आपने लहसुन और प्याज़ का इस्तेमाल केवल खाने का जायका बढ़ाने के लिए किया है लेकिन इसका इस्तेमाल करने से चेहरे के दाग धब्बों को दूर करने में भी मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक छोटे प्याज़ का चौथा हिस्सा और दो लहसुन की कलियाँ मिलाकर उन्हें अच्छे से पीस लें। और अब इस पेस्ट को चेहरे के काले दाग धब्बों पर लगाएं। लगाने के पंद्रह से बीस मिनट बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें।

चेहरे से काले दाग धब्बे हटाने के अन्य उपाय

  • रोजाना रात को सोने से पहले चेहरे पर गुलाबजल लगाएं।
  • बेसन, कच्चा दूध, गुलाबजल को को मिक्स करके चेहरे पर लगाने से भी आपको इस समस्या से निजात मिलता है।
  • बेसन, ग्रीन टी, हल्दी को मिलाकर चेहरे पर लगाने से भी इस परेशानी से निजात मिलता है।
  • निम्बू और शहद को मिक्स करके एक पेस्ट तैयार करें और उसके बाद इसे चेहरे पर लगाएं लगाने के दस से पंद्रह मिनट बाद चेहरे को धो लें।
  • दही, बेसन, हल्दी की मिक्स करके एक लेप बनाएं और उसे डाह धब्बों पर लगाएं आपको फायदा जरूर मिलेगा।
  • चेहरे पर धूल मिट्टी का जमाव नहीं होने दें।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनसे पिम्पल के साथ पिम्पल के कारण चेहरे पर होने वाले काले निशान को हटाने में भी मदद मिलती है। साथ ही आपको इन काले निशान से बचे रहने के लिए ध्यान रखना चाहिए की यदि कभी भी चेहरे पर कोई पिम्पल हो जाये तो आप न तो उसे हाथ लगाएं और न ही उस पर खुजली करें साथ ही उसे फोड़े भी नहीं बल्कि उसे अपने आप ही ठीक होने दें।

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गर्भ में शिशु की सेहत का ध्यान ऐसे रखें?

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गर्भावस्था के समय हर महिला यही चाहती है की उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो। साथ ही उसका होने वाला बच्चे स्वस्थ, हष्ट, पुष्ट, बुद्धिमान, गोरा पैदा हो। इसके लिए गर्भावस्था के समय महिला हर काम करने से पहले, हर चीज को खाने से पहले केवल इसी बात के बारे में सोचती है की क्या जो महिला खा रही है वो बच्चे के लिए ठीक है या क्या जो महिला कर रही है उससे बच्चे को कोई नुकसान तो नहीं होगा, आदि।

और सही भी है महिला को इन्ही छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना भी चाहिए क्योंकि महिला यदि कोई लापरवाही नहीं करती है और अपना अच्छे से ध्यान रखती है तो इसका असर बच्चे पर भी अच्छा पड़ता है। और बच्चे की सेहत और स्वास्थ्य दोनों सही रहते हैं। तो आज इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिला के लिए कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं जो गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत को सही रखने में मदद करते हैं।

न्यूट्रिशन से भरपूर आहार लें

गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत को सही रखने के लिए महिला को न्यूट्रिशन जैसे की कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन, फोलेट, आदि पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए। क्योंकि पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने से गर्भवती महिला की सेहत तो सही रहती है साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए जरुरी पोषक तत्व भी शिशु तक पहुंचते है। जिससे शिशु को स्वस्थ रहने और शिशु का बेहतर विकास होने में मदद मिलती है।

खुश रहें

माँ के पेट में पल रहा शिशु बिल्कुल वैसा ही महसूस करता है जैसा की उसकी माँ महसूस करती है यानी की यदि प्रेग्नेंट महिला तनाव लेती है तो बच्चे को परेशानी होती है और यदि महिला खुश रहती है तो गर्भ में पल रहा बच्चा भी खुश रहता है। और जब गर्भ में शिशु खुश रहता है तो इससे शिशु का विकास बेहतर होने में मदद मिलती है।

गर्भ में बच्चे से बातें करें

गर्भ में बच्चे के बेहतर विकास के लिए महिला को गर्भ में पल रहे शिशु से बातें करनी चाहिए। अपने पेट पर हाथ फेरना चाहिए ताकि बच्चा अपनी माँ के स्पर्श और आवाज़ को महसूस कर सकें। यदि गर्भवती महिला ऐसा करती है तो इससे भी गर्भ में शिशु के विकास को बेहतर होने में मदद मिलती है।

नेगेटिव विचारों को मन में नहीं आने दें

यदि आप चाहती है की आपका होने वाला बच्चा शारीरिक व् मानसिक रूप से स्वस्थ रहें। तो इसके लिए महिला को अपने आप को पॉजिटिव रखना चाहिए और नेगेटिव विचारों को बिल्कुल भी अपने दिमाग में नहीं लाना चाहिए। जितना महिला प्रेगनेंसी के दौरान सकारात्मक रहती है उतना ही महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

थोड़ा व्यायाम व् योगासन भी करें

गर्भ में शिशु की सेहत को सही रखने के लिए प्रेग्नेंट महिला को दिन में थोड़ी देर व्यायाम व् योगासन भी करना चाहिए। क्योंकि व्यायाम व् योगासन करने से शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है, महिला एक्टिव रहती है, तनाव दूर होता है, आदि। जिससे बच्चे का विकास अच्छे से होता है।

किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करें

गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत अच्छी रहे और उसका विकास अच्छे से हो इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को किसी भी तरह की लापरवाही करने से बचना चाहिए। जैसे की महिला को गर्म पानी से नहीं नहाना चाहिए, ज्यादा गर्म पानी नहीं पीना चाहिए, यात्रा नहीं करनी चाहिए, भारी सामान नहीं उठाना चाहिए, शरीर पर ज्यादा जोर नहीं डालना चाहिए, पेट पर बल पड़ने वाले हर काम को करने से बचना चाहिए, आदि। यदि महिला इन सभी बातों का ध्यान रखती है तो इससे गर्भ में शिशु की सेहत को भी सही रहने में मदद मिलती है।

अपने वजन को नियंत्रित रखें

प्रेगनेंसी के समय गर्भवती महिला को अपने वजन को न तो जरुरत से ज्यादा बढ़ने देना चाहिए और न ही कम होने देना चाहिए। क्योंकि दोनों के कारण ही बच्चे पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। ऐसे में यदि महिला अपने वजन को नियंत्रित रखती है तो इससे गर्भ में शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

बिमारियों से बचे रहें

गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए जरुरी है की महिला बिमारियों से बची रहें, संक्रमण से बची रहें। और इसके लिए जरुरी है की महिला की इम्युनिटी मजबूत हो साथ ही महिला संक्रमित लोगो से दूर रहें। ऐसे में महिला को ऐसी डाइट लेनी चाहिए जिससे इम्युनिटी मजबूत हो। और इस डाइट का फायदा माँ और बच्चे दोनों को मिलता है जिससे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

समय पर जांच करवाएं

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सही समय पर अपना टीकाकरण करवाने के साथ जांच भी करवाते रहना चाहिए। ताकि महिला या बच्चे को कोई दिक्कत नहीं हो साथ ही यदि कोई दिक्कत हो भी तो उसका साथ के साथ ही ट्रीटमेंट हो जाये। और बना तो महिला को कोई परेशानी हो और गर्भ में शिशु भी स्वस्थ रहें।

गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत सही रखने के लिए अन्य टिप्स

  • कैफीन युक्त पदार्थ जैसे की चाय, कॉफ़ी, चॉकलेट आदि का सेवन कम कम से कम मात्रा में करें।
  • अल्कोहल का सेवन नहीं करें।
  • धूम्रपान के सेवन से बचें।
  • शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें, और पानी का भरपूर सेवन करें क्योंकि इससे एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा सही रहती है जिससे गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।
  • भरपूर आराम करें।
  • बाहर का आहार खाने से बचें।
  • पेट के भार नहीं सोएं।
  • किसी भी तरह की दिक्कत होने पर सम्बन्ध बनाने से बचें।
  • डॉक्टर से बिना पूछें किसी भी तरह की दवाई का सेवन नहीं करें।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत को सही रखने में मदद करते हैं और शिशु के बेहतर मानसिक व् शारीरिक विकास में मदद करते हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं या माँ बनने की प्लानिंग कर रही हैं तो आप भी इन सभी बातों का ध्यान रखें ताकि आपका होने वाला शिशु भी सेहतमंद और स्वस्थ पैदा हो।

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डिलीवरी के बाद बड़ी उम्र का दिखने से ऐसे बचाएं अपने आप को?

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माँ बनना महिला की जिंदगी का सबसे बेहतरीन लम्हा होता है लेकिन डिलीवरी के बाद भी महिला कुछ चीजों को लेकर परेशान हो जाती है। खासकर अपनी ख़ूबसूरती और अपने फिगर को लेकर महिला ज्यादा परेशान हो जाती है। क्योंकि डिलीवरी के बाद कुछ महिलाओं को स्किन से जुडी समस्या जैसे की स्किन पर दाग धब्बे झाइयां आदि हो जाते हैं, वजन को लेकर महिलाएं परेशान हो जाती है, ब्रेस्ट साइज को लेकर महिलाएं चिंतित हो जाती है आदि।

और इन सभी के कारण महिलाएं अपनी उम्र से बड़ी दिखने लग जाती है और कुछ महिलाएं तो इस बात को लेकर तनाव में भी आ जाती है। लेकिन ऐसा होना बहुत ही आम होता है, और डिलीवरी के बाद महिलाएं यदि अपना अच्छे से ध्यान रखती है तो महिला आसानी से इस परेशानी से निजात पा सकती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको डिलीवरी के बाद बड़ी उम्र का दिखने से आप अपने आप को कैसे बचा सकते हैं उस बारे में बताने जा रहे हैं।

खान पान का ध्यान रखें

बच्चे के जन्म के बाद महिला के बढे हुए वजन के कारण महिलाएं परेशान हो जाती है और उन्हें लगता है की यदि वो कुछ भी खाएंगी तो और मोटी हो जाएँगी, जिससे वो उम्र में और ज्यादा बड़ी दिखने लगेंगी। जबकि ऐसा नहीं है बल्कि डिलीवरी के बाद महिला को अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

क्योंकि पोषक तत्वों से भरपूर डाइट महिला के शरीर में आई कमजोरी को दूर करती है, पूरे शरीर को पोषण देती है, जिससे महिला को जल्द से जल्द फिर होने में मदद मिलती है। साथ ही डिलीवरी के बाद बढे हुए वजन को कण्ट्रोल करने के लिए महिला को फाइबर को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए क्योंकि इससे मेटाबोलिज्म बेहतर होता है जिससे वजन नियंत्रित रहता है।

ब्रेस्टफीडिंग है जरुरी

प्रेगनेंसी के दौरान स्तनों में दूध का उत्पादन होने के कारण महिला के ब्रेस्ट का आकर थोड़ा बढ़ जाता है और बच्चे के जन्म के बाद यह थोड़ा और बढ़ सकता है। जिससे महिला सोचती हैं की अगर वो बेबी को दूध पिलायेंगी तो स्तन का साइज और बढ़ जायेगा। जबकि ऐसा नहीं है ब्रेस्टफीडिंग करवाने से बच्चे को फायदा मिलने के साथ महिला को भी फायदा मिलता है।

क्योंकि बच्चा जब दूध पीने के लिए जोर लगाता है तो ब्रेस्ट के उत्तकों के फैलाव को सही करने में मदद मिलती है जिससे ब्रेस्ट शेप को सही रहने में मदद मिलती है। और जब बच्चा दूध पीना छोड़ता है तो धीरे धीरे आपकी ब्रेस्ट शेप में आने लगती है।

सही पहने ब्रा

बहुत सी महिलाएं डिलीवरी के बाद अपने साइज से बड़ी ब्रा पहननी शुरू कर देती है ताकि महिला को स्तनपान करवाने में कोई परेशानी नहीं हो। जो की गलत बात होती है क्योंकि यही कारण होता है जिससे डिलीवरी के बाद महिला का ब्रेस्ट साइज बढ़ जाता है ऐसे में ब्रेस्ट साइज को बढ़ने से रोकने के लिए डिलीवरी के बाद महिला को अपने साइज की ब्रा पहननी चाहिए।

स्किन का रखें ध्यान

बच्चे के जन्म के बाद महिला को झुर्रियां, स्किन का काला पड़ना, पिम्पल्स होना जैसी परेशानियां हो सकती है। और चेहरे की ख़ूबसूरती का कम होना आपकी उम्र को सबसे पहले ज्यादा दिखाता है ऐसे में महिला को डिलीवरी के बाद अपनी स्किन का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। और इसके लिए महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए, पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए, एलोवेरा जैल गुलाब जल कच्चा दूध आदि को चेहरे पर रोजाना लगाना चाहिए, आदि। यदि डिलीवरी के बाद महिला चेहरे के लिए इन टिप्स को ट्राई करती है तो इससे चेहरे की ख़ूबसूरती बनी रहती है और महिला को बच्चे के जन्म के बाद भी अपनी ख़ूबसूरती से बड़ी उम्र की नहीं दिखाई देती है।

आराम करें भरपूर

डिलीवरी के बाद फिट रहने के लिए और जल्दी से जल्दी रिकवर करने के लिए महिला का भरपूर आराम करना जरुरी होता है।क्योंकि आराम करने से महिला को रिलैक्स व् फ्रैश महसूस होता है साथ ही शरीर के सभी अंग सुचारु रूप से काम भी करते हैं। जिससे महिला एक्टिव रहती है। और महिला जितना एक्टिव रहती है उतना ही महिला को जवान रहने में मदद मिलती है।

तनाव नहीं लें

बच्चे के जन्म के बाद यदि महिला तनाव ले लेती है तो इस कारण महिला की शारीरिक व् मानसिक परेशानियां तो बढ़ ही जाती हैं। साथ ही महिला उम्र से पहले ही बूढी भी हो जाती है। इसीलिए डिलीवरी के बाद महिला को अपने बच्चे के साथ पूरा समय एन्जॉय करना चाहिए और खुश रहना चाहिए।

थोड़ा बहुत व्यायाम भी करें

बच्चे के होने के कम से कम एक महीने तक महिला को व्यायाम नहीं करना चाहिए क्योंकि उस समय महिला का शरीर काफी कमजोर होता है। लेकिन उसके बाद महिला को धीरे धीरे करके थोड़ा व्यायाम करना शुरू करना चाहिए। क्योंकि व्यायाम करने से महिला शरीर में जमे फैट को कम करने में मदद मिलती है साथ ही व्यायाम करने से बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से महिला अपने आप को डिलीवरी के बाद बड़ी उम्र का दिखने से बच सकती है साथ ही अपनी ख़ूबसूरती को वापिस पा सकती है। लेकिन इसके लिए जरुरी है की महिला थोड़ा धैर्य रखे क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान आये नौ महीने के बदलाव को सही होने में थोड़ा समय लगता है। और शरीर धीरे धीरे अपनी शेप में आता है।