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प्रेगनेंसी में हर ट्राइमेस्टर का डाइट चार्ट

गर्भावस्था के दौरान खान पान का बहुत अधिक महत्व होता है क्योंकि बेहतर खान पान के जरिये ही गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे को पोषक तत्व मिलते हैं। जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को फिट रखने और प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों को कम करने के साथ गर्भ में बच्चे के बेहतर शारीरिक विकास में भी मदद करते हैं।

लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है की गर्भवती महिला किसी भी चीज का सेवन कर सकती है बल्कि गर्भावस्था के दौरान क्या खाना बेहतर होता है और क्या नहीं, इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी होता है। साथ ही ऐसा नहीं नहीं होता है की पूरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला को एक ही तरह का आहार खाना होता है।

बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान हर ट्राइमेस्टर में महिला को अपनी डाइट में थोड़ा थोड़ा बदलाव करना जरुरी होता है ताकि गर्भ में बच्चे के विकास में कोई कमी नहीं आये और प्रेग्नेंट महिला भी स्वस्थ रह सकें। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के हर ट्राइमेस्टर में महिला की डाइट क्या होनी चाहिए उस बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था की पहली तिमाही में क्या खाएं

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में बॉडी में हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से होते हैं। साथ ही महिला बहुत ज्यादा कमजोरी, थकान का अनुभव भी करती है। ऐसे में प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को ऐसी डाइट लेनी चाहिए जिससे महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिल सकें। जैसे की:

डेयरी प्रोडक्ट्स

महिला को डेयरी प्रोडक्ट्स खासकर दूध व् दही का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि दही और दूध कैल्शियम और प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं। जो महिला की हड्डियों को मजबूत रखने और मांसपशियों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। जिससे प्रेग्नेंट महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

सब्जियां व् फल

सब्जियों व् फलों का सेवन भी गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में भरपूर करना चाहिए। क्योंकि फलों और सब्जियों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।

दालें

दिन में एक समय की डाइट में महिला को एक या दो कटोरी दाल का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि दाल का सेवन करने से महिला को प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, फाइबर, पोटैशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं। जो गर्भवती महिला के लिए बहुत फायदेमंद होते है।

साबुत अनाज

साबुत अनाज जैसे गेहूं, ओट, मक्‍का, ज्‍चार, आदि का सेवन भी प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि इससे गर्भवती महिला को जरूरी विटमिन मिलते हैं जो महिला को स्वस्थ रखने के साथ बच्‍चे की गर्भनाल के विकास में योगदान देते हैं।

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में क्या खाएं

वो सभी चीजें गर्भावस्था की पहली तिमाही में महिला खाती है उन सभी चीजों का सेवन करने के साथ महिला को कुछ अन्य चीजों को भी प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। जैसे की:

अंडा

अंडा गर्भवती महिला के साथ गर्भ में शिशु के विकास के लिए भी फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। लेकिन ध्यान रखें की कच्चा या अधपका अंडा नहीं खाएं।

नॉन वेज

दूसरी तिमाही में में चाहे तो नॉन वेज का सेवन भी कर सकती है। क्योंकि नॉन वेज का सेवन करने से महिला को दुगुनी मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं। लेकिन यदि आप नॉन वेज नहीं खाती है तो परेशान न हो आप अपनी वेज डाइट से भी अपने आप को फिट रख सकती है।

ड्राई फ्रूट्स

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में महिला को थोड़े बहुत ड्राई फ्रूट्स का सेवन भी करना चाहिए। क्योंकि ड्राई फ्रूट्स में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन, व् अन्य मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

आयरन व् फोलेट युक्त डाइट

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में महिला को उन खाद्य पदार्थों का भरपूर सेवन करना चाहिए जिसमे आयरन व् फोलेट भरपूर मात्रा में मौजूद हो। क्योंकि आयरन युक्त डाइट से शरीर में खून की कमी नहीं होती है और फोलेट युक्त डाइट गर्भ में बच्चे के विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। और इसके लिए महिला लो हरी सब्जियां, अनार, सेब, ड्राई फ्रूट्स, गाजर, चुकंदर आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में क्या खाएं

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में बच्चे का विकास तेजी से होता है और वजन बढ़ने के कारण महिला की शारीरिक परेशानियां भी बढ़ जाती है। ऐसे में महिला को ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिससे बच्चे का विकास अच्छे हो, महिला के शरीर को प्रसव के लिए तैयार होने में मदद मिल सकें साथ ही महिला की शारीरिक परेशानियों को कम करने में मदद मिल सकें। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में प्रेग्नेंट महिला क्या खाएं।

फाइबर युक्त आहार

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में महिला को गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट सम्बन्धी परेशानियां अधिक हो सकती है। ऐसे में महिला को ऐसी डाइट लेनी चाहिए जिसमे फाइबर अधिक हो जिससे महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके। और फाइबर के लिए महिला केला, सेब, संतरा, गाजर, ब्रोकली, दालें, हरी सब्जियों आदि का भरपूर सेवन कर सकती है।

घी

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में महिला को घी का सेवन भी शुरू कर देना चाहिए क्योंकि इससे बच्चे का विकास अच्छे से होता है, महिला के शरीर को पोषण मिलने के साथ महिला के शरीर को प्रसव के लिए तैयार होने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रखें की यदि आपका वजन ज्यादा है तो घी का सेवन अधिक नहीं करें।

दालें व् फलियां

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में महिला को दालों व् फलियों का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि इनमे प्रोटीन और फाइबर की अधिकता होती है जो महिला को स्वस्थ रखने में मदद करने के साथ महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियों से भी प्रेगनेंसी के नौवें महीने में बचाव करने में मदद करती है।

गर्भावस्था में क्या नहीं खाएं

  • गर्भवती महिला को कच्चा दूध नहीं पीना चाहिए।
  • बिना धुले फल व् सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • कच्चे अंडे, कच्चा नॉन वेज नहीं खाना चाहिए।
  • डिब्बाबंद जूस व् खाने से दूरी रखनी चाहिए।
  • जंक फ़ूड का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • मर्करी युक्त मछली नहीं खानी चाहिए।
  • जिन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से गर्भवती महिला को एलर्जी होती है या जिन्हे पचाने में प्रेग्नेंट महिला को दिक्कत होती है उन चीजों का सेवन भी गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए।
  • ठंडी चीजों का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।
  • बासी खाने का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • जरुरत से ज्यादा मीठे व् नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • कैफीन का सेवन, नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं प्रेग्नेंट महिला के लिए प्रेगनेंसी में खान पान से जुड़े कुछ टिप्स, यदि प्रेग्नेंट महिला इन सभी बातों का ध्यान रखती है तो इससे माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

अक्टूबर महीने में प्रेग्नेंट महिला के लिए बच कर रहना क्यों जरुरी होता है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है। क्योंकि जितनी ज्यादा महिला सावधानी बरतती है उतना ही ज्यादा प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। और यह सावधानी महिला को केवल खान पान में ही नहीं बल्कि हर छोटी छोटी चीज में रखनी होती है। जैसे की शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए दिन में आठ से दस गिलास पानी जरूर पीएं,

पेट पर दबाव न पड़े इसके लिए ज्यादा टाइट कपडे न पहने, कमर दर्द पैर फिसलने जैसी दिक्कत न हो इसके लिए चप्पल का ध्यान रखें, ज्यादा भीड़भाड़ व् शोर वाली जगह पर न जाएँ जिससे शिशु या महिला को कोई दिक्कत हो, ट्रैवेलिंग नहीं करें, उल्टा होकर नहीं सोएं, बदलते मौसम के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखें, आदि। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी टिप्स के बारे में बताने का रहे हैं जो प्रेग्नेंट महिला को यह जानने में मदद करते हैं की अक्टूबर महीने में गर्भवती महिला को बचकर क्यों रहना चाहिए।

बदलते मौसम के साथ हो सकती है दिक्कत

अक्टूबर का महीना वो महीना होता है जब गर्मी से ठंडा मौसम होने की शुरुआत होती है। ऐसे में यदि बदलते मौसम के साथ यदि थोड़ी भी लापरवाही बरती जाये तो इसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है। क्योंकि ऐसे मौसम में ठण्ड के कारण होने वाली परेशानियां जैसे की खांसी, जुखाम, गले में इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।

इन्फेक्शन का रहता है डर

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। ऐसे में जब मौसम बदल रहा हो तो प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी कमजोर होने के कारण महिला को इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।

शरीर के तापमान में आता है बदलाव

बदलते मौसम के साथ यदि सावधानी न बरती जाएँ तो इस कारण गर्भवती महिला के शरीर के तापमान में बदलाव आ सकता है। और गर्भवती महिला के शरीर के तापमान में बदलाव होने के कारण महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

गलत आदतों के कारण हो सकती है दिक्कत

अक्टूबर के महीने से पहले यदि आपको ठंडा पानी पीने की आदत होती है तो अक्टूबर महीने में ठंडा मौसम होने के कारण आपको अपनी इस आदत के कारण परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए अक्टूबर महीना लगने के बाद जरुरी होता है की महिला बच कर रहे ताकि महिला की गलत आदतों के कारण महिला को किसी तरह की दिक्कत न हो।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को अक्टूबर महीने में बच कर रहना जरुरी होता है। ताकि प्रेग्नेंट महिला और बच्चे को हर तरह की शारीरिक समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके।

Why is it important for a pregnant woman to survive in October

जो प्रेग्नेंट महिलाएं नॉन वेज नहीं खाती हैं वो यह चीजें जरूर खाएं

ज्यादातर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान वो चीजें खाना सबसे ज्यादा पसंद करती है जिससे माँ और बच्चे दोनों को फायदे मिलें। कुछ गर्भवती महिलाएं वेज खाना ज्यादा पसंद करती है तो कुछ महिलाएं नॉन वेज खाना ज्यादा पसंद करती है। और गर्भावस्था के दौरान महिलाएं वेज और नॉन वेज दोनों ही आहार ले सकती है।

लेकिन यदि कोई महिला नॉन वेज नहीं खाती है तो नॉन वेज से मिलने वाले पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए महिला अपनी डाइट में वेज आहार को शामिल कर सकती है। तो आज इस आर्टिकल हम आपको जो प्रेग्नेंट महिलाएं नॉन वेज नहीं खाती हैं उन्हें अपनी डाइट में किन किन चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

सोयाबीन

सोयाबीन प्रोटीन, आयरन, ओमेगा 3 फैटी एसिड, फाइबर, विटामिन के, मैग्नीशियम, फोलेट, जिंक व् अन्य पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होता है। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ बच्चे के बेहतर विकास में भी अहम रोल अदा करते हैं। जैसे की इससे शिशु को जन्मदोष से बचाव के साथ बच्चे के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती हैं साथ ही गर्भवती महिला को कोलेस्ट्रॉल, घबराहट, पाचन से जुडी परेशानियों, मसल्स से जुडी परेशानियों आदि से बचाने में मदद मिलती हैं।

पनीर

पनीर में कैल्शियम, प्रोटीन, ओमेगा 3 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। कैल्शियम महिला की हड्डियों को मजबूत करने और गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में मदद करता है। प्रोटीन महिला की मसल्स को स्ट्रांग करने और बच्चे की मांसपेशियों के बेहतर विकास में मदद करता है, ओमेगा 3 फैटी एसिड बच्चे के दिमाग के विकास के लिए अच्छा होता है, आदि। साथ ही गर्भावस्था के दौरान महिला को अतिरिक्त कैलोरी की जरुरत होती है जो पनीर से पूरी हो सकती है।

ड्राई फ्रूट्स

कैल्शियम, आयरन, फाइबर, प्रोटीन, पोटैशियम, जैसे पोषक तत्वों से भरपूर ड्राई फ्रूट्स का सेवन भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि ड्राई फ्रूट्स में मौजूद पोषक तत्व महिला व् बच्चे के लिए बहुत जरुरी होते हैं।

दालें

दालें प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत होती है जो गर्भवती महिला की मांसपेशियों को मजबूत करने और बच्चे की कोशिकाओं के बेहतर विकास में मदद करती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला की परेशानियां कम होती है और बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

दही

दही भी प्रोटीन, कैल्शियम आदि का बेहतरीन स्त्रोत होती है जो माँ व् गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होती है। इसीलिए जो महिलाएं नॉन वेज नहीं खाती है उन्हें दिन में कम से कम एक कटोरी दही का सेवन रोजाना करना चाहिए।

सेब, अनार जैसे फल

सेब, अनार, अमरुद, जैसे फलों का सेवन भी उन गर्भवती महिलाओं को भरपूर करना चाहिए जो नॉन वेज का सेवन नहीं करती है। क्योंकि फलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

हरी सब्जियां

हरी सब्जियां भी पोषक तत्वों की खान होती है इसीलिए हरी सब्जियों का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को भरपूर करना चाहिए। हरी सब्जियों के अलावा गाजर, चुकन्दर, टमाटर, गोभी, आदि का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनका सेवन उन गर्भवती महिलाओं को भरपूर करना चाहिए जो नॉन वेज का सेवन नहीं करती हैं। क्योंकि इन सभी चीजों में वो पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो नॉन वेज का सेवन करने से माँ व् बच्चे को मिलते हैं।

Pregnant women who do not eat non-veg must eat these things

ऐसे रहें प्रेगनेंसी में खुश

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों व् शारीरिक बदलाव का सामना करना पड़ता है। और कुछ महिलाएं तो मानसिक रूप से भी इस समय परेशान रहती है। लेकिन यदि महिला पूरी प्रेगनेंसी में इन परेशानियों से निजात पाने की कोशिश करने की बजाय हमेशा नेगेटिव बातों के बारे में ही सोचती है तो ऐसा करने से महिला की प्रेगनेंसी के दौरान परेशानियां कम नहीं होती है बल्कि बढ़ जाती है। ऐसे में महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के लिए अपने स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

और स्वास्थ्य को सही रखने के लिए महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखने के साथ खुश भी रहना चाहिए। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला जितना खुश रहती है उतना ही गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से होता है, महिला को मानसिक रूप से फ्रेश रहने में मदद मिलती है, शारीरिक रूप से होने वाली परेशानियों को कम करने में भी मदद मिलती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कैसे खुश रहना चाहिए उस बारे में बताने जा रहे हैं।

अकेली न रहें

प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादातर उन महिलाओं को परेशानी होती है जो महिलाएं अकेली रहती हैं और उनकी पहली प्रेगनेंसी होती है। पहली प्रेगनेंसी होने के कारण शरीर में हो रहे बदलाव को समझने में महिला को दिक्कत होती है और महिला तनाव में आ जाती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहने के लिए सबसे जरुरी है की आप अपने परिवार के साथ रहें ताकि आपको प्रेगनेंसी में होने वाले बदलाव को समझने में आसानी हो सकें।

गर्भावस्था से जुडी जानकारी लें

माँ बनना महिला के लिए इतना आसान नहीं होता है क्योंकि पूरे नौ महीने महिला बहुत से बदलाव से गुजरती है, बहुत सी परेशानियों का सामना करती है। लेकिन महिला चाहे तो इन परेशानियों को कम करती सकती है और इसके लिए जरुरी होता है की महिला गर्भावस्था से जुडी जानकारी इक्कठी करें ताकि प्रेगनेंसी को समझने में महिला को आसानी हो। और जितना महिला प्रेगनेंसी के लक्षणों को समझती है उतना ही महिला की परेशानी कम होती है और प्रेगनेंसी में महिला को खुश रहने में मदद मिलती है।

खाएं पीएं और खुश रहें

गर्भावस्था के दौरान जीभ के स्वाद में बदलाव आने की वजह से, भूख में कमी के कारण महिला की खाने की इच्छा में कमी आती है। जिस वजह से शारीरिक परेशानियां बढ़ती है और शारीरिक परेशानियों के बढ़ने के कारण महिला तनाव में आ जाती है। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान खुश रहने के लिए महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। यदि महिला की खाने की इच्छा कम होती है तो थोड़ा थोड़ा करके खाएं लेकिन खाएं, या फिर ऐसी चीजें बनाएं जो हेल्दी होने के साथ महिला की भूख में बढ़ोतरी करें।

वजन बढ़ने के कारण न हो परेशान

गर्भावस्था के पूरे नौ महीने लगातार महिला के वजन में बढ़ोतरी होती है और वजन बढ़ने के कारण महिलाएं ऐसा सोच सकती है। की उनकी सुंदरता में कमी आ गई है जिस वजह से महिला तनाव में आ जाती है। जबकि यदि महिला प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहना चाहती है तो महिला को अपनी बढ़ती हुई बेली को एन्जॉय करना चाहिए और इसे लेकर बिल्कुल भी घबराना नहीं चाहिए।

योगासन व् मैडिटेशन

गर्भावस्था के दौरान खुश रहने के लिए महिला को थोड़ी देर योगासन, मैडिटेशन, व्यायाम आदि करना चाहिए। ऐसा करने से महिला को मानसिक रूप से रिलैक्स महसूस होता है जिससे महिला को खुश रहने में मदद मिलती है।

बुक्स पढ़ें

यदि प्रेग्नेंट महिला को बुक रीड करने का शौक है तो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अच्छी अच्छी किताबे पढ़नी चाहिए। क्योंकि किताबें पढ़ने से भी महिला का दिमाग रिलैक्स होता है जिससे प्रेग्नेंट महिला को खुश रहने में मदद मिलती है।

फोटोशूट करवाएं

प्रेगनेंसी के हर लम्हे को यादगार बनाने के लिए और खुश रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला को अपना फोटोशूट करवाना चाहिए। इससे आपको अपनी प्रेगनेंसी की यादों को समेट कर रखने में मदद मिलती है।

संगीत सुनें

प्रेगनेंसी में खुश रहने के लिए दिन में थोड़ी देर महिला को मधुर संगीत सुनना चाहिए इससे महिला को रिलैक्स फील होता है और मानसिक रूप से महिला फ्रेश महसूस करती है। जिससे महिला को एक्टिव और खुश रहने में मदद मिलती है।

नेगेटिविटी से दूर रहें

गर्भावस्था के दौरान हर कोई आपको प्रेगनेंसी में क्या करें क्या नहीं करें इससे जुडी राय देगा। साथ ही कोई आपसे प्रेगनेंसी के अच्छे एक्सपीरियंस शेयर करेगा तो कोई नेगेटिव एक्सपीरियंस भी शेयर करेगा। ऐसे में आपको प्रेगनेंसी के दौरान नेगेटिव बातों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना है और पॉजिटिव रहना है। क्योंकि जितना प्रेग्नेंट महिला पॉजिटिव रहती है। उतना ही ज्यादा महिला को खुश रहने में मदद मिलती है।

डायरी में लिखें

यदि प्रेग्नेंट महिला को लिखने का शौक है तो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान लिखना चाहिए जैसे की महिला को कैसा महसूस हो रहा है, महिला को क्या क्या अच्छा लग रहा है, अपने शिशु के बारे में लिखें, आदि। ऐसा करने से भी गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहने में मदद मिलती है।

अपने शिशु से बातें करें

गर्भ में बच्चे के बेहतर विकास के लिए और प्रेगनेंसी में खुश रहने के लिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपने बच्चे से बात करनी चाहिए।

सम्बन्ध बनाएं

यदि आपको प्रेगनेंसी में कोई समस्या नहीं है और आपका सम्बन्ध बनाने का मन करता है तो प्रेगनेंसी के दौरान अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध जरूर बनाएं। क्योंकि प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से बॉडी में जो हॉर्मोन रिलीज़ होते हैं वो आपको प्रेगनेंसी के दौरान खुश रखने में मदद करते हैं।

मसाज

गर्भावस्था के दौरान पेट को छोड़कर बॉडी की, सिर की मसाज करवाएं। ऐसा करने से गर्भवती महिला को आराम महसूस होता है जिससे प्रेग्नेंट महिला को खुश रहने में मदद मिलती है।

भरपूर आराम करें

खुश रहने के लिए गर्भवती महिला को भरपूर आराम करना चाहिए। क्योंकि आराम करने से महिला शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी रिलैक्स महसूस करती है। जिससे महिला को खुश रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान रखने से गर्भवती महिला को खुश रहने में मदद मिलती है। यदि आप भी माँ बनने वाले है तो आपको भी इन टिप्स का ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी में आपको खुश रहने और अपनी प्रेगनेंसी को अच्छे से एन्जॉय करने में मदद मिल सके।

Tips to be Happy in Pregnancy

स्वस्थ प्रेगनेंसी के लक्षण

प्रेगनेंसी की न्यूज़ महिला के लिए वो पल होता है जब उसकी जिंदगी पूरी तरह से पलट जाती है। क्योंकि यह वो पल होता है जब महिला अपने से ज्यादा अपने गर्भ में पल रहे शिशु के बारे में सोच रही होती है। और गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह से अपनी माँ पर निर्भर करता है। यदि गर्भावस्था के दौरान महिला अपने अच्छे से ध्यान रखती है तो इससे महिला को प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

जबकि यदि महिला अपनी अच्छे से केयर नहीं करती है तो इसका नुकसान माँ के साथ साथ बच्चे को भी होता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे लक्षण बताने जा रहे हैं जो यह बताते हैं की आपकी प्रेगनेंसी स्वस्थ है।

ब्लीडिंग की समस्या नहीं होना

गर्भावस्था की पहली तिमाही में यदि आपको ब्लीडिंग, स्पॉटिंग जैसी परेशानी नहीं होती है तो इसका मतलब होता है की आप स्वस्थ हैं और गर्भ में आपका बच्चे भी सुरक्षित है। और यह लक्षण स्वस्थ प्रेगनेंसी की और इशारा करता है।

इन्फेक्शन की समस्या नहीं होना

गर्भावस्था के दौरान महिला की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है जिस वजह से महिला को इन्फेक्शन, फ्लू आदि होने का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन यदि गर्भवती महिला को ऐसी कोई परेशानी नहीं होती है तो इसका मतलब होता है की महिला की प्रेगनेंसी बहुत अच्छी चल रही है।

खून की कमी

गर्भावस्था के दौरान शरीर में अतिरिक्त खून की जरुरत होती है जिसके कारण अधिकतर महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान खून की कमी की समस्या से परेशान होती है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी नहीं होती है तो इसका मतलब होता है की महिला की प्रेगनेंसी स्वस्थ है।

पोषक तत्वों की कमी

गर्भावस्था के दौरान महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में यदि आप अच्छे से अपनी डाइट ले रही हैं और शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं है। तो यह लक्षण भी इस बात की और इशारा करता है की आपकी प्रेगनेंसी स्वस्थ है।

गर्भ में शिशु को कोई समस्या नहीं होना

गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह की परेशानी का होना बहुत बड़ी समस्या होती है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे की हलचल ठीक होती है, बच्चे का वजन सही होता है, बच्चे के अंगो का विकास अच्छे से हो रहा होता है, तो इसका मतलब होता है की गर्भ में शिशु स्वस्थ है और आपकी प्रेगनेंसी भी स्वस्थ है

प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानियों का कम होना

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लेकिन यदि आपकी प्रेगनेंसी में ऐसा नहीं है और आपको ज्यादा शारीरिक परेशानियां नहीं हो रही है। तो इसका मतलब यह होता है की आपकी गर्भावस्था सही चल रही है और आपको इसी तरह अपने ध्यान रखना है ताकि आपको और आपके बच्चे को किसी भी तरह की दिक्कत न हो।

वजन सामान्य तरीके से बढ़ना

यदि गर्भवती महिला का वजन न तो जरुरत से ज्यादा होता है और न ही जरुरत से कम होता है तो यह भी गर्भवस्था के स्वस्थ होने के लक्षण होता है।

रिस्क नहीं होना

कुछ केस में गर्भवस्था के दौरान बहुत से रिस्क होते हैं लेकिन यदि ऐसा आपके नहीं है तो इसका मतलब यह हैं की आपकी गर्भावस्था स्वस्थ है।

सफ़ेद पानी की समास्या नहीं होना

बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद पानी अधिक निकलने की समस्या से परेशान होती है जिसके कारण महिला को इन्फेक्शन जैसी परेशानी का खतरा भी अधिक होता है। यदि आपको यह परेशानी नहीं हो रही है तो आपकी प्रेगनेंसी स्वस्थ है।

स्वस्थ प्रेगनेंसी के लिए महिला इन बातों का ध्यान रखें

  • प्रेगनेंसी की शुरुआत होते ही डॉक्टर से मिलें, अपनी सभी जांच करवाएं और ट्रीटमेंट चालू करें।
  • अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखें भरपूर पोषक तत्वों से युक्त आहार का सेवन करें।
  • तरल पदार्थों का सेवन भरपूर करें।
  • साफ़ सफाई का खास ध्यान रखें।
  • योगासन, मैडिटेशन जरूर करें।
  • शरीर में खून की कमी नहीं होने दें।
  • तनाव नहीं लें जितना हो सके खुश रहें।
  • कैफीन, नशीले पदार्थों के सेवन से अधिक बचें।
  • भरपूर आराम करें।
  • कोई भी परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  • गर्भावस्था के दौरान ऐसा कोई भी काम नहीं करें जिससे माँ या बच्चे दोनों को किसी भी तरह की परेशानी हो।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो आपको गर्भावस्था में स्वस्थ रहने में मदद करते हैं साथ ही कुछ लक्षण जो यह बताते हैं की आप प्रेगनेंसी में स्वस्थ हैं या नहीं। यदि आप भी गर्भवती हैं तो आपको भी इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Symptoms of healthy Pregnancy

नवरात्रि करना प्रेग्नेंट महिला के लिए सही रहेगा या नहीं?

नवरात्रि के व्रत का सभी लोगो के लिए बहुत ज्यादा महत्व होता है और ज्यादातर लोग नवरात्रि व्रत रखते भी हैं। साथ ही नवरात्रि किसी त्यौहार से कम नहीं होती है और यह त्यौहार एक या दो दिन के लिए नहीं होता है बल्कि नौ दिन तक लगातार इस त्यौहार को मनाया जाता है। और कुछ लोग पूरे नौ दिन तक माता रानी के नाम के व्रत भी रखते हैं। गर्भावस्था के दौरान भी गर्भवती महिलाओं की नवरात्रि व्रत रखने की इच्छा हो सकती है।

लेकिन व्रत रखने से पहले प्रेगनेंसी के दौरान यह जानना बहुत जरुरी होता है की गर्भवती महिलाओं को व्रत रखने भी चाहिए या नहीं? आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में नवरात्रि व्रत रखना चाहिए या नहीं इसी बारे में बताने जा रहे हैं। लेकिन उससे पहले यह जानते हैं की नवरात्रि व्रत किस किस तरह से रखा जाता है और गर्भवती महिला पर उसका क्या असर पड़ता है।

फ्रूट्स के साथ व्रत रखना

कुछ महिलाएं केवल फलों का सेवन करके ही व्रत रखती है। और फल स्वास्थ्य के लिए अच्छे भी होते हैं क्योंकि फलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। साथ ही फलों में प्राकृतिक रूप से मीठा भी मौजूद होता है। ऐसे में जितनी जरुरत हो उतना फलों का सेवन करने से गर्भवती महिला को उनका फायदा भी मिलता है। लेकिन यदि सारा दिन महिला केवल फल की खाती है और जूस ही पीती है तो ऐसा करने से ब्लड में शुगर लेवल बढ़ने का खतरा रहता है।

जिससे प्रेग्नेंट महिला को जेस्टेशनल डाइबिटीज़ होने का खतरा होता है। साथ ही सुबह या दोपहर में खाएं फलों को पचाना आसान होता है लेकिन रात के खाने में फलों का सेवन करने से गर्भवती महिला को उन्हें हज़म करने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में नौ दिनों तक केवल फलों का सेवन प्रेगनेंसी में परेशानियों को बढ़ा सकता है।

तला भुना हो जाता है ज्यादा

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अधिक तला भुना खाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी, वजन बढ़ने जैसी परेशानी होती है। और व्रत में व्रत का खाना तला हुआ होता है, चिप्स जो व्रत में खाये जाते हैं वो तले हुए होते हैं, आलू का सेवन महिला अधिक करती है, आदि। ऐसा खाना खाने से महिला को दिक्कत भी होती है और वजन भी बाध्य है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए अच्छा नहीं होता है।

कुट्टू का आटा करता है नुकसान

गर्भावस्था के दौरान ऐसी चीजों का सेवन करने की मनाही होती है जिनकी तासीर गर्म होती है। और नवरात्रि व्रत में महिला रोटी चावल तो खा नहीं सकती है बल्कि महिला कुट्टू के आटे की रोटी या पूड़ी का सेवन करती है। और कुट्टू के आटे की तासीर गर्म होती है। ऐसे में कुट्टू का आटा गर्भ में बच्चे के लिए बहुत नुकसानदायक होता है। खासकर पहली तिमाही में तो कुट्टू के आटे का सेवन करने से बच्चे को बहुत ज्यादा नुकसान पहुँच सकता है।

अलग अलग तरीके से व्रत रखना

हर कोई नवरात्रि का व्रत अलग अलग तरीके से रखता हैं जैसे की कुछ लोग केवल तरल पदार्थों के सेवन का व्रत रखते हैं, एक समय खाना खाने का व्रत, केवल फल ही खाने का व्रत, आदि। तो इस तरह के व्रत रखने से गर्भवती महिला के शरीर को भरपूर पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। जिससे माँ व् बच्चे दोनों को नुकसान पहुँच सकता है।

प्रेगनेंसी के दौरान व्रत रखें या नहीं?

गर्भावस्था के दौरान महिला को हर तरीके से व्रत रखने पर किसी न किसी तरह की परेशानी जरूर होती है। और जब माँ को परेशानी होती है तो इसका असर गर्भ में बच्चे पर भी पड़ता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला चाहती है की वो भी स्वस्थ रहे और बच्चे के विकास पर भी कोई बुरा असर न पड़े तो ऐसे में जितना हो सके गर्भवती महिला को व्रत रखने से बचना चाहिए।

तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और व्रत रखने का सोच रही है तो ऊपर दी गई बातों का ध्यान रखें, ताकि आपको समझ आ सके की प्रेगनेंसी में नवरात्रि रखना सेफ है या नहीं। और आपको और आपके बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

Is it safe to do navratri fasting during Pregnancy

प्रेगनेंसी में सांस लेने में तकलीफ होना या सांस फूलने के कारण

गर्भावस्था के दौरान महिला बहुत से नए नए अनुभव करती है लेकिन इन नए अनुभव को महसूस करने के लिए महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। कुछ परेशानियां तो ऐसी होती है जिनका सामना महिला ने पहले कभी भी नहीं किया होता है। परन्तु इतनी परेशानियों के बाद भी गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखने की कोशिश करती है।

ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियां कम हो सके और गर्भ में बच्चे का विकास अच्छे से हो सके। तो आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली साँस फूलने की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं। जिससे बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान परेशान हो सकती है।

गर्भावस्था में सांस लेने में दिक्कत होने या सांस फूलने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सांस लेने में होने वाली दिक्कत या सांस फूलने की समस्या होने का कोई एक कारण नहीं होता है। बल्कि ऐसे कई कारण हो सकते हैं जिनकी वजह से गर्भवती महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की वो कारण कौन से हैं।

ब्लड फ्लो

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में ब्लड फ्लो पहले के मुकाबले अधिक तेजी से होता है क्योंकि पूरे शरीर के साथ गर्भनाल के माध्यम से बच्चे तक भी ब्लड फ्लो होता है। ऐसे में दिल का काम बढ़ जाता है जिस वजह से प्रेग्नेंट महिला को सांस लेने में थोड़ी परेशानी का अनुभव हो सकता है।

गर्भ में शिशु की पोजीशन

जैसे जैसे गर्भ में शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे गर्भ में शिशु घूमने लगता है और शिशु के बढ़ते विकास के साथ शरीर के अंदरूनी अंगों पर दबाव बढ़ सकता है। जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

खून की कमी

प्रेगनेंसी के दौरान यदि गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी होती है तो इस कारण भी महिला को सांस लेने दिक्कत या सांस फूलने जैसी परेशानी होती है।

खर्राटे

गर्भवती महिला आम महिलाओं के मुकाबले अधिक खर्राटे ले सकती है। और जो गर्भवती महिला अधिक खर्राटे लेती है। उन्हें भी प्रेगनेंसी के दौरान यह परेशानी होने का खतरा होता है।

बहुत ज्यादा शारीरिक श्रम

गर्भवती महिला को केवल उतना ही काम करने की सलाह दी जाती है जितना की महिला कर सकती है। जरुरत से ज्यादा काम करने के कारण महिला को थकान, कमजोरी, सांस फूलने जैसी परेशानियां होती है।

सीढ़ियां चढ़ना

प्रेगनेंसी के दौरान जितना हो सके महिला को सीढियाँ न चढ़ने की सलाह दी जाती है। लेकिन यदि महिला सीढ़ियां चढ़ती है और ज्यादा सीढ़ियां चढ़ने के साथ तेजी से सीढ़ियां चढ़ती है। तो इस कारण भी महिला को सांस फूलने की समस्या होती है।

गलत पहनावा

प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान खुले और आरामदायक कपडे पहनने की सलाह दी जाती है ताकि महिला को रिलैक्स महसूस हो सकें। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला ज्यादा टाइट कपडे पहनती है जिसके कारण महिला को पसीना, घुटन महसूस होना जैसी परेशानियां होती है और घुटन महसूस होने की वजह से महिला को सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है।

वजन

गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन लगातार बढ़ता है और वजन बढ़ने के कारण जब भी महिला थोड़ी देर चलती है, एक ही जगह बैठी रहती है तो इस कारण महिला की सांस फूलने लग सकती है।

अस्थमा

सांस लेने में दिक्कत व् सांस फूलने की समस्या उन गर्भवती महलाओं को अधिक हो सकती है जो महिलाएं अस्थमा की मरीज़ होती है।

प्रेगनेंसी के दौरान सांस फूलने की समस्या से बचने के उपाय

  • महिला को लम्बी लम्बी सांस लेने की आदत डालनी चाहिए ऐसा करने से महिला को सांस लेने में होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • रोजाना योगासन करना चाहिए।
  • सीढ़ियां चढ़ने से बचना चाहिए।
  • ज्यादा तेजी से नहीं चलना चाहिए।
  • यदि तबियत ठीक नहीं है या किसी काम को करने में दिक्कत महसूस हो रही है तो आराम करना चाहिए।
  • आरामदायक कपडे पहनने चाहिए।
  • ज्यादा भागादौड़ी करने से बचना चाहिए।
  • गर्भावस्था के दौरान अपने वजन को नियंत्रित रखना चाहिए न तो आपका वजन जरुरत से ज्यादा होना चाहिए और न ही कम होना चाहिए।

सांस फूलने की समस्या होने पर डॉक्टर से कब मिलें

  • यदि सांस फूलने के साथ सिर दर्द, चक्कर, बेहोशी जैसी परेशानी हो।
  • सोते समय सांस लेने में कोई दिक्कत हो।
  • बहुत ज्यादा सांस लेने में दिक्कत हो रही हो।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में सांस लेने से जुड़े कुछ टिप्स, यदि आप भी गर्भवती है तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान इन सभी चीजों की जानकारी होनी चाहिए। ताकि आपको प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिल सके।

सर्दियों में इन चीजों का सेवन करने से बेबी गोरा होगा

महिला की प्रेगनेंसी की शुरुआत होते ही हर कोई महिला को सलाह देना शुरू कर देता है। और यह सलाह केवल महिला की फिटनेस को लेकर ही नहीं होती हैं बल्कि गर्भ में शिशु की बेहतर केयर के लिए भी होती हैं। क्योंकि गर्भ में बच्चे का विकास पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। और जब महिला अपना अच्छे से ध्यान रखती है तो गर्भ में शिशु भी स्वस्थ रहता है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान कुछ अलग अलग तरीके के टिप्स भी गर्भवती महिला को बताये जाते हैं।

जैसे की महिला क्या खाएं जिससे महिला का बेटा हो या फिर बेटी हो, महिला प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा क्या खाये जिससे होने वाले शिशु हष्ट पुष्ट होने के साथ गोरा भी हो। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत में निखार लाने से जुड़े कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं। जो आपको यह बताते हैं की सर्दियों में गर्भवती महिला को क्या क्या खाना चाहिए जिससे होने वाला शिशु गोरा हो।

केसर मिल्क

सर्दियों के मौसम में रोजाना दिन में एक गिलास दूध में तीन से चार केसर के रेशे डालकर गर्भवती महिला को दूध जरूर पीना चाहिए। क्योंकि ऐसा माना जाता है की केसर मिल्क गर्भ में शिशु की स्किन में निखार लाने में मदद करता है।

अंडा

गर्मी के मौसम में न तो अंडा खाने की इच्छा होती है और अंडो का सेवन नुकसानदायक भी हो सकता है। ऐसे में सर्दियों के मौसम में रोजाना नाश्ते में प्रेग्नेंट महिला को दो से तीन उबले अंडे का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि अंडा न केवल गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करता है। बल्कि अंडे का सेवन करने से गर्भ में शिशु की स्किन में निखार लाने में भी मदद मिलती है जिससे आपका होने वाला शिशु गोरा होता है।

हरी सब्जियां

सर्दियों के मौसम में लगभग सभी हरी सब्जियां मिल जाती हैं और हरी सब्जियां आयरन, फाइबर, फोलेट जैसे पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होती है। और यह सभी पोषक तत्व यदि गर्भ में शिशु को भरपूर मिलते हैं तो इससे न केवल गर्भ में शिशु का बेहतर विकास होता है बल्कि गर्भ में शिशु की स्किन को भी पोषण मिलता है जिससे आपके होने वाले शिशु की रंगत में निखार आता है।

अनार का जूस

अनार का जूस भी आपकी गोरा शिशु पाने की चाहत को पूरा करने में मदद करता है। साथ ही आयरन शरीर में खून की कमी पूरी करने के साथ बॉडी में ब्लड फ्लो को भी बेहतर करता है।

गाजर

गाजर भी सर्दियों में आती है और गाजर भी आयरन, फाइबर, फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होती है। जो भ्रूण के लिए जरुरी पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के साथ गर्भ में शिशु की रंगत में निखार लाने में भी मदद करता है।

संतरा

ऐसा माना जाता है की प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला संतरे का सेवन करती है तो संतरे का सेवन करने से भी गर्भ में शिशु की रंगत में निखार लाने में मदद मिलती है। लेकिन सर्दी के मौसम में दोपहर के बाद संतरे का सेवन करने से गर्भवती महिला को बचना चाहिए।

नारियल

हरा नारियल दिखने में सफ़ेद तो होता ही है साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान नारियल खाने या नारियल पानी पीने से गर्भ में शिशु की स्किन को भी पोषण मिलता है। जिससे आपका होने वाला शिशु गोरा होता है।

पानी का भरपूर सेवन करें

सर्दी के मौसम में प्यास कम ही लगती है लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है की गर्भवती महिला पानी नहीं पीएं। प्रेगनेंसी के दौरान पानी की कमी के कारण न केवल महिला बल्कि बच्चे को भी दिक्कत होती है। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए। ताकि गर्भ में पल रहे शिशु की पोषण मिलें साथ ही बच्चे की स्किन की नमी भी बरकरार रहे। जिससे आपके होने वाले शिशु की स्किन कोमल व् निखरी हुई हो।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनका सेवन गर्भवती महिला को सर्दियों के मौसम में जरूर करना चाहिए। क्योंकि यह सभी चीजें गर्भ में शिशु की रंगत में निखार लाने में मदद करती है।

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प्रेगनेंसी में हाथ सैनिटाइज़ करना कब नुकसानदेह होगा

कोरोना वायरस के चलते हाथों की साफ़ सफाई के तरीके को आसान बनाने के लिए अधिकतर लोग सैनिटाइज़र का इस्तेमाल कर रहे हैं। ताकि उन्हें हर बिमारी व् इन्फेक्शन से बचे रहने में मदद मिल सके। ऐसे में बात जब प्रेग्नेंट महिला की हो तो प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी तो प्रेगनेंसी के दौरान कमजोर हो जाती है। जिसके बाद महिला को बीमारी या इन्फेक्शन जल्दी होने का ज्यादा खतरा होता है।

इसीलिए गर्भवती महिला के लिए तो सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद है। लेकिन गर्भवती महिला को सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करने के साथ कई बार इसके नुकसान का सामना भी करना पड़ सकता है। जी हां, यह बिल्कुल सच है, आज इस आर्टिकल में हम आपको इसी बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं की प्रेगनेंसी में हाथ सैनिटाइज़ करना कब नुकसानदेह होगा।

गलत सैनिटाइज़र का इस्तेमाल

प्रेग्नेंट महिला यदि घर के बाहर जाती है और बाहर जाकर किसी का भी सैनिटाइज़र इस्तेमाल कर लेती है तो इसके कारण महिला को एलर्जी या इन्फेक्शन जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अब आप सोच रहे होंगे की सैनिटाइज़र कैसे नुकसान कर सकता है। तो इसका जवाब है की हो सकता है की जिस व्यक्ति का आप सैनिटाइज़र इस्तेमाल कर रहे हो उसे इन्फेक्शन हो।

जिससे आपको भी इन्फेक्शन हो जाये साथ ही सैनिटाइज़र के भी बहुत से फ्लेवर्स आते हैं हो सकता है बाहर जाकर आप जिस सैनिटाइज़र का इस्तेमाल कर रहे हो उस फ्लेवर से आपको एलर्जी हो। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए जब भी घर से बाहर जाएँ अपना सैनिटाइज़र साथ लेकर जाएँ।

केमिकल की अधिकता वाले सैनिटाइज़र का इस्तेमाल

आज कल बहुत सी तरह के सैनिटाइज़र मार्किट में आ गए हैं। यदि आप अच्छी खुशबू के चक्कर में किसी ऐसे सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करते हैं जिसमे केमिकल की अधिकता होती है। तो इसके कारण भी माँ व् बच्चे दोनों को नुकसान पहुँच सकता है। ऐसे में किसी भी अलग तरह के सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करने से पहले एक बार डॉक्टर से राय जरूर लें।

गैस के पास जाने पर

यदि गर्भवती महिला सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करते ही तुरंत गैस के पास चली जाती है। तो इसके कारण भी महिला को जलने जैसी परेशानी हो सकती है क्योंकि सैनिटाइज़र में अल्कोहल होता है। ऐसे में सैनिटाइज़र के तुरंत इस्तेमाल के बाद प्रेग्नेंट महिला या किसी को भी तुरंत गैस के पास नहीं जाना चाहिए।

आँखों या मुँह को छूने पर

आँखे और चेहरे की स्किन बहुत ही सेंसिटिव होती है ऐसे में महिला यदि सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करने के तुरंत बाद आँखों या मुँह को छूती है तो इसके कारण भी महिला को एलर्जी होने का खतरा रहता है।

तो यह हैं सैनिटाइज़र से जुडी कुछ ध्यान रखने योग्य बातें, यदि गर्भवती महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो महिला को सैनिटाइज़र के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

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प्रेग्नेंट महिला अभी से इन चीजों को खाना बंद कर दें

सर्दी का मौसम अब शुरू होने ही वाला है और यदि आप गर्भवती हैं तो मौसम के बदलाव के साथ आपको बहुत सी बातों का ध्यान रखने की जरुरत हैं। क्योंकि इस दौरान बरती गई लापरवाही आपको बीमार कर सकती है और जब आप बीमार होंगी तो इसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ेगा। क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं? यदि हाँ तो यह आर्टिकल आपके लिए बहुत जरुरी है। क्योंकि इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों के बारे में बताने जा रहे हैं तो आपको नहीं खाने चाहिए। क्योंकि सर्दी के मौसम में उन चीजों का सेवन करने के कारण आपको और आपके बच्चे को परेशानियों का अनुभव करना पड़ सकता है।

ठंडी आइस क्रीम

सर्दी के मौसम में यदि प्रेग्नेंट महिला को आइस क्रीम खाने की क्रेविंग होती है तो गलती से भी इसे न खाएं। क्योंकि ठण्ड के मौसम में आइस क्रीम खाने से महिला को सर्दी खांसी, बुखार जैसी परेशानी होगी जिससे महिला को परेशानी का अनुभव होगा। और जब माँ परेशान होगी तो इसका असर बच्चे पर भी पड़ सकता है।

फ्रिज से निकले ठन्डे फल

सर्दियों के मौसम में फ्रिज से तुरंत बाहर निकले फलों का सेवन करने से भी बचें। और हो सके तो फलों को फ्रिज में रखें ही न बस अच्छे से धोएं और बाहर ही रख दें। साथ ही रात के समय या शाम के समय फलों का सेवन करने से भी बचें क्योंकि असमय फल खाने से और ठन्डे फल खाने के कारण महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी हो सकती है।

ज्यादा मीठी चीजें

कुछ गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान मीठा खाने की इच्छा होती है और जब बात सर्दियों के मौसम की हो तो महिला को तो महिला की यह इच्छा बढ़ सकती है। ऐसे में महिला को सर्दियों में अधिक मीठा नहीं खाना चाहिए क्योंकि ज्यादा मीठा खाने से महिला का वजन बढ़ सकता है। और गर्भवती महिला का वजन यदि जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो इस कारण केवल माँ को ही नहीं बल्कि बच्चे को भी परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।

रात के समय दही

प्रेग्नेंट महिला को यदि दही खाने या छाछ पीने की इच्छा होती है तो महिला को दोपहर के समय ही दही खानी चाहिए या छाछ पीनी चाहिए। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को रात के समय दही का सेवन या ज्यादा ठंडी दही का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला को सर्दी के कारण होने वाली परेशान और गले में इन्फेक्शन जैसी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही राटा के समय दही को हज़म करने में महिला को दिक्कत हो सकती है जिस कारण पेट सम्बन्धी परेशानी भी महिला को हो सकती है

जरुरत से ज्यादा घी

सर्दियों के मौसम में हो सकता है की घर के बड़े बुजुर्ग आपको घी खाने की सलाह दें जो की अच्छी बात है। लेकिन ध्यान रखें की जरुरत से ज्यादा घी का सेवन नहीं करें या फिर आपका वजन ज्यादा है तो भी घी का सेवन नहीं करें। क्योंकि घी में कैलोरीज़ ज्यादा होती है जिससे आपका वजन और ज्यादा हो सकता है और जरुरत से ज्यादा वजन प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स खड़ी कर सकता है।

ठंडा पानी व् जूस

सर्दी के मौसम में ठंडा पानी व् ठंडा जूस भी नहीं पीएं क्योंकि ज्यादा ठंडा पानी व् ठंडी चीजें आपकी सेहत पर गलत असर डाल सकती है। जिससे आपको सेहत सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

लड्डू

सर्दियों के मौसम में गोंद, ड्राई फ्रूट्स के लड्डू आदि आपके घर में भी बनते होंगे। ऐसे में ध्यान रखें की यदि आपकी प्रेगनेंसी की पहली तिमाही है तो आपको इन चीजों का सेवन अधिक नहीं करना चाहिए क्योंकि इनकी तासीर गर्म होती है। जिससे आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

जंक फ़ूड

ठण्ड के मौसम में चटपटा तीखा खाने की इच्छा भी बढ़ जाती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की प्रेग्नेंट महिला जंक फ़ूड का सेवन करना शुरू कर दे। क्योंकि जंक फ़ूड खाने से महिला की और भी कमजोर हो जाती है जिस वजह से महिला के बीमार होने का खतरा बढ़ जाता है।

कैफीन

सर्दी का मौसम शुरू होने पर चाय कॉफ़ी पीने की इच्छा में भी बढ़ोतरी हो जाती है। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको अपनी इस इच्छा पर कण्ट्रोल करना चाहिए। क्योंकि मौसम चाहे कोई भी कैफीन का अधिक सेवन माँ व् बच्चे दोनों की सेहत के लिए नुकसानदायक ही होता है।

तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिन का सेवन गर्भवती महिला को सर्दी के मौसम में नहीं करना चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला इन बातों का ध्यान रखती है। तो सर्दी के मौसम में होने वाली परेशानियों से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

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