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सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला खाएं यह बेहतरीन फ्रूट्स?

गर्भावस्था के दौरान महिला के लिए बेहतरीन खान पान बहुत जरुरी होता है और महिला को उन्ही चीजों का सेवन करना चाहिए जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद हो। ऐसे में महिला के लिए फलों का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है फल खाने में स्वादिष्ट होने के साथ पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। और फलों में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

मौसम के अनुसार मार्किट में आपको अलग अलग फल नज़र आते हैं और मौसमी फल आपको बेहतरीन फायदे भी देते हैं। इसीलिए सेहत सम्बन्धी फायदों के लिए आपको फलों का सेवन जरूर करना चाहिए। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को सर्दियों में कौन कौन से फलों का सेवन करना चाहिए जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

संतरा

सर्दी के मौसम में गर्भवती महिला को एक दिन में एक या दो संतरे जरूर खाने चाहिए। क्योंकि संतरे में विटामिन सी मौजूद होता है जो महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही संतरे में पानी की भरपूर मात्रा होती है जिससे सर्दियों के मौसम में महिला को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा संतरे में पोटैशियम, फोलेट, फाइबर व् अन्य पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं जो स्वस्थ रहने में आपकी मदद करते हैं।

अमरुद

अमरुद भी पोषक तत्वों की खान होता है साथ ही यह खाने में भी खट्टा मीठा होता है। और खट्टा मीठा होने के कारण यह गर्भवती महिला को खाने में पसंद भी आता है। साथ ही अमरुद का सेवन करने से महिला को फाइबर, कार्बोहाइड्रेट आदि पोषक तत्व भी मिलते हैं जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन ज्यादा कच्चे अमरुद का सेवन नहीं करें, और अमरुद खाने से पहले चेक जरूर करें की कहीं उसमे कीड़ा तो नहीं है।

केला

सर्दी के मौसम में महिला को केले का सेवन भी जरूर करना चाहिए क्योंकि केला फाइबर, पोटैशियम, विटामिन्स जैसे बेहतरीन पोषक तत्वों से भरपूर होता है। और यह पोषक तत्व महिला की इम्युनिटी बढ़ाने, ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल रखने व् अन्य सेहत सम्बन्धी फायदे गर्भवती महिला को पहुंचाने में मदद करते हैं जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ और बच्चे दोनों को हेल्दी रहने में मदद मिलती है।

गाजर

गाजर को भी सलाद के रूप में गर्भवती महिला खा सकती है और गाजर विटामिन्स का बेहतरीन स्त्रोत होती है। ऐसे में फलों के साथ गर्भवती महिला को गाजर का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। गाजर के साथ महिला चाहे तो मूली को भी शामिल कर सकती है क्योंकि मूली भी गर्भवती महिला और शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होती है।

सेब

सर्दियों के मौसम में सेब भी मार्किट में खूब आता है और यह बहुत रसीला भी होता है। स्वादिष्ट होने के साथ सेब विटामिन सी, विटामिन के, फाइबर जैसे पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है। साथ ही ऐसा माना जाता है की रोजाना एक सेब का सेवन आपको बिमारियों से दूर रखता है ऐसे में गर्भवती महिला को रोजाना एक सेब का सेवन जरूर करना चाहिए।

नाशपाती

सर्दियों के मौसम में नाशपाती भी आती है यह खाने में मीठी होने के साथ सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है। नाशपाती में विटामिन इ, विटामिन सी जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और यह पोषक तत्व गर्भावस्था के दौरान बहुत फायदेमंद होते हैं ऐसे में गर्भवती महिला को सर्दियों के मौसम में नाशपाती का सेवन भी जरूर करना चाहिए।

अनार

लाल लाल दानों वाला अनार भी गर्भावस्था के दौरान माँ और बच्चे के लिए बहुत फायदेमंद होता है ऐसे में गर्भवती महिला को अनार का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान जरूर करना चाहिए। अनार खाने से गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी नहीं होती है। इसके अलावा और भी सेहत सम्बन्धी फायदे भी गर्भवती महिला और शिशु को मिलते हैं।

मौसमी

मौसम्बी विटामिन सी का बेहतरीन स्त्रोत होती है और विटामिन सी गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। ऐसे में गर्भवती महिला को सर्दियों के मौसम में मौसमी का सेवन भी जरूर करना चाहिए।

कीवी

सर्दियों में कीवी खाना भी बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि कीवी खाने से गर्भवती महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके अलावा और भी सेहत सम्बन्धी फायदे कीवी खाने से गर्भवती महिला को मिल सकते हैं क्योंकि कीवी में विटामिन, कैल्शियम, फाइबर जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते है।

फलों का सेवन करते समय इन बातों का ध्यान रखें

  • महिला को अच्छी क़्वालिटी के फलों का सेवन करना चाहिए।
  • गले सढ़े या बहुत दिनों तक रखे हुए फलों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • फलों को अच्छे से देखकर आना चाहिए की कहीं वो फल इंजेक्शन द्वारा पकाए हुए तो नहीं हैं।
  • फलों का सेवन करने से पहले उन्हें अच्छे से धो लेना चाहिए क्योंकि उनपर हानिकारक बैक्टेरिया हो सकता है जिससे महिला को नुकसान पहुँच सकता है।
  • सिमित मात्रा में ही फलों को खाना चाहिए क्योंकि जरूरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन करना गर्भवती महिला और शिशु की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • हो सके तो दोपहर से पहले भरपूर फलों का सेवन करना चाहिए।

तो यह हैं वो फल जिनका सेवन सर्दियों के मौसम में महिला को करना चाहिए और ऊपर बताई गई सावधानियों को ध्यान में रखते हुए गर्भवती महिला को इन फलों का सेवन करना चाहिए। ताकि महिला और शिशु को इन बेहतरीन फलों के फायदे मिल सके और सेहत सम्बन्धी किसी भी तरह के नुकसान नहीं हो।

Winter fruits for pregnant women

क्या प्रेगनेंसी में पपीता नहीं खाना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है की महिला को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए। क्योंकि सही खान पान से जहां माँ और बच्चे को फायदे मिलते हैं। वहीँ गलत चीजों का सेवन करने से माँ व् बच्चे को नुकसान भी पहुँच सकता है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान पपीता खाना चाहिए या नहीं खाना चाहिए उसके बारे में बात करने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में पपीता खाएं या नहीं?

पपीता पोषक तत्वों से भरपूर होता है ऐसे में पपीते का सेवन करने से स्वास्थ्य सम्बन्धी बहुत से फायदे मिलते हैं। लेकिन जब बात गर्भवती महिला की हो तो महिला को पपीता न खाने की सलाह दी जाती है। खासकर हरा पपीता यानी कच्चे पपीते का सेवन तो महिला को बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें एक एन्ज़ाइम मौजूद होता है जो शिशु के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। साथ ही पके हुए पपीते में इस एन्ज़ाइम की मात्रा कम हो जाती है लेकिन फिर भी महिला को पके पपीते का सेवन भी न करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान थोड़ी सी लापरवाही के कारण भी बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में पपीता खाने के नुकसान

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला पपीते का सेवन करती है तो इसके कारण गर्भ पर नकारात्मक असर पड़ता है जिसके कारण बहुत सी दिक्कत होने के चांस होते हैं। जैसे की:

मिसकैरिज

गर्भवती महिला यदि पपीता का सेवन करती है तो इसकी वजह से गर्भाशय में संकुचन होने का खतरा बढ़ जाता है। जिसकी वजह से महिला को ब्लीडिंग शुरू हो सकती है और महिला का मिसकैरिज हो सकता है।

समय से पहले डिलीवरी

कच्चे पपीते का सेवन करने से महिला की डिलीवरी समय से पहले होने का खतरा होता है। जिसके कारण जन्म के समय शिशु के जन्म में कमी, संक्रमण होने का खतरा आदि परेशानियां हो सकती है।

बर्थ डिफेक्ट होने का खतरा

पपीता में पपाइन नामक तत्व होता है जो शिशु के विकास को बुरी तरह प्रभावित करता है। जिसके कारण शिशु को जन्म दोष होने का खतरा बढ़ जाता है।

पेट से जुडी समस्या

पपीता फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत होता है लेकिन यदि महिला इसका सेवन अधिक करती है तो इससे महिला की मल पास करने की इच्छा में बढ़ोतरी होती है। जिसके कारण पेट में होने वाली परेशानियां बढ़ सकती है साथ ही गर्भपात होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में महिला को पपीता क्यों नहीं खाना चाहिए, उससे जुड़े कारण। यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको भी यह जानकारी होनी चाहिए ताकि प्रेगनेंसी में आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स से बचे रहने में मदद मिल सके।

क्यों जरुरी होता है प्रेगनेंसी के आखिरी महीनों में ज्यादा ध्यान रखना?

गर्भावस्था के पूरे नौ महीने महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है क्योंकि जितना अच्छे से महिला अपना ध्यान रखती है। उतना ही प्रेगनेंसी को आसान बनाने के साथ माँ व् बच्चे को हेल्दी रहने में मदद मिलती है। लेकिन प्रेगनेंसी के शुरूआती समय और प्रेगनेंसी के आखिरी समय में महिला को अपना और भी ज्यादा ध्यान रखना होता है क्योंकि यह दोनों समय ही महिला के लिए बहुत नाजुक होते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के आखिरी महीनों में ज्यादा ध्यान रखना क्यों जरुरी होता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

बच्चे का विकास तेजी से हो रहा होता है

गर्भावस्था के नौवें महीने में गर्भ में शिशु का विकास तेजी से हो रहा होता है साथ ही शिशु अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में आने की कोशिश करता रहता है। ऐसे में गर्भ में शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो इस परेशानी से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को मदद मिल सके और शिशु का विकास अच्छे से हो सके इसके लिए प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में महिला को अपना ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है।

पेट बाहर निकलने के कारण दिक्कत नहीं हो

प्रेगनेंसी के आखिरी समय में महिला का पेट पूरी तरह से बाहर निकल चूका होता है जिसकी वजह से महिला को उठने, बैठने, सोने, खड़े रहने, आदि में दिक्कत होती है। और महिला को कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को अपने उठने बैठने सोने आदि की सही पोजीशन का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा महिला किसी अन्य काम को करने में भी दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

डिलीवरी का समय पास होता है

प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में यदि महिला किसी भी तरह की लापरवाही करती है तो इसकी वजह से महिला की डिलीवरी में कॉम्प्लीकेशन्स आने का खतरा रहता है। ऐसे में महिला की डिलीवरी में कोई परेशानी नहीं हो, जन्म के बाद शिशु को कोई दिक्कत नहीं हो इससे बचे रहने के लिए महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

महिला डिलीवरी को लेकर परेशान हो सकती है

प्रसव को लेकर महिला ज्यादा परेशान हो सकती है जिसकी वजह से महिला घबराहट में आकर तनाव में आकर कोई गलती कर सकती है। और उसका असर माँ और बच्चे की सेहत पर पड़ सकता है। ऐसे में माँ या बच्चे की सेहत को किसी तरह की परेशानी नहीं हो इससे बचे रहने के लिए महिला को प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

महिला की भावनाओं में उतार चढ़ाव होने के कारण

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला की भावनाओं में उतार चढ़ाव आ सकते हैं जिसकी वजह से महिला तनाव में आ सकती है। और तनाव का होना माँ और बच्चे की सेहत पर बुरा असर डाल सकता है ऐसे में ऐसी कोई दिक्कत नहीं हो इससे बचे रहने के लिए महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में इन बातों का ध्यान रखें

  • ज्यादा लम्बे समय तक खड़ी न रहे साथ ही एक ही पोजीशन में ज्यादा देर तक नहीं बैठें।
  • खान पान में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करें और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें जिससे महिला को प्रसव के लिए ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिल सकें।
  • डिलीवरी को लेकर बिल्कुल भी परेशान नहीं हो।
  • पेट के बल किसी भी काम को न करें।
  • डिलीवरी का समय नजदीक आने पर सम्बन्ध बनाने से बचें।
  • शरीर में तरल पदार्थों की कमी नहीं होने दें।
  • सोने के समय अपनी पोजीशन का ध्यान रखें और जितना हो सके बाईं और करवट लेकर सोएं क्योंकि यह प्रेगनेंसी में सोने के लिए सबसे सही पोजीशन होती है।
  • नोर्मल डिलीवरी हो इसके चक्कर में शरीर पर ज्यादा जोर नहीं डालें।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला को अपना ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है। यदि आपका भी प्रेगनेंसी का आखिरी समय चल है। तो आपको भी अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि आपको और आपके होने वाले बच्चे को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

गर्भ में शिशु का दिमाग तेज करने के लिए खाएं यह 10 चीजें

गर्भ में पल रहे शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास कैसा होगा यह उसकी होने वाली माँ पर ही निर्भर करता है। क्योंकि गर्भ में शिशु अपनी हर एक जरुरत को अपनी माँ के शरीर से ही पूरा करता है। इसीलिए तो प्रेगनेंसी के दौरान हर महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है ताकि गर्भवती महिला और उसके होने वाले शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें।

साथ ही हर गर्भवती महिला चाहती है की उसका होने वाला शिशु हेल्दी, इंटेलीजेंट, सूंदर व् स्वस्थ हो। तो इसके लिए जरुरी है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपने खान पान से लेकर हर छोटी छोटी बात का ध्यान रखें। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे 10 फूड्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन यदि प्रेग्नेंट महिला करती है तो इससे होने वाले शिशु का दिमाग तेज होता है।

दालें शामिल करें अपनी डाइट में

गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर दिमागी विकास के लिए दालों का सेवन गर्भवती महिला को भरपूर करना चाहिए। क्योंकि दालों में प्रोटीन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। और प्रोटीन बच्चे के मस्तिष्क की मांसपेशियों के बेहतर विकास में मदद करता है जिससे बच्चे का दिमागी विकास अच्छे से होता है। खासकर मसूर दाल का सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। इसके अलावा दालों में अन्य पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं जो बच्चे के शारीरिक विकास को बेहतर करने में मदद करते हैं।

डेयरी प्रोडक्ट्स

गर्भवती महिला को बच्चे के दिमागी विकास को बेहतर करने के लिए डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे की दूध, दही, आदि का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि इनमे कैल्शियम व् प्रोटीन उच्च मात्रा में मौजूद होता है जो बच्चे के दिमागी विकास को बेहतर करने में दद करता है।

हरी सब्जियां

आयरन, फोलेट, प्रोटीन, विटामिन्स जैसे पोषक तत्वों से भरपूर हरी सब्जियां भी गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर दिमागी विकास में मदद करती है। साथ ही इनका सेवन करने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने व् शिशु के शारीरिक विकास को बेहतर करने में भी मदद मिलती है।

कद्दू के बीज

एंटीऑक्सीडेंट और हाई न्यूट्रिएंट्स से भरपूर कद्दू के बीज का सेवन भी गर्भावस्था के दौरान महिला कर सकती है। क्योंकि यदि गर्भवती महिला कद्दू के बीज का सेवन करती है तो इससे पेट में पल रहे शिशु के दिमाग को तेज करने में मदद मिलती है।

बादाम

वैसे प्रेगनेंसी के दौरान महिला हर तरह के ड्राई फ्रूट्स का सेवन कर सकती है लेकिन गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर दिमागी विकास बादाम का सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि बादाम में प्रोटीन कैल्शियम व् अन्य विटामिन्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर दिमागी विकास में मदद करते हैं।

अखरोट

दिमाग की शेप में दिखने वाला अखरोट भी गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर दिमागी विकास में मदद करता है। क्योंकि अखरोट में ओमेगा 3 फैटी एसिड व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और यह पोषक तत्व शिशु के मानसिक विकास को तेजी से करने में मदद करते हैं।

फल

संतरा, सेब, अनार, जामुन जैसे फलों का सेवन भी गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर दिमागी विकास के लिए गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि इनमे फोलेट, फाइबर, व् अन्य विटामिन्स मौजूद होते हैं जो शिशु के बेहतर दिमागी विकास में मदद करते हैं।

अंडा

प्रोटीन, आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होने के साथ अंडा choline से भरपूर होता है। जो गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर दिमागी विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान अंडे का सेवन करती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर दिमागी विकास में मदद मिलती है।

मछली

गर्भावस्था के दौरान महिला को मछली का सेवन करना चाहिए क्योंकि मछली में ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। और ओमेगा फैटी एसिड गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग के बेहतर विकास में मदद करता है। लेकिन ध्यान रखें की केवल उन्ही फिश का सेवन करें जिनमे मर्करी की मात्रा मौजूद नहीं होती है। साथ ही मछली में आयोडीन भी मौजूद होता है जो गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर दिमागी विकास में मदद करता है।

ब्लूबेरिस

एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर ब्लूबेरिस का सेवन भी गर्भावस्था के दौरान करने से शिशु के दिमाग के तेज को करने में मदद मिलती है। ब्लूबेरिस के अलावा स्ट्रॉबेरी, रास्पबेरी आदि का सेवन भी शिशु के दिमाग के बेहतर विकास में मदद करता है।

पेट में पल रहे शिशु का दिमाग तेज करने के अन्य टिप्स

  • गर्भ में पल रहे शिशु से बातें करें इससे गर्भ में में शिशु एक्टिव रहता है जिससे उसके शारीरिक व् मानसिक विकास को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • प्रेग्नेंट महिला खुश रहें क्योंकि जितना महिला खुश रहती है उतना ही बच्चा खुश रहता है और उसका विकास अच्छे से होता है।
  • खान पान, नींद, व्यायाम आदि का अच्छे से ध्यान रखें जिससे माँ व् बच्चे दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान कोई दिक्कत नहीं हो।
  • नशीले पदार्थों के सेवन से दूरी रखें।
  • किसी भी दिक्कत के होने पर बिना देरी किये तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  • हमेशा पॉजिटिव रहें और केवल अच्छी बातें सोचें।
  • गुस्सा, लड़ाई, आदि से बचें।
  • ज्यादा शोर, भीड़भाड़, प्रदूषण वाली जगह पर जाने से बचें।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिन्हे यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला फॉलो करती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के दिमागी विकास को बढ़ाने में मदद मिलती है। और आपका होने वाला शिशु हष्ट पुष्ट, इंटेलीजेंट होता है।

Diet in pregnancy for baby brain

सुबह सुबह उल्टी और थकान होना प्रेगनेंसी में यह कारण हो सकते हैं?

गर्भावस्था महिला के लिए बहुत ही प्यारा और खास अनुभव होता है क्योंकि इस दौरान महिला अपने गर्भ में एक नन्ही सी जान को पाल रही होती है। लेकिन साथ ही प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसा जरुरी नहीं है की हर गर्भवती महिला को शारीरिक परेशानियां हो साथ ही हर गर्भवती महिला को एक ही जैसी परेशानियां हो ऐसा भी जरुरी नहीं होता है।

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को शरीर में दर्द होना, कमजोरी होना, पैरों में सूजन होना, मूड स्विंग्स होना, पेट से जुडी समस्या जैसे की कब्ज़ अपच एसिडिटी आदि होना, थकान की समस्या होना, उल्टियां व् जी मिचलाने की समस्या होना, आदि। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सुबह के समय उल्टी या थकान ज्यादा महसूस होने के क्या कारण होते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में सुबह उल्टी व् थकान होने के कारण?

प्रेग्नेंट महिला को सुबह उल्टी या थकान की समस्या अधिक होने को मॉर्निंग सिकनेस कहा जाता है। और मॉर्निंग सिकनेस की समस्या गर्भवती महिला को होना आम बात होती है। कुछ महिलाओं को यह समस्या प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने तो कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब इस समस्या के होने के कारण के बारे में जानते हैं।

हार्मोनल बदलाव

प्रेगनेंसी की शुरुआत से लेकर आखिर तक गर्भवती महिला के शरीर लगातार हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं और इन्ही हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला को सुबह के समय थकान व् उल्टी की समस्या अधिक हो सकती है।

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में

गर्भावस्था की पहली तिमाही में बॉडी में हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से हो रहे होते हैं जिसकी वजह से अधिकतर गर्भवती महिलाओं को उल्टी व् थकान होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। उसके बाद जैसे जैसे धीरे धीरे प्रेगनेंसी आगे बढ़ती है वैसे वैसे यह समस्या कम होने लगती है।

पोषक तत्वों की कमी

गर्भावस्था के दौरान महिला को भरपूर पोषक तत्वों से युक्त डाइट लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला अपनी डाइट को सही से नहीं लेती है तो इसकी वजह से गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। और पोषक तत्वों की कमी के कारण महिला को सुबह के साथ शाम के समय भी थकान, उल्टी, शरीर में दर्द आदि की समस्या हो सकती है।

डीहाइड्रेशन के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को तरल पदार्थों का सेवन भरपूर मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। लेकिन यदि महिला पानी या अन्य तरल पदार्थों का सेवन नहीं करती है तो इसकी वजह से महिला को डीहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है। और डी हाइड्रेशन होने के कारण महिला को सुबह के समय थकान व् उल्टी आने की समस्या अधिक हो सकती है।

तनाव

जिन गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान तनाव की समस्या होती है उन महिलाओं को भी सुबह के समय थकान महसूस होना, उल्टी आने की इच्छा होना आदि आम बात होती है।

डाइट सही न लेने के कारण

  • गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं की भूख में कमी आ जाती है। जिसकी वजह से महिलाएं अच्छे से अपनी डाइट नहीं लेती है और शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है साथ ही खाली पेट गैस भी बनती है। जिसकी वजह से महिला को थकान व् कमजोरी की समस्या हो सकती है।
  • प्रेगनेंसी में सुबह उल्टी व् थकान की समस्या से निजात पाने के टिप्स
  • महिला को भरपूर पोषक तत्वों से युक्त डाइट लेनी चाहिए जिससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो और गर्भवती महिला को फिट रहने में मदद मिल सकें।
  • गर्भवती महिला को दिन में आठ से दस गिलास पानी व् अन्य तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • महिला को भरपूर आराम करना चाहिए।
  • दिन भर में थोड़ा थोड़ा करके खाएं जिससे शरीर में ऊर्जा की कमी नहीं हो और महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।
  • जंक फ़ूड का सेवन करने से बचें।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को सुबह के समय थकान व् उल्टी की समस्या हो सकती है। ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की यदि समस्या थोड़ी बहुत हो तो इसे अनदेखा किया जा सकता है लेकिन ज्यादा समस्या होने पर महिला को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

कॉक्रोच भगाने के घरेलू तरीके

घर में कॉक्रोच हो जाने के कारण अक्सर लोग परेशान रहते हैं। क्योंकि यह कॉक्रोच खाने की चीजों में, बर्तनों, किचन शैल्फ पर, अलमारियों आदि में घूमते रहते हैं। जिसे देखकर न केवल घिन्न आती है बल्कि बिमारियों के फैलने का खतरा भी होता है। बरसाती मौसम में कॉक्रोच होने की समस्या ज्यादा हो जाती है या जिनके घरों में सीलन की समस्या होती है उनके घर में कॉक्रोच अधिक होते हैं।

ऐसे में कॉक्रोच भगाने के लिए मार्किट में बहुत से रसायानिक उत्पाद मिल जाते हैं लेकिन इनमे केमिकल अधिक होने के कारण घर में छोटे बच्चों को इनसे नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है। तो लीजिये आज इस आर्टिकल में हम आपको कॉक्रोच भगाने के कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे न तो कोई नुकसान होगा और यह तरीके असरदार भी होंगे।

चीनी और बेकिंग पाउडर

एक कटोरे में बराबर मात्रा में चीनी और बेकिंग पाउडर डालकर मिक्स करें। उसके बाद इस मिश्रण को उन जगहों पर थोड़ा थोड़ा फैलाकर रख दें जहां पर कॉक्रोच आपको दिखाई देते हैं। चीनी के मीठे स्वाद के कारण जैसे ही कॉक्रोच इसके पास आएंगे वैसे ही बेकिंग सोडा के स्वाद से यह मर जायेंगे। थोड़े थोड़े समय बाद ऐसा करते रहें ताकि आपको कॉक्रोच की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके।

तेजपत्ता

कॉक्रोच को घर से खत्म करने के लिए तेजपत्ते का इस्तेमाल करना भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप तेजपत्ते को मसलकर उन जगहों पर रख दें जहां कॉक्रोच आते हैं। ऐसा करने से कॉक्रोच की तेज गंध सूंघकर कॉक्रोच वहां से दूर भागने लग जायेंगे। समय समय पर आप इन पत्तियों को बदलते रहें।

लौंग

लौंग की तेज गंध भी कॉक्रोच को भगाने का एक असरदार उपाय है इसके इस्तेमाल के लिए आप किचन में, अलमारियों व् अन्य जगह पर लौंग रख दें। ऐसा करने से लौंग की गंध सूंघकर कॉक्रोच आसानी से वहां से भाग जायेंगे।

नीम

नीम एक बेहतरीन कीटनाशक है और नीम का इस्तेमाल करने से आपको कॉक्रोच को घर से खत्म करने में भी मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक लीटर पानी में मुट्टीभर नीम की पत्तियों को पीसकर डाल दें। उसके बाद आप इस पानी को छान लें और इसे स्प्रे बोतल में डालकर आप घर के उन सभी कोनो और उन जगह पर छिड़काव करें। जहां पर कॉक्रोच अधिक होते हैं ऐसा करने से कॉक्रोच वहां नहीं आएंगे और आपको इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलेगी।

पुदीने का तेल

एक स्प्रे बोतल में आधा गिलास पानी में पंद्रह बीस बूँदे पुदीने के तेल की डालें। उसके बाद इसे मिक्स करें और घर के उन सभी कोनो और उन जगह पर छिड़काव करें जहां पर कॉक्रोच अधिक पनपते हैं ऐसा करने से कॉक्रोच वहां नहीं आएंगे।

निम्बू का रस

पोछा लगाने के पानी में रोजाना तीन से चार निम्बू का रस मिलाएं और उस जगह पर सबसे पहले पोछा लगाएं जहां कॉकरोच अधिक आते हैं। ऐसा करने से कॉक्रोच आना बंद कर देंगे लेकिन ध्यान रखें की ऐसा रोजाना करें और कॉक्रोच खत्म होने के बाद भी हफ्ते में दो से तीन बार ऐसा जरूर करें।

डिटर्जेंट

एक गिलास पानी में तीन से चार चम्मच डिटर्जेंट डालकर उसे अच्छे से मिक्स कर लें अब इस मिश्रण को स्प्रे बोतल में डाल लें। उसके बाद रात को सोने से पहले इस मिश्रण का वहां छिड़काव करें जहां कॉक्रोच आते हैं। ऐसा जब तक करें जब तक आपको पूरी तरह इस समस्या से निजता नहीं मिल जाता।

लहसुन प्याज काली मिर्च

थोड़ी सी लहसुन की कलिया और आधा प्याज को मिलाकर अच्छे से पीस लें। उसके बाद इसमें काली मिर्च को मिलाएं। अब इन तीनों को अच्छे से मिक्स करके एक स्प्रे बोतल में डालें और आधा गिलास पानी डालकर अच्छे से हिलाएं। अब इस मिश्रण के अच्छे से मिक्स होने के बाद इसे स्प्रे करें। इस तरीके का इस्तेमाल करने से भी आपको घर में होने वाले कॉक्रोच की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

बोरेक्स

बोरेक्स का इस्तेमाल करने से भी आपको कॉक्रोच को घर से भगाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप बोरेक्स पाउडर में थोड़ी चीनी मिलाकर रात को सोने से पहले उन जगह पर छिड़क दें जहां कॉक्रोच आते हैं। उसके बाद सुबह उठाकर उस जगह को अच्छे से साफ़ कर दें ताकि बोरेक्स के संपर्क में बच्चे नहीं आएं, ऐसा रोजाना रात को सोने से पहले करें।

अंडे का छिलका

अंडा खाकर यदि आप अंडे के छिलके को फेक देते हैं तो अब ऐसा नहीं करें क्योंकि अंडे का छिलका कॉक्रोच भगाने का एक असरदार उपाय है। इसके इस्तेमाल के लिए आप अंडे के छिलके को छोटे छोटे टुकड़ों में करके उन जगह पर रखें जहां कॉक्रोच आते हैं। ऐसा करने से कॉक्रोच उस जगह पर नहीं आएंगे।

घर से कॉक्रोच भगाने के आसान उपाय

  • साफ़ सफाई का ध्यान रखें।
  • रात को जूते बर्तन नहीं छोड़ें।
  • किचन में गली सदी सब्जियों को नहीं रहने दें।
  • जहां जहां पानी का रिसाव होता है उस जगह को बंद कर दें।
  • पानी की जालियों को हमेशा साफ़ रखें।
  • रात में खाने पीने की चीजों को खुला नहीं छोड़ें।
  • जानवरों को खिलाने वाला खाना भी रात को ऐसे नहीं छोड़ें।
  • घर में सीलन की समस्या है तो उसका समाधान करें।

तो यह हैं लुक घरेलू नुस्खे जिन्हे ट्राई करने से घर में मौजूद कॉक्रोच को खत्म करने में मदद मिलती है। यदि आप भी घर में कॉक्रोच की समस्या से परेशान हैं तो आप भी इनमे से किसी भी उपाय को ट्राई करके अपनी समस्या का समाधान कर सकते हैं।

Home remedies to get rid of cockroaches

सातवें महीने में प्रेग्नेंट महिला को भूलकर भी यह काम नहीं करने चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है ताकि पूरी प्रेगनेंसी के दौरान माँ और बच्चे दोनों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आएं। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला यदि किसी भी तरह की लापरवाही करती है, अपना अच्छे से ध्यान नहीं रखती है, ऐसा कोई काम करती है जो महिला को नहीं करना चाहिए तो इसकी वजह से न केवल महिला की सेहत पर बुरा असर पड़ता है बल्कि इसकी वजह से शिशु के विकास में भी रूकावट आ सकती है।

वैसे तो प्रेगनेंसी के हर महीने में महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए लेकिन प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही की शुरुआत में महिला को सतर्कता बरतने की जरुरत होती है क्योंकि इस दौरान बच्चे का शारीरिक व् मानसिक विकास तेजी से हो रहा होता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला को कौन कौन से काम नहीं करने चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

पेट के बल कोई काम न करें

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला का पेट बाहर निकला हुआ होता है ऐसे में महिला यदि पेट के बल कोई भी काम करती है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु दिक्कत होने का खतरा होता है। ऐसे में बच्चे को हर परेशानी से सुरक्षित रखने के लिए महिला को पेट के बल कोई काम नहीं करना चाहिए।

ट्रैवेलिंग करने से बचें

गर्भावस्था के सातवें महीने में महिला को ट्रैवेलिंग करने से बचना चाहिए क्योंकि पेट बाहर आने के कारण महिला को लम्बे समय तक एक ही पोजीशन में बैठने के कारण दिक्कत हो सकती है। साथ ही यदि कोई झटका आदि लग जाता है तो गर्भ में शिशु को दिक्कत होने का खतरा होता है।

दवाइयों का सेवन नहीं करें

गर्भवती महिला को बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इनका असर गर्भनाल के रास्ते शिशु तक पहुँच सकता है जिसकी वजह से शिशु के विकास में रूकावट आ सकती है।

खान पान में लापरवाही नहीं करें

गर्भावस्था के सातवें महीने में शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास अच्छे से हो इसके लिए महिला को खान पान में लापरवाही नहीं करनी चाहिए साथ ही ऐसी किसी भी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए जिससे शिशु के विकास में किसी भी तरह की कमी आएं। जैसे की महिला को बिना धुले फल सब्जियां, कच्चा अंडा, कच्चा दूध, आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

गलत पोजीशन में नहीं सोएं

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में वजन बढ़ने के कारण महिला को सोने में थोड़ी परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। साथ ही महिला को सोते समय सही पोजीशन का ध्यान रखना जरुरी होता है क्योंकि यदि महिला गलत पोजीशन में सोती है तो इसकी वजह से महिला को बच्चे को परेशानी हो सकती है। जैसे की महिला यदि सीधी सोती है तो इसकी वजह से महिला को कमर दर्द की समस्या बढ़ सकती है, बॉडी में ब्लड फ्लो सही न होने के कारण दिक्कत हो सकती है, आदि। पेट के बल सोने के कारण पेट पर दबाव बढ़ सकता है जिसकी वजह से गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है। ऐसे में महिला को सोने की सही पोजीशन का ध्यान रखना चाहिए ताकि माँ और बच्चे को कोई दिक्कत नहीं हो।

नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करें

गर्भावस्था के सातवें महीने में शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास तेजी से होता हैं ऐसे में शिशु के विकास में किसी तरह की रूकावट नहीं आये इससे बचने के लिए महिला को किसी भी तरह के नशे का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि नशीले पदार्थों का सेवन करने से गर्भ में शिशु के विकास में कमी आने का खतरा होता है और जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी समस्या आ सकती है।

कैफीन का सेवन करने से बचें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को चाय, कॉफ़ी, चॉकलेट्स व् अन्य कैफीन युक्त चीजों का सेवन जरुरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए। क्योंकि कैफीन युक्त चीजों का सेवन करने से गर्भ में शिशु का विकास तेजी से नहीं होता है जिसकी वजह से जन्म के समय शिशु को दिक्कत होने का खतरा बढ़ जाता है।

घर के उन कामों को करने से बचें जिन्हे करने में आपको दिक्कत होती है

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला का वजन पहले से बढ़ चूका होता है, महिला का पेट बाहर की तरफ निकला हुआ होता है, पैरों में सूजन आ सकती है, आदि। ऐसे में महिला को काम करने में दिक्कत हो सकती है और दिक्कत होने पर महिला यदि काम करती रहती है तो महिला को ज्यादा परेशानी हो सकती है। ऐसे में महिला को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की महिला से घर के जिन काम को करने में दिक्कत हो वह काम महिला को नहीं करने चाहिए और उनके लिए किसी की मदद लेनी चाहिए।

जांच में देरी नहीं करें

सातवें महीने के बाद डिलीवरी तक आपको डॉक्टर जल्दी जल्दी जांच के लिए बुला सकते हैं ताकि गर्भ में शिशु की स्थिति का सही से पता चल सके और डिलीवरी में कोई दिक्कत नहीं हो। ऐसे में महिला को जांच में किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए और समय से अपनी जांच करवानी चाहिए।

प्रसव को लेकर तनाव में नहीं आएं

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही लगते ही महिला को प्रसव को लेकर टेंशन नहीं लेनी चाहिए क्योंकि टेंशन से महिला को और दिक्कत हो सकती है। बल्कि महिला को प्रसव की जानकारी इक्कठी करनी चाहिए ताकि प्रसव को आसान बनाने में मदद मिल सकें।

ज्यादा टाइट कपडे न पहनें

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में महिला का पेट बाहर निकल चूका होता है ऐसे में ज्यादा टाइट कपडे पहनने के कारण पेट पर दबाव बढ़ सकता है। जिसकी वजह से गर्भ में शिशु असहज महसूस करता है। साथ ही पेट पर दबाव पड़ने के कारण महिला को भी दिक्कत महसूस हो सकती है ऐसे में महिला को अपने साइज से थोड़े खुले और आरामदायक कपडे पहनने चाहिए। इसके अलावा महिला को जूते चप्पल भी आरामदायक ही पहनने चाहिए ताकि महिला को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

ज्यादा शोर में नहीं जाएँ

गर्भवती महिला ऐसी किसी जगह पर नहीं जाएँ जहां पर ज्यादा शोर हो जैसे की जहां पर बहुत तेज गाने बज रहे हो। क्योंकि ऐसी जगह पर जाने के कारण गर्भ में पल रह शिशु की सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में यदि आप घर में भी गाने सुनने का मन है तो बहुत धीमी आवाज़ में ही संगीत सुनना चाहिए।

तो यह हैं कुछ काम जो प्रेगनेंसी के सातवें महीने में गर्भवती महिला को नहीं करने चाहिए। क्योंकि इन्हे करने से गर्भवती महिला और शिशु दोनों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और शरीर में कोई भी असहज लक्षण महसूस होने पर डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे को हर परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकें।

Precaution for seventh month of pregnancy

सर्दियों में प्रेग्नेंट महिला को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?

गर्भावस्था के दौरान महिला को बदलते मौसम के अनुसार अपनी केयर के तरीके, अपने रहन सहन के तरीके, खान पान के तरीके में बदलाव करने की जरुरत होती है। ताकि माँ व् बच्चे के स्वास्थ्य पर बदलते मौसम का बुरा असर नहीं पड़े और माँ व् बच्चा दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें। जैसा की आप सभी जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का सबसे अधिक महत्व होता है।

तो ऐसे में जब सर्दियों का मौसम आता है तो महिला को अपने खान पान से जुडी कुछ बातों का ध्यान रखने की जरुरत होती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान सर्दियों के मौसम में किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और क्या खाएं व् क्या नहीं आदि के बारे में बताने जा रहे हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • प्रेग्नेंट महिला के लिए खान पान का ध्यान रखना क्यों है जरुरी?
  • सर्दियों के मौसम में क्या खाएं गर्भवती महिला?
  • सर्दियों के मौसम में क्या नहीं खाएं गर्भवती महिला?
  • ठंड के मौसम में गर्भवती महिला ऐसे रखें अपना ध्यान?
  • सर्दी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने के टिप्स

प्रेग्नेंट महिला के लिए खान पान का ध्यान रखना क्यों है जरुरी?

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं। साथ ही गर्भ में पल रहा शिशु भी अपने विकास के लिए पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। ऐसे में महिला को शारीरिक रूप से फिट रहने और गर्भ में शिशु की जरूरतों को पूरा करने के लिए पोषक तत्वों की जरुरत होती है। और यह सभी पोषक तत्व महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट से मिल सकते हैं। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए खान पान का ध्यान रखना जरुरी होता है ताकि शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो। और प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे को हर परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकें।

सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला क्या खाएं?

प्रेगनेंसी के दौरान खाना पीना जितना जरुरी होता है उतना ही इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी होता है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए क्या खाना चाहिए। ताकि माँ व् बच्चे को किसी भी तरीके की दिक्कत नहीं हो। तो आइये अब जानते हैं की सर्दियों के मौसम में प्रेग्नेंट महिला को क्या खाना चाहिए।

खट्टे फल

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खट्टे फल जैसे की मौसमी, संतरा, किन्नू, कीवी, अमरुद आदि का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि इसमें विटामिन सी मौजूद होता है जो की एक बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट होता है। ऐसे में इन फलों का सेवन करने से भरपूर मात्रा में विटामिन सी मिलता है जिससे महिला को सर्दियों में इन्फेक्शन के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही खट्टे फलों में फोलेट, फाइबर व् अन्य मिनरल्स मौजूद होते हैं जो की प्रेगनेंसी के दौरान जरुरी होते हैं।

गाजर

सर्दियों के मौसम में गाजर आपको बहुत आसानी से मिल जाती है और गाजर का सेवन करना प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि गाजर में विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी, विटामिन के, विटामिन डी, फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए जरुरी होते हैं साथ ही इसके सेवन महिला की इम्युनिटी भी मजबूत होती है। जिससे महिला को सर्दियों में होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही प्रेग्नेंट महिला गाजर को गाजर के जूस, सलाद, सब्ज़ी, आदि के रूप में अपनी डाइट में शामिल कर सकती है।

मूली

ठंड का मौसम आते ही मार्किट में मूली भी आ जाती है और मूली के आते ही अधिकतर सभी को मूली के पराठे खाने की क्रेविंग होना आम बात होती है। और प्रेग्नेंट महिला के लिए तो सर्दियों के मौसम में मूली का सेवन करना बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान पेट सम्बन्धी समस्या होना आम बात होती है और मूली में फाइबर की मात्रा भरपूर होती है।

ऐसे में मूली का सेवन करने से महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा सर्दियों के मौसम में पानी पीने की इच्छा भी कम ही होती है ऐसे में मूली का सेवन करने से महिला को हाइड्रेट रहने में भी मदद मिलती है। इसके अलावा मूली में पोटैशियम, कैल्शियम, विटामिन सी, फोलेट, थाइमिन जैसे पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए हेल्दी होते हैं।

शकरकंदी

सर्दियों के मौसम में शकरकंदी भी मार्किट में आ जाती है जिसे आप स्वीट पोटैटो भी कहते हैं। और स्वीट पोटैटो का सेवन करना प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें थाइमिन, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी, विटामिन सी, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो सर्दियों के मौसम में महिला की इम्युनिटी को मजबूत बनाएं रखने के साथ इन्फेक्शन से सुरक्षित रखने में भी मदद करते हैं। इसके अलावा और भी सेहत सम्बन्धी फायदे शकरकंदी का सेवन करने से माँ व् बच्चे को मिलते हैं। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को शकरकंदी का सेवन जरूर करना चाहिए।

ड्राई फ्रूट्स

सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला को ड्राई फ्रूट्स का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि ड्राई फ्रूट्स में पोषक तत्व जैसे की आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, मैगनीज़, पोटैशियम, आदि भरपूर मात्रा में शामिल होता है। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु के लिए फायदेमंद होते हैं। साथ ही ड्राई फ्रूट्स की तासीर थोड़ी गर्म होती है ऐसे में ड्राई फ्रूट्स का सेवन करने से सर्दियों के मौसम में शरीर को ठंड व् ठंड के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

केसर मिल्क

सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला चाहे तो केसर मिल्क का सेवन भी कर सकती है। क्योंकि केसर मिल्क माँ व् बच्चे दोनों की सेहत को बेहतर रखने में मदद करता है। साथ ही केसर मिल्क पीने से महिला की इम्युनिटी बढ़ती है जिससे सर्दियों के कारण होने वाली दिक्कतों से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

हरी सब्जियां

ठंड का मौसम आते हैं आपको मार्किट में हर तरीके की हरी सब्ज़ी मिल जाती है और हरी सब्जियां आयरन, फोलेट, फाइबर, कैल्शियम, विटामिन्स का बेहतरीन स्त्रोत होती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने, महिला की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने और गर्भ ने पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। इसीलिए हो सके तो गर्भवती महिला को हरी सब्ज़ी का सेवन जरूर करना चाहिए।

अंडा व् नॉन वेज

प्रेगनेंसी के दौरान अंडा व् नॉन वेज खाना बिल्कुल सेफ होता है लेकिन इसकी तासीर थोड़ी गर्म होने के कारण गर्मियों में इन्हे खाने की इच्छा थोड़ी कम होती है। ऐसे में सर्दियों के मौसम में महिला को इनका सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि यह प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, फोलेट, फैटी एसिड्स जैसे पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं। जो गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। साथ ही सर्दियों में इनका सेवन करने से शरीर को गर्माहट मिलती है जिससे सर्दी के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला क्या नहीं खाएं?

प्रेग्नेंट महिला को जितना इस बता का ध्यान रखना जरुरी है की महिला को सर्दी के मौसम में क्या खाना चाहिए जिससे माँ व् बच्चे को फायदा मिलें। उतना ही महिला के लिए इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी है की गर्भवती महिला को क्या नहीं खाना चाहिए जिससे गर्भवती महिला या शिशु की सेहत को नुकसान हो। तो आइये अब जानते हैं की गर्भवती महिला को सर्दी के समय क्या नहीं खाना चाहिए।

दही

ठंड के मौसम में महिला चाहे तो दिन के समय एक कटोरी दही का सेवन कर सकती है क्योंकि दही का सेवन करना भी प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होता है। लेकिन गर्भवती महिला को रात के समय गलती से भी दही का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से महिला को खांसी, जुखाम आदि की समस्या हो सकती है।

बासी खाना

सर्दियों के मौसम में खाना जल्दी खराब नहीं होता है यह बिल्कुल सही बता है लेकिन गर्भवती महिला को बासी खाने का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि बासी खाने में पोषक तत्व न के बराबर रह जाते हैं साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान महिला की पाचन क्रिया धीमे काम करती है ऐसे में महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

ज्यादा मीठा

सर्दी के मौसम में मीठा खाने की इच्छा होना स्वाभाविक है लेकिन महिला को अपनी इस इच्छा पर रोक लगानी चाहिए। क्योंकि जरुरत से ज्यादा मीठा खाने के कारण शरीर में पानी की कमी, ब्लड शुगर लेवल बढ़ने जैसी समस्या हो जाती है। जिसकी वजह से महिला व् शिशु दोनों को दिक्कत होने का खतरा बढ़ जाता है।

ज्यादा तला भुना

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कई बार तला भुना खाने का मन करता है और सर्दी के मौसम में तो महिला की यह इच्छा बढ़ सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि गर्भावस्था के दौरान ज्यादा तला भुना खाने की वजह से गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी अधिक हो सकती है।

ठंडा दूध व् दूध से बनी चीजें

सर्दी के मौसम में महिला को ठंडा दूध व् दूध से बनी चीजों का सेवन जरुरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से महिला को कफ की समस्या हो सकती है।

मछली

वैसे प्रेगनेंसी के दौरान महिला नॉन वेज खा सकती है क्योंकि नॉन वेज का सेवन करने से माँ व् बच्चे दोनों की सेहत को फायदा मिलता है। लेकिन गर्भवती महिला को उन मछलियों का सेवन नहीं करना चाहिए जिनमे मर्करी की मात्रा मौजूद होती है। क्योंकि उन मछलियों का सेवन करने से गर्भ पर बुरा असर पड़ता है।

ठंडा पानी व् ठंडी चीजें

गर्भवती महिला को सर्दी के मौसम में ठंडा पानी व् ठंडी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि ठंडी चीजों का सेवन करने से महिला को सर्दी, जुखाम, कफ जैसी परेशानी होने का खतरा अधिक होता है।

ठंड के मौसम में ऐसे रखें गर्भवती महिला अपना ध्यान?

  • सर्दी के मौसम में प्यास नहीं लगना आम बात होती है लेकिन गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की चाहे प्यास लगे या नहीं महिला को दिन भर में आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।
  • ठंड से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को हाथों पैरों को ढक कर रखना चाहिए और गर्म कपडे पहनने चाहिए।
  • सर्दी के मौसम में महिला की चाय कॉफ़ी पीने की इच्छा बढ़ सकती है लेकिन महिला को जरुरत से ज्यादा चाय कॉफ़ी नहीं पीनी चाहिए क्योंकि इसमें कैफीन की अधिकता होती है जिससे महिला की सेहत और बच्चे के विकास पर बुरा असर पड़ सकता है।
  • महिला को नींद भरपूर लेनी चाहिए।
  • गुनगुने पानी का इस्तेमाल करके नहाना चाहिए।
  • ठंड से बचे रहने के लिए महिला को ऐसे आहार लेने चाहिए जिससे महिला की इम्युनिटी मजबूत हो जिससे महिला को संक्रमण के खतरे से बचे रहने में मदद मिल सके।

सर्दी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने के टिप्स

  • ठंड के मौसम में सर्दी के कारण होने वाली परेशानियों का खतरा लगा रहता है ऐसे में महिला को इन परेशानियों से बचे रहने के लिए कुछ टिप्स ध्यान रखने चाहिए। जैसे की:
  • कभी भी बिना गर्म कपड़ों के घर से बाहर नहीं जाना चाहिए।
  • ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए बल्कि हो सके तो पानी को थोड़ा गुनगुना कर लेना चाहिए।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का सेवन समय से करना चाहिए।
  • नींद में लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
  • दिन भर में थोड़ी देर धूप सेंकनी चाहिए।
  • ऐसी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए जिससे आपको गले में इन्फेक्शन होने का खतरा हो।
  • अपना रूटीन चेकअप करवाना बिल्कुल नहीं भूलें और कोई भी दिक्कत हो तो एक बार डॉक्टर की राय जरूर लें।

तो यह हैं प्रेग्नेंट महिला को सर्दियों के मौसम में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, क्या खाना चाहिए, क्या नहीं खाना चाहिए, आदि। यदि महिला इन सभी बातों का ध्यान रखती है तो इससे गर्भवती महिला को सर्दियों के मौसम में होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

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प्रेग्नेंट महिला को रात के समय बाहर क्यों नहीं निकलना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है। जैसे की महिला को उठने बैठने का ध्यान रखना चाहिए, सोने की पोजीशन का ध्यान रखना चाहिए, खान पान का ध्यान रखना चाहिए जैसे की क्या खाएं क्या नहीं कितनी मात्रा में खाएं आदि, प्रेगनेंसी में कौन सा व्यायाम करना चाहिए, गर्भावस्था में किन कामों को करना चाहिए और किन कामों को करने से बचना चाहिए, आदि।

क्योंकि जितना महिला प्रेगनेंसी के दौरान हर बात का ध्यान रखती है उतना ही गर्भवती महिला को फिट व् स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला के लिए कुछ ऐसे ही टिप्स बताने जा रहे हैं। की गर्भावस्था के दौरान महिला को रात के समय बाहर क्यों नहीं जाना चाहिए।

गर्भवती महिला रात के समय बाहर क्यों नहीं जाये?

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को कोई बड़ा किसी तरह की सलाह दे तो महिला को उसे जरूर मानना चाहिए और वो आपको सलाह क्यों दे रहे हैं इसका कारण भी आपको पता करना चाहिए। जैसे की रात के समय महिला को मना किया जाता है की वो घर से बाहर नहीं जाएँ, ऐसा क्यों कहा जाता है आइये जानते हैं।

गिरने का होता है डर

रात के समय बाहर अँधेरा होता है ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला बाहर जाती है तो महिला यदि किसी ईंट पत्थर से टकरा जाती है तो इसकी वजह से महिला को गिरने का खतरा होता है। और महिला के गिरने के कारण गर्भवती महिला को चोट लगने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी चोट लगने का खतरा हो जाता है। ऐसे में रात के समय महिला को बाहर निकलने से बचना चाहिए।

टोने टोटके का होता है डर

पुराने समय में टोने टोटके को बहुत मानते थे और कुछ लोग आज भी इसे बहुत मानते हैं। और ऐसा माना जाता है की रात के समय इन बुरी शक्तियों का प्रभाव ज्यादा सक्रिय होता है। ऐसे में इनके कारण महिला को कोई दिक्कत नहीं हो और शिशु पर इसका कोई बुरा असर नहीं पड़े तो इसके लिए महिला को रात को बाहर निकलने के लिए मना किया जाता है।

संक्रमण का डर होता है

रात के समय मच्छर व् अन्य कीट पतंगे बाहर होते हैं और यदि वह गर्भवती महिला को काट लेते हैं तो इनके कारण महिला को संक्रमण जैसे की मलेरिया, स्किन एलर्जी आदि होने का खतरा होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इस तरह की दिक्कतें नहीं हो इसके लिए रात के समय बिल्कुल भी बाहर नहीं निकलना चाहिए।

कुत्ते के काटने का डर

रात के समय रोड पर कुत्ते आदि होते हैं और रात के समय तो वो हर आने जाने वाले पर भोकने लगते हैं और उनके पीछे दौड़ते हैं। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला बाहर निकलती है तो कुत्ते के काटने का डर होता है। और कुत्ते के काटने के कारण महिला को बीमारी होने का खतरा भी बढ़ जाता है जिसका असर शिशु पर भी पड़ सकता है ऐसे में इस कारण भी महिला को रात के समय बाहर न जाने की सलाह दी जाती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को रात के समय बाहर निकलने के लिए मना किया जाता है। यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आपको भी रात को बाहर निकलने से बचना चाहिए इसके अलावा यदि आपको खाना खाने के बाद वाक करने की आदत हो तो ज्यादा दूर नहीं जाये बल्कि घर के आस पास ही वाक कर लें।

प्रेगनेंसी में केसर कौन से महीने से खाना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान खान पान का सबसे ज्यादा महत्व होता है। क्योंकि जितना महिला खान पान सही तरीके से लेती है, खाने पीने की सभी चीजों की जानकारी होने के बाद ही उन्हें अपनी डाइट में शामिल करने के साथ सही मात्रा में उनका सेवन करती है। उतना ही महिला व् शिशु को फायदा मिलता है।

साथ ही प्रेग्नेंट महिला के लिए यह भी जरुरी होता है की महिला जो भी खा रही है महिला को उसकी सही मात्रा व् खाने का सही समय जैसे की कौन से महीने में वो चीज खानी चाहिए उसकी जानकारी लेनी चाहिए। क्योंकि कई बार जरुरत से ज्यादा खाने या समय से पहले उस चीज का सेवन करने से महिला को शिशु को नुकसान हो सकता है।

तो लीजिये आज इस आर्टिकल में हम आपको केसर के बारे में बताने जा रहे हैं क्योंकि केसर जितना प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होता है उतना ही यदि इसे सही समय से पहले लिए जाये तो नुकसान भी हो सकता है।

क्या प्रेगनेंसी में केसर खाना सेफ होता है?

जी हाँ, यदि आप प्रेगनेंसी में केसर खाना चाहती है तो खा सकती है क्योंकि प्रेगनेंसी में केसर खाना सेफ होता है। लेकिन केसर का सेवन करने से पहले यह जानना बहुत जरुरी होता है की केसर को कौन से महीने से खाना शुरू करना चाहिए और कितनी मात्रा में खाना चाहिए।

गर्भावस्था में केसर कब खाना शुरू करना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान केसर का सेवन पहली तिमाही में बिल्कुल नहीं करना चाहिए क्योंकि केसर की तासीर गर्म होती है ऐसे में केसर का सेवन करने से ब्लीडिंग होने का खतरा होता है। साथ ही प्रेगनेंसी की दसूरी तिमाही की शुरुआत में भी केसर का सेवन करने से बचना चाहिए लेकिन प्रेगनेंसी के छठे महीने में महिला केसर का सेवन कर सकती है। उसके बाद प्रेगनेंसी के आखिर तक महिला केसर का सेवन कर सकती है।

कितनी मात्रा में गर्भवती महिला करें केसर का सेवन?

प्रेग्नेंट महिला को दिन भर में तीन से चार रेशे ही केसर का सेवन करना चाहिए इससे ज्यादा केसर का सेवन गर्भवती महिला और शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है।

प्रेगनेंसी में केसर खाने के फायदे

यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान केसर का सेवन करती है तो इससे महिला और शिशु दोनों को बहुत से फायदे मिलते हैं। जैसे की:

हाई ब्लड प्रैशर से राहत

गर्भवती महिला यदि केसर का सेवन करती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। जिससे हाई ब्लड प्रैशर के कारण होने वाली परेशानियों से माँ व् बच्चा दोनों बचे रहते हैं।

मूड स्विंग्स के लिए है बेहतर

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से महिला को मूड स्विंग्स हो सकते हैं। जैसे की महिला को गुस्सा चिड़चिड़ाहट आदि हो सकती है। ऐसे में यदि महिला केसर का सेवन करती है तो इससे महिला को मूड स्विंग्स की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

शरीर में आयरन सही रहता है

केसर आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होता है और प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे दोनों के लिए आयरन बहुत जरुरी होता है। ऐसे में शरीर में आयरन की कमी नहीं हो और माँ व् बच्चे को आयरन की वजह से किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े इसके लिए महिला को केसर का सेवन जरूर करना चाहिए।

पेट के लिए होता है बेहतर

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पाचन से जुडी समस्या, पेट में ऐंठन आदि की समस्या हो सकती है। जिसकी वजह से महिला परेशान हो सकती है। ऐसे में यदि महिला केसर का सेवन करती है तो इससे महिला को ऐंठन व् पेट से जुडी अन्य परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

सामान्य प्रसव की सम्भावना बढ़ती है

यदि प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में नियमित केसर मिल्क का सेवन करती है तो ऐसा माना जाता है की इससे महिला की डिलीवरी नोर्मल होने के चांस बढ़ते हैं।

शिशु की रंगत निखरती है

ऐसा माना जाता है की गर्भवती महिला यदि केसर मिल्क का सेवन करती है तो इससे महिला का होने वाला शिशु गोरा पैदा होता है। ऐसा पूरी तरह सच हो ऐसा जरुरी नहीं है।

अच्छी नींद आती है

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में वजन बढ़ने के कारण महिला को बेहतर नींद लेने में दिक्कत हो सकती है ऐसे में यदि महिला केसर मिल्क का सेवन करती है तो इससे महिला को अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है।

ब्लड फ्लो अच्छे से होता है

यदि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं होता है तो इस कारण गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को इस समस्या से बचे रहने के लिए केसर मिल्क का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि केसर शरीर में ब्लड फ्लो को बेहतर तरीके से करवाने में मदद करता है।

हदय सम्बन्धी समस्याओं से बचाव

केसर का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में ब्लड फ्लो बेहतर तरीके से होता है जिससे हदय को भी फायदा पहुँचता है। और प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हदय सम्बन्धी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

किन गर्भवती महिलाओं को केसर का सेवन नहीं करना चाहिए?

जिन महिलाओं को पहले गर्भपात, प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग, समय से पहले डिलीवरी जैसी समस्या रही हो उन महिलाओं को केसर का सेवन करने से बचना चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान केसर का सेवन करने से जुडी जानकारी ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी केसर के सेवन से पहले इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको या आपके होने वाले बच्चे को केसर का सेवन करने से कोई दिक्कत नहीं हो।

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