गर्भवस्था में अक्सर कुछ महिलाओं को बार बार पेशाब आता है। कुछ महिलाओं को दिन रात दोनों समय में बार बार बाथरूम जाने की आवश्यकता पड़ती है। प्रेगनेंसी में शुरूआती तीन महीनों में बार बार यूरिनेशन की समस्या साधारण माना जाता है। उसके बाद इस समस्या में कुछ दिनों के लिए आप आराम महसूस करेंगे। पर यह आराम ज्यादा दिनों के लिए नहीं होता है। गर्भावस्था के आखिरी के तीन महीनों में जब गर्भाशय का आकर बढ़ने लगता है। भूर्ण का विकास अच्छे से होने लगता है तब भी बार बार पेशाब आने के समस्या आ जाती है।
बताया जाता के जब बॉडी में ब्लड की मात्रा बढ़ जाती है। इस एक्स्ट्रा ब्लड फ्लो के लिए किडनी को ज्यादा फ्लूइड पैदा करना पड़ता है, और वही एक्स्ट्रा फ्लूइड हमारे ब्लैडर में आकर इकट्ठा हो जाता है जिस कारण हमे बार बार पेशाब आने लगता है। इसके अलावा गर्भावस्था में एच सी जी हार्मोन्स बढ़ने से भी बार बार यूरिनेशन की समस्या होने लगती है। जब हमारा गर्भाशय का आकर बढ़ जाता है तो ब्लैडर में यूरिन के लिए बहुत कम जगह बचती है इस कारण में भी हर थोड़ी देर में हमें पेशाब आने लगता है।
इन सभी कारणों के अतिरिक्त हर महिला के मेडिकल कंडीशन अलग होती है। और हर गर्भवती महिला की गर्भावस्था की प्रक्रिया भी दूसरी महिलाओं से अलग होती है। ऐसा जरुरी नहीं के हर गर्भवती महिला को शुरआती दिनों में बार बार यूरिनेशन की प्रॉब्लम हो ही। गर्भवस्था में शुरूआती महीनों और आखिरी के महीनों में अगर बार बार पेशाब ना आये तो इसका मतलब ये नहीं कुछ चिंता की बात है। फिर भी अगर आप को गर्भावस्था के दौरान किसी भी चीज को लेकर कुछ सवाल हो तो अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें। प्रेगनेंसी में किसी भी बात स्ट्रेस ना लें।
इसके अलावा बार बार पेशाब कर के आने के बाद भी आपको ऐसा लगे की अभी भी आपका ब्लैडर फूल है। या फिर यूरिनेशन करते समय किसी तरह की कोई परेशानी हो तो अपने डॉक्टर से जरूर मिले। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
टीवी में रिफाइंड के लिए तरह तरह के विज्ञापन देखकर आपको चुनने में मुश्किल होगी की कौन सा रिफाइंड आपके लिए बेस्ट हैं, क्योंकि कुछ आपके हार्ट को हैल्थी रखते है, तो कुछ आप्केशरीर में विटामिन्स की कमी को पूरा करते है, लेकिन आज आपको ये बात जानकार हैरानी होगी की रिफाइंड आपकी सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक है, और इसका कारण होता है की इसे बनाने के लिए बहुत से रसायनो का इस्तेमाल किया जाता है, और वो असंतृप्त होते है जिसके कारण वो आपले शरीर के लिए किसी जहर से कम नहीं होते है, और इसके कारण आपके शरीर को जरुरी फैटी एसिड नहीं मिलते है, जिसके कारण इसके अधिक सेवन से आप अपने शरीर में बीमारियों को बुलावा देते है, जैसे की जोड़ो का दर्द, स्किन प्रॉब्लम, आदि।
सबसे पहले तिलहन का प्रयोग किया जाता है जो की इसे रिफाइन करता है, और इसे कई बार बहुत अधिक तापमान पर गरम भी किया जाता है, और उसके बाद हेग्जेन का इस्तेमाल बीजो से अच्छे से तेल निकालने के लिए किया जाता है, जब यह दोनों काम हो जाते है तो उसके बाद इसमें कई और रसायन जैसे फॉस्फोरिक एसिड, कास्टिक सोडा, ब्लीचिंग क्लेंज आदि का इस्तेमाल किया जाता है, और इसके बाद यदि निर्माता खराब बीजो से भी रिफाइंड यदि निकालता है तो आपको उसका पता नहीं चलता है, क्योंकि चेमिकल्स को मिलाने के बाद रिफाइंड का रेंग पारदर्शी हो जाता है।
रिफाइंड तेल से होने वाले नुकसान:-
जोड़ो में दर्द की समस्या होती है:-
अधिक रिफाइंड का सेवन करने से आपको जॉइंट पेन की समस्या हो सकती है, क्योंकि इसके कारण आपके शरीर में असंतृप्त वसा का जमाव होने लगता है, जिसके कारण धीरे धीरे यह आपके जॉइंट पर असर डालता है और आपको इस समस्या का सामना करना पड़ता है।
ऐसा एक शोध में बताया गया है की रिफाइंड का सेवन करने से आपके मस्तिष्क पर भी बुरा असर पड़ता है, यदि आप इसका बहुत अधिक मात्रा में सेवन करते हैं तो इससे आपकी सोचने की क्षमता पर असर पड़ता है।
कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है:-
कई कंपनी ये दावा करती है की इससे आपको हदय सम्बन्धी समस्या नहीं होती है, क्योंकि यह आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है, लेकिन असंतृप्त वसा आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल को बढ़ता है, जिससे आपके हार्ट पर भी बुरा असर पड़ता है।
वजन बढ़ता है:-
वसा का अधिक सेवन आपके शरीर में कैलोरी को बढ़ाता है, जिसके कारण आपके शरीर पर चर्बी और वजन बढ़ने की समस्या से आपको परेशान होना पड़ सकता है, इसीलिए जितना हो इसका कम इस्तेमाल करें।
तो ये हैं कुछ रिफाइंड तेल के नुकसान, इसके अलावा यदि आप चाहे तो जैतून, सरसों, नारियल या मूंगफली के तेल का इस्तेमाल कर सकते है, इससे आपके शरीर को बुरे प्रभाव से बचाने में मदद मिलती है।
हर किसी को खूबसूरत दिखने का शौक होता है, और देखा जाये तो ये गलत भी नहीं है परन्तु असमय अपनी स्किन के साथ किसी भी तरह का एक्सपेरिमेंट करने से आपकी ख़ूबसूरती पर बहुत बुरा असर पड़ता है, ज्यादातर टीनएज में आकर लडकियां कई बार अपने आप को खूबसूरत दिखाने के लिए क्रीम, कॉस्मेटिक्स आदि का इस्तेमाल करती है, जिसके कारण समय से पहले ही उनकी स्किन केमिकल से प्रभावित हो जाती है, और दाग, स्पॉट्स आदि होने की सम्भावना भी हो जाती है, क्योंकि तब आपकी स्किन का अच्छे से प्राकृतिक रूप से विकास हो रहा होता है, और आपकी स्किन काफी सेंसिटिव होती है, जिसके कारण आपकी छोटी सी गलती आपकी प्राकृतिक ख़ूबसूरती को भी समय से पहले नष्ट कर सकती है।
ऐसा इसीलिए होता है, क्योंकि टीनएज में आकर जब लडकियां अपने से दूसरे को ज्यादा खूबसूरत देखती है, तो उनके मन भी होता है की वो भी उनकी तरह खूबसूरत दिखें, उस समय जो आप अपने चेहरे के ऊपर एक्सपेरिमेंट करती हैं, और वही आपकी गलती आपकी स्किन को डैमेज करना शुरू कर देती है, तो आइये आज हम टीनएज में लड़कियों को कौन कौन से एक्सपेरिमेंट अपनी स्किन के साथ नहीं करने चाहिए इस बारे में चर्चा करते हैं, और आपको इनको ध्यान में भी रखना चाहिए ताकि आपकी स्किन की प्राकृतिक ख़ूबसूरती का विकास अच्छे से हो सकें।
न करें फेस पैक का इस्तेमाल:-
कई बार लडकियां अपने आप को गोरा बनाने के लिए तरह तरह के फेस पैक का इस्तेमाल करना शुरू कर देती है, जिसके कारण उन्हें लगता है की उनकी स्किन गोरी हो जाएगी, लेकिन उन्हें ये नहीं पता होता है की वो उनकी स्किन को सूट करता है या नहीं, और इसके कारण स्किन पर दाग धब्बे होने लग जाते है, क्योंकि सेंसिटिव स्किन होने के कारण आपकी स्किन उससे बहुत जल्दी प्रभावित हो सकता है।
न करें अधिक केमिकल का इस्तेमाल:-
जो लडकियां समय से पहले अपने चेहरे पर अधिक केमिकल का इस्तेमाल भी करना शुरू कर देती है, उनके साथ भी ये समस्या हो जाती है, जो की गलत होता है, जैसे की अधिक केमिकल युक्त क्रीम का इस्तेमाल करना, टोनर आदि का प्रयोग करना, ऐसा करने से उनकी स्किन की कोमलता भी कम होने लगता है, हाँ लेकिन लगाने के बाद आप एक बार ऐसा महसूस जरुर करेंगे की आप सुन्दर लग रहे है, परन्तु उसके कारण धीरे धीरे स्किन डल होने लग जाती है।
अपनी स्किन के लिए अधिक कॉस्मेटिक्स का इस्तेमाल भी नुकसानदायक होता है, क्योंकि इसमें भी केमिकल अधिक होता है, जो की स्किन पर यदि ज्यादा इस्तेमाल किया जाएँ तो इसके कारण आपकी स्किन धीरे धीरे चमकने की जगह काली पड़ने लग जाती है, यदि आपको आपकी स्किन की कोमलता को बनाएं रखना है और अपनी स्किन की सेंसिटीविटी को हमेशा बरकरार रखना है, तो अधिक कास्मेटिक जैसे फेस पाउडर, होंठो के लिए लिपस्टिक आदि का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए।
गोरा होने की कोशिश में कोई गलती न करें:-
ऐसा जरुरी नहीं है की हर किसी का रंग गोरा ही हो, कई बार सांवला रंग भी हो सकता है और टीनएज में आकार खासकर दूसरों को देखकर हर किसी को लगता है की हमारा भी रंग गोरा होना चाहिए, तो इसी कारण कई बार आप अपनी स्किन के साथ एक्सपेरिमेंट करना शुरू कर देते हैं, जो की आपकी स्किन के लिए नुकसानदायक होता और आपकी स्किन की कोमलता भी कम होने लगती है, इसीलिए अपनी स्किन को गोरा करने के लिए न तो ज्यादा तेजी करें, और न ही किसी ऐड आदि पर विश्वास करके अपनी प्राकृतिक ख़ूबसूरती को भी खराब कर लें।
लड़के भी न करें आपकी स्किन के साथ छेड़छाड़:-
कई बार लड़के भी अपनी ख़ूबसूरती को बढाने के लिए अपनी स्किन के साथ एक्सपेरिमेंट कर देते है, जिसके कारण इनकी स्किन रफ़ होने लगती है, इसके अलावा कई बार लड़के अपनी शेव भी समय से पहले करना शुरू कर देते है, जिसके कारण उनकी स्किन एक तो बहुत जल्दी हार्श हो जाती है, और समय से पहले ही उनकी दाढ़ी भी सख्त आने लगती है, और वो अपनी उम्र से बड़े भी दीखने लगते है, इसीलिए लडको को भी अपनी स्किन की कोमलता को बनाएं रखने के लिए किसी भी तरह का एक्सपेरिमेंट नहीं करना चाहिए।
ब्यूटी ट्रीटमेंट का सहारा न लें:-
अपनी ख़ूबसूरती को निखारने के लिए कई बार लडकियां ब्यूटी ट्रीटमेंट का सहारा भी लेती है, जो की बिलकुल गलत है, ऐसा करने से उनकी स्किन को हर थोड़े समय बार इसकी जरुरत पड़ने लगती है, साथ ही यदि वो यदि ऐसा नहीं करती है, तो इसके कारण उनकी स्किन भद्दी लगने लगती है, इसीलिए समय से पहले अपनी स्किन के साथ जितना हो सकें किसी भी तरह का एक्सपेरिमेंट नहीं करना चाहिए।
बालों के साथ न करें किसी भी तरह के एक्सपेरिमेंट:-
आज कल लड़कियों में अपने बालों को सीधा करने का, उन्हें कलर करने का बहुत शौक होता है, परन्तु क्या आप जानते है ऐसा करने के लिए आप जिन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, उनमे कितना केमिकल होता है, जो की आपके बालों को कितना नुकसान पहुंचा सकता है, इसके कारण आपके बालों के साथ झड़ने, टूटने जैसी समस्या बुइ शुरू हो जाती है, और साथ ही आपके बालों की प्राकृतिक चमक भी कम होने लगती है, इससे बचने के लिए जरुरी है की आप अपने बालों की साफ़ सफाई का ध्यान रखें ताकि उनकी चमक बनी रहें, और उम्र से पहले ही बालों के झड़ने के कारण आपको गंजेपन की समस्या का सामना न करना पड़े।
तो ये कुछ टिप्स है टीनएजर के लिए की उन्हें किस तरह के एक्सपेरिमेंट आपकी स्किन के साथ नहीं करने चाहिए, और यदि वो अपनी ख़ूबसूरती को बढ़ाना भी चाहती है, तो इसके लिए उनकी स्किन का पहले अच्छे से विकास होने दें, और साथ ही त्वचा की नमी को बरकरार रखने के लिए आप मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें, अपनी स्किन को साफ़ रखें, जैसे की फेस वाश आदि का इस्तेमाल करके, इससे आपकी स्किन को हमेशा कोमल और साफ रहने में मदद मिलेगी।
आपके शरीर में मोटापा जैसे ही आता है, वैसे ही धीरे धीरे वो आपके शरीर के सभी अंगो को अपनी चपेट में ले लेता है, और ये भी सच है की पेट और कमर पर जमी चर्बी को कम करने के लिए तो सभी कोशिश करते हैं, परन्तु क्या आपने कभी गर्दन पर जमी चर्बी के बारे में सोचा है, गर्दन के आस पास जमी चर्बी का कारण आपका गलत लाइफस्टाइल, खाने पीने में असावधानी, बैठने का सही तरीका न होना, इसके कारण आपको गर्दन पर जमी चर्बी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन आप अपने खान पान में बदलाव, योगा, व्यायाम आदि नियमित करके थोड़े ही दिनों में इस समस्या से राहत पा सकते है, इसके अलावा और भी कई उपाय हैं आइये विस्तार से जानते हैं की वो उपाय कौन से है।
गार्डन का मोटापा कम करने के लिए पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें, इससे आपकी स्किन को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है, साथ ही इससे आपकी स्किन में लचीलापन आता है, जिससे चर्बी कम होती है, और आपकी स्किन लटकती भी नहीं है, इसके अलावा आप घर में बना हुआ बिना शुगर के जूस का सेवन करें, शराब, सोडा जैसे पेय पदार्थो का सेवन न करें, आपको फायदा मिलेगा।
अपने खान पान में बदलाव करें:-
अनियमित खान पान की आदत को छोड़ दें, और अपने आहार में साबुत अनाज, सब्जियां, फलों, बिना चर्बी के मीट आदि को शामिल करें, और हर थोड़ी देर में इनका सेवन करें, ऐसा करने से आपकी गर्दन पर जमी चर्बी को कम होने में मदद मिलेगी।
अधिक तले हुए भोजन का सेवन करें:-
जितना हो सकें अधिक तले हुए भोजन का सेवन न करें, क्योंकि यह आपकी गर्दन के साथ आपकी बॉडी में भी बहुत तेजी से फैट को बढ़ने में मदद करता है, साथ आज कल लोग पैक्ड सामान का सेवन कम से कम करें, यदि आप इसे खाना छोड़ देते है तो आपको इसका असर आपके शरीर के साथ गर्दन में भी बहुत तेजी से दिखाई देता है, और आपको गर्दन पर जमी चर्बी से निजात पाने में मदद मिलती है।
बिना चर्बी के मीट में प्रोटीन की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो को आपके शरीर में नई कोशिकाओं का निर्माण करने में आपकी मदद करते है, जिससे आपके शरीर में जमी चर्बी को कम होने में मदद मिलती है, इसीलिए आपको रेड मीट और बीफ नहीं खाना चाहिए बल्कि मछली और चिकन का सेवन करना चाहिए इससे आपको और फायदा होता है, साथ ही आपको नमक का सेवन कम से कम करना चाहिए, क्योंकि नमक के कारण आपके शरीर में पानी जमा होने लगता है, जिससे भी आपको चर्बी की परेशानी हो सकती है।
व्यायाम व् योगासन करें:-
गर्दन का फैट करने के लिए आपको योगा करना चाहिए, व्यायाम करना चाहिए इससे आपके शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, साथ ही मांसपेशियों में भी खिचांव उत्त्पन्न होता है, जिसके कारण आपके शरीर में जमी हुई चर्बी कम होने लगती है, कम से कम आधे घंटे तक इसे नियमित करना चाहिए आपको थोड़े ही दिनों में इसका असर दिखाई देगा।
गर्दन को सीधा करके बैठे:-
अपने बैठने चलने के तरीके में भी सुधार करें, क्योंकि गर्दन को झुकाकर बैठने के कारण भी आपको गर्दन पर चर्बी जमने लगती है, लेकिन यदि आप हमेशा अपनी गर्दन को सीधा करके बैठते है, तो इसके कारण आपको गर्दन पर जमी चर्बी को कम करने में मदद मिलती है।
मसाज करें:-
गर्दन पर जमी चर्बी को कम करने के लिए आपको गर्दन की मसाज करनी चाहिए, मसाज करने से आपका ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होती है, साथ ही आपकी स्किन की लचक को बढ़ने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपकी गर्दन पर जमी अतिरिक्त चर्बी कम होती है, ऐसा आपको नियमित करना चाहिए, और इसके लिए आप किसी भी तेल का इस्तेमाल कर सकते है, साथ ही हो सकें तो तेल को हल्का गुनगुना कर लें।
तो ये ही कुछ उपाय जिनका इस्तेमाल करने से आपको अपने गर्दन पर जमे फैट को कम करने में मदद मिलती है, और इन्हे आपको कुछ दिनों तक नियमित रूप से करना होगा तभी ये आपको तेजी से असर करेंगे, एक दो दिन में आपको फायदा मिलेगा, यदि आप इसे कुछ दिनों तक नियमित करते है तो इससे फैट कम होने के साथ आपकी गर्दन को भी एक शेप मिलती है।
प्रेगनेंसी के दौरान यह काम करना आपके बच्चे के लिए हो सकता है खतरनाक, प्रेगनेंसी टिप्स, गर्भवती महिला प्रेगनेंसी में यह न करे, गर्भावस्था के दौरान गर्भ में शिशु को नुकसान पहुंचा सकते हैं यह काम, प्रेगनेंसी के दौरान इन बातों का ध्यान रखें
प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कई बार अपनी इच्छा का त्याग करना पड़ता है, क्योंकि महिला यदि ऐसा कोई काम करती है जिससे उसकी सेहत पर असर पड़ता है, तो इससे केवल महिला को ही परेशानी नहीं होती है बल्कि इसके कारण कई बार गर्भ में पल रहे शिशु पर भी बुरा असर पड़ सकता है। जैसे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने खान पान में विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है और उन चीजों का सेवन करने से परहेज करना पड़ता है जिससे गर्भ में शिशु के विकास में बाधा उत्पन्न होती है। वैसे ही कुछ काम आज हम आपको बताने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला को नहीं करने चाहिए क्योंकि यह शिशु के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
साइकिलिंग
फिटनेस के लिए साइकिलिंग एक बहुत अच्छा व्यायाम है लेकिन गर्भवती महिला को यह नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे जांघो की मांसपेशियों में खिंचाव होने के साथ बढे हुए पेट के साथ साइकिलिंग करने में संतुलन बिगड़ने का खतरा भी रहता है। जिससे गर्भ में शिशु को खतरा हो सकता है।
ज्यादा खेले कूदे नहीं
फूटबाल, वालीबॉल, आदि खेलो को भी प्रेगनेंसी के दौरान महिला को नहीं खेलना चाहिए क्योंकि इसके कारण भी पेट पर चोट लगने का खतरा बना रहता है। जिसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को परेशानी का अनुभव हो सकता है।
भार उठाने, पेट के बल लगने वाला व्यायाम
गर्भवती महिला को व्यायाम न करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि अधिक व्यायाम महिला के साथ शिशु के लिए भी हानिकारक हो सकता है। ऐसे में वॉक अदि करना महिला के लिए जहां फायदेमंद होता है। वहीँ गर्भवती महिला को भार उठाने, पेट के बल लेटने वाले व्यायाम आदि को नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे गर्भ में पल रहे शिशु को असहज महसूस हो सकता है।
हॉट बाथ
वैसे तो गरम पानी में नहाने से शरीर की सारी थकान मिट जाती है और रिलैक्स महसूस होता है, लेकिन गर्भवती महिला का गरम पानी से नहाना हानिकारक हो सकता है। खासकर प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने में यदि गर्भवती महिला अधिक गरम पानी से नहाती है तो इससे गर्भपात होने के चांस बढ़ जाते हैं।
घर के काम में सावधानी बरतें
प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को घर का काम करने में भी सावधानी बरतनी चाहिए जैसे की बैठकर पोछा नहीं लगाना चाहिए, पैरों के भार बैठकर कपडे नहीं धोने चाहिए, घर में पालतू जानवर का काम करने से बचना चाहिए, झुककर सामान आदि नहीं उठाना चाहिए, एक ही जगह बहुत देर तक खड़े नहीं रहना चाहिए, आदि। क्योंकि इन कामो को करने से भी पेट पर जोर पड़ता है जो गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंचा सकते है।
कठिन योगासन भी न करें
गर्भवती महिला यदि योगासन करती है तो ऐसा करने से महिला को शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी फ्रेश रहने में मदद मिलती है। लेकिन योगासन करते समय महिला को ध्यान रखना चाहिए की आप ज्यादा कठिन योगासन भी न करें क्योंकि यह गर्भ में शिशु पर बुरा असर डाल सकता है।
तनाव न लें
बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव, प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों के कारण कुछ गर्भवती महिलाएं तनाव में भी आ जाती है। लेकिन तनाव के कारण गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी समस्या होने के साथ शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है, जैसे की समय से पहले ही प्रसव का होना, शिशु के वजन में कमी आना, आदि।
यात्रा करना
गर्भवती महिला को यात्रा भी करने से बचना चाहिए क्योंकि यात्रा के कारण पेट पर दबाव या झटके आदि लगने के कारण गर्भ में शिशु को परेशानी हो सकती है। खासकर पहले और तीसरे ट्राइमेस्टर में यात्रा करने से बचना चाहिए।
गलत खान पान
कुछ चीजें होती है जिनका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने से बचना चाहिए, जैसे की कच्चा पपीता, अनानास, जंक फ़ूड, चाइनीज़, आदि। क्योंकि इनके सेवन न केवल शिशु के विकास में समस्या उत्पन्न होती है बल्कि शुरुआत के दिनों में यह गर्भपात का कारण भी बन सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए।
तो यह हैं कुछ काम जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को करने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है। और यदि आप चाहती है की प्रेगनेंसी के दौरान आपको स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में शिशु का विकास भी अच्छे से हो सके तो जितना हो सके इन कामों को करने से बचना चाहिए।
गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला में बहुत से बदलाव आते हैं यह बदलाव बॉडी में अंदर होने वाले हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं, शारीरिक रूप से महिला में बदलाव आ सकता है व् कुछ गर्भवती महिलाएं मानसिक रूप से भी बदलाव का अनुभव कर सकती है। और इन बदलाव के कारण महिला को प्रेगनेंसी के समय बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। जैसे की उल्टी की समस्या, वजन बढ़ना, बॉडी में दर्द, मॉर्निंग सिकनेस, कब्ज़ व् एसिडिटी, मूड स्विंग्स, खाने का मन न करना, भूख अधिक लगना आदि।
तो लीजिये आज हम प्रेगनेंसी के दौरान भूख से जुडी कुछ बातें करने का रहे हैं। प्रेगनेंसी के दौरान हर महिला के शरीर में अलग अलग लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे की कुछ महिलाओं को बहुत अधिक भूख लगती है तो कुछ महिलाओं को कम। ऐसे में यह दोनों ही परेशानी का विषय हो सकते हैं, क्योंकि अधिक भोजन करने के कारण वजन बढ़ने के कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, और भूख में कमी होने के कारण गर्भवती महिला को पोषक तत्व भरपूर मात्रा में नहीं मिलते हैं जिसके कारण शिशु के विकास में कमी जैसी समस्या हो सकती है।
प्रेग्नेंट महिला को भूख नहीं लगने के कारण
बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण।
प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों की वजह से।
तनाव के कारण।
उल्टियों की समस्या अधिक होने की वजह से।
खाने की गंध से एलर्जी होने के कारण।
कब्ज़ व् एसिडिटी की समस्या अधिक होने के कारण।
प्रेगनेंसी में भूख न लगने पर क्या करें?
यदि आप गर्भवती है और आप भी प्रेगनेंसी के दौरान भूख की कमी की समस्या से परेशान हैं तो आपको इस परेशानी का इलाज जल्द से जल्द करना चाहिए। क्योंकि यदि गर्भवती महिला अपने खाने पीने का ध्यान नहीं रखती है तो इससे गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में कमी जैसी परेशानी भी हो सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की आप प्रेगनेंसी के दौरान भूख न लगने की समस्या से बचने के लिए आप क्या कर सकते हैं।
थोड़ा थोड़ा खाएं
प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है जिसके कारण भोजन को पचाने में समय लगता है, ऐसे में महिला को बड़े बड़े मील लेने की बजाय दिन में पांच से छह बार थोड़ा थोड़ा करके खाना चाहिए। ऐसा करने से भोजन को आसानी से पचाने में मदद मिलेगी, जिससे आपको भूख का अहसास भी बढ़ने लगेगा।
हल्का आहार
प्रेग्नेंट महिला को अपने आहार में पोषक तत्वों की मात्रा को भरपूर रखना चाहिए और हल्के आहार का सेवन करना चाहिए। हल्के आहार का मतलब होता है जो पचने में आसान हो जैसे की उबला आलू, दही, केले, चावल, दालें, तरल पदार्थों की अधिकता वाले फल, दलिया, ओट्स आदि। यह सब पोषक तत्वों से समृद्ध होने के साथ पचने में भी आसान होते हैं।
तरल पदार्थ
बॉडी में पानी की मात्रा का भरपूर होने के कारण यह बॉडी से विषैले तत्वों को बाहर निकालने के साथ पेट की अच्छे से सफाई में मदद करता है। जिससे गर्भवती महिला को खाने को आसानी से हज़म करने में मदद मिलती है और भूख की कमी की परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।
कब्ज़ व् एसिडिटी
कब्ज़ व् एसिडिटी की समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी गर्भवती महिलाएं परेशान रहती है। इस परेशानी के कारण महिला हमेशा पेट को भरा हुआ महसूस करती है साथ ही एसिडिटी के कारण सीने में जलन, खट्टी डकार जैसी परेशानी होने के कारण महिला की कुछ खाने की इच्छा नहीं हो सकती है। ऐसे में कब्ज़ व् एसिडिटी की समस्या से बचने के लिए महिला को फाइबर युक्त आहार का सेवन करना चाहिए, ऐसा करने से पेट को साफ़ करने में मदद मिलती है और पाचन क्रिया को भी बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है जिससे प्रेग्नेंट महिला को भूख की कमी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
मसालेदार व् जंक फ़ूड
बाहर का खाना, तेलीय आहार, मसालेदार भोजन, मिर्ची युक्त आहार का सेवन करने से भी गर्भवती महिला को बचना चाहिए क्योंकि ऐसे भोजन को पचाने में मुश्किल होती है, साथ ही इसके कारण गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में भूख की कमी की समस्या से बचने के लिए और पेट सम्बन्धी विकार से सुरक्षित रहने के लिए गर्भवती महिला को ज्यादा मसालेदार आहार का सेवन नहीं करना चाहिए।
अपनी पसंद का बनाएं
कुछ अलग खाने की इच्छा होने के कारण और अपने स्वाद अनुसार आहार न मिलने की वजह से भी गर्भवती महिला का खाने का मन नहीं कर सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपनी पसंद का आहार बनाकर उसका सेवन करना चाहिए, अपनी पसंद का खाने के कारण भी महिला की खाने की इच्छा में वृद्धि हो सकती है, लेकिन ध्यान रखें की जो भी खाएं उससे आपकी सेहत को नुकसान न हो और वह आहार पोषक तत्वों से भरपूर हो।
डॉक्टर से राय लें
कई बार हो सकता है कोई शारीरिक परेशानी जैसे की उल्टियां अधिक होना, पेट से जुडी परेशानी आदि के अधिक होने के कारण गर्भवती महिला का कुछ खाने का मन न करें ऐसे में गर्भवती महिला को एक बार डॉक्टर से भी अपनी जांच जरूर करवानी चाहिए। ताकि आपकी शारीरिक परेशानी की समस्या का समाधान करके भूख से सम्बंधित परेशानी को दूर करने में मदद मिल सके।
तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको प्रेगनेंसी के दौरान भूख न लगने जैसी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। तो यदि आप भी गर्भवती है और आपको भी भूख में कमी की समस्या है तो ऊपर दिए गए टिप्स को अपनी दिनचर्या में शामिल करें इससे आपको बहुत जल्दी इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी।
थोड़ी सी जलन भी काफी दर्द भरी और तकलीफदेह होती है। जैसे की कई बार गर्म पानी गिरने के कारण, गैस पर किसी काम को करते हुए जलना, बिजली के किसी उपकरण के कारण जलन, या अचानक से किसी बहुत गर्म चीज को हाथ लगाने के कारण जलन महसूस होने लगती है। ऐसे में उस जगह पर दर्द होने के साथ फफोले पड़ने की समस्या भी उत्त्पन्न हो जाती है। और यह दर्द ठीक होने में समय लगता है। लेकिन यदि आपके शरीर का कोई हिस्सा जल जाता है तो यदि आप उसे कोई कोई न प्राथमिक उपचार उसी समय दे देते हैं तो ऐसा करने से आपको इस समस्या का समाधान करने में मदद मिलती है।
जलने पर तुरंत दें यह प्राथमिल उपचार:- जैसे ही कोई जगह जलती है तो कई बार दर्द के कारण कुछ समझ नहीं आता है, जिसके कारण आपको अधिक परेशानी होती है। ऐसे में इस समस्या से तुरंत बचने के लिए आज हम आपको कुछ प्राथमिक उपचार बताने जा रहें हैं जिनसे आपको इस समस्या से बचाव करने में और दर्द से तुरंत राहत पाने में फायदा मिलता है।
तुरंत करें ठन्डे पानी का इस्तेमाल:- जलते ही उस जगह पर ठन्डे पानी को डाल देना चाहिए, इससे आपको दर्द से राहत मिलती है, साथ ही जले हुए स्थान पर फफोले के पड़ने का खतरा नहीं रहता है। इसके अलावा आप बर्फ के पानी में कपडे को ठंडा करके उसे भी उस स्थान पर रख सकते हैं, तो इससे भी आपको फायदा मिलता है।
आलू है फायदेमंद:– जैसे ही कोई आपका अंग जल जाता है, तो आलू हर घर में बहुत आसानी मिल जाता है तो इसके लिए आप आलू को दो भागो में काट कर अच्छे से आलू से उस जगह की मसाज करें। ऐसा करने से आपको जले हुए से आराम मिलता है, और ठंडक का अहसास होता है।
कोलगेट भी है असरदार उपाय:- पेस्ट हर घर में आसानी से मिल जाता है ऐसे में यदि कभी आपको जलने की समस्या हो जाती है, तो उसी समय उस स्थान पर आप पेस्ट को लगा लें, ऐसा करने से आपको जलन से राहत मिलती है, दर्द कम हो जाता है, और साथ ही फफोले पड़ने की समस्या भी खत्म हो जाती है।
एलोवेरा का इस्तेमाल करें:- एलोवेरा स्किन प्रॉब्लम को दूर करके आपकी त्वचा को ठंडक और आराम पहुंचाने में मदद करती है। ऐसे में जलने के बाद उस जगह पर यदि आप तुरंत एलोवेरा जेल लगा देते है, तो इससे न तो जले हुए का निशान रहता है, साथ ही आपको दर्द से राहत पाने और ठंडक महसूस करने में मदद मिलती है।
हल्दी का पानी भी दिलाता है आराम:-यदि आप पानी में हल्दी मिलाकर उसका लेप बनाकर या घोल बनाकर तुरंत जले हुए स्थान पर लगाते हैं। तो ऐसा करने से भी आपको जलने पर होने वाली समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है। और यह भी आपके घर में आसानी से मिल जाती है।
तिल का उपयोग करें:- यदि आप तिल को अच्छे से पीसकर उसका लेप बनाकर जले हुए स्थान पर लगाते हैं, तो ऐसा करने से भी आपको जलने के कारण होने वाली समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है। साथ ही इसके इस्तेमाल से जले हुए के दाग रहने की सम्भावना भी बहुत कम होती है। और आपकी स्किन को बिल्कुल साफ़ होने में मदद मिलती है।
शहद का इस्तेमाल करें:- एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर शहद का इस्तेमाल भी आपके घाव को भरने में तेजी से आपकी मदद करता है। इसके लिए आप शहद की पट्टी को अच्छे से अपने जले हुए स्थान पर लगाएं ऐसा दिन में दो से तीन बार करें आपको बहुत जल्दी इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
तुलसी का इस्तेमाल करें:- औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के रस का इस्तेमाल करने से भी आपको इस समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है। इसके लिए आप जलने के बाद तुलसी के पत्तों को अच्छे से पीस कर उनका रस निकालें। उसके बाद उस रस को जले हुए स्थान पर लगाएं। ऐसा करने से आपको जलन से राहत के साथ दाग पड़ने की समस्या से भी निजात पाने में मदद मिलती है।
नमक का इस्तेमाल करें:- जले पर नमक छिड़कने से आपके घाव को बहुत तेजी से ठीक होने में मदद मिलती है। इसके लिए आप जलने के बाद तुरंत पानी में नमक डालकर एक गाढ़ा घोल तैयार करें। उसके बाद इस घोल को जले हुए स्थान पर लगाएं ऐसा करने से आपको जले हुए स्थान को तेजी से ठीक करने में मदद मिलती है।
टी बैग का इस्तेमाल करें:-टी बैग में मौजूद टैनिक अम्ल भी आपको बहुत जल्दी इस समस्या का समाधान करने में मदद करता है। इसके लिए आप टी बैग को दस मिनट के लिए फ्रीज़र में रखकर अपने जले हुए स्थान पर रखें और उसके बाद ऐसा दिन में चार से पांच बार करें आपको इस समस्या से तेजी से राहत पाने में मदद मिलती है।
जलने से तुरंत राहत पाने के अन्य उपाय:-
प्याज को पीसकर उसका लेप बनाकर लगाने से आपको जलन से राहत पाने में मदद मिलती है।
केले को अच्छे से पीसकर उसका लेप बनाएं और उसे जले हुए स्थान पर मास्क को तरह लगाए ऐसा करने से भी आपको आराम मिलता है।
रुई की मदद से गाय का घी भी जले हुए स्थान पर लगाने से फायदा होता है।
सिरके में थोड़ा पानी मिलाएं और उसके बाद साफ कपडे को उसमे भिगोकर जले हुए स्थान पर लगाने से भी आपको आराम मिलता है।
जले हुए स्थान पर मीठा सोडा रगड़ने से भी आपको फायदा मिलता है।
नीम या चन्दन का तेल भी जले हुए स्थान पर लगाने से ठंडक मिलने के साथ फफोले पड़ने की समस्या से भी छुटकारा मिलता है।
एलोवेरा के गुद्दे में हल्दी मिलाकर लगाने से भी आपको फायदा मिलता है।
हरी मटर को पीसकर उसका लेप बनाकर लगाने से भी आपको आराम मिलता है।
मेथी के दानो को पानी के साथ पीसकर उसका लेप लगाने से भी आपको फायदा मिलता है।
तो यह हैं कुछ उपाय जिनका इस्तेमाल यदि आप तुरंत जलने के बाद करते हैं तो न तो इनके इस्तेमाल के बाद फफोले पड़ते हैं, और आपको दर्द को कम करने के साथ इस समस्या से बहुत जल्दी राहत पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा यदि अधिक जल जाता है और उसका निशान रहने का डर होता है तो इस समस्या के समाधान के लिए आप डॉक्टर से भी संपर्क कर सकते है।
प्रेगनेंसी में क्या सही होता है क्या गलत होता है, गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे अनमोल पल और एक बेहतरीन अहसास होता है। ऐसे में गर्भावस्था को अच्छे तरीके से एन्जॉय करने के लिए और प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। और इसके लिए प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाना, क्या करना, क्या नहीं खाना, क्या नहीं करना, क्या सही है, क्या गलत है, इन बातों का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी से जुड़े कुछ टिप्स शेयर करने जा रहे हैं जिनसे आपको यह जानने में मदद मिलेगी की प्रेगनेंसी के दौरान के गुड़ है और क्या बैड है।
प्रेगनेंसी में क्या सही होता है
गर्भावस्था के दौरान कौन सी चीजें गर्भवती महिला व् शिशु के विकास के लिए फायदेमंद होती है। आइये विस्तार से जानते हैं ताकि गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ व् फिट रहने में मदद मिल सके।
पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन
गर्भावस्था के दौरान सही समय पर आहार लेना, आहार में किसी तरह की लापरवाही न करना, पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना, आदि।
प्रेग्नेंट महिला के लिए फायदेमंद होने के साथ भ्रूण के विकास को बेहतर होने में भी मदद करता है।
हाइड्रेट रहना
पानी का भरपूर सेवन करने के साथ अन्य तरल पदार्थों का सेवन करना भी प्रेगनेंसी के दौरान सही होता है।
क्योंकि इससे बॉडी को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है, गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है।
जिससे प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के साथ भ्रूण के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।
खुश रहना
यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान हर लम्हे को एन्जॉय करती है।
प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों के बाद भी खुद को खुश रखने की कोशिश करती है।
तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के साथ भ्रूण के विकास को भी बेहतर होने में मदद मिलती है।
जो की प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत अच्छी बात होती है।
भरपूर नींद लेना
प्रेग्नेंट महिला का भरपूर आराम करना और भरपूर नींद लेना बहुत अच्छी बात होती है।
क्योंकि भरपूर नींद लेने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
और प्रेग्नेंट महिला का स्वस्थ रहना भ्रूण को स्वस्थ रहने में मदद करता है।
साथ ही प्रेग्नेंट महिला को सोने के लिए बाईं तरफ करवट लेकर सोना सबसे फायदेमंद होता है।
प्रेगनेंसी में क्या सही होता है गर्भ में शिशु से बात करना
गर्भ में पल रहे शिशु से अपने रिश्ते को गहरा करने के साथ शिशु के मानसिक विकास को बढ़ाने के लिए गर्भ में शिशु बात करना भी प्रेगनेंसी के दौरान अच्छी बात होती है।
ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा जरूर करना चाहिए ताकि भ्रूण को फायदा मिल सके।
सही समय पर जांच करवाना
गर्भावस्था के दौरान सही समय पर जांच करवाना, बॉडी में किसी भी लक्षण के महसूस होने पर डॉक्टर से राय लेना, आदि।
प्रेगनेंसी के दौरान बहुत अच्छी बात होती है।
क्योंकि इससे प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने के साथ प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में भी मदद मिलती है।
हल्का फुल्का व्यायाम करना
प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही से हल्का फुल्का व्यायाम, योगासन, मैडिटेशन आदि कर सकती है।
क्योंकि यह प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत अच्छा होता है।
इससे न केवल प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है बल्कि बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से होने से भ्रूण के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।
प्रेगनेंसी में क्या सही नहीं होता है
कुछ ऐसे काम भी होते हैं जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करने चाहिए। क्योंकि उन्हें करने से प्रेग्नेंट महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भावस्था के दौरान क्या करना बैड होता है।
डाइट करना
प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ना आम बात होती है।
ऐसे में वजन बढ़ने पर गलती से भी महिला को डाइट करनी शुरू नहीं करनी चाहिए।
क्योंकि इसके कारण बॉडी में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला व् भ्रूण के विकास में दिक्कत आ सकती है।
गलत खान पान
प्रेगनेंसी के दौरान कुछ आहार का सेवन करने की मनाही होती है।
जैसे की मरकरी युक्त मछली, कच्चे अंडे, चाइनीज़ फ़ूड, जंक फ़ूड, कच्चा पपीता, अनानास, कच्चा दूध, आदि।
इन पदार्थों का सेवन प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए।
क्योंकि इन्हे सेवन से न केवल प्रेग्नेंट महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा रहता है।
बल्कि भ्रूण के विकास में भी बाधा आ सकती है।
प्रेगनेंसी में क्या सही नहीं होता है नशीले पदार्थों का सेवन
प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला का नशीले पदार्थों जैसे की अल्कोहल, धूम्रपान का सेवन करना भी सही नहीं होता है।
क्योंकि नशीले पदार्थों का बुरा असर गर्भनाल के रास्ते शिशु तक पहुँच सकता है।
जिसके कारण भ्रूण के शारीरिक व् मानसिक विकास में दिक्कत का आ सकती है।
नींद से लापरवाही
गर्भावस्था के दौरान महिला को भरपूर आराम व् भरपूर नींद लेने की सलाह दी जाती है।
लेकिन यदि महिला इसमें आनाकानी करती है तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी हो सकती है।
प्रेगनेंसी में क्या सही नहीं होता है तनाव लेना
गर्भवती महिला का तनाव लेना बिल्कुल भी सही नहीं होता है।
क्योंकि इसके कारण न केवल गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या बढ़ सकती है।
बल्कि इससे भ्रूण के शारीरिक व् मानसिक विकास में भी दिक्कत आ सकती है।
यात्रा करना
प्रेगनेंसी के दौरान यात्रा करना बहुत गलत होता है।
क्योंकि यात्रा के दौरान बहुत देर तक एक ही पोजीशन में बैठने के कारण प्रेग्नेंट महिला को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
साथ ही प्रेग्नेंट महिला को झटका आदि लगने के कारण दिक्कत हो सकती है।
तो यह हैं कुछ चीजें जो गर्भवती महिला के लिए सही होती है और गलत होती है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और चाहती है की गर्भावस्था के दौरान आपको स्वस्थ रहने और भ्रूण के बेहतर विकास में मदद मिल सके। तो इन बातों का प्रेगनेंसी के दौरान अच्छे से ध्यान रखें।
गर्भधारण में क्या खाये जिससे शिशु ठिगना ना हो, प्रेगनेंसी में क्या खुराक लेने से शिशु नाटा नहीं होगा, क्या खाये के शिशु का कद छोटा ना हो, Diet which increase baby height during Pregnancy
भारत सहित दक्षिण एशियाई देशो में 38 फीसदी बच्चो का कद छोटा रह जाता है या यु कहे की वह ठिगनेपन का शिकार हो जाते है। एक अध्ययन से पता चला है के भारत में सबसे ज्यादा लोग ठिगनेपन के शिकार होते है।
क्यों शिशु का कद छोटा होता है?
एक शोध के अनुसार गर्भवती महिला के पौष्टिक आहार ना खाने से या कुपोषित होने से उसके शिशु का कद छोटा रह जाता है। यदि गर्भावस्था में सही खानपान ना लिया जाए तो उसका सीधा असर आपके गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। यही कारण है के कुछ बच्चे नाटे रह जाते है।
एक रिसर्च के अनुसार यह बताया गया हे के किसी भी महिला के गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीनो में पौष्टिक आहार देकर उसके शिशु को ठिगनेपन और कुपोषण से बचाया जा सकता है। कुपोषण और नाटापन हमारे देश की लिए एक बड़ी चुनौती है। और साथ ही गर्भवती महिलाओं के लिए चिंता का विषय भी है।
गर्भावस्था में क्या खाने से शिशु नहीं होगा नाटा या ठिगना?
रिसर्च के अनुसार यह पता चलता हे के प्रेगनेंसी के दौरान लिपिड-आधारित माइक्रोन्यूट्रिएंट भोजन खाने से शिशु को सभी पौष्टिक आहार मिलते है और शिशु को कुपोषण छू भी नहीं पता जिससे बच्चे का और उसके कद का अच्छे से विकास हो पाता है।
माइक्रोन्यूट्रिएंट में सभी जरुरी विटामिन्स और मिनरल्स शामिल होते है। आइये जानते है किस किस भोजन में माइक्रोन्यूट्रिएंट पाया जाता है।
मिल्क प्रोडक्ट :
मिल्क प्रोडक्ट यानि दूध और दूध से बनी चीजे, इनमे भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है यह तो हम सभी जानते है।
कैल्शियम हमारे लिए बहुत जरुरी मिनरल होता है।
कैल्शियम शिशु के बोनस के विकास के लिए बेहद जरुरी है।
मिल्क में विटामिन बी 2 भी होता है।
ग्रीन वेजटेबल्स :
हरी पत्तेदार सब्जिया विटामिन बी 3 ओर आयरन से भरपूर होती है।
प्रेगनेंसी में डॉक्टर भी हरी सब्जिया खाने की सलाह देते है।
गर्भवती महिलाओ व उनके शिशु को पोषित करने के लिए हरी सब्जिया बहुत जरुरी है।
बादाम :
बादाम में विटामिन बी 7 और विटामिन इ होता है।
गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीनो में भीगे हुए बादाम का छिलका उतारकर खाना चाहिए।
बादाम शिशु के दिमाग और कद के विकास के लिए अच्छा माना गया है।
गाजर :
गाजर में विटामिन ए होता है।
गर्भवती महिलाये इसे अपने भोजन में जरूर शामिल करें।
शकरकंद :
स्वीट पटैटो या शकरकंद में भरपूर मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है।
प्रेगनेंसी के इसका सेवन करने से बच्चे के कद का भी विकास होता है।
सोयबीन्स :
इसमें विटामिन के पाया जाता है।
शिशु को पोषित करने के लिए सोयबीन्स को अपने खाने में जरूर लें.
केला :
केले के अंदर भरपूर मात्रा में पोटैशियम होता है।
इसका सेवन करने से खून की कमी नहीं होती।
गर्भवती महिला को केले का सेवन जरूर करना चाहिए, इसे खाने से शिशु की मांसपेशियों का विकास होगा।
दही :
दही में फॉस्फोरस होता है।
फॉस्फोरस हमारी बोनस का विकास करता है।
गर्भवती महिला के दही खाने से शिशु की हड्डियों का विकास होगा।
दाल :
दालों में प्रोटीन की भरपूर मात्रा पायी जाती है।
प्रोटीन हमारे हड्डियों और लिगामेंट्स को स्वस्थ रखता है।
बच्चों के कद, दिमाग, और हड्डियों के विकास के लिए दाल का सेवन करना आवश्यक है।
यह सभी चीजे मिलकर एक गर्भवती महिला और उसके शिशु को पोषित रखने में मदद करते है। बाजार में लिपिड-आधारित माइक्रोन्यूट्रिएंट सप्लीमेंट्स भी मिलते है। हम फिर भी चाहेंगे के प्राकृतिक तौर से यानि फलो और सब्जियों द्वारा लिए गए माइक्रोन्यूट्रिएंट गर्भवती महिला और उनके शिशु के लिए ज्यादा फायदेमंद है। फिर भी अगर आप सप्लीमेंट लेना चाहती है तो अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
प्रेगनेंसी में मालपुआ खाने के नुकसान, त्यौहारों का समय आने पर गर्भवती महिला को ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। और अब होली आने में कुछ ही दिन रह गए हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को होली के अवसर पर रंगो से सावधान रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि रंगों में मौजूद केमिकल महिला के साथ शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन साथ ही होली पर घर में बहुत से पकवान बनाएं जाते हैं और बाजार से भी तरह तरह की मिठाइयां मंगवाई जाती है।
ऐसे में गर्भवती महिला की उन्हें खाने की इच्छा हो सकती है। लेकिन गर्भवती महिला को इस दौरान रंगों के साथ खान पान में भी सावधानी बरतनी चाहिए। तो लीजिये आज इस आर्टिकल में हम होली पर बनाये जाने वाले मालपुए के बारे में बात करने जा रहे हैं। की गर्भवती महिला को मालपुए का सेवन करना चाहिए या नहीं।
प्रेगनेंसी में मालपुआ खाना चाहिए या नहीं
प्रेग्नेंट महिला अपने खान पान में जितनी सावधानी बरतती है उतना ही ज्यादा महिला व् शिशु की सेहत के लिए अच्छा होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला मालपुए का सेवन कर सकती है। लेकिन महिला को मालपुए का सेवन जरुरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए। क्योंकि जरुरत से ज्यादा मालपुए का सेवन करने से गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं प्रेग्नेंट महिला को ज्यादा मालपुए खाने से कौन से नुकसान हो सकते हैं।
कैलोरी ज्यादा होती है
मालपुआ बनाने के लिए घी, चीनी, ड्राई फ्रूट्स आदि का इस्तेमाल किया जाता है।
ऐसे में मालपुआ में कैलोरी की मात्रा बहुत बढ़ जाती है।
क्योंकि इसे बनाने के लिए ज्यादा मीठे व् तलने के लिए घी आदि का इस्तेमाल किया जाता है।
यह बात सही है की प्रेग्नेंट महिला को अतिरिक्त कैलोरी की जरुरत होती है।
लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला बहुत अधिक मात्रा में कैलोरी का सेवन करती है तो इसके कारण महिला को वजन बढ़ने जैसी परेशानी हो सकती है।
शुगर का खतरा
मालपुआ स्वाद में मीठा होता है और प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के समय मीठा का सेवन बहुत कम करने की सलाह दी जाती है।
ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला अधिक मात्रा में मालपुए का सेवन करती है।
तो इसके कारण ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ सकता है।
जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ का खतरा हो सकता है।
प्रेगनेंसी में मालपुआ खाने से हो सकती है एसिडिटी
गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेग्नेंट महिला की पाचन क्षमता कमजोर हो सकती है।
ऐसे में मालपुए का अधिक सेवन करने से महिला को उसे हज़म करने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
जिसके कारण पेट में गैस, एसिडिटी, सीने में जलन, खट्टी डकार जैसी परेशानियां महिला को हो सकती है।
गर्भवती महिला को कितने मालपुए का सेवन करना चाहिए?
गर्भवती महिला एक दिन में एक या दो मालपुए का सेवन कर सकती है। इससे अधिक मात्रा में मालपुए का सेवन करने से महिला को परेशानी हो सकती है।
तो यह हैं कुछ नुकसान जो प्रेग्नेंट महिला को मालपुआ खाने से हो सकते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को जितना हो सके सिमित मात्रा में ही मालपुए का सेवन करना चाहिए ताकि गर्भवती महिला को किसी तरह की दिक्कत न हो।