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डिलीवरी के बाद भी अगर आपका बेबी बम्प नहीं जा रहा है तो ये अपनाएँ

प्रेगनेंसी के दौरान बेबी बम्प का होना स्वभाविक होता हैं, क्योंकि शिशु का जैसे जैसे आकार बढ़ता हैं, वैसे ही आपके पेट का आकार भी बढ़ता है, और डिलीवरी के बाद अपने वास्तविक आकार में भी आ जाता है, एक्सपर्ट्स का कहना है की डिलीवरी के बाद महिलाओ का एक या दो हफ्ते तक बेबी बम्प जैसा लगना आम बात होती है, लेकिन धीरे धीरे यह अपने आप ठीक हो जाता है, अगर इसके बाद भी आपका पेट वैसे ही रहता है, तो महिलाओ को वो थोड़ा डरावना लग सकता है, क्योंकि महिलाएं अपने फिगर को हमेशा मेन्टेन रखना चाहती है,

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इसके कई कारण सकते है, लेकिन धीरे धीरे आपकी बॉडी शेप में आ जाती है, कई बार आपको पेट में हल्का दर्द भी महसूस हो सकता है, क्योंकि आपकी फैली हुई बच्चे दानी को पेल्विस में वापिस सिकुड़कर आना होता है, इसीलिए इसे देखकर ज्यादा घबराना नहीं चाहिए तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी होने के बाद भी बेबी बम्प दिखने के क्या क्या कारण हो सकते हैं, और आप किस तरह इसका समाधान कर सकते है।

डिलीवरी के बाद बेबी बम्प दिखने के कारण:-

मांसपेशियों में खिंचाव के कारण:-

प्रेगनेंसी में गर्भ का आकार बढ़ने के साथ आपकी मांसपेशियों में भी खिंचाव उत्त्पन्न होता है, और कई बार डिलीवरी के बाद जब मांसपेशियां अपना सही आकार नहीं ले पाती है, तो इसके कारण आपका बेबी बम्प दिखता रहता है, लेकिन जैसे ही आपकी मांसपेशियां धीरे धीरे अपनी सही आकार ले लेती है, तो आपको इस परेशानी से राहत मिलती है।

बच्चेदानी के फैलाव के कारण:-

गर्भ में पल रहे शिशु का आकार बढ़ने के साथ बच्चेदानी भी फैलती है, जो कई बार डिलीवरी के बाद शेप में नहीं आती है, और उसे अपने सही आकार में आने में समय लगता है।

फ्लूइड के कारण:-

एम्नीओटिक फ्लूइड, कुछ दूसरे फ्लूइड और खून भी पेट में बम्प का आकार बने रहने का कारण होते है, इसके लिए आप चाहे तो एक बार डॉक्टर से भी राय ले सकते है।

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डिलीवरी के बाद बेबी बम्प कम करने के उपाय:-

ब्रेस्टफीडिंग:-

डिलीवरी के बाद आपके पेट को कम करने का सबसे आसान उपाय ब्रेस्टफीडिंग होता है, कई महिलाएं अपने फिगर के खराब होने के डर से शिशु को ब्रेस्टफीडिंग नहीं करवाती है, लेकिन स्तनपान करवाने से आपके शरीर की कैलोरी बर्न होती है, जिससे आपके शरीर में जमी चर्बी को कम होने में मदद मिलती है, और आपकी बॉडी शेप में आती है।

बेली बेल्ट का इस्तेमाल करें:-

बेली बेल्ट भी डिलीवरी के बड़ा आपके पेट को कम करने में मदद करती है, डिलीवरी के बाद डॉक्टर भी इसकी सलाह देते है, और इससे न केवल आपका पेट बाहर नहीं आता है, बल्कि आपको उठने बैठने में भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।

पानी का भरपूर सेवन करें:-

पानी भी महिला को भरपूर मात्रा में पीना चाहिए क्योंकि जितना आप पानी का सेवन करते हैं, उतने विषैले पदार्थ आपके शरीर से बाहर निकलती है, साथ ही इसके कारण आपके शरीर पर जमी चर्बी को भी कम होने में मदद मिलती है, इसीलिए दिन में महिला को कम से कम आठ से दस गिलास पानी का सेवन करने के साथ नारियल पानी जूस आदि का भी सेवन करना चाहिए।

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रात का भोजन समय पर करें:-

महिलाएं ऐसा सोचती हैं की पहले घर का काम कर लें, उसके बाद खाना खा लेंगे, और खाना खाने के बाद थकावट महसूस होती है, जिसके कारण आप सो जाती है, और आपके खाने में ली गई कैलोरी ऊर्जा की जगह चर्बी में बदल जाती है, इसीलिए इस समस्या से बचने के लिए आपको जितना हो सकें आठ बजे तक अपने आहार को खा लेना चाहिए ताकि आपका शरीर अच्छे से भोजन को पचा सकें, और आपकी कैलोरी ऊर्जा में बदलें, जिससे चर्बी न जमे।

निम्बू पानी का सेवन करें और फल खाएं:-

यदि नियम से सुबह उठकर खाली पेट आप निम्बू पानी का सेवन करते है, और उसके कम से कम आधे घंटे बाद कोई न कोई फल खाते हैं तो ऐसा करने से आपके शरीर में जमी चर्बी को कम होने में मदद मिलती है, क्योंकि इसके सेवन से आपके शरीर में मौजूद विषैले पदार्थो को बाहर निकालने में मदद मिलती है।

साबुत अनाज, फलों, व् सब्जियों का सेवन करें:-

अपने शरीर पर जमी चर्बी को कम करने के लिए आपको साबुत अनाज का सेवन करना चाहिए, जूस की जगह, साबुत फलों व् सब्जियों का सेवन करना चाहिए, ऐसा करने से आपके शरीर में फाइबर की मात्रा बढ़ती है, जिससे आपके शरीर में जमी चर्बी को कम होने में मदद मिलती है।

व्यायाम करें:-

व्यायाम भी आपको डिलीवरी के थोड़े दिन बाद शुरू कर देना चाहिए इससे आपकी मांसपेशियों को मजबूत होने में मदद मिलती है, लेकिन यदि आपको सिजेरियन के द्वारा शिशु हुआ है, तो ध्यान रखना चाहिए की आप अपने शरीर पर अधिक दबाव न डालें, यदि आप नियमित व्यायाम करते हैं तो ऐसा करने से आपको अपने शरीर पर जमी चर्बी को कम करने में मदद मिलती है।

नींद भी भरपूर मात्रा न लें:-

पर्याप्त नींद भी आपके शरीर में जमी चर्बी को कम करने में आपकी मदद करता है, यदि आप नींद को भरपूर मात्रा में नहीं लेते हैं तो शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन असंतुलित होता है जिसके कारण आपको शरीर पर समस्या हो सकती है, और नींद भरपूर लेने से आपको ऐसी समस्या नहीं होती है।

तो ये है कुछ कारण जिसकी वजह से डिलीवरी के बाद भी आपका बेबी बम्प दिख सकता है, लेकिन महिलाओ को इसे तेजी से कम करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए कही आपकी किसी लापरवाही के कारण आपके बच्चे के पोषण में किसी प्रकार की कोई कमी न रह जाए इस बात का आपको ध्यान रखना चाहिए, और ऊपर दिए टिप्स का इस्तेमाल यदि आप नियमित करते है तो इससे आपके बेबी बम्प को कम होने में मदद मिलती है।

नोट:- किसी भी तरह को व्यायाम को कम से कम पेंतालिस दिन बाद शुरू करना चाहिए, और सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओ को इस बारे में एक बार डॉक्टर से आवश्य राय लेनी चाहिए।

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डिलीवरी के बाद ब्रेस्ट से जुडी इन बातों का ध्यान रखें

डिलीवरी के बाद ब्रेस्ट से जुडी इन बातों का ध्यान रखें, डिलीवरी के बाद ब्रेस्ट के स्ट्रेचमार्क्स हटाने के टिप्स, प्रसव के बाद ऐसे रखें ब्रेस्ट का ध्यान, शिशु के जन्म के बाद ऐसे लाएं अपनी ब्रेस्ट को शेप में , Breast care tips after delivery

केवल प्रेगनेंसी के दौरान ही नहीं बल्कि शिशु के जन्म के बाद भी महिला के शरीर में बहुत से बदलाव देखने को मिलते हैं। जैसे की गर्भवती महिला के ब्रेस्ट का साइज बढ़ना, ब्रेस्ट के ऊपर स्ट्रेचमार्क्स के निशान आना, ब्रेस्ट में से अपने आप दूध का निकलना, दर्द का अनुभव होना, आदि। ऐसे में महिला को घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि बहुत सी महिलाओं को यह परेशानी हो सकती है। ऐसे में आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सके। तो आइये आज हम आपको प्रेगनेंसी के बाद ब्रेस्ट से जुड़े कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं।

ब्रेस्ट में दर्द का कारण और इलाज

शिशु के जन्म के बाद ब्रेस्ट में से दूध आने लगता है, लेकिन कुछ महिलाओं को दूध अधिक मात्रा में आता है। और शिशु की भूख खत्म होने के बाद भी ब्रेस्ट में दूध रहता है, जिसके कारण कई बार ब्रेस्ट में दर्द का अनुभव हो सकता है। या फिर शिशु के लिए पर्याप्त दूध ब्रेस्ट में नहीं बनता है, और शिशु जब दूध पीता है तो ब्रेस्ट की मांसपेशियों में खिंचाव उत्पन्न होता है जिसके कारण भी ब्रेस्ट में दर्द हो सकता है। ऐसे में इस दर्द से राहत पाने के लिए महिला को अपने हाथ से ब्रेस्ट पर दबाव डालकर दूध को निकाल देना चाहिए, इससे आपको आराम मिलेगा। और यदि महिला को दूध पूरा नहीं आता है तो दूध, जीरा, मूंग की दाल, सौंठ, आदि का सेवन महिला को भरपूर करना चाहिए जिससे शिशु के लिए दूध का उत्पादन बढे और महिला को इस परेशानी से निजात मिल सके।

स्ट्रेचमार्क्स

डिलीवरी के बाद स्किन में भी तरह तरह के बदलाव आते हैं, जैसे की कई बार महिला को ब्रेस्ट पर स्ट्रेचमार्क्स की समस्या हो सकती है। क्या आपको भी यह परेशानी हो गई है तो आप घर पर ही कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके इस समस्या से निजात पा सकती है। जैसे की एलोवेरा जैल, हल्दी और दही का पेस्ट, कैस्टर ऑयल, बेबी ऑयल, सिरका और ओलिव ऑयल, बादाम तेल और चीनी आदि किसी भी एक उपाय को नियमित करें, और धीरे धीरे इसका असर आपको साफ दिखाई देने लगेगा।

ब्रेस्ट का ढीलापन

ब्रेस्ट में दूध का उत्पादन होने के कारण ब्रेस्ट में ढीलापन आना आम बात होती है, ऐसे में आप जब तक शिशु को स्तनपान करवाती है, तब तक ढीली ब्रा नहीं पहननी चाहिए बल्कि अपने साइज की ब्रा पहननी चाहिए। ताकि ब्रेस्ट में ढीलेपन की समस्या से बचाव में आपको मदद मिल सके, साथ ही भरपूर पोषक तत्वों का सेवन भी करना चाहिए, इससे भी स्किन को टाइट रखने में मदद मिलती है। आज कल नर्सिंग ब्रा भी बाजार में आसानी से मिल जाती है, जिससे बच्चे को दूध पीने में भी आसानी होती है, और आपको भी ब्रेस्ट शेप को सही रखने में मदद मिलती है।

ब्रेस्ट से दूध का रिसाव

कई बार महिला को शिशु के दूध पीने के बाद भी अपने आप ही ब्रेस्ट में से दूध का रिसाव होता है। ऐसे में आपको ब्रा के अंदर रुई या सूती कपडे का पैड बनाकर रखना चाहिए ताकि आपके कपडे गीले न हो। साथ ही पूरा दिन एक ही कपडे को ब्रा में नहीं रखना चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान आपको डिलीवरी के बाद रखना चाहिए। इनका इस्तेमाल करने से आपको ब्रेस्ट से जुडी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। साथ ही कुछ महिलाएं ब्रेस्ट के शेप बिगड़ने के डर से शिशु को स्तनपान नहीं करवाती हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि हो सकता है की उस समय ब्रेस्ट में ढीलापन या भारीपन महसूस हो, लेकिन उसके बाद जैसे ही शिशु स्तनपान करना बंद करता है तो धीरे धीरे अपने आप ही ब्रेस्ट शेप में आने लगती है।

गर्भावस्था में ठण्डा पानी पीने से गर्भ में शिशु को कैसा महसूस होता है?

प्रेगनेंसी महिला के लिए एक बहुत ही सुखद अहसास होता है और इस अहसास को महसूस करते हुए प्रेगनेंसी के दौरान महिला बहुत से नए अनुभव भी महसूस करती है। साथ ही गर्भ में पल रहा बच्चा भी पूरी तरह से अपनी माँ पर भी निर्भर करता है। इसके अलावा महिला जो भी करती है, सोचती है, बोलती है, खाती है, पीती है आदि उन सभी चीजों का असर गर्भ में शिशु पर पड़ता है।

और कई बार तो शिशु इस पर अपनी प्रतिक्रिया भी देते हैं, जी नहीं, बच्चा गर्भ में बोलता नहीं है। बल्कि अपनी हलचल के माध्यम से बच्चा अपनी प्रतिक्रिया देता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भावस्था में ठण्डा पानी पीने से गर्भ में शिशु को कैसा महसूस होता है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

तापमान में बदलाव होने के कारण बढ़ सकती है शिशु की हलचल

जब प्रेग्नेंट महिला ठंडा पानी पीती है तो अचानक से बॉडी के बाहर नहीं लेकिन अंदर ठंडक सी महसूस होती है। और उस ठंडक का अहसास गर्भ में शिशु को भी होता है। ऐसे में तापमान में अचानक से बदलाव होना शिशु को अच्छा भी महसूस करवा सकता है और शिशु को हो सकता है यह अच्छा न भी लगे। लेकिन यह सच है की तापमान में बदलाव होने के कारण आपको बच्चे की हलचल महसूस हो सकती है।

गर्मी में मिल सकती है ठंडक

वैसे प्रेग्नेंट महिला को ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए क्योंकि इसके कारण महिला की शारीरिक परेशानी जैसे की सूजन, बॉडी पेन आदि बढ़ सकती है। लेकिन ठंडा पानी पीने से जैसे प्रेग्नेंट महिला को गर्मी से राहत मिल जाती है। हो सकता है वैसे ही ठंडा पानी पीने से गर्भ में ठंडक का अहसास हो सके।

तो यह है गर्भावस्था में ठण्डा पानी पीने से गर्भ में शिशु को कैसा महसूस होता है उससे जुड़े कुछ टिप्स, लेकिन ध्यान रखें की प्रेगनेंसी के दौरान ठंडा पानी पीने से जितना हो सके प्रेग्नेंट महिला को बचना चाहिए। क्योंकि ठंडा पानी पीने के कारण प्रेग्नेंट महिला की दिक्कतें बढ़ सकती है।

एबॉर्शन के बाद गर्भधारण में क्या समस्या आती है?

क्या एबॉर्शन के बाद गर्भधारण में समस्या आती है, गर्भपात के कितने समय बाद दुबारा गर्भधारण किया जा सकता है, is there any problem in conceiving after abortion?

गर्भावस्था हर महिला के लिए महत्वपूर्ण समय होता है। इस समय में हर महिला अपने शिशु के लिए बहुत सारे सपने भी बून लेती है। जिस प्रकार गर्भावस्था हर जोड़े के जीवन में एक सुखद समाचार है उसी तरह एबॉर्शन हर किसी के लिए एक दुख़द समाचार का रूप है।

अक्सर कई महिलाओं के जीवन में गर्भपात का समय आ जाता है कभी कभी मेडिकल कंडीशन्स के कारण और कभी कोई अन्य कारण से। एबॉर्शन किसी भी महिला को सिर्फ शारीरिक रूप से नहीं प्रभावित करता बल्कि मानसिक रूप से भी हिला देता है। एबॉर्शन का समय हर महिला को इस कदर परेशान कर देता है के वह सोचने पर मजबूर हो जाती है के क्या यह एबॉर्शन उनके गर्भधारण करने में कोई समस्या तो नहीं खड़ी करेगा।

 क्या एबॉर्शन के बाद गर्भधारण में समस्या आती है?

अक्सर सभी महिलाये इस चिंता में डूबी रहती है के गर्भपात कहीं उनके गर्भधारण करने में कोई समस्या तो नहीं लाएगा।

अगर एक अच्छे चिकित्स्क द्वारा आपके एबॉर्शन की प्रक्रिया पूरी की गयी है तो गर्भधारण करने में किसी प्रकार की कोई चिंता नहीं है। एक सहीं प्रक्रिया द्वारा किया गया एबॉर्शन फर्टिलिटी पर कोई असर नहीं डालता। गर्भपात के बाद दोबारा प्रेगनेंसी आसान और साधारण है।

गर्भधारण में समस्या सिर्फ तभी आ सकती है अगर एबॉर्शन के समय को परेशानी हुई हो या महिला के गर्भाशय को कोई चोट पहुंची हो। इसीलिए जरुरी है के एबॉर्शन की प्रक्रिया एक विशेषज्ञ की देखरेख में ही किया जाए।

गर्भपात के कितने समय बाद गर्भधारण कर सकते है?

जब यह समस्या सुलझ गयी की एबॉर्शन के बाद गर्भधारण में कोई समस्या नहीं आती। तो इसके बाद प्रश्न आता है के गर्भपात के कितने समय बाद अगला गर्भधारण करना उचित होता है। डॉक्टरों के अनुसार सहीं प्रक्रिया के अंतर्गत किये गए एबॉर्शन के 3-4 महीने बाद अगला गर्भधारण किया जा सकता है।

पर दोबारा गर्भवती होने के लिए जरुरी है के महिला को अपने शरीर के प्रति सजग रहना होगा और अपने खानपान और अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखना होगा।

आशा है यह आर्टिकल आपकी बहुत सी समस्याओ को सुलझाएगा।

अबॉर्शन के बाद माँ बनने में क्या दिक्कत आती है

माँ बनना जितना सुखद अहसास होता है उतना ही दुखद महिला का गर्भपात होना होता है। क्योंकि अबॉर्शन के बाद महिला केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी परेशानी का अनुभव करती है। खासकर जो महिला गर्भधारण करना चाहती थी उसके लिए गर्भपात किसी बुरे सपने से कम नहीं होता है।

साथ ही गर्भपात होने के बाद बहुत सी महिलाएं सोचती है की दुबारा गर्भधारण के लिए सही समय कौन सा है और महिला यदि दुबारा माँ बनने के लिए कोशिश करती है तो उसमे किसी तरह की परेशानी तो नहीं होगी, आदि। तो आइये अब विस्तार से अबॉर्शन के बाद गर्भधारण कब करना चाहिए और अबॉर्शन के बाद महिला को दुबारा प्रेग्नेंट होने में क्या दिक्कत आती है।

अबॉर्शन के बाद दुबारा गर्भधारण का सही समय कौन सा होता है?

गर्भधारण के बाद महिला के शरीर के काफी कमजोरी आ जाती है, गर्भशय की ग्रीवा कमजोर हो जाती है, महिला मानसिक व् शारीरिक रूप से तुरंत प्रेगनेंसी के लिए तैयार नहीं होती है, आदि। ऐसे में महिला यदि गर्भपात के तुरंत बाद प्रेग्नेंट होने के लिए सोचती है तो इससे दुबारा गर्भपात होने के चांस बढ़ जाते हैं। ऐसे में एक बार गर्भपात होने के बाद महिला को कम से कम तीन से छह महीने तक दोबारा प्रेगनेंसी के लिए नहीं सोचना चाहिए और इसके बाद माँ बनने का फैसला लेना चाहिए।

गर्भपात के बाद माँ बनने में क्या- क्या दिक्कत आती है

एक बार गर्भपात होने के बाद जब महिला दोबारा माँ बनने का फैसला लेती है तो महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भपात के बाद माँ बनने में महिला को कौन कौन सी परेशानियां होती है।

गर्भधारण में होती है परेशानी

गर्भपात होने के बाद भी महिला के शरीर में ओवुलेशन की प्रक्रिया तो चलती रहती है लेकिन महिला गर्भपात के डर से इतनी जल्दी नहीं उभर पाती है। जिसके कारण निषेचन होने के चांस कम होते हैं और महिला को गर्भधारण में परेशानी हो सकती है। साथ ही यदि महिला का गर्भपात घर पर ही हुआ है और महिला के गर्भाशय में कुछ टिश्यू रह जाते हैं तो इसके कारण भी गर्भधारण में परेशानी आती है। ऐसे में गर्भपात होने के बाद दुबारा गर्भधारण से पहले महिला को अपनी सभी जांच अच्छे से करवानी चाहिए। ताकि महिला को गर्भपात के बाद दुबारा गर्भधारण में किसी तरह की परेशानी न हो।

गर्भपात का होता है खतरा

गर्भपात के बाद गर्भाशय की ग्रीवा में कमजोरी आ जाती है जिसके कारण गर्भाशय में उतनी मजबूती नहीं रहती है जिससे गर्भधारण के बाद महिला के गर्भपात के चांस बढ़ जाते हैं। ऐसे में गर्भपात के बाद शारीरिक रूप से अच्छे से फिट होने के बाद ही महिला को दुबारा गर्भधारण का फैसला लेने चाहिए।

तनाव ज्यादा होता है

अबॉर्शन के बाद दुबारा गर्भधारण करने पर महिला को तनाव, डर, घबराहट जैसी परेशानियां अधिक हो जाती है। क्योंकि कहीं न  कहीं महिला के मन में इस बात को लेकर डर होता है की कहीं महिला का दुबारा से गर्भपात न हो जाये।

शारीरिक कमजोरी व् शारीरिक परेशानियां अधिक होती है

जिस तरह डिलीवरी के बाद पूरी तिरह फिट होने में महिला को समय लगता है उतना ही गर्भपात के बाद भी महिला को शारीरिक रूप से फिट होने में समय लगता है। ऐसे में गर्भपात के बाद दुबारा गर्भधारण होने पर महिला को शारीरिक रूप से कमजोरी व् शारीरिक परेशानियों का सामना अधिक करना पड़ सकता है, जिसके कारण प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ जाते हैं।

संक्रमण का खतरा

अबॉर्शन के बाद दुबारा गर्भधारण होने पर महिला को बच्चेदानी, प्राइवेट पार्ट आदि में संक्रमण होने का खतरा भी अधिक होता है। ऐसे गर्भपात के बाद गर्भधारण करने पर महिला को अपना बहुत ज्यादा ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

तो यह हैं गर्भपात के बाद महिला को माँ बनने का फैसला कब लेना चाहिए व् गर्भपात के बाद माँ बनने में महिला को क्या क्या दिक्कत आती है उससे जुडी कुछ बातें। यदि आपका भी अबॉर्शन हुआ है तो आपको भी इन सब बातों का ध्यान रखना चाहिए उसके बाद ही माँ बनने का फैसला लेना चाहिए।

प्रेगनेंसी में स्ट्रेचमार्क्स न हो इसके लिए क्या करें

प्रेगनेंसी में स्ट्रेचमार्क्स

गर्भवस्था के दौरान गर्भवती महिला बहुत सी बदलाव से गुजरती है और यह बदलाव शारीरिक और मानसिक रूप से होने के साथ स्किन में भी दिखाई दे सकते हैं। जैसे की कुछ महिलाओं को दाग धब्बो, मुहांसे, रंग का दबना, स्ट्रेचमार्क्स जैसी परेशानियां हो सकती है। तो आज हम आपसे प्रेगनेंसी में स्ट्रेचमार्क्स से जुडी कुछ बातें करने जा रहे हैं, और प्रेगनेंसी के दौरान आपको यह समस्या न हो इससे बचने के लिए आप क्या कर सकती है इसके बारे में भी बताने जा रहे हैं। लेकिन सबसे पहले यह जानना जरुरी है की प्रेगनेंसी के दौरान स्ट्रेचमार्क्स क्यों होते हैं।

प्रेगनेंसी में क्यों होते हैं स्ट्रेचमार्क्स?

गर्भवती महिला को पेट, जांघो, स्तन के आस पास स्ट्रेचमार्क्स की समस्या हो सकती है। और इनका कारण गर्भवती महिला का वजन बढ़ना, पेट का आकर बढ़ना, स्किन में कोलेजन का बढ़ना हो सकता है। जिसके कारण स्किन में खिंचाव के निशान आने लगते हैं जिसके कारण खुजली की समस्या भी महिला को हो सकती है। और यह दाग काफी बुरे भी लगते हैं और कुछ महिलाएं तो इनके कारण ख़ूबसूरती को कम हो गई है ऐसा सोचने लगती है।

प्रेगनेंसी में स्ट्रेचमार्क्स से बचने के टिप्स

यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचना चाहती है तो इसके गर्भवस्था के दौरान महिला को कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचने के लिए क्या करना चाहिए।

स्वस्थ आहार

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसमे एंटी ऑक्सीडेंट्स, विटामिन, ओमेगा 3 फैटी एसिड, आदि भरपूर मात्रा में हो। क्योंकि यह सभी आहार महिला को स्वास्थ्य से फिट रखने के साथ स्किन को पोषण देने में भी मदद करते हैं। जिससे स्किन पर होने वाली स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

नारियल तेल

गर्भवती महिला को नियमित रात को सोने से पहले नारियल तेल को अपने पेट पर हलके हाथों से लगाना चाहिए। और इस बात का ध्यान रखें की मालिश न करें, ऐसा करने से भी प्रेगनेंसी के दौरान स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

बादाम तेल

स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला बादाम तेल का इस्तेमाल भी कर सकती है। क्योंकि बादाम तेल भी स्किन पर होने वाली परेशानी से निजात पाने में मदद करता है।

एलोवेरा जेल

स्किन को पोषण देने, स्किन की कोमलता और ख़ूबसूरती को बनाए रखने के लिए एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करने से भी गर्भवती महिला को फायदा मिलता है। इसीलिए गर्भवती महिला चाहे तो एलोवेरा जेल को भी हल्के हाथों से प्रेगनेंसी के दौरान पेट की स्किन पर लगा सकती है।

पानी

गर्भवस्था के दौरान गर्भवती महिला को पानी का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए क्योंकि इससे बॉडी को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है। साथ ही बॉडी के हाइड्रेट रहने से स्किन की कोमलता को भी बरकरार रहने में मदद मिलती है।

वजन

प्रेगनेंसी के दौरान वजन बढ़ना अच्छी बात होती है लेकिन यदि वजन एक दम से अधिक बढ़ जाये तो न केवल इससे स्वास्थ्य सम्बन्धी दिक्कत होने का खतरा रहता है। बल्कि इससे प्रेग्नेंट महिला की स्किन में खिंचाव भी बढ़ता है जिससे स्ट्रेचमार्क्स की समस्या होने के चांस ज्यादा हो जाते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को वजन को तेजी से नहीं बढ़ने देना चाहिए, इसके लिए खान पान में संतुलन बनाए रखने के साथ हल्का फुल्का व्यायाम भी महिला कर सकती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से प्रेगनेंसी के दौरान महिला को होने वाली स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचने में मदद मिलती है। साथ ही स्किन की कोमलता को बनाए रखने में मदद मिलती है। और यदि डिलीवरी के बाद आपको स्ट्रेचमार्क्स दीखते हैं तो नियमित इन टिप्स का इस्तेमाल करने से इन्हे हल्का करने में मदद मिलती है।

कान के दर्द से ऐसे पाएं छुटकारा

व्यक्ति का शरीर बहुत ही संवेदन शील होता है उसे जिस स्थिति में ढालते है वे उसी में ढल जाता है। लेकिन कई बार हमारे शरीर में बहुत सी ऐसी परेशानियां हो जाती है जिन्हे सहन कर पाना बहुत मुश्किल होता है। उन्ही कुछ परेशानियों में से एक है कान का दर्द। कान का दर्द अक्सर हो जाता है जिसका कारण कान की साफ़ सफाई न करना और लापरवाही होता है।

ऐसे तो कान का दर्द किसी भी उम्र के व्यक्तियों को हो जाता है लेकिन यदि इसके कारणों पर ध्यान दिया जाए तो इस समस्या से बचा जा सकता है। आप ही सोचिये शरीर पर छोटी सी सुई चुभ जाने पर कितना दर्द होता है और अगर शरीर के एक हिस्से के भीतर दर्द हो तो…? वो असहनीय तो होगा ही।

यह पढ़े : पीठ के दर्द के घरेलू इलाज!

यूँ तो कान का दर्द कोई बहुत बड़ी बीमारी नहीं है लेकिन यदि समय रहते उसका इलाज न किया जाए तो ये समस्या बढ़ भी सकती है। ऐसे में बेहतर यही होगा की परेशानी के शुरू होते ही उसका इलाज करवा लिया जाए। आज हम आपको कान के दर्द से छुटकारा पाने के कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से घर बैठे इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

कान के दर्द से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय :-कान दर्द

1. कान में दर्द होने पर अदरक का प्रयोग करना लाभकारी होता है। इसके लिए अदरक का रस निकालकर उसे अपने कान में डालें। कुछ ही प्रयोग से आपके कान का दर्द ठीक हो जाएगा।

2. इस समस्या के लिए ओलिव आयल भी काफी लाभकारी होता है। ये एक लुब्रीकेंट की तरह काम करता है जो कान में जाकर इन्फेक्शन को दूर करने में मदद करता है। इसके लिए ओलिव आयल को गुनगना करके उसकी 3 से 4 बूंद कान में डालें। आराम मिलेगा।

3. प्याज हर घर में मिलने वाली सब्जी है लेकिन क्या आप जानते है की इसकी मदद से कान दर्द भी ठीक किया जा सकता है। इसके लिए प्याज का रस निकाल लें और उसे हल्का गुनगुना कर लें। गुनगुना हो जाने के बाद दिन में 3 से 4 बार उसकी 2-3 बूंद कान में डालें। जल्द ही दर्द में आराम मिलेगा।

4. लहसुन किसी भी बीमारी के लिए एंटी बायोटिक का काम करता है। इसकी मदद से आप कान दर्द को भी ठीक कर सकते है। इसके लिए लहसुन को बारीक़ काटकर उसे सरसों के तेल में गर्म कर लें। ठंडा होने के बाद उसे छान लें, और दिन में 2-3 बूंद अपने कान में डालें। आप चाहे तो सीधे लहसुन के रस को भी कान में डाल सकते है।

5. सर्दी की वजह से होने वाले कान के दर्द में गर्म पानी की सिकाई बहुत लाभकारी होती है। इसके लिए पानी गर्म करें और एक बोतल में डालकर उससे कान के आसपास सिकाई करें। इससे कान के दर्द में जल्द आराम मिलेगा।

6. पिपरमिंट का तेल और उसकी पत्ती दोनों ही कान के दर्द में बेहद लाभकारी होती है। इसके प्रयोग के लिए पिपरमिंट की पत्तियों का रस निकालकर उसे ड्राप बोतल की सहायता से अपने कान में डालें। इसके अलावा आप पिपरमेंट तेल को कॉटन की सहायता से अपने कान में भी लगा सकते है। इससे दर्द में जल्द आराम मिलेगा।

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7. तुलसी के फायदे कौन नहीं जनता लेकिन इसकी मदद से कान का दर्द भी दूर हो सकता है ये केवल कुछ ही लोग जानते है। इसके लिए तुलसी की पत्तियों का रस निकालकर उसकी कुछ बुँदे अपने कान में डालें। दिन में दो बार प्रयोग करने से दर्द में आराम मिलेगा।

8. नीम, इन्फेक्शन के लिए कितना लाभकारी होता है ये तो हम सभी जानते है। लेकिन क्या आप जानते है की इसकी मदद से कान दर्द में भी राहत पाई जा सकती है। इसके लिए नीम की पत्तियों का रस निकालकर उसकी 2-3 बूंद अपने कान में डालें। फायदा होगा।

9. जिन खाद्य पदार्थों में विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है उनका सेवन करें। ऐसा करने से भी कान के दर्द में आराम मिलता है।

10. आम के पत्तों का प्रयोग करने से भी आप कान के दर्द से छुटकारा पा सकते है। इसके लिए आम के पत्तों को पीसकर उनका रस निकाल लें। इस रस को गुनगुना करके उसकी 2 से 3 बूंद कान में डालें। दिन में 3-4 प्रयोग करने से दर्द में आराम मिल जाएगा।

ऐसे तो दर्द में डॉक्टरी सलाह लेना ही उचित होता है लेकिन अगर आप डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहते तो इन उपायों का प्रयोग किसी विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करें। क्योंकि बहुत से उपाय हर किसी हो सूट नहीं करते ऐसी स्थिति में दुष्परिणाम सामने आ सकते है।

सूखी खांसी रोकने के घरेलू उपाय

मौसम में जरा सा बदलाव नहीं आता है, की आपका शरीर उससे प्रभावित हो जाता है, ख़ास कर सर्दी और खांसी तो बहुत जल्दी हो जाती है, ऐसे में सूखी खांसी होने भी बहुत आम बात है, परन्तु इसके कारण आपको गले व् सीने में दर्द होने लगता है, और सांस लेने में भी आपको परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है, और कई बार खांसी की समस्या बढ़ने के कारण आपको दूसरों के सामने शर्मिंदा भी होना पड़ता है, क्योंकि सभी जगह शान्ति हो और आप खांसी करने लग जाये तो आपकी तरफ की सभी देखने लगते है।

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आप खुद ही सोचिये की आप किसी प्रेजेंटेशन में बैठे जहां सब लोग आराम से बैठे है, और आप बार बार खांसी करते है तो क्या होगा? इसके अलावा यदि आप कही बाहर खाना खाने गए है और आप खांसी किये जा रहे है तो आपको लोग घूर कर देखने लगते है, इसका कारण होता है यह रोग बहुत तेजी से फैलता है, इसके वायरस जैसे ही दूसरों के संपर्क में आते है तो उन्हें भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, परन्तु यदि आप इसका इलाज करते है तो इस परेशानी से राहत पा सकते है, और इसके आसान इलाज आपके घर में ही होते है तो आइये आज हम आपको सूखी खांसी से बचने के कुछ उपाय बताने जा रहे है, परन्तु यदि आपको किसी बीमारी की वजह से ये परेशानी है तो आपको डॉक्टर की राय भी लेनी चाहिए।

सूखी खांसी के क्या क्या कारण होते है:-

  • किसी तरह के वायरल संक्रमण के कारण।
  • फ्लू होने पर आपको सूखी खांसी हो सकती है।
  • सर्दी की समस्या होने पर भी आपको खांसी हो सकती है।
  • जो लोग स्मोकिंग अधिक करते है उन्हें सूखी खांसी की समस्या हो जाती है।
  • धूल मिट्टी, और प्रदूषण में ज्यादा रहने के कारण भी आपको सूखी खांसी की समस्या हो सकती है।
  • टी बी, फेफड़ो से जुडी बिमारी होने के कारण।

अदरक का सेवन करें:-

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अदरक का इस्तेमाल करने से भी सूखी खांसी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप अदरक को पीस को कर उसे अच्छे से एक गिलास पानी में उबाल लें, उसके बाद इस पानी को ठंडा करने के बाद इसे पी लें, उसके बाद दिन में तीन से चार बार इस प्रक्रिया को दोहराएं, साथ ही आप चाहे तो अदरक के तेल से अपने गले और सीने की मसाज कर सकते है इससे भी आपको राहत मिलती है।

हल्दी का इस्तेमाल करें:-

हल्दी आपको हर एक तरह के वायरल इन्फेक्शन से बचाने में मदद करती है, क्योंकि हल्दी में एंटी वायरल, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी बैक्टेरियल गुण होते है, इसके इस्तेमाल के लिए एक चम्मच हल्दी को एक चम्मच अजवाइन के साथ मिलाकर एक गिलास पानी में उबाल लें, और इसे जब तक उबालें जब तक की ये पानी आधा न रह जाएँ, उसके बाद इस पानी में थोड़ा सा शहद डाल कर दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करें आपको जरूर राहत का अहसास होगा।

बादाम का प्रयोग करें:-

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रात को सात या आठ बादाम को पानी में भिगो दें, सुबह उठ कर इन बादाम का छिलका उतार कर इन्हे अच्छे से पीस लें, उसके बाद इसमें दो चम्मच मक्खन, और दो चम्मच चीनी, दाल कर सुबह शाम इसका सेवन करें, दो या तीन दिनों में ही आपको इस समस्या से आराम मिलने में मदद मिलेगी।

लहसुन का सेवन करें:-

दो लहसुन की कलियों, और अजवाइन की पत्तियों को एक गिलास पानी में डाल कर इसे उबलने के लिए रख दें, उसके बाद जब ये मिश्रण ठंडा हो जाएँ तो इसमें शहद मिलाकर दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करें, ऐसा करने से आपको सूखी खांसी की समस्या से राहत मिलने में मदद मिलती है।

शहद के सेवन से आएगा सूखी खांसी से आराम:-

शहद में भी एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी माइक्रोबियल गुण होते है, जो आपको सूखी खांसी की समस्या से राहत दिलाने में मदद करते है, इसके लिए आप दिन में दो बार गरम दूध में एक चम्मच शहद डाल कर इसका सेवन करें, ऐसा करने से आपको सूखी खांसी से राहत मिलने के साथ सीने में दर्द से भी राहत मिलने में मदद मिलती है।

तुलसी का प्रयोग करें:-

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तुलसी भी आपको सूखी खांसी की समस्या से राहत दिलाने में मदद करता है, इसके इस्तेमाल के लिए आप तुलसी की पत्तियों का रस निकाल लें, उसके बाद उसमें थोड़ा सा शहद और अदरक का रस मिलाकर उसका दिन में सुबह शाम सेवन करें, आपको जरूर आराम मिलेगा।

निम्बू का इस्तेमाल करें:-

निम्बू में विटामिन सी की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण ये गले में होने वाले संक्रमण से राहत दिलाने में आपकी मदद करती है, इसके लिए आप दो चम्मच निम्बू के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर इसका सेवन करें, और दिन में कई बार इसका सेवन करें, आपको जल्दी आराम मिलेगा, साथ ही गले को साफ़ होने में भी मदद मिलेगी।

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काली मिर्च का उपयोग करें:-

काली मिर्च अपने गुणों से आपको सूखी खांसी की समस्या से राहत दिलाने में मदद करता है, इसके लिए आप गरम दूध में थोड़ा सा काली मिर्च पाउडर डाल कर इसका सेवन करें, इसके साथ आप चाहे तो घी में काली मिर्च को भून कर उसका सेवन भी करते है तो आपको सूखी खांसी की समस्या से राहत दिलाने में मदद करती है।

चाय का सेवन करें:-

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सूखी खांसी से राहत पाने के लिए आप चाय का सेवन कर सकते है, क्योंकि खांसी के कारण गले में दर्द होता है और गले की सिकाई के साथ सूखी खांसी से राहत पाने के लिए आप तुलसी, इलायची, काली मिर्च, अदरक आदि मिलाकर इसकी चाय बनाकर इसका सेवन करें, ऐसा करने से आपको सूखी खांसी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

गाजर के जूस का सेवन करें:-

गाजर के जूस का सेवन करने से भी आपको सूखी खांसी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप गाजर के जूस में थोड़ा पानी मिला लें, उसके बाद इसमें थोड़ा शहद मिलाकर दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करें, इसके इस्तेमाल से आपको जरूर आराम महसूस होगा।

सूखी खांसी से राहत पाने के अन्य उपाय:-

  • गरम दूध में शहद डालकर दिन में दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करने से आपको सूखी खांसी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • गरम पानी में नमक डाल कर गरारे दिन में बार बार करें आपको आराम महसूस होगा, साथ ही दर्द से भी राहत मिलेगी।
  • आधा चम्मच प्याज़ के रस में आधा चम्मच शहद डाल कर उसका सेवन दिन में दो से तीन बार करने से आपको खांसी से आराम मिलने में मदद मिलती है।
  • काले अंगूर का जूस पीने से भी सूखी खांसी की समस्या से राहत मिलने में मदद मिलती है।
  • काली मिर्च, मुलेठी, सौंठ तीनो को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस कर चूर्ण तैयार कर लें, उसके बाद इसमें शहद मिलाकर दिन में एक चम्मच में डाल कर इसका सेवन करें आपको खांसी से राहत मिलेगी।
  • त्रिफला चूर्ण, और शहद को भी बराबर मात्रा में लेने से आपको खांसी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • भुने हुए लौंग का चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से, या आप शहद में रात भर के लिए पांच छह लौंग को छोड़ दें, और सुबह उठ कर दिन में तीन से चार इस शहद का सेवन करें, इससे भी आपको सूखी खांसी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
  • एक कप पानी में एक चम्मच सिरका मिलाकर दिन में तीन से चार बार इसका सेवन करें इससे भी आपको सूखी खांसी से राहत मिलने में मदद मिलती है।

तो ये कुछ उपाय है जिनका इस्तेमाल करके आप सूखी खांसी की समस्या से राहत पा सकते है, इसके साथ सूखी खांसी होने पर आपको किसी भी तरह के ज्यादा तले भुने और मसालेदार भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए, और जितना हो सकें ठन्डे पानी का सेवन करने की बजाय गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए, साथ ही खांसी की समस्या होने पर आपको दही के सेवन से भी परहेज करना चाहिए, ऐसा करने से भी आपको खांसी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

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अबॉर्शन और डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग होना

केवल प्रेगनेंसी के दौरान ही नहीं बल्कि डिलीवरी के बाद भी महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। और डिलीवरी के बाद जो सबसे बड़ी परेशानी होती है वो होती है महिला को ब्लीडिंग होना। और जब महिला का अपने आप गर्भपात हो जाता है या महिला अबॉर्शन करवाती है तो भी महिला को ब्लीडिंग की समस्या होती है। डिलीवरी और अबॉर्शन के बाद जो ब्लीडिंग की समस्या होती है वह मासिक धर्म की तरह नहीं होती है।

बल्कि इस दौरान होने वाली ब्लीडिंग ज्यादा तेजी से होती है, ब्लड फ्लो ज्यादा होता है, ज्यादा दिनों के लिए ब्लीडिंग होती है, साथ ही महिला को पेट, कमर, टांगों में दर्द का सामना करने के साथ कमजोरी भी बहुत अधिक होती है। तो आइये अब जानते हैं की महिला को अबॉर्शन और डिलीवरी के बाद महिला को किस तरह ब्लीडिंग होती है।

अबॉर्शन के बाद ब्लीडिंग

यदि आपका गर्भ अपने आप गिर गया है या आपने डॉक्टर की मदद से अबॉर्शन करवाया है तो दोनों ही केस में आपको अलग अलग समय तक ब्लीडिंग होती है।

अपने आप गर्भपात होने पर ब्लीडिंग

यदि अभी आपकी प्रेगनेंसी हुए ज्यादा समय नहीं हुआ था और किसी कारण अपने आप ही आपका गर्भ गिर गया है तो इस केस में महिला को डेढ़ या दो हफ्ते तक बलीडिंग होती है। यह ब्लीडिंग पीरियड्स की तुलना में ज्यादा होती है, साथ ही इस दौरान महिला को पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द महसूस होने के साथ ब्लड के थक्के भी निकलते है।

और पीरियड्स के मुकाबले महिला को ज्यादा सैनिटरी पैड बदलने की जरुरत होती है। इस दौरान महिला के खाने पीने की इच्छा में कमी आने के साथ महिला को बहुत ज्यादा तनाव, कमजोरी जैसी परेशानियां भी होती है। साथ ही इसके बाद आपको थोड़े समय तक पीरियड्स के अनियमित होने की समस्या भी होती है।

डॉक्टर द्वारा गर्भपात होने पर ब्लीडिंग

यदि आपने डॉक्टर द्वारा गर्भपात करवाया है तो आपको अपने आप होने वाले गर्भपात के मुकाबले ज्यादा ब्लीडिंग होने के साथ ज्यादा दर्द का अनुभव भी होता है। लेकिन डॉक्टर द्वारा गर्भपात करवाने से गर्भाशय से सभी टिश्यू निकल जाते हैं।

जिससे बाद में महिला को परेशानी नहीं नहीं होती है। साथ ही इसके बाद हो सकता है दो तीन महीने आपको पीरियड्स न आये और आये भी तो थोड़े समय तक अनियमित हो।

डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग

डिलीवरी के बाद भी महिला को लगातार तीन से चार हफ़्तों तक ब्लीडिंग होती है। और इस दौरान महिला को बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होने के साथ कमजोरी, थकान, पेट में दर्द, बॉडी में दर्द की समस्या भी होती है। शुरुआत में एक दिन में महिला को तीन से चार पैड बदलने की जरुरत होती है उसके बाद धीरे धीरे ब्लीडिंग कम हो जाती है। और डिलीवरी के बाद जब ब्लीडिंग बंद हो जाती है तो उसके बाद हो सकता है की जब तक आप अपने बच्चे को दूध पिलायें तब तक आपके पीरियड्स न आएं।

अबॉर्शन और डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग होने पर डॉक्टर से कब मिलें

  • यदि महिला को ब्लीडिंग बहुत ज्यादा होती है की हर दो घंटे में आपको पैड बदलने की जरुरत पड़े।
  • बहुत ज्यादा समय तक ब्लीडिंग होने पर यानी की यदि आपको डिलीवरी या अबॉर्शन के बाद एक महीना हो गया और फिर भी ब्लीडिंग हो रही है।
  • पेट, पीठ या पेट के निचले हिस्से में असहनीय दर्द हो रहा है।
  • ब्लीडिंग में से महिला को तेज गंध आये तो भी डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि यह संक्रमण के कारण होता है।

तो यह हैं अबॉर्शन व् डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग होने से जुडी कुछ बातें, ऐसे में महिला दर्द की समस्या से राहत पाने के लिए गर्म पानी को बोतल में पानी डालकर सिकाई आदि कर सकती है। इसके अलावा ब्लीडिंग खत्म होने के बाद एक बार डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।

घर में बनाएं कोल्डड्रिंक अपने लिए गर्भ को कोई नुकसान नहीं होगा

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी का हाइड्रेट रहना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि शरीर में पानी की कमी गर्भवती महिला की शारीरिक परेशानियों को बढ़ाने के साथ बच्चे के विकास में कमी की समस्या भी खड़ी कर सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को भरपूर मात्रा में पानी, जूस, नारियल पानी आदि पीने की सलाह दी जाती है। लेकिन प्रेगनेंसी में जीभ के स्वाद में परिवर्तन आने के कारण महिला का कोल्ड ड्रिंक, बाहर से डिब्बाबंद जूस आदि पीने का मन कर सकता है।

और कोल्ड ड्रिंक्ड आदि पीना प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे के स्वास्थ्य के लिए सही नहीं होता है। ऐसे में गर्भवती महिला अपनी इस इच्छा को पूरी करने के लिए घर में ही कुछ ड्रिंक्स बना सकती है। जो प्रेग्नेंट महिला की सेहत और बच्चे के विकास पर कोई बुरा असर डालती है, तो आइये आज हम इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसी ही ड्रिंक्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हे प्रेग्नेंट महिला घर पर बनाकर सेवन कर सकती है।

निम्बू पानी

एक गिलास में एक निम्बू का रस, थोड़ा सा काला नमक, थोड़ी सी चीनी और पानी डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। अब इसे कांच के गिलास में डालकर साइड में एक निम्बू की स्लाइस काटकर लगाएं, और इसका सेवन करें। यह ड्रिंक प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत फायदेमंद होने के साथ स्वादिष्ट भी होती है। इसे पीने से प्रेग्नेंट महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने, पाचन तंत्र को को दुरुस्त रखने आदि में मदद मिलती है।

केसर बादाम मिल्क

दूध को अच्छे से गर्म करके इसमें दो तीन बादाम पीसकर, केसर के दो तीन रेशे और स्वादानुसार चीनी मिलाएं। अब इसे ठंडा करके इसका सेवन करें यह ड्रिंक स्वादिष्ट होने के साथ माँ व् बच्चे की सेहत को बेहतर रखने में भी मदद करती है। साथ ही ऐसा भी माना जाता है की केसर दूध पीने से होने वाला बच्चा बुद्धिमान व् सूंदर होता है।

मैंगो शेक

आम को दूध में मिलाकर अच्छे से पीस लें, उसके बाद ड्राई फ्रूट्स के छोटे छोटे टुकड़े करके उस शेक में मिलाएं। और ठंडा करने के बाद उस शेक को पीएं, यह ड्रिंक अधिकतर प्रेग्नेंट महिलाओं को पसंद आ सकती है। क्योंकि आम अधिकतर सभी महिलाओं का पसंदीदा फल होता है। साथ ही आम, दूध और ड्राई फ्रूट्स मिलाने से यह ड्रिंक सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हो जाती है। लेकिन ध्यान रखें की आम का मौसम हो तभी आम का सेवन करें।

फलों का रस

घर में आंवला, निम्बू, संतरा, व् अन्य मौसमी फलों को मिलाकर उनका रस निकालें। उसके बाद उसमें काला नमक और हल्का सा ऊपर से निम्बू का रस मिलाएं और अच्छे से मिक्स करके उसका सेवन करें। यह ड्रिंक न केवल आपकी जीभ के स्वाद को बढ़ाती है बल्कि इसके सेवन से प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

शरबत

घर में गुलाब का शरबत, पुदीने व् निम्बू के रस का शरबत, आदि भी बनाया जा सकता है। यह ड्रिंक्स प्रेग्नेंट महिला को एनर्जी से भरपूर रखने के साथ रिफ्रैश फील करने में भी मदद करता है।

दही की लस्सी

घर में दही को मिक्स करके उसमें काला नमक, भुना हुआ जीरा आदि मिलाएं। यह ड्रिंक बनाने में आसान होने के साथ गर्भवती महिला और बच्चे के लिए बहुत फायदेमंद भी होती है। नियमित दोपहर में भोजन के साथ पीएं इससे प्रेग्नेंट महिला को एनर्जी से भरपूर रहने व् प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली बहुत सी परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

जलजीरा

एक गिलास पानी में जलजीरा, नमक, निम्बू, पानी डालकर अच्छे से मिलाएं। अब इसके ऊपर थोड़ी सी बूंदी डालें। यह घर पर बनी ड्रिंक गर्भवती महिला को बहुत पसंद आ सकती है। क्योंकि यह स्वाद में चटपटी होती और खट्टी होती है।

सत्तू का शरबत

सत्तू का शरबत भी घर में बनाकर गर्भवती महिला पी सकती है। और यह ड्रिंक बनाने के लिए सत्तू, पानी, काला नमक, निम्बू, प्याज़, हरी मिर्च, भुना जीरा आदि का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे इसके स्वाद को बढ़ाने में मदद मिलती है। और यह शरबत गर्भवती महिला व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है।

तो यह है कुछ आसान और बेहतरीन ड्रिंक्स जो प्रेग्नेंट महिला घर पर बनाकर पी सकती है। और इनका सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता है। बल्कि यह माँ और बच्चा दोनों के लिए फायदेमंद होती हैं।