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प्रेग्नेंट महिलाओं को डॉक्टर से मिलने पर ये बाते जरूर पूछनी चाहिए

प्रेगनेंसी का समय सही महिलाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। हर महिला की गर्भावस्था की प्रक्रिया अलग अलग हो सकती है। हो सकता है किसी महिला को बहुत से समस्याओं और बदलावों का सामना करना पड़ रहा हो और कोई महिला इस गर्भावस्था को बहुत आराम से बिता रही हो।

इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान हर महिला को यह समस्या होती है के डॉक्टर से क्या पूछना चाहिए और क्या नहीं। यह परेशानी सिर्फ प्रेग्नेंट महिलाओं को ही नहीं होती बल्कि उन महिलाओं को भी होती है जो कन्सीव करने की प्लानिंग कर रही हो। वैसे तो आपके मन में जो भी सवाल को अपनी प्रेगनेंसी को लेकर आपको वह सभी सवाल अपने डॉक्टर से पूछने चाहिए। अपनी गर्भावस्था के हर हिस्से और हर समस्या को अपनी डॉक्टर के साथ जरूर साँझा करे क्योंकि वही जो डिलीवरी में आपकी मदद करेगी।

फिर भी अगर आपको समझ नहीं आ रहा हो के कैसे अपने डॉक्टर से बात करे या क्या पूछे तो आज इस लेख में हम आपको यही बताएंगे की कुछ जरुरी बाते आपको अपने डॉक्टर से जरूर पूछनी चाहिए। आइये जानते है आपको अपनी अगली डॉक्टर विजिट पर डॉक्टर से क्या पूछना है।

कौनसे से हर्बल सप्लीमेंट्स और दवाइयों का सेवन बंद करना है?

बहुत से लोग कुछ हर्बल सप्लीमेंट्स और विटामिन्स की दवाइयों का सेवन करते है। पर गर्भावस्था के दौरान आपके द्वारा हर ली जानी वाली चीज का पूरा असर आप अपने शिशु के साथ भी साँझा करने वाले है। इसीलिए कोई भी दवाई या हेल्थ सप्लीमेंट्स लेने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछे।

कई बार हम सभी लोग सर दर्द, उलटी, खांसी और जुकाम आदि होने पर कोई भी दवाई ले लेते है या फिर केमिस्ट के पास भी हमे बहुत से ऐसे दवाइयां बिना प्रिस्क्रिप्शन के ही मिल जाती है। पर गर्भावस्था के दौरान कोइ भी दवाई बिना अपने डॉक्टर की सलाह के ना लें। क्योंकि केमिस्ट के पास भी बहुत सी ऐसी दवाइयां होती है जो गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसानदेह हो सकती है। इसीलिए पहले से ही अपने डॉक्टर से पूछ लें की कोल्ड, सिरदर्द और उलटी आदि के कौन सी दवाई लेनी है और कौन सी नहीं। चाहे कोई विटामिन या आयरन की दवा ही क्यों ना हो पर अपने डॉकटर की सलाह के बिना ना लें।

प्रेगनेंसी के दौरान कौन कौन से टेस्ट और अल्ट्रासाउंड करवाने है?

गर्भावस्था के दौरान समय समय पर डॉक्टर बहुत से टेस्ट और अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहते है। कुछ टेस्ट आपकी मेडिकल हिस्ट्री को जानने के लिए भी होते है और कुछ टेस्ट शिशु के विकास को जानने के लिए भी। इसीलिए आप अपने डॉक्टर से अच्छे से पूछे की कौन सा टेस्ट कब करवाना है कौन सा टेस्ट या अल्ट्रासाउंड किस चीज के लिए है। यह जानकारी आपको अपनी और अपने शिशु की सेहत के लिए जरुरी है।

गर्भावस्था के दौरान कितना वेट बढ़ना चाहिए?

प्रेग्नेंट महिलाओं का वेट बढ़ना जरुरी है और वेट बढ़ता ही है यह तो सब जानते है पर कितना वेट बढ़ना चाहिए यह किसी को भी नहीं पता होता है। आपको यह जानकार हैरानी होगी की जिस तरह गर्भावस्था में वजन का ना बढ़ना चिंताजनक है, उसी तरह वेट का जरुरत से ज्यादा बढ़ना भी गंभीर समस्याओं को न्योता देने के समान है। इसीलिए प्रेगनेंसी के शुरुआत में ही आपको अपने डॉक्टर से पूछ लेना चाहिए के पूरी प्रेगनेंसी के आपको कुल कितना वेट बढ़ाना है। इसके लिए डॉक्टर आपको आपकी हाइट के हिसाब से एक अनुमानित वेट बताएंगे। जिसके अनुसार आप अपने डाइट प्लान कर सकते है।

कौन से भोजन का सेवन नहीं करना है?

गर्भावस्था में बहुत से ऐसे भोजन प्रदार्थ होते है जिनका सेवन हमे त्यागना पड़ता है क्योंकि कुछ चीजों से गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंच सकता है। इसीलिए अपने डॉक्टर से पहले ही उन चीजों के बारे में पूछ लेना सही रहता है। ताकि आगे चलकर प्रेगनेंसी में कोई परेशानी ना हो।

किस तरह की एक्सरसाइज और योग प्रेगनेंसी में कर सकते है?

कुछ लोग अपनी रोजाना की रूटीन में एक्सरसाइज और योग करना पसंद करते है। अगर वो यह ना करे तो उन्हें लगता है के उनका दिन पूरा नहीं हुआ है। पर क्योंकि अब आपके गर्भ में आपका शिशु भी है तो कोई भी एक्सरसाइज और योग करने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछे की कही किसी हैवी एक्सरसाइज का असर आपके शिशु पर तो नहीं पड़ेगा।

किसी गर्भवती महिला की मेडिकल हिस्ट्री का शिशु पर क्या प्रभाव होगा?

आजकल के बदलते और प्रदूषित वातावरण के कारण छोटी उम्र में ही लोगो को बहुत से बीमारियां हो जाती है जैसे की डायबिटीज, हाइपरटेंशन आदि। यदि किसी गर्भवती महिला को यह बीमारी हो तो उसे यह पूछ लेना चाहिए की इस बीमारी है गर्भ में पल रहे शिशु पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

क्या प्रेगनेंसी में न्यूट्रिशनल तत्वों के लिए कोई सप्लीमेंट्स लेना है या नहीं?

बहुत से डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान कुछ सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते है पर कोई भी गर्भवती महिला खुद से कोई भी सप्लीमेंट्स न लें और पहले से ही अपने डॉक्टर से इस बारे में पूछ लें।

प्रेगनेंसी के पहले तिमाही में यात्रा करें या नहीं?

गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीनो बहुत ही महत्वपूर्ण होते है। अक्सर घर के बड़े कही भी आने जाने के लिए मना करते है। पर अगर किसी भी कारण आपको कही आना या जाना है तो अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें। पहले तिमाही में यात्रा करना कितनी सुरक्षित है या नहीं।

यह बहुत थोड़े से सवाल है जो आप अपने डॉक्टर से मिलने पर उनसे पूछ सकते है। लेकिन इन सभी बातो के अतिरिक्त और कोई भी सवाल पूछना चाहते है या आपके मन में कोई शक है, चाहें वह शक या प्रश्न आपकी डिलीवरी के लिए ही क्यों ना हो तो भी अपने डॉक्टर से जरूर डिसकस करें। क्योंकि बात करने से आपकी समस्या का समाधान होगा। अपने मन में आ रहे हर शक को अपने डॉक्टर से जरूर साँझा करे, क्योंकि अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो आपको इन्ही छोटी छोटी बातो को लेकर तनाव बना रहेगा और प्रेगनेंसी में ज्यादा स्ट्रेस अच्छी बात नहीं है।

पीरियड्स कब से शुरू होकर कब बंद होते है?

When does menstruation start and stop?

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मासिक धर्म या पीरियड्स लड़कियों और महिलाओं में होने वाली एक आम समस्या है जो प्रत्येक माह कुछ दिनों के लिए होती है। इस दौरान महिलाओं के योनि भाग से रक्त का स्त्राव होता है जो 5 या 7 दिनों के बाद अपने आप बंद हो जाता है। वैसे तो आजकल सभी स्कूल्स और माताएं अपनी लड़कियों को समय से पूर्व ही इस बारे में समझा देती है। लेकिन फिर भी आजकल की लड़कियां इस बारे में बात करने से कतराती है। उन्हें इस विषय में चर्चा करने में शर्म आती है।

जिसके कारण कई बार वे अपनी समस्या के बारे में खुल कर किसी से बात नहीं कर पाती। अगर आप भी उन्ही लड़कियों में से है तो परेशान न हो! क्योंकि आज हम आपको पीरियड्स से जुड़े हर एक महत्वपूर्ण तथ्य के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है। जिसकी मदद से आप इस चक्र और इसके कारणों को अच्छे से जान पाएंगी। साथ ही हम आपको ये भी बताएंगे की किस उम्र से लड़कियों में मासिक धर्म शुरू होता है और कब बंद होता है?

मासिक धर्म क्या होता है?

सामान्य भाषा में इसे MC या Menstruation cycle भी कहा जाता है जो हर महिला में होने वाली सामान्य शारीरिक गतिविधि होती है। जन्म के दौरान एक लड़की के अंडाशय में लाखो अपरिपक्व अंडे होते है जो किशोरावस्था में हार्मोनल चेंजस होने के चलते विकसित होना शुरू हो जाते है। जिनमे से एक अंडा प्रत्येक माह अंडाशय में से बाहर निकलकर गर्भाशय में आ जाते है। और जब इन परिपक्व अण्डों के साथ किसी के साथ निषेचन नहीं होता तो ये अंडे फुटकर रक्त के रूप में योनि के द्वारा बाहर आ जाते है।periods

लेकिन जब इन अण्डों का निषेचन हो जाता है तो महिला गर्भवती हो जाती है। निषेचन न होने की स्थिति में रक्तस्त्राव होता है जो मुख्यतः 5 से 7 दिनों तक होता है। जिसके बाद अगला माहवारी चक्र फिर बनना प्रारंभ हो जाता है।

पीरियड्स किस उम्र में शुरू होते है और कब बंद हो जाते है?

सामान्य तौर पर मासिक धर्म प्रारंभ होने और बंद होने की कोई निश्चित आयु नहीं है। क्योंकि यह व्यक्ति के रहन सहन और उसकी जीवनशैली पर भी निर्भर करता है। वैसे माहवारी के प्रारंभ होने की सामान्य आयु सीमा 11-13 वर्ष है। महिलाओं में रजोनिवृत्ति (माहवारी बंद होने की स्थिति) 45-55 वर्ष की आयु के मध्य होती है। इस आयु के बाद मासिक धर्म हमेशा के लिए बंद हो जाता है। इसलिए इस आयु के पश्चात् महिलाएं बच्चा पैदा करने की स्थिति में नहीं रहती।

क्या पीरियड्स में अनियमितता भी होती है?

सभी को नहीं परन्तु, कुछ महिलाओं के पीरियड्स अनियमित होते है। जिसका कारण उनका खान पान और जीवनशैली होता है। इस स्थिति में महिला को हर महीने माहवारी नहीं आती। वैसे तो ये स्थिति कमजोर और किसी बिमारी से जूझ रही महिला के साथ भी हो सकती है लेकिन रजोनिवृत्ति की आयु पर पहुंचने वाली महिलाओं और माहवारी की प्रारंभिक स्टेज में रह रही लड़कियों के साथ होना ये आम है।

इसके अलावा इन करने की वजह से भी माहवारी अनियमित हो जाती है :
  • किसी गंभीर बीमारी का होना।
  • गर्भाशय के किसी हिस्से में संक्रमण आदि होना।
  • वजन का सामान्य से अधिक या कम होना।
  • बहुत अधिक कसरत करना।
  • तनाव होना।
  • किसी तरह की गर्भनिरोधक दवाएं या इंजेक्शन लेना।
  • नशीले पदार्थों का सेवन करना।
  • स्तनपान कराना आदि।
इन बातों का रखें ध्यान :-periods 1

अगर आपके साथ निम्नलिखित परेशानियां हो रही है और आप इनका कारण नहीं जान पा रही है तो तुरंत जाकर डॉक्टर से सम्पर्क करें। क्योंकि कई बार छोटी समझकर अनदेखी की जाने वाली समस्याएं आगे चलकर बड़ी साबित हो जाती है। वे समस्याएं निम्न है –

  • 16 वर्ष की आयु के बाद भी माहवारी का प्रारंभ नहीं होना।
  • मासिक धर्म का अचानक अनियमित हो जाना।
  • दो मासिक धर्म के बीच योनि से खून निकलना।
  • माहवारी बंद के एक साल बाद योनि से खून निकलना।
  • 40 वर्ष की आयु के बाद या इसके बाद पीरियड्स के दौरान दर्द होना।
  • मासिक चक्र की अवधि 21 दिन से कम होना।
  • माहवारी के दिनों में बहुत तेज दर्द होना।
क्या प्रत्येक 28 दिन के गैप पर माहवारी आना जरुरी है?

मासिक धर्म का चक्र हर महिला के अपने स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। सामान्यतौर पर मासिक चक्र 20 दिन से लेकर 35 दिनों के मध्य हो सकता है। स्वास्थ्य मासिक चक्र 28 दिनों के गैप को भी माना जाता है। हां, कई बार किन्ही कारणों की वजह से पीरियड्स आने में थोड़ी देरी हो जाती है लेकिन इसका अर्थ ये कतई नहीं है की आप गर्भवती है।

मासिक धर्म के दौरान गर्भधारण कर सकते है या नहीं?PREGNANCY-PROBLEM

बहुत से लोग मानते है की इस दौरान गर्भधारण नहीं करना चाहिए जबकि ऐसा नहीं है। आप चाहे तो MC के दौरान भी गर्भधारण कर सकती है। जिन महिलाओं का मासिक चक्र 28 दिनों से भी कम होता है उनमे गर्भधारण की संभावना अधिक होती है।

S*x से परहेज :-

बहुत से महिलाएं इस दौरान सेक्स करना पसंद नहीं करती। लेकिन अगर आप सुरक्षित और सही तरीके से सावधानी रखते हुए S*x किया जा सकता है। ऐसा करने से पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द में आराम मिलता है और दर्द नहीं होता।

तो ये थे मासिक धर्म से जुडी सभी महत्वपूर्ण तथ्य, जिन्हे पढ़कर आप भी समझ गयी होंगी की मासिक धर्म कोई बीमारी नहीं बल्कि एक आम समस्या है जो आपके घर में मौजूद सभी महिलाओं को होती है केवल दादी नानी को छोड़कर।

प्रेगनेंसी के दौरान क्या क्या समस्या आती है

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प्रेगनेंसी का समय किसी भी महिला के लिए बहुत की खूबसूरत और खास होता है। लेकिन जितना खास यह पल होता है कई बार महिला को उतनी ही जटिलताओं का सामना भी करना पड़ता है। यानी प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को बहुत सी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। और ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है की हर महिला को प्रेगनेंसी के दौरान एक जैसी समस्या हो। बल्कि यह हर महिला के हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है, इसके आलावा इस दौरान महिला को दर्द से लेकर, सूजन तक की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान कौन कौन सी परेशानियां होती है।

प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली समस्याएँ

गर्भावस्था किसी भी महिला के साथ उसके परिवार के लोगो के लिए एक खुशनुमा लम्हा होता है। और पूरे नौ महीने हर कोई आने वाले शिशु को लेकर कोई न कोई सपना बुनता है, लेकिन इस दौरान हो सकता है महिला को बहुत सी शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के समय महिला को अपना दुगुना ध्यान देना चाहिए ताकि गर्भवती महिला के साथ शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। तो आइए अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली समस्याएँ कौन सी हैं।

उल्टी आना व् मॉर्निंग सिकनेस

प्रेगनेंसी के शुरुआत में मॉर्निंग सिकनेस व् उल्टी की समस्या होना आम बात होती है कुछ महिलाओं को यह समस्या पहली तिमाही में रहती है। तो कुछ महिलाएं पूरे नौ महीने इस समस्या से परेशान रहने के बाद डिलीवरी के बाद भी इससे परेशान रहती हैं। उल्टियां अधिक होने की समस्या होने पर एक बार डॉक्टर से बात करनी चाहिए क्योंकि उल्टी करने से पैर पर अधिक दबाव पड़ता है जिसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु को परेशानी हो सकती है।

जल्दी थकान महसूस करना

जैसे की महिला को पता चलता है की वो प्रेग्नेंट है उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता है लेकिन इस दौरान बॉडी में तेजी से हार्मोनल बदलाव आते हैं, शुरुआत में वजन कम भी हो सकता है। और उसके बाद भी शरीर में हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं और महिला का वजन बढ़ने लगता है। ऐसे बॉडी में हो रहे तेजी से परिवर्तन के कारण महिला को कमजोरी व् थकान होने की समस्या होना आम बात होती है। और ऐसे में महिला को अपना और अच्छे से ख्याल रखना चाहिए थकान होने पर आराम करना चाहिए और बॉडी पर ज्यादा जोर नहीं डालना चाहिए।

पेट में दर्द व् ऐंठन

कई महिलाओं को पेट में दर्द व् ऐंठन की समस्या भी होती है। कभी कभार थोड़ा बहुत दर्द होना आम बात होती है लेकिन यदि महिला को तेजी से दर्द हो और बार बार यह समस्या हो तो इसे इग्नोर न करते हुए डॉक्टर से राय लेनी चाहिए और इसके कारण का पता करना चाहिए।

कब्ज़ की समस्या

कब्ज़ की समस्या प्रेगनेंसी में अधिकतर महिलाओं में देखने को मिलती है, और कब्ज़ की परेशानी होने के कारण महिला परेशान भी रहती है इसके लिए महिला को चाहिए की वो एक बार डॉक्टर से सम्पर्क करे और अपने खान पान को सही रखें।

सूजन की परेशानी

यदि किसी महिला में आयरन की कमी होती है या प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में वजन बढ़ने के कारण ब्लड फ्लो होने में दिक्कत होने लगती है तो ऐसे में महिला के पैरों में सूजन की समस्या देखने को मिलती है। और ऐसे में यदि सूजन की समस्या अधिक हो तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए। साथ ही महिला की बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर तरीके से हो इसके लिए महिला को करवट लेकर सोना चाहिए क्योंकि यदि महिला सीधा सोती है तो इससे पैरों तक ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है।

बार बार यूरिन आना

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है इसका कारण बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के साथ शिशु के पेट पर पड़ने वाला वजन भी होता है। जिसके कारण मूत्राशय पर दबाव पड़ता है और बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है।

स्वाद बदलना

गर्भावस्था के दौरान महिला के स्वाद में भी फर्क आता है कई बार महिला को अधिक भूख लगती है तो कई बार कुछ खाने का मन नहीं करता है। और कुछ महिलाओं का इस समय में मीठा खाने का मन करता है तो कुछ खट्टा खाना पसंद करती हैं, लेकिन कुछ महिलाएं ऐसी भी होती है जिनके मुँह का स्वाद कड़वा होने के कारण वो खाने से परहेज करने लगती हैं।

स्पॉटिंग की समस्या

कई बार महिला को प्रेगनेंसी के बीच बीच में खून के थक्के निकलने की समस्या भी हो जाती है, शुरुआत दिनों में ऐसा होना गर्भपात की निशानी हो सकता है। लेकिन यदि आपको दो महीने के बाद ऐसा हो तो इसे इग्नोर न करते हुए जितना जल्दी हो सके आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि प्रेगनेंसी के बीच में ऐसा होना हानिकारक हो सकता है।

कमर में दर्द

यह समस्या महिलाओं को तीसरी तिमाही से लेकर आखिरी महीने तक हो सकती है क्योंकि जैसे जैसे गर्भ में शिशु का वजन बढ़ता है तो कमर पर जोर पड़ता है। जिसके कारण महिलाओं को कमर में दर्द जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

गर्भावस्था में ध्यान देने योग्य अन्य बातें

  • महिला को सबसे पहले एक अच्छे डॉक्टर का चुनाव करना चाहिए।
  • आहार के प्रति लापरवाही नहीं करनी चाहिए और थोड़े थोड़े समय बाद खाते रहना चाहिए। और ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसमे भरपूर मात्रा में पोषक तत्व हो ताकि गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिल सके।
  • खुश रहने की कोशिश करें और अकेले न रहें।
  • किसी भी परेशानी के होने पर इग्नोर न करते हुए जल्दी से जल्दी डॉक्टर से संपर्क करें।
  • आयरन का भरपूर सेवन करें ताकि डिलीवरी के समय किसी भी तरह की परेशानी न हो।
  • तेजी से किसी भी काम को न करें, और काम करते समय बीच बीच में रेस्ट करते रहना चाहिए।
  • मूड को फ्रैश रखने के लिए वॉक करें संगीत सुनें, किताबे पड़े इससे बच्चे पर भी अच्छा असर पड़ता है।
  • पेट पर दबाव न डालें और कोर भी ऐसा काम न करें जिसमे अधिक झुकना पड़े, ऐसा करने से आपको परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।
  • समय समय पर डॉक्टर से जांच कवाते रहें ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।
  • प्रेगनेंसी के दौरान यदि आप सम्बन्ध बनाते हैं तो इसके लिए एक बार डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।
  • नार्मल डिलीवरी हो इसके लिए आखिरी महीने में महिलाएं बहुत ज्यादा काम करना शुरू कर देती हैं ऐसा न करें, क्योंकि इससे आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यदि आप चाहती है की नार्मल डिलीवरी हो तो इसके लिए अपनी फिटनेस और अपने आहार का अच्छे से ध्यान रखें।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होती है। ऐसे में महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। और साथ ही कोई भी समस्या हो थोड़ी या ज्यादा उसे अनदेखा न करते हुए डॉक्टर से संपर्क जरूर करना चाहिए। और साथ ही अपने खान पान और फिटनेस आदि का भी अच्छे से ख्याल रखना ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु का विकास बेहतर तरीके से हो सके।

अपने घर की किचन में बनाएं यह 8 बेबी फ़ूड

जन्म के बाद शिशु को छह महीने तक माँ का दूध पिलाना ही उसका संपूर्ण आहार होता है। लेकिन बच्चे के छह महीने के होने के बाद उसे ठोस आहार देने की शुरुआत होती है। तो ज्यादातर महिलाओं की समझने में दिक्कत होती है। की बच्चे के आहार की शुरुआत किस तरह से करनी चाहिए। बच्चे को क्या खिलाना चाहिए, बच्चे के लिए क्या सही है, आदि।

और सही भी है क्योंकि बच्चे का बेहतर खान पान ही बच्चे के बेहतर विकास में मदद करता है। इसीलिए महिला का इन सभी बातों को ध्यान में रखना भी जरुरी होता है। तो आज हम आपको ऐसे आठ फ़ूड के बारे में बताने जा रहे हैं। जो आप अपने घर के किचन में बना सकती है। और वह फ़ूड बच्चे के लिए भी फायदेमंद होते हैं। तो यह हैं वो आठ फ़ूड:

दाल का पानी

दाल एक ऐसा फ़ूड है जो किचन में मौजूद होता है। जिसमे पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। साथ ही बच्चा इसे आसानी से हज़म भी कर लेता है। तो आप दाल का पानी, दाल को मैश करके बच्चे को खिला सकते हैं।

खिचड़ी

खिचड़ी भी एक ऐसा फ़ूड है जिसे आप अपनी किचन में बना सकती है। इसके लिए आप चावल दाल को साथ में उबाल कर इसमें हल्के नमक आदि का इस्तेमाल कर सकती है। आप दाल चावल को उबालने के बाद अच्छे से मिक्स जरूर करें। खिचड़ी न केवल बनाने में आसान होती है। बल्कि खिचड़ी न्यूट्रिएंट्स से भी भरपूर होती है।

दलिया

गेहूं को थोड़ा मोटा पीसकर आप घर में ही दलिया भी तैयार कर सकती है। फिर इसे दूध के साथ मीठा बनाकर या सब्जियों के साथ नमकीन बनाकर बच्चे को खिला सकती है। दलिया छोटे बच्चों की ग्रोथ को बढ़ाने के लिए बेहतरीन फ़ूड है।

सब्जियों का सूप

घर में रखी सब्जियों का सूप बनाकर भी आप बच्चे को खिला सकते हैं। इसके लिए आप सब्जियों को उबालकर उन्हें मैश करें उसके बाद बच्चे को खिलाएं। इससे बच्चे को पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं।

फलों का रस

घर में फल भी मौजूद होते हैं ऐसे में आप घर में रखें फलों को मैश करके बच्चे को खिला सकती है। या फिर उनका रस निकलकर भी बच्चे को पीला सकती है।

खीर

दूध में थोड़े से चावल को उबालकर उसमे थोड़ी चीनी मिलाकर खीर बनाएं। छोटे बच्चे खीर को बहुत शौक से खा सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें की फ्रिज में रखी ठंडी खीर या बहुत ज्यादा गर्म खीर बच्चे को न खिलाएं।

उबला हुआ आलू और दही

एक कटोरी दही में उबले हुए आलू को मैश करके मिक्स करें। आप चाहे तो दोनों को अलग अलग भी खिला सकते हैं। लेकिन साथ मिलाने से इनका स्वाद बढ़ने के साथ इनमे पोषक तत्व भी बढ जाते हैं।

हलवा बच्चे को खिलाएं

आटे, सूजी का हलवा बनाकर भी आप बच्चे को खिला सकती है। लेकिन ध्यान रखें की हलवा ज्यादा गर्म न हो। और पहले थोड़ा सा बच्चे को खिलाएं और देखे वो खा रहा है या नहीं। उसके बाद ही बच्चे को खिलाएं बच्चे के साथ बिलकुल भी जबरदस्ती न करें।

तो यह हैं कुछ फ़ूड जो आप अपने घर की किचन में अपने बच्चे के लिए तैयार कर सकती है। यह फ़ूड बनाने में आसान होने के साथ बच्चे के लिए हेल्दी भी होते हैं। क्योंकि इनमे न्यूट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।

गर्भवती महिला को चिकन खाना फायदेमन्द होता है या मटन

प्रेगनेंसी में नॉन वेज

गर्भवस्था के दौरान महिला को अपने आहार का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके। ऐसे में खान पान में महिला वेज के साथ नॉन वेज को को भी शामिल कर सकती है यदि महिला नॉन वेज का सेवन करती है तो। क्योंकि नॉन वेज में आयरन, फोलिक एसिड, फोलेट आदि पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो न केवल महिला को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के साथ शिशु को जन्म दोष के खतरे से सुरक्षित रखने में भी मदद करते हैं। लेकिन नॉन वेज का सेवन करते हुए कुछ बातों का ध्यान अच्छे से रखना चाहिए जैसे की अच्छे से पकाकर इसका सेवन करें, बासी नॉन वेज का सेवन नहीं करना चाहिए, पकाने से पहले अच्छे से धोने के बाद इसका उपयोग करना चाहिए, आदि।

गर्भावस्था में चिकन ज्यादा फायदेमंद होता है या मटन

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान नॉन वेज का सेवन कर सकती है लेकिन इस दौरान चिकन का सेवन ज्यादा फायदेमंद होता है या मटन का, इसे लेकर महिला परेशान हो सकती है। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और नॉन वेज के चक्कर में परेशान हैं तो लीजिये अब हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जिससे आपको यह जानने में आसानी होगी की प्रेगनेंसी के दौरान चिकन ज्यादा फायदेमंद होता है या मटन।

मटन

प्रेगनेंसी के दौरान यदि आप मटन का सेवन करती हैं तो यह आपके लिए फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें मौजूद जिंक, विटामिन, आयरन, प्रोटीन आदि प्रेग्नेंट महिला के लिए फायदेमंद होता है। इसका सेवन करने से खून की कमी दूर होने के साथ हड्डियों व् मांसपेशियों को मजबूती मिलने में भी मदद मिलती है। लेकिन मटन का सेवन करने से महिला को कुछ परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। जैसे की इसे पचाने में महिला को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है, कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होने के कारण यह गर्भवती महिला के लिए परेशानी का कारण बन सकता हैं खासकर जो महिलाएं शुगर या दिल की बिमारी से परेशान होती है।

चिकन

गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी में चिकन का सेवन करना मटन के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद होता है। क्योंकि चिकन में पोषक तत्व भरपूर भरपूर मात्रा में मौजूद होते है जो गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। साथ ही चिकन को महिला को पचाने में मुश्किल नहीं होती है, यह भ्रूण और महिला दोनों की हड्डियों की मजबूती के लिए फायदेमंद होता है, इससे महिला को मूड स्विंग्स की समस्या से निजात मिलने के साथ तनाव जैसी परेशानी से राहत पाने में भी मदद मिलती है। इसके अलावा चिकन में फॉस्फोरस, सेलेनियम जैसे पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में होते है। और सेलेनियम गर्भवती महिला को थायरॉयड से बचाव, हार्मोनल बैलेंस, मेटाबोलिज्म, और इम्युनिटी को बेहतर बनाएं रखने में मदद मिलती है।

इसीलिए यदि आप भी प्रेगनेंसी के दौरान चिकन या मटन का सेवन करने की सोच रही हैं तो मटन से बेहतर है की आपको चिकन का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा आपको हो सके तो प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में नॉन वेज के सेवन से बचना चाहिए ।

प्रेगनेंसी में कच्चे केले की सब्ज़ी खाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान केला खाना बहुत फायदेमंद होता है साथ ही यदि कोई गर्भवती महिला कच्चे केले की सब्ज़ी खाना चाहती है तो महिला कच्चे केले की सब्ज़ी का सेवन भी कर सकती है। क्योंकि कच्चे केले में कैलोरी, फाइबर, आयरन, विटामिन सी, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में कच्चे केले की सब्ज़ी खाने से गर्भवती महिला व् शिशु को कौन से फायदे मिलते हैं।

ऊर्जा मिलती है

कच्चे केले की सब्ज़ी में कैलोरी भरपूर होती है और गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ऊर्जा से भरपूर और फिट रहने के साथ बच्चे के बेहतर विकास के लिए अतिरिक्त कैलोरी की जरुरत होती है। ऐसे में केले की सब्ज़ी का सेवन करने से गर्भवती महिला को पर्याप्त कैलोरी मिलती है जो गर्भवती महिला व् बच्चे दोनों को फिट रखने में मदद करती है।

फाइबर

गर्भावस्था के दौरान कब्ज़, अपच, गैस जैसी परेशानियों का होना आम बात होती है। क्योंकि वजन बढ़ने के कारण, बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है। लेकिन कच्चे केले की सब्ज़ी का सेवन करने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। क्योंकि कच्चे केले में फाइबर प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है।

विटामिन सी

विटामिन सी जो की एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट होता है वह कच्चे केले में भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला कच्चे केले की सब्ज़ी का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को विटामिन सी भरपूर मात्रा में मिलता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी बढ़ती है और गर्भावस्था के दौरान महिला व् बच्चे को हर तरह के संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

आयरन

गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी का होना माँ व् बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा असर डालता है। इसीलिए डॉक्टर भी प्रेगनेंसी के दौरान आयरन से भरपूर आहार का सेवन करने के साथ आयरन की दवाई का सेवन करने की सलाह भी देते हैं। ऐसे में कच्चे केले का सेवन गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद हो सकता है। क्योंकि कच्चे केले में भरपूर मात्रा में आयरन मौजूद होता है साथ ही कच्चे केले में विटामिन सी भी होता है जो बॉडी के सभी अंगो में आयरन को अच्छे से अवशोषित होने में मदद करता है। जिससे एनीमिया व् खून की कमी के कारण होने वाली अन्य परेशानियों से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

मैग्नीशियम

कच्चे केले में मैग्नीशियम भी मौजूद होता है जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूत करने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

पोटैशियम

कच्चे केले में पोटैशियम की मात्रा भी मौजूद होती है जो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के ब्लड प्रैशर को नियंत्रित रखने में मदद करती है। जिससे गर्भवती महिला को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या, हदय सम्बन्धी परेशानियों से बचाने में मदद करता है। साथ ही पोटैशियम ब्लड में शुगर के लेवल को मेन्टेन रखने में मदद करता है जिससे गेस्टेशनल शुगर जैसी परेशानी से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में कच्चे केले की सब्ज़ी का सेवन करने के फायदे जो गर्भवती महिला व् शिशु को मिलते हैं। ऐसे में इन बेहतरीन फायदों के लिए आप कच्चे केले की सब्ज़ी का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है।

गर्भावस्था के आखिरी तीन महीनों में इन परेशानियों से बचें

प्रेगनेंसी के आखिरी तीन महीनों में गर्भ में बच्चे का विकास तेजी से हो रहा होता है, महिला का वजन बढ़ चूका होता है, पेट बाहर की तरफ निकला हुआ होता है, आदि। ऐसे में महिला को थोड़ी बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यदि महिला अपना अच्छे से ध्यान रखती है, अपनी केयर अच्छे से करती है, छोटी छोटी गलतियां नहीं करती है। तो ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में गर्भवती महिला को किन किन परेशानियों से बचना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

खाने पीने में लापरवाही के कारण होने वाली परेशानी

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में खान पान में थोड़ी सी लापरवाही महिला के साथ बच्चे के लिए भी नुकसानदायक हो सकती है। ऐसे में महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। जैसे की पोषक तत्वों से भरपूर डाइट का सेवन करना चाहिए जिससे माँ व् बच्चे को पोषण मिल सके, ऐसे आहार का सेवन नहीं करना चाहिए जिससे महिला को परेशानी हो, भूख चाहे जितनी भी लगे लेकिन जरुरत से ज्यादा नहीं खाना चाहिए, समय से अपने आहार का सेवन करना चाहिए, ऐसे आहार का सेवन करने से बचना चाहिए जिससे गर्भाशय में संकुचन हो, आदि। यदि महिला इस बात का ध्यान रखती है तो महिला को शारीरिक कमजोरी व् बच्चे के विकास से जुडी परेशानियों से बचें रहने में मदद मिलती है।

पेट सम्बन्धी परेशानी से बचें फाइबर युक्त आहार जरूर लें

कब्ज़ की समस्या से अधिकतर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में परेशान होती है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला को फाइबर युक्त डाइट लेनी चाहिए। क्योंकि फाइबर युक्त डाइट लेने से पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है। जिससे गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में महिला को पाचन तंत्र से जुडी परेशानी जैसे कब्ज़, खाना हज़म होने में परेशानी, गैस, सीने में जलन आदि परेशानियों से महिला बची रहती है।

शारीरिक श्रम अधिक करने के कारण होने वाली परेशानी से बचें

वजन बढ़ने के कारण महिला प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में बहुत जल्दी थका हुआ व् कमजोरी महसूस करती है। ऐसे में महिला को इस परेशानी से बचकर रहना चाहिए और इसके लिए महिला को रुक रुक कर काम करना चाहिए, काम के साथ आराम भी करना चाहिए, लम्बे समय तक एक ही पोजीशन में नहीं रहना चाहिए, व्यायाम ज्यादा नहीं करना चाहिए, काम करने में तेजी नहीं करनी चाहिए, ज्यादा भागादौड़ी नहीं करनी चाहिए, आदि।

उठने, बैठने, लेटने, झुकने आदि का ध्यान रखें

गर्भावस्था की तीसरे ट्राइमेस्टर में पेट बाहर आने के कारण महिला को उठने, बैठने, लेटने में लापरवाही करने के कारण दिक्कत हो सकती है। ऐसे में इन परेशानियों से बचने के लिए महिला को उठते, बैठते, लेटते समय अपनी पोजीशन व् तरीके का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। साथ ही झुककर काम नहीं करना चाहिए, पैरों के बल बैठकर काम नहीं करना चाहिए, पेट पर दबाव पड़े ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, आदि। ताकि महिला को गलत तरीके से उठने, बैठने, लेटने, झुकनेके कारण होने वाली परेशानी से बचें रहने में मदद मिल सके।

डीहाइड्रेशन की समस्या से बचें

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में महिला को डीहाइड्रेशन की समस्या से बचना चाहिए। क्योंकि शरीर में पानी की कमी महिला की शारीरिक परेशानियों को बढ़ाने के साथ गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की कमी भी कर सकती है। जिसकी वजह से माँ और बच्चा दोनों को दिक्कत हो सकती है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए महिला को आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ नारियल पानी, जूस, दूध, निम्बू जैसे तरल पदार्थों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।

खुजली व् स्ट्रेचमार्क्स की परेशानी से बचें

गर्भाशय का अकार बढ़ने के कारण पेट की स्किन में खिंचाव आने की वजह से स्ट्रेचमार्क्स की समस्या होने के साथ खुजली की परेशानी भी होती है। लेकिन ज्यादा खुजली की वजह से रैशेस पड़ जाते हैं। ऐसे में महिला को खुजली व् स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से बचने के लिए लोशन, मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करना चाहिए। आजकल मार्किट में प्रेगनेंसी के दौरान स्ट्रेचमार्क्स से बचने की लिए क्रीम भी मिल जाती है आप उसका इस्तेमाल भी कर सकती है।

टेंशन से दूर रहें

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में अधिकतर गर्भवती महिलाएं खासकर जो पहली बार माँ बन रही होती है वो डिलीवरी व् बच्चे को लेकर टेंशन में आ जाती है। और गर्भवती महिला का टेंशन लेना महिला की परेशानियों को कम करने की बजाय बढ़ा देता है। ऐसे में गर्भवती महिला को जितना हो सके खुश रहना चाहिए और अपना ख्याल रखें चाहिए ताकि माँ व् बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। यदि आपकी भी प्रेगनेंसी के आखिरी महीने चल रहे हैं तो टेंशन न ले खुश रहें।

आराम न करने के कारण होने वाली परेशानी से बचें

वजन में बढ़ोतरी होने के कारण गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में सोने में दिक्कत हो सकती है। लेकिन पर्याप्त आराम न करने के कारण महिला की परेशानियां कम होने की जगह बढ़ जाती है। ऐसे में परेशानियों से बचने के लिए जितना हो सके महिला को आराम करना चाहिए। और अच्छी व् गहरी नींद लेने के लिए महिला को बाईं और करवट लेकर सोना चाहिए।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही ने रखना चाहिए। ताकि महिला व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। और डिलीवरी के दौरान भी महिला को दिक्कतों से बचें रहने में मदद मिल सके। साथ ही प्रेग्नेंट महिला को बॉडी में कोई ऐसा लक्षण महसूस हो जिससे आपको परेशानी हो तो आपको एक बार डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए। क्योंकि इस दौरान छोटी सी लापरवाही माँ व् बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है।

डिलीवरी डेट निकल जाने पर क्या परेशानियां हो सकती हैं?

प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद महिला सबसे पहले डॉक्टर से मिलती है। और डॉक्टर द्वारा महिला के लास्ट पीरियड की तिथि को जानकर डॉक्टर द्वारा एक अनुमानित डिलीवरी डेट महिला को बता दी जाती है। और यह डिलीवरी डेट महिला द्वारा प्रेगनेंसी में करवाए जाने के बाद भी डॉक्टर द्वारा बताई जा सकती है। लेकिन ऐसा कोई जरुरी नहीं होता है की जो डेट डॉक्टर ने दी है उसी दिन आपके शिशु का जन्म होगा। बल्कि उससे पहले या बाद में भी शिशु का जन्म हो सकता है। सेंतीस से चालीस हफ़्तों के बाच में महिला की डिलीवरी होना बिल्कुल सही माना जाता है। लेकिन कई बार महिला की इस समय डिलीवरी नहीं होती है और डिलीवरी डेट निकल जाती है।

लेकिन इसमें किसी तरह की घबराने की बात नहीं होती है। क्योंकि डिलीवरी डेट से दो चार दिन ऊपर नीचे हो सकते हैं। और उसके बाद भी यदि आपको प्रसव का कोई लक्षण अपनी बॉडी में नहीं दिखाई देता है। तो डॉक्टर आपको आर्टिफिशल पेन देकर डिलीवरी या सिजेरियन डिलीवरी करवा सकते हैं। क्योंकि डिलीवरी डेट के निकल जाने के बाद और उसके बाद भी समय बीतने पर यदि डिलीवरी नहीं होती है तो प्रेग्नेंट महिला और भ्रूण को बहुत सी परेशानियां हो सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी डेट निकल जाने पर कौन कौन सी दिक्कतें हो सकती है।

डिलीवरी डेट निकल जाने पर शिशु को हो सकती है दिक्कत

  • डिलीवरी तक आने तक शिशु का विकास गर्भ में शिशु का वजन बढ़ चूका होता है।
  • साथ ही इस दौरान हो सकता है की गर्भनाल अपना काम उतनी अच्छी तरह से न कर पाए जिस तरह पहले कर रही थी।
  • जिसके कारण शिशु तक पहुँचने वाले पोषक तत्वों व् ऑक्सीजन के प्रवाह में समस्या आ सकती है।
  • जिसके कारण शिशु की हलचल में कमी, शिशु की जान को रिस्क आदि हो सकता है।
  • ऐसे में डिलीवरी डेट निकल जाने पर आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
  • ताकि शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत न हो और आप एक स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकें।

महिला को हो सकती है दिक्कत

  • डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद महिला को तनाव अधिक हो सकता है।
  • जो महिला की दिक्कतों को बढ़ा सकता है।
  • पेल्विक एरिया, पीठ, आदि की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ सकता है।
  • जिसके कारण महिला का कमर दर्द, पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसी परेशानी बढ़ सकती है।
  • शिशु के जन्म की नियत तिथि निकल जाने के बाद केवल शिशु को ही रिस्क नहीं होता है।
  • बल्कि महिला को भी स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा रहता है।

तो यह हैं कुछ दिक्कतें जो महिला को डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद हो सकती हैं। ऐसे में इस बात को अनदेखा न करते हुए जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला व् शिशु को हर दिक्कत से बचे रहने में मदद मिल सके।

गर्मियों में सुबह उठते ही प्रेग्नेंट महिला को क्या खाना चाहिए

प्रेगनेंसी महिला के लिए ऐसा समय होता है जहां महिला को अपना बेहतर तरीके से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। लेकिन कई बार महिलाएं घर के काम, परिवार आदि के चक्कर में अपने आप का ध्यान रखना भी भूल जाती हैं। जो की गलत होता है, क्योंकि महिला अब अकेली नहीं होती है बल्कि महिला के पेट में पल रहा शिशु भी पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। ऐसे में महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्मियों में सुबह उठते ही प्रेग्नेंट महिला को क्या खाना चाहिए इस बारे में कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं, क्योंकि अब गर्मियों का मौसम शुरू ही होने वाला है। जो की प्रेग्नेंट महिला व् उसके पेट में पल रहे बच्चे के लिए बहुत फायदेमंद हो सकते हैं।

पानी पीएं

  • गर्मियों से सुबह उठते ही सबसे पहले प्रेग्नेंट महिला को एक या दो गिलास पानी पीना चाहिए।
  • इससे महिला का पेट साफ रहता है, शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं, महिला के शरीर में पानी की कमी नहीं होती है, प्रेग्नेंट महिला ऊर्जा से भरपूर रहती है, आदि।
  • तो यदि आप भी गर्भवती है तो सुबह उठकर सबसे पहले पानी का सेवन करें, ताकि आपको भी यह फायदे मिल सके।

प्रेग्नेंट महिला सुबह उठते ही खाएं सेब

  • प्रेग्नेंट महिला को सुबह उठने के बाद एक सेब का सेवन करना चाहिए।
  • क्योंकि सेब में आयरन, विटामिन्स व् अन्य मिनरल्स भरपूर मात्रा में होते हैं।
  • जो प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रखने के साथ शिशु के लिए भी फायदेमंद होते हैं।
  • साथ ही आप चाहे तो सेब के साथ एक गिलास गुनगुने दूध का सेवन भी कर सकते हैं।
  • इससे आपको दुगुना फायदा मिलता है।

अंकुरित चने

  • अंकुरित चने या एक रात पहले भीगे हुए चने का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला गर्मियों में सुबह उठकर कर सकती है।
  • क्योंकि इसमें पोषक तत्व जैसे की आयरन, कैल्शियम आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • जो गर्भवती महिला के साथ शिशु के बेहतर विकास के लिए भी बहुत ज्यादा फायदेमंद होते हैं।

भीगे हुए बादाम

  • एक कटोरी पानी में रातभर के लिए पांच छह बादाम भिगोकर रख दें।
  • उसके बाद सुबह उठकर प्रेग्नेंट महिलाएं इन बादाम का छिलका उतारकर इनका सेवन करें।
  • भीगे हुए बादाम पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।
  • जो प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत फायदेमंद हो सकते हैं।
  • बादाम के साथ महिलाएं भीगी हुई पांच से छह किशमिश का सेवन भी कर सकती है।

प्रेग्नेंट महिला सुबह उठते ही खाएं उबले अंडे

  • अंडा प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए सुपरफूड की तरह होता है।
  • जो प्रेग्नेंट महिला व् उसके पेट में पल रहे बच्चे के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है।
  • ऐसे में आप चाहे तो सुबह उठकर दो उबले अंडे, अंडे का ऑमलेट आदि बनाकर उसका सेवन भी कर सकती हैं।

सलाद

  • सुबह उठकर गर्भवती महिला को उस चीज का सेवन करना चाहिए जो पोषक तत्वों से भरपूर हो।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला चाहे तो फलों व् खीरा, गाजर, ककड़ी, जैसी सब्जियों का सलाद बनाकर उनका सेवन भी कर सकती है।

दूध

  • दूध पोषक तत्वों की खान होता है जो प्रेग्नेंट महिला को एनर्जी से भरपूर रखने व् उसके पेट में पल रहे बच्चे के बेहतर विकास के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है।
  • ऐसे में प्रेग्नेंट महिला चाहे तो सुबह उठकर एक गिलास दूध का सेवन भी कर सकती है।

प्रेग्नेंट महिला सुबह उठते ही पीएं फलों का रस

  • फलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं।
  • ऐसे में सुबह उठने के बाद यदि प्रेग्नेंट महिला का कुछ खाने का मन नहीं है।
  • तो महिला घर पर ताजे फलों का रस बनाकर उसका सेवन भी कर सकती है।

तो यह हैं कुछ आहार जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला सुबह उठकर कर सकती है। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी इन आहार का सेवन कर सकती है। ताकि आपको सुबह के पहले मील से ही भरपूर मात्रा में पोषक तत्व व् ऊर्जा मिल सके।

अंजीर के फायदे

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Anjeer (Fig) Benefits

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अंजीर एक बेहद स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक फल है जिसका प्रयोग बहुत सी समस्यायों और बिमारियों में किया जाता है। इस फल के पके रूप को लोग खाना पसंद करते है जबकि सूखा हुआ फल मेवे के रूप में मिलता है। सूखे फल के टुकड़े टुकड़े करके या उसे दूध में पीसकर चीनी के साथ खाया जाता है। इसका फल बहुत ही स्वादिष्ट होता है जिससे जैम भी बनाया जाता है।

इसके सूखे फल में शुगर की मात्रा 62% होती है जबकि ताजे पके हुए फल में 22% होती है। साथ ही इसमें कैल्शियम और विटामिन ऐ और बी की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है। अंजीर का सेवन करने से कब्ज की समस्या भी दूर होती है। मस्तिष्क शांत रहता है और कमजोरी दूर होती है। इसे खाने से खांसी भी ठीक हो जाती है।अंजीर के फायदे

Fig में कार्बोहायड्रेट 63 प्रतिशत, प्रोटीन 5.5 प्रतिशत, सेल्यूलोज 7.3 प्रतिशत, चिकनाई एक प्रतिशत, मिनरल सोल्ट 3 प्रतिशत, एसिड 1.2 प्रतिशत, राख 2.3 प्रतिशत और पानी 20.8 प्रतिशत होता है। प्रति 100 ग्राम अंजीर में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग आयरन, विटामिन, थोड़ी मात्रा में चूना, पोटैशियम, सोडियम, गंधक, फास्फोरिक एसिड और गोंद भी पाया जाता है। जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होते है। इसके अतिरिक्त भी अंजीर के बहुत से फायदे होते है जिनके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे है।

अंजीर खाने के क्या-क्या फायदे है?

1. एनीमिया :

अंजीर में आयरन और कैल्शियम की भरपूर मात्रा पाई जाती है जो एनीमिया की समस्या में बहुत लाभकारी होता है। इसके लिए 10 मुनक्के और 8 अंजीर 200 मिली दूध में उबाल लें। अब इस दूध का सेवन करें। इसे खून बढ़ता है और रक्त संबंधी बीमारियां दूर होती है।

2. कब्ज :

इस समस्या के होने पर 3 से 4 पके अंजीर दूध में उबालकर रात को सोने से पहले खाएं और उसके बाद वही दूध पी ले। इससे कब्ज की समस्या में आराम मिलेगा। इसके अलावा रात को सोते समय पानी में 4 अंजीर भिगो दे। अगली सुबह उन्हें थोड़ा सा मसलकर खा लें और पानी पियें। इससे कब्ज की समस्या दूर हो जाएगी।

3. अस्थमा :

अस्थमा की बिमारी में Anjeer के पत्तों से राहत मिलती है। जो लोग इन्सुलिन का इंजेक्शन या गोलिया लेते है उनके लिए ये पत्ते बहुत लाभकारी होते है। इसमें पोटैशियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है जिससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है।

4. जुखाम :anjer

जुखाम होने पर पानी में 5 अंजीर डालकर उबाल लें। अब पानी को छान गर्म गर्म सुबह और शाम पीएं। इससे जुखाम में लाभ मिलेगा।

5. ताकत :

इसके लिए सूखे Anjeer के टुकड़े और छिले हुए बादामों को गर्म पानी में उबाल लें। इसे सुखाकर इसमें दानेदार शक़्कर, पीसी हुई इलायची, केसर, चिरौंजी, पिस्ता और बादाम बराबर मात्रा में मिला दें। अब इसे 7 दिनों तक गाय के घी में पड़े रहने दें। रोजाना सुबह इसमें से २० ग्राम चूर्ण का सेवन करें। इससे आपकी ताकत बढ़ेगी।

6. सिर दर्द :

सिरके या पानी में अंजीर के पेड़ की छल की भस्म बनाकर माथे पर लेप लगाने से सिर का दर्द बंद हो जाता है।

7. बवासीर :अंजीर के लाभ

इस समस्या के लिए शाम के समय 3 से 4 सूखे हुए अंजीर पानी में भिगोकर रखे दें। रोजना सुबह इन अंजीर को मसलकर खाली पेट सेवन करें। इससे बवासीर की समस्या बिलकुल ठीक हो जाएगी।

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8. कमर दर्द :

अंजीर की छाल, सोंठ और धनिया की बराबर मात्रा लेकर उसे कूटकर पानी में भिगों दें। अगली सुबह उस रास को छानकर पी लें। इससे कमर दर्द में लाभ मिलेगा।

9. हड्डियां :

अंजीर में कैल्सियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो हड्डियों की ग्रोथ और उनकी मजबूती के लिए बहुत आवश्यक होता है। इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है बस एक दिन में 4 से 5 Anjeer का सेवन करना है। फर्क आप अपनी आँखों से देख लेना।

10. पाचन तंत्र :

अंजीर में फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो पेट के लिए बहुत अच्छी होती है। वास्तव में 3 अंजीर में 5 ग्राम फाइबर होता है। जो की हमारी रोज की जरूरत का 20% है। Anjeer का सेवन करने से पाचन से संबंधी सभी समस्याएं दूर हो जाती है।

तो ये थे Anjeer खाने के फायदे, जिन्हे जानने के बाद हो न हो आप भी इस फल / मेवे का सेवन करना शुरू कर देंगे। जानकारी के लिए बता दें यह फल पेट के लिए सबसे अधिक लाभकारी होता है। अगर आपको अक्सर पेट से जुडी समस्याएं बनी रहती है तो अभी से अंजीर का सेवन करना शुरू कर दें, लाभ होगा।