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पीठ को सुंदर और आकर्षक बनाने के ये है घरेलू नुस्खे

आज के दौर में आप घर पर बंद होकर नहीं रह सकती इसलिए हर कोई चाहता है कि जब भी वह बाहर जाये तो वह सुंदर और आकर्षित लगे। इस चाह के कारण हम अपने को सुंदर बनाने के लिए कई प्रकार के प्रसाधनो का प्रयोग करते है, जिससे हमारा चेहरा तो सुंदर बन जाता है लेकिन हमारी पीठ वैसी कि वैसी रह जाती है। जिस कारण पूरी पर्सनालिटी व खूबसूरती उभर नहीं पाती। हमारी दाग-धब्बो वाली पीठ जो रोजाना धूल और मिटटी के कारण काली हो जाती है देखने में भद्दी लगती है।खूबसूरत और आकर्षक देखने के लिए पीठ का अपना अलग ही महत्व है,किन्तु सुंदरता निखारने के लिए पीठ पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है। जिसके कारण पीठ अपना आकर्षण खो बैठती है।

लेकिन आजकल की भागदौड भरी जिंदगी में अपने ऊपर ध्यान जाता है नहीं है। सुबह उठते ही वही रूटीन शुरू हो जाता है और शाम होने तक हम इतना थक जाते है कि हमे अपना बिस्तर ही अच्छा लगता है। लेकिन अगर हम वाकई में सुंदर और आकर्षक दिखना चाहते है तो हमे अपने लिए थोड़ा सा समय तो निकलना ही पड़ेगा।

अपने चहरे को हम तरह-तरह के कॉस्मेटिक्स से सजाते और सवारते है और न जाने कितने प्रकार के उपाय करते रहते है।जिससे हमारा चेहरा सुंदर तो दिखने लगता है,लेकिन हमारी पीठ वैसी कि वैसी ही रह जाती है जो कि काफी भद्दी लगती है। जब कभी भी हम पार्टी में बैकलेस ड्रेस पहनते है तो काली धब्बो वाली पीठ देखकर सभी मजाक उड़ाते है जिस कारण हम अगली बार बैकलेस ड्रेस पहनने में संकोच करते है। कई बार पीठ की त्वचा में मैल और काले धब्बे होने के कारण पीठ काफी गन्दी दिखती है।मोटापे के कारण भी पीठ पर मांस बढ़ने लगता है जोकि पीठ के सौंदर्य को घटता है।अतः पीठ को आकर्षक व स्वस्थ बनाये रखने के लिए व्यायाम,मालिश,डायटिंग,उबटन व घरेलू नुश्खे काफी फायदेमंद होते है।

इसलिए यहां पर कुछ ऐसे घरेलू नुश्खे व टिप्स हम आपको बता रहे है जो आपकी पीठ को खूबसूरत व आकर्षक बनायेगे

नींबू का इस्तेमाल करें

नींबू में औषधि गुण होने के कारण नींबू त्वचा के कालेपन को दूर करता है।नींबू के रस में गुलाब जल और ग्लिसरीन मिलाकर लगाने से आपकी पीठ न केवल साफ होगी बल्कि चमकदार भी बनेगी। इसका प्रयोग लगातार करने से आपकी पीठ से कालापन दूर तो होगा ही बल्कि पीठ सुंदर भी दिखेगी।

एलोवेरा जेल को ऐसे इस्तेमाल करें

एलोवेरा जेल की एक परत अपनी पीठ पर लगाने के बाद कुछ देर के लिए छोड दे। बाद में पानी से इसे साफ कर ले धीरे-धीरे आपकी पीठ साफ होने लगेगी और आपकी त्वचा सम्बन्धी और बीमारिया जैसे फोड़े,फुंसी भी गायब हो जायेगे।

खीरे का रस पीठ गोरा करने के लिए

खीरे का प्रयोग जहाँ हम सलाद के रूप में करते है वंही खीरे का उपयोग त्वचा को निखारने के लिए भी प्रयोग किया जाता है।खीरे को कदूकस करके आप अपनी पीठ में लगाए,ऐसा करने से आपकी पीठ न केवल साफ होती है बल्कि चमकने भी लगती है।

बादाम का तेल

बादाम के तेल को गर्म करके पीठ में मालिश करने से पीठ का कालापन तो दूर होता ही है बल्कि कोशिकाओं में रक्त का संचरण भी अच्छे से होने लगता है। पीठ साफ होने के साथ साथ चमकदार व आकर्षक भी दिखती है।

कच्चे आलू का रस इस्तेमाल करेंbackside

आलू आपके खाने में स्वाद को बढ़ाने के साथ साथ आपकी त्वचा को भी निखरता है। क्योकि आलू में ब्लीचिंग के गुण पाए जाने के कारण आलू त्वचा के कालेपन को साफ करके त्वचा को निखरता है। आलू को मोटे – मोटे टुकड़ो में काटकर पीठ में रगड़ने से पीठ साफ जाती है।

संतरा का रस

संतरे के पाउडर को दूध में मिलाकर लगाने से पीठ न सिर्फ साफ होती है बल्कि पीठ से दाग-धब्बे भी दूर हो जाते है। इसके लगातार प्रयोग से आपको फर्क खुद ही महसूस होने लगेगा।

जैतून का तेल का इस्तेमाल

न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए बल्कि हमारी त्वचा के लिए भी जैतून का तेल काफी लाभकारी है। यह त्वचा को पोषण देने के साथ-साथ त्वचा को कोमलता भी प्रदान करता है। नींबू के रस में थोड़ा सा जैतून का तेल और ग्लिसरीन मिलाकर लगाने से त्वचा का कालापन दूर होता है। इसलिए इसको हफते में १-२ बार प्रयोग करने से पीठ न केवल साफ होगी बल्कि सूंदर व आकर्षक भी लगेगी।

शहद और टमाटर का रस

शहद से जहाँ हमारी त्वचा कोमल होती है वंही टमाटर से त्वचा में निखार आता है। शहद और टमाटर के रस को आपस में मिलाकर २० मिनट तक पीठ पर लगाकर रख दे और थोड़ी देर बाद धो ले। इसका प्रयोग करने से पीठ साफ होने के साथ साथ चमकदार भी दिखेगी।

दही और बेसन

त्वचा के कालेपन को दूर करने के लिए दही और बेसन का लेप काफी फायदेमंद है। अपने प्राकर्तिक गुणों के कारण यह त्वचा के दाग-धब्बो को दूर कर उसे कोमलता प्रदान करता है। अतः दही और बेसन के उपयोग से पीठ कांतिमय होती है।

मसूर की दाल

मसूर की दाल को रात को भिगोकर सुबह पीसकर नींबू के रस में लगाए और १५-२० मिनट के लिए छोड दे। इसके प्रयोग से आपकी पीठ का कालापन दूर होने के साथ साथ दाग-धब्बे भी मिट जायेगे।

पीठ को सुडौल और आकर्षक बनाने के लिए व्यायाम

जमीन पर नमाज करने की मुद्रा में २०-२५ मिनट तक बैठे रहने से पीठ सीधी व सुडोल होती है।

जमीन पर लेटकर दोनों हाथों को शरीर के दोनों ओर रखे। अब दाये हाथ को तनी हुई मुद्रा में ऊपर की ओर ले जाते हुए सिर के पीछे की ओर जमीन पर ले जाये। बाद में हाथ को उसी मुद्रा में वापस ले जाये। अब ऐसी तरह बाये हाथ को केरे। यह व्यायाम ५-१० मिनट तक करने से आपकी पीठ में से मोटापा धीरे-धीरे कम होगा ओर पीठ सुडौल होगी।

पीठ को सुंदर और आकर्षक बनाने के कुछ अन्य तरीके

  • जब भी आप धूप में निकले दुपट्टे ओर साड़ी के पल्लू से अपनी पीठ ढक ले। ताकि सूरज की तेज किरणों से आपकी पीठ सुरक्षित रह सके।
  • आप घर व ब्यूटी पार्लर में जाकर पीठ में मालिश करवा सकती है।
  • लम्बे हैंडल वाला ब्रश प्रयोग करने से आपकी पीठ अच्छी तरह साफ हो जाएगी।
  • नहाने से पहले सरसो के तेल की मालिश करने से नहाते समय मैल की परत थोड़ा सा रगड़ने पर ही उतर जाती है।
  • नहाने के बाद क्रीम या मॉइस्चराइजर लगाए। इससे आपकी पीठ में खुश्की नहीं होगी ओर पीठ मुलायम दिखेगी।
  • रात को सोने से पहले ढीले कपड़े पहने क्योकि रात को सोते समय तंग कपड़े पहनने से त्वचा के रोम छिद्र में से हवा पास नहीं होती ओर पसीना आने से त्वचा में दाने हो जाते है।
  • रात को सोने से पहले एक्ने लोशन लगाकर ही सोये। इससे आपकी पीठ में संक्रमण नहीं होगा।
  • अगर आप बाहर जाते समय बड़े गले की पोशाक पहनती है तो पीठ में कंसीलर जरूर लगा ले ताकि आपके चहरे और पीठ का रंग अलग न हो।
  • महीने में कम से कम एक-दो बार तेल की मालिश करने से लाभ मिलता है। रक्त संचार ठीक होता है और पीठ की माशपेशियों में लचीलापन आता है।

जब प्रेगनेंसी के नौवें महीने में अचानक से पेट में दर्द हो जाये तो क्या करें

प्रेगनेंसी का नौवां महीना वो महीना होता है जब प्रेग्नेंट महिला का इंतज़ार लगभग खत्म होने के करीब आ जाता है। क्योंकि अब महिला की डिलीवरी कभी भी हो सकती है और गर्भ में पल रही नन्ही जान को महिला अपनी गोद में लेकर बहुत करीब से महसूस कर सकती है। लेकिन साथ ही यह पल महिला के लिए घबराहट से भरा भी हो सकता है, क्योंकि इस दौरान महिला को यदि थोड़ी भी दिक्कत होती है तो महिला टेंशन ले लेती है की कहीं उसके बच्चे को कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है।

खासकर जो महिलाएं पहली बार माँ बन रही होती है उन्हें ज्यादा दिक्कत का अनुभव हो सकता है। लेकिन यह वो समय होता है जब महिला को धैर्य से काम लेना होता है और बिल्कुल भी तनाव नहीं लेना होता है। क्योंकि तनाव आपकी परेशानी को बढ़ा सकता है। प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को पेट में दर्द की समस्या ज्यादा महसूस हो सकती है। लेकिन हर बार पेट दर्द केवल डिलीवरी का ही संकेत हो ऐसा जरुरी नहीं होता है। तो आइये अब जानते हैं प्रेगनेंसी में पेट दर्द होने से जुडी बातें:-

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में पेट दर्द होने के कारण

  • पेट के आकार के पूरी तरह बढ़ने के कारण मांसपेशियों में खिंचाव अधिक हो जाता है जिसकी वजह से पेट में दर्द महसूस हो सकता है।
  • बच्चे के भार के नीचे की तरफ होने के कारण पेट में दर्द महसूस हो सकता है।
  • कब्ज़, पेट में गैस आदि की परेशानी होने पर भी पेट दर्द महसूस हो सकता है।
  • यदि महिला की डिलीवरी होने वाली है तो भी पेट, पीठ, में तेजी से या रुक रुक कर दर्द मेषसूस हो सकता है।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में कब पेट दर्द से घबराना नहीं चाहिए?

यदि गर्भवती महिला को हल्का फुल्का पेट में दर्द हो रहा है तो महिला को घबराना नहीं चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के नौवें महीने में पेट में हल्का फुल्का दर्द रहना आम बात होती है। इसके अलावा पेट दर्द महसूस होने पर महिला को थोड़ा आराम करना चाहिए, निम्बू पानी या फलों का सेवन करना चाहिए, बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए, आदि इससे महिला को पेट में दर्द से राहत पाने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में पेट दर्द होने पर डॉक्टर से कब मिलें?

  • यदि प्रेग्नेंट महिला को पेट में बहुत तेजी से दर्द हो रहा और महिला से सहन भी नहीं हो रहा है।
  • पेट में दर्द के साथ प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद पानी, हल्का ब्लड आये तो बिना देरी किये डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
  • पेट के साथ पीठ में टांगों में बहुत तेजी से दर्द हो तो भी डॉक्टर से मिलना चाहिए, क्योंकि यह सब प्रसव का समय पास आने के लक्षण होते हैं और इस बात का संकेत देते हैं की अब डिलीवरी किसी भी समय हो सकती है। ।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के नौवें महीने में पेट में दर्द से जुडी कुछ बातें, यदि आपको भी नौवां महिला लगा हुआ या शुरू हो गया है। तो यदि आपके पेट में अचानक से पेट दर्द हो जाये तो घबराएं नहीं बल्कि संयम से काम लें। ताकि माँ व् बच्चा दोनों को किसी तरह की परेशानी न हो और दोनों स्वस्थ रहें।

जब आपको गर्मी लगती है तो शिशु को कैसा महसूस होता है?

प्रेगनेंसी में गर्भ में पल रहा शिशु

गर्भावस्था में गर्भवती महिला की सेहत का बेहतर होना बहुत जरुरी होता है क्योंकि प्रेग्नेंट महिला की सेहत पर ही गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत भी निर्भर करती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को सलाह दी जाती है की वो प्रेगनेंसी के दौरान बेहतर आहार का सेवन करने के साथ छोटी छोटी चीजों का भी अच्छे से ध्यान रखे। ताकि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में किसी भी तरह की कमी न आए। ऐसे में कई गर्भवती महिलाएं बहुत से सवाल भी करती है जैसे की गर्भ में शिशु की हलचल कब महसूस होती है, शिशु का गर्भ में विकास कैसा हो रहा है, शिशु गर्भ में कैसा महसूस कर रहा है, आदि।

जब गर्भवती महिला को गर्मी लगती है तो शिशु को कैसा महसूस होता है?

गर्मी का मौसम गर्भवती महिला की मुश्किलों को और भी बढ़ा सकता है। ऐसे में महिला यदि परेशानी का अनुभव करती है तो क्या इसका प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है? यह प्रश्न बहुत सी गर्भवती महिलाएं कर सकती है। ऐसा होता है या नहीं इस बारे में किसी तरह की रिसर्च तो नहीं की गई है, लेकिन डॉक्टर्स के अनुसार यदि गर्भ में पल रहा शिशु असहज महसूस करता है, या उसे किसी तरह की परेशानी होती है तो उसकी हलचल अधिक हो सकती है।

साथ ही यह भी सच है की गर्भ में पल रहे शिशु का जैसे जैसे शारीरिक विकास होता है तो उसके अंग भी काम करने लगते है। जैसे की उसके सुनने की क्षमता बढ़ जाती है, और तेज आवाज़ या तेज रौशनी आदि के होने पर गर्भ में शिशु उसे महसूस कर सकता है और हलचल करने लगता है। इसीलिए गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपना बेहतर तरीके से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है ताकि प्रेग्नेंट महिला को किसी भी तरह की परेशानी न हो।

जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को भी हर परेशानी से बचाने में मदद मिल सके, और गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिल सके। साथ ही यदि आपको ऐसा लगता है की शिशु को गर्मी का अनुभव हो सकता है तो प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ को ठंडा रखने के लिए पानी का भरपूर सेवन, ठन्डे स्थान में रहना, फलों का भरपूर सेवन करना, आदि का आप इस्तेमाल कर सकती है, क्योंकि इन टिप्स का इस्तेमाल करने से गर्मियों में गर्भ को ठंडक पहुंचाने में मदद मिलती है।

तो यह है गर्मी में गर्भ में पल रहे शिशु को कैसा महसूस होता है उससे जुडी कुछ बातें, इसके अलावा गर्भ में शिशु के विकास को अल्ट्रासॉउन्ड के माध्यम से देखा जा सकता है। लेकिन शिशु को कैसा महसूस हो रहा है यह जानना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के इन बेहतरीन अनुभव का आनद लेना चाहिए और साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास से जुडी सभी बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

बासी मुँह गर्म पानी पीने के प्रेगनेंसी में फायदे

गर्म पानी पीने से बॉडी को बहुत से फायदे मिलते है। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को गर्म पानी पीना चाहिए या नहीं आइये इस बारे में जानते हैं? प्रेग्नेंट महिला को हर वो काम करना चाहिए जो गर्भवती महिला व् बच्चे के लिए फायदेमंद हो। और ज्यादा गर्म नहीं लेकिन सुबह उठकर सबसे पहले यानी बासी मुँह गुनगुना पानी पीना प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत फायदेमंद होता है। और यदि प्रेग्नेंट महिला ऐसा रोजाना करती है तो इससे गर्भवती महिला व् बच्चे को बहुत से स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे मिलते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में बासी मुँह गुनगुना पानी पीने से क्या फायदे मिलते हैं।

शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं

सुबह उठकर बासी मुँह गर्म पानी पीने से बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थ बाहर निकलते हैं। जिससे माँ व् बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है

सुबह उठकर बासी मुँह गुनगुना पानी पीने से पेट अच्छे से साफ़ हो जाता है जिससे पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है, कब्ज़, एसिडिटी, सीने में जलन, खट्टी डकार जैसी परेशानियों से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही मॉर्निंग सिकनेस से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

इम्युनिटी बढ़ती है

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेग्नेंट महिला की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला गुनगुने पानी का सेवन करती है तो इससे इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है। जिससे सर्दी, खांसी, जुखाम, फ्लू व् अन्य इन्फेक्शन से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड फ्लो बेहतर होता है

गुनगुना पानी पीने से बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर तरीके से होता है। और बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर तरीके से होने से गर्भवती महिला को सूजन, थकावट, कमजोरी जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

ऊर्जा मिलती है

गर्भवस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला के शरीर में कमजोरी आ जाती है। लेकिन सुबह उठकर बासी मुँह गर्म पानी पीने से प्रेग्नेंट महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

बॉडी पेन से राहत मिलती है

गर्भवती महिला यदि गुनगुना पानी पीती है तो इससे बॉडी के सभी अंगो तक ब्लड फ्लो अच्छे से होता है, पर्याप्त ऑक्सीजन व् अन्य पोषक तत्व पहुँचते हैं, साथ ही गुनगुना पानी पीने से बॉडी की सिकाई भी होती है। जिससे सभी अंगो को पोषण मिलता है और गर्भवती महिला को बॉडी पेन से राहत पाने में मदद मिलती है।

वजन सही रहता है

सुबह उठकर गुनगुना पानी पीने से वसा का जमाव बॉडी में नहीं होता है जिससे शरीर में चर्बी नहीं बढ़ती है। और प्रेग्नेंट महिला के वजन को संतुलित रहने में मदद मिलती है।

बच्चे का विकास अच्छे से होता है

सुबह उठकर गुनगुना पानी पीने से केवल प्रेग्नेंट महिला को ही नहीं बच्चे को भी फायदे मिलते हैं क्योंकि बच्चे तक भी रक्त, ऑक्सीजन, पोषक तत्व सब भरपूर मात्रा में पहुँचते हैं जिससे बच्चे के विकास को बेहतर होने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गुनगुने पानी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को मिलते हैं। लेकिन ध्यान रखें की ज्यादा गर्म पानी का सेवन न करें, सारा दिन गर्म पानी का सेवन न करें, आदि।

बच्चा नींद में क्यों रोता है और हँसता है?

घर में नन्हे शिशु के आते ही घर का पूरा माहौल खुशनुमा हो जाता है। घर के बड़े हो या छोटे सभी छोटे बच्चे की हर हरकत को महसूस भी करते है और देखते भी है। एक माँ भी शिशु को लेकर इतनी उत्साहित होती है के शिशु के दूध पीने, छींक मारने, नहाने यहां तक के उसकी नींद को भी बहुत ध्यान से देखती है। आप सभी ने भी देखा होगा के शिशु कभी नींद में हँसते है और कभी नींद में रोते है।

अपने घर के बड़ो को आपने कहते हुए सुना होगा के बच्चो को नींद में भगवान् हँसाते है और रुलाते है। और कुछ लोग मानते है के नन्हें शिशु को अपने पिछले जन्म से जुडी सभी बाते याद होती है और जब शिशु सोता है तो उसे सभी बाते याद आती जिनकी वजह से वह कभी हँसता है और कभी रोता है। माना जाता है के जब शिशु को कोई अच्छी बात याद आती है तो वह मुस्कराने लगता है और उसके पिछले जन्म से जुडी जब कोई बुरी बात सामने आती है तो वह लगता है।

हालाँकि विशेषज्ञ का कहना इसके बिलकुल ही विपरीत है। उनके अनुसार नींद में बच्चे की ऑंखें लगातार घूमती रहती है। नींद में शिशु की आँखों की मूवमेंट को रैपिड आई मूवमेंट कहते है। इस मूवमेंट के समय शिशु बहुत चीजे अनुभव करता है जैसे हंसना, रोना, डरना आदि। डॉक्टरों के अनुसार दिन में बीती सभी बातों को शिशु रात में फिर से अनुभव करता है जिसके कारण वह रोता और हँसता भी है।

कुछ डॉक्टरों के अनुसार पुरे दिन भर में शिशु जो भी आवाजे सुनता है या जो कुछ भी महसूस करता है उन सभी चीजों को अपने दिमाग में बसा लेता है और सोते समय इन्ही अनुभवों को दोहराता है। जिसे दोबारा अनुभव करते समय वह खुश होता है और रोता है। डॉक्टर मानते है के इस प्रक्रिया द्वारा शिशु का भावनात्मक विकास होता है। डॉक्टरों के यह एक नियम होता है जिससे हर शिशु को गुजरना पड़ता है।

हम आपको बता दे के इनमे से किसी भी बात का कोई सिद्ध प्रमाण नहीं है। यह सब बाते सिर्फ अंदाजों के आधार पर ही कही जाती है। बच्चे का नींद में हंसना या रोना सिर्फ 10 से 20 सेकंड का ही होता है। यह प्रक्रिया शिशु के जन्म से लेकर दसवें महीने तक चलती है। ख़ास बात यह है के शिशु को सोते हुए हँसता या रोता देख घबराना नहीं चाहिए।

चक्कर आने के क्या कारण होते है?

Causes Of Fatigue and Dizziness 

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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर लोग अपने खान पान का ध्यान रखना भूल जाते है जिसके चलते उनका स्वास्थ्य खराब होने लगता है। और खराब स्वास्थ्य के कारण कई बीमारियां उसको घेर लेतीं है। इन्ही में से एक है चक्कर आना। जो अक्सर शरीर में कमजोरी और मस्तिष्क के टेंशन में आने के कारण आ जाते है।

वैसे तो चक्कर आना कोई बड़ी बीमारी नहीं है लेकिन कई बार ध्यान न देने और लापरवाही बरतने के चलते ये समस्या रूप ले लेती है। पहले यह समस्या केवल बड़े उम्र की लोगों और गर्भवती महिलाओं में देखने को मिलती थी। लेकिन आजकल क्या बच्चे और क्या बड़े सभी अक्सर इस समस्या से परेशान दिखाई पड़ते है।चक्कर आने के क्या कारण होते है

चक्कर आने पर व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है की उसके आस-पास की चीजें गोल गोल घूम रही है। इस स्थिति में व्यक्ति खुद को स्थिर नहीं रख पाता जिसके कारण वे नीचे गिर जाता है। लेकिन क्या आप जानते है की आखिर ये चक्कर आते क्यों है? शायद हां, क्योंकि हम में से अधिकतर लोग चक्कर आने के केवल एक कारण ‘कमजोरी’ को जानते है जबकि इसके अलावा भी और बहुत से कारण है जो चक्कर आने की वजह बनते है। यहाँ हम आपको उन्ही कारणों के बारे में बताने जा रहे है। तो आईये विस्तार से जानते है की चक्कर आने के क्या कारण होते है –

चक्कर आने के कारण :-

  • शरीर में कमजोरी होना।
  • रक्त चाप (BP) बढ़ना या घटना।
  • कान में कोई बिमारी होना।
  • तनाव में रहना।
  • मस्तिष्क में रक्त की कमी हो जाना।
  • बहुत से भूखे रहना या भूख लगना।
  • आंखों में समस्या होना।
  • बहुत तेजी से चलना या दौड़ना।
  • नशा होना।
  • सिर में लगी कोई चोट।
  • शरीर में पानी की कमी होना।
1. शरीर में कमजोरी होना :

जैसा की हमने आपको बताया चक्कर आने का मुख्य कारण शरीरिक कमजोरी होती है। जो सही तरीके से भोजन नहीं करने और खाने में जरुरी पोषक तत्वों को सम्मिलित नहीं करने के कारण आती है। ऐसा करने से आपके शरीर की हड्डियां, मांसपेशियां और नसें अपना कार्य ठीक तरह से नहीं कर पाती जिसके कारण उनमे समस्याएं होने लगती है और वही समस्या चक्कर आने का कारण बनती है।

2. रक्त चाप (BP) बढ़ना या घटना :

शरीर का रक्त चाप यानी ब्लड प्रेशर के संतुलित नहीं रहने की वजह से भी कई बार चक्कर आने की शिकायत हो सकती है। ये रक्त चाप के बढ़ने और घटने दोनों स्थिति में आ सकता है। ऐसे में इन व्यक्तियों का खास ख्याल रखना चाहिए।

3. कान में कोई बिमारी होना :

चक्कर आने के कुछ कारणों में से एक कारण कान से संबंधित बीमारियां भी होती है। जिनमें कान की सूजन, कान में फोड़ा होना, कान का दर्द आदि सम्मिलित है। अगर व्यक्ति के कान में ऐसी कोई समस्या है तो उन्हें चक्कर आना स्वाभाविक है।

4. तनाव में रहना :

आजकल की भाग दौड़ भरी लाइफ में लोगों की लापरवाहियां उनकी बिमारी का कारण बनती है। लोगों को ऑफिस से आराम करने के लिए छुट्टी तो मिल जाती है लेकिन उनके मस्तिष्क में हर समय केवल और केवल काम की टेंशन चलती रहती है। जिसके कारण उन्हें स्ट्रेस होता है और इस स्ट्रेस की वजह से चक्कर आना, सिर दर्द, और बालों के झड़ने जैसी बीमारियां शुरू हो जाती है।

5. मस्तिष्क में रक्त की कमी हो जाना :

अगर आप भी सोते समय ज्यादा ऊंचा तकिया लगाते है तो आप भी इस समस्या के शिकार हो सकते है। इसके अलावा ब्रेन ट्यूमर या मष्तिष्क से जुडी कोई अन्य बिमारी भी इसका कारण होती है। वास्तव में ट्यूमर हो जाने पर रक्त नली में एक छोटा सा मांस का दाना हो जाता है जिसके कारण रक्त का प्रवाह ठीक तरह से नहीं हो पाता और परिणामस्वरूप आपको चक्कर आने लगते है।

6. बहुत से भूखे रहना या भूख लगना :

कई बार भूख लगने के कारण भी चक्कर आने लगते है। इसके अलावा अगर आप बहुत देर से भूखे है तो आपके पेट और शरीर में गैस बनने लगते है जिससे शरीर के अलग अलग हिस्सों को कार्य करने में तकलीफ होने लगती है और आपको चक्कर आने लगते है। इसीलिए जब भी भूख लगे तुरंत खाना खा लेना चाहिए।

7. आंखों में समस्या होना :red eyes

अगर किसी व्यक्ति की आंखों में कोई समस्या है तो उन्हें चक्कर आना लाजमी है। क्योंकि आँखों का सीधा संबंध मस्तिष्क से होता है। उदाहरण के रूप में अगर आप किसी ऊँची जगह खड़े होकर गहराई में देखते है, अधिक चकाचौंध वाली जगह को देखते है या गोलाई में घूमती हुई किसी वस्तु को देखते है तो आपको चक्कर आने लगते है। जो की आंखों की समस्या के कारण आने वाले चक्करों का सबसे बड़ा reason होते है।

8. बहुत तेजी से चलना या दौड़ना :

अगर आप बहुत तेजी से चलकर या दौड़कर खड़े होते है तो भी आपको चक्कर आ सकते है। क्योंकि इस समय आपके शरीर की सभी इन्द्रियां कार्यरत होती है और BP काफी तेज प्रेशर में होता है। इसके अलावा झूला झूलने, गोलाई में घूमने के कारण भी चक्कर आ सकते है।

9. नशा होना :

महिलाओं की नहीं लेकिन अधिकतर पुरुषों की नशा करने की आदत होती है। और जब वे सामर्थ्य से अधिक शराब का सेवन कर लेते है तो उन्हें चक्कर आने लगते है। आपकी उम्र चाहे कितनी ही ज्यादा क्यों न हो अगर आप बहुत अधिक नशा करते है तो आपको चक्कर आना स्वाभाविक है।

10. सिर में लगी कोई चोट :

कई बार सिर में लगी चोट भी अचानक आने वाले चक्करों का कारण होती है। इसके अलावा पुराने समय में लगी गंभीर चोट भी काफी सालों तक के चक्करों के आने का कारण बनती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सिर के किसी खास हिस्से में चोट लगने की वजह से कुछ समय के लिए वहां रक्त प्रवाह रुक जाता है जिसके कारण चक्कर आने लगते है।

11. शरीर में पानी की कमी होना :

कई बार शरीर में पानी की मात्रा की कमी हो जाने के कारण भी चक्कर आने लगते है। इसलिए कहा जाता है की सम्पूर्ण मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए।

ऊपर बताये गए सभी कारण केवल सामान्य ज्ञान के लिए है। इसके अलावा भी चक्कर आने के कई कारण हो सकते है, इसलिए केवल इन्हे कारण न माने। अधिक समस्या होने पर डॉक्टरी सलाह लें और उसी मुताबिक दवाएं लें।

सामान्य प्रसव के लिए गर्भावस्था के 9 महीने में आहार

नार्मल डिलीवरी के लिए क्या खाएं, सामान्य प्रसव के लिए आहार, प्रेगनेंसी में क्या खाएं, नार्मल डिलीवरी के टिप्स, Food for Normal Delivery

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने खान पान का दुगुना ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि गर्भ में पल रहा नवजात भी पूरी तरह से महिला पर ही निर्भर करता है। गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए जिन पोषक तत्वों की जरुरत होती है वो उसे माँ के आहार से ही मिलते हैं। साथ ही प्रसव के दौरान महिला को किसी भी तरह की परेशानी न हो इसके लिए भी महिला को फिट रहना जरुरी होता है। इसीलिए भी महिला को अपने खान पान का ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि यदि महिला स्वस्थ व संतुलित आहार का सेवन करती है तो इससे शिशु और गर्भवती महिला दोनों को ही फायदा मिलता है।

इसके अलावा क्या आप जानते हैं की कुछ ऐसे आहार भी है जिनका यदि आप प्रेगनेंसी के समय सेवन करते हैं तो आपको नार्मल डिलीवरी होने में मदद मिलती है। ज्यादातर महिलाएं चाहती है की उनकी डिलीवरी नार्मल ही हो इसका कारण यह होता है की नार्मल डिलीवरी के बाद महिला को ठीक होने में कम समय लगता है। क्या भी भी प्रेग्नेंट है और चाहती है की आपकी नार्मल डिलीवरी हो? यदि हाँ तो आज हम आपको कुछ ऐसे खाद्य पदार्थो के बारे में बताने जा रहे हैं। जिनसे आपको प्रेगनेंसी के दौरान न केवल फिट रहने में बल्कि आपको नार्मल डिलीवरी के लिए अपनी बॉडी को तैयार करने में भी मदद मिलती है।

नार्मल डिलीवरी के लिए क्या खाएं

खान पान में थोड़ी सी लापरवाही प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में कमजोरी का कारण बन सकती है, साथ ही इससे शिशु के विकास पर भी असर पड़ता है। ऐसे में महिला को अपने खान पान का खास ध्यान रखना चाहिए साथ ही महिला यदि चाहती है की उसकी नार्मल डिलीवरी हो तो उसके लिए कुछ खास खाद्य पदार्थो का सेवन करना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की वो खाद्य पदार्थ कौन से हैं।

संतरे

नार्मल डिलीवरी के लिए संतरे खाने बहुत फायदेमंद होते हैं। संतरे का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में होने वाली पानी की जरुरत को पूरा करने के साथ, आपको संक्रमण आदि से बचाव करने में भी मदद मिलती है। जिसके कारण आपका शरीर स्वस्थ रहता है और आपको नार्मल डिलीवरी होने में मदद मिलती है।

अंडे

अंडे में सैचुरेटेड फैट, प्रोटीन, मिनरल्स, विटामिन और कैलोरी भरपूर मात्रा में होती है। जो की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रखने में मदद करती है। और महिला और शिशु दोनों के स्वस्थ होने के कारण महिला के नार्मल डिलीवरी के चांस बढ़ जाते हैं।

पालक का सेवन करें

कैल्शियम, आयरन, फोलेट व अन्य एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर पालक का सेवन करने से भी प्रेगनेंसी के दौरान आपको बहुत फायदा मिलता है। आप इसे सब्ज़ी या सूप के रूप में खा सकते है, इसके सेवन से बॉडी को पोषक तत्व मिलने के साथ ब्लड की कमी को पूरा करने में भी मदद मिलती है। जिससे सामान्य प्रसव में मदद मिलती है।

दालें और फलियों का सेवन करें

फाइबर, प्रोटीन व अन्य पोषक तत्वों से भरपूर दालों और फलियों का सेवन करने से आपको फिट रहने में मदद मिलती है। साथ ही इसमें फोलेट भी भरपूर मात्रा में होता है जिससे शिशु के विकास को बेहतर होने में मदद मिलती है। और यदि महिला और शिशु दोनों स्वस्थ रहते हैं तो ऐसा होने से प्रसव के दौरान महिला को ज्यादा परेशानी नहीं होती है।

केले का सेवन

केले न केवल महिला को न केवल प्रेगनेंसी के दौरान ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करते हैं, बल्कि इससे महिला को थकान आदि की समस्या से बचाव करने में भी मदद मिलती है। ऐसे में महिला फिट रहने के लिए केले और दूध का सेवन भरपूर कर सकती है, इससे महिला को फिट रहने में मदद मिलती है जिससे डिलीवरी के समय महिला को परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।

पानी का भरपूर सेवन करें

पानी न केवल ऊर्जा का बेहतरीन स्त्रोत होता है बल्कि इससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है। पानी का भरपूर सेवन करने से महिला को इन्फेक्शन आदि से बचे रहने में भी मदद मिलती है। जिससे महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

ब्रोकली खाएं

एंटी ऑक्सीडेंट, फाइबर, विटामिन, कैल्शियम से भरपूर ब्रोकली का सेवन करने से आपको प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने में मदद मिलती है। साथ ही ब्रोकली का सेवन करने से पाचन तंत्र सम्बन्धी समस्या को दूर करने में भी मदद मिलती है। जिससे आपको फायदा मिलता है। और इसके सेवन से आपको पोषक तत्व मिलते हैं वो डिलीवरी के समय आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

कम वसा वाले मीट का सेवन करें

आयरन की मात्रा से भरपूर कम वसा वाले मीट का सेवन करने से भी प्रेगनेंसी में फायदा मिलता है, इससे शरीर को एनर्जी के साथ ब्लड की मात्रा को भी पूरा करने में भी मदद मिलती है। जिससे महिला के नार्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

नार्मल डिलीवरी के लिए अन्य टिप्स

  • प्रेगनेंसी के दौरान हल्का फुल्का व्यायाम जरूर करें।
  • कोई भी परेशानी होने पर डॉक्टर से तुरंत जांच करवाएं।
  • दिन में थोड़े थोड़े समय बाद कुछ न कुछ खाते रहें, इससे आपको एक्टिव और ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।
  • ऐसे आहार का सेवन भरपूर करें जिसमे आयरन की मात्रा भरपूर हो। क्योंकि यदि महिला में खून की कमी होती है तो डिलीवरी के समय परेशानी हो सकती है। ऐसे में नार्मल डिलीवरी के लिए ऐसे खाद्य पदार्थो का भरपूर सेवन करना चाहिए जिससे शरीर में ब्लड की मात्रा को बढ़ाने में मदद मिल सकें।
  • नार्मल डिलीवरी के लिए ताजा, स्वस्थ व संतुलित होने के साथ पौष्टिक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए।
  • डेयरी उत्पाद का भरपूर सेवन करने से भी आपको प्रेगनेंसी के दौरान आपको फिट रहने में मदद मिलती है, साथ ही इसके भरपूर सेवन से नार्मल डिलीवरी के चांस भी बढ़ जाते हैं।

तो यह हैं कुछ खास खाद्य पदार्थ जिनके सेवन से आपको सामान्य प्रसव के लिए तैयार होने में मदद मिलती है। इसके अलावा आपको नार्मल डिलीवरी के चक्कर में अपने शरीर पर ज्यादा जोर नहीं डालना चाहिए, कहीं आपको इसके कारण कोई और परेशानी न हो जाए। साथ ही आपको समय समय पर डॉक्टर से जांच भी करवाते रहना चाहिए। और ऊपर दिए गए आहार का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में नाभि निकलना और नाभि के आस पास लाइन के बनने के कारण

गर्भावस्था के दौरान महिला बहुत से शारीरिक बदलाव का अनुभव करती है। जैसे की ब्रेस्ट साइज में बदलाव, वजन का बढ़ना, पेट का बाहर आना, चेहरे पर दाग धब्बे होना, स्ट्रेचमार्क्स की समस्या होना, नाभि का बाहर निकलना, नाभि के आस पास लाइन दिखना आदि। यह सब होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है और इसके किसी तरह की घबराने की बात नहीं होती है। क्योंकि यह सभी बदलाव बॉडी में होने वाले हार्मोनल चेंज के कारण हो सकते हैं साथ ही शिशु के वजन बढ़ने के साथ ऐसा होता है। तो आज इस आर्टिकल में हम नाभि से जुड़े बदलाव के बारे में बात करने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में नाभि के बाहर निकलने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान नाभि निकलने का कारण गर्भ में शिशु का बढ़ता विकास, गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा का बढ़ना, बढ़ता वजन, शिशु की गर्भ में हलचल होना, आदि हो सकते हैं। साथ ही गर्भावस्था में नाभि के बाहर निकलने के कारण कुछ महिलाएं परेशान हो सकती है। जबकि ऐसा होना बहुत ही आम बात होती है और इसमें कोई घबराने की बात नहीं होती है।

क्योंकि डिलीवरी के बाद जैसे जैसे महिला की बॉडी वापिस शेप में आती है वैसे वैसे नाभि भी अपनी शेप में आ जाती है। यदि आपको नाभि के बाहर निकलने पर हल्का दर्द, खुजली आदि की समस्या हो तो थोड़े तेल की मदद से आराम से आप मसाज करें आपको आराम मिलेगा। ध्यान रखें की पेट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़े।

प्रेगनेंसी के नाभि के आस पास लाइन होने के कारण

गर्भावस्था के दौरान नाभि के आस पास एक गहरे रंग की लाइन भी महिला को महसूस हो सकती है। और ऐसा होना भी प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। प्रेगनेंसी के दौरान नाभि के आस पास होने वाली इस लाइन को लाइन्स नियाग्रा कहते हैं। और अधिकतर महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान नाभि के आस पास यह लाइन दिखाई देती है।

इस लाइन के उभरने का कारण गर्भावस्था में स्किन में मेलेनिन का उत्पादन बढ़ना होता है, साथ ही गर्भवती महिला के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन का उत्पादन बढ़ने के कारण भी महिला को यह लाइन महसूस हो सकती है। पुराने समय में कुछ महिलाएं पेट पर होने वाली लाइन से अंदाजा भी लगा लेती थी की गर्भ में पल रहा शिशु बेटा है या बेटी है।

पेट पर होने वाली लाइन कैसे बताती है की गर्भ में बेटा है या बेटी है

यदि पेट पर होने वाली यह लाइन बिल्कुल सीधी नाभि से होती हुई नीचे की तरफ जाती है। तो ऐसा होना इस बात की और इशारा करता है की गर्भ में पल रहा शिशु एक नन्हा राजकुमार है। और यदि यह लाइन थोड़ी सी भी टेढ़ी मेढ़ी होती है तो इसका मतलब होता है की आपके गर्भ में एक नन्ही परी है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान नाभि के निकलने और नाभि के आस पास लाइन होने के कारण, यदि आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान अपनी नाभि में यह बदलाव नज़र आता है। तो घबराएं नहीं क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा होना बहुत आम बात होती है। और डिलीवरी के कुछ समय बाद आपको इन सभी से निजात मिल जाता है।

Causes of navel exit in Pregnancy, Causes of formation of a line around the navel in pregnancy

सर्दियों में गर्म पानी से नहाना कितना नुकसानदायक हो सकता है गर्भवती महिला के लिए?

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए बहुत ही खास समय होता है लेकिन इस पल के खास होने के साथ गर्भवती महिला के कन्धों पर एक नन्ही सी जान के गर्भ में बेहतर विकास की जिम्मेवारी भी आ जाती है। ऐसे में महिला को हर छोटी से छोटी बात का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को प्रेगनेंसी के दौरान हर दिक्कत से बचे रहने में मदद मिल सके। और केवल महिला को अपने काम का ही ध्यान नहीं रखना पड़ता है बल्कि मौसम में बदलाव के साथ अपनी केयर के टिप्स के भी बदलाव की जरुरत होती है। तो लीजिये आज हम सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला को ठण्ड से बचने के लिए नहाते समय कैसे पानी का इस्तेमाल करना चाहिए इससे जुडी कुछ बातें बताने जा रहें हैं।

प्रेग्नेंट महिला को सर्दियों में गर्म पानी से नहाना चाहिए या नहीं?

जैसे ही ठंडी हवाओं की दस्तक शुरू होती है बहुत से लोग गर्म पानी से नहाना शुरू कर देते हैं और यह अच्छा भी है क्योंकि इससे ठण्ड से बचे रहने के मदद मिलती है। लेकिन क्या गर्भवती महिला को गर्म पानी से नहाना चाहिए? तो इसका जवाब है की हमारी बॉडी का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस होता है, अब पानी का तापमान यदि 38 डिग्री सेल्सियस है तो वो भी शरीर को गर्म लगता है। और पानी का तापमान इससे ज्यादा भी आप बढ़ाना चाहे तो बढ़ा सकते हैं। लेकिन गर्भवती महिला को नहाने के लिए अधिक तापमान वाले पानी यानी ज्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

क्योंकि इससे महिला की बॉडी के तापमान में फ़र्क़ आ सकता है जिसके कारण गर्भ में शिशु पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की महिला ठन्डे पानी से नहाएं क्योंकि इससे भी महिला को बीमार होने का खतरा हो सकता है। ऐसे में ठण्ड से बचाव और शिशु को किसी तरह का कोई नुकसान न हो इसके लिए गर्भवती महिला को पानी का तापमान ज्यादा नहीं बढ़ाना चाहिए। बल्कि पानी इतना गर्म हो की बॉडी को ठंडा महसूस न हो यानी गुनगुना पानी महिला नहाने के लिए इस्तेमाल कर सकती है। और गुनगुने पानी से नहाने पर महिला को आराम महसूस होता है, रिलैक्स फील होता है, मांसपेशियों को आराम मिलता है, साथ ही ठण्ड से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

ठण्ड के मौसम में गर्भवती महिला को गर्म पानी से नहाने के नुकसान

प्रेग्नेंट महिला यदि गर्म पानी से नहाती है तो इसके कारण गर्भवती महिला से ज्यादा गर्भ में पल रहे शिशु पर नकारात्मक असर पड़ता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को गर्म पानी से नहाने पर कौन कौन से नुकसान हो सकते हैं।

गर्भपात

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही महिला के लिए सबसे नाजुक समय होता है ऐसे में महिला को अपना बहुत अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। और यदि कोई गर्भवती महिला प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्म पानी से नहाती है तो इसके कारण बॉडी के तापमान के बढ़ने का खतरा रहता है, जिसके कारण महिला का गर्भपात हो सकता है, या ब्लीडिंग की समस्या भी महिला को हो सकती है।

ऑक्सीजन

यदि प्रेग्नेंट महिला नहाने के लिए बहुत ज्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल करती है तो इसके कारण गर्भ में शिशु तक ऑक्सीजन के सही प्रवाह में रुकावट आ सकती है। जिसके कारण गर्भ में शिशु असहज महसूस कर सकता है।

समय पूर्व प्रसव

अधिक तापमान वाले पानी से नहाने के कारण बॉडी के तापमान में फ़र्क़ आ सकता है जिसके कारण गर्भशय में संकुचन होने का डर रहता है। और गर्भाशय में संकुचन का अधिक होना महिला के लिए समय से पहले डिलीवरी होने की समस्या का कारण बन सकता है।

स्किन

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला की स्किन भी बहुत नाजुक हो जाती है। ऐसे में गर्म पानी से नहाने के कारण कुछ महिलाएं स्किन पर खुजली, रैशेस, सूखेपन की समस्या से परेशान हो सकती है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्भवती महिला को गर्म पानी से नहाने के कारण हो सकते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को नहाने के लिए ज्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। साथ ही महिला को नहाने में ज्यादा समय भी नहीं लेना चाहिए जल्दी जल्दी नहा लेना चाहिए। और पानी से नहाने से पहले एक बार पानी में हाथ लगाकर देख लेना चाहिए की पानी ज्यादा गर्म तो नहीं है ताकि यदि पानी ज्यादा गर्म हो तो उसमे ठंडा पानी मिलाकर आप पानी के तापमान को सही कर सकें।

स्पर्म काउंट बढ़ाने के तरीके

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शुक्राणु की कमी की समस्या का होना पुरुषो के लिए नपुंसकता का कारण भी बन सकता है, इसके कारण निषेचन होने की सम्भावना कम हो जाती है, साथ ही पुरुष खुलकर अपने शादीशुदा सम्बन्धो का आनंद भी नहीं ले पाता है। स्टडीज़ के अनुसार फर्टिलटी की समस्या होने का सबसे बड़ा कारण शुक्राणु में कमी का होना होता है। और इस समस्या के होने का कोई एक कारण नहीं होता है, बल्कि आपकी खराब जीवनशैली, तनाव से भरी जिंदगी, प्रोस्टेट ग्रंथि में संक्रमण, बहुत ज्यादा गोद में लैपटॉप रहकर काम करना, खान पान बेहतर न होना, नशीली चीजों का सेवन आदि। ऐसे और भी कारण हो सकते हैं जिसके कारण पुरुषो को इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

कई बार पुरुष खुलकर इस बारे में किसी से बात भी नहीं करते है, साथ ही अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाने में भी कतराते हैं, और इन कारणों की वजह से केवल शुक्राणु की संख्या में कमी नहीं आती है, बल्कि शुक्राणु की गुणवत्ता भी कम हो जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं की आप घर पर ही इस समस्या का समाधान कर सकते हैं, इसके लिए जरुरी होता है की सबसे पहले आप अपनी जीवनशैली को सही रखें, दिनचर्या बेहतर बनाएं, कोई शारीरिक समस्या है तो उसका इलाज करवाएं, आदि। क्योंकि आपकी शारीरिक फिटनेस सबसे ज्यादा अआप्के शुक्राणु से जुडी इस समस्या का समाधान करती है। तो लीजिये आज हम आपको शुक्राणु की कमी की समस्या से निजात पाने के कुछ खास टिप्स देने जा रहे हैं।

जीवन शैली में बदलाव लाएं

खराब जीवनशैली भी शुक्राणु की कमी का कारण हो सकती है, ऐसे में आपको इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए, की आप भरपूर नींद लें, तनाव से बचें, खुश रहें, व्यायाम करें, खाना पान में लापरवाही न करें, योगासन करें, ज्यादा तापमान में न रहें, अधिक नशीली चीजों का सेवन न करें, वजन नियंत्रित रखें, धूम्रपान से बचें आदि। जितनी बेहतर आपकी जीवनशैली होती है उतना ही आप फिट रहते हैं, और आपको शुक्राणु की संख्या को बढ़ाने में मदद मिलती है।

खान पान बेहतर रखें

प्रोटीन, कम वसा, जिंक, एंटी ऑक्सीडेंट, विटामिन सी, एमिनो एसिड, फोलिक एसिड, कैल्शियम, व् अन्य मिनरल्स युक्त आहार का भरपूर सेवन करें। इससे आपको स्वस्थ रहने के साथ शुक्राणु की संख्या को बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही अपने आहार को समय से लें, और जंक फ़ूड की जगह घर में बने ताजे व् संतुलित आहार का सेवन करें।

व्यायाम करें

शुक्राणु की कमी की समस्या को दूर करने के लिए व्यायाम करना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि इससे न केवल बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर तरीके से होता है, बल्कि आपकी बॉडी भी फिट रहती है। जिससे स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद मिलती है, लेकिन ध्यान रखे की बहुत अधिक व्यायाम भी न करें क्योंकि इसके कारण शुक्राणु की संख्या में कमी भी आ सकती है।

डार्क चॉकलेट

दिन भर में एक पीस भी यदि आप डार्क चॉकलेट का खाते हैं तो इससे फ्री रेडिकल्स की समस्या से बचाव होने के साथ शुक्राणु की कमी को पूरा करने और शुक्राणु की गुणवत्ता को भी बेहतर करने में मदद मिलती है। चॉकलेट जितना ज्यादा डार्क होता है उतना ही ज्यादा फायदेमंद भी होता है क्योंकि इसमें एमिनो एसिड की मात्रा अधिक होती है जो सीमेन को गाढ़ा करने के साथ शुक्राणु की मात्रा को भी बढ़ाता है, लेकिन इसका सेवन भी अधिक मात्रा में न करें क्योंकि इसके कारण वजन बढ़ने की समस्या के कारण आपको परेशानी हो सकती है, दिन में एक टुकड़ा भी आपके लिए फायदेमंद होता है।

एलिसिन का सेवन करें

अलिसिन एक ओरगानोसल्फर योगिक है, जो की लहसुन में भरपूर मात्रा में पाया जाता है। एलिसिन का सेवन करने से शुक्राणु की मात्रा को यौन अंग में खून के संचार के अनुकूल बनाने में मदद मिलती है। जिससे शुक्राणु की संख्या को बढ़ाने में मदद मिलती है, इसके लिए आपको सुबह दो या तीन कलियाँ नियमित लहसुन की खानी चाहिए, अपने आहार में इसे सम्मिलित करना चाहिए, या सुबह उठकर चाय में लौंग और लहसुन को अच्छे से उबालकर इसका सेवन करना चाहिए।

हिट की समस्या से बचें

प्रजनन अंगो के आस पास का तापमान बढ़ने के कारण भी शुक्राणु की संख्या में कमी आने लगती है। ऐसे में आपको इस परेशानी से बचने के लिए ज्यादा देर गोद में लैपटॉप रखकर काम नहीं करना चाहिए, पैंट जेब में फ़ोन नहीं रखना चाहिए, ज्यादा टाइट अंडरवीअर नहीं पहनना चाहिए, ज्यादा गर्म जगह पर अधिक समय के लिए नहीं रहना चाहिए, आदि। यदि आप इन बातों का भी ध्यान रखते हैं तो ऐसा करने से भी आपको शुक्राणु की कमी की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

अधिक साइकिलिंग न करें

यदि आप शुक्राणु में कमी की समस्या से परेशान हैं तो आपको अधिक साइकिलिंग नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से आपकी परेशानी बढ़ सकती है। फिटनेस के लिए आप अन्य तरह के व्यायाम कर सकते हैं।

तनाव से बचें

यदि पुरुष अधिक तनाव में रहता है तो यह भी शुक्राणु की संख्या में कमी कर सकता है। ऐसे में इस समस्या से बचाव के लिए आपको तनावमुक्त रहना चाहिए। और जितना आप फ्रैश रहते हैं उतना आपको फिट रहने में मदद मिलती है और आपको शुक्राणु से जुडी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

वजन रखे नियंत्रित

वजन का कम होना और ज्यादा होना दोनों ही नुकसानदायक होते हैं। क्योंकि इसके कारण बॉडी में हार्मोनल असंतुलन होने के चांस बढ़ जाते हैं, जैसे की एस्ट्रोजन की मात्रा बढ़ जाती है, और टेस्टोस्टेरोन की मात्रा घट जाती है। जिसके कारण आपको शुक्राणु में कमी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में स्पर्म काउंट को बढ़ाने के लिए आपको वजन को नियंत्रित रखना चाहिए।

स्पर्म काउंट बढ़ाने के अन्य तरीके

  • यदि आप मसल्स को बनाने के लिए स्टेरॉयड का इस्तेमाल करते हैं, तो शुक्राणु की संख्या पर बुरा असर पड़ सकता है ऐसे में आपको इसके सेवन से परहेज करना चाहिए।
  • सम्बन्ध बनाते समय आपको किसी भी तरह के चिकनाहट युक्त चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • जहां पर तापमान अधिक हो, उस जगह पर जाने से बचना चाहिए।
  • नींद में किसी भी तरह की लापरवाही न करें दिन में आठ घंटे की नींद जरूर लें।
  • बॉडी को हाइड्रेट रखे और उसके लिए पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करें।
  • ओमेगा 3 फैटी एसिड स्पर्म काउंट व मेल ऑर्गन्स में ब्लड फ्लो बढ़ाने में बहुत मदद करते है, और अखरोट में यह भरपूर मात्रा में होते है, इसीलिए इस समस्या से निजात पाने के लिए आपको अखरोट का भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • ब्रोकली, पालक का सेवन भरपूर मात्रा में करने से भी आपको शुक्राणु की संख्या और गुणवत्ता दोनों को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • कद्दू के बीज खाने से शरीर में टेस्टोस्टेरोन नामक हॉर्मोन बढ़ता है, जिससे स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • विटामिन सी, ए और बी 1 से भरपूर केले का सेवन भी यदि पुरुष करते हैं तो भी स्पर्म काउंट को बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से पुरुषो से जुडी इस समस्या का समाधान हो सकता है, लेकिन यदि आप चाहे तो इस समस्या के लिए एक बार डॉक्टर से भी राय ले सकते हैं।