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दो मुहें बालों से छुटकारा पाने के उपाय

बाल हमेशा से ही महिलाओं की सुंदरता को बढ़ाने का काम करते हैं इसीलिए जिस तरह आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते है, स्किन का ध्यान रखते हैं, उसी तरह आपको अपने बालों का ध्यान भी रखना चाहिए। क्योंकि यदि बालों का ध्यान अच्छे से नहीं रखा जाता है तो इसकी वजह से बालों से जुडी समस्या का सामना आपको करना पड़ सकता है। जैसे की आज कल बालों का रुखा होना, बालों का झड़ना, बालों की चमक कम होना, बालों के दो मुहें होने की समस्या आम हो गई है।

आज इस आर्टिकल में हम आपसे बालों के दो मुहें की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं। क्या आप भी इस समस्या से झूझ रहे हैं यदि हाँ, तो अब हम इस आर्टिकल में आपको कुछ ऐसे आसान नुस्खे बताने जा रहे हैं जिन्हे यदि आप ट्राई करते हैं तो इससे आपको बालों के दो मुहें होने की समस्या से निजात मिलने के साथ बालों की चमक को बढ़ाने में भी मदद मिलते हैं। लेकिन उससे पहले जानते हैं की बालों के दो मुहें होने के क्या कारण होते हैं।

बालों के दो मुहें होने के कारण

  • बालों में तेजी से कंघी करने के कारण बाल को नुकसान पहुँचता है जिसकी वजह से बालों के दो मुहें होने की समस्या हो जाती है।
  • प्रेसिंग मशीन व् अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल बालों के लिए अधिक करने की वजह से बालों को नुकसान पहुँचता है।
  • केमिकल युक्त चीजों का अधिक इस्तेमाल करने के कारण भी बालों को नुकसान पहुंचता है जिसकी वजह से बाल दो मुहें हो जाते हैं।
  • यदि आपके बाल बहुत ज्यादा रूखे सूखे रहते हैं तो इसकी वजह से भी बालों को नुकसान पहुँचता है और बालों के दो मुहें होने की समस्या हो सकती है।
  • जो महिलाएं बालों को धोने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल ज्यादा करती है उन महिलाओं को यह समस्या ज्यादा हो सकती है।

दो मुहें बालों की समस्या से निजात पाने के टिप्स

यदि आप बालों के दो मुहें होने की समस्या से परेशान हैं तो आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है क्योंकि बालों के लिए कुछ नुस्खे ट्राई करने से आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं। जैसे की:

पपीते का इस्तेमाल करें

अपने बालों के अनुसार पपीते के टुकड़ों को लेकर अच्छे से पीस लें और उसके बाद उसमे थोड़ा दही मिक्स करें। अब इस मिक्सचर को अपने स्कैल्प से लेकर बालों के आखिर तक लगाएं और थोड़ी देर के लिए इसे बालों में ही छोड़ दें उसके बाद बालों को साफ़ पानी से धो लें। ऐसा हगते में दो से तीन बात करें ऐसा करने से बिना आपके बालों को काटे आपको दो मुहें बालों की समस्या से छुटकारा पाने में मदद मिलेगा।

गर्म तौलिये का इस्तेमाल करें

सबसे पहले आप अपने पूरे सिर में नारियल के तेल से मसाज करें उसके बाद एक तौलिया लेकर गर्म पानी में भिगोएं और उसे अच्छे से निचोड़ लें। अब इस तौलिये को बालों में लपेट कर अच्छे से बाँध लें, पांच मिनट बाद इस प्रक्रिया को दोबारा दोहराएं। ऐसा कम से कम तीन से चार बार करें। ऐसा करने से बालों में रूखेपन को कम करने में मदद मिलेगी साथ ही दो मुहें बालों की समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

अंडा

इस उपाय को करने के लिए सबसे पहले आप एक कटोरी में दो अंडे की जर्दी यानी की दो अंडे का पीला भाग निकालकर डालें, उसके बाद उसमे एक चम्मच जैतून का तेल, एक चम्मच शहद, एक चम्मच बादाम का तेल डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। उसके बाद आप इस मिक्सचर को स्कैल्प से लेकर बालों की लेंथ यानी पूरी लम्बाई में लगाएं और शावर कैप से बालों को ढक लें। फिर आधे घंटे के लिए बालों को ऐसे ही छोड़ दें। ऐसा करने के बाद आप माइल्ड शैम्पू कस इस्तेमाल करके बालों को धो लें, आपको जरूर फायदा मिलेगा। इस उपाय को हफ्ते में कम से कम दो बार जरूर करें।

नारियल तेल का इस्तेमाल करें

रात को सोने से पहले बालों में नारियल तेल से मालिश करें उसके बाद सुबह उठकर माइल्ड शैम्पू से बालों को धो लें। ऐसा आप हफ्ते में दो से तीन बार करें, नारियल तेल बालों के रूखेपन को दूर करने में मदद करता है जिससे बालों को दो मुहें होने की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

केला

जी हाँ, केले का इस्तेमाल करने से भी आपको बालों के दो मुहें होने की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप केले को अच्छे से मैश कर लें और उसके बाद इसमें नारियल का दूध मिलाएं, अब इस पेस्ट को बालों की जड़ से लेकर लम्बाई तक अच्छे से लगाए। ऐसा करने के बाद इस पेस्ट को एक दो घंटे तक के लिए बालों में ही रहने दें और फिर बाद में बालों को धो दें। इस उपाय को हफ्ते में दो बार जरूर करें कुछ ही दिनों में आपको इसका असर दिखाई देने लगेगा।

शहद और दही

एक कटोरी दही में दो चम्मच शहद के मिलाएं उसके बाद इसे अच्छे से मिक्स कर लें। ऐसा करने के बाद इस पेस्ट को आप अपने बालों की जड़ से लेकर बालों की लम्बाई तक अच्छे से लगाएं। ऐसा करने के बाद आप एक घंटे के लिए बालों को ऐसे ही छोड़ दें और उसके बाद बालों में माइल्ड शैम्पू का इस्तेमाल करके बालों को धो लें। इस उपाय को हफ्ते में कम से कम दो बार करें ऐसा करने से आपको बालों के दो मुहें होने की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

दो मुहें बालों की समस्या से निजात पाने के अन्य टिप्स

  • गीले बालों में कंघी नहीं करें।
  • गर्म पानी से सिर नहीं धोएं।
  • बालों को पोषण पहुंचाने के लिए बालों को धोने से एक रात पहले या एक घंटे पहले मसाज जरूर करें।
  • केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल बालों के लिए अधिक नहीं करें।
  • बालों में हीट पहुंचाने वाली चीजों का इस्तेमाल नहीं करें क्योंकि इससे बाल बहुत ज्यादा खराब हो जाते हैं।

तो यह हैं कुछ तरीके जिन्हे ट्राई करने से बालों से जुडी इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। यदि आपको भी बालों के दो मुहें होने की समस्या है तो आप भी इनमे से किसी भी टिप्स को कुछ दिनों तक नियमित ट्राई करें आपको फायदा जरूर मिलेगा।

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प्रेगनेंसी में खाली पेट इन फलों को नहीं खाएं?

गर्भावस्था महिला के लिए ऐसा समय होता है जहां महिला को एक एक कदम फूंक फूंक कर रखना पड़ता है। क्योंकि महिला जितनी ज्यादा समझदारी बरतती है उतना ही ज्यादा प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे को फायदा मिलता है। आज इस आर्टिकल में भी हम आपसे प्रेग्नेंट महिला से जुडी जानकारी ही शेयर करने जा रहे हैं। प्रेगनेंसी के दौरान फलों का सेवन करना कितना फायदेमंद होता है यह तो आप सब जानते ही हैं और महिला को डॉक्टर्स द्वारा भी भरपूर फलों का सेवन करने की सलाह दी जाती है ताकि माँ व् बच्चे दोनों को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिल सकें।

लेकिन फलों का सेवन करने से पहले महिला के लिए इस बात का ध्यान रखना जरुरी होता है की गर्भवती महिला को कौन कौन सा फल खाना चाहिए और कौन कौन सा फल नहीं खाना चाहिए। साथ ही महिला को उन फलों की मात्रा का भी ध्यान रखना चाहिए इसके अलावा फलों से जुडी एक बात का ध्यान महिला को और रखना चाहिए की महिला गर्भवती महिला को कौन कौन से फलों का सेवन खाली पेट नहीं करना चाहिए। ताकि माँ व् बच्चे की सेहत को नुकसान नहीं हो।

प्रेगनेंसी के दौरान फलों का सेवन क्यों करना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान महिला को फलों का सेवन इसलिए करना चाहिए क्योंकि फलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते है। जैसे की फलों में कैल्शियम, पोटैशियम, एंटीऑक्सीडेंट्स, मैगनीज़, आयरन, फोलेट आदि मौजूद होता है। इसके अलावा फलों में पानी की मात्रा की अधिकता होती है जिसे गर्भवती महिला के शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है। फलों का सेवन करने से महिला को एनर्जी भी मिलती है, इसके अलावा और भी सेहत सम्बन्धी फायदे फलों का सेवन करने से गर्भवती महिला को मिलते हैं। फलों के साथ साथ महिला चाहे तो फलों के रस का सेवन भी कर सकती है।

कौन से फलों का सेवन महिला को खाली पेट नहीं करना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान फलों का सेवन करना पूरी तरह से सेफ होता है लेकिन गर्भवती महिला को फिर भी फलों का सेवन करते हुए सावधानी बरतनी चाहिए जैसे की फलों को अच्छे से धोकर खाना चाहिए, ज्यादा देर कटे रखें फलों का सेवन नहीं करना चाहिए, आदि। इसके अलावा महिला को यह भी पता होना चाहिए की महिला को कौन से फलों का सेवन खाली पेट नहीं करना चाहिए तो आइये अब जानते हैं की वो फल कौन से हैं।

ठन्डे फलों का सेवन

प्रेग्नेंट महिला की यदि सुबह सुबह फल खाने की इच्छा हो रही है तो महिला बिना किसी डर के फलों का सेवन कर सकती है। लेकिन महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला सुबह सुबह खाली पेट फ्रिज से निकले हुए ठन्डे फलों का सेवन नहीं करें। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला की इम्युनिटी कमजोर होती है ऐसे में ठन्डे फलों का सेवन करने से महिला को सर्दी, खांसी, जुखाम आदि होने का खतरा होता है।

अनार का सेवन

गर्भवती महिला को खाली पेट अनार का सेवन भी नहीं करना चाहिए खासकर सर्दियों के मौसम में तो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि अनार की तासीर ठंडी होती है ऐसे में अनार का सेवन करने से सर्दी से जुडी समस्या होने के साथ महिला और गर्भस्थ शिशु को भी निमोनिया होने का खतरा होता है।

खट्टे फलों का सेवन

गर्भवती महिला को खाली पेट उन फलों का सेवन भी नहीं करना चाहिए जो खट्टे होते हैं जैसे की संतरा, मौसम्बी आदि। क्योंकि खट्टे फलों का सेवन करने से महिला को पाचन क्रिया से सम्बंधित परेशानी हो सकती है जिसके कारण महिला को अपच, गैस, आदि की समस्या हो सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान कौन से फलों का सेवन नहीं करना चाहिए?

कुछ ऐसे फल भी है जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला को बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए क्योंकि उनका सेवन करने से गर्भपात समय से पहले डिलीवरी, जैसी समस्या होने का खतरा रहता है। जैसे की महिला को पपीता, अनानास, जरुरत से ज्यादा अंगूर आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खाली पेट कौन से फलों का सेवन नहीं करना चाहिए उससे जुडी जानकारी, यदि आप भी गर्भवती हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको व् आपके शिशु की सेहत को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

Do not eat these fruits on an empty stomach during pregnancy

गर्भ में शिशु की मूवमेंट ज्यादा होने के कारण?

गर्भ में शिशु के आने की खबर से महिला बहुत उत्साहित हो जाती है। और प्रेगनेंसी की शुरुआत से लेकर आखिर तक महिला हर वो काम करती है जिससे गर्भ में पल रहा शिशु पूरी तरह से स्वस्थ रहें। लेकिन यदि प्रेगनेंसी के सबसे खास मूवमेंट की यदि बात की जाए तो महिला के लिए वो मूवमेंट गर्भ में शिशु का पहली बार हलचल करना होता है।

क्योंकि जब शिशु मूवमेंट करता है, महिला को किक करता है तो इससे महिला को अपने शिशु के और ज्यादा करीब महसूस होता है। साथ ही शिशु का मूव करना इस बात का संकेत भी होता है की गर्भ में आपका शिशु स्वस्थ है। लेकिन कई बार देखने को मिलता है की गर्भ में शिशु ज्यादा मूव करने लगता है। क्या आप प्रेग्नेंट हैं और आपके साथ भी ऐसा हो रहा है? यदि हाँ, तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको गर्भ में शिशु ज्यादा मूव कब करता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भ में शिशु की मूवमेंट कब शुरू होती है?

माँ के गर्भ में पहले तीन महीने में शिशु के अंग बनने लगते हैं उसके बाद धीरे धीरे वह अंग काम करना शुरू कर देते हैं। बच्चे के हाथ पैर, सिर आदि मूव करने लगते हैं और प्रेगनेंसी के चौथे महीने के आखिर या पांचवें महीने के दौरान महिला को गर्भ में शिशु की हलचल महसूस होना शुरू हो जाती है।

माँ के पेट में शिशु के ज्यादा हलचल करने के कारण

गर्भ में पल रहा शिशु यदि मूव कर रहा है तो यह बात बहुत अच्छी होती है क्योंकि यह गर्भ में शिशु के स्वस्थ होने की और इशारा करता है। लेकिन कई बार शिशु ज्यादा मूव करने लगता है ऐसे में इसे लेकर महिला घबरा सकती है लेकिन ऐसे में घबराने की कोई बात नहीं होती है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भ में शिशु के ज्यादा मूव करने के क्या कारण होते हैं।

प्रेगनेंसी का समय आगे बढ़ने के साथ

गर्भावस्था के चौथे या पांचवें महीने के आखिर में गर्भ में शिशु मूव करना शुरू कर देता है। और शुरुआत में महिला को यह हलचल बहुत कम समय के लिए महसूस होती है लेकिन जैसे जैसे प्रेगनेंसी का समय आगे बढ़ता है वैसे वैसे गर्भ में शिशु की मूवमेंट भी बढ़ने लगती है। और शिशु पहले की अपेक्षा दिन भर में ज्यादा समय और ज्यादा देर तक मूव करता है।

तेज आवाज़ होने पर

गर्भ में शिशु के अंग बनने के बाद धीरे धीरे उन अंगों का विकास शुरू हो जाता है और वो अंग काम भी करने लगते हैं। जैसे की गर्भ में शिशु की सुनने की क्षमता का विकास बढ़ने लगता है और शिशु बाहर की आवाज़ों को सुनने लगते हैं। ऐसे में यदि कभी गर्भवती महिला तेज आवाज़ में म्यूजिक सुनती है या ऐसी किसी जगह पर जाती है जहां पर तेज आवाज़ होती है तो तेज आवाज़ सुनकर गर्भ में शिशु चौंक जाता है घबरा जाता है जिसकी वजह से गर्भ में शिशु अचानक से ज्यादा मूवमेंट करना शुरू कर देता हैं।

रात के समय

रात के समय जब महिला आराम से बैठती है चारों तरफ शांति होती है तो भी महिला को गर्भ में शिशु की हलचल ज्यादा महसूस हो सकती है। क्योंकि दिन भर में काम करते हुए महिला को हलचल कम महसूस होती है लेकिन रात के समय जब महिला रिलैक्स होती है तो बच्चा गर्भ में ज्यादा घूमने लगता है जिसकी वजह से महिला को हलचल ज्यादा महसूस हो सकती है।

ज्यादा रौशनी होने पर

यदि गर्भ में गर्भ पर तेज रौशनी पड़ती है तो इसे भी गर्भ में पल रहा शिशु महसूस करता है और चौंक जाता है। जिसकी वजह से गर्भ में पल रहा शिशु ज्यादा मूव करना शुरू कर देता हैं।

शिशु से बातें करने पर

प्रेग्नेंट महिला जब गर्भ पर हाथ फेरती है शिशु से बातें करती है तो गर्भ में पल रहा शिशु भी इस पर प्रतिक्रिया दे सकता है। और यह प्रतिक्रिया शिशु अपनी मूवमेंट से देता हैं और गर्भ में ज्यादा मूव करना शुरू कर देता हैं।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भ में पल रहा शिशु ज्यादा मूव करना शुरू कर देता हैं। तो ऐसे में घबराने की कोई बात नहीं होती है बल्कि इससे यह पता चलता है की गर्भ में पल रहा शिशु एक्टिव और स्वस्थ हैं। लेकिन यदि महिला को गर्भ में शिशु की हलचल में कमी महसूस हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह चिंता का कारण होता है और ऐसे केस में महिला को तुरंत डॉक्टर से भी मिलना चाहिए ताकि किसी तरह की दिक्कत नहीं हो।

क्या IVF से बच्चा हेल्दी नहीं होता है?

माँ बनना हर महिला के जीवन का सबसे अनमोल तोहफा होता है। क्योंकि इस दौरान महिला अपने ही अंदर एक नन्ही जान को सींचती है और इसका अनुभव केवल एक महिला ही उठा सकती है। लेकिन कई बार कुछ कारणों की वजह से बहुत कोशिश करने के बाद भी महिला का गर्भाधारण नहीं हो पाता है। ऐसे में महिला का हताश होना लाज़मी होता है क्योंकि माँ बनना एक महिला के लिए कितना मायने रखता है यह केवल एक महिला ही जानती है।

ऐसे में माँ बनने के लिए महिला हर मुमकिन कोशिश करती है। और आज के समय में हमारे डॉक्टर्स ने महिला की इस समस्या के लिए कुछ समाधान व् विकल्प भी बना लिए हैं। आज इस आर्टिकल में हम आपसे IVF जो की माँ बनने का एक तरीका है उसके बारे में बात करने जा रहे हैं। तो आइये सबसे पहले हम जानते हैं की आखिर IVF क्या होता है।

IVF क्या है?

आईवीएफ एक फर्टिलटी उपचार है जिसे करने के कारण महिला का गर्भधारण हो जाता है। इसमें महिला के अंडाशय से अंडे को निकालकर और पुरुष के स्पर्म को निकालकर मिलाया जाता है। और उसके बाद उस अंडे को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित क्या जाता है जिससे महिला कला गर्भाधारण हो जाता है। आज कल बहुत से लोग इस तरीके का सहारा लेकर गर्भधारण कर रहे हैं।

क्या आईवीएफ की मदद से पैदा हुआ बच्चा कम हेल्दी होता है?

आईवीएफ की मदद से जब महिला गर्भधारण करती है तो वो बच्चा माँ की कोक में ही पूरे नौ महीने तक रहता है और बिल्कुल एक नोर्मल बच्चे की तरह ही उसको महिला द्वारा पोषण पहुंचाया जाता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान जितना अच्छे तरीके से महिला अपना ध्यान रखती है उतना ही ज्यादा माँ और बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि महिला किसी तरह की लापरवाही करती है तो उसका नुकसान भी माँ और बच्चे को होता है।
ऐसे में यह कहना की नोर्मल बच्चा ज्यादा स्वस्थ होता है और आईवीएफ की मदद की पैदा हुआ बच्चा कम हेल्दी होता है यह बिल्कुल गलत है। गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत और स्वास्थ्य अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला को एक स्वस्थ शिशु को जन्म देने में मदद मिल सके।

तो यह हैं आईवीएफ से जन्मा बच्चा हेल्दी होता है या नहीं उससे जुडी जानकारी, इसके अलावा आईवीएफ ट्रीटमेंट से पहले डॉक्टर्स आपको कुछ टेस्ट व् ट्रीटमेंट की राय देते हैं। जो आपको समय से करवाना चाहिए। क्योंकि इससे आपके माँ बनने के सपने को आसान बनाने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में ब्लड आने पर क्या दिक्कत होती है?

गर्भावस्था महिला के लिए ऐसा समय होता है जहां महिला को शरीर में होने वाले थोड़े से बदलाव के बारे में जानकारी होना बहुत जरुरी होता है। चाहे वो महिला को आंतरिक रूप से महसूस हो रहा हो या फिर महिला उसे बाहरी रूप से महसूस कर रही हो।

क्योंकि जितना ज्यादा महिला के पास प्रेगनेंसी से जुडी जानकारी होती है उतना ही महिला को अपनी प्रेगनेंसी को आसान बनाने व् प्रेगनेंसी के दौरान अपने आप और अपने होने वाले शिशु को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को महसूस होने वाली ऐसी ही एक दिक्कत के बारे में बात करने जा रहे हैं और वो है की गर्भावस्था के दौरान महिला को ब्लीडिंग होना।

क्या प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग होना नोर्मल होता है?

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं को ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है खासकर प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में ऐसा अधिकतर महिलाओं के साथ हो सकता है। क्योंकि उस दौरान बच्चा जब गर्भाशय से जुड़ता है तो महिला को हल्के खून के दाग महसूस हो सकते हैं। और ऐसा होना बहुत ही नोर्मल होता है।

इसे लेकर किसी तरह की घबराने की जरुरत नहीं होती है। लेकिन यदि महिला को ब्लीडिंग ज्यादा होने लगती है जैसे की माहवारी के दौरान होती है तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि ब्लीडिंग का ज्यादा होना खतरे का संकेत होता है। ऐसा होने पर गर्भ में शिशु को ज्यादा नुकसान हो सकता है।

क्या हर प्रेग्नेंट महिला को ब्लीडिंग होती है?

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नहीं होता है की गर्भावस्था के दौरान हर महिला को ब्लीडिंग हो। क्योंकि जिस तरह प्रेगनेंसी के लक्षण हर महिला को अलग अलग महसूस होते हैं उसी तरह हो सकता है की कुछ महिलाओं को स्पॉटिंग की दिक्कत भी नहीं हो। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग होने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिनकी वजह से महिला को ब्लीडिंग हो सकती है।

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होने के कारण

  • जब शिशु गर्भाशय में प्रत्यारोपित होता है तो महिला को ब्लीडिंग हो सकती है।
  • जब महिला का अपने आप ही गर्भपात हो गया हो तो महिला को ब्लीडिंग हो सकती है।
  • गर्भ में शिशु के सही तरीके से विकसित नहीं होने पर भी ऐसा हो सकता है।
  • शरीर में हार्मोनल असंतुलन या हॉर्मोन्स की कमी के कारण भी ऐसा होना आम बात होती है।
  • जिन महिलाओं को एक्टोपिक प्रेगनेंसी हो जाती है उन महिलाओं को ये लक्षण महसूस होता है।
  • प्रेगनेंसी की शुरुआत में सम्बन्ध में की गई लापरवाही के कारण भी ऐसा हो सकता है।

ब्लीडिंग होने पर क्या क्या दिक्कत हो सकती है?

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं को ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है और यदि यह समस्या बढ़ जाती है तो इसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत होने का खतरा बढ़ जाता है। तो आइये अब जानते हैं की ब्लीडिंग होने पर महिला को क्या- क्या दिक्कत हो सकती है।

गर्भपात

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में महिला को यदि ब्लीडिंग यदि ज्यादा होने लग जाए तो इसका मतलब होता है की गर्भ में बच्चा खराब हो चूका है और महिला का गर्भपात हो गया है। ऐसा होने पर महिला को तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए यदि कोई उम्मीद है तो अपना ट्रीटमेंट करवाना चाहिए नहीं तो गर्भ की अच्छे से सफाई करवानी चाहिए ताकि बाद में कोई दिक्कत नहीं हो।

समय से पहले डिलीवरी

यदि महिला को प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के आखिर या तीसरी तिमाही में ऐसी कोई समस्या होती है तो यह समय से पहले प्रसव का संकेत होता है। ऐसे में भी महिला को बिना देरी करते हुए जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए।

शिशु के विकास में कमी

कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी का पूरा समय यह दिक्कत रहती है और वह डॉक्टर की निगरानी में अपना ट्रीटमेंट करवाती है ऐसा होने पर कुछ केस में शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

ब्लीडिंग होने पर डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

यदि महिला को माहवारी के दौरान होने वाला पेट या कमर में दर्द महसूस होने के साथ स्पॉटिंग भी हो रही हो या ब्लीडिंग अचानक से तेज होने लग जाये तो ऐसे केस में महिला को जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग होने के कारण, ब्लीडिंग के कारण होने वाली दिक्कत से जुडी समस्या, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का पता होना चाहिए। ताकि आपको यदि ऐसी कोई दिक्कत हो तो आप जल्द से जल्द डॉक्टर से अपना ट्रीटमेंट करवा सकें।

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प्रेगनेंसी के आठवें महीने में क्या-क्या होता है?

प्रेगनेंसी का आठवाँ महीना मतलब अब कुछ ही समय आपको अपना और अच्छे से ध्यान रखना है क्योंकि अब बच्चे के जन्म में थोड़ा ही समय रह गया है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है की आप अपने प्रति लापरवाह हो जाये। क्योंकि प्रेगनेंसी का आठवाँ महीना बहुत ही ज्यादा सावधानी बरतने वाला होता है। यदि इस दौरान थोड़ी भी लापरवाही बरती जाये तो आपको इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के आठवें महीने में क्या क्या होता है उसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में कौन से लक्षण महसूस होते हैं

गर्भावस्था के आठवें महीने में महिला को शरीर में बहुत से लक्षण महसूस हो सकते हैं जिसकी वजह से महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती है। जैसे की:

वजन बढ़ने के कारण होती है दिक्कत

आठवें महीने में महिला का वजन बढ़ चूका होता है जिसकी वजह से महिला को उठने बैठने, सोने आदि सभी में परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।

सूजन

वजन बढ़ने के कारण आठवें महीने में महिला को पैरों में सूजन अधिक महसूस हो सकती है और सूजन के साथ महिला को दर्द भी हो सकता है। लेकिन ध्यान रखें सूजन अधिक होने पर इसे नज़रअंदाज़ न करते हुए डॉक्टर से मिलें।

सांस लेने में तकलीफ

इस दौरान पेट का आकार बढ़ने के कारण महिला को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है लेकिन धीरे धीरे यह परेशानी कम हो जाती है क्योंकि आठवें महीने में आखिर तक कुछ बच्चे अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में आने लगते हैं।

स्तनों में रिसाव होता है

कुछ महिलाओं को इस दौरान स्तनों से रिसाव भी महसूस हो सकता है। इसे देखकर महिला को घबराना नहीं चाहिए क्योंकि ऐसा होना बहुत ही आम बात होती है।

पीठ में दर्द

गर्भ में शिशु का वजन बढ़ने के कारण पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ जाता है जिसकी वजह से महिला को पीठ में दर्द महसूस हो सकता है। और जिन महिलाओं को पहले से पीठ दर्द की समस्या होती है उन्हें यह दिक्कत ज्यादा हो सकती है।

पेल्विक एरिया में दर्द

बच्चे का भार नीचे की तरफ धीरे धीरे बढ़ने लगता है जिसकी वजह से महिला को इस दौरान पेल्विक एरिया में भी थोड़ा थोड़ा दर्द महसूस हो सकता है।

कब्ज़ व् अन्य दिक्कत

पाचन तंत्र पर दबाव पड़ने के कारण आठवें महीने में पाचन क्रिया थोड़ा धीमे काम करती है जिसकी वजह से महिला को कब्ज़, गैस जैसी परेशानी हो सकती है। और कब्ज़ ज्यादा होने के कारण बवासीर जैसी दिक्कत होने का खतरा भी रहता है।

बार बार यूरिन आने की समस्या

बच्चे का भार बढ़ने के कारण आठवें महीने में महिला की यूरिन करने की इच्छा में बढ़ोतरी हो सकती है ऐसे में महिला को ध्यान रखना चाहिए की महिला यूरिन रोककर नहीं रखें। और जब भी इच्छा को तो यूरिन पास करने जाये क्योंकि नहीं तो महिला को पेट में दर्द, यूरिन इन्फेक्शन जैसी दिक्कत होने का खतरा भी बढ़ सकता है।

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में शिशु का विकास

गर्भावस्था के आठवें महीने में शिशु गर्भ में लगभग पूरा विकसित हो चूका होता है। शिशु के हाथ पैर, आँखे, सिर, शारीरिक अंग आदि सभी विकसित हो चुकें होते हैं। इस दौरान शिशु का शारीरिक के साथ मानसिक विकास भी तेजी से हो रहा होता है। इस दौरान शिशु बाहर की सभी चीजों को महसूस कर सकता है और उन पर प्रतिक्रिया भी देता है। लेकिन इस समय शिशु का आकार बढ़ने की वजह से शिशु को घूमने के लिए जगह कम मिलती है।

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में क्या खाएं

गर्भवती महिला को इस दौरान अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इस समय महिला का शरीर डिलीवरी के लिए तैयार हो रहा होता है। साथ ही गर्भ में शिशु का विकास भी तेजी से हो रहा होता है। तो आइये अब जानते हैं की महिला को क्या खाना चाहिए।

  • महिला को फाइबर से भरपूर चीजें जैसे की दालें, हरी सब्जियां, रसदार फल आदि खाने चाहिए क्योंकि इससे महिला की पाचन क्रिया मजबूत रहती है जिससे महिला को पेट सम्बन्धी दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • डेयरी प्रोडक्ट्स व् अन्य कैल्शियम से भरपूर डाइट लेनी चाहिए क्योंकि यह माँ व् बच्चे दोनों की हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करती है।
  • प्रोटीन से भरपूर डाइट लें जैसे की ड्राई फ्रूट्स, दालें, अंडा, चिकन आदि खाएं क्योंकि ये शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए फायदेमंद होने के साथ महिला को भी एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करती है।
  • आयरन से भरपूर डाइट लें जिससे माँ व् बच्चे दोनों में खून की कमी के कारण कोई दिक्कत नहीं हो और इसके लिए महिला को सेब, अनार, हरी सब्जियों आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

गर्भावस्था के आठवें महीने में क्या नहीं खाएं

  • महिला को नशीले पदार्थ जैसे की शराब, तम्बाकू, धूम्रपान आदि का सेवन नहीं करना चाहिए साथ ही जिस जगह पर कोई इन चीजों का सेवन कर रहा हो वहां भी नहीं जाना चाहिए।
  • चाय, कॉफ़ी व् अन्य कैफीन युक्त पदार्थों का जरुरत से ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए।
  • मर्करी युक्त मछली का सेवन नहीं करें।
  • कच्चा अंडा, कच्चा मास, कच्चे दूध आदि का सेवन नहीं करें।
  • बिना धुले फल व् सब्जियां नहीं खाएं।
  • बहुत देर तक कटे रखे खाद्य पदार्थ, गले सड़े पदार्थों का सेवन भी नहीं करें क्योंकि इनसे पेट में इन्फेक्शन होने का खतरा अधिक होता है।

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में रखें इन बातों का ध्यान

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के आठवें महीने कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें। जैसे की:

  • महिला को अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए समय से आहार लेने के साथ थोड़ा थोड़ा खाना चाहिए ताकि खाने को अच्छे से हज़म होने में मदद मिल सकें।
  • शरीर में पानी की कमी नहीं हो इसके लिए दिन भर में आठ से दस गिलास पानी का सेवन करना चाहिए।
  • निम्बू पानी, नारियल पानी, जूस आदि का सेवन करना चाहिए।
  • नींद भरपूर लेनी चाहिए साथ ही वजन बढ़ने के कारण सोने में यदि कोई दिक्कत हो तो प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • उठते, बैठते, लेटते समय अपनी पोजीशन का ध्यान रखना चाहिए।
  • पेट के भार कोई काम नहीं करना चाहिए, झुककर काम नहीं करना चाहिए, भारी सामान नहीं उठाना चाहिए, आदि।
  • गर्भ में शिशु की मूवमेंट का ध्यान रखना चाहिए इस बात का खास ध्यान रखें की यदि आपको शिशु की हलचल यदि महसूस न हो और समय भी ज्यादा बीत गया हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाए।
  • व्यायाम ज्यादा नहीं करें लेकिन थोड़ी देर वाक जरूर करें परतु यदि डॉक्टर ने बेड रेस्ट कहा हो तो ऐसा व्यायाम करने से बचें।
  • वजन बढ़ने के कारण और पेट बाहर आने के कारण महिला को इस महीने में थोड़ी परेशानी ज्यादा हो सकती है लेकिन महिला घबराना नहीं चाहिए और अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

गर्भावस्था के आठवें महीने में डॉक्टर से कब मिलें?

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में महिला को जब भी डॉक्टर रूटीन चेकअप के लिए बुलाएं तो आपको जाना चाहिए। इसके अलावा यदि आपको शरीर में कोई असहज लक्षण महसूस हो, कोई दिक्कत ज्यादा हो, कुछ समझ न आ रहा हो तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के आठवें महीने से जुडी जानकारी, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपका आठवां महीना शुरू होने वाला है, या आपकी प्रेगनेंसी अभी कन्फर्म हुई है तो भी आपको यह सभी जानकारी होनी चाहिए। ताकि आपकी प्रेगनेंसी को आसान बनाने और हर तरह की परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके।

Eighth month of Pregnancy

नवजात शिशु को हमेशा गोद में क्यों नहीं रखना चाहिए?

छोटे बच्चे बहुत ही प्यारे और मासूम होते हैं उनकी हर छोटी से छोटी बात बहुत ही प्यारी और मन को मोह लेने वाली होती है। साथ ही आपके बच्चे की आदत कैसी होगी यह आप बच्चे की केयर कैसे करती है, बच्चे को रखती कैसे हैं इस बात पर निर्भर करती है। जैसे की कुछ महिलाएं जन्म के बाद अपने बच्चे को दूध की बोतल में दूध पिलाना शुरू कर देती है और इस आदत को बच्चे से एक डेढ़ साल का होने तक ऐसे ही चलने देती है।

तो उसके बाद बच्चे को इस आदत की लत पड़ जाती है और बच्चे को इस आदत को छुड़वाने में आपको दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। वैसे ही छोटे बच्चे हर किसी को प्यारे लगते हैं इसीलिए हर कोई उन्हें गोद में उठाकर रखना चाहता है लेकिन यदि बच्चा सारा दिन गोद में ही रहता है तो बच्चे को इसकी आदत लग जाती है और फिर आपका बच्चा केवल गोद में ही रहना पसंद करता है। जिसके कारण आपको बहुत परेशानी हो सकती है। आज इस आर्टिकल में बच्चों को गोद में हमेशा रखने की आदत क्यों नहीं डालनी चाहिए इसके बारे में बताने जा रहें हैं।

चिपकू हो जाता है बच्चा

बच्चे को हमेशा गोद में लेकर रखने के कारण बच्चा चिपकू हो जाता है यानी की बच्चे हमेशा गोद में ही रहना चाहता है। जिसके कारण आपको खाते समय, खिलाते समय, सोते समय सुलाते समय, हर काम को करते हुए बच्चे को गोद में लेकर रखना पड़ता है। ऐसे में बच्चा तो गोद में खुश हो जाता है लेकिन उसकी यह आदत आपके लिए दिक्कत खड़ी कर सकती है।

चलना या बैठना लेट शुरू करता है बच्चा

बच्चा जब हमेशा गोद में रहता है तो बच्चे को हमेशा गोद में रहने की आदत पड़ जाती है ऐसे में फिर यदि आप बच्चे को कुछ सीखना भी चाहते हैं तो बच्चा नहीं सीखता है। क्योंकि उसे गोद में रहना अच्छा लगता है जिसके कारण आपका बच्चा लेट बैठना शुरू करता है साथ ही लेट चलना भी शुरू कर सकता है।

आपको काम करने में होती है परेशानी

घर के बहुत काम होते हैं, बच्चे से जुड़े बहुत काम होते हैं जो महिला को करने पड़ते हैं। ऐसे में यदि आप हमेशा बच्चे को गोद में रखते हैं तो इसके कारण महिला को परेशानी का अनुभव करना पड़ सकता है।

अधिक रोने लगता है बच्चा

गोद में हमेशा रहने की आदत के कारण आपके बच्चे की रोने की आदत भी बढ़ जाती है क्योंकि जैसे ही आप या घर का कोई सदस्य काम करने के लिए उसे गोद से नीचे उतारता वह रोने लगता है। और वो चाहता है की उसे कोई गोद में ले ले ऐसे में उसे चुप करवाने के लिए उसे गोद में लेना जरुरी हो जाता है।

शिशु एक्टिव नहीं होता

शिशु जब नीचे लेटा होता है या बैठा होता है तो उस दौरान शिशु अपने हाथ पैर चलाने की कोशिश करता है जिसकी वजह से शिशु को एक्टिव रहने में मदद मिलती है। ऐसे में यदि आप हमेशा शिशु को गोद में लेकर रखते हैं तो शिशु उन एक्टिविटीज को नहीं कर पाता है जिसके कारण आपका शिशु ज्यादा एक्टिव नहीं रहता है और हमेशा गोद में सुस्त रहता है और ऐसे बच्चे किसी और की गोद में जाना पसंद भी नहीं करते हैं।

बच्चा चिड़चिड़ा ज्यादा हो जाता है

बच्चे को हमेशा गोद में रखने के कारण न तो बच्चा खेलता है, न ही कुछ करता है ऐसे में जब भी आप बच्चे को नीचे छोड़ते हैं। तो बच्चा खेलने की बजाय चिड़चिड़ाने लगता है।

नींद पूरी करने में होती है दिक्कत

गोद में रहने वाले बच्चे गोद में ही सोना भी पसंद करते हैं ऐसे में गोद में सुलाने के बाद जब आप बच्चे को नीचे सुलाते हैं तो बच्चा तुरंत उठ जाता है। जिसके कारण बच्चा अच्छे से नींद नहीं ले पाता है और नींद पूरी न होने के कारण बच्चा तो परेशान होता है साथ ही आपको भी दिक्कत होती है।

सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का रहता है खतरा

बच्चे को गोद में लेकर रखने से बच्चा एक्टिव नहीं होता है बच्चा चिड़चिड़ा रहता है, बच्चा खाना नहीं खाता है, नींद अच्छे से नहीं ले पाता है, आदि। जिसके कारण बच्चे को पोषण अच्छे से नहीं मिलता है और शिशु को सेहत सम्बन्धी समस्या होने का खतरा होता है।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जिनका सामना आपको नवजात शिशु को हमेशा गोद में रखने के कारण हो सकती है। ऐसे में महिला को इन परेशानियों से बचने और शिशु के बेहतर विकास के लिए बच्चे को ऐसी आदत नहीं डालनी चाहिए। हाँ, आप कभी कभार आप बच्चे को गोद में ले सकते हैं लेकिन जरुरत से ज्यादा आप या किसी और को बच्चे को गोद में पकड़ने के लिए न दें।

गर्मियों में प्रेग्नेंट महिला को ऐसे सोना चाहिए?

प्रेगनेंसी महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जहां महिला को कई बार अपनी मनचाही चीजों से परहेज करना पड़ता है। जैसे की महिला को कई बार अपनी पसंद का खाना नहीं खाना होता है, महिला अपना मनचाहा व्यायाम नहीं कर सकती है, अपनी मर्ज़ी से घूम फिर नहीं सकती है, अपनी पसंद की पोजीशन में सो नहीं सकती है, आदि। और महिला इसीलिए ऐसा नहीं कर सकती है क्योंकि कई बार महिला की मनपसंद चीज से शिशु को गर्भ में दिक्कत होने का खतरा होता है।

गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी के दौरान सबसे जरुरी होता है की वो प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा कुछ भी नहीं करें जिससे महिला की सेहत या बच्चे के स्वास्थ्य को किसी भी तरह का खतरा हो। आज इस आर्टिकल में हम गर्भावस्था के दौरान महिला को कैसे सोना चाहिए, कितना सोना चाहिए, अच्छी और गहरी नींद लेने के लिए महिला क्या क्या कर सकती है उसके बारे में बताने जा रहे हैं। तो आइये अब इन सभी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कितनी देर सोना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान महिला के लिए खाना पीने जितना अहम होता है उतना ही महिला के लिए सोना भी अहम होता है। और स्वस्थ रहने के लिए एक आदमी को दिन भर में कम से कम साथ से आठ घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को साथ से आठ घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए साथ ही महिला को रात को सोने के साथ दिन भर में भी एक घंटा आराम जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से महिला को रिलैक्स, एक्टिव व् स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

गर्मियों में प्रेग्नेंट महिला को कैसे सोना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान महिला का पहली तिमाही में पेट उतना बाहर नहीं होता है ऐसे में महिला किसी भी पोजीशन में आराम से सो जाती है। लेकिन जैसे जैसे महिला का पेट बाहर आता है वैसे वैसे महिला को सोने में दिक्कत होती है। साथ ही सही पोजीशन में नहीं सोने के कारण गर्भवती महिला और शिशु को दिक्कत होने का भी खतरा होता है। ऐसे में महिला के लिए भरपूर नींद लेने के साथ सही पोजीशन में सोना जरुरी होता है। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो इस बात का ध्यान रखें की गर्मी का मौसम हो या सर्दी का मौसम हो आपको सोने की सही पोजीशन का ध्यान रखते हुए उसी में सोना है ताकि आपको व् आपके बच्चे को कोई दिक्कत नहीं हो।

प्रेग्नेंट महिला के लिए सोने की सही पोजीशन

गर्भवती महिला को सीधे होकर नहीं नहीं सोना चाहिए क्योंकि इससे ब्लड फ्लो में रूकावट, कमर में दर्द जैसी समस्या हो सकती है। महिला को लम्बे समय तक दाईं और करवट लेकर भी नहीं सोना चाहिए क्योंकि इससे शिशु तक ब्लड, ऑक्सीजन, आदि का फ्लो अच्छे से होने में परेशानी होती है। लेकिन यदि महिला बाईं और करवट लेकर सोती है तो इससे महिला आराम से सो भी जाती है और इस पोजीशन में सोने से माँ व् बच्चे को कोई दिक्कत भी नहीं होती है। इसके अलावा यदि सोते समय महिला बार बार करवट लेती रहती है तो बार बार करवट बदल बदल कर सोना भी महिला के लिए सही होता है।

गर्मियों में अच्छी व् गहरी नींद के लिए प्रेग्नेंट महिला क्या करें?

यदि प्रेग्नेंट महिला अच्छी व् गहरी नींद लेना चाहती है तो इसके लिए गर्भवती महिला को कुछ छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे की:

  • महिला को अपने सोने की जगह को साफ़ सुथरा रखना चाहिए।
  • गर्मियों के मौसम में सूती चादर, पिलो कवर आदि का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • कमरे को ठंडा रखना चाहिए और रात को अपने ऊपर सूती चादर ओड कर सोना चाहिए।
  • प्रेग्नेंट महिला को सोते समय आरामदायक कपडे पहनने चाहिए जिससे महिला को सोने में कोई दिक्कत नहीं हो।
  • यदि आप ए सी में सो रही है तो कमरे में हवा पास हो सके इसके लिए कमरे को थोड़ा खुला रखना चाहिए।
  • सोने से पहले फ़ोन से दूरी बना लें क्योंकि यदि आपके पास फ़ोन होगा तो आपको सोने में देरी होगी।
  • बेहतर व् आरामदायक नींद के लिए आप प्रेगनेंसी पिलो का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • सोते समय किसी भी तरह के नेगेटिव विचारों को अपने मन में नहीं आने दें, पॉजिटिव सोचते हुए सोने की कोशिश करें।
  • सोने से पहले गुनगुना दूध पीएं इससे अच्छी व् गहरी नींद लेने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेग्नेंट महिला को कैसे सोना चाहिए उससे जुड़े टिप्स, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि इन बातों का ध्यान रखने से आपको अच्छी व् गहरी नींद लेने में मदद मिलती है और जितना महिला प्रेगनेंसी के दौरान अच्छे से नींद लेती है उतना ही महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे भी मिलते हैं।

Sleeping position for pregnant women during summer season

प्रेगनेंसी में नारियल पानी पीने और नारियल खाने के फायदे और कब से खाना शुरू करें?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को नारियल पानी और नारियल दोनों का ही सेवन करना चाहिए क्योंकि इनमे विटामिन सी, फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम, सोडियम, जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की सिमित मात्रा में ही नारियल पानी या नारियल का सेवन करना चाहिए जिससे माँ और बच्चे को केवल इनके फायदे मिलें और किसी तरह का नुकसान नहीं हो। तो आइये अब आगे जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को कब नारियल पानी या नारियल का सेवन करना चाहिए साथ ही इनसे कौन से बेहतरीन फायदे गर्भवती महिला और शिशु को मिलते हैं।

गर्भवती महिला को नारियल पानी या नारियल का सेवन कब करना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान महिला को नारियल पानी पीने या नारियल खाने के लिए महिला को किसी खास समय का इंतज़ार नहीं करना पड़ता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान शुरू से लेकर आखिर तक महिला जब चाहे नारियल पानी और नारियल का सेवन कर सकती है। लेकिन यदि किसी महिला को नारियल पानी का सेवन करने से या नारियल खाने से किसी भी तरह की दिक्कत होती है तो महिला को नारियल पानी का सेवन नहीं करना चाहिए और नारियल भी नहीं खाना चाहिए।

प्रेगनेंसी में नारियल खाने और नारियल पानी पीने के फायदे

गर्भवती महिला यदि नारियल पानी पीती है या नारियल का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला को बहुत से सेहत सम्बन्धी फायदे मिलते हैं। जिससे गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होता है तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में नारियल पानी पीने और नारियल खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

इम्युनिटी मजबूत होती है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है जिस कारण महिला को संक्रमण व् बिमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में महिला यदि नारियल पानी पीती है या नारियल का सेवन करती है तो इससे महिला की प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम को मजबूती मिलती है। क्योंकि नारियल पानी व् नारियल में एंटी फंगल, एंटी बैक्टेरियल गुण मौजूद होते हैं साथ ही इनमे विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में मौजूद होता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे को संक्रमण व् बिमारियों के खतरे से बचाने में मदद मिलती है।

कैल्शियम

नारियल पानी और नारियल में कैल्शियम मौजूद होता है और गर्भावस्था के दौरान कैल्शियम माँ और बच्चे दोनों के लिए एक जरुरी पोषक तत्व होता है। जो माँ की हड्डियों को पोषण देने के साथ गर्भ में शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद करता है। ऐसे में महिला को इस बेहतरीन फायदे के लिए नारियल पानी या नारियल का सेवन जरूर करना चाहिए। इसके अलावा कैल्शियम दांतों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

फाइबर

प्रेगनेंसी के समय महिला की पाचन क्रिया थोड़ी धीमी पड़ जाती है जिसके कारण महिला को खाना हज़म करने में दिक्कत होती है साथ ही पेट सम्बंधित परेशानियों का सामना भी महिला को करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को फाइबर युक्त डाइट लेने की सलाह दी जाती है जिससे महिला की पाचन क्रिया को मजबूत रहने में मदद मिल सके। ऐसे में नारियल पानी और नारियल का सेवन कर सकती है जिससे महिला को फाइबर मिलता है और महिला को प्रेगनेंसी के दौरान पेट सम्बंधित परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

मूड रहता है बेहतर

गर्भावस्था के दौरान महिला को मूड स्विंग्स यानी की कभी गुस्सा आना, चिड़चिड़ाहट, स्ट्रेस होना जैसी समस्या हो सकती है। लेकिन नारियल पानी पीने और नारियल खाने से महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

डी हाइड्रेशन से मिलता है निजात

गर्भावस्था के दौरान महिला को शरीर में पोषक तत्वों के साथ तरल पदार्थों की मात्रा पूरी रखने की सलाह भी दी जाती है। ऐसे में नारियल पानी पीने और नारियल खाने से महिला के शरीर में पानी की मात्रा को सही रखने में मदद मिलती है जिससे शरीर में पानी की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर रहता है कण्ट्रोल

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं को ब्लड प्रैशर से जुडी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है और यह समस्या माँ और बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा असर डाल सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचे रहने के लिए नारियल पानी जरूर पीना चाहिए। क्योंकि नारियल पानी पीने से ब्लड प्रैशर को सामान्य रहने में मदद मिलती है।

सोडियम

नारियल खाने से प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में सोडियम की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है जो माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।

यूरिन इन्फेक्शन की समस्या से बचाव होता है

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को यूरिन इन्फेक्शन जैसी समस्या होने का खतरा भी रहता है लेकिन नारियल पानी का सेवन करने से महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

शिशु की रंगत निखरती है

ऐसा माना जाता है की प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला कच्चा नारियल खाती है तो इससे महिला की होने वाली संतान का रंग गोरा होता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में नारियल पानी पीने और नारियल खाने के फायदे, ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान नारियल पानी जरूर पीना चाहिए और नारियल खाना चाहिए।

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ब्रेस्टफीडिंग करवाने से पहले यह जरूर करें?

बच्चे के जन्म के बाद कम से कम छह महीने तक माँ का दूध ही बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार होता है। क्योंकि माँ के दूध में वो सभी जरुरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो बच्चे के विकास के लिए जरुरी होते हैं। साथ ही माँ का दूध पीने से बच्चे का विकास दुगुनी तेजी से होता है और बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है जिससे बच्चे को बिमारियों का खतरा कम होता है। ऐसे में हर महिला को अपने बच्चे को दूध जरूर पिलाना चाहिए। और दूध पिलाने से पहले महिला को कुछ काम करने चाहिए जिससे बच्चा भी आराम से दूध पी सके और महिला को भी कोई दिक्कत नहीं हो। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको यह बताने जा रहे हैं की ब्रेस्टफीडिंग करवाने से पहले महिला को क्या -क्या करना चाहिए।

कुछ तरल पीएं

बच्चे को दूध पिलाने से पहले महिला को कुछ तरल जरूर पीना चाहिए जैसे की पानी, जूस, दूध, आदि। ऐसा करने से दूध को अच्छे से उतरने में मदद मिलती है। जिससे बच्चे को पर्याप्त दूध मिलता है।

आरामदायक पोजीशन में बैठे

बच्चे को दूध पिलाते समय बच्चा आराम से दूध पीये और महिला को कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को पहले से ही आरामदायक पोजीशन में बैठना चाहिए। और इसके लिए महिला पीठ पर तकिये का सहारा लेकर बैठे साथ ही गोदी में भी एक तकिया रखें जिस पर लिटाकर बच्चे को दूध पिलायें।

शोर वाली जगह पर न बैठे

बच्चे को स्तनपान करवाने के लिए ऐसी जगह पर बैठें जहां पर शोर नहीं हो और बच्चा आराम से पेट भरकर दूध पी सके। क्योंकि यदि आप ऐसी जगह पर बैठेंगी जहां पर शोर होगा तो वहां बच्चा अच्छे से दूध नहीं पी पायेगा।

कौन सी ब्रेस्ट से दूध पिलाना है यह ध्यान रखें

बच्चे को दोनों ब्रेस्ट से फीड करवाना चाहिए ऐसे में ध्यान रखें की जिस ब्रेस्ट से आपने पहले फीड करवाया था उससे नहीं बल्कि अब दूसरे ब्रेस्ट से बच्चे को दूध पिलाने की शुरुआत करें। ऐसा करने से महिला को ब्रेस्ट पेन जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलेगी।

दूध पिलाने से पहले इन बातों का ध्यान रखें

जैसे ही आप बच्चे को दूध पिलाने के लिए गोद में लेते हैं तो ध्यान रखें की ब्रेस्ट का दबाव बच्चे की नाक पर नहीं पड़े जिससे उसे सांस लेने में दिक्कत हो, ब्रेस्ट को दबाकर थोड़ा दूध निकाल लें, निप्पल बच्चे के मुँह में हो जिससे बच्चा आसानी से दूध पी सके, बच्चे का सिर थोड़ा ऊपर करके रखें, जिससे बच्चे को दूध पीने में परेशानी नहीं हो, आदि।

तो यह हैं कुछ काम जो ब्रेस्टफीड करवाने से पहले महिला को करने चाहिए ताकि बच्चा आराम से दूध पी सके साथ ही बच्चे का विकास बेहतर तरीके से होने में मदद मिल सके।

Do this before breast feeding