Home Blog Page 135

बालों से डैंड्रफ खत्म करने के उपाय

बालों से डैंड्रफ खत्म करने के उपाय, बालों से रुसी खत्म करने के टिप्स, बालों से डैंड्रफ कैसे हटाएँ, डैंड्रफ से चाहते हैं छुटकारा तो अपनाएँ यह उपाय, Remedies for Dandruff, How to get rid from dandruff 

बालों में डैंड्रफ का होना एक आम समस्या है, और यह केवल महिला को ही नहीं बल्कि पुरुषो को भी हो सकती है। यह सफ़ेद रंग की पतली पपड़ी की तरह होती है जो स्कैल्प पर जमने लगती है। और इसके कारण खुजली होना या बालों में से सफ़ेद सफ़ेद पार्टिकल का गिरना आम बात होती है, इसकी वजह से बालों के झड़ने जैसी परेशानी और कई बार बालों में से दुर्गन्ध आने जैसी परेशानी का सामना भी आपको करना पड़ सकता है। इसके लिए मार्किट में बहुत से शैम्पू भी हैं लेकिन उनके ज्यादा इस्तेमाल से बालों के रफ होने का खतरा रहता है, तो लीजिए आज हम आपको इस परेशानी से बचने के कुछ आसान टिप्स बताने जा रहे हैं जिनका इस्तेमाल करने से आपको इससे राहत पाने में मदद मिलेगी।

बालों में रुसी होने के कारण

  • ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल बालों के लिए करने से आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • सिर को अच्छे से न धोने के कारण।
  • यदि बहुत लम्बे समय तक आप बालों के लिए तेल आदि का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो भी आपको यह समस्या हो सकती है।
  • हेयर वैक्स या तरह तरह के जैल का इस्तेमाल करने की वजह से भी आपको यह परेशानी हो सकती है।
  • बॉडी में हार्मोनल बदलाव या मेंटल स्ट्रेस के कारण भी ऐसा होता है।
  • ड्राई स्किन भी इसका कारण होता है।
  • यदि आपकी स्किन से जुडी कोई समस्या है तो भी ऐसा हो सकता है। तो आइये अब जानते हैं की आप इस समस्या से बचने के लिए क्या क्या कर सकते हैं।

दही

बालों के लिए दही का इस्तेमाल करने से आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सकती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप एक कटोरा दही लेकर बालों के स्कैल्प से लेकर अपने पूरे बालों में अच्छे से लगाएं, और एक घंटे या थोड़ा ज्यादा समय के लिए बालों में उसे रहने दें। उसके बाद सिर धो लें, हफ्ते में दो बार इसका इस्तेमाल करने से आपको इसका असर जरूर दिखाई देगा साथ ही बाल सिल्की और शाइनी भी होंगे।

अंडा

प्रोटीन की कमी होने के कारण भी बालों में रुसी की समस्या हो सकती है, ऐसे में सिर धोने से एक घंटे पहले अंडे को फोड़ कर उसके सफ़ेद भाग को स्कैल्प पर लगाएं। इससे भी आपको फायदा होगा साफ़ ही बाल भी मजबूत बनेंगे क्योंकि अंडे में प्रोटीन भरपूर होता है।

एलोवेरा

फंगल इन्फेक्शन होने के कारण भी बालों में रुसी की समस्या होती है ऐसे में एलोवेरा जैल सिर से फंगल व् गंदगी के जमाव को हटाने में मदद करता है, जिससे आपको रुसी की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप ताजा एलोवेरा लेकर उसकी पत्ते को काटकर जैल निकाल लें, उसके बाद उसे पीसकर अच्छे से अपने बालों में लगाएं। और दो घण्टे बाद बालों को धो लें।

मुल्तानी मिट्टी

थोड़ी सी मुल्तानी मिट्टी को पानी में भिगोकर रख दें, उसके बाद उसे अच्छे से पेस्ट बनाकर बालों में लगाएं। सूखने के बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके अपने बालों को धो लें। ऐसा करने से रुसी से निजात पाने के साथ बालों को सिल्की बनाने में भी फायदा मिलता है।

निम्बू का रस

एक निम्बू का रस निकाल कर उसे थोड़े से सरसों या फिर नारियल के तेल में अच्छे से मिक्स करें, और उसके बाद पूरे स्कैल्प पर इसे अच्छे से लगाएं। और दो या तीन घंटे बाद सिर धो लें, हफ्ते में दो या तीन बार इस उपाय को जरूर करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।

तुलसी और नीम

एक बड़े बर्तन में तुलसी और नीम के पत्तों को पानी में डालकर पानी के आधा रहने तक उबाल लें, उसके बाद पानी के गुनगुने रहने पर बालों को धोएं ऐसा हफ्ते में तीन या चार बार करें आपको बहुत फायदा होगा क्योंकि तुलसी और नीम में मौजूद एंटी बैक्टेरियल गुण आपकी इस परेशानी से निजात दिलाने में आपकी मदद करेंगे।

टी ट्री ऑयल

एंटीबैक्टेरियल गुणों से भरपूर टी ट्री ऑयल की आठ दस बुँदे अपने शैम्पू में मिक्स करके अपने बालों को धोएं ऐसा करने से आपको फायदा मिलता है, और धीरे धीरे इस परेशानी से निजात मिलने लगता है।

मसाज

बालों में रुसी की समस्या न हो, और हमेशा बालो मजबूत और चमकदार बने रहें इसके लिए आपको एक बात का खास ध्यान रखना चाहिए की आप बालों को धोने से एक रत पहले अपने बालों में तेल की मसाज जरूर करें इससे बालों को पोषण मिलता है जिससे आपको रुसी जैसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है।

आंवला पाउडर

बालों से जुडी हर परेशानी से निजात पाने के लिए आंवला पाउडर एक बेहतर उपाय होता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप दो चम्मच आंवला पाउडर को एक मुट्ठी तुलसी के पत्तों के साथ पीसकर पेस्ट बना लीजिए। अब इस पेस्ट को बालों की जड़ में लगाकर एक घंटे के लिए छोड़ दें, और उसके बाद शैम्पू से सिर को धो लें। इससे आपको फायदा मिलेगा।

लहसुन

लहसुन की आठ दस कलियों को पीस कर एक महीन पेस्ट बनाकर स्कैल्प पर लगाकर एक घंटे के लिए छोड़ दें, उसके बाद शैम्पू का इस्तेमाल करके बालों को धो लें, ऐसा करने से भी आपको डैंड्रफ की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

मेथी दाना

तीन से चार चम्मच मेथी दाना रात को पानी में भिगो दें, सुबह उठकर एक कटोरी दही में डालकर इसे पीसकर मिक्स कर लें, उसके बाद इसे बालों की जड़ में अच्छे से लगाएं और एक घंटे के लिए छोड़ दें। उसके बाद बालों को धो लें, हफ्ते में दो से तीन बार इस उपाय को करने से आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास नुस्खे जिनका इस्तेमाल करने से आपको डैंड्रफ जैसी परेशानी से निजात मिल सकता है। इसके अलावा आपको अपने सर की साफ सफाई का खास ध्यान देना चाहिए जैसे ही हफ्ते में दो या तीन बार सिर जरूर धोना चाहिए। ऐसा करने से सिर में गंदगी का जमाव नहीं होता है जिसके कारण आपको इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।

आम खाने के 10 फायदे गर्भवती महिलाओं के लिए

आम खाने के 10 फायदे गर्भवती महिलाओं के लिए, प्रेगनेंसी के दौराम आम खाने के फायदे, गर्भवती महिला को आम क्यों खाना चाहिए, आम खाने के फायदे, Benefits of eating mango during pregnancy

आयरन, विटामिन सी, विटामिन ए, फाइबर, विटामिन बी 6, पोटेशियम, एंटी ऑक्सीडेंट्स, फॉलिक एसिड आदि पोषक तत्वों से भरपूर आम का सेवन प्रेग्नेंट महिला के लिए लाभदायक होता है। और यदि गर्भवती महिला को आम खाना पसंद हैं तो महिला इसका सेवन कर सकती है। क्योंकि गर्भवती महिला को फिट रहने के लिए और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों की जरुरत होती है। और आम पोषक तत्वों से भरपूर होता है, तो लीजिये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान आम का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

एनीमिया से बचाव

आयरन और विटामिन सी से भरपूर आम का सेवन करने से गर्भवती महिला को एनीमिया जैसी परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है। क्योंकि आम में मौजूद आयरन गर्भवती महिला के शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद करता है।

पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है

आम में भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होता है जो प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली पेट से सम्बंधित समस्याएं जैसे की कब्ज़, अपच, आदि से निजात दिलाने के साथ मेटाबोलिज्म को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है।

इम्यून सिस्टम मजबूत होता है

एंटी ऑक्सीडेंट्स, फोलिक एसिड, विटामिन ए, विटामिन बी 6, पोटैशियम, व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो की गर्भवती महिला के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते है, और उसे बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

ब्लड प्रैशर कण्ट्रोल होता है

कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान ब्लड प्रैशर के घटने या बढ़ने की समस्या से परेशान होना पद सकता है, ऐसे में आम का सेवन गर्भवती महिला से जुडी इस परेशानी से बचाव के लिए फायदेमंद होता है।

वजन नियंत्रित रहता है

आम एक मीठा फल है ऐसे में जिन महिलाओं की प्रेगनेंसी के दौरान मीठा खाने की इच्छा होती है वो इसका सेवन कर सकती है, क्योंकि यह पचाने में आसान होता है जिससे मोटापे जैसी समस्या से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है। साथ ही यदि आप चॉकलेट, मिठाइयों का सधिक सेवन करती है तो इससे मोटापे की समस्या के कारण आपको परेशान होना पड़ सकता है।

स्किन के लिए है फायदेमंद

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल प्रभाव के कारण कई बार गर्भवती महिला की स्किन भी प्रभावित होती है। ऐसे में प्रेगनेंसी में स्किन की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने के लिए भी आम का सेवन करने से बहुत फायदे मिलते हैं, साथ ही यह आँखों के लिए भी फायदेमंद होता है।

एमनियोटिक फ्लूड को बैलेंस करता है

पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स आम में भरपूर मात्रा में होते हैं। जो एमनियोटिक फ्लूड को बैलेंस में रखने में मदद करते हैं, साथ ही इससे गर्भवती महिला के शरीर में होने वाली क्रियाओं को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है, जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला स्वस्थ रहती है।

शिशु का होता है बेहतर विकास

विटामिन ए की मात्रा आम में बहुत अधिक होती है, जो की गर्भ में शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में मदद करती है। इससे शिशु की मसल्स, हड्डियों, इम्यून सिस्टम, तंत्रिका तंत्र, स्पाइनल कॉर्ड को मजबूत बनाने में मदद मिलती है, साथ ही शिशु के दिमाग के बेहतर विकास में भी यह मदद करता है।

समयपूर्व प्रसव का खतरा होता है कम

विटामिन सी जैसे एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर आम का सेवन करने से गर्भवती महिला को समयपूर्व प्रसव जैसी समस्या से बचने में भी मदद मिलती है।

गर्भ में शिशु को पोषण मिलता है

आम में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में मदद करते है। जिससे गर्भ में पल रहे शिशु को भी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिलते हैं। और शिशु के बेहतर विकास को होने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान आम का सेवन करने से मिलते हैं, यदि आप भी गर्भवती है, और प्रेगनेंसी के दौरान इन फायदों को उठाना चाहती है तो आम का सेवन जरूर करें, ताकि गर्भवती महिला को फिट रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिल सके। साथ ही बिना मौसम के आम और कृत्रिम तरीको से पकाएं गए आम का सेवन नहीं करना चाहिए।

Hindi Video : Mango for Pregnant Women

Garbhvati Mahila ko Aam Khane Chahiye ya Nahi?

प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में सूजन कितनी खतरनाक हो सकती है?

माँ बनने का अहसास बहुत ही खूबसूरत होता है, लेकिन इस खूबसूरत अहसास को महसूस करने के साथ प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण किसी न किसी समस्या से परेशान रह सकती है। ऐसे में यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा की माँ बनना किसी भी महिला के लिए आसान नहीं होता है। और गर्भवती महिला उल्टी, मॉर्निंग सिकनेस, बॉडी पार्ट्स में दर्द, ब्लीडिंग, वजन बढ़ना, बालों का गिरना, मूड स्विंग्स, जैसी पता नहीं कितनी परेशानियों का सामना प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है। जरुरी नहीं है की हर गर्भवती महिला को एक जैसी ही परेशानी हो क्योंकि यह महिला की बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करता है। और ऐसी ही कुछ परेशानियों में से एक होती है सूजन की समस्या जिससे बहुत सी गर्भवती महिलाएं परेशान हो सकती है।

प्रेगनेंसी में सूजन

गर्भावस्था के समय सूजन की समस्या का होना आम बात होती है और यह सूजन महिला को हाथों, पैरों, मुँह, आदि कई अंगो पर देखने को मिल सकती है। ज्यादा महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान तीसरी तिमाही में इस समस्या से ग्रस्त हो सकती है। क्योंकि वजन बढ़ने के कारण सिर से पैरों तक ब्लड फ्लो स्लो हो सकता है जिसके कारण यह समस्या हो सकती है। इसके अलावा और भी ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान सूजन के और क्या कारण हो सकते हैं।

प्रेगनेंसी में सूजन के कारण

  • जो प्रेग्नेंट महिलाएं पानी का सेवन कम मात्रा में करती है उन महिलालों को डिहाइड्रेशन की समस्या होने के कारण इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • बहुत देर तक एक ही पोजीशन में खड़े या बैठे रहने के कारण भी महिला को इस समस्या के कारण परेशान होना पड़ सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण भी महिला को इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • नमक का सेवन अधिक मात्रा में करने की वजह से भी ऐसा हो सकता है।
  • जिन गर्भवती महिलाओं के शरीर में खून की कमी होती है उन्हें भी यह परेशानी हो सकती है।

प्रेगनेंसी में सूजन होना कितना खतरनाक हो सकता है?

गर्भवती महिला को हाथों, पैरों, में हल्की सूजन का महसूस होना बहुत ही आम बात होती है। कई बार इसके कारण महिला को चलने फिरने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही महिला को हल्के फुल्के दर्द का अहसास भी हो सकता है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला को मुँह व् हाथों पर अधिक सूजन हो, पैरों में सूजन के साथ बहुत तेज दर्द हो पैरों के भार खड़े होने में भी दिक्कत हो, स्किन पर गर्माहट महसूस हो, तो प्रेग्नेंट महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह प्री-एक्लेमप्सिया का लक्षण हो सकता है जो प्रेग्नेंट महिला के साथ शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को सूजन के इन लक्षणों को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान सूजन होना कितना खतरनाक हो सकता है और सूजन के क्या क्या कारण हो सकते हैं इससे जुड़े कुछ टिप्स, ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को सूजन के साथ अन्य कोई भी असहज लक्षण महसूस हो तो उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह शिशु और महिला दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

बाहर निकले दांत को अंदर कैसे करें जाने ये उपाय

आपकी खूबसूरत मुस्कराहट को साफ़ और सही शेप में में होने वाले दांत और भी बढ़ा देते है। आपकी लाइफ में आपके दांत दो बार आते है, एक बार बचपन में छह महीने के बाद इनकी शुरुआत होती है। पहली बार आने वाले दांतों को दूध के दांत कहा जाता है जो आपके चार या पांच साल की उम्र में टूटने शुरू हो जाते है। उसके बाद जो दांत आते है व्ही आपके साथ बुढ़ापे में टूटने तक रहते है। लेकिन कई बार इन दांतों की शेप सही नहीं होती है और यह बाहर की तरफ उभरने लगते है, जो की दिखने में बहुत भद्दे लगते है।

साथ ही कही न कहीं इसके कारण आपकी पर्सनैल्टी पर भी बुरा असर पड़ता है, और इसके कारण कई बार आपको दूसरों के सामने हंसी का पात्र भी बनना पड़ता है। लेकिन यह कोई ऐसी समस्या नहीं है की जिसका कोई समाधान न हो, बल्कि इस समस्या का सबसे आसान उपाय होता है की आप दांतों में तारा लगवाएं जिससे थोड़े समय में आपको इस परेशानी से निजात मिलता है और आपके दांत सही शेप में आने लगते है। तो आइये आज हम आपको अपने दाँतो को सीधा करने के लिए कुछ टिप्स बताते है।

दांतों को सीधा करने के टिप्स:-

तार लगवाकर:-

तार लगवाना दांतो को अंदर करने का सबसे आसान और असरदार उपाय होता है, इसे बच्चा बूढ़ा, जवान सभी लगवा सकते है। यह सभी उम्र के लोगो पर असरदार होता है। यह तार दो तरह का होता है टेम्पररी और परमानेंट। इस तरीके में दांतों के ऊपर एक तार को अच्छे से एडजस्ट कर दिया जाता है। जिसके कारण दांतो पर दबाव पड़ता है, और धीरे धीरे दांत सीधे होने लगते है। यदि छोटी उम्र में ही आपको ऐसा लगे की आपके बच्चे के दांत बहार है तो आपको तुरंत यह उपाय कर लेना चाहिए। क्योंकि उस समय बच्चे का जबड़ा नाजुक होता है जिससे आपको जल्दी इस समस्या से निजात मिल जाता है।

जीभ से दांतो पर दबाव:-

यदि आपके दांत ज्यादा बाहर नहीं है तो यदि आप नियमित थोड़ी देर अपनी जीभ से दांतो पर बाहर से अंदर की और दबाव डालें। यह दांतो को सीधा करने के लिए एक व्यायाम की तरह काम करता है। जिससे आपके दांतो को सीधा होने में मदद मिलती है। साथ ही इसमें आपको किसी तरह का कोई भी खर्चा नहीं करना पड़ता है।

प्लास्टिक कवर का इस्तेमाल करें:-

जिन लोगो को ऐसा लगता है की दांतों में तार लगवाने के कारण उन्हें अच्छा नहीं लगता है। उनके लिए यह उपाय बहुत ही असरदार होता है। इसमें आपके दांतों की शेप और उनके साइज के हिसाब से दांतों का प्लास्टिक कवर बना दिया जाता है। जिनसे आप अपने दांतों को अच्छे से कवर कर सकते है, इस तरीके का इस्तेमाल करने से भी आपके दांतो पर दबाव पड़ता है। जिसके कारण आपके दांत अंदर होने लगते है।

ऊँगली से दबाव डालें:-

नियमित सुबह सोकर उठने के बाद जिस तरह आप व्यायाम करते है। उसी तरह आप यह आदत बना लें की आप अपने दांतों पर ऊँगली से दबाव डालेंगे। अपने हल्के हाथो से इसे नियमित पांच से दस मिनट तक प्रेस करें। इससे भी आपके बाहर निकले दांतो को अंदर करने में मदद मिलती है।

तो यदि आपको भी दांतो से जुडी ऐसी कोई परेशानी है या आपके बच्चे या घर में किसी को दांतो से जुडी समस्या है। तो आप भी इस समस्या से निजात पाने के लिए ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल कर सकते है। इसके अलावा आप चाहे तो किसी डेंटिस्ट से भी इस बारे में राय ले सकते है, यदि आपको ऐसा लगता है की आपके शिशु के दांत बाहर आ रहे है तो शुरुआत में ही आप यदि ट्रीटमेंट कर लेते है तो यह समस्या ज्यादा नहीं बढ़ती है।

7 टिप्स जिससे शिशु का जन्म नोर्मल डिलीवरी से होगा और कम दर्द से होगा

प्रेगनेंसी के नौ महीने जैसे तैसे महिला धीरे धीरे निकाल लेती है लेकिन जैसे ही डिलीवरी का समय पास आने वाला होता है वैसे ही महिला के मन में घबराहट होने लगती है। और इसका कारण मन में चल रहे तरह तरह के सवाल होते हैं जैसे की डिलीवरी नोर्मल होगी या सिजेरियन, बच्चे को तो कोई दिक्कत नहीं होगी, नोर्मल डिलीवरी हुई तो दर्द कितना होगा, डिलीवरी के दौरान कोई परेशानी तो नहीं होगी, आदि।

और अधिकतर गर्भवती महिलाएं यही चाहती है की वो नेचुरल तरीके से बच्चे को जन्म दें, और डिलीवरी के दौरान उन्हें अधिक दर्द का सामना भी नहीं करना पड़े। क्या आप भी प्रेग्नेंट हैं? और आपकी डिलीवरी का समय भी पास आ गया है और आप भी यही चाहती हैं? यदि हाँ, तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे 7 टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे महिला के सामान्य प्रसव के चांस बढ़ाने और प्रसव पीड़ा को कम करने में मदद मिल सकती है।

सही डॉक्टर का चुनाव

प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही महिला को अपने लिए एक ऐसे डॉक्टर का चुनाव करना चाहिए जो महिला के स्वास्थ्य की सही जानकारी महिला को दे। और महिला को भी प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही अपना टीकाकरण, अपनी जांच सभी समय से करवानी चाहिए। साथ ही महिला को प्रेगनेंसी के पूरे समय किसी भी तरह की परेशानी हो तो उसका साथ ही साथ इलाज करवाना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला जितना स्वस्थ रहती है, बच्चा जितना स्वस्थ रहता है उतना ही डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिलती है।

डिलीवरी से जुडी जानकारी को इक्कठा करें

यदि हमे किसी भी चीज के बारे में थोड़ी भी जानकारी होती है तो हमे उसे समझने में आसानी हो जाती है। वैसे ही यदि प्रेग्नेंट महिला बच्चे के जन्म से पहले प्रसव से जुडी जानकारी को इक्कठा कर लेती है। जैसे की नोर्मल डिलीवरी के लिए क्या खाना पीना चाहिए, प्रसव का समय होने पर शरीर में कैसे लक्षण महसूस होंगे, किस तरह डिलीवरी पेन को कम करने में मदद मिलती है, सामान्य प्रसव के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है, आदि। तो इससे महिला के नेचुरल डिलीवरी होने के चांस बढ़ाने के साथ डिलीवरी पेन को भी कम करने में मदद मिलती है।

शरीर में खून की कमी न होने दें

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में खून की कमी का होना नोर्मल डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों को बढ़ाने के साथ नोर्मल डिलीवरी होने के चांस को भी कम करता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को पूरी प्रेगनेंसी के दौरान आयरन से भरपूर आहार जैसे सेब, अनार, गाजर, चुकंदर, पालक, संतरा, आदि का सेवन करना चाहिए। ताकि महिला के शरीर में खून की कमी न हो जिससे महिला के सामान्य प्रसव के चांस बढ़ाने के साथ खून की कमी के कारण प्रसव के समय आने वाली परेशानियों को भी दूर करने में मदद मिल सके।

सुनी सुनाई के कारण न हो परेशान

डिलीवरी का समय पास आने पर यदि कोई आपसे अपने नेगेटिव एक्सपीरियंस को शेयर करता है तो आपको उन बातों को लेकर परेशान नहीं होना है। क्योंकि हर महिला का एक्सपीरियंस अलग होता है वैसे ही आपका भी अलग एक्सपीरियंस होगा। यदि आप डिलीवरी का समय पास आने पर नकारात्मक बातों से दूर रहती है और पॉजिटिव रहती है तो इससे भी आपकी डिलीवरी नोर्मल होने के चांस बढ़ते हैं।

शरीर के निचले हिस्से की मालिश

नौवें महीने की शुरुआत से ही पेट के निचले हिस्से की मालिश करें। ध्यान रखें की ज्यादा तेजी न करें, मालिश करने से पेल्विक एरिया की मांसपशियों को आराम मिलता है साथ ही इससे प्रसव को आसान बनाने और प्रसव पीड़ा को कम करने में भी मदद मिलती है।

वजन

नोर्मल डिलीवरी के लिए बहुत जरुरी है की महिला का वजन नियंत्रित हो। क्योंकि यदि महिला का वजन ज्यादा होता है या कम होता है। तो दोनों ही केस में नोर्मल डिलीवरी के चांस कम होते हैं और डिलीवरी में कॉम्प्लीकेशन्स ज्यादा होती है। ऐसे में नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ाने और दर्द को कम करने के लिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपने वजन को सही रखना चाहिए।

व्यायाम

थोड़ा बहुत व्यायाम भी गर्भावस्था के दौरान जरुरी होता है क्योंकि ऐसा करने से शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से होता है, मांसपेशियों को आराम मिलता है, महिला एक्टिव रहती है, तनाव दूर होता है, पाचन तंत्र दुरुस्त रहता हैं, प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है, आदि। जिससे प्रेग्नेंट महिला स्वस्थ रहती है और जितना प्रेग्नेंट महिला स्वस्थ रहती है उतना ही सामान्य प्रसव होने के चांस बढ़ते हैं और प्रसव के दौरान होने वाले दर्द को कम करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं वो टिप्स जिनसे महिला के नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ाने और प्रसव पीड़ा को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखती है, टेंशन नहीं लेती है, खुश रहती है, गर्भ में शिशु को कोई दिक्कत नहीं होती है तो उन महिलाओं का प्रसव सामान्य रूप से होने के चांस बढ़ भी जाते हैं। तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी इन बातों का ध्यान रखें ताकि आपकी डिलीवरी को भी आसान बनाने में मदद मिल सके।

7 Tips for giving birth to a baby with normal delivery and with less pain

खारे पानी से बाल और त्वचा खराब होने से ऐसे बचाएं !

Khare Pani ke Nuksan : नया शहर, नयी जगह, नया माहौल सभी में लोगों को एडजस्ट करने में समय लगता है। इसी प्रकार हमारे शरीर को भी परिवर्तन में एडजस्ट करने में समय लगता है लेकिन जब वो परिवर्तन ही समस्या का कारण बन जाए तो परेशानियां आने लगती है। खारे पानी से होने वाले नुकसान भी कुछ उन्ही परेशानियों में से एक है।

नई जगह जाने और वहां रहकर खुद को संतुलित करने में कुछ वक्त लगता है। और थोड़े समय बाद आप में पहले से ज्यादा परिवर्तन होने लगते हैं। जो आपके शरीर, बाल और स्वास्थ्य से पता चलता है। बहुत से लोगों के बाल मोटे हो जाते है तो किसी के बहुत पतले। किसी की त्वचा अजीब सी दिखने लगती है। जिसका कारण नल का खारा पानी होता है।

जी हां, अगर आप खारे पानी वाले क्षेत्र में रहते हैं तो आपके बाल और त्वचा खराब हो सकती है। क्योंकि खारा पानी बहुत हार्ड होता है और स्किन बहुत सॉफ्ट। ऐसे में खारा पानी स्किन और बालों को पूरी तरह खराब कर देता है। जिसे महंगे से महंगे शैम्पू और कंडीशनर भी ठीक नहीं कर सकते।

खारा पानी क्या होता है (Khara pani kya hota hai)?

साधारण पानी जिसमे खनिज सामग्री यानी मिनरल्स की मात्रा जैसे – मैग्नीशियम और कैल्शियम अधिक होती है उसे खारा पानी कहा जाता है। वैसे तो इसके कोई दुष्परिणाम नहीं हैं लेकिन यह त्वचा और बालों के लिए गंभीर समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।

बालों और त्वचा पर खारे पानी का क्या प्रभाव होता है?

for hair – बालों में 

खारे पानी से बार-बार बाल धोने के बाद बालों में एक परत बन जाती है जो बालों को नुकसान पहुंचाती है। इस पानी से बाल धोने पर वे रूखे, सूखे और बेजान दिखने लगते है। क्योंकि खारे पानी की परत बालों की जड़ो में नमी और पोषक तत्वों को प्रवेश नहीं करने देती परिणामस्वरूप बालों में खुश्की और डैंड्रफ हो जाता है।

for skin – त्वचा में 

खारे पानी से चेहरा धोने पर वह रखा हो जाता है। स्किन में खिचाव आने लगता है, त्वचा पर भी खुश्की होने लगती है। कई बार खारे पानी की वजह से स्किन में इर्रिटेशन और जलन भी होने लगती है। इसीलिए खारे पानी के साथ कभी भी फेस पर साबुन का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

अगर आपके एरिया (Area) का पानी भी खारा है और आप अपनी स्किन और बालों को उसके दुष्प्रभावों से बचाना चाहते है तो यहाँ कुछ उपाय है जिनकी मदद से आपकी ये समस्या दूर हो सकती है।

1. सिरके का प्रयोग करें :

सिरके में एसिड की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो बालों पर जमी खारे पानी की परत को दूर करने का काम करता है। इसके लिए सिरके और ग्लिसरीन को मॉइस्चराइज़र के साथ मिलाकर अपनी त्वचा और बालों में लगाएं। ये आपकी त्वचा और स्कैल्प के pH को संतुलित करने में मदद करेगा।

जबकि विनेगर बालों की जड़ों को मजबूत करेगा। इतना ही नहीं यह बालों को मुलायम बनाने में भी मदद करता है। ग्लिसरीन स्किन के इन्फेक्शन को दूर करने में भी मदद करती है और उसे स्मूथ बनाती है। एप्पल साइडर विनेगर इसका एक बेहतर उपाय है, लेकिन बाल्समिक विनेगर का इस्तेमाल न करें।

Vinegar – सिरके का इस्तेमाल कैसे करें?

  • चेहरे या बालों पर लगाने के लिए सिरका और पानी को १:३ में मिलाएं। शैम्पू से बाल धोने के बाद बालों में यह मिश्रण लगाएं। 10 मिनट तक रखें और उसके बाद धो लें।
  • स्किन के लिए नहान के पानी में 2 बून्द सिरका डाल लें।
  • बालों को सिरके से धोने से बालों में चमक आती है और घनापन भी आता है।
  • एक हफ्ते में एक बार इस उपाय का प्रयोग करते रहेंगे तो बाल और त्वचा को खारे पानी से ज्यादा नुकसान नहीं होगा।

2. नींबू का इस्तेमाल करें :

नींबू के रस में सिट्रिक एसिड होता हैं जो बालों से अतिरिक्त परत और डैंड्रफ को दूर करता है। इसके अलावा भी यह बालों की बहुत से समस्यायों को दूर करने में मदद करता है। नींबू का घोल बनाने के लिए 1:3 में निम्बू और पानी को अच्छे से मिला लें। शैम्पू करने के बाद इस मिश्रण को अपने बालों और स्कैल्प में लगाएं। 2 मिनट तक रखें और फिर बाल धो लें।

Lemon के फायदे –

  • इसका प्रयोग करने से आपके बालों में चमक आएगी और वे मुलायम होंगे।
  • डैंड्रफ से परेशान लोगों के लिए यह सबसे बढिया औषधि है।
  • नींबू स्किन के लिए भी बहुत लाभकारी होता है इससे स्किन में चमक आती है और यह स्किन के लिए प्राकृतिक ब्लीच का भी काम करता है और स्किन में ग्लो लाता है।

3. वाटर सॉफ्टनर (Water Softner for Hard Water) :

यह एक आधुनिक तकनीक है जिसमे मशीन के जरिए खारे पानी को निर्मल बनाया जाता है। हालाँकि यह थोड़ा महंगा तरीका है लेकिन इसकी मदद से पानी में मौजूद कैल्सियम और मैग्नेशियम को निकाल दिया जाता है जिससे पानी सॉफ्ट हो जाता है और स्किन व् बालों को नुकसान नहीं पहुंचाता।

इसके अतिरिक्त यह खारे पानी में मौजूद अन्य धातु सामग्री और ठोस अशुद्धियों को निकालने में भी मदद करता है जिससे पानी आम प्रयोग के लिए सुरक्षित हो जाता है।

4. शावर फ़िल्टर (Shower Filter for Khara Pani) :

शावर फ़िल्टर का इस्तेमाल पिछले उपाय की तुलना में अधिक सस्ता उपाय है। यह पानी से चुने की मात्रा, क्लोरीन और अन्य रसायनों को निकालकर पानी को साफ़ कर देता है। इसका इस्तेमाल आसानी से बिना अधिक पैसे खर्च किये किया जा सकता है।

तो ये थे कुछ सामान्य उपाय जिनकी मदद से आप अपने बालों और त्वचा को खारे पानी से बचा सकते हैं। बस ध्यान रहे किसी भी उपाय का इस्तेमाल दी गयी मात्रा से अधिक मत कीजिएगा अन्यथा समस्या हो सकती है।

प्रेगनेंसी में रोने से क्या होता है?

गर्भावस्था में रोना, प्रेगनेंसी में तनाव, प्रेगनेंसी में रोने से क्या होता है, गर्भावस्था में तनाव लेने से बच्चे को क्या नुकसान होता है, प्रेगनेंसी में मूड स्विंग्स, गर्भावस्था में मन दुखी होना, प्रेगनेंसी में दुखी होने के नुकसान 

गर्भावस्था के दौरान, डॉक्टर्स और घर के सभी बड़े महिला को खुश रहने की सलाह देते हैं। क्योंकि माना जाता हैं की गर्भावस्था के दौरान माँ के शरीर में बहुत से चेंजेस आते हैं जिसके कारण उनका मूड बदलता रहता है कभी अच्छा होता है तो कभी खराब, कभी वे खुश हो जाती हैं तो कभी दुखी। बहुत बार महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान, बिना कारण के रोने लगती हैं।

जबकि प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिलाओं को खुश रहने को कहा जाता है। जिससे आपकी आपके गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत अच्छी रहे। गर्भावस्था में रोना जितना आपके लिए नुकसानदेह होता है, उतना ही आपके बच्चे के लिए भी होता है!

प्रेगनेंसी में रोने से क्या होता है?प्रेगनेंसी में रोने से नुकसान

गर्भावस्था के दौरान, बच्चे का माँ के साथ केवल शारीरिक जुड़ाव ही नहीं बल्कि भावात्मक जुड़ाव भी होता है। इसलिए इस दौरान माँ जिस भी भावना या इमोशन को महसूस करती है उस समय वो इमोशन बच्चा भी महसूस करता है। और जब माँ दुखी होती है या रोती है तो उसका प्रभाव बच्चे पर भी पड़ता है।

रिसर्च में पाया गया है, जो माँ प्रेग्नेंसी के दौरान तनाव लेती है या रोती हैं उनके बच्चे अक्सर जन्म के बाद बहुत ज्यादा रोते हैं। केवल ज्यादा ही नहीं वे बच्चे अपनी उम्र के बाकी बच्चों की बहुत ज्यादा रोते हैं।

प्रेगनेंसी में कई बार मूड स्विंग्स भी होते है जिसके कारण मन अच्छा नहीं लगता लेकिन अगर आप अक्सर दुखी और तनाव में रहती हैं तो हो सकता है आपका बच्चा जन्म के बाद बहुत ज्यादा रोए।

मूड स्विंग्स होने पर क्या करें?Happy Mother and Baby

अगर आप कुछ समय से खुद को परेशान महसूस कर रही हैं और आपको रोना आ रहा है तो इसके लिए आप दूसरे तरीके अपनाकर अपना मूड ठीक कर सकती हैं। इस तरह से इमोशंस से बचने के लिए आप अपना ध्यान उन चीजों में लगाएं जिनसे आपको ख़ुशी मिलती है।

 मूड को अच्छा करने के उपाय

अगर आप घर में अकेली हैं और सोच-सोचकर आपको रोना आ रहा है तो आप किसी फैमिली फ्रेंड या रिश्तेदारों से फोन पर बात कर सकती हैं। इसके अलावा आप कहीं बाहर घूमने भी जा सकती हैं, आप घर में फिल्म भी देख सकती हैं। आप चाहे तो किताबे पढ़कर भी अपना मन अच्छा कर सकती हैं। ये सभी काम आपको पॉजिटिव ऊर्जा देने में मदद करेंगे और आपके मूड को खुशनुमा बनाएंगी।

हेल्थी बेबी के लिए मुस्कुराते रहें

मुस्कुराना और खुश रहना अच्छी सेहत का राज कहा जाता है। इसलिए डॉक्टर भी, सिर्फ प्रेगनेंसी में ही नहीं बल्कि सामान्यतः भी खुश रहने की सलाह देते हैं। हेल्थी और मुस्कुराते बच्चे के लिए आप भी प्रेगनेंसी में जितना हो सके खुश रहें और मुस्कुराते रहें। आपके होने वाले बच्चे के लिए हमारी ओर से शुभकामनाएं।

Video : प्रेगनेंसी में रोनें और उदास रहने से शिशु पर क्या असर पड़ता है

जब प्रेग्नेंट महिला हंसती है या रोती है तो गर्भ में शिशु क्या करता है?

गर्भ में शिशु के होने का अहसास केवल एक महिला को ही महसूस होता है। और यह अहसास महिला के लिए दुनिया का सबसे प्यारा अहसास होता है। लेकिन क्या आप जानती है की गर्भ में आपको शिशु के होने का अहसास तो होता है लेकिन गर्भ में शिशु ऐसी बहुत सी हरकतें करता है जो आपको दिखाई नहीं देती है। जैसे की शिशु अंगड़ाई लेता है, हिचकी लेता है, अंगूठा चूसता है, हँसता है रोता है, चौंक जाता है, आदि।

साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में शिशु क्या कर रहा है और क्या नहीं, महिला जो करती है शिशु का उस पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसे लेकर गर्भवती महिला के मन में बहुत से सवाल भी होते हैं। तो आज इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसी ही बातों के बारे में बताने जा रहे हैं। जैसे की जब महिला खुश होती है तो गर्भ में शिशु कैसा महसूस करता है और जब महिला उदास होती है या रोती है तो शिशु कैसा महसूस करता है।

जब प्रेग्नेंट महिला हंसती है या रोती है तो गर्भ में शिशु को कैसा महसूस होता है

गर्भ में रहकर शिशु के अंगो का विकास जैसे जैसे बढ़ता है वैसे वैसे शिशु की हरकतें भी बढ़ती जाती है। और गर्भावस्था के दौरान जितना अच्छे से महिला अपना ख्याल रखती है उतना ही होने वाला बच्चा भी हष्ट पुष्ट होता है। इसका मतलब यह होता है की गर्भवती महिला जो भी करती उसका असर होने वाले शिशु पर पड़ता है और अपनी माँ की गतिविधियों के माध्यम से ही गर्भ में बहुत कुछ बच्चा सीखता भी है।

वैसे ही जब महिला खुश होती है तो इसका असर गर्भ में शिशु पर भी पड़ता है और बच्चा खुश होता है। और महिला के खुश होने से गर्भ में बच्चे का विकास भी और अच्छे से होता है। वहीँ इसके विरीत जब महिला उदास होती है, तनाव लेती है, रोती है तो गर्भ में शिशु भी शांत हो जाता है शिशु का विकास अच्छे से नहीं हो पाता है। यदि आप भी प्रेगनेंसी के इस बेहतरीन अनुभव का अहसास ले रही हैं तो आपको भी हमेशा खुश रहना चाहिए ताकि आपका बच्चा भी गर्भ में खुश रह सके।

प्रेग्नेंट होना ही नहीं बल्कि प्रेगनेंसी के दौरान अपनी अच्छे से केयर करना भी महिला के लिए जरुरी होता है। क्योंकि महिला जितने अच्छे से अपनी केयर करती है उतना ही ज्यादा महिला को खुश होने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में व्रत रखने के नुकसान

भारीय संस्कृति में उपवास रखने का बहुत अधिक महत्व है, और ऐसा भी नहीं है की हर किसी व्यक्ति का उपवास रखना जरुरी है। और कोई भगवान भी आपसे आकर यह नहीं कहते हैं की आपके लिए व्रत रखना जरुरी है। व्रत रखने का असली मतलब होता है की लोग अपनी आस्था, विश्वास व् श्रद्धा भाव को भगवान के प्रति समर्पित करते हैं। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग व्यक्ति, बच्चों के लिए तो खासकर कोई बंधन नहीं है की वो व्रत रखें, क्योंकि यदि आप स्वस्थ नहीं है और व्रत रखते हैं तो ऐसा व्रत रखने का भी कोई फायदा नहीं है जिसे रखकर आप बीमार हो जाएँ। और वैसे भी यदि आप सच्चे मन से अपने भगवान को याद करते है तो वो हमेशा आपके साथ रहते हैं। लेकिन कुछ गर्भवती महिलाएं धार्मिक मान्यताओं में छूट होने के बाद भी व्रत रखती है।

क्या प्रेग्नेंट महिला व्रत रख सकती है?

यदि गर्भवती महिला स्वस्थ हैं, निर्जला उपवास नहीं है, व्रत के बावजूद महिला को अपने खान पान में किसी भी तरह से परहेज नहीं करना पड़ता, डॉक्टर द्वारा सलाह लेने के बाद यदि महिला व्रत करती है, महिला को किसी तरह की प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स नहीं है और महिला स्वस्थ हैं, तो गर्भवती महिला चाहे तो व्रत कर सकती है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान लम्बे चलने वाले व्रत रखने से, व्रत में खाने पीने में लापरवाही करने से प्रेग्नेंट महिला के साथ शिशु के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है। लेकिन यदि महिला अपनी अच्छे से देखभाल करने के बाद व्रत करती है तो महिला को परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकती है। ऐसे में पूरी तरह से व्रत रखना गर्भवती महिला के लिए सेफ है या नहीं इसे कहना थोड़ा मुश्किल है। हाँ, गर्भवती महिला चाहे तो व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से राय ले सकती है।

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में व्रत रखने के नुकसान

यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में कोई व्रत आदि रखती है, तो ऐसे केस में देखा जाता है की गर्भ में पल रहे शिशु का वजन सामान्य शिशु की तुलना में कम हो सकता है। इसीलिए गर्भवती महिला को पहली तिमाही में किसी भी तरह का व्रत रखने से पहले डॉक्टर की राय लेनी चाहिए। साथ ही इस दौरान गर्भवती महिला की बॉडी में हार्मोनल बदलाव बहुत तेजी से हो रहे होते हैं, जिसके कारण महिला की शारीरिक परेशानियां जैसे सिर दर्द, चक्कर, थकान, कमजोरी, उल्टियां, आदि की समस्या अधिक हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को जितना हो सके प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में व्रत रखने से बचना चाहिए।

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में व्रत रखने के नुकसान

दूसरी तिमाही में शारीरिक परेशानियां कम होने के कारण गर्भवती महिला व्रत रख सकती है लेकिन इस दौरान व्रत रखने पर खान पान का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि इस समय शिशु का शारीरिक विकास होना शुरू होता है ऐसे में महिला का खान पान के प्रति लापरवाही बरतना शिशु की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसीलिए डॉक्टर की सलाह लेने के बाद और अच्छे से खान पान का ध्यान रखने पर ही महिला को दूसरी तिमाही में व्रत रखने के बारे में सोचना चाहिए।

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में व्रत रखने के नुकसान

गर्भ में पल रहे शिशु का विकास प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में बहुत तेजी से होता है, साथ ही महिला का वजन बढ़ने के कारण महिला को भी परेशानी अधिक होती है। ऐसे में शिशु के विकास के लिए विटामिन, प्रोटीन, मिनरल्स सभी का शिशु को भरपूर मात्रा में मिलना बहुत जरुरी होता है। लेकिन यदि महिला उपवास रख लेती है तो ऐसे में न तो शिशु को जरुरी पोषक तत्व मिल पाते हैं और साथ ही महिला की शारीरिक परेशानी भी अधिक हो सकती है। साथ ही गर्भवती महिला की शारीरिक परेशानी बढ़ने के कारण या गर्भ में शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत होने के कारण समयपूर्व प्रसव का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में भी पूरी सावधानी और डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही व्रत रखने के बारे में सोचना चाहिए।

लम्बे व्रत रखने के नुकसान

नवरात्रि, रमजान यह कुछ ऐसे व्रत होते हैं जो लम्बे चलते हैं ऐसे में यदि महिला इन व्रत को रखती है तो महिला को स्वस्थ रहने के लिए और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए जो भी जरुरी पोषक तत्व चाहिए होते हैं वो महिला को नहीं मिल पाते हैं। जिसके कारण गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने के साथ शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। और साथ व्रत में खाया जाने वाला आहार ज्यादातर मीठा ही होता है, और गर्भवती महिला द्वारा अधिक मीठे का सेवन करना ब्लड में शुगर लेवल को बढ़ा सकता है जिसके कारण महिला को गेस्टेशनल शुगर की परेशानी होने के साथ महिला का वजन भी तेजी से बढ़ने की समस्या हो सकती है। जो गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए हानिकारक होती है।

प्रेगनेंसी में व्रत रखते समय इन बातों का ध्यान रखें

यदि गर्भवती महिला व्रत रखती है तो उसे बहुत सी बातों का व्रत रखते समय ध्यान रखना चाहिए, ताकि महिला को किसी भी तरह की समस्या न हो। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को व्रत रखते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • पानी का भरपूर सेवन करें।
  • फलों व् फलों के रस को भरपूर मात्रा में पीएं।
  • भरपूर आराम करें।
  • तनाव न लें, खुश रहें।
  • खाने में ज्यादा लम्बा गैप न रखें।
  • नमक व् चीनी की मात्रा जरुरत के अनुसार लें।
  • अधिक मात्रा में चाय पीने से बचना चाहिए।
  • व्रत रखने पर भारी भोजन करने से बचें क्योंकि इसके कारण पेट सम्बन्धी समस्या होने का खतरा रहता है।
  • व्रत रखने पर किसी भी तरह की परेशानी अधिक होने लगे तो व्रत को तोड़ दें।
  • व्रत रखने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्भवती महिला को व्रत रखने के कारण हो सकते हैं ऐसे में गर्भवती महिला को व्रत या तो नहीं रखना चाहिए। लेकिन यदि महिला व्रत रखती है तो उसे अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

बालों की मेहंदी में क्या मिलाएं और बालों में मेहंदी कैसे लगाएं?

महिलाएं हो या पुरुष, बालों को सभी की खुबसूरती का अभिन्न हिस्सा माना जाता है इसलिए तो सभी इनकी खास देखभाल करते है। लेकिन बढती उम्र के साथ साथ इनमें सफ़ेद बालों की समस्या आने लगती है, जो देखने में बहुत खराब लगती है। पुरुष तो फिर भी इन सफ़ेद बालों के साथ एडजस्ट कर लेते है लेकिन महिलाएं उनके लिए ये सफ़ेद बाल किसी परेशानी से कम नहीं होते। पहले के समय में यह केवल बढती उम्र के साथ ही हुआ करती थी लेकिन आजकल छोटे छोटे बच्चों में भी सफ़ेद बालों की समस्या देखने को मिलती है। जिसका कारण है बदलता पर्यावरण।

यूँ तो सफ़ेद बालों को छिपाने के लिए बहुत से ओपशंस मार्केट में मौजूद है लेकिन उनका इस्तेमाल करना आपकी सेहत और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। क्योंकि सभी तरह के हेयर कलर्स में केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है जो सीधे तौर पर त्वचा और आँखों को नुकसान पहुंचाते है। ऐसे में इनका इस्तेमाल करना ठीक नहीं। लेकिन इसके अलावा भी एक उपाय है जिसकी मदद से आप अपने सफ़ेद बालों को छुपाने के साथ साथ उन्हें एक नयी चमक और मजबूती भी प्रदान कर सकते है, और वो है मेहंदी।hair

जी हाँ, सफ़ेद बालों को छिपाने के साथ-साथ यह बालों को मजबूती, चमक और रूखेपन से छुटकारा भी दिलाती है। इसके अलावा डैंड्रफ की समस्या में भी इसका इस्तेमाल करने से फायदा मिलता है। यहाँ हम आपको मेहंदी लगाने का सही तरीका बताने जा रहे है। इसके अलावा मेहंदी में क्या मिलाकर लगाने से फायदा होगा ये भी हम आपको बता रहे है।

मेहंदी में क्या मिलाकर लगाने से बालों को होगा फायदा :-

हालांकि मेहंदी बालों के लिए एक अच्छा उत्पाद है लेकिन केवल मेहंदी का प्रयोग करने से बालों को नुकसान पहुंच सकता है। क्योंकि मेहंदी में कई ऐसे तत्व पाए जाते है जो बालों को रुखा बना देते है जिससे वो और अधिक टूटने लगते है। इसलिए कभी भी केवल मेहंदी का इस्तेमाल बालों में नहीं करना चाहिए। इसके लिए आप अन्य घरेलू और प्राकृतिक वस्तुओं का इस्तेमाल कर सकते है। जिन्हें मेहंदी में मिलाकर लगाने से बालों में नयी शाइन आती है। ये चीजें मेहंदी के हानिकारक प्रभाव को लाभ में परिवर्तित कर देते है। जिससे आपके बाल और अधिक घने और मजबूत हो जाते है। यहाँ हम आपको उन्हीं कुछ प्राकृतिक उत्पादों की सूचि दे रहे है जिनका प्रयोग करके बालों में मेहंदी का कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा। तो आइए जानते है उन उत्पादों के बारे में –

1. लौंग –

इसका इस्तेमाल सर्दियों के मौसम में करना लाभकारी होता है। इसे मेहंदी में मिलाकर लगाने से सर में ठंड नहीं चढ़ती और बाल भी चमकदार हो जाते है।

2. सूखा आंवला –dry hair home remedies

इसका इस्तेमाल आप कभी भी कर सकते है। यह बालों को मजबूती देने और उन्हें घना करने में मदद करता है। इसके इस्तेमाल से मेहंदी बालों को रुखा नहीं करती।

3. शलगम का रस –

इसका इस्तेमाल मेहंदी के कड़कपन को कम करने और मुलायम बनाने के लिए किया जाता है। क्योंकि मेहंदी लगाने के बाद बाल बहुत कड़े हो जाते है।

4. दालचीनी का पाउडर –

मेहंदी में इसका इस्तेमाल करने से बालों को लाभ मिलता है। और डैंड्रफ व् संक्रमण जैसी समस्याएं भी दूर होती है।

5. कॉफ़ी –

इसे आप पाउडर या लिक्विड दोनों रूप में इस्तेमाल कर सकते है। ये बालों में कलर करने और सफ़ेद बालों को छिपाने में मदद करती है। लिक्विड के रूप में प्रयोग करने के लिए थोड़े से पानी में कॉफ़ी डालकर पानी को अच्छे से उबाल लें। ठंडा होने के बाद उस पानी को मेहंदी पाउडर में डालकर मेहंदी घो लें।

6. चाय पत्ती का पानी –

इसका इस्तेमाल भी बालों को कलर देने के लिए किया जाता है। इसके लिए चाय पत्ती को पानी में उबालकर मेहंदी पाउडर में मिक्स कर लें, और रातभर ऐसे ही रहने दें। इसके इस्तेमाल से बालों में कड़ापन, रूखापन नहीं आएगा और वे पहले से अधिक मुलायम होंगे।

7. रीठा और शिकाकाई –

बालों में मेहंदी लगाने के लिए इन दोनों प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल साथ-साथ किया जाता है। ये बालों को मजबूत, घना और चमकदार बनाने में मदद करते है। इसके लिए दोनों को बराबर मात्रा में रात में पानी में भिगो दें। अगली सुबह छानकर इस पानी को मेहंदी में मिलाएं।

8. नींबू का रस –

नींबू का रस बालों से डैंड्रफ दूर करने और स्कैल्प के फंगल इन्फेक्शन को खत्म करने में मदद करता है। क्योंकि यही फंगल इन्फेक्शन बालों में डैंड्रफ का कारण होता है। इसके लिए मेहँदी का घो बनाकर उसमे थोडा सा नींबू का रस मिला लें।

9. मेथी का पेस्ट –fenugreek for hair

सामान्यतौर पर इसका इस्तेमाल बालों को शाइन देने और मजबूत बनाने के लिए किया जाता है। मेहंदी में इसे घोलकर लगाने से बाल पहले से अधिक चमकदार और घने भी होते है। प्रयोग के लिए रात में मेथी के बीज पानी में भिगो दें और अगली सुबह इन्हें पीसकर मेहंदी के घोल में मिला लें।

10. दही –

दही का इस्तेमाल बालों को मुलायम बनाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा यह बालों को चमक भी प्रदान करता है जिससे वे पहले से बेहतर होते है।

11. अंडा –

अगर आप चाहे तो मेहंदी में अंडे का इस्तेमाल भी कर सकते है। हां, ये थोड़ी स्मेल जरुर देग लेकिन इसके इस्तेमाल से आपके बाल पहले से कहीं अधिक मुलायम, चमकदार और सुन्दर दिखने लगेंगे। इसके लिए आपको अंडे के भीतर का पूरा लिक्विड मेहंदी में घोलकर लगाना होगा।

बालों में मेहंदी लगाने का सही तरीका :-

मेहंदी लगाने के लिए आपको मेहंदी, पानी, मेहंदी घोलने के लिए पात्र, हाथो को रंग से बचाने के लिए दस्ताने, पेट्रोलियम जेली या तेल, एक तौलिया, मेहंदी लगाने के लिए ब्रश, बालों को कवर करने के लिए शॉवर कैप, एक चम्मच और अपनी जरूरत के अनुसार मेहंदी के साथ घोलने के लिए अन्य चीजें आदि की आवश्यकता होगी (कॉफ़ी या चाय पत्ती का पानी, अंडा, सरसो तेल, नींबू का पानी, दही और मेथी के बीज आदि)। बालों में मेहंदी लगाने से पहले एक बात का ध्यान रखें की बालों में तेल नहीं लगा होना चाहिए। क्योंकि तेल लगे बालों में मेहंदी का रंग अच्छी तरह से नहीं आता। अगर बालों में तेल लगा हो तो पहले शैम्पू करके बालों को अच्छे से साफ़ कर लें। और उसके बाद ही मेहंदी लगाएं।

मेहंदी लगाने के लिए –
  • सबसे पहले मेहंदी पाउडर को लोहे के बर्तन में डालकर उसमे जरुरत की अनुसार घोल बन जाने तक पानी मिला लें और अच्छे से घोलें।
  • अब कुछ देर के लिए उसे ऐसे ही रखे रहने दें(अगर आप उसमे चाय पत्ती का पानी मिला रही है तो ये काम आपको एक रात पहले करना होगा।
  • मेहंदी लगाने से पहले अपने माथे और बालों के आसपास के हिस्सों पर वैसलीन या तेल लगा लें। इससे मेहंदी का रंग आपकी त्वचा पर नहीं लगेगा। अब दस्ताने पहन लें और मेहंदी को दोबारा अच्छे से चम्मच से हिलाएं।
  • मेहँदी के एक सार होने के बाद ब्रश की मदद से मेहंदी लगाना शुरू करें।
  • वैसे आप चाहे तो इसके लिए पार्लर वाली की सहायता भी ले सकती है।
  • जब सभी बालों में अच्छे से मेहंदी लग जाए तो सर पर शावर कैप पहन लें।
  • ये मेहंदी को कड़ा होने से बचाएगा जिससे बालों को साफ़ करने में आसानी होगी।
  • 3 से 4 घंटे रखने के बाद बालों को धो लें। लेकिन शैम्पू से बाल 24 घंटे बाद ही धोएं।
  • क्यूंकि मेहंदी गाढ़ा रंग देने में थोड़ा समय लेती है।
  • एक बात और आप अपनी इच्छानुसार किसी भी अन्य पदार्थ को मेहंदी में मिलाकर लगा सकती है। लेकिन बहुत सारे पदार्थों का एक साथ इस्तेमाल न करें। एक समय में केवल एक का इस्तेमाल करना बेहतर होगा। और हां किसी हानिकारक उत्पाद के प्रयोग से भी बचें। अन्यथा ये आपके बालों को नुकसान पहुंचा सकते है।