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किस तरह कम करें अपने आंखों के नीचे के डार्क सर्कल्स

Dark Circles Dur Karne Ke Upay : अच्छा, सुन्दर और आकर्षक दिखना हर महिला की चाह होती है लेकिन त्वचा की अन्य समस्यायों और बाहर के वातावरण के कारण उनकी ये चाह अधूरी ही रह जाती है। कभी मौसम में बदलाव तो कभी बढ़ता प्रदुषण त्वचा को खराब कर ही देता है खासकर फेस की त्वचा को। इसके अलावा खान पान का सही ध्यान नहीं रखने और तरह-तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से त्वचा में समस्याएं होने लगती हैं।

डार्क सर्कल्स यानी काले घेरे उन्ही समस्यायों में से एक है। जो अक्सर शरीर में पोषण की कमी और त्वचा में पिगमेंटेशन के कारण हो जाते है। इसके अलावा त्वचा की ठीक तरह से देखभाल नहीं करने के कारण भी आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स आ जाते हैं।

परंतु कुछ उपाय हैं जिनके प्रयोग से इस समस्या को ठीक किया जा सकता है यहाँ हम आपको उन्ही उपायों के बारे में बता रहे हैं। लेकिन किसी भी समस्या का उपाय जानने से पूर्व उसके कारणों को जान लेना चाहिए ताकि समस्या को बढ़ने से रोका जा सके।

डार्क सर्कल्स होने के क्या कारण होते है?

  • शरीर में पानी की कमी होना
  • खान पान में लापरवाही बरतना
  • संतुलित भोजन का सेवन नहीं करना
  • शरीर में कमजोरी या रक्त की कमी होना
  • कोई बिमारी होना
  • कंप्यूटर / लैपटॉप पर लंबे समय तक काम करना
  • नींद पूरी न होना
  • स्ट्रेस या तनाव होने के कारण
  • त्वचा के रूखी होने की वजह से
  • ब्यूटी प्रोडक्ट्स के अधिक इस्तेमाल से
  • इसके अलावा जिन लोगों की नजरें कमजोर होती है और वे किसी लेंस या चश्मे का प्रयोग नहीं करतें तो उन्हें देखने के लिए आंखों पर ज़ोर डालना पड़ता है जिसके कारण उनकी आँखों के नीचे काले घेरे आ जाते हैं। – Dark circle hatane ka upay

आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स के घरेलू उपाय :

अगर आपकी आँखों के नीचे भी किसी कारण से डार्क सर्कल्स आ गए है तो यहाँ हम आपको कुछ घरेलू उपाय दे रहें हैं जिनकी मदद से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

अरंड का तेल :

इस तेल में बहुत गुण होते है जो डार्क सर्कल्स को ठीक करने में मदद करते हैं। इसके लिए अपनी उँगलियों पर थोड़ा सा तेल लें और उसे अपनी आँखों के नीचे लगाएं। कुछ देर मसाज करें और फिर रातभर के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दें। इस उपाय का रोजाना इस्तेमाल करे और अगली सुबह पानी से मुंह धो लें। डार्क सर्कल्स और झुर्रियां दोनों ही दूर हो जाएंगी।

बादाम का तेल :

बादाम तेल का इस्तेमाल करके भी आँखों के काले घेरों को ठीक किया जा सकता है। इसके लिए थोड़ा सा बादाम का तेल उँगलियों पर लें और उसे काले घेरों पर लगाएं। लगाने के बाद मसाज करें और तेल को ऐसे ही लगा रहने दें। अगली सुबह आंखो को पानी से धो लें। सोने से पहले उस उपाय का रोजाना इस्तेमाल करें समस्या ठीक हो जाएगी। – Dark circle dur karne ke upay

खीरा :

काले घेरो को दूर करने के लिया एक खीरा लें और उसके मोटे-मोटे टुकड़े कर लें। अब उन्हें आधा घंटे के लिए फ्रिज में रख दें और उसके बाद 2 टुकड़े निकालकर उन्हें आंखो के नीचे रख दें। 10 मिनट तक रखे रखें और फिर आँखों को ठंडे पानी से धो लें। हफ्ते में 2 बार इस उपाय का इस्तेमाल करें फायदा होगा।

टमाटर :

डार्क सर्कल्स के लिए एक चम्मच टमाटर का जूस और एक चम्मच आलू का जूस लें और दोनों को अच्छे से मिला लें। एक साथ मिलाने के बाद इसे आंखों के निचले हिस्से पर रुई से लगाएं। 10 मिनट तक लगाएं रखें और उसके बाद ठंडे पानी से आंखें धो लें। दिन में 1 बार इस उपाय का इस्तेमाल अवश्य करें।

गुलाब जल :

गुलाब जल त्वचा की किसी भी समस्या के लिए बहुत लाभकारी होता है। डार्क सर्कल्स के लिए रुई को कुछ देर के लिए गुलाबजल में डाल दें। उसके बाद रुई को आंखो के नीचे लगाएं। 10 मिनट तक रखें और फिर आंखों को ठंडे पानी से धो लें। रोजाना इस उपाय का इस्तेमाल करें डार्क सर्कल्स ठीक हो जाएंगे।

शहद :

इस उपाय के लिए थोड़ा सा शहद अपनी उँगलियों पर लगाकर डार्क सर्कल्स वाले हिस्से पर लगाएं। 15 से 20 मिनट तक रखें और उसके बाद पानी से इस जगह को साफ़ कर लें। दिन में एक बार इस उपाय का इस्तेमाल जरूर करें डार्क सर्कल्स पूरी तरह ठीक हो जाएंगे।

ग्रीन टी बैग :

काले घेरे दूर करने के लिए २ ग्रीन टी बैग को पानी में डुबोएं और कुछ देर बाद फ्रिज में रख दें। कुछ समय बाद ग्रीन टी बैग को निकालकर अपनी आंखों के ऊपर रखें और 15 मिनट तक रखे रहें। उसके बाद पानी से अपना चेहरा साफ़ कर लें। तुरंत निजात पाने के लिए रोजाना इस उपाय का इस्तेमाल करें। – Dark circle khatam karne ka tarika

नारियल का तेल :

आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स होने पर नारियल के तेल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए थोड़ा सा नारियल तेल काले घेरों पर लगाएं। अब उँगलियों से डार्क सर्कल्स पर मसाज करें। मसाज करने के बाद रातभर इस तेल को लगे रहने दें। अगली सुबह पानी से चेहरा साफ़ कर लें।

सेब का सिरका :

डार्क सर्कल्स दूर करने के लिए इयर बड को 1 चम्मच सिरके में डालें और उसी से आँखों के नीचे डार्क सर्कल्स पर लगाएं। और उसके सूखने का इन्तजार करें। इस उपाय का इस्तेमाल 2 दिन में एक बाद अवश्य करें समस्या पूरी तरह ठीक हो जाएगी।

तो ये थे कुछ उपाय जिनकी मदद से आंखों के नीचे के दर्द सर्कल्स को आसानी से दूर किया जा सकता है। ये उपाय पूरी तरह सेफ और असरदार है जिनका त्वचा पर कोई दुष्परिणाम नहीं होगा। बस ध्यान रहे सेंसिटिव स्किन वाले इनका उपाय किसी विशेषज्ञ से राय लेने के बाद ही करें।

ये सब्जियां गर्भ को नुकसान पहुंचाती हैं

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गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत ही सावधान रहना पड़ता है, खासकर अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। क्योंकि कुछ ऐसी सब्जियां व् फल होते हैं जिनका सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान आपकी परेशानी बढ़ने के साथ गर्भपात होने के चांस भी बढ़ जाते हैं। क्योंकि इनके सेवन से गर्भाशय में संकुचन होने लगता है, जो की गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंचा सकती है, तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसी ही सब्जियों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके सेवन से प्रेगनेंसी के दौरान परहेज करना चाहिए।

कटहल

प्रेगनेंसी के दौरान कटहल का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसमें विटामिन सी की अधिकता होती है। जिसके कारण गर्भाशय में संकुचन हो सकता है, और इसका सेवन शुरूआती दिनों में करने से गर्भपात और गर्भावस्था के आखिरी महीनो में करने से समय पूर्व शिशु का जन्म होने जैसी समस्या हो सकती है।

कच्ची व् अंकुरित सब्जियां

किसी भी कच्ची सब्ज़ी का प्रेगनेंसी के दौरान सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण पाचन क्रिया से सम्बंधित समस्या बढ़ सकती है। साथ ही अंकुरित सब्जियां जैसे की आलू के रखे रहने पर उसमे अंकुर निकलने लगते हैं, या स्प्राउट्स आदि का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें मौजूद हानिकारक बैक्टेरिया और वायरस गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है।

कच्चा पनीर

पनीर की सब्ज़ी का सेवन आप चाहे तो प्रेगनेंसी के दौरान कर सकते हैं लेकिन कच्चे पनीर का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए। क्योंकि कच्चा पनीर भी शिशु की सेहत को नुकसान पहुँचा सकता है।

नॉन वेज

गर्भावस्था में हफ्ते में एक बार आप नॉन वेज का सेवन कर सकते हैं, क्योंकि इसमें आयरन सबसे अधिक पाया जाता है जो की गर्भवती महिला के लिए बहुत जरुरी होता है। लेकिन मरकरी युक्त मछली, कच्चा मास, बासी नॉन वेज नहीं खाना चाहिए।

करेला

करेला में मौजूद गुण बहुत फायदेमंद होते हैं, लेकिन गर्भवती महिला को करेले का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें मौजूद मेमोरचेरिन नामक तत्व पाया जाता है जो की शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है, और यहां तक की यह महिला का गर्भपात भी करवा सकता हैं, इसके अलावा इसके सेवन से शिशु के लिए दुग्ध उत्पादन में भी कमी आ सकती है। इसीलिए जितना हो सके गर्भवती महिला को इससे परहेज करना चाहिए।

बैंगन

प्रेगनेंसी के दौरान बैंगन का अधिक सेवन भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके अधिक सेवन से महिला को एसिडिटी की समस्या हो सकती है, इसके कारण यूटेरस में संकुचन हो सकता है जिसके कारण गर्भपात या समय पूर्व शिशु का जन्म भी हो सकता है।

तो यह हैं कुछ सब्जियां जिनका सेवन गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए, क्योंकि इनके सेवन से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को ही परेशानी हो सकती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान आपको मौसमी सब्जियों का सेवन करना चाहिए, और ताज़ी व् अच्छे से धोने के बाद ही उन्हें उपयोग में लाना चाहिए।

गर्भवती महिला को जब अंतिम महीने में दर्द शुरू नहीं हो तो यह करें

गर्भावस्था के नौ महीने महिला अपने गर्भ में पल रही नन्ही जान का बेसब्री से इंतज़ार करती है। और जैसे ही महिला को नौवां महीना लगता है वैसे ही महिला उसका इंतज़ार खत्म होने के करीब आ जाता है क्योंकि अब किसी भी समय शिशु जन्म ले सकता है। वैसे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान एक अनुमानित डिलीवरी डेट दी जाती है।

लेकिन ऐसा जरुरी नहीं होता है की उसी दिन बच्चा होगा, कुछ महिलाओं को डिलीवरी डेट से पहले तो कुछ महिलाएं डिलीवरी डेट के बाद बच्चे को जन्म देती है, साथ ही कई बार महिलाएं डॉक्टर द्वारा दी गई डिलीवरी डेट को भी बच्चे को जन्म दे सकती है। लेकिन कुछ केस ऐसे भी होते हैं जहां प्रेग्नेंट महिला को डिलीवरी पेन का अहसास ही नहीं होता है।

कई बार तो डिलीवरी डेट भी निकल जाती है। ऐसे में गर्भवती महिला को घबराना नहीं चाहिए, साथ ही महिला को अपने शरीर में होने वाले बदलाव को भी समझने की कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे को किसी तरह की परेशानी न हो। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी पेन न शुरू होने पर महिला क्या करें।

बच्चे की हलचल पर रखें ध्यान

सबसे पहले तो यदि गर्भ में शिशु हलचल कर रहा है और आपको कोई परेशानी नहीं हो रही है। तो आपको घबराना नहीं चाहिए क्योंकि हो सकता हैं की आपको एक दो दिन में दर्द शुरू हो जाये। लेकिन यदि गर्भ में शिशु हलचल नहीं कर रहा है तो यह घबराने की बात होती है ऐसे में आपको जल्दी से जल्दी डॉक्टर से मिलना चाहिए।

जल्दबाज़ी न करें

यदि आपको दर्द शुरू नहीं हो रहा है तो आपको किसी तरह की जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए, खासकर शारीरिक श्रम जैसे की अधिक व्यायाम करके, भारी चीजों को उठाकर, पेट के बल काम करके जैसे की पोछा लगाकर, आदि से लेबर पेन लाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इससे महिला व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

ध्यान रखें पानी की थैली तो नहीं फटी

यदि प्रेग्नेंट महिला को लेबर पेन तो नहीं होती है लेकिन गर्भ में जिस पानी की थैली में बच्चा है वो फट गई है। और प्राइवेट पार्ट से पानी निकल रहा है तो महिला को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। लेकिन महिला को बहुत ज्यादा तनाव नहीं लेना चाहिए, क्योंकि आप यदि घबरा गई तो आपकी दिक्कतें बढ़ेगी। और आपको जल्दी डॉक्टर से इसीलिए मिलना चाहिए क्योंकि यदि गर्भाशय में पानी की कमी हो जाती है तो ऐसे में बच्चे को खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में डॉक्टर आपको या तो आर्टिफिशल पेन देकर डिलीवरी करवाते हैं या सिजेरियन डिलीवरी की राय देते हैं।

डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद डॉक्टर से मिलें

यदि आपको डॉक्टर ने जो डिलीवरी के लिए डेट दी थी वो निकल गई है। तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि डिलीवरी डेट के बाद यदि गर्भ में शिशु को ज्यादा दिन हो जाते है। तो इससे भी गर्भ में शिशु की जान को खतरा हो सकता है। ऐसे में भी डॉक्टर आपको आर्टिफिशल पेन देकर या सिजेरियन डिलीवरी करवाने की सलाह दे सकते हैं।

तो यह हैं कुछ काम जो प्रेग्नेंट महिला को डिलीवरी डेट के निकल जाने के बाद करना चाहिए। ताकि माँ व् बच्चे दोनों को सुरक्षित रहने में मदद मिल सके। लेकिन ध्यान रखें की बिल्कुल भी तनाव न लें और किसी तरह की लापरवाही न करें।

गर्भावस्था में बॉडी में खुजली होने के कारण व् उपाय

गर्भावस्था में खुजली होने के कारण व् उपाय, गर्भावस्था के दौरान प्रेग्नेंट महिला के शरीर में बहुत से बदलाव होते हैं। जैसे की बॉडी में हार्मोनल बदलाव होना, धीरे धीरे वजन बढ़ना और पेट का निकलना, मूड स्विंग्स, आदि। इसके साथ महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियां जैसे की उल्टियां होना, सिर दर्द व् बॉडी के अन्य हिस्सों में दर्द महसूस होना, मॉर्निंग सिकनेस, कमजोरी व् थकान महसूस होना आदि का सामना भी कर सकती है। इसके अलावा कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान स्किन से जुडी समस्या का सामना भी कर सकती है।

जैसे की चेहरे पर दाग धब्बे होना, खुजली की समस्या होना आदि। तो लीजिये आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली खुजली की समस्या को लेकर बात करने जा रहे हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान खुजली के क्या कारण होते हैं, क्या प्रेगनेंसी में खुजली होना नोर्मल बात होती है, और इस परेशानी से गर्भवती महिला कैसे बच सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान खुजली होने के कारण

  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव का असर स्किन पर भी पड़ता है जिसके कारण महिला को थोड़ी बहुत खुजली की समस्या हो सकती है।
  • यदि आप ऐसा कुछ खा लेती है जिसे खाने से आपको एलर्जी होती है तो ऐसे में भी गर्भवती महिला को खुजली की परेशानी हो सकती है।
  • गर्भ में शिशु का विकास बढ़ने के साथ गर्भाशय का आकार भी बढ़ता है जिसके कारण पेट की स्किन में खिंचाव हो सकता है और खिंचाव होने के कारण महिला को खुजली की समस्या भी हो सकती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में ब्लड फ्लो पहले की अपेक्षा तेजी से होता है जिसके कारण भी महिला को पेट, ब्रेस्ट, जाघों आदि पर खुजली की समस्या हो सकती है।
  • यदि गर्भवती महिला को स्किन से जुड़ा कोई संक्रमण प्रेगनेंसी के दौरान हो जाता है तो ऐसे में महिला को स्किन पर खुजली के साथ रैशेस आदि की समस्या भी हो सकती है।

क्या प्रेगनेंसी के दौरान खुजली होना आम बात होती है

बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान खुजली की समस्या से परेशान हो सकती है। थोड़ी बहुत खुजली की समस्या होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। लेकिन यदि महिला को बहुत ज्यादा खुजली हो रही है साथ ही लाल दाने व् रैशेस की समस्या भी है। तो इसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए और जितना जल्दी हो सके डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि यह महिला के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।

गर्भावस्था में खुजली से बचने के टिप्स

यदि आप गर्भवती है और आप प्रेगनेंसी के दौरान खुजली की समस्या से परेशान हैं। तो अब आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है क्योंकि अब हम आपको कुछ ऐसे आसान टिप्स बताने जा रहे हैं। जो गर्भवती महिला को खुजली की समस्या से बचाने में मदद करते हैं।

नारियल तेल

  • जिस भी जगह पर आपको खुजली का अनुभव हो रहा है वहां पर नारियल का तेल लगाएं।
  • ऐसा करने से स्किन का रूखापन दूर करने में मदद मिलेगी साथ ही मिनटों में खुजली से भी आराम मिलेगा।

गर्भावस्था में खुजली से बचने के लिए इस्तेमाल करें ठंडा पानी

  • एक बर्तन में बर्फ डालकर उसमे थोड़ा पानी ड़ालें, पानी के ठंडा होने पर उसमे सूती कपडा ड़ालें।
  • अब उस कपडे को पानी में डालकर निचोड़ कर बॉडी के उस हिस्से पर रखें जहां आपको खुजली का अनुभव हो रहा है।
  • ऐसा करने से आपको तुरंत खुजली से आराम मिलेगा।

एलोवेरा जैल

  • नियमित नहाने से पहले अपनी बॉडी पर खूश्बूदार साबुन की जगह एलोवेरा जैल लगाएं।
  • और दस से पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें।
  • उसके बाद पानी से नहाएं।
  • ऐसा करने से भी प्रेग्नेंट महिला को खुजली की परेशानी से बचें रहने में मदद मिलती है।

बेकिंग सोडा

  • शरीर के जिस हिस्से पर प्रेग्नेंट महिला को खुजली महसूस होती है।
  • उस जगह पर गर्भवती महिला बेकिंग सोडा और पानी को मिलाकर बनाया हुआ पेस्ट लगाएं।
  • ऐसा करने से भी महिला को खुजली की समस्या से बचने में मदद मिलती है।

गर्भावस्था में खुजली से बचने के लिए इस्तेमाल करें मॉइस्चराइजर

  • प्रेगनेंसी के दौरान नियमित नहाने के बाद बॉडी पर मॉइस्चराइजर लगाएं।
  • मॉइस्चराइजर लगाने से स्किन की नमी को बरकरार रहने में मदद मिलती है।
  • जिससे प्रेग्नेंट महिला को खुजली की दिक्कत से बचें रहने में मदद मिलती है।

सेब का सिरका

  • बॉडी के जिसे हिस्से पर प्रेग्नेंट महिला को खुजली महसूस होती है।
  • उस हिस्से पर रुई की मदद से महिला सेब का सिरका लगाएं।
  • सेब के सिरके का इस्तेमाल करने से भी प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचें रहने में मदद मिलती है।

गर्भावस्था में खुजली से बचने के लिए सूती कपडे पहने

  • प्रेग्नेंट महिला को सूती व् आरामदायक कपडे पहनने चाहिए, साथ ही कपडे बिल्कुल साफ़ होने चाहिए।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला अपने पहनावे का अच्छे से ध्यान रखती है।
  • तो इससे भी प्रेग्नेंट महिला को खुजली की समस्या से बचें रहने में मदद मिलती है।

सूरज की रौशनी

  • प्रेग्नेंट महिला को बहुत देर तक सूरज की रौशनी में भी नहीं बैठना चाहिए।
  • क्योंकि सूरज की रौशनी के कारण स्किन बहुत बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
  • जिसके कारण महिला को खुजली की समस्या हो सकती है।
  • इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला को बहुत देर तक एसी के सामने भी नहीं बैठना चाहिए।
  • क्योंकि एसी के सामने बैठने से भी खुजली की समस्या हो सकती है।

पानी

  • गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान एक दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।
  • इससे बॉडी को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है जिसे गर्भवती महिला को खुजली जैसी परेशानी से बचें रहने में मदद मिलती है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को होने वाली खुजली की समस्या के कारण व् उपाय, यदि आप भी गर्भवती हैं और आपको भी यह समस्या है तो आप भी इन आसान टिप्स का ध्यान रखें ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको इस परेशानी से बचें रहने में मदद मिल सके।

मान सम्मान बढ़ाने के उपाय

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जिंदगी में हर कोई चाहता है की उसे मान सामान मिले, लोग उनकी तारीफ़ करें, सराहना करें, आदि। कुछ लोगो को बहुत ही आसानी से सब कुछ मिल जाता है, तो कुछ लोगो को सारी जिंदगी मेहनत करने के बाद भी ऐसा नहीं मिलता है। मान सामान पाने के लिए सबसे पहली बात की आपके पास सिर्फ पैसा होना जरुरी नहीं होता है, बल्कि आपका व्यवहार बहुत अच्छा होना चाहिए। आपको लोगो को इज्जत देनी चाहिए ताकि लोग आपका भी सम्मान करें। इसके अलावा मान सम्मान पाने के लिए आपको एक बात और ध्यान रखनी चाहिए की आप इसे किसी से मांग नहीं सकते हैं, बल्कि आपको मान सम्मान कमाना पड़ता है।

मान सम्मान पाने के उपाय

यदि आप चाहते हैं की लोग आपकी इज्जत करें, आपका साथ दें, आपकी बातों को सुने तो सबसे पहले आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। क्या आप भी ऐसा चाहते हैं? यदि हाँ तो आइये जानते हैं मान सम्मान पाने के लिए आप किन टिप्स का इस्तेमाल कर सकते है।

दूसरों को दे इज्जत

मान सम्मान पाने का सबसे आसान उपाय होता है की आप दूसरों का सम्मान करें लोग आपका सम्मान जरूर करेंगे। लेकिन आप इसे कभी किसी से मांग नहीं सकते है इसे कमाना पड़ता है जो की आपको तब मिलता है जब आपको दूसरों को भी वही इज्जत देते हैं।

करें प्यार से बात

आपका व्यवहार ही आपको लोगो के करीब करने में मदद करता है, ऐसे में मान सम्मान को बढ़ाने के लिए आपको हमेशा लोगो से जुड़ कर रहना चाहिए हमेशा उनसे प्यार से बात करनी चाहिए। आप जितना लोगो को प्यार बांटते हैं लोग आपको उतना ही प्यार देते हैं, इसीलिए आपको चाहिए की आप हमेशा लोगो के साथ प्यार से रहें।

न करें क्रोध

गुस्सा हमेशा इंसान की कमजोरी का काम करता है, जो हमेशा इंसान को गिराने लगती हैं। ऐसे में गुस्सा करना किसी सही बात के लिए जायज होता है, लेकिन हर बात पर गुस्सा करके अपने आप को यदि आप महान दिखाते हैं तो यह आपकी गलती है। क्योंकि ऐसा करने से आपके साथ कभी कोई नहीं खड़ा होता है और न ही आपका कोई मान सम्मान करता है ऐसे में यदि आप चाहते हैं की लोग आपका मान सम्मान करें तो आपको अपनी इस आदत में भी सुधार लाना चाहिए।

गलत का न दें साथ

गलत का साथ देने पर आपके साथ केवल वही लोग होते है जो खुद गलत होते हैं, और वो भी आपकी इज्जत नहीं करते हैं। साथ ही बाकी लोगो की नज़रों में भी आप गिर जाते हैं। ऐसे में आपको इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की आप कभी भी गलत का साथ न दें, हमेशा खुद भी सही करें और सही के साथ खड़े रहें ऐसा करने से आपको खुद पता चलेगा की कितने लोग आपके साथ हैं और कितने लोग आपसे अलग है।

किसी को न दिखाएं नीचा

इंसान जब किसी को नीचा दिखाने की कोशिश करता है तो वो दूसरे को नीचा नहीं दिखाता है, बल्कि दूसरों की नज़रों में खुद नीचा हो जाता है। इसीलिए यदि आप चाहते हैं लोग आपका मान सम्मान करें, आपको प्यार करें, तो आपको कभी भी किसी को नीचा दिखाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

न करें घमंड

घमंड करने वाले लोगो को बाहर तो क्या कोई घर में भी सम्मान नहीं देता है, उनके अपने रिश्तेदार ही उनसे मुँह मोड़ने लगते हैं। और घमंड हमेशा मनुष्य को नीचा करता है, ऐसे में यदि आप चाहते हैं तो आपको कभी घमंड नहीं करना चाहिए, और कभी भी बड़े और छोटे का भेदभाव भी नहीं करना चाहिए।

मदद करें

मदद करना इंसानियत की सबसे पहली निशानी है, यदि आप हमेशा लोगो की मदद के लिए आगे आते हैं तैयार रहते हैं। ऐसे में लोग आप पर विश्वास करते है और आपको सम्मान देते हैं, इसीलिए मदद करते समय ऐसा न सोचते हुए की इसमें आपका क्या फायदा होगा और दूसरों की मदद करें इससे आपको मान सम्मान बढ़ाने में मदद मिलेगी।

एक मत रहें

हमेशा एक मत रहें बार बार अपनी बातों को न बदलें, क्योंकि ऐसा करने से आप दूसरों की नज़रों में गिर जाते हैं। और यदि आप अपनी ही बात पर एकमत नहीं रह सकते हैं तो दूसरों की आपसे अपेक्षा नहीं रहती है और कोई भी आपको नहीं पूछता है। ऐसे में मान सम्मान बढ़ाने के लिए एकमत रहें औरवो भी जो सही है उस बात पर।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको मान सम्मान पाने में मदद मिलती है, और यदि आप चाहते है की लोग हमेशा आपको मान सम्मान दें तो इसके लिए जरुरी है की आप अपने व्यवहार को सबके साथ ठीक रखें।

चिंता दूर करने के तरीके

How To Reduce Stress?

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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बच्चा हो या बूढ़ा सभी किसी न किसी परेशानी से ग्रसित दिखाई पड़ते है। जहां एक तरफ छोटे बच्चों की आंखे कमजोर होने लगी है वहीं दूसरी तरफ बड़े-बूढ़े मधुमेह, थाइराइड और हाई बीपी जैसी परेशानियों को झेल रहे है। परन्तु इसके अलावा भी एक समस्या है जो वर्तमान में हर व्यक्ति के दिनचर्या का अहम हिस्सा बनती जा रही है। और वो है चिंता।

आज के समय में हर व्यक्ति अपने कार्यों में इतना व्यस्त है की उसे ठीक से खाना खाने तक की भी फुर्सत नहीं है जिसके चलते दिमाग और शरीर को आराम नहीं मिल रहा। और परिणामस्वरूप दिनों दिन लोग चिंता जैसी खतरनाक समस्या से ग्रसित होते जा रहे है। किसी को पैसे कमाने की चिंता है, तो किसी को बच्चों की शादी करने की, किसी को घर बनाने की टेंशन है तो किसी को बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाने के लिए लगने वाली फ़ीस की। और न जाने ऐसी कितनी ही समस्याएं है जिन्हे आज कल के युवा अपने दिमाग में लिए चलते रहते है।

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जबकि इस बात को सभी भली भांति जानते है की “चिंता चिता के समान होती है”। परन्तु फिर भी कोई व्यक्ति खुद को आराम देने की बात नहीं करता। सबको भागने की जल्दी लगी रहती है। चिंता लेना तो आसान है लेकिन उसे दूर करना काफी मुश्किल। कुछ लोग इससे छुटकारा पाने के लिए दवाओं का सेवन करना शुरू कर देते है जबकि कुछ लोगों से मिलना जुलना कम कर देते है। ऐसे में उनकी समस्या घटती नहीं बल्कि और बढ़ती है।चिंता दूर करने के तरीके

लेकिन कुछ तरीके है जिनकी मदद से आप अपनी इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर सकते है। इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं करना है बस अपनी कुछ आदतों को बदलना होगा और चिंता लेने की आदत को छोड़ना होगा। क्योंकि अगर आप लगातार स्ट्रेस लेते रहेंगे तो हो सकता है आपका दिमाग किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो जाए। ऐसे में इन उपायों का प्रयोग करना ही उचित उपाय है।

चिंता दूर करने के उपाय :-

1. गहरी साँस लें :

सामान्य व्यक्ति के लिए इस बात का पता लगाना काफी मुश्किल है, परन्तु स्ट्रेस की स्थिति में आपकी हार्ट बीट काफी बढ़ जाती है। व्यक्ति की साँस ऊपर नीचे होने लगती है। इसलिए जब कभी भी आपको टेंशन या चिंता हो तो अपनी श्वसन प्रक्रिया को संतुलित करके नियंत्रित करें। जिसके लिए कई बार लंबी सांस लें और छोड़ें। इससे आपकी हार्ट बीट सामान्य हो जाएगी। और आप चिंता मुक्त हो जाएंगे।

2. कुछ लिखे :

बहुत से लोगों की चिंता का कारण उनके अंदर छुपी कोई बात या गहरा राज होता है। जिसे वे औरो के साथ शेयर नहीं कर पाते या बता नहीं पाते। ऐसे में आप कागज पर कुछ लिख कर अपनी समस्या का हल निकाल सकते है। इसके लिए प्रतीक्षा न करें संभव हो तो तुरंत अप्लाई करे।

3. खुली हवा :stress management

जब लोग बहुत टेंशन में आ जाते है तो उनका दिमाग घुटन महसूस करने लगता है ऐसे में अपने दिमाग को रेस्ट देने का एकमात्र उपाय है खुली हवा। तो जब भी आपको बहुत ज्यादा टेंशन हो तो घर या ऑफिस से बाहर निकलकर कुछ देर के लिए बाहर खुली हवा में जाएँ। इससे दिमाग को शांति तो मिलेगी ही साथ-साथ सर दर्द में भी आराम मिलेगा जिससे चिंता अपने आप दूर हो जाएगी।

4. वातावरण :

कई बार अपने आस पास मौजूद नकारात्मक विचारों वाले लोगों के कारण भी व्यक्ति को अनायास ही तनाव हो जाता है। इस तरह के लोग हर समय दूसरों को नुकसान पहुँचाने के विषय में सोचते रहते है। ऐसे में अगर आप उनके साथ कुछ और समय बितयांएगे तो समस्या बढ़ सकती है। बेहतर यही होगा की आप उन लोगों का साथ छोड़ दे और अपनी जगह बदलें। इससे थोड़ा वातावरण चेंज होगा और आपके दिमाग में सकारात्मक विचारों का वास होगा।

5. चिंता बांटें :

अक्सर लोग किसी समस्या से अकेले लड़ते लड़ते थक जाते है जिसके चलते वे स्ट्रेस लेने लगते है। ऐसे में अगर आपको लगता है की कोई है जिसके साथ आप अपनी समस्या बाँट सकते है या शेयर कर सकते है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। अगर आपके सामनेवाला आपकी परेशानी को समझ सकता है तो एक बार अपनी परेशानी उससे शेयर जरूर करें। क्या पता आपका स्ट्रेस खत्म हो जाए।

6. खुद पर ध्यान दे :

चिंता होने की वजह से लोग अक्सर अपना ध्यान रखना भूल जाते है। जिसके कारण आपकी लाइफस्टाइल बिगड़ने लगती है। और समस्याएं कम होने की बजाय और अधिक बढ़ने लगती है। ऐसे में अपनी केयर करना ही बेहतर रहेगा। अच्छी तरह से खाना, सही नींद लेना, आपको अन्य समस्यायों से बचाने में मदद करेगा। अर्थात स्ट्रेस होने पर अपने प्रति केयरलेस न हो।

7. रूटीन में ब्रेक :

कई बार लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी या लाइफस्टाइल चिंता का कारण बन जाती है। ऐसे में खुद को थोड़ा ब्रेक देना आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है। साथ ही अपनी लाइफस्टाइल को भी थोड़ा चेंज कर लें। बस इस बात का ध्यान रखे की इस ब्रेक से आपके जरुरी कामों पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़े।

8. मनपसंद कार्य :

शायद आपको नहीं पता लेकिन आपकी हॉबी आपको इस समस्या से उबारने में आपकी मदद कर सकती है। किताबे पढ़ना, खेलना कूदना, गाने सुनना, साइकिलिंग करना कुछ ऐसी आदतें है तो आपको चिंता से मुक्ति दिलाने में मदद कर सकती है। अगर नहीं तो आप अपने घर वालों से बात करके भी अपने माइंड को फ्रेश कर सकते है।

तो ये थे कुछ तरीके जिनकी मदद से आप अपनी चिंता यानी स्ट्रेस को कुछ ही समय में दूर कर सकते है। बस ध्यान इस बात का रखे की इन सभी उपायों से आपकी इम्पोर्टेन्ट लाइफ या लाइफ से जुड़ा कोई जरुरी काम प्रभावित न होने पाए।

डकार कब आती है और क्या कारण होते है?

अधिक डकारे आने के क्या कारण होते है?

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अक्सर खाना खाने के बाद या बहुत अधिक भूखे पेट रहने के कारण हमारे पेट से एक आवाज निकलती है जिसे आप और हम डकार रहते है। कहने को डकार एक सामान्य प्रक्रिया है जिसके मुताबिक जब हम हवा निगल लेते है तो वह उसी रास्ते से बाहर निकलने का प्रयास करती है जिसके कारण डकार आने के दौरान पेट से आवाज आती है।

वैसे तो यह एक सामान्य प्रक्रिया है जो हर किसी के साथ होती है लेकिन अगर यह हद से ज्यादा बढ़ जाए तो इसपर गौर करना आवश्यक है। क्योंकि ज्यादा डकार आने का कारण बहुत सी बीमारियां भी होती है जिनके बारे में आप और हम सामान्य जीवन में पता नहीं लगा सकते है। इसीलिए आज हम आपको अधिक डकारे आना कौन-कौन सी बिमारियों का संकेत है इस बारे में बताने जा रहे है।

डकार क्या है?अधिक डकारे आने के क्या कारण होते है

वास्तव में डकार लेना एक प्राकृतिक क्रिया है जो की सबही व्यक्तियों के साथ होती है। ऐसा माना जाता है की हमारे द्वारा खाया गया भोजन पूरी तरह से हजम होने का डकार एक संकेत होती है।जबकि ऐसा कुछ नहीं है, खाना खाते समय या उसके बाद डकार आने का अर्थ होता है की आपने खाना खाने के दौरान काफी मात्रा में हवा निगल ली है। और जब वो हवा बाहर निकलती है तो हमें डकार आती है।

पेट की गैस को प्राकृतिक रूप से बाहर निकालने का एक तरीका है। और अगर सही समय पर पेट की हवा बाहर नहीं निकले तो पेट से संबंधित परेशानियां हो सकती है। लेकिन बार बार डकारे आना भी किसी बिमारी का संकेत हो सकते है जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे है तो आइये जानते है क्या है वे बीमारियां।

बार-बार डकार आना कौन-सी बिमारियों का संकेत है?

1. एरोफेजिया :

खाना खाते समय हम लोग अक्सर अधिक हवा पेट में निगल लेते है। जिसके बाद लगातार डकारे आने लगती है। इसी स्थिति को एरोफेजिया कहते है। कुछ खाते या पीते समय खाद्य पदार्थ के साथ साथ हवा पेट में चले जाने से अक्सर यह स्थिति पैदा हो जाती है। वैसे तो ये कोई बीमारी नहीं है लेकिन स्वास्थ्य के लिए अधिक डकारे लेना अच्छा नहीं होता। इससे बचने के लिए खाने के छोटे निवाले खाये और हमेशा मुंह बंद करके खाना खाये। साथ ही खाने को धीरे धीरे चबा कर निगले।

2. कब्ज या बदहज़मी :acidity

शोध से पता चला है की जिन लोगों को बहुत डकारें आती है, उनमे से 30% लोग कब्ज से ग्रसित होते है। अगर आपके साथ भी यही समस्या है तो अपने खाने में फाइबर युक्त चीजों को शामिल करें। साथ ही ईसबगोल का भी सेवन करें। इसके अलावा हाजमा के खराब होने की वजह से भी अधिक डकारे आने की समस्या होती है इस स्थिति में डकार के साथ पेट दर्द भी हो सकता है।

3. डिप्रेशन :

ये बात सभी भली भांति जानते है की तनाव बहुत सी बिमारियों का एक कारण होता है। तनाव होने की वजह से कुछ प्रभाव हमारे पेट पर भी पड़ता है। कई शोधों से पता चला है की 65% मामलों में mood swing या तनाव के बढ़ने की वजह से भी अधिक डकारे आने लगती है।

4. गैस्ट्रोसोफेजिअल रिफ्लक्स डिज़ीज़ :सीने के एक तरफ दर्द रहता है

यह एक तरह की बिमारी है जिसमे सीने में जलन होती है और इसके कारण ज्यादा डकारे आती है। इस बीमारी के होने पर कई बार व्यक्ति की आँतों में भी जलन होने लगती है। जिससे खाद्य नली में एसिड बनने लगता है जो सीधे तौर पर हमारे पाचन तंत्र पर प्रभाव डालता है। इससे बचने के लिए अपने खानपान में बदलाव करें और अपनी जीवनशैली को बदलें।

5. इरिटेबल बाउल सिंड्रोम या पेप्टिक अल्सर :

इस समस्या के होने पर व्यक्ति को कब्ज, पेट में दर्द, पेट में मरोड़े और दस्त आदि लगने की समस्याएं हो सकती है। और अधिक डकारे आना इस रोग का सबसे बड़ा कारण होता है। वैसे इस समस्या का कोई पक्का इलाज अभी तक मेडिकल साइंस में उपलब्ध नहीं है लेकिन अगर परहेज किये जाए तो समस्या से बचा जा सकता है। इसके अलावा पेप्टिक अल्सर होने के कारण भी अधिक डकारे आती है। जिसमे पेट की गैस और बैक्टीरिया आपके पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाते है और परिणामस्वरूप आपको डकारे आती है।

तो ये थी कुछ समस्याएं जिनके कारण अक्सर बार बार डकारे आती है। अगर आपको लगता है की इनमे से कोई भी कारण आपकी डकारों की वजह नहीं है तो हो सकता है समस्या कुछ और ही हो। ऐसे में डॉक्टरी सलाह लेना ही उचित रहेगा।

इन 7 बातों से जानिए गर्भ में पल रहे शिशु के बारे में

प्रेगनेंसी के दौरान हर पल महिला को केवल एक ही बात का ख्याल रहता है, की गर्भ में शिशु कैसा है, शिशु का विकास तो सही से हो रहा है, शिशु गर्भ में क्या कर रहा है, कब शिशु की हलचल महसूस होगी, शिशु को भरपूर पोषण मिल रहा है या नहीं, आदि। खासकर जब महिला पहली बार माँ बनती है तो महिला इन चीजों को लेकर ज्यादा परेशान रहती है। और ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि गर्भ में पल रहा शिशु अपनी माँ पर ही हर एक चीज के लिए निर्भर करता है, ऐसे में महिला को हमेशा डर रहना की क्या सही है क्या नहीं यह आम बात होती है। ऐसे में गर्भ में पल रहे शिशु की जानकारी के लिए अल्ट्रासॉउन्ड एक माध्यम होता है जिससे शिशु के विकास के बारे में जाना जा सकता है, लेकिन वह भी रोज नहीं हो सकता है उसे डॉक्टर की राय अनुसार ही आपको करवाना चाहिए। तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी में होने वाली कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जिससे गर्भ में शिशु की सेहत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

शिशु के दिल की धड़कन

प्रेगनेंसी के पांचवे हफ्ते के बाद जाँच करवाने पर ज्यादातर शिशु के दिल की धड़कन का पता चल जाता है, और यदि दिल की धड़कन सुनाई देती है तो यह शिशु के विकास की शुरुआत की निशानी होती है। लेकिन लेकिन यदि जांच करवाने के बाद गर्भ में पल रहे शिशु की धड़कन महसूस नहीं हो होती हैं तो इसका मतलब गर्भाशय में भ्रूण तनाव में हो सकता है।

पेट में ऐंठन

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियां हो सकती है, ऐसे में पेट में ऐंठन का होना भी आम बात होती है। लेकिन यदि महिला को बहुत ज्यादा ऐंठन की समस्या के साथ पेट में दर्द व रक्तस्त्राव जैसी समस्या लगे तो यह गर्भ में शिशु के लिए परेशानी का विषय हो सकता है ऐसे में इस लक्षण को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

ब्लीडिंग

प्रेगनेंसी के दौरान शुरुआत में स्पॉटिंग का होना आम बात होती है, लेकिन यदि महिला को यह समस्या प्रेगनेंसी के दौरान बार बार हो। तो इसका मतलब केवल गर्भपात ही नहीं होता है, बल्कि यह शिशु के समय से पहले यानी की समय पूर्व प्रसव का संकेत हो सकता है, साथ ही यदि गर्भनाल से जुडी कोई परेशानी हो तो भी ऐसा हो सकता है।

आई यू जी आर

इंट्रायूटेरिन ग्रोथ रेजिस्टेंट यह एक टेस्ट होता है जो की गर्भ में शिशु के विकास का पता लगाने के लिए किया जाता है। ऐसे में यदि गर्भ में शिशु के विकास को पूरी तरह से जानने के लिए यह टेस्ट भी करवाया जा सकता है इसके लिए एक बार आप डॉक्टर की राय ले सकते हैं, क्योंकि यदि गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से नहीं होता है तो शिशु को जन्म के बाद सांस से जुडी समस्या जैसे अस्थमा, ब्लड प्रैशर, वजन में कमी जैसी परेशानी हो सकती है।

प्राइवेट पार्ट से तरल पदार्थ का निकलना

प्रेगनेंसी के दौरान सफ़ेद पानी का आना आम बात होती है, लेकिन यदि प्राइवेट पार्ट से ऐसा तरल पदार्थ आये जिसमे खून के धब्बे दिखाई देने के साथ, बहुत ज्यादा गंध आए रही हो, और दर्द महसूस हो, आदि। तो यह शिशु के स्वस्थ न होने का संकेत दे सकता है ऐसे में इस लक्षण को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

पीठ में दर्द

प्रेगनेंसी के दौरान मांसपेशियों का खिंचाव होने और पेट का आकार बढ़ने के कारण पीठ में दर्द का होना आम बात होती है। ऐसे में बहुत ज्यादा पीठ में दर्द का अनुभव होने पर आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि यह किडनी या प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन के कारण भी हो सकता है, और यह समस्या अधिक होने पर शिशु पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकती है।

गर्भ में शिशु की हलचल

गर्भ में शिशु पांचवे महीने के बाद से ही हलचल करना शुरू कर देता है ऐसे में जब शिशु गर्भ में मूवमेंट करने लगता है और कभी आपको ऐसा महसूस हो की बहुत समय से गर्भ में शिशु हलचल नहीं कर रहा है तो इसके लिए जितना जल्दी हो सके एक बार डॉक्टर से राय लेना चाहिए। क्योंकि गर्भ में शिशु की हलचल का न होना बहुत ही ज्यादा परेशानी का कारण हो सकता है।

तो यह हैं कुछ बातें जिन्हे महसूस कर अंदाजा लगाया जा सकता है की गर्भ में शिशु का स्वास्थ्य ठीक है या नहीं। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान कोई भी असहज लक्षण महसूस हो तो उसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

Hindi Video : गर्भ में शिशु स्वस्थ है या अस्वस्थ जानिए इस वीडियो से

Baby’s Health During Pregnancy

गर्भवती महिलाओ के लिए 10 कैल्सियम भोजन 

गर्भावस्था में खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इससे गर्भवती महिला का स्वास्थ्य ठीक रहता है और ये भी कहा जाता है की स्वस्थ गर्भवती महिला के गर्भ में स्वस्थ बच्चा निवास करता है. इसीलिए गर्भवती महिला को पुरे नौ महीने तक ऐसा आहार लना चाहिए जिसमे सभी तरह के पोषक तत्व मौजूद है ताकि उसके बच्चे और उस माँ में किसी तरह के विटामिन आदि का कमी न आए.

इसी प्रकार कैल्सियम भी उन्ही आवश्यक तत्वों में से एक है जिसका सेवन गर्भावस्था में बढ़ा देना चाहिए. गर्भावस्था के दौरान कैल्शियम का सेवन करना गर्भ में पल रहे बच्चे की हड्डियों का विकास करने के लिए बेहद जरुरी होता है. लेकिन अपर्याप्त और गलत मात्रा में इसका सेवन करने से osteoporosis का खतरा बढ़ जाता है. इसीलिए इस अवस्था में अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

लेकिन अधिकतर महिलाएं इसी असमंजस में पड़ी रहती है की कौन से खाद्य पदार्थो को खाने से कौन सा पोषक तत्व मिलेगा. इसीलिए आज हम आपको कुछ ऐसे कैल्सियम युक्त खाद्य पदार्थो के बारे में बताने जा रहे है जिनका सेवन गर्भावस्था में करना लाभकारी होता है. तो आईये जानते है गर्भवती महिला के लिए कुछ खाद्य पदार्थ!!

गर्भवती महिलाओ के लिए 10 कैल्शियम भोजन :-

1. दूध :

दूध को कैल्सियम का अच्छा स्त्रोत्र माना जाता है जो सभी उम्र के व्यक्तिओ के लिए लाभकारी होता है. यदि आप भी एक गर्भवती महिला है तो रोजाना सुबह एक गिलास दूध का सेवन करे ये आपको पुरे दिन फिट रखने में मदद करता है. लेकिन सिर्फ दूध से ही बात नहीं बनेगी इसके साथ ही दूध से बने अन्य डेरी प्रोडक्ट जैसे दही, पनीर आदि भी कैल्सियम के अच्छे स्रोत्र माने जाते है. तो आयडी आपको डेरी प्रोडक्ट्स से किसी प्रकार की एलर्जी नहीं है तो रोजाना अच्छी क्वालिटी के दूध और डेरी उत्पादों का सेवन करना शुरू कर दें खासकर आपके महत्वपूर्ण नौ महीनो में.

2. संतरे :

जब बात गर्भवती महिला के लिए कैल्सियम वाले भोजन की आती है तो संतरा उसके लिए सबसे बेहतर ऑप्शन माना जाता है. यदि आप दूध आदि डेरी उत्पादों को अधिक पसन्द नहीं करती तो ये आपके लिए बेहतर होगा. क्योंकि गर्भावस्था के फायदों के अलावा इसमें कई तरह के एंटी ऑक्सीडेंट्स और विटामिन C भी पाया जाता है जो आपके इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है और आपकी गर्भावस्था को स्वस्थ बनाने में भी मदद करता है. इसके साथ ही ये खट्टा मीठा फल आपके सुबह के आलस को दूर भागने में भी लाभकारी होता है.

3. खजूर :

ड्राई फ्रूट्स में से एक खजूर एनर्जी और न्यूट्रिएंट्स का अच्छा स्त्रोत्र है. लेकिन क्या आप जानती है की इस मीठे फल में कैल्सियम की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है. जो आपके स्वास्थ्य के साथ-साथ आपकी हड्डियों और दांतों के लिए भी लाभकारी होता है. ये फल पुरे वर्ष भर किसी भी ग्रोसरी स्टोर पर आसानी से मिल जाता है. तो अपने दांतों को कैल्सियम प्रदान करने के साथ-साथ मीठे का स्वाद लेने के लिए खजूर का प्रयोग जरुर करें.

4. सुखी अंजीर :

इसका सेवन आप एक बेहतर मिड डे स्नैक के रूप में कर सकती है. क्योंकि इनमे केवल कैल्शियम की ही अच्छी मात्रा नहीं पायी जाती अपितु उसमे कई फाइबर गुण भी पाए जाते है. इसके साथ ही अंजीर न केवल आपके बच्चे की हड्डियों की मजबूती प्रदान करता है बल्कि शौच आदि से जुडी समस्याओ को ठीक करने में भी मदद करता है जिससे कब्ज के समस्या को ठीक किया जा सके.

5. Bok Choy :

ये हरी पत्तेदार सब्जी पत्तागोभी की एक प्रजाति है. जिसका प्रयोग सामान्य तौर पर चाइनीज डिशस बनाने के लिए किया जाता है. इसीलिए जो महिलाएं गाय का दूध पीना अधिक पसंद नही करती वे अपनी गर्भावस्था के दौरान इस क्रंची सब्जी का स्वाद ले सकती है.

6. दलिया :

जइ के दलिए में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते है जैसे कैल्सियम, riboflavin, carbohydrates, folic acid, potassium आदि. इसीलिए आपकी छोटी मोटी भूख भगाने और आपके पेट को भरने के लिए ये एक बेहतर नाश्ता हो सकता है.

7. काले :

ये एक तरह की पत्तागोभी जैसी दिखने वाली सब्जी होती है जिसके पत्ते बड़े होते है. लेकिन क्या आप जानती है की इस सब्जी को कैल्सियम की खान माना जाता है. आप इसका सेवन सलाद या फिर चिप्स और पेटिस के रूप में भी कर सकती है. तो इसीलिए अपनी गर्भावस्था के दौरान काले को अपने डेली रूटीन में शामिल कर लें ताकि शरीर में किसी प्रकार की कैल्सियम की कमी न होने पाए.

8. बादाम :

यदि आप ड्राई फ्रूट्स आदि की शौक़ीन है तो इस दौरान आप बादाम आदि का सेवन भी कर सकती है. क्योंकि इस नट में कैल्सियम के साथ-साथ विटामिन इ की भी अच्छी मात्रा पायी जाती है. इसीलिए आज से ही इसे अपनी डाइट में सम्मिलित करें और खुद को स्वस्थ रखे.

9. ब्रोकली :

ये एक प्रकार की फूल गोभी होती है जिसका रंग गहरा हरा होता है. लेकिन गर्भावस्था के दौरान ब्रोकली आपके शरीर को कैल्सियम की अच्छी मात्रा प्रदान करती है. तो खुद को स्वस्थ रखने के लिए इस लाभकारी सब्जी को अपने खाने में जरुर सम्मिलित करें.

10. टोफू :

टोफू उन बेहतर कैल्सियम युक्त खाद्य पदार्थो में से एक है जिनका सेवन गर्भावस्था के दौरान करने से लाभ मिलता है. इसके साथ ही इसमें कैल्सियम, magensium, प्रोटीन, आयरन आदि कई पोषक तत्व भी पाए जाते है. तो आप भी अपनी गर्भावस्था के दौरान टोफू से बनी नई-नई रेसिपीज try कर सकती है.

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मिक्स जूस पीना क्यों हानिकारक हो सकता है प्रेग्नेंट महिला के लिए?

प्रेगनेंसी में मिक्स फ्रूट जूस क्यों नहीं पीना चाहिए, गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने खान पान में पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इस दौरान महिला यदि कुछ भी ऐसा खा लेती है या पी लेती है। जो की उसे नहीं खाना या पीना चाहिए, तो इसका बुरा असर केवल महिला के स्वास्थ्य पर ही नहीं पड़ता है। बल्कि इसके कारण माँ के पेट में पल रहा बच्चा भी प्रभावित हो सकता है।

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में पानी की कमी को पूरा करने के लिए पानी के साथ नारियल पानी, निम्बू पानी, फलों के रस आदि पीने की सलाह भी दी जाती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला फलों के रस का सेवन प्रेगनेंसी के समय जरूर करना चाहिए क्योंकि फलों में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। लेकिन जूस का सेवन करने के साथ आपको एक बात का खास ध्यान रखना चाहिए।

और वो यह है की आप मिक्स्ड फ्रूट यानी सभी फलों के एक साथ बनाएं रस के जूस का सेवन न करें। अब आप सोच रहे होंगे की हम ऐसा क्यों कह रहे हैं जबकि फल तो प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होते हैं। तो आइये अब हम आपको बताने जा रहे हैं की मिक्स फ्रूट जूस का सेवन करने से गर्भवती महिला या शिशु को क्या दिक्कत हो सकती है।

प्रेगनेंसी में मिक्स फ्रूट जूस पीने से प्रेग्नेंट महिला को हो सकती है एलर्जी

  • यदि गर्भवती महिला मिक्स फ्रूट जूस का सेवन करती है और उसमे कोई ऐसा फल होता है जिसे खाने से आपको एलर्जी होने का खतरा होता है।
  • और आप उस जूस का सेवन कर लेती है तो इसके कारण प्रेगनेंसी के समय आपको एलर्जी की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • साथ ही गर्भवती महिला को एलर्जी होने के कारण आपका शिशु भी प्रभावित हो सकता है।

गर्भपात व् समय पूर्व प्रसव

  • मिक्स फ्रूट जूस में अंगूर, अनानास आदि फल का रस भी होता है। जो की प्रेगनेंसी के दौरान अधिक मात्रा में न लेने की सलाह दी जाती है।
  • क्योंकि इन फलों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने से गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है।
  • और यदि आप इस जूस का सेवन करती है तो इसके कारण पेट में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुँच सकता है।
  • जिसके कारण गर्भ गिरने जैसी परेशानी हो सकती है।
  • इसके अलावा प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में जहां इसके कारण गर्भ गिरने की परेशानी हो सकती है।
  • वहीँ इसके कारण प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी भी हो सकती है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो प्रेग्नेंट महिला को मिक्स फ्रूट जूस पीने से हो सकते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को इस जूस को पीने से बचना चाहिए। और यदि जूस पीना भी है तो केवल उनकी फलों का रस पीएं जिन्हे पीना प्रेगनेंसी के समय फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा जूस पीते समय एक बात का ध्यान रखें की घर में बनाकर ताजा ही पीएं।