स्वस्थ प्रेगनेंसी के लिए गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने के साथ सही तरीके और सही मात्रा में आहार का सेवन भी जरुरी होता है। क्योंकि बहुत ज्यादा खाने से, जंक फ़ूड खाने से, ज्यादा मसालेदार व् तेलीय आहार का सेवन करने से, खराब फलों व् सब्जियों का सेवन करने से, बासी व् कच्ची चीजों का सेवन करने से गर्भवती महिला को फ़ूड प्वॉइजनिंग हो सकती है।
साथ ही मेटाबोलिज्म रेट कम होने के कारण गर्भवती महिला को गलत चीजों का सेवन करने से फ़ूड प्वॉइजनिंग का खतरा भी ज्यादा होता है। और गर्भवती महिला को यदि फ़ूड प्वॉइजनिंग हो जाती है तो इसके कारण गर्भवती महिला व् गर्भ में बच्चे दोनों को दिक्कत होती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में फ़ूड प्वॉइजनिंग क्यों खतरनाक होती है।
गर्भ में शिशु को होता है खतरा
खराब व् दूषित खाना खाने के कारण गर्भवती महिला के शरीर में बैड बैक्टेरिया चला जाता है और यह बैक्टेरिया गर्भनाल के रास्ते शिशु तक भी पहुँचता है। ऐसे में बैड बैक्टेरिया के कारण शिशु के संक्रमित होने का खतरा बढ़ने के साथ शिशु के विकास में भी कमी आ सकती है। और कई बार फ़ूड प्वॉइजनिंग की परेशानी ज्यादा होने के कारण महिला का गर्भपात भी हो जाता है।
डायरिया के कारण होती है दिक्कत
फ़ूड प्वॉइजनिंग की वजह से गर्भवती महिला को उल्टी, दस्त की परेशानी बहुत ज्यादा हो जाती है। जिसके कारण शारीरिक रूप से महिला बहुत ज्यादा कमजोरी का अनुभव करती है, और महिला की खाने की इच्छा में भी कमी आती है जिसके कारण ज्यादा परेशानी बढ़ जाती है।
पानी की कमी हो जाती है बॉडी में
उल्टी दस्त की समस्या बढ़ने की वजह से गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी होने का खतरा भी बढ़ जाता है। और गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी होने के कारण माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत होती है।
बॉडी का तापमान बढ़ जाता है
फ़ूड प्वॉइजनिंग की समस्या के कारण प्रेगनेंसी महिला के शरीर के तापमान के बढ़ने का खतरा रहता है जिसकी वजह से गर्भवती महिला को दिक्कत होती है। साथ ही गर्भवती महिला के शरीर का तापमान अधिक बढ़ना शिशु के लिए भी परेशानी खड़ी करता है।
भूख में कमी व् कमजोरी
सारा दिन उल्टी दस्त की समस्या होने के बाद गर्भवती महिला की खाने की इच्छा में कमी आती है जिसकी वजह से बॉडी में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। जिससे गर्भवती महिला को कमजोरी व् थकान जैसी समस्या अधिक होने के साथ बच्चे के विकास में भी दिक्कत आती है।
पेट व् बॉडी में दर्द
फ़ूड प्वॉइजनिंग की वजह से गर्भवती महिला को पेट में दर्द के साथ बॉडी के अन्य हिस्सों में भी दर्द की परेशानी अधिक होती है जिसकी वजह से गर्भवती महिला बहुत ज्यादा परेशानी हो सकती है।
तो यह हैं कुछ परेशानियां जो फ़ूड प्वॉइजनिंग की वजह से गर्भवती महिला व् बच्चे को हो सकती है जिसके कारण प्रेगनेंसी में बहुत ज्यादा कॉम्प्लीकेशन्स हो जाती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को ऐसे आहार का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए जिससे महिला को फ़ूड प्वॉइजनिंग का खतरा हो।
अंडे के छिलकों के फायदे, अंडे का छिलका फेंकना नहीं चाहिए, Eggshells benefits, अंडे के छिलके के स्वास्थ्य के लिए फायदे, Eggshells benefits for health & Skin
ये बात तो हम सभी जानते है की अंडा सबसे स्वस्थ और पौष्टिक आहार होता है इसलिए तो प्रत्येक परिवार अपने ब्रेकफास्ट में इसे विशेष आहार के रूप में सम्मिलित करता है। बॉयल्ड अंडा हो, या अंडे की करि, अंडे का परांठा या उससे बना ऑमलेट सभी को लोग बड़े चाव से खाते है। क्योंकि यही एक मात्र ऐसा स्वस्थ ब्रेकफास्ट है जो आपको पुरे दिन स्फूर्ति और ताकत प्रदान करता है।
लेकिन क्या आप जानते है? की अंडे की ही तरह उसके छिलके में भी कई पोषक तत्व पाए जाते है जिनकी स्वास्थ्य के लिए बहुत से फायदे है। परन्तु हम में से अधिकतर लोग इसके छिलकों को फेंक देते है। जबकि अंडे के योल्क और अंडे की सफेदी की भांति इसके छिलकों को भी खाया जा सकता है। लेकिन सभी को इन छिलकों के बारे में पूर्ण जानकारी नहीं होती। इसीलिए आज हम आपको अंडे के छिलके के कुछ स्वास्थ्यवर्धक फायदों के बारे में बताने जा रहे है। जिन्हे जानकार शायद आप भी इनका सेवन करना शुरू कर दें।
अंडे के छिलके के फायदे :-
1. स्वास्थ्य के लिए बेहतर :
शोधों से पता चला है की अंडे के छिलकों का सेवन करने का सबसे बेस्ट तरीका पाउडर के रूप में होता है। इस पाउडर का रोजाना अपने खाने में इस्तेमाल करने से पुरे शरीर का स्वास्थ्य बेहतर किया जा सकता है। दरअसल अंडे के छिलकों में Hyaluronic acid पाया जाता है जो त्वचा में ग्लो लाने में मदद करता है। जबकि इसमें मौजूद अन्य तत्व chondroitin, collagen, और glucosamine जोड़ों के दर्द और हड्डियों की अकड़न को कम करता है।
2. टॉक्सिक पदार्थो को दूर करे :
अगर रक्त को शुद्ध करने की प्रक्रिया पर ध्यान दिया जाए तो अंडे के छिलकों का पाउडर इस कार्य को करने में सक्षम है। यह शरीर से सभी हानिकारक टॉक्सिक पदार्थों को दूर करने में मदद करता है। इसके लिए रोजाना दिन में कुल 3 ग्लास पानी और अंडे के छिलकों के पाउडर के मिश्रण का सेवन करे। यह आपके शरीर से सभी टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करेगा।
3. थाइराइड :
थाइराइड की समस्या के लिए भी आप इनका इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए अंडे के छिलको को क्रश करके उसमे नींबू का रस मिलाएं। कम से कम 7 दिनों के लिए इसे रेफ्रीजिरेटर में रख लें। और इसकी 1 चम्मच का अल्कोहल मिश्रित पेय पदार्थ व् शहद के साथ रोजाना खाली पेट सेवन करें।
4. पेट के अल्सर :
पेट के अल्सर की समस्या के लिए भी अंडे के छिलके एक बेहतर और लाभकारी प्राकृतिक उपाय है। इसमें मौजूद तत्व पेट के अल्सर को दूर करने में मदद करते है। इसके लिए अंडे के छिलकों के पाउडर और गर्म दूध को मिलाकर नियमित रूप से इसका सेवन करें। कुछ ही दिनों में समस्या दूर हो जाएगी।
5. हड्डियों को मजबूत करें :
शरीर की हड्डियों को मजबूत करने के लिए कैल्शियम की जरूरत होती है जो खाने की बहुत से चीजों से लिया जा सकता है। लेकिन क्या आप जानते है की अंडो के छिलके में भी कैल्शियम भी उच्च मात्रा पाई जाती है। इसके मौजूद यही मात्रा हड्डियों को मजबूत करने में भी मदद करती है। जानकारी के लिए बता दें, अंडे के छिलकों में 95% कैल्सियम की मात्रा पाई जाती है जो दांतों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।
इन सब कारणों से तो आप जान ही गए होंगे की यह वेस्ट मैटेरियल आपके शरीर और स्वास्थ्य के लिए कितना लाभकारी है। तो अगली बार से इन्हे कूड़ेदान में फेंकने की बजाय इनका एक पाउडर बना लें और उसे अपनी डाइट में सम्मिलित करें और स्वस्थ जीवन जीएं।
डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में बहुत कमजोरी हो जाती है। ऐसे में महिला को डिलीवरी के बाद अच्छे से आराम करने की सलाह दी जाती है। और बच्चे के जन्म के एक या दो दिन तक महिला को हॉस्पिटल में ही रखा जाता है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद तो महिला को ज्यादा समय के लिए हॉस्पिटल में रखा जाता है।
ऐसे में हॉस्पिटल में रहते हुए कुछ ऐसे काम है जो महिला को बिल्कुल नहीं करने चाहिए। क्योंकि उन कामों को करने से प्रेग्नेंट महिला को परेशानी हो सकती है। तो आइये अब जानते हैं की वो कौन से काम है जो डिलीवरी के समय हॉस्पिटल में महिला को नहीं करने चाहिए।
डिलीवरी होने के तुरंत बाद सभी के साथ बातचीत
बच्चे के जन्म के बाद जब आपको रूम में शिफ्ट किया जाता है तब आपसे बहुत लोग मिलने आते हैं बधाइयां देते हैं। जो की अच्छी बात है लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है की आप उठकर बैठने की कोशिश करें और सभी से खूब बातें करें। क्योंकि उस समय आपको बहुत ज्यादा आराम की जरुरत होती है। यदि आप ऐसा करती है तो उस समय तो आपको कुछ नहीं होता लेकिन जब वहां कोई नहीं होता तक आपको सिर दर्द, कमजोरी महसूस होना जैसी परेशानियां अधिक होती है। ऐसे में हॉस्पिटल में आपको आपके आराम के लिए ही रखा जाता है इसीलिए महिला को वहां आराम ही करना चाहिए।
मेडिसिन नहीं खाना
डिलीवरी के बाद आपको यदि डॉक्टर्स मेडिसिन खाने की सलाह देते हैं। तो आपको दवाई का सेवन करने में बिल्कुल भी आनाकानी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि वो दवाइयां आपको ही जल्दी फिट करने के लिए होती है और आप ही यदि उनका सेवन नहीं करि है तो आपको बड़ा में ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
डॉक्टर से बिना पूछें कुछ भी खाना पीना शुरू कर देना
बच्चे के जन्म के तुरंत बाद डॉक्टर की बिना सलाह के महिला को कुछ भी नहीं खाना चाहिए खासकर वो चीजें तो बिल्कुल नहीं खानी चाहिए जिससे महिला को दिक्कत हो। यदि आपको डॉक्टर कुछ खाने या पीने की सलाह देते हैं तभी आपको खाना पीना शुरू करना चाहिए।
जल्दी छुट्टी के लिए बोलना
बच्चे के जन्म के बाद महिला में कमजोरी आ जाती है ऐसे में महिला को डॉक्टर अपनी देखरेख में रखते हैं ताकि महिला को कोई दिक्कत न हो। नोर्मल डिलीवरी वाली महिलाओं को दो या तीन दिनों के लिए डॉक्टर हॉस्पिटल में रखते हैं जबकि सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं को ज्यादा समय के लिए हॉस्पिटल में रखा जाता है। ऐसे में महिला को डॉक्टर को बार बार छुट्टी करने के लिए नहीं बोलना चाहिए। क्योंकि यदि आप फिट होंगी तो डॉक्टर आपको अपने आप ही छुट्टी दे देंगे।
अपने आप अपने काम करना
डिलीवरी होने के बाद हॉस्पिटल में आपके सभी काम नर्स करती है यहां तक की आपके कपडे भी वहीँ बदलती है। ताकि आपको यदि टाँके लगे हैं तो आपको कोई दिक्कत न हो, ऐसे में आपको अपने काम को अपने आप करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। और न ही नर्स को मना करना चाहिए क्योंकि इसके कारण आपको ही दिक्कत होगी
बच्चे से जुडी जानकारी गलत लिखवाना
हॉस्पिटल में आपसे आपके बच्चे से जुडी जानकारी पूछी जाती है जैसे की पिता का नाम, माता का नाम, आदि। ऐसे में आपको उस जानकारी को अच्छे से भरवाना चाहिए। स्पेलिंग को अच्छे से चेक करना चाहिए, क्योंकि यदि आप जानकारी को गलत भरवाते हैं तो इससे बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र में गलती हो जाती है। जिसकी वजह से बाद में आपको दिक्कत होती है।
तो यह हैं कुछ काम जो डिलीवरी के बाद महिला को हॉस्पिटल में नहीं करने चाहिए। क्योंकि इन कामों को करने से किसी और को नहीं बल्कि आपको ही बाद में परेशानी होगी। ऐसे में आपको बाद में कोई दिक्कत न हो इसके लिए इन गलतियों को डिलीवरी के समय हॉस्पिटल में न करें।
शरीर के सभी भाग आपकी सुंदरता को बढ़ाने में एक अहम रोल अदा करते है, फिर चाहे वो आपका चेहरा हो या आपके हाथ और पैर, परन्तु देखा जाएँ तो चेहरे के मुकाबले हाथों और पैरों की सुंदरता पर इतना ध्यान नहीं दिया जाता है, जिसके कारण हाथों और पैरों की त्वचा बेजान और रूखी हो जाती है, इसीलिए आपको ध्यान रखना चाहिए जितनी केयर आपके चेहरे के लिए चाहिए होती है, उतना ही ध्यान आपको अपने हाथों और पैरों का भी रखना चाहिए, इसके कारण आपकी सुंदरता को बढ़ाने में मदद मिलती है।
सर्दियों में आपके हाथ पैर ढ़के हुए रहते है, इसीलिए वो दिखाई नहीं देते है परन्तु गर्मियों में जब आप शार्ट ड्रेस या फिर स्लीव कट सूट आदि पहनती है, जिसमे आपके हाथ पैर दिखाई देते है, और सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों के कारण और भी रूखे होने लगते है, क्योंकि हाथों और पैरों को न तो आप अच्छे से मॉइस्चराइज करती है, और न ही सनस्क्रीन का इस्तेमाल करती है, जिसके कारण आपके हाथों और पैरों के रूखेपन की समस्या खड़ी हो जाती है, और ये भी सच है की हाथों और पैरों का रूखापन भी आपकी पर्सनैल्टी को खराब कर सकता है,
क्योंकि जब आप शॉर्ट्स पहनती है तो आपके काले घुटने और पैरों की त्वचा का रूखापन आपकी लुक को खराब कर सकता है, परन्तु ये कोई ऐसी परेशानी भी नहीं है की जिसका कोई समाधान न हो, बल्कि जिस तरह से आप अपने चेहरे की केयर करती है, यदि उसी तरह से आप अपने हाथों और पैरों की भी केयर करेंगी तो इसके कारण आपकी ख़ूबसूरती को और भी निखारने में मदद मिलेगी और साथ ही आपके हाथों और पैरों को रूखेपन की समस्या से भी राहत मिलेगी।
मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें:-
त्वचा के रुखेपन को दूर करने का सबसे आसान इलाज होता है की आप त्वचा को अच्छे से मॉइस्चराइज करें यदि आप नियमित रूप से अपने हाथों और पैरों को पोषण देते है, तो इसके कारण आपके हाथों और पैरों को कोमल व् मुलायम बनाने में मदद मिलती है, साथ ही यदि आप अपने हाथों और पैरों की त्वचा को मॉइस्चराइज नहीं करते है, तो इसके कारण आपको रूखेपन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, इसीलिए अपनी त्वचा की कोमलता को बनाएं रखने के लिए आपको अपनी त्वचा को मॉइस्चराइज जरूर करना चाहिए।
सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें:-
गर्मियों में खास कर जब भी आप धूप में निकलती है, तो सूर्य से निकलने वाली तेज किरणे आपके हाथों और पैरों पर बहुत बुरा प्रभाव डालती है, जिसके कारण त्वचा रूखी व् बेजान होने लगती है, इसीलिए अपनीओ त्वचा की कोमलता को बनाएं रखने के लिए आपको धूप में निकलने से कम से कम बीस मिनट पहले अपने हाथों पर सनस्क्रीन लगाना चाहिए, इसके कारण आपकी त्वचा की नमी भी बनी रहती है, और साथ ही पराबैंगनी किरणों का बुरा प्रभाव भी आपकी त्वचा पर नहीं पड़ता है।
आलू, शहद और दूध का इस्तेमाल करें:-
हाथों और पैरों के रूखेपन को दूर करने के लिए आप एक आलू को अच्छे से ग्राइंड कर लें, उसके बाद उसमे चार चम्मच शहद और चार चम्मच दूध मिलाएं, और अच्छे से मिक्स करके एक पेस्ट तैयार करें, अब इस पेस्ट को अच्छे से अपने हाथो और पैरों पर लगाएं, और कम से कम पंद्रह मिनट तक लगे रहने के बाद ठन्डे पानी से अपने हाथों और पैरों को धो दे, इसके कारण आपके हाथों और पैरों का रंग भी निखर जाएगा, और साथ ही आपके हाथ और पैरों की रूखेपन की समस्या दूर हो जायेगी और इन्हे सॉफ्ट बनने में मदद मिलेगी।
एलोवेरा का इस्तेमाल करें:-
एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करने से भी आपकी त्वचा के रूखेपन की समस्या को दूर करके आपके हाथों और पैरों को कोमल बनने में मदद मिलती है, इसके लिए आप एलोवेरा के छिलके के उतार कर उसके गुद्दे को निकाल कर अच्छे से पीस लें, और उसके बाद इससे अच्छे से अपने हाथों और पैरों की मसाज करें, और थोड़ी देर के लिए ऐसे ही छोड़ दें, और सूखने के बाद ठन्डे पानी से इसे साफ़ कर लें, ऐसा करने से आपके हाथों और पैरों के रंग में भी निखार आने में मदद मिलती है, और साथ ही आपके हाथ और पैर कोमल भी हो जाते है।
ग्लिसरीन, गुलाबजल, व् निम्बू के रस का इस्तेमाल करें:-
इन तीनो का इस्तेमाल करने से भी आपको अपने हाथों और पैरों का रूखापन दूर करने में मदद मिलती है, इसके लिए आप दो चम्मच ग्लिसरीन, एक चम्मच निम्बू का रस, और एक चम्मच गुलाबजल लेकर अच्छे से मिक्स करें, और रात को सोने से पहले अपने हाथों और पैरों की अच्छे से इससे मसाज करें, ऐसा करने के बाद इसे रात भर के लिए छोड़ दें, और सुबह उठ कर ठन्डे पानी से अच्छे से अपने हाथों और पैरों को धो लें, ऐसा करने से आपके हाथों और पैरों के रूखेपन को दूर करके उसकी कोमलता को बनाएं रखने में मदद मिलती है।
मलाई, हल्दी और निम्बू के रस का इस्तेमाल करें:-
दो चम्मच मलाई में चुटकी भर हल्दी, और थोड़ा सा निम्बू का रस मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद इस पेस्ट को अच्छे से अपने हाथों और पैरों पर लगाएं, और कम से कम बीस मिनट के लिए छोड़ दें, ऐसा करने के बाद अपने हाथों और पैरों को अच्छे से पानी से धो लें, इसके कारण आपके हाथों और पैरों का रंग भी निखर जाएगा, और उन्हें कोमल बनने में भी मदद मिलेगी, आप इस उपचार को यदि एक दिन छोड़ कर भी करती है, तो इसके कारण आपको बहुत जल्दी हाथों और पैरों को गोरा करने में भी मदद मिलती है।
शहद, चीनी और निम्बू के रस का इस्तेमाल करें:-
दो चम्मच शहद में दो चम्मच चीनी और दो चम्मच ही निम्बू का रस लेकर अच्छे से मिक्स करें, चीनी को पूरी तरह से मेल्ट न होने दें, उसके बाद इसे अच्छे से अपने हाथों और पैरों पर पांच से दस मिनट के लिए स्क्रब करें, ऐसा करने से आपके हाथों और पैरों पर जमी डेड स्किन निकल जायेगी, जिसके कारण त्वचा का रूखापन दूर होकर उसे कोमल बनने में मदद मिलती है।
तेल से मसाज करें:-
त्वचा की कोमलता को बनाएं रखने और उसे रूखेपन से निजात दिलाने के लिए आप अपने हाथों और पैरों की रात को सोने से पहले अच्छे से तेल से मसाज करें, इसके लिए आप बादाम, नारियल या जैतून के तेल का इस्तेमाल कर सकते है, इसे आप रात भर ऐसे ही छोड़ दें, और सुबह उठ कर नहा लें, यदि आप इस उपाय का इस्तेमाल हफ्ते में दो से तीन बार भी करते है, तो इसके कारण आपके हाथों और पैरों के रूखेपन को दूर करके आपके हाथों और पैरों को सॉफ्ट बनने में मदद मिलती है।
हाथों और पैरों के रूखेपन को दूर करने के अन्य टिप्स:-
नहाते समय भी अपने हाथों और पैरों की साफ़ सफाई का ध्यान रखें, और नहाने के बाद त्वचा को मॉइस्चराइज जरूर करें।
आलू के रस को हाथों और पैरों पर लगाने से भी आपकी त्वचा को कोमल बनाने में मदद मिलती है।
नहाने से पहले तेल की मालिश करने से भी आपके हाथों और पैरों को कोमल बनाने में मदद मिलती है।
ज्यादा तेज गरम पानी से हाथ नहीं धोने चाहिए।
बेसन दही और चुटकी भर हल्दी को अपने हाथों और पैरों पर लगाएं इसके कारण आपके हाथों और पैरों का रंग भी निखर जायेगा, और दही के कारण उन्हें कोमल बनने में भी मदद मिलेगी।
ग्लिसरीन और गुलाबजल को मिलाकर हाथों पैरों पर लगाने से भी आपके हाथों पैरों को कोमल बनने में मदद मिलती है।
निम्बू के रस में चीनी को मिलाकर हाथों और पैरों की मसाज करने से डेड स्किन निकलती है, जिसके कारण त्वचा में कोमलता आती है।
अच्छे साबुन का प्रयोग करने के साथ कपडे धोने के लिए भी अच्छे डिटर्जेंट का इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण भी आपकी आपको त्वचा में रूखापन आता है।
तो ये कुछ टिप्स है जिनका इस्तेमाल करके आप अपने हाथों और पैरों के रूखेपन को दूर कर सकते है, और साथ ही उनमे निखार भी ला सकते है, और वैसे आपको नियमित रूप से अपने हाथों और पैरों की सफाई करनी चाहिए, जैसे की आप अपने चेहरे की करते है, ऐसा करने से न तो आपके हाथों पैरों की त्वचा शुष्क होगी, साथ ही उनकी कोमलता को बनाएं रखने में भी मदद मिलेगी।
नेचुरल बर्थ के लिए क्या खाएं, प्रेगनेंसी महिला के लिए बहुत ही खूबसूरत अहसास होता है और इस अहसास को हकीकत में बदलने का समय तब आता है। जब महिला की डिलीवरी का समय पास आ रहा होता है। क्योंकि अब वो समय होता है जब प्रेग्नेंट महिला अपने पेट में पल रहें बच्चे हो अपनी बाहों में थामने का अनुभव लेने वाली होती है। लेकिन शिशु के आने की ख़ुशी के साथ इस दौरान भी महिला मन में बहुत से सवाल भी चल रहें होते हैं। जैसे की डिलीवरी के समय कोई दिक्कत तो नहीं होगी, डिलीवरी सिजेरियन होगी या नोर्मल, शिशु को तो कोई दिक्कत नहीं होगी आदि। और अधिकतर हर महिला मन ही मन यह भी चाहती है की वो नेचुरल यानी सामान्य प्रसव के तरीके से शिशु को जन्म दें।
क्योंकि सामान्य प्रसव के बाद महिला को फिट होने में कम समय लगता है और शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखने के साथ अपनी डाइट में कुछ ऐसे आहार को शामिल करना होता है। जिससे सामान्य प्रसव हो होने में मदद मिल सके। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे आहार के बारे में बताने जा रहें हैं जो प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी के दौरान जरूर खाने चाहिए क्योंकि उनसे नोर्मल डिलीवरी में मदद मिलती है।
नेचुरल बर्थ के लिए खाएं हरी सब्जियां
गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को सामान्य प्रसव के चांस बढ़ाने के लिए हरी सब्जियों का भरपूर सेवन करना चाहिए।
क्योंकि हरी सब्जियों आयरन होता है जो बॉडी में ब्लड की कमी को पूरा करने में मदद करता है जो सामान्य प्रसव के लिए बहुत जरुरी होता है।
फोलिक एसिड होता है जो रेड ब्लड सेल्स को बढ़ाने के साथ पेट में पल रहें शिशु के शारीरिक व् दिमाग के विकास को बढ़ाने में मदद करता है।
फाइबर मौजूद होता है जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है जिससे प्रेगनेंसी में महिला फिट रहती है।
कैल्शियम व् प्रोटीन की मात्रा मौजूद होती है जो प्रेग्नेंट महिला और शिशु की हड्डियों को मजबूत करने के साथ मांसपेशियों की मजबूती को बढ़ाने में मदद करते हैं।
हरी सब्जियों में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करती है।
ऐसे में हरी सब्जियों का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला और पेट में पल रहें शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
और प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में भरपूर पोषक तत्व का होना और महिला का स्वस्थ रहना सामान्य प्रसव के चांस को बढ़ाने में मदद करता है।
दालें
गर्भावस्था के दौरान महिला को दालों का भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि यह आयरन, प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर जैसे बहुत से पोषक तत्वों से भरपूर होती है।
जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने के साथ, गर्भ में शिशु के बेहतर विकास, और प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है।
क्योंकि दालों में मौजूद आयरन बॉडी में खून की कमी को पूरा करने, कैल्शियम हड्डियों को मजबूत करने, प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करते हैं, आदि।
और प्रेग्नेंट महिला का स्वस्थ रहना ही महिला की बॉडी को नेचुरल बर्थ के लिए तैयार करने में मदद करता है।
नेचुरल बर्थ के लिए खाएं कम वसा वाला मीट
नॉन वेज का सेवन प्रेग्नेंट महिला कर सकती है यदि महिला करना चाहती है, लेकिन इस बात का ध्यान रखें की ताजे व् अच्छे से पके हुए मीट का सेवन ही करें।
मीट का सेवन करने से गर्भवती महिला को बहुत से पोषक तत्व मिलते हैं जो गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
साथ ही मीट का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को महिला को लेबर पेन को कम करने व् नेचुरल बर्थ के चांस को बढ़ाने में भी मदद मिलते हैं।
लेकिन इस बात का ध्यान रखें की सामान्य प्रसव के लिए महिला को कम वसा वाले मीट का सेवन ही करना चाहिए।
मीट के अलावा अंडे का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को करना चाहिए, क्योंकि अंडे भी प्रेग्नेंट महिला के शरीर को फिट रखने में मदद करते हैं जिससे सामान्य प्रसव के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।
फल
नोर्मल डिलीवरी के लिए महिला को अपनी डाइट में फलों को भी भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए खासकर जो फल रसदार होते हैं, जिनमे आयरन की अधिकता होती है आदि।
क्योंकि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की मात्रा का पूरा होना और पानी की मात्रा का पूरा होना नेचुरल बर्थ के चांस को बढ़ाने में मदद करता है।
जैसे की पानी के लिए महिला को तरबूज, संतरे, मौसमी आदि का सेवन करना चाहिए।
आयरन के लिए सेब, अनार, आदि का प्रेग्नेंट महिला को भरपूर सेवन करना चाहिए।
इसके अलावा एवोकाडो, अमरुद, केला, आदि का भी महिला को सेवन करना चाहिए क्योंकि यह सभी फल प्रेग्नेंट महिला की बॉडी को सामान्य प्रसव के लिए तैयार करने में मदद करते हैं।
तो यह हैं वो चार आहार जिनका सेवन यदि प्रेगनेंसी में महिला भरपूर मात्रा में करती है। तो इससे प्रेग्नेंट महिला को नेचुरल प्रसव के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।
प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में बहुत से बदलाव होते हैं जिसके कारण महिला को तरह तरह की परेशानियां भी होती है। जैसे की मॉर्निंग सिकनेस की समस्या, शरीर में दर्द, उल्टियां होना, सूजन की समस्या, स्किन से जुडी समस्या जैसे की चेहरे पर दाग धब्बे और खुजली की समस्या होना, आदि। तो आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दैरान पेट पर होने वाली खुजली की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं। की आखिर प्रेग्नेंट महिला को पेट पर खुजली क्यों होती है? और किस तरह महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है।
प्रेगनेंसी में पेट पर खुजली होने के कारण
गर्भावस्था के दौरान बॉडी में हार्मोनल बदलाव होते हैं जिसके कारण बॉडी में एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्तर बढ़ता है और एस्ट्रोजन हॉर्मोन का स्तर बढ़ने के कारण महिला को खुजली की समस्या होती है।
प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में ब्लड फ्लो सही न होने के कारण भी पेट के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में भी खुजली की समस्या हो सकती है।
गर्भ में शिशु का आकार बढ़ने के साथ गर्भाशय का आकार भी बढ़ता है जिसकी वजह से पेट के आस पास की त्वचा फैलने लगती है और स्किन में खिंचाव बढ़ जाता है जिसके कारण खुजली की समस्या हो जाती है।
पेट का आकार बढ़ने के साथ पेट की स्किन में मौजूद प्राकृतिक मॉइस्चराइजर कम होने लगता है जिसके कारण स्किन में सूखापन आ जाता है और पेट पर खुजली की समस्या होने लगती है।
प्रेगनेंसी के दौरान पानी का सेवन कम करने के कारण डीहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है जिसकी वजह से खुजली होने लगती है।
धूप में ज्यादा घूमने के कारण भी यह दिक्कत हो सकती है।
ज्यादा देर तक एसी में रहने के कारण भी यह समस्या हो सकती है इसीलिए जरुरत से ज्यादा एसी में न रहें।
प्रेगनेंसी के दौरान बहुत ज्यादा टाइट कपडे पहनने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
यदि प्रेग्नेंट महिला अपने शरीर की साफ़ सफाई का ध्यान अच्छे से नहीं रखती है या फिर स्किन के लिए बहुत हार्श साबुन का इस्तेमाल करती है तो भी खुजली की समस्या होती है।
यदि प्रेग्नेंट महिला गुनगुने पानी से ज्यादा नहाती है तो भी स्किन में सूखापन आता है और महिला को खुजली की समस्या होती है।
गर्भावस्था में खुजली की समस्या से बचने के टिप्स
यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपको पेट पर खुजली हो रही है तो आप कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके इस परेशानी से निजात पा सकती है। जैसे की:
नारियल तेल
नारियल तेल स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है ऐसे में खुजली की समस्या होने पर गर्भवती महिला को अपने पेट पर नारियल तेल लगाना चाहिए। इससे महिला को खुजली की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।
सेब का सिरका
रुई की मदद से पेट की स्किन पर सेब का सिरका लगाएं, ऐसा करने से स्किन में नमी बरकरार रहती है और गर्भवती महिला को पेट पर होने वाली खुजली की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
बर्फ की सिकाई
जब भी महिला को खुजली हो तो महिला को किसी कपडे में बर्फ के ठन्डे पानी में भिगोकर या बर्फ का टुकड़ा कपडे में डालकर उसे अपने पेट पर घुमाना चाहिए। ऐसा करने से गर्भवती महिला को पेट पर होने वाली खुजली की समस्या से निजात मिलता है। लेकिन बर्फ के टुकड़े को बहुत देर तक एक ही जगह पर न रखें।
एलोवेरा जैल
रोजाना नहाने के बाद थोड़ा सा एलोवेरा जैल अपने पेट पर लगाएं और लगाने के पंद्रह से बीस मिनट बाद अपने पेट को गीले कपडे से साफ़ कर लें। ऐसा करने से आपके पेट के आस पास की स्किन की कोमलता को बरकरार रहने में मदद मिलेगी। साथ ही एलोवेरा में मौजूद एंटी इंफ्लमेटरी गुण आपको खुजली की समस्या से बचे रहने में भी मदद करते हैं।
मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल
रोजाना नहाने के बाद स्किन के लिए मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें इससे स्किन की कोमलता को बरकरार रहने में मदद मिलती है। साथ ही खुजली की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।
नीम के पत्ते
एक बड़े बर्तन को पानी से भरकर उसमे बहुत से नीम के पत्ते डालकर उबाल लें, अब उस पानी को ठंडा करके नहाने वाले पानी मिलाएं। और उस पानी से नहाएं, ऐसा करने से भी गर्भवती महिला को खुजली की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
तुलसी के पत्ते
तुलसी के पत्तों का रस निकालकर खुजली वाली जगह पर लगाएं। ऐसा करने से भी गर्भवती महिला को खुजली की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
निम्बू का रस
सरसों या नारियल या किसी अन्य तेल में आप निम्बू का रस मिलाकर पेट पर लगाएं ऐसा करने से भी आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी।
पेट्रोलियम जेली
खुजली की समस्या से निजात पाने के लिए पेट्रोलियम जेली का इस्तेमाल करना भी बहुत फायदेमंद होता है। ऐसे में जब भी आपको पेट या शरीर के अन्य हिस्से में खुजली महसूस हो तो आपको पेट्रिलियम जेली का इस्तेमाल करना चाहिए।
खुजली से बचने के अन्य टिप्स
पानी का भरपूर सेवन करें।
ज्यादा गर्मी में न रहें।
सूती, खुले और आरामदायक कपडे पहनें।
ज्यादा एसी में न बैठें।
बेसन में मलाई मिलाकर पेट पर लगाएं ऐसा करने से भी खुजली से आराम मिलता है।
ज्यादा गर्म पानी से न नहाएं।
प्रेगनेंसी के दौरान कब होती है खुजली खतरनाक?
गर्भावस्था के दौरान थोड़ी बहुत खुजली की समस्या होना आम बात होती है लेकिन यदि महिला को खुजली बहुत ज्यादा हो, स्किन पर रैशेस होने लगे, लाल लाल दाने होने लग जाएँ, स्किन करने लगे, खुजली इतनी ज्यादा हो जाये की आपसे सहन ही न हो, तो आपको इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि इसका कारण स्किन इन्फेक्शन हो सकता है जो माँ व् बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है।
तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान खुजली होने के कारण व् उपाय, साथ ही महिला को यदि खुजली हो भी तो महिला को खुजली नहीं करनी चाहिए। खासकर जब पेट पर हो, आप खुजली से बचने के लिए मॉइस्चराइजर, तेल आदि का इस्तेमाल करें, क्योंकि पुराने समय की महिलाओं का मानें तो जो महिलाएं पेट पर ज्यादा खुजली करती हैं। उन्हें स्ट्रेचमार्क्स की समस्या भी ज्यादा हो जाती है। इसीलिए खुजली की समस्या होने पर आपको ऊपर दिए गए टिप्स में से किसी न किसी उपाय का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।
आजकल जमाना काफी बदल गया है, लोग पहले की तरह दूसरों से बातें छिपाते नहीं है। लोगों को एक दुसरे से बात करने में कोई शर्म नहीं आती। लेकिन इतने बदलाव के बावजूद भी कुछ महिलाएं ऐसी है जो अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर चर्चा करने से शर्माती है। फिर वो समस्या चाहे उनकी निजी जिंदगी की हो या उनके स्वास्थ्य से जुड़ी हो।
स्तनों में खुजली होना भी उन्ही समस्यायों में से एक है जिनके बारे में महिलाएं बाते करने से कतराती है। लेकिन कई बार इस समस्या के कारण महिलाओं को शर्मिंदगी भी महसूस होती है। वैसे तो ये कोई बड़ी समस्या नहीं है लेकिन अगर समय पर इसके लक्षणों पर ध्यान नहीं दिया जाए तो आगे चलकर यह बड़ी समस्या का कारण बन सकती है।
ब्रेस्ट में खुजली होने की मुख्य वजह शरीर में हार्मोनल बदलाव, परफ्यूम के अधिक इस्तेमाल, ब्रा के गलत फैब्रिक पहनना, टाइट और कसे हुए कपडे पहनना और नए कपड़ों को पहनना होता है। जिसके कारण स्किन में एलर्जी हो जाती है और खुजली होने लगती है। महिलाओं में होने वाली यह एक आम समस्या है जो किसी भी उम्र की महिला को हो सकती है। इसलिए आज हम आपको इस समस्या के होने के कारण और उसके पूर्ण उपायों के बारे में बता रहे है। जिसकी मदद से आप इस समस्या की जड़ को खत्म करके उससे हमेशा के लिए छुटकारा पा सकती है।
ब्रैस्ट (स्तनों) में खुजली होने के कारण और उपाय :-
1. स्किन का ड्राई होना है ब्रैस्ट में खुजली की मुख्य वजह :
ड्राई स्किन में बहुत सी समस्याएं होती रहती है। क्योंकि यह स्किन टाइप त्वचा में नमी को बनाए नहीं रख पाती जिसके कारण स्किन रुखी हो जाती है। और रुखी होने के कारण इसमें खुजली, फ्लेकिंग और रफ स्किन की समस्या होने लगती है। लेकिन स्किन का ड्राई होना सामान्य नहीं है। जी हां, स्किन के ड्राई होने का सबसे बड़ा कारण अधिक समय तक नहाना और अधिक गर्म पानी से नहाना होता है। इसके अलावा कुछ विशेष साबुन भी इस समस्या का कारण होते है। इसलिए पहले इन कारणों को दूर करें।
उपाय : ड्राई स्किन की समस्या में मोइस्चराइज़र का इस्तेमाल करना बेहतर होगा। इसके लिए ऐसा मोइस्चराइज़र चुनें जो त्वचा की नमी को बनाए रखे। इसके साथ ही नहाने के बाद स्किन को अच्छी तरह सुखाकर उसपर मोइस्चराइज़र लगाएं। बता दें बेहतर परिणामों के लिए हलकी गीली स्किन पर मोइस्चराइज़र लगाना अच्छा होता है। इसके अलावा आप नारियल तेल और बादाम के तेल का भी इस्तेमाल कर सकती है। इसके साथ ही साबुन और अन्य स्किन केयर प्रोडक्ट्स को चुनते समय भी खास ध्यान रखें।
2. यीस्ट इंफेक्शन भी हो सकता है एक कारण :
हमारे शरीर में कई तरह के बैक्टीरिया और यीस्ट रहते है जो शरीर के लिए अच्छे होते है। लेकिन कई बार कुछ कारणों की वजह से अच्छे जीवाणुओं का विकास रुक जाता है जिसकी वजह से यीस्ट अधिक मात्रा में ग्रो होने लगता है जिसके परिणामस्वरूप यीस्ट इंफेक्शन हो जाता है। इसके होने के बाद स्किन में काफी खुजली होती है। यह स्थिति अधिकतर स्तनपान कराते समय होती है। खमीर संक्रमण होने के बाद स्किन में खुजली के साथ साथ फफोले, रेड निप्पलस, फ्लेकिंग स्किन और स्तनों में तेज दर्द भी होता है।
उपाय : इससे छुटकारा पाने के लिए आप डॉक्टर से सलाह लेकर एंटी फंगल दवाओं का सेवन कर सकती है। इसके साथ ही कुछ सावधानियां बरतकर भी आप इस संक्रमण को फैलने से रोक सकती है। इसके लिए अपने और अपने शिशु के हाथों को साफ़ करती रहें। तौलिया, ब्रा और खिलौने आदि जो यीस्ट के सम्पर्क में आ सकते है उन्हें स्वच्छ रखें। परिवार के अन्य सदस्यों की जाँच करें की कहीं वे संक्रमित तो नहीं है। साथ ही ये भी देखें की किसी को यह संक्रमण हुआ तो नहीं।
3. एक्जिमा की वजह से भी हो सकती है स्तनों में खुजली :
यह एक तरह की त्वचा संबंधित बिमारी होती है जिसमे स्किन में खुजली, ड्राई स्किन और लाल रंग के दाने उत्पन्न होने लगते है। लेकिन इस समस्या का मुख्य कारण क्या है इसके बारे में अब तक कोई बता नहीं पाया जाता है। शोधकर्ताओं की मानें तो इसका मुख्य कारण अनुवांशिक और पर्यावरणीय कारक दोनों होते है। जिससे बचने के लिए खास सावधानी बरतनी चाहिए।
उपाय : एक्जिमा की स्थिति में मोइस्चराइज़र का इस्तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है। इस परेशानी में सर्वप्रथम डॉक्टर से सलाह ही लेनी चाहिए। क्योंकि समस्या कितनी गंभीर है यह केवल डॉक्टर ही बता सकता है। बता दें, साबुन, लोशन और कुछ विशेष कपडे भी त्वचा में जलन कर सकते है इसलिए उनके प्रयोग से भी बचें। तनाव कम करें और ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन बंद करें जिससे एलर्जी हो सकती है। एक और बात, खुजली होने पर स्किन को खरोंचने की कोशिश न करें ऐसा करने से समस्या और भी अधिक कष्टदायक हो सकती है।
4. मैस्टाइटिस भी है खुजली की एक वजह :
यह एक तरह का संक्रमण होता है जिसके होने के बाद स्तनों में सूजन और दर्द होता है। यह स्थिति अधिकतर स्तनपान करने वाली महिलाओं के साथ होती है। जब दूध की नलियाँ अवरुद्ध हो जाती है। विशेषज्ञों की माने तो दूध आस पास के उत्तकों में लीक हो सकता है जिससे सूजन आ सकती है। और इस सूजन की वजह से भी संक्रमण हो सकता है। वास्तव में इस समस्या के लिए एक बैक्टीरिया जिम्मेदार होता है जो त्वचा की दरारों के माध्यम से स्किन में प्रवेश कर संक्रमण और सूजन उत्पन्न करता है। इस समस्या के होने पर स्तनों में खुजली, निप्पल से रिसाव, लालिमा, दर्द और सूजन आदि हो सकती है। ठंड लगना और थकान महसूस होना भी इसी समस्या का लक्षण है।
उपाय : इस स्थिति के होने पर सर्वप्रथम डॉक्टर से जाँच करानी चाहिए। क्योंकि घर पर इस समस्या का इलाज करना सम्भव नहीं और यह आपके लिए सुरक्षित भी नहीं होगा। लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर आप इस समस्या में अपनी देखभाल कर सकती है। इसके लिए अगर आप स्तनपान करा रही है तो उसे जारी रखें। अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन करें ताकि शरीर को आराम मिले और नमी बरकरार रहे। हालत में सुधार होने तक ब्रा और अधिक तंग कपडे नहीं पहने।
5. सनबर्न के कारण भी हो सकती है खुजली :
अधिक समय तक धुप में रहनें और बाहर घुमने की वजह से स्किन में सनबर्न हो जाता है जिसके कारण खुजली होती है। इसके अलावा सनबर्न होने पर त्वचा में लालिमा और छोटे दाने भी आने लगते है जिनमे दर्द के साथ-साथ काफी खुजली होती है।
उपाय : इससे बचने के लिए जब भी धुप में निकलें तो स्किन को कवर कर लें जिससे सूरज की हानिकारक किरणें स्किन तक न पहुंच पायें। स्किन को जितना हो सके धुप और गर्मी से बचा कर रखें। बेहतर होगा समस्या के ठीक होने पर घर पर ही रहें। साथ ही स्किन को ठंडक पहुंचाते रहें जिससे दाने और लालिमा कम हो। इतना सब करने के बाद भी यदि आराम न मिले तो आप इस विषय में डॉक्टर से सलाह ले सकती है।
6. सोरायसिस के कारण भी हो सकती है ब्रैस्ट में खुजली :
यह एक तरह की स्किन संबंधी समस्या है जिसमे त्वचा में जलन और लालिमा आती है। इस समस्या का मुख्य लक्षण फ्लेकिंग स्किन होता है। यह अक्सर आपके स्तनों के नीचे, बगल में और नितम्बों के बीच में होता है। जिसमे बिना फ्लेकिंग के लाल रंग के चिकने पैच होते है। जिसका कारण प्रतिरक्षा प्रणाली का गलत तरीके से कार्य करना होता है।
उपाय : इस समस्या के होने पर केवल डॉक्टर से ही सम्पर्क करना चाहिए। स्वयं घर पर उपचार करने से समस्या और गंभीर हो सकती है।
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प्रेगनेंसी के दौरान छोटी मोटी परेशानियां होती रहती हैं और उनका यदि सही से इलाज किया जाये तो आपको उनसे निजात भी मिल जाता है। लेकिन यदि किसी परेशानी को अनदेखा किया जाये तो वो बढ़ जाती है जिसकी वजह से आपको परेशानी हो सकती है। तो आज हम प्रेगनेंसी के दौरान आपको खांसी की समस्या होने से जुड़े कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं। यदि गर्भवती महिला को खांसी थोड़ी बहुत होती है तो उसका जल्दी इलाज कर लेना चाहिए।
क्योंकि यदि यह परेशानी बढ़ जाती है तो इसके कारण गले दर्द, गले में इन्फेक्शन, खांसी करते समय सीने में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ने के कारण शरीर में दर्द, बलगम आदि की समस्या हो जाती है। तो लीजिये अब ऐसे कुछ टिप्स हम आपको बताते हैं जो प्रेग्नेंट महिला को खांसी की समस्या से तुरंत बचाने में मदद करते हैं।
लहसुन
एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल, एंटी वायरल, एंटी बायोटिक गुणों से भरपूर लहसुन का इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को बहुत जल्दी खांसी से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए गर्भवती महिला दिन में दो से तीन बार एक कली लहसुन की अच्छे से चबाए। यदि महिला को लहसुन की गंध या स्वाद से दिक्कत हो तो आप शहद के साथ लहसुन का सेवन करें।
अदरक
थोड़ा सा अदरक लेकर उसे पीस लें और उसका रस निकाल लें। उसके बाद एक चम्मच अदरक के रस में एक चम्मच शहद डालकर उसका सेवन करें। या फिर आप अदरक को पानी में उबालकर उस पानी का सेवन दिन में दो से तीन बार थोड़ा थोड़ा करें। ऐसा करने से भी गर्भवती महिला को खांसी से आराम पाने में मदद मिलती है।
हल्दी
दिन में दो बार एक कप दूध में हल्दी डालकर उसका सेवन करें। हल्दी में एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल, एंटी वायरल, एंटी बायोटिक गुण भरपूर होते हैं जो प्रेग्नेंट महिला की खांसी की परेशानी को दूर करने में मदद करते हैं।
नारियल दूध
रात को सोने से पहले तीन से चार चम्मच नारियल दूध में एक चम्मच शहद और आधा चम्मच खसखस मिलाकर खाएं। इस उपाय को करने से गर्भवती महिला को बहुत जल्दी इस परेशानी से बचने में मदद मिलती है।
गुनगुना पानी और नमक
एक गिलास गुनगुने पानी में नमक मिलाकर दिन में तीन से चार बार गरारे करें। ऐसा करने से भी आपको बहुत जल्दी खांसी की परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। हो सके तो पीने के लिए भी गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें और फ्रिज का ठंडा पानी गलती से भी न पीएं।
निम्बू
आधा निम्बू काट लें उसके बाद उसके बीज निकालकर निम्बू पर थोड़ी काली मिर्च और काला नमक लगाए उसके बाद निम्बू को चूसें। ऐसा करने से आपको खांसी की परेशानी से बहुत जल्दी राहत पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा गुनगुने पानी में निम्बू और शहद डालकर पीने से भी खांसी की समस्या से राहत मिलती है।
बादाम
रात भर के लिए तीन चार बादाम पानी में भिगोकर रख दें। उसके बाद सुबह उठकर इसका छिलका उतार इसे पीस लें, फिर इसमें थोड़ी मिश्री या चीनी और थोड़ा सा मक्खन डालकर इसका सेवन करें। आपको तुरंत खांसी की परेशानी से आराम पाने में मदद मिलेगी।
पानी का भरपूर सेवन करें
गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी होने के कारण भी खांसी की समस्या हो सकती है। ऐसे में इस समस्या से निजात पाने के लिए गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए।
प्याज़ का रस और शहद
प्याज़ को कद्दूकस करके उसका रस निकाल लें अब दिन में दो से तीन बार एक चम्मच प्याज़ के रस और एक चम्मच शहद को मिलाकर उसका सेवन करें। ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को बहुत जल्दी खांसी की परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।
संतरे का जूस
खांसी की समस्या से बचने के लिए संतरे का रस पीना भी एक बेहतरीन और असरदार विकल्प होता है। क्योंकि इसमें विटामिन सी की अधिकता होती है जो इम्युनिटी को बढ़ाने और खांसी को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा अन्य फल व् सब्जियां जिनमे विटामिन सी मौजूद होता है उनका सेवन भी आपको जरूर करना चाहिए।
तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से प्रेग्नेंट महिला को खांसी के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो किसी दवाई का सेवन करने की बजाय खांसी की शुरुआत होते ही इन टिप्स को ट्राई करें आपको तुरंत इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी।
खूबसूरत और बेदाग़ चेहरा हर किसी को पसंद होता है। लेकिन खराब जीवनशैली, गलत खान पान, प्रदूषण के दुष्प्रभाव, स्किन की अच्छे से केयर न करने पर, शरीर में हार्मोनल अंसतुलन होने पर चेहरे पर दाग धब्बे जिन्हे आप पिम्पल कहते हैं हो जाते हैं। जो आपके चेहरे की ख़ूबसूरती को बिगाड़ देते हैं। साथ ही कई बार यह पिम्पल तो खत्म हो जाते हैं लेकिन इनके निशान चेहरे पर रह जाते हैं। मार्किट में बहुत से प्रोडक्ट्स भी मिल जाते हैं जो आपको इस समस्या से निजात दिलाने में मदद करते हैं।
लेकिन उनमे केमिकल की अधिकता होती है जिसके कारण आपकी स्किन पर उल्टा प्रभाव पड़ने का भी खतरा होता है। ऐसे में पिम्पल की समस्या से निजात पाने के लिए घरेलू तरीको का इस्तेमाल करना बेहतरीन विकल्प होता है। तो आइये अब ऐसे ही कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में जानते हैं जो पिम्पल की समस्या से निजात पाने में और आपके चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में आपकी मदद करते हैं।
टूथपेस्ट (Toothpaste)
जी हाँ, हम सही कह रहे है सफ़ेद टूथ पेस्ट को आप रुई की मदद से पिम्पल पर बिना दबाव डालें लगाएं। और रात भर के लिए इसे छोड़ दें, सुबह उठकर इसे पानी से साफ़ कर दें। एक ही बार में आपको इसका असर जरूर दिखाई देगा।
लहसुन (Garlic)
लहसुन का इस्तेमाल करने से भी आप चेहरे पर होने वाली पिम्पल की समस्या से आसानी से निजात पा सकते हैं। इसके लिए आप चार से पांच लहसुन की कलियों को अच्छे से पीसकर उसका पेस्ट तैयार करें। उसके बाद इस पेस्ट को पिम्पल पर लगाएं और दस से पंद्रह मिनट बाद चेहरे को धो लें। ध्यान रखें की लहसुन लगाने के बाद आपको स्किन पर खुजली या रेडनेस महसूस हो तो इस उपाय को आप न करें और किसी और तरीके का इस्तेमाल करें।
सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar)
पानी और सेब के सिरके को बराबर मात्रा में थोड़ा थोड़ा मिक्स करें। अब इस मिक्सचर को रुई की मदद से पिम्पल पर लगाएं। और दस से पंद्रह मिनट बाद ठन्डे पानी से चेहरे को धो लें।
बेकिंग सोडा (Baking Soda)
बेकिंग सोडा में पानी मिलाकर एक पतला पेस्ट तैयार करें अब इस पेस्ट को पिपंल पर लगाएं। पेस्ट को पांच से साथ मिनट लगाने के बाद गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें। फिर चेहरे पर मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं। एक बार अपने हाथ की स्किन पर बेकिंग सोडा लगाकर देखें की आपको किसी तरह की एलर्जी तो नहीं हो रही उसके बाद ही इसे चेहरे पर लगाएं।
एलोवेरा (Alovera)
एलोवेरा के पत्ते को काटकर उसमे से जैल निकाल लें, अब इस जैल को अपने चेहरे पर लगाएं। आप चाहे तो पंद्रह से बीस मिनट इसे पिम्पल पर लगाने के बाद चेहरे को धो लें, नहीं तो रातभर के लिए एलोवेरा जैल को चेहरे पर रहने दे। ऐसा करने से पिम्पल की समस्या से निजात मिलने के साथ चेहरे को ग्लोइंग बनाने में भी मदद मिलती है। यदि आपके घर के पास एलोवेरा नहीं है तो मार्किट से एलोवेरा जैल लाकर भी आप इस्तेमाल कर सकते हैं।
मुल्तानी मिट्टी (Multani Soil)
एक कटोरी में थोड़ा सा मुल्तानी मिट्टी का पाउडर, गुलाबजल, निम्बू का रस डालकर अच्छे से मिलाएं। अब इस पेस्ट को पूरे चेहरे या केवल पिम्पल पर लगाएं। लगाने के बीस मिनट बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें। इसके अलावा रोजाना रात को सोने से पहले रुई की मदद से चेहरे पर गुलाबजल लगाने से भी आपको फायदा मिलता है।
निम्बू का रस (Lemon Juice)
निम्बू का रस रुई की मदद से पिम्पल पर लगाएं और रातभर के लिए उसे ऐसे ही रहने दें। उसके बाद सुबह उठकर ठन्डे पानी से चेहरे को धो लें। आपको जरूर फायदा मिलेगा।
बर्फ (Ice Cube)
बर्फ का एक टुकड़ा लेकर पिम्पल पर लगाएं और दो से तीन मिनट पर पिम्पल पर घुमाएं। ध्यान रखें की ज्यादा दबाव न डालें और ज्यादा देर तक ऐसा न करें। ऐसा करने से भी पिम्पल की समस्या से बहुत जल्दी निजात पाने में मदद मिलती है।
शहद (Honey)
औषधीय गुणों से भरपूर शहद का इस्तेमाल करने से भी पिम्पल की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप साफ़ ऊँगली से शहद को पिम्पल पर लगाएं और आधे घंटे के लिए छोड़ दें। उसके बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें।
हल्दी (Turmeric)
हल्दी में पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें अब इस पेस्ट को पिम्पल पर लगाएं। सूखने के बाद इसे साफ़ कर दें, आप चाहे तो थोड़ा सा बेसन और निम्बू का रस भी मिक्स कर सकते हैं।
चन्दन पाउडर (Sandalwood Powder)
चन्दन पाउडर में गुलाबजल मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को पिम्पल पर लगाएं। सूखने के बाद चेहरे को साफ़ कर दें।
नीम (Neem)
नीम के पत्तों को सुखाकर पीस लें और पाउडर बना लें। अब बराबर मात्रा में मुल्तानी मिट्टी पाउडर, नीम के पत्तों का पाउडर और गुलाबजल मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को पिम्पल पर लगाएं। और सूखने के बाद चेहरे को धो लें।
कैस्टर आयल (Castor Oil)
चेहरे को धोने के बाद अच्छे से साफ़ करके सूखा लें उसके बाद कैस्टर आयल को पिम्पल पर लगाएं। और थोड़ी देर बाद चेहरे को धो लें।
पपीता (Papaya)
पपीते के कुछ टुकड़ों को पीसकर पिम्पल पर लगाएं और बीस से पच्चीस मिनट बाद चेहरे को धो लें। ऐसा करने से भी आपको चेहरे पर होने वाली पिम्पल की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।
तो यह हैं कुछ घरेलू नुस्खे जिन्हे ट्राई करने आपके चेहरे पर होने वाली पिम्पल की समस्या से निजात पा सकते हैं। यदि आपको भी यह समस्या है तो आप भी इनमे से किसी भी टिप्स को कुछ दिनों तक ट्राई करें आपको खुद इसका असर साफ़ दिखाई देगा।
गर्भवती महिला को कौन से फल खाने चाहिए और कौन से नहीं, गर्भवती महिलाओं के लिए फल, Fruits for pregnancy, Fruits to Avoid During Pregnancy, Pregnancy Diet
माँ बनना हर महिला के लिए बेहद सुखद एहसास होता है। क्योंकि इसी के बाद उसका नारीत्व पूर्ण होता है। गर्भवती होने के बाद महिला को अपना ख़ास ध्याना रखना होता है क्योंकि अब वह अकेली नहीं है उसके गर्भ में एक और नन्ही जान पल रही है। गर्भवती होते ही हर महिला अपने होने वाले बच्चे के बारे में सोचने लगती है। की किस समय वो क्या कर रहा होगा? कैसा दिख रहा होगा?
सभी यही चाहती है की उनके पेट में पल रहे बच्चे का अच्छे से विकास हो, उसके शरीर का प्रत्येक अंग अच्छे से ग्रोथ कर सके। इसीलिए तो वह अपने खान पान से लेकर रहन सहन तक सभी में उचित बदलाव करती है। लेकिन जब प्रश्न खाने पर आते है तो वे यही सोचने लगती है की उन्हें क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?
गर्भावस्था में केवल शारीरिक ध्यान रखना काफी नहीं होता उसके लिए आपको अपने आहार पर भी ध्यान देना होता है। क्योंकि इस समय खाया जाने वाला प्रत्येक आहार आपके शिशु तक पहुंचता है। ऐसे में जरुरी है की केवल उन्ही खाद्य पदार्थों को खाया जाए तो बच्चे को किसी तरह का नुकसान न करें।
क्योंकि कई बार माँ के गलत आहार लेने और गलत चीजों के सेवन करने से भी बच्चे के शारीरिक और मानसिक ग्रोथ पर फर्क पड़ता है जो उसके लिए अच्छा नहीं होता। यहाँ हम आपको गर्भावस्था में खाये जाने वाले फलों से जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में बताने जा रहे है जिसके मुताबिक आप जान पाएंगी की गर्भावस्था में कौन से फल खाने चाहिए और कौन से नहीं?
गर्भवती महिला को कौन से फल खाने चाहिए और कौन से नहीं?
गर्भावस्था में कौन से फल खाने चाहिए?
गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए फल बहुत अहम भूमिका निभाते है। क्योंकि इनमे प्रोटीन, विटामिन और कई तरह के मिनरल्स होते है जो प्रेगनेंट महिला के लिए बेहद जरुरी होते है। ये बच्चे में उत्तकों और कोशिकाओं को विकसित करने में मदद करते है। इनमे मौजूद विटामिन सी और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत और स्वास्थ्य बनाने में मदद करते है। आइये सबसे पहले जानते है गर्भावस्था में कौन से फल खाने चाहिए –
1. केला :
गर्भावस्था में बच्चे के विकास के लिए खाये जाने वाले फलों में केला सबसे पहले आता है। यह काफी फायदेमंद और स्वादिष्ट फल है। इसमें फोलेट, विटामिन सी, विटामिन बी 6, पोटैशियम और मैग्नेशियम पाया जाता है। फोलेट प्रसव के दौरान भ्रूण को फैलोपियन ट्यूब के दोषों से बचाने में मदद करता है। विटामिन बी और सोडियम जी मचलने और उलटी की समस्या को कम करता है। डॉक्टर भी पहले तीन महीने रोजाना एक केला खाने की सलाह देते है।
2. शरीफा :
गर्भवती महिला को इस दौरान शरीफा खाना चाहिए। यह प्रेग्नेंसी के दौरान खाये जाने वाले सबसे अच्छे फलों में से एक है। इसमें विटामिन ए और सी अच्छी मात्रा में पाया जाता है जो शिशु की आंखों, त्वचा, बाल और फेस के उत्तकों के लिए अच्छा होता है। इस अवस्था में कब्ज रोकने के लिए शरीफा बहुत लाभकारी होता है।
3. चीकू :
गर्भवती स्त्रियों के लिए चीकू बहुत अच्छा होता है इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स, विटामिन ए, कार्बोहायड्रेट और ऊर्जा की भरपूर मात्रा पाई जाती है जो माँ को स्तनपान कराने में मदद करती है। गर्भावस्था के दौरान चक्कर आने और मतली की समस्या में इसका सेवन करना अच्छा होता है। यह कोलोजन के उत्पादन को भी सुधारता है जिससे पेट से जुडी बीमारियां दूर होती है।
4. तरबूज :
इस फल में विटामिन ए, सी, बी 6, मैग्नेशियम और पोटैशियम की भरपूर मात्रा पाई जाती है। शुरू के तीन महीनों में तरबूज खाने से दिल मजबूत होता है और हाथ पैरों की सूजन कम होती है। इसके अलावा यह मांसपेशियों की ऐंठन कम करने में मदद करता है और आपको हाइड्रेट रखता है।
5. आम :
गर्भावस्था में कच्चों आमों का सेवन नहीं करना चाहिए अगर आप खाना चाहती है तो पके हुए आम खाएं। यह पाचन को सही रखने, कब्ज को कम करने और कई तरह की बिमारियों के संक्रमण से बचाता है। केवल गर्मियों में मौसम आम खाना अच्छा होता है दूसरे मौसम में इसके सेवन से बचें।
6. सेब :
सेब स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होता है। यह बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और शक्ति को बढ़ाता है। गर्भावस्था में सेब खाने से घरघराहट, अस्थमा और एक्जिमा की समस्या के खतरे को कम करता है। इसके अलावा इसमें विटामिन ए, इ, डी और जिंक भी पाया जाता है।
7. कीवी :
पकी हुई कीवी गर्भावस्था के लिए अच्छी मानी जाती है। इसमें विटामिन सी, ई, ए, पोटैशियम, फॉस्फोरस, मैग्नेशियम, फोलिक एसिड और फाइबर जैसे पोषक तत्व पाए जाते है। यह श्वसन प्रणाली को मजबूत करके खांसी, सर्दी, जुखाम, बुखार आदि की समस्या को दूर करते है।
8. अमरुद :
गर्भवती स्त्रियों के लिए अमरुद खाना बहुत लाभकारी होता है। अमरुद का रस माँ के लिए लाभकारी होता है। यह आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करता है और साथ ही BP को नियंत्रित करने में भी मदद करता है।
गर्भावस्था में कौन से फलों का सेवन नहीं करना चाहिए?
1. पपीता :
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए, इसे खाने से गर्भपात की समस्या हो सकती है। कच्चे या आधे पके हुए पपीते में लेटेक्स होते जो गर्भाशय के लिए नुकसाहदेह होता है। डॉक्टरों की माने तो पका हुआ पपीता भी गर्भाशय के लिए अच्छा नही होता लेकिन अगर पपीता आधा कच्चा या आधा पका हुआ है तो भी उसका सेवन नहीं करना चाहिए।
2. काले अंगूर :
डॉक्टरों की माने तो गर्भवती महिलाओं के लिए अंगूर बिलकुल अच्छा नहीं होता। अंगूर काले हो या हरे प्रेगनेंसी में कभी भी इनका सेवन नहीं करना चाहिए। विशेषकर पहले तीन महीनों में। क्योंकि इन्हे खाने से शरीर में गर्मी बढ़ती है जो गर्भ में पल रहे शिशु के लिए हानिकारक होती है।
3. अनानास :
गर्भवती स्त्रियों को कभी भी अनानास का सेवन नहीं करना यह गर्भाशय को नरम करने का काम करता है। जो बच्चे की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं। इसलिए इसका सेवन न करें।
4. संतरा :
संतरा ही नहीं, कोई भी खट्टा फल गर्भावस्था के दौरान नहीं खाना चाहिए। यह आपके शिशु और आपके स्वास्थ्य को बहुत नुकसान पहुंचाता है। खट्टे फल डिलीवरी के समय भी नुकसान पहुंचाते है।
अब तो आप भली भांति समझ गयी होंगी की इस अवस्था में कौन से फल खाने चाहिए और कौन से नहीं? लेकिन ध्यान रहे हो सकता है आपको इनमे से किसी फल की आवश्यकता हो। ऐसे में डॉक्टरी सलाह से ही इनका सेवन करें। लेकिन पपीते का सेवन भूलकर भी न करें।