Home Blog Page 14

प्रेगनेंसी में मुँह के स्वाद के कड़वा होने के कारण और उपाय

प्रेगनेंसी का समय हर एक महिला के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है क्योंकि इस दौरान महिला अकेली नहीं होती है बल्कि उसके गर्भ में पल रहे नन्हे शिशु की जिम्मेवारी भी महिला की ही होती है। साथ ही गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान महिला उन परेशानियों को ख़ुशी ख़ुशी सहन भी कर लेती है। क्योंकि उसे पता होता है की यह छोटो छोटी दिक्कतें उन्हें बहुत बड़ी ख़ुशी देने वाली हैं। तो आज इस आर्टिकल में भी हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली एक समस्या के बारे में ही बात करने जा रहे हैं। और वह समस्या है की गर्भावस्था के दौरान महिला के मुँह का स्वाद कड़वा क्यों हो जाता है।

गर्भावस्था के दौरान महिला के मुँह स्वाद कड़वा होने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं को मुँह का स्वाद कड़वा होने की समस्या हो सकती है और यह समस्या होने के बाद महिला के खाने पीने की इच्छा में भी कमी आ सकती है। प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला के मुँह का स्वाद कड़वा हो जाता है तो इसके कई कारण हो सकते हैं। जैसे की:

हार्मोनल बदलाव

गर्भावस्था के समय में महिला के शरीर में लगातार हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं और उनका असर महिला को महसूस भी होता है। जैसे की शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण ही जीभ के स्वाद में भी बदलाव आ सकता है और महिला को मुँह के स्वाद में कड़वापन महसूस होने लगता है।

शरीर में पानी की कमी

जिन गर्भवती महिलाओं के शरीर में पानी की कमी होती है उन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान जीभ का सूखा रहना, जीभ के स्वाद में कड़वापन आदि महसूस हो सकता है।

उल्टियां अधिक आना

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को उल्टियां होना बहुत ही आम बात होती है ऐसे में यदि महिला को उल्टियां होती है तो बार बार उल्टी करने की वजह से महिला को जीभ में कड़वापन महसूस हो सकता है।

दवाइयों का सेवन

गर्भावस्था के समय महिला कैल्शियम, आयरन, जैसी दवाइयों का सेवन भी करती है ऐसे में उन दवाइयों का सेवन करने के कारण भी महिला के मुँह के स्वाद में कड़वापन महसूस हो सकता है।

पेट से जुडी समस्या

जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान अपच, एसिडिटी जैसी समस्या प्रेगनेंसी के दौरान अधिक रहती है। उन गर्भवती महिलाओं को जीभ के स्वाद में कड़वेपन से जुडी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

शरीर में विटामिन्स की कमी

जिन गर्भवती महिलाओं के शरीर में विटामिन्स की कमी होती है उन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान यह समस्या होने के खतरा अधिक होता है।

मधुमेह की समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान जो महिलाएं मधुमेह की समस्या से पीड़ित होती है उन महिलाओं को भी मुँह में कड़वेपन की समस्या हो सकती है।

मुँह के कड़वेपन को दूर करने के लिए प्रेग्नेंट महिला अपनाएँ यह टिप्स

गर्भवती महिला को मुँह के कड़वेपन की समस्या होने के कारण महिला के खाने पीने की इच्छा में कमी आ सकती है। जिसकी वजह से महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने का खतरा भी रहता है। और जब महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होती है। तो इसकी वजह से माँ व् बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में महिला कुछ आसान टिप्स को फॉलो करके इस समस्या से निजात पा सकती है।

मुँह के कड़वेपन को दूर करने के उपाय

  • महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए ऐसा करने से महिला को मुँह के कड़वेपन की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।
  • प्रेग्नेंट महिला को निम्बू, संतरा, किन्नू जैसे फल खाने चाहिए इन फलों का स्वाद बहुत अच्छा होता है जिससे महिला के मुँह के स्वाद को भी बेहतर करने में मदद मिलती है।
  • प्रेग्नेंट महिला को बार बार कुल्ला करना चाहिए जिससे मुँह के स्वाद को सही करने में मदद मिल सकें।
  • महिला को नारियल पानी, छाछ, निम्बू पानी, जैसी चीजों का सेवन भी करना चाहिए इससे मुँह का स्वाद बेहतर होगा साथ ही महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में भी मदद मिलेगी।
  • महिला को अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए जिससे शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को सही रहने में मदद मिल सकें ऐसा करने से भी महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • प्रेग्नेंट महिला को उन चीजों की गंध से दूर रहना चाहिए जिनकी गंध उनके प्रेगनेंसी के दौरान अच्छी नहीं लगती है।
  • जीभ के स्वाद को सही रखने के लिए महिला को अपनी पसंद का कुछ हेल्दी व् टेस्टी बनाकर खाना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान मुँह में कड़वापन होने के कारण व् इस समस्या से बचाव के कुछ उपाय। यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको भी इन टिप्स के बारे में जरूर पता होना चाहिए ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको अपने खाने पीने में किसी भी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े।

Causes and remedies for bitter taste of mouth during pregnancy

गर्भ में बच्चा कब हलचल करता है?

गर्भ में शिशु के आने की खबर के साथ ही महिला का अपने शिशु के साथ एक गहरा रिश्ता जुड़ जाता है। उसके बाद प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला उस पल का इंतज़ार करती है जब महिला अपने शिशु को करीब से महसूस कर पाएगी। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान ही ऐसे बहुत से अनुभव होते हैं जब महिला अपने शिशु के अहसास को महसूस कर पाती है। जैसे की शिशु के दिल की धड़कन को सुनकर, शिशु की हलचल को महसूस करके महिला इस अनुभव का अहसास कर सकती है। और अधिकतर महिलाएं शिशु की हलचल को महसूस करने के लिए बहुत उत्सुक भी होती है की कब उनका शिशु किक करेगा। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं की गर्भ में शिशु कब हलचल करना शुरू कर देता है।

कब करता है गर्भ में शिशु हलचल?

गर्भ में शिशु का विकास पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। और गर्भनाल के माध्यम से शिशु तक शिशु के विकास के लिए सभी जरुरी पोषक तत्व पहुंचाए जाते हैं। ऐसे में जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे शिशु गर्भ में घूमने लगता है। और शिशु के घूमने पर जो हलचल होती है उसे महिला महसूस करती है। और यह हलचल प्रेगनेंसी के चौथे हफ्ते के आखिर तक या पांचवें महीने की शुरुआत में महसूस होने लग जाती है। यानी की प्रेगनेंसी के चौहदवें हफ्ते के बाद महिला को गर्भ में शिशु की हलचल महसूस होने लगती है।

कितनी होती है शिशु की हलचल?

आप चाहे तो दिन भर में शिशु कितनी बार किक करता है इसे गिन सकते हैं। लेकिन शुरुआत में यह हलचल बहुत कम होती है और जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे गर्भ में शिशु की हलचल भी बढ़ने लगती है। यदि आपको गर्भ में शिशु की हलचल कम महसूस होती है तो यह इस बात की और भी इशारा करता है की गर्भ में शिशु के विकास में कमी है।

क्या शिशु बाहर की चीजों पर प्रतिक्रिया देकर हलचल करता है?

जी हाँ, गर्भ में शिशु के अंग विकसित होने के बाद शिशु के अंगों के काम करने की प्रक्रिया का भी विकास होता है। जिसके कारण शिशु की सुनने की क्षमता बढ़ती है। ऐसे में जब तेज आवाज़ होती है, महिला शिशु से बातें करती है, बहुत ज्यादा शांति होती है, तो ऐसे में शिशु ज्यादा हलचल कर सकता है। क्योंकि इसका मतलब होता है की शिशु बाहर क्या हो रहा है उस चीज प्रतिक्रिया दे रहा है और इस दौरान शिशु और भी ज्यादा तेजी से हलचल कर सकता है। जिसके कारण महिला को हल्का पेट में दर्द भी महसूस हो सकता है।

शिशु की हलचल न होने पर क्या करें?

ऐसा नहीं है की गर्भ में शिशु पूरा दिन हलचल करें या फिर यदि आप काम में व्यस्त हैं तो हो सकता है की आपको शिशु की हलचल में कमी महसूस हो। ऐसे में आप थोड़ी देर आराम से लेट जाएँ या पानी पीएं ऐसा करने के बाद आपको शिशु की हलचल महसूस होगी। लेकिन उसके बाद भी यदि आपको शिशु की हलचल महसूस नहीं होती है तो यह परेशानी का कारण होता है। क्योंकि गर्भ में शिशु के हलचल न करने का मतलब होता है की गर्भ में शिशु को रिस्क है। ऐसे में आपको जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए।

तो यह है गर्भ में शिशु के हलचल करने से जुड़े टिप्स, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी यह सभी जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान अपना अच्छे से ध्यान रखें ताकि आपको और आपके शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

Baby kick in pregnancy

पुरुषों को खजूर क्यों खाने चाहिए?

खजूर का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि खजूर में कैलोरी, कार्ब्स, फाइबर, प्रोटीन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, विटामिन्स, एंटीऑक्सीडेंट्स, कॉपर व् अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। खासकर पुरुषों को नियमित रूप से खजूर का सेवन करना चाहिए क्योंकि खजूर का सेवन करने से पुरुषों को बहुत से सेहत सम्बन्धी फायदे मिलते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं की पुरुषों को खजूर का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

स्पर्म काउंट बढ़ता है

आज कल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बहुत से ऐसे पुरुष हैं जो स्पर्म काउंट की कमी की समस्या से झूझ रहे हैं। और इसी कारण न तो वो अपनी शादीशुदा लाइफ को अच्छे से एन्जॉय कर पा रहे हैं और न ही उन्हें समय पर पिता बनने का सुख मिल रहा है। तो इस समस्या के समाधान के लिए पुरुष खजूर का सेवन कर सकते हैं क्योंकि खजूर में एस्ट्राडियोल और फ्लेवोनोइड मौजूद होते हैं जो स्पर्म की क़्वालिटी, स्पर्म की संख्या को बढ़ाने में मदद करते हैं। उसके बाद जब ये समस्या दूर होने लगती है तो धीरे धीरे पुरुष अपनी शादीशुदा लाइफ को अच्छे से एन्जॉय कर पाते हैं।

हड्डियां होती है मजबूत

खान पान सही न होने के कारण आज कल लोग समय से पहले ही बूढ़ा महसूस करने लगते हैं और उन्हें थकान, कमजोरी जैसी समस्या होने लगती है। लेकिन खजूर का रोजाना सेवन करने से इस समस्या को दूर करने में मदद मिलती है। क्योंकि खजूर में कैल्शियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम आदि मौजूद होते हैं और यह सभी पोषक तत्वों हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करते हैं।

दिमाग होता है तेज

खजूर में विटामिन बी और कोलिन जैसे पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं जो मस्तिष्क के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। ऐसे में खजूर का सेवन करने से पुरुषों की यादाश्त को तेज रहने, सीखने की क्षमता को बढ़ावा मिलने में मदद मिलता है। ऐसे में छोटे बच्चों को बचपन से ही खजूर खिलाना चाहिए ताकि बच्चे के दिमाग को तेज करने में मदद मिल सके।

पाचन शक्ति रहती है मजबूत

आज कल लोगो के पास खाने का भी समय नहीं है साथ ही क्या खाना चाहिए और क्या नहीं इसका लोग बिल्कुल ध्यान नहीं रखते हैं जिसकी वजह से आज कल अधिकतर लोग पेट सम्बन्धी समस्या से परेशान रहते हैं। लेकिन खजूर का सेवन करने से इस समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकती है। क्योंकि खजूर में फाइबर प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है। जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है जिससे पेट सम्बन्धी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

स्किन और बालों के लिए है फायदेमंद

आज कल समय से पहले ही पुरुषों के बाल झड़ने, स्किन से जुडी समस्या होना अधिक होने लग गया है। ऐसे में इस समस्या से बचे रहने और बालों व् स्किन की चमक को बरकरार रखने के लिए पुरुष खजूर का सेवन कर सकते हैं। क्योंकि खजूर में आयरन, विटामिन सी, विटामिन डी जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो बालों और स्किन की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने में आपकी मदद करते हैं।

ब्लड शुगर लेवल रहता है कण्ट्रोल

जो पुरुष डाइबिटीज़ की समस्या से पीड़ित है उन्हें खजूर का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि खजूर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम होता है जिसकी वजह से इसका सेवन करने पर ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

एनर्जी मिलती है

खजूर पोषक तत्वों की खान होता है ऐसे में पुरुष यदि सुबह रोजाना खजूर का सेवन करता है तो इससे उनके अंदर एनर्जी को बूस्ट होने में मदद मिलती है। जिससे वो पूरा दिन फ्रैश व् एक्टिव महसूस करते हैं।

वजन बढ़ता है

जिन पुरुषों का वजन कम होता है उन्हें खजूर का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि खजूर में प्रोटीन भी मौजूद होता है। जो शरीर में कोशिकाओं को अच्छे से विकसित होने व् उनकी केयर में मदद करता है जिससे वजन को सही रहने में मदद मिलती है।

सम्बन्ध बनाने की क्षमता में वृद्धि होती है

खजूर में एमिनो एसिड्स मौजूद होते हैं ऐसे में माना जाता है की दूध के साथ खजूर का सेवन यदि कोई पुरुष रोजाना करता है तो इससे उसकी सम्बन्ध बनाने की पावर में वृद्धि होती है। जिससे वो अपनी शादीशुदा लाइफ को अच्छे से एन्जॉय कर पाता है।

खून की कमी होती है पूरी

खजूर आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होता है ऐसे में खजूर का सेवन करने से पुरुषों में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है जिससे उन्हें खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल रहता है कण्ट्रोल

खजूर का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल रहने में भी मदद मिलती है क्योंकि खजूर में फैट बहुत कम होता है सतह ही कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है। और कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल रहने से हदय सम्बन्धी परेशानियां होने का खतरा भी कम होता है।

किस तरह करें खजूर का सेवन?

  • आप ड्राई फ्रूट्स के साथ मिलाकर खजूर का सेवन कर सकते हैं।
  • रात भर खजूर को पानी में भिगोकर रखें और उसके उसे पानी में से निकालकर खाली पेट उसका सेवन करें। ऐसा करने से भी आपको खजूर खाने के बेहतरीन फायदे मिलते हैं।
  • दूध में उबालकर भी खजूर का सेवन किया जा सकता है या फिर आप वैसे भी गर्म दूध के साथ खजूर का सेवन कर सकते हैं।
  • खीर, स्मूदी, ओट्स, सलाद आदि में डालकर भी खजूर का सेवन किया जा सकता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो खजूर का सेवन करने से पुरुषों को मिलते हैं ऐसे में पुरुषों को सेहत सम्बन्धी इन बेहतरीन फायदों के लिए रोजाना चार से पांच खज्जूर का सेवन जरूर करना चाहिए।

Health benefits of dates for men

प्रेगनेंसी में आयरन क्यों जरुरी है? आयरन से भरपूर फूड्स कौन से हैं

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को आयरन का सेवन भरपूर मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि आयरन महिला को स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए भी बहुत जरुरी होता है साथ ही प्रेगनेंसी में शरीर में आयरन की जरुरत भी अधिक होती है। ऐसे में डॉक्टर्स आयरन युक्त डाइट लेने के साथ महिला को आयरन की गोलियों का सेवन करने की सलाह भी देते हैं।

साथ ही यदि महिला आयरन का भरपूर सेवन नहीं करती है तो इसकी वजह से शरीर में खून की कमी हो जाती है जिसे की एनीमिया कहा जाता है। और एनीमिया होने के कारण माँ और शिशु दोनों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में आयरन क्यों जरुरी है। और कौन कौन से फूड्स में आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।

प्रेगनेंसी में आयरन क्यों है जरुरी?

गर्भावस्था के दौरान शरीर में आयरन का होना इसीलिए जरुरी है ताकि गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से हो सकें, महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें, इसके अलावा और आयरन के अन्य फायदे भी माँ और बच्चे को मिल सकें। जिससे प्रेगनेंसी में प्रसव में आने वाली दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिल सके। तो आइये अब प्रेगनेंसी में आयरन का भरपूर सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं उसके बारे में जानते हैं।

ऑक्सीजन: ब्लड के माध्यम से शरीर के सभी अंगो तक और शिशु तक ऑक्सीजन पहुँचती है। और यह ऑक्सीजन लाल रक्त कोशिकाओं में पाए जाने एक प्रोटीन जिसे हीमोग्लोबिन कहा जाता है उसकी मदद से पूरे शरीर में पहुँचती है। जिससे महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

खून की कमी पूरी होती है: प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अतिरिक्त खून की शरीर में जरुरत होती है साथ ही प्रसव के दौरान भी महिला को बहुत ब्लड का फ्लो हो जाता है। ऐसे में आयरन लेने से शरीर में खून की कमी पूरी होती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान और प्रसव के दौरान खून की कमी के कारण होने वाली परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।

बच्चे का विकास होता है बेहतर: प्रेगनेंसी के दौरान आयरन का भरपूर सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली समस्या से होता है बचाव: आयरन का भरपूर सेवन करने से महिला को समय से पहले डिलीवरी, प्रेगनेंसी के दौरान थकान व् कमजोरी, जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ते हैं: प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में खून की कमी पूरी होने से सामान्य प्रसव होने के चांस बढ़ाने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के दौरान कौन से फूड्स खाने से आयरन मिलता है?

गर्भावस्था के दौरान शरीर में खून की कमी को पूरा रखने के लिए आयरन की दवाई तो देते ही हैं। लेकिन साथ ही डॉक्टर्स आयरन युक्त आहार का सेवन करने की सलाह भी देते हैं। ऐसे में आयरन के लिए गर्भवती महिला हरी सब्जियां जैसे की पालक, मटर, ड्राई फ्रूट्स, काला चना, मछली, चिकन, दालें, अंडा, आदि। और यह सभी खाद्य पदार्थ प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। लेकिन ध्यान रखें की आप इन्हे सही मात्रा और सही तरीके से खाएं। ताकि आपको आयरन भरपूर मात्रा में मिल सकें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में आयरन लेने के फायदे व् आयरन किन खाद्य पदार्थों में मौजूद होता है उससे जुड़े टिप्स, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी यह जानकारी होनी चाहिए। ताकि गर्भावस्था के दौरान शरीर में खून की कमी नहीं हो जिससे माँ और बच्चा दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

Why iron is important during pregnancy

चांदी की पायल कैसे साफ़ करें?

चांदी की पायल अधिकतर सभी महिलाएं पहनती है और रोजाना पहने रखने के कारण वो धीरे धीरे काली पड़ने लगती है। साथ ही रखे रखे भी चांदी अपनी चमक खो देती है। ऐसे में चांदी की खोई चमक आप चाहे तो वापिस ला सकती है और इसके लिए आपको जरा पैसे भी खर्च करने की जरुरत नहीं है। क्योंकि घर में रखी कुछ चीजों की मदद से भी आप अपनी चांदी की पायल को चमका सकती है तो आइये अब इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं की आप घर में बैठे चांदी की पायल की खोई चमक को कैसे वापिस ला सकते हैं।

टूथ पेस्ट

आपकी दांतों की चमक को बरकरार रखने वाला कोलगेट आपकी चांदी की पायल को साफ़ करने में भी आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए आप अपनी चांदी की पायल पर कोलगेट लगाएं फिर इसे गुनगुने पानी में डाल दें और दो से तीन मिनट बाद इसे ब्रश की मदद से साफ़ करें। उसके बाद साफ़ पानी से इसे धोकर पोछ लें आपको कोलगेट का असर अपनी पायल पर साफा दिखाई देगा।

सैनिटाइज़र

हाथों को कीटाणुओं से सुरक्षित रखने वाला सैनिटाइज़र भी आपकी चांदी की पायल को चमकाने में आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए आपको थोड़ी सेर अपनी पायल को हैंड सैनिटाइज़र में डुबोकर रखना है और उसके बाद इसे साफ़ कपडे से पोछ लेना है। आपको ऐसा लगेगा जैसे की आपकी पायल आपने अभी अभी पोलिश करवाई है।

हेयर कंडीशनर

आपके बालों की चमक को बढ़ाने वाला हेयर सैनिटाइज़र भी आपकी चांदी की चीजों की खोई चमक को वापिस लाने में आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए आप हेयर कंडीशनर को पायल पर लगाएं या फिर गुनगुने पानी में हेयर कंडीशनर डालकर अपनी पायल को उसमे डुबोकर रख दें। उसके बाद आप हाथों या ब्रश की मदद से पायल को रगड़ें फिर साफ़ पानी से धोकर और साफ़ कपडे से पोछकर पायल को देखें।

सोडा और निम्बू

निम्बू और सोडा का इस्तेमाल करने से भी पायल की खोई चमक को वापिस लाने में मदद मिलती है इसके लिए आप अपनी पायल को थोड़ी देर के लिए निम्बू और सोडा के घोल में डालकर रख दें। और उसके बाद उसे बाहर थोड़ा हलके हाथ से रगड़ें और साफ़ पानी से धोकर पोछ लें। ऐसा करने से आपकी पायल की चमक को बरकरार रखने में मदद मिलती है।

सर्फ यानी डिटर्जेंट

कपडे धोने के सर्फ का इस्तेमाल करके भी आप अपनी चांदी की पायल की खोई चमक को वापिस ला सकती है। इसके लिए आप गुनगुने पानी में सर्फ डालकर थोड़ी देर अपनी पायल को उसमे डुबोकर रख दें। उसके बाद इसे ब्रश की मदद से या अपने हाथ से रगड़कर इसे साफ़ करें। साफ़ करने के बाद इसे साफ़ पानी में धोकर सूखे कपडे से पोछ लें आप देखेंगे की आपकी पायल बिल्कुल नई जैसी दिखाई देगी।

टोमेटो सॉस

टोमेटो सॉस का इस्तेमाल करके भी आप अपनी चांदी की पायल की चमक को वापिस ला सकती है। इसके लिए आप चांदी की पायल पर सॉस लगाकर उसे ब्रश से रगड़ें या फिर थोड़ी देर के लिए पायल को सॉस लगाकर रख दें। उसके बाद ब्रश की मदद से पायल को साफ़ करें और साफ़ पानी से धोकर उसे पोछ लें। ऐसा करने से भी आप अपनी चांदी की पायल की चमक को वापिस ला सकती है।

एल्युमिनियम फॉयल

एल्युमिनियम फॉयल की मदद से पायल साफ़ करने के लिए सबसे पहले आप एक लीटर पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा डालें। उसके बाद बाद पायल निकाल कर इसे फॉयल पेपर से साफ़ करें ऐसा करने से आप देखेंगे की आपकी पायल बिल्कुल नई जैसी हो गई है।

सिरका

सिरके का इस्तेमाल करके भी आप चांदी के गहनों को चमका सकते हैं इसके लिए आप एक कप सिरके में एक चम्मच नमक मिलाएं फिर उसमे पायल को डालकर रख दें। उसके बाद इसे गुनगुने पानी से धोएं और साफ कपडे से पोछकर रख लें। ऐसा करने से भी आप अपनी चांदी की पायक की चमक वापिस ला सकते हैं।

बेकिंग सोडा

बेकिंग सोडा चांदी की चमक को वापिस लाने का एक बेहतरीन उपाय है। इसके लिए आप एक चम्मच बेकिंग सोडा में गुनगुना पानी मिलाकर पेस्ट तैयार करें। उसके बाद इस पेस्ट को पायल पर लगाएं। पायल पर पेस्ट लगाने के बाद आप आप इसे रख दें फिर थोड़े गुनगुने पानी और ब्रश का इस्तेमाल करके इसे रगड़ें। फिर साफा पानी का इस्तेमाल करके इसे धो दें। ऐसा करने से भी आप पायल की चमक को वापिस ला सकते हैं।

नमक

गुनगुने पानी में नमक डालकर थोड़ी देर तक चांदी के गहनों को डालकर रख दें उसके बाद टूथब्रश की मदद से उसे रगड़ें। ऐसा करने से भी आप चांदी की पायल व् अन्य गहनों की चमक को वापिस ला सकते हैं।

सिल्वर पोलिश

आज कल मार्किट में सिल्वर पॉलिश आसानी से मिल जाती है ऐसे में आप मार्किट से सिल्वर पोलिश लाकर आसानी से घर में चांदी की पायल को पोलिश कर सकते हैं। इससे आपकी पायल व् अन्य गहनें वापिस से चमकदार हो जायेंगे।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से आप घर में बैठे आसानी से अपनी पायल की चमक को वापिस ला सकती है। ऐसे में अब त्यौहार आने ही वाले है तो आप अपने चांदी के गहनों या बर्तनों को चमकाना चाहते हैं तो आप भी इन आसान तरीको को ट्राई कर सकते हैं।

Tips to clean silver at home

दूध पिलाने वाली महिला को क्या-क्या नहीं खाना चाहिए?

जिस तरह प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहा नवजात अपने बेहतर विकास के लिए अपनी माँ पर निर्भर करता है उसी तरह जन्म के बाद भी शिशु अपने विकास के लिए अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। और जैसे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को उन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए जिससे शिशु के विकास में किसी तरह की कमी आये उसी तरह बच्चे को दूध पिलाने वाली महिलाओं को भी कुछ चीजों का सेवन करने की मनाही होती है। जो महिलाएं शिशु को स्तनपान नहीं करवाती है उन्हें खान पान में ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत नहीं होती है।

लेकिन डिलीवरी के बाद जरुरी होता है की महिला उन्ही खाद्य पदार्थों का सेवन करें जिससे महिला को एनर्जी मिलें और जल्दी से जल्दी महिला फिट हो सके। बच्चे को स्तनपान करवाते समय महिला यदि अपने खान पान का ध्यान नहीं रखती है तो इसकी वजह से बच्चे के विकास में कमी, सेहत सम्बन्धी समस्या आदि होने का खतरा रहता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं की स्तनपान करवाने वाली महिला को क्या-क्या नहीं खाना चाहिए।

कॉफ़ी

दूध पिलाने वाली महिला को कॉफ़ी का सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि कॉफ़ी में कैफीन की अधिकता होती है। जिसकी वजह से यह दूध के जरिये जब शिशु तक पहुँचता है तो इससे शिशु के विकास में कमी, अनिंद्रा, चिड़चिड़ापन जैसी समस्या हो सकती है।

ब्रोकली

स्तनपान करवाने वाली महिला को ब्रोकली का सेवन करने से भी बचना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से शिशु को पेट में दर्द जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और यदि महिला ब्रोकली खाती है तो महिला को ताज़ी, अच्छे से पकी हुई और बिल्कुल थोड़ी मात्रा में ब्रोकली का सेवन करना चाहिए।

चॉकलेट

चॉकलेट स्वाद में मीठी होने के साथ कैफीन युक्त भी होती है ऐसे में मीठे की मात्रा अधिक होने के कारण शिशु की स्किन पर खुजली जैसी समस्या हो सकती है साथ ही कैफीन के कारण भी शिशु को परेशानी हो सकती है।

लहसुन

दूध पिलाने वाली महिला को लहसुन का सेवन करने से भी बचना चाहिए क्योंकि ऐसा माना जाता है की लहसुन खाने से दूध में से गंध आने लगती है और वो शिशु को पसंद नहीं आ सकती है। जिसके कारण शिशु दूध नहीं पीता है।

जंक फ़ूड

छोटे बच्चे को दूध पिलाने वाली महिला को जंक फ़ूड, ज्यादा तेल मसाले वाले आहार का सेवन करने से भी बचना चाहिए। क्योंकि ऐसे आहार का सेवन करने से बच्चे का पेट खराब हो सकता है जिसकी वजह से शिशु को दस्त, उल्टी, पेट में गैस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

खट्टे फल

दूध पिलाने वाली महिलाओं को खट्टे फलों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण दूध में विटामिन सी की अधिकता होने के कारण दूध में अम्ल अधिक बनता है जिसकी वजह से शिशु को पेट से जुडी परेशानियां अधिक हो सकती है।

गैस बनाने वाले खाद्य पदार्थ

जिन खाद्य पदार्थों को खाने से गैस बनती है जैसे की गोभी, मूली, राजमा आदि उन खाद्य पदार्थों का सेवन भी दूध पिलाने वाली महिलाओं को नहीं करना चाहिए। क्योंकि उनका सेवन करने से महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियां होने के साथ शिशु को भी दिक्कत होने का खतरा होता है।

मछली

दूध पिलाने वाली महिला को मछली का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि मछली में मर्करी यानी पारा होता है। जो शिशु के दिमागी विकास पर बुरा प्रभाव डाल सकता है ऐसे में शिशु के दिमागी विकास पर बुरा असर नहीं पड़े इसके लिए स्तनपान करवाने वाली महिला को मछली का सेवन करने से बचना चाहिए।

अल्कोहल

स्तनपान करवाने वाली महिला को अल्कोहल का सेवन करने से भी बचना चाहिए क्योंकि अल्कोहल भी शिशु के विकास पर बुरा असर डाल सकता है।

पुदीना

दूध पिलाने वाली महिला को पुदीना का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि पुदीना का सेवन करने से दूध के उत्पादन में कमी आती है। जिसके कारण शिशु को पर्याप्त दूध नहीं मिलता है।

मूंगफली और कॉर्न

कई महिलाओं या बच्चों को मूंगफली या कॉर्न से एलर्जी होती है ऐसे में स्तनपान के कारण शिशु को यह दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को मूंगफली, कॉर्न या अन्य खाद्य पदार्थ जिन्हे खाने से एलर्जी होती है उनका सेवन नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिनका सेवन दूध पिलाने वाली माताओं को नहीं करना चाहिए। इसके अलावा महिला को उन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जिससे दूध के उत्पादन में वृद्धि होने के साथ शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।

What should a breastfeeding mother not eat

सावन (2021) का महीना कब से कब तक है? कैसे करें व्रत

शास्त्रों में सावन का महीना बहुत ही पवित्र और धार्मिक माना गया है। सावन के महीने में भोलेबाबा, माँ पार्वती की पूजा करने का बहुत अधिक महत्व होता है साथ ही इनकी पूजा करना बहुत ही फलदायक माना जाता है। ऐसा माना जाता है सावन महीने में भोलेबाबा अपने सभी भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं।

साथ ही सावन के महीने में आने वाले सोमवार का और भी ज्यादा महत्व होता है और ऐसा माना जाता है की जो व्यक्ति पूरा साल सोमवार के व्रत नहीं करता है लेकिन सावन के सभी सोमवार पूरी श्रद्धा और निष्ठा से करता है उस पर भोले बाबा की असीम कृपा होती है और उसे पूरे साल के सोमवार के व्रत रखने जितना ही फल मिलता है। साथ ही जो भक्त भोलेबाबा को मानते हैं उन्हें सावन के महीने का बहुत इंतज़ार भी रहता है। तो आइये साल 2021 में सावन महीना कब शुरू हो रहा है उसके बारे में जानते हैं।

2021 में सावन महिला कब से शुरू हो रहा है?

24 जुलाई 2021 को आषाढ़ माह का समापन होगा उसके बाद 25 जुलाई 2021 दिन रविवार को सावन माह की शुरुआत होगी। उसके बाद 26 जुलाई 2021 दिन सोमवार को सावन माह का प्रथम सोमवार का व्रत रखा जायेगा। फिर 22 अगस्त 2021 दिन रविवार को सावन के महीने का समापन होगा।

सावन के सोमवार का व्रत रखने की विधि

  • यदि आप व्रत रख रहे हैं तो सबसे पहले व्रत वाले दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
  • उसके बाद घर की साफ़ सफाई करें और नहा धोकर साफ स्वच्छ वस्त्र धारण करके तैयार हो जाएँ।
  • फिर अपने घर के मंदिर में भोलेबाबा और माँ पार्वती के सामने दीप जलाएं और हाथ जोड़कर व्रत करने का संकल्प लें।
  • यदि आपके घर के आस पास मंदिर है तो उसके बाद आप मंदिर में जाएँ।
  • मंदिर में एक लोटे में पानी और दूध मिलाकर जल बनाएं और उसे लेकर जाएँ फिर मंदिर में पहुंचकर उस जल को भोलेबाबा, माँ पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय, नंदी जी पर अर्पित करें और उनका जलाभिषेक करें।
  • उसके बाद शिव परिवार पर फूल, बेल पत्र, धतूरा, भांग, गन्ना, बेर या अन्य कोई फल आदि चीजें अर्पित करें।
  • पूजा करते समय हमेशा शिव मंत्र यानी ॐ नमः शिवाय का जाप करते रहें।
  • फिर आप चाहे तो मंदिर में ही बैठकर कथा पढ़े व् आरती करें नहीं तो आप घर आने के बाद अपने घर के मंदिर में बैठकर भी ऐसा कर सकते हैं।
  • कथा व् आरती के साथ शिव चालीसा, रुद्राष्टक का पाठ करें।
  • कथा और आरती करने के बाद भोलेबाबा को भोग लगाएं उसके बाद भोग का प्रसाद सभी लोगो में वितरित करें।
  • उसके बाद शाम के समय भोजन करें और व्रत खोल लें ध्यान रखें की भोजन दिन में केवल एक बार ही लेना है।
  • ध्यान रखें की आप सोमवार का व्रत बीच में नहीं छोड़ें क्योंकि ऐसा माना जाता है की ऐसा करने से भोलेबाबा नाराज़ हो जाते हैं।

तो यह है सावन का महिला 2021 में कब है और सावन के महीने में सोमवार के व्रत रखने की विधि से जुड़े टिप्स, यदि आप भी सावन के महीने में सोमवार के व्रत रखते हैं। तो आप भी इन बातों का ध्यान रखें ताकि आपके व्रत को सम्पूर्ण होने में मदद मिल सके और भोलेबाबा की कृपा आप पर हमेशा बनी रहे।

प्रेगनेंसी में एसिडिटी हो तो क्या करें?

प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी महिलाएं एसिडिटी की समस्या से परेशान रहती है और ऐसा शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव व् शारीरिक बदलाव के कारण हो सकता है। एसिडिटी की समस्या एक ऐसी समस्या होती है जिसकी वजह से महिला को पेट में दर्द, सीने में दर्द व् जलन, असहजता, भूख न लगने जैसी और भी परेशानियां हो सकती है।

जिन महिलाओं को यह समस्या ज्यादा होती है वो महिलाएं कई बार रात को सो भी नहीं पाती है। ऐसे में जरुरी होता है की गर्भावस्था के दौरान महिला अपना अच्छे से ध्यान रखें ताकि महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकें। तो लीजिये आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को होने वाली एसिडिटी की समस्या के बारे में ही बात करने जा रहे हैं।

एसिडिटी होने का कारण

  • गर्भावस्था के दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं जिसकी वजह से पाचन क्रिया थोड़ा धीमे काम करने लगती है ऐसे में खाना हज़म अच्छे से हज़म होने में समय लगता है जिसकी वजह से यह दिक्कत होती है।
  • खाना खाने के बाद तुरंत सो जाना भी आपकी एसिडिटी की समस्या को बढ़ा देता है।
  • जरुरत से ज्यादा खा लेने के कारण भोजन अच्छे से हज़म होने में परेशानी होती है जिसकी वजह से एसिडिटी की समस्या हो सकती है।
  • समय पर भोजन नहीं करना, लम्बे समय तक भूखे रहना भी एसिडिटी होने का कारण होता है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला ज्यादा चटपटा, मसालेदार भोजन खाती है तो इसकी वजह से भोजन को हज़म होने में परेशानी होती है जिसकी वजह से एसिडिटी व् सीने में जलन की समस्या होना आम बात होती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान जरुरत से ज्यादा वजन बढ़ने पर भी यह समस्या होना आम बात होती है।
  • जो खाद्य पदार्थ आपको गैस बनाते हैं और आप उन्ही का सेवन करते हैं तो इसकी वजह से भी गैस की समस्या होना आम बात होती है।
  • कैफीन का ज्यादा सेवन करने के कारण भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • प्रेग्नेंट महिला यदि धूम्रपान करती है तो इसके कारण भी महिला को यह दिक्कत हो सकती है।

प्रेगनेंसी में एसिडिटी की समस्या से बचे रहने के उपाय

गर्भावस्था में यदि महिला को एसिडिटी की समस्या होती है तो कुछ आसान टिप्स को फॉलो करने से गर्भवती महिला को इस समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकती है। तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

कम मात्रा में खाएं लेकिन कई बार खाएं

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में पोषक तत्व भी सही मात्रा में रहे और महिला को यह दिक्कत भी नहीं हो इसके लिए महिला को दिन भर में थोड़ा थोड़ा करके खाना चाहिए। और हर दो घंटे में कुछ न कुछ खाना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से खाना हज़म भी हो जाता है। साथ ही शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को सही रहने में भी मदद मिलती है।

खाने के बाद तुरंत सोएं नहीं

जब भी आप खाना खाती है तो ध्यान रखें की खाना खाते ही आप तुरंत सो नहीं जाएँ क्योंकि इससे खाना हज़म नहीं हो पाता है। जिसकी वजह से पेट में गैस बनने लगती है और कब्ज़ की समस्या भी अधिक हो सकती है। ऐसे में आपको यह दिक्कत नहीं हो इसके लिए खाना खाते ही थोड़ा टहलें जिससे खाने को आसानी से हज़म होने में मदद मिल सके।

उन खाद्य पदार्थों को नहीं खाएं जिनसे गैस बनती है

गर्भावस्था के दौरान एसिडिटी की समस्या से बचे रहने के लिए इस बात का ध्यान रखें की उन खाद्य पदार्थों का सेवन बिल्कुल नहीं करें। जिन्हे खाने से आपको गैस बनती है।

पानी भरपूर पीएं

खाना खाने के साथ पानी पीने की बजाय आपको खाना खाने के आधे घंटे के बाद और दो मील के बीच के समय में भरपूर पानी पीना चाहिए। इससे आपका खाना भी अच्छे से हज़म हो जाता है साथ ही पानी की मदद से आपको पेट सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

निम्बू पानी पीएं

दिन में एक या दो बार एक गिलास पानी में एक निम्बू निचोड़कर उसका सेवन करें इससे पाचन क्रिया को बेहतर रहने मदद मिलती है। जिससे एसिडिटी, कब्ज़ जैसी पेट सम्बन्धी परेशानियों से महिला को बचे रहने में फायदा मिलता है।

केला खाएं

गर्भावस्था के दौरान केला खाना बिल्कुल सेफ होता है ऐसे में गर्भवती महिला को केले का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि केले में भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होता है जिससे गर्भवती महिला की पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है। और एसिडिटी जैसी समस्या से बचाव होने साथ पेट सम्बन्धी अन्य परेशानियों से भी निजात मिलता है।

आंवला चूर्ण

गर्भवती महिला चाहे तो आंवला चूर्ण का सेवन भी कर सकती है क्योंकि आंवला चूर्ण भी एसिडिटी की समस्या को खत्म करने में फायदेमंद होता है। इसके लिए आप एक चम्मच आंवला चूर्ण का सेवन पानी के साथ कर सकती है।

थोड़ा सिर ऊपर करके सोएं

गर्भवती महिला को थोड़ा सिर ऊपर करके सोना चाहिए, ऐसा करने से पेट से जुडी इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है इसके अलावा बैठते समय भी ध्यान रखें की कमर को झुकाकर नहीं बल्कि कमर को सीधे करके बैठें।

धूम्रपान नहीं करें

यदि आप शुम्रपान करती है तो अपनी इस आदत को आज ही बंद कर दें क्योंकि यह माँ और बच्चे दोनों की सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। साथ ही इससे शिशु के मानसिक विकास में कमी आने का खतरा होता है। इसके अलावा धूम्रपान नहीं करने से महिला को एसिडिटी की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

ज्यादा चाय कॉफ़ी नहीं पीएं

प्रेग्नेंट महिला को ज्यादा चाय कॉफ़ी या अन्य कैफीन युक्त चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे महिला की एसिडिटी की परेशानी बढ़ जाती है। यदि महिला इनका सेवन सिमित मात्रा में करती है तो इससे महिला को एसिडिटी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

ठंडा दूध

पेट में बनने वाली गैस की समस्या से निजात पाने के लिए ठंडा दूध भी फायदेमंद होता है बस इस बात का ध्यान रखें की दूध बिना उबला नहीं हो और उसमे चीनी भी न हो। इस उपाय को करने से भी एसिडिटी की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

टहलना न भूलें

गर्भावस्था के दौरान महिला को रोजाना सुबह शाम थोड़ी देर जरूर टहलना चाहिए क्योंकि इससे गर्भवती महिला को एक्टिव रहने में मदद मिलती है साथ ही शरीर की क्रियाओं को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है। जिससे महिला को एसिडिटी जैसी समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

आरामदायक कपडे पहनें

प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा तंग कपडे पहनने के कारण भी यह दिक्कत हो सकती है। ऐसे में महिला को इस परेशानी से बचे रहने के लिए आरामदायक कपडे पहनने चाहिए।

एसिडिटी की समस्या होने पर डॉक्टर से कब मिलें?

यदि प्रेग्नेंट महिला को बहुत ज्यादा गैस बनने के साथ, पेट में दर्द, सीने में जलन, भूख न लगने जैसी परेशानी बढ़ रही हो तो महिला को ऐसी कंडीशन में बीने देरी करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान एसिडिटी की समस्या होने के कारण व् इस समस्या से बचाव के कुछ उपाय, ऐसे में यदि आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान यह समस्या हो रही है। तो आपको भी ऊपर बताएं गए टिप्स को जरूर ट्राई करना चाहिए ताकि आपको भी इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सकें।

Remedies to get rid of acidity during pregnancy

प्रेगनेंसी में क्या-क्या जरूर खाना चाहिए

गर्भावस्था के दौरान खान पान का विशेष ध्यान रखना जरुरी होता है। क्योंकि जितना बेहतर महिला का खान पान होता है उतना ही महिला को प्रेगनेंसी के दौरान फिट रहने, शारीरिक परेशानियों से बचे रहने, प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली कॉम्प्लीकेशन्स को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही बेहतर खान पान का असर गर्भनाल के माध्यम से शिशु तक भी पहुँचता है जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिलती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान महिला को क्या-क्या खाना चाहिए उसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

डेयरी प्रोडक्ट्स

गर्भवती महिला को डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे की दूध, दही, पनीर, छाछ आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि डेयरी प्रोडक्ट्स कैल्शियम, प्रोटीन, वसा व् अन्य पोषक तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

हरी सब्जियां व् अन्य सब्जियां

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हरी सब्जियों व् अन्य सब्जियों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि सब्जियों में आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, प्रोटीन, फोलिक एसिड, विटामिन्स, फाइबर सभी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में शामिल होते हैं। जो की प्रेगनेंसी के दौरान बहुत फायदेमंद होते हैं साथ ही अच्छे से धोने के बाद ही सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

फल

फल खाने में स्वादिष्ट होने के साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर होते हैं। साथ ही इनमे पानी की भी अधिकता होती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को फलों का सेवन भी जरूर करना चाहिए। लेकिन ध्यान रखें की मौसमी फलों का ही सेवन करें साथ ही फलों को ताजे ही खाएं और अच्छे से धोने के बाद प्रयोग में लाएं। फलों का सेवन करने के साथ आप फलों के रस का सेवन भी कर सकते हैं।

दालें

गर्भावस्था के दौरान दालों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए कम से कम दिन भर की एक डाइट में दाल जरूर खानी चाहिए। क्योंकि दालें प्रोटीन, आयरन, विटामिन व् अन्य मिनरल्स का बेहतरीन स्त्रोत होती है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए जरुरी होते हैं।

ड्राई फ्रूट्स

सिमित मात्रा में रोजाना प्रेग्नेंट महिला को ड्राई फ्रूट्स भी जरूर खाने चाहिए क्योंकि ड्राई फ्रूट्स भी पोषक तत्वों की खान होते हैं।जो गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

प्रीनेटल विटामिन

खान पान के साथ जरुरी विटामिन्स जो की डॉक्टर द्वारा गर्भवती महिला को लेने की सलाह दी जाती है। उनका सेवन भी नियमित रूप से प्रेग्नेंट महिला को करना चाहिए। ताकि गर्भवती महिला के शरीर में किसी भी पोषक तत्व की कमी नहीं हो।

अंडा

प्रेग्नेंट महिला यदि अंडे का सेवन कर लेती है तो महिला को अंडा भी जरूर खाना चाहिए। क्योंकि अंडा में प्रोटीन मौजूद होता है जो गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक विकास को बढ़ावा देता है। साथ ही अंडे में मौजूद कोलिन नामक तत्व शिशु के मानसिक विकास को बेहतर करने में मदद करते हैं। इसके अलावा यदि आप अंडा नहीं खाती है तो कोशिश करें की प्रेगनेंसी के दौरान आप अंडे का सेवन जरूर करें। साथ ही कच्चे अंडे, अच्छे से न पके हुए अंडे का सेवन बिल्कुल नहीं करें।

नॉन वेज

गर्भावस्था के दौरान महिला चाहे तो नॉन वेज का सेवन भी कर सकती है। क्योंकि नॉन वेज भी माँ और बच्चे दोनों की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

तरल पदार्थ

खाने की चीजों के साथ गर्भवती महिला को शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा को भी सही रखना चाहिए। और इसके लिए महिला दिन चार में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ नारियल पानी, जूस, आदि का सेवन भी कर सकती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में क्या क्या खाना चाहिए उससे जुड़े कुछ टिप्स, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी खान पान से जुडी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा जिन चीजों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए उनका सेवन नहीं करें, किसी चीज से एलर्जी है वो न खाएं, बासी ठन्डे खाने को खाने से बचें, जरुरत से ज्यादा नहीं खाएं, आदि। इन सभी बातों का ध्यान रखने से प्रेगनेंसी के दौरान माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

What to eat during Pregnancy

प्रेगनेंसी में दलिया खाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के लिए दलिया का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि दलिया में प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, आयरन जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। साथ ही महिला चाहे तो दलिया में अलग अलग सब्जियों को मिक्स करके उसमे पोषक तत्वों की मात्रा को बढा सकती है।

इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला दलिया का सेवन अपने स्वादानुसार कर सकती है यानी की महिला का यदि मीठा दलिया खाने का दिल है तो महिला मीठा दलिया खा सकती है और नमकीन खाने का मन है तो महिला नमकीन दलिया खा सकती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की दलिया का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

पचाने में होता है आसान

गर्भावस्था के दौरान महिला को ऐसा आहार लेना चाहिए जिसे पचाना आसान हो क्योंकि इस दौरान महिला की पाचन क्रिया धीमी पड़ जाती है। ऐसे में दलिया खाने से प्रेग्नेंट महिला को बहुत से पोषक तत्व भी मिलते हैं साथ ही इसे हज़म करना भी महिला के लिए आसान होता है। क्योंकि दलिया फाइबर से भरपूर होता है।

पोषक तत्वों से होता है भरपूर

गर्भावस्था के दौरान महिला को ऐसी डाइट लेने की सलाह दी जाती है जिसमे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद हो। ऐसे में महिला के लिए दलिया खाना बहुत फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें कैल्शियम, फाइबर, प्रोटीन जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। जो माँ और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

वजन रहता है कण्ट्रोल

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ता है लेकिन यदि महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ता है तो इसके कारण माँ और बच्चे की सेहत को नुकसान पहुँच सकता है। ऐसे में दलिया खाना महिला के लिए फायदेमंद हो सकता है क्योंकि दलिया फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत होता हैं और इसे खाने से महिला की पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है। जिससे खाना आसानी से हज़म हो जाता है। और इससे वजन भी नियंत्रित रहता हैं।

ब्लड शुगर रहता है कण्ट्रोल

दलिया का सेवन करने से गर्भवती महिला का ब्लड शुगर लेवल कण्ट्रोल रहता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को जेस्टेशनल शुगर होने का खतरा नहीं होता है।

प्रेग्नेंट महिला ऊर्जा से रहती है भरपूर

दलिया फैट फ्री होने के साथ कैलोरीज से भरपूर होता है जो गर्भवती महिला के शरीर के लिए जरूरी कैलोरीज़ की मात्रा को भरपूर रखने में मदद करता है। और यदि गर्भवती महिला को यदि जरुरत के अनुसार कैलोरीज़ मिलती है तो इससे महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

बॉडी पेन से मिलता है आराम

दलिया मैग्नीशियम का बेहतरीन स्त्रोत होता है और मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम पहुंचाने और रिलैक्स रखने में मदद करता है। जिससे गर्भवती महिला को बॉडी पेन जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

कब्ज़ से मिलता है आराम

प्रेगनेंसी के दौरान दलिया का सेवन करने से मेटाबोलिज्म रेट बेहतर होता है जिससे गर्भवती महिला को कब्ज़ व् पेट सम्बन्धी अन्य परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड प्रैशर रहता है कण्ट्रोल

दलिया का सेवन करने से गर्भवती महिला को ब्लड प्रैशर को कण्ट्रोल रखने में मदद मिलती है साथ ही इससे हदय स्वस्थ रहता है और महिला को तनाव जैसी समस्या से आराम मिलता है। जो की माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है।

एनीमिया से राहत

आयरन का बेहतरीन स्त्रोत होने के कारण दलिया का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी पूरी रहती है। जिससे माँ और बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है और खून की कमी के कारण होने वाली दिक्कतों से बचाव होता है।

नींद आती है बेहतर

दलिया का सेवन करने से तंत्रिका तंत्र को आराम पहुँचता है साथ ही तनाव से बचे रहने में भी मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है।

इम्युनिटी बढ़ती है

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला दलिया का सेवन करती है तो इससे महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। जिससे माँ और बच्चे को संक्रमण व् बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो दलिया का सेवन करने से गर्भवती महिला व् शिशु को मिलते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को दलिया को जरूर शामिल करना चाहिए और दलिया खाने का सबसे सही समय सुबह का नाश्ता होता है। इसके अलावा महिला को दलिया का सेवन ताजा बनाकर ही करना चाहिए।