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पीरियड में बदबू आने के कारण

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जैसा की आप सभी जानते हैं की पीरियड्स हर महिला को होने वाली एक आम समस्या है जो हर महीने अठाइस से पेंतीस दिनों के बाद महिला को होती है। इस दौरान महिला के पेट व् कमर में दर्द होने के साथ प्राइवेट पार्ट से रक्त का प्रवाह होता है। ऐसे में कुछ महिलाओं को योनि से रक्त प्रवाह के दौरान अधिक बदबू भी आती है। जो की महिलाओं के लिए परेशानी का विषय होता है लेकिन पीरियड्स के दौरान बदबू आने का क्या कारण होता है? क्या आप जानते हैं यदि नहीं तो आइये इस बारे में जानते हैं।

हार्मोनल बदलाव

पीरियड्स के दौरान भी बॉडी में लगातार हार्मोनल बदलाव होते रहता हैं। जिसके कारण एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है जिसके कारण महिलाएं प्राइवेट पार्ट में पतले डिस्चार्ज का अनुभव करती है जिसके कारण पीरियड्स के दौरान बदबू आने लगती है। ऐसे में इसे इग्नोर न करते हुए एक बार डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए।

संक्रमण

माहवारी के दौरान प्राइवेट पार्ट से बदबू आने का एक कारण संक्रमण यानी बैक्टेरियल वेजिनोसिस भी हो सकता है। जिसके कारण आपको यूरिन पास करने में भी कठिनाई का अनुभव हो सकता है और इसी कारण आपको पीरियड्स के समय योनि से अजीब सी गंध आ सकती है।

पसीना

जननांगो के आस पास अधिक पसीना आता है और पीरियड्स के दौरान भी ऐसा होता है जिसके कारण हो सकता है की आपको पीरियड्स के समय बदबू का अहसास हो।

खान पान

आपका खान पान भी पीरियड्स के दौरान आने वाली बदबू का कारण हो सकता है क्योंकि यदि आप लहसुन, प्याज, मिर्च, मछली, गोभी आदि का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं तो पीरियड्स के दौरान आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

पैड न बदलने के कारण

यदि आप एक ही पैड को पूरा दिन इस्तेमाल करती है, तो इसके कारण भी प्राइवेट पार्ट में बैड बैक्टेरिया पनपने लगते हैं, जिसके कारण आपको पीरियड्स के समय गंध आने लगती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से आपको पीरियड्स के समय बदबू आने की समस्या हो सकती है। और यदि बदबू अधिक आती है तो इसे इग्नोर न करते हुए आपको एक बहार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

विडिओ पीरियड में बदबू आने के क्या कारण होते हैं?

परिवार वालों से प्रेगनेंसी के दौरान इन बातों को न छुपाएं

परिवार वालों से प्रेगनेंसी के दौरान न छुपाएं यह बातें, गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जहां महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों के साथ शारीरिक बदलाव का भी अनुभव करना पड़ सकता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। ताकि प्रेग्नेंट महिला या गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत न हो। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान यदि बॉडी में कोई ऐसा लक्षण महसूस हो रहा है जिसके कारण महिला को दिक्कत महसूस हो रही है, या कोई शारीरिक समस्या ज्यादा बढ़ रही है।

तो उसे अनदेखा नहीं करना चाहिए बल्कि अपने परिवार वालों के साथ उसे शेयर करना चाहिए। क्योंकि हो सकता गर्भावस्था के दौरान यदि आप जिस परेशानी को अनदेखा करते हैं वो आपके लिए बड़ी परेशानी का कारण बन जाएँ। तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसी परेशानियों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे प्रेग्नेंट महिला को अपने परिवार वालों के साथ जरूर शेयर करना चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली किसी भी दिक्कत से बचे रहने में मदद मिल सके।

परिवार वालों से प्रेगनेंसी के दौरान न छुपाएं ब्लीडिंग की परेशानी

  • प्रेगनेंसी के दूसरे महीने की शुरुआत में प्रेग्नेंट महिला को हल्का फुल्का खून का धब्बा लगना आम बात होती है।
  • क्योंकि इस दौरान भ्रूण गर्भाशय में प्रत्यारोपित हो रहा होता है।
  • लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला को ब्लीडिंग अधिक हो जैसे की मासिक धर्म के दौरान होती है।
  • तो ऐसे में इसे अनदेखा न करते हुए परिवार वालों को बताना चाहिए क्योंकि यह गर्भपात होने की और संकेत कर सकता है।

पेट में बहुत तेज दर्द हो

  • गर्भावस्था के दौरान पेट में हल्का फुल्का दर्द रहना बहुत ही आम बात होती है।
  • लेकिन प्रेग्नेंट महिला को बहुत ज्यादा पेट में दर्द का अनुभव हो।
  • जैसे की मासिक धर्म के दौरान होता है या दर्द असहनीय हो चाहे वो प्रेगनेंसी के किसी भी महीने हो।
  • ऐसे में पेट में दर्द को प्रेग्नेंट महिला को बिल्कुल भी अनदेखा न करते हुए परिवार वालों को बताना चाहिए।
  • क्योंकि प्रेगनेंसी की शुरुआत में यह दर्द गर्भपात, तीसरी तिमाही की शुरुआत में समय पूर्व प्रसव व तीसरी तिमाही के आखिर में डिलीवरी का लक्षण हो सकता है।

सफ़ेद पानी की समस्या

  • प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को थोड़ा बहुत सफ़ेद पानी की समस्या होना आम बात होती है।
  • और यह गर्भवती महिला व शिशु को संक्रमण से सुरक्षित रखने में मदद करता है।
  • लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला को सफ़ेद पानी गिरने की समस्या अधिक हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि इसका कारण महिला को संक्रमण का होना हो सकता है और संक्रमण का बुरा प्रभाव शिशु पर भी पड़ सकता है।

उल्टियां अधिक हो रही हो

  • उल्टी होना प्रेगनेंसी का एक अहम लक्षण माना जाता है और अधिकतर सभी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान इस दिक्कत का सामना करती हैं।
  • कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने तो कुछ पूरे नौ महीने तक इस समस्या से परेशान रहती हैं।
  • लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला दिन में बहुत उल्टियां करें, कुछ भी खाने का महिला का न पच रहा हो और खाते ही उल्टी आ जाये।
  • तो इसे अनदेखा न करते हुए प्रेग्नेंट महिला को परिवार वालों को बताना चाहिए ताकि वो आपको डॉक्टर के पास ले जाएँ।
  • क्योंकि बहुत अधिक उल्टी की समस्या होने के कारण प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पानी व पोषक तत्वों की कमी हो सकती है।
  • जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला व शिशु दोनों को दिक्कत हो सकती है।

परिवार वालों से प्रेगनेंसी के दौरान न छुपाएं यूरिन के रंग में बदलाव या बदबू महसूस हो

  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण यूरिन के रंग में आपको थोड़ा बदलाव महसूस हो सकता है।
  • लेकिन यदि आपको ऐसा महसूस हो की यूरिन का रंग बहुत ज्यादा पीला, यूरिन के साथ खून आना, यूरिन पास करते समय बदबू महसूस होना, आदि हो रहा है।
  • तो इसे परिवार वालों को बताएं क्योंकि यह यूरिन इन्फेक्शन का लक्षण हो सकता है और इसे अनदेखा करने से आपकी दिक्कत बढ़ सकती है।

प्रेगनेंसी में यदि कोई कॉम्प्लीकेशन्स हो

  • बहुत सी गर्भवती महिलाएं ऐसी होती है जिन्हे प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा कॉम्प्लीकेशन्स होती है।
  • जिसकी वजह से उन्हें घर का काम करने की मनाही होने के साथ पूरा दिन बेड रेस्ट की सलाह दी जाती है।
  • ऐसे में आपको अपने परिवार वालो को यह बात बतानी चाहिए ताकि वो आपकी अच्छे से केयर कर सकें।
  • और आपको एक बात का ध्यान रखना है की किसी को खुश करने के लिए घर का काम करके आप अपनी सेहत के प्रति थोड़ी भी लापरवाही न बरतें।

परिवार वालों से प्रेगनेंसी के दौरान न छुपाएं जब गर्भ में शिशु मूवमेंट न कर रहा हो

  • गर्भावस्था के दौरान गर्भ में शिशु की मूवमेंट प्रेगनेंसी का सबसे बेहतरीन अहसास होता है।
  • लेकिन यदि कभी प्रेग्नेंट महिला को ऐसा महसूस हो की गर्भ में बहुत देर से शिशु मूवमेंट नहीं कर रहा है।
  • तो इसके बारे में परिवार वालों को बताएं क्योंकि गर्भ में शिशु की मूवमेंट का न होना बहुत बड़ा रिस्क होता है।

प्राइवेट पार्ट से यूरिन की तरह सफ़ेद गाढ़ा पानी गिरना

  • यदि प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में प्रेग्नेंट महिला को प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद गाढ़ा चिपचिपा पदार्थ निकलता हुआ महसूस हो।
  • और यह बहुत अधिक मात्रा में निकल रहा हो तो तुरंत परिवार वालों को बताना चाहिए।
  • क्योंकि यह एमनियोटिक फ्लूड हो सकता है जिसमे गर्भ में शिशु होता है।
  • और एमनियोटिक फ्लूड का अधिक मात्रा में निकलना डिलीवरी का संकेत हो सकता है।

मन में आ रहे सवालों को परिवार वालों से शेयर करें

  • पहली प्रेगनेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिला के मन में बहुत से सवाल होते है व शरीर में हो रहे बदलाव को लेकर महिला परेशान हो सकती है।
  • कुछ महिलाएं तो इसकी वजह से तनाव में भी आ जाती है ऐसे में किसी भी चीज को लेकर परेशान होने की जरुरत नहीं है।
  • अपने मन में आ रहे सभी सवालों को अपने परिवार वालों से शेयर करें ताकि आपको मानसिक रूप से रिलैक्स रहने में मदद मिल सके।
  • और प्रेगनेंसी में क्या सही है और क्या गलत है इसके बारे में आपको सम्पूर्ण जानकारी मिल सके।

तो यह हैं कुछ दिक्कतें जिनके महसूस होने पर गर्भवती महिला को इन्हे अपने परिवार वालों से नहीं छुपाना चाहिए। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला यदि इन परेशानियों को छुपाती है। तो इनके कारण महिला को व शिशु दोनों को प्रेगनेंसी के दौरान परेशानी हो सकती है।

खूबसूरत तन और मन के लिए सुबह उठ कर आपको ये करना चाहिए

रात को समय से सोना और सुबह समय से उठना ये एक बहुत अच्छी आदत होती है, इसके कारण आपको सुबह उठकर फ्रेश महसूस होता है, और साथ ही आपको रिलैक्स फील होता है, इसके अलावा सुनह उठ कर आपको ऐसे कौन से काम करने चाहिए जिसके कारण आपके तन को ही नहीं बल्कि आपके मन भी भी अच्छा लगे, तो आइये जानते है ऐसी ही कुछ बातों के बारे में जो आपके तन और मन दोनों के लिए फायदेमंद है।

देर रात तक जागने और सुबह समय से न उठने के कारण आपके स्वास्थ्य के ऊपर गलत असर पड़ता है, और यदि आप सुबह समय से उठते है, और भरपूर नींद लेते है, तो इसके कारण भी आपको पूरा दिन एक्टिव रहने में मदद मिलती है, सिर्फ सुबह समय से उठना ही नहीं बल्कि आपको सुबह उठ कर ऐसे कुछ काम भी करने चाहिए, जिसके कारण केवल आपके तन को ही नहीं बल्कि मन को भी खूबसूरत होने में मदद मिलें, क्या आप जानते है की इसके लिए आप क्या कर सकते है, यदि नहीं तो आइये इसके लिए हम, आपको कुछ ऐसे टिप्स देते है जो आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकते है।

योगा करें:-

doing yoga

अपनी दिनचर्या में सुबह समय से उठ कर आपको योगा को शामिल करना चाहिए, क्योंकि योगा करने से आपको फ्रेश फील करने में मदद मिलती है, इसके साथ आपके मन भी शांति मिलती है, साथ ही योगा करने से आपके अंदर एनर्जी रहती और आपको फिट रहने में भी मदद मिलती हैं, साथ ही योगा करने से आपकी ख़ूबसूरती को भी बढ़ाने में मदद मिलती है।

मैडिटेशन या ध्यान करें:-

सुबह समय से उठ कर आपको मैडिटेशन या ध्यान भी करना चाहिए, क्योंकि मैडिटेशन करने से आपको आंतरिक रूप से शांति का अहसास होता है, और सुबह के समय प्रकृति की छटा को देखा कर आपका मन भी उत्साहित होता है, यदि आप नियमित रूप से दस मिनट भी सुबह उठ कर मैडिटेशन या ध्यान करते है, तो इसके कारण आपको मानसिक रूप से आराम महसूस होता है, यदि आपको कोई परेशानी है तो उसका समाधान ढूंढने में भी मदद मिलती है, जिसकी झलक आपकी त्वचा की चमक में भी साफ़ दिखाई देती है।

पानी का सेवन करें:-

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सुबह उठ कर पानी का सेवन करने से आपको बहुत से फायदे हो सकते है, जैसे की पानी का सेवन करने से आपके पेट अच्छे से साफ़ हो जाता है, जिसके कारण आपके अंदर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते है, और आपको फ्रेश महसूस होता है, व पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करने से आपके अंदर ऊर्जा का भी विकास होता है, साथ ही पानी का सेवन करने से आपकी त्वचा की चमक को भी बढ़ाने में मदद मिलती है, और एक व्यक्ति को दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।

व्यायाम करें:-

अपमान आपको यदि आप फिट रखना चाहते है तो इसके लिए आपको सुबह उठ कर व्यायाम करना चाहिए, क्योंकि व्यायाम करने से आपकी बॉडी से पसीना निकलता है, जिसके कारण आपके शरीर की अतिरिक्त चर्बी को कम होने में मदद मिलती है, और आप भी सही शेप में आ जाते है, और सुबह का किया गया आधे घंटे का व्यायाम आपको पूरे दिन के लिए एनर्जी देता है, इसके साथ इसके कारण आपकी पर्सनैल्टी को भी निखरने में मदद मिलती है, और यदि आप मोटापे की समस्या से परेशान है तो इस समस्या का समाधान करने के साथ, यदि आप किसी शारीरिक समस्या से परेशान है, तो उसे भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

अपने साथी को समय दें:-

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दिन भर की थकान और बिज़ी दिनचर्या के चलते रात को आपको थकावट के कारण नींद आ जाती है, जिसके कारण आप अपने पार्टनर को समय नहीं दे पाते है, जिसके कारण आपके रिश्मे में प्यार का अहसास कम होने लगता है जबकि शादीशुदा रिश्ते में सम्बन्ध बेहतर होने के कारण आपको अपने रिश्ते को मजबूत बनाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप सुबह समय से उठ कर अपने साथी को अहसास करवाएं, और प्यार को अपने रिश्ते में बढ़ाएं इसके कारण आपको भी मानसिक रूप से राहत मिलने में मदद मिलती है, और साथ ही महिलाओ में एस्ट्रोजेन का निर्माण भी बेहतर होता है, जिसके कारण उनकी ख़ूबसूरती को निखर कर सामने आने में मदद मिलती है।

स्वस्थ व् संतुलित नाश्ता लें:-

उसके बाद जब आप व्यायाम आदि कर लेते है, तो आपको नहा धोकर नाश्ता करना चाहिए, पूरे दिन एक्टिव रहने के लिए नाश्ता बहुत जरुरी होता है, इसीलिए न तो सुबह के खाने से आपको परहेज करना चाहिए, और न ही आधा पेट खाना चाहिए, बल्कि आपको भरपेट खाना खाना चाहिए, जिसके कारण आपको पूरे दिन के लिए एनर्जी मिल सकें, और याद रखें ज्यादा तली भुनी चीजो के सेवन की बजाय स्वस्थ संतुलित आहार व् फलों के रस का सेवन करना चाहिए, इसके कारण आपको शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के साथ आपकी त्वचा को भी पोषण देने में मदद मिलती है।

तो ये कुछ फायदे है सुबह उठने के जिनसे आप अपने तन के साथ मन को भी खूबसूरत बना सकते है, और आपको इन फायदों को उठाना भी चाहिए, देर रात तक कोई काम करने की बजाय सुबह समय से उठ कर उस काम को करना चाहिए, इसके कारण आपकी थकान भी कम होगी, आपका काम भी हो जाएगा, और आपको फ्रेश भी महसूस होगा, और आपकी त्वचा की चमक को भी बढ़ाने में मदद मिलेगी, और सुबह समय से उठने से आप प्रकृति के अनोखे दृश्यों का नज़ारा भी ले सकते है, जिसके कारण आपके मन को शांति मिलती है, और आपको आंतरिक रूप से ख़ुशी के अहसास भी होता है, जिसके कारण आपके तनाव, थकान आदि की समस्या से भी राहत मिलने में मदद मिलती है, श यदि आप सुबह समय से नहीं उठते है, तो इन फायदों को उठाने के लिए आपको सुबह समय से उठना चाहिए।

मलेरिया बुखार का घरेलू इलाज

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मलेरिया बुखार प्रोटोजोआ परजीवी द्वारा फैलता है, और मलेरिया के परजीवी वाहक मादा एनोफिलेज़ मच्छर होता है। जैसे ही मलेरिया के मच्छर काटते हैं, वैसे ही इसके परजीवी बॉडी में लाल रक्त कोशिकाओं में बढ़ने लगते है। और आपकी बॉडी में मलेरिया के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। मलेरिया होने पर तेज बुखार, जुखाम, ठण्ड लगना, अधिक उबकाई आना, सांस फूलना, एनीमिया के लक्षण, सिर में अधिक दर्द, चक्कर, बेहोशी आदि लक्षण बॉडी में दिखाई देने लगते हैं। और ऐसे में यदि आपको थोड़ा सा बुखार महसूस हो तो इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए ताकि आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सके। तो आज हम आपके लिए मलेरिया बुखार से बचने के लिए कुछ खास और असरदार घरेलू नुस्खे बताने जा रहें हैं जो आपको इस परेशानी से निजात दिलाने में मदद करते हैं।

अमरुद

अमरुद में विटामिन सी की अधिकता होने के कारण मलेरिया से बचाव के लिए यह एक असरदार उपाय है, यदि कोई मलेरिया का रोगी दिन में दो से तीन बार अमरुद का सेवन करता है। तो उसे बहुत जल्दी इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

गिलोय

गिलोय मलेरिया के लिए एक ऐसा आयुर्वेदिक उपचार है जो न केवल आपको बुखार से आराम देती है बल्कि आपकी बॉडी में मौजूद सभी विषैले तत्वों को बाहर निकालकर आपको फिट रखने में भी मदद करती है। इसके लिए आप दिन में दो या तीन बार एक गिलास पानी में गिलोय डालकर अच्छे से उबालकर गुनगुना रहने पर इसका सेवन करें। या फिर रात भर के लिए मिट्टी के बर्तन में गिलोय को अच्छे से पीसकर को डालकर रख दें। उसके बाद सुबह उठकर दिन में तीन बार छानकर इसका सेवन करें, आपको इसका असर जरूर दिखाई देगा।

अदरक और किशमिश

एक गिलास पानी में थोड़ा अदरक और दस बारह किशमिश डालकर पानी के आधा रहने तक अच्छे से उबाल लें, उसके बाद दिन में दो बार इसका सेवन करें इससे भी आपको मलेरिया बुखार को कम करने में मदद मिलती है।

तुलसी

तुलसी को आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है, बहुत से शरीर के रोगो से लड़ने के लिए यह एक असरदार उपाय की तरह इस्तेमाल की जाती है। और मलेरिया बुखार से बचने के लिए आप आठ दस पत्ते तुलसी के लें, उसमे पांच छह काली मिर्च को पानी के साथ मिलाकर अच्छे से पीस लें, और दिन में दो बार इसका सेवन करें, आप चाहे तो इसमें थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं। साथ ही घर में तुलसी का पौधा लगाएं इससे मच्छर आपके घर में नहीं आते हैं। और जब तक बुखार में अच्छे से आराम न आए दिन में दो बार इसका सेवन करें।

नीम

नीम का इस्तेमाल करने से भी आपको मलेरिया बुखार से आराम पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप नीम के पेड़ की छाल को पानी में अच्छे से उबाल कर दिन में दो से तीन बार इसका काढ़ा बनाकर पीएं, या फिर नीम के पत्ते और काली मिर्च को पानी में उबालकर उसे ठंडा करके छानकर दिन में दो से तीन बार उसका सेवन करें इससे भी आपको आराम मिलता है। साथ ही नीम के तेल से मसाज करने से भी आपको आराम मिलता है।

सेंधा नमक

दस ग्राम सेंधा नमक और चालीस ग्राम बूरा लेकर अच्छे से मिक्स कर लें, उसके बाद दिन में तीन बार एक गिलास गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन करने से आपको बुखार से आराम पाने में मदद मिलती है। साथ ही आप रात को सोने से पहले एक गिलास पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक, थोड़ा शहद, और थोड़ी हल्दी मिलाकर अच्छे से गरम करें, उसके बाद गुनगुना रहने पर छानकर इसका सेवन करें।

प्याज़ का रस

आधे प्याज़ का रस निकालकर उसमे चुकीभर काली मिर्च डालकर अच्छे से मिक्स करके दिन में दो बार सुबह शाम इसका सेवन करें आपको बुखार से आराम पाने में मदद मिलती है।

जीरा

एक चम्मच जीरा लेकर उसमे थोड़ा गुड़ मिलाकर अच्छे से पीस लें, उसके बाद इसकी छोटी छोटी गोलियां बनाएं। और दिन में तीन बार इनका गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन करें ऐसा करने से आपको बुखार से आराम मिलता है।

संतरे का उपयोग करें

विटामिन सी की अधिकता होने के कारण संतरे का जूस या संतरे का सेवन करने से आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। साथ ही संक्रमण से बहाव करके मलेरिया बुखार से आराम दिलाने में भी यह आपकी मदद करता है। साथ ही निम्बू का रस भी इसमें इस्तेमाल करना चाहिए फिर यह ज्यादा असरदार होता है।

तो यह हैं कुछ खास घरेलू उपचार जो आपको मलेरिया बुखार से बचने में मदद करते हैं। इसके अलावा मलेरिया बुखार में आपको पानी, जूस, निम्बू पानी, नारियल पानी व् अन्य तरल चीजों का सेवन ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए आपको बहुत जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है। इसके साथ आपको डॉक्टर से चेक करवाकर दवाइयों का भी नियमित सेवन करते रहना चाहिए।

ये हैं प्रेगनेंसी के सुपर फ़ूड

प्रेगनेंसी में खान पान

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए ऐसा समय होता है जहां केवल उसे अपने आप का ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के विकास का भी बेहतर तरीके से ध्यान रखना पड़ता है। और गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सभी जरुरी पोषक तत्व महिला द्वारा लिए गए आहार से ही मिलते हैं। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है, और घर के बड़े, आपकी सहेलियां, पडोसी सभी आपको प्रेगनेंसी में खान पान को लेकर अपनी अपनी राय देते हैं। लेकिन हो सकता है की हर किसी की अलग अलग राय सुनकर महिला को समझ न आये की सही क्या है और गलत क्या है।

पहली बार माँ बन रही महिलाएं ज्यादा खान पान को लेकर ज्यादा परेशान हो सकती है क्योंकि उन्हें समझने में ज्यादा दिक्कत होती है की प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, कितनी मात्रा में लेना चाहिए, और उस भोजन में कितने पोषक तत्व हैं। और यह सही भी है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का सही होना बहुत जरुरी होता है, ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को चाहिए की वो अपनी डाइट में पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करें, साथ ही भोजन की मात्रा पर ध्यान देने से ज्यादा जरुरी है की भोजन में कितने पोषक तत्व है, साथ ही उस आहार से गर्भ में पल रहे शिशु को फायदा होगा या नहीं।

प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाना चाहिए

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को कुछ ऐसे फल, सब्जियां, व् अन्य चीजें होती है जिनका सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को अपने आहार में कौन कौन सी चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए।

अंडे

अंडे को प्रेगनेंसी के दौरान सुपर फ़ूड माना जाता है क्योंकि यह प्रेग्नेंट महिला के लिए ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होता है। अंडे में प्रोटीन, फैट व् अन्य मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं, जो गर्भवती महिला को फिट रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में भी मदद करते हैं। इसके अलावा अंडे में cholin नामक तत्व मौजूद होता है, जो गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर मानसिक विकास में मदद करते हैं। और यदि गर्भ में पल रहे शिशु को cholin नामक तत्व भरपूर मात्रा में नहीं मिलता है तो इससे शिशु के मानसिक विकास में कमी आ सकती है। साथ ही गर्भवती महिला को कच्चे अंडे का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे गर्भवती महिला को पेट सम्बन्धी समस्या का करना पड़ सकता है।

साबुत अनाज

साबुत अनाज में कैलोरीज़ भरपूर मात्रा में मौजूद होती हैं जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करती है। इसीलिए डॉक्टर्स भी प्रेगनेंसी के दौरान साबुत अनाज जैसे चावल, दलिया, ओट्स, दालें, आदि का भरपूर सेवन करने की सलाह दी जाती है।

हरी पत्तेदार सब्जियां

हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, साग, बथुआ, ब्रोकली, आदि का सेवन भरपूर मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। और नियमित अपनी डाइट में इनका सेवन करने के लिए कहा जाता है क्योंकि इसमें आयरन, फोलेट, फोलिक एसिड, कैल्शियम, पोटैशियम, विटामिन सी, विटामिन के, एंटी ऑक्सीडेंट्स आदि पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो की प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को पूर्ण करने में मदद करते हैं, जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।

डेयरी प्रोडक्ट्स

कैल्शियम, प्रोटीन, मैग्नीशियम आदि पोषक तत्व डेयरी प्रोडक्ट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो प्रेगनेंसी के दौरान हड्डियों की मजबूती, मांसपेशियों को पोषण देने में मदद करते हैं साथ ही इससे गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती मिलने में मदद मिलती है। और यदि यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला के शरीर में मौजूद होते हैं तो इन्हे शिशु तक पहुंचकर शिशु के विकास को बेहतर तरीके से करने में मदद मिलती है। इसीलिए प्रेगनेंसी में गर्भवती महिला को दूध, दही, छाछ आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए।

ड्राई फ्रूट्स

ड्राई फ्रूट्स की तासीर गर्म होने के कारण इनका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान अधिक करने से बचना चाहिए। लेकिन जरुरत के अनुसार इनका सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि यह पोषक तत्वों की खान होते हैं इसमें विटामिन्स, फोलेट, आयरन, पोटैशियम व् अन्य मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। खासकर बादाम, अखरोट, आदि का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि यह गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

शकरगंद

विटामिन ए, बीटा कैरोटीन, फाइबर जैसे पोषक तत्वों से भरपूर शकरगंद का सेवन करने से गर्भवती महिला को पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद मिलती है, आँखों के लिए फायदेमंद होता है, ब्लड शुगर को कण्ट्रोल रखने में मदद करता है। साथ ही इससे गर्भ में शिशु की आँखों के बेहतर विकास के साथ शिशु को स्वस्थ रखने में भी मदद मिलती है।

दालें, फलियां, बीन्स आदि

फाइबर, प्रोटीन, आयरन, फोलेट, कैल्शियम, जैसे पोषक तत्वों से भरपूर दालें, फलियां, बीन्स आदि का सेवन भी गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि यह गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियों से बचाने के साथ गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में भी बहुत फायदेमंद होते है।

फल

अनार, केला, संतरा, जामुन, जैसे फलों का सेवन भी गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए क्योंकि यह सभी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। जैसे की अनार में आयरन की मात्रा भरपूर होने के कारण यह प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी नहीं होने देता है, केले में पोटैशियम, कार्बोहाइड्रेट की मात्रा होने के कारण यह गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करता है, संतरे में फाइबर की मात्रा प्रचुर होने के कारण यह गर्भवती महिला को पाचन क्रिया से जुडी परेशानी से निजात दिलाने के साथ पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करता है, जामुन में मौजूद विटामिन सी जैसे एंटी ऑक्सीडेंट्स इम्युनिटी को मजबूत बनाये रखने में मदद करते हैं। इसीलिए गर्भवती महिला को इन फलों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

नॉन वेज

जो महिलाएं नॉन वेज का सेवन कर लेती है उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान अपनी डाइट में नॉन वेज का सेवन भी जरूर करना चाहिए जैसे की मछली, चिकन आदि क्योंकि इनमे पोषक तत्वों की मात्रा बहुत अधिक होती है। लेकिन मछली की केवल उस किस्म का सेवन करना चाहिए जिसमे मर्क्युरी की मात्रा न हो क्योंकि यह गर्भस्थ शिशु को नुकसान पहुंचा सकती है। साथ ही अधपके, ज्यादा मसाले वाले, बासी, ठन्डे चिकन का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ आहार जिनका सेवन गर्भवती महिला को अपनी डाइट में जरूर करना चाहिए। क्योंकि यह सभी चीजें पोषक तत्वों से भरपूर होने साथ गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु के बेहतर विकास में मदद करता है। इसके अलावा गर्भवती महिला को एक बार अपनी डाइटिशन से भी जरूर राय लेनी चाहिए की प्रेगनेंसी के दौरान कौन सी चीज को कितनी मात्रा में लेना चाहिए, किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए, और किन चीजों का सेवन जरूर करना चाहिए।

इन दिनों में गर्भधारण करना सबसे आसान होता है

अधिकतर महिलाओं को ऐसा ही लगता है की प्रेग्नेंट होने के लिए ओवुलेशन पीरियड ही सबसे बेहतर होता है। हाँ, यह बात सच है की ओवुलेशन पीरियड के दौरान गर्भधारण की सम्भावना सबसे ज्यादा होती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है की बाकी बचे दिनों में सम्बन्ध बनाने से महिला का गर्भधारण नहीं होगा।

क्योंकि जिन महिलाओं को सही ओवुलेशन की जानकारी नहीं होती है वो भी गर्भधारण करती है। जो इस बात का संकेत होती है की ओवुलेशन पीरियड के अलावा बाकि दिनों में भी गर्भधारण होने की उम्मीद होती है। यानी की ऐसा बिल्कुल नहीं है की महिला के ओवुलेशन के दिनों में ही गर्भधारण कर सकती है। तो आइये अब जानते हैं प्रेग्नेंट होने की सबसे अधिक अधिक किन दिनों में होती है।

मासिक धर्म के दौरान

ज्यादातर कपल यही सोचते हैं की पीरियड्स में सम्बन्ध बनाने से गर्भ नहीं ठहरता है। जबकि ऐसा नहीं है यदि महिला पीरियड्स के पहले दूसरे दिन सम्बन्ध बनाती है। तो पहले दो दिनों में प्रेग्नेंट होने की सम्भावना न के बराबर होती है लेकिन जैसे जैसे पीरियड्स के के दिन आगे गुजरते हैं। वैसे वैसे महिला के प्रेग्नेंट होने की सम्भावना भी बढ़ जाती है।

पीरियड्स ख़त्म होने के बाद

पीरियड्स खत्म होने के एक या दो दिन बार से ही यदि महिला और पुरुष आपस में सम्बन्ध बनाते हैं। तो इन दिनों में भी प्रेग्नेंट होने की कैलकुलेशन जीरो नहीं होती है। बल्कि पीरियड्स शुरू होने के बाद तेरह से पंद्रह दिनों तक गर्भ ठहरने की सम्भावना चाहे कम हो लेकिन इन दिनों में भी महिला गर्भधारण कर सकती है। ऐसे में यदि आप भी पीरियड्स में सम्बन्ध बनाती हैं तो आपका भी गर्भधारण हो सकता है।

ओवुलेशन पीरियड

पीरियड्स के पहले दिन से गिनते हुए बारह से अठारह दिनों का जो समय होता है वो ओवुलेशन पीरियड होता है। इस दौरान सम्बन्ध बनाने से अंडे के निषेचित होने के चांस सबसे ज्यादा होते हैं। ऐसे में यदि आप प्रेग्नेंट होने की सोच रही हैं तो डॉक्टर्स भी आपको इन्ही दिनों में सम्बन्ध बनाने की सलाह देते हैं।

सम्बन्ध बनाते समय इन बातों का ध्यान रखने से बढ़ते हैं प्रेगनेंसी के चांस

  • सुबह का समय चुने, इस समय आप दोनों रिलैक्स होते हैं ऐसे में सम्बन्ध बनाने से आपके गर्भधारण के चांस बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • बिना किसी टेंशन के खुशनुमा मूड से सम्बन्ध बनाएं क्योंकि जितना आप खुशनुमा होकर आप अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाते हैं उतना ही ज्यादा आपके गर्भधारण करने के चांस बढ़ते हैं।
  • सही पोजीशन का ध्यान रखें कुछ पोजीशन ऐसी होती है जिन्हे आप ट्राई करते हैं तो उनसे गर्भ ठहरने के चांस ज्यादा होते हैं।
  • सम्बन्ध बनाने पर दोनों के खुश होने से ही प्रेग्नेंट होने के चांस बढ़ते हैं।

तो यदि आप भी गर्भधारण के बारे में सोच रही है तो ऐसा मत सोचिये की एक ही दिन सम्बन्ध बनाने से आपका गर्भ ठहरेगा या कोई एक ही दिन ऐसा है जिस दिन सम्बन्ध बनाने आपके गर्भधारण के चांस अधिक है। बल्कि आपको गर्भधारण के लिए अच्छे से सम्बन्ध बनाना चाहिए और अपने आप को फिट रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी में झाड़ू पोछा करने के फायदे और नुकसान

प्रेगनेंसी में झाड़ू पोछा

गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए एक बहुत ही खूबसूरत अहसास है, लेकिन साथ ही इस दौरान महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। इसके अलावा गर्भवती महिला द्वारा बरती गई थोड़ी सी लापरवाही का असर गर्भवती महिला के स्वास्थ्य के साथ गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है। ऐसे में घर के किसी भी काम को लेकर प्रेग्नेंट महिला के मन में सवाल रहता है की प्रेगनेंसी के दौरान यह काम करना ठीक है या नहीं। जैसे की झाड़ू पोछा लगाना, बहुत सी गर्भवती महिलाओं को आपने प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में झाड़ू पोछा लगाते हुए अधिक देखा होगा, क्योंकि बहुत से लोग ऐसा भी मानते हैं की प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में ऐसा करने से नोर्मल डिलीवरी होने के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

डॉक्टर्स के अनुसार प्रेग्नेंट महिला के लिए प्रेगनेंसी के पहले तीन महीने बहुत ही अहम होते है, ऐसे में गर्भवती महिला को झाड़ू पोछा लगाने से बचना चाहिए। जबकि प्रेगनेंसी में यदि किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स हैं तो भी गर्भवती महिला को इससे बचना चाहिए। लेकिन यदि गर्भवती महिला स्वस्थ है तो प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में झाड़ू पोछा लगाना गर्भवती महिला के लिए फायदेमंद भी हो सकता है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान कोई भी काम करते हुए महिला को इतना ध्यान रखना चाहिए की महिला किसी भी तरह की लापरवाही न करे ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह के नुकसान से बचे रहने में मदद मिल सके। तो आइये अब जानते हैं प्रेगनेंसी में झाड़ू पोछा लगाने से जुडी कुछ बातों के बारे में।

प्रेगनेंसी में झाड़ू पोछा लगाने के फायदे

ऐसा नहीं है की प्रेग्नेंट महिला घर का कोई भी काम नहीं कर सकती है, बल्कि महिला को थोड़ा बहुत काम जरूर करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से गर्भवती महिला को फायदा मिलता है। तो आइये अब जानते हैं प्रेगनेंसी में झाड़ू पोछा लगाने से क्या फायदे मिलते हैं।

एक्टिव रहना

प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अधिक व्यायाम आदि न करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में झाड़ू पोछा लगाने से महिला का व्यायाम हो जाता है। जिससे बॉडी को रिलैक्स महसूस हो सकता है, और गर्भवती महिला को एक्टिव रहने में मदद मिलती है, और गर्भवती महिला का प्रेगनेंसी के दौरान एक्टिव रहना महिला को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

फ्लेक्सिबल मसल्स

झाड़ू पोछा लगाने से पेल्विक मसल्स यानी गर्भाशय के आस पास की मसल्स को फ्लेक्सिबल रहने में मदद मिलती है। जिसे गर्भवती महिला को डिलीवरी के दौरान आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है। और पेल्विक मसल्स के फ्लेक्सिबल होने से महिला की नोर्मल डिलीवरी होने के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में झाड़ू पोछा लगाने के नुकसान

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान हर कदम पर अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि महिला द्वारा की गई कोई भी गलती शिशु पर नकारात्मक असर डाल सकती है। तो लीजिये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में झाड़ू पोछा लगाने के क्या नुकसान होते हैं।

गर्भपात

गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान महिला को ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहिए जिससे पेट पर जोर पड़े। ऐसे में महिला को खड़े होकर या बैठकर झाड़ू पोछा लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि इसके कारण पेट पर अधिक दबाव पड़ने पर महिला के गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।

दर्द व् ब्लीडिंग

झाड़ू पोछा लगाने के कारण गर्भवती महिला के पेट के निचले हिस्से में दर्द आदि की सम्भावना हो सकती है। जिसके कारण महिला को परेशानी हो सकती है, साथ ही कई बार स्पॉटिंग की समस्या का भी खतरा रहता है, ऐसे में झाड़ू पोछा लगाते समय ज्यादा तेजी या ज्यादा जोर नहीं लगाना चाहिए।

कॉम्प्लीकेशन्स होने पर

यदि गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स होती है तो भी गर्भवती महिला को झाड़ू पोछा न लगाने की सलाह दी जाती है। क्योंकि ऐसा करने के कारण प्रेग्नेंट महिला की दिक्कतें बढ़ सकती है।

गर्भवती महिला को झाड़ू पोछा लगाते समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

  • गर्भ में पल रहे शिशु और गर्भवती महिला को इन्फेक्शन से बचे रहने के लिए पोछा के पानी में किसी भी केमिकल युक्त चीज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • झाड़ू पोछा लगाते समय प्रेग्नेंट महिला को बिल्कुल भी तेजी नहीं करनी चाहिए बल्कि आराम से महिला को काम करना चाहिए।
  • यदि आपको धूल से एलर्जी है तो झाड़ू लगाते समय मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए, या झाड़ू लगाने से बचना चाहिए।
  • अधिक थकावट महसूस होने पर झाड़ू पोछा लगाते हुए रूककर थोड़ा आराम करना चाहिए, क्योंकि थकान का अधिक अनुभव होने पर महिला को परेशानी हो सकती है।
  • ज्यादा ऊँची जगह पर झाड़ने आदि के काम को करने से बचना चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे पढ़ने के बाद आपको यह जानने में आसानी होगी की गर्भवती महिला को झाड़ू पोछा लगाना चाहिए या नहीं। इसके अलावा गर्भवती महिला यदि घर में झाड़ू पोछा आदि का काम करती है तो महिला को घर के किसी सदस्य को आस पास जरूर रखना चाहिए, ताकि यदि कोई परेशानी हो तो आपको संभालने के लिए कोई आपके पास हो। और सबसे जरुरी बात प्रेगनेंसी में किसी भी काम को करने से पहले एक बार डॉक्टर की राय जरूर लेनी चाहिए।

प्रेगनेंसी में पैरों के दर्द से निजात पाने के टिप्स

गर्भावस्था में पैरों का दर्द

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी परेशानियों से जूझती है। इन परेशानियों में से पैरों में दर्द महसूस होना एक आम समस्या है और ज्यादातर महिलाएं इससे परेशान भी रहती है। दिन भर में पैरों के दर्द से इतनी परेशानी नहीं होती है लेकिन रात में सोने के समय इस दर्द का बहुत ज्यादा अनुभव हो सकता है। आखिरी महीनो में तो कुछ महिलाओं के पैरों में सूजन भी आ सकती है, जिसके कारण चलने फिरने में भी परेशानी का अनुभव हो सकता है। प्रेगनेंसी में महिला को पैरों में दर्द के महसूस होने के बहुत से कारण हो सकते हैं।

प्रेगनेंसी में पैरों में दर्द के कारण

  • गर्भवती महिला का वजन बढ़ने के कारण प्रेगनेंसी में पैरों के दर्द की समस्या हो सकती है, क्योंकि वजन बढ़ने के कारण पैरों पर अधिक दबाव पड़ता है जिसके कारण दर्द का अनुभव हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान जैसे जैसे गर्भाशय का आकार बढ़ता है तो इसके कारण पैरों की तरफ जाने वाली नसों पर दबाव पड़ने के कारण भी पैरों में दर्द की समस्या हो सकती है क्योंकि इससे ब्लड फ्लो में रूकावट आ सकती है।
  • पैरों को एक ही पोजीशन में रखने के कारण भी ऐसा महसूस हो सकता है, खासकर बहुत देर तक एक ही जगह खड़े रहने के कारण।
  • गर्भवती महिला यदि ऐसे आहार का सेवन करती है जिसमे फॉस्फोरस की मात्रा अधिक होती है, तो इसके कारण भी महिला को पैरों में दर्द की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • यदि गर्भवती महिला की बॉडी में कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों की कमी हो जाती है तो भी यह परेशानी हो सकती है।

प्रेगनेंसी में पैरों के दर्द से राहत पाने के लिए टिप्स

प्रेग्नेंट महिला यदि पैरों में होने वाले दर्द की समस्या से परेशान रहती है तो इस परेशानी से निजात पाने के लिए कुछ आसान से टिप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में पैरों में होने वाले दर्द से निजात पाने के लिए क्या करना चाहिए।

सिकाई

सिकाई पैरों के दर्द से राहत पाने के लिए एक आसान और असरदार उपाय में से एक है। इसके इस्तेमाल के लिए पानी गुनगुना करके उसमे थोड़ा नमक या फिटकरी मिलाएं, उसके बाद रात को सोने से पहले इसमें पंद्रह से बीस मिनट तक पैरों को डालकर रखें। उसके बाद पैरों को साफ़ करके सो जाएँ आपको आराम मिलेगा।

मालिश

रात को सोने से पहले किसी भी तेल को गुनगुना करके हल्के हाथों से मसाज करें। इससे पैरों को आराम मिलने के साथ पैरों में ब्लड फ्लो अच्छे से होगा। जिससे पैरों में दर्द के साथ सूजन से राहत पाने में मदद मिलेगी।

स्ट्रेचिंग

प्रेगनेंसी में अधिक व्यायाम गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन पैरों के दर्द से आराम के लिए पैरों और पैरों की उँगलियों को स्ट्रेच किया जा सकता है। सुबह नियमित उठकर दस से पंद्रह मिनट तक स्ट्रेचिंग करें, या आप योगासन भी कर सकते हैं इसे करने से भी पैरों को आराम महसूस होगा।

वॉक

वॉक करना प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को फिट रखने में मदद करता है, साथ ही वॉक करने से पैरों की मांसपेशियों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है, और ब्लड फ्लो भी बेहतर तरीके से होता है। जिससे पैरों में होने वाली दर्द की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। इसीलिए दिन में थोड़ी देर गर्भवती महिला को वॉक जरूर करनी चाहिए।

पोषण युक्त आहार

गर्भावस्था के दौरान ऐसे आहार का सेवन करने जिसमे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में हो। खासकर कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम आदि, ऐसे आहार का सेवन करने से गर्भवती महिला को फिट रहने, गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रहने के साथ, पैरों में होने वाले दर्द की समस्या से भी रहत पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा हरी सब्जियों, फलों, आदि का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

पानी पीएं

प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर पानी का सेवन करने से भी प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सकती है। क्योंकि इससे बॉडी में मौजूद विषैले पदार्थो को बाहर निकलने के साथ बॉडी को एनर्जी भी मिलती है जिससे इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में होने वाले दर्द की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। साथ ही यदि दर्द व् सूजन की समस्या अधिक हो तो इसे अनदेखा भी नहीं करना चाहिए। और इसके लिए एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

चूहे से छुटकारा पाने के उपाय

चूहों को भी घर के लिए बकारत्मक माना जाता है, क्योंकि इसके कारण घर में गंदगी होने के साथ सामान का नुकसान भी होता है, इसके अलावा यह खाने पीने की वस्तुओ को भी कुतर जाते हैं जिसे बिमारी फैलने का खतरा रहता है, यह कभी भी और कही से भी आपके घर में आ जाता है, और बाहर होने वाली गंदगी को भी आपके घर में ले आता है, साथ ही कई बार ये अंदर की मर जाते है जिसके कारण पूरा घर बदबू से भर जाता है, और ये अपने आप को घर का राजा समझते है कभी भी कही भी पहुँच जाते है, नुकसान कर देते है और आपके आने की आहट सुनकर एक दम से गायब भी हो जाते है, इन्हें जीवित रहने के लिए आपकी जूठन भी काफी होती है, बाकी ये खुद ही खाने के लिए कुछ न कुछ ढूंड ही लेते हैं, क्या आप भी घर में चूहों की समस्या से परेशान हैं, यदि हाँ तो आये आज हम आपको चूहों से बचने के लिए कुछ आसान टिप्स बताने जा रहे है जिनसे आपको कुछ ही दिनों में रहत मिलेगी।

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लाल मिर्च का उपयोग करें:-

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चूहों को घर से भगाने के लिए आप लाल मिर्च का इस्तेमाल कर सकती है, इसके लिए आप घर के उन हिस्सों में लाल मिर्च पाउडर डाल दें, उसके बाद देखिये चूहें आपके घर में आने से पहले दस बार सोचेंगे, और आपके घर से बाहर भागते हुए दिखाई देंगे।

पुदीने की पत्तियों का इस्तेमाल करें:-

पुदीने की गंध चूहों को बल्कि अच्छी नहीं लगती है, इसीलिए आप इनका इस्तेमाल भी चूहों को अपने घर से भगाने के लिए कर सकती है, इसके लिए आप पुदीने की पत्तियों को पीसकर उनका रस निकाल लें, उसके बाद रुई को उसमे भिगोकर घर के अलग अलग हिस्सों में रख दें, इसकी गंध का असर आपको जरूर दिखाई देगा और चूहों की समस्या से आपको निजात मिलेगा।

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घर में बिल्ली पालें:-

यदि आपको घर में पेट पालने का शौक है तो आप बिल्ली पालें, बिल्ली से दर कर चूहें कहा जाते हैं पता ही नहीं चलता है, साथ ही बिल्ली को घर में उसका मनपसंद भोजन भी मिल जायेगा।

प्याज़ का प्रयोग करें:-

प्याज़ जितना आपके खाने का जायका बढ़ता है, उतना ही चूहें इससे दूर भागते हैं इसके लिए आप प्याज़ के टुकड़े काटकर उन स्थानों पर रखें जहां से चूहें आपके घर में आते हैं, और फिर देखिये आप ही कहेंगे की चूहें हमारे घर का रास्ता भूल गए हैं।

गाय के गोबर का इस्तेमाल करें:-

यदि आपके गार्डन में चूहें बहुत परेशान करते है, तो इसके लिए आप थोड़ा सा गाय का गोबर अपने गार्डन में फैला दीजिए, उसके बाद चूहें जैसे ही इसे खाएंगे तो इससे उनके पेट में दत्ड़ होना शुरू हो जायेगा, और वो इधर उधर भागने लगेंगे, और मर भी जाएंगे।

तेज पत्ते का इस्तेमाल करें:-

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तेज पत्ते की तीखी गंध भी चूहों को बिलकुल नापसंद होती है, इसीलिए आप घर के उन हिस्सों में तेज पत्ते का पाउडर बनाकर रखें जहां से चूहें आते है, या चूहें जहापर अधिक आते है, इसकी सुगढ़ सूघ कर भी चूहें आपके घर से दूर भाग जाएंगे।

मानव बाल का उपयोग करें:-

चूहों को भगाने के लिए आप बालों का इस्तेमाल भी कर सकते है, चूहें जैसे ही मानव बाल को निगलते हैं तो इन्हे निगलने में उन्हें परेशानी होती है, और यदि वो इन्हे निगल लेते हैं तो ऐसा करने से उनकी मौत हो जाती है।

जाल का उपयोग करें:-

बाजार में भी चूहों को भगाने के लिए जलता है,इसमें आप चूहों केलिए रोटी या ब्रेड लगाकर उस हिस्से में रखें जहां चूहें आते है, और जैसे ही चूहें खाने को निकालने के लिए जाल के पास आयेंगे तो वो इसमें फंस जायेगें, और उसके बाद आप उन्हें अपने घर से दूर किसी पार्क आदि में छोड़कर आ सकते हैं।

तो ये हैं कुछ उपाय जिनका इस्तेमाल करके आप अपने घर में चूहों को आने से रोक सकती हैं, साथ ही इससे चूहों के कारण आपके सामान को नुकसान, और इनके द्वारा फैलने वाली बिमारी से बचाव करने में मदद मिलती है।

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डायबिटीज़ के लक्षण क्या होते हैं

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डायबिटीज़ को शुगर या महुमेह के नाम से भी जाना जाता है, इस बिमारी से पहले से लोग प्रभावित हो रहे है। लेकिन आज के समय में शुगर से परेशान रोगियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। शुरुआत में आपको पता भी नहीं चलता है की आप इस बिमारी से ग्रसित है, लेकिन जब यह बढ़ने लगती है तो आपको इसके बारे में पता चलता है। इस बिमारी का कारण या तो आपकी खराब जीवनशैली या फिर वंशानुगत हो सकता है। यह आज कल आम समस्या की तरह उभर कर सामने आ रही है। लेकिन यदि आपको इस बिमारी के बारे में शुरुआत में ही पता चल जाता है तो इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। तो आइए जानते है की डायबिटीज़ कौन कौन सी होती है। और इसके क्या लक्षण होते है।

डायबिटीज़ के टाइप कौन से है:-

खराब जीवनशैली के कारण आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है, और इसके होने का कारण होता है की जब आपके शरीर में पैक्रियाज ग्रंथि इन्सुलिन बनाना बंद कर देती है तो आपको इस समस्या का सामना करना पड़ता है। डायबिटीज़ दो तरह की होती है टाइप 1 और टाइप 2 आइये जानते हैं इसके बारे में।

टाइप 1 :-

इस टाइप के होने की समस्या या तो छोटे बच्चों में या बीस साल तक की उम्र के लोगो में देखी जाती है। इसके होने के कारण शरीर में इन्सुलिन नहीं बनता है।

टाइप 2 :-

ज्यादातर लोग इस तरह के शुगर से ग्रसित होते है, इसके होने के कारण शरीर में इन्सुलिन तो बनता है, लेकिन या तो वह शरीर की जरुरत के अनुसार नहीं बनता है या फिर वह बॉडी में ठीक से काम नहीं कर पाता है जिस तरह से उसे करना चाहिए।

डायबिटीज़ के होने के कारण:-

  • जंक फ़ूड का अधिक सेवन शुगर होने की सम्भावना को बढ़ाता है।
  • यह रोग अनुवांशिक भी हो सकता है, इसका मतलब होता है की यदि यह रोग माँ बाप को होता है तो हो सकता है आपके बच्चों को भी यह परेशानी हो।
  • जरुरत से ज्यादा वजन होना भी डायबिटीज़ का कारण बनता है।
  • डिप्रेशन या तनाव के होने से भी आपको यह समस्या हो सकती है।
  • कोल्ड ड्रिंक, मीठा, चाय आदि का अधिक सेवन भी इसका कारण बनता है।
  • नशा करने से जैसे धूम्रपान, तम्बाकू आदि का सेवन करने से भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • बिना सलाह के लम्बे समय तक दवाइयों का सेवन करने से भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

डायबिटीज़ के क्या लक्षण होते है:-

डायबिटीज़ के होने पर आपके शरीर में बहुत से लक्षण दिखाई देने लगते है, जिससे आप पता कर सकते हैं की कहीं आपको शुगर की समस्या तो नहीं है, इसके लिए आज हम आपको कुछ ऐसे ही लक्षण बताने जा रहें है जिन्हे यदि आप अपने शरीर में देखते हैं तो आपको तुरंत डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

डायबिटीज़ में होता है थकान का अनुभव:-

यदि आप शुगर की बिमारी से ग्रसित है तो आपको बहुत जल्दी थकान का अनुभव होने लगता है। और यदि आप सोकर भी उठते है तो भी ऐसा लगता है की जैसे आपका शरीर टूट रहा है। और पूरी नींद होने के बाद भी आपको ऐसा लगता है की जैसे आपकी नींद पूरी नहीं हुई है। और यदि ऐसा होता है तो इसका मतलब होता है की आपके शरीर में ब्लड में शुगर का लेवल लगातार बढ़ता जा रहा है।

शुगर में घाव नहीं भरते जल्दी:-

यदि आपको कहीं चोट लग जाती है या छोटी मोटी खरोच भी आ जाती है, और आप शुगर की बिमारी से ग्रसित है तो आपकी वह चोट जल्दी नहीं ठीक होती है। और कई बार तो छोटी सी चोट भी बड़े घाव का रूप ले लेती है।

वजन में कमी आना है मधुमेह का लक्षण:-

मधुमेह में रोग के होने पर शरीर का वजन तेजी से कम होने लगता है। सामान्य दिनों के मुकाबले वजन में कमी तेजी से होने लगती है, तो ऐसे में आपको अपना चेकअप जरूर करवाना चाहिए।

बार बार पेशाब आना भी है डायबिटीज़ की पहचान:-

शुगर के रोगी को बार बार यूरिन के पास करने इच्छा होती है, क्योंकि ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ने लगता है, जिसके कारण शुगर की मात्रा बढ़ती है और व्यक्ति को बार बार यूरिन आने की समस्या शुरू हो जाती है।

मधुमेह के रोगी को लगती है जोरो से भूख:-

मधुमेह के होने पर जितना तेजी से व्यक्ति का वजन कम होता है, उतनी ही तेजी से उसे भूख लगनी शुरू हो जाती है। ऐसे में भूख के बार बार लगने पर व्यक्ति का कुछ न कुछ जरूर खाने का मन करता है।

ज्यादा तबियत खराब रहने लगती है:-

यदि आप शुगर की बिमारी से ग्रसित हैं तो ऐसा होने पर आपको यदि कोई भी बैक्टेरियल इन्फेक्शन जैसे की खांसी जुखाम आदि हो जाता है तो वो जल्दी से ठीक नहीं होता है। बल्कि कई बार छोटी छोटी चीजें भी बड़े संक्रमण का रूप ले लेती है।

आँखों में कमजोरी का आना भी है डायबिटीज़ का लक्षण:-

डायबिटीज़ की समस्या के होने पर व्यक्ति की आँखों पर भी प्रभाव पड़ता है, जैसे की धुंधला दिखाई देने लगता है, और साथ ही किसी भी चीज को देखने या पढ़ने के लिए आँखों पर बहुत जोर डालना पड़ता है।

बार बार लगती है प्यास:-

शुगर के रोगी को बार बार प्यास का लगना आम बात होती है, क्योंकि बार बार यूरिन पास करने से व्यक्ति के शरीर में पानी की कमी होने लगती है। जिसके कारण उसकी बार बार पानी पीने की इच्छा होती है।

स्किन सम्बन्धी समस्या का होना:-

शुगर की शुरुआत में आपको स्किन सम्बन्धी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है जैसे की आपकी स्किन पर बड़े बड़े घाव से पड़ने लगते है। ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर से राय  लेनी चाहिए।

डायबिटीज़ से बचने के कुछ उपाय:-

  • व्यायाम आदि करना चाहिए इसे आपके शरीर की गतिविधियों को सुचारू रूप से चलने में मदद मिलती है।
  • जंक फ़ूड का सेवन नहीं करना चाहिए संतुलित व् पौष्टिक आहार का सेवन करने से आपको इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।
  • तनाव लेना भी मधुमेह का कारण हो सकता है इसीलिए जितना हो सकें आपको खुश रहना चाहिए।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के ज्यादा दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • किसी भी तरह के नशे से परहेज करना चाहिए।
  • अपने वजन को नियंत्रित रखना चाहिए।
  • योगासन जैसे की अनुलोम विलोम और कपालभाति करना चाहिए, इससे आपको शुगर से राहत में आराम मिलता है।
  • शुगर की समस्या होने पर आपको अपना अच्छे से ख्याल रखना चाहिए ताकि आपके शरीर पर कोई भी जख्म आदि न बने।

तो यह है कुछ कारण जिनकी वजह से आपको इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।साथ ही यदि आपको शुगर के लक्षण आपके शरीर में दिखाई देते हैं तो आपको बिना देरी किए तुरंत अपना चेकअप करवाना चाहिए, ताकि आपकी इस समस्या को शुरुआत में ही ख़त्म किया जा सकें और आपको किसी तरह की कोई भी परेशानी न हो।