महिलाओं को वाइट डिस्चार्ज की समस्या होना बहुत ही आम बात होती है। और यह परेशानी कुछ महिलाओं को बहुत अधिक होती है। खासकर पीरियड्स से पहले, तो ऐसे में इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि सफ़ेद पानी का अधिक आना, बदबूदार आना, किसी शारीरिक परेशानी का संकेत हो सकता है। और वाइट डिस्चार्ज के गिरने का कोई एक कारण नहीं होता है। तो आइये आज हम पीरियड्स से पहले गाढ़ा चिपचिपा पदार्थ गिरने के कारण व् उपचार बताने जा रहें हैं।
पीरियड्स से पहले सफ़ेद पानी गिरने के कारण
महिला को बहुत अधिक घबराहट महसूस होना।
किसी रोग ग्रस्त व्यक्ति के साथ सम्बन्ध बनाने के कारण।
प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई न रखने के कारण।
शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण।
बारे बार गर्भपात होने की समस्या के कारण।
महिला के प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन होने के कारण।
माहवारी से पहले सफ़ेद पानी आने के लक्षण
प्राइवेट पार्ट में खुजली व् बदबू का महसूस होना।
महिला को थकावट, कमजोरी का महसूस होना।
सिर दर्द व् चक्कर आने जैसी परेशानी होना।
पेट से सम्बन्धी परेशानी जैसे कब्ज़ आदि का होना।
पीरियड्स से पहले सफ़ेद पानी आने की समस्या से बचने के टिप्स
यदि आप पीरियड्स आने से पहले वाइट डिस्चार्ज गिरने की समस्या से परेशान हैं। तो आप कुछ आसान तरीको का इस्तेमाल करके आसानी से इस परेशानी से राहत पा सकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं इस परेशानी से बचाव के कुछ उपचार
साफ सफाई
महिला को अपने प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि महिला को इन्फेक्शन जैसी समस्या से बचें रहने में मदद मिल सके। जिससे इस परेशानी से बचाव हो सके। और सफाई के लिए मल पास करने के बाद प्राइवेट पार्ट को साफ करना, साफ़ अंडरवियर पहनना आदि का ध्यान रखें।
फिटकरी
फिटकरी के टुकड़े को पानी में उबाल लें। उसके बाद पानी के गुनगुना रहने पर इस पानी से प्राइवेट पार्ट को साफ़ करें। इससे इन्फेक्शन से बचने व् सफेद पानी की समस्या से बचें रहने में मदद मिलेगी।
अदरक
पानी में अदरक के टुकड़े डालकर अच्छे से पानी के आधा रहने तक उबाल लें। उसके बाद दिन में तीन से चार बार थोड़ा थोड़ा इस पानी को पीएं। ऐसा करने से भी आपको इस परेशानी से बचें रहने में मदद मिलती है।
भुने हुए चने
भुने हुए चने में थोड़ा सा चीनी या गुड़ मिलाएं। उसके बाद इसमें थोड़ा सा दूध व् घी मिलाकर इसका नियमित सेवन करें। ऐसा करने से भी महिला को माहवारी से पहले वाइट डिस्चार्ज आने की समस्या से निजात मिल सकता है।
मेथी दाना
मेथी दाना को पानी में उबाल लें।
अब इस इस पानी के गुनगुना रहने पर इस पानी से प्राइवेट पार्ट को साफ़ करें।
ऐसा नियमित करने से भी आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिल सकती है।
सफ़ेद पानी से बचाव के लिए पीएं जूस
पालक, गाजर, चुकंदर, आदि का जूस निकालकर नियमित पीना चाहिए।
क्योंकि इनका जूस पीने से महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।
जिससे आपको इस परेशानी से बचाव मिलने में मदद मिल सकती है।
सम्बन्ध
इस परेशानी से बचाव के लिए आपको सम्बन्ध बनाते समय ध्यान रखना चाहिए। की यदि आपको इन्फेक्शन है या आपके पार्टनर को इन्फेक्शन है। तो आपको सम्बन्ध बनाते समय सुरक्षा का इस्तेमाल करना चाहिए। या फिर अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।
तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सकती है। तो यदि आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो इन टिप्स का खास ध्यान रखें।
Face Wrinkle : यूँ तो झुर्रियों का आना, एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और बढ़ती उम्र के साथ-साथ चेहरे पर झुर्रियाँ आ जाना एक आम बात है, परंतु त्वचा की सही देखभाल न होने पर समय से पहले ही झुर्रियाँ नज़र आने लगती हैं। ऐसे तो आधुनिकता के इस युग में बोटॉक्स और लेज़र तकनीक जैसे कई उपाय मौजूद हैं, जो आपकी बढ़ती उम्र के असर को छुपा सकते हैं। परंतु ये उपाय बहुत महँगे होने के साथ-साथ बहुत ख़तरनाक भी हैं, क्यूँकि अगर ये कुशल चिकित्सक की देखरेख में ना किए जाएँ तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
बढ़ती उम्र को रोकना बेशक हमारे हाथ में नहीं है, परंतु कुछ घरेलू उपायों से हम बढ़ती उम्र को दर्शाने वाली इन झुर्रियों को कम ज़रूर कर सकते हैं। बढ़ती उम्र के साथ-साथ अन्य कई कारण भी होते हैं जो कि असमय ही चेहरे पर झुर्रियों को न्यौता दे देते हैं। इन कारणों पर अगर समय रहते क़ाबू पा लिया जाए तो हम झुर्रियों को चेहरे पर झलकने से रोक सकते हैं।
झुर्रियों के कारण-
एजिंग-एजिंग यानी की बढ़ती उम्र। हम सभी जानते हैं कि बढ़ती उम्र के साथ झुर्रियों का आना आम बात है।
धूम्रपान-बीड़ी, सिगरेट इत्यादि के सेवन से त्वचा कांतिहीन हो जाती है, मुरझाई-सी दिखने लगती है। त्वचा रूखी पड़ जाती है और झुर्रियाँ नज़र आने लगती हैं।
फ़्री-रेडिकल्स-फ़्री रेडिकल्स ऐसे परमाणु या परमाणु समूह होते हैं, जिनमें odd या unpaired इलेक्ट्रॉन होता है। ऐसे परमाणु ऑक्सिजन के सम्पर्क में आने से बेहद रीऐक्टिव हो जाते हैं और हमारे DNA, रक्त वाहिकाओं और सेल मेम्ब्रेन को नुक़सान पहुँचा सकते हैं। फ़्री रेडिकल्स की वजह से एजिंग, कैन्सर हो सकता है।
धूप में ज़्यादा रहना-अत्यधिक धूप में रहने के कारण हमारे चेहरे पर अनेक प्रकार की समस्याएँ होने लगती हैं, उनमें झुर्रियाँ भी शामिल हैं।
तनाव-अत्यधिक तनाव की वजह से भी हमारा शरीर असमय बुढ़ापे के लक्षण दिखाने लगता है। चेहरे की त्वचा कांतिहीन हो जाती है और झुर्रियाँ आने लगती हैं।
पोषण का अभाव-समय से पहले एजिंग की प्रॉब्लम का सबसे बड़ा कारण है असंतुलित खानपान। आजकल जंक फ़ूड के बढ़ते हुए चलन और तली हुई चीज़ें अधिक खाने से शरीर में वसा जमा होती जाती है, शरीर को आवश्यक विटामिन और मिनरल नहीं मिल पाते हैं और हमारी त्वचा समय से पहले ही बूढ़ी होने लगती है।
डिहाइड्रेशन-शरीर में पानी की कमी होने से त्वचा की नमी ख़त्म होने लगती है और त्वचा रूखी सूखी नज़र आने लगती हैं। ज़रूरी नमी ना मिलने की वजह से त्वचा में झुर्रियाँ पड़ने लगती हैं।
प्रदूषण-प्रदूषण का ना सिर्फ़ हमारे स्वास्थ्य बल्कि हमारी त्वचा पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। त्वचा पर दाग़ धब्बे, मुहाँसे और रूखापन आ जाता है। असमय झुर्रियाँ आने लगती हैं।
त्वचा की देखभाल न करना-त्वचा की सही तरीक़े से देखभाल ना करना भी झुर्रियों के लिए ज़िम्मेदार है। त्वचा की नियमित रूप से साफ़ सफ़ाई व उचित पोषण बेहद ज़रूरी है।
झुर्रियों के लक्षण-
चेहरे का बेजान होना।
त्वचा का रूखापन।
माथे में छोटी-छोटी लकीरों का पड़ना।
आँखों के पास महीन सिलवटें पड़ना।
होंठों के पास महीन रेखाएँ पड़ना।
झुर्रियों को रोकने के उपाय-
• संतुलित आहार लें-अच्छी सेहत के साथ-साथ स्वस्थ त्वचा के लिए संतुलित भोजन खाना अतिआवश्यक होता है। हमारे भोजन में फल, सब्ज़ियाँ, अनाज, दूध, दालें इत्यादि हर चीज़ शामिल होनी चाहिए. फलों और सब्ज़ियों में सभी प्रकार के विटामिन और मिनरल मौजूद होते हैं, जो की हमें बीमारियों से दूर रखने के साथ-साथ हमारी त्वचा को भी कांतिमय बनाए रखते हैं और एजिंग की प्रॉब्लम को हमसे दूर रखते हैं। आँवला, पपीता, तरबूज़, संतरा, अंकुरित दालें इत्यादि खाने से शरीर को पोषक तत्व मिलते हैं, जो की त्वचा को सुंदर और कोमल बनाए रखने के लिए ज़रूरी होते हैं।
• पानी अधिक पिएँ-दिन में कम से कम आठ दस गिलास पानी ज़रूर पिएँ। शरीर में पानी की सही मात्रा होने से हमारा पाचन तंत्र सही रहता है और त्वचा में नमी बनी रहती है। त्वचा में नमी बने रहने से असमय उम्र बढ़ने के लक्षण यानी झुर्रियाँ नहीं दिखाई देती।
• नारियल पानी पिएँ-रोज़ाना एक नारियल का पानी पिएँ। एक नारियल में क़रीब दो सौ मिलीलीटर पानी होता है। नारियल पानी एक कम कैलोरी वाला पेय है, इसमें एंटीऑक्सिडेंटस्, अमीनो ऐसिडस्, एंजाईमस्, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन-सी और कई तरह के सॉल्ट भी होते हैं। नारियल पानी पीने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और इसमें मौजूद cytokinin त्वचा की कोशिकाओं और उत्तकों पर सकारात्मक प्रभाव डाल कर बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करता है। फ़्री रेडिकल्स के ख़तरनाक प्रभाव को कम करने के लिए एंटीऑक्सिडेंटस् बेहद आवश्यक होते हैं।
• नशीले पदार्थों से तौबा करें-धूम्रपान और शराब के सेवन से तौबा करें, इससे आपकी त्वचा असमय बूढ़ी होने से बचेगी।
• नियमित व्यायाम करें-नियमित सैर, योगा और व्यायाम करने से शरीर स्वस्थ रहता है और टॉक्सिक पदार्थ पसीने के साथ शरीर से बाहर निकल जाते हैं। इससे आपकी त्वचा कांतिमय बनी रहती है, ढीली नहीं पड़ती। त्वचा में उचित कसाव रहने से झुर्रियों को समस्या नहीं होती है।
झुर्रियाँ हटाने के घरेलू नुस्ख़े-
1. ग्लिसरीन पैक-गुलाब जल, ग्लिसरीन और निम्बू का रस बराबर मात्रा में मिला कर चेहरे पर लगाएँ, 15-20 मिनट तक लगा रहने दें, फिर चेहरा धो दें। इसे नियमित रूप से लगाने से झुर्रियाँ ठीक होती हैं।
2. पपीता पैक-पपीते को मसल कर चेहरे पर लगाने से विषैले पदार्थ त्वचा से बाहर निकल जाते हैं, त्वचा में कसाव आता है व झुर्रियाँ ग़ायब होती हैं।
3. केले का पैक-पके हुए केले को अच्छी तरह मसलकर पेस्ट जैसा बनाएँ और चेहरे पर लगा लें। आधा घंटा चेहरे पर लगा रहने दें। फिर सादे पानी से चेहरा धो दें।
4. बादाम का तेल-बादाम का तेल भी झुर्रियां हटाने में कारगर है। रोज रात में बादाम के तेल से चेहरे की मसाज करें। इस तेल से आँखों के नीचे के काले घेरे भी कम हो जाते हैं। ये त्वचा को पोषण देकर झुर्रियों को दूर करता है।
5. मुल्तानी मिट्टी-चेहरे पर कसाव लाने और महीन रेखाओं से निजात दिलाने में मुल्तानी मिट्टी काफी फायदेमंद है। मुल्तानी मिट्टी को आधे घंटे के लिए पानी में भिगो दें, जब यह गल जाए तो इसमें खीरे का रस, टमाटर का रस और शहद मिलाएँ। अच्छी तरह मिक्स करके इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएँ। ध्यान रखें कि पैक लगाने के बाद हँसें या बोले नहीं। सूखने तक इसे लगा कर रखें, फिर चेहरा धो दें।
6. ऑलिव ऑयल-ऑलिव ऑयल भी चेहरे के लिए बेहद फायदेमंद है। इसकी मालिश से चेहरे में चमक आती है, रंग निखरता है और फाइन लाइन्स यानी की महीन रेखाएँ कम होती हैं।
7. मिल्क पाउडर-2 बड़े चम्मच शहद, 4 बड़े चम्मच मिल्क पाउडर और 2 बड़े चम्मच गर्म पानी। सभी चीज़ों को अच्छी तरह मिलाकर चेहरे और गर्दन पर लगाएँ। शहद से चेहरे पर ग्लो आता है और मिल्क पाउडर से चेहरा स्मूथ और रिंकल फ्री होता है।
8. उड़द दाल का पैक-झुर्रियों को मिटाने के लिए उड़द की दाल का प्रयोग भी बहुत कारगर है। उड़द की दाल को रातभर दूध में भिगोकर सुबह पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएँ। इससे चेहरे में झुर्रियाँ नहीं आती तथा रंगत निखरती है।
इन सब नुस्ख़ों को आज़मा कर व अपनी खाने पीने की ग़लत आदतों में सुधार करके, आप चेहरे पर आने वाली झुर्रियों को मिटाकर अपनी बढ़ती उम्र को रोक सकते हैं।
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हर गर्भवती महिला चाहती है की उसके गर्भ में पल रहे शिशु का विकास अच्छे तरीके से हो, और उसके विकास में किसी भी तरह की कमी न आए। साथ ही उसका होने वाला शिशु गोरा, सूंदर व् बुद्धिमान हो। और इसके लिए सबसे जरुरी होता है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखें, फिट रहें, खाने में किसी तरह की लापरवाही न करें, आदि। इन सभी चीजों का ध्यान रखने से गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है। साथ ही शिशु की रंगत को लेकर महिला के मन में सवाल आए सकता है की क्या शिशु को गोरा करने के लिए भी प्रेगनेंसी के दौरान कुछ किया जा सकता है? तो इसका जवाब होता है हाँ, क्योंकि कई लोग ऐसा मानते हैं की कुछ ऐसे आहार होते हैं जिनका सेवन यदि गर्भवती महिला करती है, तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास को होने के साथ शिशु की रंगत को निखारने में भी मदद मिलती है। क्योंकि शिशु अपने विकास के साथ अपनी अन्य जरूरतों के लिए भी अपनी माँ पर ही निर्भर करता है।
गोरा बच्चा होने के लिए गर्भवती महिला खाएं यह आहार
शिशु के जन्म के बाद महिला शिशु की त्वचा की बेहतर केयर के लिए उसका अच्छे से ध्यान रखती है, जैसे की मालिश करती है, शिशु की स्किन के लिए लोशन आदि का इस्तेमाल करती है, आदि। लेकिन आप चाहे तो गर्भ से ही शिशु की स्किन को निखारने के लिए कुछ टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है। तो लीजिये आज हम ऐसे ही कुछ आहार के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो इससे शिशु की रंगत को निखारने में मदद मिलती है, तो आइये अब जानते हैं की वो आहार कौन से हैं।
स्वस्थ व् पौष्टिक आहार
प्रेग्नेंट महिला को भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों से युक्त आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है ताकि गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में शिशु के विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिल सके। और इसके लिए सबसे जरुरी होता है की महिला स्वस्थ व् पौष्टिक आहार का सेवन करें। क्योंकि ऐसा करने से शिशु के विकास के लिए सभी जरुरी पोषक तत्व उसे भरपूर मात्रा में मिलते है जिससे शिशु को सूंदर, गोरा, बुद्धिमान होने में मदद मिलती है।
नारियल
गर्भ में शिशु की रंगत को निखारने के लिए गर्भवती महिला को हरे नारियल का सेवन जरूर करना चाहिए। साथ ही नारियल और मिश्री को मिलाकर उसका सेवन करने से भी गर्भवती महिला कर सकती है इससे गर्भ में शिशु की स्किन को पोषण पहुंचाने में मदद मिलती है। इसके अलावा नारियल पानी का सेवन भी गर्भवती महिला को करना चाहिए क्योंकि इसे शिशु की त्वचा की कोमलता और सुंदरता को बनाएं रखने में मदद मिलती है।
दूध
यदि आप चाहती है की आपके शिशु की दूध जैसी निखरी त्वचा हो, तो इसके लिए प्रेगनेंसी में दूध का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि दूध न केवल शिशु के रंग को गोरा करने में मदद करता है बल्कि कैल्शियम की अधिकता होने के कारण शिशु की हड्डियों के विकास को भी बेहतर करने में मदद करता है। और दूध के फायदे को दुगुना करने के लिए गर्भवती महिला इसमें केसर या बादाम को भी मिला सकती है। लेकिन केसर और बादाम की मात्रा का ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा गर्भवती महिला को दूध से बनी चीजों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि यह भी शिशु की रंगत में निखार लाने में मदद कर सकती है।
संतरा
संतरे में मौजूद विटामिन सी शिशु की त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है, साथ ही शिशु और गर्भवती महिला दोनों को हर तरह के संक्रमण से सुरक्षित रखने में भी फायदेमंद होता है। और ऐसा बहुत से लोग कहते हैं की प्रेग्नेंट महिला यदि संतरे का सेवन करती है तो इससे गर्भ में शिशु की रंगत में निखार लाने और शिशु की आँखों को खूबसूरत बनाने में मदद मिलती है।
अंडा
पोषक तत्वों से भरपूर अंडे का सेवन यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही से करती है और इसे अपनी डाइट में शामिल करती है। तो इसमें मौजूद विटामिन, प्रोटीन जैसे मिनरल शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास को बेहतर करने में मदद करते हैं। साथ ही अंडे का सेवन करने से शिशु की रंगत भी निखर जाती है ऐसा भी कुछ लोग का मानते हैं।
सौंफ
बहुत से लोग ऐसा भी मानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के सौंफ का सेवन करने या इसका पानी पीने से शिशु की रंगत में निखार लाने में मदद मिलती है। ऐसे में आप भी यदि गर्भवती हैं तो आप भी सौंफ का सेवन शिशु की रंगत को निखारने के लिए कर सकती है।
तरल पदार्थ
पानी का गर्भवती महिला की बॉडी में भरपूर मात्रा में होना बहुत जरुरी होता है क्योंकि पानी का भरपूर सेवन करने से गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। साथ ही शिशु की स्किन को भी भरपूर पोषण मिलता है। जिससे शिशु की स्किन को कोमल व् निखरी हुई बनाने में मदद मिलती है। इसी लिए गर्भवती महिला को दिन में आठ से दस गिलास पानी जरूर पीना चाहिए और पानी के साथ महिला नारियल पानी, ताजे फलों का रस, आदि का सेवन भी कर सकती है।
आंवले का मुरब्बा
आयरन, विटामिन सी, कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों से भरपूर आंवले के मुरब्बे का सेवन करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को फायदा मिलता है। साथ ही यदि गर्भवती महिला गर्भ में पल रहे शिशु की रंगत को लेकर थोड़ा परेशान होती है। तो इसके लिए आप आंवले के मुरब्बे को अपनी डाइट में शामिल कर सकती है क्योंकि आंवले के मुरब्बे का सेवन करने से शिशु की स्किन की रंगत में निखार लाने में मदद मिल सकती है।
तो यह है कुछ आहार जिनका सेवन यदि प्रेग्नेंट महिला करती है तो इससे गर्भ में शिशु की रंगत को निखारने में मदद मिलती है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला चाहे तो इन आहार को अपनी डाइट में शामिल कर सकती है ताकि गोर व् सूंदर शिशु को जन्म देने में मदद मिल सके।
गर्भावस्था के दौरान महिला बहुत सी शारीरिक समस्याओं से गुजरती है और उनकी में से एक होती है थकान व् कमजोरी की समस्या, प्रेग्नेंट महिला को थकान व् कमजोरी का अनुभव होना बहुत ही आम बात होती है। खासकर इसका अनुभव प्रेगनेंसी के शुरूआती समय और प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में अधिक हो सकता है। प्रेगनेंसी के शुरुआत में इसका कारण बॉडी में तेजी से हार्मोनल बदलाव और आखिरी तिमाही में इसका कारण महिला का वजन बढ़ना हो सकता है। ऐसे में थकान व् कमजोरी का अधिक अनुभव होने पर महिला को बहुत ज्यादा परेशानी हो सकती है साथ ही इसकी वजह से कहीं भी मन नहीं लगता है। प्रेगनेंसी के दौरान थकान व् कमजोरी का अधिक होना बॉडी में होने वाली कुछ स्वास्थ्य समस्या की और इशारा भी करता है। जैसे की महिला का एनीमिया, तनाव, अनिंद्रा जैसी परेशानी से ग्रसित होना, ऐसे में थकान व् कमजोरी की समस्या अधिक होने पर इसे अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर से भी बात करनी चाहिए।
प्रेगनेंसी में थकान और कमजोरी को दूर करने के टिप्स
गर्भावस्था के दौरान यदि महिला थकाम व् कमजोरी की समस्या से अधिक परेशान है तो इसके इलाज के लिए महिला को जरूर टिप्स का इस्तेमाल करना चाहिए। जिससे गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचाव करने में मदद मिल सके। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला थकान व् कमजोरी की समस्या से बचने के लिए क्या कर सकती है।
आयरन
गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया की समस्या होने के कारण भी गर्भवती महिला को थकान व् कमजोरी का अनुभव अधिक हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस समस्या से बचने के लिए उन आहार का भरपूर सेवन करना चाहिए जिसमे आयरन मौजूद हो। जैसे की अनार, सेब, हरी सब्जियां खासकर पालक, ब्रोकली, ड्राई फ्रूट, चुकंदर, गाजर, आदि। यदि महिला इन सबका भरपूर सेवन करती है तो इससे बॉडी में खून की कमी को पूरा करके थकान व् कमजोरी की समस्या से महिला को बचाने में मदद करता है।
कैल्शियम
प्रेगनेंसी के दौरान महिला की हड्डियों में आई कमजोरी के कारण भी महिला बहुत जल्दी थकान व् कमजोरी का अनुभव कर सकती है। ऐसे में इस समस्या से बचने के लिए महिला को अपनी डाइट में कैल्शियम युक्त आहार जैसे दूध व् दूध से बने प्रोडक्ट्स, ड्राई फ्रूट, टोफू, आदि का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। कैल्शियम युक्त आहार का भरपूर सेवन करने से गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती मिलने में मदद मिलती है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान थकान व् कमजोरी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
सही समय से आहार
गर्भावस्था एक ऐसा समय होता है जहां आपके द्वारा लिया जाने वाला आहार केवल महिला के लिए ही नहीं बल्कि आपके गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी होता है। ऐसे में न केवल महिला को अपनी डाइट में भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए बल्कि सही समय से आहार लेना भी चाहिए। ताकि महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी न हो, ऐसे में महिला को हर दो से तीन घंटे में थोड़ा थोड़ा कुछ न कुछ हेल्दी जरूर खाना चाहिए। यदि महिला अपने आहार को समय से लेने के साथ पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करती है तो इससे भी महिला को थकान व् कमजोरी जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
खुश रहें
कुछ महिलाएं बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण और प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली शारीरिक परेशानियों के कारण कुछ गर्भवती महिलाएं तनाव में आ जाती है। और गर्भवती महिला का मानसिक रूप से परेशान रहना भी थकान व् कमजोरी का कारण हो सकता है। ऐसे में थकान व् कमजोरी की समस्या से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को तनाव लेने से बचना चाहिए और खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए। और कुछ रखने के लिए महिला को अपनी पसंद का काम करना चाहिए, अपने आप को बिज़ी रखना चाहिए, मेडिटेशन करना चाहिए, आदि।
पानी
डिहाइड्रेशन यानी बॉडी में पानी की कमी के कारण भी महिला बहुत जल्दी थकान व् कमजोरी का अनुभव कर सकती है। और ऐसे में इस समस्या से बचने के लिए गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि पानी पीने से महिला को तुरंत एनर्जी मिलती है। इसीलिए दिन में आठ से दस गिलास पानी व् ने तरल पदार्थ जैसे की जूस, निम्बू पानी, नारियल पानी, आदि का महिला को भरपूर सेवन करना चाहिए।
नींद
कुछ गर्भवती महिलाओं की थकान व् कमजोरी का कारण उनकी नींद पूरी न होना भी हो सकता है। खासकर महिला का वजन बढ़ने के कारण महिला को गहरी नींद लेने में ज्यादा समस्या हो सकती है, ऐसे में महिला को अपने सोने की पोजीशन, सोने की जगह, सोने के माहौल का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। जैसे की महिला को बाईं और करवट लेकर सोना चाहिए, सोने के लिए नरम गद्दे का इस्तेमाल करना चाहिए, प्रेगनेंसी पिलो या घर में रखें पिल्लो का इस्तेमाल करना चाहिए, शांत व् कम लाइट के माहौल में सोना चाहिए इससे महिला को अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है।
व्यायाम
प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में तो नहीं लेकिन प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में महिला हल्का फुल्का व्यायाम कर सकती है। व्यायाम करने से महिला की बॉडी में ब्लड फ्लो को बेहतर होना, पाचन क्रिया को बेहतर तरीके से काम करने, महिला को रिलैक्स फील होने, तनाव से बचे रहने,आदि में मदद मिलती है। जिससे महिला को थकान व् कमजोरी से आराम पाने में मदद मिलती है क्योंकि व्यायाम करने से महिला एक्टिव रहती है।
ऑफिस वाली महिलाएं
जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान भी ऑफिस का काम करती है उन्हें यह समस्या कई बार अधिक हो सकती है ऐसे में आपको ऑफिस में भी अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। एक ही जगह पर बैठे रहने की बजाय थोड़ा चलना फिरना चाहिए। अपनी जरुरत के सभी सामान को आस पास रखना चाहिए ताकि आपको इसके कारण किसी भी तरह की परेशानी न हो। ऐसा करने से कामकाजी महिलाओं को भी थकान व् कमजोरी की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।
तो यह हैं कुछ आसान तरीके जिनका ध्यान रखने से गर्भवती महिला को थकान व् कमजोरी जैसी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा अधिक थकान व् कमजोरी को अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर से भी राय लेनी चाहिए।
इन 9 तरीकों से हटायें ऊनी कपड़ों या स्वेटर में लगे दाग़-धब्बे
सर्दियों का मौसम अब केवल कुछ ही दिनों का मेहमान रह गया है. और इसी के साथ ऊनी कपड़ों की धरा उठाई भी शुरू हो चुकी है. जैसे-जैसे सर्दी हल्के पड़ने लगती है लोग अपनी अलमारियों से सर्दियों के ऊनी कपड़ों को निकालकर उनकी साफ़-सफाई में जुट जाते है. साफ़-सुथरे कपडें सभी को अच्छे लगते है लेकिन जाने-अनजाने उन कपड़ों में दाग़-धब्बे लग ही जाते है.
एक बार को यदि सामान्य कपड़ों में दाग़ लग जाए तो उसे ब्रश से रगड़कर साफ़ किया भी जा सकता है लेकिन यदि ऊनी कपड़ों में दाग़ लग जाए तो ये काफी परेशानी का कारण बन जाता है. क्योंकि इन कपड़ों को आप न तो ब्रश से रगड़ सकते है और न ही इनमे किसी तरह के रसायन का प्रयोग कर सकते है, क्योंकि ये कपड़ें बेहद नाजुक होते है और यदि इन पर ब्रश आदि का इस्तेमाल क्या गया तो इनकी शो खराब हो सकती है.
सामान्य कपड़ो की तुलना में ऊनी कपड़ों की सफाई बिलकुल अलग तरीके से की जाती है. ऐसे में यदि इनमे दाग़ लग जाए तो उसे हटाने के लिए भी आपको कुछ विशेष प्रयास करने होंगे. जिनमे बारे में आज हम आपको बताने जा रहे है.
ऊनी कपड़ों में लगे दाग़ को ऐसे दूर करें :-
1. यदि आपके ऊनी कपडे में फलों का दाग़ लग गया है तो इसके लिए उस पर ग्लिसरीन लगाकर धोएं.
2. ऊनी कपड़ों में लगे कीचड़ के दाग़ को हटाने के लिए पहले सुखी कीचड़ को सुखा लें. उसके बाद पानी में अमोनिया मिलाकर उससे दाग़ को हटाने के प्रयास करें.
3. अगर आपके गर्म कपड़ों पर शराब गिर गई है तो दाग़ पर थोड़े-सा सोडे वाला पानी डालें. दाग़ साफ़ हो जायेग.
4. स्याही या पेन की इंक के निशान को हटाने के लिए दाग़ पर टमाटर का रस लगायें. उसके बाद साफ़ पानी से इसे धो दें.
5. कपड़ों पर तेल का दाग़ लगने पर उस पर हलके हाथों से खट्टी दही लगायें. उसके बाद इसे पानी से धो लें.
6. ऊनी कपड़ों पर चाय या कॉफ़ी का निशान या दाग़ लग जाने पर उसे तुरंत चीनी से रगड़ें. ऐसा करने से दाग़ हल्का हो जायेगा, और उसके बाद पानी से साफ़ कर लें.
7. अगर आपके बच्चे के गर्म कपड़ों पर चॉकलेट का दाग़ लग गया है तो उसे हटाने के लिए स्पंज को ठंडे पानी से गिला करके उस दाग़ को साफ़ कर लें.
8. ऊनी कपड़ों या स्वेटर पर गोंड का निशान पड़ जाने पर शराब की 1-2 बूंद उस दाग़ पर गिरा दें. और उसके बाद साबुन से साफ़ कर लें. दाग़ चला जायेगा.
9. यदि आपके ऊनी कपड़ों से दाग़ नहीं छुट रहा है तो आप उसे पेट्रोल से भी साफ़ कर सकते है. मोटे कपडे पर पेट्रोल लगाकर धीरे-धीरे हलके हाथों से रगड़ें. दाग़ साफ़ हो जाएगा.
स्वेटर पर दाग़ लग जाने पर इन 4 बातों का भी रखें ध्यान :-
1. पानी में भिगो कर रखें :
यदि ऊनी कपड़ों में दाग़ लग जाये तो इस स्थिति में सादे पानी में सर्फ डालकर कुछ देर तक उसे भिगो कर रखें. और कुछ देर बाद इसे साफ़ कर लें. दाग़ साफ़ हो जायेगा. लेकिन भिगोते समय एक बात का ध्यान रखें की जिस पानी में आप कपडा भिगो रही है वह अधिक गर्म न हो. क्योंकि गर्म पानी से वूलेन सिकुड़ भी सकता है.
2. दाग़ लगते ही तुरंत धो लें :
अगर ऊनी कपडे पर दाग़ या सब्जी गिर गई है तो उसे तुरंत उसी समय गुनगुने पानी से साफ़ कर लें. ऐसा करने से वो दाग़ मजबूत नहीं होगा और आप इसे आसानी से हटा पाएंगे.
3. ऊनी कपड़ों को उल्टा करके ही धोएं :
ऊनी कपड़ों को धोने से पहले उन्हें हमेशा उल्टा कर लें. उसके बाद कप्द्दे के अन्दर वाले हिस्से को साफ़ करें.
4. माइल्ड सिर्फ का इस्तेमाल करें :
ऊनी कपड़ों में लगे दाग़ को हटाने के लिए कभी भी हार्ड सर्फ का इस्तेमाल न करें. बाज़ार में ऊनी कपडे धोने के लिए अलग से सर्फ भी मौजूद है. जिसका इस्तेमाल कर आप गर्म कपड़ों को धो सकती है. इसके अलावा आप किसी माइल्ड सर्फ का भी इस्तेमाल कर सकती है.
ऐसे करें ऊनी कपड़ों की देखभाल :-
ऊनी कपड़ों को लटकाकर रखने से इनकी फिटिंग खराब हो जाती है इसीलिए इनको लटकाने की बजाय तय लगाकर रखें.
गर्म कपड़ों में कीड़ा लगने का भी डर बना रहता है, इसीलिए इन्हें अखबार में लपेट कर रखें.
इन कपड़ों को ड्रायर में न सुखाएं इससे यह ढीले हो सकते है.
यदि ऊनी कपड़ों में रोए आ गए है तो हलके हाथों से रेज़र की मदद से इन्हें हटा लें.
गर्म कपड़ों में प्रेस करने से वे खराब हो सकते है. यदि प्रेस करना जरुरी है तो स्टीम आयरन कस इस्तेमाल किया जा सकता है.
ऊनी कपड़ों को धोने के लिए हमेशा लिक्विड डिटर्जेंट का ही इस्तेमाल करना चाहिए.
आम कपड़ों की तरह रोज रोज धोने से इनकी चमक कम हो सकती है.
अधिक गर्म पानी और अधिक देर तक धुप में रखने से भी ऊनी कपड़ों की चमक कम होती है.
तो अगर, आपके ऊनी कपड़ों में भी किसी तरह का दाग़ लग गया है तो उन्हें छुड़ाने के ब्रश और डिटर्जेंट का इस्तेमाल करने की बजाए उपर बताए तरीको का इस्तेमाल करें. इसके साथ ही अपने गर्म कपड़ों की देखभाल करने के लिए विशेष बातों का ध्यान रखें, ताकि आपके कपड़ों की चमक खराब न हों और वो हमेशा नए जैसे दिखें.
टॉसिल हमारे गले में होने वाली एक समस्या होती है, हमारे गले के अंदर दोनों तरफ मॉस की गांठ होती है, जब इन गांठो में बाहरी संक्रमण का असर होता है, तो गले में दर्द या सूजन की समस्या हो जाती है, कई बार तो गले में खराश में आवाज़ में भी बदलाव आ जाता है, इस समस्या को टॉन्सिलाइटिस कहा जाता है, ये समस्या किसी भी अयमर में हो सकती है, इसीलिए इसका समस्या रहते इलाज़ करना चाहिए, यदि ये समस्या बढ़ जाती है, तो बाद में आपको काफी परेशान कर सकती है।
गले में टॉन्सिल होने का मुख्य कारण होता है, गरम सर्द का एक साथ सेवन करना, सर्दी के मौसम में भी ठंडी चीजे या ठन्डे पानी का सेवन अधिक करना, खट्टी चीजो का सेवन करना, या चावल और मैदा को अधिक मात्रा में सेवन करने से भी आपको टॉन्सिल की समस्या खड़ी हो जाती है, इसके अलावा सर्दी लगने से, मौसम के अचानक बदल जाने से, या फिर गर्म से अचानक ठंडे में जाने और प्रदूषित वातावरण में रहने से भी टॉन्सिल की समस्या पनपने लगती हैं। और इसके कारण तो कई बार खाने पीने में भी आपको परेशानी का अनुभव करना पड़ता है, क्योंकि आपका गला अंदर से पाक जाता है।
परंतु ये कोई ऐसी भी समस्या नहीं होती है, जिसका इलाज़ न हो सकें परंतु इसके इलाज़ में देरी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इसके बढ़ने से आपको ज्यादा परेशानी का अनुभव भी करना पड़ सकता है, तो आइये आज हम आपको इस समस्या से बचने के लिए कुछ घरेलू उपचार बताने जा रहे है, जो आपको टॉन्सिल की समस्या से राहत दिलाने में आपकी मदद करते है, इसीलिए जब भी आपको ये परेशानी हो तो आपको इन टिप्स का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए, तो ये है टॉन्सिल से बचने के घरेलू उपचार। परंतु पहले जानते है, टॉसिल के कारण और इसके क्या क्या लक्षण होते है।
गर्भवती महिलाएं सर्दियों में ऐसे रखें अपना ध्यान, सर्दियों में गर्भवती महिला को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए, प्रेगनेंसी टिप्स, प्रेग्नेंट महिलाएं सर्दियों में ऐसे रखें अपना ख्याल, Winter care tips for Pregnant Women
प्रेगनेंसी महिला के लिए बहुत ही अनोखा और प्यारा समय होता है ऐसे में महिला को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। और मौसम के बदलाव के साथ महिला को अपनी और अच्छे से केयर करनी पड़ती है ताकि मौसम के बदलाव का बुरा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर न पड़े और साथ ही गर्भवती महिला को भी स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। सर्दियों में मौसम में खासकर बहुत जल्दी बैक्टेरियल इन्फेशन जैसे खांसी, जुखाम, ड्राई स्किन आदि की समस्या हो सकती है। तो आइये आज हम आपको विस्तार से बताते हैं की गर्भवती महिला को सर्दियों के समय किस तरह से अपनी केयर करनी चाहिए।
सर्द हवा से बचें
सर्दी के मौसम में ठंडी हवाएं चलती रहती हैं, जो की गर्भवती महिला को बहुत नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में इससे बचने के लिए आप हमेशा जुराबे पहन कर रखें, सिर को ढक कर रखें, और जब भी बाहर जाएँ तो पूरे गर्म कपडे पहने, कान, सिर, पैर सब ढक कर चले ताकि सर्द हवा से बचाव करने में आपको मदद मिल सके।
विटामिन सी लें
सर्दियों में विटामिन सी लेना गर्भवती महिलाओं के लिए बेहतर होता है इसके लिए आप संतरे, ब्रोकली, आदि का सेवन कर सकती है। इसके अलावा आपको केसर वाला दूध भी पीना चाहिए और जितना हो सके गुनगुना दूध पीएं यह सर्दियों में आपकी बॉडी का बचाव करने के साथ आपको एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करता है।
प्रोटीन भरपूर लें
फिश, अंडे, चिकन, दूध, दालें आदि प्रोटीन युक्त पदार्थो का सेवन सर्दियों में जरूर करना चाहिए। क्योंकि इनके सेवन से गर्भवती महिला को फायदा मिलता है साथ ही गर्भ में शिशु के विकास को बेहतर होने में मदद मिलती है।
हाइड्रेट रहें
सर्दियों में पानी की प्यास कम ही लगती है, और बॉडी में पानी की कमी होने लगती है। जिसके कारण आपका इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ सकता है, ऐसे में इम्यून सिस्टम की मजबूती को बनाएं रखने के लिए आपको सर्दियों में पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए ताकि आपकी बॉडी हाइड्रेट रहे, और आपको सर्दियों में होने वाली समस्याओं से बचाव करने में मदद मिल सके।
बासी खाने से बचें
प्रेगनेंसी में बासी खाना बिलकुल नहीं खाना चाहिए। खासकर सर्दियों में लोग ऐसा ही सोचते हैं की खाना जल्दी खराब नहीं होता है, लेकिन बासी खाने में पोषक तत्व की कमी हो जाती है जिसके कारण शिशु के पोषण में कमी आ सकती है ऐसे में आपको बासी खाना खाने से बचना चाहिए। और बॉडी में होने वाली पोषक तत्वों की कमी के कारण महिला को भी स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या हो सकती है।
स्किन का भी रखें ख्याल
सर्दियों में स्किन में रूखापन आना आम बात होती है, इसके लिए आप मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करने से साथ बॉडी को हाइड्रेट भी रखना चाहिए। ऐसा करने से आपकी स्किन को पोषण मिलेगा जिससे प्रेगनेंसी में भी आपकी स्किन कोमल और मुलायम रहेगी।
इन्फेक्शन से करें बचाव
प्रेग्नेंट महिला को सर्दियों में इन्फेक्शन की समस्या से बचने के लिए साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। साथ ही जो भी खाएं उसे अच्छे से धो लें ऐसा करने से आपको इन्फेशन से बचाव करने में मदद मिलेगी।
तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान आपको सर्दियों में रखना चाहिए, यदि प्रेग्नेंट महिला इन टिप्स का ध्यान रखती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के साथ प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।
टाइफॉइड का घरेलू इलाज, टाइफॉइड से निजात पाने के तरीके, टाइफॉइड का घरेलू उपचार, ऐसे पाएं टाइफॉइड से छुटकारा, Home remedies for Typhoid
ब्लड में बैक्टेरियल संक्रमण होने के कारण आपको टाइफॉइड बुखार जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता हैं, और ब्लड के कारण यह आपके सभी बॉडी पार्ट्स में फ़ैल जाता है। और यह बैक्टेरिया दूषित पानी या आहार के कारण आपको बॉडी में फैलता है। टाइफॉइड की समस्या होने पर बॉडी में दर्द, तेज बुखार, कमजोरी, पेट में दर्द, कब्ज़, दस्त, सिर दर्द, उल्टी आदि जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। गर्मियों में यह ज्यादा होने के चांस होते हैं। और यदि आप बाहर का खाना अधिक खाते हैं, खान पान में सफाई का ध्यान नहीं रखते हैं, तो इसके कारण आपको परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है। तो आइये आज हम आपको टाइफॉइड से बचने के कुछ खास घरेलू उपाय बताने जा रहें हैं।
सेब का सिरका
टाइफॉइड बुखार से निजात पाने के लिए सेब का सिरका एक बेहतरीन उपचार होता है इसके लिए आप नियमित एक या दो चम्मच सेब के सिरके में शहद मिलाकर पीएं। सेब के सिरके में मौजूद मिनरल्स न केवल आपको बुखार से निजात दिलाते हैं। बल्कि शरीर में आई कमजोरी को दूर करने में भी आपकी मदद करते हैं।
लहसुन
एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर लहसुन टाइफॉइड के बैक्टेरिया को खत्म करने के साथ प्रतिरोधक शांता को बढ़ाने में भी आपकी मदद करता है। और इसके लिए आपको नियमित खली पेट दो या तीन लहसुन की कलियाँ खाने से फायदा मिलता है।
तुलसी
आयुर्वेदिक गुण के साथ एंटीबायोटिक और एंटी बैक्टेरियल गुणों से भरपूर तुलसी का सेवन करने से भी टाइफॉइड के बैक्टेरिया को खत्म करने में मदद मिलती है। इसके लिए आप नियमित सुबह एक तुलसी का पत्ता एक चम्मच अदरक का रस एक गिलास पानी के साथ लेना चाहिए। इसके अलावा आप पानी में अदरक, सौंठ, और पंद्रह बीस तुलसी के पत्ते डालकर काढ़ा बना लें, और दिन में दो से तीन बार इसका सेवन करें इससे आपको बहुत जल्दी इस परेशानी से निजात मिल जाता है।
पेय पदार्थ
टाइफॉइड होने के कारण दस्त जैसी समस्या भी हो जाती है, जिसके कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है। ऐसे में यदि आप ओ आर एस घोल, निम्बू पानी, खट्टे फलों का रस, नारियल पानी आदि का भरपूर सेवन करते हैं। तो इससे न तो शरीर में पानी की कमी होती है। और न ही कमजोरी महसूस होती है साथ ही आपको जैसी रिकवर होने में मदद मिलती है। और पानी का सेवन अच्छे से उबाल कर उसके ठंडा होने के बाद करें।
प्रोटीन से भरपूर आहार खिलाएं
टाइफॉइड के रोगी को स्वस्थ करने के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन की मात्रा देनी चाहिए, और इसके लिए आप उनके दालें, अंकुरित दालें, किशमिश, मुनक्का, अंडे आदि का सेवन करवाएं, इससे टाइफॉइड से निजात मिलने के साथ बॉडी को फिट रहने में भी मदद मिलेगी।
नारियल का पानी
नारियल का पानी ब्लड में होने वाले संक्रमण को तेजी से खत्म करने में आपकी मदद करता है, ऐसे में टाइफॉुइड के रोगी को दिन में तीन से चार बार नारियल का पानी जरूर देना चाहिए।
केला
आधा कप दही में एक केला और एक चम्मच शहद डालकर अच्छे से मिक्स करने के बाद इसका सेवन करें। ऐसा करने से बुखार से राहत मिलने के साथ दस्त जैसी समस्या से भी आपको आराम मिलता है।
गिलोय
गिलोय भी टाइफॉइड के बुखार से निजात पाने के लिए आयुर्वेदिक औषधि की तरह काम करती है, इसके लिए आप पानी में गिलोय को अच्छे से उबाल कर पानी को ठंडा करके दिन में चार से पांच बार पीएं। इससे बॉडी में विषैले बैक्टेरिया को तेजी से खत्म करके आपको इस परेशानी से राहत दिलाने में मदद मिलती है।
तो यह हैं कुछ घरेलू नुस्खे जो आपको टाइफॉइड की समस्या से निजात दिलाने में मदद कर सकते है, इसके अलावा इस दौरान आपको साफ़ सफाई का बहुत ध्यान देना चाहिए। क्योंकि दूषित खाने और दूषित वातावरण में रहने के कारण आपकी परेशानी बढ़ सकती है। साथ ही डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों का भी नियमित रूप से सेवन करना चाहिए।
स्वास्थ्य के लिए मूंगफली कितनी लाभदायक है इसके बारे में तो हम आपको बता ही चुके है लेकिन क्या आप जानते है की आपके स्वास्थ्य के अतिरिक्त आपकी त्वचा और बालों के लिए भी मूंगफली के अनगिनत फ़ायदे है. झुर्रियां और मुँहासे जैसी सामान्य समस्या से लेकर त्वचा सम्बन्धी किसी भी समस्या के लिए मूंगफली बेहद लाभकारी होती है.
इसके साथ ही ये त्वचा में नई कोशिकाओं का भी निर्माण करती है जिससे स्किन में नई चमक और ग्लो आता है. त्वचा के लिए मूंगफली के इन फायदों को जानने के बाद आपका मन भी इसके पूर्ण फ़ायदे जानने के लिए उत्सुक हो रहा होगा तो आईये आपकी इस उत्सुकता को शांत करते है और बताते है त्वचा और बालों के लिए मूंगफली के पूर्ण फ़ायदे!!
त्वचा के लिए मूंगफली के फ़ायदे
आपकी भूख को मिटने के अलावा मूंगफली का सेवन करने से स्मूथ, supple और जवान त्वचा भी पाई जा सकती है. त्वचा के लिए मूंगफली के फायदों में निम्नलिखित सम्मिलित है.
1. मुँहासे, सूजन और त्वचा संबंधी बीमारियां :
मूंगफली की anti-inflammatory प्रकृति त्वचा संबंधी कई बीमारी जैसे psoriasis और eczema को ठीक करें. मूंगफली में मौजूद fatty acid त्वचा की लालिमा और सूजन को कम करें. इसके अलावा इसमें विटामिन E, zinc और मैग्नीशियम भी पाया जाता है जो त्वचा को निखारे और मुँहासे बढ़ाने वाले बैक्टीरिया से लड़े. मूंगफली में मौजूद प्रोटीन नई कोशिकाओं का निर्माण करने में मदद करता है.
2. मुरझाई त्वचा के लिए :
इसमें fatty acid की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो मस्तिष्क के nerve cells को अच्छा करती है. ये कोशिकाएं तनाव से छुटकारा दिलाने में मदद करती है. इसके साथ ही झुर्रियां, fine lines और मुरझाई हुई त्वचा के लिए भी ये बहुत फायदेमंद होती है.
3. स्वस्थ त्वचा :
नट्स में मौजूद फाइबर शरीर से टॉक्सिन्स और waste पदार्थ को निकालने के लिए जरुरी होता है. क्योंकि शरीर में मौजूद ये टॉक्सिन्स breakout, त्वचा की dullness और अतिरिक्त आयल के निर्माण का कारण बनते है. मूंगफली का नियमित रूप से सेवन करने से ये सभी टॉक्सिन्स शरीर के बाहर चले जाते है जिससे आप भी स्वस्थ त्वचा पा सकते है.
4. निखरी और जवान त्वचा पाना चाहती है :
मूंगफली में मैग्नीशियम भी पाया जाता है जो हमारी नसों, मांसपेशियों और रक्त वाहिकाओं को शांत करता है जिससे त्वचा को रक्त का बेहतर प्रवाह प्राप्त हो सके. इससे आप जवान और निखरी हुई स्वस्थ त्वचा पा सकते है.
5. धुप से बचाए और स्किन डैमेज ठीक करे :
त्वचा में हुई किसी भी प्रकार की क्षति oxidation का परिणाम होता है. और मूंगफली में मौजूद Vitamin E त्वचा की कोशिकाओं को इस रिएक्शन के प्रभाव से बचाता है. इसके साथ ही ये आपकी त्वचा को हानिकारक UV रेज़ से भी बचाता है. Sun Burn और Skin Damage की समस्या भी इसके सेवन से नहीं होती.
6. बढ़ती उम्र की निशानियां :
बढ़ती उम्र की निशानिया जैसे झुर्रियां, रंग में परिवर्तन आना और त्वचा में आये बदलाव महिलाओ के लिए सबसे बड़ी परेशानी होती है. और मूंगफली में विटामिन E की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो collagen के निर्माण के लिए बेहद आवश्यक है. ये collagen tendons, त्वचा और उपास्थि को बनाए रखने के लिए जरुरी होता है. ये आपकी त्वचा को दृढ़ता और लोच प्रदान करता है जिससे आपकी त्वचा जवां और supple रहती है.
7. एंटी-ऑक्सीडेंट्स :
मूंगफली में पाया जाने वाला, Beta carotene नामक एक एंटी ऑक्सीडेंट स्वस्थ त्वचा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है. शरीर में जाकर ये vitamin A में परिवर्तित हो जाता है जो शारीरक विकास और कोशिकाओं की मरम्मत में मदद करता है. जिस वजह से मूंगफली घाव और चोटों को जल्द ठीक करने में भी मदद करती है.
8. Omega -3 fatty acid :
मूंगफली में Omega -3 fatty acid भी पाया जाता है जो त्वचा के लिए कई मायनो में फायदेमंद होता है. Omega 3 fatty acid त्वचा में आई किसी भी प्रकार की सूजन को कम करने में मदद करता है जिससे skin eruption को ठीक किया जा सके. इसके साथ ही ये स्किन कैंसर की squamous कोशिका के निर्माण के खतरे को भी कम करता है.इसके अलावा रूखी और बेजान त्वचा को हाइड्रेट और मॉइश्राइज करके उसे निखारने में मदद करता है.
9. त्वचा की समस्याएं :
त्वचा संबंधी किसी भी समस्याओ के लिए मूंगफली बेहद फायदेमंद होती है. खासकर pustules, skin rashes और rosacea में.
10. फेस मास्क :
शायद आप नहीं जानती लेकिन आज कल पीनट बटर का फेसिअल मास्क बहुत अधिक प्रसिद्ध होता जा रहा है. प्राकतिक पीनट बटर को अपने चेहरे पर लगाने से सभी impurities और डर्ट बाहर निकल जाता है जिससे त्वचा स्वस्थ दिखती है. इसके लिए सबसे पहले अपने चेहरे को साफ़ क्लीन्जर से धो लें और उसके बाद उसपर पीनट बटर लगाएं.
इस मास्क के सूखने तक इसे लगे रहने दें और बाद में गोलाई में घूमते हुए इससे स्किन की मसाज करे. बाद में गरम पानी से चेहरा धो लें और उसे सूखा लें. लेकिन हां एक बात का ध्यान रखे की इसे लगाने से पहले एक patch test करके इस बात की पुष्टि जरूर कर लें की कहीं ये आपकी स्किन को एलर्जी तो नहीं कर रहा. क्योंकि एलर्जी मूंगफली के सामान्य साइड इफेक्ट्स में से एक है. यदि आपको ऐसी कोई समस्या होती है तो कृपया इसका प्रयोग न करे.
बालों के लिए मूंगफली के फ़ायदे
त्वचा और स्वास्थ्य की ही तरह आपके बालों के लिए भी मूंगफली के कई फ़ायदे है, तो आईये जानते हैं बालों के लिए मूंगफली के फ़ायदे.
11. बालों की ग्रोथ :
मूंगफली में कई तरह के अनुकूल पोषक तत्त्व पाए जाते है जो आपके बालों की सेहत के लिए बेहद जरुरी होते है. इसमें omega 3 fatty acids की उच्च मात्रा पाई जाती है जो स्कैल्प को मजबूती प्रदान करते है और बालों की ग्रोथ बढ़ाने में मदद करते है.
12. गंजेपन की समस्या :
मूंगफली को larginine का अच्छा स्रोत्र माना जाता है. Larginine एक प्रकार का एमिनो एसिड है जो गंजेपन की समस्या को ठीक करने में मदद करता है और अच्छे बालों की ग्रोथ में मदद करता है. ये artery walls के स्वास्थ्य को भी सुधारता है और blood clotting को ठीक करता है जिससे रक्त के प्रवाह को सुधारा जा सकता है. और रक्त का बेहतर प्रवाह आपके बालों को स्वस्थ और मजबूत बनाता है.
13. कमज़ोर और बेजान बाल :
शरीर में आई vitamin E की कमी दो मुँहे और कमज़ोर बालों का कारण होती है. और मूंगफली में विटामिन E की अच्छी मात्रा पायी जाती है. यदि इसे अपनी डाइट में सम्मिलित किया जाए तो जड़ो को मजबूत करके पुरे बालों को विटामिन प्रदान करता है जिससे उन्हें मजबूती मिलती है.
त्वचा और बालों के लिए मूंगफली के फ़ायदे, स्किन और हेयर के लिए पीनट के फ़ायदे, मूंगफली खाने से त्वचा को मिलने वाले लाभ, बालों के लिए पीनट के क्या-क्या फ़ायदे है
प्रेगनेंसी के दौरान रोटी खाना ज्यादा फायदेमंद होता है या चावल खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। इस बारे में अधिकतर गर्भवती महिलाएं सवाल करती है। तो इसका जवाब होता है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला रोटी भी खा सकती है और चावल भी खा सकती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान रोटी और चावल दोनों का सेवन फायदेमंद होता है।
लेकिन अधिकतर गर्भवती महिलाएं यह नहीं जानती है की रोटी और चावल का सेवन एक साथ करना प्रेगनेंसी के दौरान अच्छा नहीं होता है। अब आप सोच रही होंगी की ऐसा क्यों होता है। तो आइये हम आपको बताते हैं की प्रेगनेंसी में चावल और रोटी का सेवन एक साथ करना क्यों नुकसानदायक होता है।
पाचन तंत्र से जुडी समस्या होती है
रोटी और चावल दोनों में ही कैलोरी भरपूर मात्रा में मौजूद होती है। ऐसे में दोनों का सेवन एक साथ करने से गर्भवती महिला के शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है जिसे पचाने में गर्भवती महिला को दिक्कत होती है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है।
जिसकी वजह से महिला को अपच, गैस, कब्ज़, पेट में दर्द, डायरिया जैसी परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के लिए और पाचन तंत्र से जुडी परेशानियों से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को रोटी और चावल का सेवन एक साथ न करने की सलाह दी जाती है।
वजन तेजी से बढ़ता है
प्रेगनेंसी के दौरान वजन बढ़ना अच्छी बात होती है। लेकिन जरुरत से ज्यादा वजन का बढ़ना गर्भवती महिला और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है। और रोटी चावल एक साथ खाने से गर्भवती महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता है।
क्योंकि रोटी चावल एक साथ खाने से शरीर में कैलोरी बढ़ती है। और वो कैलोरी शरीर में फैट बनकर इक्कठी होने लगती है। जो वजन तेजी से बढ़ाती है। ऐसे में महिला को मोटापे के कारण कोई दिक्कत न हो इसके लिए रोटी और चावल का सेवन एक साथ न करने की सलाह दी जाती है।
तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भवती महिला को रोटी और चावल का सेवन एक साथ न करने की सलाह दी जाती है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही एक बात का और ध्यान रखें गर्भावस्था में रात को चावल का सेवन करने से बचे क्योंकि इसके कारण भी आपको पाचन तंत्र से जुडी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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