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प्रेग्नेंट होते ही महिला के शरीर में यह बदलाव आते हैं?

गर्भधारण करना हर महिला के लिए बहुत ही ख़ुशी भरा लम्हा होता है। और हर महिला अपने जीवन में इस लम्हे को जरूर महसूस करना चाहती है। लेकिन माँ बनने की जितनी ख़ुशी महिला को होती है उतना ही इस दौरान महिला को बहुत सी दिक्कतों, बदलाव आदि का सामना भी इस दौरान करना पड़ता है। और यह बदलाव महिला के प्रेग्नेंट होते ही शरीर में शुरू हो जाते हैं और महिला को महसूस होने लगते हैं। यह बदलाव महिला को बाहरी व् आंतरिक रूप से होते हैं। ऐसा होना गर्भवस्था के दौरान आम बात होती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको महिला को प्रेग्नेंट होते ही शरीर में कौन- कौन से बदलाव महसूस होते हैं उनके बारे में बताने जा रहे हैं।

पीरियड्स मिस होना

यदि महिला प्रेग्नेंट होती है तो सबसे पहले महिला को पीरियड्स आने बंद हो जाते हैं और पीरियड्स मिस होने के बाद ही महिला प्रेगनेंसी टेस्ट करती है। इसके अलावा शुरुआत में यदि महिला को हल्की स्पॉटिंग यदि महसूस होती है तो यह भी प्रेगनेंसी का लक्षण होता है।

ब्रेस्ट में बदलाव

महिला को प्रेग्नेंट होते ही अपने स्तनों में थोड़ा दर्द, सूजन, आदि भी महसूस हो सकती है। साथ ही महिला की ब्रेस्ट के आगे के हिस्से का रंग भी पहले की अपेक्षा थोड़ा गहरा हो जाता है।

उल्टी आने का मन करना

उल्टी आना प्रेगनेंसी के सबसे अहम लक्षणों में से एक होता है ऐसे में यदि महिला गर्भवती है तो महिला को उल्टी आने की इच्छा अधिक हो जाती है।

मूड स्विंग्स

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव का असर महिला के व्यवहार पर भी देखने को मिल सकता है। जिसकी वजह से गर्भवती महिला को मूड स्विंग्स की समस्या हो सकती है।

भूख में कमी

प्रेग्नेंट होते ही महिला के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण शुरूआती समय में महिला की भूख में थोड़ी कमी आ सकती है। लेकिन ऐसा हर महिला के साथ हो यह बिल्कुल भी जरुरी नहीं होता है।

बार बार यूरिन आने की समस्या

प्रेगनेंसी के शुरूआती समय में बॉडी में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण किडनी का काम बढ़ जाता है जिसकी वजह से महिला को बारे बार यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है।

स्किन में बदलाव

कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी की शुरुआत से ही ड्राई स्किन की समस्या हो सकती है जिसकी वजह से महिला को खुजली आदि की समस्या भी अधिक हो सकती है।

गैस व् कब्ज़ की समस्या

बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण पाचन कराया थोड़ा धीमे काम कर सकती है जिसकी वजह से महिला को पेट सम्बन्धी समस्या जैसे की कब्ज़, पेट में गैस आदि अधिक हो सकती है। साथ ही प्रेग्नेंट महिला को सीने में जलन आदि की समस्या भी हो सकती है।

तनाव

कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में हो रहे बदलाव के कारण मानसिक रूप से परेशानी का अनुभव हो सकता है जिसकी वजह से महिला स्ट्रैस जैसी परेशानी का सामना कर सकती है।

तो यह हैं है कुछ बदलाव जो प्रेग्नेंट होते ही महिला को शरीर में महसूस होने लग जाते हैं ऐसे में महिला को अपना और ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है। ताकि प्रेग्नेंट महिला को इन बदलाव के कारण किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

Changes occur in a woman’s body as soon as she is pregnant

गर्भवती महिला को इन दस चीजों को नहीं छूना चाहिए?

गर्भावस्था महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जो महिला के लिए ख़ुशी से भरपूर होने के साथ काफी नाजुक भी होता है। क्योंकि इस दौरान महिला अकेली नहीं होती है बल्कि गर्भ में पल रहा शिशु भी पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। ऐसे में महिला को अपना बहुत अच्छे से ध्यान रखना होता है क्योंकि महिला द्वारा बरती गई लापरवाही का असर माँ के साथ साथ बच्चे की सेहत पर भी पड़ता है।

साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान हर कोई महिला को सलाह भी देता रहता है की प्रेगनेंसी में महिला को क्या करना चाहिए जो माँ व् बच्चे के लिए सही होता है और क्या नहीं करना चाहिए। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान महिला को किन- किन चीजों को नहीं छूना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

बाहर घूमने वाले जानवर

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बाहर घूमने वाले किसी भी जानवर को छूने से बचना चाहिए। क्योंकि वो पता नहीं कहाँ कहाँ घूमते हैं कहाँ बैठते हैं, आदि ऐसे में उन्हें छूने से महिला को इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है। इसके अलावा वो यदि आपको काट लेते हैं तो आपकी दिक्कत और भी ज्यादा बढ़ सकती है।

संक्रमित व्यक्ति को

प्रेग्नेंट महिला को संक्रमित व्यक्ति से भी दूरी रखनी चाहिए क्योंकि संक्रमित व्यक्ति के पास जाने या उसके द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले सामान को छूने के कारण महिला को भी संक्रमण होने का खतरा भी बढ़ जाता है। लेकिन यदि घर में किसी व्यक्ति को ऐसा कुछ हो तो उसे छोड़कर घर से बाहर भी नहीं जा सकते हैं परन्तु उस दौरान सावधानी जरूर बरत सकते हैं। जैसे की मास्क, सैनिटाइज़र, आदि कस इस्तेमाल कर सकते हैं घर में साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रख सकते हैं इससे संक्रमित व्यक्ति भी जल्दी ठीक होता है और महिला को भी संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।

जिस पेड़ पौधे की आपको जानकारी नहीं हो

प्रेग्नेंट महिला को ऐसे ही किसी भी पेड़ पौधे को भी न छूना चाहिए क्योंकि कई पौधे ऐसे होते हैं जिन्हे छूने से खुजली जैसी समस्या हो सकती है, या उन पर बहुत से लोग हाथ लगाते हैं और यदि कोई संक्रमित व्यक्ति भी यदि हाथ लगा लेता है तो महिला को इन्फेक्शन हो सकता है, आदि। ऐसे में गर्भवती महिला को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि प्रेगनेंसी में स्किन ज्यादा सेंसिटिव होती है और महिला को दिक्कत होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।

ऐसी चीजों को जिसे छूने से आपको एलर्जी हो

कई लोग होते हैं जिनकी स्किन बहुत सेंसिटिव होती है ऐसे में कुछ चीजों को छूने से उन्हें एलर्जी या खुजली जैसी परेशानी का खतरा होता है। तो यदि प्रेग्नेंट महिला को भी किसी चीज को छूने से ऐसा होता है तो गर्भवती महिला को भी उन चीजों को नहीं छूना चाहिए।

गंदे नाले के पानी को

नाले के पानी या अन्य किसी जगह पर एकत्रित पानी को भी गर्भवती महिला को नहीं छूना चाहिए। क्योंकि ऐसे पानी में हानिकारक कीटाणु मौजूद होते हैं जिनकी वजह से संक्रमण होने का खतरा होता है।

केमिकल युक्त चीजों को

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की स्किन बहुत सेंसिटिव हो जाती है। ऐसे में महिला को बहुत ध्यान रखने की जरुरत होती है ताकि महिला को स्किन की वजह से कोई इन्फेक्शन नहीं हो। जैसे की महिला को केमिकल युक्त चीजों को अधिक नहीं छूना चाहिए क्योंकि केमिकल जब महिला की स्किन के संपर्क में आता है। तो उसकी वजह से भी महिला को दिक्कत हो सकती है और महिला को दिक्कत होने के साथ शिशु को भी दिक्कत होने का खतरा अधिक होता है।

घर में पाले हुए जानवर के मल को

आपने यदि घर में कोई जानवर है तो उसके मल को भी गर्भवती महिला को नहीं छूना चाहिए और न ही उसकी साफ़ सफाई करनी चाहिए। बल्कि यह काम घर के किसी अन्य सदस्य से करवाना चाहिए ताकि घर में साफ़ सफाई रहे, जानवर स्वच्छ रहे जिससे इन्फेक्शन का खतरा नहीं हो।

रास्ते में पड़ी हुई चीजों को

यदि प्रेग्नेंट महिला घर से बाहर जाती है तो रास्ते में पड़ी अनजान चीजों को भी गर्भवती महिला को नहीं छूना चाहिए क्योंकि वह टोना टोटका, कोई जहरीला पदार्थ, संक्रमण करने वाली चीज आदि हो सकती है। और उस चीज के कारण महिला को दिक्कत होने का खतरा होता है।

कांटेदार फूलों को

जिन फूलों या पौधों में कांटे होते हैं उन्हें भी प्रेग्नेंट महिला को नहीं छूना चाहिए क्योंकि उनके छूने से खून आने का खतरा होता है साथ ही काँटों के चुभने के कारण इन्फेक्शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

जिन चीजों की स्मेल से महिला को एलर्जी हो

प्रेग्नेंट महिला को उन चीजों से भी दूरी रखनी चाहिए जिनकी स्मेल से महिला को एलर्जी होती है। हो सकता है आपको ऐसी कोई दिक्कत पहले नहीं हो और प्रेगनेंसी के दौरान कुछ चीजों की स्मेल से दिक्कत हो रही हो। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान उन चीजों से दूरी रखें ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपको कोई परेशानी नहीं हो।

तो यह हैं कुछ चीजें जिन चीजों को प्रेग्नेंट महिला को नहीं छूना चाहिए क्योंकि इन चीजों को छूने से गर्भवती महिला व् शिशु दोनों को दिक्कत होने का खतरा होता है। इसके अलावा अन्य कोई भी चीज जिसकी गंध से या छूने से आपको एलर्जी हो उनसे प्रेगनेंसी के दौरान आपको दूरी रखनी चाहिए।

सिर में जुएं होने के कारण और उपाय

सिर में जुएं होना एक आम समस्या है यह समस्या किसी भी बच्चे या बड़े को हो सकती है। साथ ही यदि इस समस्या का जल्द इलाज नहीं किया जाये तो यह बहुत तेजी से सिर में बढ़ने लगती है। क्योंकि जुएं सिर में अंडे देती है और वो अंडे पहले लीख बनते हैं और उसके बाद वो छोटी फिर बड़ी जूं बन जाते हैं। साथ ही इन जुओं को पोषक भी आपके द्वारा ही दिया जाता है क्योंकि यह स्कैल्प आपके खून को चूसती है और तेजी से बढ़ती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको जुएं होने के क्या कारण होते हैं, क्या लक्षण होते हैं, और किस तरह आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

जुएं होने के क्या लक्षण होते हैं? (symptoms of Lice)

  • यदि आपके सिर में एक भी जूं हो जाती है तो ऐसे महसूस होता है की आपके सिर में कुछ घूम रहा है और आपको वहीँ पर खुजली होना शुरू हो जाता है।
  • सिर में जुएं होने पर आप जब भी कंघी करते हैं तो आपको सिर से काले या भूरे रंग के छोटे छोटे कीड़े निकलते हुए महसूस होते हैं वो जुएं ही होती है।

किन लोगो को सिर में जुएं की समस्या होने का ज्यादा खतरा होता है?

यदि किसी स्कैल्प बहुत ज्यादा ऑयली होता है, जिन लोगो के सिर में रुसी की समस्या होती है, साफ़ सफाई कम और बालों में गंदगी ज्यादा रहती है, पसीना बालों में अधिक रहता है, आदि। तो ऐसे लोगो को जुओं की समस्या होने का खतरा ज्यादा होता है।

क्या जुएं सिर के बाहर दिखाई देती हैं?

जी हाँ, जिन लोगो के सिर में ज्यादा जुएं या लीखें हो जाती है तो वो उनके सिर पर चलती हुई या बालों से चिपकी हुई भी दिखाई देती है। और ऐसे में यदि कोई आपको टोक दे तो यह काफी शर्मिंदगी भरा हो सकता है। और कई बार तो यदि आपके सिर में दो चार जुएं भी हो तो वो भी आपके बालों में बाहर की तरफ दिखाई दे सकती है ऐसा जरुरी नहीं है की जुएं ज्यादा होंगी तभी दिखाई देंगी।

किन कारणों की वजह से होती है सिर में जुएं? (Causes of Lice)

यदि किसी के सिर में जुएं होती है तो इसका कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिनकी वजह से सिर में जुओं की समस्या हो जाती है। तो आइये अब उन कारणों के बारे में जानते हैं।

गंदगी की वजह से

यदि आप अपने बालों की साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रखते है, मिट्टी में ज्यादा रहते हैं, बालों को साफ़ करने के लिए साफा कपड़ों की बजाय गंदे कपड़ों का इस्तेमाल करते हैं, इसके अलावा शरीर के अन्य हिस्सों की साफ़ सफाई का ध्यान भी नहीं रखते हैं तो इसकी वजह से सिर में जुएं हो जाती है।

जुएं ग्रसित व्यक्ति के साथ रहने पर

यदि आप किसी जुएं होने वाले व्यक्ति की चीजों का इस्तेमाल करते है जैसे की उनके इस्तेमाल किए सिरहाने पर सो जाते हैं, उनका इस्तेमाल किया हुआ तौलिया इस्तेमाल करते हैं, उनके साथ सो जाते हैं, तो ऐसे में जुएं बहुत जल्दी आपके बालों में भी अपना घर बना लेती हैं।

जुओं की समस्या से बचे रहने के आसान उपाय (Prevention for Lice)

यदि आपके बालों में जुओं की समस्या हो गई है तो यह कोई ऐसी परेशानी नहीं है की इसका इलाज़ संभव नहीं हो। बल्कि आप कुछ घरेलू तरीकों का इस्तेमाल करके इस समस्या से आसानी से निजात पा सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की वो आसान टिप्स कौन से हैं।

नीम

नीम की गंध कितनी तेज होती है यह तो आप जानते हैं और यही गंध जुओं की समस्या से निजात पाने का एक रामबाण उपाय है। इसके इस्तेमाल के लिए आप कुछ नीम की पत्तियों को पीसकर सिर में लगाएं। और उसके बाद इसे चार से पांच घंटे के लिए बालों में छोड़ दें उसके बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके बालों को धो लें। ऐसा करने से जुएं मर जाती है। जल्द परिणाम के लिए इस उपाय को हफ्ते में दो से तीन बार करें।

निम्बू और अदरक

निम्बू और अदरक का इस्तेमाल करने से भी सिर में से जुओं की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप निम्बू का रस और अदरक के पेस्ट को मिलाकर एक मिक्सचर तैयार करें। उसके बाद इस पेस्ट को बालों में लगाएं और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। उसके बाद बालों को धो लें इस उपाय को हफ्ते में दो बारे कम से कम करें आपको जल्द फायदा मिलेगा।

पेट्रोलियम जेली

पेट्रोलियम जेली का इस्तेमाल करने से भी बालों में होने वाली जुओं की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप पेट्रोलियम जेली को बालों में लगाएं और आप इसे बालों में चार से पांच घंटे के लिए छोड़ दें। उसके बाद आप बालों को धो लें ऐसा हफ्ते में दो बारे जरूर करें।

जैतून का तेल

रात को सोने से पहले अपने बालों में जैतून का तेल लगाएं उसके बाद सुबह उठकर बालों को अच्छे से धो लें। बालों को धोने के बाद पतले दांतों वाली कंघी की मदद से बालों में कंघी करें इससे बालों से जुएं निकल जाती है। लेकिन ध्यान रखें की एक बार में यह तरीका अपना असर नहीं दिखायेगा इसीलिए इस उपाय को कुछ दिनों तक नियमित रूप से करें।

बेकिंग सोडा

जैतून के तेल में बेकिंग सोडा मिलाएं और एक पेस्ट तैयार करें और अब इस पेस्ट को रातभर के लिए बालों में लगे रहने दें। उसके बाद सुबह उठकर बालों को धो लें इस उपाय को हफ्ते में दो से तीन बार करें। यह उपाय आसान होने के साथ बहुत असरदार भी है।

सेब का सिरका और नारियल का तेल

नारियल के तेल को सेब के सिरके में मिलाकर एक मिक्सचर तैयार करें और अब इस मिक्सचर को अपने बालों में लगाएं। बालों में इस मिक्सचर को लगाने के बाद कुछ घंटों के लिए छोड़ दें और उसके बाद बालों में शैम्पू करें। फिर बालों में कंघी करें आप देखेंगे की जुएं बालों से कंघी में ही बाहर आ रही है। और कुछ तो मर भी गई है।

सफ़ेद सिरका

सफ़ेद सिरका का इस्तेमाल भी जुओं की समस्या से निजात पाने के लिए किया जा सकता है क्योंकि इसमें एसिटिक एसिड मौजूद होता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप बालों में सफ़ेद सिरका लगाएं और बालों को तोलिये से ढक लें। थोड़ी देर बाद बालों में शैम्पू करें और बालों को धो लें। ऐसा करने से भी बालों में होने वाली जुओं की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

तुलसी

तुलसी का इस्तेमाल करने से भी बालों में होने वाली जुओं की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप तुलसी के पत्तों को पीसकर बालों में लगाएं। और थोड़ी देर के लिए तुलसी के पत्तों का पेस्ट बालों में ही लगे रहने दें। उसके बाद बालों को धो लें। साथ ही रात को अपने तकिये के पास तुलसी के पत्ते रखें इसकी गंध से भी जुओं को खत्म करने में मदद मिलती है।

प्याज

प्याज का रस या फिर प्याज को पीसकर उसका पेस्ट बालों में लगाने से भी जुओं की समस्या से बचें रहने में मदद मिलती है। क्योंकि प्याज में सल्फर की मात्रा मौजूद होती है जो जुओं को मारने में मदद करती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप प्याज के रस या प्याज के पेस्ट को सिर में लगाएं और आधे घंटे बाद बालों को धो लें। ऐसा हफ्ते में तीन से चार बार करें।

बादाम

बादाम को रातभर के लिए पानी में भिगोकर रखें उसके बाद सुबह उठकर बादाम का छिलका उतार लें और उसके बाद बादाम को पीसकर इसमें निम्बू का रस मिलाएं और उसके बाद इस पेस्ट को बालों में लगाएं। बालों में लगाने के बाद थोड़ी देर के लिए इस पेस्ट को बालों में ही छोड़ दें। उसके बाद बालों को धोकर कंघी कर लें। ऐसा करने से भी जुओं की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

लेमन जूस

निम्बू का रस भी जुओं की समस्या से बचाव के लिए एक आसान व् असरदार उपाय है इसके इस्तेमाल के लिए आप लेमन जूस को सिर में लगाएं। और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें उसके बाद बालों को धो लें। ऐसा करने से भी जुओं की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

कपूर और नारियल का तेल

नारियल तेल में कपूर मिलाकर सिर में लगाने से भी जुओं की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप नारियल तेल में कपूर को पीसकर मिक्स कर लें उसके बाद इसे आप अपने सिर में लगाएं और शावर कैप से बालों को ढक लें उसके बाद शैम्पू का इस्तेमाल कर बालों को धो लें। ऐसा करने से भी आपको इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

जूं की समस्या होने पर डॉक्टर से कब मिलना चाहिए।

जुएं होना कोई बिमारी नहीं है की इसके लिए आप किसी डॉक्टर की मदद लें बल्कि आप ऊपर बताए गए आसान टिप्स को फॉलो करें साथ ही अपने बालों की साफ़ सफाई का ध्यान रखें। जितना आप साफ़ सफाई का ध्यान रखेंगी अपने बालों की केयर करेंगी उतना ही आपको इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलेगी।

तो यह हैं जुएं होने के कारण, लक्षण व् उपचार, यदि आप भी बालों में होने वाली जुओं की समस्या से परेशान हैं तो आप भी इन टिप्स को फॉलो कर सकते हैं ताकि आपको जल्द से जल्द इस परेशानी और शर्मिंदगी दोनों से बचे रहने में मदद मिल सकें।

Remedies to get rid of Lice

जो गर्भवती महिलाएं ज्यादा खट्टा खाती है उनका शिशु ऐसा होता है?

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला के खाने पीने के स्वाद में परिवर्तन आ सकता है। जैसे की कुछ महिलाओं का प्रेगनेंसी के दौरान खट्टा खाने का मन करता है तो कुछ महिलाओं का मीठा खाने का मन करता है साथ ही कुछ महिलाओं का तीखा और चटपटा खाने का मन करता है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान खट्टी चीजों का सेवन करने के बारे में बात करने जा रहे हैं। की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खट्टा खाना चाहिए या नहीं और खट्टा खाने के कारण शिशु पर क्या प्रभाव पड़ता है।

गर्भवती महिला को खट्टा खाना चाहिए या नहीं?

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला की खट्टा खाने की इच्छा होती है तो महिला खट्टी चीजों का सेवन कर सकती है। क्योंकि इससे महिला के पाचन तंत्र को सही काम करने में मदद मिलती है, पेट सम्बन्धी समस्या से महिला को छुटकारा मिलता है, आदि। साथ ही महिला को खट्टी चीजों का सेवन करने के साथ इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए की महिला कभी कभार और थोड़ी मात्रा में ही खट्टी चीजों का सेवन करें। क्योंकि खट्टी चीजों का सेवन करने से महिला को जितना फायदा मिलता है उतना ही महिला को नुकसान भी पहुंच सकता है। और ज्यादा खट्टी चीजों का सेवन करने के कारण गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत को भी नुकसान पहुँच सकता है।

खट्टी चीजों का सेवन करने के कारण शिशु पर क्या बुरा प्रभाव पड़ता है?

यदि प्रेग्नेंट महिला खट्टी चीजों का सेवन ज्यादा करती है तो इसका गर्भ में पल रहे शिशु पर नकारात्मक असर पड़ता है। तो आइये अब जानते हैं की खट्टी चीजों का सेवन करने के कारण शिशु को क्या नुकसान हो सकता है।

गर्भपात

गर्भवती महिला यदि ज्यादा खट्टा खाती है तो इसके कारण शरीर में विटामिन सी की अधिकता हो सकती है जिसके कारण प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन के स्तर में गिरावट आ सकती है। और प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन के स्तर में गिरावट आने के कारण महिला के गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है।

शरीर में पानी की कमी हो सकती है

ज्यादा खट्टा खाने के कारण गर्भवती महिला को दस्त, कब्ज़ जैसी समस्या हो सकती है। और दस्त की समस्या बढ़ने के कारण महिला के शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो इसका बुरा असर गर्भवती महिला की सेहत पर पड़ने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ सकता है।

समय से पहले डिलीवरी का खतरा

खट्टा खाने के कारण शरीर में पानी की कमी होने का खतरा रहता है और शरीर में पानी की कमी होने के कारण गर्भाशय में संकुचन बढ़ सकता है। जिसकी वजह से समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा बढ़ जाता है और यदि महिला की डिलीवरी समय से पहले हो जाती है तो इस कारण बच्चे को जन्म दोष, वजन में कमी जैसी समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।

रिएक्शन के कारण हो सकता है नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान महिला अलग अलग तरीको की दवाइयों का सेवन कर सकती है। और अलग अलग तरीको की दवाइयों का सेवन करने के साथ यदि महिला खट्टा अधिक खाती है तो इसकी वजह से दवाइयों के साथ खट्टी चीजों का रिएक्शन हो सकता है। और शरीर में रिएक्शन होने के कारण महिला और शिशु दोनों पर बुरा असर पड़ने का खतरा होता है।

ऑपरेशन के समय आ सकती है दिक्कत

डिलीवरी का समय पास आने पर महिला को खट्टी चीजों का सेवन करना बंद कर देना चाहिए। क्योंकि यदि आपकी डिलीवरी सिजेरियन होती है और आप खट्टी चीजों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान अधिक कर रही होती है खासकर डिलीवरी का समय पास होने पर भी तो ऐसा करने से डिलीवरी के समय महिला का ब्लड शुगर लेवल लौ हो सकता है। और ब्लड शुगर लेवल लौ होने के कारण महिला को दिक्कतें हो सकती है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो प्रेगनेंसी के दौरान खट्टा अधिक खाने के कारण माँ व् बच्चे को हो सकते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को खट्टी चीजों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान अधिक नहीं करना चाहिए।

गर्भावस्था में अंडे कब से खाने चाहिए और क्यों खाने चाहिए?

आपने बहुत बार यह सुना होगा की संडे हो या मंडे रोज खाएं अंडे, लेकिन जब बात प्रेगनेंसी की होती है तो प्रेगनेंसी के दौरान हर महिला को अपने खान पान की चीजों को लेकर अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। जैसे की महिला को कब खाना चाहिए, कितना खाना चाहिए, क्यों खाना चाहिए, आदि।

क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला के लिए स्वस्थ रहना बहुत जरुरी होता है साथ ही महिला यदि कोई भी गलती करती है तो इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान अंडे का सेवन कब करना चाहिए, क्यों करना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में अंडे का सेवन कब करना चाहिए?

प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन्स व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर अंडे का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान महिला को जरूर करना चाहिए। लेकिन अंडे का सेवन करते समय महिला को एक बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में अंडे खाने से बचें। क्योंकि अंडे की तासीर गर्म होती है जिससे गर्भ में पल रहे शिशु पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

साथ ही गर्मियों का मौसम होने पर महिला को जरुरत से ज्यादा अंडे नहीं खाने चाहिए क्योंकि गर्मी के मौसम में अंडे खाने से महिला को दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के बाद महिला एक दिन में एक से दो अंडे खा सकती है।

गर्भवती महिला को अंडे क्यों खाने चाहिए?

अंडा पोषक तत्वों की खान होता है जैसे की विटामिन, प्रोटीन, फोलेट, कैल्शियम, व् अन्य पोषक तत्व अंडे में मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला और शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। साथ ही अंडे का सेवन करने से महिला और शिशु दोनों को बहुत से सेहत सम्बन्धी फायदे भी मिलते हैं। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अंडे खाने की सलाह दी जाती है।

प्रेगनेंसी के दौरान अंडे खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान अंडे का सेवन करती है तो इससे महिला और शिशु को एक नहीं बल्कि कई सेहत सम्बन्धी फायदे मिलते हैं। जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की कौन से सेहत सम्बन्धी फायदे अंडे का सेवन करने से महिला व् शिशु को मिलते हैं।

प्रोटीन मिलता है

अंडा प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भवती महिला की कोशिकाओं को पोषण पहुँचाने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की कोशिकाओं के बेहतर विकास में मदद करता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक व् दिमागी विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

कैल्शियम

कैल्शियम हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कैल्शियम युक्त चीजों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। ताकि गर्भवती महिला की हड्डियों को पोषण मिलने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके। और अंडा कैल्शियम का बेहतरीन स्त्रोत होता है ऐसे में अंडे का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने से गर्भवती महिला और शिशु दोनों को फायदा मिलता है।

आयोडीन

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में आयोडीन की कमी होने के कारण गर्भवती महिला की शारीरिक परेशानियां बढ़ने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी आने का भी खतरा रहता है। ऐसे में महिला को शरीर में आयोडीन की कमी को पूरा करने के लिए आयोडीन युक्त चीजों का सेवन जरूर करना चाहिए। और अंडा आयोडीन से भरपूर होता है जो गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में आयोडीन की कमी को पूरा करने में मदद करता है। जिससे माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

विटामिन ए

अंडे में विटामिन ए भी मपुजूद होता है जो गर्भवती महिला की आँखों को सुरक्षा प्रदान करने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की आँखों के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

कोलिन

अंडे में कोलिन नामक तत्व मौजूद होता है जो गर्भ में पल रहे शिशु के दिमागी विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। ऐसे में यदि महिला अंडे का सेवन करती है तो इससे बच्चे तक कोलिन नामक तत्व पहुँच जाता है जिससे गर्भ में पल रहे शिशु के दिमागी विकास को बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

ऊर्जा का है बेहतरीन स्त्रोत

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को 200 से 300 अतिरिक्त कैलोरी की जरुरत होती है। और अंडे का सेवन करने से महिला को अतिरिक्त कैलोरी मिलती है जिससे गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

ओमेगा 3 फैटी एसिड

अंडे में ओमेगा 3 फैटी एसिड भी मौजूद होते हैं जो गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक व् दिमागी विकास को बेहतर करने में मदद करते हैं।

फोलेट

फोलेट एक ऐसा पोषक तत्व होता है जो गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद करता है और यदि शिशु को यह पोषक तत्व नहीं मिलता है तो इसके कारण शिशु के शारीरिक व् दिमागी विकास में कमी आने का खतरा रहता है। साथ ही शिशु को जन्मदोष होने का खतरा भी रहता है ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ऐसे खाद्य पदार्थ जरूर खाने चाहिए जिसमे फोलेट मौजूद हो। और अंडे में फोलेट मौजूद होता है ऐसे में शिशु के बेहतर विकास के लिए और शिशु को जन्मदोष के खतरे से सुरक्षित रखने के लिए महिला को अंडे का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान जरूर करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ सेहत सम्बन्धी फायदे जो गर्भवती महिला और शिशु को मिलते हैं। इसके अलावा गर्भवती महिला को अंडे का सेवन करते समय ध्यान रखना चाहिए की महिला ताजे अंडे दूकान से लाएं और उनका सेवन करें, अंडे को खाने से पहले अच्छे से पकाएं, आधा पका हुआ और आधा कच्चा अंडा नहीं खाएं, आदि।

प्रेगनेंसी में यह 8 गलतियां बिल्कुल नहीं करें?

गर्भावस्था के पूरे नौ महीने महिला के लिए उतार चढ़ाव से भरे होते हैं, महिला अपने शरीर में बहुत से आंतरिक व् बाहरी रूप से बदलाव का अनुभव करती है, मानसिक रूप से भी महिलाएं परेशान हो सकती है, इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कुछ अनोखे अनुभवों का अहसास करने का भी मौका मिलता है, आदि। ऐसे में जरुरी होता है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को दिक्कतें कम हो और गर्भ में पल रही नन्ही जान के विकास में भी किसी तरह की दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला अपना प्रेगनेंसी की शुरुआत से लेकर आखिर तक अच्छे से ध्यान रखें।

साथ ही महिला किसी भी तरह की गलतियां नहीं करें और इसके लिए जरुरी है की महिला इस बात की जानकारी इक्कठी करें की प्रेगनेंसी के दौरान क्या क्या करना माँ और बच्चे दोनों के लिए परेशान कर सकता है। क्योंकि जितनी महिला को प्रेगनेंसी से जुडी जानकारी होती है उतना ही प्रेगनेंसी को आसान बनाने में मदद मिलती है। तो लीजिये इस आर्टिकल में हम आपको ऐसी आठ गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो महिला को बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए।

घर में प्रेगनेंसी टेस्ट करने के बाद डॉक्टर से मिलने में देरी

पीरियड्स मिस होने के बाद जैसे ही गर्भवती महिला घर में प्रेगनेंसी टेस्ट करती है और उसके बाद महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है। तो उसके बाद तुरंत महिला को डॉक्टर से मिलना चाहिए। ताकि महिला का सही ट्रीटमेंट शुरू हो सके इसके अलावा महिला को डॉक्टर ढूंढने में पूरा ध्यान रखना चाहिए और सही जानकारी के बाद ही डॉक्टर का चुनाव करना चाहिए। साथ ही हो सके तो ऐसे डॉक्टर को ढूंढ़ना चाहिए जिसका हॉस्पिटल या क्लिनिक आपके घर के आस पास हो। ऐसे में महिला यदि प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही लापरवाही करती है और डॉक्टर से मिलने में देरी करती है तो इसके कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए दवाइयों का सेवन

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियां हो सकती है जैसे की सिर दर्द, चक्कर, बॉडी पेन, पेट दर्द, पीठ दर्द, उल्टियां आदि। और ऐसा होना बिल्कुल आम बात होती है लेकिन इन परेशानियों से निजात पाने के लिए महिला को बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि यदि महिला अपनी मर्ज़ी से किसी भी दवाई का सेवन कर लेती है तो इसके कारण शिशु के विकास पर बुरा असर पड़ सकता है।

घर के काम

प्रेगनेंसी के दौरान महिला घर के छोटे मोटे काम कर सकती है लेकिन महिला को किसी भी काम करने में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। जैसे की महिला को गैस के साथ खड़े रहकर काम नहीं करना चाहिए, शेल्फ के साथ सटकर काम नहीं करना चाहिए, लम्बे समय तक एक ही जगह खड़े रहकर काम नहीं करना चाहिए, उन कामों को नहीं करना चाहिए जिससे पेट पर दबाव पड़े या जिस काम को करने में ज्यादा झुकना पड़े, केमिकल वाली चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, घर में यदि किसी व्यक्ति को संक्रमण है तो उसका काम करने से बचना चाहिए, भारी चीजों को उठाने वाला काम नहीं करना चाहिए, बाथरूम साफ़ नहीं करना चाहिए, पालतू जानवरों की साफ़ सफाई का काम नहीं करना चाहिए, आदि। क्योंकि यह सभी काम करने से माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

गलत खाद्य पदार्थों का सेवन का सेवन

कुछ चीजों का सेवन गर्भावस्था के दौरान करने की मनाही होती है जैसे की बासी खाना, फ्रिज से निकला ठंडा खाना, कच्चे अंडे, कच्चा नॉन वेज, कच्चा पपीता, गर्म तासीर वाली चीजें, जंक फ़ूड, तेलीय व् मसालेदार आहार, बिना ढक कर रखा हुआ आहार, आर्टिफिशल मीठे से युक्त चीजें, डिब्बाबंद आहार व् जूस, जरुरत से ज्यादा नमक, आदि। ऐसे में महिला को इन सभी चीजों से परहेज करना चाहिए क्योंकि इन सभी चीजों का सेवन करने से गर्भवती महिला व् शिशु की सेहत को नुकसान पहुँचता है।

गलत तरीके से सम्बन्ध

स्वस्थ प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाना बिल्कुल सेफ होता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की महिला सम्बन्ध बनाते समय गलतियां करें। क्योंकि तेजी से सम्बन्ध बनाने पर, नए नए एक्सपेरिमेंट करने पर, सम्बन्ध बनाते समय पेट पर डालने पर माँ व् बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान पहुँच सकता है। ऐसे में सम्बन्ध बनाते समय यह गलतियां नहीं करें इसके अलावा सम्बन्ध बनाने से पहले हो सके तो एक बार डॉक्टर की राय जरूर लें।

सोते समय की जाने वाली गलती

गर्भावस्था के दौरान जिस तरह महिला को खान पान, चलने फिरने, उठने बैठने में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है उसी तरह प्रेग्नेंट महिला को सोते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए। जैसे की महिला को पेट के बल, सीधा होकर, नहीं सोना चाहिए क्योंकि इसके कारण माँ व् बच्चे को दिक्कत हो सकती है। क्योंकि पेट के बल सोने पर पेट पर दबाव पड़ता है जिसकी वजह से गर्भ में शिशु को दिक्कत होने का खतरा होता है। साथ ही सीधा होकर सोने से महिला की रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है जिसकी वजह से महिला को कमर में दर्द की समस्या हो सकती है।

नशे का सेवन

गर्भवती महिला को गलती से भी नशे जैसे की धूम्रपान, अल्कोहल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि नशे का सेवन करने से गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी समस्या होने के साथ शिशु के शारीरिक, मानसिक विकास में कमी आ सकती है। इसके अलावा शिशु को जन्म दोष होने का खतरा भी हो सकता है। ऐसे में महिला को नशा करने की गलती बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए।

वजन कम करने की कोशिश

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ना आम बात होती है लेकिन महिला को बिल्कुल भी वजन कम करने की नहीं सोचनी चाहिए। क्योंकि यदि महिला वजन कम करने के लिए डाइट करती है या ज्यादा व्यायाम करती है तो इन दोनों के कारण माँ व् बच्चे की सेहत पर उल्टा असर पड़ने का खतरा रहता है।

तो यह हैं कुछ गलतियां जो गर्भवती महिला को नहीं करनी चाहिए क्योंकि इनकी वजह से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को दिक्कत होने का खतरा रहता है। इसके अलावा गर्भावस्था की सही जानकारी इक्कठी करनी चाहिए, डॉक्टर से रूटीन चेकअप समय से करवाना चाहिए, अपनी फिटनेस के प्रति सतर्क रहना चाहिए, आदि। ताकि प्रेगनेंसी और डिलीवरी में किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं आएं।

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प्रेगनेंसी में हरी मिर्च खाने के फायदे और नुकसान

गर्भावस्था के दौरान महिला के लिए अच्छी डाइट लेना बहुत जरुरी होता है क्योंकि इससे प्रेग्नेंट महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है, प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है, आदि। लेकिन खान पान में महिला को बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत भी होती है जैसे की महिला को यह ध्यान रखना चाहिए की महिला क्या खाएं क्या नहीं खाएं, कितनी मात्रा में खाएं, कब खाएं, आदि।

इसीलिए गर्भावस्था के दौरान किसी भी चीज का सेवन करने से पहले महिला के दिमाग में बहुत सी बातें घूमने लगती है जैसे की महिला जो खा रही है वो प्रेगनेंसी के दौरान सेफ है या नहीं। साथ ही जैसे कुछ महिलाओं का प्रेगनेंसी के दौरान तीखा खाने का मन करता है तो महिला के मन में आता है की महिला तीखा खाएं या नहीं। तो आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को हरी मिर्च का सेवन करना चाहिए या नहीं उसके बारे में बताने जा रहे हैं साथ ही इसके क्या फायदे और नुकसान महिला को हो सकते हैं उसके बारे में जानते हैं।

प्रेग्नेंट महिला को हरी मिर्च खानी चाहिए या नहीं?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का तीखा खाने का यदि मन करता है तो महिला थोड़ा बहुत तीखा खा सकती है खासकर हरी मिर्च का सेवन महिला कर सकती है। क्योंकि हरी मिर्च खाने से गर्भवती महिला को नुकसान नहीं होता है और न ही शिशु को नुकसान होता है। साथ ही हरी मिर्च में विटामिन सी व् अन्य विटामिन्स, फाइबर, फोलेट, आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन सिमित मात्रा में हरी मिर्च का सेवन करने से महिला और शिशु को इसके फायदे मिलते हैं और जरुरत से ज्यादा खाने पर नुकसान भी हो सकते हैं।

प्रेगनेंसी में हरी मिर्च खाने के फायदे

गर्भवती महिला यदि हरी मिर्च का सेवन करती है तो इससे महिला और शिशु को एक नहीं बल्कि बहुत से सेहत सम्बन्धी फायदे मिलते हैं। जैसे की:

ब्लड प्रैशर रहता है कण्ट्रोल

प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रैशर की समस्या के होने के कारण गर्भवती महिला और शिशु दोनों को दिक्कत होने का खतरा रहता है। ऐसे में सिमित मात्रा में यदि महिला हरी मिर्च का सेवन करती है तो हरी मिर्च में मौजूद गुण गर्भवती महिला को इस समस्या से बचे रहने में मदद करते हैं।

वजन रहता है नियंत्रित

गर्भावस्था के दौरान जरुरत से ज्यादा वजन के बढ़ने के कारण गर्भवती महिला और शिशु को दिक्कत हो सकती है ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है की महिला का वजन सही रहें। ऐसे में यदि महिला हरी मिर्च का सेवन करती है तो इससे महिला के वजन को नियंत्रित रहने में मदद मिलती है।

इम्युनिटी बढ़ती है

हरी मिर्च विटामिन सी का बेहतरीन स्त्रोत होती है और विटामिन सी एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट होता है। जो गर्भवती महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है। और प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला की इम्युनिटी मजबूत होना बहुत जरुरी होता है ताकि गर्भवती महिला को संक्रमण व् बिमारियों के खतरे से बचे रहने में मदद मिल सके।

स्किन सम्बन्धी फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं की स्किन में रूखापन आना, दाग धब्बे होना आम बात होती है लेकिन हरी मिर्च का सेवन करने से गर्भवती महिला की स्किन को फायदे मिलते हैं। क्योंकि हरी मिर्च में विटामिन ए, विटामिन सी मौजूद होता है। जो प्रेगनेंसी के दौरान भी स्किन को ग्लोइंग रखने में मदद करता है।

मूड रहता है बेहतर

गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को तनाव होना आम बात होती है ऐसे में हरी मिर्च खाने से महिला की इस समस्या को दूर करने में मदद मिलती है। क्योंकि हरी मिर्च का सेवन करने से शरीर में ऐसे हॉर्मोन रिलीज़ होते हैं जो मूड को बेहतर रखने में मदद करते हैं।

भूख बढ़ती है

कुछ महिलाओं के मुँह का स्वाद खराब होने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान भूख में कमी आ सकती है। ऐसे में हरी मिर्च का सेवन करने से महिला के मुँह के स्वाद को सही करने में मदद मिलती है जिससे महिला की भूख में वृद्धि होती है।

ब्लड शुगर लेवल रहता है कण्ट्रोल

हरी मिर्च का सेवन करने से ब्लड में शुगर लेवल को कण्ट्रोल रहने में मदद मिलती है जिससे गर्भवती महिला को जेस्टेशनल शुगर की समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहने में मदद मिलती है।

आँखों के लिए है बेहतर

हरी मिर्च विटामिन ए का बेहतरीन स्त्रोत होती है ऐसे में हरी मिर्च का सेवन करने से गर्भवती महिला की आँखों को सही रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की आँखों के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

पाचन क्षमता रहती है बेहतर

हरी मिर्च का सेवन करने से गर्भवती महिला की पाचन क्षमता को मजबूत रहने में भी मदद मिलती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पेट सम्बंधित समस्याओं से बचे रहने में मदद मिलती है।

हदय सम्बन्धी फायदे

हरी मिर्च का सेवन करने से गर्भवती महिला को कोलेस्ट्रॉल से जुडी समस्याओं, हदय सम्बंधित परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के दौरान हरी मिर्च का सेवन करने के नुकसान

गर्भावस्था के दौरान यदि स्वाद या टेस्ट के चक्कर में महिला जरुरत से ज्यादा हरी मिर्च का सेवन करती है तो ऐसा करने से महिला को सेहत सम्बन्धी फायदे नहीं नुकसान पहुँच सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में हरी मिर्च का सेवन करने से कौन से नुकसान हो सकते हैं।

पाचन सम्बन्धी परेशानी

हरी मिर्च का अधिक सेवन करने से पेट में गर्मी बढ़ सकती है जिसके कारण महिला को पाचन सम्बन्धी समस्या जैसे की गैस, कब्ज़ जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

सीने में जलन

जरुरत से ज्यादा हरी मिर्च खाने के कारण महिला को सीने में जलन जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और सीने में जलन के कारण महिला की खाने पीने की इच्छा में कमी आ सकती है जो की महिला और शिशु के लिए सही नहीं होता है।

स्किन सम्बन्धी परेशानी

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की स्किन बहुत सेंसिटिव हो जाती है। ऐसे में ज्यादा मिर्च खाने के कारण महिला को स्किन सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

बवासीर

हरी मिर्च का सेवन ज्यादा खाने के कारण गर्भवती महिला को बवासीर जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और जिन महिलाओं को यह समस्या पहले से है उनकी यह समस्या और ज्यादा बढ़ सकती है।

डायरिया

हरी मिर्च में फाइबर की मात्रा अधिक होती है ऐसे में जरुरत से ज्यादा हरी मिर्च का सेवन करने के कारण गर्भवती महिला को डायरिया जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो हरी मिर्च का सेवन करने से गर्भवती महिला को हो सकते हैं। ऐसे में हरी मिर्च के बेहतरीन फायदों के लिए और उसके नुकसान से बचे रहने के लिए महिला को सिमित मात्रा में ही हरी मिर्च का सेवन करना चाहिए।

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प्रेग्नेंट महिला के लिए ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर के लिए सही समय

गर्भावस्था के दौरान अपनी डाइट का ध्यान महिला को अच्छे से रखना चाहिए और डाइट का ध्यान रखने का मतलब केवल यह नहीं है की महिला भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें। बल्कि इसका मतलब यह हैं की महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने के साथ सही समय से अपने आहार का सेवन करना चाहिए। क्योंकि पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने के साथ यदि महिला सही समय से अपनी डाइट लेती है तो इसका दुगुना फायदा माँ और बच्चे को मिलता है।

साथ ही केवल एक समय का खाना ही नहीं बल्कि पूरे दिन भर में महिला को अपने सही मील समय से लेने चाहिए। यदि प्रेग्नेंट महिला अपनी डाइट को समय से नहीं लेती है तो इसके कारण महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां होने के शिशु के विकास में कमी आने का खतरा भी होता है। ऐसे में इस परेशानी से बचे रहने के लिए महिला को अपनी डाइट को समय से लेना चाहिए।तो आइये अब इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला के लिए ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर के लिए सही समय क्या है।

प्रेग्नेंट महिला को ब्रेकफास्ट कब करना चाहिए?

ब्रेकफास्ट यानी नाश्ता दिन का सबसे पहले आहार का होता है। साथ ही डिनर के लम्बे गैप के बाद महिला को नाश्ता करना होता है। ऐसे में जरुरी होता है की महिला नाश्ते में भरपूर पोषक तत्वों से युक्त चीजों को शामिल करें साथ ही सुबह जितना जल्दी हो सके नाश्ता कर लें। और नाश्ते के लिए सात से नौ बजे तक का समय सबसे सही होता है। इसके अलावा यह भी जरुरी होता है की महिला सुबह उठने के एक घंटे के बाद तक नाश्ता कर लें। ताकि महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिल सके।

साथ ही महिला को इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए की महिला रात को समय से सोए और सुबह समय से उठें। क्योंकि यदि महिला देर तक सोती है तो इसके कारण महिला की दिनचर्या पर गलत प्रभाव पड़ता है जिससे खाने पीने का पूरा रूटीन डिस्टर्ब हो जाता है। नाश्ता करने और लंच करने के बीच में जो समय होता है उस समय में भी महिला को खाली पेट नहीं रहना चाहिए। बल्कि उस समय किसी न किसी फल, जूस, सलाद आदि का सेवन महिला को करना चाहिए।

गर्भवती महिला के लिए लंच करने का सही समय

प्रेग्नेंट महिला ने यदि सात बजे से लेकर नौ बजे के बीच में नाश्ता कर लिया है तो इसके बाद महिला को एक से दो बजे के बीच में लंच भी कर लेना चाहिए। इससे ज्यादा देर महिला को दोपहर के खाने में नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा दोपहर के खाने में महिला को किसी न किसी हरी सब्जी, दाल आदि का सेवन जरूर करना चाहिए।

रात के डिनर के लिए सही समय

लंच करने के बाद महिला को शाम के समय स्नैक्स के रूप में किसी न किसी खाद्य पदार्थ जैसे की फल, सलाद, बिस्कुट आदि का सेवन जरूर करना चाहिए। और उसके बाद सात से आठ बजे के बीच महिला को डिनर भी खत्म कर लेना चाहिए ज्यादा हो तो महिला नौ बजे तक डिनर कर लें। डिनर में महिला को हल्का आहार लेना चाहिए जिसे आसानी से हज़म होने में मदद मिल सके। उसके बाद महिला को थोड़ी देर वाक करनी चाहिए और सोने से पहले दूध का सेवन करके सो जाना चाहिए।

तो यह हैं प्रेग्नेंट महिला के लिए ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर के लेने का सही समय ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वो अपने सभी समय की डाइट को समय से लें। ताकि शरीर में पोषक तत्व भरपूर रहे जिससे माँ और बच्चे दोनों को हेल्दी रहने के साथ प्रेगनेंसी में आने वाली दिक्कतों को कम करने में मदद मिल सके।

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प्रेग्नेंट महिला को फूल क्यों नहीं सूंघने चाहिए?

फूल दिखने में खूबसूरत होने के साथ सुगन्धित भी होते हैं इसीलिए हर कोई उनकी तरफ तेजी से आकर्षित भी होता है। और हर किसी का कोई न कोई पसंदीदा फूल भी होता है जिसका रंग या सुगंध उसे बहुत पसंद होती है। क्या आपका भी कोई पसंदीदा फूल है यदि हाँ तो बहुत अच्छी बात है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फूलों को सूंघने या छूने से बचना चाहिए अब आप सोच रहे होंगे की ऐसा क्यों? तो आइये आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फूलों को छूना या सूंघना क्यों नहीं चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

संक्रमण का होता है डर

एक फूल को पता नहीं दिन भर में कितने लोग हाथ लगाते हैं, सूंघते हैं, ऐसे में उसी फूल को यदि प्रेग्नेंट महिला छूती है या सूंघती है। तो इससे यदि किसी व्यक्ति को किसी तरह का संक्रमण होता है तो उसका वायरस फूल पर भी रह जाता है। और उसके बाद उसे भी टच करता है तो वो वायरस उस व्यक्ति के संपर्क में आ सकता है जिसकी वजह से दूसरे व्यक्ति को भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को संक्रमण से बचाव के लिए फूलों को सुघने या टच करने से बचना चाहिए।

ज्यादा गंध के कारण हो सकती है परेशानी

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण कुछ महिलाओं को अलग अलग चीजों की गंध से एलर्जी या उल्टी जैसी समस्या होने का खतरा होता है। और हर एक फूल की सुगंध अलग अलग होती है ऐसे में गंध के कारण महिला को किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो इससे बचने के लिए महिला को फूलों को सूंघने से बचना चाहिए।

सेहत सम्बन्धी परेशानी हो सकती है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ज्यादा सुगन्धित चीजों का इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि ज्यादा सुगन्धित चीजों के कारण महिला को जुखाम जैसी समस्या के होने का खतरा होता है। ऐसे में इस परेशानी से बचे रहने के लिए प्रेग्नेंट महिला को फूलों को सूंघने की मनाही होती है।

कई फूल माँ व् बच्चे को पहुंचा सकते हैं नुकसान

कुछ फूलों की सुंगंध जहर के समान होती है जो स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकती है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला ऐसे फूलों को छूती है या सूंघती है तो इसका असर केवल महिला की ही नहीं बल्कि बच्चे की सेहत पर भी पड़ सकता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे की सेहत को किसी भी तरह का नुकसान से बचे रहने के लिए फूलों को सूंघने या टच करने की मनाही होती है।

फूलों में कांटे और कीड़े आदि भी हो सकते हैं

फूल दिखने में जितने खूबसूरत होते हैं कई बार उसमे उतने ही कीड़े और कांटे मौजूद होते हैं। ऐसे में फूलों को छूने पर यदि महिला को कांटे चुभ जाते हैं या कीड़ा काट जाता है तो इसके कारण भी इन्फेक्शन होने का खतरा होता है। ऐसे में महिला को किसी भी तरह का इन्फेक्शन नहीं हो इससे बचाव के लिए प्रेग्नेंट महिला को फूलों को सूंघने व् छूने की मनाही होती है।

फूलों में मौजूद कीटाणु से हो सकता है नुकसान

फूलों में कीटाणु भी मौजूद होते हैं ऐसे में प्रेग्नेंट महिला यदि फूलों को छूती है तो इसकी वजह से वो कीटाणु शरीर में प्रवेश कर सकते हैं जिसकी वजह से माँ व् बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान पहुँच सकता है। ऐसे में माँ व् बच्चे दोनों को ऐसी कोई परेशानी नहीं हो इससे बचने के लिए फूलों को सूंघने व् छूने की मनाही होती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से प्रेग्नेंट महिला को फूलों को सूंघने या छूने से बचना चाहिए। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आपको या आपके बच्चे को इस कारण किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

गोपाल संतान मन्त्र और पूजा विधि लड़का होने के लिए

शादी होने के बाद प्रत्येक कपल यही चाहता है की उनके घर में बच्चे की किलकारी गूँजें और इस बात का इंतज़ार कपल के साथ घर में मौजूद हर सदस्य भी करता है। कुछ कपल शादी के तुरंत बाद ही माँ बाप बन जाते हैं तो कुछ थोड़ा समय लगाते हैं। परन्तु कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो बहुत कोशिश करने के बाद भी इस सफल नहीं हो पाते हैं।

खासकर आज के समय में जहां लोह ज्यादा उम्र में शादी कर रहें हैं, गलत लाइफस्टाइल के शिकार हो रहे हैं, उन्हें इस समस्या का सामना ज्यादा करना पड़ रहा है। उसके बड़ा इसके इलाज के लिए वो महंगे से महंगे डॉक्टर के पास जाते हैं, बाबा के चक्कर में भी पड़ जाते हैं लेकिन इससे भी उन्हें कुछ हासिल नहीं होता है। उसके बाद बहार वाले ही इस बात को लेकर तने मारने लग जाते हैं जिसकी वजह से महिला की जिंदगी तो बद से बदतर हो जाती है।

लेकिन यह भी सच है की जब दवा असर नहीं करती है तो दुआ काम आ जाती है। ऐसे में हमारे धर्म शास्त्रों में कई ऋषि मुनियों ने मंत्रों की रचना को किया है जिनकी यदि विधिवत साधना करके संतान समस्याएं मिट जाती हैं। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको एक ऐसे ही मन्त्र के बारे में बताने जा रहे हैं।

क्या होता है गोपाल संतान मन्त्र

ऐसा माना जाता है बहुत कोशिशों के बाद भी जिन दम्पतियों को संतान की प्राप्ति नहीं होती है वो दम्पति यदि गोपाल संतान मन्त्र का जाप करता है। तो इससे उनको अपने जीवन की सबसे अनमोल ख़ुशी को पाने में मदद मिलती है। “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः।” और यह होता है गोपाल संतान मन्त्र, ऐसे में यदि आपको भी गर्भाधारण में समस्या आ रही हो तो आपको भी मन्त्र का जाप करना चाहिए ताकि आपको अपनी इस समस्या का समाधान पाने में मदद मिल सकें।

गोपाल संतान मन्त्र को जपने की पूजा विधि

  • वैसे तो रोजाना गोपाल संतान मन्त्र का जाप करना चाहिए लेकिन ऐसा माना जाता है की जन्माष्टमी के दिन इस मन्त्र का पूरी श्रद्धा भाव से साथ जाप करने पर बाल गोपाल जैसी संतान यानी की स्वयं कान्हा रूपी पुत्र आपके घर जन्म लेते हैं।
  • इस मन्त्र का जाप करने से पहले घर में बाल गोपाल का सूंदर सा चित्र लगाएं। उसके बाद माखन मिश्री का भोग लगाएं।
  • फिर तुलसी की माला से 108 बार इस मन्त्र का जाप करें।
  • जन्माष्टमी के दिन अलावा रोजाना भी आप तुलसी माला के साथ इस मन्त्र का जाप करें ऐसा करने से आपको पुत्र की प्राप्ति व् निसंतान दम्पति को संतान की प्राप्ति होती है।

तो यह हैं गोपाल संतान मन्त्र से जुडी जानकारी यदि आप भी बच्चे पैदा न होने की परेशानी से जूझ रहे हैं तो आपको भी इस मन्त्र का जाप करना चाहिए। ताकि कान्हा स्वयं आकर आपकी इस समस्या का समाधान करें और आपके घर में भी एक नन्हा बाल गोपाल रूपी पुत्र जन्म लें।