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गर्मियों में गर्भवती महिला ऐसे रखें अपना ध्यान

गर्मियों का मौसम बहुत परेशान कर देने वाला होता है पसीना, तेज धूप, भूख में कमी, बार बार ठंडा खाने की इच्छा होना, बहुत ज्यादा आलस महसूस होना, जैसी परेशानियां होती है। और ऐसे में यदि कोई महिला गर्भवती है तो उसे ज्यादा परेशानी हो सकती है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला गर्मियों के मौसम में कुछ आसान और छोटी छोटी बातों का ध्यान रखती है। तो इससे महिला को गर्मी में होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसी ही छोटी छोटी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं।

ठंडा खाने से बचें: गर्मी के मौसम में ठंडा खाने की इच्छा बढ़ जाती है। लेकिन ठंडी चीजों का अधिक सेवन यहां तक की अधिक ठंडा पानी पीने के कारण गर्भवती महिला को सूजन जैसी परेशानी हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को ठंडी चीजों के सेवन से बचना चाहिए। यदि ठंडा पानी पीना चाहते हैं तो मटके का पानी पीएं वह ठंडा होने के साथ सेहत पर गलत प्रभाव भी नहीं डालता है। यदि कोई फल आदि खा रही है और वो गर्म सा लग रहा है तो उसे थोड़ी देर पानी में रखें फिर जब उसका तापमान सामान्य हो जाये उसके बाद उसे खाएं।

हाइड्रेट रहें: गर्मी के मौसम में प्रेग्नेंट महिला को पानी की कमी बॉडी में नहीं होने देनी चाहिए। और इसके लिए आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ निम्बू पानी, नारियल पानी, फलों के रस आदि का सेवन महिला को करना चाहिए। इससे बॉडी को हाइड्रेट रहने के साथ संक्रमण से बचे रहने, शारीरिक परेशानियों से बचे रहने और हमेशा ऊर्जा से भरपूर रहने और फ्रेश महसूस होने में मदद मिलती है।

हल्का आहार: गर्मी के मौसम में प्रेग्नेंट महिला को हल्का आहार लेना चाहिए लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की उसमे पोषक तत्व ही न हो। हल्के आहार का मतलब है जो पोषक तत्वों से भरपूर हो लेकिन मिर्च, तेल, मसाले घी आदि का इस्तेमाल उनमे कम हो। क्योंकि ज्यादा तेलीय व् मसालेदार आहार गर्मी में प्रेग्नेंट महिला की पेट सम्बन्धी परेशानी को बढ़ा सकता है। इसके अलावा नमक का सेवन भी कम करें क्योंकि इसके कारण प्रेग्नेंट महिला को सूजन जैसी परेशानी हो सकती है।

पहनावा: गर्मी के मौसम में होने वाली परेशानी से बचने के लिए गर्भवती महिला को सूती कपडे पहनने चाहिए। और हो सके तो प्रेग्नेंट महिला को सूती गाउन खरीद लेने चाहिए। इनमे महिला आरामदायक महसूस कर सकती है। साथ ही सूती कपड़ो में गर्मी का अहसास कम होता है और यह पसीने को भी आसानी से सोख लेते हैं।

कमरे को ठंडा रखें: अपने बैठने व् आराम करने वाली जगह को ठंडा रखें। इसके लिए खिड़की दरवाज़ों पर परदे लगाएं। थोड़ी देर एसी चलाएं या कूलर चलाएं, कमरे में थोड़ी हवा पास होने के लिए भी जगद खुली छोड़ें। ऐसा करने से भी प्रेग्नेंट महिला को गर्मी से बचे रहने में मदद मिलती है।

ठन्डे पानी से नहाएं: दिन में दो बार जरूर नहाएं और एक दिन छोड़कर बालों को भी जरूर धोएं। क्योंकि नहाने से शरीर को ठंडा रहने में मदद मिलती है। जिसे प्रेग्नेंट महिला को गर्मी से बचे रहने में मदद मिलती है।

पार्क जाएँ: यदि आपके घर के आस पास पार्क है तो सुबह शाम पार्क में जाएँ। क्योंकि पेड़ पौधों के बीच न केवल आपको रिलैक्स व् फ्रेश महसूस होता है। जिससे आपको थोड़ी बहुत गर्मी से भी राहत मिलती है।

आराम है जरुरी: गर्मी के दिन बहुत लम्बे होते हैं ऐसे में रात को सोने के साथ दिन में भी प्रेग्नेंट महिला को थोड़ा आराम करना चाहिए। क्योंकि जितना प्रेग्नेंट महिला आराम करती है उतना ही महिला और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

यदि आपको प्रेग्नेंट हैं तो आप भी इन टिप्स को ट्राई कर सकती है क्योंकि इन्हे ट्राई करने से आपको गर्मी से बचे रहने में मदद मिल सकती है।

Useful Video tips for pregnancy care during summer

कान की मैल साफ़ करने के घरेलू उपाय

कान में मैल

कान बॉडी का एक बहुत ही नाजुक अंग होता है ऐसे में इसका अच्छे से ध्यान रखना भी जरुरी होता है ताकि कान से जुडी किसी भी समस्या का सामना आपको न करना पड़े। कान में मैल का होना सामान्य बात होती है, ऐसे में इसकी साफ़ सफाई का ध्यान रखना भी बहुत जरुरी होता है। ताकि कान में मैल के कारण आपको कोई दिक्कत न हो। कई लोग कान की सफाई के लिए माचिस की तीली, ईयर बड, पिन आदि का इस्तेमाल करता है जो की बिल्कुल गलत तरीका होता है। क्योंकि कान बहुत ही संवेदनशील अंग होता है जिस पर थोड़ी सी भी चोट बहुत बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है। ऐसे में कान की सफाई जितनी जरुरी है उतना ही जरुरी है की कान की सफाई के लिए सही तरीके का इस्तेमाल किया जाए।

कान की मैल साफ़ करने के तरीके

यदि आपके भी कान में मैल हो गई तो उसे साफ करना जरुरी होता है क्योंकि कान में मैल का अधिक जमना कान में दर्द, सुनने में कमी जैसी परेशानी का कारण बन सकता है। तो लीजिये आज हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं जो कान की साफ़ सफाई को सही ढंग से करने में आपकी मदद करते हैं और आपके कान को किसी भी तरह के नुकसान से बचाने में भी मदद मिलती है।

नमक और पानी

दो से तीन चम्मच पानी में थोड़ा नमक डालकर अच्छे से मिक्स कर लें, मिक्स करने के लिए थोड़ी सी रुई को लेकर इसमें अच्छे से भिगोएं। अब अपने कान को एक तरफ करके उस रुई को कान में निचोड़ दें, और दो से तीन मिनट तक वैसे ही बैठी रहे। इससे कान का मैल धीरे धीरे नरम हो जाएगा, और उसके बाद अपने कान को दूसरी दिशा में निचे की और करें इससे कान का मैल बाहर की तरफ आना शुरू हो जाएगा या आप रुई की मदद से भी इसे बाहर निकाल सकती है।

सरसों का तेल

सरसों के तेल की तीन से चार बूंदे कान में डालें, और कान को ऊपर की दिशा में करके पांच मिनट तक बैठी रहें। और फिर कान को दूसरी दिशा में नीचे की तरफ करें, सरसों के तेल से मैल नरम हो जाएगा जिससे उसे बाहर निकलने में आसानी होगी।

सेब का सिरका

एक चम्मच सेब का सिरका और एक चम्मच पानी अच्छे से मिक्स कर लें, अब इस मिक्सचर की पांच छह बूंदे ड्रॉपर की मदद से कान में डालें, और कान को ऊपर की दिशा में करके बैठे रहे। और पांच से सात मिनट के बाद कान को नीचे की तरफ कर लें, इससे मैल को बाहर आसानी से निकालने में मदद मिल सकती है।

जैतून का तेल

जैतून के तेल को गर्म करें उसके बाद इसके सामान्य तापमान में आने पर ड्रॉपर की मदद से इसकी चार से पांच बूंदे कान में डालें। और कान में रुई डालें, अब करीबन साथ से दस मिनट बाद उस रुई को बाहर निकालें ऐसा करने से भी कान की मैल को साफ़ करने में मदद मिलती है।

ग्लिसरीन

ड्रॉपर की मदद से ग्लिसरीन की चार से पांच बूंदे कान में डालें, और कान को ऊपर की तरफ करें। ऐसा करने से कान की मैल को नरम होने में मदद मिलती है। और मैल के नरम होने के बाद इसे आसानी से रुई की मदद से बाहर निकलने में मदद मिलती है।

बेबी आयल

बेबी आयल की कुछ बूंदे कान में डालें, और कान को एक तरफ करके पांच से सात मिनट तक बैठें, ऐसा करने से कान की मैल को आसानी से नरम होने में मदद मिलती है। जिससे कान से आसानी से मैल को बाहर निकाला जा सकता है।

लहसुन

नारियल या जैतून के तेल में तीन चार लहसुन की कलियों को पीस कर पका लें। उसके बाद इस तेल को छानकर अलग कर लें, और फिर ड्रॉपर की मदद से कान में डालें। और कान को ऊपर की तरफ करके पांच मिनट के लिए बैठ जाएँ। इस तरीके का इस्तेमाल करने से भी कान के मैल को नरम करने में मदद मिलती है जिससे आसानी से कान का मैल बाहर निकल सकता है।

नारियल का तेल

नारियल के तेल को गर्म करें और अब तेल का तापमान कम होने पर इसे ड्रॉपर की मदद से अपने कान में डालें। और रुई पर लगा ले। ऐसा करने से कान के मैल को नरम होकर रुई के साथ ही बाहर आने में मदद मिलेगी।

तो यह हैं कुछ आसान उपाय जिनका इस्तेमाल करने से आपको कान में जमी गंदगी को साफ करने में मदद मिलती है। ऐसे में जब भी आपको लगे की आपके कान में मैल हो गई है तो आप ऊपर दिए गए किसी भी एक तरीके का इस्तेमाल करें इससे आपको आसानी से कान के मैल को साफ़ करने में मदद मिलती है। साथ ही आप चाहे तो कान साफ़ करने के लिए कौन सा तरीका सबसे आसान और सही है इसके लिए डॉक्टर से भी पूछ सकते हैं।

गर्भ में शिशु की मूवमेंट से जाने की लड़का है या लड़की

माँ बनना किसी भी महिला के लिए उसकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत अहसास होता है, फिर चाहे वो लड़के की माँ बने या लड़की की। माँ बनने का अहसास ही महिला में मातृत्व की भावना को बढ़ा देता है। गर्भवती महिला की चाल ढाल, उसके लक्षणों को देखकर पुराने समय में लोग अंदाज़ा लगाते थे की गर्भ में लड़का है या लड़की। और कई लोग आज भी ऐसा करते है, लेकिन यह केवल अंदाजा ही होता है पूरी तरह से इसे सच नहीं कहा जा सकता है।

जैसे की बड़े बुर्जुग कहते थे की यदि महिला के पेट का आकार कम होने के साथ गोल है तो इसका मतलब गर्भ में लड़का है, और यदि पेट आगे की और अधिक निकला हुआ है तो गर्भ में लड़की हो सकती है। ऐसे और भी बहुत से लक्षण हैं जिन्हे देखकर केवल अनुमान ही बड़े बुर्जुग लगाते थे की गर्भ में पल रहे शिशु का जेंडर क्या है। ऐसे ही गर्भ में शिशु की हलचल जानकर भी अनुमान लगाया जा सकता है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की। गर्भ में शिशु पांचवे महीने में हलचल शुरू कर सकता है, शुरुआत में यह हलचल कम महसूस होती है लेकिन धीरे धीरे जैसे शिशु बढ़ता है वैसे ही यह हलचल ज्यादा भी महसूस हो सकती है।

गर्भ में शिशु की हलचल से कैसे पता चलता है की लड़का है या लड़की

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में शिशु की हलचल को पहली बार महसूस करना गर्भवती महिला के लिए सबसे यादगार लम्हो के साथ एक अनोखा अनुभव भी होता है। खासकर जब पहली बार प्रेगनेंसी होती है, ऐसे में माना जाता है की यदि गर्भ में शिशु बहुत ज्यादा सक्रिय होता है तो यह गर्भ में लड़का होने का संकेत होता है, जबकि यदि गर्भ में शिशु कम मूवमेंट करता है तो यह गर्भ में लड़की होने का संकेत होती है। यह पूरी तरह से सच नहीं है बल्कि लोग केवल ऐसा अनुमान ही लगाते है।

तो यह है गर्भ में शिशु की मूवमेंट से कैसे पता लगाया जाता है की गर्भ में लड़का है या लड़की से जुडी कुछ बातें, साथ ही शिशु चाहे लड़का हो या लड़की लेकिन उसके आने से घर में एक नन्हा मेहमान आने के साथ सबसे चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है। ऐसे में घर में आए नन्हे मेहमान का स्वागत करना चाहिए।

ब्रा पहनने से स्किन पर निशान हो गए हैं? ऐसे हटाएँ

ब्रा महिलाओ की आम जरुरत है, जिसका इस्तेमाल वो अपने ब्रैस्ट को सही शेप में रखने के लिए करती है, और यह सीधा आपकी स्किन के संपर्क में रहती है, और साथ ही चिपकी हुई होती है, या आप स्किन फिट या टाइट ब्रा पहनती है, तो इसके कारण आपकी स्किन पर लाल निशान पड़ने लगते है और वो जगह आपको अलग ही दिखाई भी देती है, जब आप ब्रा उतारते है, साथ ही कई बार इन निशान में आपको दर्द का अनुभव भी होता है, यह समस्या उन महिलाओ के साथ अधिक होती हैं जो अपने साइज से अधिक छोटी ब्रा को पहनती है।

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क्या आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो इससे निजात पाने के लिए आपको या तो रात के समय इसे उतार कर सोना चाहिए, अपने साइज की ब्रा या थोड़ी खुली ब्रा पहननी चाहिए, क्योंकि इसके कारण केवल आपके कंधे पर ही नहीं बल्कि आपके सीने पर भी निशान पड़ जाते है, और यदि आप रात को इसे उतार कर या फिर अपने स्ट्रेप को ढीला करके पहनती हैं, तो इसके कारण आपके स्ट्रेप के आस पास की स्किन को सांस लेने की जगह मिलती है, जिससे आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है, इसके आलावा और भी कई उपाय हैं, जिनका इस्तेमाल करके आप इस समस्या से निजता पा सकते है, तो आइये जानते है वो टिप्स कौन से हैं।

पेट्रोलियम जैली का इस्तेमाल करें:-

यदि आप भी ब्रा के कारण पड़े निशान की समस्या से परेशान हैं तो पेट्रोलियम जैली इस समस्या से बचने का सबसे आसान और सरल उपाय है, इसके इस्तेमाल के लिए आप इसे ब्रा के स्ट्रेप के निशान पर लगाएं, उसके बाद ब्रा पहन लें, इससे आपको निशान नहीं पड़ेंगे, और यदि पहले रैशेस या लाल निशान होंगे तो धीरे धीरे उनको भी खत्म करने में आपको मदद मिलेगी।

एलोवेरा जैल का इस्तेमाल करें:-

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एलोवेरा का इस्तेमाल करने से न केवल आपकी स्किन को ठंडक मिलेगी बल्कि इसके इस्तेमाल से आपको ब्रा के स्ट्रेप के कारण पड़े निशान से निजात पाने में भी मदद मिलेगी, इसके इस्तेमाल के लिए आप नियमित रात को सोने से पहले इस जैल को लगाएं, धीरे धीरे आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलेगी।

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हल्दी और निम्बू का लेप लगाएं:-

हल्दी और निम्बू का इस्तेमाल करने से भी आपको अपने ब्रा के कारण पड़े मार्क्स को हटाने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए थोड़ी सी हल्दी में निम्बू का रस मिलाकर अच्छे से इसे अपने निशान पर लगाएं, उसके बाद दस से पंद्रह मिनट लगाने के बाद इसे पानी से धो लें, ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करने से ही आपको अपने मार्क्स को हटाने में मदद मिलती है।

मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें:-

आप अपने हाथों, पैरों की स्किन की कोमलता को बनाएं रखने के लिए तो मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करते है, लेकिन आप अपने कंधो या ब्रैस्ट के लिए भी उसका इस्तेमाल करना चाहिए, इससे आपकी स्किन की कोमलता को बनाएं रखने और साथ ही इससे ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है, जिससे आपको इसके कारण रैशेस भी नहीं पड़ते है।

आइस पैक का इस्तेमाल करें:-

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आइस पैक का इस्तेमाल करने से भी आपको ब्रा के स्ट्रैप्स के कारण पड़े निशान को दूर करने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप रात को सोने से पहले अच्छे से आइस क्यूब को अपने रैशेस या निशान पर लगाएं, और मसाज करें, एक हफ्ता नियमित करने से ही आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलेगी।

तो ये हैं वो टिप्स जिनकी मदद से आप ब्रा के स्ट्रेप से पड़े निशान को हटा सकते है, और ऐसा करने से आपको इस समस्या से निजात मिलने के साथ आपका स्किन टोन भी एक जैसी हो जाती है, और दर्द भी खत्म हो जाता है, इसके अलावा आपको अपने साइज की ब्रा पहननी चाहिए, और ब्रा के स्ट्रेप को ज्यादा टाइट भी नहीं रखना चाहिए, ताकि आपकी ब्रा के स्ट्रेप के आस पास की स्किन को सांस लेने की जगह मिल सकें।

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चेहरे की झाइयां हटाने के बेहतरीन तरीके

चेहरे पर झाइयां होने के कारण आपके चेहरे की त्वचा का रंग अलग अलग दिखना शुरू हो जाता है, क्योंकि इसके कारण आपके चेहरे पर गहरे काले धब्बे पढ़ने लग जाते है, और जिसके कारण आपके चाँद से चेहरे पर दाग लगने लग जाते है, और इसके कारण आपका आकर्षण भी कम हो जाता है, तो आइये आज हम आपको कुछ ऐसे आसान टिप्स बताने जा रहे है जो आपकी त्वचा से झाइयों को दूर करके आपकी त्वचा की चमक को बढ़ाने में मदद करते है।

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चेहरे पर किसी भी तरह का दाग धब्बा आपकी पर्सनैल्टी को फीका कर देता है, और चेहरे पर झाइयों का होना बढ़ती उम्र को दिखाने लगता है, इसके अलावा चहरे पर झाइयां होने के और भी कारण हो सकते है, त्वचा की ग्रंथी की अनियमितता ,लीवर से जुडी कोई समस्या , गर्भावस्था के समय में, रजोनिवृत्ति, एमीबियासिस, हृदय रोग के होने पर, डायबिटिज, ल्यूकोरिया, एनीमिया, खून की कमी, कब्ज, या पेट से सम्बंधित कोई परेशानी, शरीर में Vitamin ‘A’, ‘E’ की कमी होना आदि कारणों से झाइयों की समस्या से आपको परेशान होना पड़ सकता है,

इसके अलावा इसका कारण गलत आदतों का शिकार होने भी हो सकता है, ज्यादा मेक अप करना, धुप में ज्यादा घूमने के कारण भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, और इसके उपचार के लियर मार्किट में कई प्रोडक्ट्स भी मिल जाते है, परंतु कई बार वो आपकी त्वचा पर उलटा असर भी कर जाते है. और ये कोई ऐसी समस्या भी नहीं है, की जिसका कोई उपचार न हो, तो आइये आज हम आपको झाइयों की समस्या से राहत पाने के कुछ टिप्स बताने जा रहे है जिनका इस्तेमाल करके आप अपने चेहरे को बेदाग़ बना सकती है।

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प्याज़ का इस्तेमाल करें:-

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प्याज़ का नियमित रूप से इस्तेमाल करने से भी आप झाइयों की समस्या से राहत पा सकते है, क्योंकि इसमें मौजूद सल्फर आपकी त्वचा से हर तरह के दाग को हटाने में मदद करता है, इसके उपयोग के लिए आप लाल प्याज़ लें, और उसके बाद उसकी स्लाइस काट कर अच्छे से झाइयों पर मसाज करें, इसके अलावा आप प्याज़ को पीस कर उसका पेस्ट बनाकर भी अपनी झाइयों पर लगा सकते है, ऐसा नियमित करने से आपको कुछ ही दिनों में झाइयों की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

आलू का इस्तेमाल करें:-

आलू हर एक घर में आसानी से मिल जाता है, परंतु क्या आप जानते है की आलू भी आपकी झाइयों को खत्म करने के लिए एक बेहतर विकल्प है, इसके लिए आप आलू को चील कर उसकी स्लाइस काटें, और उसके बाद इस स्लाइस को छाछ में भिगाने के बाद अच्छे से अपनी झाइयों पर मसाज करें, हफ्ते में तीन से चार बार इस उपाय के करने से आपको इस परेशानी का हल मिल जाता है, और त्वचा कोमल और मुलायम भी हो जाती है।

शहद और गेहूं के बीज का इस्तेमाल करें:-

चेहरे की झाइयों की समस्या को दूर करने के लिए शहद भी एक बेहतर उपाय है, साथ ही यह आपकी त्वचा को चमकदार बनाने में भी मदद करता है, इसके लिए आप शहद में गेहूं के बीज मिलाकर उसे अच्छे से अपनी झाइयों पर लगाएं, और दस से पंद्रह मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें, और उसके बाद अपने मुँह को गुनगुने पानी की मदद से धो दें, ऐसा करने से भी आपको चेहरे की झाइयों से राहत पाने में मदद मिलती है।

खट्टी मलाई का इस्तेमाल करें:-

खट्टी मलाई का इस्तेमाल करने से भी आपको झाइयों को हटाने में मदद मिलती है, क्योंकि खट्टी मलाई मर लैक्टिक अम्ल होता है, जो की आपके चेहरे को साफ़ करने में मदद करता है, इसके लिए आप अपने मुँह को अच्छे से साफ़ करने के बाद उस पर खट्टी मलाई लगा दें, और उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें, उसके बाद किसी कॉटन के कपडे या टिश्यू की मदद से चेहरा साफ़ कर दें, और त्वचा के रूखेपन को मिटाने के लिए मॉइस्चराइजर लगाएं, इस तरीके को नियमित रूप से करने पर आपको झाइयों की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

निम्बू के रस का इस्तेमाल करें:-

LEMON JUICE

निम्बू के रस में एंटी ऑक्सीडेंट्स होने के साथ एसिड के भी गुण होते है, जो आपकी त्वचा पर होने वाले हर दाग को खत्म करने में मदद करता है, इसके लिए आप निम्बू को दो भागो में काट लें, और उसके बाद इसे अच्छे से अपने चेहरे पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दें, उसके बाद अच्छे से अपने चेहरे को साफ करें, थोड़े ही दिनों के नियमित इस्तेमाल से आपको अपने चेहरे पर झाइयों से निजात मिल जाएगा।

मुलैठी का इस्तेमाल करें:-

मुलैठी का इस्तेमाल यदि आप अपने चेहरे के लिए करते है तो इसके कारण आपके चेहरे पर मेलेनिन का उत्पादन कम हो जाता है, और मुलैठी की जड़ का इस्तेमाल करने से आपकोअ पेन चेहरे से झाइयों को खत्म करने में मदद मिलती है, इसके इस्तेमाल के लिए आप मुलैठी की जड़ को जोजोबा के तेल के साथ अच्छे से पीस कर अपनी झाइयों पर लगाएं, और आधे घंटे के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दें, और उसके बाद अपने चेहरे को साफ़ कर लें, थोड़े ही दिनों के निरंतर इस्तेमाल से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

फलों से बने मास्क का इस्तेमाल करें:-

फलों से बनें मास्क का इस्तेमाल करने से भी आपको चेहरे की झाइयों से राहत पाने में मदद मिलती है, इसके लिए आप पपीता, हिसालू, ककड़ी और अनानस को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, और इस पेस्ट को अच्छे से अपनी झाइयों पर लगाएं, उसके पंद्रह मिनट के बाद अच्छे से अपने चेहरे को धो लें, इसके कारण चेहरे की झाइयां दूर होने के साथ आपके चेहरे पर चमक आने में भी मदद मिलती है।

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हल्दी और चन्दन का इस्तेमाल करें:-

हल्दी और चन्दन का इस्तेमाल बरसों से चेहरे ओर निखार लाने के लिए किया जाता है, और इन दोनों के मिश्रण का इस्तेमाल करने से आपको अपने चेहरे से झाइयों की समस्या को दूर करने में भी मदद मिलती है, इसके लिए आप हल्दी की जड़ और चन्दन की लकड़ी को घिस कर अच्छे से एक पेस्ट तैयार करें, और अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर झाइयों पर लगाएं, अब इसे सूखने के लिए छोड़ दें, और उसके बाद अपने हाथों पर हल्का पानी लगा कर अच्छे से अपने चेहरे की मसाज करें, और उसके बाद पानी से अपने चेहरे को धो दें, ऐसा करने से भी आपको अपने चेहरे से झाइयों को हटाने में मदद मिलती है।

ग्रीन टी के इन 10 फ़ायदों को जानते है आप?

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ग्रीन टी के इन फ़ायदों को जानते है : सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्व के हर कोने में रहने वाले लोग अपने दिन की शुरुआत चाय की चुस्कियो के साथ ही शुरू करना पसंद करते है. जहां एक तरफ कुछ लोगो की आदत सुबह की चाय के साथ अख़बार पढ़ने की बन जाती है तो कई लोगो के दिन की शुरुआत बिना चाय की होती ही नहीं. इसके अलावा अपने काम के बीच में चाय पीना हर कोई पसंद करता है.

लेकिन क्या आपने ग्रीन टी के बारे में सुना है. या कभी उसका स्वाद लिया है. शायद हां, क्योंकि वर्तमान में ये इतनी मशहूर जो हो चुकी है. जिसके चलते लगभग हर तीसरे घर में कोई न कोई ग्रीन टी का सेवन जरूर करता है. पहले की तो नहीं कही जा सकती लेकिन आज कल के समय में दूध वाली चाय की तुलना में ग्रीन टी का अधिक प्रयोग किया जाता है.

स्वास्थ्य से लेकर आपकी त्वचा तक सभी के लिए ग्रीन टी बेहद फायदेमंद होती है. इसके अलावा खुद को फिट रखने का भी ग्रीन टी सबसे बेहतर और आसान उपाय है. लेकिन क्या आप जानते है की वजन कम करने वाली के लिए ये सबसे पसंदीदा पेय है. इसके साथ ही त्वचा को निखारने, और लम्बे समय तक एक्टिव बने रहने के लिए भी लोग ग्रीन टी पीना अच्छा रहता है.

पर ग्रीन टी के साथ एक निश्चित रूटीन और समय होना चाहिए, माना ग्रीन टी फायदेमंद होती है लेकिन कई लोग एक ही दिन में कई कप ग्रीन टी का सेवन करते है जो फायदेमंद तो नहीं होती लेकिन नुकसानदेह जरूर हो जाती है. इसीलिए यदि आप भी ग्रीन टी का सेवन करते है तो इस बात का ध्यान रखे की इसका एक सही समय तय कर लें क्योंकि असमय पीने से ये नुकसादेह हो सकती है.

ऐसा इसीलिए क्योकि Green Tea में कैफीन और टॉक्सिन्स पाए जाते है जो गैस्ट्रिक जूस को dilute करके पेट को नुकसान पंहुचा सकते है. इसके अलावा ग्रीन टी के अधिक सेवन इ चक्कर आना, उलटी आना और गैस जैसी समस्याएं भी उतपन्न हो सकती है.

इसीलिए ग्रीन टी का सेवन करते समय एक बात का ध्यान जरूर रखे की ग्रीन टी के फ़ायदे तो है लेकिन तभी जब सही मात्रा और सही समय में इसका सेवन किया जाये.

ये तो बात हो गई इसके सेवन की लेकिन क्या आप Green Tea के पूर्ण फ़ायदों के बारे में जानते है. यदि नहीं तो परेशान न हो आज हम आपको ग्रीन टी के पूर्ण फ़ायदों के बारे में बताने जा रहे है. जिनकी मदद से आप भी जान जायेंगे की आखिर Green Tea आपके लिए कितनी लाभकारी होती है.

ग्रीन टी के फ़ायदे

1. मोटापा घटाने में मदद करे :

आज के समय में मोटापा सबसे बड़ी और आम समस्या बनता जा रहा है. यदि आपके साथ भी स्थिति कुछ ऐसी ही है तो एक बार Green Tea का प्रयोग करके देखें. इसे अपनी दूध वाली चाय से रिप्लेस करे. धीरे-धीरे आपका मोटापा कम होने लगेगा. क्योंकि इसमें कई तरह के एंटी ऑक्सीडेंट्स पाए जाते है जो मोटापा घटाने में मदद करते है.

2. साँस की बदबू से छुटकारा दिलाए :

सांसो की बदबू, एक बहुत बड़ी समस्या है जो कई तरह के कारणों की वजह से होती है. यदि आप भी इस तरह की समस्या से परेशान है तो ग्रीन टी का इस्तेमाल करे. क्योंकि इसमें मौजूद तत्व उन बैक्टीरिया और वायरस को बढ़ने से रोकते है जो आगे चलकर इस समस्या का कारण बनते है. इसके लिए Green Tea से कुल्ला करे.

3. कोलेस्ट्रॉल कम करे :

शरीर में बढ़ कोलेस्ट्रॉल का लेवल आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है. इसके अलावा हृदय सम्बन्धी बीमारियां और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है. ग्रीन टी में tannis नाम का तत्व पाया जाता है जो प्राकृतिक तरीके से कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है. यदि इस समस्या में Green Tea का सेवन किया जाये तो खून में बढे हुए कोलेस्ट्रॉल को भी कम किया जा सकता है.

4. स्वस्थ त्वचा के लिए :green-tea-ke-benefits

ग्रीन टी में कई तरह के एंटी ऑक्सीडेंट्स पाए जाते है जो त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होता है. इसके अलावा इसमें कुछ ऐसे तत्व भी पाए जाते है जिसकी मदद से ग्लोइंग स्किन भी पायी जा सकती है. इसके साथ ही कई तरह के कॉस्मेटिक्स में भी ग्रीन टी का प्रयोग किया जाता है. Sun डैमेज और free radicals की समस्या को दूर करके सूजन को कम करने में मदद करता है. ग्रीन टी में मौजूद polyphenols बढ़ती उम्र की निशानियो को कम करने में मदद करे.

5. एलर्जी से बचाये रखे :

ग्रीन टी में पाया जाने वाला EGCG, histamine और immunoglobulin E (IgE) के निर्माण को कम करता है जो एलर्जी का एक कारण होते है. शरीर की कई तरह एलर्जी और अन्य समस्यायों के लिए Green Tea का प्रयोग किया जा सकता है.

6. स्वस्थ बाल :

ग्रीन टी में पाए जाने वाले तत्व बालों के लिए भी बेहद फायदेमंद होते है. लंबे और घने बालो के लिए ग्रीन टी से बाल धोने से लाभ मिलता है. इसके अलावा स्कैल्प से जुडी समस्याओ के लिए भी ग्रीन टी बेहद फायदेमंद होती है. डेंड्रफ और psoriasis की समस्या में भी ये बेहद लाभकारी होती है.

7. मधुमेह नियंत्रित करे :

ग्रीन टी मधुमेह की समस्या में भी बेहद लाभदायक सिद्ध होती है. क्योंकि इसमें कई प्राकृतिक anti oxidents पाए जाते है जो रक्त में blood sugar level को नियंत्रित करने में मदद करते है. इसके अलावा Green Tea glucose tolerance को सुधारने में भी मदद करती है.

8. ब्लड प्रेशर को सामान्य रखें :

ग्रीन टी में कैफीन तत्व पाए जाते है जो hypertension से पीड़ित लोगो के लिए ठीक नहीं होता. परंतु Green Tea में कैफीन का बहुत कम मात्रा पाई जाती है जो हृदय के पुरे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है. teaइसके साथ ही मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में भी Green Tea मदद करती है.

9. मस्से की समस्या :

शायद आप नहीं जानते लेकिन Green Tea का इस्तेमाल करके मस्से की समस्या से भी छुटकारा पाया जा सकता है. क्योंकि इसमें मौजूद sinecatechin एक FDA approved drug है जिसका इस्तेमाल इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है.

10. गर्भावस्था :

जैसे की हमने आपको बताया की Green Tea के स्वास्थ्य के लिए कई फ़ायदे है लेकिन क्या आप जानते है की गर्भवती महिला के लिए भी ये बेहद लाभकारी होती है. क्योंकि इसमें एंटी ऑक्सीडेंट्स की उच्च मात्रा पाई जाती है जो cell damage को ठीक करके, blood शुगर को नियंत्रित करने में मदद करती है. इसके साथ ही ये hypertension को नियंत्रित करने में भी मदद करती है.

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बेबी डिलीवरी समय से पहले हो जाने के क्या कारण होते हैं?

गर्भावस्था महिला के लिए बहुत ही ख़ुशी का अहसास होता है। और यह अहसास हर महिला के लिए उसकी जिंदगी के बेहतरीन अहसास में से एक होता है। प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला बहुत से शारीरिक, मानसिक व् भावनात्मक बदलाव का अनुभव करती है। लेकिन फिर भी महिला प्रेगनेंसी के हर पल को केवल एन्जॉय करती है और उस पल का बेसब्री से इंतज़ार करती है की कब उसके शिशु का जन्म होगा।

लेकिन कई बार कुछ परेशानियों के कारण शिशु का जन्म समय से पहले ही हो जाता है जिसे की प्रीमैच्योर डिलीवरी कहा जाता है। और समय से पहले बच्चे के होने के कारण शिशु के विकास से जुडी परेशानियां हो सकती है। साथ ही इसके कारण महिला की परेशानी भी बढ़ सकती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको शिशु के समय से पहले होने के क्या कारण होते हैं, क्या लक्षण होते हैं इस बारे में बताने जा रहे हैं।

समय से पहले डिलीवरी होने के लक्षण

यदि महिला की समय से पहले डिलीवरी होने वाली होती है तो उससे पहले बॉडी में बहुत से लक्षण महसूस हो सकते हैं। जैसे की:-

  • प्राइवेट पार्ट से होने वाले स्राव में परिवर्तन आना जैसे की स्त्राव का अधिक होना, स्त्राव में खून आना, आदि।
  • पेट में बहुत अधिक कसाव महसूस होना।
  • पेल्विक क्षेत्र यानी पेट के निचले हिस्से में बहुत अधिक दबाव व् दर्द का महसूस होना जैसे की शिशु नीचे की ओर अपने आप को धकेल रहा हो।
  • पेट व् पीठ में दर्द होना।
  • पीरियड्स के दौरान पेट में होने वाली ऐंठन जैसा महसूस होना।
  • डायरिया, कब्ज़, आदि का अधिक महसूस होना।

बेबी डिलीवरी समय से पहले हो जाने के क्या कारण होते हैं?

बच्चे के समय से पहले जन्म लेने की समस्या बहुत ही कम देखने को मिलती है लेकिन कई बार कुछ परेशानियां ऐसी होती है जिसके कारण शिशु का जन्म से पहले हो जाता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की बच्चे का समय से पहले जन्म होने का क्या कारण होता है।

खराब जीवनशैली

यदि प्रेग्नेंट महिला शराब पीती है, नींद पूरी नहीं लेती है, खाने का ध्यान रखती है, ज्यादा भागदौड़ करती है, ज्यादा समय तक खड़ी रहती है, जंक फ़ूड का अधिक सेवन करती है, आदि। तो ऐसा करने से गर्भ पर नकारात्मक असर पड़ता है जिसके कारण कारण समय पूर्व प्रसव जैसी समस्या हो सकती है।

उम्र कम या ज्यादा होना

समय से पहले बच्चे का जन्म होने का कारण महिला की उम्र भी हो सकती है। यदि महिला कम उम्र में या अधिक उम्र में प्रेग्नेंट होती है। तो ऐसे में प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स अधिक हो सकती है जिसके कारण बेबी डिलीवरी समय से पहले हो सकती है।

पहले बच्चे का जन्म भी प्रीमैच्योर डिलीवरी से होना

यदि किसी महिला की पहली डिलीवरी प्रीमैच्योर होती है तो इसके कारण महिला को दूसरी डिलीवरी भी प्रीमैच्योर होने का खतरा रहता है।

गर्भ में जुड़वां या उससे ज्यादा बच्चे होना

जिन महिलाओं के गर्भ में दो या दो से ज्यादा शिशु होते है उन महिलाओं को भी समय पूर्व डिलीवरी का खतरा अधिक होता है। साथ ही ऐसे केस में सिजेरियन डिलीवरी के चांस भी अधिक होते हैं।

शारीरिक बीमारिया

प्रेग्नेंट महिला को यदि शुगर, हाई ब्लड प्रैशर, थायरॉयड, या अन्य को भी शारीरिक बिमारी होती है तो इस कारण भी महिला के गर्भ पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। जिसके कारण समय से पहले शिशु का जन्म हो सकता है।

पोषक तत्वों की कमी

गर्भवती महिला के शरीर में पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों का न होना, खून की कमी होना, आदि भी बेबी के समय से पहले जन्म का कारण हो सकते हैं। साथ ही इससे बच्चे के विकास पर भी बहुत बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में समय पूर्व प्रसव से बचने के लिए और बच्चे के बेहतर विकास के लिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अपनी डाइट में भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए।

किसी प्रकार का संक्रमण होना

यूरिन इन्फेक्शन, प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन या अन्य किसी भी तरह के संक्रमण से यदि प्रेग्नेंट महिला ग्रसित होती है। तो इसके कारण भी महिला की समय से पहले डिलीवरी हो सकती है।

आनुवंशिक प्रभाव

प्रेग्नेंट महिला के परिवार में यदि किसी को पहले समय से पहले डिलीवरी हुई है तो उस कारण आपको भी ऐसा होने के चांस बढ़ सकते हैं। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि इस समस्या से बचे रहने में मदद मिल सके।

मोटापा

जरुरत से ज्यादा और कम वजन भी गर्भ पर बुरा असर डाल सकता है। और इस कारण बेबी डिलीवरी समय से पहले होने का खतरा बढ़ सकता है।

तनाव

प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली परेशानियां, शरीर में होने वाले बदलाव के कारण कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान तनाव ले लेती है। और गर्भवती महिला का बहुत अधिक स्ट्रेस लेना समय से पहले डिलीवरी का कारण हो सकता है।

शारीरिक श्रम अधिक करना

गर्भवती महिला यदि बहुत अधिक शारीरिक श्रम करती है जैसे की महिला बहुत अधिक व्यायाम करती है, बहुत ज्यादा खड़ी रहती है, पेट के बल बहुत ज्यादा काम करती है, शारीरिक श्रम से कम आहार का सेवन करती है, आदि। तो इस कारण भी गर्भ में बच्चा प्रभावित हो सकता है और बेबी डिलीवरी समय से पहले होने के चांस बढ़ जाते हैं।

समय से पहले बच्चे का जन्म होने के कारण होने वाली परेशानियां

  • सिजेरियन डिलीवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं।
  • शिशु को स्तनपान करवाने में समस्या होती है जिससे शिशु का विकास प्रभावित हो सकता है।
  • कमजोरी और थकान महिला को अधिक महसूस हो सकती है जिससे शिशु की केयर करने में महिला को दिक्कत हो सकती है जैसे की शिशु को उठाने में समस्या हो सकती है।
  • शुगर होने का खतरा होता है।
  • हैहय ब्लड प्रैशर जैसी समस्या महिला को हो सकती है।
  • तनाव व् अनिंद्रा जैसी परेशानियां महिला को अधिक हो सकती है।
  • महिला को ध्यान लगाने में कठिनाई हो सकती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से बच्चे का जन्म समय से पहले हो जाता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को प्रेगनेंसी के दौरान इन बातों का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि समय से पहले डिलीवरी होने से बचे रहने में मदद मिल सके। जिससे माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहें।

हेयर स्ट्रैट (बालों को सीधा) करने के घरेलू उपाय

सभी लोगो को सीधे, लम्बे और चमकदार बाल पसंद होते है। और आजकल स्ट्रैट लम्बे बाल ट्रेंड में भी है। स्ट्रैट बाल पाने के लिए लोग परमानेंट स्ट्रैटनिंग का ट्रीटमेंट भी लेते है। जिसे करवाने से एक साल तक तो बाल बहुत अच्छे दीखते है पर एक साल बाद बालों का पहले से भी बुरा हाल हो जाता है। बाल रूखे, बेजान होकर झड़ने भी लगते है। ऐसा इसीलिए भी होता है क्योंकि परमानेंट स्ट्रैटनिंग की प्रक्रिया में बहुत से केमिकल्स शामिल होते है जिनका असर एक साल बाद दीखता है। पर क्या आप जानते है के हम घर पर ही बैठे अपने बालों को स्ट्रैट बना सकते है वो भी बिना किसी केमिकल्स के प्रयोग के।

प्राकृतिक उपाय को अपनाने से बालों को कोई नुक्सान भी नहीं पहुँचता है। तो तैयार हो जाइये सीधे स्ट्रैट और स्मूथ बाल पाने के लिए बिना पैसो को खर्च किये। आइये जानते है के कौन से घरेलु उपाय अपनाने से आप सुन्दर, सॉफ्ट, चमकदार और स्ट्रैट बाल पा सकते है।

शहद और ओलिव आयल

सीधे और सुलझे हुए बाल पाने के लिए शहद और ओलिव आयल का प्रयोग सबसे बेहतरीन उपायों में से एक है, पर ध्यान रखिये के ओलिव आयल एक्स्ट्रा वर्जिन ही होना चाहिए क्योंकि एक्स्ट्रा वर्जिन ओलिव आयल में कोई भी अलग प्रदार्थ नहीं मिला होता है। इस आयल से बाल प्राकृतिक रूप से मुलायम बनेंगे और आसान से कंघी हो जाती है।

अपने बालों की लम्बाई के हिसाब से थोड़ा एक्स्ट्रा वर्जिन ओलिव आयल में उसकी आधी मात्रा जितना शहद मिलाये। अब दोनों चीजों का अच्छे से मिक्स कर मिश्रण बना लें। अब इस मिश्रण को अपने बालों में जड़ो से लम्बाई तक लगाए और अपने सर को प्लास्टिक शीट से कवर करें। एक घंटे तक का वेट करे और उसके बाद नार्मल प्रक्रिया से अपने बालों को धो लें। पहली वाश में ही आपको अपने बालों में फर्क दिखेगा, बाल पहले से सॉफ्ट मुलायम और सीधे हो जाएंगे।

दूध

यह उपाय अपनाने से पहले बालों को अच्छे से शैम्पू करे और फिर कंघी करे। अब हल्के गीले बालो में ही स्प्रे बॉटल की मदद से दूध डाले। दूध को जड़ो से लेकर बालों की पूरी लम्बाई तक अच्छे से स्प्रे करें। 30 मिनट तक बालों के सूखने का इंतज़ार करें और उसके बाद बालों को सादे पाने से धो लें। गीले बालो में ही फिर से कंघी करें। आप चाहें तो दूध की स्मेल को खत्म करने के लिए कंघी में गुलाबजल या फिर अपना कोई भी पसंदीदा परफ्यूम छिड़क सकते है। इस उपाय से आपके बाल प्राकृतिक रूप से बहुत सुन्दर, मुलायम और स्ट्रैट बनेंगे।

मुल्तानी मिटटी

हम सभी लोग मुल्तानी मिटटी के गुणों से हमारी त्वचा के होने वाले फायदों को बहुत अच्छे से जानते है। पर क्या आप यह जानते है के मुल्तानी मिटटी बालों को स्ट्रैट बनाने में बहुत मदद करती है। मुल्तानी मिटटी के पाउडर और पानी को अच्छे से मिक्स कर पेस्ट बनाये। अब इस पेस्ट को अपने बालो में लगाए, मुल्तानी मिटटी को हल्के हाथो से जड़ो और बालों की लम्बाई तक लगाए। इस मिक्सचर को अच्छे से लगाने के बाद बालों में कंघी करे और एक घंटे के लिए सूखने दे। अब पानी से बालो को अच्छे से धो लें, हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें। अब मुल्तानी मिटटी के परिणाम को देखे। आप चाहें तो इस उपाय को महीने में दो बार इस्तेमाल कर सकते है।

गेहूं, अलसी और मेथी

दो चम्मच गेहूं, एक चम्मच अलसी और पांच दाने मेथी के लेकर एक कटोरी में डाले। अब इन तीनो चीजों को रात भर के लिए पानी में भिगो कर रख दें। जब आप सुबह उठ कर देखेंगे तो कटोरी में वह मिश्रण एक जेल के रूप में मिलेगा। अब इस जेल को अच्छे से मिक्स करे। अपने हाथो से थोड़े थोड़े बालो को लेकर ऊपर से निचे की और यह जेल लगाए और आधे घंटे तक सूखने के लिए छोड़ दें। बालों के सूखने के बाद शैम्पू करें। इस उपाय से आपको एक ही बार में चौकाने वाला परिणाम मिलेगा।

केले का मास्क

यह मास्क प्रकृति के बहुत से गुणों से भरपूर है। 2 केले, 2 चम्मच शहद, 1 चम्मच ओलिव आयल और 4 चम्मच दही, इस सभी चीजों को अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस मास्क को अपने बालों में लगाए। आप चाहें तो बालों को शावर कैप से कवर कर लें और आधे घंटे के लिए छोड़ दें। अब हल्के माइल्ड शैम्पू से धो लें। इस मास्क आप हफ्ते में एक बार जरूर इस्तेमाल करें। इस मास्क से आपको बेहद ही खूबसूरत, मुलायम और सीधे बाल मिलेंगे।

दूध और अंडे का मास्क

एक अंडे को 2 कप दूध में अच्छे से फैंटे। इस मिक्सचर को फैंटने के लिए आप ब्लेंडर का इस्तेमाल कर सकते है। अब इस मिश्रण को अपने बालों पर लगाएं। अब एक घंटे के लिए बालो को सूखने दें, शावर कैप या प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल को कवर करने के लिए कर सकते है। एक घंटे बाद बालों को अच्छे से शैम्पू करें और गीले बालों के ही अच्छे से कंघी करें। इस मास्क को आप अपनी जरुरत के हिसाब से सप्ताह में एक बार इस्तेमाल कर सकते है।

कच्चा दूध और शहद

एक कप कच्चे दूध में दो चम्मच शहद मिलाये और थोड़ी पीसी हुई स्टॉबेर्री का पेस्ट भी लें। इस मिक्सचर को अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस पेस्ट को अपने बालों पर अच्छे से लगाए और दो घंटे के लिए बालों को आराम करने दें। दो घंटे बाद बालों को अच्छे से शैम्पू से धो लें। इस उपाय को सप्ताह में एक बार जरूर इस्तेमाल करें। दूध से मिलने वाला प्रोटीन आपके बालों को जड़ो से सीधा बनायेंगे और साथ ही शहद और स्टॉबेर्री बालों को प्राकृतिक रूप से सॉफ्ट और चमकदार बनाएंगे।

इन सभी घरेलु नुस्खों में से कोई भी नुस्खा आप अपनी सुविधा के अनुसार अपना सकती है। ध्यान रखिये बालो के रूखेपन के कारण ही वह घुंघराले हो जाते है तो उन्हें मॉइस्चराइज़ करने के लिए सप्ताह में दो बार किसी भी तेल से मालिश जरूर करें। तेल को हल्का सा गुनगुना जरूर करें इससे सर का ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होगा और बालो को बहुत फायदा मिलेगा।

पीरियड के ब्लड के रंग से जानें अपने स्वास्थ्य के बारे में

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पीरियड के ब्लड कलर से जानें अपने स्वास्थ्य के बारे में, महिलाएं अपनी लाइफ में बहुत सी शारीरिक परेशनियों का सामना करती हैं। जिनमे से एक पीरियड्स होती है, यह समस्या हर महिला को होती है। और हर महीने महिला इस परेशानी का सामना करती है। साथ ही पीरियड्स के दौरान महिला बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ेपन के साथ बॉडी में होने वाले दर्द का सामना भी कर सकती है। लेकिन अधिकतर महिलाएं पीरियड्स में ब्लड से जुडी कुछ बातें नहीं जानती है।

और केवल इतना ही जानती हैं की पीरियड्स के दौरान महिला के प्राइवेट पार्ट से गाढ़ा लाल खून निकलता है जिसमे कई बार खून के थक्के भी आ सकते हैं। लेकिन कई बार महिला को पीरियड्स के दौरान आने वाले ब्लड का रंग अलग हो सकता है। और इसी खून के रंग से महिला अपने स्वास्थ्य से जुडी जानकारी पता कर सकती है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको पीरियड्स के दौरान ब्लड का रंग आपको आपके स्वास्थ्य के बारे में क्या बताता हैं उससे जुडी बातें करने जा रहे हैं।

पीरियड के ब्लड कलर का लाल रंग

  • जब पीरियड्स के दौरान आने वाले खून का रंग लाल होता है।
  • तो इसमें घबराने की बात नहीं होती है इसका मतलब यह होता है की आप स्वस्थ हैं और आपके प्रजनन अंग अच्छे से काम कर रहे हैं।

गाढ़ा भूरा रंग

  • यदि पीरियड्स के समय आपको ब्लड का रंग गाढ़ा भूरा महसूस होता है।
  • तो यह इस बात की और संकेत करता है की यह खून गर्भाशय में पहले से ही जमा हुआ था।
  • इसमें घबराने की बात नहीं होती है और यह खून पीरियड्स के पहले दिन शुरुआत में आपको महसूस हो सकता है।
  • और ऐसा उन महिलाओं के साथ अधिक होता है जिन्हे हर महीने पीरियड्स देरी से आते हैं।

पीरियड के ब्लड कलर का काला रंग

  • पीरियड्स के समय यदि आपके ब्लड का रंग काला हो, ब्लड आने के साथ प्राइवेट पार्ट से बदबू महसूस हो तो इसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि इस रंग का ब्लड आना प्राइवेट पार्ट में, गर्भाशय में या किसी अन्य प्रजनन अंग में संक्रमण का कारण हो सकता है।
  • साथ ही यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपको काले रंग के खून के धब्बे महसूस होते हैं।
  • तो यह गर्भपात का संकेत हो सकते हैं।
  • ऐसे में जितना हो सके आपको इसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं करना चाहिए और जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए। ताकि आपको किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी न हो सके।

हल्का गुलाबी रंग

  • यदि पीरियड्स का रंग आपको हल्का गुलाबी महसूस होता है तो यह बॉडी में एस्ट्रोजन का उत्पादन कम होने के कारण हो सकता है।
  • ज्यादातर ऐसा उन महिलाओं या लड़कियों के साथ होता है जो खेल कूद करती हैं या बहुत ज्यादा शारीरिक श्रम करती है।
  • लेकिन इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए क्योंकि बॉडी में हार्मोनल अंसतुलन आपकी दिक्कतों को बढ़ा सकता है।
  • ऐसे में इसके लिए एक बार डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।

पीरियड के ब्लड कलर का रंग पानी की तरह होना

  • यदि किसी महिला को पीरियड्स के दौरान खून का रंग लाल आने की बजाय पतला, लाल के साथ सफ़ेद रंग का नज़र आये तो यह शरीर में खून की कमी की और संकेत करता है।
  • ऐसे में पीरियड्स के दौरान महिला को शारीरिक परेशानियां भी अधिक हो सकती है।
  • जिसे महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।
  • साथ ही अपने आहार में आयरन को भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए।

खून के थक्के

  • कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान खून के साथ खून के थक्के भी आते हैं।
  • छोटे छोटे खून के थक्कों का आना पीरियड्स में आम बात होती है।
  • लेकिन बड़े बड़े खून के थक्के निकलना और हर बार पीरियड्स में ऐसा होना परेशानी का कारण हो सकता है।
  • क्योंकि इसका कारण गर्भाशय में गाँठ, बॉडी में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन के स्तर में अंसतुलन हो सकता है।
  • जिसके कारण महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं पीरियड्स में आने वाले ब्लड के रंग से जुडी कुछ खास बातें जो आपको पीरियड्स के दौरान आपको ध्यान रखनी चाहिए। ताकि आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

10 जूस जो प्रेग्नेंट महिला को जरूर पीने चाहिए

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला को फिट रहने व् बच्चे के बेहतर विकास के लिए ठोस आहार खाने के साथ बॉडी में तरल पदार्थों की मात्रा को सही रखने की सलाह भी दी जाती है। और बॉडी में पानी की कमी को पूरा करने के लिए गर्भवती महिला को पानी पीने के साथ जूस आदि का सेवन करने की सलाह भी दी जाती है।

लेकिन इस बात का ध्यान रखें की जिस भी फल का आप जूस पीएं उसे घर में ताजा बनाकर पीएं न की बाहर से डिब्बाबंद जूस लाकर उसका सेवन करें। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे दस जूस के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन गर्भवती महिला को जरूर करना चाहिए क्योंकि यह सभी जूस माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

संतरे का जूस

संतरे के जूस में विटामिन सी, फाइबर, आयरन, फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला को फिट रखने के साथ गर्भ में बच्चे के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में भी मदद करते हैं।

निम्बू पानी

निम्बू पानी में विटामिन्स जैसे की विटामिन सी, एंटी ऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम, पोटैशियम आदि भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला की शारीरिक परेशानियां जैसे की सूजन, ऐंठन, मॉर्निंग सिकनेस जैसी परेशानियों से निजात दिलाते हैं। सतह ही बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

नारियल पानी

जूस के रूप में रोजाना सुबह या शाम के समय एक गिलास नारियल पानी का सेवन भी गर्भवती महिला व् बच्चे के लिए फायदेमंद होता है। क्योंकि नारियल पानी में फाइबर, कैलोरी, प्रोटीन, विटामिन सी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, एंटी ऑक्सीडेंट्स, भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जिससे प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी बढ़ने के साथ महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

अनार का जूस

फोलेट, विटामिन सी, विटामिन के, फाइबर, प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर अनार का जूस पीने से गर्भवती महिला की सेहत सम्बन्धी परेशानियां जैसे की कब्ज़, कमजोरी, थकान, खून की कमी, डीहाइड्रेशन को दूर जैसी परेशानियों को दूर करने के साथ बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद करता है।

गाजर का जूस

विटामिन ए, विटामिन सी, कैलोरी, फैट, आयरन, पोटैशियम, एंटी ऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व गाजर के जूस में भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। ऐसे में यदि गर्भवती महिला यदि गाजर का जूस पीती है तो गाजर का जूस पीने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है, थकावट दूर होती है, एनर्जी लेवल बढ़ता है साथ ही बच्चे के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

स्ट्रॉबेरी का जूस

स्ट्रॉबेरी का जूस गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे बेहतरीन जूस में से एक होने के साथ गर्भ में बच्चे के लिए भी फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें स्ट्रॉबेरी के जूस में फोलेट प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है। जो गर्भ में शिशु के शारीरिक विकास को बढ़ाने में मदद करने के साथ शिशु की इम्युनिटी भी बढ़ाता है जिससे गर्भ में शिशु को बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

सेब का जूस

प्रेग्नेंसी के दौरान जिन महिलाओं के शरीर में खून की कमी होती है। उन महिलाओं को शरीर में खून की कमी की समस्या को दूर करने के लिए सेब के जूस का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि सेब में आयरन होता है जो कि गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने, खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों को दूर करने, बच्चे के बेहतर विकास में मदद करता है। आयरन के अलावा सेब में मौजूद अन्य न्यूट्रिएंट्स भी प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे के लिए फायदेमंद होते हैं।

चुकंदर का जूस

चुकंदर जिसे की बीटरूट भी कहा जाता है उसके जूस का सेवन भी प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि चुकंदर का जूस पीने से गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने, शरीर में खून की कमी को पूरा करने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक विकास में मदद मिलती है। क्योंकि चुकंदर में आयरन, विटामिन सी, कैलोरी आदि का बेहतरीन स्त्रोत होता है।

कीवी का जूस

विटामिन, कैल्शियम, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट जैसे पोषक तत्वों की मात्रा कीवी में मौजूद होती है। और यह सभी पोषक गर्भावस्था के दौरान भरपूर फायदेमंद होते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला यदि चाहे तो कीवी के जूस का सेवन भी कर सकती है।

गन्ने का रस

गर्मियों के मौसम में गन्ने का जूस भी मिलता है और गर्भवती महिला की यदि गन्ने का जूस पीने की इच्छा हो गर्भवती महिला गन्ने के रस का सेवन भी कर सकती है। क्योंकि गन्ने के रस में मौजूद पोषक तत्व भी गर्भवती महिला व् बच्चे के लिए फायदेमंद होते है। लेकिन ध्यान रखें की गर्भवती महिला साफ़ सुथरी जगह से जाकर गन्ने के रस का सेवन करें।

तो यह हैं कुछ जूस जिनका सेवन गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान जरूर करना चाहिए। यदि गर्भवती महिला को इसमें से किसी भी तरह के जूस पीने से किसी तरह की परेशानी होती है तो उस जूस का सेवन न करें।