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छिपकली से छुटकारा पाने के उपाय

घर से छिपकली को कैसे भगाएं :- दुनिया में बहुत तरह के जीवे जंतु मौजूद है जिनमे से कुछ बहुत छोटे और कुछ बहुत बड़े है. बड़े जन्तुओ को तो आप केवल जंगलो में ही देख सकते है. लेकिन छोटे जंतु अक्सर आपके घर के आस-पास या घर में मौजूद रहते है. जैसे की कुत्ता, बिल्ली या खरगोश. लेकिन घर के आस-पास और घर में मौजूद सभी जंतु आपकी पसंद के नहीं होते जैसे की छिपकली.

घर में छिपकली होना एक चिंता का विषय है. क्योकि ये देखने में तो अजीब लगती ही है साथ-साथ कई बिमारियों की जड़ भी होती है. हालाँकि ये हमारे घर में मौजूद छोटे-मोटे किट पतंगों को समाप्त कर देती है लेकिन फिर भी इसका होना अच्छा नहीं है.

कुछ लोग तो छिपकली से इतना डरते है की यदि उसे देख ले तो बिस्तर से नीचे भी नहीं उतरते. जबकि कुछ इसे देखते है जोर-जोर से चीखने लगते है. ऐसे में घर में छिपकली का होना और भी चिंताजनक विषय बन जाता है. ऐसे तो बाज़ार में छिपकली भगाने की कई दवाइयां मिलती है लेकिन उनमे कुछ रासयनिक तत्वों का प्रयोग किया जाता है. और यदि ये दवाई घर में मौजूद पालतू जानवर या किसी बच्चे के सम्पर्क में आ जाये तो ये उसके लिए हानिकारक हो सकती है. इसीलिए इस तरह के घरो को इन दवाइयों का इस्तेमाल कदापि नहीं करना चाहिए.

अब आप सोच रहे होंगे की इनका इस्तेमाल न करे तो करें क्या? छिपकली की समस्या से छुटकारा कैसे पायें? परेशान होने की आवश्यकता नहीं है. क्योंकि आज हम आपको कुछ ऐसे सरल घरेलु उपाय बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप अपने घर से छिपकली को भगाने में सफल हो सकते है. और इसके लिए आपको बहुत अधिक पैसे खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं है क्योंकि ये सभी उपाय पूरी तरह घरेलु है जो आपकी किचन और घर में मौजूद उत्पादों से ही मिलकर बने है. तो आइए जानते है क्या है वे उपाय जिनकी मदद से छिपकली की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है.

प्रेगनेंसी में पेट के निचले हिस्से में दर्द होने का कारण व् उपाय

प्रेगनेंसी में पेट में दर्द

गर्भावस्था महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जहां बॉडी में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। और उन्ही में से एक है पेट में दर्द की समस्या, गर्भवती महिला को पेट में हल्का फुल्का पेट में दर्द होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। लेकिन यदि यह दर्द बढ़ने लगे तो इसे अनदेखा न करते हुए गर्भवती महिला को एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण मांसपेशियों में खिंचाव होने लगता है जिसके कारण महिला महिला को पेट में हल्का फुल्का दर्द रह सकता है। पेट के साथ कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान पेट के निचले हिस्से यानी की पेल्विक एरिया में दर्द की समस्या से भी परेशान हो सकती है।

प्रेगनेंसी में पेट के निचले हिस्से में दर्द होने के कारण

गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाएं पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या से परेशान रह सकती है। और इस दर्द के होने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि गर्भवती महिला को इस दर्द के होने के बहुत से कारण हो सकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द होने के कौन कौन से कारण हो सकते हैं।

वजन

गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन लगातार बढ़ता है जिसके कारण कारण पेट के निचले हिस्से में मांसपेशियों पर दबाव का अनुभव हो सकता है। और इसी दबाव के कारण गर्भवती महिला को पेट के निचले हिस्से में प्रेगनेंसी के दौरान दर्द का अनुभव हो सकता है।

यूरिन इन्फेक्शन

जिन गर्भवती महिलाओं को यूरिन में इन्फेक्शन हो जाता है, उन महिलाओं को भी पेट के निचले हिस्से में दर्द के साथ, यूरिन पास करने में परेशानी, दर्द, जलन आदि की समस्या भी हो सकती है।

कब्ज़

बहुत सी गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़ की समस्या से परेशान रह सकती है, क्योंकि बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव और बढ़ते वजन के कारण पाचन क्रिया धीमी पड़ सकती है। जिसके कारण कब्ज़ की समस्या हो सकती है। और जो महिलाएं इस समस्या से परेशान रहती है उन्हें कब्ज़ के कारण पेट के निचले हिस्से में दर्द का अहसास हो सकता है।

सम्बन्ध

जो गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान भी सम्बन्ध बनाती है तो सम्बन्ध बनाने के कारण भी गर्भवती महिलाओं को पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या के कारण परेशान होना पड़ सकता है।

ज्यादा देर तक खड़े रहना

यदि गर्भवती महिला बहुत देर तक एक ही जगह पर खड़ी रहती है तो ऐसा करने के कारण पेट के निचले हिस्से की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। जिसके कारण गर्भवती महिला को पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या हो सकती है।

शिशु

गर्भ में एक से ज्यादा शिशु के होने पर पेट के निचले हिस्से में अधिक दबाव महसूस हो सकता है जिसके कारण भी महिला को पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या हो सकती है।

ऐंठन

जिन गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान गर्भाशय में ऐंठन की समस्या रहती है उन गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या रह सकती है।

प्रेगनेंसी में पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या से राहत पाने के टिप्स

व्यायाम: पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या से राहत पाने के लिए गर्भवती महिला को हल्का फुल्का व्यायाम करते रहना चाहिए। क्योंकि इससे पेल्विक एरिया में ब्लड फ्लो अच्छे तरीके से होता है जिससे गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है, यदि व्यायाम नहीं तो थोड़ी बहुत सैर जरूर करनी चाहिए।

आराम करें: गर्भवती महिला को पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या होने पर काम करने से बचना चाहिए, ज्यादा देर एक जगह पर खड़े नहीं रहना चाहिए, जितना हो सके आराम करना चाहिए। ऐसा करने से भी महिला को इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

स्विमिंग: पेल्विक एरिया में दर्द की समस्या से राहत पाने के लिए स्विमिंग एक बेहतरीन उपाय होता है। यदि गर्भवती महिला को स्वीमिंग आती है तो स्विमिंग करके भी आसानी से गर्भवती महिला इस समस्या से राहत पा सकती है।

पानी: पानी का भरपूर सेवन करें, इससे बॉडी को हाइड्रेट रहने में मदद मिलती है, और बॉडी के हाइड्रेट रहने से बॉडी में होने वाले दर्द की परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

आहार: खान पान में भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों को शामिल करें, हरी सब्जियां, फल, दालें, नॉन वेज आदि का भरपूर सेवन करें। क्योंकि जितनी गर्भवती महिला की खुराक अच्छी होती है उतना ही गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

सम्बन्ध: यदि प्रेग्नेंट महिला को पेट में दर्द की समस्या रहती है तो महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से महिला की परेशानी बढ़ सकती है।

डॉक्टर से जांच: पेल्विक एरिया में यदि गर्भवती महिला को दर्द की परेशानी अधिक रहती है तो इसे गर्भवती महिला को अनदेखा नहीं करना चाहिए और जितना जल्दी हो सके एक बार डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को पेट के निचले हिस्से में दर्द क्यों होता है इसके कारण और इस समस्या से बचने के लिए कुछ आसान उपाय। यदि आप भी गर्भवती है और इस समस्या से परेशान है तो आपको इन टिप्स का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए, लेकिन उससे पहले इस दर्द के होने के सही कारण का पता करना चाहिए।

यह 10 फ़ूड जो आपको प्रेग्नेंट होने नहीं देंगे

गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने खान पान का खास ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि प्रेग्नेंट महिला के खान पान का सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। और कुछ आहार ऐसे होते हैं को महिला को गर्भवती नहीं रहने देते हैं यानी की उन फ़ूड को खाने से महिला का गर्भपात हो जाता है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे 10 फ़ूड बताने जा रहे हैं जो आपके गर्भ गिरने का कारण बनते हैं।

एलोवेरा: बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो कच्चे एलोवेरा या एलोवेरा जूस आदि का सेवन करते हैं। क्योंकि यह आपको सेहत सम्बन्धी परेशानियों से बचाने के साथ आपकी ख़ूबसूरती को बढ़ाने में भी मदद करता है। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको एलोवेरा का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि एलोवेरा का सेवन करने से गर्भपात हो जाता है।

तुलसी: तुलसी औषधीय गुणों से भरपूर होती है लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट है तो आपको तुलसी का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि तुलसी में मर्करी का लेवल अधिक होता है। जिसकी वजह से आपका गर्भ गिर सकता है।

चाइनीज फूड: चाइनीज़ फ़ूड में मोनो सोडियम गूलामेट होता है जो गर्भ में शिशु के विकास के लिए हानिकारक है। ऐसे में गर्भवती महिला यदि चाइनीज़ फ़ूड का सेवन करती है तो इससे गर्भपात के साथ बच्चे के बाद भी बच्चे में डिफेक्ट्स दिख सकते हैं। साथ ही चाइनीज़ फ़ूड में इस्तेमाल की जाने वाली सोया सॉस में नमक की भारी मात्रा होती है, जिससे गर्भवती महिला को हाई ब्लड प्रैशर होने का खतरा रहता है जो माँ व् बच्चे दोनों पर बुरा असर डालता है।

शराब: प्रेग्नेंट महिला को गलती से भी शराब या अन्य किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण गर्भ में शिशु पर बहुत बुरा असर पड़ता है जिससे महिला का मिसकैरिज होने के साथ जन्म के समय बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में कमी हो जाती है।

कैफीन: चाय कॉफ़ी का सेवन जरुरत से ज्यादा गर्भवती महिला को बिल्कुल नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें कैफीन की अधिक मात्रा मौजूद होती है। और कैफीन बच्चे के लिए बहुत नुकसानदायक होती है ऐसे में कैफीन का अधिक सेवन करने से महिला का गर्भपात भी हो जाता है।

सी फ़ूड: सी फ़ूड जैसे की मछली आदि का सेवन भी गर्भवती महिला को करने से बचना चाहिए। खासकर जिनमे मर्करी की मात्रा मौजूद होती है उनका सेवन तो गर्भवती महिला को बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि मर्करी गर्भ में शिशु के लिए बहुत नुकसानदायक होती है जिससे महिला का गर्भपात हो जाता है। इसके अलावा फ्रोजन सी फ़ूड का सेवन भी महिला को नहीं करना चाहिए।

ड्रमस्टिक: प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को ड्रमस्टिक का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि ड्रमस्टिक में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो गर्भ के लिए बहुत नुकसानदायक होते हैं जिससे महिला का गर्भपात हो जाता है।

कच्चा पपीता: कच्चे पपीते में लेटेक्स की मौजूद होता है जो गर्भ पर बहुत बुरा असर डालता है। जिसकी वजह से महिला का गर्भपात हो जाता है।

अनानास: अनानास का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने की मनाही होती है क्योंकि ऐसा माना जाता है की अनानास भी गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए बहुत नुकसानदायक होता है। जिससे महिला का गर्भपात हो जाता है।

नमक: यदि आप बहुत तेज नमक खाती हैं तो आपको प्रेगनेंसी के दौरान अपनी इस आदत को बदल लेना चाहिए। क्योंकि नमक का अधिक सेवन करने से ब्लड प्रैशर बढ़ जाता है। जिसका बुरा असर गर्भ में शिशु पर पड़ता है और महिला को मिसकैरिज का खतरा होता है।

तो यह हैं वो फ़ूड जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इन फ़ूड का सेवन करने से महिला का गर्भपात हो जाता है। ऐसे में यदि आप चाहती है की आपको प्रेगनेंसी में ऐसी कोई दिक्कत न हो तो इसके लिए किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन करने से पहले इस बात का पता करें की प्रेगनेंसी में वह फायदेमंद है या नुकसानदायक है।

आजकल सेब खाना क्यों फायदेमंद है प्रेगनेंसी में

प्रेगनेंसी में सेब खाना बहुत फायदेमंद होता है यह तो सभी कहते हैं लेकिन आज कल जब हर जगह वायरस से संक्रमित होने का खतरा बढ़ रहा है। तो ऐसे में गर्भवती महिला को सेब का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। अब आप सोच रहे होंगे की हम ऐसा क्यों कह रहे हैं तो आइये अब जानते हैं की आजकल प्रेगनेंसी में सेब खाना क्यों फायदेमंद है।

जरुरी पोषक तत्व से है भरपूर

आजकल हर एक चीज की मार्किट में कमी हो रही है लेकिन अगर आप मार्किट जायेंगे तो हो सकता है की कुछ फल आपको मिल भी जाएँ जैसे की आम, तरबूज आदि। आम व् तरबूज पोषक तत्वों से भरपूर तो होता है लेकिन सेब में इन फलों की अपेक्षा ज्यादा न्यूट्रिएंट्स मौजूद होते हैं। जिनकी प्रेग्नेंट महिला को जरुरत है, साथ ही यह फल बहुत अधिक मीठे होते हैं।

जिसके कारण इन फलों का ज्यादा सेवन महिला की परेशानी को बढ़ा सकता हैजैसे की गेस्टेशनल डाइबिटीज़, वजन बढ़ना, आदि। जबकि रोजाना एक सेब का सेवन प्रेग्नेंट महिला को सभी बिमारियों से बचाने में मदद करता है। साथ ही गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने में मदद करता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है

सेब में विटामिन सी व् अन्य एंटी ऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में मौजूद होते है जो महिला की इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है। जिससे महिला व् बच्चे दोनों को वायरस के खतरे से बचे रहने में मदद मिलती है साथ ही अन्य बिमारियों से सुरक्षित रहने में भी मदद मिलती है।

आयरन

प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी महिलाएं बॉडी में खून की कमी की समस्या से परेशान होती है जिसके कारण महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियां भी होती है। और महिला को बार बार डॉक्टर के पास जाना पड़ता है लेकिन आज कल हॉस्पिटल में जाना बिल्कुल भी सेफ नहीं है। ऐसे में सेब का सेवन महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद करता है। साथ ही खून की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से माँ व् बच्चे को स्वस्थ रहने में भी मदद करता है।

फोलेट

सेब में फोलेट भी प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जो की गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को बेहतर करने के साथ जन्म के समय शिशु को होने वाली बिमारियों से बचाने में मदद करता है। ऐसे में शिशु को गर्भ में व् जन्म के बाद फिट रखने के लिए महिला को सेब का सेवन जरूर करना चाहिए।

फाइबर

गर्भवती महिला को पाचन तंत्र से जुडी समस्या जैसे की भोजन को पचाने में परेशानी, कब्ज़ आदि होना आम बात होती है। ऐसे में महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी न हो, इसके लिए महिला को आजकल रोजाना सेब का सेवन जरूर करना चाहिए।

नींद आती है बेहतर

आज कल वायरस का खतरा इतना बढ़ गया है की इसके कारण हो सकता है की महिला बेहतर नींद भी न ले पा रही हो। ऐसे में सेब का सेवन महिला के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। क्योंकि सेब का सेवन करने से महिला को बेहतर नींद लेने में भी मदद मिलती है।

तो इन बेहतरीन फायदों के लिए आजकल के दिनों में सेब का सेवन करना चाहिए। ताकि घर में रहकर ही माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके और वायरस से भी बचाव हो सके।

इन आदतों से आपके और आपके गर्भ में पल रहे शिशु का रिश्ता होगा मजबूत

महिला को जब यह पता चलता है की वो माँ बनने वाली है और उसके गर्भ में एक नन्ही जान पल रही है। तभी से महिला अपने बच्चे से लगाव महसूस करने लगती है और महिला को मातृत्व का अहसास होने लगता है। इसीलिए पूरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला सबसे ज्यादा बच्चे के विकास को लेकर ही सोचती है और परेशान भी रहती है।

लेकिन सच तो यह हैं की यदि प्रेग्नेंट महिला परेशान रहती है तो बच्चा भी परेशान होता है और महिला जब खुश होती है तो बच्चा भी खुश होता है। क्योंकि बच्चा भी अपनी माँ के भाव को समझता है। ऐसे में माँ और गर्भ में पल रहे बच्चे के रिश्ते को मजबूत करने के लिए कुछ काम जरूर करने चाहिए। तो आइये जानते हैं की आपको क्या करना चाहिए।

शिशु से करें बातें

गर्भ में पल रहे बच्चे से रिश्ता मजबूत करने के लिए गर्भवती महिला को गर्भ में पल रहे बच्चे से बातें करनी चाहिए। उसे कहानियां सुनानी चाहिए, आप चाहे तो मधुर संगीत भी उसे सुना सकते हैं, किताबें पढ़कर उसे सुनाएँ, धार्मिक ग्रन्थ पढ़ें, आदि। गर्भ में शिशु की सुनने की क्षमता में वृद्धि होने के साथ बच्चा आपकी यह बातें सुन सकता है। और यदि प् रोजाना अपने बच्चे से बातें करती है तो इससे आपका और आपके बच्चे का रिश्ता मजबूत होता है।

पेट पर फेरे हाथ

जब भी माँ बच्चे को प्यार करना चाहती है तो वो उसे स्पर्श करती है और बच्चा भी माँ के अहसास को समझता है। वैसे ही गर्भ में शिशु को अपने स्पर्श का अहसास देने के लिए आपको धीरे धीरे अपने पेट पर हाथ फेरना चाहिए। जब आप पेट पर हाथ फेरती है तो गर्भ में शिशु आपके स्पर्श को महसूस करता है। और हो सकता है की कई बार वो आपके स्पर्श को महसूस करके अपनी हलचल को बढाकर उसपर प्रतिक्रिया भी दें। ऐसा करने से भी आपके और गर्भ में पल रहे बच्चे का रिश्ता मजबूत होता है।

पसंदीदा काम करें

गर्भ में शिशु से रिश्ता मजबूत करने के लिए महिला को हमेशा खुश रहना चाहिए। क्योंकि जितना आप खुश रहती है उतना ही आपका बच्चा भी खुश रहता है। और खुश रहने के लिए आप प्रेगनेंसी में वो काम करें जिनसे आपको ख़ुशी मिलती है। लेकिन ध्यान रखें उससे बच्चे को या आपकी सेहत को कोई नुकसान न हो।

तो यह हैं कुछ काम जो प्रेग्नेंट महिला यदि प्रेगनेंसी के दौरान करती है तो ऐसा करने से माँ और गर्भ में पल रहे बच्चे का रिश्ता मजबूत होता है। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी अपने बच्चे से रिश्ता मजबूत करने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा जरूर करना चाहिए।

गर्भवती महिलाओं को यह नहीं खाना चाहिए

गर्भवती महिलाएं यह नहीं खाती हैं, प्रेगनेंसी में रखें इन चीजों से परहेज, गर्भवती महिला को क्या नहीं खाना पीना चाहिए, प्रेग्नेंट महिला इन चीजों से रखे परहेज, प्रेग्नेंट महिला भूलकर भी न खाए यह आहार, Food not eaten during pregnancy

यह बात बिल्कुल सच है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने खान पान का खास ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि महिला का खान पान की शिशु के बेहतर विकास और प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रखने में मदद करता हैं। लेकिन इस बात का भी गर्भवती महिला को ध्यान देना चाहिए की क्या खाना प्रेगनेंसी के दौरान सेफ होता है और कौन सी चीजे महिला को नहीं खाना चाहिए। तो आइये आज हम कुछ ऐसी ही चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने आहार में शामिल नहीं करना चाहिए।

कच्चा पपीता

कच्चा पपीता प्रेगनेंसी के दौरान सेफ नहीं होता है क्योंकि इसमें लेटेक्स नामक एक पदार्थ होता है, और यदि आप इसका सेवन करते हैं तो इसके कारण गर्भाशय में संकुचन होने लगता है। जिसके कारण महिला को शुरूआती दिनों में गर्भपात तो आखिरी दिनों में समय से पहले प्रसन जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

मछली

प्रेगनेंसी के दौरान हफ्ते में एक बार मछली खाना सेफ होता है लेकिन आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप उस मछली का सेवन करें जिसमे मरकरी न हो। क्योंकि जिन मछलियों में मरकरी की मात्रा अधिक होती है और आप उनका सेवन करती है तो ऐसा करने से यह प्लेसेंटा यानी गर्भनाल के रास्ते शिशु के पास जाकर, उसके तंत्रिका तंत्र, किडनी व् मानसिक विकास में बाधा पैदा करती है। इसलिए आपको शार्क, ट्यूना, किंग मैकरेल आदि मछलियों का सेवन नहीं करना चाहिए।

अनानास

प्रेगनेंसी के दौरान अनानास खाना भी सेफ नहीं होता है क्योंकि इसमें मौजूद ब्रोमेलैन नामक पदार्थ भी शुरुआत में गर्भपात और प्रेगनेंसी के आखिरी महीनो में समय से पहले प्रसव का कारण बन सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान आपको अनानास के सेवन से बचना चाहिए।

ज्यादा मीठा

कई महिलाओं का प्रेगनेंसी के दौरान इमली, चॉकलेट, आइस क्रीम आदि खाने का बहुत मन करता है। लेकिन आप यदि गर्भावस्था में ज्यादा मीठे का सेवन करती हैं तो ऐसा करने से शुगर होने के खतरा ज्यादा होता है इसीलिए नियमित मात्रा में ही मीठे का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करना चाहिए।

मिट्टी

मिट्टी, कोयला, बत्ती, चॉक, आदि खाने का भी कुछ महिलाओं का मन करता है, और इसका कारण बॉडी में होने वाली पोषक तत्वों की कमी होती है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान महिला यदि इनका सेवन करती है तो शिशु और महिला दोनों पर ही इसका गलत असर पड़ता है।

मांस

प्रेगनेंसी के दौरान अधपका मांस खाना भी शिशु और महिला दोनों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके कारण महिला को टॉक्सोप्लाज़्मा संक्रमण हो सकता है जिसके कारण महिला को मानसिक बिमारी से परेशान होना पड़ सकता है साथ ही इसका असर महिला के कारण शिशु पर भी पड़ता है।

अंगूर

अंगूर का सेवन यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान अधिक करते हैं तो इसके कारण गर्भाशय में संकुचन हो सकता है, जिसके कारण असमय प्रसव या गर्भपात के चांस बढ़ जाते है। और यदि आपका अंगूर खाने का मन है तो आप कभी कभी दस बारह दाने खा सकते हैं इससे ज्यादा अंगूरों का सेवन नहीं करना चाहिए।

अधपके अंडे

अधपके या कच्चे अंडे का सेवन भी प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से इन्फेक्शन होने के साथ डायरिया व् उल्टी होने की परेशानी का सामना भी आपको अधिक करना पड़ सकता है।

चाय कॉफ़ी

चाय कॉफ़ी में भी कैफीन की मात्रा बहुत अधिक होती है जो की आपको प्रेगनेंसी में परेशान कर सकती है साथ ही इसका असर शिशु पर भी पड़ सकता है इसीलिए ज्यादा चाय कॉफ़ी के सेवन से भी प्रेगनेंसी के दौरान बचना चाहिए। साथ ही आपको कोल्ड ड्रिंक का सेवन भी अधिक नहीं करना चाहिए।

अल्कोहल का सेवन

शराब का सेवन भी गर्भावस्था के दौरान महिला को नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह आपके ब्लड में घुल जाती है और गर्भनाल के रास्ते शिशु तक पहुँच जाती है। जिसके कारण शिशु पर बुरा असर पड़ता है और उसकी मानसिक क्षमता कमजोर होती है।

कच्चा दूध

कच्चा दूध भी प्रेगनेंसी के दौरान आपको नहीं पीना चाहिए, हमेशा दूध को उबालकर ही उसका सेवन करना चाहिए। क्योंकि कच्चे दूध में टी बी, डायरिया आदि के कीटाणु हो सकते हैं जो महिला को परेशानी में डाल सकते है, साथ ही इससे शिशु पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।

धूम्रपान न करें

जो महिला प्रेगनेंसी के दौरान धूम्रपान करती है उसके कारण कार्बन मोनो ऑक्साइड, निकोटिन जैसे बुसरे रसायन बॉडी में पहुंचकर शिशु तक ऑक्सीजन पहुंचाने वाले मार्ग में बाधा डालते हैं। जिसके कारण शिशु का शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से विकास रुकने का खतरा हो जाता है और शिशु मानसिक व् शारीरिक रूप से विकलांग भी हो सकता है, ऐसे में प्रेगनेंसी में दौरान महिला को धूम्रपान नहीं करना चाहिए।

तो यह है कुछ चीजें जिनका सेवन महिला को प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह महिला के साथ शिशु के लिए भी बेहतर नहीं होता है। इसके अलावा आपको डिब्बाबंद जूस, कटी पड़ी सब्जियां व् फल, अधिक जंक फ़ूड, विटामिन सी की अधिकता वाले पदार्थ आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

डिलीवरी के बाद पेट बड़ा होने के कारण और उपाय

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिल बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करती है। और डिलीवरी के बाद महिला को अधिकतर सभी परेशानियों से निजात मिल जाता है। लेकिन बढ़ा हुआ पेट देखकर डिलीवरी के बाद अधिकतर महिलाएं परेशान रहती है और कुछ महिलाओं को तो ऐसा लगता है की अभी तक उनकी डिलीवरी हुई ही नहीं हैं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको डिलीवरी के बाद बड़े हुए पेट को कम करने के लिए महिला क्या कर सकती है और डिलीवरी के बाद ज्यादा पेट बढ़ने के क्या कारण होते हैं इस बारे में बताने जा रहें हैं।

प्रसव के बाद बड़े हुए पेट के कारण

  • गर्भाशय का आकार प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ जाता है और डिलीवरी के बाद गर्भाशय को वापिस अपनी पोजीशन में थोड़ा समय लग जाता है। जिसकी वजह से डिलीवरी के बाद महिला का पेट बढ़ा हुआ महसूस होता है।
  • जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान जरुरत से ज्यादा खाना खाती हैं उनका वजन प्रेगनेंसी के दौरान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है जिसके कारण डिलीवरी के बाद उनका पेट बाहर की तरफ आ जाता है।
  • थायरॉयड जैसी बिमारी से ग्रसित महिला भी डिलीवरी के बाद बढे हुए पेट की समस्या से परेशान हो सकती है।
  • प्रसव के बाद महिला का अधिक तनाव लेना भी महिला का वजन बढ़ने की समस्या का कारण होता है।

डिलीवरी के बाद बाहर निकले हुए पेट को अंदर करने के टिप्स

शिशु के जन्म के बाद यदि महिला का पेट बाहर की तरफ निकला हुआ होता है तो ऐसे में महिला को इसे लेकर परेशान होने की जरुरत नहीं होती है। क्योंकि डिलीवरी होने के तुरंत बाद तो आप कुछ नहीं कर सकती है। ऐसे में थोड़ा धैर्य रखें, और उसके बाद कुछ ट्राई करें। तो आइये अब जानते हैं की डिलीवरी के बाद बाहर निकले हुए पेट को कम करने के लिए प्रेग्नेंट महिला क्या- क्या कर सकती है।

बेल्ट का इस्तेमाल करें

डिलीवरी के बाद बड़े हुए पेट को कम करने के लिए महिला को पेट के लिए बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए। इस बेल्ट को पहनने से न केवल डिलीवरी के बड़ा महिला को उठने, बैठने, स्तनपान करवाने में आसानी होती है। बल्कि इस बेल्ट का इस्तेमाल करने से डिलीवरी के बाद महिला के पेट की मांसपेशियों में आए ढीलेपन को दूर करने, गर्भाशय को वापिस शेप में लाने में मदद मिलती है। जिससे महिला का बढ़ा हुआ पेट कम होता है।

स्तनपान

डिलीवरी के बाद बढे हुए पेट को कम करने के साथ पूरी बॉडी के वजन को सही करने के लिए महिला शिशु को स्तनपान जरूर करवाए। क्योंकि बच्चे के दूध को बनाने के लिए बॉडी में मौजूद फैट सेल्स और कैलोरीस दोनों का इस्तेमाल होता है। जिससे डिलीवरी के बाद महिला के वजन को सही रखने में मदद मिलती है।

गुनगुना पानी

प्रसव के बाद बड़े हुए पेट को कम करने के लिए महिला को जितना हो सके गुनगुने पानी का ही सेवन करना चाहिए। क्योंकि गुनगुना पानी बॉडी में जमे फैट को खत्म करने में मदद करता है साथ ही डिलीवरी के बाद गुनगुना पानी पाने से महिला को बॉडी पेन से आराम मिलता है और महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

ग्रीन टी

शिशु के जन्म के बाद महिला चाय की जगह दिन में एक बार ग्रीन टी का सेवन जरूर करे, क्योंकि ग्रीन टी एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है। जो डिलीवरी के बाद महिला का वजन तेजी से कम करने में मदद करती है।

फाइबर युक्त आहार

प्रसव के बाद महिला को उन खाद्य पदार्थों का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए जिनमे फाइबर प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है। ऐसा करने से डिलीवरी के बाद महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियों से बचे रहने और बढे हुए पेट को कम करने में मदद मिलती है।

मेथी के बीज

एक चम्मच मेथी के बीज को रातभर के लिए पानी में भिगो दें, और सुबह उठकर उस पानी को छानकर उसका सेवन करें। ऐसा नियमित करने से भी डिलीवरी के बाद महिला के बढे हुए पेट को कम करने में मदद मिलती है साथ मेथी के बीज शिशु के लिए दूध की मात्रा बढ़ाने में भी मदद करते हैं।

हल्का व्यायाम

डिलीवरी के एक महीने बाद से महिला थोड़ा थोड़ा व्यायाम करना भी शुरू कर सकती है। और उसके बाद महिला रोजाना उन एक्सरसाइज को करे जिनसे तेजी से पेट कम होता है और महिला को कोई दिक्कत भी नहीं होती है। तो ऐसा करने से भी डिलीवरी के बाद महिला के बढे हुए पेट को कम करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से डिलीवरी के बाद बहार निकले हुए पेट को कम करने में मदद मिलती है। लेकिन डिलीवरी के बाद कुछ भी करने से पहले आपको इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए की आप जो भी करें उससे बच्चे के विकास में किसी तरह की समस्या नहीं आनी चाहिए।

नारियल तेल और कपूर मिलाकर लगाने के फायदे

कपूर और नारियल तेल दो ऐसी वस्तुएं है जिनका इस्तेमाल लगभग हर में समान रूप से किया जाता है। कपूर का इस्तेमाल सभी अपने घर में पूजा आदि के कार्यों के लिए करते है जबकि नारियल तेल बालों में लगाने के लिए मशहूर है। इसके अलावा कपूर का इस्तेमाल घर की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने के लिए भी किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते है की यदि इन दोनों वस्तुएं को एकसाथ मिलाकर सामान रूप से इस्तेमाल किया जाए तो क्या कहने?

आज के समय में हर कोई तरह तरह की त्वचा संबंधी परेशानियों से पीड़ित रहता है। यूँ तो बाजार में इन प्रॉब्लम्स के लिए बहुत सी दवाएं आदि मौजूद है लेकिन हर समस्या के लिए दवा का प्रयोग उचित नहीं। शायद आप नहीं जानते लेकिन नारियल तेल के अलावा कपूर भी हमारी त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होता है। इसकी मदद से त्वचा संबंधी कई परेशानियों को आसनी से दूर किया जा सकता है।

इसीलिए आज हम आपको नारियल तेल और कपूर को एक साथ मिलाकर प्रयोग करने के फायदे बताने जा रहे है।

नारियल तेल और कपूर मिलाकर लगाने के फायदे :- 

1. त्वचा के दाग :

इसे पढ़े : दाग़-धब्बे हटाने के घरेलू तरीके

इस बदलते पर्यावरण के कारण हमारी त्वचा को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। और त्वचा के दाग उन्ही परेशानियों में से एक है। जो किसी चोट लगने या त्वचा पर पिम्पले हो जाने के कारण पड़ जाते है। इस तरह के दागो को दूर करने के लिए नारियल के तेल में थोड़ा सा कपूर मिलाकर त्वचा पर लगाएं। यह दाग को हल्का करके उसे समाप्त करने में मदद करेगा।

2. स्किन डिजीज यानि त्वचा के रोग :कपूर और नारियल तेल

बरसात और गर्मियों के दिनों में हमारी त्वचा को बहुत सी प्रॉब्लम्स का सामना करना पड़ता है और इन्ही कुछ प्रॉब्लम्स में से एक है स्किन डिजीज। इसके लिए 100 ग्राम नारियल तेल में कपूर की एक टिक्की मिलाकर एक मिश्रण बना लें। और इसे नहाने के बाद त्वचा पर लगाएं। इसकी मदद से आप त्वचा में होने वाले रोगों से बचे रहेंगे।

3. संक्रमण :

अधिक समय तक पानी में रहने से पैरों में सफ़ेद फफूंद लग जाती है। जिसके कारण पैरों में संक्रमण की संभावना भी बढ़ जाती है। जिसके कारण कई बहार तेज़ खुजली भी होती है। इस स्थिति से निजात पाने के लिए कपूर सबसे उत्तम उपाय है।इसके अतिरिक्त त्वचा के किसी भी संक्रमण में आप इसका प्रयोग कर सकते है।

4. जले और कटे के निशान :

अक्सर हमारी त्वचा कट या जल जाती है। हां, समय के साथ चोट तो ठीक हो जाती है लेकिन उसके बाद रह जाने वाले दाग काफी भद्दे और अजीब दिखते है। इस समस्या के लिए कपूर के टुकड़े को थोड़े से पानी में घोलकर प्रभवित हिस्से पर लगाना चाहिए। कुछ ही दिनों के प्रयोग से आपका निशान पूरी तरह गायब हो जाएगा। और अगर त्वचा पर किसी प्रकार की सूजन है तो वो भी ठीक हो जाएगी।

5. पिंपल के लिए :pimple

किशोरावस्था में मुँहासे होना बहुत ही आम बात है लेकिन उनके ठीक हो जाने के बाद रह जाने वाले निशान हमारी खूबसूरती पर हमेशा के लिए धब्बा छोड़ जाते है। ऐसे में कपूर का प्रयोग बहुत ही लाभकारी होगा। इससे त्वचा पर पड़े दाग पूरी तरह साफ़ हो जाएंगे और स्किन भी चमक उठेगी।

6. फटी एड़िया :

एड़ियों में पड़ी दरारे न केवल हमारी सुंदरता को खराब करती है बल्कि काफी भद्दी भी लगती है। इसके अलावा इनमे होने वाले दर्द को तो सभी जानते है। इस स्थिति में कपूर और गर्म पानी काफी लाभ देता है। इसके लिए गर्म पानी में कपूर डालकर अपने पैर अच्छे से धोएं। इससे एड़ियां तो साफ़ होंगी ही साथ-साथ उनमे होने वाले दर्द में भी आराम मिलेगा।

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7. बालों के लिए :

कपूर तेल बालों के लिए काफी लाभदायक होता है। इससे बालो में मजबूती आती है और वे लम्बे भी होते है। इसके अलावा स्कैल्प में होने वाली समस्यायों से भी निजात मिलती है। इसके लिए दही और अंडे में थोड़ा सा कपूर का तेल डालें और उसे अपने बालों की जड़ों में अच्छे से लगाएं। इससे आपके बाल तो अच्छे होंगे ही साथ-साथ आपका तनाव भी दूर होगा।

माहवारी (Period) से पहले गर्भवती (Pregnancy) होने या गर्भधारण करने के 10 लक्षण

पीरियड्स के मिस हो जाने के बाद ज्यादातर महिलाएं चेक करती है की कहीं वो गर्भवती तो नहीं हैं। लेकिन क्या आप जानते है की आपके पीरियड्स आने से पहले ही यदि आप गर्भवती होने वाली हैं तो आपका शरीर इसके संकेत देने लगता है। क्योंकि जब एग फर्टीलाइज होकर महिला के यूटेरस में जाता है तब महिला प्रेग्नेंट होती है। और यह तो आपके पीरियड्स आने से पहले भी हो सकता है। इसीलिए यदि आप गर्भवती होती हैं, तो पीरियड्स से पहले ही आपकी बॉडी इसके संकेत देने लग जाती है।

अब आप ये सोच रहें होंगे की ऐसे कौन से संकेत हो साकेत है जो आपको पीरियड्स के आने से पहले ही बता दे की आप गर्भवती हैं या नहीं। तो आपको इस बारे में सोच कर परेशान होने की बिलकुल भी जरुरत नहीं है आइये आज हम आपको बताते हैं की आप किस तरह के संकेतो को देखकर पता कर सकती है की आप प्रेग्नेंट है या नहीं। लेकिन यदि आपको हमेशा ही ऐसा लगे की पीरियड्स से पहले आपको परेशानी होती है तो आप डॉक्टर से चेक भी करवा सकती है।

माहवारी से पहले गर्भवती होने या गर्भधारण करने के 10 लक्षण:-

ब्रैस्ट में बदलाव:-

यदि आपको पीरियड्स से पहले अपने ब्रैस्ट में दर्द, भारीपन, या सूजन महसूस होने लगती है। तो यह पीरियड्स से पहले कई बार आपकी प्रेगनेंसी की और इशारा करता है।

थकान महसूस होना:-

शरीर में हार्मोनल बदलाव होने के कारण आपको थकान का अनुभव हो सकता है। क्योंकि यदि आप प्रेग्नेंट होने वाली होती है तो बॉडी में प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन का स्त्राव अधिक होता है जिसके कारण आप बहुत जल्दी थकने लगते हैं, या नींद का अनुभव भी होता है।

जी मचलाने लगता है:-

vomiting

ऐसा जरुरी नहीं है की हर महिला के साथ ऐसा हो, क्योंकि कई बार महिलाओ को उलटी आदि की परेशानी नहीं होती है। लेकिन कई महिलाएं ऐसी भी होती है जिन्हे पूरे नौ महीने तक उलटी होती है। ऐसे में यदि आपको उलटी आदि आती है तो यह भी प्रेग्नेंट होने का ही एक संकेत होता है।

पेट फूलने लगता है:-

पेट फूलने का मुख्य कारण कब्ज़ या गैस होना होता है। लेकिन यदि ऐसा न हो और फिर भी आपको पीरियड्स से पहले ऐसा लगे, तो यह भी आपके पीरियड्स से पहले ही प्रेग्नेंट होने के संकेत देता है।

बार बार बाथरूम में यदि जाना पड़े:-

बार बार यदि आपको बाथरूम में जाना पड़ता है, और रात को भी यदि ऐसी परेशानी अधिक होती है, और कोई शारीरिक परेशानी भी नहीं है। तो यह भी आपके प्रेग्नेंट होने की तरफ इशारा करता है। लेकिन यदि यह परेशानी अधिक हो तो आप चाहे तो एक बार डॉक्टर को भी दिखा सकते है।

खाने से एलर्जी होना:-

ज्यादातर महिलाओ को यह परेशानी होती है, यदि आपका खाना खाने का मन नहीं हो रहा है या फिर खाने की गंध से एलर्जी हो रही है तो भी यह आपकी प्रेगनेंसी के लक्षण हो सकते हैं, और यह परेशानी प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में ज्यादातर देखने को मिलती है।

मूड स्विंग्स होना:-

शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण आपके मूड में परिवर्तन आना बहुत ही आम बात होती है लेकिन यदि अचाबनक से आपके साथ ऐसा होने लगा है और खासकर आपके पीरियड्स के आने से पहले तो इसका मतलब यह हो सकता है की शायद आपको भी माँ बनने की ख़ुशी मिलने वाली है, और ऐसा होने पर अचानक ही आपको गुस्सा, चिड़चिड़ापन या कभी हंसने का मन करने लगता है।

चक्कर आना या सर दर्द रहना:-

प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में ब्लड प्रैशर कई बार कम होने लगता है जिसके कारण सर में दर्द रहना या चक्कर आना बहुत ही आम बात होता है। लेकिन ऐसा नहीं है यह समस्या आपको पूरी प्रेगनेंसी में रहती है धीरे धीरे यह ठीक होने लगती है। और यह लक्षण भी पीरियड से पहले गर्भवती होने का संकेत देती है।

शरीर का तापमान बढ़ना:-

वैसे हमारे शरीर का तापमान बिलकुल सही रहता है लेकिन कई बार पीरियड्स के समय शरीर का तापमान बढ़ जाता है जिसमे किसी तरह की परेशानी वाली कोई बात नहीं होती है। लेकिन यदि आपको यह समस्या पीरियड्स से पहले होती है तो इसका मतलब यह हो सकता है की शायद आप प्रेग्नेंट हैं।

स्पॉटिंग होना:-

वैसे तो आपका पीरियड्स अपने समय से दो चार दिन कई बार ऊपर नीचे हो सकता है, लेकिन यदि आप आपको अपने पीरियड से आठ या दस दिन पहले हलकी फुल्की स्पॉटिंग दिखाई दे, तो इसका मतलब यह हो सकता है की आप प्रेग्नेंट है और इस स्पॉटिंग को इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग कहा जाता है। लेकिन यदि ऐसा कुछ नहीं होता है तो आपको समय से पहले भी कई बार मासिक धर्म जैसी ब्लीडिंग भी हो जाती है।

तो ये हैं कुछ लक्षण जो आपको पीरियड्स से पहले ही इस बात का संकेत देते हैं की आप प्रेग्नेंट है या नहीं। और आप यदि ऐसा कुछ अनुभव नहीं करती है या थोड़ा बहुत बदलाव आता है तो वो आपके पीरियड्स के मिस होने के बाद पता चल जाता है की आप प्रेग्नेंट है या नहीं। तो यदि आपको भी पीरियड्स से पहले ऊपर दिए गए लक्षण अपने शरीर में दिखाई दें तो हो सकता है की आप प्रेग्नेंट हैं।

पीरियड्स में पेट दर्द, ये उपाय करें मासिक धर्म में पेट दर्द दूर होगा!

Stomach Pain During Periods : पीरियड्स हर महिला के साथ होने वाली आम समस्या है जिससे चाहकर भी कोई दूर नहीं भाग सकता। परंतु इस समय होने वाला पेट दर्द वाकई किसी के लिए भी असहनीय होता है। कहने को तो पीरियड्स महीने में केवल एक बार ही आते है लेकिन इस दौरान होने वाला पेट दर्द बहुत परेशानी देता है। सामान्यतौर पर यह चक्र हर 28 दिन के बाद आता है लेकिन बहुत सी महिलाओं में यह 20 या 25 दिन बाद ही आ जाता है। ऐसे में पेट दर्द सामान्य दिनों से अधिक होता है।

सही समय पर यानी 28 दिन के गैप पर आने वाले मासिक धर्म को सही माना जाता है। डॉक्टर भी आपके प्रजनन तंत्र का स्वास्थ्य आपके मासिक धर्म से ही पहचानते है। इसके अलावा पीरियड्स में कमर के निचले हिस्से में भी दर्द होता है। जिसके कारण बहुत परेशानी होती है। अगर आपका दर्द भी सीमा से अधिक होता है और उससे छुटकारा पाने के लिए आप दवाओं का सेवन करती है तो एक बार उनकी जगह इन घरेलू उपायों का इस्तेमाल करके देखिये। यह उपाय पूरी तरह घरेलू और नेचुरल है जिनका स्वास्थ्य या किसी भी तंत्र पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं होता। यहाँ हम आपको उन्ही कुछ घरेलू उपायों के बारे में बता रहे है। तो आइये जानते है उनके बारे में – Remedies For Stomach Pain in Periods

पेट दर्द होने का कारण :periods

बहुत ही कम महिलाएं इसके बारे में जानती है लेकिन यह जानना जरुरी है की आखिर पीरियड्स के दौरान पेट दर्द होता क्यों है?

  • पीरियड्स के दौरान शरीर के गर्भाशय से खून का स्त्राव होता है। जिसमे कमजोर अंडाणु रक्त के रूप में शरीर से बाहर की ओर निकलने लगते है। और इसी कारण पेट दर्द होने लगता है।
  • कई बाद पीरियड्स रेगुलर नहीं होने की वजह से भी पेट दर्द होने लगता है।
  • पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग होने पर भी पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है।

पीरियड्स में पेट दर्द होने के उपाय :-

वैसे तो इसके लिए कोई निश्चित उपाय नहीं है। परंतु कुछ घरेलू उपाय है जिनकी मदद से पेट दर्द को दूर किया जा सकता है।

1. पोषक तत्वों की पूर्ति :

पीरियड्स के दौरान शरीर से रक्त का स्त्राव होता है जिसमे शरीर के जरुरी विटामिन्स और आयरन की खपत अधिक होती है। ऐसे में यदि इस कमी को समय पूरा न किया जाए तो अगले महीने के पीरियड्स में दर्द होने की सम्भावना बनी रहती है। इसलिए पीरियड्स के दौरान खानपान पर विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। इसके लिए दूध, दही, फलों का जूस और हरी सब्जियों का सेवन करना लाभकारी रहेगा।

2. पेट के निचले हिस्से की मालिश :

पीरियड्स के दौरान पेट के निचले हिस्से पर सूजन आ जाती है। और कई बार इसकी वजह से भी पेट दर्द होने लगता है। ऐसे में मालिश करके इस सूजन को दूर किया जा सकता है। इसके लिए हलके हाथों से पेट के निचले हिस्से में मालिश करें। मसाज के लिए आप जैतून या नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकते है। लेकिन ध्यान रहे मालिश से पूर्व तेल को हल्का गर्म कर लें। आराम जल्द मिल जाएगा।

3. पेट की सिकाई :sikai

इस दौरान पेट की सिकाई बहुत लाभकारी होती है। इससे पेट का दर्द भी दूर हो जाता है और एंठन भी खत्म होती है। इसके लिए पीठ के बल लेट जाएं फिर गर्म तौलिया या गर्म पानी की बोतल लें। अब उससे अपने पेट के निचले हिसे पर सिकाई करें। ऐसा करने से थोड़ी बहुत गंदगी जो रह जाती है वो भी साफ़ हो जाएगी और दर्द में भी आराम मिलेगा। यह आपके लिए एक बेहतर दर्द निवारक के रूप में कार्य करेगा।

4. लिक्विड का सेवन करना भी है जरूरी :

इस दौरान शरीर की पानी की मात्रा ठीक उसी तरह कम होती है जिस तरह दस्त में कम होती है इसलिए इस दौरान लिक्विड का नियमित रूप से सेवन करते रहना चाहिए। विशेषकर पानी, लेकिन पानी ठंडा नहीं होना चाहिए इससे दर्द और बढ़ जाएगा। इसकी जगह गुनगुना पानी लें। इसके अतिरिक्त ग्रीन टी और अदरक-तुलसी वाली चाय का सेवन करने से भी पेट दर्द में आराम मिलता है। एक बात और, इस दौरान ठंडी चीजें खाना-पीना अवॉयड करना चाहिए।

5. आयुर्वेदिक उपचार :

अगर आप चाहे तो आयुर्वेदिक उपचार की मदद से भी पेट दर्द को दूर कर सकती है। इसके लिए एक चम्मच शहद, एक चम्मच हल्दी और दो चम्मच जीरा एक ग्लास पानी में डालकर उबाल लें। गाढ़ा होने तक पकाएं और उसके बाद छाने बिना कप में डालकर पी जाएं। दिन में 2 बार इस उपाय का इस्तेमाल करने से दर्द ठीक हो जाएगा।

इसके अलावा पीरियड्स में साफ़ सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इस समय शरीर काफी सेंसिटिव होता है ऐसे में इंफेक्शन होने का ख़तरा ज्यादा होता है। इसलिए अपनी साफ़ सफाई का ध्यान रखें। और हर पांच से छः घंटे में पेड बदलते रहें।