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विटामिन सी के क्या फायदे होते है?

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हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत से पौष्टिक तत्व और एसिड आदि की आवश्यकता होती है। जिनमे से यदि एक भी थोड़ा कम या ज्यादा हो जाए तो समस्या पुरे शरीर को उठानी पड़ती है। लेकिन अधिकतर मामलों में इनकी कमी ही पाई जाती है। जैसे की खून में ग्लूकोस की कमी, बच्चों में विटामिन डी की कमी और न जाने क्या क्या? परन्तु इनके अलावा भी एक तत्व है जिसकी आवश्यकता हमारे शरीर को बहुत अधिक होती है और वो है विटामिन सी।

विटामिन की को एस्कॉर्बिक एसिड के नाम से भी जाना जाता है। यह हमारे शरीर की कार्यप्रणाली को ठीक ढंग चलाने के लिए प्रयोग होने वाले महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में से एक है। यह हमारे शरीर के लिए हर तरह से लाभकारी होता है। त्वचा संबंधी समस्याएं हो या स्वास्थ्य संबंधी सभी में यह काफी महत्वपूर्ण योगदान निभाता है।

त्वचा की अशुद्धियाँ निकालने से लेकर शरीर में विटामिन इ की सप्लाई को पुनर्जीवित करने तक सभी में योगदान देता है। विटामिन सी एक तरह के एंटी एलर्जिक और एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। संतरा, आलू, टमाटर आदि विटामिन सी के अच्छे स्तोत्र है। खट्टे फलों में भी विटामिन सी की अच्छी मात्रा पाई जाती है।

लेकिन फिर भी बहुत से लोग इस तत्व के बारे में पूर्णतः नहीं जानते। इसीलिए आज हम आपको विटामिन सी के फायदे और उसके कार्यों के बारे में बताएंगे।

विटामिन सी के स्त्रोत्र :-

खट्टे रसीले फल जैसे आंवला, नारंगी, नींबू, संतरा, बेर, बिल्व, कटहल, शलगम, पुदीना, अंगूर, टमाटर, आदि एवं अमरूद, सेब, केला,मूली के पत्ते, मुनक्का, दूध, चुकंदर, चौलाई, बंदगोभी, हरा धनिया, और पालक विटामिन सी के अच्छे स्तोत्र है। इसके अतिरिक्त बहुत सी डालें भी विटामिन सी का इस्तेमाल कर सकते है।

विटामिन सी के फायदे :

निम्नलिखित कारणों की वजह से विटामिन सी हमारे शरीर के लिए जरुरी है और फायदेमंद भी –

1. फ्री रेडिकल्स :

विटामिन सी में एंटी ऑक्सीडेंट्स की अच्छी मात्रा पाई जाती है जो शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करती है। फ्री रेडिकल्स के करण त्वचा में झुर्रियां पड़ने लगती है और स्किन उम्र से पहले ही डैमेज होने लगती है। इसलिए जरुरी है की आप अपने खाने में विटामिन सी की भरपूर मात्रा का सेवन करें। कोशिश करें विटामिन सी युक्त फलों का ही सेवन करें।

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2. कैंसर :

विटामिन सी किसी भी तरह के कैंसर को पनपने से रोकता है। यह शरीर में एंटीबायोटिक की तरह काम करता है जिससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

3. सर्दी :

कई लोगों का मानना है की सर्दी जुखाम में विटामिन सी का सेवन करने से सर्दी और बढ़ती है जबकि ऐसा बिलकुल नहीं है। रिसर्च में पाया गया है की सामने सर्दी और जुखाम में विटामिन सी का सेवन करना बहुत लाभकारी होता है।

4. हड्डियां :

विटामिन सी शरीर के भीतर नयी कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। जिन लोगों के अंदर विटमिनम सी की कमी होती है उनकी हड्डियां कमजोर होती है जिसके कारण त्वचा काफी लूज़ हो जाती है।

5. दांतों के लिए :

शरीर में विटामिन सी की कमी हो जाने पर मसूड़े से खूब बहने लगता है, दांतों में दर्द होता है, दाढ़ और मसूड़े ढीले हो जाते है। कई बार निकल भी जाते है। इसलिए अपने खाने में विटामिन सी जरूर सम्मलित करें।

6. हाई बीपी :

जिन व्यक्तियों को उक्तरक्तचाप की परेशानी है वे आपने आहार में रोजाना विटामिन सी का सेवन करना चाहिए। यह मांसपेशियों और नसों को फैला कर हाइपरटेंशन की समस्या से छुटकारा दिलाने में मदद करती है।

7. बीमारियां :

विटामिन की की कमी के कारण शरीर में बहुत सी बीमारियां जैसे मोतियाबिंद, चर्म रोग, गर्भपात, रक्ताल्पता, भूख न लगना इत्यादि हो सकती हैं। और विटामिन सी इन सभी समस्याओं को दूर करने की क्षमता रखता है। साथ ही श्वास संबंधी और पाचन संबंधी बिमारियों में भी आराम दिलाता है।

8. सेराटोनिन :

विटामिन सी मस्तिष्क में एक विशेष रसायन सेराटोनिन को बनाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बता दें, ये रसायन हमारी नींद के लिए बेहद जरुरी है। विटामिन सी कोलेस्टेरोल को नियंत्रित करने में भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

9. आँखों के रोग :health benefits of vitamin c

विटामिन की आँखों के रोग “ग्लूकोमा” से आँखों की रक्षा करने में मदद करता है। इसीलिए सही संतुलित और उचित मात्रा में विटामिन सी का सेवन करना चाहिए।

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10. विटामिन सी :

आमतौर पर विटामिन सी के अच्छे स्रोत आलू, टमाटर, संतरा हैं। इनके अलावा लाल मिर्च, अनानास, स्ट्रापबेरी, सेब, खट्टे रसीले फल, कच्चे फलों और सब्जियों में भी विटामिन सी पाया जाता है। आंवला, नारंगी, नींबू, अंगूर, अमरूद, केला, बेर, कटहल, शलगम, पुदीना, मूली के पत्ते, मुनक्का, दूध, चुकंदर, चौलाई, बंदगोभी, हरा धनिया, और पालक इत्यादि भी विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं।

ध्यान रखने योग्य बात : विटामिन सी युक्त पदार्थों को गैस या ओवन में पकाने या उबालने और अधिक समय तक स्टोर करके रखने से उनकी पौष्टिकता कम हो जाती है। तो अगर आप विटामिन सी का पूरा फायदा उठाना चाहते है तो कच्चे फल और सब्जिया ही चुने।

 

10 फ़ूड जो बेबी के दिमाग को तेज करने में मदद करते हैं

हर गर्भवती महिला चाहती है की उसका होने वाले शिशु शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के साथ दिमागी रूप से भी तेज हो, बुद्धिमान हो। ऐसे में इसके लिए गर्भवती महिला को शिशु के जन्म लेने का इंतज़ार करने की जरुरत नहीं है बल्कि जब शिशु गर्भ में होता है तभी से महिला उसके दिमाग को तेज करने की कोशिश कर सकती है।

और यह भी महिला प्रेगनेंसी के दौरान अपने खान पान का ध्यान रखकर कर सकती है। क्योंकि कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जो पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और जिनका फायदा गर्भनाल के माध्यम से शिशु तक पहुँचता है जिससे गर्भ में पल रहे शिशु का शारीरिक विकास बेहतर होने के साथ दिमाग भी तेज होता है। तो लीजिये अब जानते हैं ऐसे 10 फ़ूड जो बेबी के दिमाग को तेज करने में मदद करते हैं।

अंडा

प्रेगनेंसी के दौरान अंडे का सेवन करने से बच्चे के दिमाग को तेज करने में मदद मिलती है। क्योंकि अंडे Choline नामक पोषक तत्व मौजूद होता है जो बच्चे के दिमाग के विकास को तेज करने में मदद करता है। साथ अंडे में फैट व् प्रोटीन भी मौजूद होता है जो दिमाग के सेल्स को विकसित करने में मदद करता है।

दही

दही प्रोटीन से भरपूर होती है और प्रोटीन युक्त चीजों का सेवन करने से शिशु के दिमाग के बेहतर विकास में मदद मिलती है। इसीलिए गर्भवती महिला को शिशु के दिमाग को तेज करने के लिए रोजाना एक कटोरी दही का सेवन जरूर करना चाहिए।

पालक

पालक में फोलेट, आयरन, प्रोटीन की मात्रा भरपूर होती है और यह सभी पोषक शिशु के दिमाग को विकास को तेज करने में मदद करते हैं। लेकिन गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की पालक को ज्यादा पकाकर उसका सेवन न करें क्योंकि ऐसा करने से पालक में फोलेट की मात्रा कम हो जाती है।

मछली

फिश में ओमेगा फैटी एसिड, विटामिन डी, जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भ में शिशु के बेहतर दिमागी विकास के लिए जरुरी होते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला गर्भ में शिशु के दिमाग को तेज करने के लिए मछली का सेवन कर सकती है।

दाल

प्रेग्नेंट महिला को गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग को तेज करने के लिए दालों का भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि दालें प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत होती है और प्रोटीन से गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग के सेल्स के बेहतर विकास में मदद करती है जिससे शिशु का दिमाग तेज होता है।

ड्राई फ्रूट्स

गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग के विकास को बढ़ाने के लिए गर्भवती महिला को ड्राई फ्रूट्स का सेवन भी करना चाहिए। खासकर बादाम, अखरोट का, क्योंकि इसमें प्रोटीन, फैट, विटामिन आदि मौजूद होता है जो शिशु के दिमाग के बेहतर विकास में मदद करता है।

स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी

गर्भावस्था के दौरान स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी दोनों का सेवन फायदेमंद होता है। और गर्भावस्था के दौरान यदि महिला इनका सेवन करती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग के विकास को तेज करने में मदद मिलती है। क्योंकि स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स दिमाग के विकास को तेज करने में मदद करते हैं।

मूंगफली

विटामिन इ, प्रोटीन, फैट, फोलेट जैसे पोषक तत्व दिमाग के विकास को तेज करने में बहुत फायदेमंद होते हैं। और मूंगफली में यह सभी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला यदि मूंगफली का सेवन करती है तो इससे बच्चे के दिमाग के विकास को बढ़ाने में मदद मिलती है। लेकिन यदि गर्भवती महिला को मूंगफली का सेवन करने से किसी भी तरह की एलर्जी होती है तो प्रेग्नेंट महिला को मूंगफली का सेवन नहीं करना चाहिए।

दूध

दूध में विटामिन डी, प्रोटीन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग के विकास को बेहतर करने में मदद करते हैं। इसके अलावा दूध में कैल्शियम, फैट भी मौजूद होता है जो शिशु के दिमागी व् मानसिक विकास को बेहतर करने में मदद मिलते हैं। ऐसे में दिन में कम से कम दो से तीन गिलास दूध का सेवन प्रेग्नेंट महिला को जरूर करना चाहिए।

हल्दी

एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर हल्दी गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद करती है। इसीलिए अपने सब्ज़ी आदि में गर्भवती महिला को हल्दी को भरपूर मात्रा में शामिल करना चाहिए।

तो यह हैं वो दस आहार जिनका सेवन यदि प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी के दौरान करती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग को तेज होने में मदद मिलती है। ऐसे में इन खाद्य पदार्थों को गर्भवती महिला को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

प्रदूषण का गर्भ (शिशु) पर प्रभाव और बचाव

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प्रेगनेंसी के दौरान महिला को गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए अपना बहुत अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है, ताकि शिशु को किसी भी तरह की परेशानी न हो। क्योंकि महिला द्वारा प्रेगनेंसी में की गई थोड़ी सी लापरवाही शिशु के शारीरिक के साथ मानसिक विकास पर भी बुरा असर डाल सकती है। और प्रदूषण भी गर्भवती महिला के साथ साथ शिशु के लिए भी नुकसानदायक होता है। एक रिसर्च के अनुसार यदि गर्भवती महिला प्रदूषित वातावरण के संपर्क में आती है तो इसके कारण शिशु के मानसिक विकास में अवरोध उत्पन्न हो जाता है। तो आइये अब जानते हैं की गर्भ में पल रहे शिशु पर प्रदूषण का क्या असर पड़ता है, और आप किस तरह से इससे बच सकते हैं।

मानसिक विकास पर असर पड़ता है

जब भी आप कहीं बाहर प्रदूषित वातावरण में सांस लेते हैं, तो हवा में मौजूद विषैले कण आपके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। जो की न केवल प्रेगनेंसी के दौरान महिला को परेशान करते हैं बल्कि गर्भनाल के माध्यम से शिशु तक भी पहुँच जाते हैं। ऐसे में वो शिशु के मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं, जिससे शिशु के मानसिक विकास में कमी आ सकती है।

इन्फेक्शन हो सकता है

जब प्रदूषण के कण ब्लड में मिक्स हो जाते है, तो इसके कारण ब्लड इन्फेक्शन, स्किन इन्फेक्शन, या एलर्जी होने के चांस बढ़ जाते है, और इससे गर्भवती महिला के साथ शिशु के सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है, साथ ही जन्म के बाद शिशु को भी इन्फेक्शन होने चांस होते हैं।

विकलांगता हो सकती है

भीड़भाड़, प्रदूषण वाली जगह पर, ज्यादा शोर आदि में रहने पर शिशु के अंगो के विकास पर असर पड़ता है, यहां तक की शिशु की सुनने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है। ऐसे में शिशु के अंगो के सही विकास के लिए जितना हो सके प्रेगनेंसी के दौरान आपको इन सभी से परहेज करना चाहिए।

प्रदूषण से बचाव के लिए अपनाएँ यह टिप्स

  • प्रदूषण से बचाव के लिए सबसे पहले तो आप कहीं भी जाएँ आपको मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • प्रेगनेंसी का पूरा समय आपको किसी भी ऐसी जगह पर नहीं जाना चाहिए जहां पर बहुत अधिक भीड़भाड़ हो।
  • शाम की बजाय सुबह घूमने या वॉक करने जाएँ, क्योंकि सुबह एयर फ्रैश होती है।
  • प्रेगनेंसी के समय आपको ज्यादा शोर वाली जगह पर जाने से भी परहेज करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो प्रदूषण के कारण गर्भ में पल रहे शिशु के साथ हो सकती है, ऐसे में यदि आप चाहती है की आपका शिशु स्वस्थ, हष्ट पुष्ट, और तेज दिमाग वाला हो तो प्रेगनेंसी में आपको प्रदूषण वाली जगह पर जाने से परहेज करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में दही ज्यादा फायदेमंद है या दूध?

गर्भावस्था के दौरान हर वो चीज खानी चाहिए जिससे माँ व् बच्चे दोनों को फायदा मिलें। और ऐसा नहीं होता है की एक ही चीज को खाने से आपको सभी फायदे मिलें। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को अलग अलग चीजें खानी चाहिए। जो की पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद भी हो।

जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान दालें, साबुत अनाज, फल, सब्जियां, दूध, दही, ड्राई फ्रूट्स , घी सभी चीजों का सेवन करना चाहिए। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में दूध का सेवन करना ज्यादा फायदेमंद होता है या दही का सेवन, इस बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में दही या दूध क्या है ज्यादा फायदेमंद?

दही दूध से ही बनती है, ऐसे में दूध में जो फायदे होते हैं वो दही में भी मौजूद होते हैं। हाँ, हो सकता है की जो फायदे दूध में अधिक हो वो दही में न हो, और जो फायदे दही में हो वो दूध में अधिक न हो। ऐसे में किसी एक के बारे में कहना की दही न खाएं केवल दूध ही पीएं या दूध नहीं पीएं केवल दही ही खाएं ऐसा कहना सही नहीं होता है।

लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला को दूध पीने से दिक्कत होती है तो महिला दही का सेवन कर सकती है। और यदि महिला को दही खाने से दिक्कत होती है तो महिला दूध पी सकती है। यदि दोनों से कोई दिक्कत नहीं है तो महिला दोनों का सेवन कर सकती है लेकिन दोनों का एक साथ सेवन नहीं करें। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में दूध पीने और दही खाने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

गर्भावस्था में दूध पीने के फायदे

  • कैल्शियम से भरपूर दूध माँ व् बच्चे दोनों की हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है जिससे प्रेग्नेंट महिला की शारीरिक परेशानियां कम होती है। और गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास को बेहतर करने में मदद मिलती है।
  • प्रोटीन की मात्रा भी दूध में मौजूद होती है जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होती है।
  • दूध का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा को सही रखने में मदद मिलती है।
  • विटामिन डी भी दूध में प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जो गर्भ में शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास को बेहतर करने में मदद करता है।

प्रेगनेंसी में दही खाने के फायदे

  • दही का सेवन करना पाचन तंत्र के लिए बहुत अच्छा होता है क्योंकि दही खाने को अच्छे से हज़म करने में मदद करती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज़, अपच, एसिडिटी जैसी परेशानियों से प्रेग्नेंट महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।
  • प्रेग्नेंट महिला यदि दही का सेवन करती है तो इससे इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिलती है जिसे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे को संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • दही का सेवन करने से प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान वजन नियंत्रित रखने के लिए दही का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
  • हड्डियों व् मसल्स को मजबूत बनाने के लिए दही खाना बहुत फायदेमंद होता है।
  • तनाव, बेचैनी जैसी समस्याओं से बचाव के लिए दही का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो दूध व् दही का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को मिलते हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी दूध, दही का सेवन भरपूर करना चाहिए। लेकिन दूध व् दही का सेवन एक साथ कभी नहीं करें क्योंकि इसके कारण पेट से जुडी परेशानी हो सकती है साथ ही रात को दही का सेवन नहीं करें क्योंकि इससे सर्दी खांसी जैसी समस्या होने का खतरा रहता है।

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बच्चों की लम्बाई बढ़ाने के लिए ये फ़ूड जरूर खिलाये

आजकल बच्चो की लम्बाई एक महत्वपूर्ण विषय बनता जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि अक्सर छोटी हाइट वाले बच्चे अपना आत्मविश्वास खोने लगते है खासतौर पर जब अपने साथ के बच्चो का कद वो अपने से बड़ा देखते है। साधारणतः कद बढ़ना हमारे जीन पर निर्भर करता है। लेकिन कुछ अध्य्यन द्वारा यह बात सामने आयी है के कुछ बाहरी तत्व भी होते है जो हमारे कद पर असर डालते है। हालाँकि बहुत से ऐसे प्रोडक्ट बाजार में बेचे भी जाते है जो दावा करते है के उनके प्रयोग से बच्चो की हाइट बढ़ती है। लेकिन उनमे से ज्यादातर प्रोडक्ट काम नहीं करते है। आपके लिए यह जानना जरुरी है के हाइट बच्चो को दी जाने वाले सेहतमंद डाइट, जीन और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है।

ऐसा देखा जाता है के जो बच्चे अच्छी संतुलित डाइट लेते है और रोजाना एक्सरसाइज करते है उनकी हाइट बेहतरीन तरीके से बढ़ती है। हमारे शरीर में ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन्स (एच् जी एच्) होती है जो हमारी हाइट बढ़ाते है। कुछ ऐसे भोजन प्रदार्थ होते है जो हमारे एच् जी एच् की काम सुनिश्चित करते है जिससे की हाइट अच्छे से बढ़ सके। एच् जी एच् की ग्रोथ हमारे शरीर के हर टिश्यू और हर बॉडी ऑर्गन्स में होनी जरुरी होते है।

महत्वपूर्ण नुट्रिएंट्स कद बढ़ाने के लिए

भोजन के बारे में जानने से पहले जरुरी है के हम उन नुट्रिएंट्स के बारे में जाने जिनसे हाइट को बढ़ने में मदद मिलती है।

मिनरल्स

बच्चे के हाइट बढ़ाने के लिए कुछ मिनरल्स को अपने भोजन में शामिल करना बहुत ही जरुरी है। भोजन जिनमे आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, आयोडीन, मैगनीस और फ्लोरिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है वह भोजन बच्चो की हाइट बढ़ाने में बहुत ही मददगार होते है। कैल्शियम इन सभी मिनरल्स में सबसे इम्पोर्टेन्ट मिनरल है यह सिर्फ बच्चों की हाइट ही नहीं बढ़ाता बल्कि बच्चों की हड्डियों को भी मजबूत बनाता है।

प्रोटीन्स

बच्चों की हाइट बढ़ाने के लिए सभी महत्वपूर्ण तत्वों में से एक प्रोटीन है। प्रोटीन हमारे शरीर में हमारे टिश्यू की ग्रोथ के लिए सबसे ज्यादा जरुरी है। प्रोटीन की कमी के कारण असाधारण ग्रोथ तो होती ही है साथ में मसल्स का भी बहुत कम विकास हो पाता है, जिसके कारण बच्चे बहुत कमजोर भी हो जाते है। बच्चो के कद के पूर्ण विकास के लिए उन्हें ऐसा भोजन दे जिसमे प्रोटीन की भरपूर मात्रा हो।

विटामिन्स

जब बात शरीर की हड्डियों और हाइट की करे तो विटामिन डी का बहुत बड़ा योगदान होता है। क्योकि विटामिन डी की सहायता से ही हड्डियों को कैल्शियम की मात्रा मिल पाती है। विटामिन डी की कमी से बच्चों की हड्डियां कमजोर हो जाती और उनमे दर्द भी रहने लगता है इसी कारण बच्चो की हाइट की भी कम ग्रोथ होती है। इसके अतिरिक्त बच्चो का कद बढ़ाने के लिए विटामिन ए, विटामिन बी 1, विटामिन बी 2, विटामिन सी, विटामिन एफ आदि भी बहुत जरुरी है। यह सभी जरुरी विटामिन्स सब्जी और फलों में पाए जाते है।

कार्बोहाइड्रेट्स

सामान्यतः कार्ब्स को हानिकारक माना जाता है, पर इनकी कुछ मात्रा बच्चे की हाइट बढ़ाने के लिए भी जरुरी होती है। बच्चों के सन्दर्भ में यह माना जाता है के कार्बोहाइड्रेट्स से बच्चो को एनर्जी मिलती है। लेकिन आपको यह सुनिश्चित करना होगा के आपके बच्चे की डाइट में सिर्फ सेहतमंद कार्ब्स ही शामिल हो। बच्चो के लिए गेहूं और दालों से मिलने वाले कार्बोहाइड्रेट्स सेहतमंद माने जाते है परन्तु पिज़ा, बर्गर और मैदे से मिलने वाले कार्ब्स हानिकारक होते है।

इन सभी पोषक तत्वों के अतिरिक्त आपके बच्चे के डाइट में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 भी जरूर शामिल करें।

फ़ूड हाइट बढ़ाने के लिए

नुट्रिएंट्स के बारे में पढ़ने के बाद यह जरूर जाने के यह सभी पोषक तत्व किस तरह के भोजन में पाए जाते है। जिससे की अपने बच्चों की डाइट में उन प्रदार्थो को शामिल कर सके।

दूध और दूध से बने प्रोडक्ट

बच्चों की हाइट बढ़ाने में दूध और दूध से बनी चीजों का उपयोग बहुत ही फायदेमंद होता है। क्योंकि इन प्रदार्थो में विटामिन ए, बी, डी ए और विटामिन इ भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके आलावा यह प्रदार्थ कैल्शियम का भी अच्छा स्रोत माने जाते है। अपने बच्चे की हाइट बढ़ाने के लिए बच्चे को रोजाना दूध, दही, पनीर और घी जरूर दे। इनके सेवन से शरीर की हड्डियों को मजबूती मिलती है और उनकी ग्रोथ भी होती है।

अंडे और चिकन

चिकन और अंडे में भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। यह बच्चों के शरीर में टिश्यू का निर्माण कर उनकी मसल्स को मजबूत बनाते है। अंडे का वाइट हिस्सा 100 परसेंट प्रोटीन होता है। अंडे और चिकन की खास बात यह होती है के इन्हे अलग अलग तरह से बनाकर खाया जा सकता है। इससे आपका बच्चा जल्दी से बोर भी नहीं होगा। अगर आप अपने भोजन में चिकन और अंडो को शामिल करते है तो आपके बच्चे की हाइट बढ़ने में बहुत मदद मिलेगी।

सोयाबीन

जो लोग अंडे और चिकन का सेवन नही करते उनके लिए सोयाबीन सबसे बेस्ट ऑप्शन है। सोयाबीन प्रोटीन, फोलेट, विटामिन्स, कार्बोहाइड्रेट्स और फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत है। इसके नियमित इस्तेमाल से आपके बच्चे को अंडे और चिकन जितना ही प्रोटीन मिलेगा।

सूखे मेवे

सूखे मेवे भी बच्चो की हाइट बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा ऑप्शन है। यह मिनरल्स और विटामिन्स से तो भरपूर होते ही है साथ ही बच्चे की सेहत और दिमाग के विकास के लिए भी बहुत फायदेमंद होते है। बच्चों को सुबह नाश्ते में बादाम, काजू, अलसी, पिस्ता, अखरोट आदि जरूर दें। पर ध्यान रखिये यह सब चीजे थोड़ी थोड़ी मात्रा में ही दे, किसी भी चीज की अधिकता नुकसानदेह भी हो सकती है।

हरी पत्तेदार सब्जियाँ

बच्चो को अक्सर हरी सब्जियां पसंद नहीं आती उन्हें देखते ही वह मुँह बनाने लगते है। पर आपको जानकार हैरानी होगी की हरी पत्तेदार सब्जियाँ जैसे, ब्रोकोली, पालक, मटर, ओकरा आदि मिनरल्स, विटामिन्स और फाइबर से भरपूर होती है। यह सभी चीजे बच्चे की सही ग्रोथ के लिए बहुत ही जरुरी होती है।

फल

सभी ताजे मौसमी फल बच्चो के लिए बहुत ही जरुरी होते है। यह फल विटामिन्स और मिनरल्स से युक्त होते है और बच्चो की डाइट इनके बिना अधूरी होती है। अपने बच्चों को सभी तरह के फ्रूट्स खाने को दें खासतौर पर वो फल जो विटामिन ए और विटामिन सी से भरपूर होते है जैसे की पपीता, संतरा, तरबूज और सेब।

दाल

सभी दाले बच्चो के लिए जरुरी और सेहतमंद होती है। हर तरह की दाल एनर्जी, विटामिन, फाइबर, मैग्नीशियम और आयरन का गोदाम होती है। यह सभी चीजे अलग अलग ढंग से बनाकर अपने बच्चों को खिलाएं जिससे की उनकी रूचि इनको खाने में बढ़े।

इन सभी चीजों को बच्चों के भोजन में शामिल करने के साथ साथ उन्हें योग और एक्सरसाइज करने की भी आदत डालें। एक्सरसाइज करने से बच्चों की हड्डियों का अच्छे से विकास होगा और वह मजबूत बनेगी और हाइट को बढ़ने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त ध्यान रखिये की बच्चों के शरीर में फैट की मात्रा को ज्यादा ना बढ़ने दे। यदि फैट की मात्रा अधिक बढ़ती है तो हाइट बढ़ने में रूकावट होती है।

प्रेगनेंसी में तुसली के पत्ते खाने के फायदे

औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी में एक या दो नहीं बल्कि बहुत से औषधीय गुण मौजूद होते हैं। साथ ही इसमें पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो आपको स्वस्थ रखने के साथ बिमारियों और संक्रमण से सुरक्षित रखने में भी मदद करते हैं। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान तुलसी के पत्तों का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने और बहुत सी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में तुलसी के पत्तों का सेवन करने से कौन से फायदे मिलते हैं।

खून की कमी होती है दूर

प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी महिलाएं शरीर में खून की कमी की समस्या का सामना करती है। लेकिन रोजाना तुलसी के पत्ते का सेवन करने से महिला को इस परेशानी से निजात मिलता है। क्योंकि तुलसी के पत्ते का सेवन करने शरीर को आयरन और फोलेट मिलता है जिससे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या शरीर में बढ़ती है और महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

संक्रमण से होता है बचाव

एंटी वायरल, एंटी बैक्टेरियल, एंटी ऑक्सीडेंट्स से भरपूर तुसली के पत्तों का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी बढ़ती है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे दोनों को हर तरह की बीमारी व् संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।

ऊर्जा मिलती है

गर्भावस्था के दौरान थकान, कमजोरी जैसी परेशानियों का महसूस होना आम बात होती है। खासकर सुबह के समय महिला को यह समस्या ज्यादा होती है। लेकिन तुलसी के पत्ते का सेवन करने से महिला को इस परेशानी से भी निजात मिलता है। क्योंकि पोषक तत्वों से भरपूर तुलसी के पत्ते महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करते हैं।

बच्चे के विकास के लिए है फायदेमंद

विटामिन ए, विटामिन के जैसे पोषक तत्वों से भरपूर तुलसी का सेवन करने से गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो तुलसी का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को मिलते हैं। हो सकता है की आपको कुछ लोग प्रेगनेंसी में तुलसी का सेवन न करने की सलाह दें, क्योंकि तुलसी का ज्यादा सेवन हानिकारक हो सकता है। ऐसे में आप इसके बेहतरीन फायदों के लिए एक दिन में केवल एक ही तुलसी के पत्ते का सेवन करें ताकि आपको आपको तुलसी के फायदे भी मिलें और किसी भी तरह का नुकसान न हो।

ब्रैस्ट को छोटा और टाइट करने का तरीका

महिलाओं की पर्सनैल्टी को बढ़ाने में ब्रैस्ट भी बहुत अहम रोल निभाते है, साथ ही इसे महिलाओ के आकर्षित अंग में से एक कहा जाता है। लेकिन कई बार ब्रैस्ट के ढीले और उनका आकार बढ़ने के कारण आपकी लुक खराब हो सकती है। लेकिन कई बार इसके ढीले और इनकी शेप खराब होने के जिम्मेवार आप होते है। क्योंकि यदि महिला अपने ब्रैस्ट साइज की ब्रा नहीं पहनती है, तो इसके कारण आपके ब्रैस्ट पर दबाव पड़ता है, जिसके कारण मासपेशियां फैलने लगती है, और ब्रैस्ट लटकने लग जाता है।

ज्यादातर महिलाएं चाहती है की उनकी ब्रैस्ट का साइज छोटा, स्तन टाइट, होना चाहिए। ताकि उनकी पर्सनैल्टी और लुक को बेहतर बनाने में मदद मिल सके। और ऐसा करना कोई मुश्किल भी नहीं है, क्योंकि बहुत से आसान उपाय है जिनके कुछ दिन के इस्तेमाल से आपको परफेक्ट ब्रैस्ट शेप पाने में मदद मिलती है। क्या आप भी अपने ब्रैस्ट के ढीलेपन को दूर करना चाहते हैं? क्या आप भी भरी स्तन से परेशान हैं? तो आइये आज हम आपको इस समस्या से निजात पाकर आपके ब्रैस्ट को छोटा और टाइट करने के लिए आसान टिप्स बताते हैं।

ब्रैस्ट के ढीले और बड़े होने के कारण:-

  • फिटिंग की ब्रा न पहनने के कारण महिला का ब्रैस्ट शेप खराब हो जाता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • अचानक वजन बढ़ने या कम होने पर भी महिलाओ का ब्रैस्ट शेप खराब हो जाता है।
  • स्तनपान जब तक बच्चा करता है, तो स्तन में दूध की ग्रंथियों के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने पर भी ऐसा होता है।
  • मेनोपॉज़ के दौरान भी शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण ऐसा हो सकता है।
  • अत्यधिक निकोटिन युक्त पदार्थो का सेवन करने से भी महिला की स्किन ढीली हो जाती है।
  • ब्रैस्ट कैंसर या टी बी जैसे रोग होने पर भी आपको इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

ब्रैस्ट छोटा व् टाइट करने के तरीके:-

बर्फ का इस्तेमाल करें:-

बर्फ का इस्तेमाल करने से ब्रैस्ट के उत्तक को टाइट और स्थिर करने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप दो बर्फ के टुकड़े लें, और उन्हें अच्छे से ब्रैस्ट के चारों को घुमाएं। ऐसा लगभग दो मिनट तक करें, उसके बाद ब्रैस्ट को साफ़ तोलिये से पोछ लें। उसके बाद अपने माप की ब्रा पहने और आधे घंटे के लिए लेट जाएँ। ऐसा नियमित दिन में एक बार करें इससे आपके ब्रैस्ट को टाइट होने के साथ छोटा होने में मदद मिलती है।

जैतून का तेल:-

एंटी ऑक्सीडेंट और फैटी एसिड से भरपूर जैतून का तेल जो की आपके ब्रैस्ट को फ्री रेडिकल के कारण ढीला होने वाली परेशानी से बचाने में मदद करता है। जिससे आपकी ब्रैस्ट को टाइट होने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप दोनों हाथो पर थोड़ा जैतून का तेल लेकर अच्छे से अपने दोनों ब्रैस्ट की पंद्रह मिनट तक मसाज करें। ऐसा कुछ दिन करने से आपको फायदा मिलेगा।

खीरा और अंडे की जर्दी:-

खीरे को अच्छे से मिक्सी में पीस लें, उसके बाद इसमें एक अंडे की जर्दी, एक चम्मच कोई भी क्रीम या मक्खन मिलाकर एक पेस्ट को तैयार करें। उसके बाद इस पेस्ट को अच्छे से अपने ब्रैस्ट पर लगाएं, और आधे घंटे के लिए छोड़ दे। उसके बाद ठन्डे पानी का इस्तेमाल करके अच्छे से ब्रैस्ट को साफ़ करके तोलिये से पोछ लें। और उसके बाद अपनी फिटिंग की ब्रा पहन लें, ऐसा हफ्ते में एक बार करने पर आपको ब्रैस्ट को टाइट और छोटा करने में मदद मिलती है।

मेथी का प्रयोग:-

मेथी में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट और विटामिन ब्रैस्ट को टाइट करने, और उठाने का काम करते हैं। जिससे ब्रैस्ट को टाइट और परफेक्ट शेप में आने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप दो चम्मच मेथी पाउडर में पानी डालकर एक पेस्ट तैयार करें, और उसे मास्क की तरह अच्छे से अपने ब्रैस्ट पर लगाएं। थोड़ी देर बाद गुनगुने पानी से इसे अच्छे से साफ़ कर लें, हफ्ते में दो या तीन बार इस उपाय को करें।

पुश अप्स करें:-

ब्रैस्ट को टाइट करने और उसके आकर को कम करने के लिए पुश अप्स सबसे अहम एक्सरसाइज होती है। क्योंकि इसे करने पर सबसे ज्यादा जोर आपकी ब्रैस्ट पर पड़ता है, जिसके कारण आस पास की स्किन में खिंचाव होता है, और एक्स्ट्रा चर्बी कम होती है। जिससे ब्रैस्ट साइज को छोटा और टाइट होने के साथ परफेक्ट शेप में आने में मदद मिलती है। शुरुआत में कम और धीरे धीरे आपको इसको बढ़ाते रहना चाहिए ताकि इसे आपको अधिक थकावट महसूस न हो।

मसाज करें:-

घर में मौजूद किसी भी क्रीम, या तेल ( बादाम का तेल, जैतून का तेल) आदि से अच्छे से अपने ब्रैस्ट की हफ्ते में तीन से चार बार अच्छे से मसाज करें। इससे आपके ब्रैस्ट की मांसपेशियों और उत्तको को टाइट होने में मदद मिलती है। जिससे आपके ब्रैस्ट साइज को टाइट होने के साथ परफेक्ट शेप लाने में भी फायदा होता है।

एलोवेरा:-

एलोवेरा न केवल आपकी स्किन की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में आपकी मदद करता है, बल्कि इसके इस्तेमाल से आपके ब्रैस्ट को भी टाइट होने में मदद मिलती है। इसके लिए आप एलोवेरा जेल की मदद से दस मिनट तक अच्छे से अपने ब्रैस्ट की मसाज करें। उसके बाद इसे थोड़ी देर ऐसे ही छोड़ दें, और गुनगुने पानी का इस्तेमाल करके इसे अच्छे से साफ़ करें, हफ्ते में इस उपाय को कम से कम पांच बार करें।

शिया बटर:-

शिया बटर भी आपके ब्रैस्ट को परफेक्ट शेप देने में आपकी मदद करता है। इसके लिए आप अपने हाथ पर शिया बटर लेकर अच्छे से अपने ब्रैस्ट की मसाज करें, उसके बाद इसे दस से पंद्रह मिनट के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दें। उसके बाद ठन्डे पानी का इस्तेमाल करके अपने ब्रैस्ट को अच्छे से साफ़ करें, ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करने से आपको ब्रैस्ट को टाइट करने में मदद मिलती है।

ब्रैस्ट को छोटा और टाइट करने के अन्य टिप्स:-

  • नियमित व्यायाम व् योगासन करने से भी आपके शरीर पर जमी अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद मिलती है, जिससे ब्रैस्ट भी धीरे धीरे परफेक्ट शेप में आने लगता है।
  • रहसोल क्ले को पानी में मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें, उसके बाद इसे अच्छे से अपने ब्रैस्ट पर लगाएं, और सूखने के बाद गर्म पानी से धो दें।
  • पानी का भरपूर सेवन करें, साथ ही अपने आहार में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में लें।
  • ब्रा का चुनाव करते समय ध्यान रखें की वो आपके साइज की हो, न तो छोटी और न ही बड़ी ब्रा पहने।
  • धूम्रपान व् अन्य निकोटिन युक्त पदार्थो के सेवन से परहेज करें।
  • अंडे को फोड़ कर उसे अच्छे से फेट लें, और उसके बाद इसे मास्क की तरह अपने ब्रैस्ट पर लगाएं, और उसके बाद इसे साफ करने के लिए खीरे के रस या प्याज़ के रस का इस्तेमाल करें, इसे आपको ब्रैस्ट को शेप में तेजी से लाने में मदद मिलती है।
  • अनार के छिलको को सुखाकर इसका पाउडर तैयार करें, उसके बाद इसमें नीम या सरसों का तेल मिलकर अच्छे से अपने ब्रैस्ट पर लगाएं।

तो ये हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करके आप अपने ब्रैस्ट को परफेक्ट शेप दे सकते है। इसके साथ आपको कुछ दिनों तक नियमित इस उपाय को करने से इनका असर दिखाई देता है, ऐसा नहीं है की आप चाहे की एक हफ्ते या एक दिन में ये अपना असर दिखाएं। तो इसीलिए आपको धैर्य रखना चाहिए, साथ ही महिलाओ को अपने ब्रैस्ट शेप को सही रखने के लिए कभी भी गलत ब्रा का चुनाव नहीं करना चाहिए।

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सुबह उठने के फायदे

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सुबह की नींद बेहद ही सुकून देने वाली होती है, पर यही सुबह की नींद हमारा पूरी दिनचर्या बिगाड़ सकती है। सुबह सुबह बिस्तरा छोड़ कर किसे उठना अच्छा लगता है, खासतौर पर अगर सर्दियों की सुबह है तो बिलकुल भी नहीं, पर सभी बड़े कहते है कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है। जो बिलकुल सही भी है, सुबह उठने के बहुत से फायदे है। अंग्रेजी की एक कहावत में भी कहा गया है “अर्ली टू बेड अर्ली टू राइस, मेक्स अ मैन हेल्दी, वेल्दी एंड वाइज” इसका मतलब है रात में समय से सोना, सुबह जल्दी उठना एक इंसान को सेहतमंद, दौलतमंद और बुद्धिमान बनाता है। चलिए देखते है सुबह उठने के क्या क्या फायदे है।

  • एक्सरसाइज का समय : आज कल के प्रदूषित वातावरण में अपने आप को फिट रखना बेहद जरुरी है, उसके लिए जरुरी है की हम रोजाना कुछ समय एक्सरसाइज या योगा को दे। लोग अक्सर कहते है की एक्सरसाइज का समय नहीं मिलता, सच यह है की हम समय से उठते नहीं है। यदि हम सुबह जल्दी उठे तो थोड़ा समय अपनी फिटनेस के लिए आसानी से निकाल सकते है। सुबह ताज़ी हवा में व्यायाम करने से हम लम्बे समय तक तंदरूस्त रहेंगे।
  • ताजगी का अनुभव : अगर हम सुबह जल्दी उठे तो, हम देखेंगे की हम पूरा दिन फ्रेश रहते है , आलस हमारे शरीर को छू भी नहीं पाता। सुबह की ताज़ी हवा में सांस लेने से हमारा सारा आलस ख़त्म हो जाता है।
  • दिनचर्या : सूर्योदय से १ घंटा पहले उठने से हम ताज़ी हवा में व्यायाम, स्नान, पूजा, भोजन आदि आसानी से कर सकते है। और पुरे दिन की दिनचर्या को नियमित कर सकते है, जब सब कुछ सही ढंग से होता है तो हमारे अंदर एक साकारात्मक ऊर्जा अपने आप ही उत्पन्न होने लगती है।
  • मानसिक और शारीरक विकास : सुबह समय पर उठने से हमारा न केवल शारीरक बल्कि मानसिक विकास भी होता है। मांनसिक विकास होने पर हम तनाव जैसी बीमारियों से भी दूर रहते है।
  • शवास की बीमारी : जिन लोगो को शवास या फेफड़ो से सम्बंधित रोग होते है उन्हें सुबह ताज़ी हवा में सैर करने मात्र से ही बहुत लाभ मिलता है।
  • पौष्टिक भोजन : सुबह समय पर उठने से हमे सभी कार्यो के लिए पूरा समय मिल जाता है। जिससे हम पौष्टिक भोजन बना कर खा भी सकते है। वरना अक्सर लोग देर से उठने पर जल्दी जल्दी में सुबह का ब्रेकफास्ट तो छोड़ ही देते है , जबकि ब्रेकफास्ट हमारे पुरे दिन का सबसे अहम् हिस्सा होता है।
  • चमकदार त्वचा : जी है सही पढ़ा आपने चमकदार त्वचा, सुबह जल्दी उठकर ताज़ी हवा में व्यायाम करने से हमारे त्वचा पर चमक और कसाव आता है , और साथ ही हमारी प्राकृतिक सुंदरता भी बढ़ती है। जिससे हम अपनी उम्र से कम दीखते है।
  • स्ट्रेस काम होना : सुबह जल्दी उठने से, हमे काम का कम स्ट्रेस होता है। कम स्ट्रेस होने से हम एक पाजिटिविटी के साथ काम करते है, जो की हमारी तरक्की में अहम् भूमिका निभाती है। स्ट्रेस कम होने से हमारी कंसंट्रेशन पावर भी बढ़ती है।
  • उत्पादकता : एक रिसर्च में सामने आया है जो लोग सूर्योदय से पहले उठते है , उनकी क्षमता किसी भी कार्य को करने की आम लोगो से ज्यादा होती है।

तो आपने देखा एक छोटी से जल्दी उठने की आदत आपकी पूरी दिनचर्या कैसे सुधार देती है। सुबह जल्दी उठने की आदत न की सिर्फ दिनचर्या बल्कि आपकी सेहत, और आपका आने वाला कल भी सुधारती है।

IUI की जरुरत कब होती है

IUI यानी इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन, हर महिला अपने जीवन में मां बनने का सपना जरूर देखती है। लेकिन कई बार कुछ कारणों की वजह से महिला को चाह कर भी यह खुशी नहीं मिल पाती है। ऐसे में महिलाएं अपनी माँ बनने की इच्छा को पूरी करने के लिए आईवीएफ, आईसीएसआई (ICSI) जैसी मेडिकल सुविधाओं का इस्तेमाल करती है। जिससे महिला को माँ बनने का सुख मिल पाता है। ऐसी की एक और तकनीक भी है जिससे महिला गर्भधारण में आ रही परेशानियों को दूर करके माँ बनने का सुख पा सकती है। और वो है आईयूआई (IUI) यानी इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन। यह तरीका महिला को गर्भधारण करने में मदद करता है। तो आइये अब जानते हैं की IUI क्या होता है और कब किया जाता है।

क्या है इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन IUI?

  • IUI के लिए सबसे पहले पुरुष के शुक्राणुओं को लैब में साफ किया जाता है।
  • जिसमे अच्छे और बेकार शुक्राणुओं को अलग कर दिया जाता है।
  • उसके बाद जब महिला का ओवुलेशन पीरियड शुरू होता है उस समय डॉक्टर प्लास्टिक की पतली कैथेटर ट्यूब की मदद से अच्छे शुक्राणुओं को महिला के गर्भाशय में अंडों के पास रख देते हैं।
  • जिससे अंडे के आसानी से निषेचित होने के चांस बढ़ जाते हैं।
  • उसके बाद हो सकता है की डॉक्टर आपको गर्भधारण करने की संभावना बढ़ाने के लिए दवाइयां भी दें।
  • इसके अलावा आईयूआई का इस्तेमाल करने के लिए महिला की फैलोपियन ट्यूब का सही होना जरूरी है।

इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन IUI कब किया जाता है?

  • यदि महिला बहुत समय से गर्भधारण की कोशिश कर रही हो लेकिन महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु आपस में न मिल रहे हों।
  • पुरुष के शुक्राणुओं की संख्या में कमी या पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्ता में कमी होने का कारण।
  • समलैंगिक जोड़ो के केस में भी ऐसा किया जाता है।
  • यदि महिला का ओवुलेशन पीरियड पीरियड सही नहीं होता है तो डॉक्टर अपने तरीके से जांच करके महिला के सही ओवुलेशन पीरियड का पता लगाकर इस तरीके का इस्तेमाल करते हैं।
  • यदि पुरुष में कोई कमी हो तो महिला के चाहने पर लैब में किसी और पुरुष के शुक्राणु द्वारा महिला का गर्भधारण किया जाता है।

आईयूआई के बाद बरतें यह सावधानियां सावधानियां

  • जब आईयूआई की प्रक्रिया की जाती है यानी की शुक्राणुओं को गर्भाशय में स्थापित किया जाता है तो उसके बाद करीब 20 से 30 मिनट तक बैठे रहें, कोई भी काम न करें।
  • कम से कम दो से तीन दिन तक शारीरिक सम्बन्ध न बनाएं।
  • स्विमिंग करने से बचें।
  • यदि आईयूआई के बाद आपको पेट में दर्द होता है या अन्य कोई परेशानी होती है तो किसी भी दवाई का सेवन न करें, बल्कि डॉक्टर से संपर्क करें।
  • प्रेगनेंसी को लेकर तनाव में न आएं कम से कम दो हफ्ते तक का इंतजार करें।
  • क्योंकि इस दौरान ओवुलेशन की प्रक्रिया तेज होने के बाद भ्रूण को विकसित होने में समय लगता है।
  • यदि आपको डॉक्टर किसी भी दवाई का सेवन करने की राय देते हैं तो समय से उन दवाइयों का सेवन करें।

तो यह है आईयूआई से जुडी जानकारी, यदि आपको भी गर्भधारण से जुडी समस्याएँ आ रही हैं। तो आप भी इन तरीको का इस्तेमाल करके आसानी से गर्भधारण कर सकते हैं।

गर्दन के कालेपन को ऐसे दूर करें

हर कोई चाहे महिला हो या पुरुष, लड़का हो या लड़की सभी अपनी ख़ूबसूरती को बरकरार रखने के लिए कुछ न कुछ जरूर करते हैं। और चेहरे का तो सबसे ज्यादा ध्यान रखा जाता है। लेकिन बॉडी के कुछ ऐसे हिस्से भी होते हैं जहां आपका ध्यान कम ही जाता है और उनकी वजह से कई बार आपकी ख़ूबसूरती में थोड़ी कमी आ जाती है। और ऐसा ही एक बॉडी पार्ट है गर्दन, गर्दन का कालेपन की समस्या अधिकतर लोगो को होती है।

लेकिन जितना ध्यान आप अपने चेहरे का रखते हैं उतना ही बॉडी के अन्य पार्ट्स का भी रखें तो आपको यह परेशानी नहीं होती है। क्योंकि जैसे आप चेहरे पर जमी गंदगी को रोजाना साफ़ करती है जिससे चेहरे की ख़ूबसूरती बरकरार रहती है वैसे ही गर्दन की रोजाना साफ़ सफाई से गर्दन की ख़ूबसूरती को बरकरार रहने में मदद मिलती है। तो लीजिये आज इस आर्टिकल में उनके लिए कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं जो गर्दन के कालेपन से परेशान हैं। तो आइये अब जानते हैं की गर्दन के कालेपन से निजात पाने के लिए आप कौन कौन से टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

निम्बू का रस और गुलाबजल

रात को सोने से पहले एक निम्बू के रस में बराबर मात्रा में गुलाबजल मिलाएं। अब रुई की मदद से इसे अपनी गर्दन पर अच्छे से लगाएं, और हो सके तो हल्की मसाज करें। उसके बाद इसे रातभर के लिए गर्दन पर ही छोड़ दें और सुबह उठकर गर्दन साफ़ कर लें। गुलाबजल न मिलाना चाहे तो आप केवल निम्बू की स्लाइस काटकर भी गर्दन की मसाज कर सकती है यह भी गर्दन के कालेपन को दूर करने का एक असरदार उपाय होता है।

बेकिंग सोडा

एक चम्मच बेकिंग सोडा में पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। अब इसे मास्क की तरह अपनी गर्दन पर लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद साफ़ पानी से धो दें, ऐसा हफ्ते में तीन से चार बार करें।

दही

दही में हल्दी मिलाकर एक पेस्ट बनाएं और इस पेस्ट से अपनी गर्दन की मसाज करें। उसके बाद इस पेस्ट को दस मिनट के लिए गर्दन पर छोड़ दें। फिर साफ पानी से धो लें, ऐसा ही दही में निम्बू का रस मिलाकर भी आप कर सकते हैं इससे भी आपको गर्दन के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

शहद और निम्बू

एक चम्मच शहद में निम्बू का रस मिलाकर अच्छे से गर्दन की मसाज करें। फिर इस पेस्ट को आधे घंटे के लिए गर्दन पर छोड़ दें। उसके बाद इसे गुनगुने पानी से साफ़ कर दें, ऐसा करने से गर्दन पर जमी डेड स्किन, धूल मिट्टी के कण निकल जायेंगे। ऐसा एक दिन छोड़कर तब तक करें जब तक गर्दन अच्छे से साफ न हो जाए।

बादाम तेल

रोजाना रात को सोने से पहले बादाम तेल से गर्दन की मसाज करें। उसके बाद इसे रात भर के लिए गर्दन पर लगे रहने दें। फिर सुबह उठकर हल्के गुनगुने पानी से मसाज करते हुए गर्दन को साफ़ करें, ऐसा रोजाना कुछ दिनों तक करें आपको इसका असर अपनी गर्दन पर जरूर दिखाई देगा।

ओलिव ऑयल

ओलिव ऑयल न केवन स्किन को कोमल बनाने में मदद करता है बल्कि स्किन पोर्स में जमी गंदगी को साफ़ करके स्किन को निखारने में भी मदद करता है। ऐसे में गर्दन का कालापन दूर करने के लिए आपको रोजाना नहाने से बीस मिनट पहले ओलिव ऑयल से गर्दन की मसाज करनी है। और फिर नहाते समय इस ऑयल को गुनगुने पानी से साफ करना है ऐसा करने से गर्दन के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

एलोवेरा

स्किन से जुडी सभी परेशानियों को दूर करने के लिए एलोवेरा का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है। ऐसे में गर्दन के कालेपन को दूर करने के लिए रोजाना रात को सोने से पहले गर्दन पर एलोवेरा जैल लगाकर मसाज करें और जैल को रातभर के लिए गर्दन पर लगे रहने दें। उसके बाद सुबह उठकर गर्दन को साफ कर लें ऐसा रोजाना करें आपको बहुत जल्दी गर्दन पर इसका असर दिखाई देगा।

आलू

आलू की स्लाइसेस को काटकर पांच से दस मिनट तक गर्दन की मसाज करें। और उसके बाद गर्दन को दस मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। उसके बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके गर्दन को धो दें। ऐसा करने से गर्दन के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

बेसन और सरसों का तेल

एक चम्मच बेसन में थोड़ी हल्दी और सरसों का तेल मिलाएं उसके बाद इस पेस्ट को अच्छे से मिक्स करके गर्दन पर लगाकर दस से पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें। उसके बाद गर्दन की दो से तीन मिनट तक मसाज करें और गुनगुने पानी से गर्दन को साफ़ कर दें। ऐसा करने से भी गर्दन के कालेपन को दूर करने में मदद मिलती है।

नमक या चीनी

नमक या चीनी को किसी भी तेल जैसे सरसों, नारियल, बादाम, आदि या निम्बू के रस के साथ मिलाकर गर्दन के लिए स्क्रब की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। जिससे गर्दन पर जमी गंदगी को बाहर निकालने में मदद मिलती है। ऐसे में आप भी गर्दन के कालेपन को दूर करना चाहते हैं तो घर में ऐसे ही स्क्रब बनाकर गर्दन के कालेपन को दूर कर सकते हैं।

तो यह हैं कुछ आसान तरीके जिन्हे ट्राई करने से गर्दन के कालेपन को दूर करके गर्दन को गोरा व् निखरा हुआ बनाने में मदद मिलती है। साथ ही यदि आप रोजाना नहाते समय यदि गर्दन की साफ़ सफाई का ध्यान रखते हैं तो आपके चेहरे के साथ गर्दन की ख़ूबसूरती को भी बरकरार रहने में मदद मिलती है।