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प्रेग्नेंट महिला को रात को रोटी खानी चाहिए या चावल

यह तो आप सभी जानते होंगे की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपनी डाइट में हेल्दी फूड्स की मात्रा को बढ़ा लेना चाहिए। क्योंकि जितना महिला हेल्दी फूड्स का सेवन करती है उतना ही गर्भ में पल रहे शिशु की ग्रोथ को बढ़ाने और प्रेग्नेंट महिला के एनर्जी लेवल को बढाए रखने में मदद मिलती है। लेकिन साथ ही हर खाने पीने की चीज को लेकर प्रेग्नेंट महिला के मन में सवाल भी रहते हैं की कौन सी चीजों को कितनी मात्रा में लेना चाहिए।

क्योंकि महिला जितना सही मात्रा में अपनी डाइट को लेती है उतना ही महिला के शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को सही रहने में मदद मिलती है। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान रात के समय महिला को रोटी का सेवन करना चाहिए या चावल का सेवन करना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

क्या प्रेगनेंसी के दौरान चावल खाना सेफ होता है?

जी हाँ, प्रेगनेंसी के दौरान चावल खाना बिल्कुल सेफ होता है क्योंकि चावल में कैल्शियम, थायमिन, फाइबर, विटामिन डी जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भवती महिला और शिशु दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। ऐसे में महिला को यदि चावल पसंद है तो महिला बिना किसी डर के रोटी के साथ राइस को भी अपनी डाइट का अहम हिस्सा बना सकती है।

प्रेगनेंसी में कौन सा चावल खाएं सफ़ेद या ब्राउन?

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला का सफ़ेद चावल खाने का मन है तो महिला सफ़ेद चावल खा सकती है साथ ही यदि महिला ब्राउन राइस खाने का मन है तो महिला ब्राउन राइस भी खा सकती है। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान सफ़ेद और ब्राउन दोनों ही तरह के राइस खाना बिल्कुल सेफ होता है। और दोनों से ही महिला को पोषक तत्व मिलते हैं जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।

गर्भवती महिला को रात को रोटी खानी चाहिए या चावल?

जैसा की ऊपर आपने जाना की चावल में भी पोषक तत्व भरपूर होते हैं तो इसीलिए महिला चाहे तो कभी कभार रात में चावल का सेवन कर सकती है। लेकिन यदि ठण्ड का मौसम है, महिला को खांसी जुखाम कफ आदि की समस्या है तो महिला को रात के समय चावल खाने से बचना चाहिए। क्योंकि रात के समय चावल खाने से महिला को यह दिक्कत बढ़ सकती है।

साथ ही महिला को रात के समय यदि महिला रोटी खाती है तो यह चावल की अपेक्षा ज्यादा फायदेमंद होता है क्योंकि रोटी में चावल से ज्यादा फाइबर होता है। जिसकी वजह से रोटी को पचाना महिला के लिए ज्यादा आसान होता है। लेकिन कभी कभी आप चावल भी खा सकती है परतु चावल ले साथ आधी या एक रोटी जरूर खाएं।

इसके अलावा रात के समय चावल खाएं तो उसमे सब्जियों की मात्रा की अधिकता रखें ताकि चावल आपको ज्यादा फायदा पहुंचा सकें। साथ ही जिन महिलाओं को कब्ज़ आदि की समस्या रहती है तो वो खिचड़ी के रूप में चावल का सेवन करें क्योंकि खिचड़ी एक हल्का आहार है जिसे हज़म करने से आसानी होती है।

चावल का सेवन करते समय इन बातों का ध्यान रखें

  • प्रेग्नेंट महिला चावल में पोषक तत्वों की मात्रा को बढ़ाने के लिए इसमें अलग अलग तरह की सब्जियों को मिक्स कर सकती है ऐसा करने से चावल में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है।
  • चावल में पोषक तत्वों की मात्रा को बढ़ाने के लिए महिला को इसे ओलिव आयल में फ्राई करना चाहिए।
  • गर्भवती महिला इस बात का ध्यान रखें की महिला का जब भी चावल खाने का मन हो तो महिला ताजे चावल ही बनाएं और फ्रिज में रखें ठन्डे व् बासी चावल का सेवन नहीं करें क्योंकि इसकी वजह से महिला को पेट सम्बन्धी समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • आप चाहे तो खिचड़ी के रूप में चावल का सेवन भी कर सकते हैं बस ध्यान रखें की खिचड़ी में दाल की मात्रा को ज्यादा रखें। साथ ही खिचड़ी एक हल्का भोजन भी है जो प्रेगनेंसी के दौरान पेट सम्बन्धी समस्या से बचे रहने में मदद करती है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान महिला रात के समय महिला को चावल खाने चाहिए या रोटी उससे जुडी जानकारी, यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि प्रेगनेंसी के दौरान आपके शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को सही रहने में मदद मिल सके।

होंठों को सूंदर बनाने के उपाय

चेहरे की सुंदरता और भी बढ़ जाती है जब आपके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान हो और मुस्कान तब और भी प्यारी हो जाती है जब आपके होंठ गुलाबी हो। लेकिन कई बार केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल करने के कारण, होंठों की स्किन में सूखापन होने के कारण, धूम्रपान की वजह से, सही पोषण नहीं मिलने के कारण, खून की कमी होने की वजह से, होंठ काले पड़ने लगते हैं।

या कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके होंठ जन्म से ही थोड़े काले होते हैं लेकिन उन्हें बहुत शौक होता है की उनके होंठ गुलाबी हो। क्या आप भी चाहते हैं की आपके होंठ खूबसूरत हो जाएँ? यदि हाँ, तो आइये अब इस आर्टिकल में हम कुछ आपको कुछ ऐसे आसान और असरदार उपाय बताने जा रहे हैं, जिन्हे ट्राई करने से आपके होंठों के रंग को गुलाबी करने और सॉफ्ट रखने में मदद मिलती है।

निम्बू

विटामिन सी से भरपूर निम्बू का इस्तेमाल करने से चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों को दूर करने के साथ होंठों की सुंदरता को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप दिन दो बारे थोड़ा थोड़ा निम्बू का रस ऊँगली या रुई की मदद से होंठों पर लगाएं और उसके बाद उसे पांच मिनट के लिए छोड़ दें। ऐसा करने के बाद साफ़ पानी से उसे धो लें और होंठों मॉइस्चराइजर लगाएं कुछ दिनों तक लगातार इस उपाय को करने पर आपको इसका फायदा दिखाई देने लगेगा।

हल्दी और मलाई

औषधीय गुणों से भरपूर हल्दी में एंटी बैक्टेरियल और एंटी इन्फ्लामेट्री गुण मौजूद होते हैं जो स्किन सम्बन्धी समस्या को दूर करने में मदद करते हैं। और मलाई का इस्तेमाल करने से भी स्किन की कोमलता को बरकरार रखने में मदद मिलती है ऐसे में हल्दी और मलाई का यदि साथ में इस्तेमाल किया जाये तो इससे होंठों की सुंदरता को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप थोड़ी सी हल्दी और थोड़ी सी मलाई को साथ मिलाकर एक पेस्ट बनाएं और इस पेस्ट की पतली लेयर को होंठों पर लगाकर रातभर के लिए छोड़ दें, उसके बाद सुबह उठकर धो दें, कुछ ही दिनों के नियमित इस्तेमाल के बाद आपको इसका असर दिखने लगेगा।

नारियल तेल

रोजाना नारियल तेल को दिन में दो बार लिप ग्लॉस की की तरह होंठों पर लगाएं इससे होंठों को पोषण मिलेगा जिससे होंठों की रंगत में निखार आने के साथ होंठों को मुलायम बने रहने में भी मदद मिलेगी।

केसर

थोड़े से कच्चे दूध में पांच छह केसर के रेशों को अच्छे से पीसकर मिक्स कर लें मिक्स करने के बाद आप उसे होंठों पर लगाएं ऐसा रात को सोने से पहले पांच से छह बार करें जैसे ही दूध सूख जाये तो होंठों पर दूध वापिस लगाएं। ऐसा एक हफ्ते तक नियमित करने के बाद ही आपको थोड़ा थोड़ा फ़र्क़ दिखाई देने लगेगा।

गुलाबजल

रोजाना सुबह और रात को सोने से पहले गुलाबजल को होंठों पर लगाएं ऐसा करने से भी होंठों की सुंदरता को बढ़ाने में मदद मिलती है।

बादाम का तेल

बादाम का तेल विटामिन इ से भरपूर होता है और विटामिन इ स्किन सम्बन्धी परेशानियों को दूर करने में आपकी मदद करता है। ऐसे में होंठों की स्किन की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए भी बादाम के तेल का इस्तेमाल करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप बादाम के तेल को सुबह शाम होंठों पर लगाएं इससे होंठों को मुलायम रहने में मदद मिलेगी साथ ही होंठों की सुंदरता भी बढ़ेगी।

चुकंदर

चुकंदर खाने से शरीर में आयरन की मात्रा तो बढ़ती है साथ ही चुकंदर के रस को नियमित रूप से होंठों पर लगाने से होंठों रंगत भी अच्छी होती है। ऐसे में आपको चुकंदर का सेवन करने के साथ चुकन्दर के रस को भी नियमित रूप से होंठों पर लगाना चाहिए।

अनार के दाने

होंठों की सुंदरता को बढ़ाने के लिए आप लाल लाल अनार के दानों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं इसके इस्तेमाल के लिए अनार के दानों को पीसकर उसमे थोड़ी मलाई मिलाएं। उसके बाद इस मिश्रण को होंठों पर लगाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। ऐसा कुछ दिनों तक नियमित करें इससे होंठों की ख़ूबसूरती बढ़ाने के साथ होंठों को मुलायम रखने में भी मदद मिलेगी।

नारियल पानी

नारियल पानी, खीरे का रस, निम्बू का रस, इन तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर दिन में तीन से चारा बारे होंठों पर लगाएं। ऐसा करने से भी होंठों की ख़ूबसूरती को बढ़ाने में मदद मिलती है।

संतरा

संतरे के एक टुकड़े को लेकर उसके अंदर का रसीला हिस्सा अलग कर लें और उस रसीले हिस्से से होंठों को रगड़ें। ऐसा करने से भी होंठों की सुंदरता को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

शहद

शहद का इस्तेमाल करने से भी होंठों को कोमल बनाने के साथ गुलाबी बनाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप रातभर होंठों पर शहद लगाकर छोड़ दें और सुबह उठकर होंठों को धो लें। ऐसा कुछ दिनों तक नियमित रूप से करें। ऐसा करने से होंठों की सुंदरता को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

स्ट्रॉबेरी

स्ट्रॉबेरी जिस तरह दिखने में लाल लाल होती है वैसे ही इससे होंठों की रंगत भी लाल लाल हो जाती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप एक स्ट्रॉबेरी को पीस लें, उसके बाद इसमें थोड़ा एलोवेरा जैल, थोड़ा शहद मिलाकर एक पेस्ट बनाएं अब इस पेस्ट को होंठों पर लगाकर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। उसके बाद होंठों को साफ़ कर लें ऐसा करने से होंठों को खूबसूरत बने रहने में मदद मिलती है।

गुलाब की पंखुडिया

दो तीन गुलाब की पंखुडिया लेकर अच्छे से पीस लें और उसके बाद इसे थोड़े से कच्चे दूध में मिक्स करें। मिक्स करने के बाद इस पेस्ट को होंठों पर लगाएं। और थोड़ी देर के लिए इसे होंठों पर छोड़ दें। ऐसा करने के थोड़ी देर बाद होंठों को धो लें यह उपाय कुछ दिनों तक लगातार करें ऐसा करने से होंठों की सुंदरता को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

नाभि में डालें सरसों का तेल

रोजाना अपनी नाभि में दो बूंदे सरसों के तेल की डालें ऐसा करने से न तो आपके होंठ कभी फटेंगे, आपके होंठों की नमी बरकरार रहेगी साथ ही होंठों की सुंदरता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

भरपूर पीएं पानी

स्किन से जुडी समस्याओं का कारण कई बार शरीर में होने वाली पानी की कमी भी होती है। ऐसे में पानी का भरपूर सेवन करने से स्किन सम्बन्धी परेशानी को दूर करने में मदद मिल सकती है। तो यदि आप भरपूर पानी का सेवन करती है तो इससे आपके होंठों की स्किन में नमी बरकरार रहती है जिससे होंठों को मुलायम रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से होंठों के रंग को गुलाबी होने में मदद मिलती है। इसके अलावा यदि आपकी अपने होंठों पर जीभ लगाने की आदत है, रात को आप लिपस्टिक लगाकर ही सो जाती हैं, तो आपको अपनी इन आदतों में बदलाव करना चाहिए क्योंकि इनकी वजह से भी आपके होंठों की सुंदरता में कमी आती है।

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बेबी को खाना खिलाते समय यह गलतियां नहीं करें?

जन्म के छह महीने तक शिशु को माँ का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है और इसके अलावा शिशु को और कुछ नहीं खिलाना या पिलाना चाहिए। लेकिन छह महीने के बाद धीरे धीरे शिशु को कुछ कुछ खिलाना शुरू किया जा सकता है जैसे की केला, उबला आलू, फलों का रस, दाल का पानी, खिचड़ी, दलिया, दूध और बिस्कुट, दही, आदि।

लेकिन शिशु को जब आप खाना खिलाना शुरू करती है तो ऐसे में आपको बहुत सी बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है। ताकि शिशु को पाचन सम्बन्धी या सेहत सम्बन्धी कोई समस्या नहीं हो। तो आइये अब इस आर्टिकल में ऐसी गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो बेबी को खाना खिलाते समय बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।

बच्चे को ज्यादा ठोस आहार नहीं दें

छह महीने तक शिशु के दांत अच्छे से विकसित नहीं होते हैं और न ही शिशु को चबाने की प्रक्रिया का पता होता है वह धीरे धीरे शिशु को पता चलता है। ऐसे में ज्यादा ठोस आहार शिशु को खाने के लिए नहीं दें बल्कि जो कुछ भी दें वो शिशु को मैश करके यानी पीसकर खिलाएं। साथ ही थोड़ा थोड़ा करके शिशु को खिलाएं ताकि शिशु आराम से उसे खा सकें।

ज्यादा मीठा नहीं खिलाएं

एक साल तक का होने से पहले शिशु को ज्यादा मीठा नहीं खिलाना चाहिए क्योंकि इसके कारण उसके दांतों के विकास में समस्या आ सकती है। साथ ही बच्चे के शरीर में कैलोरी की अधिकता हो सकती है जिसकी वजह से आपका बच्चा मोटापे जैसी समस्या का शिकार हो सकता है। यहां तक की हो सके तो बच्चे को दूध भी बिना मीठे का देना चाहिए।

बासी खाना नहीं दें

जब भी शिशु को कुछ खिलाना है तो उसके लिए थोड़ा सा ताजा ही बनाएं बासी, फ्रिज में रखना खाना, पहले से कटे पड़े फलों का रस आदि शिशु को नहीं दें। क्योंकि इसके कारण शिशु को पेट सम्बन्धी समस्या होने का खतरा होता है। साथ ही ऐसे आहार में पोषक तत्व नहीं होते हैं जिसकी वजह से शिशु को ऐसे आहार का सेवन करने का कोई फायदा भी नहीं मिलता है।

बच्चे को लिटाकर खाना नहीं खिलाएं

जब भी बच्चे को खाना खिलाना हो तो बच्चे को बिठाकर खाना खिलाएं और गलती से भी लिटाकर बच्चे को खाना नहीं खिलाएं। क्योंकि लिटाकर खाना खिलाने से बच्चे के गले में खाना फंसने का डर रहता है।

बच्चे को नमक भी अधिक नहीं दें

छोटे बच्चों को नमक भी अधिक नहीं देना चाहिए क्योंकि छोटे बच्चों की किडनी को पूरी तरह विकसित होने में थोड़ा समय लगता है। जिसकी वजह से बच्चे के शरीर में पानी की कमी जैसी समस्या हो सकती है। आपको शुरुआत में बिल्कुल नहीं और धीरे धीरे शिशु को नमक देने की शुरुआत करनी चाहिए।

उन खाद्य पदार्थों को शिशु को नहीं खिलाएं जिससे गैस बनती है

छोटे बच्चों को ऐसी चीजें बिल्कुल नहीं खिलाएं जिनसे गैस बनने की सम्भावना होती है जैसे की गोभी। क्योंकि अभी बच्चे का पाचन तंत्र उतना मजबूत नहीं होता है जिसकी वजह से शिशु को पेट में गैस के साथ दर्द, भूख नहीं लगने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

बच्चे के साथ जबरदस्ती नहीं करें

यदि आप बच्चे को खाना खिला रही है और बच्चा अब खाना मुँह से निकाल रहा है तो इसका मतलब यह हैं की बच्चे को और भूख नहीं है। साथ ही आप बच्चे को जबरदस्ती नहीं खिलाएं नहीं तो बच्चे ने जो भी खाया है वो भी उल्टी करके बाहर निकाल देगा।

जल्दी जल्दी नहीं खिलाएं

बच्चे को खाना खिलाते समय बिल्कुल भी तेजी नहीं करें बल्कि शिशु को आराम आराम से थोड़ा थोड़ा करके खिलाएं। ताकि शिशु आराम से खाना खा सके और शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

शिशु को फूंक मारकर नहीं खिलाएं

बच्चे का खाना यदि गर्म है तो उसे पहले किसी खुले बर्तन में डालकर ठंडा कर लें और उसके बाद शिशु को खिलाएं। क्योंकि यदि आप शिशु को फूंक मारकर खिलातें हैं तो फूंक मारते समय आपके मुँह के जर्म्स खाने में आ जाते हैं जो शिशु की सेहत पर गलत असर डाल सकते हैं।

साफ़ सफाई का ध्यान रखें

बच्चे को खाना खिलाते समय, बच्चे के लिए खाना बनाते समय साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखें। ताकि शिशु को हर तरह के संक्रमण व् बिमारियों से सुरक्षित रखने में मदद मिल सके।

शिशु के खाने में थोड़ा गैप रखें

बच्चे को एक बार खाना खिलाने के बाद दो से तीन घंटे का गैप जरूर रखें ताकि बच्चे को अच्छे से भूख लग सके। यदि आप थोड़ी थोड़ी देर में बच्चे को खिलाएंगे तो इससे न ही बच्चा अच्छे से खा पायेगा और न ही उसका रूटीन बनेगा। ऐसे में आप बच्चे को अच्छे से भूख लगने दें उसके बाद ही बच्चे को खिलाएं।

सी फ़ूड या नॉन वेज नहीं खिलाएं

शुरुआत में भी बेबी को नॉन वेज और सी फ़ूड नहीं खिलाएं। क्योंकि इन्हे पचाना शिशु के लिए मुश्किल हो सकता है जिसकी वजह से शिशु को पेट सम्बन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

गाय का दूध

ऐसा माना जाता है की जब तक बच्चा एक साल का नहीं हो जाये उसे गाय का दूध नहीं देना चाहिए। बल्कि यदि आप अपने बच्चे को फीड करवाती हैं तो आप अपना ही दूध बच्चे को पिलायें क्योंकि बच्चे के लिए गाय के दूध से ज्यादा माँ का दूध फायदेमंद होता है।

शहद

छोटे बच्चों को शहद चटाने से भी बचना चाहिए। क्योंकि शहद में ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो बच्चे के लिए नुकसानदायक होते हैं। ऐसे में बच्चे के बेहतर विकास के लिए एक साल तक शिशु को शहद खिलाने से भी बचना चाहिए।

डकार नहीं दिलाना

जी तरह बच्चे को दूध पिलाने के बाद आप डकार दिलवाते थे उसी तरह खाना खाने के बाद भी बच्चे को कंधे से जरूर लगाएं ताकि बच्चा डकार ले सके और बच्चे को खाना हज़म करने में आसानी हो सके।

तो यह हैं कुछ गलतियां जो बेबी को खाना खिलातें समय महिला को नहीं करनी चाहिए क्योंकि इनके कारण शिशु को दिक्कत हो सकती है। यदि आपका भी बेबी छोटा है तो आप भी इन सभी बातों का ध्यान रखें ताकि आपके बच्चे को किसी तरकी परेशानी नहीं हो।

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प्रेगनेंसी में पीठ दर्द की समस्या क्यों आती है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की उल्टियां होना, मॉर्निंग सिकनेस, पेट दर्द, पैरों में सूजन, थकावट, कमजोरी, पेट दर्द, पीठ दर्द, आदि। प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली इन परेशानियों का अनुभव कुछ महिलाएं तीन महीने तक करती है और उसके बाद महिला की परेशानियां कम होने लगती है, साथ ही कुछ महिलाएं ऐसी होती है जो प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक इन परेशानियों का सामना करती है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली पीठ दर्द की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसका सामना अधिकतर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के आखिर तक कर सकती है।

गर्भावस्था में पीठ में दर्द होने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान पीठ में दर्द की समस्या होने का कोई एक कारण नहीं होता है बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिनकी वजह से महिला को पीठ दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाएं तो इस दर्द को सहन कर लेती है लेकिन कुछ महिलाओं को असहनीय दर्द हो सकता है। तो आइये अब जानते हैं की किन कारणों की वजह से महिला को पीठ में दर्द की समस्या हो सकती है।

हार्मोनल बदलाव

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते हैं और इन हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का अनुभव करना पड़ सकता है। जिनमे से पीठ दर्द की समस्या होना भी आम बात होती है।

पहले से ही यह समस्या हो

कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी से पहले ही पीठ में दर्द की समस्या होती है और जिन महिलाओं को पहले से ही यह समस्या होती है। उन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा पीठ में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

मांसपेशियों पर प्रभाव पड़ने के कारण

गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट व् पीठ के पास की मांसपेशियां अलग होने लगती है जिसकी वजह से भी गर्भवती महिला को पीठ में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है।

लम्बे समय तक एक ही पोजीशन में बैठने के कारण

यदि प्रेग्नेंट महिला एक ही पोजीशन में बहुत देर तक बैठी रहती है तो इस कारण भी महिला को पीठ में दर्द, पैरों में दर्द, पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

ज्यादा देर तक खड़े रहने के कारण

प्रेग्नेंट महिला का वजन बढ़ने के कारण पेट व् पीठ की मांसपेशियों पर असर पड़ता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला ज्यादा देर तक खड़ी रहती है तो इसके कारण पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव ज्यादा महसूस होता है जिसके कारण महिला को पीठ में दर्द की समस्या होती है।

वजन बढ़ने की वजह से

प्रेगनेंसी के दौरान जब महिला का पेट बाहर की और निकलता है तो उस वजन को स्पोर्ट देने के लिए रीढ़ की हड्डी एक अहम रोल अदा करती है। ऐसे में वजन जितना ज्यादा बढ़ता रहता है उतना ही महिला को पीठ में दर्द की समस्या का अनुभव अधिक हो सकता है।

गलत पोजीशन में उठने बैठने के कारण

गर्भावस्था के दौरान महिला को उठने बैठने आदि का अच्छे से ध्यान रखने के लिए कहा जाता है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान थोड़ी सी लापरवाही महिला की दिक्कत बढ़ा सकती है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला गलत पोजीशन में उठती बैठती है तो इस कारण भी महिला को पीठ में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

पोषक तत्वों की कमी के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला अपनी डाइट अच्छे से नहीं लेती है तो इस कारण महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। और गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण महिला को कमजोरी जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। और कमजोरी महसूस होने के कारण गर्भवती महिला को पीठ दर्द की समस्या होना भी आम बात होती है।

सही पोजीशन में न सोने के कारण

गर्भवती महिला यदि गलत पोजीशन यानी की सीधा होकर सोती है तो इस कारण गर्भाशय का पूरा भार रीढ़ की हड्डी पर आ जाता है। जिसकी वजह से महिला को पीठ में दर्द की समस्या हो सकती है।

तनाव

गर्भावस्था के दौरान जो महिलाएं तनाव से ग्रसित हो जाती है उन महिलाओं को भी इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

भारी सामान उठाने के कारण

यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान भारी सामान उठाती है या झुककर काम करती है। तो इस कारण भी महिला को पीठ में होने वाले दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

पीठ के दर्द की समस्या से बचाव के उपाय

गर्भवती महिला को यदि पीठ में दर्द की समस्या अधिक होती है तो कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके महिला इस समस्या से निजात पा सकती है। जैसे की:

  • शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं होने दें जिससे शरीर में भरपूर ऊर्जा रहे और महिला को कमर दर्द के साथ बॉडी के अन्य पार्ट्स में भी दर्द की समस्या से निजात मिल सके।
  • प्रेगनेंसी में हल्का फुल्का व्यायाम करने से भी पीठ के दर्द की समस्या से राहत पाने के मदद मिलती है।
  • मैटरनिटी बेल्ट का इस्तेमाल करें इससे पीठ व् पेट दोनों को स्पोर्ट मिलता है जिससे कमर दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • पीठ दर्द की समस्या से निजात पाने के लिए महिला पीठ की मालिश भी कर सकती है।
  • गलत पोजीशन में नहीं सोएं और आरामदायक नींद लेने के लिए आप प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल कर सकती है।
  • बहुत देर तक एक ही पोजीशन में न तो बैठें और न ही खड़े हो।
  • उठते बैठते समय तेजी नहीं करें बल्कि किसी चीज का सहारण लेकर उठे बैठें।
  • भारी सामान नहीं उठायें।
  • झुककर काम करने से बचें।
  • ज्यादा टाइट कपडे नहीं पहनें।
  • तनाव से बचें और जितना हो सके खुश रहने की कोशिश करें।
  • नींद भरपूर लें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान पीठ दर्द होने के कारण व् इस परेशानी से बचाव के लिए कुछ उपाय, यदि आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान यह समस्या हो रही है। तो आप भी इन टिप्स को ध्यान में रखकर इस समस्या से निजात पा सकते हैं। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला इस समस्या से निजात पाने के लिए बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवाई का सेवन नहीं करें।

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बड़ी उम्र में माँ बनने में क्या-क्या परेशानियां होती हैं?

माँ बनना हर महिला के जीवन में सबसे ज्यादा बदलाव लाने वाला मोड़ होता है। क्योंकि माँ बनने के बाद महिला को अपने बारे में सोचने से पहले अपने बच्चे के बारे में सोचना पड़ता है। और इसी के चलते आज कल लडकियां पहले अपने करियर के बारे में सोचती है की पहले अच्छे से सेटल हो जाएँ उसके बाद शादी करेंगी। और करियर के बारे में सोचने के चलने उनकी शादी की उम्र अब अठाइस से तीस वर्ष होती है जा रही है उसके बाद शादी के पहले एक दो साल वो बच्चा प्लान करने के बारे में नहीं सोचती है और फिर उसके बाद बच्चा पैदा करने के बारे में प्लान करती है। जिससे महिला की उम्र बढ़ती जाती है और बढ़ती उम्र में गर्भधारण होने के बाद महिला को बहुत दिक्कतें आने का खतरा रहता है।

बड़ी उम्र में गर्भधारण करने के कारण

  • शादी देरी से होने की वजह से ऐसा हो सकता है।
  • कुछ महिलाएं शादी के तुरंत बाद बच्चा प्लान नहीं करती है और एक गैप के बाद ऐसा करती है।
  • कई बार महिलाओं को शारीरिक समस्या के चलते भी देरी से गर्भधारण होता है।

ज्यादा उम्र में गर्भधारण करने के कारण होने वाली दिक्कतें

यदि कोई महिला तीस के बाद गर्भधारण करती है तो इस उम्र में महिला के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं, महिला के शरीर में बदलाव आ जाता है, आदि। तो ऐसे में गर्भधारण करने में महिला को कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे की:

गर्भधारण में दिक्कत

सबसे पहले तो बड़ी उम्र में यदि महिला माँ बनने के बारे में सोचती है तो महिला को कन्सीव करने में ही बहुत सनस्य आ सकती है। और उन महिलाओं को तो ज्यादा परेशानियां होती है जो गर्भधारण न होने की दवाइयों का सेवन कर रही होती है।

गर्भपात का खतरा

जो महिलाएं बड़ी उम्र में गर्भधारण करती है उन महिलाओं का गर्भपात होने का खतरा अधिक होता है इसीलिए उन्हें ज्यादा देख रेख की जरुरत पड़ती है और ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है।

शारीरिक परेशानियां अधिक होती है

अधिक उम्र में गर्भधारण करने पर महिला को शारीरिक परेशानियां जैसे की पीठ में दर्द, हाई ब्लड प्रैशर, जेस्टेशनल डाइबिटीज़, शरीर में दर्द, सूजन, घुटनों में दर्द आदि होने का खतरा ज्यादा हो सकता है।

नोर्मल डिलीवरी के चांस होते हैं कम

बड़ी उम्र में गर्भधारण करने पर महिला को परेशानियां अधिक होने के साथ नोर्मल डिलीवरी होने के चांस भी बहुत कम होते हैं। अधिक उम्र में गर्भधारण करने पर ज्यादातर केस में सिजेरियन डिलीवरी ही करवानी पड़ती है।

समय से पहले डिलीवरी का खतरा

बड़ी उम्र में गर्भधारण करने पर महिला को समय से पहले बच्चे के जन्म होने जैसी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। और यदि महिला की डिलीवरी समय से पहले होती है तो इस कारण बच्चा प्रीमैच्योर होता है। जिसकी वजह से जन्म के बाद बच्चे को और भी ज्यादा केयर की जरुरत पड़ सकती है।

थकान व् कमजोरी ज्यादा हो सकती है

अधिक उम्र में गर्भधारण होने पर महिला को थकान, कमजोरी, हमेशा सुस्त महसूस करना जैसी दिक्कत भी अधिक हो सकती है। ऐसा सभी महिलाओं के साथ हो यह जरुरी नहीं है लेकिन जिन महिलाओं को किसी तरह की शारीरिक परेशानी हो उन्हें यह दिक्कत अधिक हो सकती है।

क्या हर बड़ी उम्र की महिला के साथ ऐसा होता है?

जी नहीं, हर बड़ी उम्र में माँ बनने वाली महिला के साथ ऐसा हो ऐसा जरुरी नहीं होता है। कुछ बड़ी उम्र की महिलाओं की डिलीवरी बिल्कुल नोर्मल होती है और उन्हें किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होती है। लेकिन अधिकतर केस में महिला को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

माँ बनने की सही उम्र क्या होती है?

यदि किसी महिला की शादी बाइस या तेईस वर्ष की उम्र में हो जाती है तो महिला की तेईस वर्ष की उम्र से लेकर अठाइस वर्ष तक माँ बनने की सही उम्र होती है। लेकिन यदि महिला इस उम्र के बाद शादी करती है तो उसके बाद भी महिला चाहे तो साथ साथ गर्भधारण की कोशिश कर सकती है क्योंकि तीस की उम्र होने के बाद महिला को गर्भधारण में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

बड़ी उम्र में गर्भधारण करने पर किन बातों का ध्यान रखें

  • महिला को समय समय पर डॉक्टर से जांच करवाते रहना चाहिए।
  • खान पान में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
  • थोड़ा बहुत व्यायाम भी जरूर करना चाहिए ताकि आपको एक्टिव रहने में मदद मिल सकें।
  • ब्लड शुगर, ब्लड प्रैशर आदि मापते रहना चाहिए।
  • किसी भी दिक्कत के होने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
  • आपकी उम्र ज्यादा है इस बात को अपने दिमाग पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
  • प्रेगनेंसी व् प्रसव की जानकारी इक्कठी करनी चाहिए जिससे आपको प्रेगनेंसी को आसान बनाने में मदद मिल सकें।
  • नींद भरपूर लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ परेशानियां जो अधिक उम्र में गर्भधारण करने पर महिला को हो सकती है। ऐसे में जितना हो सके महिला को सही उम्र में माँ बनने का फैसला करना चाहिए या फिर अपनी सेहत का हमेशा ध्यान रखना चाहिए। ताकि यदि आप बड़ी उम्र में भी माँ बनने का सोच रहे हो तो आपको प्रेगनेंसी में दिक्कतें नहीं आएं।

What are the difficulties in becoming a mother at an older age?

प्रेग्नेंट महिला को रात को क्या-क्या नहीं खाना चाहिए?

प्रेगनेंसी महिला के लिए एक ऐसा समय होता है जहां महिला को छोटी छोटी बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला अकेली नहीं होती है बल्कि गर्भ में पल रहा शिशु भी अपने विकास के लिए अपनी माँ पर निर्भर करता है। ऐसे में महिला जो भी करती है उसका असर माँ के साथ बच्चे पर भी पड़ता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

आज इस आर्टिकल में हम प्रेग्नेंट महिला के लिए भी एक खास टिप्स शेयर करने जा रहे हैं जिसका ध्यान रखना महिला के लिए बहुत जरुरी होता है। और वो टिप्स है की गर्भवती महिला को रात को समय से भोजन तो करना चाहिए लेकिन भोजन में महिला को ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जिससे महिला को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की ऐसी कौन सी चीजें हैं जो गर्भवती महिला को रात को नहीं खानी चाहिए क्योंकि उन्हें खाने से महिला को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

मसालेदार आहार

ऐसा आहार जिसमे तेल मसाले अधिक हो, फ्राइड हो, जंक फ़ूड हो उस आहार का सेवन महिला को रात को नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसी चीजों को हज़म करने में महिला को दिक्कत हो सकती है जिसकी वजह से गैस की परेशानी का सामना महिला को करना पड़ सकता है।

नॉन वेज

यदि प्रेगनेंसी के दौरान महिला का नॉन वेज खाने का मन करता है तो महिला को उसे दिन में ही खाना चाहिए। क्योंकि रात के समय नॉन वेज खाने से उसे पचाने में महिला को मुश्किल होती है जिसकी वजह से महिला अच्छे से नींद भी नहीं ले पाती है।

जरुरत से ज्यादा मीठा

रात को कुछ लोगो की खाने के बाद मीठा खाने की आदत होती है यदि आपकी भी यह आदत है तो अपनी इस आदत को आपको आज ही बदल देना चाहिए। क्योंकि रात को मीठा खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है साथ ही महिला को अनिंद्रा जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

दही

रात के समय गर्भवती महिला को दही खाने से भी बचना चाहिए और छाछ भी नहीं पीनी चाहिए क्योंकि दही की तासीर ठंडी होती है। जिसके कारण महिला को गले में इन्फेक्शन, जुखाम जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

चाय या कॉफ़ी

रात को सोने से पहले महिला को चाय या कॉफ़ी का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला को बेचैनी, घबराहट, अनिंद्रा जैसी समस्या हो सकती है। और महिला को रात भर परेशान होना पड़ सकता है।

चॉकलेट

गर्भवती महिला को रात को सोने से पहले चॉकलेट का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि चॉकलेट में कैफीन की अधिकता होती है और कैफीन के कारण महिला को अनिद्रा की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

फल

यदि आपका रात के समय फल खाने का मन करता है तो आपको अपने ऊपर कण्ट्रोल करना चाहिए। क्योंकि रात को फल खाने से भी आपको दिक्कत हो सकती है क्योंकि फलों को पचाने में महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

कच्चा प्याज

रात के समय जरुरत से ज्यादा कच्चा प्याज खाने से भी गर्भवती महिला को बचना चाहिए क्योंकि कच्चा प्याज खाने के कारण महिला को खट्टी डकार, एसिडिटी जैसी समस्या हो सकती है। जिसके कारण महिला को रात को अच्छे से नींद नहीं आ पाती है और महिला को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

जिन खाद्य पदार्थों को खाने से आपको गैस बनती है

कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जिन्हे खाने के कारण महिला को परेशानी हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को उन सभी खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए जिन्हे खाने से महिला को गैस की समस्या होती है। जैसे की गोभी, मूली, आदि खाने से गैस की समस्या हो सकती है।

जरुरत से ज्यादा नहीं खाएं

गर्भवती महिला को जरुरत से ज्यादा नहीं खाना चाहिए क्योंकि जरुरत से ज्यादा खाने के कारण के कारण भोजन को हज़म करने में महिला को दिक्कत हो सकती है। खासकर रात के समय तो बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे महिला को पेट सम्बन्धी समस्या होने के साथ अनिंद्रा की समस्या से भी परेशान होना पड़ सकता है।

ठंडा दूध

गर्भवती महिला को रात को सोने से पहले ठंडा दूध नहीं पीना चाहिए बल्कि महिला को थोड़ा गुनगुना दूध पीना चाहिए। क्योंकि ठंडा दूध पीने से पाचन क्रिया बुरी तरह प्रभावित होती है।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनका सेवन रात के समय महिला को नहीं करना चाहिए। इसके अलावा महिला को रात को सोने से दो घंटे पहले अपने आहार का सेवन कर लेना चाहिए ताकि खाने को हज़म होने में मदद मिल सके। इसके अलावा खाने के तुरंत बाद महिला को नहीं सोना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से महिला की पेट सम्बन्धी परेशानियाना बढ़ सकती है।

सावन के सोमवार व्रत करने के नियम

हिन्दू धर्म में सावन माह का बहुत अधिक महत्व है क्योंकि यह माह भक्तों के प्यारे भोले बाबा को समर्पित होता है। साल 2021 में सावन माह 25 जुलाई से शुरू हो चूका है। सावन माह का महिला बहुत ही धार्मिक होता है और इस माह में मंदिरों में बहुत रौनक देखने को मिलती है। खासकर सोमावर के दिन तो भारी संख्या में लोग शिवलिंग पर जल अर्पित करने और अभिषेक करने पहुंचते हैं। सावन के महीने में आने वाले सोमवार को व्रत रखने की परम्परा होती है और बहुत से लोग सावन के सोमवार का व्रत जरूर करते हैं।

साथ ही ऐसा भी माना जाता है की सावन माह में आने वाले सोमवार का व्रत यदि कोई करता है तो उसे साल भर के सोमवार व्रत रखने का फल मिलता है। इसके अलावा ऐसी मान्यता है की ऐसा करने से घर में सुख शांति का वास रहता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको सावन के सोमवार व्रत रखने की विधि व् नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं।

सावन के सोमवार व्रत रखने की पूजा विधि

  • व्रत वाले दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
  • उसके बाद घर की साफ़ सफाई करें, नित्य क्रिया क्रम करने के बाद नहा धोकर साफ स्वच्छ वस्त्र धारण करके तैयार हो जाएँ।
  • फिर घर में पूजा करने के स्थान पर भोलेबाबा और माँ पार्वती के सामने दीप जलाएं और हाथ जोड़कर व्रत करने का संकल्प लें।
  • उसके बाद आस पास कहीं शिव मंदिर है तो वहां जाएँ और शिवलिंग पर जल (पानी और दूध मिलाकर जल बनाएं) अर्पित करें। शिवलिंग का अभिषेक करें।
  • शिवलिंग के साथ पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय, नंदी जी का भी जलाभिषेक करें।
  • उसके बाद फूल, बेल पत्र, धतूरा, भांग, गन्ना, बेर या अन्य कोई फल आदि चीजें शिवलिंग पर अर्पित करें।
  • ध्यान रखें की पूजा करते समय शिव मंत्र यानी ॐ नमः शिवाय का जाप करते रहें।
  • उसके बाद हो सके तो मंदिर में ही बैठकर कथा पढ़े व् आरती करें नहीं तो आप घर आने के बाद अपने घर के पूजा स्थल के पास बैठकर भी ऐसा कर सकते हैं।
  • कथा व् आरती के साथ शिव चालीसा, रुद्राष्टक का पाठ करें।
  • आरती करने के बाद भोग लगाएं उसके बाद भोग का प्रसाद सभी लोगो में वितरित करें।
  • यदि आपने व्रत किया है तो फिर शाम के समय भोजन करें और व्रत खोल लें ध्यान रखें की भोजन दिन में केवल एक बार ही लेना है।

सावन के सोमवार व्रत रखने के नियम

  • सावन का महिला बहुत ही धार्मिक महीना होता है ऐसे में इस महीने में मास, मदिरा जैसी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • लड़ाई, कलेश, आदि से दूर रहना चाहिए।
  • किसी भी बुराई नहीं करनी चाहिए।
  • जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।
  • दान धर्म के कार्य करने चाहिए।
  • सावन के महीने में लहसुन, प्याज, दही, बैंगन, मूली, मसूर की दाल आदि का सेवन करने से बचना चाहिए।

सावन महीना आरम्भ व् समापन 2021

साल 2021 में सावन का महीना 25 जुलाई से शुरू होकर 22 अगस्त पर ख़त्म होगा।

तो यह है सावन के सोमवार व्रत रखने की विधि व् सावन के सोमवार व्रत रखने के नियम, यदि आप भी सावन के सोमवार के व्रत रखते हैं। तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आपके व्रत को सम्पूर्ण होने में मदद मिल सके।

बालों में मेहँदी लगाने से पहले यह बातें जान लें नहीं तो बाल झड़ जायेंगे

बालों के लिए मेहँदी का इस्तेमाल पुराने समय से ही किया जाता है क्योंकि मेहदी का इस्तेमाल करना बालों की ख़ूबसूरती को बनाएं रखने और बढ़ाने का एक प्राकृतिक तरीका है। मेहँदी लगाने से न केवल बालों में शाइन आती है बल्कि बालों से जुडी समस्याओं से निजात पाने में भी मदद मिलती है।

लेकिन यदि गलत तरीके से बालों मेहँदी का इस्तेमाल किया जाए तो इसका उल्टा असर भी हो सकता है। जैसे की आपके बाल झड़ सकते हैं तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको बालों में मेहँदी लगाने से बाल क्यों झड़ जाते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

जरुरत से ज्यादा मेहँदी लगाने के कारण

यदि आप बालों के लिए मेहँदी का इस्तेमाल करती हैं तो महीने में एक या दो बार मेहँदी लगाना सही होता है लेकिन यदि आप हर दूसरे तीसरे दिन बालों में मेहँदी लगाती है तो इससे बाल ड्राई को सकते हैं। और जब बाल ज्यादा ड्राई रहने लगते हैं तो बालों के झड़ने की समस्या होना आम बात होती है।

लम्बे समय तक बालों में मेहँदी लगाने के कारण

जब भी आप अपने बालों में मेहँदी लगाते हैं तो मेहँदी लगाने के एक या दो घंटे बाद आपको बालों को धो लेना चाहिए। क्योंकि यदि आप चार या पांच घंटे तक या उससे भी ज्यादा बालों में मेहँदी लगाकर रखते हैं तो इसकी वजह से बाल अपनी नमी खोने लगते हैं और बाल ड्राई हो जाते हैं। और बालों के ड्राई होने के कारण बालों का झड़ना आम बात होती है। साथ ही यदि मेहँदी ज्यादा सूख जाती है और उसके बाद आप बालों को धोते हैं तो धोते समय भी आपके बालों के ज्यादा टूटने का खतरा होता है।

मेहँदी लगाने के बाद ऑइलिंग न करने के कारण

जब भी आप मेहँदी लगाते हैं तो ध्यान रखें की उसे धोने के बाद आप बालों में तेल जरूर लगाएं इस बालों की नमी को बरकरार रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि आप ऑइलिंग नहीं करते हैं तो इसकी वजह से बालों में रंग और शाइन तो आ जाती है। परन्तु बाल रूखे रूखे और बेजान भी लगने लगते हैं। और रूखे व् बेजान होने के कारण बालों का झड़ना आम बात होती है।

केमिकल मिक्स मेहँदी लगाने के कारण

आज कल बाजार में अलग अलग कंपनी की मेहँदी आपको मिल जाती है जिसमे केमिकल की मात्रा की अधिकता हो सकती है। और जिस मेहँदी में केमिकल की अधिकता होती है यदि आप उस मेहँदी को अपने बालों में लगाते हैं तो इसकी वजह से बाल अच्छे होने की बजाय कई बार अपनी असली चमक भी खो देते हैं जिसकी वजह से बालों की चमक खोने के साथ बालों के झड़ने, रूखे व् बेजान होने की समस्या हो सकती है। ऐसे में आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप केवल हर्बल मेहँदी का इस्तेमाल करें।

तो यह हैं कुछ तरीके यदि इन तरीकों से बालों में मेहँदी लगाईं जाती है तो इसकी वजह से बाल झड़ने शुरू हो जाते हैं। ऐसे में आपको बालों में मेहँदी लगाने से पहले ऐसा नहीं करना करना चाहिए। इसके अलावा मेहँदी लगाने से आपके बालों को बेहतरीन फायदे मिलें इसके लिए सही तरीके से बालों में मेहँदी लगाने का तरीका अपनाना चाहिए।

Before applying henna in the hair, know these things, otherwise the hair will fall

दीमक भगाने के घरेलू उपाय

दीमक एक ऐसी चीज है जो धीरे धीरे करके आपके घर में फ़ैल जाती है और समय रहते यदि इसका इलाज़ नहीं किया जाये तो इसकी वजह से बहुत नुकसान हो जाता है। खासकर लकड़ी के सामान में दीमक धीरे धीरे बढ़ने लगता है और उसे अंदर तक खोखला कर देता है। जैसे की यह आपके बैड, खिड़की दरवाज़े आदि में लग जाती है और उसके बाद फिर आपके घर में ऊपर नीचे जहां भी लकड़ी का सामान हो वहां यह फैलने लग जाती है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको दीमक लगने के कारण व् इस समस्या से छुटकारा पाने के कुछ घरेलू उपाय बताने जा रहे हैं।

किस कारण घर में लगती है दीमक?

दीमक के लगने का सबसे अहम कारण होता है नमी यदि आपके घर में नमी रहती है, धूप बहुत कम आती है तो इसकी वजह से आपके घर में दीमक का फैलाव होने लगता है। खासकर बरसाती मौसम में दीमक के लगने का सबसे ज्यादा डर होता है।

दीमक से बचाव के घरेलू नुस्खें

यदि आपके घर में दीमक है तो आपको जल्द से जल्द इस समस्या का इलाज करना चाहिए। और जो चीजें दीमक लगकर पूरा खत्म हो चुकी हो उन्हें बाहर कर देना चाहिए ताकि दूसरी चीजों में दीमक नहीं लगे। लेकिन अभी यदि अभी दीमक की शुरुआत हुई है तो आपको किन घरेलू नुस्खों को ट्राई करना चाहिए आइये उनके बारे में जानते हैं।

नमक और पानी

एक कप पानी में एक कप नमक डालकर उसे अच्छे से उबाल लें अब इस पानी को स्प्रे बॉटल में डालकर वहां वहां छिड़काव करें जहां दीमक है। ऐसा रोजाना करें आपको कुछ ही दिनों में इसका असर दिखाई देने लगेगा। आप चाहे तो पानी के बिना खाली नमक का छिड़काव भी कर सकते हैं सिर्फ नमक भी दीमक को जड़ से खत्म करने में आपकी मदद करता है।

नीम

नीम का तेल रुई पर लगाकर उस जगह पर रख दें जहां आपको दीमक दिखाई दे रहा है या उस जगह पर नीम के तेल का अच्छे से स्प्रे कर दें। आपको इसका असर साफ़ दिखाई देगा आप चाहे तो नीम के तेल की जगह नीम की पत्तियों का रस निकालकर उसका छिड़काव भी कर सकते हैं।

लाल मिर्च पाउडर

जहां भी आपको दीमक दिखाई दे रही है वहां पर आप लाल मिर्च पाउडर का छिड़काव कर दें ऐसा करने से वहां पर दीमक नहीं बढ़ेगी साथ ही जो दीमक होगी वो खत्म भी हो जाएगी।।।

लकड़ी के सामान को धूप दिखाते रहें

यदि आप चाहते हैं की आपके लकड़ी के सामान में दीमक नहीं लगे तो इसके लिए आपको लकड़ी के सामान को धूप दिखाते रहना चाहिए। धूप दिखाने से लकड़ी के सामान में नमी नहीं रहती है जिससे दीमक से बचे रहने में मदद मिलती है।

सिरका

सिरका बाजार से मंगाकर एक स्प्रे बोतल में डाल दे, अब इस स्प्रे बोतल की मदद से स्प्रे को दीमक के ऊपर छिड़क दें। ऐसा रोजाना करने से आपको दीमक की समस्या से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी।

करेले का रस

जी हाँ, कड़वा करेला दीमक को जड़ से खत्म करने में आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए आप करेले का रस निकालकर इसे स्प्रे बोतल में भर दें। अब इस रस का उन जगह पर छिड़काव करें जहां दीमक होता है कुछ दिनों तक इस उपाय को करने से आपको दीमक को जड़ से खत्म करने में मदद मिलेगी।

बोरिक एसिड

बाजार से बोरिक एसिड मंगवाकर आप उन सभी जगह पर छिड़क दें जहां दीमक है। बोरिक एसिड का छिड़काव करने से दीमक को जड़ से ख़त्म करने में मदद मिलती है लेकिन ध्यान रखें की बच्चों को इसके संपर्क से दूर रखें।

मिट्टी का तेल

रुई का सूती कपडे को मिट्टी के तेल में भिगोकर उस जगह पर लगाएं या रख दें जहां दीमक है। मिट्टी के तेल की गंध जैसे ही दीमक को लगती है वैसे ही वो अंदर से खत्म होना शुरू हो जाता है लेकिन इस उपाय को करते समय पूरी सावधानी बरतें।

कपूर

कपूर को बाजार से लाकर इसे पीस लें या फिर वैसे ही लकड़ी की बनी अलमारियों आदि में रख दें। इससे आपकी लकड़ियों की अलमारी में न तो कीड़े मकोड़े आएंगे और न ही दीमक लगे और यदि ऐसा कुछ होगा भी तो उसे खत्म करने में मदद मिलेगी।

संतरे का पाउडर या तेल

दीमक को जड़ से खत्म करने के लिए आप संतरे के पाउडर या तेल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं क्योंकि इसमें डी लिकनीन नामक तत्व होता है जो कीटनाशक होता है। ऐसे में इसका इस्तेमाल करने से दीमक को जड़ से खत्म करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से दीमक की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा समय समय पर आपको घर में पेस्ट कण्ट्रोल करवाते रहना चाहिए इससे दीमक व् अन्य कीड़े मकोड़ों से आपके घर को बचे रहने में मदद मिलती है।

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ज्यादा खाँसना और छींकना गर्भ के लिए कितना नुकसानदायक है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। जिस कारण महिला को सर्दी, जुखाम व् अन्य संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। बदलते मौसम के कारण भी महिला को सर्दी जुखाम होने का खतरा रहता है, सर्दी का मौसम होने पर महिला को यह दिक्कत होने का खतरा बढ़ जाता है, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के कारण महिला की यह दिक्कत बढ़ सकती है, गर्म ठन्डे का सेवन एक साथ करने के कारण महिला को यह दिक्कत हो सकती है, आदि।

ऐसे में महिला को इस परेशानी से बचाव के लिए प्रेगनेंसी के दौरान अपना ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। लेकिन फिर भी यदि महिला को यह दिक्कत हो जाती है तो महिला को इस समस्या का इलाज करना चाहिए। साथ ही डॉक्टर से बिना पूछें किसी भी दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि दवाइयों का सेवन गर्भ पर बुरा असर डाल सकता है।

इस समस्या का इलाज महिला को जल्द से जल्द इसीलिए करना चाहिए क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा खांसी व् छींकें आने के कारण गर्भ पर बुरा असर पड़ सकता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा छींकने और खांसने पर गर्भ पर क्या प्रभाव पड़ सकता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

ज्यादा छींकने और खांसी से गर्भ पर क्या प्रभाव पड़ता है?

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को खांसी अधिक आती है या छींके अधिक आती है तो इसके कारण गर्भाशय में संकुचन होने का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि खांसी करते समय और छींकते समय पेट पर जोर पड़ता है। ऐसे में गर्भाशय में यदि संकुचन बढ़ जाता है तो इसके कारण पेट में दर्द आदि बढ़ने की दिक्कत हो सकती है जिसका असर माँ के साथ बच्चे पर भी पड़ सकता है।

इसके अलावा गर्भ में शिशु एमनियोटिक फ्लूड में बिल्कुल सुरक्षित होता है और शिशु को इस कारण कोई दिक्कत नहीं होती है। ऐसे में महिला को खांसी करते समय छींकते समय सिर्फ एक बात का खास ध्यान रखना चाहिए की महिला जब भी खांसी करें या छींकें तो महिला को पेट पर हाथ रख लेना चाहिए।

ज्यादा छींकने व् खांसने के कारण महिला को होने वाली दिक्कत

बीच में यूरिन: ज्यादा खांसी करने व् छींकने के कारण महिला का यूरिन कई बार बीच में निकल सकता है।

पेट में दर्द: ज्यादा छींकने के कारण खांसने के कारण महिला के पेट पर जोर पड़ता है जिसके कारण महिला को पेट में दर्द की समस्या हो सकती है।

गले में दर्द: खांसी करने व् छींकने के कारण महिला को गले में इन्फेक्शन जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।

पेल्विक एरिया में दर्द: जब महिला ज्यादा खांसी करती है या छींकने लग जाती है तो इसकी वजह से पेट पर के आस पास की मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ने लगता है जिसकी वजह से महिला को पेल्विक एरिया में दर्द की समस्या हो सकती है।

तो यह हैं कुछ दिक्कत जो ज्यादा खांसी करने व् छीकें मारने के कारण गर्भ को हो सकती है साथ ही महिला को हो सकती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला जल्द से जल्द इस परेशानी का इलाज करे ताकि माँ और बच्चे दोनों को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिल सके। इसके अलावा यदि अन्य किसी भी प्रकार की दिक्कत यदि प्रेग्नेंट महिला व् उसके होने वाले शिशु को होती है तो महिला को उसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।