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गर्भावस्था में क्या नहीं करें?

प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक गर्भवती महिला के लिए जरुरी होता है की महिला अपना ध्यान अच्छे से रखें। क्योंकि प्रेगनेंसी महिला के लिए जितना ख़ुशी भरा समय होता है उतना ही नाजुक समय भी होता है। साथ ही महिला जितना अच्छे से अपना ध्यान रखती है उतना ही गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को बेहतर होने में भी मदद मिलती है।

ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला और शिशु को कोई दिक्कत नहीं हो इसके लिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान क्या क्या करना चाहिए और क्या क्या नहीं करना चाहिए इसकी पूरी जानकारी इक्कठी कर लेनी चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे कामों के बारे में बताने जा जा रहे हैं जो गर्भवती महिला को बिल्कुल भी नहीं करने चाहिए।

उन खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करें जिनसे आपको दिक्कत हो

प्रेगनेंसी के दौरान गर्म तासीर वाली चीजें, कच्चा पपीता, करेले के बीज, अधिक मात्रा में बैंगन, आदि का सेवन महिला को नहीं करना चाहिए। क्योंकि इन सभी चीजों का सेवन करने से गर्भ को नुकसान पहुंचा सकता है जिससे गर्भपात, समय से पहले डिलीवरी का खतरा रहता है। इसके अलावा महिला को उन चीजों का सेवन भी नहीं करना चाहिए जिससे महिला को एलर्जी या अन्य किसी सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा होता है।

भारी चीजें नहीं उठायें

गर्भावस्था के दौरान महिला को भारी चीजें नहीं उठानी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से महिला के पेट पर दबाव पड़ता है जिसके कारण महिला को ब्लीडिंग, गर्भपात, समय से पहले डिलीवरी, पीठ में दर्द आदि होने का खतरा होता है। भारी चीजों को उठाने के साथ महिला को भरे चीजों को सरकाना भी नहीं चाहिए।

सीढ़ियां चढ़ने से बचें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अधिक सीढ़ियां भी नहीं चढ़नी चाहिए और ज्यादा तेजी से भी सीढ़ियां नहीं चढ़नी चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से पेट को झटका लगने, गिरने आदि का डर होता है जिससे माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है।

नशीले पदार्थों से दूर रहें

गर्भवती महिला को धूम्रपान, अल्कोहल व् अन्य नशीले पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इन सभी चीजों का सेवन करने से गर्भवती महिला व् गर्भ में पल रहे शिशु को दिक्कत होने का खतरा होता है। साथ ही प्रेग्नेंट महिला को उस जगह पर जाने से भी बचना चाहिए जहां पर इन चीजों का सेवन कोई कर रहा होता है।

लम्बे समय तक एक ही पोजीशन में नहीं खड़ी रहें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को लम्बे समय तक एक ही जगह पर खड़े नहीं रहना चाहिए और न ही एक जगह लम्बे समय तक खड़े रहकर काम करना चाहिए। क्योंकि लम्बे समय तक एक ही पोजीशन में खड़े रहने से प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पेट दर्द, पैरों में सूजन, पीठ में दर्द, जैसी समस्या हो सकती है। साथ ही महिला को गर्भपात, समय से पहले डिलीवरी जैसी दिक्कत होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

घर के इन कामों को करने से बचें

गर्भवती महिला को झुककर झाड़ू लगाने से बचना चाहिए, पैरों के भार बैठकर या खड़े होकर पोछा लगाने से बचना चाहिए, बाथरूम साफ करने से बचना चाहिए, किचन की शेल्फ से सटकर काम करने से बचना चाहिए, गैस के पास ज्यादा देर खड़े रहकर काम नहीं करना चाहिए, पालतू जानवर के काम को करने से बचना चाहिए, घर के जिन कामों को करने के लिए केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल करना पड़े उन्हें करने से बचना चाहिए, आदि। क्योंकि इन सभी कामों को करने से महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

ट्रेवल करने से बचें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को यात्रा करने की भी मनाही होती है क्योंकि ट्रेवल करते समय लम्बे समय तक एक ही पोजीशन में रहने और ट्रेवल करते समय झटका आदि लगने के कारण महिला को दिक्कत होने का खतरा होता है। ऐसे में जितना हो सके गर्भवती महिला को ट्रेवल करने से भी बचना चाहिए।

दवाइयों का सेवन

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवाई का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि बिना डॉक्टरी सलाह के दवाइयों का सेवन करने के कारण गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में रूकावट होने का खतरा होता है।

टेंशन नहीं लें

गर्भावस्था का समय थोड़ा परेशानी भरा जरूर होता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की महिला टेंशन में रहे। क्योंकि महिला का ज्यादा टेंशन लेना महिला और बच्चे दोनों की दिक्कत को बढ़ा सकता है।

पेट या पीठ के बल नहीं सोएं

गर्भावस्था के दौरान महिला को पीठ या पेट के बल नहीं सोना चाहिए। क्योंकि पीठ व् पेट के बल सोने के कारण महिला और शिशु को दिक्कत होने का खतरा होता है।

व्यायाम जरुरत से ज्यादा नहीं करें

प्रेग्नेंट महिला को फिट रहने के लिए थोड़ा बहुत व्यायाम जरूर करना चाहिए और वो भी डॉक्टर से राय लेने के बाद, साथ ही महिला को यदि किसी भी तरह की दिक्कत हो जैसे की बॉडी पेन की समस्या हो, चक्कर और उल्टी की समस्या हो तो महिला को बिल्कुल भी व्यायाम नहीं करना चाहिए।

ज्यादा शोर से दूर रहें

गर्भवती महिला को ऐसी जगह पर बिल्कुल नहीं जाना चाहिए जहां शोर अधिक हो क्योंकि प्रेगनेंसी के छठे महीने में शिशु की सुनने की क्षमता बढ़ने लगती है। ऐसे में यदि महिला ज्यादा शोर शराबे वाली जगह पर जाती है तो इसके कारण शिशु की सुनने की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

ऊँचे चप्पल जूते और टाइट कपडे नहीं पहनें

गर्भवती महिला को ऊँचे जूते चप्पल व् टाइट कपडे नहीं पहनने चाहिए। क्योंकि ज्यादा टाइट कपडे व् ऊँचे जूते चप्पल पहनने के कारण महिला और शिशु दोनों को दिक्कत होने का खतरा होता है।

गर्म पानी से नहीं नहाएं

गर्भावस्था के दौरान महिला को ज्यादा गर्म पानी से भी नहीं नहाना चाहिए क्योंकि गर्म पानी से नहाने के कारण महिला के शरीर के तापमान में फ़र्क़ आ सकता है जिसकी वजह से महिला और शिशु दोनों को दिक्कत होने का खतरा होता है।

मालिश

गर्भवती महिला को गलती से भी प्रेगनेंसी के दौरान पेट की मालिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि इसके कारण पेट पर दबाव बढ़ता है जिसकी वजह से गर्भ में पल रहे शिशु को दिक्कत होने का खतरा होता है।

सम्बन्ध बनाने से बचें

यदि प्रेगनेंसी में महिला को किसी भी तरह की दिक्कत है, ज्यादा उम्र में गर्भधारण हुआ है, गर्भ में एक से ज्यादा शिशु है तो ऐसे कुछ केस में प्रेग्नेंट महिला को सम्बन्ध बनाने से भी बचना चाहिए।

नेगेटिव नहीं सोचें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला बिल्कुल भी नेगेटिव नहीं सोचें क्योंकि महिला जितना ज्यादा नेगेटिव सोचती है उतना ही महिला को मानसिक रूप से परेशानी होती है जिससे शिशु महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी अधिक होने के साथ शिशु को भी दिक्कत होने का खतरा होता है।

डाइट नहीं करें

गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन बढ़ना आम बात होती है ऐसे में महिला को वजन कम करने के लिए डाइट बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। क्योंकि यदि महिला अपनी डाइट अच्छे से नहीं लेगी तो इसकी वजह से शरीर में पोषक तत्वों की कमी होगी जिसके कारण माँ व् बच्चे दोनों दिक्कत होने का खतरा रहता है।

उपवास करने से बचें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को भूखे प्यासे रहने वाले उपवास नहीं करने चाहिए साथ ही महिला को यदि सेहत सम्बन्धी दिक्कतें है तो कोई भी उपवास नहीं करना चाहिए।

डॉक्टर की जांच में लापरवाही

गर्भवती महिला को डॉक्टर से सभी रूटीन चेकअप, टेस्ट, अल्ट्रासॉउन्ड आदि समय से करवाने चाहिए साथ ही डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का सेवन भी समय से करना चाहिए। क्योंकि यदि गर्भवती महिला जांच में लापरवाही करती है तो इसके कारण यदि महिला को कोई दिक्कत होती है तो वह बढ़ सकती है जो बाद में गंभीर समस्या का रूप ले सकती है।

नींद में लापरवाही

प्रेग्नेंट महिला को जिस तरह अपने खाने पीने का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए उसी तरह महिला को अपने सोने का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यदि महिला भरपूर नींद नहीं लेती है तो इसके कारण भी गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को दिक्कत होने का खतरा रहता है।

तो यह हैं कुछ काम जिन्हे करने से गर्भवती महिला को बचना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान कुछ भी करने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए की महिला को कर रही है वो सही है या नहीं। क्योंकि जितना महिला प्रेगनेंसी के दौरान सही जानकारी लेती है उतना ही प्रेगनेंसी को आसान बनाने और कॉम्प्लीकेशन्स को कम करने में मदद मिलती है।

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छह महीने की प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान जैसे जैसे शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे महिला को अपनी डाइट में थोड़ा बदलाव करने की जरुरत होती है। क्योंकि महिला को उन खाद्य पदार्थों का सेवन उस समय करना होता है जिससे गर्भ में शिशु का विकास तेजी से हो और शिशु या महिला को किसी भी तरह की सेहत सम्बन्धी समस्या नहीं हो। वैसे तो प्रेगनेंसी के हर महीने में महिला को अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

लेकिन महीने दर महीने महिला को अपनी डाइट में कुछ न कुछ जरुरी चीजों को शामिल जरूर करना चाहिए जिससे शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को पर्याप्त बने रहने में मदद मिल सकें। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के छठे महीने की डाइट के बारे में बताने जा रहे हैं की गर्भावस्था के छठे महीने में महिला को क्या-क्या खाना चाहिए।

आयरन युक्त डाइट

गर्भावस्था के छठे महीने में महिला को आयरन युक्त डाइट भरपूर लेनी चाहिए ताकि डिलीवरी के समय शरीर में आयरन की कमी के कारण होने वाली परेशानियों से महिला को बचे रहने में मदद मिल सके। साथ ही शिशु के बेहतर विकास और महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। और इसके लिए महिला को सेब, अनार, ड्राई फ्रूट्स, दालें, चुकंदर, गाजर, व् अन्य आयरन युक्त चीजों का भरपूर सेवन करना चाहिए।

कैल्शियम से भरपूर आहार

कैल्शियम हड्डियों के लिए बहुत जरुरी होता है ऐसे में गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों का बेहतर विकास हो सके साथ ही महिला की हड्डियों को भी पोषण मिल सके जिससे माँ व् बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। इसके लिए गर्भवती महिला को कैल्शियम युक्त डाइट भरपूर लेनी चाहिए खासकर छठे महीने के बाद महिला के शरीर को डिलीवरी के लिए तैयार लिए कैल्शियम की जरुरत होती है। ऐसे में महिला को डेयरी प्रोडक्ट्स, दालों, नट्स आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि इनमे सबसे अधिक मात्रा में कैल्शियम मौजूद होता है।

प्रोटीन लें

प्रेगनेंसी के छठे महीने में महिला को प्रोटीन युक्त डाइट का भी भरपूर सेवन करना चाहिए ताकि शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास को बढ़ावा मिल सके साथ ही महिला को भी एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिल सके। और प्रोटीन के लिए सबसे ज्यादा महिला को दालों, ड्राई फ्रूट्स आदि का सेवन करना चाहिए।

फल व् सब्जियां

प्रेगनेंसी के छठे महीने में महिला को फलों व् सब्जियों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए। क्योंकि फलों व् सब्जियों में सभी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो माँ व् बच्चे दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।

डेयरी प्रोडक्ट्स

गर्भावस्था के छठे महीने में महिला को दूध, दही, दूध से बनी चीजों का भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि इससे महिला को स्वस्थ रहने और शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

अंडा व् नॉन वेज

यदि प्रेग्नेंट महिला अंडा व् नॉन वेज का सेवन कर लेती है तो प्रेगनेंसी के छठे महीने में महिला को अंडा व् नॉन वेज भी जरूर खाना चाहिए। क्योंकि इससे शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास को दुगुनी तेजी से बढ़ावा मिलता है साथ ही महिला को भी फिट रहने में मदद मिलती है।

प्रेग्नेंट महिला खाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

  • महिला को एक ही बारे में पेट भरकर नहीं खाना चाहिए बल्कि थोड़ा थोड़ा करके खाना चाहिए ताकि भोजन को आसानी से हज़म होने में मदद मिल सके।
  • गर्भवती महिला को उन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए जिससे महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा हो।
  • मसालेदार, जंक फ़ूड, ज्यादा तेलीय, बासी व् ठंडा, बिना धुले फल व् सब्जियां आदि खाने से गर्भवती महिला को बचना चाहिए।
  • शरीर में पानी की कमी नहीं हो इसके लिए महिला को पेय पदार्थों का सेवन भरपूर करना चाहिए जैसे की महिला को पानी के साथ निम्बू पानी, नारियल पानी, जूस आदि का सेवन जरूर करना चाहिए।
  • यदि भूख कम लगती हो या बहुत ज्यादा लगती हो और ऐसा रोजाना होता हो तो इसे अनदेखा न करते हुए डॉक्टर से मिलें ताकि आपकी इस समस्या का समाधान हो सकें।
  • खाने पीने की चीजों के साथ गर्भवती महिला को डॉक्टर द्वारा बताये गए विटामिन्स का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के छठे महीने में महिला को क्या खाना चाहिए उससे जुडी जानकारी, यदि आप भी माँ बनने वाली हैं और आपको भी छठा महीना लगने वाला है या चल रहा है तो आपको भी खान पान से जुड़े इन टिप्स का ध्यान जरूर रखना चाहिए।

What to eat during 6th months pregnancy

Frequent urination during pregnancy

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गर्भावस्था में पेशाब की स्थिति एक आम समस्या हो सकती है। मात्रा बढ़ जाती है और इसके साथ-साथ आमतौर पर अधिक पेशाब करने की आवश्यकता हो सकती है। यह अंतर्निहित हार्मोनल परिवर्तनों, बच्चे के दबाव, और गर्भाशय के बढ़ते आकार के कारण हो सकता है।

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प्रेग्नेंसी में बार बार पेशाब आता है – Frequent urination during pregnancy

प्रेगनेंसी में पेट दर्द से छुटकारा चाहती हैं? तो यह करें

गर्भावस्था के दौरान महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। और छोटी छोटी शारीरिक परेशानियों का होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। साथ ही ऐसा जरुरी नहीं है हर एक गर्भवती महिला को एक तरह की शारीरिक परेशानियां हो। आज इस आर्टिकल में प्रेगनेंसी के दौरान पेट में होने वाले दर्द की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान पेट दर्द क्यों होता है और प्रेगनेंसी में पेट दर्द से कैसे छुटकारा पाने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में पेट दर्द होने के कारण

  • यदि महिला ऐसी चीजों का सेवन करती है जिन्हे हज़म करने में महिला को परेशानी होती है या खाने से गैस बनती है। तो ऐसी चीजों का सेवन करने के कारण महिला को पेट दर्द की समस्या हो सकती है।
  • गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट की मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ता है जिसकी वजह से पेट दर्द हो सकता है।
  • गर्भ में शिशु की हलचल अधिक होने के कारण भी महिला को पेट में दर्द महसूस हो सकता है।
  • ज्यादा देर तक एक ही जगह खड़े रहने के कारण, पेट के बल सोने के कारण भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • कैफीन युक्त चीजों का सेवन अधिक करने के कारण भी महिला को यह दिक्कत हो सकती है।

गर्भावस्था में पेट दर्द की समस्या से बचने के उपाय

गर्भवती महिला को यदि पेट में दर्द होता है तो कुछ आसान टिप्स को ट्राई करने से महिला को पेट दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

खान पान का ध्यान रखें

पेट दर्द की समस्या से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को अपने खान पान का खास ध्यान रखना चाहिए। जैसे की महिला को एक ही बार में जरुरत से ज्यादा नहीं खाना चाहिए, ऐसी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए जिनसे महिला को गैस बनती हो, ज्यादा मिर्च मसाले नहीं खाने चाहिए, बासी खाना खाने से बचना चाहिए, खाने पीने की चीजों में साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए, आदि। यदि महिला खान पान से जुडी इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखती है तो महिला को पेट में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

स्ट्रेचिंग करें

गर्भावस्था के दौरान स्ट्रेचिंग करने से पेट दर्द व् अन्य बॉडी पार्ट्स में पेन की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। क्योंकि स्ट्रेचिंग करने से मांसपेशियों को रिलैक्स महसूस होता है।

पेट के बल कोई काम नहीं करें

गर्भवती महिला इस बात का खास ध्यान रखें की महिला ऐसा कोई काम नहीं करें जिससे पेट पर दबाव पड़े या पेट पर किसी भी तरह का असर पड़े। जैसे की महिला पेट के बल नहीं सोएं, ज्यादा देर तक खड़ी नहीं रहें, झुककर काम नहीं करें, भारी चीजें नहीं उठायें आदि। यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो ऐसा करने से महिला को पेट में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

मालिश करें

हल्के हाथों से पेट पैर बिना दबाव डालें महिला को मालिश करनी चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से भी महिला को पेट में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

ज्यादा टाइट कपडे नहीं पहनें

प्रेग्नेंट महिला को ज्यादा टाइट कपडे नहीं पहनने चाहिए बल्कि अपने साइज से थोड़े खुले कपडे पहनने चाहिए। क्योंकि ज्यादा टाइट कपडे पहनने के कारण पेट दबाव पड़ता है जिसकी वजह से महिला को पेट दर्द की समस्या हो सकती है। और यदि महिला अपने साइज से थोड़े खुले कपडे पहनती है तो इससे पेट पर दबाव नहीं पड़ता है। और महिला को इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

मैटरनिटी बेल्ट का इस्तेमाल करें

गर्भावस्था के दौरान महिला को पेट पर बाँधने वाली बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए ऐसा करने से पेट का भार नीचे की तरफ अधिक महसूस नहीं होता है। जिससे मांसपेशियों का खिंचाव भी अधिक महसूस नहीं होता है और महिला को पेट दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

पानी का भरपूर सेवन करें

पेट दर्द की समस्या से बचे रहने के लिए महिला को शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा को भी सही रखना चाहिए। क्योंकि इससे महिला की पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है, एनर्जी मिलती है जिससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली इन छोटी छोटी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से महिला को पेट में दर्द की समस्या हो सकती है। साथ ही कुछ उपाय हैं जिन्हे ट्राई करने से महिला को पेट दर्द की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

ध्यान रखें: यदि महिला को पेट में जरुरत से ज्यादा दर्द होता है तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। और जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि ज्यादा पेट दर्द होने का कारण मिसकैरिज, डिलीवरी आदि हो सकते हैं। ऐसे में इसे अनदेखा करने के कारण महिला की दिक्कत बढ़ सकती है।

होली खेलने से पहले यह बातें जान लें प्रेग्नेंट महिला?

होली एक ऐसा त्यौहार है जिसे हर कोई खेलना पसंद करता है यह त्यौहार आपकी जिंदगी में रंगों के महत्व, प्यार, और दूसरों के प्रति अपनेपन को दर्शाता है। साथ ही लोग इस त्यौहार पर रंगों की फुहार का आनंद लेते हुए खूब मस्ती भी करते हैं। होली के दिन एन्जॉय करने के साथ आपको बहुत सी बातों का ध्यान भी रखना चाहिए जैसे की हर्बल रंगों का इस्तेमाल करें, स्किन का ध्यान रखें, ऐसी कोई भी हरकत नहीं करें जिससे आपको या किसी और को किसी भी तरह का नुकसान हो। खासकर यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको और भी ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को होली खेलते समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

होलिका दहन वाले दिन रखें इस बात का ध्यान

यदि आप होलिका को पूजते हैं तो गर्भवती महिला को इस दिन ध्यान रखना चाहिए की महिला आग के ज्यादा पास नहीं जाएँ क्योंकि धुंए के कारण महिला को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। साथ ही भीड़ में धक्का लगने, ज्यादा देर आग के पास खड़े रहने से शरीर का तापमान बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है। जिसके कारण माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत होने का खतरा होता है।

ज्यादा लोगो से नहीं मिलें

होली के दिन हो सकता है की आपको बहुत से लोग होली की मुबारक बात देने या रंग लगाने के लिए आएं। लेकिन आपको जितना हो सके ज्यादा लोगो से मिलने से बचना है उनके संपर्क में आने से बचना है क्योंकि अभी भी कोरोना का डर कम नहीं हुआ है और प्रेग्नेंट महिला को संक्रमण जल्दी होने का खतरा होता है। ऐसे में जितना हो सके अपने परिवार के अलावा अन्य लोगो से होली के दिन गर्भवती महिला न ही मिले तो अच्छा रहेगा।

पानी से होली नहीं खेले

गर्भवती महिला को पाने वाली होली नहीं खेलनी चाहिए इसके अलावा जहां पर लोग पानी के साथ खेल रहे हो वहां जाना भी नहीं चाहिए। क्योंकि ऐसी जगह पर प्रेग्नेंट महिला के गिरने या फिसलने का डर होता है जिससे माँ व् बच्चे को नुकसान पहुँच सकता है।

हर्बल रंगों से ही खेले होली

यदि प्रेग्नेंट महिला को कोई रंग लगाता है तो ध्यान रखें की वह हर्बल रंग हो क्योंकि केमिकल वाले रंगों को स्किन पर लगाने से माँ व् बच्चे की सेहत को खतरा हो सकता है।

डांस करने से बचें

होली की धूम में नाच गाना होना बहुत आम बात है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को डांस करने से बचना चाहिए साथ ही उस जगह भी खड़े नहीं रहना चाहिए जहां लोग डांस कर रहे होते हैं। क्योंकि डांस करते समय यदि अचानक से किसी का धक्का लग जाए तो इसकी वजह से माँ और बच्चे को नुकसान पहुँच सकता है।

आयल लगाएं

गर्भवती महिला को अपने चेहरे व् बॉडी की स्किन पर होली वाले दिन आयल लगा लेने चाहिए क्योंकि इसके बाद यदि आपको कोई रंग लगाता है तो वह रंग आसानी से निकल जाता है। साथ ही स्किन सम्बन्धी परेशानी के खतरे को कम करने में भी मदद मिलती है।

भांग से दूर रहें

अधिकतर लोगों को यही लगता है कि भांग एक प्राकृतिक चीज है और इसलिए इसे लेने से कोई नुकसान नहीं होगा। जबकि सच तो यह है कि भांग एक प्रकार का नशा है। यदि कोई इसका सेवन करता है तो इसे पीने के बाद सिर में दर्द, बेचैनी, घबराहट, उल्टी, चक्कर जैसी समस्याएं हो सकती है। ऐसे में अगर गर्भवती महिला इसका सेवन करती है तो उसे यह समस्या होने का खतरा होता है जिसके बाद महिला को परेशानी होने के साथ बच्चे की सेहत पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में गर्भवती महिला को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए।

मिठाइयों के सेवन से बचें

त्योहारों के मौसम में मिलावट होना आम बात है खासकर मिठाइयों में तो ऐसा होने की सम्भावना अधिक होती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए और जितना हो सके मिठाइयों के सेवन से परहेज करना चाहिए। क्योंकि मिलावट वाली चीजें खाने से महिला को पाचन क्रिया से जुडी समस्याएँ अधिक हो सकती है।

पहनावें का भी ध्यान रखें

होली के दिन गर्भवती महिला को आरामदायक कपडे पहनने चाहिए जिससे महिला को कोई दिक्कत नहीं हो साथ ही महिला को पूरी बाजू के कपडे भी पहनने चाहिए ताकि रंगों से बचे रहने में मदद मिल सके।

खाने पीने का ध्यान रखें

होली के दिन ख़ुशी के चक्कर में अपनी डाइट में लापरवाही नहीं करें बल्कि पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें साथ ही पानी का भरपूर सेवन करें इससे आपको हेल्दी व् फिट रहने में मदद मिलेगी।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान होली खेलते समय प्रेग्नेंट महिला को रखना चाहिए क्योंकि इन टिप्स का ध्यान रखने से प्रेग्नेंट महिला सुरक्षित रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा यदि आपको प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की समस्या है तो आपको होली के दिन बाहर भी नहीं निकलना चाहिए क्योंकि आपकी छोटी सी गलती का आपको बहुत बड़ा परिणाम भुगतना पड़ सकता है।

Holi tips for women during pregnancy

प्रेग्नेंट महिला को कब सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान कपल एक दूसरे के करीब आये या नहीं इसे लेकर कपल के मन में बहुत से सवाल चल रहे होते हैं। क्योंकि वो अपने पार्टनर के करीब आना भी चाहते हैं लेकिन बच्चे को कोई दिक्कत तो नहीं होगी इस डर से वो एक दूसरे से दूरी रखते हैं। तो ऐसे में आपको इस बता का पता होना चाहिए की प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से माँ या बच्चे को कोई दिक्कत नहीं होती है।

क्योंकि यदि प्रेगनेंसी में कोई कम्प्लीकेशन नहीं है, आप और आपका पार्टनर पूरी तरह स्वस्थ हैं, सम्बन्ध बनाते समय पूरी सावधानी का ध्यान रखा जा रहा है तो ऐसे में सम्बन्ध बनाना सेफ होता है। लेकिन कुछ कंडीशन होती है जिनमे गर्भवती महिला को सम्बन्ध बनाने की मनाही होती है तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला को कब सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में गर्भवती महिला को सम्बन्ध न बनाने की सलाह दी जाती है। क्योंकि प्रेगनेंसी की पहली तिमाही महिला के लिए बहुत ही नाजुक होती है इस दौरान बरती गई थोड़ी सी लापरवाही के कारण गर्भपात होने का खतरा होता है ऐसे में प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में सम्बन्ध न बनाने की सलाह दी जाती है।

ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होने पर

जिन गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग या स्पॉटिंग की समस्या होती है उन महिलाओं को भी सम्बन्ध बनाने की मनाही होती है। क्योंकि ब्लीडिंग या स्पॉटिंग की समस्या बढ़ने के कारण गर्भपात, समय से पहले डिलीवरी जैसी परेशानी होने का खतरा बढ़ जाता है।

प्रेगनेंसी बहुत मुश्किल से हुई है

यदि गर्भवती महिला ने बहुत मुश्किलों के बाद गर्भाधारण किया है तो ऐसे केस में भी महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। ऐसा नहीं है की सम्बन्ध बनाने से दिक्कत होगी बल्कि किसी दिक्कत का कोई चांस भी नहीं हो इससे बचने के लिए महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

ज्यादा उम्र में महिला गर्भवती हुई है

प्रेग्नेंट महिला ने यदि ज्यादा उम्र में गर्भधारण किया है तो ऐसे केस में भी महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। क्योंकि अधिक उम्र में गर्भाधारण करने पर दिक्कतें अधिक होती है ऐसे में सम्बन्ध बनाने के कारण कोई परेशानी नहीं हो इससे बचने के लिए महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

महिला या पुरुष को इन्फेक्शन है

यदि महिला या पुरुष दोनों में से किसी को भी प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन हैं तो ऐसे केस में भी महिला को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि इसकी वजह से इन्फेक्शन बढ़ने का खतरा होता है साथ ही यदि महिला का इन्फेक्शन बढ़ जाता है तो इसके कारण प्रेगनेंसी में दिक्कतें बढ़ सकती है।

यदि पेट में दर्द की समस्या है

गर्भावस्था के दौरान महिला को पेट में दर्द होना आम बात होती है लेकिन यदि महिला को यह दिक्कत ज्यादा रहती है तो ऐसे में महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। क्योंकि यदि महिला को पेट दर्द की समस्या होने पर सम्बन्ध बनाएं जाते हैं तो ऐसे में महिला की यह दिक्कत बढ़ सकती है।

महिला का सम्बन्ध बनाने का मन नहीं है

प्रेगनेंसी में मूड स्विंग्स होना आम बात होती है ऐसे में हो सकता है की महिला की सम्बन्ध बनाने में रूचि न रहे या महिला का अभी मन न हो। तो ऐसे में भी महिला के पार्टनर को उनके साथ किसी तरह की जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए और सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए।

डॉक्टर से मना किया है

गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर के पास रूटीन चेकअप के लिए आना जाना लगा रहता है जिससे आपके शरीर की पूरी जानकारी उनके पास होती है। ऐसे में सम्बन्ध बनाना यदि आपके लिए सेफ होता है तो डॉक्टर आपको मना नहीं करते हैं लेकिन यदि आपको कोई दिक्कत होती है तो आपको डॉक्टर सम्बन्ध बनाने के लिए मना कर सकते हैं। ऐसे में यदि आपको डॉक्टर ने सम्बन्ध बनाने के लिए मना किया होता है तो आपको सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

गर्भ में एक से ज्यादा शिशु है

जिन महिलाओं के गर्भ में एक से ज्यादा शिशु होते हैं उन्हें भी प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए। क्योंकि गर्भ में एक से ज्यादा शिशु के होने पर गर्भाशय पर यदि हल्की सी चोट लगती है। तो इसकी वजह से दिक्कत होने का खतरा होता है ऐसे में आपको डॉक्टर्स भी सम्बन्ध न बनाने की सलाह देते हैं। खासकर प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में तो बिल्कुल भी सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए।

यदि आपका पार्टनर नशे में हैं

गर्भावस्था के दौरान यदि छोटी छोटी बातों का ध्यान रखा जाये तो इससे गर्भवती महिला और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। ऐसे में यदि आपका पार्टनर नशे में हैं तो ऐसी हालत में आपको अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि नशे में हो सकता है कोई गलती हो जाये जिससे माँ या बच्चे को दिक्कत हो।

तो यह हैं कुछ कंडीशन जिनके होने पर गर्भवती महिला को सम्बन्ध न बनाने की सलाह दी जाती है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपके साथ में भी ऐसी की समस्या है तो आपको सबंध बनाने से बचना चाहिए इसके अलावा प्रेगनेंसी में यदि कोई दिक्कत नहीं है तो आप बिना किसी डर के और पूरी सावधानी का ध्यान रखते हुए सम्बन्ध बना सकती है।

प्रेगनेंसी में केक खाने के नुकसान

प्रेगनेंसी के दौरान महिला बहुत से अलग अलग अनुभव करती है और अपने आप में बदलाव महसूस करती है और इन्ही बदलाव के साथ महिला के जीभ के स्वाद में भी बदलाव आता है। ऐसे में जीभ के स्वाद के बदलाव आने के कारण महिला को अलग अलग चीजें खाने की इच्छा होती है। जैसे की कुछ महिलाओं को तीखा खाने की इच्छा होती है तो कुछ को चटपटा और कुछ को मीठा खाने की इच्छा भी होती है। लेकिन इस दौरान महिला को कुछ भी खाने की इच्छा होने पर अपनी जीभ के स्वाद पर थोड़ी रोक लगानी चाहिए।

क्योंकि गर्भावस्था के दौरान महिला को उन्ही चीजों का सेवन करना चाहिए जिससे गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को फायदा मिल सके। और उन चीजों के सेवन से परहेज करना चाहिए जो माँ व् बच्चे की सेहत को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाते हैं। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान केक को खाने से जुडी बातें बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में केक खाएं या नहीं?

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान केक या पेस्ट्री खाने की क्रेविंग भी हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपनी इच्छा पर थोड़ा कण्ट्रोल करना चाहिए क्योंकि केक खाने से महिला की सेहत पर उल्टा असर पड़ सकता है साथ ही इसका बुरा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है। क्योंकि केक बनाने के लिए जिन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है वो माँ और बच्चे के लिए अनहेल्दी होती है। इसके अलावा यदि महिला की कभी केक खाने की इच्छा हो तो भी महिला को कण्ट्रोल करना चाहिए।

क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला जितना अच्छे से अपने खान पान का ध्यान रखती है उतना ही फायदा माँ और बच्चे की हेल्थ को मिलता है। और यदि प्रेग्नेंट महिला ऐसा सोचती है की कभी कभार या एक चम्मच केक खाने से कोई नुकसान नहीं होगा तो आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की प्रेगनेंसी बहुत नाजुक समय होता है ऐसे में बरती गई लापरवाही आपके और बच्चे के लिए हानिकारक हो सकती है। और बच्चे के जन्म के कुछ समय बाद तो आप पानी इच्छा के अनुसार इन चीजों का सेवन कर सकती है इसीलिए थोड़े समय के लिए इन चीजों से दूरी बनाने में कोई नुकसान नहीं है।

प्रेगनेंसी में केक खाने के नुकसान

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला केक का सेवन करती है तो इसकी वजह से महिला को बहुत सी शारीरिक परेशानियां होने का खतरा बढ़ जाता है। जिसके कारण गर्भवती महिला की कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ जाती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में केक खाने से कौन से नुकसान होते हैं।

वजन बढ़ता है

केक में शुगर की मात्रा अधिक होती है ऐसे में केक का सेवन करने के कारण गर्भवती महिला के शरीर में कैलोरीज़ जरुरत से ज्यादा हो सकती है। और शरीर में कैलोरीज़ बढ़ने के कारण गर्भवती महिला को वजन बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में यदि महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो इसके कारण प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ने की वजह से महिला और शिशु दोनों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

बैक्टेरिया पहुंचाते हैं नुकसान

केक को बनाने के लिए कच्चे अंडे का इस्तेमाल किया जाता है और कच्चे अंडे में साल्मोनेला, इ कोलाई, जैसे हानिकारक बैक्टेरिया मौजूद होते हैं। जिसकी वजह से महिला को संक्रमण होने का खतरा होता है। और प्रेगनेंसी के दौरान तो महिला की इम्युनिटी वैसे भी कमजोर होती है जिसके कारण महिला को संक्रमण होने की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा घर में भी यदि आप केक बनाते हैं और अंडा नहीं डालते हैं तो भी केक के बैटर में बैक्टेरिया पैदा होने का खतरा होता है। ऐसे में घर हो या बाहर महिला को हर तरह के केक को खाने से बचना चाहिए।

अनहेल्दी सप्लीमेंट्स हो सकते हैं नुकसानदायक

केक के स्वाद को बढ़ाने के लिए अनहेल्दी सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल किया जाता है ऐसे में वह अनहेल्दी सप्लीमेंट्स माँ और बच्चे दोनों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसीलिए भी गर्भवती महिला को केक खाने से बचना चाहिए।

अल्कोहल होता है नुकसानदायक

केक को बनाने के लिए कई बार अल्कोहल का इस्तेमाल भी किया जाता है और अल्कोहल का सेवन गर्भ में पल रहे शिशु के बढ़ते विकास के लिए बहुत नुकसानदायक होता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य को सही रखने के लिए केक का सेवन करने से बचना चाहिए।

ब्लड शुगर लेवल

केक बनाने के लिए आर्टिफिशल शुगर का इस्तेमाल किया जाता है और वह स्वाद में काफी मीठी होती है। ऐसे में गर्भवती महिला यदि केक का सेवन करती है तो इससे ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ जाता है जिसके कारण महिला को जेस्टेशनल शुगर जैसी समस्या होने का खतरा रहता है। साथ ही यह समस्या आपके नवजात में भी देखने को मिल सकती है और जन्म के बाद शिशु मोटापे जैसी समस्या से ग्रसित हो सकता है।

यदि आप भी माँ बनने वाली है और प्रेगनेंसी में केक का सेवन करने की सोच रही है तो उससे पहले आप भी इन बातों को अच्छे से जान ले की यह नुकसान केक खाने के कारण आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान हो सकते हैं। ऐसे में स्वस्थ प्रेगनेंसी के लिए आपको प्रेगनेंसी में केक के सेवन से परहेज करना चाहिए।

Harmful effects of eating cake in pregnancy

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में किन-किन बातों का ध्यान रखें?

गर्भावस्था का नौवां महीना लगते ही महिला को डिलीवरी को लेकर मन में डर होने के साथ आने वाले बच्चे को लेकर मन में उत्साह भी बढ़ जाता है। क्योंकि नौवें महीने लगने के बाद कभी भी डिलीवरी हो सकती है। ऐसे में महिला के लिए जरुरी होता है की महिला अपना अच्छे से ध्यान रखें ताकि डिलीवरी में कोई दिक्कत नहीं आये साथ ही महिला को स्वस्थ रहने में भी मदद मिल सकें। लेकिन इस दौरान महिला का वजन बढ़ने के कारण महिला को थोड़ी दिक्कतें भी हो सकती है लेकिन फिर भी महिला को कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में कौन कौन सी दिक्कतें आ सकती है?

  • महिला का वजन बढ़ने के कारण महिला को उठने, बैठने चलने, लेटने आदि में दिक्कत हो सकती है।
  • प्रेगनेंसी के नौवें महीने में पैरों पर दबाव ज्यादा बढ़ने के कारण महिला को पैरों में सूजन व् दर्द की समस्या अधिक हो सकती है।
  • बच्चे का वजन बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से पर दबाव भी बढ़ जाता है ऐसे में महिला को थोड़ी थोड़ी देर में यूरिन पास करने की इच्छा हो सकती है।
  • कुछ महिलाओं को इस दौरान कब्ज़ व् पाचन सम्बन्धी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।
  • नौवें महीने में महिला को डिलीवरी के बारे में सोच सोच कर थोड़ा स्ट्रेस भी हो सकता है।
  • इस दौरान शिशु अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में आ चूका होता है जिसकी वजह से शिशु की हलचल में कमी आ सकती है ऐसे में महिला थोड़ा घबरा भी सकती है लेकिन इसमें कोई घबराने की बात नहीं होती है।

प्रेग्नेंट महिला को नौवें महीने में किन -किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

गर्भवती महिला को नौवें महीने में कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे दोनों को कोई दिक्कत नहीं हो और महिला की डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिल सकें।

डिलीवरी बैग पैक कर लें

सबसे पहले तो महिला को हॉस्पिटल लेकर जाने वाला बैग पहले से ही तैयार कर लेना चाहिए जिसमे आपके सारे जरुरी कागज़, महिला व् बच्चे के लिए सभी जरुरी सामान आदि हो। ताकि जैसे ही आपको लेबर पेन शुरू हो तो आपको कुछ इक्कठा नहीं करना पड़े बस आप जल्द से जल्द हॉस्पिटल पहुँच जाएँ।

स्ट्रेस नहीं लें

अधिकतर महिलाएं खासकर जिन महिलाओं की पहली डिलीवरी होती है या फिर प्रेगनेंसी में दिक्कतें अधिक होती है और डिलीवरी के समय के पास आने पर बहुत ज्यादा तनाव में आ जाती है। महिलाओं को ऐसे में बिल्कुल भी स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए बल्कि रिलैक्स रहना चाहिए क्योंकि तनाव से डिलीवरी में दिक्कतें बढ़ती है वहीँ महिला के शांत रहने से डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिलती है।

पानी भरपूर पीएं

महिला को नौवें महीने शरीर में पानी की कमी बिल्कुल नहीं होने देनी चाहिए क्योंकि पानी की कमी के कारण महिला और शिशु दोनों की दिक्कतें बढ़ सकती है। ऐसे में महिला को आठ दस गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।

जल्दबाज़ी नहीं करें

प्रेगनेंसी का नौवां महीना बहुत ही ज्यादा ध्यान रखने वाला होता है ऐसे में महिला को किसी भी काम में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए। जैसे की महिला को अचानक से या तेजी से उठना, बैठना नहीं चाहिए बल्कि किसी चीज का सहारा लेकर आराम से उठना बैठना चाहिए। ज्यादा तेजी से चलना नहीं चाहिए, किसी भी काम को करने में तेजी नहीं करनी चाहिए, आदि। क्योंकि ऐसा करने से गर्भ में पल रहे शिशु को दिक्कत महसूस हो सकती है।

पेट पर दबाव नहीं डालना चाहिए

प्रेग्नेंट महिला को इस दौरान कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे की महिला के पेट पर दबाव पड़े। क्योंकि इसकी वजह से गर्भ में शिशु को दिक्कत महसूस हो सकती है।

नोर्मल डिलीवरी के लिए शरीर पर जोर नहीं डालें

बहुत सी महिलाएं यही चाहती हैं की वो सामान्य प्रसव से शिशु को जन्म दें। और इसके लिए वो नौवें महीने में शरीर पर कई बार जोर भी डालने लगती है जैसे की पोछा लगाना शुरू कर देती हैं लेकिन महिला को ऐसा करने से बचना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने की वजह से आपको या शिशु को नुकसान पहुँचने का खतरा रहता है।

खाना पीना अच्छा रखें

नौवें महीने में महिला को अपने ख़ान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए ताकि डिलीवरी के समय महिला के शरीर में आयरन की कमी नहीं हो, महिला को डिलीवरी के लिए एनर्जी मिल सकें, आदि। लेकिन साथ ही ध्यान रखें की महिला ऐसी डाइट नहीं लें जिसे खाने से महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी अधिक हो।

इन चीजों का सेवन नहीं करें

ज्यादा चाय कॉफ़ी, नशीले पदार्थ, कच्चा मास व् अंडा, जंक फ़ूड, ज्यादा तेल मसाले आहार, बासी खाना, डिब्बाबंद आहार आदि का सेवन महिला को प्रेगनेंसी के नौवें महीने में नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसकी वजह से महिला की सेहत सम्बन्धी परेशानियां बढ़ सकती है।

थोड़ा वाक जरूर करें

नौवें महीने में महिला को थोड़ी देर सुबह शाम चहलकदमी जरूर करनी चाहिए ताकि शरीर में ब्लड फ्लो को बेहतर होने में मदद मिल सकें। इसके अलावा वाक करने से महिला के शरीर की अन्य प्रक्रियाओं को भी सही तरीके से काम करने में मदद मिलती है।

अकेली नहीं रहें

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को अकेले नहीं रहना चाहिए बल्कि घर वालों के साथ रहना चाहिए क्योंकि इससे महिला का तनाव कम होता है साथ ही यदि डिलीवरी का समय पास हो तो आपको तुरंत ही डॉक्टर के पास पहुंचा दिया जाता है।

नेगेटिव नहीं सोचें

डिलीवरी को लेकर यदि आपके मन में में कोई डर है तो आपको उस डर को दूर करना चाहिए और नेगेटिव बिल्कुल भी नहीं सोचना चाहिए क्योंकि यदि आप पॉजिटिव रहती हैं। तो इससे आपको अपनी डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिलती है।

आराम करना नहीं भूलें

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में थोड़ा काम करने के बाद ही महिला को थकावट महसूस हो सकती है ऐसे में महिला इस बात का ध्यान रखें की अपने शरीर को ज्यादा थकाएं नहीं बल्कि ज्यादा से ज्यादा आराम करें। ताकि महिला को रिलैक्स व् ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिल सकें। साथ ही यदि महिला को इस दौरान बेहतर नींद लेने के लिए प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल करना चाहिए।

प्रसव की जानकारी इक्कठी करें

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को प्रसव से जुडी साड़ी जानकारी इक्कठी कर लेनी चाहिए ताकि महिला को प्रसव के लक्षणों को समझने में आसानी हो। जिससे महिला को जैसे ही लेबर पेन शुरू हो तो बिना देरी किये आप तुरंत डॉक्टर तक पहुँच जाएँ।

सम्बन्ध बनाने से बचें

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बनाने से भी बचना चाहिए क्योंकि इस दौरान महिला का पेट पूरी तरह बाहर होता है ऐसे में थोड़ी सी चूक गंभीर समस्या खड़ी कर सकती है।

तो यह हैं कुछ बातें जिनका ध्यान गर्भवती महिला को नौवें महीने में जरूर रखना चाहिए ताकि महिला व् शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें। इसके अलावा गर्भवती महिला को शरीर में कुछ भी असहज महसूस हो तो आपको एक बार डॉक्टर से बात जरूर करनी चाहिए।

Precautions for ninth month of pregnancy

पेट में गैस बनने की समस्या से ऐसे पाएं निजात?

पेट में गैस एक ऐसी समस्या है जिससे आज कल हर दूसरा व्यक्ति परेशान रहता है। और इसका सबसे अहम कारण यह हैं की आज कल लोगो का खान पान सही नहीं है, लोगो का रूटीन सही नहीं जब मन आये तब खा लेते हैं, बाहर का फ़ूड खाने में लोगो को ज्यादा मज़ा आता है, आदि।

जिस व्यक्ति को पेट में गैस हो जाती है तो इसके बाद उनके खट्टी डकार, पेट में दर्द, कब्ज़, सीने में जलन आदि की समस्या भी हो जाती है। और जिस व्यक्ति को यह समस्या बार बार होती है वो तो बहुत ज्यादा परेशान हो जाते हैं इसकी वजह से सिर दर्द, पेट दर्द, जैसी समस्या अधिक बढ़ सकती है।

इस समस्या के लिए कई लोग महंगे से महंगा ट्रीटमेंट भी लेते हैं जो कई बार असरदार होता है कई बार नहीं, तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको पेट में गैस की समस्या से कैसे आप आसानी से निजात पा सकते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

क्यों होती है पेट में गैस?

  • पेट में गैस होने का सबसे अहम कारण है लोगो के खाने का कोई रूटीन नहीं है जब भूख लगती है तब वो खाते नहीं है और उसके बाद जब मन में आता है तो खा लेते हैं ऐसे में लम्बे समय तक भूखा रहने के कारण पेट में गैस बनना आम बात होती है।
  • जंक फ़ूड, ज्यादा मसालेदार खाना खाने के कारण पाचन क्रिया को उसे पचाने में समय लगता है जिसकी वजह से पेट में गैस हो सकती है।
  • कई लोगो को बासी व् ठंडा खाने के कारण भी गैस बन जाती है।
  • खाली पेट चाय पीने, खट्टे फल खाने के कारण भी गैस बन सकती है।
  • यदि आप किसी बिमारी से सम्बंधित दवाइयों का सेवन कर रहे हैं तो उन दवाइयों की तासीर गर्म हो सकती है कई बारे उन्हें खाने की वजह से भी गैस बन जाती है।
  • खाना खाने के बाद तुरंत सो जाने पर खाना अच्छे से हज़म नहीं हो पाता है जिसकी वजह से भी गैस बनती है।

पेट में गैस की समस्या से निजात पाने के उपाय

यदि आपको गैस की समस्या अधिक रहती है तो आपको घर में ही कुछ आसान नुस्खों को ट्राई करके इस समस्या से निजात पा सकते हैं। यह नुस्खे आसान होने के साथ बहुत असरदार भी होते हैं। तो आइये अब जानते हैं की वो उपाय कौन से हैं।

सेब का सिरका

एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच सेब का सिरका डालकर इसका सेवन करें। ऐसा करने से आपको गैस की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है क्योंकि सेब के सिरके में फाइबर मौजूद होता है जो आपके पेट में से गैस को बाहर निकालने में मदद करता है।

जीरा सौंफ की चाय

गैस की समस्या से बचाव के लिए जीरा व् सौंफ की चाय बनाकर पीना भी फायदेमंद होता है। इसके लिए आप थोड़ा सा जीरा व् थोड़ी सी सौंफ को पानी में डालकर उबाल लें उसके बाद आप इसे छानकर इसका सेवन करें।

अजवाइन और नमक

पेट में गैस होने पर एक चम्मच अजवाइन में थोड़ा सा काला नमक मिलाएं और उसके बाद एक गिलास गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन कर लें। ऐसा करने से भी आपको पेट में गैस की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

हरड़ का चूर्ण

हरड़ का चूर्ण आपको पंसारी की दूकान से आसानी से मिल जाता है ऐसे में यदि आपको गैस की समस्या रहती है तो आपको इस चूर्ण को घर में लाकर रख लेना चाहिए। उसके बाद आपको जब भी गैस की समस्या हो तो को थोड़े से हरड़ के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर उसका सेवन करें इससे आपको गैस की समस्या से जल्दी से जल्दी छुटकारा पाने में मदद मिलेगी।

अदरक

अदरक का इस्तेमाल करने से भी गैस की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है इसके सेवन के लिए आप एक छोटे से अदरक के टुकड़े को काटकर उसपर काला नमक लगाएं और उसे चूसें। ऐसा करने से आपको गैस की समस्या से बचे रहने में मदद मिलेगी। अदरक के टुकड़े को निम्बू के रस में भिगोकर चूसने से भी गैस की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

चने का सत्तू पीएं

गैस की समस्या से राहत पाने के लिए आप एक गिलास चने का सत्तू बनाकर पीये इससे पेट को ठंडक मिलती है जिससे पेट में गैस की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

नारियल पानी

नारियल पानी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है और गैस की समस्या से बचाव के लिए भी आप इसका सेवन कर सकते हैं। ऐसे में जब भी आपको पेट में गैस को तो आप एक नारियल पानी मंगाएं और उसका सेवन करें आपको रहत मिलेगी।

एलोवेरा

एलोवेरा का इस्तेमाल आपने आज तक ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए क्या होगा लेकिन आपको यह भी पता होना चाहिए की एलोवेरा का इस्तेमाल करने से पेट में गैस की समस्या से निजात पाने में भी मदद मिलती है। इसके लिए आप एलोवेरा जूस जो की आसानी से बाजार में कहीं भी मिल जाता है उसका सेवन करें। नियमित रूप से खाली पेट एलोवेरा जूस पीने से आपको इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

लौंग

खाना खाने के बाद एक लौंग ले और उसे थोड़ी देर तक मुँह में रखें चूसें ऐसा करने से भी आपको गैस नहीं बनती है यदि आपको ज्यादा गैस की समस्या रहती है तो आप रोजाना खाना खाने के बाद ऐसा करें।

निम्बू और नमक

एक गिलास पानी में नमक और एक निम्बू का रस निचोड़ कर उसका सेवन करें ऐसा करने से भी एसिडिटी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

एसिडिटी की समस्या से बचने के आसान टिप्स

  • जरुरत से ज्यादा नहीं खाएं जितनी भूख हो उतने ही आहार का सेवन करें।
  • खाना खाने के बाद तुरंत सोएं नहीं बल्कि थोड़ा चहलकदमी करें ताकि भोजन को आसानी से हज़म होने में मदद मिल सकें।
  • ज्यादा तेलीय, मसालेदार, खाने का सेवन करने से बचें सात्विक आहार का सेवन करें, यदि बाहर का खाने का मन है तो कभी कभार थोड़ा बहुत ठीक है लेकिन रोजाना ऐसा खाना खाना अच्छी बता नहीं है।
  • खाली पेट चाय या खट्टे फल या अन्य कोई चीज जिसे खाने से आपको गैस बनती है उसका सेवन नहीं करें।
  • यदि आपको धूम्रपान करने या अल्कोहल का सेवन करने से गैस बनती है तो आपको उसका सेवन करने से भी बचना चाहिए।
  • थोड़ा थोड़ा करके खाएं, खाने में जल्दी नहीं करें, धीरे धीरे चबाकर खाएं, ऐसा करने से भोजन को पचाने में आसानी होती है।
  • योगासन करने से भी एसिडिटी की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • पेट में गैस की समस्या से बचे रहने के लिए आपको पानी व् अन्य तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करना चाहिए।

पेट में गैस होने पर डॉक्टर से कब मिलें?

वैसे तो गैस की समस्या के लिए घरेलू नुस्खों से आराम मिल जाता है लेकिन फिर भी यदि आपको गैस की समस्या ज्यादा होती है, गैस की वजह से सिर व् पेट में दर्द ज्यादा रहता है। तो आपको इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए और जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए।

तो यह हैं पेट में गैस की समस्या होने के कारण व् इस समस्या से बचाव के उपाय, यदि आपको भी पेट में गैस की समस्या होती है तो आप भी इन टिप्स को ट्राई कर सकते हैं। इसके अलावा पेट में गैस की समस्या होने पर इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए बल्कि इसका इलाज जरूर करना चाहिए ताकि पेट में दर्द आदि की समस्या से आपको बचे रहने में मदद मिल सकें।

Stomach gas relief tips

डी टैन क्या होता है? घर में डी टैन से निजात पाने के तरीके

हॉट हॉट गर्मियों के मौसम में टैनिंग की समस्या होना आम बात होती है जिसकी वजह से आपका खूबसूरत चेहरा काला पड़ने लगता है। जिसकी वजह से आपको अपनी सुन्दरता में कमी महसूस हो सकती है। ऐसे में जरुरी है की गर्मियों में स्किन केयर के लिए आपके पास डी टैन का कोई न कोई उपाय जरूर हो ताकि गर्मियों में भी आपकी स्किन को एक दम निखरा हुआ रहने में मदद मिल सकें। तो आइये अब जानते हैं की डी टैन क्या होता है और डी टैन करने के घरेलू नुस्खे कौन कौन से हैं।

टैनिंग क्या होती है?

स्किन की बाहरी यानी की सबसे ऊपरी परत में मेलेनिन पिग्मेंट होता है, जो आपकी स्किन को उसका कलर यानी रंगत देता है। साथ ही मेलेनिन ही स्किन को धूप से भी बचाता है। लेकिन जब आपकी स्किन सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में आती है, तो यह और ज्यादा मेलेनिन का उत्पादन करने लगती है, जिसकी वजह से स्किन टैनिंग हो जाती है। और यह एक तरह का नेचुरल स्किन से जुडी प्रक्रिया है। टैनिंग से डेड स्किन सेल्स में व्रद्धि होती है। जिसकी वजह से स्किन काली, सुस्त, बेजान, रूखी और मोटी और बेरंग से दिखाई देने लगती है।

डी टैन क्या होता है?

फेस पर होने वाली टैनिंग की समस्या को दूर करने और आपके चेहरे की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे, क्रीम्स, मसाज आदि को ट्राई किया जाता है। और इन्हे ट्राई करने के बाद स्किन पर जमी धूल मिट्टी, कालापन दूर हो जाता है और इस प्रक्रिया को ही डी टैन कहा जाता है।

डी टैन करने के घरेलू नुस्खें

यदि आपके फेस पर टैनिंग की समस्या हो गई तो इसे दूर करने के लिए आपको महंगे महंगे प्रोडक्ट्स को खरीदने की जरुरत नहीं है। बल्कि आप कुछ आसान घरेलू टिप्स को ट्राई करके इस समस्या से निजात पा सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं कुछ डी टैन के कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में:

एलोवेरा, शहद और हल्दी

हफ्ते में एक या दो बार आप दो चम्मच एलोवेरा जैल में एक चम्मच शहद और आधा चम्मच हल्दी एक बाउल में लेकर इसे अच्छे से मिलाएं। उसके बाद इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दें सूखने के बाद साफ़ पानी से अपने चेहरे को धो लें। ऐसा करने से आपकी डेड स्किन निकल जाएगी।

शहद और निम्बू

एक कटोरी में एक से डेढ़ चम्मच शहद और एक चम्मच निम्बू का रस डाल ले और इसे अच्छे से मिक्स कर दें। मिक्स करने के बाद इसे अपने चेहरे पर लगाएं और उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें। ऐसा करने से स्किन टैनिंग को दूर करने में मदद मिलती है।

दही और कॉफ़ी पाउडर

दो चम्मच दही में एक चम्मच कॉफ़ी पाउडर और थोड़ी हल्दी मिलाएं और एक पेस्ट तैयार करें। उसके बाद इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद साफ़ पानी से चेहरे को धो लें ऐसा करने से भी टैनिंग की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

टमाटर

टमाटर में नेचुरल ब्लीचिंग गुण मौजूद होते हैं ऐसे में टमाटर के गुद्दे को चेहरे पर लगाने से स्किन को ग्लोइंग बनाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप टमाटर के गुद्दे को चेहरे पर लगाएं उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद साफ़ पानी से चेहरे को धो लें। आपको जरूर फर्क दिखाई देगा आप चाहे तो हर दूसरे तीसरे दिन इस टिप्स को ट्राई कर सकते हैं।

मुल्तानी मिट्टी

दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी का पाउडर ले उसके बाद उसमे एलोवेरा जैल मिलाकर एक पेस्ट बनाएं पेस्ट बनाकर इसे मास्क की तरह चेहरे पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद साफ़ पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को धो लें ऐसा करने से आपको डैमेज स्किन को हटाने और स्किन को कोमल व् निखरी हुई बनाने में मदद मिलती है।

आलू का रस

हफ्ते में कम से कम दो बार आलू और निम्बू के रस को बराबर मात्रा में मिलाएं और उसे स्किन पर लगाएं आप चाहे तो दो से टीम मिनट तक मसाज भी कर सकतें हैं। उसके बाद इसे दस से पंद्रह मिनट तक चेहरे पर ही लगे रहने दें। फिर साफ़ पानी से मुँह धो लें ऐसा करने से भी स्किन की ख़ूबसूरती को बने रहने में मदद मिलती है। सही तरीके से इस रस को चेहरे पर फैलाने के लिए आप रुई का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

पपीता

पपीते का दो से तीन चम्मच पेस्ट, एक चम्मच शहद और थोड़ा सा निम्बू का रस एक बाउल में डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। इस पेस्ट को मिक्स करने के बाद आप इसे चेहरे पर लगाएं। उसके बाद इसे बीस से पच्चीस मिनट के लिए चेहरे पर ही छोड़ दें। फिर चेहरे को साफ़ पानी से धो लें, चेहरे का कालापन, सनबर्न की समस्या, मुहांसों की समस्या को दूर करने के लिए यह एक बेहतरीन घरेलू नुस्खा है।

संतरे का छिलका और दूध

दो चम्मच संतरे के छिलके का पाउडर लेकर उसे एक बाउल में डाल लें अब इसमें कच्चा दूध मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दें। सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें। इस तरीके को ट्राई करने से आपको टैनिंग की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

बेसन

एक कटोरी में दो तीन चम्मच बेसन, एक चम्मच जैतून का तेल, निम्बू का रस और चुटकी भर हल्दी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और सूखने के लिए छोड़ दें, सूखने के बाद गुनगुने पाने का इस्तेमाल करके चेहरे को धो लें। ऐसा करने से टैनिंग की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

केला

आधा केला लेकर उसे अच्छे से पीस लें, उसके बाद एक बाउल में पीसा हुआ केला, एक चम्मच निम्बू का रस, दो चम्मच कच्चा दूध मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें, अब इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। उसके बाद पंद्रह से बीस मिनट बाद चेहरे को धो लें इस तरीके को ट्राई करने से भी टैनिंग की समस्या को दूर करने में मदद मिलती है।

टैनिंग की समस्या से बचे रहने के अन्य टिप्स

  • धूप में जाने से पहले सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें।
  • बाहर जाने पर अपने चेहरे को अच्छे से कवर करें।
  • दिन में पांच छह बार नोर्मल पानी से अपना मुँह जरूर धोएं।
  • स्किन की ख़ूबसूरती को बरकरार रखने के लिए फेस के लिए ऊपर दिए गए टिप्स में से किसी न किसी को जरूर ट्राई करें और नियमित करें।
  • पानी का भरपूर सेवन करें इससे भी आपकी स्किन को पोषण मिलता हैं।

तो यह हैं डी टैन क्या होता है और डी टैन करने के घरेलू नुस्खें क्या हैं उससे जुड़े टिप्स, ऐसे में आप भी बिना पैसे खर्च किये अपने घर में मौजूद सामान व् पौधों की मदद से अपने चेहरे की ख़ूबसूरती को बरकरार रख सकते हैं।