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मेनोपॉज़ के बाद होने वाली समस्या और समाधान

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मेनोपॉज़ को महिला का जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट भी कहा जाता है क्योंकि इस दौरान महिला को बहुत सी ऐसी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है जो की उसने पहले कभी नहीं किया है। कुछ महिलाओं को मेनोपॉज़ के दौरान ज्यादा परेशानी नहीं होती है लेकिन कुछ महिलाओं को बहुत अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह एक ऐसी अवस्था होती है जो हर महिला को अलग अलग तरह से प्रभावित करती है क्योंकि यह उसके शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करती है। इस दौरान महिला को तनाव, अनिंद्रा, अकेलापन, हदय सम्बन्धी आदि कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

यह समय हर महिला की जिंदगी का अहम हिस्सा होता है इस दौरान महिला को पीरियड्स आने बंद हो जाते है। और महिला के गर्भाशय में अंडे बनने की प्रक्रिया भी खत्म हो जाती है इसके बाद महिला के प्राकृतिक रूप से माँ बनने की सम्भावना बिल्कुल खत्म हो जाती है। ज्यादातर महिलाओं को यह पेंतालिस से पचास वर्ष की आयु में हो जाता है। और कुछ महिलाओं को इस उम्र के बाद भी हो सकता है, यह हर महिला के बॉडी में हो रहे बदलाव पर निर्भर करता है। तो आइये अब जानते हैं की मेओपोज के दौरान महिला के साथ कौन कौन सी समस्याए हो सकती है।

मेनोपॉज़ के दौरान होने वाली समस्याए:- यह हर महिला की लाइफ में होने वाली एक शारीरिक प्रक्रिया होती है। और इस समय महिला को कई बार बहुत पीड़ा का सामना भी करना पड़ता है, साथ ही इस समय महिला के को शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी बहुत से बदलाव का सामना करना पड़ सकता है। तो आइए अब जानते हैं की महिला को मेनोपॉज़ के दौरान कौन कौन सी परेशानियां होती है।

  • शरीर में बहुत तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं।
  • महिला की सोच पर असर पड़ता है कई बार उसकी स्मरण शक्ति भी कम होने लगती है।
  • मूड में बहुत से बदलाव आते हैं, जिसके कारण तनाव होना आम बात होती है।
  • महिला के प्राइवेट पार्ट में सूखापन आने लगता है, जिसके कारण उसे सम्बन्ध बनाने में परेशानी हो सकती है ।
  • बॉडी में दर्द आदि की समस्या रहने लगती है।
  • अनिंद्रा की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • यूरिन पास करते समय दर्द व् जलन महसूस हो सकती है।
  • शरीर में बहुत अधिक कमजोरी आने लगती है, थकावट आदि की समस्या के कारण भी आपको परेशान होना पड़ सकता है।
  • हाई ब्लड प्रैशर की समस्या का सामना भी आपको करना पड़ सकता है।
  • मेनोपॉज़ होने पर हदय सम्बन्धी समस्या भी आपको हो सकती है।
  • इस दौरान महिला का वजन भी कई बार बढ़ने लगता है।

मेनोपॉज़ का उपचार:- मेनोपॉज़ के दौरान महिला कई परेशानियों से गुजरती है। लेकिन ऐसा हर महिला के साथ हो कोई जरुरी नहीं होता है। लेकिन कुछ महिलाओं को इस दौरान काफी पीड़ा होती है। ऐसे में आज हम आपको मेनोपॉज़ की समस्या से निपटने के लिए कुछ उपचार बताने जा रहे हैं जिससे आपको मेनोपॉज़ के दौरान होने वाली परेशानी से बचाव करने में मदद मिलती है।

गर्म पसीना आने पर करें यह उपचार:- मेनोपॉज़ के दौरान महिला को बहुत अधिक पसीना आता है तो ऐसा लगता है की जैसे गर्म पानी बॉडी पर रखा हुआ है। तो आइये जानते हैं की इस समस्या से बचने के लिए महिला क्या क्या कर सकती है।

  • ऐसे में महिला को ज्यादा गर्मी में काम नहीं करना चाहिए बल्कि काम करते हुए पंखे या ए सी का प्रयोग करना चाहिए।
  • कई बार अधिक वजन भी मेनोपॉज़ में पसीना आने का कारण होता है इसीलिए अपने वजन को कम करना चाहिए।
  • यदि महिला धूम्रपान या अल्कोहल का सेवन करती है तो ऐसा भी नहीं करना चाहिए।
  • अधिक तीखा, मसालें वाले, तला हुआ भोजन आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • जब भी आपको अधिक पसीना आए तो ठन्डे में बैठकर गहरी सांस लेना चाहिए इससे आपको आराम मिलेगा।
  • ज्यादा टाइट कपडे न पहने, और चाय कॉफ़ी जैसी चीजों का अधिक सेवन न करें।

अनिद्रा की समस्या को कैसे दूर करें:- शरीर में हो रहे लगातार हार्मोनल बदलाव के कारण आपको अनिंद्रा की परेशानी बी हो सकती है। या बार बार नींद खुलती रहती है तो इससे बचने के लिए आप आइये जानते हैं क्या कर सकते है।

  • अपने सोने के स्थान को साफ सुथरा और आरामदायक रखें।
  • नींद की गोली आदि का सेवन करें।
  • रोजाना सोने का समय बनाएं ताकि आपका रूटीन सेट हो जाए।
  • सोते समय हल्के और आरामदायक कपडे पहने और कमरे को ठंडा रखें।
  • रात का भोजन हल्का करें और देरी से भोजन न करें क्योंकि इसके कारण भी आपको नींद से जुडी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • सोने से पहले न तो कैफीन का सेवन करें और न ही फ़ोन आदि का इस्तेमाल करें इससे आपको परेशानी बढ़ सकती है।

आहार से न करें लापवाही:- मेनोपॉज़ होने पर शरीर में कमजोरी आने लगती है। और ऐसे में आपको अपनी डाइट का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और उसमे किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए। स्वस्थ संतुलित व् पौष्टिक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। आइये जानते है की आपको अपने आहार का कैसे ध्यान रखना चाहिए।

  • सबसे पहले तो शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए क्योंकि पानी आपके शरीर के लिए ऊर्जा स्त्रोत का काम करता है, और आपको दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।
  • प्रोटीन और कैल्शियम युक्त आहार का सबसे ज्यादा सेवन करना चाहिए जैसे की सुबह नाश्ते में अंडे का सेवन करना चाहिए और दिन में दो से तीन गिलास दूध जरूर पीना चाहिए।
  • ऐसे आहार से परहेज करना चाहिए जो मोटापा बढ़ाते हैं या फिर जिन्हे खाने से आपको अधिक पसीना आता है, जैसे की ज्यादा तला हुआ, या तीखा खाना नहीं खाना चाहिए।
  • आहार में हरी सब्जियों और फलों का भरपूर सेवन करना चाहिए।
  • सुबह उठकर सूर्य की किरणों को भी बॉडी को लेना चाहिए इससे आपके शरीर को भरपूर मात्रा में विटामिन डी मिलता है।

तनाव का उपचार:- यह महिला के लिए एक ऐसी स्थिति होती है जिसमे बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला के मूड में भी बदलाव आना आम बात होती है। ऐसे में चिड़चिड़ापन होना, अधिक गुस्सा करना, सोचने की शक्ति कम होना, मानसिक रूप से परेशान होना आम बात होती है। ऐसे में आप इससे बचने के लिए क्या कर सकते हैं आइये जानते हैं।

  • जितना हो सके मस्तिष्क को आराम देना चाहिए और अपनी सोच को पॉजिटिव रखना चाहिए।
  • अपने आप को खुश रखने के लिए वो काम करें जिससे आपको ख़ुशी मिलती है।
  • अकेले न रहें हमेशा लोगो से बाते करें परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं।
  • योगासन व् मैडिटेशन करने से भी आपको मानसिक रूप से आराम से रहने में मदद मिलती है।
  • ज्यादा परेशानी होने पर एक बार आप अपने डॉक्टर से भी राय ले सकते है।

बालों और त्वचा से सम्बंधित समस्या का समाधान ऐसे करें:- मेनोपॉज़ का असर आपकी स्किन और बालों पर भी देखने को मिलता है, जैसे की स्किन का रुखा होना, बाल पतले होना, या बालों के झड़ने की समस्या का अधिक होना। तो आइये जानते हैं की आप इस समस्या का समाधान कैसे कर सकते हैं।

  • धूप में निकालने से पहले बालों और स्किन को अच्छे से ढक कर निकलें, साथ ही स्किन के लिए मॉइस्चराइजर का या सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें।
  • बालों के लिए उन्हें धोते समय कंडीशनर का इस्तेमाल करें।
  • स्किन के लिए अच्छे से मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें।
  • जितना हो सकें अधिक केमिकल का प्रयोग करने की बजाय हर्बल चीजों का इस्तेमाल करें।

सम्बन्ध से जुडी परेशानी होने पर:- मेनोपॉज़ के होने पर आपको अपनी शादीशुदा जिंदगी में भी थोड़ी परेशानी हो सकती है। जैसे की शारीरिक सम्बन्ध बनाते समय आपको अधिक दर्द का आभास होना, और सम्बन्ध बनाने की इच्छा न होना। तो आइये अब जानते हैं की आप इस समस्या से बचने के लिए क्या कर सकते है।

  • प्राइवेट पार्ट के लिए अच्छी सी क्रीम या चिकनाई युक्त पदार्थ का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • ज्यादा टाइट कपडे न पहने और अंडरवियर हमेशा कॉटन का पहने।
  • पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज करने से भी आपको आराम मिलता है, इसे करने के लिए आप अपने यूरिन को रोक रोक कर करें इसी को पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज कहा जाता है।
  • इसके अलावा आपको इन बदलाव के बारे में अपने पार्टनर से भी बात करनी चाहिए।

हार्मोनल बदलाव के लिए उपचार:- मेनोपॉज़ की अवस्था में लगातार और तेजी से हार्मोनल बदलाव होते हैं ऐसे में आपको इसके लिए या तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। या फिर अपनी दिनचर्या में अच्छे तरीके से बदलाव करना चाहिए जिससे आपको शारीरिक के साथ मानसिक रूप से भी फिट रहने में मदद मिल सकें। इसके लावा यदि आपको ज्यादा समस्या है तो आप डॉक्टर की राय के बाद इस समस्या से निजता पाने के लिए हार्मोनल थेरेपी का इस्तेमाल भी कर सकते है।

तो यह है कुछ समस्ये जो आपको मेनोपॉज़ के बाद हो सकती है। जिसके कारण आपको बहुत परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन आप यदि चाहे तो आसानी से इस समस्या का सामना कर सकती हैं, और इस दौरान होने वाली परेशानियों का समाधान भी कर सकती है। और इस दौरान होने वाली परेशानियों से बचाव के लिए आप ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे आपको मेनोपॉज़ के दौरान होने वाली परेशानियों से बचाव करने में मदद मिलती है।

गर्भावस्था में गैस की समस्या से छुटकारा

गर्भवती होने किसी भी महिला के लिए सबसे सुखद और खास अनुभव होता है। इस दौरान महिला कई शारीरिक व् मानसिक बदलाव से गुजरती है। ऐसे में महिला को उल्टी, पेट में दर्द, शरीर के अंगो में दर्द, तनाव, आदि होना आम बात होती है। लेकिन इस दौरान महिलाको होने वाली गैस की समस्या के कारण महिला बहुत ज्यादा परेशान होती है। इस बात का ध्यान भी आपको रखना चाहिए की गैस की समस्या होने पर अपने मन से दवाई लेने की जगह आपको इसे डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में प्रोजेस्टेरोन का स्तर काफी बढ़ जाता है, जिसके कारण आंत ढीली पड़ने लगती है। और भोजन को पचने में समय लगता है जिसके कारण महिला को गैस होने की परेशानी होती है। गैस के साथ कब्ज़ की भी समस्या महिला को हो सकती है। कई बार गैस का कारण, महिला का पानी कम पीना, या ज्यादा जंक और ऑयली खाने का सेवन भी हो सकता है। तो आइये आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान गैस की समस्या से बचने के कुछ टिप्स बताते है।

प्रेगनेंसी के दौरान गैस की समस्या से बचने के टिप्स:-

तरल पदार्थ:-

गर्भावस्था के दौरान आपको तरल पदार्थो का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से यूरिन पास करने के कारण बैड बैक्टेरिया को आपके शरीर से बाहर निकलने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपके पाचन तंत्र को भी फायदा मिलता है। और आपको कब्ज़ और गैस की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है, पानी के साथ आपको फ्रैश जूस का भी सेवन करना चाहिए।

अदरक:-

अदरक को कदूकस करके इसका रस निकाल लें, अब एक चम्मच अदरक के रस में एक चम्मच शहद मिलाएं। और जब भी आपको गैस की समस्या हो इसका सेवन करें, आपको प्रेगनेंसी के दौरान गैस की समस्या से बचने में मदद मिलेगी।

दालचीनी:-

एक कप पानी में एक चम्मच दालचीनी पाउडर और एक चम्मच शहद डालकर अच्छे से उबाल लें। उसके बाद इसे छान कर इसका सेवन करें, इससे आपको पेट से सम्बंधित परेशानी से राहत मिलती है, लेकिन ज्यादा गर्म का सेवन न करें।

मेथी:-

प्रेगनेंसी के दौरान गैस की समस्या से बचने के लिए मेथी एक असरदार उपाय है, इसके लिए आप एक गिलास पानी में दो चम्मच मेथी के बीजो को डालकर रख दें। उसके बाद सुबह उठकर इस पानी को छानकर इसका सेवन करें, ऐसा नियमित करने से आपको गैस की समस्या से बचने में मदद मिलती है।

धनिया:-

धनिया पाउडर को एक कप पानी में उबालकर इसे छानकर इसका सेवन करें। इससे भी आपको गैस की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। और आप इसका सेवन जब करें जब आपको गैस से परेशान हो, नियमित इसका सेवन न करें।

तनाव न लें:-

तनाव लेने के कारण भी महिला को पेट में ऐंठन व् गैस की समस्या हो सकती है। इसीलिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान मानसिक रूप से आराम लेना चाहिए, और जितना हो सके खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए।

धूम्रपान न करें:-

कई महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान भी धूम्रपान करती हैं जो की गलत होता है, इसके कारण भी प्रेग्नन्सी के दुराण महिला को पेट में गैस की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही यह बहुत नुकसानदायक भी होता है इसीलिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान इसके सेवन से बचना चाहिए।

गर्भावस्था में गैस की समस्या से बचने के लिए अन्य टिप्स:-

  • महिला को ज्यादा तेलीय और मसाले वाले भोजन से परहेज करना चाहिए।
  • नियमित हल्का फुल्का व्यायाम करने से भी आपको गैस की समस्या से बचने में मदद मिलती है।
  • भोजन को अच्छे से चबा कर और आराम से खाएं।
  • अपने आहार में फाइबर युक्त पदार्थो का सेवन भरपूर करें, इससे भी गैस की समस्या से बचने में मदद मिलती है। इसके लिए आप साबुत अनाज, चावल, हरी पत्तेदार सब्जियों आदि का सेवन कर सकते है।
  • अपने खाने के समय में ज्यादा बड़ा अंतराल न रखें।
  • ज्यादा टाइट कपडे न पहने।
  • खाने के बाद हलकी फुलकी वॉक जरूर करें।
  • पानी का सेवन जब भी करें गिलास में करें।
  • बड़े बड़े मील की जगह थोड़ी थोड़ी देर बाद छोटे छोटे मील खाएं, इससे आपको ऊर्जा से भरपूर रहने और गैस की समस्या से बचने में मदद मिलती है।

तो यदि आपको भी यह समस्या रहती है तो आपको भी ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल कर सकते है। इसके अलावा आपको इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए की आप अपने मन से दवाई न लें, और यदि आपको गैस की समस्या ज्यादा रहती है। तो इस बारे में आप अपने डॉक्टर से बात करें, क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा दवाइयों का सेवन आपके और शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

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अगर आप डिलीवरी के बाद भी पहले जैसी दिखना चाहती है? तो ये करें

डिलीवरी के बाद महिला और उसके परिवार के लिए बहुत ही ख़ुशी का समय होता है, क्योंकि एक नन्हा सा मेहमान उनकी जिंदगी में आता है, परन्तु इसके साथ महिला के शरीर में भी बहुत से बदलाव आते है, जैसे की महिला के स्तन से दूध आने लगता है, खान पान में बदलाव आने के कारण महिला का वजन भी बढ़ने लगता है, त्वचा पर भी इसका असर दिखता है, साथ ही महिला के पूरे फिगर में ही बदलाव आ जाता है, जिसके कारण महिला को ऐसा मह्सूस होने लगता है, की अब वो पहले जैसी खूबसूरत नहीं रही।

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क्या आप भी डिलीवरी के बाद अपनी बॉडी की शेप के खराब होने पर परेशान है? क्या आपका भी वजन बढ़ गया है? क्या आपकी भी ब्रैस्ट की शेप खराब हो गई है? ये परेशानी डिलीवरी के बाद ज्यादातर महिलाओ के साथ हो जाती है, और डिलीवरी के कम से कम छह हफ्ते तक आप इसके लिए कुछ कर भी नहीं सकते, और यदि आपकी डिलीवरी सीजेरियन हुई है तो आपको ज्यादा समय भी लग सकता है, डिलीवरी के बाद महिला की बॉडी को अच्छे से आराम की जरुरत होती है, क्योंकि उसका शरीर काफी कमजोर हो जाता है, और ऐसा भी कहा जाता है, डिलीवरी के बाद केवल नवजात शिशु का ही नहीं बल्कि माँ का भी नया जन्म होता है।

डिलीवरी के शुरूआती दिनों में न तो आप ज्यादा व्यायाम कर सकते है, और न ही अपने खान पान के प्रति लापरवाही, क्योंकि इस दौरान महिला केवल शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी परेशान होती है, परन्तु आप डिलीवरी के बाद भी अपने शरीर को सही शेप में ला सकती है, और बिलकुल वैसी ही दिख सकती है, जैसे की आप पहले थी इसके लिए आपको स्तनपान करवाते समय कभी भी ढीली ब्रा नहीं पहननी चाहिए, हलकी फुलकी सैर करनी चाहिए, इसके अलावा आप डिलीवरी के छह हफ्ते बाद अपने शरीर को फिर से वही शेप में ला सकती है, तो आइये जानते है की इसके लिए आपको किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

बच्चे को स्तनपान करवाएं:-

breastfeeding

कई महिलाओ का सोचना होता है की शिशु को स्तनपान करवाने के कारण उनकी बॉडी का शेप खराब हो रहा है, परन्तु ये बिलकुल गलत होता है, स्तनपान करवाने से महिला के शरीर पर जमी चर्बी को कम करने में मदद मिलती है, क्योंकि जब शिशु स्तनपान करता है, तो इसके कारण महिला के शरीर की कैलोरी बर्न होती है, ऐसा डॉक्टर भी कहते है, इसीलिए शिशु को हमेशा स्तनपान करवाना चाहिए, इसके कारण शिशु का विकास भी होता है, और आपको स्तनपान करवाते समय भी अपने साइज की ब्रा का चुनाव करना चाहिए, यदि आप ज्यादा टाइट या ढीली ब्रा पहनती है, तो इसके कारण आपका ब्रैस्ट ढीला हो सकता है।

वॉक करें:-

डिलीवरी के बाद महिलाओ को ज्यादा कड़ा व्यायाम करने के लिए मना किया जाता है, इसीलिए महिलाओ को ज्यादा व्यायाम करने की जगह थोड़ी देर वॉक जरूर करनी चाहिए, इसके कारण महिलाओ के शरीर को आराम भी मिलता है, आपका वजन भी घटता है, आपको तनाव से भी राहत मिलती है, और आपकी बॉडी को भी फिट रहने में मदद मिलती है, आप चाहे तो अपने शिशु को भी वॉक पर लेकर जा सकती है, इसके कारण उसे भी अच्छा महसूस होगा, साथ ही महिला के शरीर में ऊर्जा की भी वृद्धि होगी।

हल्का फुल्का व्यायाम करें:-

exercise

वैसे तो डिलीवरी के बाद महिलाओ को व्यायाम कम से कम छह हफ्ते के लिए नहीं करना चाहिए, परन्तु छह हफ्ते के बाद महिलाओ को हलके फुल्के व्यायाम को शुरू कर देना चाहिए, क्योंकि वजन घटाने और अपनी बॉडी को फिट रखने का सबसे अच्छा तरीका व्यायाम ही है, इसीलिए यदि आप भी डिलीवरी के बाद अपनी बॉडी को शेप में लाना चाहती है, तो इसके लिए आप जॉगिंग, तैराकी, बाइकिंग आदि कर सकती है, इसके कारण आपकी बॉडी को शेप में आने में मदद मिलेगी।

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पानी का भरपूर सेवन करें:-

पानी न केवल आपकी बॉडी को हाइड्रेट रखता है, बल्कि आपके शरीर में गर्मी लाता है जिसके कारण आपके शरीर में कैलोरी को बर्न होने में मदद मिलती है, साथ ही इसके कारण आपके शरीर में जमी गंदगी को भी यूरिन के रास्ते बाहर निकालने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपका बीमारियों से भी बचाव होता है, और आपको फिट रहने में मदद मिलती है, साथ ही यदि आप अपनी बॉडी में जमी चर्बी को तेजी से घटाना चाहते है, तो आपको सुबह शाम गुनगुने पानी में शहद और निम्बू का रस डाल कर उसका सेवन करना चाहिए।

तनाव कम करें:-

डिलीवरी के बाद महिला पर बहुत सी जिम्मेवारी बढ़ जाती है, शिशु की केयर और घर के काम में मगन होने के कारण महिला अपने ऊपर अच्छे से ध्यान ही नहीं दे पाती है, परतु यदि आप डिलीवरी के बाद अपनी बॉडी को शेप में लाना चाहती है, और पहले जैसी दिखना चाहती है, तो आपको अपने स्ट्रेस को कम करना चाहिए, क्योंकि तनाव आपके रक्त में होने वाले कार्टिसोल नामक हॉर्मोन की वृद्धि करता है, जिसके कारण आपका वजन कम होने में समस्या हो सकती है, और साथ ही कार्टिसोल के साथ एड्रेनालाइन नामक हॉर्मोन की भी वृद्धि होती है जिसके कारण वजन तो बढ़ता ही है, साथ ही तनाव, उदासी और चिड़चिड़ापन भी बढ़ने लगता है, इसीलिए यदि आप डिलीवरी के बाद फिर से वैसी ही दिखना चाहती है तो आपको अपने तनाव को कम करना चाहिए।

स्वस्थ व् पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए:-

vegetables

डिलीवरी के बाद महिला को अपने आहार में बिलकुल भी लापवाही नहीं करनी चाहिए, बल्कि स्वस्थ, संतुलित व् पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए, ऐसा करने से बच्चे के विकास के साथ महिला को भी फिट रहने में मदद मिलती हैं, इसके लिए आपको ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, ओमेगा ३ फैटी एसिड, कैल्शियम, आदि सभी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में हो, इसके कारण आपको ऊर्जा भी मिलती है, और साथ ही आपकी बॉडी को फिट रहने में भी मदद मिलती है।

भरपूर नींद लें:-

डिलीवरी के बाद रात को पूरे समय के लिए सोना महिलाओ के लिए मुश्किल होता है, परतु ,महिलाओ को पूरी नींद लेनी चाहिए चाहे फिर उन्हें दिन में ही सोना पड़ें, क्योंकि यदि महिलाएं पूरी नींद नहीं लेती है, तो इसके कारण महिलाओ को तनाव महसूस होता है, और साथ की रक्त में कार्टिसोल की वृद्धि होती है, जिसके कारण महिलायें अनफिट हो जाती है, इसीलिए यदि आप भी डिलीवरी के बाद बिलकुल फिट रहना चाहती है, तो आपको भरपूर नींद लेनी चाहिए।

स्किन की भी करें देखभाल:-

skin

गर्भावस्था के पूरा समय और डिलीवरी के बाद तक महिलाओ के शरीर में इतने बदलाव आते है, जिनका असर महिलाओ के चेहरे पर भी साफ़ दिखने लगता है, परन्तु उस समय महिलायें अपने नए अनुभव ले रही होती है, जिसके कारण वो अपनी स्किन की केयर भी अच्छे से नहीं कर पाती है, जिसके कारण उनकी स्किन भी पहले जैसी नहीं रहती है, इसीलिए डिलीवरी के बाद महिलाओ को अपनी स्किन की केयर पर भी ध्यान देना चाहिए, जिसके कारण उनकी ख़ूबसूरती में निखार आने में मदद मिल सकें, या फिर आपके इसके लिए ब्यूटी ट्रीटमेंट लेने चाहिए।

बैली रैप का इस्तेमाल करें:-

डिलीवरी के बाद बैली रैप का इस्तेमाल करने से भी आपको फिट रहने में मदद मिलती है, क्योंकि यह खास कर पेट की चर्बी, आपके गर्भाशय के उत्तको और मांसपेशियों को फिट करने में मदद करता है, साथ ही इसके कारण डिलीवरी के बाद आपको पीठ दर्द की समस्या होती है, तो उससे भी राहत दिलवाने में मदद करता है, सीजेरियन डिलीवरी के बाद यह महिलाओ को डॉक्टर्स द्वारा दिया जाता है, इसे नार्मल डिलीवरी वाली महिलाएं भी अपनी बॉडी को फिट रखने के लिए इस्तेमाल कर सकती है।

तो ये कुछ टिप्स है जिनका इस्तेमाल करके महिलायें वापिस से वैसी ही हो सकती है, जैसे की वो प्रेगनेंसी से पहले थी, परतु महिलाओ को ध्यान देना चाहिए यदि उनकी सीजेरियन डिलीवरी है तो उन्हें डॉक्टर से राय लेनी चाहिए, इसके अलावा आपको छह हफ्ते के बाद भी धीरे धीरे इन चीजों की शुरुआत करनी चाहिए, और आपको अपनी सेहत के प्रति ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिसके कारण आपके शिशु के विकास पर कोई गलत प्रभाव पड़े, बाकी आप इन टिप्स का इस्तेमाल नियमित रूप से करके बिलकुल वैसे ही दिख सकती है, जैसे की आप प्रेगनेंसी से पहले थी।

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नाख़ून सफ़ेद होने के कारण और उन्हें ठीक करने के उपाय

नाख़ून हमारे शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नाख़ून हमारी पर्सनालिटी को भी दर्शाता है। नाख़ूनो की केयर करना भी एक कला है। अक्सर हमने देखा है की लोग अपने नाखुनो को मेन्टेन रखने के लिए पार्लर पर बहुत सा खर्चा कर देते है। आमतौर देखने पर आता है की नखूनो पर ठीक से ध्यान न देने के कारण, सफ़ेद रंग के धब्बे पड़ जाते है। सफ़ेद निशान नाखुनो को कमजोर भी बनाते है। जिसके कारण नाख़ून टूटने लगते है, टूटे हुए नाख़ून हमारा इम्प्रैशन ख़राब कर देते है। किसी भी चीज़ को ठीक करने के लिए उसके कारण को जानना जरुरी है। नाखुनो का सफ़ेद पड़ने के अलग अलग कारण हो सकते है।

विटामिन और कैल्शियम की कमी

सामान्यत: विटामिन और कैल्शियम की कमी के कारण नाखुनो पर सफ़ेद निशान हो जाते है। आमतौर पर महिलाओं में कैल्शियम की कमी के कारण ही सफ़ेद निशान होते है। नाखुनो पर सफ़ेद निशान और बालो का रुखा और बेजान दिखना कैल्शियम की कमी को दर्शाता है। जिंक की कमी के कारण भी नाखुनो पर सफ़ेद निशान पढ़ जाते है।

एलर्जिक रिएक्शंस

कभी कभी कोई नया नेल पेंट या नया नेल रेमोवेर उपयोग करने से एलर्जिक रिएक्शन हो जाते है, जिस कारण नाखुनो पर सफ़ेद स्पॉट पढ़ जाते है।

बार बार पड़ने वाले सफ़ेद निशान किसी बड़ी बीमारी का भी कारण हो सकते है। मलेरिया और किसी विशेष प्रकार के बैक्टीरिया से भी सफ़ेद स्पॉट नाखुनो पर पढ़ जाते है। फंगल इन्फेक्शन होने पर भी नाखुनो पर सफ़ेद स्पॉट जल्दी जल्दी होने लगते है।

लिवर की बीमारी

अक्सर ये देखा गया है की, जिन लोगो को लिवर से सम्बंधित बीमारी हो , उनके नाखुनो पर भी सफ़ेद निशान पढ़ जाते है। एनिमिक होने से भी नाख़ून पर सफ़ेद धब्बे पढ़ जाते है।

सफ़ेद नाख़ून को ठीक करने के उपाय

इन सभी कारणो को जानने के बाद हमें ये देखना होगा की हम अपने नाखुनो की देखभाल कैसे करे की ये किसी बड़ी बीमारी या फंगल इन्फेक्शन वाली स्तिथि तक ना पहुंचे। और साथ ही जरुरी है की हमारे अच्छे इम्प्रैशन और पर्सनालिटी के लिए भी हमारे नेल्सअच्छे दिखे।

तेल से मसाज

चाय के पेड़ का तेल और ओलिव तेल को मिलाकर, नाखुनो पर मसाज करने से नाखुनो पर सफ़ेद दाग कम पड़ते है और नाख़ून का टूटना भी कम होता है। इस उपयोग को दिन में दो बार, एक सप्ताह लगातार करने से अच्छे परिणाम मिलते है।

६ बुँदे लैवेंडर आयल की १५ म. ल नारियल तेल में मिलाकर, १५ मिंट नाखुनो पर मसाज करने से सफ़ेद स्पॉट से छुटकारा मिलता है। लैवेंडर आयल की खास विशेषता है एंटी फंगल, जो सफ़ेद निशान फंगल इन्फेक्शन के कारण है उन्हें ठीक करने के लिए बहुत ही सहायक होगा।

कैल्शियम और मिनरल्स

नाखुनो पर सफ़ेद निशान, सबसे ज्यादा कैल्शियम, जिंक और मिनरल्स की कमी के कारण होते है। इसके लिए जरुरी है की हम संतुलित मात्रा में हरी सब्जिया , दाले, चिकन, अंडे, दूध, दही और फल अपने आहार में शामिल करे।

निम्बू के रस

कुछ बुँदे निम्बू के रस की ओलिव आयल में मिलाकर नाखुनो पर लगाने से भी नाखुनो के सफ़ेद स्पॉट को हटाने में फायदेमंद होता है। निम्बू का रस विटामिन सी से भरपूर होता है जो हमारे नेल्स के लिए बहुत ही फायदेमंद है, विटामिन्स की कमी को पूरा भी करेगा।

तो ये है नाख़ून के सफ़ेद होने के कारण और उन्हें ठीक करने के उपाय। इसके अतिरिक्त्त आपके नेलस पर फिर भी बार बार सफ़ेद स्पॉट पड़ते है , तो ये किसी बड़ी बीमारी का भी कारण हो सकता है। ऐसी स्तिथि में बिना देरी किये अपने डॉक्टर से मिले।

नार्मल डिलीवरी करने के लिए क्या-क्या उपाय हैं?

नार्मल डिलीवरी टिप्स: नार्मल डिलीवरी करने के लिए क्या-क्या उपाय हैं:-

जैसे ही किसी महिला को पता चलता हैं, की उसके गर्भ में एक नन्ही सी जान पल रही हैं| तो वो ख़ुशी से झूम उठती हैं| माँ बनना किसी भी औरत के लिए, उसकी जिंदगी का सबसे खास लम्हा होता हैं| गर्भावस्था के दौरान महिला में बहुत से बदलाव आते हैं| और कई बार उसे बहुत सी परेशानियां भी हो जाती हैं| परंतु जैसे ही बच्चा माँ की गोद में आता हैं| तो महिला अपनी सारी परेशानियों को झट से भुला देती हैं| और घर में आने वाले नए मेहमान के लिए ख़ुशी मानते हैं|

हर एक महिला चाहती हैं| के बच्चा नार्मल हो जाये| कुछ औरते ऐसी भी है जो चाहती है के उनका बच्चा बिना दर्द के, आसानी से हो जाये| तो वो सिजेरियन डिलीवरी को पसंद करती हैं| परंतु आज के समय में ज्यादातर महिलाएं नार्मल डिलीवरी को पहला स्थान देती हैं| वो चाहती हैं के उन्हें डिलीवरी के बाद ज्यादा परेशानी ना हो| ऐसा करने के लिए वो हर तरह की कोशिश करती हैं| क्योकि महिलायें जानती हैं, की नार्मल डिलीवरी का दर्द थोड़े समय के लिए ही होता हैं।

देखा जाये तो सिजेरियन डिलीवरी में ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती हैं। इसमें महिलाओ को हर चीज का पूरा ध्यान रखना पड़ता हैं। यदि हम नार्मल डिलीवरी की बात करे तो ध्यान तो इसमें भी रखना पड़ता है। परंतु सिजेरियन डिलीवरी से कम। नार्मल डिलीवरी में महिला को बस डिलीवरी के समय दर्द सहन पड़ता हैं, परंतु सिजेरियन में कई बार थोड़े दिन तक उठने-बैठने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।

नार्मल डिलीवरी होने से महिला के शरीर में ज्यादा परिवर्तन नहीं होते। परंतु सिजेरियन में कई दिन तक संभल कर चलना पड़ता हैं। नार्मल डिलीवरी चाहने वाली महिला को हर दम अपने आप को स्वस्थ रखना चाहिए। चलते फिरते रहना चाहिए। स्वस्थ आहार लेना चाहिए। गर्भवस्था में बरतने वाली सावधानियां बरतनी चाहिए। गर्भावस्था का समय किसी भी औरत के लिए बहुत कठिन, और अपना ध्यान रखने वाला होता हैं। इसीलिए पूरी तरह से अपना ध्यान रखना चाहिए।नार्मल डिलीवरी टिप्स: नार्मल डिलीवरी करने के लिए क्या-क्या उपाय हैं

नार्मल डिलीवरी चाहने वाली महिला हो या सिजेरियन चाहने वाली महिला, हर रूप में गर्भावस्था के पहले तीन महीने हर औरत को बहुत संभल कर काटने पड़ते हैं। जरुरी नहीं है के आप चाहे तो आपकी डिलीवरी नार्मल होगी, और आप इसके लिए बिना सावधानी का ध्यान रखे और काम करे। गर्भावस्था के पुरे नौ महीने आपको अपने डॉक्टर की राय लेनी चाहिए। क्योंकि गर्भावस्था में अपने अनुसार कोई भी काम करना कई बार किसी परेशानी को बुलावा दे देता हैं।

आइये जानते हैं कुछ ऐसे तरीको के बारे में, जिनसे आपको नार्मल डिलीवरी करवाने में सहायता मिल सकती हैं। परंतु ये भी जरुरी नहीं हैं की आपकी इन उपायो को करने से नार्मल डिलीवरी ही होगी। परंतु इससे आपके नार्मल डिलीवरी के अवसर बाद जायेगे। और ऐसा करने से आपका शरीर भी स्वस्थ रहेगा। तो ये कुछ उपाय हैं जिन्हें करके आपको नार्मल डिलीवरी करवाने में सहायता मिल सकती हैं।

नार्मल डिलीवरी करवाने के लिए कुछ टिप्स:-

महिलाओं को अपने आप को स्वस्थ रखना चाहिए:-

डिलीवरी से पहले आपको पूरी तरह से अपने आपको स्वस्थ रखना चाहिए| क्योंकि स्वस्थ माँ के गर्भ में ही स्वस्थ बच्चा निवास करता हैं| और आको इसलिए भी स्वस्थ रहना चाहिए ताकि डिलीवरी के समय कोई परेशानी न हो| और किसी भी प्रकार की कोई कमजोरी आपको न हो| डिलीवरी से पहले आपके शरीर में खून की कमी नहीं होनी चाहिए| नहीं तो डिलीवरी के समय परेशानी का सामना करना पड सकता हैं| और आपको ज्यादा तकलीफ भी हो सकती हैं|

गर्भवती महिला को अपने आप को मानसिक रूप से, और शारीरिक रूप से इस बात के लिए तैयार रखना चाहिए कि डिलीवरी के समय उसे बहुत तकलीफ होने वाली है| और उसे अपने आप को उस तकलीफ से बचाने के लिए खुद को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी है|

सही समय पर आहार लेना चाहिए:-

गर्भावस्था में महिलाओं के अंदर बहुत से परिवर्तन आते हैं| जिसके कारण कई बार उनका कुछ खाने पीने का मन नहीं करता हैं| ऐसे में महिलायें अपना आहार समय पर नहीं लेती| और ये उनके लिए नुक्सान का काम करता हैं| और महिला को ना केवल आहार समय पर लेना चाहिए बल्कि ध्यान रखना चाहिए| की भोजन संतुलित होना चाहिए, उसमे कैल्शियम युक्त भोजन होना चाहिए, आयरन होना चाहिए आदि| मतलब के सभी तर्क के मिनरल्स होने चाहिए| क्योंकि डिलीवरी के समय खून की कमी नहीं होनी चाहिए| इसलिए समय पर और पोष्टिक आहार लेना चाहिए|

पानी का उचित मात्रा में सेवन करे:-

गर्भ में बच्चा एक थैली में रहता है| और इसी थैली में बच्चा इधर से उधर घूमता हैं| इस थैली को एमनियोटिक फ्लूड कहते हैं| इसी से बच्चे को ऊर्जा मिलती है| ऐसे में मां के लिए ये जरूरी है कि वो हर रोज आठ से दस गिलास पानी पिए| पानी को ज्यादा मात्रा में पीने से यूरिन के रास्ते शरीर से कीटाणु बाहर निकल जाते हैं| पानी वैसे भी शरीर के लिए बहुत उपयोगी होता हैं| और गर्भवस्था के दौरान ये शिशु के लिए भी बहुत उपयोगी होता हैं| इसीलिए ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए|

महिलाओं को टहलना और व्ययाम करना चाहिए:-

नार्मल डिलीवरी के लिए महिलाओं को हमेशा घूमते फिरते रहना चाहिए| परंतु ये भी नही है के आप आप अपने आप को थकाने में लग जाये| आपको नियामत उप से सुबह और शाम घूमना चाहिए| इससे बच्चा तंदरुस्त रहता हैं| और माँ के स्वस्थ पर भी इसका अच्छा असर पड़ता हैं| हो सके तो खाना खाने के बाद जरूर घूमना चाहिए| इससे पाचन क्रिया बढ़ती हैं| और कब्ज़ और गैस जैसी बीमारिया नहीं होती|

महिलाओं को स्वस्थ रहने के लिए गर्भावस्था के दौरान व्ययाम भी करना चाहिए| परंतु पेट के बल रहकर कोई भी काम नहीं करना चाहिए इससे बच्चे पर बुरा असर पड़ता हैं| हल्का सा व्ययाम करना चाहिए जिससे आपको ज्यादा परेशानी का सामना न करना पड़े|

तनाव मुक्त रहना चाहिए:-

जब भी आप माँ बनने का फैसला करती हैं| तो आपको ध्यान रखना चाहिए के आप पर कोई भी मानसिक या शारीरिक दबाव न हो| ऐसे में आपको परेशानी का सामना करना पड सकता हैं| मानसिक परेशानी यानि कई बार ज्यादा टेंशन होने की वजह से गर्भपात का खतरा निरंतर बना रहता हैं| इसीलिए माँ बनने वाली महिला को ध्यान रखना चाहिए ,के वो ज्यादा किसी बात को लेकर तनाव न ले| इससे कई बार माँ के गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी बुरा असर पड़ता हैं|

तो ये सब कुछ उपाय हैं जिनकी वजह से आप नार्मल डिलीवरी करवाने में फायदा पा सकते हैं| नार्मल डिलीवरी करवाने के बाद महिला के शरीर को ज्यादा परिवर्तन से नहीं गुजरना पड़ता हैं| नार्मल डिलीवरी के बाद जहां मां को वापिस से अपने आप को सँभालने में ज्यादा वक्त नहीं लगता है| वहीं सिजेरियन से होने वाली डिलीवरी में मां को काफी समय तक ध्यान रखना पड़ता है| अगर आप गर्भवती हैं| तो इन उपायों को अपनाकर आप नार्मल डिलीवरी के चांसेज को बढ़ा सकती हैं|

गर्भावस्था के दौरान हर महिला की पहली चिंता ये होती हैं| कि उसका गर्भ में पल रहा बच्चा स्वस्थ है या नहीं| उसकी डिलीवरी नार्मल होगी या सिजेरियन डिलीवरी होगी| ऐसी बहुत सी बातें गर्भवती मां के दिमाग में चलती रहती हैं| और वो बस इन्ही बातो को सोचती रहती हैं| लगभग हर औरत चाहती है कि उसी डिलीवरी नार्मल हो लेकिन कई बार परिस्थ‍ितियां ऐसी हो जाती हैं| कि नार्मल डिलीवरी की जगह सिजेरियन ही करना पड़ता है| इसके लिए आपको अपने डॉक्टर की राय अनुसार ही चलना चाहिए|

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आर्मपिट को साफ़ और गोरा बनाने के उपाय

Remedies For Glowing Armpit

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अधिकतर महिलाएं खुद को स्मार्ट और मॉडर्न प्रदर्शित करने की चाह रखती है जिसके लिए वे तरह तरह की ब्यूटी और फैशन टिप्स का प्रयोग करती है। जैसे की वर्तमान में अधिकांश महिलाएं बैकलेस गाउन और स्लीवलेस कपडे अधिक पहनना पसंद करती है। लेकिन इनमे से शायद ही कुछ महिलाएं ऐसी होंगी जो बिना किसी झिझक और शर्मिंदगी के अपने हाथों को ऊपर कर सकती होंगी?

क्योंकि अक्सर अंडर आर्म्स का कालापन आपके लिए परेशानी का कारण बन जाता है। ऐसे में इनका ढकें रहना हो अच्छा होता है। लेकिन हमेशा एक ही तरह के कपडे पहनना किसे अच्छा लगता है? शायद किसी को भी नहीं। तो अगर आपके आर्मपिट में भी कालापन है और आप उसे हमेशा के लिए दूर करना चाहती है तो हमारे द्वारा बताएं गए इन उपायों का प्रयोग करके देखें।

इन उपायों को प्रयोग करने के बाद आप बिंदास होकर अपनी स्लीवलेस ड्रेस पहन सकती है और बिना किसी शर्मिंदगी के अपने हाथों को ऊपर उठा सकती है। क्योंकि साफ़ और गोर आर्मपिट न केवल आपको स्लीवलेस और बैकलेस ड्रेस पहनने की आजादी देते है बल्कि यह आपमें एटीएम विश्वास भी बढ़ाते है। इसीलिए इसके उपाय जानने से पूर्व हम आपको आर्म पिट के डार्क होने के कारणों के बारे में बता रहे है।

आर्म पिट के डार्क होने के क्या कारण है?

1. शेविंग :

अंडरआर्म के बालों को हटाने के लिए रेजर या शेविंग का प्रयोग बहुत सी लड़कियां और महिलाएं करती हैं। जबकि इसे करने के बाद आपकी स्किन पर थोड़े थोड़े बाल छूट जाते है जो और भी भद्दे लगते है। और इसी कारण आपके अंडरआर्म भी डार्क होने लगते है। ऐसा ही प्रभाव
हेयर रिमूवल क्रीम का भी होता है। इसीलिए आर्मपिट के बालों को हटाने के लिए हमेशा वैक्सिंग का प्रयोग करना चाहिए। इससे बाल जड़ से साफ़ होते है और कोई दाग या काला पन भी नहीं आता।

2. मृत कोशिकाएं :

अंडरआर्म का कालापन या डार्कनेस का एक कारण त्वचा की मृत कोशिकाएं भी होती है। जिनकी सही समय पर सफाई करना बेहद जरुरी होता है। इसके लिए आप लैक्टिक एसिड के साथ-साथ एक स्क्रब की सहायता ले सकती है।

3. प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल :

आजकल हर कोई डियोड्रेंट आदि का बहुत बढ़-चढ़कर प्रयोग कर रहा है जबकि इनमे बहुत से रासयनिक तत्व होते है जो स्किन के टोन को डार्क करने का काम करते है। इनके अधिक इस्तेमाल से स्किन में रंजकता (पिगमेंटेशन) हो सकती है जो, बहुत लम्बे समय के लिए आपके अंडरआर्म को काला कर देती है। इसीलिए इनके इस्तेमाल से बचें।

4. अन्य कारण :

कभी-कभी तंग कपडे पहनने से अंडर आर्म में घर्षण होता है जिससे इन्फेक्शन होता है और अंडरआर्म काले पड़ने लगते है। साथ ही अनुवांशिकता भी इसका एक कारण हो सकती है। अत्यधिक वजन, हार्मोनल चेंजेस था गर्भनिरोधक गोर्लिया भी डार्क अंडर आर्म्स का एक कारण है। साथ ही मधुमेह की रोगी भी इस समस्या से परेशान हो सकते है।

अंडरआर्म को गोरा और सुंदर बनाने के घरेलू उपाय :-

1. वैक्सिंग या इलेक्ट्रोलिसिस :

शेविंग और हेयर रिमूवल क्रीम डार्क अंडरआर्म की समस्या का पहला और मुख्य कारण है। ऐसे में वैक्सिंग करना एक मात्र लाभकारी उपाय है। माना यह थोड़ा दुखदाई होता है लेकिन इसमें बाल जड़ से निकाले जाते है और स्किन का रंग भी साफ़ हो जाता है। वैसे अगर आप किसी महंगी तकनीक का इस्तेमाल कर सकती है तो इलेक्ट्रोलिसिस भी एक बेहतर उपाय है।

2. नींबू का रस :

आर्मपिट को गोरा और साफ़ करने के लिए रोजाना नहाने से पूर्व उनपर नींबू का रस रगड़ें। ऐसा करने से उनका ककपन कुछ ही दिनों में दूर हो आजाएगा। दरअसल नींबू एक प्राकृतिक ब्लीच है जो अंडरआर्म को साफ़ करने में मदद करता है। नहाने के बाद उनपर मॉइस्चराइज़र लगाना न भूलें।

3. लाइटिंग मास्क :

इसके लिए आप स्वयं अपने घर पर एक लाइटनिंग पैक बना सकती है इसे आप बाजार से भी खरीद सकती है। पैक को घर पर बनाने के लिए एक मुट्ठी बेसन में दही, नींबू और हल्दी डालकर मिक्स कर लें। अब 15 से 20 मिनट के लिए इसे अपने आर्म पिट पर लगाएं और फिर पानी इसे पानी से साफ कर लें।

4. आलू और ककड़ी :

आलू में प्राकृतिक ब्लीचिंग एजेंट पाए जाते है जो स्किन की रंगत को साफ़ करने में मदद करते है। इसके लिए बारीक़ कटे आलू की स्लाइसेस लेकर उनके अपने अंडरआर्म में रगड़ें। आप चाहे तो इन्हे मसलकर इसके जूस का भी इस्तेमाल कर सकते है। 15 मिनट तक लगाए रखने के बाद उसे पानी से धो लें। नियमित प्रयोग से आपकी आर्मपिट गोरी और सुंदर हो जाएगी। इसकी जगह आप ककड़ी और उसके जूस का भी प्रयोग कर सकती है।

5. केसर :

केसर रंग निखारने के लिए एक बेहतर उपाय है। यह अंडरआर्म को साफ़ करने में भी आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए दो चम्मच दूध या मलाई में एक चुटकी केसर डालें और सोने से पहले इसे अपनी आर्मपिट पर लगाएं। पूरी रात इसे स्किन पर लगे रहने दें और अगली सुबह पानी से सफव कर लें। यह न केवल आर्मपिट को साफ़ करेगा बल्कि वहा से आने वाली बदबू के कारण बनने वाले बैक्टीरिया और कीटाणुओं को भी समाप्त करता है।

6. चंदन और गुलाब जल :

इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप चंदन के पाउडर और गुलाबजल का भी इस्तेमाल कर सकती है। इसके लिए चंदन और गुलाबकल को मिलाकर पेस्ट बनाएं और उसे अपने अंडरआर्म पर लगाएं। 5 मिनट तक लगाएं रखें और उसके बाद पानी से साफ़ कर लें। चंदन स्किन को निखारने में मदद करता है जबकि गुलाबजल स्किन को ठंडक प्रदान करके त्वचा को मुलायम बनाता है।

मूंगफली खाने के फायदे

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Health Benefits of Peanut (Mungfali)

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सर्दियों के मौसम में खान-पीने की ऐसी बहुत सी चीजें आने लगती है जो न केवल स्वादिष्ट होती है अपितु हमारे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी होती है। जैसे की – तिल से बनने वाले लडडू, गुड़पट्टी, गज्जक, गोंद के लडडू। इन्ही चीजों में से एक है मूंगफली। जो खाने में तो स्वादिष्ट होती ही है साथ ही स्वास्थ्य के लिए भी इसके ढेरों फायदे होते है। सामान्य भाषा में इसे सेहत का खजाना भी कहा जाता है।

जिसका सबसे बड़ा कारण इसमें मौजूद प्रोटीन की मात्रा होती है जो न केवल आपके स्वास्थ्य अपितु आपकी त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद होती है। सर्दियों के दिनों में रोजाना मूंगफली खाने से बहुत से फायदे मिलते है जो शायद आपको सामान्य खान पान से न मिल पाए। मूंगफली में अंडे की तुलना में कई गुना अधिक प्रोटीन पाया जाता है।

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इसके अतिरिक्त मूंगफली में आयरन, नियासिन, फोलेट, कैल्शियम और ज़िंक आदि भी पाया जाता है जो सेहत को बेहतर बनाने का काम करते है। अपने कमजोर शरीर और कम वजन से परेशान लोगों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है, इसके मौजूद वसा व्यक्ति को मोटा बनाने का काम करता है। मूंगफली का बटर यानी पीनट बटर का सेवन करने से व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है।mungfali मूंगफली खाने के फायदे

लेकिन ये बात भी सत्य है की किसी भी चीज का अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। क्योंकि इसकी तासीर काफी गर्म होती है इसलिए इसका सेवन लिमिटेड मात्रा में भी करना चाहिए। अगर आप ऐसा नहीं करते है तो स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती है। एक और बात, मूंगफली खाने के कम से कम 2 घंटे बाद तक पानी का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि अगर आप मूंगफली खाने के तुरंत बाद पानी का सेवन कर लेंगे तो आपको खांसी और गले की खराश की समस्या हो सकती है। यहाँ हम आपको मूंगफली खाने के कुछ अन्य फायदों के बारे में बताने जा रहे है। तो आइये जानते है क्या है वे फायदे?

मूंगफली खाने के फायदे :-

1. पोषक तत्व :

मूंगफली में बहुत तरह के पोषक तत्व पाए जाते है जो स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होते है। जिनमे नुट्रिएंट्स, मिनरल्स, एंटी ऑक्सीडेंट्स और विटामिन आदि तत्व सम्मिलित है।

2. कोलेस्ट्रॉल :

इस छोटे से दाने में mono unsaturated fatty acid पाए जाते है जो रक्त में LDL या बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करके good कोलेस्ट्रॉल के लेवल को बढ़ाने में मदद करते है।

3. प्रोटीन :

इस ड्राई नट में प्रोटीन और वसा की बहुत अच्छी मात्रा पाई जाती है। इसमें मौजूद प्रोटीन की मात्रा अंडे और दूध से भी अधिक होती है। तो अगर आपको दूध या अंडे के बराबर का पोषण चाहिए तो मूंगफली का सेवन शुरू कर दें। इसमें पाई जाने वाली चिकनाई भी घी से अधिक होती है जिससे ये घी के पोषक तत्वों की भी पूर्ति करती है।

4. सर्दियों में :

ठंड में मौसम में गरम चीजों का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। ऐसे में अगर आप इन दिनों मूंगफली का सेवन करते है तो आपका शरीर गर्म रहेगा। जिससे खांसी, जुखाम और फेफड़ों से संबंधित समस्याएं होने का खतरा नहीं रहेगा।

5. फोलेट :

इसमें पाए जाने वाले एक तत्व फोलेट का व्यक्ति के शरीर में बहुत खास महत्त्व होता है। प्रेग्नेंट महिला को उचित मात्रा में फोलेट का सेवन करना चाहिए, इससे जन्म के सम्मी होने वाली विभिन्न परेशानियों से छुटकारा मिलता है। इसे खाने से प्री-मैच्योर डिलीवरी के चान्सेस भी कम हो जाते है।

6. दिमाग :

मूंगफली में विटामिन बी3 पाया जाता है जो दिमागी विकास के लिए बेहद जरूरी होता है। इसे एक तरह का ब्रेन फ़ूड भी कहा जाता है। इसमें मौजूद तत्व और मिनरल्स दिमाग कार्य करने की क्षमता को बढ़ाते है और भूलने की बीमारी, डिप्रेशन, टेंशन आदि को दूर करने का काम करते है।

7. कैंसर :

पूर्णतः तो हम भी नहीं कह सकते। लेकिन मन जाता है महिलाओं में होने वाले colon cancer को मूंगफली के सेवन से दूर किया जा सकता है। इसके लिए हफ्ते में दो बार पीनट बटर का सेवन करना चाहिए। इससे colon cancer के खतरे को 50 % तक कम किया जा सकता है।

8. पाचन :

सही तरीके से खान पान का ध्यान न देने के चलते अक्सर पेट या पाचन से संबंधित परेशानियां होती रहती है। जिससे बचने के लिए भी मूंगफली का इस्तेमाल किया जा सकता है।इसके लिए मूंगफली का सेवन करें। ऐसा करने से पेट की बीमारियां नहीं होंगी और कब्ज की शिकायत भी नहीं होगी।

9. मोटापा :

जो लोग अपने कम वजन से परेशान है और अपना वजन बढ़ाने के लिए कई तरह के प्रयास करके हार चुके है उनके लिए मूंगफली किसी वरदान से कम नहीं है। ये न केवल आपके शरीर को बिमारियों को बचाती है। अपितु आपको मोटा करने और वजन बढ़ाने में भी मदद करती है। साथ ही शरीर के मेटाबोलिज्म का लेवल को नियंत्रित करती है जिससे मोटापा बढ़ाने में मदद मिलती है।

10. स्किन के लिए :

मूंगफली में ओमेगा 6 फैटी एसिड के अतिरिक्त और बहुत से ऐसे तत्व और गुण पाए जाते है जो स्किन को बेहतर बनाने में मदद करती है और साथ ही उनमे होने वाली तरह तरह की परेशानियों को भी दूर करते है। इसीलिए सर्दियों के मौसम में मूंगफली का सेवन अवश्य करना चाहिए।

तो ये सर्दियों में मूंगफली खाने के कुछ फायदे, जिन्हे जानकर आप भी इसे खाने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। लेकिन ध्यान रहे, BP और हृदय रोगी मूंगफली का सेवन नहीं करें। ये उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

होली में गुलाल से खेलना क्यों हानिकारक हो सकता है प्रेग्नेंट महिला के लिए

होली में गुलाल से क्यों नहीं खेलना चाहिए प्रेग्नेंट महिला को, साल भर में त्यौहारों के आने जाने का सिलसिला लगा ही रहता है। जैसे की अब होली का त्यौहार आने ही वाला है। 9 मार्च को जहां होलिका दहन का उत्सव है वहीँ 10 मार्च को रंगों से होली मनाई जाएगी। होली के दिन सब और रंगों की धूम होती है। और हर कोई एक दूसरे को रंग लगाकर इस त्यहार का आनंद लें रहा होता है। लेकिन प्रेग्नेंट महिला को इन सब से दूरी बनाकर रखने की सलाह दी जाती है। क्योंकि गर्भावस्था महिला के लिए बहुत ही नाजुक समय होता है।

और इस दौरान यदि महिला द्वारा थोड़ी भी गलती की जाती है तो इसके कारण महिला के साथ शिशु को भी नुकसान हो सकता है। खासकर होली के गुलाल से तो महिला को दूर ही रहना चाहिए। क्योंकि यह प्रेग्नेंट महिला को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में गुलाल का इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को क्या नुकसान हो सकते हैं।

केमिकल होता है गुलाल में

  • गुलाल को बनाने के लिए तरह तरह के केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है जैसे की लेड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट, आदि।
  • ऐसे में गर्भवती महिला यदि इनके संपर्क में आती है तो केमिकल का बुरा असर महिला की सेहत के साथ शिशु के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
  • जिसके कारण महिला का गर्भपात, शिशु के वजन में कमी, महिला को इन्फेक्शन, समय पूर्व प्रसव, जैसी परेशानियां हो सकती है।

सांस लेने में हो सकती है दिक्कत

  • गुलाल सूखा हुआ होता है ऐसे में यदि कोई प्रेग्नेंट महिला के मुँह पर गुलाल लगाता है और नाक या मुँह के आस पास यह रंग लग जाता है।
  • तो इसके कारण महिला को सांस लेने लें दिक्कत हो सकती है।
  • जिसके कारण बॉडी में ऑक्सीजन के फ्लो में कमी आ सकती है।
  • और महिला व् शिशु दोनों की सेहत पर इसका बहुत बुरा असर पड़ सकता है।

गुलाल में हो सकते हैं कांच के टुकड़े

  • आज कल रंगों को बनाने के लिए कुछ लोग उसमे छोटे छोटे कांच के टुकड़े भी मिला देते हैं।
  • ऐसे में यदि महिला को यह कांच के टुकड़े लग जाते हैं तो इसके कारण भी महिला को खून निकलने, इन्फेक्शन होने जैसी दिक्कतें हो सकती है।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्भवती महिला को होली के रंगों व् गुलाल खेलने से हो सकते हैं। ऐसे में इन दिक्कतों से प्रेग्नेंट महिला को बचने के लिए जितना हो सके होली में गुलाल आदि खेलने से बचना चाहिए।

प्रेगनेंसी के दौरान आँखों के चारों और काले घेरे होना और मुँह पर दाग होना

प्रेगनेंसी के दौरान महिला की बॉडी में बहुत से बदलाव महसूस होते हैं। यह बदलाव शारीरिक रूप से हो सकते हैं, मानसिक रूप से हो सकते हैं, साथ ही कुछ महिलाओं की स्किन में भी बदलाव आ जाता है। जैसे की प्रेग्नेंट महिला के चेहरे पर दाग धब्बे हो जाते हैं, साथ ही आँखों के चारों और काले घेरे हो जाते हैं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान आँखों के चारों तरफ काले घेरे और चेहरे पर दाग होने के क्या कारण होते हैं, और इस समस्या से बचने के लिए प्रेग्नेंट महिला क्या कर सकती है इस बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में आँखों के चारों तरफ काले घेरे होने के कारण

  • चेहरे की स्किन में मेलेनिन का जमाव होने के कारण आँखों के चारों तरफ की स्किन काली पड़ने लगती है।
  • आँखों के चारों तरफ काले घेरे होना गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी का लक्षण होता है।
  • गर्भवती महिला के शरीर में खून का प्रवाह सही न होने के कारण भी ऐसा होता है।
  • प्रेग्नेंट महिला यदि तनाव लेती है तो इस कारण भी आँखों के चारों तरफ काले घेरे हो जाते हैं।
  • प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला भरपूर नींद नहीं लेती है तो इस कारण भी महिला की आँखों के नीचे काले घेरे हो जाते हैं।
  • गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • प्रेग्नेंट महिला यदि पानी का भरपूर सेवन नहीं करती है तो महिला को डीहाइड्रेशन की समस्या हो जाती है जिसकी वजह से आँखों के चारों तरफ काले घेरे हो जाते हैं।

गर्भावस्था के दौरान आँखों के चारों तरफ होने वाले काले घेरे की समस्या से निजात पाने के टिप्स

प्रेगनेंसी के दौरान आँखों के चारों तरफ होने वाले काले घेरे की समस्या से बचने के लिए महिला को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जैसे की :

व्यायाम: गर्भवती महिला को थोड़ा व्यायाम करना चाहिए ऐसा करने से महिला के शरीर में खून का प्रवाह अच्छे से होता है जिससे महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

योगासन व् मैडिटेशन: योगा व् मैडिटेशन करने से प्रेग्नेंट महिला को तनाव से राहत पाने में मदद मिलती है। और नींद भी अच्छी आती है जिससे आपको आँखों से जुडी इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

पोषक तत्वों से भरपूर आहार: गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार लेना चाहिए खासकर आयरन युक्त आहार को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। क्योंकि यदि महिला के शरीर में पोषक तत्व भरपूर होते हैं खून की कमी नहीं होती है तो इससे स्किन को पोषण मिलता है जिससे आँखों के नीचे काले घेरे की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

पानी: गर्भवती महिला को पानी का भी भरपूर सेवन करना चाहिए और केवल पानी ही नहीं बल्कि नारियल पानी, जूस आदि का सेवन करना चाहिए। क्योंकि महिला के शरीर में तरल पदार्थ यदि भरपूर मात्रा में होते हैं तो इससे स्किन की नमी और ख़ूबसूरती को बरकरार रहने में मदद मिलती है।

भरपूर नींद: प्रेग्नेंट महिला को आँखों के नीचे होने वाले काले घेरे की समस्या से बचने के लिए भरपूर नींद लेनी चाहिए। यदि गर्भवती महिला भरपूर नींद लेती है तो इससे आँखों के आस पास काले घेरे की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

कुछ आसान टिप्स करें ट्राई: रोज़ाना रात को रुई की मदद से गुलाबजल आँखों के चारों तरफ लगाएं, मलाई या कच्चा दूध रुई की मदद से आँखों के चारों तरफ लगाएं, आलू या खीरे की स्लाइसेस काटकर आँखों पर रखें।

प्रेगनेंसी में चेहरे पर दाग धब्बे होने के कारण

  • बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण ऐसा हो सकता है।
  • स्किन में मेलेनिन का जमाव होने के कारण।
  • शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से न होने के कारण।
  • शरीर में पोषक तत्वों व् पानी की कमी की वजह से भी स्किन पर दाग धब्बे हो सकते हैं।
  • दवाइयों के सेवन के कारण।

गर्भावस्था में चेहरे से दाग धब्बे हटाने के टिप्स

यदि आप प्रेग्नेंट हैं और आपके चेहरे पर दाग धब्बे हो गए हैं तो घर में कुछ आसान तरीको का इस्तेमाल करके आप चेहरे के दाग धब्बे हटा सकते हैं। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान भी अपने चेहरे के ग्लो को बरकरार रख सकती है। तो आइये जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

खान पान का ध्यान: चेहरे से जुडी इस परेशानी से प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहने के लिए महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार खाना चाहिए और तरल पदार्थों की शरीर में कमी नहीं होने देनी चाहिए। ऐसा करने से स्किन को पोषण मिलता है जिससे प्रेग्नेंट महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

एलोवेरा जैल: मार्किट से लाकर या एलोवेरा के पत्ते को काटकर उसमे से जैल निकाल कर अपने चेहरे पर लगाएं। और जैल सूखने के बाद अपने चेहरे को धो दें ऐसा करने से आपको चेहरे से जुडी परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

गुलाब जल: रोज़ाना रात को सोने से पहले रुई की मदद से गुलाब जल अपने चेहरे पर लगाएं इससे चेहरे से डेड स्किन को हटाने में मदद मिलेगी। जिससे दाग धब्बों की समस्या से भी गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

आलू का रस: आलू के रास को चेहरे पर लगाने से भी चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

कच्चा दूध: कच्चा दूध रुई की मदद से चेहरे पर लगाएं और सूखने के बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो दें। ऐसा करने से भी प्रेगनेंसी के दौरान आपको अपने से चेहरे से जुडी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है। दूध के साथ आप दही का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

निम्बू का रस और शहद: एक चम्मच निम्बू के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं। लगाने के दस से पंद्रह मिनट बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो दें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान आँखों के नीचे काले घेरे और चेहरे पर होने वाले दाग धब्बे होने के कारण व् इस परेशानी से बचने के आसान उपाय, यदि आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान चेहरे से जुडी यह समस्या है। तो आप भी इन आसान टिप्स को ट्राई कर सकते हैं।

प्रेगनेंसी के बाद ब्रैस्ट के स्ट्रेचमार्क्स को हटाने के आसान तरीके

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प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं जो की शरीर के विभिन्न भागों में देखने को मिलते हैं। जैसे की पेट, स्तन, जांघो, कमर आदि में। ऐसा इसीलिए होता है की शिशु को माँ के गर्भ में रहने के लिए जगह चाहिए होती है जिसके कारण महिला के शरीर की कोशिकाओं में खिंचाव उत्त्पन्न होता है, और साथ ही महिला का वजन भी बढ़ने लगता है। ऐसे में कोशिकाओं में खिंचाव आने के कारण महिलाओं को स्ट्रेच मार्क्स जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। पेट के साथ जांघो और स्तन पर भी स्ट्रेच मार्क्स आ जाते हैं। और यह स्ट्रेच मार्क्स शरीर पर महिला को भद्दे लगते हैं, जिसके कारण उसे ऐसा लगता है की उसने अपनी ख़ूबसूरती खो दी है। पर आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं ऐसे में आपको अपने खान पान के साथ कुछ टिप्स का इस्तेमाल करना चाहिए जो आज हम आपको बताने जा रहें है।

ब्रैस्ट के स्ट्रेच मार्क्स हटाने के उपाय

डिलीवरी के बाद ब्रैस्ट में ढीलेपन की समस्या के साथ ब्रैस्ट पर स्ट्रेच मार्क्स की समस्या का भी महिला को सामना करना पड़ सकता है। लेकिन आप चाहे तो कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके इस समस्या से राहत पा सकती हैं। तो आइये आज हम आपको विस्तार से बताते हैं की डिलीवरी के बाद होने वाली इस समस्या से निजात पाने के कुछ आसान टिप्स कौन से हैं।

एलोवेरा का इस्तेमाल करें

एलोवेरा का इस्तेमाल करने से आपको ब्रैस्ट पर होने स्ट्रेच मार्क्स को हटाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप नियमित रात को सोने से पहले एलोवेरा जैल से ब्रैस्ट की मसाज करें, और सो जाएँ। और सुबह उठाकर नहा लें, नियमित इस उपाय को करने से आपको फायदा मिलता है।

बादाम का तेल और चीनी

एक कटोरी में एक चम्मच चीनी लें, और इसके कुछ बूंदे निम्बू के रस और बादाम के तेल की मिलाएं। और स्किन पर स्क्रब की तरह इस्तेमाल करें। और दो से तीन मिनट तक अच्छे से मसाज करें, ऐसा नियमित करने से आपको स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

सिरका और जैतून का तेल

दो चम्मच जैतून के तेल में एक चम्मच सिरका और एक चम्मच पानी का मिलाएं। अब इसे अच्छे से मिक्स करने के बाद दस मिनट तक हलके हाथों से ब्रैस्ट की मसाज करें। उसमे बाद आप इसे साफ कर दें, नियमित इस उपाय का इस्तेमाल करने से धीरे धीरे आपको ब्रैस्ट पर होने वाली स्ट्रेचमार्क्स से जुडी इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

एप्पल साइडर विनेगर

सेब के सिरके का इस्तेमाल करने से भी आपको ब्रैस्ट पर होने वाले स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप सेब के सिरके में थोड़ा पानी मिलाएं। और इसे रुई की मदद से अपने स्ट्रेचमार्क्स पर लगाएं। और उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें ऐसा नियमित करने से आपको जरूर फायदा मिलता है।

अरंडी का तेल

अरंडी का तेल यानी कैस्टर ऑयल को गुनगुना करने के बाद रात को सोने से पहले मसाज करें। लगभग दस से पंद्रह मिनट तक मसाज करने के बाद इसे वहीँ छोड़ दें। ऐसा नियमित रात को सोने से पहले करें धीरे धीरे आपको इसका असर साफ़ दिखाई देना लगेगा।

हल्दी का प्रयोग

हल्दी का प्रयोग हमेशा से ही आपकी स्किन की ख़ूबसूरती को बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसके लिए आप हल्दी में दही को मिलाकर इसे स्ट्रेच मार्क्स पर लगाएं, और थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। लगभग आधे घंटे तक रहने के बाद गुनगुने पानी का इस्तेमाल करके आप इसे साफ कर दें। ऐसा करने से आपको ब्रैस्ट पर होने वाले स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

जोजोबा का तेल

जोजोबा तेल का इस्तेमाल करने से आपकी नई कोशिकाओं को बढ़ने में मदद मिलती है जिससे आपको स्ट्रेच मार्क्स की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके लिए आप नियमित रात को सोने से पहले जोजोबा ऑयल से मसाज करें, आपको थोड़े दिन में इसका असर साफ़ दिखाई देगा।

निम्बू का इस्तेमाल करें

निम्बू में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स और विटामिन सी भी आपको स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से राहत दिलाने में मदद करते है। इसके लिए आप निम्बू को दो हिस्सों में काटकर अच्छे से अपने स्ट्रेचमार्क्स पर मसाज करें। और उसे जब तक सूखने तक जब तक की निम्बू का रस आपकी स्किन अच्छे से सोख नहीं लेती है। ऐसा करने से आपको फायदा मिलता है।

टी ट्री ऑयल

टी ट्री ऑयल भी आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर होता है। जिसके कारण यह आपकी स्किन पर होने वाली स्ट्रेच मार्क्स की समस्या से राहत दिलाने में आपकी मदद करता है। इसके लिए आप आधा चम्मच टी ट्री ऑयल में जैतून या नारियल का तेल मिक्स करें और उसके बाद अपने ब्रैस्ट की अच्छे से मसाज करें। ऐसा नियमित रात को सोने से पहले करें इस तरीके का इस्तेमाल करने से आपको अपनी ब्रैस्ट की स्किन को साफ़ करने में मदद मिलती है।

बेकिंग सोडा

बैकिंड सोडा और निम्बू का रस मिलाकर एक पेस्ट बनाएं, इस पेस्ट को बनाने के बाद अच्छे से अपने स्ट्रेच मार्क्स पर लगाकर दो मिनट तक मसाज करें। उसके बाद इसे सूखने के लिए छोड़ दें, और फिर इसे साफ़ करने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से आपको स्ट्रेच मार्क्स से जुडी इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

बेबी ऑयल

नियमित नहाने के बाद ब्रैस्ट को साफ़ करके बेबी ऑयल से मसाज करें, और इसे साफ़ नहीं करें बल्कि आपकी स्किन को अच्छे से अवशोषित करने दें। ऐसा नियमित करने से आपको इस समस्या से राहत मिलती है।

बादाम का तेल

बादाम का तेल स्किन टोन को बेहतर बनाने में मदद करता है, इसीलिए ब्रैस्ट पर होने वाले स्ट्रेचमार्क्स की समस्या से निजात पाने के लिए आप बादाम के तेल का इस्तेमाल भी कर सकते है। इसके लिए आप बादाम के तेल से अच्छे से अपने ब्रैस्ट की मसाज करके इसे आधे घंटे के लिए छोड़ दें उसके बाद गुनगुने पानी का इस्तेमाल करके इसे साफ़ करें।

स्ट्रेच मार्क्स से निजात के लिए खाएं यह आहार

  • खजूर का सेवन करने से आपके ब्लड फ्लो में सुधार आता है, साथ ही स्किन में कसाव भी आता है, जिससे आपको इस समस्या से निजात पाने में मदद मिलता है।
  • संतरे में मौजूद विटामिन सी भी आपकी इस समस्या का समाधान करने में आपकी मदद करता है। इसीलिए आपको संतरे का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए।
  • दूध में मौजूद कैल्शियम, विटामिन इ, प्रोटीन स्किन में कोलेजन के उत्पादन को बढ़ाता है जिससे आपके स्ट्रेच मार्क्स को कम करने में मदद मिलती है।
  • ओमेगा 3 से भरपूर अवोकेडो का सेवन करने से भी आपकी इस समस्या का समाधान करने में मदद मिलती है।
  • अंडे में मौजूद प्रोटीन भी स्किन में कसाव लाने में मदद करता है जिससे आपके स्ट्रेच मार्क्स को कम करने में मदद मिलती है।
  • विटामिन सी व् अन्य पोषक तत्वों से भरपूर शकरगंद का सेवन करने से भी आपको त्वचा को साफ़ करने में मदद मिलती है।
  • स्किन को हाइड्रेट रखने से भी आपको इस समस्या से निजात मिलता है, इसके लिए पानी के साथ आपको अन्य पेय पदार्थो का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए।
  • जिलेटिन युक्त आहार का सेवन करने से भी आपको इस परेशानी से निजात मिलता है।
  • कोकोआ बटर का सेवन करें।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको इस समस्या से राहत मिलती है। और आपको धैर्य रखना चाहिए क्योंकि ऐसा नहीं है की आपको इस समस्या से एक दिन में निजात मिल जाएगा बल्कि कुछ दिनों तक इन टिप्स का इस्तेमाल करने से आपको धीरे धीरे इस समस्या से निजात मिल जाता है। साथ ही आपको स्ट्रेच मार्क्स को खत्म करने वाले आहार को भी अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।