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जिनका पहला बच्चा है उनके लिए जरुरी टिप्स

जिनका पहला बच्चा है उनके लिए जरुरी टिप्स, पहली बार गर्भधारण के दौरान इन बातों का ध्यान रखें, प्रेगनेंसी के लिए जरुरी टिप्स, ऐसे रखें प्रेगनेंसी के दौरान अपना ध्यान

गर्भधारण करना किसी भी महिला के लिए बहुत ही ख़ुशी का लम्हा होता है, लेकिन पहली बार माँ बनने का अहसास सबसे अलग होता है। यदि आप पहली बार माँ बनने जा रही है तो आपको बहुत सी चीजों का खास ध्यान रखना पड़ता है। प्रेगनेंसी के पहले महीने से लेकर आखिरी महीने तक आपके लिए क्या सही है क्या नहीं इसका पता होना बहुत जरुरी होता है। और जैसे ही आपकी प्रेगनेंसी के बारे में आपके घर में पता चलता है, वैसे ही घर के बड़े आपको राय देना शुरू कर देते हैं। क्या आप भी पहली बार माँ बनने जा रही हैं? और आपको समझ नहीं आ रहा है की आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं तो लीजिए आज हम आपको पहली बार माँ बनने पर किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

डॉक्टर से मिलें

पीरियड्स मिस होने के एक हफ्ते या दस दिन बाद आप घर में किट से चेक करते हैं की आप प्रेग्नेंट है या नहीं, और अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है। तो उसके बाद बिना देरी करते हुए आपको एक अच्छे से डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि प्रेगनेंसी के कन्फर्म होने के साथ प्रेगनेंसी में आपके लिए क्या जरुरी है, कौन से टेस्ट करवाने हैं, इंजेक्शन लगवाने हैं, दवाइयां लेनी है उनके बारे में पता चल सके।

खान पान का रखें ध्यान

प्रेगनेंसी के शुरूआती दिनों में बहुत तेजी से बॉडी में हार्मोनल बदलाव होते हैं। जिसके कारण महिला को बहुत सी शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे की कमजोरी, पेट में हल्का दर्द, उल्टी, मतली, सिर दर्द, थकान आदि। तो ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए और गर्भ में भ्रूण को सुरक्षित रखने के लिए आपको खान पान में भरपूर पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए, और दिन में हर दो से तीन घंटे बाद कुछ न कुछ खाते पीते रहना चाहिए।

भाग दौड़, यात्रा आदि न करें

गर्भावस्था के दौरान महिला द्वारा की गई अधिक भागदौड़, ज्यादा यात्रा शुरूआती दिनों में गर्भपात का कारण बन सकता है। साथ ही उसके बाद जैसे जैसे शिशु का गर्भ में विकास होता है, तो अधिक भागदौड़ आदि के कारण शिशु और गर्भवती महिला दोनों को परेशानी हो सकती है। इसीलिए महिला को पूरी प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा यात्रा करना, भागदौड़ करना, प्रदूषण वाले स्थान पर जाना, ज्यादा तेजी से चलना, सीढ़ियां अधिक चढ़ना आदि से परहेज करना चाहिए।

खाने में इन चीजों से रखें परहेज

प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा आहार खाना चाहिए जिससे शिशु का विकास बेहतर होने के साथ गर्भवती महिला को किसी भी तरह की परेशानी न हो। और इसके लिए आपको प्रेगनेंसी के दौरान मरकरी युक्त मछली, कच्चा पपीता, कटहल, ज्यादा मात्रा में अंगूर, कच्चे अंडे, अनानास आदि चीजों से परहेज रखना चाहिए। इनके सेवन से गर्भपात होने चांस बढ़ जाते हैं।

व्यायाम न करें

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी को फिट रखने के लिए यदि आप बहुत कड़ा व्यायाम आदि करते हैं तो इसके कारण आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। शुरूआती दिनों में अधिक व्यायाम आदि करने पर बॉडी पर जोर पड़ता है जिसके कारण आपको ब्लीडिंग जैसी समस्या का सामना पड़ सकता है, और उसके बाद जब महिला का वजन बढ़ता है तो अधिक शारीरिक श्रम के कारण पेट पर जोर पड़ता है, जिसके कारण गर्भ में शिशु को परेशानी हो सकती है।

गलत चीजों का सेवन न करें

शिशु के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए महिला को अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन नहीं करना चाहिए। यदि आप घूम्रपान, शराब, तम्बाकू, व् अन्य किसी नशीले पदार्थ का बहुत अधिक सेवन करते हैं। तो इसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान आपको परेशानी होने के साथ गर्भ में शिशु के विकास में भी कमी आती है।

तनाव न लें खुश रहें

तनाव प्रेगनेंसी के दौरान गर्भपात का कारण बनने के साथ शिशु के मानसिक विकास में भी कमी ला सकता है। साथ ही गर्भवती महिला को तनाव होने के कारण उसकी शारीरिक समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। इसीलिए गर्भवर्ती महिला को स्वस्थ रहने के लिए और शिशु के बेहतर विकास के लिए आपको प्रेगनेंसी के दौरान जितना हो सके खुश रहने की कोशिश करनी चाहिए।

कपड़ो का रखें ध्यान

गर्भावस्था के दौरान आपको कपड़ो का भी खास ध्यान रखना चाहिए आपको ज्यादा टाइट व् चुभने वाले कपडे नहीं पहनने चाहिए। क्योंकि यदि आप ऐसा करते हैं तो इसके कारण पेट पर दबाव साथ ही आपको भी असुविधा महसूस हो सकती है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान आपको खुले और सूती कपडे पहनने चाहिए।

पानी की कमी न होने दें शरीर में

पानी का सेवन भरपूर मात्रा में करने से वह बॉडी को हमेशा ऊर्जावान बनाएं रखने में मदद करता है। इसीलिए आपको प्रेगनेंसी के दौरान भी शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए। और पानी की कमी को पूरा करने के लिए दिन में आठ दस गिलास पानी पीने के साथ ताजे फलों का रस, नारियल पानी, फलों का भरपूर सेवन करना चाहिए। और प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में पानी की मात्रा पूरी होने के कारण आपको बहुत सी परेशानियों से बचाव करने में मदद मिलता है।

गलत चीजें न देखें

लड़ाई, झगड़ा, मार काट वाले सीरियल, भूत की फिल्मे आदि भी प्रेगनेंसी के दौरान नहीं देखनी चाहिए। क्योंकि इसके कारण आपके मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है जिसके कारण शिशु को भी परेशानी हो सकती है ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान आपको मधुर संगीत सुनना चाहिए, किताबे पड़नी चाहिए जिससे शिशु के बेहतर विकास में आपको मदद मिल सके।

सोते समय बरतें सावधानी

प्रेगनेंसी के समय वजन बढ़ने के बाद महिला को सोते समय परेशानी हो सकती है, ऐसे में महिला को अपनी नींद के प्रति लापरवाही न करते हुए रात के साथ दिन में भी थोड़ी देर आराम जरूर करना चाहिए। इससे महिला को आराम मिलता है, इसके अलावा सोने की पोजीशन का भी महिला को ध्यान रखना चाहिए। जैसे की सारी रात एक ही पोजीशन में न सोएं, सीधे न सोएं, पेट के बल न सोएं, अधिक देर दाईं और करवट लेकर न सोएं, ऐसा करने से आपकी परेशानी बढ़ सकती है। और प्रेगनेंसी के दौरान सोने की सही पोजीशन होती है की महिला बाईं और करवट लेकर सोएं।

समय पर करवाएं जांच

प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी तरह की परेशानी होने पर आपको तुरंत डॉक्टर से राय लेनी चाहिए। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान सही समय पर अपनी जांच करवाते रहना चाहिए, ताकि आपको प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली हर समस्या से बचाव करने में मदद मिल सके।

आखिरी महीने में रखें ध्यान

प्रसव का समय पास आते ही आपको हॉस्पिटल के लिए जरूरी सामान के एक बैग तैयार कर लेना चाहिए। साथ ही यदि कभी आपको पेट या कमर में तेज दर्द हो, स्पॉटिंग या प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद पानी निकलने की समस्या अधिक हो तो इसे नज़रअंदाज़ न करते हुए जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए, क्योंकि यह इस बात का संकेत होता है की शिशु गर्भ से बाहर आने के लिए पूरी तरह तैयार होता है।

डिलीवरी होने के बाद रखें ध्यान

डिलीवरी के बाद में महिला के शरीर में काफी कमजोरी आ जाती है, जिसके कारण उसे पूरी तरह रिकवर होने में समय लगता है। ऐसे में आपको अकेले नहीं रहना चाहिए और शिशु और अपनी बेहतर केयर के लिए किसी को हमेशा अपने पास रखना चाहिए। साथ ही अपना खान पान बेहतर रखना चाहिए, और साफ सफाई का ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला और शिशु दोनों को ही किसी भी तरह के संक्रमण से बचाव करने में मदद मिल सके।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिसका ध्यान उस महिला को रखना चाहिए जो की पहली बार माँ बनने जा रही है, क्योंकि दूसरी बार इस अनुभव के होने पर महिला को बहुत जानकारी हो जाती है। इसके अलावा जन्म के बाद शिशु की बेहतर केयर के लिए और महिला को स्वस्थ रहने के लिए शिशु को स्तनपान जरूर करवाना चाहिए।

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अगर पहला बच्चा है तो इन बातों का ध्यान रखें। फर्स्ट बेबी है तो ये ध्यान रखें।

गर्भवती महिलाओं को शरीर में तेल क्यों लगाना चाहिए

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गर्भावस्था के समय शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को शारीरिक व् मानसिक रूप से बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला को अपना दुगुना ध्यान रखना चाहिए ताकि इन सभी परेशानियों से निजात पाकर गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके। और इन्हे लिए महिला अपने आहार का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए, उठने बैठने का ध्यान रखना चाहिए, भरपूर आराम करना चाहिए, समय पर जांच करवानी चाहिए, आदि। इससे महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में मदद मिलती है इसके अलावा एक और तरीका है जिसे यदि गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान इस्तेमाल करती है।

तो ऐसा करने से महिला को बहुत सी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है, और वह तरीका है गर्भावस्था के समय तेल का इस्तेमाल करना, यानी बॉडी की हल्की मसाज आदि करना। तेल लगाने से महिला को न केवल शारीरिक रूप से आराम मिलता है बल्कि मानसिक रूप से भी राहत मिलती है। लेकिन तेल का इस्तेमाल करते हुए एक बात का खास ध्यान रखना चाहिए की आप तेजी से और ज्यादा दबाव डालकर इसे बॉडी के लिए इस्तेमाल न करें। क्योंकि ऐसा करने से गर्भवती महिला और शिशु को परेशानी हो सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के समय तेल लगाने से कौन कौन से फायदे होते है।

त्वचा की नमी बरकरार रहती है

शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव और मांसपेशियों में खिंचाव के कारण स्किन से जुडी समस्या जैसे की स्किन का सुखना आदि भी प्रेगनेंसी के दौरान हो जाती है। ऐसे में स्किन को पोषण देने के लिए और उसकी नमी को बरकरार रखने के लिए आपको स्किन पर तेल लगाना चाहिए ताकि त्वचा की कोमलता को बरकरार रहने में मदद मिल सके।

खुजली से आराम

खुजली की समस्या से भी कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान परेशान रहती हैं। और यदि महिला नारियल, सरसों, या अन्य किसी तेल का इस्तेमाल स्किन के लिए करती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को खुजली की समस्या से आराम मिल सकता है।

हार्मोनल संतुलन को बनाएं रखता है

गर्भावस्था के शुरुआत से ही बॉडी में हार्मोनल बदलाव होने शुरू हो जाते हैं, जिसके कारण महिला को शारीरिक व् मानसिक रूप से परेशानी हो सकती है। ऐसे में यदि महिला तेल से मसाज करती है तो इससे बॉडी में हार्मोनल संतुलन को बरकरार रखने में मदद मिलती है। जिससे महिला को आराम महसूस होता है।

तनाव कम होता है

प्रेगनेंसी की शुरुआत से हो बॉडी में होने वाले बदलाव व् प्रेगनेंसी में होने वाली समस्याओं के कारण कुछ महिलाएं तनाव में भी आ जाती है। और तनाव गर्भवती महिला के साथ शिशु के लिए भी नुकसानदायक होता है। ऐसे में तनाव से निजात पाने के लिए भी तेल की मसाज महिला के लिए बहुत फायदेमंद होती है।

ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है

यदि महिला प्रेगनेंसी के हफ्ते में दो से तीन बार भी हल्के हाथों से अपनी बॉडी की मसाज करती है तो इससे बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर होने में मदद मिलती है। जो की न केवल गर्भवती महिला बल्कि शिशु के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है।

दर्द से आराम

कमजोरी, थकान, शरीर के अंगो में दर्द महसूस होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। और यदि आप तेल का इस्तेमाल गर्भवती महिला अपने शरीर के लिए करती है तो ऐसा करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है। जिससे आपको शरीर के किसी भी अंग में होने वाली दर्द की समस्या से राहत मिल सकती है।

सूजन से आराम

कुछ गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान हाथों, पैरों में सूजन की समस्या हो सकती है। जिससे निजात पाने के लिए महिला तेल को हल्का गर्म करके यदि उससे मसाज करती है। तो ऐसा करने से महिला को आराम महसूस होता है, साथ ही सूजन भी कम होने लगती है, और यदि अधिक सूजन की समस्या होती है तो इसे नज़रअंदाज़ न करते हुए एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए।

हदय को मिलता है फायदा

कई बार कुछ गर्भवती महिलाओं को हदय की गति के अनियंत्रित होने जैसी समस्या हो जाती है, जो न केवल गर्भवती महिला बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकती है। ऐसे में तेल की मसाज करने से शरीर को आराम मिलता है जिससे हदय की गति पर नियंत्रण पाने में मदद मिलती है।

बेहतर नींद

प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने के लिए महिला का भरपूर और गहरी नींद लेना भी बहुत जरुरी होता है। और तेल की मसाज करने से महिला को भरपूर आराम मिलता है जिससे महिला को बेहतर नींद लेने में भी मदद मिलती है।

ऑक्सीजन का प्रवाह

गर्भ में शिशु को सुरक्षित रखने और गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के लिए बॉडी में ऑक्सीजन का प्रवाह भी बेहतर तरीके से होने भी बहुत जरुरी होता है। और तेल से मसाज करने से रक्त वाहिकाओं की मदद से बॉडी में ऑक्सीजन का प्रवाह भी बेहतर तरीके से होता है, जिससे शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो आपको प्रेगनेंसी के दौरान आपको तेल की मालिश करने से आपको मिलते हैं। और तेल लगाने से पहले आपको एक बात का ध्यान रखना चाहिए की बॉडी को हाइड्रेट रखें, यानी की भरपूर मात्रा में पानी व् अन्य तरल पदार्थ का सेवन करें। साथ ही ज्यादा तेजी से और डिलीवरी के समय पास आने पर बॉडी पर ज्यादा मसाज नहीं करनी चाहिए इससे शिशु को नुकसान पहुँच सकता है।

प्रेगनेंसी में पैरों के दर्द रहने के कारण और उपाय

प्रेगनेंसी में जैसे जैसे समय आगे की और बढ़ता है वैसे वैसे प्रेग्नेंट महिला की शारीरिक परेशानियां भी बढ़ती है। और इन परेशानियों का कारण महिला के वजन का बढ़ना, पेट का बाहर की तरफ आना, मांसपेशियों में खिंचाव का बढ़ना आदि हो सकते हैं। तो आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली एक ऐसी समस्या के बारे में बताने जा रहे हैं। जिससे अधिकतर प्रेग्नेंट महिलाएं परेशान हो सकती है।

और वह परेशानी है पैरों में दर्द होना, और कुछ गर्भवती महिलाएं पैरों में दर्द के साथ सूजन की समस्या से भी परेशान हो सकती है। और इसके कारण महिला को उठते -बैठते, चलते, सोते समय बहुत अधिक परेशानी होती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में पैरों में दर्द का क्या कारण होता है और किस प्रकार प्रेग्नेंट महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है।

गर्भावस्था में पैरों में दर्द रहने के कारण

प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा बिल्कुल नहीं होता है की हर गर्भवती महिला को पैरों में दर्द होने का एक ही कारण हो। क्योंकि प्रेगनेंसी में पैरों में दर्द रहने का कोई एक कारण नहीं होता है। बल्कि ऐसे बहुत से कारण होते हैं जिनकी वजह से गर्भवती महिला को पैरों में दर्द की समस्या हो सकती है।

पोषक तत्वों की कमी: प्रेग्नेंट महिला को भरपूर मात्रा में कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन्स व् अन्य मिनरल्स से भरपूर आहार का सेवन करने से सलाह दी जाती है। लेकिन यदि महिला ऐसे आहार का सेवन करती है जिसमे पोषक तत्वों की कमी होती है। तो इसके कारण प्रेग्नेंट महिला के शरीर में कमजोरी आ जाती है जिसके कारण महिला को पैरों के साथ शरीर के अन्य हिस्सों के भी दर्द की समस्या अधिक हो सकती है।

खून की कमी: प्रेगनेंसी के दौरान महिला व् बच्चे दोनों के स्वस्थ रहने के लिए बॉडी में खून की कमी नहीं होनी चाहिए। लेकिन यदि गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी होती है तो इस कारण बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं होता है, शरीर में थकान व् कमजोरी जैसी समस्या अधिक होती है। जिसकी वजह से महिला के पैरों में दर्द होता है।

सूजन होने के कारण: पैरों में सूजन की समस्या होना प्रेगनेंसी में आम बात होती है खासकर महिला को तीसरी तिमाही में यह समस्या अधिक हो सकती है। और जिन महिलाओं को पैरों में सूजन होती है उन्हें पैरों में सूजन के साथ दर्द भी महसूस हो सकता है।

नसों पर दबाव: गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पैरों की और जाने वाली नसों पर दबाव बढ़ जाता है। जिसके कारण पैरों तक ब्लड फ्लो होने में रुकावट पैदा होने लगती है। और पैरों तक ब्लड फ्लो अच्छे से न हो तो इस वजह से महिला को पैरों में दर्द अधिक महसूस हो सकता है।

वजन: गर्भावस्था के दौरान वजन बढ़ना बहुत अच्छी बात होती है लेकिन वजन बढ़ने के कारण महिले की पूरी बॉडी का दबाव पैरों पर आ जाता है। और पैरों पर अधिक दबाव पड़ने के कारण महिला को पैरों में दर्द की समस्या हो सकती है।

पानी की कमी: यदि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में पानी की कमी होती है तो इस कारण भी महिला को पैरों में दर्द के साथ शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द की समस्या हो सकती है।

गर्भावस्था में पैरों में दर्द से राहत के टिप्स

यदि आप माँ बनने वाली और प्रेगनेंसी के दौरान पैरों में दर्द से परेशान हैं, तो इसमें घबराने की कोई बात नहीं हैं। क्योंकि कुछ आसान तरीको का इस्तेमाल करके आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं प्रेगनेंसी में राहत पाने के आसान टिप्स कौन से हैं।

अपनी पोजीशन का ध्यान रखें: प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले पैरों में दर्द से बचने के लिए गर्भवती महिला को अपने उठने बैठने की पोजीशन पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचने में मदद मिल सकती है। और इसके लिए गर्भवती महिला को ज्यादा देर खड़े रहकर काम नहीं करना चाहिए, एक ही पोजीशन में बहुत देर बैठना नहीं चाहिए, पैरों को ज्यादा देर लटकाकर बैठने से बचना चाहिए, आदि। यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला को पैरों में दर्द की समस्या से बचने में मदद मिलती है। और यदि आप जॉब करती है तो भी ध्यान रखें की बहुत देर तक एक ही जगह पर न बैठी रहें।

थोड़ा व्यायाम करें: प्रेग्नेंट महिला को पैरों की स्ट्रेचिंग, थोड़ी देर सैर, आदि जरूर करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से पैरों तक ब्लड फ्लो अच्छे से होता है। और यदि पैरों तक ब्लड फ्लो अच्छे से होता है तो महिला को पैरों में दर्द से बचे रहने में मदद मिलती है।

पोषक तत्वों से भरपूर ले आहार: आयरन, कैल्शियम, विटामिन सी, प्रोटीन, मैग्नीशियम, पोटैशियम व् अन्य मिनरल्स से भरपूर आहार का सेवन करें। ताकि हड्डियों, मांसपेशियों, को अच्छे से पोषण मिल सके जिससे प्रेगनेंसी के दौरान थकवाट, कमजोरी पैरों व् शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द की समस्या से आपको निजात मिल सके।

सिकाई करें: पैरों में अधिक दर्द महसूस होने पर गर्म पानी को बोतल में डालकर उससे सिकाई करें। सिकाई करने से ब्लड फ्लो बेहतर होता है साथ ही दर्द से भी आराम मिलता है। इसके अलावा गर्म पानी में नमक डालकर उसमे थोड़ी देर पैरों को रखें ऐसा करने से भी पैरों के दर्द से आराम मिलता है।

पानी का भरपूर सेवन करें: पानी की कमी होने के कारण भी महिला को शरीर के दर्द, थकावट, कमजोरी जैसी समस्या हो सकती है। ऐसे में इन समस्याओं से बचने के लिए गर्भवती महिला को पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए।

रुक रुक कर काम करें: पैरों में दर्द से आराम के लिए प्रेग्नेंट महिला को लगातार खड़े रहकर या थकावट महसूस होने पर काम नहीं करना चाहिए। बल्कि आप थोड़ा आराम करें उसके बाद फिर से काम करें, रुकरुक कर काम करें, ऐसा करने से थकावट व् पैरों में दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलेगी।

तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपको भी पैरों में दर्द की समस्या है तो आप भी इन आसान टिप्स का इस्तेमाल करके आसानी से इस समस्या से निजात पा सकते हैं। इसके अलावा यदि आपको सूजन के साथ दर्द की समस्या ज्यादा हो तो इसे अनदेखा न करते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

शिशु गर्भ में कैसे सांस लेता है

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गर्भ में शिशु क्या करता है क्या नहीं इसे लेकर गर्भवती महिला के मन में बहुत से सवाल होते हैं। तो आज हम ऐसे ही एक सवाल का जवाब आपको देने जा रहे हैं जिससे आप जान सकती है की क्या शिशु गर्भ में सांस लेता है या नहीं। गर्भ में शिशु का सांस लेना एक काल्पनिक बात, क्योंकि ज्यादातर सभी लोग ऐसा सोचते हैं की शिशु गर्भ में हलचल करता है तो सांस भी लेता होगा? आइये जानते हैं।

गर्भ में शिशु सांस लेता है या नहीं

शिशु जब माँ के पेट में होता है तो उसका खान पान, उसका विकास पूरी तरह से गर्भवती महिला पर निर्भर करता है। गर्भवती महिला जो भी खाती है उसी से गर्भ में पल रहे शिशु का विकास होता है, जिस तरह अपनी सभी जरूरतों के लिए शिशु माँ पर निर्भर होता है, उसी तरह गर्भ में शिशु के लिए सांस भी माँ ही लेती है। और उसकी यह सभी जरुरत गर्भनाल द्वारा पूरी की जाती है। गर्भनाल के रास्ते ही शिशु तक ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है जिससे उसका विकास बेहतर हो सके।

गर्भनाल गर्भ में बच्चे को ऑक्सीजन युक्त रक्त प्रदान करती है। जिससे मां बच्चे के लिए सांस लेती है, और शिशु से निकलने वाले कार्बन डाइऑक्साइड को प्लेसेंटा के माध्यम से गर्भवती महिला के रक्त में ले जाया जाता है, जिसे महिला द्वारा सांस बाहर छोड़ने के माध्यम से बॉडी से बाहर निकाल दिया जाता है। साथ ही शिशु के फेफड़े गर्भ में उसी तरह कार्य नहीं करते हैं जैसे की वे शिशु के जन्म लेने के बाद करते हैं। जन्म से पहले एक बच्चे के फेफड़े एमनियोटिक द्रव से भरे होते हैं। लेकिन जन्म के बाद शिशु के बॉडी की सभी प्रक्रियाएं अपने आप ही शुरू हो जाती है।

तो यह हैं शिशु के गर्भ में सांस लेने से जुडी कुछ बातें, और इसका मतलब यह हैं की गर्भ में नन्ही सी जान के सांस लेने की जिम्मेवार भी गर्भवती महिला होती है, इसीलिए यदि गर्भ में शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर हो और आप एक स्वस्थ शिशु को जन्म देना चाहती है। तो इसके लिए गर्भवती महिला को एक बात का खास ध्यान रखना चाहिए की प्रेगनेंसी के दौरान अपनी सेहत के प्रति बिल्कुल भी लापरवाही न करें।

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गर्भ में शिशु साँस कैसे लेता है?

हार्ट अटैक क्यों आता है?

आज के समय में बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हे पता भी नहीं होता है की वो दिल के मरीज़ हैं, और ज्यादातर लोग सीने में होने वाले हलके फुल्के दर्द को इग्नोर कर देते हैं जो की बिलकुल गलत होता है, दिल का दौरा पड़ने का कारण आपके दिल तक रक्त का सही से नहीं पहुंच पाना होता है, क्योंकि दिल का दौरा पड़ने पर आपके हार्ट तक खून को पहुंचाने वाली एक से अधिक धमनियों में वसा के थक्के बन जाते हैं, जिसके कारण दिल तक खून को पहुँचने में दिक्कत होने लगती है, और सही तरह से खून न मिल पाने के कारण दिल की मांसपेशियों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, और यदि जल्दी ही खून का प्रवाह सही न हो तो दिल की मांसपेशियों की गति रुक जाती है, और आपको हार्ट अटैक आता है, तो आइये अब हम जानते हैं की दिल का दौरान पड़ने के क्या क्या लक्षण होते हैं।

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सीने में असहजता महसूस होती है:-

यदि आपको सीने में जकड़न या असहजता कुछ मिनट तक महसूस होती है तो यह हार्ट अटैक का पहला लक्षण होता है, इसीलिए चाहे यह कुछ देर बाद ठीक भी हो जाएँ लेकिन इसकी जांच डॉक्टर से जरूर करवानी चाहिए।

शरीर के ऊपरी हिस्से में दर्द का होना:-

आपके सीने में ही दर्द ही ऐसा जरुरी नहीं है बल्कि यदि आप कंधे, बाजू, गर्दन, जबड़े, दांत, कमर गर्दन आदि में भी तेजी से महसूस हो सकता है, और पसीना भी अधिक आने लगता है,यदि ऐसा होता है तो इसे इग्नोर किए बिना आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

पेट में दर्द और उलटी आना:-

कई बार मांसपेशियों में उठता हुआ ये दर्द आपके पेट में भी होने लगता है, लेकिन इसके साथ आपको सीने में जलन और मतली और उलटी की समस्या भी हो सकती है।

हड्डियों के दर्द से छुटकारा पाने के लिए इनका सेवन करें

पसीना आना:-

यदि आपको बहुत अधिक पसीना आ रहा है, और साथ ही अधिक ठण्ड भी महसूस हो, और चिपचिपा पसीना हो तो यह भी हार्ट अटैक का ही एक लक्षण हो सकता है।

सांस उखड़ने लगती है:-

यदि आपको सांस लेने में तकलीफ हो और आप गहरी सांस लेने लगे, तो यह सीने में असहजता होने से पहले हो सकता है, इसीलिए इसे अनदेखा न करें।

चिंता महसूस होना:-

यदि आपको बिना किसी बात के दबाव महसूस हो रहा हो, या आप अपने आप को दुखी महसूस कर रहे है तो यह भी पेनिक अटैक का एक लक्षण होता है।

हार्ट अटैक का क्या कारण होता है:-

हार्ट अटैक के आने का कारण आपके हदय तक धमनियों द्वारा रक्त का सही से न पहुंचा पाना होता है, इससे हदय में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिसके कारण आपको दिल का दौरा पड़ने के चांस बढ़ जाते है।

तो ये हैं हार्ट अटैक के कुछ कारण और लक्षण यदि आपको ऐसा कुछ महसूस हो तो इसे अनदेखा न करें और जितना जल्दी हो सकें आप डॉक्टर से अपनी जांच करवाएं ताकि आपको समय पर इस समस्या का समाधान मिल सकें।

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गर्भावस्था में ये फल हैं आपके दुश्मन

गर्भावस्था में ये फल हैं आपके दुश्मन, प्रेगनेंसी में इन फलों का न करें सेवन, गर्भवती महिला को किन फलों का सेवन नहीं करना चाहिए, प्रेगनेंसी में भूलकर भी न खाएं यह फल, गर्भावस्था के दौरान इन फलों का सेवन करने से बचें, Fruits not to eat during Pregnancy

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए उत्साह भरा समय होता है क्योंकि इस दौरान गर्भ में पल रहे शिशु के साथ गर्भवती महिला बहुत से नए अनुभव का अहसास करती है। और हर गर्भवती महिला चाहती है की प्रेगनेंसी के दौरान उसे किसी भी तरह की परेशानी न हो, जिससे शिशु के विकास का बेहतर तरीके से होने में मदद मिल सके। ऐसे में महिला को अपनी दुगुनी केयर करनी पड़ती है, और साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना पड़ता है, की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को क्या खाना चाहिए, और क्या नहीं। क्योंकि इसका सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। तो लीजिये आज हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान किन- किन फलों के सेवन से परहेज करना चाहिए इस बारे में कुछ टिप्स देने जा रहे हैं।

अनानास

अनानास एक ऐसा फल है जिसे गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए। क्योंकि इसके सेवन से आपको गर्भाशय के संकुचन का अनुभव हो सकता है जो गर्भपात का कारण बन सकता है। इसका कारण अनानास में मौजूद ब्रोमेलैन नामक एक एंजाइम होता है जो गर्भाशय ग्रीवा की दीवार को नरम कर सकता है और ऐसा होने के कारण गर्भाशय के संकुचन होने के साथ रक्तस्राव भी हो सकता है। इसीलिए आपको गर्भावस्था के दौरान अनानास के सेवन से बचना चाहिए।

कच्चा पपीता

पपीता मैक्रो न्यूट्रिएंट्स और विटामिन से भरपूर होता है जो की आपके स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है, लेकिन फिर भी प्रेगनेंसी के दौरान इसका सेवन न करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इसके सेवन के कारण गर्भाशय के संकुचन, रक्तस्राव और यहां तक ​​कि गर्भपात होने के चांस है भी बढ़ सकते हैं साथ ही यह भ्रूण के विकास को भी ख़राब कर सकता है। इसका कारण इसमें मौजूद लेटेक्स होता है जो की गर्भवती महिला के लिए नुकसानदायक होता है।

अंगूर

रेसवेराट्रॉल एक यौगिक है जिसमें वे गर्भवती माताओं के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है। जो की अंगूर में बहुत अधिक मात्रा में होता है, इसके अलावा काले अंगूर का छिलका पचाने में गर्भवती महिला को मुश्किल हो सकती है जिसके कारण आपका पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है। और उसके बाद महिला को पेट से सम्बंधित समस्या जैसे की एसिडिटी, डायरिया का सामना भी करना पड़ सकता है, जिसके कारण शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है, ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान अंगूर एक सेवन भी न करने की सलाह दी जाती है। अंगूर का अधिक सेवन गर्भवती महिला की मॉर्निंग सिकनेस को भी अधिक बढ़ा देता है।

इमली

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला की जीभ के स्वाद में परिवर्तन भी आता है जिसके कारण कई बार महिलाओं का इमली खाने के मन करता है। लेकिन महिला को इसके सेवन से परहेज करना चाहिए, विटामिन सी से भरपूर गर्भवती महिला के शरीर में प्रोजेस्टेरोन के उत्पादन को दबा सकती है। ऐसे में प्रोजेस्टेरोन के स्तर को कम करके, यह गर्भपात, समय पूर्व प्रसव का कारण बन सकती है और यहां तक इससे भ्रूण को भी नुकसान पहुँच सकता है, इसीलिए अधिक मात्रा में इमली के सेवन से गर्भवती महिलाओं को परहेज करना चाहिए।

तरबूज

पानी से भरपूर तरबूज का सेवन करना सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है, क्योंकि यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के साथ शरीर से विषैले पदार्थो को भी बाहर निकालता है। लेकिन इसके अधिक सेवन के कारण हो सकता है की वो विषैले पदार्थ शिशु को नुकसान पहुंचा दें, इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान इसके अधिक सेवन से बचना चाहिए।

फ्रोजेन जामुन

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को ताजे व् संतुलित चीजों का सेवन करने की सलाह दी जाती है, ताकि गर्भ में पल रहे शिशु के पास सभी पोषक तत्व उच्च मात्रा में पहुँच पाएं। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान आपको किसी भी डिब्बाबंद या फ्रोजेन चीज ना खाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह गर्भवती महिला के स्वास्थ्य के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। इसीलिए महिला को फ्रोजेन जामुन का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

खजूर

खजूर विटामिन के साथ अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान इसके अधिक सेवन से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह आपके शरीर को गर्म करने का कारण बनते हैं और यहां तक ​​कि इसके अधिक सेवन से गर्भाशय की मांसपेशियों उत्तेजित करके गर्भाशय में संकुचन हो सकता है। इसलिए इसके अधिक सेवन से जितना हो सके परहेज करना चाहिए।

केला

केला प्रेगनेंसी के दौरान महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करता है, लेकिन जिन महिलाओं को शुगर की समस्या होती है उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान इसके सेवन से परहेज करना चाहिए। साथ ही अधिक पके हुए केले का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके कारण गेस्टेशनल डाइबिटीज़ होने की समस्या हो सकती है।

तो यह हैं कुछ फल जिनके सेवन से प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को परहेज करना चाहिए। साथ ही जो भी खाएं अच्छे से धुला हुआ हो, साथ ही ताजा हो। क्योंकि दूषित फल का सेवन भी गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

क्या प्रेगनेंसी में घर का काम करना खतरनाक हो सकता है

क्या प्रेगनेंसी में घर का काम करना खतरनाक हो सकता है, प्रेगनेंसी के दौरान घर का काम करना चाहिए या नहीं, गर्भवती महिला के लिए टिप्स, गर्भवती महिला को घर का काम करना चाहिए या नहीं

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सी चीजों से परहेज करना पड़ता है, जिससे प्रेगनेंसी के दौरान उसे स्वस्थ रहने में मदद मिल सके, और गर्भ में शिशु का विकास भी हो सके। गर्भवती महिला महिला को घर में मौजूद हर सदस्य प्रेगनेंसी के दौरान सही गलत के बारे में बताता हैं, साथ ही आज कल इससे जुडी सभी जानकारी किताबो व् इंटरनेट पर भी बहुत आसानी से मिल जाती है। ऐसे में कुछ महिलाएं यह सवाल करती है की प्रेगनेंसी के दौरान घर का काम करना सही है या गलत? तो लीजिये आज हम आपको इससे जुड़े कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं और यह भी जानते हैं की गर्भवती महिला को घर में कौन से काम करने से परहेज रखना चाहिए।

गर्भवती महिला को घर का काम करना चाहिए या नहीं

प्रेगनेंसी के दौरान आराम करना बहुत अच्छी बात होती है, लेकिन सारा दिन आराम करना और कोई भी काम न करना भी गलत होता है। क्योंकि ऐसा करने से वजन बढ़ने के साथ, खाया हुआ हज़म करने में भी दिक्कत आती है जिससे पेट से सम्बंधित समस्या हो सकती है, आलस बढ़ता है, वजन बढ़ने के कारण हाई ब्लड प्रैशर की समस्या हो सकती है, आदि। ऐसे में प्रेगनेंसी में फिट रहने के लिए जितना आराम जरुरी होता है उतना ही काम भी जरुरी होता है। इसीलिए आपको घर का काम जरूर करना चाहिए, लेकिन आराम से और साथ ही अब जानते हैं की घर के कौन से काम हैं जो गर्भवती महिला को नहीं करने चाहिए।

प्रेगनेंसी में घर के यह काम न करें

कुछ ऐसे काम भी होते हैं घर में जो की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को नहीं करना चाहिए, क्योंकि उन्हें करने से गर्भवती महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तो आइये अब जानते हैं की वो काम कौन से हैं जिन्हे करने से गर्भवती महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

भारी सामान उठाना

पानी की बाल्टी उठाना, ज्यादा भारी कुर्सी या टेबल उठाना, सिलिंडर को उठाना, आदि, जिन चीजों में भार हो उन चीजों को गर्भवती महिला को नहीं उठाना चाहिए। क्योंकि इससे पेट में दर्द या शुरूआती दिनों में इसके कारण गर्भपात जैसी समस्या, ब्लीडिंग होना आदि का सामना गर्भवती महिला को करना पड़ सकता है।

पेट पर दबाव पड़ने वाला काम

पेट पर दबाव पड़ने वाले किसी काम को गर्भवती महिला को करना चाहिए। जैसे की पैरों के भार बैठकर पोछा लगाना, जमीन पर गिरा हुआ सामान या खिलौने आदि इकट्ठे करना, पैरों के भार बैठकर कपडे धोना, आदि ऐसे काम करने से पेट पर दबाव पड़ता है जिसके कारण गर्भवती महिला को दिक्कत हो सकती है, यहां तक की किसी भारी चीज को सरकाना भी नहीं चाहिए, क्योंकि इससे भी पेट पर जोर पड़ता है।

केमिकल युक्त चीजों को हाथ लगाना

गर्भवती महिला को उन चीजों से काम करने से बचना चाहिए जिनमे केमिकल का इस्तेमाल होता है, क्योंकि इससे प्रेगनेंसी में इन्फेक्शन होने के चांस बढ़ जाते हैं। जैसे की पोछा लगाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल करना, शीशा साफ़ करने के लिए केमिकल का इस्तेमाल करना, आदि, और यदि आपको यह काम करना भी है तो मास्क और ग्लव्स पहनकर करने चाहिए।

घर में पालतू जानवर का काम करना

यदि आपके घर में कोई पालतू जानवर है जैसे की कुत्ता, बिल्ली, आदि तो उसकी साफ़ सफाई करना, आदि काम आपको नहीं करने चाहिए। क्योंकि ऐसे काम करने से भी इन्फेक्शन होने के चांस बहुत ज्यादा होते हैं, जिसके कारण आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, और यदि घर में कोई नहीं है तो मास्क और दस्ताने पहनकर आपको यह काम करना चाहिए।

जिन कामो में संतुलन बनाना मुश्किल हो

गर्भवती महिला को ऐसा कोई काम भी नहीं करना चाहिए जिसमे महिला का संतुलन न बने जैसे की टेबल पर चढ़कर पंखे साफ़ करना, अलमारी के ऊपर से सामान उठाना, बल्ब लगाना या उतारना, ऐसे काम भी गर्भवती महिला को नहीं करने चाहिए। क्योंकि ऐसे काम करने में गिरने का खतरा होता है जिससे गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी समस्या हो सकती है।

ज्यादा देर तक खड़े रहकर काम न करें

यदि गर्भवती महिला किचन या कहीं पर भी काम कर रही है, तो एक ही स्थान पर ज्यादा देर के लिए खड़े होकर काम नहीं करना चाहिए। जो काम बैठकर हो सकता है पहले उसे बैठकर कर लें, या फिर काम करते हुए बीच बीच में आराम करते रहें ताकि आपको कोई परेशानी न हो।

तो यह हैं गर्भवती महिला के घर में काम करने से जुड़े कुछ खास टिप्स, और यह हैं कुछ काम जो गर्भवती महिला को नहीं करने चाहिए। साथ ही काम करते हुए पूरी सावधानी बरतनी चाहिए, और जो काम डॉक्टर न करने की सलाह दे उन्हें नहीं करना चाहिए, और पूरा दिन आराम भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे आपको ज्यादा परेशानी हो सकती है।

Hindi Video : House Work During Pregnancy

Pregnancy me Ghar ke ye Kam Nahi Karen

डिलीवरी के बाद मालिश क्यों जरुरी होती है

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डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में बहुत से बदलाव आते हैं, जिसके कारण डिलीवरी के बाद महिला का वजन बढ़ना, स्किन में कसावट न रहना, शरीर के कई अंगो में दर्द की समस्या का होना, कमजोरी महसूस करना आदि समस्याएँ हो जाती है। ऐसे में महिला को इन परेशानियों से निजात दिलवाने के लिए और महिला को पूरी तरह फिट करने के लिए प्रसव के बाद मालिश जरूर करवानी चाहिए। नोर्मल डिलीवरी के होने पर जहां मालिश दूसरे या तीसरे दिन से करवा सकते हैं। वहीँ सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं को टांको के खुलने के बाद मालिश करवानी चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की डिलीवरी के बाद मालिश क्यों करवानी चाहिए।

दर्द से आराम मिलता है

डिलीवरी के बड़ा शरीर में आई कमजोरी के कारण शरीर के दर्द आदि की समस्या होती है ऐसे में मालिश करने से आपकी बॉडी को बहुत जल्दी आराम मिलता है, और दर्द से निजात मिलने के बाद आप तरोताजा महसूस करती है। साथ ही डिलीवरी के बाद महिला को जल्दी रिकवर होने में मदद मिलती है।

मांसपेशियां मजबूत होती है

मालिश करवाने से बॉडी में मांसपेशियों को मजबूत होने में मदद मिलती है जिससे बॉडी में ऑक्सीजन का प्रवाह भी बेहतर तरीके से हो पाता है। और इसके कारण किडनी भी बेहतर तरीके से काम करने लगती है जिससे बॉडी में विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी मदद मिलती है।

कसाव आता है

प्रसव के बाद महिला की त्वचा में ढीलापन आ जाता है जिसके कारण स्किन ढलकने लगती है, और मालिश करवाने से स्किन में कसाव लाने में मदद मिलती है। जिससे महिला को डिलीवरी के बाद अपनी बॉडी को वापिस शेप में लाने में मदद मिलती है।

तनाव दूर करती है

डिलीवरी के बाद कई बारे महिलाएं बॉडी में आई कमजोरी और शिशु की परवरिश को लेकर मानसिक रूप से परेशानी होकर तनाव में रहने लगती है, और मालिश करवाने से न केवल उन्हें शारीरिक रूप से आराम मिलता है बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी फिट होने में मदद मिलती है। क्योंकि मालिश करने से ऐसे हॉर्मोन निकलते हैं जो आपके मूड को फ्रैश करने में मदद करते हैं।

स्तन में दूध की वृद्धि

मालिश करने से आॅक्सीटॉसिन हॉर्मोन बॉडी में निकलता है जो की शिशु के लिए ब्रेस्टफीड को बढ़ाने में मदद करता है। कई बार कुछ महिलाओं को स्तन में दूध नहीं आता है तो यह स्तन में होने वाली गांठों को खोलकर दूध की मात्रा को बढ़ाने में भी मदद करता है।

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है

डिलीवरी के बाद शरीर काफी कमजोर हो जाता है जिसके कारण इन्फेक्शन आदि होने के खतरा भी बहुत अधिक होता है। ऐसे में मालिश करवाने से महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो आपको डिलीवरी के बाद मालिश करवाने से मिलते हैं, ऐसे में डिलीवरी के बाद शिशु को महिला को फिट रखने के लिए मालिश जरूर करवानी चाहिए।

कैस्टर ऑयल के फायदे

कैस्टर ऑयल जिसे अरंडी का तेल कहा जाता हैं। यह एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी वायरल, एंटी बैक्टीरियल गुणों, के साथ अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है। यह तेल आपकी सेहत से लेकर आपकी ख़ूबसूरती तक को बढ़ाने में मदद करता है। चेहरे से जुडी समस्या हो, बालों से जुडी कोई समस्या हो, सेहत सम्बन्धी कोई परेशानी हो। तो कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल करने से आपको आसानी से इन सभी परेशानियों से आराम पाने में मदद मिलती है। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको कैस्टर ऑयल के बेहतरीन फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं।

आँखों की पलकों और आइब्रो के लिए है फायदेमंद

  • लम्बी व् घनी आँखों की पलके और आइब्रो आपके चेहरे की ख़ूबसूरती को और भी बढ़ा देती है।
  • लेकिन यदि आपकी पलके बढ़ी नहीं है, घनी नहीं है, आइब्रो की ग्रोथ अच्छी नहीं है, तो इस समस्या से निजात के लिए आप कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • आँखों के साथ होंठों के लिए भी यह प्राकृतिक बाम की तरह काम करता है।

कैस्टर ऑयल के फायदे बालों के लिए

  • आज कल बहुत से लोग चाहे वो महिलाएं हो या पुरुष बालों से जुडी समस्या से परेशान रहते हैं।
  • जैसे की बालों का झड़ना, दो मुहें बाल, बालों में डैंड्रफ, बालों का लम्बा न होना, हलके बाल होना आदि।
  • तो इन सभी परेशानियों से निजात पाने के लिए कैस्टर ऑयल बहुत फायदेमंद होता है।
  • हफ्ते में दो बार अरंडी के तेल को बालों में लगाने से आपको बालों से जुडी हर समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

दाढ़ी बढ़ाने में है फायदेमंद

  • आज कल दाढ़ी बढ़ाने का ट्रेंड चल रहा है।
  • लेकिन कुछ पुरुष ऐसे भी होते हैं जिनकी दाढ़ी की ग्रोथ अच्छे से नहीं होती है।
  • यदि आपको भी यह दिक्कत है तो रोजाना रात को सोने से पहले थोड़ा अरंडी का तेल दाढ़ी की जगह पर लगाकर सोएं।
  • थोड़े दिनों में आपको इसका असर खुद ही दिखाई देने लगेगा।

कैस्टर ऑयल के फायदे चेहरे के लिए

  • हर कोई चाहता है की उनका चेहरा हमेशा आकर्षक और खूबसूरत रहें।
  • लेकिन प्रदूषण के कारण, तनाव के कारण, गलत लाइफस्टाइल के कारण कई बार स्किन पर दाग धब्बे, झाइयां, मुहांसे, आदि की समस्या हो जाती है।
  • और अरंडी का तेल चेहरे के लिए इस्तेमाल करने से आपको इन सभी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।
  • साथ ही अरंडी का तेल स्किन के लिए इस्तेमाल करने से स्किन को हाइड्रेट रहने व् मॉइस्चराइज रहने में मदद मिलती है।
  • इसके अलावा अरंडी का तेल इस्तेमाल करने से स्किन पर जमी गंदगी को दूर करके चेहरे में निखार लाने में भी मदद मिलती है।

कैस्टर ऑयल है स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

  • अरंडी का तेल यदि आप अपने आहार में शामिल करते हैं तो इससे बहुत से स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे भी मिलते हैं।
  • जैसे की यह प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है जिससे आपको हर तरह के संक्रमण से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • बॉडी में ब्लड फ्लो को सही रखने में मदद करता है।
  • मासिक धर्म सम्बंधित समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।
  • जोड़ो में दर्द, बॉडी में दर्द की समस्या से बचाव करने में मदद करता है।
  • पाचन तंत्र को सही तरीके से काम करने में मदद करता है जिससे कब्ज़ जैसी परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।
  • सूजन जैसी परेशानी से निजात दिलाने में मदद करता है।
  • खुजली जैसी परेशानी से राहत दिलाता है।
  • मुँह में छाले की समस्या हो तो उससे निजात दिलाने में मदद करता है।
  • लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको कैस्टर ऑयल का सेवन करने से बचना चाहिए।

तो यह हैं कुछ बेमिसाल फायदे जो आपको कैस्टर ऑयल से मिलते हैं। तो यदि आप भी चाहे तो कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

सर्दियाँ आ गई हैं अगर आप प्रेग्नेंट हैं तो यह जरूर खाएं

प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपने खान का पान का बहुत अच्छे से ध्यान रखती है जैसे की प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए क्या नहीं। ऐसे ही मौसम के अनुसार भी कुछ अन्य चीजों को महिला को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। क्योंकि कुछ ऐसी चीजें होती है जिनका सेवन गर्मियों में करना सही होता है तो कुछ ऐसी चीजें होती है जिनका सेवन सर्दियों में करना सही होता है। तो अब सर्दियों के मौसम की शुरुआत हो चुकी है और यदि आप प्रेग्नेंट हैं, तो ऐसे में आपको कुछ अन्य चीजों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए जिनका सेवन करने से गर्भवती महिला और शिशु को स्वस्थ रहने में तो मदद मिलती है। बल्कि वह आहार सर्दी के मौसम में ठण्ड से बचाव में भी बहुत ज्यादा फायदेमंद होते हैं।

सर्दियों में गर्भवती महिला को क्या खाना चाहिए

सर्दियों के मौसम में स्वस्थ रहने के लिए और गर्भ में शिशु के विकास को सही रखने के लिए गर्भवती महिला को कुछ चीजों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को सर्दियों के मौसम में क्या क्या खाना चाहिए।

हरी सब्जियां

सर्दी के मौसम में आपको लगभग सभी हरी सब्जियां मिल जाती है और हरी सब्जियों में आयरन, फोलेट, कैल्शियम, फाइबर जैसे सभी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने के साथ गर्भवती महिला की शारीरिक परेशानियों को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही इससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है।

ड्राई फ्रूट्स

ड्राई फ्रूट्स की तासीर गर्म होने के कारण गर्मी के मौसम में गर्भवती महिला को इसका अधिक सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे बॉडी के तापमान में फ़र्क़ आने के कारण महिला को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन सर्दियों के मौसम में गर्भवती महिला इनका सेवन कर सकती है, क्योंकि यह पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण प्रेग्नेंट महिला की इम्युनिटी को मजबूत करने के साथ महिला को स्वस्थ रखने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

अंडे

अंडा न केवल पोषक तत्वों से भरपूर होता है बल्कि सर्दी के मौसम में इसका सेवन करने से गर्भवती महिला को ठण्ड से बचे रहने में भी मदद मिलती है। इसीलिए प्रेग्नेंट महिला को दिन में कम से कम दो अंडो का सेवन सर्दियों के मौसम में जरूर करना चाहिए।

नॉन वेज

सर्दी के मौसम में प्रेग्नेंट महिला नॉन वेज का सेवन भी कर सकती है, क्योंकि यह आयरन, ओमेगा फैटी एसिड से भरपूर होता है। साथ ही सर्दियों में नॉन वेज खाने से ठण्ड के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रखें की ताजा, अच्छे से पका हुआ नॉन वेज ही खाएं।

केसर व् बादाम दूध

केसर व् बादाम दूध न केवल गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मदद करता है। बल्कि इससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के साथ उसकी रंगत को निखारने में भी मदद मिलती है। साथ ही सर्दियों के मौसम में इसका सेवन करने से गर्भवती महिला और शिशु दोनों को ठण्ड के कारण होने वाली परेशानी से बचे रहने में भी मदद मिलती है। ऐसे में गर्भवती महिला को सर्दियों में नियमित रात को सोने से पहले एक गिलास केसर या बादाम दूध का सेवन जरूर करना चाहिए।

पानी

ठण्ड के मौसम में प्यास बहुत कम लगती है लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है की प्रेग्नेंट महिला पानी का सेवन न करें। क्योंकि पानी की कमी के कारण न केवल गर्भवती महिला की दिक्कतें बढ़ सकती है बल्कि गर्भ में शिशु को भी दिक्कत हो सकती है। ऐसे में सर्दी के मौसम में भी गर्भवती महिला को दिन में आठ से नौ गिलास पानी का सेवन जरूर करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला को सर्दियों के मौसम में जरूर करना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला और शिशु दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।