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ज्यादा चाय पीने वाली गर्भवती महिलाओं का यह हाल होता है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या यह होती है की महिला क्या खाएं क्या पीएं। क्योंकि कई बार महिला को प्रेगनेंसी में उन चीजों के सेवन से परहेज करना पड़ता है जिनका सेवन करना महिला को बहुत पसंद होता है। जैसे की कुछ महिलाओं के दिन की शुरुआत ही चाय के साथ होती है और दिन भर में उन्हें चाय पीने की बहुत आदत होती है।

लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान महिला को चाय का सेवन जरुरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए। क्योंकि चाय में कैफीन की अधिकता होती है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान चाय का अधिक सेवन करने से कौन कौन से नुकसान हो सकते हैं उसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

मिसकैरिज

चाय का अधिक सेवन करने से गर्भ पर बहुत बुरा असर पड़ता है जिसके कारण महिला के मिसकैरिज होने का खतरा बढ़ जाता है। क्योंकि चाय में कैफीन की अधिकता होती है साथ ही चाय का सेवन करने से मिसकैरिज के साथ समय से पहले डिलीवरी होने का खतरा भी अधिक होता है।

पेट से जुडी समस्याएं

यदि गर्भवती महिला चाय का अधिक सेवन करती है तो इसके कारण महिला के पेट खराब रहने की समस्या बढ़ सकती है क्योंकि कैफीन पाचन क्रिया पर बुरा असर डालती है। जिसकी वजह से महिला को कब्ज़, पेट में गैस, दस्त जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

घबराहट

गर्भवती महिला यदि जरुरत से चाय का सेवन करती है तो इसकी वजह से महिला को घबराहट अधिक महसूस हो सकती है। जिसके कारण महिला को शारीरिक रूप से परेशानी का अनुभव हो सकता है।

सिर दर्द

वैसे कुछ लोग चाय का सेवन सिर दर्द को भगाने के लिए करते हैं। लेकिन यदि जरुरत से ज्यादा चाय का सेवन किया जाएँ तो इससे आपकी यह समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला चाय का सेवन अधिक मात्रा में करती है तो इसकी वजह से महिला को सिर दर्द की समस्या होने का खतरा बढ़ सकता है।

हार्ट बर्न

हार्ट बर्न यानी सीने में जलन की समस्या होने का एक कारण चाय का अधिक सेवन करना भी होता है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला चाय का अधिक सेवन करती है तो इसकी वजह से महिला को हार्ट बर्न की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि चाय पीने से एसिडिटी और कब्ज़ होती है जिसकी वजह से सीने में जलन की समस्या होती है।

भूख में कमी

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपने आहार का अच्छे से सेवन करना चाहिए। लेकिन यदि महिला चाय का सेवन करती है तो इसके कारण महिला की भूख में कमी आती है। जिसकी वजह से महिला का खाने पीने का मन नहीं करता है नतीजा शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिसके कारण माँ और बच्चे दोनों को सेहत सम्बन्धी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

अनिंद्रा

चाय का अधिक सेवन करने के कारण महिला को अच्छी नींद लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। और नींद पूरी न लेने के कारण महिला को शारीरिक परेशानियां जैसे की कमजोरी, थकान, आलस आदि अधिक होती है। और यदि महिला को शारीरिक परेशानियां अधिक होती हैं तो शिशु को भी दिक्कत होती है।

शिशु के विकास में कमी

चाय में कैफीन की अधिकता होती है ऐसे में चाय का अधिक सेवन करने से गर्भ में शिशु के विकास पर बुरा असर पड़ता है। जिसके कारण शिशु का शारीरिक विकास ही नहीं बल्कि मानसिक विकास भी बुरी तरह प्रभावित होता है। साथ ही जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी दिक्कत होने का खतरा भी अधिक होता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान चाय का अधिक सेवन करने के नुकसान, ऐसे में गर्भवती महिला को जरुरत से ज्यादा चाय का सेवन नहीं करनी चाहिए। यदि महिला की चाय पीने की इच्छा है तो महिला दिन में एक या दो बार थोड़ी थोड़ी चाय पी सकती है। इसके अलावा महिला को खाली पेट चाय नहीं पीनी चाहिए और चाय के साथ कुछ न कुछ जरूर खाना चाहिए। क्योंकि खाली पेट चाय पीने के कारण महिला को पेट सम्बन्धी दिक्कतें अधिक हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला के लिए एक से नौ महीने तक के पौष्टिक आहार

प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का बहुत अधिक महत्व होता है क्योंकि खान पान के जरिये महिला के शरीर में जरुरी पोषक तत्वों की कमी पूरी होती है। साथ ही शिशु के विकास के लिए भी पोषक तत्व महिला द्वारा लिए गए आहार के जरिये ही शिशु को मिलते हैं। जिससे गर्भावस्था के नौ महीने महिला को फिट व् स्वस्थ रहने में मदद मिलती है साथ ही गर्भ में शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

तो लीजिये आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान महिला का आहार कैसा होना चाहिए और किस तरह महीने दर महीने महिला को अपने खान पान में बदलाव करना चाहिए उसके बार में बताने जा रहे हैं। यदि आप भी माँ बनने वाली है तो आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान लिए जाने वाले पौष्टिक आहार की जानकारी होनी चाहिए। ताकि आपको और आपके होने वाले बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

गर्भावस्था के पहले महीने में क्या खाएं

प्रेग्नेंट महिला को पहले महीने का पता ही नहीं चलता है लेकिन यदि आप कंसीव करने का ट्राई कर रही है और आपको लगता है की आपका गर्भाधारण हो जायेगा। तो आपको शुरुआत से ही अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ऐसे में प्रेगनेंसी के पहले महीने में यानी जब आप कंसीव करना का ट्राई कर रही हैं तो आपको हरी सब्जियों, फलों, डेयरी प्रोडक्ट्स, दालें व् बीन्स आदि का भररपुर सेवन करना चाहिए। साथ ही उन चीजों का सेवन करने से परहेज करना चाहिए जो आपकी प्रेगनेंसी होने में बाधा बनते हैं जैसे की गर्म तासीर वाली चीजें, कच्चा पपीता, आदि।

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में क्या खाएं

गर्भावस्था के दूसरे महीने में शिशु के दिल की धड़कन आती है जिसके बाद धीरे धीरे शिशु के अंग बनने लगते हैं। ऐसे में प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में महिला को ऐसी डाइट लेनी चाहिए जिससे शिशु का शुरुआत से ही विकास बेहतर तरीके से होने में मदद मिल सके। साथ ही दूसरे महीने में महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव अधिक होने के कारण महिला को शारीरिक परेशानियां भी अधिक हो सकती है। ऐसे में महिला को डाइट में ऐसी चीजों को भी शामिल करना चाहिए जिससे महिला की दिक्कतों को कम करने में मदद मिल सके। जैसे की महिला को ओट्स, साबुत अनाज, दूध, दही, दालें, फ्रूट्स आदि का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला तीसरे महीने में क्या खाएं

गर्भावस्था के तीसरे महीने में शिशु के अंगो का विकास और अच्छे से होने लगता है ऐसे में महिला को अपने खान पान का और अच्छे तरीके से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। इसीलिए महिला को थोड़ी थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए जिससे महिला के शरीर में एनर्जी भरपूर रहे साथ ही शिशु का विकास भी अच्छे से हो। ऐसे में महिला को आलू, शकरकंद, थोड़े थोड़े ड्राई फ्रूट्स, जूस, नारियल पानी, फल, सब्जियां, दालें व् फलियां, आदि का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला चौथे महीने में क्या खाएं

प्रेगनेंसी के चौथा महीना महिला के लिए थोड़ा रिलैक्स करने वाला होता है क्योंकि अब महिला की शारीरिक परेशानियां भी थोड़ी कम हो जाती है। लेकिन इस महीने में शिशु के अंग लगभग बन चुके होते हैं और उनका विकास होना शुरू हो जाता है। ऐसे में अब महिला को ऐसी डाइट लेनी चाहिए जिससे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके। और इसके लिए महिला को अपनी डाइट में कुछ अन्य चीजों को भी शामिल करने की जरुरत होती है जैसे की फलों, सब्जियों, साबुत अनाज, दालों के साथ महिला को अंडे, चिकन, मछली आदि का भी सेवन करना चाहिए।

गर्भावस्था के पांचवें महीने में क्या खाएं

प्रेगनेंसी के पांचवें महीने में महिला को थोड़ी ज्यादा भूख लग सकती है क्योंकि अब शिशु के विकास के लिए भी ज्यादा पोषक तत्वों की जरुरत होती है। ऐसे में महिला को एक बार भरपूर खाना खाने की बजाय थोड़ी थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए जिससे खाना हज़म भी हो जाये और आपको भरपूर मात्रा में पोषक तत्व भी मिल सके। ऐसे में महिला दाल, रोटी, सब्जी के अलावा स्नैक्स के रूप में ब्रेड, सलाद, फ्रूट्स, चने, फलों का रस आदि का सेवन कर सकती है।

प्रेग्नेंट महीना छठे महीने में क्या खाएं

इस दौरान महिला को अपनी डाइट का और अच्छे से ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इस दौरान वजन बढ़ने के कारण महिला को पाचन सम्बन्धी समस्या अधिक हो सकती है ऐसे में महिला को फाइबर युक्त डाइट का भरपूर सेवन करना चाहिए। और इसके लिए महिला केला, खट्टे फल, ब्रोकली, गाजर, दालें आदि का भरपूर सेवन कर सकती है।

गर्भावस्था के सातवें महीने में महिला क्या खाएं

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में गर्भ में बच्चे का विकास और तेजी से होने लगता है ऐसे में महिला को उन सभी चीजों का सेवन करना चाहिए जिससे बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होने में मदद मिल सके। साथ ही महिला को भी भरपूर एनर्जी मिलें खासकर तरल पदार्थों का इस दौरान महिला को भरपूर सेवन करना चाहिए। ऐसे में महिला को रसदार फल, नारियल पानी, दाल का पानी, सूप, अंडा, मछली, देसी घी, खजूर व् अन्य ड्राई फ्रूट्स और अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

प्रेगनेंसी के आठवें महीने में क्या खाएं

गर्भावस्था के आठवें महीने में महिला को अंडा, चिकन, पालक व् अन्य हरी सब्जियां, दाल, रोटी, चावल, फल, दूध, दही, ड्राई फ्रूट्स आदि का भरपूर सेवन करना चाहिए। लेकिन इस दौरान महिला को कैफीन युक्त चीजों का सेवन ज्यादा नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से गर्भ में शिशु पर नकारात्मक असर पड़ने से साथ समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा बढ़ जाता है।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में क्या खाएं

गर्भावस्था के आखिरी महिला में महिला को उन चीजों का भरपूर सेवन करने से चाहिए जिससे महिला के प्रसव को आसान बनाने में मदद मिल सके। जैसे की महिला को खजूर, ड्राई फ्रूट्स, देसी घी, भरपूर मात्रा में तरल पदार्थ, पालक, मसालेदार आहार, आदि।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के एक से नौ महीने तक महिला को क्या खाना चाहिए उससे जुड़े टिप्स, साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान खान पान का ध्यान महिला को जरूर रखना चाहिए। क्योंकि बेहतर खाना पान आपकी प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियों को कम कर सकता है, आपको फिट रखने में मदद करता है और आपकी एक हेल्दी, हष्ट पुष्ट, तंदरुस्त बच्चे को जन्म देने में मदद मिलती है।

First to ninth month diet for pregnant women

बेबी डिलीवरी से पहले दूध निकालना क्या यह नोर्मल है?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में बहुत से परिवर्तन होते हैं जैसे की महिला का वजन बढ़ जाता है, महिला का पेट बाहर निकल जाता हैं, हाथ पैर सूजे हुए महसूस हो सकते हैं, ब्रेस्ट में बदलाव महसूस होता है, आदि। यह सब इसीलिए होता है क्योंकि गर्भ में पल रहा शिशु विकसित हो रहा होता है।

साथ ही कुछ महिलाओं को ब्रेस्ट से भूरे रंग का चिपचिपा द्रव भी निकलता हुआ महसूस हो सकता है। क्या आप जानते हैं की वो क्या होता है? यदि नहीं तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान ब्रेस्ट में होने वाले बदलाव व् ब्रेस्ट में रिसाव क्यों होता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

क्यों आता है प्रेगनेंसी के दौरान ब्रेस्ट में बदलाव?

प्रेगनेंसी के दौरान जैसे ही गर्भ में शिशु आता है वैसे ही शरीर में अलग अलग बदलाव होने शुरू हो जाते हैं। जैसे की गर्भवती महिला को अपने ब्रेस्ट में हल्का दर्द, कड़ापन, निप्पल के रंग गहरा आदि महसूस हो सकता है। उसके बाद धीरे धीरे महिला को अपने स्तन सूजे हुए भी महसूस हो सकता है।

साथ ही महिला का ब्रेस्ट साइज भी थोड़ा बढ़ सकता है। ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि गर्भ में शिशु के आने के बाद ब्रेस्ट में दूध का उत्पादन करने वाले उत्तक व् कोशिकाओं का फैलाव बढ़ता है। और शिशु के लिए दूध बनने की प्रक्रिया शिशु के गर्भ में आने से ही शुरू हो जाती है।

ब्रेस्ट से रिसाव होने पर क्या निकलता है?

कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के आखिरी दिनों में ब्रेस्ट से भूरे रंग के द्रव का रिसाव महसूस हो सकता है। और वह रिसाव कुछ और नहीं बल्कि दूध होता है जिसे कोलेस्ट्रम भी कहा जाता है। और ऐसा होना बहुत आम बात होती है इसीलिए महिला को शरीर में इस लक्षण के महसूस होने पर बिल्कुल घबराना भी नहीं चाहिए।

क्या बच्चे के जन्म से पहले ब्रेस्ट में से दूध निकालना सही होता है?

पहली बात तो बच्चे के जन्म से पहले आपको ब्रेस्ट से दो चार बूंदों का रिसाव ही महसूस होता है और वह इतना ज्यादा नहीं होता है की जिसे देखकर महिला परेशान हो जाये। साथ ही ब्रेस्ट को दबाकर यदि आप दूध निकालने की कोशिश करती है तो इससे आपको ब्रेस्ट पेन बढ़ सकता है ऐसे में महिला को ब्रेस्ट को दबाकर दूध नहीं निकालना चाहिए।

साथ ही बच्चे के जन्म के बाद अपने आप ही दूध आना शुरू हो जाता है ऐसे में आप पहले दूध निकालकर ब्रेस्ट से जुडी समस्या को बढ़ा सकती है जिससे बाद में दिक्कत हो सकती है इसीलिए आपको बच्चे के जन्म से पहले दूध निकालने से बचना चाहिए। हाँ लेकिन यदि आपको रिसाव ज्यादा हो रहा है तो इसके लिए आप चाहे तो एक बार डॉक्टर से परामर्श ले सकते हैं।

तो यह हैं बेबी डिलीवरी से पहले दूध निकालना नोर्मल है या नहीं उससे जुडी जानकारी, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपको भी ऐसी कुछ दिक्कत हो रही है तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

ये है प्रेगनेंसी में सोने का सही तरीका और यह है सही सोने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान महिला को खान पान का अच्छे से ध्यान रखना होता है, डॉक्टर से अपनी जांच का ध्यान रखना होता है, क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए इस बात का ध्यान रखना होता है, क्योंकि ऐसी बातों का ध्यान रखने से ही प्रेगनेंसी के दौरान माँ और बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान महिला को अपने सोने का भी ध्यान रखना चाहिए जैसे की महिला को कितनी देर सोना चाहिए, कौन सी पोजीशन में सोना चाहिए, कौन सी पोजीशन में नहीं सोना चाहिए, सही तरीके से सोने और भरपूर नींद लेने के क्या फायदे होते हैं, आदि। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी में सोने का सही तरीका और यह है सही सोने के फायदे होते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भवती महिला को कितनी देर सोना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान अच्छी और गहरी नींद लेने से महिला को फ्रैश महसूस होता है साथ ही महिला एनर्जी से भरपूर महसूस करती है। ऐसे में गर्भवती महिला को दिन भर में आठ से दस घंटे जरूर सोना चाहिए और इसके लिए महिला आठ से नौ घंटे रात के समय और एक घंटा दिन के समय आराम कर सकती है। यदि महिला अपने सही समय पर सोती है और पर्याप्त नींद लेती है तो इससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ और बच्चे दोनों को सेहत सम्बन्धी फायदे भी मिलते हैं।

प्रेग्नेंट महिला के सोने के लिए सही पोजीशन?

गर्भावस्था के दौरान महिला का सोते समय सही पोजीशन का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है क्योंकि यदि गर्भवती महिला गलत पोजीशन में सोती है तो इसके कारण गर्भवती महिला को और आपके होने वाले बच्चे को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में महिला के सोने के सही पोजीशन के बारे में यदि बात की जाये तो बाईं और करवट लेकर सोना महिला के लिए सबसे सही होता है। क्योंकि इससे माँ और बच्चे दोनों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। अच्छी और बेहतर नींद के लिए महिला प्रेगनेंसी पिल्लो का इस्तेमाल कर सकती है।

कौन सी पोजीशन में गर्भवती महिला को नहीं सोना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान महिला को सीधे होकर नहीं सोना चाहिए क्योंकि इससे बच्चे का पूरा भार रीढ़ की हड्डी पर आ जाता है जिसके कारण महिला को पीठ दर्द की समस्या अधिक होती है। गर्भवती महिला को पेट के भार भी नहीं सोना चाहिए क्योंकि इसके कारण गर्भवती महिला को पेट दर्द की समस्या होती है साथ ही शिशु गर्भ में असहज महसूस करता है। इसके अलावा महिला को दाईं और करवट लेकर भी ज्यादा नहीं सोना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से गर्भनाल पर दबाव पड़ता है जिसके कारण शिशु तक पोषक तत्व व् अन्य चीजें अच्छे से नहीं पहुँच पाती है। ऐसे में महिला को इन पोजीशन में नहीं सोना चाहिए।

प्रेगनेंसी में सही पोजीशन में सोने के फायदे

गर्भवती महिला यादो सोते समय सोने की सही पोजीशन का ध्यान रखती है तो इससे प्रेग्नेंट महिला और शिशु को बहुत से फायदे मिलते हैं। जैसे की:

बेहतर नींद

सही पोजीशन में सोने से गर्भवती महिला को सोने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है महिला को अच्छी और गहरी नींद लेने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला रिलैक्स और एक्टिव रहती है।

शिशु का विकास

सही पोजीशन में सोने से गर्भनाल भी अच्छे से काम करती है जिससे गर्भ में पल रहे शिशु तक ब्लड, ऑक्सीजन, पोषक तत्व सभी अच्छे से पहुँचते हैं और शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियां होती है कम

सही पोजीशन में सोने से महिला को नींद अच्छे से आती है जिससे महिला को रिलैक्स और एक्टिव रहने में मदद मिलती है। और जब महिला एक्टिव और फ्रैश रहती है तो इससे प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी में सही पोजीशन में सोने के फायदे व् सोने की सही पोजीशन कौन सी होती है उससे जुड़े टिप्स, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आपके और आपके होने वाले शिशु को प्रेगनेंसी में आने वाली दिक्कतों को कम करने और बेहतर नींद लेने में मदद मिल सके।

Correct sleeping position during pregnancy

प्रेगनेंसी में सिर दर्द हो तो क्या करें?

प्रेगनेंसी महिला के लिए बहुत ही सुखद समय होता है लेकिन साथ महिला को प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तरह तरह के शारीरिक बदलावों और परेशानियों से गुजरना पड़ सकता है। और प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा होना बहुत आम बात होती है। आज इस आर्टिकल में हम प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली सिर दर्द की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं। और सिर की समस्या एक ऐसी समस्या है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर महिलाएं परेशान रहती है।

जिन महिलाओं को सिर दर्द की समस्या पहले से होती है उन महिलाओं की यह समस्या प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ भी सकती है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान सिर दर्द की समस्या होने का क्या कारण होते हैं और आप किस तरह से इस समस्या से निजात पा सकते हैं।

गर्भावस्था में सिर दर्द होने के कारण

  • जो महिलाएं खान पान का अच्छे से ध्यान नहीं रखती है तो उनके शरीर में कमजोरी आ जाती है जिसकी वजह से सिर दर्द की समस्या हो सकती है।
  • भरपूर नींद नहीं लेने के कारण भी ऐसा हो सकता है।
  • बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण भी ऐसा होता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में ब्लड फ्लो बढ़ जाता है जिसकी वजह से भी महिला को सिर दर्द की समस्या हो समस्या हो सकती है।
  • जो महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा सोचती रहती हैं और तनाव से ग्रसित हो जाती है उन महिलाओं को भी सिर दर्द की समस्या अधिक रह सकती है।
  • जिन महिलाओं को माइग्रेन और साइनस की समस्या होती है उन महिलाओं को भी यह दिक्कत होती है।

प्रेगनेंसी में सिर दर्द की समस्या से बचे रहने के टिप्स

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को सिर दर्द की समस्या अधिक होती है तो कुछ आसान घरेलू टिप्स का इस्तेमाल करने से महिला को इस समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। तो आइये अब उन घरेलू टिप्स के बारे में विस्तार से जानते हैं।

एनर्जी से भरपूर रहें

गर्भवती महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए जिससे महिला के शरीर में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में रहें साथ ही महिला एक्टिव और एनर्जी से भरपूर रहें। यदि महिला एक्टिव और एनर्जी से भरपूर रहती है तो महिला को सिर दर्द के साथ अन्य शारीरिक परेशानियों को भी कम करने में मदद मिलती है।

खुश रहें

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला तनाव लेती है नेगेटिव ज्यादा सोचती है तो उन्हें यह परेशानी अधिक होती है। ऐसे में महिला को तनाव लेने की बजाय खुश रहना चाहिए, नेगेटिव सोचने की बजाय पॉजिटिव सोचना चाहिए। यदि महिला ऐसा करती है तो महिला को इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

मसाज करें

सिर दर्द की समस्या से बचाव के लिए महिला को गुनगुने तेल से सिर की मसाज करनी चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से सिर को आराम पहुँचता है जिससे सिर दर्द से राहत के साथ नींद बेहतर आने में भी मदद मिलती है।

आइस पैक

सिर दर्द की समस्या से बचाव के लिए प्रेग्नेंट महिला सिर पर आइस पैक से सिकाई कर सकती है। ऐसा करने से भी महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

भरपूर नींद लें

प्रेग्नेंट महिला यदि नींद भरपूर नहीं लेती है तो इस कारण भी महिला को सिर में दर्द की समस्या अधिक हो सकती है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए महिला को नींद भरपूर लेनी चाहिए। साथ ही महिला को रात में सोने के साथ दिन में भी थोड़ी देर आराम करना चाहिए।

हाइड्रेट रहें

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में पानी की कमी होने के कारण भी महिला को यह समस्या हो सकती है। ऐसे में सिर दर्द की समस्या से बचे रहने के लिए महिला को तरल पदार्थों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

योगा और मैडिटेशन करें

प्रेगनेंसी के दौरान सिर दर्द की समस्या से राहत पाने के लिए महिला योगा और मैडिटेशन कर सकती है। ऐसा करने से महिला को मानसिक रूप से फ्रैश महसूस होता है जिससे महिला को तनाव से बचे रहने में मदद मिलती है। और जब महिला तनाव से फ्री रहती है तो महिला को सिर दर्द की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

भाप लें

गर्भावस्था के दौरान सिर दर्द की समस्या से बचाव के लिए महिला भाप ले सकती है। क्योंकि भाप लेने से महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान सिर दर्द की समस्या होने के कारण व् इस समस्या से बचने के उपाय, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपको सिर दर्द की समस्या है तो आप भी इन टिप्स को ट्राई कर सकती है। इसके अलावा सिर दर्द की समस्या से बचाव के लिए महिला को किसी भी तरह की दवाई का सेवन नहीं करना चाहिए। बल्कि यदि परेशानी ज्यादा हो तो इस समस्या के निवारण के लिए एक बार डॉक्टर से मिलें।

नोर्मल डिलीवरी के लिए क्या-क्या करना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर महिलाएं यही चाहती है की वो सामान्य प्रसव से शिशु को जन्म दें सके। क्योंकि सामान्य प्रसव होने से डिलीवरी के बाद महिला के जल्दी रिकवर होने की सम्भावना होती है साथ ही जन्म के समय होने वाले शिशु को भी दिक्कत होने का खतरा बहुत कम होता है। लेकिन कई बार कुछ केस में डिलीवरी के समय कोई दिक्कत आ जाती है जिसकी वजह से सिजेरियन डिलीवरी करनी पड़ती है।

ऐसे में यदि आप चाहती है की आप नोर्मल डिलीवरी से बच्चे को जन्म दें। तो इसके लिए प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने तक महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला के सामान्य प्रसव के चांस को बढ़ाने में मदद मिल सके। साथ ही डिलीवरी के समय कोई दिक्कत भी नहीं आये। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं जिन्हे कंसीव करने से पहले और प्रेगनेंसी के दौरान फॉलो करने से आपको नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ाने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी और प्रसव की जानकारी इक्कठी करें

प्रेगनेंसी और प्रसव को आसान बनाने के लिए सबसे जरुरी होता है की आपको प्रेगनेंसी और प्रसव की सम्पूर्ण जानकारी हो। क्योंकि जितना आप प्रेगनेंसी और प्रसव को समझ पाते हैं उतना ही इसे आसान बनाने में मदद मिलती है।

हेल्दी डाइट लें

खान पान का प्रेगनेंसी के दौरान अहम रोल होता है ऐसे में आपको अपनी डाइट का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि जितनी अच्छी आपकी डाइट होगी उतना ही आपको स्वस्थ रहने और गर्भ में शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलेगी। और जितना आप प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहेंगी उतना ही नोर्मल डिलीवरी की सम्भावना बढ़ेगी। इसके अलावा प्रेगनेंसी के दौरान उन चीजों का सेवन बिल्कुल नहीं करें जिनका सेवन करने की प्रेगनेंसी के दौरान मनाही हो।

हाइड्रेट रहें

नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने के लिए महिला को शरीर में तरल पदार्थों की कमी नहीं होने देनी चाहिए। क्योंकि शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा पूरी होने से गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा सही रहती है जिससे बच्चे का विकास अच्छे से होता है साथ ही प्रेगनेंसी और डिलीवरी में कॉम्प्लिकेशन को कम करने में मदद मिलती है।

सभी जांच व् टीकाकरण समय से करवाएं

यदि आप चाहती है की आपकी डिलीवरी नोर्मल हो तो इसके लिए आप अपनी सभी जांच और टीकाकरण समय से करवाएं। ऐसा करने से प्रेग्नेंट महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी साथ ही यदि कोई समस्या होगी तो उसका समय से इलाज भी हो जायेगा। इसके अलावा डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का सेवन भी महिला को समय से करना चाहिए ताकि शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो।

खुश और एक्टिव रहें

यदि आप चाहती है की आपको प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत नहीं हो, डिलीवरी में कोई परेशानी नहीं हो, तो इसके लिए आप प्रेगनेंसी के दौरान तनाव से दूर रहें और हमेशा खुश रहें। साथ ही आलस न करके एक्टिव रहें क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान खुश रहने और एक्टिव रहने से आपको फिट रहने में मदद मिलती है और जितना आप फिट रहती है उतना ही नोर्मल डिलीवरी को सम्भावना को बढ़ाने में मदद मिलती है।

वजन को जरुरत से ज्यादा न बढ़ने दें

गर्भावस्था के समय महिला का वजन जरूर बढ़ता है लेकिन ध्यान रखें की वजन जरुरत से ज्यादा नहीं बढ़ें। क्योंकि वजन का जरुरत से ज्यादा बढ़ना नोर्मल डिलीवरी की सम्भावना को कम करता है। और यदि आप अपने वजन को नियंत्रित रखती है तो इससे नोर्मल डिलीवरी होने के चांस बढ़ते हैं।

टहलना है जरुरी

नोर्मल डिलीवरी की चाह रखने वाली गर्भवती महिलाओं को रोजाना वॉक जरूर करनी चाहिए। खासकर प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में तो जरूर करनी चाहिए क्योंकि वॉक करने से महिला फिट रहती है साथ ही गर्भ में शिशु को भी जन्म लेने की सही पोजीशन में आने में मदद मिलती है और पेल्विक एरिया की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। जिससे सामान्य प्रसव के चांस बढ़ाने में मदद मिलती है।

स्विमिंग करें

यदि आपको स्विमिंग आती है तो आपको हफ्ते में एक या दो दिन स्विमिंग भी जरूर करनी चाहिए। क्योंकि स्विमिंग करने से पेल्विक एरिया को मजबूती मिलती है साथ ही नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ाने और डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिलती है।

योगासन करें

गर्भवती महिला को एक्टिव रहने के लिए दिन भर में थोड़ी देर योगा जरूर करना चाहिए। और खासकर वो योगा करना चाहिए जिससे पेल्विक एरिया को स्ट्रेच करने में मदद मिल सके, पेल्विक एरिया की मांसपेशियों को मजबूती मिल सके, आदि। इसके आलावा और भी योगा करने चाहिए योगा करने से महिला को दिमागी रूप से और शारीरिक रूप से रिफ्रेश रहने में मदद मिलती है साथ ही शरीर भी सामान्य प्रसव के लिए तैयार होता है जिससे सामान्य प्रसव की सम्भावना बढ़ती है।

बेहतर नींद भी है जरुरी

गर्भावस्था के दौरान बेहतर नींद भी बहुत जरुरी होती है क्योंकि नींद अच्छी लेने से महिला को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। और जितना प्रेग्नेंट महिला फिट रहती है स्वस्थ रहती है उतना ही नोर्मल डिलीवरी के चांस को बढ़ाने में मदद मिलती है।

ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें

नोर्मल डिलीवरी के दौरान जब दर्द शुरू होता है तो ऐसे में जरुरी होता है की महिला शांत रहें। क्योंकि ऐसा करने से डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिलती है और इसके लिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ब्रीदिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए। क्योंकि लम्बी लम्बी सांस लेने से महिला को पेन को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है जिससे डिलीवरी को आसान बनाने में फायदा पहुँचता है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे फॉलो करने से आपको नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ाने में मदद मिलती है। यदि आप भी माँ बनने वाली हैं या माँ बनने की प्लांनिग कर रही हैं और चाहती हैं की आप सामान्य प्रसव के माध्यम से बच्चे को जन्म दें। तो आपको भी इन टिप्स का ध्यान रखना चाहिए।

Important tips for Normal Delivery

प्रेग्नेंट महिला को बार बार खाना गर्म करके क्यों नहीं खाना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खान पान का अच्छे से ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। जैसे की महिला को पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेनी चाहिए, उन चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए जिनकी वजह से महिला या शिशु को दिक्कत होने का खतरा होता है, सिमित मात्रा में चीजों का सेवन करना चाहिए, सही समय पर अपनी डाइट लेनी चाहिए, आदि।

खान पान से जुडी इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखने से गर्भावस्था के दौरान महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है साथ ही महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियां भी कम होती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान खान पान से जुडी एक और बात बताने जा रहे हैं जिसका ध्यान प्रेग्नेंट महिला को जरूर रखना चाहिए। और वो बात है की प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बार बार खाना गर्म करके नहीं खाना चाहिए।

गर्भवती महिला को खाना बार बार गर्म करके क्यों नहीं खाना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हमेशा ताजा, पोषक तत्वों से भरपूर आहार ही खाना चाहिए। क्योंकि यदि महिला बिना पोषक तत्वों वाला, बासी, ठंडा आहार या फिर पहले से रखे हुए खाने को ही बार बारे गर्म करके उसका सेवन करती है। तो इस के कारण महिला को बहुत सी सेहत सम्बन्धी परेशानियां होने का खतरा रहता है। जिसके कारण महिला की प्रेगनेंसी के दौरान दिक्कतें बढ़ सकती है।

खाने को बार बार गर्म करके खाने के कारण होने वाले नुकसान

गर्भवती महिला पहले से रखे हुए खाने को यदि बार बार गर्म करके खाती है तो इसके कारण महिला को बहुत सी सेहत सम्बंदि दिक्कतें हो सकती है। जैसे की:

शरीर में पोषक तत्वों की होती है कमी

खाने को बार बार गर्म करने के कारण उसमे मौजूद पोषक तत्व खत्म होने लगते हैं जिसकी वजह से खाना खाने पर महिला का पेट तो भर जाता है लेकिन महिला को पोषक तत्व नहीं मिलते हैं। और पोषक तत्वों के न मिलने के कारण गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है।

केमिकल रिएक्शन के कारण होता है एलर्जी का खतरा

खाने को बार बार गर्म करने के कारण उसमे केमिकल रिएक्शन होने का खतरा भी होता है। जिसके कारण महिला को एलर्जी जैसे की स्किन पर दाने, दाग धब्बे आदि होने का खतरा होता है। साथ ही केमिकल रिएक्शन का बुरा असर शरीर की क्रियाओं पर भी पड़ सकता है।

फ़ूड पॉइज़निंग का खतरा

खाने को बार बार गर्म करके खाने की वजह से फ़ूड पॉइज़निंग का खतरा भी होता है। जिसकी वजह से महिला को पेट में दर्द, उल्टियां, दस्त जैसी समस्या हो जाती है और इसके कारण गर्भ में शिशु के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है।

पेट सम्बन्धी समस्या

बार बार गर्म किया खाना खाने से गर्भवती महिला को अपच, कब्ज़, पेट में गैस, सीने में जलन, खट्टी डकार जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कई बार इसके कारण महिला को पेट में तेज दर्द जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।

बैड बैक्टेरिया के कारण हो सकता है नुकसान

गर्भवती महिला यदि खाने को बार बार गर्म करके खाती है तो उसमे बैड बैक्टेरिया भी बढ़ने लगता है जिसके कारण महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी हो सकती है।

ओवन में खाना गर्म करके खाना पड़ सकता है भारी

बासी खाना यदि गर्भवती महिला ओवन में गर्म करके खाती है तो इसके कारण महिला को कैंसर, हाई ब्लड प्रैशर, एलर्जी जैसी परेशानियां होने का खतरा और भी बढ़ जाता है।

तो यह हैं कुछ शारीरिक परेशानियां जो खाने को बार बार गर्म करके खाने के कारण प्रेग्नेंट महिला को हो सकती है। ऐसे में गर्भवती महिला को ध्यान रखना चाहिए महिला हमेशा ताजा खाना बनाकर ही खाएं। जिससे माँ और बच्चे दोनों को हेल्दी रहने में मदद मिल सके।

आपका बेबी जल्दी बोलेगा! यह तरीके अपनाएँ

बच्चे के जन्म के बाद हर माँ बाप को बच्चे की हर नई हरकत को देखने का उत्साह होता हो और हर दिन बच्चे को लेकर एक नई उम्मीद जाग जाती है। जैसे की बच्चा जब शुरुआत में अधिक सोता है तो उन्हें लगता है कब यह उनके साथ खेलेगा, जब बच्चा थोड़ा बहुत खेलने लगता है, तो उन्हें लगता है की कब यह उलट पलट करना शुरू करेगा, जब वो ऐसा करना शुरू करता है तो बच्चा कब चलने लगेगा, जब बच्चा चलना शुरू कर देता है तो कब बच्चा उनसे बातें करेगा उनकी बातों का जवाब देगा, आदि।

ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि एक छोटे बच्चे के साथ हर कोई अपना बचपन दोबारा जीता है। लेकिन ऐसा जरुरी नहीं होता है की हर बच्चा एक ही जैसे ग्रोथ करें ऐसे में बच्चे से जुड़े हर काम में आपको धैर्य से काम लेने की जरुरत होती है। तो आज इस आर्टिकल में हम बच्चों से जुड़े कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं की आखिर आप ऐसे कौन कौन से काम करें जिससे आपका बच्चा जल्दी बोलने लगेगा। तो आइये अब उन टिप्स के बारे में विस्तार से जानते हैं।

गर्भ से ही करें शुरुआत

बच्चे की परवरिश बच्चे के जन्म के बाद नहीं बल्कि गर्भ से ही करनी शुरू कर देनी चाहिए क्योंकि गर्भ में पल रहा शिशु बाहर की चीजों को समझ सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला बच्चे से बात करती है, उसके साथ समय बिताती है तो ऐसे बच्चे जन्म के बाद हर चीज में जल्दी ग्रो करते हैं। यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा करती है तो जन्म के बाद आपके बच्चे को भी जल्दी बोलने में मदद मिलती है।

बच्चे का हर काम करते समय बच्चे से करें बातें

जब भी आप बच्चे को खिलाती हैं, सुलाती है, नहलाती हैं, उसके साथ खेलती है हर समय आपको बच्चे के साथ बात करने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि जितना ज्यादा आप बात करती है उतना ही ज्यादा आपका बच्चा जल्दी बात करने की कोशिश करता है।

बच्चे को बोलने के लिए करें प्रेरित

बच्चा कई बार मुँह में हूँ हाँ की आवाज़ें निकालता रहता है और इसी आवाज़ को शब्दों में बदलने के लिए आपको बच्चे के सामने नए शब्द बार बार बोलने चाहिए। जैसे की पापा एक आसान शब्द है आप बच्चे के सामने बार बार बोलें पापा पापा तो बच्चा इसे बोलने की कोशिश करेगा और आप बच्चे को बोलें की बोलो पापा तो ऐसा करने से भी आप अपने बच्चे को जल्दी बोलना सीखा सकते हैं।

संगीत की ले मदद

संगीत एक ऐसी चीज है जो हर चीज का इलाज कर सकती है वैसे ही छोटे बच्चों को भी संगीत बहुत पसंद होता है। और इसकी मदद से भी आप अपने बच्चे को जल्दी बोलना सीखा सकते हैं इसके लिए आप बच्चे के सामने गुनगुनाएं। खासकर जब भी आप बच्चे का कोई भी काम कर रही हों ऐसा करने से बच्चा खुश होता है और हो सकता है की वो धीरे धीरे आपके साथ गुनगुनाना भी शुरू कर दें। ऐसा बार बार करें आपको जरूर इसका असर बच्चे में दिखाई देगा।

बच्चा जो बोलने की कोशिश कर रहा है उसे करें कॉपी

बच्चे को जल्दी बोलना सिखाने के लिए आपको बच्चे द्वारा कही गई लाइन या शब्द को कॉपी करके दोबारा बोलना चाहिए ताकि बच्चा पहले से ज्यादा अच्छे से बोलने की कोशिश करें। ऐसा रोजाना करें आपको खुद बच्चे में थोड़ा थोड़ा विकास दिखाई देना शुरू हो जायेगा।

छोटी छोटी चीजों को दिखाकर पूछें और बताएं यह क्या है

ऐसा नहीं होता है की आप सीधे सीधे बच्चे को पूरी लाइन बोलना सिखाते है बल्कि इसकी शुरुआत एक एक से शब्द से करनी चाहिए। और इसके लिए आप छोटी छोटी चीजों के नाम लेकर बच्चे को बताएं की यह क्या है फिर बार बार बोलें और उसके बाद जब बच्चा कोशिश करें तो उससे पूछें की यह क्या है ऐसे की बच्चे के साथ थोड़ी देर करें ऐसा करने से भी बच्चा धीरे धीरे बोलना शुरू करने की कोशिश करेगा।

उसकी अधूरी बातों को पूरा करें

बच्चा जल्दी बोलना सीखें उसके लिए आपको बच्चे द्वारा कही अधूरी बातों को पूरा करना चाहिए उसके इशारों को समझना चाहिए। जैसे की बच्चा यदि किसी खिलौने की तरफ इशारा करता है तो आप बोलें की टॉय चाहिए बच्चा सिर्फ टॉय बोले तो उसकी बात को पूरा करें। ऐसा करने से बच्चा आपके द्वारा कहे शब्दों को बोलने की कोशिश करेगा। जिससे बच्चे को जल्दी बोलने में मदद मिलेगी।

केवल आप ही नहीं बल्कि घर के हर सदस्य की लें मदद

जिस तरह एक माँ अपने बच्चे के पालन पोषण को बेहतर से बेहतर बनाने की कोशिश करती है उसी तरह यदि घर के सदस्य भी उसका साथ देते हैं तो बच्चा और ज्यादा अच्छे से ग्रो करता हैं। वैसे की बच्चा जल्दी बोलें इसके लिए जो जो टिप्स आप फॉलो करती है उसी तरह आप अपने घर वालों को भी उन टिप्स को फॉलो करने के लिए कहें। ऐसा करने से बच्चे को एक जैसा माहौल मिलेगा और जितनी ज्यादा कोशिश बच्चा करेगा उतना ही जल्दी बच्चे को बोलने में मदद मिलेगी।

तो यह कुछ टिप्स जिन्हे ट्राई करने से आपके बच्चे को जल्दी बोलने में मदद मिलेगी। यदि आपका बच्चा भी छोटा है तो आपको भी इन टिप्स को ट्राई करना चाहिए इससे आपके बच्चे को भी जल्दी बोलने में मदद मिलेगी।

दूध पीने के बाद यह गलतियां नहीं करें प्रेग्नेंट महिला

गर्भावस्था के दौरान महिला को दूध का सेवन करने की सलाह दी जाती है क्योंकि दूध कैल्शियम, प्रोटीन, एनर्जी का बेहतरीन स्त्रोत होता है। ऐसे में दूध का सेवन करने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास में मदद मिलती है। लेकिन यदि दूध के बेहतरीन फायदे आपको चाहिए होते हैं तो दूध का सेवन करते समय बहुत सी बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है।

खासकर गर्भवती महिला को तो जरूर दूध का सेवन करने से जुडी सभी बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है। ताकि माँ और बच्चे को दूध पीने के बेहतरीन फायदे मिल सके और दोनों की सेहत को किसी तरह का नुकसान नहीं हो। तो लीजिये अब इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं की दूध पीने के बाद या पहले या साथ में प्रेग्नेंट महिला को क्या नहीं करना चाहिए।

दूध पीते समय प्रेग्नेंट महिला नहीं करें यह गलतियां

गर्भावस्था के दौरान किसी भी खाद्य पदार्थ या तरल पदार्थ का आपको भरपूर फायदा मिल सके। इसके लिए गर्भवती महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला को कितनी मात्रा में वो चीज खानी चाहिए, कब खानी चाहिए, उसके साथ क्या नहीं खाना चाहिए, आदि। तो आइये अब दूध के बारे में जानते हैं की महिला को दूध पीने के बाद या पहले क्या नहीं खाना चाहिए।

खट्टी चीजें

दूध पीने से पहले या बाद में महिला को कम से कम एक घंटे तक खट्टी चीजों के सेवन जैसे की इमली, संतरा व् अन्य खट्टे फलों का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से महिला को पाचन से जुडी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

नमकीन चीजें

दूध के साथ, पहले या बाद में महिला को थोड़ी देर तक नमकीन चीजों का या मसालेदार चीजों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से भी पाचन क्रिया पर बुरा असर पड़ता है।

उड़द की दाल

दूध का सेवन करने के बाद या पहले आपको उड़द की दाल का सेवन भी करने से बचना चाहिए। या फिर दोनों के खाने पीने में कम से कम एक घंटे का गैप रखना चाहिए। क्योंकि दूध और उड़द दाल का सेवन एक साथ करने से महिला को पेट में गैस, कब्ज़, उल्टी जैसी समस्या होने का खतरा हो जाता है।

करेला, भिंडी, मूली, जामुन

दूध पीने के बाद महिला को करेला, भिंडी, मूली, जामुन का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने के कारण महिला को स्किन सम्बन्धी समस्या जैसे की स्किन पर काले दाग, रैशेस, खुजली जैसी समस्या होने का खतरा रहता है।

मछली

दूध पीने के तुरंत बाद या पहले मछली का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि दूध और मछली का सेवन एक साथ करने से शरीर पर सफ़ेद दाग पड़ने की समस्या हो सकती है साथ ही पाचन क्रिया पर भी इसका बुरा असर पड़ता है जिसकी वजह से महिला को पेट सम्बन्धी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

दही

दूध और दही का सेवन भी एक साथ नहीं करना चाहिए इन दोनों के सेवन में भी कम से कम आधे से एक घंटे का गैप होना चाहिए। क्योंकि दूध और दही का सेवन एक साथ करने के कारण भी पेट सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा रहता है।

तो यह है प्रेगनेंसी में दूध के साथ में, बाद में, पहले किन चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिला को कच्चे दूध का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि उसमे हानिकारक बैक्टेरिया होता है जिसकी वजह से महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा हो जाता है। साथ ही गर्भवती महिला को बहुत ज्यादा गर्म दूध और मलाई वाले दूध का सेवन करने से भी बचना चाहिए।

चार महीने का गर्भ कितना होता है?

प्रेगनेंसी की पहली तिमाही खत्म होने के बाद प्रेगनेंसी के चौथे महीने में महिला थोड़ा को थोड़ा आराम मिल जाता है। क्योंकि इस दौरान महिला की शारीरिक परेशानियां थोड़ी कम हो जाती है। इसीलिए प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही को प्रेग्नेंट महिला के लिए हैप्पी सीजन भी कहा जाता है। साथ ही इस दौरान महिला की भूख में वृद्धि भी होती है, महिला थोड़ा एनर्जी से भरपूर भी महसूस करती है, महिला का पेट भी थोड़ा बाहर आ जाता है जिससे थोड़ा बहुत अंदाजा लगाने में मदद मिलती है की महिला गर्भवती है, आदि। इसके अलावा प्रेगनेंसी के चौथे महीने में शिशु भी थोड़ा बड़ा हो जाता है तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में चार महीने का गर्भ कितना होता है।

गर्भावस्था के चौथे महीने में शिशु का विकास व् आकार

जैसे जैसे गर्भ में शिशु का विकास बढ़ता है वैसे वैसे आप गर्भ में शिशु की हलचल महसूस कर सकते हैं। जैसे की कुछ गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के चौथे महीने के आखिर तक गर्भ में शिशु की हलचल महसूस करने लग जाती है। खासकर जिन महिलाओं की दूसरी प्रेगनेंसी होती है उन्हें शिशु की हलचल समझने में आसानी होती है।

प्रेगनेंसी के चौथे महीने की शुरुआत में बच्चे की लम्बाई पांच से छह इंच तक हो सकती है और दिखने में शिशु एक संतरे अमरुद जैसे आकार हो सकता है। लेकिन चौथे महीने के आगे बढ़ने के साथ शिशु चौथे महीने के आखिर तक लगभग दस इंच तक लम्बा हो सकता है यानी की शिशु एक केले के आकार का हो सकता है। इसके अलावा शिशु का वजन 110 से 140 ग्राम तक हो सकता है।

गर्भावस्था के चौथे महीने में शिशु की जो एक पूंछ सी दिखाई देती है वो गायब हो चुकी होती है, शिशु की हड्ड़ियों का विकास हो चूका होता है अब उनकी मजबूती बढ़ रही होती हैं, शिशु की स्किन अभी पतली होती है, शिशु के शरीर में बाल से आने लगते हैं, कान विकसित होने लगते हैं, साथ ही बाकी अंगो का विकास भी तेजी से बढ़ रहा होता है।

तो यह है प्रेगनेंसी के चौथे महीने में शिशु का विकास कितना हो चूका होता है उससे जुडी जानकारी, साथ ही इस दौरान महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि शिशु के विकास को तेजी से होने में मदद मिल सके। जिससे आपका शिशु गर्भ में स्वस्थ व् हष्ट पुष्ट रहे।

Baby growth in 4th month pregnancy