Home Blog Page 239

सर्दियों में गाल फटने की समस्या से ऐसे निजात पाएं

Natural Remedies for Chapped “Winter Cheeks”

गालों के फटने की समस्या से ऐसे निजात पाएं, Natural Remedies for Chapped Cheeks, Home Remedies for Winter Cheeks, गाल फटने की समस्या, गालों का फटना

सर्दियों का मौसम आते ही स्किन में अजीब का रूखापन आने लगता है जो न तो किसी मॉइस्चराइज़र से ठीक होता है और न ही किसी आयल से। इन दिनों दिन में कितनी ही बार मुंह धोकर क्रीम क्यों न लगा ली जाए कुछ समय पश्चात् स्थिति वैसी की वैसी ही रहती है। जिसका कारण होता है मौसम में मौजूद शुष्कता। गर्मियों की तुलना में सर्दियों के मौसम में स्किन अधिक काली, बेजान और रूखी होती है। जिसका कारण इन दिनों चलने वाली सर्द हवाएं होती है।

इन दिनों चलने वाली ये सर्द हवाएं हमारी स्किन से नमी चुराकर उसे रुखा बना देती है जिसके चलते स्किन बेजान हो जाती है। इसके अलावा तनाव और डिहाइड्रेशन भी स्किन फटने का एक कारण होता है। बड़ों की तुलना में छोटे बच्चों में ये समस्या अधिक देखने को मिलती है। जिसमे काफी दर्द होता है।

यूँ तो बाजार में ढेरों ऐसे क्रीम्स मौजूद है जो स्किन का रूखापन ठीक करने का दावा करती है लेकिन उनमे से केवल कुछ को छोड़कर अन्य सभी अपने इस कार्य को पूरा नहीं कर पाती। जिसका कारण होता है उनमे मौजूद केमिकल्स। जो स्किन को ठीक करने की बजाय और अधिक रुखा और बेजान बना देते है। ऐसे में करे तो क्या?गालों के फटने की समस्या

परेशान न हो क्योंकि आज हम आपको कुछ ऐसे आसान और घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप सर्दियों में गाल फटने की समस्या से लेकर त्वचा संबंधी अन्य समस्यायों को भी आसानी से दूर कर पाएंगी। इन उपायों का प्रयोग करने से आपकी प्रॉब्लम्स तो दूर होंगी ही साथ साथ आपकी स्किन पहले से अधिक सुंदर और आकर्षक बनेगी। तो आइये जानते है क्या है वे उपाय?

गालों के फटने की समस्या के घरेलू उपाय :-

1. दालचीनी और शहद :

शायद आप नहीं जानते लेकिन आपकी किचन में मौजूद मसालें भी आपकी स्किन संबंधी समस्यायों को दूर करने में आपकी मदद कर सकते है। ऐसे ही मसालों में से एक हैं दालचीनी और शहद जो स्किन का रूखापन दूर करके उसे सॉफ्ट और मुलायम बनाने में मदद करते है। इसके लिए दालचीनी और शहद को एक साथ मिलाकर लेप बना बनाएं और इसे अपने फेस पर लगाएं। साथ ही इन दोनों चीजों का सेवन करने से स्किन से ड्राइनेस दूर हो जाती है। दालचीनी में बहुत से एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते है जबकि शहद स्किन को सॉफ्ट बनाने का काम करती है।

2. अंडे की सफेदी :

गालों के फटने की समस्या होने पर अपने फेस पर अंडे की जर्दी लगाना काफी लाभकारी हो सकता है। क्योंकि इसमें कैल्शियम की भरपूर मात्रा पाई जाती है जो स्किन को ठीक करने का काम करती है। सर्दियों में अंडा खाने और उसकी सफेदी को फेस पर लगाने से काफी फायदा होता है। इसके लिए सप्ताह में एक बार अपने फेस पर अंडे की सफेदी लगाएं। कुछ देर सूखने दें और उसके बाद फेस पानी से साफ़ कर लें। इससे स्किन में ग्लो आता है।

3. पपीता :papita on face

फेस की फटी हुई त्वचा को ठीक करने के लिए आप पपीते का इस्तेमाल भी कर सकती है। यह स्किन को अंदर से पोषण प्रदान करके रिपेयर करता है। वैसे भी आजकल बहुत से ब्यूटी प्रोडक्ट्स में पपीते का इस्तेमाल मुख्य इंग्रीडिएंट के रूप में किया जाने लगा है। ऐसे में आप भी इसका इस्तेमाल अपने फेस की समस्या को ठीक करने के लिए कर सकती है। इसके लिए पपीते को छीलकर उसके बीज निकाल लें और गूदे को अच्छी तरह से पीस लें। अब इसे अपने फेस पर लगाकर मसाज करें। 15 से 20 मिनट तक रखें और उसके बाद गुनगुने पानी से साफ़ कर लें। आपकी स्किन अपने आप ठीक होने लगेगी।

4. केला :

स्वाद में भले ही यह फ्रूट आपको पसंद नहीं हो लेकिन इसके फायदे जानकर आप इसका इस्तेमाल किये बिना रह नहीं पाएंगे। जी हां, शायद आप नहीं जानती लेकिन ये केला भी आपकी फेस की त्वचा को ठीक करने में आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए एक केला लें और उसे छीलकर उसे अच्छी तरह से पीस लें। अब इस पेस्ट को अपने फेस पर लगाएं और 30 मिनट के लिए रहने दें। बाद में गुनगुने पानी से अपना फेस साफ़ कर लें। स्किन अपने आप ठीक हो जाएगी।

5. नींबू :LEMON JUICE

नींबू, फेस के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, अनचाहे बालों को छुपाना हो या फेस के दाग धब्बों को, स्किन में ग्लो लाना हो या मुहांसों को दूर भगाना हो सभी के लिए यह प्रमुख उपाय के रूप में प्रयोग किया जाता है। लेकिन क्या आप जानती है की इसकी मदद से आप अपने फटे हुए गालों को भी ठीक कर सकती है। लेकिन बहुत से लोगों का मानना होता है की इसे लगाने से स्किन और अधिक फट जाती है जबकि ऐसा कुछ नहीं है। प्रारंभ में लगाने पर थोड़ी जलन अवश्य होगी। लेकिन यदि आप रोजाना इसका इस्तेमाल करेंगे तो स्किन में ग्लो भी आएगा। इसके लिए नींबू का रस निचोड़कर रुई की मदद से उसे अपने पुरे फेस पर अच्छे से लगा लें। 10 मिनट सूखने के बाद फेस साफ़ कर लें।

6. पुदीना :

पुदीने की तासीर बहुत ठंडी होती है, जो स्किन की इरिटेशन और जलन को दूर करके उसमे आराम दिलाने में मदद करती है। इसके अलावा फटी हुई स्किन, दाने और मुहांसे आदि की समस्या में भी पुदीने का इस्तेमाल करना लाभकारी होता है। इसके लिए पुदीने की पत्तियों को पीसकर उनका जूस निकाल लें। अब इसे अपने फेस पर लगाएं और 15 मिनट लगाएं रखें। और उसके बाद साफ़ पानी से धो लें।

7. बादाम तेल :बादाम तेल

गालों के फटने पर आप बादाम के तेल का भी इस्तेमाल कर सकते है। इसमें मौजूद तत्व और गुण स्किन को भीतरी पोषण देने के साथ साथ अंदरूनी पोषण देने में भी मदद करते है। इसके लिए बादाम तेल की 2 से 4 बून्द को अपने फटे गालों पर अच्छी तरह से लगा लें। और इसे सूखने दें। कुछ देर बाद अपना फेस पानी से साफ़ कर लें। नियमित रूप से इस उपाय का इस्तेमाल करने से आपकी स्किन नार्मल हो जाएगी।

तो ये थे कुछ उपाय, जिनकी मदद से आप सर्दियों के मौसम में गालों के फटने की समस्या का इलाज कर सकते है। लेकिन एक बात का ध्यान रखें की इस मौसम में फेस धोने के लिए कभी भी गर्म पानी का इस्तेमाल नहीं करें। इसे आपकी स्किन और भी रुकी हो सकती है।

प्रेगनेंसी के तीन महीने होते ही इन बातों का ध्यान रखें

प्रेगनेंसी के तीन महीने होते ही इन बातों का ध्यान रखें, प्रेगनेंसी के तीन महीने बाद रखें इन बातों का ध्यान, प्रेगनेंसी टिप्स, गर्भवस्था के लिए टिप्स, गर्भवती महिलाएं तीन महीने बाद रखें इन बातों का ध्यान , Pregnancy tips

वैसे तो गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी का हर पल बहुत अहम होता है, और महिला को हर कदम पर अपना बेहतर तरीके से ध्यान रखना पड़ता है। लेकिन प्रेगनेंसी के तीन महीने बाद महिला को और अच्छे से अपनी केयर करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इस दौरान शिशु के अंग अच्छे से विकसित हो जाते हैं और अब शिशु के बेहतर शारीरिक विकास और मानसिक विकास के लिए महिला को अपना अच्छे से और भी ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। ताकि गर्भ में शिशु का विकास अच्छे तरीके से हो सके और आप एक हष्ट पुष्ट, तंदरुस्त, बुद्धिमान शिशु को जन्म दे सकें। तो लीजिए आज हम आपसे कुछ ऐसे ही टिप्स शेयर करने जा रहे हैं जिनका ध्यान महिला को प्रेगनेंसी के तीसरे महीने के बाद अच्छे तरीके से रखना चाहिए।

खान पान का ध्यान रखें

पहले तीन महीने हो सकता है बॉडी में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला का कुछ खाने पीने का मन न करें। और ऐसे में कुछ महिलाएं खान पान के प्रति लापरवाही भी करने लगती है, लेकिन प्रेगनेंसी के तीन महीने बाद भी आप अपने खान पान का अच्छे से ध्यान नहीं रखती है। तो इसके कारण शिशु के शारीरिक विकास में कमी आ सकती है। जिसके कारण जन्म के बाद शिशु के वजन में कमी जैसी समस्या का सामना भी आपको करना पड़ सकता है। ऐसे में खान पान के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही न करते हुए भरपूर मात्रा में पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए।

घूमने फिरने में ज्यादा न रहें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को किसी भी ऐसी जगह पर नहीं जाना चाहिए जहां ज्यादा भीड़भाड़ हो, ज्यादा शोर हो, ज्यादा प्रदूषण हो, और न ही लम्बी यात्रा पर, क्योंकि यदि आप ऐसी जगह पर जाती है तो इसके कारण महिला को इन्फेक्शन की समस्या हो सकती है। और महिला को इन्फेक्शन होने के कारण गर्भनाल के रास्ते इन्फेक्शन के वायरस शिशु तक भी पहुँच सकते हैं जो की शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है। साथ ही ज्यादा शोर आदि में जाने के कारण शिशु के बोलने और सुनने की क्षमता में भी कमी आ सकती है।

सम्बन्ध बनाते समय

स्वस्थ गर्भावस्था होने पर आप प्रेगनेंसी के दौरान भी आप अपने पार्टनर के साथ सम्बन्ध बना सकते हैं। लेकिन यदि प्रेगनेंसी के किसी तरह की समस्या है, महिला का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, महिला सम्बन्ध बनाने के लिए तैयार नहीं है, तो ऐसे में जरुरी है की पुरुष पार्टनर अपनी साथी का साथ दें। और यदि सम्बन्ध बनाते भी हैं, तो पेट पर जोर न पड़ने दे, किसी भी तरह का नया एक्सपेरिमेंट न करें, महिला को परेशानी होने पर जबरदस्ती न करें, सुरक्षा का इस्तेमाल जरूर करें, आदि बातों का इस दौरान अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

अधिक व्यायाम न करें

गर्भावस्था के दौरान महिला का वजन बढ़ना आम बात होती है, ऐसे में इस दौरान महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वजन घटाने के लिए अधिक व्यायाम आदि नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, हां आप चाहे तो वॉक, योगासन आदि कर सकते हैं।

बॉडी को हाइड्रेट रखें

प्रेगनेंसी के दौरान पानी न केवल शरीर में ऊर्जा को बनाएं रखता है बल्कि महिला को गर्भावस्था के दौरान होने वाली बहुत सी परेशानियों से भी बचाव करने में मदद करता है। ऐसे में महिला को शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ अन्य पेय पदार्थ जैसे जूस, नारियल पानी आदि का भी भरपूर सेवन करना चाहिए।

जंक फ़ूड से बचें

पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने से गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी बेहतर होने में मदद मिलती है। लेकिन यदि आप जंक फ़ूड का सेवन करती है तो इससे इन्फेक्शन, पेट से जुडी समस्याएँ आदि होने के चांस बढ़ जाते हैं। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान जंक फ़ूड से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

किसी भी तरह का नशा न करें

यदि किसी महिला को शराब या धूम्रपान का सेवन करने का मन भी करता है तो प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है, इसके बुरे प्रभाव गर्भनाल के रास्ते शिशु तक पहुंचकर शिशु के शारीरिक के साथ मानसिक विकास में भी कमी ला सकते हैं।

सोते समय रखें ध्यान

प्रेगनेंसी के चौथे महीने में या उसके बाद महिला का पेट थोड़ा निकलना शुरू हो जाता है। ऐसे में महिला को ध्यान रखना चाहिए की सोते समय महिला न तो एक ही पोजीशन में सोए, और न ही पेट पर अधिक दबाव पड़ने दे, यानी की उल्टा होकर भी न सोएं। क्योंकि इसके कारण गर्भ में शिशु को असहज महसूस हो सकता है।

जांच में न करें देरी

गर्भवती महिला को एक बात का खास ध्यान रखना चाहिए की समय पर अपनी जांच करवाए, समय पर दवाइयों का सेवन करे, जांच में कभी भी देरी न करे, किसी भी परेशानी के होने पर डॉक्टर को संपर्क करे आदि। ऐसा करने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के तीसरे महीने के बाद खासकर रखना चाहिए। यदि गर्भवती महिला इन टिप्स का अच्छे से ध्यान रखती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु का विकास भी बेहतर तरीके से होने में मदद मिलती है।

प्रेग्नेंट महिला का करवा चौथ का व्रत कैसा होना चाहिए

साल भर में बहुत से व्रत आते हैं लेकिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत बहुत ही खास होता है। क्योंकि यह व्रत महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र के लिए रखती है। ज्यादातर व्रत में जहां दिन भर में चाय पानी पीना, फलाहार लेना, एक समय भोजन किया जा सकता है। वहीँ करवा चौथ का व्रत निर्जला उपवास होता है इसमें महिला को रात को चाँद देखकर अर्ध्य देने के बाद ही खाने की अनुमति होती है। और बहुत से लोग इस व्रत में थोड़ी सी भी चूक हो जाये तो इसे बहुत ही अशुभ मानते हैं, ऐसे में करवा चौथ का व्रत रखना गर्भवती महिला के लिए थोड़ा परेशानी भरा हो सकता है। क्योंकि गर्भवती महिला अकेली नहीं होती है बल्कि गर्भ में पल रहा शिशु भी महिला पर ही निर्भर करता है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को करवा चौथ का व्रत रखते समय बहुत सी बातों का ध्यान रखना पड़ता है।

प्रेग्नेंट महिला करवा चौथ रखते समय इन टिप्स का ध्यान रखें

यदि आप गर्भवती है, और करवा चौथ का व्रत आने वाला है, और किसी भी कीमत पर आप उस व्रत को करना चाहती है। तो ऐसी बहुत सी बातें हैं जिनका ध्यान रखना गर्भवती महिला के लिए बहुत जरुरी होता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भवती महिला का करवा चौथ का व्रत कैसा होना चाहिए।

डॉक्टर से ले राय

महिला को व्रत रखने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर राय लेनी चाहिए, क्योंकि महिला की शारीरिक स्थिति के बारे में डॉक्टर से बेहतर कोई नहीं बता सकता है। साथ ही करवा चौथ का व्रत रखते समय किन किन बातों का ध्यान रखना जरुरी है इस बारे में भी डॉक्टर आपको बहुत अच्छे से बता सकते हैं।

सरगी

करवा चौथ व्रत की शुरुआत होती है सरगी से, यह महिला को सुबह सूर्योदय से पहले खानी होती है। ऐसे में गर्भवती महिला को अपनी सरगी में हेल्दी चीजों, तरल चीजों को भरपूर शामिल करना चाहिए। ताकि पूरा दिन निर्जला रहने के बाद भी महिला को कमजोरी का अहसास न हो। और इसके लिए महिला पानी, जूस, दूध, ड्राई फ्रूट, फल, आदि का महिला को सेवन करना चाहिए। इसके अलावा जो दवाई आपको दिन में लेनी होती है और भी सुबह ले लें, ताकि दिनभर में कोई परेशानी न हो।

कपडे

करवा चौथ पर क्या पहनना है इसकी तैयारी महिला बहुत पहले से ही शुरू कर देती है। और हर महिला भारी से भारी सूट, लहंगे, साडी, हैवी ज्वेलरी पहनना पसंद करती है। लेकिन यदि आप गर्भवती है तो आपको व्रत के दिन आपको अपने पहनावे का भी ध्यान रखना चाहिए, ज्यादा भारी व् ज्यादा टाइट कपडे पहनने के कारण आपको दिक्कत हो सकती है ऐसे में आपको आरामदायक कपड़ो का ही चुनाव करना चाहिए। कथा के लिए आप अपने सिर पर भारी दुपट्टा या अपनी शादी की चुनरी रख सकती है। इससे गर्भवती महिला को कपड़ो के कारण करवा चौथ के दिन कोई परेशानी नहीं होगी।

आराम करें

शाम को पांच बजे के बाद ही करवा चौथ की पूजा शुरू होती है, ऐसे में महिला को उससे पहले थोड़ा आराम करना चाहिए। ताकि महिला को रेस्ट मिले और थोड़ा टाइम भी पास हो जाये। इससे महिला को करवा चौथ के दिन प्यासे रहने के बाद भी थोड़ा आराम मिलेगा।

खुद को बिज़ी रखें

यदि आप चाहे तो अपने आप को किसी न किसी काम में बिज़ी रख सकती है, टीवी देख सकती है, संगीत सुन सकती हैं, आदि। ऐसा करने से भी महिला को भूख प्यास को भुलाने में मदद मिलती है और महिला का समय भी पास हो जाता है।

कथा जल्दी सुनें

वैसे तो करवा चौथ में कथा का समय शाम का होता है लेकिन यदि आप गर्भवती है तो आपको जल्दी कथा सुन लेनी चाहिए। इसके लिए आप व्रत कथा किताब या घर के किसी बड़े या पंडतानी को बुलाकर सुन सकती है। क्योंकि करवा चौथ में कथा सुनना जरुरी होता है। ऐसे में आप डेढ़ या दो बजे के आस पास कथा सुनें और कथा सुनने के बाद चाय या फलाहार का सेवन कर लें, ऐसा करने से आपको थोड़ी एनर्जी मिलेगी और फिर थोड़ा आराम करें उसके बाद थोड़ा ही समय रह जायेगा और आपको भूखे रहने के कारण होने वाली परेशानी से निजात पाने में मदद मिलेगी।

पूजा के बाद कुछ आहार लें

जैसे ही आप पूजा करके आती है आप चाहे तो उसके बाद दूध, फलाहार का सेवन कर सकती है। और बहुत सी महिलाएं पूजा के बाद ऐसा करती है, तो गर्भवती महिला को तो ऐसा जरूर करना चाहिए। इससे महिला को एनर्जी मिलती है और कमजोरी व् प्यास से थोड़ा आराम मिलता है, साथ ही शिशु तक भी पोषण पहुँचता है।

व्रत खोलने के बाद

व्रत खोलने के बाद महिला को एक दम से खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसके कारण महिला को पेट सम्बन्धी समस्या हो सकती है। बल्कि सबसे पहले महिला को एक या दो गिलास पानी के पीने चाहिए। उसके बाद महिला को दस मिनट बाद खाना खाना चाहिए और खाने में भी अधिक मसालों का सेवन करने की बजाय हल्के आहार का सेवन करना चाहिए ताकि खाने को पचाने में महिला को किसी भी तरह की परेशानी न हो।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो गर्भवती महिला को करवा चौथ का व्रत रखते समय ध्यान रखना चाहिए। इसके कारण गर्भवती महिला को व्रत रखने में आसानी होने के साथ परेशानी से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

गर्भावस्था में सोते समय इन बातों का ध्यान रखें

गर्भावस्था में सोते समय इन बातों का ध्यान रखें, प्रेगनेंसी में सोते हुए इन बातों का ध्यान रखें, प्रेगनेंसी टिप्स, गर्भावस्था के दौरान इन बातों का ध्यान रखें, Sleeping tips during Pregnancy

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए बहुत ही महत्वपुर्ण समय होता है, और इस दौरान महिला को अपने अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि गर्भावस्था के दौरान महिला को स्वस्थ रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिल सके। गर्भवती महिला को अपने खान पान, उठने बैठने, चलने फिरने, के साथ सोते समय भी बहुत सी बातों का ध्यान रखना चाहिए। जिससे की महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिल सके और किसी भी तरह की परेशानी न हो, क्योंकि यदि गर्भावस्था के दौरान महिला नींद भरपूर नहीं लेती है तो तनाव हो सकता है, और गलत तरीके से महिला सोती है तो इसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके अलावा और भी बहुत सी बातें हैं जिनका ध्यान महिला को प्रेगनेंसी के दौरान महिला को सोते समय रखना चाहिए, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

सोने की जगह

सोने के लिए गर्भवती महिला को सोने के स्थान को साफ़ सुथरा रखना चाहिए, और नरम गद्दों पर सोना चाहिए। क्योंकि यदि महिला का सोने का स्थान साफ़ नहीं होता है तो इसके कारण महिला को बेहतर नींद नहीं मिल पाती है, साथ ही टाइट गद्दों पर सोने के कारण महिला को कमर दर्द जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसीलिए बेहतर नींद के लिए सोने की जगह का खास ध्यान रखना चाहिए।

आरामदायक कपडे पहने

गर्भावस्था के दौरान आपको कॉटन के और ढीले कपडे पहनने चाहिए, इससे आपको आरामदायक महसूस होता है। और सोते समय भी आपको इस बात का दिन रखना चाहिए की आप ऐसे कपडे डालकर न सोएं जो की टाइट या चुभने वाले हो। क्योंकि इसके कारण आपके साथ गर्भ में पल रहे शिशु को भी परेशानी होगी, और आपको भरपूर नींद लेने में भी परेशानी होगी। इसीलिए रात को सोते समय ढीले और सूती कपडे पहने जिसमे आपको आरामदायक महसूस हो और आप बेहतर नींद ले सकें।

पोजीशन का रखें ध्यान

प्रेगनेंसी के दौरान वजन बढ़ने के कारण सोने में परेशानी हो सकती है, लेकिन आपको सोते समय अपनी पोजीशन का खास ध्यान रखना चाहिए। प्रेगनेंसी के दौरान जितना हो सके महिला को बाईं और करवट लेकर सोना चाहिए इससे महिला को नींद बेहतर आती है, साथ ही शिशु को भी किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। और यदि आप सीधे होकर सोते हैं तो इसके कारण बॉडी में ब्लड फ्लो बेहतर नहीं हो पाता है जिसके कारण सूजन जैसी समस्या का आपको सामना करना पड़ सकता है, साथ ही दाईं और करवट लेकर सोने से लिवर पर जोर पड़ता है, ऐसे में सोते समय आपको अपनी पोजीशन का ध्यान जरूर रखना चाहिए।

कितनी देर सोना है जरुरी

आमतौर पर स्वस्थ रहने के लिए दिन में आठ घंटे सोने की सलाह दी जाती है, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में लगातार हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण गर्भवती महिला थकान व् कमजोरी का अनुभव कर सकती है। ऐसे महिला रात की नींद के अलावा दिन में भी थोड़ी देर सोना चाहिए। ऐसा करने से महिला को फ्रैश महसूस होने में मदद मिलती है।

पेट और पीठ के बल न सोएं

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पेट के बल नहीं सोना चाहिए, क्योंकि इसके कारण पेट पर दबाव पड़ता है। जिसकी वजह से महिला को पेट में दर्द होने के साथ गर्भ में शिशु को भी असहज महसूस हो सकता है। इसके अलावा महिला को पीठ के बल भी नहीं सोना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से पैरों तक ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं हो पाता है, जिसके कारण सूजन के साथ पीठ में दर्द की समस्या भी हो सकती है।

तनाव न लें

सोते समय आपको किसी भी तरह की बात को लेकर आपको परेशान नहीं होना चाहिए, क्योंकि यदि आप किसी बात को लेकर परेशान रहते हैं तो इसके कारण आपको नींद नहीं आ पाती है। और नींद पूरी न होने के कारण आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, जो शिशु के लिए भी नुकसानदायक होता है।

पानी पीएं

सोने से पहले महिला को एक या दो गिलास पानी भी जरूर पीना चाहिए, इससे शिशु को बेहतर मूव करने में मदद मिलती है। साथ ही बॉडी में एनर्जी भी बरकरार रहती है।

तो यह हैं कुछ खास टिप्स जिनका ध्यान आपको प्रेगनेंसी के दौरान सोते समय रखना चाहिए। यदि आप इन टिप्स का ध्यान रखते हैं तो गर्भवती महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है, जिसके कारण प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली बहुत सी परेशानियों से निजात मिल जाता है।

यूट्यूब विडिओ –

गर्भधारण के बाद रात को सोने से पहले इन बातों का ध्यान रखें।

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु में होते है ये बदलाव

प्रेगनेंसी को यदि दुनिया का सबसे खास और प्यारा अनुभव कहा जाए तो गलत नहीं होगा। क्योंकि इस दौरान महिला पूरे नौ महीने गर्भ में एक नन्ही जान को रखती है। हर पल, हर समय शरीर में हो रहे नए बदलाव का अनुभव करती है। जैसे ही महिला को पता चलता है की वो माँ बनने वाली है, तो अपने आप ही उसमे मातृत्व की झलकियां दिखनी शुरू हो जाती है। गर्भ में पल रहे शिशु का अभी जन्म भी नहीं होता, लेकिन माँ अपने मन में अपने शिशु के लिए सपने संजोना शुरू कर देती है।

गर्भ में पल रहा शिशु जब अपनी मूवमेंट को शुरू करता है, जो की महिला प्रेगनेंसी के पांचवे हफ्ते में महसूस करना शुरू कर देती है। जैसे की बच्चे का लात मारना, घूमना, आदि। इस पल को केवल एक माँ ही महसूस करती है। तो आइये आज हम आपको महिला को प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में हो रहे शिशु के विकास से जुडी कुछ बातें बताते है। जो की शायद हर माँ के मन का सवाल होता है की शिशु का गर्भ में विकास कैसे होता है।

प्रेगनेंसी के दौरान पहली तिमाही में होने वाले बदलाव:-

प्रेगनेंसी का पहला महीना:-

प्रेगनेंसी के पहले महीने में पीरियड्स मिस होने के बाद आप अपने घर में टेस्ट करके या अपने डॉक्टर से चेक करवाकर पता करते है की आप प्रेग्नेंट है। और आप ऐसा अपने पीरियड्स खत्म होने के चौथे हफ्ते के बाद चेक कर सकते है। यदि आप प्रेग्नेंट है तो इस समय भ्रूण बनता है और उसमे केवल दो कोशिकाएं होती है।

प्रेगनेंसी का दूसरा महीना:-

इस दौरान महिला के शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण नए नए प्रेगनेंसी के लक्षण दिखाई देते है। जैसे की सुबह उठने में दिक्कत होना, मन मचलाना, बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होना, सर में भारीपन, आदि। यह लक्षण हर महिला के हार्मोनल बदलाव पर निर्भर करते है। दूसरे महीने में आपके बेबी का दिल धड़कना शुरू करता है। और उसका मानसिक विकास या मस्तिष्क भी बन जाता है।

प्रेगनेंसी का तीसरा महीना:-

प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में भ्रूण पूरा विकसित हो जाता है, और इस महीने में महिलाओ को सुबह उठने पर सर में भारीपन आदि से भी छुटकारा मिल जाता है। और साथ ही शिशु का विकास होता है और प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में भ्रूण का आकार एक बेर जितना हो जाता है। साथ ही अब भ्रूण मुड़ना, जम्हाई लेना, आंखे घूमना, हिचकी लेना भी शुरू कर देता है।

प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही:-

प्रेगनेंसी का चौथा महीना:-

चौथे महीने के शुरू होते ही प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही शुरू हो जाती है। और गर्भ में पल रहे शिशु का विकास तेजी से होने लगता है। बच्चे की हड्डियां, और कोशिकाएं मजबूत होने लगती है। और यह आप देखना चाहे तो अल्ट्रासाउंड मदद से देख भी सकते है। इस दौरान बच्चा पांच इंच लम्बा हो जाता है और उसका वजन भी पांच औंस के बराबर हो जाता है।

प्रेगनेंसी का पांचवा महीना:-

इस महीने में माँ एक नया अनुभव लेती है क्योंकि गर्भ में पल रहा शिशु अब कई बार आपको लात मरता है, जिसका अहसास माँ कर सकती है। लेकिन इस महीने में महिलाओ को कुछ परेशानी भी हो सकती है जैसे की खट्टी डकार आना, जलन महसूस होना, पीठ में दर्द की परेशानी, सर दर्द होना, कब्ज़, पानी की अधिक प्यास लगना, आदि। क्योंकि शिशु का विकास और तेजी से होने लगता है।

प्रेगनेंसी का छठा महीना:-

प्रेगनेंसी का छठा महीना यह बताता है की आपकी आधी प्रेगनेंसी बीत चुकी है। और इस महीने में शिशु के सभी अंग अच्छे से विकसित हो जाते है। और शिशु पूरा बन जाता है। लेकिन उसका आकार अभी छोटा होता है और उसका विकास अगले महीनो में अच्छे से होता है।

प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही:-

प्रेगनेंसी का सातवां महीना:-

इस महीने में शिशु के साथ संकुचन की गतिविधियां शुरू हो जाती है, ऐसे में गर्भ में पल रहा शिशु बाहर की आवाज़ को सुन सकता है, और लाइट को महसूस कर सकता है। और इस महीने में शिशु का आकार लगभग 13 इंच तक बढ़ जाता है, जिसके कारण शिशु की मूवमेंट का आप ज्यादा अनुभव ले सकती है।

प्रेगनेंसी का आठवां महीना:-

प्रेगनेंसी के आठवे महीने में शिशु का वजन भी अच्छे से बढ़ जाता है, ऐसे में शिशु के विकास के लिए माँ को अपने आहार का पूरा ध्यान देना चाहिए। और इस समय तक गर्भ में पल रहे शिशु के फेफड़ों का भी अच्छे से विकास हो जाता है।

प्रेगनेंसी का नौवा महीना:-

अब वो समय और पास आ जाता है जब आपका शिशु आपके हाथों में आने वाला होता है। और इस समय आपको बच्चे का आकार बढ़ने के कारण ज्यादा परेशानियां हो सकती है, क्योंकि इस समय शिशु को जगह कम होने के कारण वो अधिक संकुचन करने लगता है। जिससे आपको पीठ दर्द, व् सोने में परेशानी हो सकती है। उसके बाद जब भी आपको ऐसा लगे की आपको जायदा समस्या हो रही है तो आपको अपने डॉक्टर के पास बिना देरी किया जाना चाहिए।

तो यदि आप भी इस खास अनुभव को लेने वाली है तो आप भी इन टिप्स को पढ़कर जान सकती है। और इनसे आपको यह भी पता चलता हैकि कैसे एक जान अपने अंदर एक नई जान को रखती है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपना अच्छे से ख्याल भी रखना चाहिए, ताकि महिला और शिशु दोनों को ही स्वस्थ रहने में मदद मिल सकें। और आपका नन्हा मेहमान हष्ट पुष्ट, तंदरुस्त, और बुद्धिमान हो।

प्रेगनेंसी, गर्भावस्था, प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में शिशु का विकास, गर्भ में शिशु का विकास कैसे होता है, गर्भावस्था के दौरान गर्भ में शिशु का विकास कैसे होता है, pregnancy stages, pregnancy ke nau mahine

डिलीवरी के बाद पेट बाहर नहीं निकलें इसके लिए क्या करें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन लगातार बढ़ता है और गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण पेट भी बाहर आता है। ऐसे में महिलाओं को इस बात की हमेशा चिंता रहती है की किस तरह वो डिलीवरी के बाद अपने बढ़े हुए पेट को अंदर करें। ताकि उनकी बॉडी को वापिस शेप में आने में मदद मिल सकें। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है की प्रेगनेंसी के दौरान और डिलीवरी के तुरंत बाद महिला ज्यादा व्यायाम या डाइट करें।

क्योंकि इसके कारण महिला की परेशानियां बढ़ सकती है। तो यदि आप प्रेग्नेंट हैं या आपकी अभी अभी डिलीवरी हुई है। और आप भी बढ़े हुए पेट को लेकर परेशान हैं तो घबराइए नहीं क्योंकि आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे ही टिप्स बताने जा रहे हैं। जो आपके बढ़े हुए पेट की समस्या से बचे रहने में आपको मदद करते हैं।

फाइबर युक्त आहार

यदि आप चाहती हैं की आपका पेट नहीं बढे तो इसके लिए सबसे पहले आपको इस बात का ध्यान रखना है की आप प्रेगनेंसी के दौरान फाइबर युक्त आहार का सेवन करें। क्योंकि फाइबर युक्त आहार का सेवन करने से महिला की पाचन शक्ति अच्छी रहती है, मेटाबोलिज्म रेट अच्छा रहता है, शरीर पर चर्बी का जमाव नहीं होता है जिससे महिला को पेट के साथ शरीर के बाकी अंगो में मोटापे की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा डिलीवरी के बाद भी फाइबर युक्त डाइट लें ताकि आपके पेट को जल्दी सही शेप में लाने में मदद मिल सके।

हाइड्रेटेड रहें

पानी का भरपूर सेवन करें, क्योंकि पानी का भरपूर सेवन करने से शरीर में वसा का जमाव नहीं होता है साथ ही शरीर से विषैले पदार्थ भी बाहर निकलते हैं। जिससे महिला को बढ़े हुए पेट व् ज्यादा वजन बढ़ने की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा डिलीवरी के बाद महिला को लौंग, इलायची वाला पानी उबाल कर पीना चाहिए या गर्म पानी पीना चाहिए। क्योंकि वह पानी शरीर से फैट को तेजी से कम करने में मदद करता है।

बेल्ट

प्रेगनेंसी के दौरान भी और डिलीवरी के बाद भी मेटरनिटी बेल्ट का इस्तेमाल पेट के लिए करें। ऐसा करने से पेट के आस पास की मांसपेशियों में खिंचाव ज्यादा नहीं होता है और उन्हें टाइट रहने में मदद मिलती है। जिसकी वजह से महिला का पेट जरुरत से ज्यादा बाहर नहीं आता है।

थोड़ा व्यायाम

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हमेशा आराम ही नहीं करना चाहिए बल्कि थोड़ा व्यायाम भी करना चाहिए। क्योंकि व्यायाम करने से महिला को फिट रहने में मदद मिलती है। खासकर खाना खाने के बाद थोड़ा वाक आदि जरूर करना चाहिए ऐसा करने से महिला के वजन को सही रहने में मदद मिलती है। ध्यान रखें की डिलीवरी के तुरंत बाद व्यायाम न करें क्योंकि इसके कारण आपकी शारीरिक परेशानियाना बढ़ सकती है।

डिलीवरी के बाद यह करें

ऐसा नहीं है की डिलीवरी होने के तुरंत बाद आपका पेट अंदर चला जायेगा। क्योंकि गर्भाशय को अपने सही आकार में आने में समय लगता है उसके बाद पेट अपने सही आकार में आता है। ऐसे में डिलीवरी के बाद पेट को अंदर करने के लिए आपको शिशु को स्तनपान जरूर करवाना चाहिए, गर्म पानी पीना चाहिए, ग्रीन टी पीनी चाहिए, खाने के बाद पानी नहीं पीना चाहिए, खाने के एक घंटे बाद गर्म पानी पीना चाहिए, ऐसी कुछ बातों का ध्यान रखने से डिलीवरी के बाद महिला को पेट अंदर करने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका ध्यान रखने से महिला को डिलीवरी के बाद बढ़े हुए पेट की समस्या से बचने में मदद मिलती है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको भी डिलीवरी के बाद जल्द से जल्द अपनी बॉडी को शेप में लाने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में आँखों के नीचे काले घेरे क्यों हो जाते हैं और क्या हैं उपाय

गर्भावस्था के दौरान महिला बहुत से आंतरिक और बाहरी बदलावों का अनुभव करती है। जैसे की प्रेगनेंसी के दौरान महिला का वजन बढ़ना, प्रेगनेंसी के दौरान शारीरिक परेशानियां होना, ख़ूबसूरती का बढ़ना या कम होना, आदि। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली डार्क सर्कल की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं।

गर्भावस्था के दौरान महिला को आँखों के नीचे काले घेरे की समस्या हो सकती है लेकिन ऐसा जरुरी नहीं है की यह हर महिला के साथ हो। प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा होना बहुत ही आम बात होती है। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के डार्क सर्कल क्यों होते हैं और किस तरह महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है।

प्रेगनेंसी में आँखों के नीचे काले घेरे होने के कारण

  • गर्भवती महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण शरीर में कमजोरी आ जाती है। जिसकी वजह से महिला को यह दिक्कत हो सकती है।
  • गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से शरीर के कई हिस्सों में रक्त जमा हो जाता है और यह आँखों के आस पास भी जमा हो सकता है। ऐसे में यह जमा हुआ रक्त काले घेरों के रूप में महिला को दिखाई देता है।
  • यदि प्रेग्नेंट महिला थोड़ा भी व्यायाम नहीं करती है सारा दिन एक ही जगह बैठ रहती है तो इसके कारण शरीर में ब्लड फ्लो में रूकावट आ जाती है जिसके कारण पूरी बॉडी में ऑक्सीजन का फ्लो भी अच्छे से नहीं हो पाता है जिसकी वजह से महिला को यह समस्या हो सकती है।
  • शरीर में पानी की कमी के कारण भी प्रेग्नेंट महिला को यह दिक्कत हो सकती है।
  • खून की कमी के कारण भी ऐसा होता है।
  • तनाव के कारण भी महिला की आँखों के नीचे काले घेरे आते हैं।
  • यदि गर्भवती महिला अपनी नींद भरपूर नहीं लेती है तो इस कारण भी महिला को काले घेरे की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला को कॉम्प्लीकेशन्स होती है, शारीरिक परेशानियां अधिक होती है तो इस कारण भी गर्भवती महिला को यह समस्या हो सकती है।

प्रेगनेंसी में आँखों के चारों तरफ काले घेरे की समस्या से निजात पाने के टिप्स

यदि प्रेग्नेंट महिला को आँखों के नीचे काले घेरे हो जाते हैं तो इसमें प्रेग्नेंट महिला को घबराने की जरुरत नहीं है। क्योंकि कुछ आसान टिप्स को ट्राई करने से महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिल सकती है। जैसे की:

व्यायाम

गर्भवती महिला को ज्यादा नहीं लेकिन थोड़ा बहुत व्यायाम, वाक आदि जरूर करनी चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से बॉडी में ब्लड फ्लो अच्छे से होते है, शरीर के सभी अंगो तक ऑक्सीजन अच्छे से पहुँचती है, प्रेगनेंसी में आने वाली परेशानियां कम होती है, जिससे महिला को आँखों से जुडी समस्या से राहत पाने में भी मदद मिलती है।

पोषक तत्वों से भरपूर आहार

गर्भवती महिला को पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। ताकि शरीर में आयरन, प्रोटीन, व् अन्य पोषक तत्वों की कमी न हो। और स्किन को भी भरपूर पोषण मिलें जिससे आँखों के चारों तरफ काले घेरे की समस्या से निजात पाने में मदद मिल सके।

पानी

एक दिन में आठ से दस गिलास पानी पीने के साथ जूस, नारियल पानी आदि का भी भरपूर सेवन करें। क्योंकि शरीर में तरल पदार्थों की भरपूर मात्रा होने से भी गर्भवती महिला को इस परेशानी से निजात मिलता है।

तनाव से दूर रहें

यदि प्रेग्नेंट महिला खुश रहती है किसी भी बात को लेकर मानसिक रूप से परेशानी महसूस नहीं करती है तनाव नहीं लेती तो ऐसा करने से भी गर्भवती महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

भरपूर नींद

गर्भवती महिला के स्वस्थ रहने के लिए गर्भवती महिला को भरपूर नींद लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला यदि अपनी नींद भरपूर लेती है। तो ऐसा करने से भी काले घेरे की समस्या दूर होती है।

प्रेगनेंसी में आँखों के नीचे काले घेरे की समस्या को दूर करने के घरेलू तरीके

  • सोने से पहले रुई की मदद से आँखों के चारों तरफ गुलाबजल लगाएं।
  • आँखों के चारों तरफ मलाई लगाएं।
  • आलू या खीरे की स्लाइसेस काटकर आँखों पर रखें।
  • पुदीने के पत्तों व् टमाटर का रस निकालकर अपनी आँखों के चारों तरफ लगाएं।
  • आँखों के चारों तरफ बादाम तेल लगाएं।
  • हल्दी चन्दन, गुलाबजल का फेस पैक लगाएं।
  • ग्रीन टी बैग को पानी में भिगोकर फ्रीज़र में रखें और उसके बाद उसे अपनी आँखों पर रखें।
  • पपीते के टुकड़ों को पीसकर आँखों के चारों तरफ रखें।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से प्रेगनेंसी के दौरान आँखों के चारों तरफ होने वाले काले घेरे की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आपको भी यह दिक्कत हो रही है तो आप भी इन टिप्स का ध्यान रखें ताकि आपको भी प्रेगनेंसी के दौरान अपनी ख़ूबसूरती को बरकरार रखने में मदद मिल सके।

Tips to remove dark circle during Pregnancy

लॉक डाउन से गर्भवती महिला को क्या फायदे हुए हैं और क्या नुकसान हुए हैं?

कोरोना वायरस का डर आजकल हर जगह देखने को मिल रहा है। क्योंकि यह एक ऐसा वायरस है जो की सम्पर्क में आने से बहुत तेजी से फ़ैल रहा है। और इस वायरस का खतरा सबसे ज्यादा बुर्जुग, बच्चों, किसी बिमारी से जूझ रहे लोगो को, गर्भवती महिला को सबसे अधिक है। क्योंकि इन सभी का इम्युनिटी लेवल बहुत कमजोर होता है। और इम्युनिटी कमजोर होने के कारण वायरस के कारण संक्रमण बहुत जल्दी होता है। लेकिन लॉक डाउन के दौरान गर्भवती महिला को इसके बहुत से फायदे भी हुए हैं और फायदों के साथ कुछ नुकसान भी हुए हैं। तो आइये इस आर्टिकल में हम आपको इस बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

लॉक डाउन के फायदे गर्भवती महिला के लिए

प्रेग्नेंट महिला को लॉक डाउन से एक नहीं बल्कि बहुत से फायदे हुए हैं यदि आप भी माँ बनने वाली हैं, तो आपको भी इस बारे में पता होना चाहिए, तो आइये अब जानते हैं की वो फायदे कौन से हैं।

प्रदूषण का नहीं है खतरा

लॉक डाउन के चलते वाहन, फैक्टरियां, कंस्ट्रक्शन आदि सभी का काम बंद हो गया है। जिससे पर्यावरण में बहुत सुधार आया है क्योंकि प्रदूषण कम हो गया है। और गर्भवती महिला को इससे बहुत फायदा मिला है क्योंकि प्रदूषण के कारण गर्भवती महिला व् शिशु दोनों को खतरा होता है, लेकिन अब जब प्रदूषण में कमी आई है तो माँ और बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल रही है।

जंक फ़ूड से मिला छुटकारा

प्रेग्नेंट महिला को जंक फ़ूड की मनाही होती है लेकिन फिर भी कई बार मुँह के स्वाद को बढ़ाने के लिए महिला जंक फ़ूड का सेवन कर लेती है। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को जंक फ़ूड के कारण होने वाली परेशानी से भी निजात मिल रहा है क्योंकि अब बाहर न तो किसी तरह की जंक फ़ूड की शॉप खुली हैं और न ही डर के कारण महिला का इसे खाने का मन कर रहा है। और यदि महिला तेलीय, मसालेदार, जंक फ़ूड का सेवन नहीं कर रही है तो इससे महिला व् बच्चे को फायदा ही रहा है।

आना जाना हुआ कम

गर्भवती महिला यदि ट्रैवेलिंग करती है, घर के काम के लिए बाहर जाती है, किसी की शादी या फैमिली में गेस्ट के आने पर बिज़ी रहती है, आदि तो इन सभी कामों से गर्भवती महिला को परेशानी हो सकती है लेकिन लॉक डाउन के चलते अब प्रेग्नेंट महिला को इन सब से निजात मिल गया है। क्योंकि इस समय न तो प्रेग्नेंट महिला कहीं बाहर जा सकती है और न ही कोई उनके घर में आ सकता है।

साफ़ सफाई का रखा जा रहा है ध्यान

प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए साफ़ सफाई का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है लेकिन फिर भी कई बार महिला लापरवाही कर जाती है। ऐसे में कोरोना वायरस के चलते महिला बिल्कुल भी लापरवाही नहीं कर रही है और पहले से भी ज्यादा साफ़ सफाई का ध्यान रख रही है जिससे कोरोना वायरस के साथ महिला को हर तरह के संक्रमण से बचे रहने में मदद मिल रही है।

परिवार का मिल रहा है साथ

प्रेगनेंसी के दौरान परिवार का साथ बहुत जरुरी होता है। लेकिन चाहते हुए भी कई बार घर के सदस्य उतना समय नहीं दे पाते हैं। ऐसे में लॉक डाउन के चलते घर के सभी सदस्य घर में ही है और प्रेग्नेंट महिला परिवार के साथ अच्छा समय बिता रही है जिससे प्रेग्नेंट महिला खुश भी होगी, जिससे बच्चे को भी खुश रहने में मदद मिलती है। साथ ही घर में प्रेग्नेंट महिला की केयर भी अच्छे से हो रही है।

लॉक डाउन के कारण प्रेग्नेंट महिला को होने वाले नुकसान

यदि लॉक डाउन के चलते गर्भवती महिला को फायदे हुए हैं तो इसके कारण गर्भवती महिला को बहुत से नुकसान भी हो रहे हैं। तो आइये अब जानते हैं की लोक डाउन के कारण गर्भवती महिला को कौन से नुकसान हो रहे हैं।

डॉक्टर से मिलने में हो रही है मुश्किल

लॉक डाउन के चलते गर्भवती महिला का हॉस्पिटल में जाना मुश्किल हो गया है और महिला डॉक्टर से नहीं मिल पा रही है, और कुछ महिलाएं जिनको दिक्कत है वो भी डॉक्टर से नहीं मिल पा रही हैं। जिसके कारण डॉक्टर से मिलने में महिला को परेशानी हो रही है।

जिन महिलाओं की डिलीवरी होने वाली है उन्हें हो रही है दिक्कत

यदि कोई गर्भवती महिला है जिसकी डिलीवरी की डेट आने वाली है, तो उन महिलाओं को भी इस दौरान परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि हॉस्पिटल में जाने के लिए घर से बाहर निकलने पर दिक्कत हो रही है ऐसे में महिला को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही महिला की जहां डिलीवरी होनी थी जिस डॉक्टर के पास महिला का इलाज चल रहा था वहां महिला की डिलीवरी नहीं हो रही है।

डर का माहौल है

इस दौरान हर छोटी सी छोटी बात को लेकर प्रेग्नेंट महिला को डर लग रहा है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला को कोई भी दिक्कत होती है तो उसका असर बच्चे पर भी पड़ता है। ऐसे में यदि महिला को गलती से खांसी भी आ रही है महिला बहुत ज्यादा परेशानी, तनाव का सामना कर रही है।

चीजों के इस्तेमाल से लग रहा है डर

खाने की चीजें, सब्जियां, राशन आदि सभी चीजें घर के बाहर से आ रहा है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को किसी भी चीज का इस्तेमाल करने से पहले डर लग रहा है। की कहीं किसी चीज को छूने के कारण महिला को इन्फेक्शन न हो जाये।

एक्सरसाइज करने में हो रही है दिक्कत

लॉक डाउन के चलते गर्भवती महिला न तो पार्क में सैर करने जा सकती है, सीढ़ियां अधिक चढ़ने के कारण महिला को दिक्कत हो सकती है इसीलिए महिला छत पर चढ़कर भी व्यायाम नहीं कर सकती है और गर्मी का मौसम भी चल रहा है, ऐसे में महिला को घर में वजन बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है क्योंकि किसी भी तरह का व्यायाम महिला नहीं कर पा रही है।

खाने पीने के कारण हो रही है परेशानी

घर में जब सब इक्कठे बैठते हैं तो कुछ न कुछ अलग बनता रहता है, स्वादिष्ट, चटपटा, मसालेदार आदि, ऐसे में प्रेग्नेंट महिला भी घर में है तो उन चीजों का सेवन कर सकती है। जिसके कारण गर्भवती महिला को पाचन से जुडी परेशानियों का सामना अधिक करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ फायदे और नुकसान जो गर्भवती महिला को लॉक डाउन में गर्भवती महिला को हो रहे हैं, तो यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप एक बात का ध्यान रखें की घर में रहें, सुरक्षित रहें, सेहत के प्रति कोई लापरवाही न बरतें, ताकि आपको और आपके बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में इन चीजों को खाकर दूध नहीं पीएं

गर्भावस्था महिला के लिए बहुत ही बेहतरीन अहसास और खास अनुभव होता है। लेकिन यह महिला के लिए वो समय भी होता है जहां महिला को छोटी छोटी बातों का अच्छे से ध्यान रखना पड़ता है। ताकि प्रेग्नेंट महिला और उसके पेट में पल रहे बच्चे को किसी भी तरह की परेशानी न हो। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसी ही जानकारी देने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला के लिए बहुत ही लाभदायक हो सकती है। और वह है प्रेगनेंसी के दौरान किन चीजों का सेवन दूध के साथ नहीं करना चाहिए। या कौन सी चीजें हैं जिन्हे खाकर दूध नहीं पीना चाहिए।

गर्भावस्था में दूध के साथ न खाएं दही

  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला को दूध के साथ दही का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि दूध के साथ दही का सेवन करने से पाचन शक्ति पर बुरा असर पड़ सकता है।
  • क्योंकि दूध व् दही के गुण एक दूसरे से विपरीत होते हैं।
  • जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को एसिडिटी, गैस, उल्टी, पेट में दर्द जैसी समस्या हो सकती है।

दूध के साथ फल

  • जितना हो सके प्रेग्नेंट महिला को दूध के साथ, पहले या बाद में फलों का सेवन करने से बचना चाहिए।
  • खासकर जो फल खट्टे होते हैं जैसे की संतरा, मौसमी, कीवी, आदि।
  • क्योंकि इसके कारण एसिडिटी, पेट में गैस, उल्टी जैसी परेशानियां गर्भवती महिला को अधिक हो सकती है।
  • दूध और फलों के सेवन के बीच में कम से कम आधे से एक घंटे का फ़र्क़ जरूर रखना चाहिए।

गर्भावस्था में दूध के साथ न खाएं मछली

  • दूध और मछली का सेवन भी एक साथ गर्भवती महिला को नहीं करना चाहिए।
  • दूध की तासीर ठंडी होती है और मछली की तासीर गर्म होती होती जिससे यह गर्भवती महिला के सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है।
  • और प्रेग्नेंट महिला को दूध और मछली का सेवन एक साथ करने से पेट में गैस, स्किन पर एलर्जी, त्वचा सम्बंधित रोग जैसे की स्किन पर सफ़ेद दाग पड़ना जैसी दिक्कत होने का खतरा बढ़ जाता है।

दूध के बाद प्याज

  • प्रेग्नेंट महिला को दूध के बाद प्याज़ का सेवन करने से भी बचना चाहिए।
  • क्योंकि इसके कारण प्रेग्नेंट महिला को खुजली, स्किन पर एलर्जी जैसी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

दूध के साथ मसालेदार भोजन

  • दूध के साथ नमकीन चीजों, मसालेदार भोजन, हरी मिर्च आदि का सेवन करने से भी बचना चाहिए।
  • क्योंकि ऐसा करने से पाचन क्रिया पर प्रभाव पड़ सकता है।
  • जिसके कारण खाने को पचाने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
  • और प्रेग्नेंट महिला को अपच, सीने में जलन, पेट में गैस, खट्टी डकार जैसी परेशानियां हो सकती है।

गर्भावस्था में दूध के साथ न खाएं उड़द की दाल

  • प्रेग्नेंट महिला को उड़द की दाल के साथ भी दूध का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • क्योंकि दूध और उड़द की दाल आपस में मिलने के बाद आपको नुकसान पहुंचा सकती है।
  • जिसके कारण प्रेग्नेंट महिला को पेट में दर्द, गैस, खट्टी डकार जैसी परेशानी हो सकती है।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान दूध के साथ किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला व् उसके पेट में पल रही नन्ही जान को किसी भी तरह की सेहत सम्बन्धी परेशानी न हो। साथ ही आप चाहे तो दूध को किसी चीज के साथ भी न पीएं क्योंकि दूध अपने आप में ही सम्पूर्ण आहार होता है जो प्रेग्नेंट महिला व् शिशु दोनों के लिए फायदेमंद होता है।

बालों में रुसी (Dandruff) की समस्या से ऐसे बचें

रुसी (Dandruff) की समस्या से कैसे बचें?

बालों में रुसी (Dandruff) की समस्या से ऐसे बचें, How to Get Rid of Dandruff, Tips to prevent dandruff, Dandruff Problem, रुसी की प्रॉब्लम से कैसे बचें

महिलाएं हो या पुरुष सभी के लिए बालों की खूबसूरती बेहद महत्वपूर्ण होती है इसीलिए तो सब इसकी देखभाल का हर संभव प्रयास करते है। जहा एक तरफ महिलाएं स्पा आदि लेकर अपने बालों को पोषण प्रदान करती है वहीं पुरुष भी तेल मालिश और मेहंदी (हिना) आदि की मदद से अपने बालों की देखभाल करते है। लेकिन कई बार इतना सब कुछ करने के बाद भी बालों में कोई न कोई समस्या हो ही जाती है।

फिर वो बाल टूटने की समस्या हो या डैंड्रफ की। बाल टूटने की समस्या तो अक्सर शैम्पू बदलने या देखभाल नहीं करने के कारण होती है। परन्तु डैंड्रफ एक ऐसी समस्या है जो बालों में गंदगी रहने और उनकी सही देखरेख नहीं करने के कारण होती है। और कई बार बालों के झड़ने का कारण भी ये डैंड्रफ ही होता है।रुसी की प्रॉब्लम से कैसे बचें

डैंड्रफ न केवल आपकी पर्सनालिटी को खराब करता है अपितु कई बार इसकी वजह से आपको शर्मिंदा भी होना पड़ता है। गर्मियों की तुलना में सर्दियों के मौसम में ये समस्या सबसे अधिक देखने को मिलती है। जिसका कारण गर्म पानी से सिर धोने को मानते है जबकि वास्तव में इसके पीछे की वजह तो कुछ और ही होती है।

जी हां, ठंड के दिनों में हमारे सिर और शरीर की त्वचा रूखी हो जाती है जिसके कारण वह पपड़ी बनकर उतरने लगती है और उसी पपड़ी को डैंड्रफ कहा जाता है। स्किन को तो आप मॉइस्चराइज़र आदि लगाकर ठीक कर लेते है लेकिन स्कैल्प में केवल हेयर आयल ही लगाया जा सकता है। जो की बालों के लिए सबसे उपयुक्त पोषण होता है। परन्तु ये भी सत्य है की सिर्फ पोषण से बात नहीं बनेगी इसके लिए आपको कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना होगा। जिससे भविष्य में ये समस्या दोबारा न होने पाए। और अगर हो जाए तो इनकी मदद से आप उसे बढ़ने से रोक सके। यहाँ हम आपको उन्ही महत्वपूर्ण बातों के बारे में बताने जा रहे है तो आइये जानते है उनके bare में –

बालों में हो रही रुसी की समस्या से ऐसे बचें :-

1. पूर्ण देखभाल :

अक्सर किसी कार्य में बिज़ी होने या ध्यान नहीं रखने के कारण हमारे बालों की देखभाल ठीक तरह से नहीं हो पाती। जिसका सीधा प्रभाव बालों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। और रुसी होना एक तरह से बीमारी ही है जो बालों की सेहत को काफी नुकसान पहुंचाती है। अगर आप चाहते है की आपके बालों में डैंड्रफ की समस्या दोबारा उत्पन्न नहीं हो तो उसके लिए अपने बालों की पूर्ण देखभाल करना प्रारंभ कर दें। उनमे तेल मालिश और मसाज करते रहे।

2. हॉर्मोन्स में असंतुलन :

कई बार शरीर में कोई बिमारी या असंतुलन के कारण भी बालों में रुसी की समस्या होने लगती है। जिसका विशेष कारण स्कैल्प में Oil Glands का बंद हो जाना होता है। अगर आपको लगता है की आपके सिर के डैंड्रफ का कारण कोई बीमारी है तो तुरंत उसका इलाज करवाएं। साथ ही अपने बालों में लगातार तेल मालिश करते रहे जिससे स्कैल्प की आयल पूर्ति हो सके और स्किन ड्राई न हो।

3. मौसम का रखें ध्यान :rusi

मौसम में बदलने के कारण भी कई बार डैंड्रफ की समस्या हो जाती है। जो अक्सर सर्दियों और बरसात के मौसम में हो जाती है। बरसात के मौसम में बरसात के पानी और सर्दियों के मौसम में स्किन के ड्राई होने की वजह से डैंड्रफ की समस्या होने लगती है। ऐसे में आपको चाहिए की बदलते हुए मौसम में अपने बालों की सही देखरेख करना शुरू कर दें। उनमे रेगुलर ऑइलिंग और शैम्पू का ध्यान रहे। उन्हें ज्यादा देर तक खुला न रखे और किसी स्टाइलिंग उत्पाद का प्रयोग करने से पूर्व हेयर प्रोटेक्शन स्प्रे अवश्य लगा लें।

4. साफ़ सफाई का ध्यान रखें :

बालों की खूबसूरती को बनाए रखने के लिए उसकी साफ़ सफाई का ध्यान रखना भी बेहद जरुरी होता है। क्योंकि साफ़ सुथरे बाल ही सुन्दर और आकर्षक लगते है। वैसे भी डैंड्रफ की समस्या का एक कारण बालों में डैंड्रफ होना भी होता है। बालों की सफाई न रखने के कारण उनमे फंगल इन्फेक्शन होने लगता है जो रुसी को बढ़ावा देता है। इसलिए अपने बालों की साफ़ सफाई का पूर्ण ध्यान दें। सप्ताह में कम से कम 3 बार बाल धोएं। लम्बे बालों में आप 2 बार बाल धो सकते है। और साथ ही रोजाना अपने बालों में कंघी भी करें।

5. एलर्जी से रहे दूर :

कई बार किसी घटिया क्वालिटी के प्रोडक्ट का यूज करने या एक्सपायर डेट के प्रोडक्ट का यूज करने की वजह से बालों में एलर्जी होने लगती है। जिससे बालों में डैंड्रफ होने लगता है। अगर आप चाहती है की आपके बालों में ये न हो तो जरुरी है की किसी भी हेयर प्रोडक्ट को यूज करने से पूर्व उसकी एक्सपायर डेट और क्वालिटी जरूर चेक कर लें। कीमत की बजाय उसके प्रभाव को देखें। क्योंकि कई बार महंगे प्रोडक्ट्स भी बाल टूटने और एलर्जी का एक कारण बन जाते है।

6. पोषण :

कई बार बालों की ठीक तरह से पोषण नहीं मिलने की वजह से भी रुसी की शिकायत होने लगती है। अर्थात अगर आप सही डाइट नहीं लेते है या अपने बालों में सही आयल का इस्तेमाल नहीं करते है तो भी बालों में रुसी होने लगती है। बालों में मसाज नहीं करने की वजह से भी डैंड्रफ हो सकता है। ऐसे में जरुरी है की आप अपने बालों को सही पोषण प्रदान करें। अपने खान पान को सुधारे और बालों में नियमित ऑइलिंग करें। इसके साथ ही बालों में मसाज आदि भी करें। इससे डैंड्रफ की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी

7. नशीले पदार्थों से बचें :

नशीले पदार्थ जैसे शराब, सिगरेट, पान, गुटका आदि न केवल आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते है अपितु आपके बालों को भी काफी नुकसान पहुंचाते है। शराब का सेवन करने वाली महिलाओं के बालों में इस समस्या का होना आम है। इसलिए अगर आप चाहते है की आपके बालों में ये समस्या न हो तो तुरंत इन सभी चीजों का सेवन बंद कर दें। इससे आपके बालो को तो फायदा होगा ही साथ साथ आपके स्वास्थ्य को भी विशेष लाभ मिलेगा।

8. हेयर कलर :

बालों में होने वाली अधिकतर समस्याओं की मुख्य जड़ हेयर कलर ही होते है क्योंकि इनमे बहुत से केमिकल पाए जाते है जो बालों की स्कैल्प को काफी नुकसान पहुंचाते है। और फलस्वरूप आपके बालों में खुजली, रुसी और बाल टूटने की समस्या होने लगती है। अगर आप इस समस्या से बचना चाहते है तो अभी से इनका इस्तेमाल बंद कर दें। इनके स्थान पर आप हिना या नेचुरल कलर्स का भी इस्तेमाल कर सकते है।

9. बैक्टीरियल संक्रमण :

बालों में किसी तरह का फंगल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन होना, बार बार खुजली होना, अधिक तनाव, चाय कॉफ़ी का अधिक सेवन, बालों में केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स का प्रयोग करना, ड्रायर का इस्तेमाल, गीले बालों को बांधना, हेयर स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स का यूज करने से बालों में ये समस्या हो ही जाती है। ऐसे में आपको इन सभी बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बालों को हमेशा सूखा कर बांधना चाहिए, केमिकल युक्त प्रोडक्ट का यूज नहीं करना चाहिए और साथ ही हेयर स्टाइलिंग और हीट उपकरणों का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए।

तो ये थी कुछ टिप्स जिनकी मदद से आप अपने बालों को डैंड्रफ की समस्या से बचा सकते है। लेकिन ध्यान रहे ये सभी उपाय केवल महिलाओं के लिए ही नहीं अपितु पुरुषों के लिए भी जरुरी है। क्योंकि डैंड्रफ महिला या पुरुष नहीं देखता वो किसी के भी बालों में हो सकता है।