Home Blog Page 24

अगर प्रेग्नेंट महिला के शरीर में यह बदलाव नहीं हो रहे हैं तो समझिए की गर्भ में शिशु स्वस्थ नहीं है?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में बहुत से बदलाव होते हैं, बहुत से लक्षण महसूस होते हैं और ऐसा होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है। साथ ही गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य के बारे में बताने में भी मदद करते हैं।

जैसे की यदि महिला का पेट का आकार बढ़ रहा है तो इसका मतलब होता है की गर्भ में शिशु का विकास सही हो रहा है, शिशु अच्छे से हलचल कर रहा है तो शिशु स्वस्थ है, आदि। आज इस आर्टिकल में हम आपको उन बदलाव के बारे में बताने जा रहे हैं जो यदि प्रेग्नेंट महिला के शरीर में नहीं होते हैं तो इसका मतलब यह होता है की गर्भ में शिशु स्वस्थ नहीं है।

गर्भवती महिला के पेट का आकार नहीं बढ़ना

गर्भावस्था के दौरान जैसे जैसे समय आगे बढ़ता है वैसे वैसे गर्भ में शिशु का विकास भी बढ़ता है। और गर्भ में शिशु का शारीरिक विकास बढ़ने के साथ गर्भाशय का आकार भी बढ़ता है और महिला का पेट बाहर की और निकलने लगता है।

महिला के पेट का बाहर की और निकलना इस बात की और इशारा करता है की गर्भ में शिशु का विकास सही तरीके से हो रहा है। ऐसे में यदि प्रेग्नेंट महिला का पेट बाहर की और नहीं निकलता है तो इसका मतलब यह होता है की गर्भ में शिशु का विकास सही तरीके से नहीं हो रहा है।

शिशु की हलचल में कमी

गर्भ में शिशु के बढ़ते विकास के साथ महिला को गर्भ में पल रहे शिशु की हलचल महसूस होती है यानी जब भी गर्भ में शिशु घूमता है या हाथ पैर चलाता है तो महिला उसे महसूस कर सकती है।

ऐसे में यदि महिला को यदि शिशु की हलचल बढ़ते समय के साथ भी पूरी तरह से महसूस नहीं होती है यानी की कम महसूस होती है तो यह लक्षण इस बात की और इशारा करता है की गर्भ में शिशु का विकास अच्छे से नहीं हो रहा है।

वजन में कमी

प्रेगनेंसी के दौरान महिला का पंद्रह से सोलह किलों तक वजन बढ़ जाता है और यह वजन बढ़ना सही होता है क्योंकि यह स्वस्थ प्रेगनेंसी की और इशारा करता है क्योंकि इसका मतलब होता है की गर्भ में शिशु का विकास भी सही से हो रहा है।

लेकिन यदि महिला का वजन कम बढ़ता है तो इसका मतलब होता है की गर्भ में शिशु का विकास सही नहीं हो रहा है और आपको अपना और ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है।

यूरिन पास करने की इच्छा में कमी

जैसे जैसे बच्चे का वजन बढ़ता है वैसे वैसे महिला की यूरिन पास करने की इच्छा में बढ़ोतरी होती है क्योंकि बच्चे का वजन बढ़ने के साथ पेट के निचले हिस्से पर दबाव बढ़ जाता है।

लेकिन यदि महिला को प्रेगनेंसी का समय आगे बढ़ने के साथ ऐसा कोई लक्षण महसूस नहीं होता है तो इसका मतलब भी यह होता है की गर्भ में शिशु का विकास सही से नहीं हो रहा है यानी की शिशु के वजन में कमी है।

ब्रेस्ट में बदलाव

प्रेगनेंसी के दौरान महिला की ब्रेस्ट में भी बदलाव आता है और यह बदलाव महिला का वजन बढ़ने के कारण, ब्रेस्ट में दूध बनने की प्रक्रिया होने के कारण आता है। और यह बदलाव स्वस्थ प्रेग्नेंसी का लक्षण भी होता है लेकिन यदि महिला को ब्रेस्ट में कोई बदलाव नज़र नहीं आता है तो यह भी प्रेगनेंसी में दिक्कत या शिशु का सही विकास न होने की और इशारा करता है।

डिलीवरी से पहले शिशु का सही पोजीशन में नहीं आना

डिलीवरी का समय पास आने पर गर्भ में पल रहा शिशु अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में आने लगता है। यानी की शिशु का सिर नीचे की तरफ और पैर ऊपर की तरफ हो जाते हैं। लेकिन यदि शिशु अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में नहीं आ पाते हैं तो इसका एक कारण यह भी होता है की शिशु का विकास गर्भ में सही तरीके से नहीं हुआ है।

तो यह हैं कुछ बदलाव जो गर्भवती महिला के शरीर में महसूस नहीं होते हैं तो यह इस बात की और इशारा करते हैं की गर्भ में शिशु का विकास सही तरीके से नहीं हो रहा है। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको इन बातों का पता होना चाहिए ताकि यदि आपको कोई ऐसा लक्षण महसूस हो तो समय रहते आप उसका समाधान कर सकें जिससे आपको प्रेगनेंसी में आ रही परेशानियों को दूर करने में मदद मिल सके।

नोर्मल डिलीवरी के बाद पीरियड्स में क्या बदलाव आते हैं

प्रेगनेंसी के दौरान पूरे नौ महीने तक पीरियड्स नहीं आते हैं। फिर डिलीवरी के बाद एक दम से पीरियड्स आते हैं और दो से तीन हफ्ते तक पीरियड्स रहते हैं। लेकिन उसके बाद महिला को कई बारे च महीने तक पीरियड्स नहीं आते हैं। ऐसे में डिलीवरी के बाद आने वाले पीरियड्स को लेकर महिला के मन में कई सवाल होते हैं।

जैसे की पीरियड्स कब आएंगे, पीरियड्स के दौरान कोई दिक्कत नहीं नहीं होगी, पीरियड्स अनियमित तो नहीं हो जायेंगे, दर्द तो नहीं होगा, आदि। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको नोर्मल डिलीवरी के बाद पीरियड्स में क्या बदलाव आ सकते हैं।

जब तक स्तनपान करवाती है तब तक नहीं आ सकते पीरियड्स

कुछ केस में होता है की जो महिलाएं स्तनपान नहीं करवाती है तो उन्हें डेढ़ या दो महीने के बाद ही पीरियड्स आना शुरू हो जाते हैं। लेकिन यदि आप अपने बच्चे को स्तनपान करवा रही हैं तो आपको हो सकता ही की जब तक आप अपने बच्चे को स्तनपान करवाएं तब तक पीरियड्स नहीं आएं। या फिर जब आपका बच्चा ब्रेस्टफीड कम कर दे तो उसके बाद आपको पीरियड्स आना शुरू हो जाएँ।

कम या ज्यादा हो सकते हैं पीरियड्स

हो सकता है की आपको पहले या पांच दिन पीरियड्स आते थे तो अब चार या फिर छह दिन आना शुरू हो जाएँ। ऐसा होना काफी आम बात है लेकिन यदि आपको पीरियड्स में ब्लीडिंग बहुत ज्यादा होने लग जाये तो इसे अनदेखा नहीं करें क्योंकि यह आपके स्वास्थ्य के लिए सही नहीं होता है इससे आपके शरीर में कमजोरी आ सकती है।

मासिक चक्र पर पड़ता है फ़र्क़

डिलीवरी के बाद जब पीरियड्स आते हैं तो शुरुआत में थोड़े समय के लिए आपके मासिक चक्र पर भी असर पड़ सकता है जैसे की यदि आपको पीरियड्स पहले ठीक एक महीने पहले आ जाते थे। तो डिलीवरी के बाद हो सकता है की थोड़ा आगे पीछे हो जाएँ या हो सकता है शुरुआत में एक दो बार मिस भी हो जाये और दो महीने में एक बार ही पीरियड्स आये। फिर धीरे धीरे सब सामान्य हो जाता है। और आपको पीरियड्स समय पर आने लग जाते हैं।

पेन हो सकता है

कई महिलाओं को पीरियड्स के दौरान पेन नहीं होता है लेकिन हो सकता डिलीवरी के बाद जब आपको पीरियड्स आये तो आपको इस परेशानी का सामना करना पड़े। लेकिन इसमें घबराने की बात नहीं है पीरियड्स के दौरान पेन होना आम बात है। परन्तु यदि दर्द असहनीय हो तो एक बार डॉक्टर से जरूर मिले।

खून के थक्के आ सकते हैं

डिलीवरी के बाद जब आपको पहली बार पीरियड्स आते हैं तो हो सकता है उसमे आपको खून के थक्के आएं। ऐसा होना काफी आम बात होती है लेकिन धीरे धीरे यह सब ठीक हो जाता है। इसे देखकर महिलाओं को बिल्कुल भी घबराना नहीं चाहिए।

तो यह हैं कुछ बदलाव जो महिला को पीरियड्स में महसूस हो सकते हैं। लेकिन यदि आपको पीरियड्स आने पर यदि ज्यादा ब्लीडिंग, ज्यादा पेन आदि की समस्या हो तो आपको इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए और डॉक्टर से मिलना चाहिए। ताकि यदि आपको कोई दिक्कत हो तो उसका सही समय से इलाज़ हो सकें।

Changes in periods after normal delivery

गर्भ में शिशु जन्म लेने की पोजीशन में कब आता है? और इस समय क्या सावधानी बरतें

गर्भ में शिशु का विकास जैसे जैसे बढ़ता है वैसे वैसे शिशु मूव करना शुरू कर देता है। और शिशु का हलचल करना गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी का सबसे अनमोल पल होता है। उसके बाद शिशु का विकास और तेजी से होने लगता है और फिर वो पल आता है जब गर्भ में शिशु अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में आ जाता है। और उसके बाद आपका नन्हा मेहमान आपकी बाहों में भी आ जाता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भ में शिशु जन्म लेने की सही पोजीशन में कब आता है और इस दौरान महिला को क्या- क्या सावधानी बरतनी चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

माँ के गर्भ में शिशु जन्म लेने की सही पोजीशन में कब आता है?

हर एक महिला की गर्भावस्था अलग होती है, हर एक महिला के गर्भ में पल रहे शिशु का विकास अलग होता है, हर एक गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान परेशानियां अलग होती हैं, वैसे ही गर्भ में पल रहे शिशु के जन्म लेने की पोजीशन का समय भी अलग अलग ही होता है। जैसे की गर्भ में कुछ शिशु आठवें महीने के आखिर में जन्म लेने की सही पोजीशन में आने लगते हैं।

तो कुछ शिशु प्रेगनेंसी के नौवें महीने की शुरुआत में जन्म लेने की सही पोजीशन में आते हैं साथ ही कुछ शिशु डिलीवरी के समय से थोड़ी देर पहले ही जन्म लेने की सही पोजीशन में आ सकते हैं। यहां तक की ऐसा बिल्कुल भी जरुरी नहीं है की सभी बच्चे जन्म लेने की पोजीशन में आये क्योंकि कुछ बच्चे या तो पेट में उल्टे हो जाते हैं तो कुछ का सिर नीचे की तरफ नहीं आता बल्कि ऊपर की तरफ ही रहता है।

ऐसे में हर एक महिला के पेट में बच्चे के जन्म लेने की सही पोजीशन में आने का समय एक नहीं होता है। साथ ही कई बार जब बच्चे जन्म लेने की सही पोजीशन में नहीं आते हैं तो डॉक्टर्स भी अपने तरीके लगाते हैं जिससे बच्चे सही पोजीशन में आ जाते हैं। ऐसे में बच्चे के जन्म लेने की सही पोजीशन में आना पूरी तरह से महिला की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है।

गर्भ में शिशु के जन्म लेने की सही पोजीशन में आने पर बरतें यह सावधानियां

माँ के गर्भ में जब शिशु जन्म लेने की सही पोजीशन में आ जाता है तो महिला को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि माँ व् बच्चे दोनों को किसी भी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े।

पेट पर दबाव नहीं पड़ने दें

महिला को अपने पेट पर दबाव नहीं पड़ने देना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से गर्भ में शिशु को दिक्कत महसूस हो सकती है। साथ ही महिला को भी पेट दर्द, पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

महिला को सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए

जब महिला के गर्भ में पल रहा शिशु जन्म लेने की पोजीशन में आ जाता है तो उसके बाद महिला को सम्बन्ध बनाने की गलती भी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इसकी वजह से पेट पर दबाव पड़ने के साथ गर्भाशय को चोट लगने का खतरा भी हो सकता है।

यूरिन रोककर नहीं रखना चाहिए

बच्चे के जन्म लेने की सही पोजीशन में आने पर पेट के निचले हिस्से पर दबाव अधिक बढ़ जाता है जिसकी वजह से महिला की यूरिन पास करने की इच्छा में बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला यूरिन को बिल्कुल भी कण्ट्रोल नहीं करें क्योंकि इसकी वजह से महिला को पेट दर्द, बीच में यूरिन निकलने की समस्या, इन्फेक्शन आदि होने का खतरा हो सकता है।

स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए

गर्भ में शिशु के जन्म लेने की सही पोजीशन में आने का मतलब होता है की अब शिशु का जन्म अब किसी भी वक्त हो सकता है ऐसे में महिला को बिल्कुल भी स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए बल्कि अपने आप को शांत रखना चाहिए। क्योंकि यदि महिला स्ट्रेस लेती है तो इससे महिला की परेशानियां बढ़ सकती है। साथ ही यदि महिला शांत रहती है तो इससे डिलीवरी को आसान बनाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं गर्भ में शिशु जन्म लेने की सही पोजीशन में कब आता है और शिशु के गर्भ में जन्म लेने की सही पोजीशन में आने पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उससे जुड़े टिप्स, यदि आप भी माँ बनने वाली हैं तो आपको भी यह जानकारी जरूर होनी चाहिए ताकि आपको अपने शरीर में हो रहे बदलाव को समझने में आसानी हो सके और आप अपना अच्छे से ध्यान रख सकें।

हेल्दी बेबी के लिए प्रेग्नेंट महिला रोजाना खाएं यह चीजें?

मां बनना हर महिला के लिए जीवन का सबसे सुखद और बहुत ही अनोखा एहसास होता है और महिला के साथ ही परिवार के अन्‍य लोगों को भी घर में आने वाले नन्हे मेहमान का बेसब्री से इंतज़ार होता है। इसलिए जैसे ही महिला को पता चलता है की वो गर्भवती है तो उसकी और परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहता है। साथ ही महिला प्रेगनेंसी की खबर सुनने के बाद से ही अपने आने वाले मेहमान की हेल्‍थ को बनाए रखने, उसके बेहतर विकास के लिए के लिए हर संभव कोशिश करना शुरू कर देती है।

ताकि आने वाला नन्हा मेहमान हष्ट पुष्ट और दुरुस्त हो, ऐसे में महिलाओं को खाने पीने की चीजों को लेकर थोड़ी परेशानी हो सकती है। क्योंकि उन्हें यह समझ नहीं आता है की महिला को प्रेगनेंसी के दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिला को खान पान से जुडी कुछ चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करने से गर्भ में पल रहे शिशु को हेल्दी रखने में मदद मिलती है।

सब्जियां व् फल

गर्भावस्था के दौरान महिला को उन सभी सब्जियों या फलों का सेवन करना चाहिए जो गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद करते हैं। साथ ही महिला को रोजाना एक फल का सेवन जरूर करना चाहिए और फलों का सेवन बदल बदल कर करना चाहिए। क्योंकि एक ही फल रोजाना खाने से महिला को केवल एक ही तरह के पोषक तत्व मिलते हैं जबकि अलग अलग फलों का सेवन करने से महिला को अलग अलग पोषक तत्व मिलते हैं साथ ही शरीर में सभी पोषक तत्वों की मात्रा सही रहती है। ऐसे ही महिला को रोजाना सब्जियों को अलग अलग खाना चाहिए।

दालें

दालें पोषक तत्वों की खान होती है ऐसे में गर्भ में शिशु के बेहतर विकास के लिए महिला को रोजाना एक दाल का सेवन जरूर करना चाहिए। जैसे की महिला यदि दिन में सब्ज़ी खाती है तो रात के समय महिला को दाल खानी चाहिए। वैसे भी रात के समय दाल खाने से खाने को जल्दी हज़म होने में मदद मिलती है। ऐसे में महिला को रोजाना अलग अलग दालों का सेवन करना चाहिए।

अंडा व् नॉन वेज

गर्भावस्था की पहली तिमाही के बाद महिला को अंडे का सेवन नॉन वेज का सेवन जरूर करना चाहिए। जैसे की महिला हफ्ते में एक या दो दिन नॉन वेज खा सकती है और रोजाना या एक दिन छोड़कर अंडे का सेवन कर सकती है। अंडा व् नॉन वेज पोषक तत्वों से भरपूर होता है। जैसे की इनमे कैल्शियम, आयरन, फोलेट, आयरन, ओमेगा फैटी एसिड, ाडी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद करते हैं। और आपका होने वाला शिशु हेल्दी होता है।

ड्राई फ्रूट्स

बादाम, अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स का सिमित मात्रा में महिला को रोजाना सेवन करना चाहिए। क्योंकि इनमे वो सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो शिशु के शरीर के बेहतर विकास के साथ शिशु के मस्तिष्क के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं।

केसर मिल्क

गर्भावस्था की पहली तिमाही के बाद महिला को केसर मिल्क का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि केसर और दूध दोनों मिलकर गर्भ में पल रहे शिशु को दुगुना फायदा पहुंचाते हैं जिससे शिशु का विकास अच्छे से होने के साथ शिशु को बिमारियों व् संक्रमण से बचे रहने में भी मदद मिलती है। साथ ही ऐसा भी माना जाता है की प्रेगनेंसी के दौरान केसर मिल्क पीने से आपका होने वाला बच्चा गोरा होता है। लेकिन ध्यान रखें की दूध में तीन से चार रेशे ही केसर के डालें क्योंकि इससे ज्यादा केसर का सेवन बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

आंवले का मुरब्बा

यदि आप आंवलें का मुरब्बा खा लेती है तो प्रेगनेंसी के दौरान आपको आंवले का मुरब्बा जरूर खाना चाहिए। क्योंकि आंवले का मुरब्बा विटामिन सी, आयरन, कैल्शियम, फाइबर जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है। जो प्रेग्नेंट महिला की सेहत के लिए फायदेमंद होने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करता है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास के लिए आंवलें का मुरब्बा जरूर खाना चाहिए।

डेयरी प्रोडक्ट्स

डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे की दूध, दही, घी, पनीर, आदि कैल्शियम, प्रोटीन, ओमेगा फैटी एसिड का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद करते हैं। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए ताकि गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।

शकरकंद

गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए गर्भवती महिला को शकरकंद भी जरूर खाना चाहिए। इसे खाने से गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है साथ ही शिशु एक्टिव व् तंदरुस्त रहता है।

तरल पदार्थ

पोषक तत्वों से भरपूर डाइट के साथ प्रेग्नेंट महिला को तरल पदार्थों का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि तरल पदार्थ भरपूर मात्रा में लेने से प्रेग्नेंट महिला दुरुस्त रहती है साथ ही गर्भाशय में एमनियोटिक फ्लूड की मात्रा सही रहती है। जिससे गर्भ में शिशु के विकास में कोई कमी नहीं आती है। ऐसे में तरल पदार्थों के लिए प्रेग्नेंट महिला को पानी के साथ फलों का रस, निम्बू पानी, नारियल पानी आदि का सेवन भी जरूर करना चाहिए।

गर्भ में पल रहे शिशु को हेल्दी रखने के अन्य टिप्स

  • महिला पानी का भरपूर सेवन करें।
  • अपने आहार को सही समय से ले।
  • उन चीजों का सेवन नहीं करें जिसमे पोषक तत्वों की कमी हो साथ ही जिनका सेवन करने से महिला को कोई दिक्कत हो।
  • गर्भ में पल रहे शिशु से बातें करें।
  • ऐसी जगह पर जाने से बचे जहां पर ज्यादा भीड़भाड़ या शोर हो।
  • सही समय से अपना टीकाकरण व् जांच करवाएं।
  • खान पान के साथ भरपूर नींद लें।
  • अपने आप को खुश और एक्टिव रखें।
  • कोई भी दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे फॉलो करने से प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु को बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास को बढ़ाने और परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। यदि आप भी माँ बनने वाली है तो अपने शिशु की बेहतरीन ग्रोथ और शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत से बचाने के लिए इन टिप्स का ध्यान रखें।

Best foods to eat during pregnancy to get healthy baby

क्या प्रेगनेंसी में कटहल का सेवन करने से बचना चाहिए?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को सब्जियों का भरपूर सेवन करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि सब्जियों में पोषक तत्वों की मात्रा भरपूर होती है जो माँ और बच्चे दोनों को हेल्दी रखने में मदद करते हैं। लेकिन कुछ सब्जियों को लेकर गर्भवती महिला महिला के मन में आशंका हो सकती है की उनका सेवन प्रेगनेंसी के दौरान करें या नहीं? आज इस आर्टिकल में हम एक ऐसी ही सब्जी के बारे में बता करने जा रहे हैं। और वो सब्जी है कटहल, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में कटहल का सेवन करना माँ और बच्चे के लिए सेफ होता है या नहीं होता है।

गर्भवती महिला कटहल का सेवन करें या नहीं?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिलाओं को कटहल का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि ऐसा माना जाता है की कटहल का सेवन करने से महिला के गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता है या गर्भपात हो ही जाता है। जबकि यह बिल्कुल गलत है, कटहल में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला सिमित मात्रा में कटहल का सेवन करती है तो इससे माँ और बच्चे दोनों को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है बल्कि इससे गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी फायदे और बच्चे के बेहतर विकास में मदद मिलती है। तो आइये अब जानते हैं की सिमित मात्रा में कटहल का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला को कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

गर्भावस्था में कटहल खाने के फायदे

प्रेग्नेंट महिला यदि जरुरत अनुसार कटहल का सेवन करती है तो ऐसा करने से एक नहीं बल्कि बहुत से फायदे महिला को मिलते हैं। जैसे की:

हार्मोनल बैलेंस बना रहता है

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला के शरीर में हार्मोनल असंतुलन हो जाता है तो इसके कारण माँ और बच्चे दोनों को दिक्कत का अनुभव करना पड़ सकता है। लेकिन यदि महिला कटहल का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला के शरीर में हार्मोनल बैलेंस बना रहता है। जिससे माँ और बच्चे को दिक्कतों से बचे रहने में मदद मिलती है।

पाचन सम्बन्धी परेशानियां होती है दूर

प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर गर्भवती महिलाओं को पाचन सम्बन्धी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे की कब्ज़, खाना हज़म नहीं होना, एसिडिटी, आदि। लेकिन यदि महिला कटहल का सेवन करती है तो प्रेग्नेंट महिलाओं को इन परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि कटहल का सेवन करने से पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है।

संक्रमण से बचाव

कटहल में विटामिन सी की मात्रा मौजूद होती है जो की बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट होता है। और यह एंटी ऑक्सीडेंट गर्भवती महिला को संक्रमण से बचे रहने में मदद करता है। साथ ही विटामिन सी गर्भवती महिला की इम्युनिटी को मजबूत रखने में भी मदद करता है।

ब्लड प्रैशर रहता है कण्ट्रोल

कटहल में सोडियम की मात्रा कम होती है ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हाई ब्लड प्रैशर की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। जिससे माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ रहते हैं।

मूड स्विंग्स होते हैं नियंत्रित

गर्भावस्था के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को मूड स्विंग्स की समस्या भी हो सकती है। लेकिन यदि महिला कटहल का सेवन करती है तो इससे बॉडी में हार्मोनल बैलेंस रहता है जिसकी वजह से मूड स्विंग्स के कारण होने वाली परेशानी से गर्भवती महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

एनीमिया से बचाव

एनीमिया यानी खून की कमी की समस्या यदि गर्भवती महिला को होती है तो इससे माँ और बच्चे दोनों की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है। लेकिन कटहल के बीजों का सेवन करने से महिला की यह परेशानी दूर होती है क्योंकि कटहल के बीजों में आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है।

डिप्रेशन होता है दूर

गर्भावस्था के दौरान तनाव होना माँ और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक होता है। ऐसे में तनाव से दूर रहने के लिए महिला को व्यायाम, योगासन, मैडिटेशन आदि करने के साथ अपनी डाइट का भी खास ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। ऐसे में यदि महिला अपनी डाइट में कटहल का सेवन करती है तो महिला को इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

ऊर्जा मिलती है

थकान, कमजोरी जैसी दिक्कतों का होना प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है लेकिन यदि महिला कटहल का सेवन करती है तो इस से महिला के शरीर में ऊर्जा को भरपूर रखने में मदद मिलती है।

वजन रहता है नियंत्रित

कटहल का सेवन करने से महिला की पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है, शरीर में सोडियम की मात्रा सही रहती है, जिससे प्रेग्नेंट महिला के वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

बच्चे के लिए है फायदेमंद

कटहल का सेवन करने से गर्भवती महिला को सेहत सम्बन्धी फायदे मिलने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। क्योंकि कटहल में विटामिन ए, विटामिन सी, कैल्शियम, जिंक, आयरन, फोलेट, बीटा कैरोटीन आदि मौजूद होते हैं। और यह सभी पोषक तत्व गर्भ में शिशु के विकास को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलती है।

तो यह है कुछ बेहतरीन फायदे जो कटहल का सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को मिलते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को सिमित मात्रा में कटहल का सेवन जरूर करना चाहिए।

Jackfruit during Pregnancy

प्रेग्नेंट महिला को गर्मियों में क्या-क्या खाना पीना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान खान पान का अच्छे से ध्यान रखा जाए तो इससे प्रेगनेंसी में आने वाली आधी से ज्यादा परेशानियों को खत्म करने और माँ व् बच्चे को पूरी तरह से स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। क्योंकि खान पान यदि सही होता है तो इससे महिला के शरीर में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं, जिससे महिला और शिशु दोनों को पोषण मिलता है, एनर्जी मिलती है, आदि। ऐसे में हर गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान फिट और एक्टिव रहने के लिए खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

साथ ही मौसम के बदलाव के साथ मार्किट में आने वाली नई फल सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए ताकि आपके शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा को सही रहने में मदद मिल सके। क्योंकि हर मौसम में एक ही तरह की डाइट नहीं ली जाती है बल्कि मौसम के साथ जरुरी होता है की आप अपनी डाइट में भी बदलाव करें। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्मियों के मौसम में गर्भवती महिला को क्या-क्या खाना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

मौसमी फल

गर्मियों के मौसम में आने वाले ताजा फल जैसे की तरबूज, खरबूजा, आम, आदि का सेवन भी महिला को जरूर करना चाहिए। क्योंकि इन फलों में पानी की अधिकता होने के साथ आयरन, फोलिक एसिड व् अन्य मिनरल्स भी मौजूद होते हैं जो माँ व् बच्चे के लिए जरुरी होते हैं। लेकिन इनका सही मात्रा में ही सेवन करें क्योंकि जरुरत से ज्यादा कोई भी चीज शरीर को नुकसान पहुंचाती है।

सलाद

खीरा, ककड़ी भी गर्मियों में खूब मिलती है ऐसे में महिला को इसमें टमाटर, निम्बू आदि को मिलाकर इनका सलाद भी जरूर खाना चाहिए। क्योंकि इनमे पानी की अधिकता होने के साथ पोषक तत्व भी भरपूर होते हैं।

दही और छाछ

गर्मियों के मौसम में सुबह के नाश्ते या दोपहर के खाने में महिला को एक कटोरी दही या एक गिलास छाछ का सेवन भी जरूर करना चाहिए। क्योंकि गर्मियों के मौसम में इसे खाने से महिला को ठंडक महसूस होती है साथ ही दही व् छाछ पाचन क्रिया के लिए भी अच्छे होते हैं।

हल्का व् पोषक तत्वों से भरपूर आहार

गर्भवती महिला को गर्मियों में अपनी डाइट में हल्के और पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करना चाहिए। ताकि खाना आसानी से हज़म भी हो जाए और महिला को भरपूर पोषण भी मिलें। और इसके लिए महिला गर्मियों में दालें, पोहा, दलिया, खिचड़ी, इडली साम्भर, घीया, तोरई, उपमा, आदि का सेवन करना चाहिए। यह खाना आसानी से हज़म होने के साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है।

पानी व् अन्य तरल पदार्थ

गर्मी के मौसम में महिला को पानी और ज्यादा पीना चाहिए और पानी पीने के साथ महिला को नारियल पानी, निम्बू, ताजे फलों का रस आदि भी जरूर पीना चाहिए। ताकि महिला के शरीर में पोषक तत्वों की मात्रा भी सही रहे और शरीर में पानी भी भरपूर हो। जिससे गर्मियों के मौसम में महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिल सकें।

गर्मी के मौसम में गर्भवती महिला के लिए ध्यान रखने योग्य अन्य बातें

  • ठंडी चीजों का सेवन ज्यादा नहीं करें।
  • आइस क्रीम खाने से बचें।
  • आराम भरपूर करें रात भर में सोने के साथ दिन में भी जरूर सोएं ताकि शरीर में एनर्जी भरपूर रहें।
  • ज्यादा टाइट, मोटे, चुभने वाले कपडे पहनने से बचें।
  • नमक का सेवन सिमित मात्रा में करें।
  • मार्किट से लाये गए जूस, डिब्बाबंद आहार का सेवन नहीं करें।
  • जंक फ़ूड, ज्यादा मसालेदार आहार, तेली आहार खाने से बचें क्योंकि गर्मियों में ऐसा खाना हज़म करने में ज्यादा दिक्कत होती है और महिला को पेट में इन्फेक्शन जैसी परेशानी हो सकती है।
  • टंकी से आने वाले तेज गर्म पानी से नहाने से बचें बल्कि पहले थोड़ा पानी निकाल कर रख दें और उस पानी के नोर्मल होने पर उससे नहाएं।
  • तेज धूप में जाने से बचें।
  • दिन में दो बार जरूर नहाएं।
  • घर में ठंडक बनाकर रखें।
  • गर्म सर्द न हो इसके लिए अपना अच्छे से ध्यान रखें।
  • गर्मियों में बासी खाना खाने से बचें।

तो यह हैं वो खाने पीने की चीजें जो महिला को गर्मियों के मौसम में अपनी डाइट में जरूर शामिल करनी चाहिए। इससे महिला को गर्मियों के मौसम में भी अपने आप को स्वस्थ, फिट व् एक्टिव रहने में मदद मिलती है।

Summers diet for pregnant women

डिलीवरी के बाद पेट की चर्बी कम करने के टिप्स

प्रेगनेंसी के दौरान महिला के खान पान में बदलाव आता है और उस दौरान महिला की भूख में भी बढ़ोतरी होती है, साथ ही गर्भाशय का आकार बढ़ने के कारण महिला का पेट बाहर की और निकल जाता है। फिर डिलीवरी होने के तुरंत बाद महिला का पेट अंदर नहीं जाता है और महिला का वजन भी बढ़ जाता है। ऐसे में महिलाएं बढे हुए वजन और बाहर निकले हुए पेट के कारण थोड़ा परेशान हो सकती है।

क्योंकि यदि बॉडी शेप में नहीं हो तो इससे महिला की ख़ूबसूरती में थोड़ा फ़र्क़ पड़ता है। ऐसे में बच्चे के जन्म के तुरंत बाद तो महिला जिम या एक्सरसाइज नहीं कर सकती है क्योंकि इससे महिला और बच्चे दोनों को सेहत को नुकसान पहुँच सकता है। लेकिन फिर भी कुछ घरेलू टिप्स का इस्तेमाल करके महिला अपने वजन को थोड़ा कण्ट्रोल कर सकती है पेट की चर्बी कम कर सकती है। तो आइये अब जानते हैं की डिलीवरी के बाद महिला पेट की चर्बी कम करने के लिए कौन से टिप्स ट्राई कर सकती है।

खान पान का ध्यान

डिलीवरी के बाद बढे हुए पेट को अंदर करने के लिए महिला को अपनी डाइट में फाइबर युक्त चीजों को शामिल करना चाहिए। ऐसा करने से महिला का पेट साफ़ रहता है और मेटाबोलिज्म रेट अच्छा होता है। जिससे महिला की पेट की चर्बी को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है।

मालिश

बच्चे के जन्म के बाद महिला को पेट की मालिश भी करवानी चाहिए ऐसा करने से महिला के पेट के आस पास की मांसपशियों को सेट होने में मदद मिलती है। साथ ही त्वचा में आये ढीलेपन को दूर करके पेट की चर्बी को कम करने में मदद मिलती है। लेकिन ध्यान रखें की यदि आप सिजेरियन डिलीवरी है तो आपको ऐसा नहीं करना चाहिए।

योगासन

बच्चे के जन्म के कुछ दिनों बाद से ही महिला को घर पर योगासन करना चाहिए। जैसे की कपाल भाति, अनुलोम विलोम व् अन्य ब्रीदिंग योगा करने चाहिए। इन्हे करने से भी महिला के पेट को वापिस शेप में लाने में मदद मिलती है क्योंकि इन योगा को करने से पेट पर असर पड़ता है।

अजवाइन का पानी

अजवाइन को पानी में उबाल कर दिन भर थोड़ा थोड़ा करके महिला को उसी पानी का सेवन करना चाहिए। इस पानी को पीने से महिला को आंतरिक रूप से जल्दी रिकवर करने में मदद मिलने के साथ पेट की चर्बी को भी कम करने में मदद मिलती है।

दालचीनी का पानी

बच्चे के जन्म के बाद बढे हुए पेट को कण्ट्रोल करने के लिए महिला को दालचीनी का पानी भी पीना चाहिए। क्योंकि दालचीनी का पानी पीना भी महिला के लिए फायदेमंद होता है। इससे महिला को वजन को नियंत्रित रखने और पेट को अंदर करने में मदद मिलती है। इसके लिए महिला एक चम्मच गुनगुने पानी में आधा चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाकर पीना चाहिए।

ग्रीन टी

बढे हुए पेट को कम करने के लिए ग्रीन टी भी फायदेमंद होती है क्योंकि ग्रीन टी पीने से मेटाबोलिज्म रेट बढ़ता है। जिससे महिला के बाहर निकले हुए पेट को कम करने और वजन को कम करने में मदद मिलती है।

ब्रेस्टफीडिंग

डिलीवरी के बाद बॉडी को जल्दी वापिस शेप में लाने के के लिए महिला को स्तनपान को भी अपने बच्चे को जरूर करवाना चाहिए। क्योंकि ब्रेस्टफीडिंग करवाने से मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ता है जिससे उन्हें वापिस शेप में लाने में मदद मिलती है।

तनाव से बचें

डिलीवरी के बाद बिगड़ी हुई बॉडी शेप को सही करने के लिए महिला को तनाव से दूरी रखनी चाहिए और रिलैक्स रहना चाहिए। क्योंकि यदि डिलीवरी के बाद महिला तनाव लेती है तो इसकी वजह से महिला को दिक्कत कम होने की बजाय बढ़ सकती है।

पेट को बांधें

पुराने समय में डिलीवरी के बाद महिला के पेट पर चुन्नी को बाँध देते थे इससे महिला का पेट बाहर की और ज्यादा नहीं लटकता था। और आज कल डिलीवरी के बाद पेट पर बाँधने के लिए बेल्ट भी मार्किट में मिल जाती है जिससे पेट को जल्दी वापिस शेप में लाने में मदद मिलती है। ऐसे में बस महिला यदि पेट पर बाँधने वाली बेल्ट लगाती है तो इससे भी पेट को वापिस शेप में आने में मदद मिलती है। साथ ही महिला को उठने बैठने में होने वाली परेशानी को भी कम करने में मदद मिलती है।

गर्म पानी पीएं

डिलीवरी के बाद पेट कम करने के लिए महिला जब भी पानी पीएं तो महिला गर्म या गुनगुने पानी का ही सेवन करें। इससे महिला को आराम भी मिलता है और पेट को कम करने में मदद भी मिलती है। इसके अलावा महिला को दिन में आठ से दस गिलास पानी का सेवन जरूर कारण चाहिए।

मेथी के बीज

रात को सोने से पहले एक गिलास पानी में एक चम्मच मेथी के बीज डालकर उबाल लें। उसके बाद इस पानी को छानकर गुनगुना होने के बाद पीएं। ऐसा करने से भी बढे हुए पेट को कम करने में मदद मिलती है।

नींद भरपूर लें

बच्चे के जन्म के बाद बच्चे की देखभाल के चक्कर में महिलाएं पूरी नींद नहीं ले पाती है जिसकी वजह से भी महिला को वजन बढ़ने और पेट बाहर निकलने जैसी समस्या ज्यादा होती है। ऐसे में महिला को इस परेशानी को कम करने के लिए जितना हो सके नींद भरपूर लेनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ आसान और घरेलू टिप्स जिन्हे डिलीवरी के तुरंत बाद ट्राई करने से महिला को बाहर निकले पेट की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके अलावा महिला ध्यान रखें की महिला डिलीवरी के तुरंत बाद ज्यादा व्यायाम करके, डाइट करके वजन घटाने की कोशिश नहीं करें इससे माँ और बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है।

Reduce belly fat after delivery

घर में दीमक होने के क्या कारण होते हैं? और घर में से दीमक भगाने के उपाय

घर में लकड़ी का सामान होना आम बात होती है जैसे की बेड, अलमारी, दरवाज़े, खिड़कियाँ, आदि। और इन सभी की साफ़ सफाई भी समय समय पर होती है लेकिन कई बार साफ़ सफाई होने के बाद भी घर के लकड़ी के सामान में दीमक लग जाती है। और दीमक एक ऐसी चीज है जो आपके लकड़ी के सामान को धीरे धीरे खोखला करना शुरू कर देती है।

ऐसे में यदि आप उसका इलाज नहीं करते हैं तो एक समय ऐसा आ जाता है की आपका लकड़ी का सामान अपने आप ही टूटने लग जाता है क्योंकि वो अंदर से खोखला हो जाता है। क्या आपके घर में भी दीमक है? यदि हाँ, तो यह आर्टिकल आपकी समस्या का समाधान कर सकता है। क्योंकि इस आर्टिकल में हम आपको दीमक की समस्या होने के क्या कारण होते हैं और आप किस तरह इस समस्या का समाधान कर सकते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

घर के सामान में दीमक लगने के कारण?

दीमक लगने का सबसे अहम कारण होता है नमी होना, यदि आपके घर में धूप नहीं आती है, आपके घर में सीलन है और आपका लकड़ी का सामान एक ही जगह पर लम्बे समय तक रहता है, आप कभी अपने घर के सामान को बाहर धूप नहीं लगवाते हैं, तो इसकी वजह से लकड़ी के सामान में नमी बननी शुरू हो जाती है जिसकी वजह से आपके सामान में दीमक लग जाती है। दीमक लगने का सबसे ज्यादा खतरा बारिश के मौसम में होता है।

दीमक से बचाव के घरेलू उपाय

घर के सामान में लगने वाली दीमक को यदि शुरुआत में ही कण्ट्रोल कर लिए जाएँ तो आपको इस समस्या से निजात मिल सकता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको कुछ घरेलू नुस्खे बताने जा रहे हैं जिनसे आपको दीमक की समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकती है।

नीम

नीम दीमक को खत्म करने के लिए एक असरदार विकल्प है इसके इस्तेमाल के लिए आप नीम के तेल को रुई की मदद से उस जगह पर अच्छे से लगा दें जहां दीमक है। थोड़ा ज्यादा ज्यादा ही लागियें ऐसा कुछ दिनों तक नियमित करें आप देखेंगे की दीमक खत्म हो रही है। इसके अलावा यदि नीम का तेल नहीं है तो नीम की पत्तियों को पीसकर उसका रस निकाल लें उसके बाद उस रस को दीमक वाली जगह पर लगाएं। ऐसा नियमित कुछ दिनों तक करें।

लाल मिर्च पाउडर

लाल मिर्च पाउडर का इस्तेमाक करने से भी दीमक की समस्या से जड़ से छुटकारा मिल जाता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप दीमक वाली जगह पर लाल मिर्च पाउडर को भर दें, ऐसा करने से धीरे धीरे दीमक जड़ से खत्म हो जाएगी।

करेले का रस

करेला का रस बहुत ही कड़वा होता है ऐसे में यह दीमक से बचाव के लिए एक आसान व् असरदार उपाय साबित हो सकता है। इसके इस्तेमाल के लिए आप करेले को पीसकर इसका रस निकाल लें उसके बाद बाद इसे स्प्रे बोतल में भरकर दिन में कम से कम दो बार उस जगह पर छिड़काव करें आपको इसका असर जरूर दिखाई देगा।

सिरका

सिरका आपको आसानी से कहीं से भी मिल जाता है और सिरके का नियमित इस्तेमाल दीमक वाली जगह पर करने से दीमक को आसानी से खत्म करने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप सिरका में निम्बू का रस या फिर पानी मिलाएं। उसके बाद इसे स्प्रे बोतल में भरें। स्प्रे बोतल में भरने के बाद आप इसे वहां वहां छिड़काव करें जहां जहां दीमक है ऐसा दिन में दो बार जरूर करें।

बोरिक एसिड

बोरिक एसिड का इस्तेमाल करने से भी कीड़े मकोड़ों से निजात पाने में मदद मिलती है। इसके इस्तेमाल के लिए आप बोरिक एसिड का उस जगह पर छिड़काव करें जहां पर दीमक है। कुछ दिनों तक ऐसा नियमित तरीके से करें। ऐसा करने से आपको थोड़े ही दिनों में दीमक से निजात पाने में मदद मिलेगी। लेकिन ध्यान रखें की बोरिक एसिड से बच्चों को दूर रखें और खुद भी जब छिड़काव करें तो मुँह और नका को ढक लें।

गत्ते का ट्रेप

दीमक की समस्या से निजात पाने के लिए आप गत्ते का इस्तेमाल भी कर सकते हैं क्योंकि गत्ते में सेलूलोज होता है और यह एक तरह का दीमक का भोजन है। ऐसे में घर के जिस कोने में दीमक लगी है वहां कार्डबोर्ड को गीला करके रख दीजिए। उसके बाद यह होगा की कार्डबोर्ड दीमक को अट्रैक्ट करेगा। फिर जब दीमक कार्डबोर्ड पर इक्ठ्‌ठी हो जाएगी। अब इस कार्डबोर्ड को उठाकर फेंक दीजिए और जब तक गत्ते का यह तरीका अपनाएँ जब तक की पूरी तरह से दीमक घर से निकाल नहीं जाये।

मिट्टी का तेल

मिट्टी के तेल का इस्तेमाल करने से भी दीमक की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है इसके इस्तेमाल के लिए आप एक सूती कपडे को मिट्टी के तेल से पूरा भिगो दें। भिगोने के बाद आप इसे उस जगह पर रखें जहां दीमक है दीमक यदि ज्यादा है तो छोटे छोटे टुकड़ों में मिट्टी का तेल भरकर रखें मिट्टी के तेल की गंध से दीमक को जड़ से खत्म करने में आपको मदद मिलेगी। इसके अलावा आप एक बात का ध्यान रखें की मिट्टी के तेल वाली जगह के पास माचिस या अन्य कोई भी जलने वाली चीज लेकर नहीं जाएँ।

धूप में रखें

यदि किसी ऐसी चीज में दीमक लग गई है जिसे आप आसानी से घर के थोड़ा बाहर करके धूप में रख सकते हैं तो उसे कुछ दिनों के लिए धूप में रख दें। धूप के प्रभाव से दीमक को खत्म होने में मदद मिलेगी।

नमक और गर्म पानी का इस्तेमाल करें

जी हाँ, नमक का इस्तेमाल करने से भी आप दीमक को भगा सकते हैं इसके इस्तेमाल के लिए आप एक कप तेज गर्म पानी में एक चम्मच नमक मिलाएं। उसके बाद इस मिश्रण को एक स्प्रे बोतल में डाल दें फिर इसका छिड़काव करें। दिन में कम से कम दो बार से तीन बार तक ऐसा करें ऐसा नियमित करने से भी दीमक की समस्या से छुटकारा पाने में मदद मिलती है।

घर में पेस्ट कण्ट्रोल करवाते रहें

दीमक की समस्या से निजात पाने के लिए हर छह महीने में घर में पेस्ट कण्ट्रोल करवाते रहना चाहिए। ऐसा करने से दीमक, कीड़े मकोड़ो आदि से घर को सुरक्षित रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं दीमक लगने के कारण व् दीमक की समस्या से बचाव के उपाय, ऐसे में यदि आपके घर में भी दीमक है तो आपके सामान को इससे बचाने के लिए आपको भी इन टिप्स को जरूर फॉलो करना चाहिए। ताकि आपके घर में लकड़ी के सामान को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो।

Home remedies to get rid of termite

प्रेग्नेंट महिला के गर्भ में शिशु को क्यों निमोनिया हो जाता है

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु का विकास पूरी तरह से अपनी माँ पर ही निर्भर करता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला जितने अच्छे से अपना ध्यान रखती है उतना ही माँ व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। लेकिन यदि महिला अपना ध्यान नहीं रखती है, किसी तरह की लापरवाही करती है तो इसका असर महिला की सेहत के साथ साथ शिशु की सेहत पर भी पड़ता है।

जिसकी वजह से गर्भ में शिशु के विकास में कमी, वजन में कमी, इन्फेक्शन आदि की समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है। और इन परेशानियों के कारण जन्म के बाद शिशु की दिक्कतें और भी बढ़ सकती है। आज इस आर्टिकल में हम गर्भ में शिशु को निमोनिया क्यों हो जाता है इसके बारे में बताने जा रहे हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इस आर्टिकल को अच्छे से पढ़ना चाहिए ताकि आपके बच्चे को इस दिक्कत से बचाने में मदद मिल सकें।

इम्युनिटी कमजोर होने के कारण

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने कारण, शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से महिला की इम्युनिटी कमजोर हो सकती है। ऐसे में यदि महिला की इम्युनिटी कमजोर होती है तो इसकी वजह से माँ व् बच्चे दोनों को संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यदि किसी गर्भवती महिला की इम्युनिटी कमजोर होती है तो इसकी वजह से गर्भ में शिशु की निमोनिया होने का खतरा अधिक होता है।

खाली पेट ठंडी चीजों का सेवन

यदि प्रेग्नेंट महिला खाली पेट उन चीजों का सेवन अधिक करती है जिनकी तासीर ठंडी होती है तो इसकी वजह से गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत बुरी तरह प्रभावित होती है। और ऐसा जरुरत से ज्यादा होने के कारण गर्भ में ही शिशु को निमोनिया हो जाता है। जैसे की अनार की तासीर ठंडी होती है इसीलिए महिला को खाली पेट अनार का सेवन नहीं करना चाहिए।

वायरस के कारण

निमोनिया होने के कारण आपके शरीर का वायरस या बैड बैक्टेरिया से ग्रसित होना होता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला के शरीर में वायरस या बैड बैक्टेरिया प्रवेश करते हैं तो इसकी वजह से केवल गर्भवती महिला की सेहत पर ही बुरा असर नहीं पड़ता है। बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु पर भी इसका बुरा असर पड़ता है जिसकी वजह से शिशु को निमोनिया या अन्य कोई संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है।

गर्भ में शिशु को निमोनिया से बचाने के उपाय

  • महिला को प्रेगनेंसी के दौरान ऐसी डाइट लेनी चाहिए जिससे महिला के शरीर में पोषक तत्वों की कमी नहीं हो और महिला की इम्युनिटी को मजबूत रहने में मदद मिल सकें। यदि महिला की इम्युनिटी मजबूत होगी तो इससे महिला व् शिशु दोनों को हर संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलेगी।
  • गर्भवती महिला को खाली पेट उन चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए जिनकी तासीर ठंडी होती है।
  • महिला को अपनी साफ़ सफाई का और अपने आस पास की साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला को वायरस या बैड बैक्टेरिया के संपर्क में आने से बचे रहने में मदद मिल सकें। यदि महिला वायरस से सुरक्षित रहेगी तो महिला व् बच्चे दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी।

प्रेग्नेंट महिला डॉक्टर से कब मिलें?

गर्भ में शिशु का अच्छे से हलचल करना, महिला का सही तरीके से वजन बढ़ना, आदि गर्भ में शिशु के स्वस्थ होने की और इशारा करता है ऐसे में कभी महिला को शिशु की हलचल में कमी महसूस हो, महिला का वजन सही तरीके से न बढ़ रहा हो, तो महिला को एक बार डॉक्टर से मिलना चाहिए। ताकि गर्भ में पल रहा शिशु स्वस्थ है या नहीं इसके बारे में महिला को पता चल सके और समय से इलाज हो सकें।

माँ के पेट में शिशु को निमोनिया होने के दुष्प्रभाव?

यदि गर्भ में शिशु को निमोनिया हो जाता है तो इसकी वजह से जन्म के समय शिशु के वजन में कमी, फेफड़ों से जुडी समस्या, शिशु को किसी शारीरिक बीमारी के होने के खतरा बढ़ जाता है। इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान शिशु को कोई दिक्कत न हो इसके लिए महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखना चाहिए।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु को निमोनिया होने के कारण व् इस समस्या से बचाव के तरीके, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन टिप्स का ध्यान रखना चाहिए। ताकि आपको व् आपके होने वाले नवजात शिशु को इस समस्या से सुरक्षित रहने में मदद मिल सकें।

During Pregnancy Due to these habits, the child is born sick

0

During Pregnancy Due to these habits, the child is born sick and remains weak for many years. गर्भावस्था इन आदतों से ही बच्चा बीमार पैदा होता है और कई साल तक कमजोर रहता है।

Pregnancy Tips, Pregnancy Care, Garbhavastha, Health and Fitness of Pregnant Women, Fetus Development, Embryo, Women Health, Baby Birth and Care, Fertility, Infertility, Healthy Pregnancy Lifestyle Tips, गर्भवती महिला, गर्भावस्था में खान पान, गर्भावस्था में रहन सहन, शिशु का विकास, गर्भ में शिशु, क्या खाने चाहिए प्रेगनेंसी में, कैसे रहने चाहिए प्रेगनेंसी में, शिशु का विकास कैसे होगा, क्या नहीं खाने चाहिए गर्भवती महिला को जानिए हिंदी में वीडियो