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प्रेग्नेंट महिला को बालों में मेहँदी लगाने के नुकसान

गर्भावस्था के दौरान महिला को हर छोटी से छोटी बात का ध्यान रखना चाहिए। जैसे की महिला को प्रेगनेंसी के दौरान किन चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए और किन चीजों के इस्तेमाल से बचना चाहिए। तो आज इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिला को मेहँदी का इस्तेमाल प्रेगनेंसी के दौरान करना चाहिए या नहीं इस बारे में बताने जा रहे हैं। गर्भावस्था के दौरान बाजार से मिलने वाली मेहँदी का इस्तेमाल करना गर्भवती महिला के लिए बिल्कुल भी सेफ नहीं होता है।

क्योंकि इनमे कलर की मात्रा को बढ़ाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है। और यह केमिकल प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन प्रेग्नेंट महिला चाहे तो ऑर्गेनिक मेहँदी का इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन तभी जब महिला को को मेहँदी लगाने से किसी तरह की परेशानी नहीं हो। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी में बाजार से मिलने वाली मेहँदी लगाने से कौन से नुकसान होते हैं।

खुजली और रैशेस हो सकते हैं

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण स्किन बहुत सेंसिटिव हो जाती है। ऐसे में बालों में मेहँदी लगाने से सिर की स्किन पर खुजली जैसी परेशानी होने का खतरा अधिक होता है। जिसके कारण बाद में दाने निकल सकते हैं, रैशेस की समस्या भी हो सकती है।

सुगंध से हो सकती है दिक्कत

कुछ गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान तेज सुगंध से भी परेशानी हो सकती है और मेहँदी तो बहुत ज्यादा महकती है। ऐसे में मेहँदी लगाने के कारण तेज गंध के कारण महिला को परेशानी होने का खतरा होता है।

केमिकल का हानिकारक प्रभाव

गर्भावस्था के दौरान किसी भी ऐसी चीज के इस्तेमाल की मनाही होती है जिसमे केमिकल मौजूद होता है। ऐसे में बाजार से मिलने वाली मेहँदी में केमिकल ज्यादा होता है। और ऐसे में इस मेहँदी का इस्तेमाल करने से केमिकल के संपर्क में आने के कारण माँ व् बच्चे दोनों को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा अधिक होता है।

बालों से जुडी परेशानी

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण बालों के झड़ने, रूखे होने जैसी परेशानी का होना आम बात होती है। ऐसे में इस परेशानी से बचने के लिए महिला मेहँदी का इस्तेमाल करने की सोच सकती है, लेकिन यदि आप पहली बार मेहँदी का इस्तेमाल कर रही हैं तो आपको मेहँदी का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। क्योंकि हो सकता है की यह आपको सूट न करें और इससे आपके बालों को फायदा होने की बजाय नुकसान हो।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो प्रेगनेंसी में मेहँदी का इस्तेमाल करने से गर्भवती महिला को हो सकते हैं। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी प्रेगनेंसी में मेहँदी का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

इन वजहों से गर्भ तीन महीनों में ही गिर जाता है

तीन महीनो के अंदर अचानक से ही गर्भ के गिर जाने को गर्भपात कहा जाता है। एक अध्ययन के अनुसार कुल गर्भवती महिलाओं में से 10 से 25 प्रतिशत महिलाओं का गर्भपात हो जाता है। लेकिन असल में गर्भपात के सहीं नंबर बहुत ज्यादा है। बहुत सी महिलाओं का गर्भ इतनी जल्द गिर जाता है के उन्हें पता भी नहीं होता के वह गर्भवती है। गर्भपात एक साधारण समस्या पर फिर भी बहुत मुश्किल अनुभव होता है।

गर्भवस्था के समय हमारा शरीर ही शिशु तक भोजन, पानी और जरुरी पोषक तत्व पहुंचता है। शुरुआती तीन महीनों में गर्भपात का सबसे बड़ा कारण होता है भ्रूण का असाधारण विकास। गर्भपात के होने के और भी बहुत से अलग अलग कारण होते है। आइये जानते है आज उन सभी कारणों के बारे में जिनकी वजह से गर्भ तीन महीनों के अंदर ही गिर जाता है।

जेनेटिक इशू

ज्यादातर गर्भपात क्रोमोसम प्रोब्लेम्स की वजह से होते है। यह जेनेटिक समस्या किसी भी समय भ्रूण के सेल्स बनते समय हो सकती है। इस परेशानी के कारण भ्रूण खराब हो जाता है या उसका विकास बीच में ही रुक जाता है।

लम्बे समय से खराब सेहत

यदि पिछले कुछ समय से गर्भवती महिला की सेहत अच्छी नहीं चल रही हों तो भी शुरूआती तीन महीनों के अंदर अंदर गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। अगर गर्भवती महिला को बहुत पहले से ही हाई ब्लड शुगर, थाइरोइड, हाइपरटेंशन, हार्ट और किडनी से संबंधित बीमारियां है तो ऐसे में उस महिला को गर्भपात का खतरा बहुत बढ़ जाता है।

गर्भपात से बचने के लिए जरुरी है के गर्भ धारण करने से पूर्व ही आप अपने डॉक्टर से मिले और अपनी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में बताये। शुगर, हाइपरटेंशन जैसी बिमारियों को कण्ट्रोल करने के बाद ही बेबी के लिए प्लान करें।

इन्फेक्शन

गर्भावस्था के शुरूआती तीन महीनें बहुत ही महत्वपूर्ण होते है इस बीच गर्भवती महिला को बहुत से हार्मोनल बदलावों से गुजरना पड़ता है। इन तीन महीनो के दौरान महिला की इम्युनिटी पावर यानि की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर हो जाती है। अगर इसी समय में महिला को कोई इन्फेक्शन हो जाए जैसे की मलेरिया, चेचक, एड्स आदि तो गर्भपात का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है।

इसीलिए गर्भवस्था के इस पहले भाग में जितना हो सके अपना अच्छे से खास ख्याल रखें। इस समय में कुछ भी समस्या होने पर आपने डॉक्टर से बिना देर किये सलाह ले। अगर आप इन्फेक्शन के खतरे को टाल दें और गर्भपात का खतरा भी टल जाता है।

कमजोर गर्भाशय

तीसरे महीने में होने वाले ज्यादातर गर्भपात कमजोर गर्भाशय के कारण होते है। गर्भाशय या उसकी मसल्स इतनी कमजोर होती है के भ्रूण को पकड़ नहीं पाती है। गर्भाशय या इसकी मसल्स की कमजोरी किसी पुरानी चोट या करवाए गए ऑपरेशन के कारण हो सकती है।

गर्भाशय के कमजोर होने की वजह से कई बार गर्भाशय का द्वार बहुत पहले यानि के गर्भावस्था के तीसरे महीने में खुल जाता जिस कारण गर्भपात हो जाता है।

आयु

महिला के अधिक आयु होने से भी गर्भपात का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। माना जाता के 35 और 40 की उम्र की महिला में गर्भपात का खतरा कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है, छोटी उम्र की महिला की तुलना में।

कैफीन

डॉक्टरों के अनुसार जो गर्भवती महिलाएं कैफीन का ज्यादा सेवन करती है, उन्हें भी शुरूआती तीन महीनों में गर्भपात का खतरा बना रहता है। कैफीन एक ऐसा नशीला प्रदार्थ होता है जो के चाय, कॉफ़ी, कोल्ड ड्रिंक्स और चॉकलेट में भी पाया जाता है। इसीलिए जरुरी है के गर्भधारण करते है इन प्रदार्थों का सेवन त्याग दिया जाए।

बासी या खमीरा भोजन

जो गर्भवती महिला बहुत अधिक बासी भोजन या खमीर हुए भोजन का इस्तेमाल करती है। उनके गर्भ गिरने का खतरा भी बना रहता है। बासी भोजन में विषैले और हानिकारक बैक्टीरिया पैदा होते है जो आपके पेट में जाकर और विषैले तत्वों का निर्माण करते है।

इसके अतरिक्त कच्चे या आधे पक्के हुए भोजन का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए, जैसे की कच्चे अंडे। इस तरह के भोजन से भी गर्भपात का खतरा बढ़ता है।

प्रेग्नेंसी में कब और कितना केसर खाना चाहिए?

गर्भावस्था में केसर खाने के फायदे Garbhavastha Me Kesar Khane Ke Fayde

गर्भावस्था  के दौरान केसर खाना फयदेमंद होता हैं। महिलायें दूध में केसर डाल कर पीतीं हैं। ताकि स्वाथ्य भी बना रहे और शिशु भी गोरा और सुन्दर पैदा हो। पर कई बार इसके साइड इफ्फेक्ट भी हो सकते है। पर प्रेग्नेंसी के दौरान कई सारी समस्याओं से भी निजात दिलाता है केसर। इस बात का भी ध्यान रखना होगा। तो प्रश्न ये है की कितनी मात्रा में केसर का सेवाएं करना चाहिए। और कैसे करना चाहिए।

प्रेग्नेंसी में केसर पूरी तरह सेफ है क्यूंकि इसमे कई औषधीय गुण होते हैं।

  • केसर प्रेग्नेंसी में स्ट्रेस कम करता हैं।
  • यह मूड स्विंग्स की समस्या को भी दूर करता है।
  • किसी भी तरह के दर्द और तकलीफ को दूर करता है केसर।
  • ब्लड प्रेशर को नार्मल करता है।
  • मॉर्निंग सिकनेस की समस्या भी नहीं होती है।
  • पाचन तंत्र मजबूत बना रहता है।

केसर कब नुकसानदेह होता है और क्यो होता हैं?

ऐसे तो केसर के कई फायदे है अगर जरूरत से ज्यादा खा लिया जाये तो प्रेग्नेंट महिला के लिए सही नहीं होता।  यह गर्भशय में संकुचन पैदा करता है और इसके कई सारे साइड इफ़ेक्ट भी होते हैं।

जरूरत से ज्यादा खाने पर

  • मिस करेज का खतरा बढ़ जाता है।
  • बार बार उलटी आने की समस्या होती है।
  • एलर्जी का खतरा हो सकता है।
  • बेचैनी महसूस होने लगती है।
  • सर में दर्द रह सकता है।
  • मुँह सूखने की दिक्कत हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला को रोजाना कितने केसर का सेवन करना चाहिए?

केसर का सेवन रोजाना 4-5 रेशे करने चाहिए। दूध में डाल कर पीएं। अगर दूध के साथ  सेवन नहीं सकें तो खीर के साथ सेवन करें। पर ध्यान रहे की केसर हमेशा ओरिजिनल और शुद्ध होना चाहिए।  इसलिए सही जगह से ही केसर ख़रीदे।

उबले अंडे खाने के फायदे

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यदि ऐसा कहा जाए की दिन की शुरुआत करने के लिए उबले हुए अंडे का सेवन सर्वोत्तम आहार है तो गलत नहीं होगा। क्योंकि अंडे में भरपूर मिनरल्स, विटामिन, प्रोटीन, एमिनो एसिड आदि पोषक तत्व होते हैं। जो आपकी बॉडी के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। जैसे की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं, गुड़ कोलेस्ट्रॉल का निर्माण होता है, हड्डियों को मजबूती मिलती है, आदि। इसीलिए रोजाना सुबह नाश्ते में उबले हुए अंडे खाने की सलाह दी जाती है। इसीलिए तो यह भी कहा जाता है की संडे हो या मंडे रोज खाओ अंडे, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की उबले हुए अंडे खाने के क्या क्या फायदे होते हैं।

तेज दिमाग

ओमेगा 3 और विटामिन बी 12 से भरपूर उबले हुए अंडे का सेवन आपके मस्तिष्क के लिए बहुत बेहतर होता है। इससे आपके दिमाग को तेज करने के साथ एकाग्रता को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

आँखों के लिए है बेहतर

आँखों की रौशनी को बढ़ाने के लिए भी उबले अंडे का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। इसीलिए बच्चों को खासतौर पर उबले हुए अंडे खाने की सलाह दी जाती है।

मांसपेशियों का निर्माण

प्रोटीन से भरपूर उबले अंडे का सेवन करने से आपकी मांसपेशियों को मजबूत करने के साथ मांसपेशियों की मरम्मत करने में भी मदद मिलती है। जिससे आपकी बॉडी फिट रहती है।

ब्रेस्ट कैंसर से बचाव

महिलाओं में होने वाली ब्रेस्ट कैंसर की समस्या से बचाव करने में भी यह बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि इसमें ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो ब्रेस्ट कैंसर की समस्या उत्पन्न करने वाले कारको को फैलने से रोकते हैं जिसके कारण आपको ब्रेस्ट कैंसर की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

मूड बेहतर करने के लिए

मूड रिफ्रैश करने के लिए भी उबले अंडे का सेवन बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि यह तनाव को दूर करके आपको भावनात्मक रूप से मजबूत करने का काम भी करता है। इसीलिए खुश रहने के लिए आप इसका सेवन कर सकते है।

गर्मी के लिए

सर्दियों में बॉडी का तापमान सही रखने और बॉडी को गर्म रखने के लिए भी अंडे का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। इसके सेवन से आपको खांसी, जुखाम, ठण्ड लगने जैसी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए

प्रेगनेंसी के दौरान भी उबले अंडे का सेवन बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि यह प्रेग्नेंट महिला में विटामिन और प्रोटीन की कमी को पूरा करने में मदद करता है। जिससे प्रेगनेंसी के दौरान महिला को फिट रहने में मदद मिलती है।

ऊर्जा प्रदान करता है

अंडे में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है जो की आपकी बॉडी को ऊर्जा प्रदान करती है। इसीलिए इसे बॉडी को ऊर्जा से भरपूर रखने के लिए एक बेहतर स्त्रोत माना जाता है, और इसे पचाने में भी अधिक समय नहीं लगता है। यदि आप नाश्ते में दो अंडे का सेवन करते हैं तो इससे आपको पूरा दिन एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है, साथ ही यह आपके आलस्य को दूर भगाने में भी आपकी मदद करता है।

हड्डियों की मजबूती

कैल्शियम, विटामिन और प्रोटीन की भरपूर मात्रा होने के कारण यह आपकी हड्डियों को मजबूत करता है। और यदि आप बच्चों को इसका सेवन करवाते हैं तो इससे शिशु की हड्डियों का बेहतर विकास होने के साथ उनको स्वस्थ रखने में भी मदद मिलती है।

बालों के लिए

आपने यह तो सुना ही होगा की अंडे को बालों में लगाने से आपको कितने फायदे मिलते हैं। लेकिन इसके सेवन से भी आपके बालों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है और बालों के झड़ने जैसी समस्या से निजात भी मिलता है। इसीलिए बालों की मजबूती को बरकरार रखने के लिए आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए।

दांतों और नाखूनों के लिए

हाई लेवल प्रोटीन और कैल्शियम होने के कारण यह आपके दांतों और नाखूनों को भी मजबूत बनाएं रखने में मदद करता है।

वजन कम करने के लिए

ज्यादातर लोग ऐसा ही मानते हैं की अंडे का सेवन करने से मोटापा बढ़ता है, लेकिन अंडे में मौजूद प्रोटीन आपके वजन को नियंत्रित रखने में मदद करता है। इसके सेवन के लिए आप अंडो को उबाल कर उसका पीला भाग अलग कर लें क्योंकि उसमे फैट अधिक मात्रा में होता है। और केवल सफ़ेद भाग का सेवन करें ऐसा करने से आपके मोटापे को कम करने में मदद मिलती है।

दुबलापन दूर करने के लिए

कई लोग मोटापे तो कुछ लोग वजन अधिक होने के कारण परेशान होते हैं, ऐसे में अंडे का सेवन करने से आपके दुबलेपन की समस्या का भी दूर किया जा सकता है। इसके लिए आपको अंडे के सफ़ेद भाग के साथ पीले भाग का सेवन भी करना चाहिए।

खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है

अंडे में गुड़ कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने के गुण होते हैं, ऐसे में यह आपके शरीर में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करके गुड़ कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है जिससे आपको स्वस्थ रहने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ खास फायदे जो आपको अंडे खाने से होते हैं, इसीलिए यदि आप भी अपनी बॉडी को फिट और स्वस्थ रखना चाहते हैं तो आपको भी आज से ही अंडे का सेवन शुरू कर देना चाहिए। और इस बात का भी आपको ध्यान रखना चाहिए की अंडा पूरी तरह से उबाले, क्योंकि अधपके अंडे का सेवन करने से आपको परेशानी भी हो सकती है।

विडिओ अंडे खाने के क्या-क्या फायदे होते हैं?

होठों का कालापन दूर करने के उपाय

हमारे चेहरे पर मौजूद हर एक अंग हमारी खूबसूरती को बढाने का काम करता है। जिनमे सबसे अधिक महत्व आँखों और होठों को दिया जाता है। क्योंकि फेस के ये दो अंग किसी के भी लुक को बना सकते है। इसलिए कोई भी इनमे जरा सी भी समस्या नहीं देखना चाहता। कोई नहीं चाहता की उनके होंठ काले दिखें, फिर चाहे वो महिलाएं हो या पुरुष वे सदैव ही अपने होठों को खुबसूरत और आकर्षक बनाना चाहते है।

ये बात तो हम सभी भली-भांति समझते है की सुंदर होठों की मुस्कराहट बहुत अच्छी दिखती है लेकिन कई बार कुछ कारणों की वजह से होठों पर कालापन आ जाते है जिसके कारण होंठ काले हो जाते है और आपकी अच्छी खासी मुस्कुराहट की बैंड बज जाती है। पहले के समय की तो पता नहीं लेकिन आज के समय में यह समस्या काफी बढती जा रही है।

जिसके बहुत से कारण है जैसे – अत्यधिक चाय या कॉफ़ी का सेवन, धुम्रपान करना, अधिक समय तक सूर्य के संपर्क में रहना, होठों की देखभाल नहीं करना, अलग-अलग कास्मेटिक का प्रयोग आदि। परन्तु परेशान होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आप हम आपको कुछ ऐसे आसान और घरेलू उपायों के बारे में बता रहे है जिनकी मदद से होठों के कालेपन की समस्या को हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है। तो आइये जानते है होठों का कालापन दूर करने के घरेलू उपाय!होठों का कालापन दूर करने

होठों का कालापन दूर करने के घरेलू उपाय :-

1. नारियल का तेल –

इसका इस्तेमाल आप लिप बाम के रूप में आसानी से कर सकती है। बस थोडा सा नारियल तेल लें और उए अपने होठों पर लगा लें। ऐसा आप दिन में जितनी बार हो सके उतनी बार करें और हां, रात्रि को सोते समय भी इसका इस्तेमाल करें।

2. बादाम तेल –

होठों की खूबसूरती बढाने के लिए ये भी नारियल तेल की ही तरह काम करता है। प्रयोग के लिए बस उँगलियों पर 1 या 2 बूंद बादाम तेल लें और फिर उसे अपने काले होठों पर लगाओ। 2 मिनट की मसाज करने के बाद रातभर ऐसे ही रहने दें। इस उपाय का इस्तेमाल सोने से पहले करेंगे तो अधिक बेहतर होगा। वैसे आप चाहे तो दिन में भी इसका इस्तेमाल कर सकते है।

3. शहद और नींबू –

डार्क लिप्स को नार्मल करने में ये दोनों ही बहुत लाभकारी है। प्रयोग के लिए शहद और नींबू की बराबर मात्रा मिलाकर अपने होठों पर लगायें। 20 मिनट तक रखें और उसके बाद मुलायम और गीले कपड़े से अपने होंठ साफ कर लें। कुछ ही सप्ताह में होंठ पहले की तरह गुलाबी हो जाएंगे।

4. ग्लिसरीन –

स्किन टैनिंग को हटाने के लिए ये बहुत लाभकारी होती है। होठों के कालेपन को दूर करने के लिए रुई में थोड़ी सी ग्लिसरीन लें और उसे रोज रात सोने से पूर्व अपने होठों पर लगा लें। रोजाना इस्तेमाल से समस्या अपने आप दूर हो जाएगी।

5. एलोवेरा –

वैसे तो इसका प्रयोग स्किन संबंधी हर समस्या को दूर करने के लिए किया जाता है लेकिन होठों का कालापन दूर करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए एलोवेरा जेल निकालकर उसे अपने होंठों पर लगा लें और सूखने का इंतजार करें। सूखने के बाद होठों को गुनगुने पानी से साफ़ कर लें।

6. चुकंदर –होठों का कालापन दूर करने के उपाय

शायद आप नहीं जानते लेकिन खून बढ़ाने वाला चुकंदर भी आपके होठों के कालेपन को दूर कर सकता है। इसके लिए चुकंदर के टुकड़े कर लें और फिर उन्हें फ्रिज में रख दें। उसके पश्चात जब भी समय मिले चुकंदर के टुकड़े को अपने होठों पर कुछ मिनट तक रगड़ें। फिर 10 से 15 मिनट बाद होठों को साफ़ कर लें। दिन में एक बार इसका इस्तेमाल करें समस्या दूर हो जाएगी।

7. खीरे का जूस –

खीरे का जूस भी होठों के कालेपन को दूर कर सकता है। इसके लिए खीरे को घिसकर उसका रस निकाल लें। उसके बाद जूस को फ्रिज में ठंडा होने रख दें। ठंडा होने के बाद रुई से काले होठों पर जूस लगाएं। लगाने के बाद 20 से 30 मिनट का इंतजार करें और फिर पानी से साफ़ कर लें। दिन में एक बार इस्तेमाल करने से होठों की प्राकृतिक रंगत वापस आ जाएगी।

8. गुलाबजल –

इस उपाय का इस्तेमाल करके भी आप अपने काले होठों को चमकदार और गुलाबी बना सकते है। इसके लिए रुई में गुलाबजल डालें और फिर होठों पर लगाएं। अब रुई से हलके-हलके होठों को रगड़ें। गुलाबजल को ऐसे ही लगे रहने दें और सो जाए। रोजाना रात इस उपाय का इस्तेमाल करें होठों का कालापन दूर हो जाएगा।

9. गुलाब की पत्तियां –

इस उपाय के लिए गुलाब की कुछ पत्तियों को आधा कप दूध में रातभर के लिए डुबो दें। अगली सुबह पत्तियों को दूध से निकालकर मूसली से पीस लें। अब पीसी हुई पत्तियों में थोडा सा दूध डालें पेस्ट तैयार हो जाएगा। इस पेस्ट का प्रयोग अपने होठों पर करें और 15 मिनट तक लगे रहने दें। फिर ठंडे पानी से साफ़ कर लें।

10. ग्लिसरीन और नींबू का रस –

दोनों का अलग-अलग इस्तेमाल करने के फायदे तो आप जान ही चुके है लेकिन क्या आप जानते है की इन दोनों का एक साथ प्रयोग करने से होठों का बहुत लाभ होता है। इसके लिए सबसे पहले नींबू के रस में थोडा सा ग्लिसरीन मिला लें। अब इस मिश्रण को किसी डिब्बे में डालकर फ्रिज में रख दें। अब रोजाना अपनी उँगलियों से इसे होठों पर लगाएं। रोजाना इस्तेमाल करने से होठों का कालापन हमेशा के लिए दूर हो जाएगा।

तो ये थे, कुछ घरेलू उपाय जिनकी मदद से होठों का कालापन दूर किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे आपको सभी उपायों में से केवल एक ही का इस्तेमाल करना होगा। अगर आप एक से ज्यादा उपाय इस्तेमाल करेंगे तो समस्या हो सकती है। इसलिए उपाय का चुनाव सोच समझकर करें।

गर्भ में शिशु कभी कम और कभी ज्यादा हलचल क्यों करता है?

गर्भ में शिशु की हलचल

गर्भ में शिशु की हलचल न केवल गर्भवती महिला के उत्साह को बढ़ाती है बल्कि इससे गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को जानने में भी मदद मिलती है। गर्भ में पल रहा शिशु लगभग पांचवें महीने में गर्भ में हलचल करना शुरू कर देता है। और शुरुआत में यह हलचल थोड़े समय के लिए जबकि शिशु का विकास बढ़ने के साथ यह हलचल धीरे धीरे बढ़ने लगती है। प्रेग्नेंट महिला के लिए शिशु का गर्भ में हलचल करना प्रेगनेंसी का सबसे प्यारा और अनोखा अनुभव होता है। लेकिन कई बार शिशु की कम हलचल होने के कारण जहां गर्भवती महिला घबरा जाती है वहीँ शिशु की मूवमेंट प्रेगनेंसी के उत्साह को और बढ़ाती है।

गर्भ में शिशु की हलचल कम होने के कारण

कई बार गर्भवती महिला को गर्भ में शिशु की हलचल कम महसूस होती है जिसके कारण गर्भवती महिला घबरा सकती है। ऐसे में यह जानना बहुत जरुरी होता है की आखिर क्यों गर्भ में शिशु हलचल कम करता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भ में शिशु हलचल कम क्यों करता है।

प्रेगनेंसी की शुरुआत

गर्भावस्था की शुरुआत में शिशु बहुत छोटा होता है, ऐसे में यदि शिशु गर्भ में कुछ करता है तो उसे महसूस करना और शिशु की हलचल को समझना महिला के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है। और पांचवें महीने में जब शिशु की हलचल महिला को थोड़ी बहुत महसूस होती है, तो उस समय भी शिशु का शारीरिक विकास बढ़ रहा होता है जिस कारण शिशु हलचल करता तो है लेकिन वो महिला को कम महसूस हो सकती है।

सोना

गर्भ में शिशु ज्यादा से ज्यादा समय के लिए सोता है, इसीलिए प्रेगनेंसी के दौरान कई बार महिला को शिशु की हलचल कम महसूस हो सकती है।

बिज़ी रहना

यदि गर्भवती महिला घर के किसी काम या अन्य किसी और चीज में महिला का ध्यान होता है। तो शिशु की हलचल की और महिला का ध्यान कम जा सकता है, जिसके कारण महिला को ऐसा महसूस हो सकता है की गर्भ में पल रहा शिशु कम हलचल कर रहा है।

शिशु का विकास

शिशु का विकास प्रेगनेंसी का समय जैसे जैसे आगे बढ़ता है वैसे वैसे बढ़ता जाता है। ऐसे में शिशु का विकास पूरी तरह न होने के कारण या शिशु के वजन में कमी की समस्या के कारण भी गर्भवती महिला को गर्भ में पल रहे शिशु की हलचल कम महसूस हो सकती है।

ऑक्सीजन

प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में शिशु का विकास लगभग हो चूका होता है ऐसे में शिशु की हलचल महिला को ज्यादा महसूस हो सकती है। लेकिन कई बार शिशु को गर्भ में जरुरत के अनुसार ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है जिसके कारण शिशु की हलचल कम महसूस होने के साथ गर्भ में शिशु को रिस्क भी हो सकता है। ऐसे में प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में यदि महिला को गर्भ में पल रहे शिशु की हलचल कम महसूस हो तो इसके लिए महिला को एक बार डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए

गर्भ में शिशु की हलचल अधिक होने के कारण

कई बार गर्भ में शिशु की हलचल अधिक होने लगती है, और यह अच्छी बात होती है क्योंकि यह गर्भ में शिशु के बेहतर विकास होने के साथ शिशु के एक्टिव होने की तरफ इशारा करती है। साथ ही शिशु के गर्भ में हलचल अधिक करने के कुछ और कारण भी हो सकते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की गर्भ में शिशु का विकास अधिक होने के और क्या कारण हो सकते हैं।

रात का समय

दिनभर में महिला जब काम में व्यस्त होती है तो महिला द्वारा की गई गतिविधियों के कारण शिशु कम हलचल कर सकता है या महिला का शिशु की हलचल पर ध्यान नहीं जाता है। लेकिन रात को जब महिला आराम कर रही होती है तो शिशु को बाहर की कोई गतिविधि महसूस न होने पर शिशु गर्भ में ज्यादा हलचल कर सकता है, या आप यह भी कह सकते हैं की महिला उस समय शिशु की हलचल को ज्यादा अच्छे तरीके से महसूस कर सकती है।

स्वाद

महिला जिस भी आहार का सेवन सेवन करती है तो उसका स्वाद गर्भनाल के रास्ते शिशु तक पहुँच जाता है। ऐसे में महिला यदि तीखे या चटपटे भोजन का सेवन करती है तो इसका स्वाद भी शिशु तक पहुँचता है। जिस कारण शिशु गर्भ में ज्यादा हलचल कर सकता है।

शोर

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में शिशु की सुनने की क्षमता भी बढ़ चुकी होती है ऐसे में शिशु अपने आस पास की गतिविधियों को सुनकर हलचल के रूप में अपनी प्रतिक्रिया भी दे सकता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला ज्यादा शोर वाली जगह पर जाती है या तेज आवाज़ में गाने सुनती है तो इसके कारण शिशु चौंक सकता है जिसके कारण गर्भ में शिशु की हलचल महिला को अधिक महसूस हो सकती है।

शांति

जिस तरह शोर को सुनकर गर्भ में शिशु प्रतिक्रिया देता है उसी तरह जब शिशु को कुछ सुनाई नहीं देता है तो भी शिशु गर्भ में ज्यादा हलचल कर सकता है। क्योंकि दिनभर शिशु अपने आस पास की आवाज़ों को सुनता रहता है ऐसे में यदि शिशु को आस पास कोई आवाज़ सुनाई न दे तो भी शिशु गर्भ में ज्यादा हलचल कर सकता है।

डिलीवरी का समय

प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में शिशु का विकास पूरी तरह हो चूका होता है, ऐसे में शिशु को गर्भ में अच्छे से घूमने में थोड़ी परेशानी हो सकती है। जिसके कारण शिशु डिलीवरी के लिए अपनी सही पोजीशन में आने लगता है, ऐसे में डिलीवरी का समय जैसे जैसे पास आता है वैसे वैसे महिला को गर्भ में पल रहे शिशु की हलचल ज्यादा महसूस हो सकती है।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से गर्भ में पल रहा शिशु गर्भ में कम या ज्यादा हलचल करता है। ऐसे में यदि आप भी शिशु की हलचल को अच्छे से समझ नहीं पा रही है की आखिर शिशु की हलचल कभी कम और कभी ज्यादा क्यों हो रही है तो ऊपर दिए गए टिप्स को पढ़ने के बाद आपको यह समझने में आसानी होगी। इसके अलावा यदि कभी आपको गर्भ में पल रहे शिशु की हलचल कम महसूस हो या न महसूस हो तो इसके लिए आप एक बार डॉक्टर से भी पूछ सकते हैं।

चेहरे से काले दाग हटाने के तरीके

आज कल हर उम्र की महिलाएं व् लड़कियां चेहरे पर होने वाले दाग धब्बों से परेशान रहती है। और ऐसा इसीलिए होता है क्योंकि आज कल पौष्टिक आहार से ज्यादा बाहर की चीजों को लोग खाना पसंद करते हैं, स्किन के लिए महंगे से महंगे केमिकल से बने प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, आदि। ऐसा करने से न तो स्किन को पोषण मिलता है साथ ही स्किन अपना प्राकृतिक ग्लो भी खोने लगती है।

जिसके कारण दाग धब्बों की परेशानी हो सकती है और यही दाग धब्बे चेहरे पर काले निशान की तरह दिखाई देते हैं। जो की चेहरे की सुंदरता को कम करने के साथ भद्दे भी नज़र आते हैं। तो आइये आज हम आपको बताते हैं की चेहरे पर काले दाग क्यों हो जाते हैं और किस तरह आप इस परेशानी से निजात पाकर अपने चेहरे की ख़ूबसूरती को बरकरार रख सकते हैं।

चेहरे पर काले दाग होने के कारण

  • केमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल अधिक करने के कारण।
  • दवाइयों का सेवन करने के कारण भी चेहरे पर यह समस्या हो सकती है।
  • यदि आपको चेहरे पर चोट लग गई है तो उसका निशान भी धीरे धीरे काला पड़ने लगता है।
  • जले के निशान भी चेहरे पर काले रंग के नज़र आते हैं।
  • तनाव के कारण दाग धब्बे की परेशानी बढ़ती है और बाद में यह दाग धब्बे काले निशान के रूप में दिखाई देते हैं।
  • चेहरे पर फुंसी आदि होने के पर यदि आप उसपर खुजली करते हैं तो वह भी काले निशान के रूप में चेहरे पर नज़र आती है।
  • ऑयली स्किन वालों को यह परेशानी ज्यादा होती है।
  • स्किन की अच्छे से देखभाल न करने के कारण डेड स्किन का जमाव होने लगता है जिसके कारण भी चेहरे पर काले निशान पड़ने लगते हैं।
  • धूप की किरणों के कारण स्किन पर गलत प्रभाव पड़ता है जिसकी वजह से स्किन में मेलेनिन बढ़ जाता है और चेहरे पर काले निशान दिखाई देने लगते हैं।
  • मुहांसों के कारण भी स्किन पर काले निशान दिखाई देते हैं।

स्किन पर से काले निशान हटाने के टिप्स

यदि आपके चेहरे पर दाग धब्बे के कारण काले निशान पड़ गए हैं। तो घबराइए नहीं क्योंकि कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल करके आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं। तो आइये अब जानते हैं चेहरे पर से काले निशान हटाने के लिए आपको क्या क्या करना चाहिए।

आलू और शहद

एक छोटा आलू ले उसे कद्दूकस करें फिर उसमे एक से चम्मच शहद मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें। अब इस मिश्रण को चेहरे पर लगाएं खासकर जहां आपको काले निशान हैं वहां लगाएं। और पंद्रह से बीस मिनट के लिए इसे चेहरे पर छोड़ दें। उसके बाद गुनगुने पानी का इस्तेमाल करके चेहरे को धो लें। जल्दी फायदे के लिए ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें।

हल्दी और दूध

चेहरे पर से काले निशान हटाने के लिए एक कटोरी में एक छोटा चम्मच हल्दी, एक चम्मच निम्बू का रस और उतना दूध मिलाएं की एक पतला पेस्ट तैयार हो जाएँ। उसके बाद इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। और थोड़ी देर बाद जब यह मास्क सूख जाएँ तो पानी का इस्तेमाल करके अपने चेहरे को धो लें।

सेब का सिरका

एक चम्मच शहद में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाएं और रुई की मदद से इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर दस से पंद्रह मिनट के लिए छोड़ दें। उसके बाद चेहरे को धो लें, ऐसा हफ्ते में दो से तीन बार करें। ऐसा करने से आपको बहुत जल्दी चेहरे पर होने वाले काले धब्बों से निजात पाने में मदद मिलेगी।

शहद

शहद स्किन के लिए कितना फायदेमंद है यह तो आप सभी जानते हैं लेकिन शहद का इस्तेमाल कई तरह से करके आप चेहरे से काले दाग की समस्या से निजात पा सकते हैं। जैसे की शहद में दूध मिलाकर चेहरे पर लगाएं, शहद में प्याज़ का रस मिलाकर चेहरे पर लगाएं, शहद में दालचीनी पाउडर मिलाकर चेहरे पर लगाएं, आदि।

संतरे के छिलके

संतरे के छिलको को धूप में सुखाकर उन्हें पाउडर के रूप में तैयार कर लें। एक एक कटोरी में एक से डेढ़ चम्मच संतरे के छिलके का पाउडर, थोड़ा सा दूध और थोड़ा सा शहद मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को अपने चेहरे पर लगाएं। और सूखने के लिए छोड़ दें। थोड़ी देर बाद चेहरे को साफ़ पानी से धो लें।

एलोवेरा जैल

चेहरे से जुडी परेशानियों की बात हो और एलोवेरा का नाम न आये ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। क्योंकि एलोवेरा जैल चेहरे से जुडी सभी परेशानियों से निजात दिलाने में आपकी मदद करता है। ऐसे ही चेहरे से काले दाग हटाने के लिए रोजाना आपको एलोवेरा जैल चेहरे पर लगाना चाहिए और सुबह उठकर चेहरे को धो लेना चाहिए। यदि आपके पास ताजा एलोवेरा जैल नहीं है तो आप मार्किट से लाये एलोवेरा जैल का भी इस्तेमाल कर सकती है।

चेहरे पर से काले दाग हटाने के अन्य तरीके

  • निम्बू के रस को रुई की मदद से चेहरे पर लगाएं।
  • आलू का रस चेहरे के लिए इस्तेमाल करें।
  • रोजाना रात को मुँह को अच्छे से धोएं उसके बाद चेहरे को साफ़ करें फिर रुई की मदद से गुलाबजल लगाएं।
  • खीरे को कद्दूकस करके दे के साथ मिलाएं और चेहरे पर पर लगाएं।
  • पपीते के टुकड़ों को पीसकर चेहरे पर लगाएं।
  • लहसुन और प्याज़ को पीसकर लेप बनाएं और चेहरे पर लगाएं।
  • गर्म पानी की भाप से त्वचा के रोम छिद्र खुल जाते हैं और स्किन में जमी मैल साफ हो जाती है। ऐसा होने पर स्किन पर निखार आने साथ काले धब्बे भी कम हो जाते हैं।

तो यह हैं कुछ आसान टिप्स जिन्हे ट्राई करने से चेहरे पर होने वाले काले निशान की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। साथ ही ऐसा नहीं है की एक बार में ही यह उपाय अपना असर दिखाएं बल्कि आपको कुछ दिनों तक इन्हे करना है। धीरे धीरे आपको इनका असर आपके चेहरे पर साफ़ दिखाई देगा।

प्रेगनेंसी के दौरान गर्मी में केसर दूध, अंडा, बादाम खाने के तरीके

गर्मी में गर्भावस्था के दौरान खान पान

गर्मी का मौसम गर्भवती महिला की परेशानियों को और भी बढ़ा देता है, एक तो प्रेगनेंसी में होने वाली समस्याएँ साथ ही गर्मी के कारण होने वाली परेशानी। साथ ही गर्मी के मौसम में तो कुछ खाने की इच्छा भी नहीं होती है, बस मन करता है की केवल ठन्डे आहार का सेवन ही किया जाए। लेकिन अधिक ठन्डे आहार का सेवन वजन बढ़ने, सूजन जैसी समस्या पैदा कर सकता है। इसके अलावा कुछ और चीजें भी है जो गर्भावस्था के दौरान फायदा करती है, लेकिन उनकी तासीर गर्म होने के कारण गर्मी में उनके खाने में थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए।

क्योंकि यदि गर्भवती महिला गर्मी में गर्म तासीर वाली चीजों का सेवन करती है तो इससे बॉडी में हीट बढ़ती है, जिससे ब्लीडिंग, मिसकैरिज जैसी समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में गर्भवती महिला को गर्मी के मौसम में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए इसके लिए एक बार डॉक्टर से भी राय लेनी चाहिए। तो लीजिये आज हम कुछ चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होती है, लेकिन गर्मियों में इनका सेवन कैसे करना चाहिए इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी होता है। जैसे की केसर, बादाम, अंडा आदि। तो लीजिए अब जानते हैं की गर्मियों में गर्भवती महिला को इनका सेवन कैसे करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में केसर दूध

प्रेगनेंसी के दौरान यदि सही मात्रा में केसर का सेवन किया जाए तो इससे गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को बहुत फायदा मिलता है। लेकिन यदि गर्भवती महिला आवश्यकता से अधिक इसका सेवन करती है तो इसके कारण गर्भपात, उल्टियां, चक्कर, बेचैनी जैसी समस्या बढ़ा भी देता है। साथ ही इसकी तासीर गर्म होने के कारण गर्मियों में तो सोच समझकर इसका सेवन करना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की किस तरह से आप प्रेगनेंसी के दौरान गर्मियों में केसर का सेवन कर सकती है।

  • केसर के चार पांच रेशे लेकर एक गिलास दूध में डालकर अच्छे से उबाल लें, अब उस दूध को ठंडा होने के लिए रख दें, ध्यान रखें की केसर के रेशे ज्यादा न हो। साथ ही न तो दूध बहुत अधिक गर्म हो और न ही बहुत ज्यादा ठंडा हो, दूध का तापमान नोर्मल होने पर आप इसका सेवन कर सकती है।
  • यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान खीर आदि बनाती है तो उसमे भी केसर को मिक्स कर सकती है, लेकिन खीर में भी ज्यादा केसर न ड़ालें।

बादाम

पोषक तत्वों से भरपूर बादाम न केवल प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने में मदद करता है बल्कि इससे गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में भी मदद मिलती है। क्योंकि बादाम में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं, लेकिन गर्मियों में गर्भवती महिला को बादाम का सेवन किस तरह करना चाहिए आइये जानते हैं।

  • पांच छह बादाम को रात भर के लिए पानी में भिगोकर रख दें, उसके बाद सुबह उठकर उन बादाम का सेवन करें।
  • यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान खीर, हलवा, आदि कुछ खाना चाहती है तो उसमे भी बादाम को छोटे छोटे टुकड़ों में काट कर मिक्स कर सकती है।
  • बादाम को पीसकर दूध में मिलाने के बाद इसे अच्छे से उबाल लें, उसके बाद जब दूध नोर्मल हो जाए तो इसका सेवन करें। ऐसा करने से बादाम दूध के साथ मिलकर गर्भवती महिला को दुगुना फायदा पहुंचाता है।

अंडा

अंडे की तासीर भी गर्म होती है, ऐसे में गर्मियों के दौरान अंडे का अधिक मात्रा में सेवन करना नुकसान भी पहुंचा सकता है, लेकिन अंडे में मौजूद पोषक तत्व गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के लिए फायदेमंद भी होते हैं। इसीलिए गर्भवती महिला को पर्याप्त मात्रा में और सही समय पर अंडे का सेवन करना चाहिए। तो आइये अब जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला को गर्मियों में अंडे का सेवन कैसे करना चाहिए।

  • अंडे का सेवन जितना हो सके सुबह नाश्ते के समय करना चाहिए, क्योंकि इसमें मौजूद कैलोरी गर्भवती महिला को पूरा दिन एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करती है।
  • जितना हो सके उबले हुए अंडे का सेवन ही करना चाहिए, लेकिन कभी स्वाद के लिए आप चाहे तो अंडे की भुजी, ऑमलेट, अंडे का पराठा बनाकर भी इसका सेवन कर सकती है।
  • अंडे का सेवन करते हुए एक बात का खास ध्यान रखे की न तो न ही अंडा कच्चा हो, और न ही अधपका हो क्योंकि ऐसे अंडे का सेवन करने से गर्भवती महिला को पेट सम्बंधित समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ तरीके जिनका इस्तेमाल करके गर्मियों में महिला केसर, अंडे, बादाम आदि का सेवन कर सकती है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान हर एक चीज का पर्याप्त मात्रा में ही सेवन करना चाहिए, और सही तरीके ताकि गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु को किसी भी तरह की परेशानी न हो और दोनों को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

प्रेग्नेंट महिला को मखाने को घी में भूनकर क्यों खाना चाहिए?

गर्भवती महिला का प्रेगनेंसी के दौरान कुछ न कुछ अलग खाने का मन करता है। लेकिन हर चीज का सेवन गर्भवती महिला के लिए सही हो ऐसा जरुरी नहीं होता है। लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनका सेवन प्रेग्नेंट महिला के लिए फायदेमंद होता है साथ ही वह महिला के मुँह के स्वाद को भी बेहतर करने में मदद करते हैं। आज हम ऐसी ही एक चीज के बारे में आपको बताने जा रहे हैं।

और वो है मखाने को घी में भूनकर खाना, मखाने को घी में भुनने से यह बहुत कुरमुरे से हो जाते हैं। साथ ही इनका स्वाद भी बढ़ जाता है इसके अलावा इनके फायदे भी दुगुने हो जाते हैं। क्योंकि घी और मखाने दोनों का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होता है। तो आइये अब जानते हैं प्रेगनेंसी में घी में मखाने भूनकर खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

बच्चे का बेहतर विकास होता है

घी और मखाने दोनों में ही पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। ऐसे में घी में मखाने भूनकर खाने से इसमें पोषक तत्व भी बढ़ जाते हैं। और यदि गर्भवती महिला इनका सेवन करती है तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को पोषण मिलने के साथ बच्चे को भी पोषण मिलता है। जिससे गर्भ में बच्चे शारीरिक व् मानसिक विकास को बढ़ने में मदद मिलती है। और आपका होने वाला बच्चा हष्ट पुष्ट और बुद्धिमान होता है।

प्रेग्नेंट महिला रहती है फिट

मखाने और घी दोनों में ही एंटी ऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं। जो प्रेग्नेंट महिला को इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। जिससे गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान संक्रमण से बचे रहने व् फिट रहने में मदद मिलती है।

नींद तनाव जैसी परेशानियों से मिलता है निजात

घी और मखाने दोनों में ही ऐसे गुण मौजूद होते हैं जो प्रेग्नेंट महिला के मूड को बेहतर करने, तनाव को दूर करने, नींद से जुडी परेशानियों से निजात दिलाने में मदद करते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला यदि घी में मखाने भूनकर खाती है। तो ऐसा करने से गर्भवती महिला को अनिंद्रा, तनाव, बेचैनी, घबराहट जैसी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

एनीमिया की समस्या से मिलती है राहत

मखाने में आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है साथ ही घी में मौजूद पोषक तत्व व् कैलोरी गर्भवती महिला को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करते हैं। ऐसे में घी में मखाने को भूनकर खाने से गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने व् खून की कमी के कारण होने वाली शारीरिक परेशानियां जैसे की कमजोरी थकान जैसी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

शुगर रहता है कण्ट्रोल

मखाने में शुगर की मात्रा न के बराबर ही होती है। ऐसे में मखाने का सेवन करने से गर्भवती महिला के ब्लड में शुगर के लेवल को मेन्टेन रखने में मदद मिलती है। जिससे प्रेग्नेंट महिला को गेस्टेशनल डाइबिटीज़ की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ बेहतरीन फायदे जो मखाने को घी में भूनकर खाने से प्रेग्नेंट महिला को मिलते हैं। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आप भी यदि चाहे तो मखाने को घी में भूनकर खा सकती हैं। ताकि आपको और आपके बच्चे को यह बेहतरीन फायदे मिल सके।

डिलीवरी के बाद पति से मिलन कब सेफ होता है?

डिलीवरी के बाद महिला की फिटनेस

शिशु को जन्म देने के बाद महिला को केवल शिशु की ही नहीं बल्कि अपनी सेहत पर भी पूरा ध्यान देने की जरुरत होती है। क्योंकि शिशु के जन्म के बाद महिला का शरीर बहुत ही कमजोर हो जाता है, जिसके कारण कमजोरी, थकान, बॉडी में दर्द, तनाव, आदि जैसी परेशानियों का सामना महिला को करना पड़ सकता है। इसके अलावा महिला के शरीर को पूरी तरह फिट होने के लिए महिला को पूरे आराम के साथ बेहतर खान पान की सलाह भी दी जाती है। नोर्मल डिलीवरी होने वाली महिलाएं जहां डिलीवरी के बाद जल्दी फिट हो जाती है वहीँ सिजेरियन डिलीवरी वाली महिलाओं को उनसे ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में महिला को पूरी तरह फिट होने के लिए डिलीवरी के बाद अपनी सेहत का अच्छे से ध्यान रखने की जरुरत होती है।

डिलीवरी के बाद सम्बन्ध कब बनाएं?

बहुत सी महिलाओं के मन में यह सवाल आता है की डिलीवरी के बाद सम्बन्ध बनाना कब सेफ होता है। महिला ही नहीं बल्कि पुरुष भी इस बारे में जानना चाहते हैं की डिलीवरी के बाद कब वो अपने पार्टनर से मिलन कर सकते हैं। तो इसका कुछ हद तक जवाब तो महिला की बॉडी ही दे देती है, क्योंकि महिला डिलीवरी के बाद अपने आप को कब और कितना स्वस्थ महसूस कर रही है इसके बारे में तो महिला बता देती है। लेकिन डॉक्टर्स के अनुसार डिलीवरी के बाद सम्बन्ध कब बनाना सही होता है इस बारे में जानना भी जरुरी होता है।

नोर्मल डिलीवरी के बाद पति पत्नी कब करे मिलन

नोर्मल डिलीवरी के बाद महिला को फिट होने में कम समय लगता है लेकिन कुछ महिलाओं को नोर्मल डिलीवरी में भी कुछ टाँके आते हैं। ऐसे में महिला को कम से कम डेढ़ से दो महीने तक अपने पार्टनर के साथ मिलन करने से बचना चाहिए। ऐसा इसीलिए करना चाहिए क्योंकि नोर्मल पेल्विक एरिया की मांसपेशियों को फिट होने में थोड़ा समय लग सकता है, साथ ही गर्भाशय को भी अपनी स्थिति में आने में समय लग सकता है। साथ ही डिलीवरी के बाद महिला को पीरियड्स भी ज्यादा दिनों तक आते हैं। ऐसे में महिला पूरी तरह फिट हो सके और डिलीवरी के बाद सम्बन्ध बनाने पर आपको किसी भी तरह की परेशानी न हो इससे बचने के लिए कम से कम डेढ़ से दो महीने बाद सम्बन्ध बनाना चाहिए।

सिजेरियन डिलीवरी के बाद सम्बन्ध

नोर्मल डिलीवरी की अपेक्षा सिजेरियन डिलीवरी के बाद फिट होने में महिला को ज्यादा समय लग सकता है। क्योंकि सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिला को लगने वाले टांको को ठीक होने में समय लग सकता है। साथ ही इन टांको के ठीक न होने से पहले महिला द्वारा की गई थोड़ी सी भी लापरवाही महिला के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। इसीलिए महिला को कम से कम ढाई से तीन महीने बाद अपने पार्टनर से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। साथ ही डिलीवरी के बाद महिला के निचले हिस्से में सूखापन आने के कारण मिलन के दौरान आपको थोड़ी दिक्कत भी हो सकती है। ऐसे में घबराने की कोई बात नहीं होती है बल्कि धीरे धीरे सब पहले की तरह ठीक होने लग जाता है।

तो यह है डिलीवरी के बाद पार्टनर के साथ मिलन करने से जुड़े कुछ खास टिप्स, आप चाहे तो डिलीवरी के बाद सम्बन्ध कब बनाना चाहिए इसके लिए डॉक्टर से भी राय ले सकते है। साथ ही यदि डिलीवरी के बाद महिला को लगे की अभी वो सम्बन्ध बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है तो ऐसे में उन्हें सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसे सम्बन्ध बनाने से महिला तनाव से परेशान हो सकती है।