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जब शिशु का सिर नीचे की तरफ आ जाये तो यह सावधानियां रखें

डिलीवरी का समय पास आने पर गर्भ में शिशु अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में आने लगता है। यानी की शिशु का सिर नीचे की तरफ होने लगता है। अब आप सोच रही होंगी की आपको कैसे पता चलेगा की शिशु का सिर नीचे हो गया है? तो इसका जवाब है जब शिशु का सिर नीचे की तरफ होता है तो महिला के पेल्विक एरिया पर दबाव अधिक महसूस होता है।

साथ ही महिला को ऐसा लगता है की शिशु अपने आप को नीचे धकेलने की कोशिश कर रहा है। तो जब महिला को ऐसा महसूस होता है तब महिला को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए ताकि होने वाले शिशु को किसी भी तरह की दिक्कत न हो। तो आइये अब जानते हैं की महिला को कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए।

खान पान का ध्यान रखें

महिला को अपने खान पान का ध्यान रखना चाहिए। जैसे की महिला को ऐसा कोई भी खाद्य पदार्थ नहीं खाना चाहिए जिससे महिला को गैस, अपच, दस्त लगने जैसी परेशानी हो। क्योंकि इसके कारण आपको ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

सम्बन्ध बनाने से बचे

शिशु का सिर नीचे की तरफ होने पर महिला को सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि सम्बन्ध बनाने के कारण गर्भाशय को चोट लगने का खतरा होता है। जिसके कारण गर्भ में शिशु को परेशानी हो सकती है। साथ ही यदि आप बिना सुरक्षा के सम्बन्ध बनाते हैं तो इसके कारण गर्भाशय में संक्रमण होने का भी खतरा होता है।

ट्रैवेलिंग न करें

शिशु का सिर नीचे की तरफ आने पर महिला को पास हो या दूर कही भी ट्रेवल करने से बचना चाहिए। बस जब आपको डॉक्टर के पास जाना हो तभी जाएँ। क्योंकि ट्रैवेलिंग के कारण महिला को झटका आदि लगने का खतरा होता है जिसकी वजह से महिला और बच्चे को परेशानी हो सकती है।

ऐसा कोई काम न करें जिससे आपको झटका लगने का खतरा हो

शिशु का सिर नीचे आने के बाद ऐसा कोई काम न करें जिसके कारण पेट पर ज्यादा दबाव पड़े या झटका लगने का खतरा हो। जैसे की भारी वजन उठाना, सीढ़ियां चढ़ना, व्यायाम करना, झुककर काम करना, आदि। क्योंकि ऐसे काम करने के कारण माँ व् बच्चे को परेशानी महसूस हो सकती है।

ज्यादा चहलकदमी न करें

वाक करना अच्छी बात होती है और प्रेग्नेंट महिला को थोड़ी बहुत वाक करनी भी चाहिए। लेकिन इस बता का ध्यान रखें की शिशु का सिर नीचे महसूस होने पर ज्यादा तेजी से और जरुरत से ज्यादा चहलकदमी करना आपको परेशानी में डाल सकता है।

शरीर पर जोर न डालें

नौवां महीना लगने के बाद कुछ महिलाएं नोर्मल डिलीवरी के चक्कर में शरीर पर ज्यादा जोर डालने लग जाती हैं। जो की गलत बात होती है ऐसा करने से कई बार आपकी परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में शिशु का सिर नीचे की तरफ आने पर महिला को जरुरत से ज्यादा शारीरिक श्रम भी नहीं करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ काम जो महिला को शिशु का सिर नीचे की तरफ होने के बाद करने से बचना चाहिए। ताकि महिला को और बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके और डिलीवरी में किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स न आएं।

Precautions for when your baby’s head falls down during Pregnancy

बच्चे के दूध पीते ही तुरंत उल्टी कर देने के क्या कारण होते हैं

माँ का दूध बच्चे के लिए अमृत होता है यह तो सभी जानते हैं। लेकिन कई बार बच्चे को जब महिला दूध पिलाती है तो दूध पीने के बाद तुरंत बच्चा उल्टी कर देता है। जिसे लेकर महिला घबरा सकती है, खासकर जब महिला पहली बार बच्चे की केयर कर रही हो। लेकिन नवजात के दूध पीने के बाद उल्टी करने का कारण हमेशा परेशान ही कर देने वाला हो ऐसा जरुरी नहीं होता है, लेकिन हाँ आपके लिए यह जानना जरुरी होता है की बच्चा आखिर उल्टी क्यों कर रहा है। यदि आपका बच्चा भी दूध पीने के बाद उल्टी कर रहा है, तो आइये जानते हैं की किन कारणों की वजह से आपका बच्चा दूध पीते ही उल्टी कर रहा है।

डकार न दिलवाने पर

यदि आप बच्चे को दूध पिलाने के बाद डकार नहीं दिलवाती है तो दूध के साथ बच्चे में पेट गई हवा के कारण बच्चा उल्टी कर देता है। इसीलिए जब भी बच्चे को दूध पिलायें तो कंधे से लगाकर बच्चे को डकार जरूर दिलवाएं।

बच्चे के पेट में गैस होने पर

महिला जो भी खाती है वो दूध के माध्यम से शिशु तक पहुँचता है ऐसे में यदि आप ऐसा कुछ खा लेती है जिसे शिशु पचा नहीं पाता है तो इस कारण बच्चे के पेट में गैस हो जाती है। ऐसे में जब आप बच्चे को दूध पिलाती है तो बच्चे को दूध हज़म करने में दिक्कत होती है जिसकी वजह से बच्चा दूध के साथ उल्टी कर देता है।

बुखार, खांसी या कफ होने पर

यदि आपके बच्चे को बुखार है या अन्य कोई समस्या जैसे खांसी या कफ है तो इस वजह से भी बच्चे को दूध पीने में दिक्कत हो सकती है। जिस कारण बच्चा उल्टी कर देता है।

रोते समय बच्चे के दूध पीने के कारण

यदि आपका बच्चा रो रहा है और आप उसे दूध पिला रही हैं तो ऐसे में बच्चे का दूध गले में अटक सकता है जिसकी वजह से बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होने के साथ उल्टी भी आ जाती है।

दूध का स्वाद न पसंद आना

यदि महिला कभी ऐसा कुछ खा लेती है जिसकी वजह से दूध के स्वाद में फ़र्क़ आता है। और ऐसे में बच्चे को दूध पिलाने पर यदि बच्चे को दूध का स्वाद पसंद नहीं आता है। तो इस वजह से बच्चे दूध पीने के बाद उल्टी कर देते हैं।

बच्चे का पेट भरा होने की वजह से

कई बार ऐसा भी होता है की महिला बच्चे को थोड़ी थोड़ी देर में दूध पिलाती रहती है, ऐसे में यदि बच्चे का पेट भरा होता है। और आप बच्चे को दूध पिलाती हैं तो इस वजह से भी बच्चा उल्टी कर देता है।

यात्रा की वजह से

यदि आप कहीं बाहर जैसे की धूप से आते ही बच्चे को दूध पिलाती हैं, या गाड़ी में आदि में बच्चे को दूध पिलाती है। तो ट्रैवेलिंग के दौरान बच्चे को दूध पिलाने से भी बच्चे उल्टी कर देते हैं।

बच्चे को उल्टी होने पर डॉक्टर को कब दिखाएं

  • बच्चे की उल्टी में दूध फटा हुआ या दही जैसा न निकलने की बजाय दूध जैसा ही निकलें।
  • उल्टी के साथ खून आने पर।
  • बेबी हरे, पीले या काले रंग की उल्टी करे।
  • उल्टी के साथ बच्चे की बॉडी का तापमान भी बढ़ा हुआ हो।
  • यदि बच्चा उल्टी करने के साथ यूरिन भी ज्यादा पास करे।
  • उल्टी करने के बाद बच्चा सो जाए या सुस्त रहे।
  • बच्चे के उल्टी करने के बाद बच्चे का मुँह सूखा रहे।

तो यह हैं कुछ कारण जिनकी वजह से बच्चा दूध पीने के बाद उल्टी कर देता है। लेकिन यदि बच्चे को उल्टी की परेशानी ज्यादा हो रही हो या ऊपर दिए कारण हो तो महिला को इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए और एक बार बच्चे को डॉक्टर से चेक जरूर करवाना चाहिए।

सर्दियों में बार बार टॉयलेट जाना, ये कारण होते है!

Sardiyon me Baar-Baar Toilet

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सर्दियों के मौसम में ठंड लगना आम बात है लेकिन कई बार यह ठंड बहुत से लोगों के लिए परेशानी का कारण बन जाती है। जाना एक तरफ अधिक ठंड पड़ने से बच्चे बीमार होने लगते है वहीं दूसरी तरफ ठंड बढ़ने के कारण चलने वाली सर्द हवाएं त्वचा से नमी छीनकर उन्हें रुखा बनाने का काम करती है। लेकिन इसके अलावा भी कुछ है जिसके कारण बहुत से लोग सर्दियों में बहुत परेशान रहते है।

और वो है, बार-बार टॉयलेट जाना। जी हां, सभी के साथ नहीं लेकिन कुछ लोग ऐसे होते है जिनके साथ यह समस्या केवल सर्दियों में शुरू हो जाती है। बहुत से लोग इसे बीमारी समझते है जबकि कुछ इसे आम मानते है। जबकि ध्यान दिया जाए तो ये दोनों ही तथ्य गलत है। सर्दियों में मौसम में बार बार टॉयलेट आना न तो कोई बिमारी है और न ही कोई आम बात है। दरअसल यह हमारे द्वारा की जाने वाली गलतियों का नतीजा होता है जिन्हे हम अपने डेली रुटीन में करते है।

हम में से बहुत से लोग सर्दियों के दिनों में कम पानी पीते है और इसका कारण बाथरूम जाना बताते है। जो काफी हद तक सही भी है लेकिन इस समस्या के लिए पूरी तरह से इस कारण को दोषी ठहरना ठीक नही। क्योंकि इसके अलावा भी ऐसी बहुत सी गलतियां है जिन्हे हम और आप अपनी दिनचर्या में करते है और उनपर जरा भी ध्यान नहीं देते।सर्दियों में बार बार टॉयलेट जाना

लेकिन ये भी सच है, अगर किसी व्यक्ति को कोई बीमारी है तो उन्हें भी इस दौरान बार-बार टॉयलेट आएगी। ऐसे में इस समस्या का विशेष कारण जान पाना और भी मुश्किल हो जाता है। क्योंकि हर छोटी से छोटी चीज के लिए डॉक्टर के पास जाना भी ठीक नहीं।

इसीलिए आज हम आपको सर्दियों में बार बार टॉयलेट आने के कुछ विशेष कारणों के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से शायद आप भी अपनी इस समस्या के कारण को पहचान पाएं। लेकिन एक बात का ध्यान रखें की अगर आपकी समस्या का इनमे से कोई कारण नहीं है तो आप तुरंत डॉक्टर से मिलें। क्योंकि हो सकता है जिसे आप आम बात मान रहे हो वह कोई बड़ी बीमारी हो। तो आइये जानते है सर्दियों में बार-बार टॉयलेट आने के क्या होते है?

सर्दियों में बार-बार टॉयलेट आने की समस्या के कारण :-

1. जरुरत से ज़्यादा पानी पीना :drinking water

सर्दियों के समय बाहर का टेम्परेचर काफी कम होता है। जिसकी वजह से हमें ठंड लगती है। ऐसे में जब आप जरुरत से अधिक पानी पीने लगते है तो आपका शरीर उसे एडजस्ट नहीं कर पाता जिसकी वजह से बाथरूम जाना पड़ता है। वो भी एक बार नहीं बल्कि कई बार। और इसी के कारण आपको बार बार टॉयलेट जाना पड़ता है और आप यही सोचते रहते है की आज ठंड बहुत है जबकि गलती तो आपके द्वारा पीये जाने वाले अतिरिक्त पानी की होती है।

2. पुरे कपडे पहन कर सोयें :sleeping person

सभी को नहीं लेकिन बहुत से लोगों को आदत होती है की वे रात को सोते समय अपने कपडे उतार देते है। जिसके कारण बाहर का वातावरण उनके शरीर पर प्रभाव डालता है और उन्हें ठंड लगती है जिससे उन्हें बार-बार बाथरूम आती है। कई बार रात को सोते समय लोगों के शरीर पर से कपडे हट जाते है जिसके कारण उन्हें ठंड लगती है और ठंड लगते ही आपको टॉयलेट आने लगती है। इसीलिए अगर आप रात को सोते समय कपडे उतार कर सोते है तो आज से ही अपनी इस आदत को बदल दें। इसके अलावा रात को सोते समय अपने बिस्तरों का भी ध्यान रखें।

3. गर्म बिस्तर :winter blanket

ऐसे तो सभी लोग सर्दियों में गर्म बिस्तरों का इस्तेमाल करते है लेकिन कुछ लोग इस तरह के बिस्तरों का इस्तेमाल नहीं करते। अब आप सोच रहे होंगे की बिस्तरों का बाथरूम से क्या रिलेशन? शायद आप नहीं जानते, लेकिन आपकी इस समस्या का एक आपका बिस्तर भी हो सकता है। क्योंकि सर्दियों के समय जब आप ठंडे बिस्तर पर जाकर सोते है तो आपके शरीर को भी उसकी ठंडक महसूस होती है जिससे आपको ठंड लगती है और आपको बाथरूम आती है।

जबकि अगर आप गर्म बिस्तरों का इस्तेमाल करते है तो आपके शरीर को ठंड नहीं लगती और आप अच्छा महसूस करते है। साथ ही किसी अन्य कपडे के बिस्तरों का इस्तेमाल करने की बजाय सूती या फर वाले बिस्तरों का इस्तेमाल करें क्योंकि ये आपको ठंड से बचाने और गर्म रखने में मदद करेंगे।

4. हवादार जगहों पर न सोयें :

सर्दियों के दिनों में दोपहर की अपेक्षा रात्रि के समय बहुत ठंडी-ठंडी सर्द हवाएं चलती है। लेकिन कुछ लोगों को खिड़की और दरवाजें खोलकर सोने की आदत होती है। जो की ठीक नहीं है। गर्मियों के समय में तो ये चल जाता है लेकिन अगर आप सर्दियों के मौसम में दरवाजें और खिड़की आदि खोलकर सोते है तो जाहिर सी बात है रात के समय में आपको ठंड लगेगी।

और ठंड लगने के बाद तो बाथरूम आना वाजिब है। कुछ लोग तो हीटर वगैरह चलाकर सोते है उनके साथ ऐसी परेशानी नहीं होगी। अगर आप हीटर अफ़्फोर्ड नहीं कर सकते तो अपने खिड़की दरवाजें आदि को बंद करके ही सोएं। ये आपके लिए ही बेहतर होगा।

5. ठंडी चीजों का सेवन :drinking cold drink

यह बात तो हम सभी भली-भांति जानते है की सर्दियों के मौसम में किसी भी ठंडी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए। लेकिन फिर भी बहुत से लोग इन दिनों में भी ठंडी कोल्डड्रिंक, आइस क्रीम, जूस आदि का सेवन करते है इतना ही नहीं कुछ लोग तो सर्दियों के दिनों में ठंडा पानी पीना भी बहुत पसंद करते है। जबकि वे नहीं जानते की उनके द्वारा की जाने वाली उनके लिए परेशानी का सबब बन सकती है।

जैसा की हम आपको पहले भी बता चुके है की सर्दियों के दिनों में बाहर का टेम्परेचर काफी कम होता है। जबकि हमारे शरीर का टेम्पेरेचर थोड़ा ज़्यादा। ऐसे में जब आप रात के समय किसी ठंडी वस्तु का सेवन करते है तो इसका प्रभाव सीधे आपके शरीर पर पड़ता है जिसे परिणामसवरूप आपको बार-बार टॉयलेट आती है। इसीलिए सर्दियों के दिनों में विशेषकर रात में ठंडी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

6. सोने से पहले बाथरूम :peshab se khun ana

सर्दी हो या गर्मी किसी भी मौसम में रात को सोने से पहले एक बार बाथरूम अवश्य जाना चाहिए। क्योंकि रात के समय खाना खाने के बाद व्यक्ति को एक बार टॉयलेट जरूर आती है और जब आप सोने से पहले बाथरूम नहीं जाते है तो सोने के बाद बाथरूम आना तो लाजमी है। इसीलिए सोने से पहले हमेशा एक बार बाथरूम अवशि जाना चाहिए।

बड़े ही नही बच्चों को भी सोने से पहले बाथरूम जाने की आदत होनी चाहिए ताकि वे बिस्तर में पेशाब न करें। एक बात और बता दें, की बच्चों द्वारा बिस्तर में पेशाब करने का भी यही एक कारण होता है। जो बच्चे रात में सोने से पहले बाथरूम नहीं जाते है उन्हें सोते समय बाथरूम आती है और वे बिस्तर में ही सु-सु कर देते है। इसीलिए आज से ही सोने से पहले खुद और अपने बच्चों को बाथरूम जरूर कराएं फिर चाहे सर्दी हो या गर्मी।

रिमूवर के बिना ऐसे छुड़ाएं नेल पेंट

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नेल पेंट रिमूवर के बिना कैसे छुड़ाएं पुरानी नेल पॉलिश?

लंबे और शेप्ड नाखूनों पर नेल पेंट बहुत सुन्दर लगती है, पर केवल तब तक जब तक वह हटने न लगे। क्योंकि एक बार नेल पेंट हटने लगती है तो उसके बाद नेल्स का पूरा लुक खराब हो जाता है जो काफी अजीब लगता है। ऐसे में उस नेल पेंट को हटाने के लिए नेल पेंट रिमूवर की आवश्यकता पड़ती है, जो लगभग हर लड़की के पास होता है।

परन्तु कई बार ऐसी स्थिति आ जाती है जब आपको कहीं जाना होता है और नेल पेंट रिमूवर खत्म हो जाता है। ऐसे में उस आधी अधूरी नेल पेंट के साथ जाना वाकई बहुत खराब दिखता है। और ये बात हर कोई जानता है की बिना नेल पेंट रिमूवर के नेल पेंट हटाना इम्पॉसिबल है। लेकिन शायद आपको ये नहीं पता की आपके पास कुछ और चीजें भी हैं जिनकी मदद से आप अपनी आधी अधूरी नेल पेंट को बिना किसी परेशानी से हटा सकती हैं।

जी हां, नेल पेंट रिमूवर में एक खास तत्व होता है जो नेल पेंट को हटाने का काम करता है और वही खास तत्व आपकी घर में मौजूद कुछ अन्य चीजों में भी पाया जाता है। ऐसे में अगर कभी नेल पेंट रिमूवर खत्म हो जाए तो आप उनका इस्तेमाल कर सकती हैं। यहाँ उन सभी उपायों के बारे में बताया जा रहा है जिनकी मदद से नेल पेंट रिमूवर के बिना नेल पेंट रिमूव की जा सकती है।

बिना नेल पेंट रिमूवर के नेल पॉलिश कैसे हटाएं?

दूसरी नेल पॉलिश का इस्तेमाल करें

पुरानी नेल पेंट को हटाने के लिए आपको दूसरी डार्क कलर की नेल पॉलिश का प्रयोग करना होगा। प्रयोग के लिए पुरानी नेल पेंट के ऊपर किसी भी डार्क कलर की नेल पेंट के 1 से 2 कोट लगा लें और लगाने के तुरंत 2 सेकंड बाद ही रुई की मदद से उसे पोंछ लें। ऐसा करने से नई नेल पेंट के साथ-साथ पुरानी नेल पेंट भी साफ़ हो जाएगी। लेकिन ध्यान रखें, डार्क नेल पेंट को ज्यादा देर तक नेल्स पर ना रहने दें वरना वो हटेगी नहीं।

बॉडी स्प्रे का प्रयोग करें

रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाला बॉडी स्प्रे भी आपकी पुरानी नेल पेंट को हटाने में मदद कर सकता है। दरअसल बॉडी स्प्रे में भी वही तत्व पाए जाते हैं जो नेल पेंट रिमूवर में होते हैं। इसके लिए आप अपने नेल्स पर बॉडी स्प्रे करें और उसके तुरंत बाद रुई से नेल पेंट पोंछ लें। 2 से 3 स्प्रे में नेल पॉलिश साफ़ हो जाएगी।

परफ्यूम का इस्तेमाल करें 

परफ्यूम हर लड़की के पास होता ही है। और सबसे ख़ुशी की बात ये है की आप इसके इस्तेमाल से भी अपने नेल्स पर से नेल पेंट हटा सकती हैं। इसके लिए रुई पर थोड़ा सा परफ्यूम छिड़कें और फिर उस रुई से नेल पेंट हटाने का प्रयास करें। नेल पेंट अपने आप साफ़ हो जाएगी।

हेयर स्प्रे का प्रयोग करें

बालों को सेट करने के लिए हेयर स्प्रे अधिकतर लड़कियां अपने पास रखती हैं। अगर आप चाहे तो हेयर स्प्रे की मदद से भी आप अपनी पुरानी नेल पेंट को आसानी से हटा सकती हैं। इसके लिए हेयर स्प्रे को नेल्स पर स्प्रे करें और उसके बाद रुई से पोंछ दें। लेकिन ध्यान रहे हेयर स्प्रे नेल्स को ड्राई कर देता है इसीलिए ज्यादा देर तक उसे नेल्स पर ना रहने दें।

ट्रांसपेरेंट नेल पेंट का इस्तेमाल करें

ट्रांसपेरेंट नेल पेंट भी आपके नेल्स पर लगी पुरानी नेल पेंट को हटाने में मदद कर सकती है। इसका इस्तेमाल भी आपको डार्क नेल पेंट के इस्तेमाल की तरह ही करना है। इस नेल पेंट से पुरानी नेल पॉलिश हटाने का ये फायदा है की नाखूनों को वो कलर नहीं रहेगा और जो रहेगा वो ट्रांसपेरेंट नेल पेंट से हट जाएगा।

टूथपेस्ट का प्रयोग करें

अगर ऊपर बताए गए उपाय काम ना करें, तो आप टूथपेस्ट की मदद से अपनी पुरानी नेल पेंट को छुड़ा सकती हैं। इसके लिए टूथपेस्ट को नेल्स पर लगाकर ब्रश से तब तक स्क्रब करते रहें जब तक नेल पॉलिश पूरी तरह साफ ना हो जाए। ऐसा करने से नेल्स अपने आप साफ़ हो जाएंगे। और साथ ही उनकी स्क्रबिंग भी हो जाएगी।

गर्म पानी और मुलायम कपड़ा

इस उपाय की मदद से आपके नाखूनों को कोई नुकसान भी नहीं होगा और नेल पेंट भी साफ़ हो जाएगी वो भी बिना नेल पेंट रिमूवर के।इस उपाय में गर्म पानी की आवश्यकता होगी, तो साथ-साथ आपका मैनीक्योर भी हो जाएगा। नेल पेंट छुड़ाने के लिए एक कटोरे में सहने योग्य गर्म पानी ले लें। उसके बाद 20 से 25 मिनट तक उस पानी में अपने हाथ डालकर रखें। ऐसा करने से पुरानी नेल पेंट नरम हो जाएगी और उसके बाद हाथ बाहर निकालकर नेल्स को मुलायम कपडे से साफ़ कर लें।

हैण्ड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें 

अगर आप कहीं बाहर हैं और आपको अपनी आधी हटी हुई नेल पेंट साफ़ करनी है तो आप उसके लिए हैण्ड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल कर सकती है। ये नेल पेंट को पूरी तरह साफ़ कर देगा। प्रयोग के लिए थोड़ा सा हैण्ड सैनिटाइज़र नेल्स पर लगाएं और फिर कपडे से रगड़कर नाख़ून साफ़ कर लें नेल पेंट हट जाएगी।

तो ये थे कुछ उपाय, जिनकी मदद से बिना नेल पेंट रिमूवर के भी नाखूनों पर से नेल पेंट हटाई जा सकती है। वो भी बिना अधिक पैसे खर्च किये। वैसे अगर आप चाहे तो सामान्य दिनों में भी इन्हे ट्राई कर सकती हैं क्योंकि नेल पेंट रिमूवर का अधिक इस्तेमाल नाखूनों को कमजोर और खुरदुरा बनाता है।

शीघ्र गर्भवती होने के उपाय

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माँ बनना हर महिला का सपना होता है। कई महिलाएं तो गर्भधारण आसानी से कर लेती हैं लेकिन कुछ महिलाओं के लिए गर्भधारण करना बहुत मुश्किल हो जाता है। बार-बार ट्राई करने के बाद भी नेगेटिव रिजल्ट मिलते हैं। जिसके कई कारण हो सकते हैं। कई बार कुछ शरीरिक परेशानी के कारण तो कई बार सही समय पर संबंध नहीं बनाने के चलते गर्भधारण नहीं हो पाता। आज हम आपको शीघ्र गर्भवती होने के कुछ टिप्स बता रहे हैं, जिनकी मदद से आप भी आसानी से गर्भधारण कर पाएंगी।

जल्द से जल्द प्रेग्नेंट होने के उपाय

दोस्तों, बार-बार ट्राई करने के बाद भी गर्भधारण नहीं होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे – खान-पान में लापरवाही, शरीर का कमजोर होना, अंडे का ठीक तरह से नहीं बनना, स्पर्म का अंडे तक नहीं पहुंचना, निषेचन में दिक्क्तें होना, शुक्राणु का कमजोर होना आदि। यहाँ कुछ टिप्स बता रहे हैं जिनकी मदद से आप आसानी से कंसीव कर सकती हैं।

स्वस्थ खान-पान

गर्भधारण के लिए शरीर का पूरी तरह स्वस्थ होना बहुत जरुरी होता है। क्यूंकि शरीर में मौजूद पोषक तत्व ही गर्भधारण की प्रक्रिया में सहयोग करते हैं। अगर वो पोषक तत्व शरीर में पर्याप्त मात्रा में मौजूद नहीं होंगे तो गर्भधारण होने में दिक्क्त आएगी। इसके लिए आपको सम्पूर्ण और संतुलित आहार लेना होगा। खाद्य पदार्थ में कार्बोहायड्रेट, वसा, प्रोटीन और विटामिन्स युक्त भोजन का सेवन करें। और भरपूर मात्रा में पानी पीएं। आप शीघ्र गर्भवती हो जाएंगी।

महिला-पुरुष का स्वस्थ होना

गर्भवती होने के लिए महिला और पुरुष दोनों के यौन स्वास्थ्य का ठीक होना बहुत जरुरी है। क्यूंकि गर्भधारण की पूरी प्रक्रिया महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु पर ही निर्भर करती है। ऐसे में अगर इन दोनों में से किसी एक के साथ कमजोरी या कोई दिक्क्त होगी तो गर्भधारण में मुश्किलें आ सकती है। इसलिए ध्यान रखें।

दवाओं के सेवन से बचें

अगर महिला गर्भधारण करना चाहती हैं तो उन्हें अपने खान पान की आदतों में कुछ बदलाव करने होंगे। यानी अगर आप इससे पूर्व गर्भधारण रोकने के लिए गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती थी तो आपको गर्भधारण करने से पूर्व उसको छोड़ना होगा। इसके अलावा अगर आप प्रेग्नेंट होने के लिए भी दवाओं का सेवन करती थी तो उसे भी बंद कर दें। क्यूंकि इन दवाओं में मौजूद केमिकल्स गर्भधारण में अवरोध उत्पन्न करते हैं।

धूम्रपान आदि से बचें

गर्भधारण करने के लिए आपको शराब या धूम्रपान के सेवन से दूर रहना होगा। क्यूंकि इस तरह के ड्रिंक्स शरीर में TESTOSTERONE की मात्रा बढ़ाने का काम करते हैं जिससे शुक्राणु कमजोर हो जाते हैं और उनकी संख्या भी कम हो जाती है। इसके अलावा तम्बाकू, सिगरेट या कॉफ़ी के अधिक सेवन से भी आपको बचना चाहिए। यह भी गर्भधारण की प्रक्रिया को बाधित करते हैं।

सही समय पर संबंध बनाएं

गर्भवती होने के लिए आपको सही समय पर, सही तरीके से संबंध बनाने होंगे। इसके लिए आप अपने ओवूलूशन पीरियड को जानें जो नियमित मासिक धर्म शुरू होने के 14 से 18 दिन के बीच होता है। जबकि अनियमित मासिक धर्म में यह 2 3 दिन आगे-पीछे हो सकता है।

शीघ्र गर्भवती होने के लिए आपको सुबह के समय संबंध बनाने चाहिए। क्यूंकि सुबह के समय शरीर बहुत फ्रेश होता है और प्रजनन अंग भी बेहतर तरीके से काम करते हैं। ऐसे में गर्भधारण आसानी से हो जाता है।

सही तरीके से संबंध बनाएं

गर्भधारण करने के लिए सही तरीके से संबंध बनाने चाहिए। आपको ऐसी पोजीशन का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे गर्भवती होने में मदद मिले। इसके लिए आप मिशनरी पोजीशन या डॉगी पोजीशन ट्राई कर सकती है। इससे शुक्राणु अंडे के नजदीक पहुँचते हैं और उन्हें निषेचन क्रिया करने के लिए अधिक जद्दोजहत नहीं करनी पड़ती। इसके अलावा संबंध बनाने के बाद कुछ देर लेटे रहें। इससे शुक्राणु के बाहर निकलने की संभावना नहीं रहती और गर्भधारण आसानी से  हो जाता है।

इन सभी उपायों को करने के बाद भी अगर गर्भधारण नहीं हो पाए तो आपको डॉक्टर से मिलकर अपनी जाँच करानी चाहिए। क्यूंकि हो सकता है शरीर में कोई अंदरूनी समस्या है जिसके कारण गर्भधारण नहीं हो पा रहा है। इसके साथ-साथ आपको प्रेग्नेंसी से जुड़े सभी टेस्ट भी करवाने होंगे जिससे पता चल सके की आप गर्भवती होने के तैयार है या नहीं। अगर सब कुछ नार्मल है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप शीघ्र ही गर्भवती होंगी।

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जल्दी माँ बनने के उपाय

अनार खाना क्यों जरुरी होता है प्रेगनेंसी में

जब कोई भी महिला गर्भवती होती है तो वो यही चाहती है की प्रेगनेंसी के दौरान उसे हर परेशानी से बचे रहने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु का विकास अच्छे से हो। ताकि वो एक स्वस्थ शिशु को जन्म दे सके, और शिशु के बेहतर शारीरिक व् मानसिक विकास के लिए सबसे जरुरी होता है की महिला पोषक तत्वों का भरपूर मात्रा में सेवन करे। तो आज हम एक ऐसे ही पोषक तत्वों से भरपूर फल के बारे में बात करने जा रहे हैं जो गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। और वो है अनार, अनार का फल के रूप में या जूस के रूप में सेवन कर सकते हैं इसके बीजों में भी बहुत से पोषक तत्व होते हैं जो प्रेगनेंसी के दौरान फायदेमंद होते है। इसीलिए डॉक्टर्स और प्रेगनेंसी डाइट एक्सपर्ट भी प्रेगनेंसी के दौरान अनार को अपनी डाइट में शामिल करने की सलाह जरूर देते हैं।

प्रेगनेंसी में अनार खाने के फायदे

अनार के लाल लाल छोटे छोटे दाने बहुत से पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं जो गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रखने के साथ बहुत सी परेशानियों से भी बचाने में मदद करते हैं। साथ ही अनार में मौजूद पोषक तत्व गर्भस्थ शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान अनार का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

आयरन

खून की कमी के कारण प्रेग्नेंट महिला और शिशु दोनों को ही परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला अनार का सेवन करती है तो महिला को इन परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है। क्योंकि अनार में आयरन के साथ विटामिन सी भी मौजूद होता है जो आयरन को बॉडी में बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करता है। जिससे प्रेग्नेंट महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में मदद मिलती है।

फाइबर

अनार फाइबर का एक बेहतरीन स्त्रोत होता है जो गर्भवती महिला को पाचन तंत्र से जुडी परेशानियां जैसे कब्ज़, एसिडिटी आदि से निजात दिलाने के साथ मेटाबोलिज्म को बेहतर रखने में भी मदद करता है। और प्रेगनेंसी के दौरान बहुत सी महिलाएं पाचन क्रिया से जुडी समस्याओं से परेशान रहती है ऐसे में अनार का सेवन करने से गर्भवती महिला को इस परेशानी से राहत पाने में मदद मिलती है।

पोटैशियम

प्रेगनेंसी के दौरान मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या का होना आम बात होती है जिसके कारण कई बॉडी पार्ट्स में दर्द की परेशानी भी रहती है। ऐसे में डॉक्टर्स इस समस्या से राहत पाने के लिए अपनी डाइट में पोटैशियम युक्त आहार को शामिल करने की सलाह देते हैं। और अनार में पोटैशियम प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है जो की मांसपेशियों के बीच तरल पदार्थ की मात्रा के संतुलन को बनाएं रखने में मदद करता है। जिससे महिला को मांसपेशियों से जुडी समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है। इसीलिए मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या से राहत पाने के लिए महिला को अनार का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।

एंटीऑक्सीडेंट्स

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण इम्युनिटी कमजोर हो सकती है जिसके कारण महिला और शिशु को संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बॉडी में से विषैले तत्वों को बाहर निकालना बहुत जरुरी होता है, और इस परेशानी से निजात के लिए महिला अनार का सेवन कर सकती है क्योंकि अनार में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो बॉडी में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालकर गर्भवती महिला और शिशु दोनों को बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।

फोलेट

गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर मानसिक विकास के लिए शिशु तक फोलेट को प्रचुर मात्रा में पहुंचाना बहुत जरुरी होता है। और एक गिलास अनार का जूस या एक कटोरी अनार के दाने का सेवन शिशु की एक दिन की दस प्रतिशत तक फोलेट की जरुरत को पूरा करने में मदद करता है जो की शिशु के बेहतर मानसिक विकास के लिए बहुत जरुरी होता है। ऐसे में शिशु के बेहतर मानसिक विकास के लिए गर्भवती महिला को अनार का सेवन जरूर करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में अनार का सेवन करते हुए इन बातों का ध्यान रखें

  • यदि महिला रक्त को पतला करने वाली दवाई का सेवन कर रही हो तो अनार के सेवन से पहले एक बार डॉक्टर से पूछना चाहिए।
  • हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रसित महिलाओं को भी अनार के सेवन से पहले डॉक्टर से पूछना चाहिए।
  • अनार में कैलोरी उच्च मात्रा में मौजूद होती है ऐसे में जरुरत से ज्यादा भी अनार का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि बॉडी में कैलोरी की मात्रा का बढ़ना वजन को ज्यादा तेजी से बढ़ा सकता है, और जरुरत से ज्यादा वजन का बढ़ना महिला के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
  • प्रेग्नेंट महिला यदि अनार के जूस का सेवन करती है तो बाहर से पीने या फिर पैकेट वाले जूस के सेवन से महिला को बचना चाहिए, और घर में ही अनार के ताजे जूस को निकालकर उसका सेवन करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ फायदे और नुकसान जो गर्भवती महिला को अनार का सेवन करने से होते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को हर परेशानी से बचने के लिए अनार का जरुरत के अनुसार ही सेवन करना चाहिए।

बालों में स्पा कैसे करें?

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लंबे, खूबसूरत और आकर्षक बाल महिलाओं की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। पर आजकल के धूल, धुआं और प्रदूषण भरे वातावरण में बालों की खूबसूरती को बरकरार रख पाना वाकई काफी मुश्किल होता है। इसके अलावा सही पोषण ना मिलने और शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण भी बाल कमजोर बेजान और रूखे हो जाते हैं।

बालों की केयर करने के लिए केवल अच्छे शैम्पू और कंडीशनर के प्रयोग से बात नहीं बनेगी। हेयर स्पा ऐसे ही एक तरीके में से एक हैं जिसका प्रयोग करके बालों की चमक को वापस लाया जा सकता है। लेकिन सभी के लिए पार्लर जाकर हेयर स्पा कराना संभव नहीं। आज हम आपको घर पर हेयर स्पा करने का तरीका बता रहे हैं। आप सिर्फ इस प्रक्रिया में प्रयोग होने वाले समानों को घर ले आएं और इस विधि को अपनाएं। आपके बाल पहले से स्मूथ और मुलायम हो जाएंगे।

हेयर स्पा क्यों किया जाता है?

रूखे और बेजान बालों को ठीक करने के लिए हेयर स्पा किया जाता है। इसके अलावा हेयर स्पा स्ट्रेस को भी दूर करता है और बालों को पोषण देकर उन्हें चमकदार बनाता है। हेयर स्पा कराने से बालों में चमक, स्मूथनेस, मजबूती और स्ट्रेंथ आती हैं।

घर पर हेयर स्पा कैसे करें?

हेयर स्पा में पांच स्टेप्स होते हैं जिसमे पहले ऑइलिंग की जाती है, फिर बालों को स्टीमिंग दी जाती है, उसके बाद माइल्ड शैम्पू से बाल धोएं जाते हैं, बालों में कंडीशनिंग की जाती है और अंत में हेयर मास्क लगाया जाता है। आगे हम इन सभी स्टेप्स को विस्तार बता रहे हैं ताकि आप घर पर आसानी से हेयर स्पा कर सके।


Hair Spa Step 1 : ऑइलिंग एंड मसाज

हेयर स्पा का पहला स्टेप है ऑइलिंग एंड मसाज। इस स्टेप में बालों की जड़ों से लेकर सिरों तक हर हिस्से में अच्छे से तेल लगाया जाता है। ताकि पुरे बालों को पोषण मिल सके। इसके लिए आप ओलिव आयल या नारियल के तेल का इस्तेमाल कर सकती हैं।

मसाज के लिए उंगलियों के टिप्स से सर्कुलर मोशन में अपने बालों की मालिश करें। मसाज करने के बाद 10 से 20 मिनट के लिए बालों को ऐसे ही छोड़ दें। इससे बालों की जड़ों तक तेल आसानी से पहुँच जाएगा और बाल नरम होंगे।


Hair Spa Step 2 : स्टीमिंग

ऑइलिंग के बाद दूसरा स्टेप है स्टीमिंग। इस स्टेप में बालों को भाप दी जाती है। पार्लर-सलून में इस प्रक्रिया को मशीन से किया जाता है। पर घर पर आप बिना मशीन के भी स्टीमिंग कर सकती है। इसके लिए सबसे पहले गर्म पानी कर लें।

अब किसी साफ़ टॉवल को भोगीकर हलके हाथों से निचोड़ लें, उस टॉवल को अपने पुरे बालों में अच्छे से लपेट लें। जब तक तौलिया पूरी तरह ठंडी ना हो जाए उसे ऐसे ही रहने दें। एक बार ठंडी होने के बाद दोबारा ऐसा ही करें। इस तरह आपके बालों में स्टीमिंग हो जाएगी।


Hair Spa Step 3 : वाशिंग

हेयर स्पा का तीसरा स्टेप है, वाशिंग। इस स्टेप में बालों को धोकर साफ़ किया जाता है और अच्छे ब्रांड के शैम्पू से वाश किया जाता है। ताकि बालों से पूरा आयल निकल जाए। बाल धोने के लिए आप हलके गुनगुने पानी का प्रयोग करें। ज्यादा गर्म पानी बालों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसीलिए ध्यान रखें।


Hair Spa Step 4 : कंडीशनिंग

हेयर स्पा का चौथा स्टेप है कंडीशनिंग। हेयर वाशिंग के बाद कंडीशनिंग बहुत जरुरी होती है। यह शैम्पू के बाद बालों को होने वाले नुकसान से बचाता है और उन्हें स्मूथ भी करता है। इसके लिए आप चाहे तो होममेड कंडीशनर का भी इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन ये कुछ ज्यादा टाइम ले सकता है। तो आप बाहर से कंडीशनर लाकर यूज कर लें।

इसके लिए आप उसी कंपनी का कंडीशनर लाएं जिसका आपने शैम्पू यूज किया था। कंडीशनर लगाने के बाद बालों को ज्यादा रगड़ें नहीं इससे बाल टूट सकते हैं। तीन मिनट बाद बाल धो लें। आपके बाल कंडीशन हो जाएंगे और उनमे स्मूथनेस भी आएगी।


Hair Spa Step 5 : हेयर मास्क

हेयर स्पा का आखिरी स्टेप है हेयर मास्क। बालों को कंडीशन करने के बाद उनपर हेयर मास्क लगाया जाता है ताकि बालों की स्मूथनेस और शाइन लम्बे समय तक बनी रहे। इसके लिए आप अपने बालों को किसी मोटे कंघे से काढ़ने के बाद उन्हें सीधा कर लें। अब उनमें हेयर मास्क लगा लें। कुछ देर रखने के बाद गुनगुने पानी से हेयर मास्क धो दें। जब आपके बाल सूख जाएं तो उनमे कंघी कर लें।

आपके बाल पहले से अधिक सॉफ्ट, स्मूथ, शाइनी और सुन्दर हो जाएंगे। ये हेयर स्पा फायदेमंद होने के साथ-साथ सस्ता भी हैं। लेकिन ध्यान रहें यह सभी स्टेप्स करने के लिए आपको एक व्यक्ति की जरूरत पड़ेगी। आप खुद ये सब नहीं कर सकती।

हेयर स्पा कराने के फायदे

  • बालों में चमक आती है।
  • स्कैल्प की डैंड्रफ की समस्या दूर होती है।
  • बालों का झड़ना और टूटना कम होता है।
  • बालों को पोषण मिलता है।
  • दो मुंहे बालों की समस्या दूर होती है।
  • कमजोर जड़े मजबूत होती है।
  • बालों में स्मूथनेस आती है।
  • बाल पहले से अधिक सॉफ्ट और शाइनी हो जाते हैं।

टाइफाइड बुखार के देसी इलाज

Remedies For Typhoid (Motijhara)

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आजकल होने वाली बिमारियों का कोई विशेष कारण नहीं होता छोटी सी गलती के कारण भी आपको बड़ी बीमारी का सामना करना पड़ सकता है। उन्ही कुछ बिमारियों में से एक है टायफॉइड। यह एक तरह का बुखार होता है जो व्यक्ति के खून और आंतों में हुए इन्फेक्शन के कारण होता है। यह इन्फेक्शन Salmonella Typhi नाम के बैक्टीरिया के शरीर में प्रवेश करता है जो बाद में बुखार का रूप ले लेता है।

टाइफाइड भी मच्छरों और वायरस के कारण फैलने वाली उन बिमारियों में से एक है जिनमे यदि समय पर सही उपचार न किया जाए तो मरीज की मौत भी हो सकती है। बाहर के दूषित खाद्य और पेय पदार्थों के जरिए ये बैक्टीरिया हमारे शरीर में प्रवेश करता है जो बहुत तेजी से बढ़ता और फैलता है। प्रवेश के बाद यह आँतों से होते हुए खून में शामिल हो जाता है और खून के जरिए यह बैक्टीरिया लिवर, गाल ब्लैडर, और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है। सामान्य भाषा में इसे मोतीझारा या मियादी बुखर भी कहा जाता है।

किन कारणों से फैलता है टाइफाइड और क्या है इसके लक्षण?

इस रोग के होने पर रोगी को सबसे पहले बुखार, सिर में दर्द, कमजोरी और कई बार पेट दर्द होता है। वैसे शुरुवाती बुखार आने पर यदि पेनकिलर या कोई अन्य दवा ले ली जाए तो एक बार बुखार उतर जाता है लेकिन कुछ समय बाद यह वापस आ जाता है। इसे में डॉक्टर को एंटीबायोटिक्स देते है वे ही काम करती है। क्योंकि ये दवा उन बैक्टीरिया को खत्म करके उसके दोबारा पनपने की संभावना को भी कम कर देती है इसीलिए टाइफाइड का पूरा इलाज करना जरुरी होता है। वैसे इसक बीमारी के होने का मुख्य कारण साफ़ सफाई नहीं होना होता है। जिससे ये बैक्टीरिया पनपने है और हमारे शरीर में प्रवेश करते है।

लक्षण :

  • भूख न लग्न
  • तेज बुखार (104 डिग्री)
  • सिर में दर्द रहना
  • उलटी आना और दस्त लग्न
  • पुरे बदन में दर्द
  • कब्ज होना
  • मल में खून आना
  • त्वचा पर निशान पड़ना

यदि आपको उपरोक्त लक्षणों में से एक भी दिखाई दे और बुखार लगातार बना रहे तो तुरंत ब्लड टेस्ट कराएं। इससे आपकी बीमारी की सही जाँच की जा सकेगी और उसका सही उपचार हो पाएगा।

टाइफाइड के घरेलू इलाज :-

1. तुलसी :

बहुत सी बिमारियों के लिए इसका प्रयोग सर्वप्रथम किया जाता है। टाइफाइड बुखार में भी इसका प्रयोग करना लाभकारी होता है। यह खून से बैक्टीरिया को समाप्त करके टाइफाइड दूर करने में मदद करती है। प्रयोग के लिए तुलसी की 25 पत्तियों और एक चम्मच अदरक के पेस्ट को एक कप साफ़ पानी में डालकर उबाल लें। उबल उबाल कर आधा रह जाने के बाद उसमे थोड़ा सा शहद डालकर दिन में 2 से 3 बार इसका सेवन करें।

2. सेब :

इस बीमारी के होने पर मरीज के शरीर में पानी की कमी हो जाती है जिससे बचने के लिए सेब का रस सबसे बेहतर उपाय है। यह काफी लाभकारी होता है इसमें प्राकृतिक मिनरल्स और Electrolytes भी पाए जाते है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते है। प्रयोग के लिए एक ग्लास सेब के जूस में थोड़ा सा अदरक का रस मिलाएं और इसका सेवन करें। दिन में कम से कम एक बार इसका सेवन जरूर करें।

3. लौंग :

टाइफाइड होने पर लौंग का इस्तेमाल भी काफी लाभकारी होता है यह उलटी और दस्त की समस्या में आराम देती है। लौंग में पाए जाने वाले एंटीबैक्टीरियल गुण मोतीझारा की समस्या में आराम पहुंचाते है। इसके लिए 6-7 लौंग लें और उन्हें 3-4 ग्लास पानी में उबाल लें। पानी के उबालकर आधा हो जाने के बाद उसे ठंडा करें और एक हफ्ते तक दिन में 2 से 3 बार इसका सेवन करें।

4. गाजर :gajar for chashma

गाजर बहुत ही गुणकारी सब्जी है जिसका सेवन करने से शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। मियादी बुखार होने पर यह काफी लाभकारी होती है। इससे इम्यून सिस्टम और मजबूत होता है। टाइफाइड बुखार में दस्त लगने पर गाजर के रस का सेवन करने से लाभ होता है। प्रयोग के लिए एक गाजर को छीलकर उसके टुकड़े कर लें और उसे एक ग्लास पानी में उबाल लें। स्वाद के लिए काला नमक मिला लें। दस्त लगने और शरीर में पानी की कमी होने पर इसका सेवन करें। लाभ होगा।

5. लहसुन :

लहसुन में एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते है जो शरीर में मौजूद बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करते है साथ ही टाइफाइड में होने वाली कमजोरी को भी दूर करते है। प्रयोग के लिए सुबह खाली पेट एक हफ्ते तक 2 लहसुन का सेवन करें। इससे टाइफाइड के शुरुवाती लक्षणों के साथ साथ बुखार से भी निजात मिल जाएगा।

टाइफाइड के होने पर खाने में परहेज :

  • कुछ दिनों तक नॉन-वेज और मीठे से परहेज करे।
  • संतरे के जूस का सेवन करें।fast-food
  • मिनरल वाटर या सामान्य पानी को उबाल कर पियें।
  • बाजार में खुले बिकने वाले कच्चे फल न खाएं। इस दौरान घर में बने हुए खाने का ही सेवन करें।
  • खाने पकाने और खाने से पहले अच्छी तरह हाथ साफ़ कर लें।
  • टाइफाइड में दस्त लगने पर दूध और उससे बनी चीजों से परहेज करें।
  • अधिक से अधिक पानी पियें।
  • हरी सब्जियां और जूस / सूप आदि का सेवन करें।

टाइफाइड के उपाय :

1. अगर बुखार तेज है तो एक तौलिया को ठंडे पानी में भिगोकर माथे पर रखें। इससे बुखार कम होगा और वह दिमाग में भी नहीं चढ़ेगा।

2. मियादी बुखार के बचाव के लिए पहले से ही बचपन में टाइफाइड का टीका लगवा लें।

3. मोतीझारा होने पर शरीर में कमजोरी आ जाती है ऐसे में मरीज को पूरा आराम देना जरुरी है।

4. टाइफाइड के होमियोपैथी उपचार के लिए डॉक्टरी सलाह के बिना कोई दवा न लें। यह नुकसानदेह हो सकती है।

5. बुखार से निजात पाने के लिए बाजार में मौजूद गिलोय सत्व और प्रवाल पिष्टी दवा का सेवन आयुर्वेदिक उपचार के रूप में किया जा सकता है लेकिन वो भी डॉक्टरी परामर्श के बाद।

अगर ये पांच चीजे पसंद नहीं तो पेट में लड़का है

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गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए बहुत ही प्यारा समय होता है। लेकिन यह भी सच है की इस दौरान महिला बहुत से शारीरिक और मानसिक बदलाव से भी गुजरती है। प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में लगातार हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं, जिसके कारण महिला के केवल शरीर में ही नहीं बल्कि स्वभाव में भी परिवर्तन देखने को मिलता है, महिला के जीभ का स्वाद भी बदल जाता है, और साथ ही महिला की पसंद नापसंद भी बदल जाती है, आदि। गर्भवती महिला में हो रहे इन्ही बदलाव को देखकर कई बार अंदाजा भी लगाया जाता है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की। तो लीजिये आज हम आपको ऐसी पांच चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जो की यदि महिला को प्रेगनेंसी के दौरान नापसंद होती है तो यह इस बात की और संकेत करती है की गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है।

मीठा नहीं होता है पसंद

प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण बॉडी में बहुत से बलाव आते हैं, और इस दौरान मुँह के स्वाद का बदलना भी आम बात होती है। ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान महिला के गर्भ में यदि लड़का होता है तो महिला को मीठा बिल्कुल भी पसंद नहीं होता है। बल्कि इस दौरान महिला का खट्टा, मसालेदार, तीखा खाने का मन करता है।

ज्यादा आराम करना

गर्भ में पल रहा शिशु यदि लड़का होता है, तो महिला को आलस करना, सारा दिन आराम करना आदि भी पसंद नहीं होता है। जबकि ऐसा माना जाता है की गर्भ में लड़की होने पर महिला अधिक आलसी हो जाती है, और ज्यादा आराम करना पसंद करती है।

चॉकलेट और आइसक्रीम

प्रेगनेंसी महिला के लिए नए नए अनुभवों से भरपूर होती है इस दौरान महिला का कभी किसी चीज की तरफ मन आकर्षित होता है, तो कभी किसी चीज से गर्भवती महिला परहेज करने लगती है। इस दौरान महिला का यदि चॉकलेट या आइसक्रीम खाने का मन नहीं करता है, और न ही महिला इसे देखना पसंद करती है तो यह भी गर्भ में लड़का होने का लक्षण होता है।

कुछ खाने का मन नहीं करता है

महिला को अधिक उल्टियां आना, जी मचलाना, खाने का मन नहीं करना आदि होने के मतलब होता है की गर्भ में लड़का हो सकता है। और सभी परेशानियों के होने के कारण प्रेगनेंसी के दौरान भी महिला को ज्यादा खाना बिल्कुल भी पसंद नहीं होता है। लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान महिला को खान पान से परहेज नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे शिशु के विकास के साथ गर्भवती महिला के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुँचता है।

ज्यादा बात करना

मूड में बदलाव होना भी प्रेगनेंसी के दौरान आम बात होती है जिससे महिला के व्यवहार में भी बदलाव आ सकता है, और यदि गर्भ में लड़का होता है तो महिला को ज्यादा बात करना भी पसंद नहीं होता है, महिला बस अपने आप में ही खुश रहना पसंद करती है। क्योंकि यदि गर्भ में लड़का हो तो प्रेगनेंसी के दौरान चिड़चिड़ापन और गुस्सा आना आम बात होती है।

तो यह हैं कुछ बातें जो गर्भ में लड़का होने पर गर्भवती महिला को बिल्कुल भी पसंद नहीं होती है। लेकिन इसमें घबराने की बात नहीं होती है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान महिला के इस तरह के बदलाव आम बात होती है, और डिलीवरी के बाद महिला बिल्कुल ठीक हो जाती है।

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क्या आपको ज्यादा नींद आती है? तो ये हैं आपके लिए घरेलु उपाय

एक व्यक्ति को दिन में कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए, इसके कारण उन्हें फिट रहने में मदद मिलती है, और जो लोग पर्याप्त नींद लेते है और वो हमेशा फ्रैश, एक्टिव और स्वस्थ रहते है, और जो लोग अपनी नींद को पर्याप्त नहीं लेते है, वो शारीरिक रूप से अस्वस्थ रहते है, इसके साथ जिन लोगो को नींद अधिक मात्रा में आती है, वो लोग भी स्वस्थ नहीं होते है उनके साथ भी हमेशा कोई न कोई परेशानी लगी रहती है, तो आइये इस बारे में विस्तार से जानते है।

इन्हे भी पढ़ें:- जो पूरी नींद नहीं लेता है! उसको ये परेशानियां होती हैं

नींद लेना जहां स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, वहीं ज्यादा या कम नींद लेने के कारण आपके शरीर पर इसके हानिकारक प्रभाव भी पड़ते है, ज्यादा सोने से आपके दिमाग पर भी बुरा असर पड़ता है, इसके कारण आपके सोचने समझने की क्षमता, सीखने और विचार करने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है, इसके कारण आपके शरीर के साथ और भी समस्या हो जाती है, जैसे की आपका मोटापा बढ़ता है, और आप जानते है की मोटापे के साथ बहुत सी बीमारियां भी आपके शरीर में आ जाती है, सर दर्द, कमर दर्द आदि की समस्या भी हो जाती है, तो आपको अपनी इस आदत में सुधार करना चाहिए, अपने आप को एक्टिव रखना चाहिए, इसके अलावा और भी तरीके है जिनका इस्तेमाल करके आप इस समस्या से राहत पा सकते है, तो आइये जानते है की अधिक नींद आने के क्या क्या कारण होते है और आप किस प्रकार इस समस्या से राहत पा सकते है।

अधिक नींद आने के कारण:-

  • जिन लोगो का वजन अधिक होता है उन्हें नींद अधिक आती है।
  • ज्यादा तनाव लेने के कारण भी या तो व्यक्ति को अधिक नींद आती है, या फिर नींद कम आती है।
  • जिन लोगो की दिनचर्या सही नहीं होती है उन्हें भी ये समस्या परेशान करती है।
  • जो लोग एक बार में पूरी नींद नहीं लेते है, उन्हें बारे बार नींद आती है और अधिक मात्रा में वो सोना पसंद करते है।
  • शुगर के रोगियों को भी अधिक मात्रा में नींद आती है।
  • जो लोग मोटापे की समस्या से परेशान होते है उन्हें भी नींद अधिक मात्रा में आती है।

सौंफ का इस्तेमाल करें:-

अधिक नींद आने की समस्या से राहत पाने के लिए आपको सौंफ का इस्तेमाल करने से आपको फायदा मिलता है, इसके उपचार के लिए एक पतीले पानी में दस ग्राम सौंफ को उबाल लें, उसके बाद इसे जब तक उबालें जब तक की ये एक चौथाई न रह जाएँ, उसके बाद इस पानी को ठंडा करके सुबह शाम इस पानी का सेवन सेंधा नमक डाल कर करें, कुछ दिनों तक इस तरीके का इस्तेमाल करने से अधिक नींद आने की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

व्यायाम करें:-

व्यायाम करने से भी आपको फ्रैश रहने में मदद मिलती है, यदि आप सुबह उठ कर नियमित आधा घंटा व्यायाम योगासन आदि करते है, तो आपकी मांसपेशियों को आराम महसूस होता हैं, साथ ही तनाव से ही राहत मिलने में मदद मिलती है, जिसके कारण आपको अत्यधिक नींद आने की समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

ज्यादा मसालेदार भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए:-

जो लोग अधिक मसालेंदार भोजन का सेवन करते है, उन्हें भी शरीर से सम्बंधित कोई न कोई परेशानी लगी ही रहती है, जैसे की मोटापे का बढ़ना, शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा का अनियंत्रित होना, जिसके कारण उनका शरीर हमेशा थका थका महसूस करते है, और उन्हें अधिक नींद आती है, इसीलिए यदि आप इस परेशानी को दूर करना चाहते है, तो आपको अत्यधिक मसालेदार भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।

इन्हे भी पढ़ें:- रात को नींद नहीं आती? चैन से सोना हैं तो करे ये उपाय

रात का भोजन का ख़ास ध्यान रखें:-

कई बार लोग रात को न तो समय से खाना खाते है, और ऊपर से पेट भर के खा लेते है, जिसके कारण या तो उन्हें अधिक नींद आने लगती है, या फिर पेट से सम्बंधित समस्या हो जाती है, और आलस भी अधिक आने लगता है, यदि आप चाहते है की आपको अधिक नींद आने की समस्या से राहत मिले तो इससे बचने के लिए आपको रात के भोजन को हल्का करना चाहिए, इससे आपको अच्छी और बेहतर के साथ पर्याप्त नींद लेने में मदद मिलेगी।

आँखों में काजल लगाएं:-

आँखों में काजल का इस्तेमाल करने से भी आपको नींद कम आती है, इसीलिए यदि आप इस समस्या से परेशान है तो आपको आँखों में काजल लगाना चाहिए ऐसा कहा जाता है की जो लोग आँखों में काजल लगाते है उन्हें नींद कम आती है।

ज्यादा वसायुक्त आहार का सेवन नहीं करना चाहिए:-

यदि आपको भी अधिक नींद आती है, तो इस समस्या से बचने के लिए आपको अधिक वसायुक्त आहार का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके कारण आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जिसके कारण आपके शरीर को नुकसान पहुँचता है, और आपको अधिक नींद आती है इससे बचने के लिए आपको अधिक वसायुक्त आहार का सेवन नहीं करना चाहिए।

तो ये कुछ उपाय है जिनका इस्तेमाल करके आप अधिक नींद आने की समस्या से राहत पा सकते है, इसके अलावा आपको अपने सोने का एक समय निश्चित करना चाहिए, यदि आपको कोई जरुरी काम भी है तो आपको सुबह समय से उठ कर उस काम को करना चाहिए, इसके कारण आपकी सोने की एक दिनचर्या बन जाती है, और आपको एक बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है, और अधिक नींद आने की समस्या से भी आराम मिलता है।