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Benefits of Pomegranate During Pregnancy

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Consuming pomegranate during pregnancy has been shown to have various potential health benefits. Incorporating this fruit into one’s diet may assist in maintaining fetal health, reducing the risk of disease during pregnancy, and promoting postpartum health and vitality. The consumption of pomegranate has been linked to numerous positive health outcomes for expectant mothers and their babies. Therefore, it is recommended that expectant mothers begin incorporating pomegranate into their diets to reap the incredible benefits this fruit has to offer.

Pomegranate fruit is a great source of potassium and folate, two vitamins and minerals that are crucial for pregnant women. Folate aids in the formation of the neural tube in the fetus, and potassium supports a healthy fluid balance in the body. Pomegranate also possesses antioxidant qualities that may lessen the risk of cell deterioration. However, pregnant women should only eat a small amount of it because an excessive amount can cause difficulties.

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प्रेग्नेंट महिला के लिए सोशल मीडिया का अधिक उपयोग घातक कैसे है?

सोशल मीडिया का इस्तेमाल आज कल हर कोई करता है। और यह वो प्लेटफार्म है जहां से आपको बहुत सी जानकारियां मिलती है लेकिन साथ ही कई बार आपको इस पर कुछ ऐसी चीजें भी देखने को मिल जताई है जो की आपको नहीं देखनी चाहिए। खासकर छोटे बच्चों को सोशल मीडिया से दूरी का ध्यान रखना जरुरी होता है क्योंकि इसपर अलग अलग तरह की चीजें होती है जो बच्चों पर बुरा असर डाल सकती है।

साथ ही गर्भावस्था के दौरान भी गर्भवती महिला को सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। क्योंकि सोशल मीडिया का जब इस्तेमाल करते हैं तो कुछ का कुछ खुल जाता है और कई बार ऐसी चीजें सामने आ जाती है जो की गर्भवती महिला के लिए देखनी सही नहीं होती है। जैसे की कभी मौत की खबर, एक्सीडेंट, भूत, कोई गलत वीडियो आदि। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की प्रेग्नेंट महिला के लिए सोशल मीडिया का अधिक उपयोग घातक कैसे होता है।

प्रेग्नेंट महिला को हो सकता है स्ट्रैस

सोशल मेंडिस पर अलग अलग तरह के वीडियो आते रहते हैं जिसमे से कभी किसी की मौत का वीडियो हो सकता है, किसी लड़ाई का वीडियो हो सकता है, कोई डरावना वीडियो या फिर हिंसा का वीडियो हो सकता है, साथ ही कई वीडियो गर्भवती महिलाओं के साथ होने वाली समस्या के भी हो सकते है। ऐसे में इस तरीके की वीडियो देखने के बाद महिला के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।

क्योंकि जो चीजें आप देखते रहते हैं वहीँ आपके दिमाग में भी चलती रहती है। ऐसे में महिला तनाव की शिकार हो सकती है और वो सभी चीजें उसके साथ होंगी ऐसा महसूस कर सकती है। इसीलिए महिला को स्ट्रैस नहीं हो और महिला इन चीजों के बारे में नहीं सोचें इसके लिए महिला को सोशल मीडिया से थोड़ी दूरी रखनी चाहिए।

नींद पूरी न होने के कारण हो सकती है स्वास्थ्य समस्या

आम तौर पर आपने देखा होगा की जब आप फ़ोन का इस्तेमाल करने लगते हैं और उसपर कुछ देखने लगते हैं तो समय का पता ही नहीं चलता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला सारा दिन सोशल मीडिया पर रहती है तो इसकी वजह से महिला अपनी नींद भरपूर नहीं लेती है खासकर रात के समय महिला को फ़ोन का इस्तेमाल करने पर नींद न आने की समस्या हो जाती है। ऐसे में समय से नहीं सोने, नींद पूरी नहीं लेने के कारण शरीर की क्रियाओं पर बुरा असर पड़ सकता है जिसकी वजह से गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां हो सकती है।

प्रेग्नेंट महिला की सोच नेगेटिव हो सकती है

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पॉजिटिव रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि जितना महिला पॉजिटिव रहती है उतना ही गर्भवती महिला और शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। साथ ही प्रेगनेंसी और प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है लेकिन जब महिला प्रेगनेंसी के दौरान मन में चल रहे सवालों के जवाब के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करती है।

तो महिला को उससे जुड़े एक नहीं कई जवाब मिलते हैं और यह जवाब पॉजिटिव के साथ नेगेटिव भी हो सकते हैं और उस दौरान महिला पॉजिटिव चीजों के बारे में कम और नेगेटिव चीजों पर ज्यादा ध्यान दे सकती है। जिसकी वजह से प्रेगनेंसी के दौरान महिला हर चीज के बारे में नेगेटिव होने लगती है जो माँ और बच्चे दोनों के लिए सही नहीं होता है।

सुस्त रहती है प्रेग्नेंट महिला

अब जब गर्भवती महिला सोशल मीडिया पर सारा दिन एक्टिव रहती है तो महिला बिल्कुल भी शारीरिक श्रम नहीं करती है जिसके कारण महिला सुस्त हो जाती है। और एक्टिव न रहने के कारण महिला को शरीर में दर्द, वजन बढ़ने जैसी समस्या हो सकती है जो माँ व् बच्चे दोनों के लये परेशानी खड़ी कर सकती है।

कई बार कर लेती है महिला लापरवाही

इंटरनेट पर आपने देखा होगा की गर्भवती महिला को कई तरह का व्यायाम, योगासन, आदि करते हुए दिखाया जाता है ऐसे में महिला उन्हें यदि बिना किसी की मदद के घर पर करने की कोशिश करती है। और ऐसा करते समय कोई लापरवाही हो जाती है तो इसके कारण महिला माँ व् बच्चे दोनों को दिक्कत हो सकती है। इसीलिए सोशल मीडिया को ज्यादा देखना गर्भावस्था के दौरान सही नहीं होता है।

मूड स्विंग्स हो सकते हैं अधिक

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को मूड स्विंग्स होना आम बात होती है लेकिन सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल करने पर महिला को यह दिक्कत ज्यादा हो सकती है। ऐसे में महिला अधिक चिड़चिड़ापन, गुस्सा आदि महसूस कर सकती है।

बच्चे पर भी पड़ता है बुरा असर

यह बात तो आपने भी सुनी होगी की प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला जो भी करती है उसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है फिर चाहे हो वो अच्छा हो या बुरा हो। वैसे ही प्रेग्नेंट महिला यदि सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल करती है और उसका बुरा असर गर्भवती महिला की सेहत पर पड़ता है तो उसका बुरा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है। जैसे की यदि महिला स्ट्रैस में आती है, समय से अपना आहार नहीं लेती है, नींद पूरी नहीं लेती है, गलत तरीके से व्यायाम करती है तो इन सभी चीजों से शिशु का शारीरिक व् मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है।

तो इन कारणों की वजह से गर्भवती महिला को सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। क्योंकि यदि प्रेग्नेंट महिला सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल करती है तो इसकी वजह से महिला को यह दिक्कतें हो सकती है जिससे प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ सकती है ऐसे में प्रेगनेंसी के दौरान किसी तरह की दिक्कत नहीं आये इससे बचने के लिए गर्भवती महिला को सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

Harmful effect of watching social media during pregnancy

पैंतीस की उम्र के बाद प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं तो इन बातों का ध्यान रखें?

हर महिला अपनी जिंदगी में कभी न कभी माँ बनने का सोचती है कुछ महिलाएं सही उम्र में माँ बन जाती है। तो कुछ महिलाएं शादी देरी से होने के कारण, अपने करियर के कारण थोड़ा लेट प्रेगनेंसी के बारे में सोचती है। या फिर कुछ महिलाएं पहला बच्चा करने के बाद दूसरे बच्चे में गैप ले लती है। ऐसे में उम्र बढ़ने पर प्रेगनेंसी प्लान करना थोड़ा कठिनाई भरा हो सकता है लेकिन नामुमकिन बिल्कुल भी नहीं हो सकता है।

साथ ही यदि महिला प्राकृतिक तरीके से यदि गर्भधारण नहीं करती है तो आज कल मेडिकल ने बहुत तरक्की की हुई है। ऐसे में महिला मेडिकल तरीको का इस्तेमाल करके गर्भधारण कर सकती है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ जरुरी है की महिला प्रेगनेंसी प्लान करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखें। तो आइये आज इस आर्टिकल में हम आपको पैंतीस की उम्र के बाद प्रेगनेंसी प्लान करने पर महिला को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

डॉक्टर से करवाएं जांच

सबसे पहले तो आपको एक अच्छे से डॉक्टर से मिलना चाहिए और आपको व् आपके पार्टनर दोनों को सभी टेस्ट करवाने चाहिए। ताकि आपको यह जानने में मदद मिल सके की उम्र अधिक होने पर आपको कंसीव करने में किसी तरह की दिक्कत तो नहीं है।

हेल्दी डाइट फॉलो करें

आपको अपनी डाइट का ध्यान रखना चाहिए और फोलिक एसिड, आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन से युक्त डाइट लेनी चाहिए जिससे आपके शरीर को प्रेगनेंसी के लिए पूरी तरह तैयार होने में मदद मिल सकें। साथ ही यदि आप कंसीव कर लेती हैं तो यह सभी पोषक तत्व आपको प्रेगनेंसी के दौरान एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करते हैं इसीलिए आपको प्रेगनेंसी के दौरान भी इसी डाइट को फॉलो करना चाहिए।

व्यायाम जरूर करें

यदि आप कंसीव करने का प्लान कर रही है तो दिन भर में थोड़ी देर व्यायाम, योगासन जरूर करें इससे आपके शरीर की क्रियाओं को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है। साथ ही इससे आपको एक्टिव रहने में भी मदद मिलती है।

ओवुलेशन पीरियड का ध्यान रखें

पैंतीस की उम्र में माँ बनने के लिए आपको एक बात का ध्यान रखना चाहिए और वो है आपका ओवुलेशन पीरियड क्योंकि ऐसा माना जाता है। की इन दिनों में सम्बन्ध बनाने से आपको प्रेग्नेंट होने के चांस बढ़ाने में भी मदद मिलती है। साथ ही यदि आपको अनियमित पीरियड की समस्या है तो आपको एक बार डॉक्टर से अपने ओवुलेशन पीरियड की जानकारी लेनी चाहिए ताकि आपको जल्द से जल्द कंसीव करने में मदद मिल सकें।

स्ट्रेस नहीं लें

बड़ी उम्र में माँ बनने में थोड़ी मुश्किलें आ सकती है लेकिन ऐसा नहीं है की आप माँ नहीं बन सकती है ऐसे में आपको स्ट्रेस नहीं लेना चाहिए। बल्कि खुश रहना चाहिए क्योंकि आप शारीरिक के साथ जितना मानसिक रूप से स्वस्थ होंगी उतना ही आपको प्रेगनेंसी के चांस बढ़ाने में मदद मिलेगी और यदि आप स्ट्रेस लेंगी तो हो सकता है की आपको कंसीव न हो या आपको प्रेगनेंसी हो भी जाये तो आपको दिक्कतें अधिक हो। ऐसे में स्वस्थ प्रेगनेंसी के लिए आपको बिल्कुल स्ट्रेस फ्री रहना चाहिए।

वजन का ध्यान रखें

यदि आपका वजन जरुरत से ज्यादा है या कम है तो आपको अपने वजन का ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि यदि आपका वजन ज्यादा है तो भी सही नहीं है और कम है तो भी सही नहीं है। ऐसे में आपको बढ़ती उम्र में गर्भधारण में कोई समस्या नहीं आये इसके लिए आपको अपने वजन को सही रखना चाहिए।

यदि कोई समस्या है तो उसका इलाज करें

पैंतीस की उम्र में गर्भधारण करने पर वैसे ही परेशानियां होने का खतरा अधिक होता है ऐसे में यदि महिला की उम्र अधिक है और महिला को कोई शारीरिक समस्या है। तो पहले महिला को उसे नियंत्रित करना चाहिए उसके बाद गर्भधारण की कोशिश करनी चाहिए। ताकि आपको बाद में किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े।

मन में कोई डर नहीं रखें

यदि आप पैंतीस की उम्र में गर्भधारण के लिए ट्राई कर रही है तो आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आपके मन में कोई डर या सवाल नहीं हो। और यदि आपके मन में कोई डर या सवाल है तो आप पहले उसका समाधान करें। उसके बाद आप माँ बनने के बारे में ट्राई करें क्योंकि जब तक मन में सवाल, चिंता, डर होगा तब तक आप अच्छे से कुछ भी नहीं कर सकेंगे।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिन्हे महिला को पैंतीस की उम्र में गर्भधारण का प्लान करने पर ध्यान रखना चाहिए यदि महिला इन बातों का ध्यान रखती है। तो इससे महिला को कंसीव करने में आसानी होती है साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ रहने में भी मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के लास्ट वीक में क्या होता है?

स्वस्थ प्रेगनेंसी के सैंतीसवें हफ्ते से इकतालीसवें हफ्ते के बीच महिला की डिलीवरी कभी भी हो सकती है। और इन्ही में से कोई भी वीक महिला के लिए प्रेगनेंसी का लास्ट वीक हो सकता है। कुछ केस ऐसे भी होते हैं जिनमे महिला की डिलीवरी समय से पहले भी हो जाती है।

समय से पहले डिलीवरी होने पर कई बार और बच्चे दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यदि महिला की डिलीवरी सही समय पर हो रही है तो माँ और बच्चे दोनों को दिक्कतें होने का खतरा कम होता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के लास्ट वीक में क्या- क्या हो सकता है उस बारे में बात करने जा रहें हैं।

प्रेगनेंसी के लास्ट वीक के लक्षण

गर्भावस्था के लास्ट वीक में महिला को शरीर में बहुत से लक्षण महसूस हो सकते हैं और यह लक्षण महसूस होना आम बात होती है। जैसे की:

तरल पदार्थ का रिसाव: महिला को ब्रेस्ट में से तरल पदार्थ का रिसाव हो सकता है और इस रिसाव होने का कारण ब्रेस्ट में दूध का बनना होता है।

यूरिन करने की इच्छा में बढ़ोतरी: प्रेगनेंसी के लास्ट वीक में महिला की यूरिन बार बार करने की इच्छा हो सकती है।

पेट के निचले हिस्से पर दबाव: पेल्विक एरिया पर दबाव ज्यादा पड़ने लगता है जिसके कारण ऐसा महसूस हो सकता है जैसे की कुछ नीचे गिरने वाला है।

डायरिया की समस्या: कुछ गर्भवती महिलाओं को डायरिया की समस्या का सामना भी करना पड़ सकता है।

बच्चे की हलचल: शिशु की मूवमेंट में कमी आ सकती है क्योंकि शिशु अब अपने जन्म लेने की सही पोजीशन में आ चूका होता है। लेकिन ध्यान रखें की थोड़ी बहुत शिशु हलचल करेगा और यदि शिशु ऐसा नहीं कर रहा है तो डॉक्टर से जल्द से जल्द मिलें।

पेट में दर्द: पेट और पेट के निचले हिस्से में महिला को रुक रुक कर दर्द महसूस हो सकता है और यदि पेट में असहनीय दर्द हो तो यह प्रसव का लक्षण होता है।

सफ़ेद पानी: प्राइवेट पार्ट से सफ़ेद पानी आने की समस्या हो सकती है और यदि यह पानी ज्यादा मात्रा में निकल रहा हो तो इसका मतलब होता है की डिलीवरी होने वाली है।

पीठ में दर्द: पेट के साथ कुछ महिलाओं को पीठ में दर्द महसूस हो सकता है। जिसके कारण महिला को दिक्कत अधिक हो सकती है।

परेशानी अधिक होती है: प्रेगनेंसी के लास्ट वीक में उठने, बैठने, सोने, में ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी के लास्ट वीक में किन बातों का ध्यान रखें

  • गर्भावस्था के लास्ट वीक में महिला को अपने खान पान का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए ताकि महिला को एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिल सके।
  • महिला को अपना डिलीवरी बैग तैयार कर लेना चाहिए।
  • गलती से भी महिला को इस दौरान अकेले नहीं रहना चाहिए और किसी न किसी को अपने पास में रखना चाहिए।
  • डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए।
  • किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
  • टेंशन से दूर रहना चाहिए और खुश रहना चाहिए।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो प्रेगनेंसी के लास्ट वीक में महिला को महसूस हो सकते हैं। ऐसे में महिला को उन लक्षणों का ध्यान रखना चाहिए जो प्रसव पीड़ा के होते हैं। जैसे की प्राइवेट पार्ट से पानी या खून निकलना, पेट में दर्द, पीठ में दर्द आदि। ताकि महिला को डिलीवरी को आसान बनाने और डिलीवरी के समय होने वाली परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके। और यदि डिलीवरी डेट निकल जाने के बाद महिला को प्रसव के कोई लक्षण महसूस नहीं हो तो महिला को जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलना चाहिए। क्योंकि समय से ज्यादा गर्भ में शिशु का रहना रिस्क बन सकता है।

Last week of pregnancy

प्रेग्नेंट होने के 10 लक्षण

पीरियड्स खत्म होने के बाद जब भी महिला और पुरुष आपस में सम्बन्ध बनाते हैं तो उस समय में यदि महिला के अंडाशय में होने वाले अंडे और पुरुष के शुक्राणु का मिलन हो जाता है तो ऐसा होने पर महिला के गर्भ ठहरने के चांस बढ़ जाते है। खासकर ओवुलेशन पीरियड्स के दौरान ऐसा होने के चांस अधिक होता है। ओवुलेशन पीरियड पीरियड्स शुरू होने से लेकर आठवें दिन से सोहलवें दिन तक का समय होता है इन दिनों में गर्भ ठहरने के चांस सबसे अधिक होते हैं। ऐसे में यदि महिला का गर्भ ठहर जाता है तो उसी समय से महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव होने शुरू हो जाते हैं। और उसके अलग अलग लक्षण शरीर में महसूस भी होते हैं। आज इस आर्टिकल में हम उन्ही लक्षणों के बारे में बात करने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी के लक्षण कब से शुरू होते हैं?

पहले महीने में आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं उसे आप चेक नहीं कर सकते लेकिन यदि अंडे और शुक्राणु का मिलन हो गया है। तो इसके कारण शरीर में आपको बहुत से लक्षण महसूस हो सकते हैं। और यह लक्षण आपको प्रेगनेंसी के पहले महीने में ही थोड़े बहुत महसूस हो सकते हैं।

क्या सभी प्रेग्नेंट महिलाओं को एक जैसा महसूस होता है?

जी नहीं, ऐसा बिल्कुल जरुरी नहीं होता है की हर गर्भवती महिला को शरीर में एक जैसे ही लक्षण महसूस हो। क्योंकि हर महिला का शरीर अलग अलग होता है ऐसे में उन्हें प्रेगनेंसी के दौरान महसूस होने वाले लक्षण भी अलग अलग हो सकते हैं और कुछ लक्षण ऐसे भी होते हैं जो अधिकतर गर्भवती महिलाओं को महसूस होते हैं।

प्रेग्नेंट होने के लक्षण

यदि किसी महिला का गर्भ ठहर गया है तो उसे शरीर में होने वाले अंदरूनी बदलाव के कारण शरीर में कुछ लक्षण महसूस हो सकते हैं। जैसे की:

पीरियड्स मिस होना

गर्भावस्था का सबसे अहम लक्षण होता है की यदि महिला प्रेग्नेंट होती है तो उसके पीरियड्स मिस हो जाते हैं। और पीरियड्स मिस होने के बाद ही महिला घर में या डॉक्टर के पास जाकर प्रेगनेंसी टेस्ट करवाती है।

स्पॉटिंग होना

यदि महिला को पीरियड्स नहीं आ रहे हैं लेकिन महिला को अपनी पैंटी में खून के थोड़े बहुत धब्बे नज़र आ रहे हैं तो यह लक्षण भी महिला के गर्भवती होने का होता है। क्योंकि निषेचन की प्रक्रिया के दौरान महिला को स्पॉटिंग हो सकती है।

थकान व् कमजोरी

प्रेग्नेंट होने पर शरीर के अंदर दुगुनी तेजी से काम होने लगता है शरीर में अंदरूनी बदलाव होते हैं। और इन बदलाव के होने पर महिला को थकान व् कमजोरी महसूस हो सकती है।

जी मिचलाना व् उल्टी होना

प्रेगनेंसी के दौरान अधिकतर महिलाओं को जी मिचलाना व् उल्टी होने का लक्षण महसूस हो सकता है। कुछ महिलाओं को उल्टी की समस्या थोड़ी बहुत तो कुछ महिलाओं को कुछ भी खाने पीने या गंध से भी उल्टी आने की दिक्कत हो सकती है।

सूजे हुए ब्रेस्ट

गर्भावस्था के लक्षणों के बारे में बात की जाये तो महिला को अपने ब्रेस्ट सूजे हुए, ब्रेस्ट को हाथ लगाने पर दर्द, निप्पल का रंग गहरा आदि भी महसूस हो सकते हैं।

बार बार यूरिन आने की समस्या

शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव, रक्त की मात्रा बढ़ने आदि के कारण किडनी का काम बढ़ जाता है ऐसे में यूरिन पास करने की इच्छा में बढ़ोतरी हो सकती है। तो यदि महिला को बार बार यूरिन पास करने की इच्छा अधिक हो तो यह भी प्रेगनेंसी का ही लक्षण होता है।

मूड स्विंग्स होना

शरीर में होने वाले अंदरूनी बदलाव का असर महिला के व्यवहार पर भी देखने को मिल सकता है ऐसे में यदि महिला को अचानक से मूड स्विंग्स हो तो महिला को समझ जाना चाहिए की महिला का गर्भ ठहर गया है।

शरीर का तापमान

यदि महिला को ऐसा महसूस हो रहा है की महिला के शरीर का तापमान बढ़ गया है साथ ही पीरियड्स भी डिले हो गए हैं तो ऐसा होना भी महिला के गर्भवती होने का लक्षण होता है।

टेस्ट और स्मैल में बदलाव

यदि महिला को अपनी पसंद की चीज का स्वाद अब अच्छा नहीं लग रहा है या स्मेल अच्छी नहीं लग रही है और महिला को कुछ अलग अलग खाने की इच्छा हो रही है तो ऐसा होना भी महिला के प्रेग्नेंट होने का लक्षण होता है। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान महिला की पसंद नापसंद में बदलाव आ सकता है।

पेट में दर्द

हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की पाचन क्रिया पर भी असर पड़ सकता है जिसकी वजह से महिला को पेट में दर्द की समस्या हो सकती है। इसके अलावा गर्भाशय में आने वाले बदलाव के कारण भी महिला को पेट में दर्द की समस्या हो सकती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी होने पर महिला को शरीर में कौन कौन से लक्षण महसूस हो सकते हैं उससे जुडी जानकारी, साथ ही यदि आप बच्चे को जन्म देना चाहती हैं तो शुरुआत से ही अपना अच्छे से ध्यान रखें ताकि प्रेगनेंसी में किसी भी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं हो।

Symptoms to know that you are pregnant

बेबी बॉय के लिए क्या करना चाहिए?

दुनिया के सबसे प्यारे अहसास और अनुभव के बारे में यदि किसी महिला से बात की जाये तो वो हमेशा प्रेगनेंसी के नौ महीने के बारे में जरूर बोलती है इसके अलावा एक पुरुष के लिए भी बाप बनना उसकी जिंदगी का सबसे बेहतरीन पल होता है। वैसे तो गर्भ में पल रही संतान लड़का हो या लड़की इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ना चाहिए। लेकिन फिर भी ज्यादातर लोग यह चाहते हैं की उनकी पहली संतान एक बेटा हो या फिर जिन महिलाओं द्वारा पहले पुत्री को जन्म दिया जाता है तो उन महिलाओं को दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान पुत्र पाने की इच्छा होती है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिससे आपकी इस इच्छा को पूरी होने में मदद मिल सकती है। लेकिन उससे पहले जानते हैं की बेबी बॉय कैसे जन्म लेता है।

बेबी बॉय कैसे जन्म लेता है?

बच्चे के जन्म लेने की प्रक्रिया पूरी तरह से शुक्राणु के मिलन यानी क्रोमोसोम के मिलन पर निर्भर करती है। पुरुष के शुक्राणु में दो तरह के क्रोमोसोम होते हैं जिनमे से एक x होता है और एक y होता है। इसके विपरीत महिला में दोनों x ही होते हैं। ऐसे में यदि निषेचन के समय जब पुरुष के शुक्राणु महिला के अंडाशय में मौजूद अंडे के साथ निषेचन की क्रिया करते हैं। और निषेचन के दौरान यदि महिला और पुरुष के x x क्रोमोसोम का मिलना होता है तो गर्भ में लड़की होती है जबकि यदि महिला के x और पुरुष के y क्रोमोसोम का मिलन होता है तो गर्भ में लड़का होता है।

लड़का चाहते हैं तो इन उपाय को ट्राई करें

यदि कोई कपल चाहता है की उनकी होने वाली संतान एक नन्हा राजकुमार हो तो महिला को पुरुष को इन टिप्स को जरूर ट्राई करना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

चाय या कॉफी पीएं

सम्बन्ध बनाने से पंद्रह या बीस मिनट पहले पुरुष को कॉफ़ी या चाय पीनी चाहिए ऐसा करने से शुक्राणु की गति तेज और उनके थोड़ा ज्यादा समय तक जिन्दा रहने की शक्ति बनी रहती है। हो सके तो ऐसा महिला को भी जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से पुत्र प्राप्ति के चांस बढ़ाने में मदद मिलती है।

सम्बन्ध बनाते समय रहे तनावमुक्त

लड़का पाने की इच्छा रखने वाले कपल को सम्बन्ध बनाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वो सम्बन्ध बनाते समय उस समय को अच्छे से एन्जॉय करें और खुश रहें। सम्बन्ध बनाते समय किसी भी तरह का तनाव नहीं ले ऐसा करने से भी लड़का होने के चांस बढ़ाने में मदद मिलती है।

एक से ज्यादा बार बनाएं सम्बन्ध

यदि कपल एक दिन में दो से तीन बार सम्बन्ध बनाता है तो इससे y क्रोमोसोम के मिलन की सम्भावना बढ़ती है। जिससे महिला के x और पुरुष के y क्रोमोसोम मिलते हैं लड़का होने के चांस बढ़ाने में फायदा मिलता है।

सम दिनों में बनाएं सम्बन्ध

लड़का पैदा करने के लिए महिला और पुरुष को सम दिनों में ही सम्बन्ध बनाने का प्रयास करना चाहिए। जैसे की पीरियड्स खत्म होने की चौथी, छठी, आठवीं, दसवीं, बाहरवीं, चौहदवीं, सोहलवीं रात या दिन को ही सम्बन्ध बनाने की कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा एक बात का ध्यान रखें की यदि आपको एक तारीख की रात को आठ बजे पीरियड शुरू हुए हैं तो 2 तारीख की रात को आठ बजे आपका एक दिन पूरा होगा इसी के आधार पर ध्यान रखें ताकि आपको पुत्र प्राप्ति में मदद मिल सके।

सही पोजीशन का रखें ध्यान

यदि आप चाहते हैं की आपको पुत्र पैदा हो तो आपको सम्बन्ध बनाते समय सही पोजीशन का ध्यान रखना भी जरुरी होता है। जैसे की महिला को उन पोजीशन को ट्राई करना चाहिए जिससे पुरुष का प्राइवेट पार्ट में महिला के प्राइवेट पार्ट में गहराई तक जा सके। जैसे की महिला को ऊपर बैठकर सम्बन्ध बनाना आदि पोसिशन्स आप ट्राई कर सकते हैं।

महिला पहले पहुंचे चरमसुख तक

यदि सम्बन्ध बनाते समय पुरुष से पहले महिला चरमसुख तक पहुँचती है तो उस केस में महिला के गर्भ में पुत्र होने चांस बढ़ जाते हैं। ऐसे में कपल को सम्बन्ध बनाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए की महिला चरमसुख तक पहले पहुंचें।

नशे से दूर रहें

लड़का चाहने वाले पुरुषों को जितना हो सके नशे से दूर रहना चाहिए और नशे में सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए क्योंकि अल्कोहल, धूम्रपान जैसा नशा करने के कारण य क्रोमोसोम के नष्ट होने शुक्राणु की कमी होने जैसी समस्या हो सकती है जिससे लड़का न पैदा होने के साथ गर्भधारण में भी समस्या आने का खतरा रहता है।

इन खाद्य पदार्थों का सेवन करें

लड़का चाहने वाले कपल को अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, मूली, फलियां, गाजर, शकरकंद, नॉन वेज आदि का सेवन भरपूर करना चाहिए। इससे शुक्राणु की गुणवत्ता बेहतर होती है जिससे लड़का होने के चांस बढ़ाने में भी मदद मिलती है।

दूसरी प्रेगनेंसी है तो ध्यान रखें

यदि आपको पहले बेटी हुई है तो अपनी दूसरी प्रेगनेंसी में चार से पांच साल का अंतराल जरूर रखें ऐसा करने से आपको दूसरी बार लड़का पैदा होने के चांस में वृद्धि होती है।

तो यह हैं लड़का पैदा करने के कुछ उपाय यदि आप भी चाहते हैं की आप एक प्यारे से पुत्र को जन्म दें तो आप भी इन टिप्स को ट्राई कर सकते हैं।

Tips for Baby Boy

घर के अंदर कौन- कौन से पौधे नहीं लगाएं?

घर की बालकनी या छत पर लगे पौधे न केवल दिखने में सूंदर लगते हैं, बल्कि इससे घर के वातावरण को शुद्ध रहने, आपको हरियाली में थोड़ी देर रिलैक्स करने आदि में भी फायदेमंद होते हैं। और कई लोगो को तो घर में पौधे लगाने का बहुत ही ज्यादा शौक होता है। और वो हर तरह के पौधे घर में लगवाते रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं की घर की रौनक बढ़ाने वाले यह पौधे कई बार आपके घर की बरकत को घटाने, आपके घर में नेगेटिविटी को बढ़ाने का काम करते हैं। यदि नहीं, तो आइये आज इस आर्टिकल में हम जानते हैं की घर में कौन से पौधों को लगाना अशुभ माना जाता है और आपको उन पौधों को घर में बिल्कुल भी नहीं लगाना चाहिए।

कांटेदार पौधें

जिन पौधों में कांटे होते हैं जैसे की कैक्टस, यह दिखने में तो सूंदर होते हैं। लेकिन इन्हे घर में लगाना काफी अशुभ माना जाता है।

इमली

इमली का छोटा पौधा या पेड़ घर या घर के आस पास नहीं लगाना चाहिए क्योंकि पुराने समय से ही ऐसा माना जाता है की इमली के पेड़ या पौधे पर बुरी आत्माओं का वास होता है। ऐसे में यदि आपके घर के गमले में भी इमली का पौधा है तो आप आज ही उसे घर से बाहर कर दें।

मेहँदी

मेहँदी महिलाओं के लिए बहुत ही शुभ मानी जाती है यह सुहाग का प्रतीक होने के साथ महिला की हाथों की रंगत को बढ़ाने और बालों की चमक को बढ़ाने में भी फायदेमंद होती है। लेकिन आपको घर में कभी भी मेहँदी का पौधा या पेड़ नहीं लगाना चाहिए क्योंकि मेहँदी के पेड़ या पौधे को घर में लगाना बहुत ही अशुभ माना जाता है।

कपास का पौधा

घर में कपास का पौधा भी बिल्कुल नहीं लगाना चाहिए क्योंकि कपास का पौधा घर के लिए बहुत ही अशुभ माना जाता है। यदि आपके घर में भी कपास का पौधा है तो आपको उसे तुरंत घर से बाहर कर देना चाहिए ताकि आपके घर में किसी भी तरह की नेगेटिविटी नहीं हो।

सूखे हुए पौधें

यदि आपके घर में जो पौधे हैं वो सूखने लगते हैं और उनकी केयर करने पर भी वो उभर कर नहीं खिलतें हैं। तो आपको ऐसे पौधों को घर से बाहर कर देना चाहिए क्यों सूखे हुए पौधे घर के लिए बहुत ही अशुभ माने जाते हैं।

बोनसाई

बोनसाई का पौधा दिखने में काफी आकर्षित करने वाला होता है लेकिन आपको इस पौधे को घर में बिल्कुल भी नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि ऐसा माना जाता है की घर में यदि बोनसाई का पौधा लगाया जाता है तो इससे घर के सदस्यों की प्रगति के मार्ग में रुकावट आती है।

घर की दीवारों पर लगने वाले पौधें

आज कल बालकनी की दीवारों को सुन्दर बनाने के लिए लोग दीवारों पर भी छोटे छोटे गमले लगाकर पौधे लगा देते हैं। जो दिखने में बहुत ही सूंदर लगते हैं लेकिन गमले लगाते समय आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए की आप घर के उत्तर व् पूर्व दिशा की दीवार पर पौधे नहीं लगाएं क्योंकि इस दिशा में पौधे लगाना बहुत ही अशुभ माना जाता है।

मदार का पौधा

मदार के पौधे में से दूध जैसा कुछ निकलता है वास्तु के अनुसार ऐसे पौधे को घर में बिल्कुल नहीं लगाना चाहिए। क्योंकि ऐसे पौधे घर में नेगेटिव ऊर्जा को बढ़ाते हैं।

पीपल

कई बार पीपल का पेड़ अपने आप ही घर में उगने लगता है ऐसे में आपको उसे जल्द से जल्द वहां से हटा देना चाहिए क्योंकि यह घर में लगा हुआ अशुभ माना जाता है। लेकिन ध्यान रखें आप इसे काटें नहीं बल्कि इसे जड़ समेत निकालकर किसी मंदिर आदि में लगा आएं।

तो यह हैं वो पौधें जिन्हे आपको घर में बिल्कुल भी नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इन पौधों को घर में लगाने से घर में नेगेटिविटी फैलती है। इसके अलावा आपको इस बात का ध्यान भी रखना चाहिए की आप पौधों की अच्छे से कार करें ताकि वो हरे भरे रहें और बिल्कुल भी नहीं सूखें साथ ही समय समय पर उनकी कटाई, खाद आदि का भी ध्यान रखना चाहिए।

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प्रेगनेंसी में प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन होने पर शिशु पर क्या प्रभाव पड़ता है?

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भवती महिला का शरीर दुगुनी तेजी से काम करता है। और उतनी ही तेजी से शरीर में हार्मोनल बदलाव भी होते हैं। इन्ही हार्मोनल बदलाव के कारण महिला का वजाइनल एरिया बहुत सेंसिटिव हो जाता है। ऐसे में यदि प्राइवेट पार्ट की साफ सफाई का ध्यान नहीं रखा जाए, शरीर में पानी की कमी हो, तो ऐसे कुछ कारणों की वजह से वजाइनल इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।

जिसके कारण महिला को दिक्कत हो सकती है क्योंकि वजाइनल इंफेक्शन होने की वजह से महिला को प्राइवेट एरिया में दिक्कत महसूस हो सकती है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपको महिला को वजाइनल इन्फेक्शन होने पर शिशु पर क्या प्रभाव पड़ता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं।

वजाइनल इन्फेक्शन होने के लक्षण

गर्भवती महिला को यदि वजाइनल इन्फेक्शन हो जाता है तो ऐसा होने पर महिला को अलग अलग लक्षण महसूस हो सकते है जिन्हे आप दिक्कत भी कह सकते हैं। जैसे की:

  • महिला को प्राइवेट पार्ट में खुजली व् जलन महसूस हो सकती है।
  • सफ़ेद पानी निकलने की समस्या अधिक हो जाती है।
  • प्राइवेट पार्ट से बदबू आने लगती है।
  • पेशाब करते समय दर्द व् जलन महसूस होना।
  • सम्बन्ध बनाते समय दिक्कत महसूस हो सकती है।

किन कारणों से हो सकता है प्राइवेट पार्ट में संक्रमण?

गर्भवती महिला को यदि प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन हो जाता है तो इसके कई कारण हो सकते हैं। तो आइये अब इन कारणों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के शरीर में लगातार बहुत से हार्मोनल बदलाव होते रहते हैं और इन्ही हार्मोनल बदलाव के चलते गर्भवती महिला की वजाइना सेंसिटिव हो जाती है जिसकी वजह से इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

साफ़ सफाई न रखना

गर्भवती महिला यदि प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान नहीं रखती है तो इसकी वजह से प्राइवेट पार्ट में हानिकारक बैक्टेरिया बढ़ने लगता है जिसकी वजह से इन्फेक्शन हो जाता है।

शरीर में पानी की कमी होने के कारण

गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी होने के कारण महिला को यूरिन इन्फेक्शन हो जाता है जिसकी वजह से महिला को प्राइवेट पार्ट में दर्द, जलन, सूजन जैसी समस्या हो सकती है।

शारीरिक परेशानी होने के कारण

जिन महिलाओं को हाई ब्लड शुगर, डाइबिटीज़ जैसी परेशानियाना होती है उन्हें भी इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

सम्बन्ध बनाने के कारण

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को या महिला के पार्टनर को इन्फेक्शन होता है और वो सम्बन्ध बनाते है तो इसकी वजह से महिला को इन्फेक्शन बढ़ सकता है। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान बिना सुरक्षा के सम्बन्ध बनाने के कारण इन्फेक्शन होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

क्या महिला को इन्फेक्शन होने पर शिशु को दिक्कत होती है?

गर्भस्थ शिशु एमनियोटिक फ्लूड में होता है और गर्भाशय में फ्लूड में शिशु बिल्कुल सेफ होता है क्योंकि प्राइवेट पार्ट से हानिकारक बैक्टेरिया शिशु तक नहीं पहुँच सकता है। ऐसे में यदि महिला को वजाइनल इन्फेक्शन होता है तो शिशु पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। लेकिन हाँ, इसकी वजह से महिला को दिक्कत हो सकती है ऐसे में महिला को इसका ट्रीटमेंट जरूर करवाना चाहिए।

प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

  • महिला को सबसे पहले तो प्राइवेट पार्ट की साफ़ सफाई का ध्यान रखना चाहिए जिससे महिला को यह समस्या नहीं हो।
  • ज्यादा टाइट अंडरगार्मेंट्स नहीं पहनने चाहिए।
  • प्राइवेट पार्ट के लिए ज्यादा खुशबूदार चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  • सम्बन्ध बनाते समय सेफ्टी जरूर इस्तेमाल करनी चाहिए।
  • शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए।
  • मीठी चीजों का सेवन अधिक नहीं करना चाहिए।
  • इन्फेक्शन होने पर एक बार डॉक्टर से राय जरूर लेनी चाहिए।

तो यह है प्रेगनेंसी के दौरान प्राइवेट पार्ट में इन्फेक्शन होने पर शिशु को दिक्कत महसूस होती है या नहीं उससे जुडी जानकारी, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ताकि इन्फेक्शन होने पर आपको पता चल सके जिससे आप जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान कर सकें।

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प्रेग्नेंट महिला को सुबह खाली पेट क्या खाना पीना नहीं चाहिए? शिशु को हो सकता है नुकसान

हर गर्भवती महिला यही चाहती है की उसका होने वाला शिशु स्वस्थ हष्ट पुष्ट व् तंदरुस्त हो। इसीलिए प्रेगनेंसी के पूरे नौ महीने महिला इस बात का सबसे ज्यादा रखती है की महिला केवल वही खाये पीये, वही काम करे जिससे शिशु का विकास अच्छे से हो और किसी भी तरह की गलती नहीं करती है।

लेकिन कई बार प्रेगनेंसी के दौरान सभी चीजों के बारे में सही जानकारी न होने के कारण महिला कुछ गलतियां कर सकती है जिसकी वजह से महिला की सेहत के साथ शिशु के विकास पर भी बुरा असर पड़ता है। आज इस आर्टिकल में हम खाने पीने को लेकर आपको बताने जा रहे हैं की प्रेग्नेंट महिला को सुबह खाली पेट क्या क्या नहीं खाना चाहिए जो शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है।

अनार का जूस

प्रेग्नेंट महिला को खाली पेट अनार का जूस नहीं पीना चाहिए। क्योंकि अनार के जूस की तासीर ठंडी होती है जो गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है। और जन्म के समय शिशु को निमोनिया होने के खतरे को बढ़ा सकता है।

चाय या कॉफ़ी

प्रेग्नेंट महिला को खाली पेट कॉफ़ी या चाय का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें कैफीन की अधिकता होती है। और कैफीन गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी जैसी समस्या का कारण बन सकता है।

मसालेदार भोजन

सुबह खाली पेट महिला को मसालेदार चीजों का सेवन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी वजह से महिला को पेट सम्बन्धी समस्या हो सकती है। और पेट सम्बन्धी समस्या होने के कारण महिला की भूख में कमी आ सकती है। ऐसे में यदि महिला अपनी डाइट अच्छे से नहीं लेगी तो इसकी वजह से शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने का खतरा हो सकता है। और शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने के कारण शिशु को पोषक तत्व भरपूर नहीं मिलते हैं जिसकी वजह से शिशु के विकास में कमी आने का खतरा बढ़ सकता है।

पपीता

गर्भावस्था के दौरान महिला को सुबह उठकर गलती से भी खाली पेट पपीता का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि पपीते में मौजूद एंजाइम महिला का गर्भपात करवा सकते है इसके अलावा वैसे भी प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पपीते का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान नहीं करना चाहिए।

एलोवेरा जूस

कुछ महिलाओं की आदत होती है की पेट को साफ़ रखने के लिए वो रोजाना सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस का सेवन करती है। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए और प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी समय एलोवेरा जूस का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि एलोवेरा जूस का सेवन करने के कारण महिला का गर्भपात होने का खतरा रहता है।

मीठा

गर्भवती महिला को खाली पेट मीठी चीजों के सेवन से भी बचना चाहिए क्योंकि इसके कारण महिला का वजन बढ़ने का खतरा भी अधिक होता है। और प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो इसकी वजह से गर्भवती महिला और शिशु दोनों को नुकसान पहुँचने का खतरा होता है।

अनानास

गर्भावस्था के दौरान महिला को खाली पेट अनानास का सेवन भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि अनानास का सेवन करने की वजह से भी गर्भ में शिशु के विकास को नुकसान पहुँचने और गर्भपात होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

तो यह हैं कुछ चीजें जो प्रेग्नेंट महिला को खाली पेट बिल्कुल नहीं खानी चाहिए क्योंकि इनका सेवन गर्भ में पल रहे शिशु के विकास में बाधा पैदा कर सकता है। इसके अलावा महिला को उन सभी चीजों का सेवन सिमित मात्रा में करना चाहिए जिससे महिला को स्वस्थ रहने और गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिल सके।

गर्भ में शिशु की धड़कन कितने दिन बाद आती है?

माँ बनना एक ऐसा अहसास है जो एक महिला की जिंदगी को पूरी तरह से बदल देता है। और जैसे ही महिला की प्रेगनेंसी कन्फर्म होती है उसके बाद तो महिला के दिल दिमाग में केवल गर्भ में शिशु से जुड़े विचार ही आने लगते हैं। जैसे की बच्चे के लिए क्या सही हैं, गर्भ में बच्चा ठीक तो है, गर्भ में शिशु कितना बड़ा हो गया है, बच्चे का वजन तो सही है, बच्चे का विकास अच्छे से हो रहा है या नहीं, गर्भ में शिशु में पल रहे शिशु के दिल की धड़कन महिला कब सुन पाएगी, बच्चे की हलचल कब महसूस होगी, आदि।

साथ ही प्रेगनेंसी महिला के लिए ऐसा समय होता है जहां महिला अपनी जिंदगी के सबसे प्यारे अनुभव करती है। आज इस आर्टिकल में हम शिशु के गर्भ में होने के अहसास करवाने वाले पहले अनुभव के बारे में बात करने जा रहे हैं। और वो अनुभव है गर्भ में शिशु के दिल का धड़कना, अधिकतर महिलाएं यह जानना चाहती है की प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद वो कब अपने बच्चे के दिल की धड़कन सुन सकती है या शिशु के दिल की धड़कन कब आती है।

बच्चे के दिल की धड़कन कब आती है?

गर्भ में शिशु के विकास की शुरुआत दिल के धड़कने से ही होती है सबसे पहले शिशु का दिल धड़कना शुरू करता है। उसके बाद धीरे धीरे शिशु के अंग विकसित होते हैं और जैसे ही अंग विकसित हो जाते हैं उसके बाद उनका विकास होना शुरू हो जाता है। ऐसे में घर में प्रेगनेंसी कन्फर्म होने के बाद जब आप डॉक्टर के पास जाती है तो उसके बाद डॉक्टर आपको कुछ टेस्ट व् अल्ट्रासॉउन्ड करवाने की सलाह देते हैं।

प्रेगनेंसी में पहला अल्ट्रासॉउन्ड प्रेगनेंसी के छठे हफ्ते में होता है। क्योंकि उस समय तक बच्चे का दिल धड़कना शुरू कर देता है और उस दौरान आपको डॉक्टर गर्भ में पल रहे शिशु के दिल की धड़कन को सुनाते हैं। वैसे शिशु के दिल की धड़कन प्रेगनेंसी के पांचवें हफ्ते के आस पास ही आ जाती है लेकिन पहली बार अल्ट्रासॉउन्ड छठे हफ्ते के आस पास होता है। तो आप उसी समय शिशु के दिल की धड़कन को सुन सकते हैं।

उसके बाद आप जब भी डॉक्टर के पास जाती है तो आप चाहे तो डॉक्टर को कहकर डॉप्लर की मदद से अपने शिशु के दिल की धड़कन को सुन सकती है। इसके अलावा यदि आप डॉक्टर के पास जाने में थोड़ी देरी करते हैं जैसे की दो महीने पूरे होने के बाद जाते हैं तो आपका स्कैन उसी समय होता है और उस दौरान आपको अपने शिशु के दिल की धड़कन सुनाई जाती है।

तो यह है गर्भ में शिशु के दिल की धड़कन कब सुनाई जाती है उससे जुड़े कुछ टिप्स, यदि आपकी प्रेगनेंसी भी कन्फर्म हो गई है और आप भी अपने बच्चे के दिल की धड़कन को सुनना चाहते हैं तो इसके लिए आप अपने डॉक्टर से बोल सकते हैं।