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एक से दो सप्ताह की प्रेगनेंसी का अबॉर्शन कैसे करे?

1 Week Abortion Tips in Hindi: प्रेगनेंसी होना अच्छी बात है और बुरी बात भी, ऐसा मैं इसलिए कह रही हु, किसी की जिंदगी में खुशियाँ आ जाती है जब रिपोर्ट पॉजिटिव होता है। पर किसी और के लिए सिर पर पहाड़ टूट पड़ता है। जब आप बच्चा प्लान कर रहीं है और आपकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो आपके जिंदगी में खुशियाँ आती है। और जब आपको बच्चा नहीं चाहिए या आप उस लायक नहीं है की आपको बच्चा हो तो मुसीबत आती है।

एबॉर्शन की जरुरत क्यों होती है?

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एबॉर्शन की जरुरत तब होती है जब आपको बच्चा नहीं चाहिए यानी की आपकी फॅमिली प्लानिंग हो चुकी है। दुसरा वो होता है जिनको जल्दबाजी नहीं है, और  अभी अभी शादी हुई है। तीसरा जो समाज की नजर में ठीक नहीं है, आप समझ गयी होंगी। डर सबसे ज्यादा तीसरी केस में होता है, आप खुलकर किसी से बात भी नहीं कर सकतीं है। आप किसी को बता भी नहीं सकती हैं। और आप रख भी नहीं सकती है। अगर आप किसी छोटे शहर या गाँव से आते है तब तो और भी मुश्किल होती है।
मुसीबत को दूर करना ही जिंदगी का नेक्स्ट लेवल होता है। इसलिए तनाव से बाहर निकल कर समस्या का निदान करना बहूत जरुरी होता है।

१. चेक करें की प्रेगनेंसी पॉजिटिव है?

How to check one or two week pregnancy? कई बार ऐसा होता है चार पांच दिन मेंस आगे पीछे हो जाता है। और अगर आप बुखार से हो या आपको बहूत कमजोरी हुई हो, या पिछले एक एक दो महीने पहले एबॉर्शन करवाया हो तो हो सकता है। मेंस और भी ज्यादा दिन लग सकता है। घबराएँ नहीं, हिम्मत से काम लें।

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मार्किट से (किसी भी मेडिकल स्टोर से) प्रेगनेंसी टेस्ट करने की किट लायें, सुबह सुबह का पहला पेसाब निर्देशानुसार चेक करें, ये किट आपको १०० रूपये के अन्दर अन्दर आ जाता है।

२. प्रेगनेंसी पॉजिटिव हो तो अबॉर्शन कैसे करे?

आप इन्टरनेट पर चाहे कितना भी कुछ पढ़ें घरेलु नुस्खे (Gharulu Nuskhe for 1 Week Pregnancy) पर शायद एबॉर्शन नहीं होगा, नुस्खे से सिर्फ पांच परसेंट ही चांस है की एबॉर्शन हो जाये। पर नुस्खे आजमाते आजमाते कही ऐसा ना हो की कुछ दिन या सप्ताह और ज्यादा हो जाये और आप ज्यादा मुस्किल में पड़ जाएँ। इसलिए जल्द ही कदम उठायें। आप किसी डॉक्टर से मिलें, आपको यहाँ डर और शर्म छोडनी पड़ेगी। डर और शर्म से परेशानी और बढ़ेगी, इसलिए आप सबसे पहले समस्या का निदान ढूंढें। अगर एक से दो सप्ताह का है या ज्यादा से ज्यादा एक महीने का है तब भी ज्यादा डर नहीं है। आराम से मेंस के साथ ही एबॉर्शन हो जायेगा। अगर आप डॉक्टर से किसी कारणबस नहीं मिल सकती हैं तो दुसरा उपाय है, किसी अच्छे मेडिकल से पिल्स ले सकते हैं। पर ये रिस्क होगा। समस्या हो सकती है। इसपर अपना विवेक इस्तेमाल करें। मैं कभी ये सलाह नहीं दूंगी।

३. अबॉर्शन के बाद कितने दिन में नार्मल होंगे?

After Abortion Problem? अगर कम दिन की प्रेगनेंसी है तो ज्यादा मुस्किल नहीं होगा। मेंस होना स्टार्ट होगा और फिर क्लीन हो जायेगा। थोड़ी कमजोरी हो सकती है। और हो सकता है मेंस ज्यादा दिन तक हो और बाद में कुछ दिन और महीने रेगुलर ना हो आगे पीछे हो। आप फिर से जल्द ही नार्मल हो सकती हैं।

ऊपर दिए गए कुछ टिप्स हैं जिससे आप कुछ सप्ताह की प्रेगनेंसी का एबॉर्शन कर सकती हैं, पर ध्यान रहे अगर ज्यादा दिन का है तो किसी भी हाल में आप पिल्स से नहीं करें। आप डॉक्टर के निर्देशानुर ही काम करें।

अगर आपकी कुछ सुझाव है तो जरुर कमेंट में लिखने हम, आपके ईमेल को प्रकाशित नहीं करे है, ये गोपनीय रहता है, आप चाहे तो अपना नाम कुछ और लिख सकती हैं।

आपको ये सुझाब कैसा लगा जरुर बताएं।

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गर्भधारण होने पर कैसा महसूस होता है

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गर्भधारण करना किसी भी महिला के लिए बहुत ही प्यारा अहसास होता है, लेकिन इस अहसास को जीने के लिए महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत से बॉडी चेंजेस से गुजरना पड़ता है। साथ ही हर महिला को इस समय बॉडी में अलग तरीके से महसूस होता है। कुछ महिलाएं प्रेगनेंसी में बहुत परेशानियां झेलती है, तो कुछ महिलाओं को पता ही नहीं चलता है और वो स्वस्थ रहती है। शुरुआत में महिला के शरीर में बहुत से हार्मोनल बदलाव एक साथ होते हैं जिसके कारण महिला को शारीरिक, मानसिक, व् व्यव्हार से सम्बंधित बहुत से बदलाव महसूस होते हैं। तो आइये अब जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान महिला की बॉडी में कौन कौन से बदलाव महसूस होते हैं।

कमजोरी होना

शुरुआत में बॉडी में तेजी से हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण महिला बहुत जल्दी थक जाती है, साथ ही इनके कारण महिला कई बार मानसिक रूप से भी परेशान हो जाती है, और खासकर प्रेगनेंसी की शुरुआत में महिला का कुछ खाने का मन भी नहीं करता है। जिसके कारण बहुत जल्दी थकान व् कमजोरी महसूस होने लगती है।

सिर में भारीपन महसूस होना व् चक्कर आना

हार्मोनल बदलाव तेजी से होने के कारण बॉडी में ब्लड फ्लो भी बढ़ जाता है जिसके कारण सिर में दर्द व् भारीपन महसूस होना आम बात है। कई बार यदि ज्यादा थकावट हो जाती है तो चक्कर भी आने लग जाते हैं।

उल्टी आना

कई बार महिलाओं को या तो ज्यादा खाने पर या न खाने पर उल्टी आने लगती है, कुछ महिलाओं को गंध से भी एलर्जी हो जाती है। जिसके कारण उन्हें यदि उस वस्तु की गंध आती जिससे उन्हें एलर्जी है तो भी वो उल्टी कर देती है। प्रेगनेंसी की शुरुआत में ज्यादातर महिलाओं को उल्टी की समस्या रहती है लेकिन कुछ महिलाओं को पूरे नौ महीने इस समस्या से परेशान रहना पड़ता है।

गुस्सा व् चिड़चिड़ापन होना

महिला के बॉडी में हो रहे शारीरिक और मानसिक बदलाव के कारण कई बार महिला इसे बर्दाश नहीं कर पाती है, जिसके कारण उसके स्वभाव में भी परिवर्तन आता है और उसे गुस्सा व् चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है।

भूख की कमी

प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर खान पान शिशु के बेहतर विकास और महिला के फिट रहने के लिए बहुत जरुरी होता है, लेकिन शुरुआत में महिला को भूख का अहसास भी नहीं होता है, और उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे उनका पेट भरा हुआ है, या खाने के बाद उल्टी आने के डर से, वो खाना नहीं खाती हैं। लेकिन ऐसे में खान पान के प्रति लापरवाही शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

अनिंद्रा की समस्या

हार्मोनल बदलाव के कारण शरीर के तापमान में भी फ़र्क़ आता है, जिसके कारण नींद में कमी आ सकती है। लेकिन फिर भी महिला को अपनी नींद का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए और यदि रात को नींद पूरी नहीं होती है तो दिन में थोड़ी देर सोना चाहिए।

ब्रेस्ट में भारीपन

हार्मोनल बदलाव होने के कारण इसका असर ब्रेस्ट पर भी दिखाई देता है, क्योंकि ब्रेस्ट बॉडी का काफी संवेदनशील अंग होता है। इसके कारण ब्रेस्ट में भारीपन व् सूजन महसूस होती है, साथ ही निप्पल का रंग भी डार्क हो जाता है।

बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होना

प्रेगनेंसी के शुरुआत में हार्मोनल बदलाव होने के कारण किडनी अधिक सक्रिय हो जाती है, और उसके बाद जैसे जैसे महिला के पेट निकलता है तो इसके कारण मूत्राशय पर दबाव पड़ता है जिसके कारण बार बार यूरिन पास करने की इच्छा होती है।

क्रेविंग होना

प्रेगनेंसी के दौरान कई बार आपका एक चीज की तरफ आकर्षण बढ़ जाता है, या कुछ अलग खाने का मन करता है, हर समय आपको कुछ अलग करने की इच्छा भी होती है इसे क्रेविंग कहा जाता है।

कब्ज़ की समस्या

पाचन क्रिया का धीमा होना, और इस पर असर पड़ने का कारण भी बॉडी में हार्मोनल बदलाव ही होते हैं, ऐसे में कई बार महिलाओं को शुरुआत में कब्ज़ जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जो महिला को प्रेगनेंसी के दौरान महसूस होते है, इनमे घबराने की कोई बात नहीं होती है क्योंकि यह प्रेगनेंसी के आम लक्षण होते है। लेकिन यदि आप किसी कारण असहज महसूस कर रही हो या ज्यादा तकलीफ हो तो इसे इग्नोर न करते हुए एक baar।।पने डॉक्टर से राय लेनी चाहिए।

प्रेगनेंसी में चावल खा सकते हैं या नहीं

गर्भावस्था में चावल

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि महिला चाहे बुरा करे या अच्छा उससे महिला के साथ गर्भ में पल रहा शिशु भी प्रभावित होता है। साथ ही शिशु के विकास के लिए पोषक तत्वों की प्राप्ति का एक ही स्त्रोत होता है, और है महिला द्वारा लिया गया आहार। प्रेगनेंसी के दौरान महिला जो भी खाती है यदि महिला पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करती है तो उससे भी शिशु प्रभावित होता है यदि महिला ऐसे आहार का सेवन करती है जिससे शिशु को नुकसान पहुँच सकता है उससे भी शिशु प्रभावित होता है। इसीलिए गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने और शिशु के बेहतर विकास के लिए पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है। और आहार में रोटी, दाल, सब्ज़ी, फल, आदि के साथ चावल भी शामिल होता है। और अधिकतर लोगो को चावल पसंद भी होता है, लेकिन प्रेगनेंसी में चावल का सेवन करना चाहिए या नहीं, इसके बारे में जानना पहले जरुरी होता है।

क्या प्रेगनेंसी में चावल खा सकते हैं?

जी हाँ, प्रेग्नेंट महिला प्रेगनेंसी के दौरान चावल का सेवन कर सकती है क्योंकि इसमें फाइबर, कैल्शियम व् अन्य एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में शामिल होते हैं। लेकिन बासी चावल, अधिक तेल व् मसाले युक्त आहार, बाहर की बिरयानी, कच्चे चावल, बिना धुले चावल, आदि का सेवन करने से महिला को परहेज करना चाहिए। क्योंकि इसके कारण महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानी हो सकती है और यदि महिला को दिक्कत होती है तो उसका असर शिशु पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा चावल का सेवन उतना ही करें जितना की जरुरी हो, क्योंकि जरुरत से ज्यादा किसी भी चीज का सेवन फायदे की जगह गर्भवती महिला को नुकसान पहुंचा सकता है।

प्रेगनेंसी में चावल खाने के फायदे

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला यदि चावल को अपनी डाइट में शामिल करती है तो इससे गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी बहुत से फायदे मिलते हैं। क्योंकि चावल में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में शामिल होते हैं। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान चावल का सेवन करने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं।

कार्बोहायड्रेट

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को स्वस्थ रहने के लिए बॉडी को ऊर्जा से भरपूर रखना चाहिए। ऐसे में चावल का सेवन करने से महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। क्योंकि इसमें मौजूद कार्बोहायड्रेट महिला को तुरंत ऊर्जा देने में मदद करता है।

सोडियम

ब्लड प्रेशर घटने या बढ़ने की समस्या से प्रेगनेंसी के दौरान महिला परेशान हो सकती है। ऐसे में महिला ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए चावल का सेवन कर सकती है, क्योंकि चावल में सोडियम की मात्रा कम होती है जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करती है।

कैल्शियम

गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान कमजोरी व् थकान जैसी समस्या का अनुभव कर सकती है ऐसे में चावल का सेवन करने से महिला को इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है। क्योंकि चावल में कैल्शियम मौजूद होता है जो गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती देने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में भी मदद करता है। साथ ही इससे महिला के दांतों को मजबूती मिलने के साथ शिशु के दांतों का विकास भी अच्छे से होने में मदद मिलती है।

एंटी ऑक्सीडेंट

बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की इम्युनिटी कमजोर हो सकती है, जिसके कारण गर्भवती महिला व् शिशु को संक्रमण होने का ख़तरा रहता है। लेकिन चावल का सेवन करने से महिला को एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में मिलते हैं जिससे महिला को संक्रमण से सुरक्षित रहने में मदद मिलती है। और साथ ही शिशु को भी संक्रमण से बचाव करने में मदद मिलती है।

फाइबर व् पानी

वजन बढ़ने के कारण, बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण प्रेग्नेंट महिला की पाचन क्रिया कमजोर हो सकती है। जिसके कारण महिला को गैस, एसिडिटी, कब्ज़ जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन चावल में मौजूद फाइबर व् पानी बॉडी को हाइड्रेट रखने के साथ पाचन क्रिया को भी बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है। और पानी की मात्रा होने के कारण चावल का सेवन करने से महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में भी मदद मिलती है।

यूरिन इन्फेक्शन

बहुत सी गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान यूरिन इन्फेक्शन की समस्या से परेशान हो सकती है, और यूरिन इन्फेक्शन की समस्या का बढ़ना महिला के साथ शिशु के लिए भी नुकसानदायक हो सकती है। लेकिन गर्भवती महिला यदि चावल का सेवन करती है तो इससे यूरिन इन्फेक्शन की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है।

कोलेस्ट्रॉल

चावल का सेवन करने से गर्भवती महिला के बॉडी में कोलेस्ट्रॉल को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को स्वस्थ रहने में मदद मिलने के साथ हदय सम्बन्धी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

शिशु के लिए

कैल्शियम, फाइबर, आयरन, थायमिन, विटामिन डी, जैसे पोषक तत्व चावल में भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए बहुत जरुरी होते हैं, और चावल का सेवन करने से यह शिशु को भरपूर मात्रा में मिलते हैं जिससे शिशु के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी में चावल खाने के नुकसान

जरुरत से ज्यादा या बिना पकाएं चावल का सेवन करने से गर्भवती महिला और शिशु को नुकसान भी हो सकता है। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान चावल खाने से कौन कौन से नुकसान हो सकते हैं।

वजन: भोजन में रोटी कम और चावल को अधिक मात्रा में शामिल करने से महिला को वजन बढ़ने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि चावल में स्टार्च की मात्रा अधिक होती है, और जिन महिलाओं का वजन प्रेगनेंसी के दौरान पहले से ही अधिक होता है, उन्हें चावल का सेवन करने से परहेज रखना चाहिए।

गेस्टेशनल शुगर: ग्लाइसेमिक की मात्रा चावल में अधिक होती है, ऐसे में गर्भवती महिला यदि चावल का सेवन अधिक करती है तो इसके कारण ब्लड में शुगर का लेवल अधिक बढ़ सकता है। जिसके कारण महिला को प्रेगनेंसी के दौरान गेस्टेशनल शुगर की समस्या हो सकती है।

पेट में दर्द: बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण कुछ महिलाओं की प्रेगनेंसी के दौरान कुछ अलग खाने की इच्छा हो सकती है ऐसे में कुछ महिलाओं की कच्चे चावल खाने की इच्छा हो सकती है। और कच्चे चावल का सेवन करने से महिला को पेट में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

संक्रमण: कच्चे चावल में कीटनाशक व् रसायन मौजूद हो सकते है जिसका सेवन करने के कारण केवल गर्भवती महिला को ही नहीं बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु को भी संक्रमण होने का खतरा हो सकता है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान चावल का सेवन करने से जुड़े कुछ टिप्स, ऐसे में आपको चावल का सेवन जरूर करना चाहिए ताकि गर्भवती महिला और शिशु को इससे भरपूर फायदा मिलें। लेकिन जरुरत से ज्यादा भी इसका सेवन न करें की आपको इसके कारण किसी भी तरह की परेशानी का सामना करना पड़े।

इम्युनिटी बढ़ाने के तरीके ताकि बीमार कम पड़े

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हमने अक्सर हमारे आसपास देखा होगा के कुछ लोग बहुत जल्दी बीमार पड़ जाते है। मौसम बदलते ही इनकी सेहत डगमगाने लगती है, खासतौर पर बच्चे और बूढ़े। इसका मैन कारण है कमजोर इम्यून सिस्टम का होना। इम्युनिटी से मतलब रोगो से लड़ने की क्षमता से है।

जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है वह बहुत जल्द बीमार पड़ते है, कोई भी इन्फेक्शन इनकी बॉडी पर बहुत जल्दी हावी हो जाता है। इसके विपरीत जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होती है उन्हें जल्दी से बीमारियां नहीं पकड़ पाती। अगर हम जिंदगी में बिना रुके चलना चाहते है तो जरुरी है के हम अपनी इम्युनिटी को बढ़ाये।

इम्युनिटी बढ़ाने के उपाय

आइये जानते है किन किन चीजों से हम अपनी और अपने बच्चों की इम्युनिटी बढ़ा सकते है।

सिट्रस फ्रूट्स :

  • सिट्रस फ्रूट्स वो फल होते है जिनके अंदर विटामिन सी की मात्रा अधिक पायी जाती है।
  • विटामिन सी हमारे इम्यून सिस्टम को अच्छा करता है।
  • जिससे हमे मौसम बदलते ही कोल्ड और फ्लू नहीं होता है।
  • ऑरेंज, मौसम्बी, अंगूर और निम्बू यह फल सिट्रस फ्रूट्स कहलाते है।

सूखे मेवें :

  • ड्राई फ्रूट्स में विटामिन ए पाया जाता है।
  • विटामिन ए हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए मदद करता है।
  • बादाम हमारे शरीर में नेचुरल किलर सेल्स को बढ़ाते है।
  • सूखे मेवों का सेवन हमारे शरीर को और भी कई पोषक तत्व प्रदान करते है।

लहसुन :

  • लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट और एल्लीसिन तत्व होते है।
  • यह हमारे शरीर की इम्युनिटी बढ़ाते है।
  • साथ कई तरह के बैक्टीरिया से लड़ने में भी मदद करते है।
  • लहसुन का सेवन हमें कैंसर जैसी बिमारियों से भी बचाता है।

अदरक :

  • अदरक में भी एंटीऑक्सीडेंट तत्व होते है।
  • इसमें एंटी इन्फ्लैमटॉरी गुण भी होते है।
  • इसका नियमित सेवन हमारे शरीर को रोगों से दूर रखता है।

ग्रीन टी :

  • ग्रीन टी एन्टिऑक्सेंट गुणों से भरपूर होती है।
  • इसमें कैफीन और कैलोरी की मात्रा भी बहुत कम होती है।
  • इसका नियमित सेवन शरीर की सिर्फ इम्युनिटी ही नहीं बढ़ाता बल्कि मोटापे को भी खत्म करता है।
  • ग्रीन टी खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया को भी खत्म करता है।
  • इसे आप शहद और निम्बू के साथ भी ले सकते है।

दही :

  • दही में दूध से ज्यादा कैल्शियम होता है।
  • इसमें अच्छे बैक्टीरिया होते है जो हमारे शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाते है।
  • इसमें बहुत से विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम और लैक्टोस होता है।
  • यह सब हमारे शरीर को बीमारियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है।
  • दही हमारे लिए एक एंटीबायोटिक की तरह भी काम करती है।

हल्दी :

  • हल्दी एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होती है।
  • इसका नियमित सेवन कैंसर और शुगर जैसी बीमारियों को भी ठीक करता है।

दालचीनी :

  • दालचीनी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट खून में बक्टेरिया जमने से रोकते है।
  • इन्हें हम अपने खाने के मसलों में इस्तेमाल कर सकते है।
  • इसके उपयोग से कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कण्ट्रोल होता है।

शकरकंद :

  • शकरकंद भी हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद होता है।
  • इसमें बीटा कैरोटीन होता है।
  • यह हमारी त्वचा के लिए बहुत ही अच्छा होता है।

स्मोकिंग :

  • खाने के अतिरिक्त स्मोकिंग को भी ना कहें।
  • स्मोकिंग ना करने से भी आपकी इम्युनिटी स्ट्रांग बनी रहती है।

व्यायाम :

  • सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करने से आप हर बीमारी से दूर रहते है।
  • व्यायाम करने से आपके अंदर ताज़ी और शुद्ध वायु का संचरण होता है।

तनाव :

  • अच्छी इम्युनिटी के लिए जरुरी है आप तनाव से दूर रहें।
  • छोटी छोटी बातों का स्ट्रेस ना लें।

नींद :

  • सेहतमंद स्वास्थ्य के लिए तनाव रहित निंदा जरुरी है।
  • नींद से ही हमारा शरीर अपनी खोयी हुई ऊर्जा दोबारा पाता है।
  • एक दिन में 8 से 9 घंटे की नींद लेना जरुरी है।

आशा है यह सभी उपाय आपकी और आपके परिवार की इम्युनिटी बढ़ाने के काम आएंगे।

गर्मियों में फोड़े फुंसी के इलाज के लिए 20 घरेलू टिप्स

गर्मियों में केवल आपके लिए लू या गर्मी ही परेशानी नहीं होती है। बल्कि इस मौसम में फोड़े फुंसी होने की सम्भावना भी अधिक होती है। क्योंकि पसीना अधिक होने के कारण बैड बैक्टेरिया बढ़ जाता है। जिसके कारण आपको यह समस्या हो सकती है, और इनके होने पर कई बार तो जलन व् खुजली की समस्या भी खड़ी हो जाती है। ऐसे में यदि आप अपनी साफ़ सफाई का अच्छे से ध्यान नहीं रखते है, तो यह बैड बैक्टेरिया आपकी स्किन के साथ सम्पर्क में आकर फोड़े या फुंसी की समस्या को उत्त्पन्न कर देता है।

फोड़े फुंसी में एक बार आप दर्द तो सहन कर लेते है, लेकिन कई बार यह तो ठीक हो जाते है परन्तु इनके खत्म होने के बाद इनके दाग नहीं जाते है। ऐसे में स्किन पर होने वाले ये दाग धब्बे आपकी ख़ूबसूरती को भी खराब करते है। इसीलिए जरुरी है की गर्मियों में आप अपनी स्किन को अच्छे से ढक कर रखने के साथ अपनी साफ सफाई का भी अच्छे से ध्यान रखें। तो आइये आज हम आपको ऐसे ही कुछ घरेलू उपाय बताने जा रहे है जो की आपको फोड़े फुंसी से बचाने में मदद करते है।

फोड़े फुंसी होने के कारण:-

  • यदि आप गंदे पानी का सेवन करते है या उससे नहाते है, तो आपकी बॉडी में होने वाले बैड बैक्टेरिया के कारण आपको यह समस्या हो सकती है।
  • गर्मियों में अधिक तेलीय व् मसालेदार चीजों का सेवन करने से भी फोड़े फुंसी हो जाते है।
  • शरीर की साफ सफाई का ध्यान न रखने के कारण भी आपको यह समस्या हो सकती है।
  • कई बार दवाइयों के साइड इफ़ेक्ट के कारण भी यह समस्या हो जाती है।
  • गर्मियों में अधिक गरम चीजों का सेवन करने से भी यह परेशानी हो जाती है।

गर्मियों में फोड़े फुंसी से बचने के घरेलू टिप्स:-

गाजर और तेल का इस्तेमाल करें:-

इस उपाय को करने के लिए सबसे पहले गाजर को पीस लें, उसके बाद तवे पर थोड़ा सा तेल डालकर उसे गरम कर लें। तेल के गर्म होने के बाद उसमे पीसी हुई गाजर डालकर अच्छे से गर्म करे, उसके बाद इसे फोड़े फुंसी पर लगाएं, और कपडा बाँध लें आपको फायदा होगा।

नारियल तेल और कपूर:-

नारियल के तेल को गुनगुनाकर उसमे थोड़ा सा पीसा हुआ कपूर मिलाकर, नियमित दिन में दो से तीन बार फोड़े फुंसी पर लगाने से आपको गर्मियों में होने वाली इस परेशानी से राहत मिलती है।

तुलसी का प्रयोग करें:-

तुलसी में मौजूद एंटीबैक्टेरियल गुण आपके शरीर को बहुत सी परेशानियों से बचाने में मदद करती है। इसके लिए आप दिन में दो बार पांच छह तुलसी के पत्ते को पीस कर एक लेप तैयार करें, और इसे अपने फोड़े फुंसी पर लगाएं इससे आपको फायदा मिलेगा।

एलोवेरा का इस्तेमाल करें:-

इस उपाय को करने के लिए एक चम्मच एलोवेरा के गुद्दे को निकालकर अच्छे से पीस लें, उसके बाद इसमें थोड़ी सी हल्दी मिलाएं, और इसे लेप की तरह फोड़े फुंसी पर लगाएं। ऐसा दिन में दो बार कुछ दिन तक करने से आपको फायदा मिलता है।

करेले का रस:-

करेले का रस भी आपकी इस समस्या को खत्म करने में आपकी मदद करता है। इसके लिए आप करेले के रस को निकाल कर रुई की मदद से दिन में तीन से चार बार इस्तेमाल करें। धीरे धीरे आपके फोड़े फुंसी ठीक हो जाएंगे।

मेहँदी इस्तेमाल करें:-

मेहँदी की ठंडक भी आपको गर्मियों में फोड़े फुंसी की समस्या से बचाने में मदद करती है। इसके लिए आप एक कप पानी में एक चम्मच मेहँदी डालकर अच्छे से उबाल लें, उसके बाद रुई की मदद से इसे अपने फोड़े फुंसी पर लगाएं। दिन में दो से तीन बार कुछ दिन इस उपाय को करने से आपको फायदा मिलता है।

निम्बू और अजवाइन:-

एक चम्मच अजवाइन को अच्छे से पीस कर चूर्ण के रूप में तैयार करें। उसके बाद इसमें निम्बू का रस मिलाएं और इसे लेप की तरह फोड़े फुंसी पर लगाएं और कपडा बाँध लें। ऐसा नियमित करने से आपको फोड़े फुंसी से बचाव करने में मदद मिलती है।

मुल्तानी मिट्टी है फायदेमंद:-

ठंडी तासीर होने के कारण मुल्तानी मिट्टी आपको फोड़े फुंसी की समस्या से बचाने के साथ गर्मियों में ठंडक भी प्रदान करती है। इस उपाय को करने के लिए आप थोड़ी सी मुल्तानी मिट्टी को पानी में भिगो लें, और उसका लेप तैयार करें। इस लेप को दिन में दो बार कुछ दिनों तक लगाने से आपके फोड़े फुंसी खत्म हो जाएंगे।

खरबूजे के बीज:-

खरबूजे के बीजो को साफ़ करके छिलके समेत की अच्छे से पीस लें, उसके बाद इसे लेप की तरह दिन में दो से तीन बार कुछ दिनों तक फोड़े फुंसी पर लगाने से आपको इस समस्या से राहत पाने में मदद मिलती है।

नीम भी है फायदेमंद:-

नीम आपकी स्किन पर होने वाले इन्फेक्शन को दूर करने के लिए बहुत फायदेमंद होती है। इस उपाय को करने के लिए आप नीम की निबोली को पानी में डालकर अच्छे से उबाल लें, और उसके बाद दिन में तीन से चार बार इस पानी से फोड़े फुंसी को साफ़ करें, इसके अलावा नीम की पत्तियों का लेप बनाकर फोड़े फुंसी पर लगाने से भी आपको फायदा मिलता है।

अमरुद की पत्तियों का प्रयोग करें:-

आठ दस अमरूप की पत्तियों को पानी में डालकर अच्छे से उबाल लें। उसके बाद इन पत्तियों को अच्छे से पीस कर इसका लेप तैयार करें। इस लेप को दिन में दो बार फोड़े फुंसी पर लगाएं। कुछ दिन नियमित ऐसा करने से आपको फायदा मिलेगा।

तेल और हल्दी:-

हल्दी में मौजूद एंटीसेप्टिक गुण आपको फोड़े फुंसी की समस्या से बचाव करने में मदद करते है। इसके लिए आप तवे पर थोड़ा सा तेल गरम कर उसमे थोड़ी सी हल्दी डालकर उसे पकाएं। उसके बाद इसे फोड़े फुंसी पर लगाकर पट्टी बाँध दे। ऐसा जब तक करें जब तक आपकी फुंसी ठीक न हो जाए।

कद्दू की बेल का इस्तेमाल करें:-

कद्दू की बेल के पत्तों को तोड़कर उन्हें अच्छे से पीस लें। उसके बाद उनका रस निकाल कर उन्हें फोड़े फुंसी पर लगाएं इस उपाय को करने से आपको फोड़े फुंसी की समस्या से बचने में मदद मिलती है।

अनानास का रस:-

अनानास का रस इस्तेमाल करने से भी आपके फोड़े फुंसी को जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है। इसके लिए आप अनानास का रस निकालकर दिन में तीन से चार बार रुई से फोड़े फुंसी पर लगाएं।

बकायन की पत्तियां:-

बकायन की पत्तियों को पीस कर उनका लेप तैयार करें। उसके बाद इस लेप को अपने फोड़े फुंसियों पर लगाएं। ऐसा नियमित करे जब तक की आपके फोड़े फुंसियां ठीक न हो जाएँ।

आलू का प्रयोग करें:-

आलू को पीस कर उसका रस निकाल लें, अब इस रस को दिन में तीन से चार बार रुई की मदद से फोड़े फुंसी पर लगाएं। इससे आपके फोड़े फुंसी को ठीक होने में मदद मिलती है। आप चाहे तो सुबह खाली पेट दो चम्मच आलू के रस का सेवन भी कर सकते है इससे भी आपको फायदा मिलता है।

मसूर की दाल:-

मसूर की दाल को भिगोकर उसे पीस लें, अब इसे लेप की तरह फोड़े फुंसी पर नियमित लगाए इस उपाय को करने से भी आपको फायदा मिलता है।

चन्दन और निम्बू:-

एक चम्मच चन्दन पाउडर, एक चम्मच चोकर, एक चम्मच पीसी हुई मुल्तानी मिट्टी पानी और निम्बू के रस की कुछ बूंदे मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को दिन में दो बार अपने फोड़े फुंसी पर लगाएं आपको फायदा मिलेगा।

टी ट्री आयल:-

दिन में तीन से चार बार टी ट्री आयल को रुई में भिगोकर अच्छे से फोड़े फुंसी पर लगाएं ऐसा करने से आपके फोड़े फुंसी को ठीक होने में मदद मिलती है।

गेंदे के फूल क इस्तेमाल करें:-

गेंदे के फूल की पत्तियों को तोड़कर पानी में डालकर अच्छे से उबाल लें, उसके बाद इस पानी से दिन में तीन से चार बार फोड़े और फुंसियों को साफ़ करें इस उपाय को करने से आपके फोड़े फुंसी को ठीक होने में मदद मिलती है।

तो यदि आपको भी गर्मियों में फोड़े फुंसी से जुडी कोई परेशानी है तो आप भी इससे बचने के लिए ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल कर सकते है। इसके अलावा आपको इन्हे ज्यादा खुरचना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे दाग पड़ने की सम्भावना अधिक हो जाती है।

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काले होठों को गुलाबी करने के उपाय

How To Get Rid of Black Lips?

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अच्छे, सुंदर और गुलाबी होंठ महिलाओं की पर्सनालिटी को सुंदर बनाते है। लेकिन अगर वही होंठ काले, बेजान और फटे-फटे से लगने लगे तो यह उनकी पर्सनालिटी को काफी प्रभावित करते है। क्योंकि किसी भी महिला के फेस पर काले होंठ बहुत खराब और अजीब लगते है। जिसे छुपाने के लिए वे अक्सर तरह-तरह के कलर की लिपस्टिक का इस्तेमाल करने लगती है। जो उनके होंठों को अच्छा तो नहीं बनाते लेकिन हां, कुछ समय के लिए उनके कालेपन को छुपा जरूर देते है।

ऐसे में होंठों के कालेपन को छुपाने के लिए हर बार लिपस्टिक की मदद लेना उचित नहीं। क्योंकि लिपस्टिक भी एक तरह का कॉस्मेटिक है जिसके निर्माण में केमिकल का प्रयोग होता है और लम्बे समय तक केमिकल युक्त प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना न केवल आपकी स्किन अपितु आपकी सेहत के लिए भी हानिकारक हो सकता है।

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परन्तु लिपस्टिक का इस्तेमाल नहीं करें तो करे क्या? परेशान न हो क्योंकि आपकी किचन और घर के गर्दन में ऐसी बहुत सी चीजें मौजूद है जो आपकी समस्या का हल कर सकती है। कुछ मिनटों या कुछ घंटों के लिए नहीं हमेशा के लिए ये आपके होंठों को गुलाबी बना सकते है। आज के समय में घरेलू उपाय, सुनने में थोड़ा अजीब लगता है लेकिन वाकई ये उपाय बहुत कारगर होते है।

2 दिन नहीं बल्कि 2 हफ्ते तक इनका प्रयोग करने से परिणाम आपके सामने आ जाएंगे। और बता दें, ये उपाय पूरी तरह cost-less है क्योंकि इनके लिए आपको पैसे खर्च करने की भी आवश्यकता नहीं है बस अपनी किचन में मौजूद कुछ जरुरी चीजों को एक साथ मिलाना है और उनका इस्तेमाल करना है। तो आइये जानते है क्या है वे उपाय –

होठों के काले होने के कारण :-causes

  • अधिक धूम्रपान करना।
  • अधिक समय तक सूरज की धुप के सम्पर्क में रहना।
  • तंबाकू आदि के सेवन से भी होंठ काले हो जाते है।
  • अधिक चाय व् कॉफ़ी का सेवन करना।
  • ब्यूटी प्रोडक्ट्स के अधिक इस्तेमाल के कारण हुई एलर्जी के कारण भी होंठ काले हो जाते है।
    किसी बीमारी का होना।
  • पानी का सही सेवन नहीं करना। आदि।

काले होठों को गुलाबी करने के घरेलू उपाय :- 

1. दूध की मलाई :

दूध व् उसकी मलाई में त्वचा की सफाई करने और उसे निखारने के गुण पाए जाते है, जो किसी भी प्रकार के कालेपन को दूर करने में सक्षम होते है। यह आपकी स्किन को मुलायम करने के साथ साथ उसे नैचुरली लाल भी बनाती है। इसके लिए थोड़ी सी मलाई में चुटकी भर हल्दी मिलाकर उससे अपने होंठों की मालिश करें। कुछ ही दिनों के लगातार प्रयोग से आपके लिप्स गुलाबी हो जाएंगे।

2. गुलाब :

गुलाबी होंठ पाने के लिए गुलाब सबसे बेहतर माना जाता है फिर वो चाहे स्किन के लिए हो या होठों के लिए। इस उपाय का प्रयोग करने के लिए गुलाब की कुछ पंखुडियों को लें और उन्हें पीस लें। अब इसमें ग्लिसरीन मिला कर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट का इस्तेमाल रोजाना रात को सोने से पहले करें। और अगली सुबह जागकर अपने होठों को साफ़ कर लें।

3. कच्चा दूध :

जिस प्रकार दूध की मलाई स्किन की रंगत को निखारने का काम करती है उसी प्रकार कच्चा दूध भी इस कार्य को करने में पूरी तरह से सक्षम है। यह न केवल स्किन की रंगत को सुधारता है अपितु उसे अंदर से पोषण देने में भी मदद करता है। इसके लिए कच्चे दूध में केसर को पीसकर उसे अपने लिप्स पर रोजाना लगाकर हलकी मालिश करें। इससे आपके होंठ सुंदर और आकर्षक बनेंगे।

4. संतरा :

विटामिन सी युक्त सभी फल स्किन के रंग को साफ़ करने में मदद करते है फिर चाहे वो संतरा हो या नींबू। इनमे मौजूद विटामिन सी त्वचा के भीतर से कालेपन के सभी कारणों को समाप्त कर स्किन को नया ग्लो प्रदान करते है। इसके लिए संतरे को अपने होठों पर रगड़ें। यह उन्हें मुलायम को बनाएगा ही साथ-साथ उनके रंग को भी सुधारने में मदद करेगा।

5. अनार का रस :

होठों की पिगमेंटेशन को खत्म करने के लिए आप अनार के रस का भी इस्तेमाल कर सकते है। ये न केवल आपके होठों के कालेपन को दूर करने में मदद करेगा बल्कि उसे अंदरूनी पोषण भी प्रदान करेगा। इसके लिए गाजर और अनार को मिलाकर रस निकाल लें और उसे अपने लिप्स पर लगाएं। बचे हुए रस का सेवन कर लें।

6. चुकंदर :

सर्दियों के मौसम में चुकंदर बहुत ही लाभकारी सब्जी मानी जाती है। इसके रस का सेवन करने से शरीर में खून की कमी पूरी हो जाती है और शरीर में कोई बीमारी भी नहीं होती। इसके अलावा यह काले होठों को गुलाबी करने में भी काफी फायदेमंद होता है। इसके लिए चुकंदर की एक स्लाइस काटकर उसे अपने होठों पर मलें।

7. जैतून का तेल :

लिप्स पर ओलिव आयल लगाने से भी वे खूबसूरत और आकर्षक होते है। इसके लिए आप रोजाना ओलिव आयल से अपने होठों पर मालिश करें। कुछ ही दिनों में होंठ अपनी वास्तविक रंगत में आ जाएंगे।

8. शहद :काले होठों को गुलाबी करने के उपाय

इसके लिए दिन में कम से कम 2 बार अपने होठों पर शहद से मसाज करें। 1 या 2 हफ्तों तक प्रयोग करने से ही आपके होंठ मुलायम और गुलाबी होने लगेंगे। अगर आप चाहे तो शहद में थोड़ा गुलाबजल भी मिला सकती है यह होठों को प्राकृतिक लाली देने में मदद करेगा।

9. लिप्स का कालापन दूर करने के लिए नारियल पानी, खीरे का रस और नींबू के रस को एक साथ मिलाकर अपने होठों पर लगाएं। और कुछ देर मालिश करें। थोड़े दिनों के प्रयोग से ही आपके होंठ गुलाबी हो जाएंगे।

10. पानी :

होठों के कालेपन का एक कारण डिहाइड्रेशन भी होता है जो की पानी नहीं पीने के कारण होता है। अगर आपको लगता है की आप भी दिन भर में बहुत कम पानी का सेवन करते है। तो अभी से इस आदत को बदलिए क्योंकि पानी सिर्फ आपके लिप्स ही नहीं बल्कि आपके शरीर के हर हिस्से के बेहतर स्वास्थ्य के लिए उत्तरदायी होता है।

तो ये थे, काले होठों को गुलाबी करने के कुछ घरेलू उपाय। जिनकी मदद से आप कुछ ही समय में अपने होठों को प्राकृतिक तरीको से गुलाबी और मुलायम बना सकते है। लेकिन ध्यान रहे किसी को उपाय को कार्य करने में थोड़ा समय लगता है ऐसे में अगर आप 1 या 2 दिन इस्तेमाल करके उपायों का प्रयोग नहीं करेंगे तो इच्छित परिणाम नहीं आएंगे। इसीलिए सही मात्रा और सही समय तक उपायों का प्रयोग करते रहे।

होली का रंग गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए कितना नुकसानदायक होता है

होली का रंग कैसे पहुंचाता है गर्भ में बच्चे को नुकसान, माँ बनना हर महिला के लिए उसके जीवन का सबसे सुखद अहसास होता है। क्योंकि इस दौरान महिला अपने पेट में एक नन्ही जान को पूरे नौ महीने तक रखती है। और अपनी जान की चिंता न करते हुए इस दुनिया में उस नन्ही जान को लाती है। ऐसे में उस नन्ही जान को किसी भी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपना अच्छे से ध्यान रखती है।

लेकिन त्यौहारों के समय महिला को और ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत होती है। और अब होली का त्यौहार आने ही वाला है ऐसे में प्रेग्नेंट महिला को होली के रंगों से गर्भ में पल रहे शिशु को बचाकर रखना चाहिए। क्योंकि यह रंग महिला के साथ शिशु को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की होली के रंगो से शिशु को क्या नुकसान पहुँच सकता है।

होली का रंग होता है केमिकल से भरपूर

  • आज कल रंगो को चाहे कितना ही कहा जाये की हर्बल है।
  • लेकिन उसमे केमिकल की मिलावट जरूर होती है।
  • और प्रेगनेंसी के दौरान महिला को केमिकल वाली चीजों का इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है।
  • क्योंकि केमिकल के बुरे असर के कारण महिला को स्किन इन्फेक्शन, एलर्जी, बॉडी के किसी पार्ट में इन्फेक्शन आदि की समस्या हो सकती है।
  • और यदि प्रेग्नेंट महिला को कोई परेशानी होती है तो उसका असर बच्चे पर भी पड़ सकता है।
  • ऐसे में केमिकल का प्रभाव यदि शिशु तक पहुँचता है।
  • तो इसके कारण शिशु के विकास में समस्या आ सकती है।
  • साथ ही महिला को गर्भपात, समय पूर्व प्रसव जैसी परेशानी भी हो सकती है।

पानी वाले रंग

  • यदि गर्भवती महिला पानी वाले होली के रंगो से होली खेलती है।
  • तो इसके कारण भी महिला के साथ शिशु को दिक्कत हो सकती है।
  • क्योंकि पानी वाले रंगो के कारण महिला के फिसलने या गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
  • और यदि महिला गिरती है तो इसके कारण शिशु को दिक्कत हो सकती है।
  • खासकर जब महिला पेट के पल गिरती है तो गर्भपात तक हो सकता है।
  • ऐसे में गलती से भी प्रेग्नेंट महिला को पानी वाले रंगों के साथ होली नहीं खेलनी चाहिए।

तो यह हैं कुछ नुकसान जो गर्भ में पल रहे शिशु को होली के रंगो के कारण हो सकते हैं। ऐसे में महिला को एक साल होली से परहेज करना चाहिए। साथ ही इस समय अपने खान पान आदि का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। ताकि त्यौहार के मौसम में भी महिला व् शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में चाय पीनी चाहिए या नहीं? कब कैसे और कितनी चाय पीएं

प्रेगनेंसी गर्भवती महिला के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण समय होता है। क्योंकि इस दौरान महिला को शारीरिक परेशानियों का सामना करने के बाद भी अपनी अच्छे से केयर करनी होती है, जो महिला का खाने का मन होता है कई बार उन्ही चीजों से परहेज करना होता है, अपने रहन सहन के तरीके में बदलाव करना होता है, महिला को मानसिक रूप से परेशानी का अनुभव हो सकता है, आदि। लेकिन महिला यदि अपनी दिनचर्या सही रखती है, क्या खाना है कितना खाना है क्या खाना है, क्या करें क्या नहीं, इन सभी बातों का ध्यान रखती है तो महिला को इन सभी परेशानियों से निजात पाने में मदद मिलती है।

तो आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेग्नेंट महिला की चाय पीने की आदत के बारे में बताने जा रहे हैं। जैसे की जरुरत से ज्यादा चाय पीने के क्या नुकसान होते हैं, महिला को कितनी चाय पीनी चाहिए, किस तरीके से चाय बनाकर पीनी चाहिए आदि। क्योंकि कुछ महिलाओं को चाय पीने की आदत होती है लेकिन प्रेगनेंसी में कब, कितनी और कैसे चाय पीनी चाहिए यदि इस बात का ध्यान न रखा जाये तो इसका असर माँ व् बच्चे दोनों की सेहत पर पड़ सकता है।

क्या प्रेगनेंसी में चाय पी सकते हैं?

कुछ महिलाओं की दिन की शुरुआत ही चाय से होती है। लेकिन यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको अपनी इस आदत में बदलाव करना जरुरी है। क्योंकि आप थोड़ी चाय का सेवन प्रेगनेंसी के दौरान कर तो सकती हैं लेकिन चाय का सेवन करने के साथ ही आपको बहुत सी बातों का ध्यान भी रखना पड़ता है। जैसे की सुबह उठने के बाद पहले महिला को कुछ खाना या पीना चाहिए उसके बाद चाय पीनी चाहिए। साथ ही चाय के साथ कुछ न कुछ खाना जरूर चाहिए। क्योंकि खाली पेट चाय पीने से या सिर्फ चाय का सेवन करने से महिला को पेट सम्बन्धी परेशानी होने का खतरा होता है।

प्रेगनेंसी में एक टाइम चाय पीने से क्या होता है?

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला दिन में एक बार चाय का सेवन करती है तो बहुत अच्छी बात है क्योंकि एक बार चाय का सेवन महिला प्रेगनेंसी के दौरान कर सकती है। लेकिन साथ ही चाय का सेवन करते समय महिला को ध्यान रखना चाहिए। जैसे की यदि आप एक बार चाय पी रही है तो इसका मतलब यह नहीं है की आप एक ही बार में गिलास भरकर चाय का सेवन करें, सुबह उठने के बाद खाली पेट चाय का सेवन नहीं करें, ज्यादा मीठे वाली चाय न पीएं, चाय में अदरक तुलसी आदि का अधिक इस्तेमाल करने से बचें, तेज पत्ती और कम दूध वाली चाय न पीएं, काली चाय पीने से बचें। यदि आप चाय पीना चाहती है तो एक कप, नोर्मल मीठा, नोर्मल पत्ती, ज्यादा दूध वाली चाय का सेवन करें।

प्रेगनेंसी में दो टाइम चाय पीने से क्या होता है?

यदि महिला का कभी मन होता है तो महिला दो बार भी चाय पी सकती है। लेकिन ऐसा नहीं है की एक कप चाय पीने के बाद तुरंत ही दूसरा कप भी चाय का पी लें। बल्कि चाय पीने के कारण आपको कोई परेशानी न हो इसके लिए एक कप सुबह तो एक कप शाम को चाय का सेवन करें। और जिन बातों का ध्यान आपको एक कप चाय का सेवन करते हुए रखना चाहिए उन्ही बातों का ध्यान प्रेग्नेंट महिला को दो कप चाय का सेवन करते हुए भी रखना चाहिए।

प्रेगनेंसी में तीन कप चाय का सेवन करने से क्या होता है?

गर्भवती महिला को इतनी चाय का सेवन करने से बचना चाहिए। क्योंकि चाय में कैफीन की मात्रा मौजूद होती है। और अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन महिला और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक होता है। यदि महिला तीन या उससे ज्यादा चाय का सेवन प्रेगनेंसी में करती है तो इसके कारण महिला को पेट में गैस, सीने में जलन, घबराहट, मुँह का स्वाद खराब होना, भूख में कमी, आदि की समस्या होती है। साथ ही इसका असर बच्चे पर भी पड़ता है क्योंकि महिला यदि अधिक मात्रा में कैफीन लेती है तो इससे बच्चे के विकास में कमी आती है। जिसके कारण जन्म के समय शिशु के वजन में कमी जैसी परेशानी का सामना महिला को करना पड़ सकता है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जो चाय का सेवन करते हुए प्रेग्नेंट महिला को ध्यान में रखने चाहिए। ताकि प्रेग्नेंट महिला की चाय पीने की इच्छा भी पूरी हो जाये और महिला को इन सभी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिल सके।

माँ के पहले गाढ़े दूध के फायदे जानें

माँ का पहला गाढ़ा दूध शिशु के लिए अमृत के समान होता है। इससे न केवल शिशु को शारीरिक रूप से बल्कि दिमागी रूप से बढ़ने में भी मदद मिलती है। साथ ही माँ के दूध से बच्चे को रोगो से लड़ने के लिए भी सक्षम बनाया जाता है। इसीलिए डॉक्टर्स भी कहते है की शिशु के जन्म के एक घंटे में अंदर माँ का पहला गाढ़ा दूध बच्चे को पिला देना चाहिए। और जन्म से लेकर छह महीने तक शिशु को केवल माँ का दूध ही देना चाहिए इसके अलावा बच्चे को पानी भी नहीं पिलाना चाहिए।

माँ का पहला गाढ़ा दूध पीले रंग का होता है, जिसे कोलोस्ट्रम भी कहा जाता है। इसमें प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है। यदि इसे शिशु को पिलाया जाता है तो इससे शिशु की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। साथ ही यह बच्चे को रोगो से मुक्त रखने में भी मदद करता है। यदि आप सीधे शिशु को स्तनपान नहीं करवा पाती है तो इसे निकालकर चम्मच की मदद से बच्चे को पिलाना चाहिए, लेकिन माँ का पहला गाढ़े दूध के फायदे शिशु को देने के लिए इसे पिलाना जरूर चाहिए।

माँ के दूध में वो सभी मिनरल्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते है, जो शिशु के शारीरिक और दिमागी विकास के लिए जरुरी होते है। इस दूध में गाय के दूध से भी सौ गुना अधिक शक्ति होती है। जो शिशु को हर संक्रमण और बिमारी से बचाती है। क्या आप भी माँ बनने जा रही है तो शिशु को पहले गाढ़ा दूध जरूर पिलाएं। क्योंकि इससे उसे भरपूर फायदे मिलते है, तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की माँ के पहले गाढ़े दूध से शिशु को कौन कौन से फायदे मिलते है।

माँ के पहले गाढ़े दूध के फायदे:-

संक्रमण से बचाता है:-

जब शिशु जन्म लेता है, तो उसकी स्किन बहुत ही कोमल होती है, जो की आसानी से किसी भी संक्रमण की चपेट में आ सकती है। लेकिन यदि जन्म के एक घंटे के भीतर की माँ अपने शिशु को स्तनपान करवाती है, तो इससे उसकी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलती है, जिससे संक्रमण से बचने में मदद मिलती है।

पाचन तंत्र को मजबूत करता है:-

जन्म के बाद माँ के गड्ढे दूध को पचने में बच्चे को समय नहीं लगता है, साथ ही इससे शिशु का पंचन तंत्र मजबूत होता है। जिससे पाचन क्रिया को बेहतर मिलने में मदद मिलती है, और बच्चा दूध आसानी से पचाना शुरू कर देता है।

मिनरल्स मिलते है:-

बच्चे के शारीरिक विकास के लिए जो भी मिनरल्स चाहिए होते है वो माँ के दूध में भरपूर मात्रा में मौजूद होते है। और माँ का पहला गाढ़ा दूध तो बच्चों के लिए वरदान होता है। इसीलिए महिला को जब तक बच्चा स्तनपान करे उसे करवाना चाहिए। जिससे बच्चे के शरीर को सभी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिल सकें।

विकास में मदद मिलती है:-

जन्म के बाद तीन साल तक शिशु का विकास काफी तेजी से होता है, ऐसे में जन्म के तुरंत बाद ही माँ का पहला गाढ़ा दूध बच्चे के लिए बहुत फायदेमंद होता है। क्योंकि इससे उसे रोगो से लड़ने के लिए सक्षम बनाया जा सकता है। और बच्चे के न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक विकास में भी तेजी से मदद मिलती है।

पीलिया की सम्भावना को कम करने में मदद करता है:-

ज्यादातर शिशुओं को जन्म के बाद पीलिया होने की सम्भावना रहती है। और इसके होने का मुख्य कारण बिलीरुबिन का शरीर में ज्यादा इक्कठा होना होता है। लेकिन माँ का पहला गाढ़ा दूध पीने से इसकी सम्भावना कम होने लगती है। जिसके कारण यह बच्चे को पीलिया होने से रोकने में मदद करता है।

तंत्रिका तंत्र का विकास करता है:-

माँ के पहले गाढ़े दूध में कोलेस्ट्रॉल उच्च मात्रा में होता है, जिसके कारण यह शिशु के तंत्रिका तंत्र के विकास में मदद करता है। और बच्चे के दिमाग का विकास भी तेजी से होता है। इसीलिए शिशु की बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने के लिए उसे माँ का दूध जरूर देना चाहिए।

भरपूर ऊर्जा देता है:-

शर्करा की मात्रा भी माँ के पहले गाढ़े दूध में भरपूर होती है। जिससे यह शरीर को ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करता है। इसीलिए शिशु को ऊर्जावान बनाने के लिए माँ का पहला गधा दूध जरूर देना चाहिए।

तो ये हैं कुछ फायदे जो माँ के पहले गाढ़े दूध से बच्चे को होते है, लेकिन कई महिलाएं अपने फिगर के ख़राब होने के डर से शिशु को स्तनपान नहीं करवाती है जो की गलत होता है। बच्चे के स्तनपान से केवल शिशु कोही नहीं माँ को भी ब्रैस्ट कैंसर जैसी बीमारियों से बचने में मदद मिलती है। तो हर माँ को अपने शिशु को स्तनपान जरूर करवाना चाहिए।

नोट:-

कई महिलाओ को डिलीवरी के तुरंत बाद स्तन में दूध नहीं आता है, तो इसके लिए आप अपने डॉक्टर से बात कर सकते है। या फिर जिन महिलाओ को दूध कम आता है वो घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करके इस समस्या का समाधान कर सकती है।

गर्भावस्था में पेट की खुजली से बचने के उपाय

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प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में बहुत से हार्मोनल बदलाव होते है जिसके कारण स्किन पर इसका बहुत जल्दी असर पड़ता है। क्योंकि त्वचा बहुत ही संवेदनशील होती है, साथ ही पेट का आकार बढ़ने के कारण पेट की मांसपेशियों में खिंचाव भी अधिक हो जाता है। और बॉडी में ब्लड फ्लो भी तेजी से होता है और इसके कारण आमतौर पर महिला को पेट पर खुजली जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। कुछ महिलाओं को तो पूरे शरीर में भी खुजली की समस्या हो जाती है। और इसके कारण महिला को परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है।

गर्भवस्था के दौरान यदि आपको पेट या शरीर के किसी अन्य भाग पर या पूरे शरीर में बहुत ज्यादा खुजली हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। क्योंकि ऐसा होने का कारण किसी लिवर सम्बन्धी समस्या का होना होता है। जो की गर्भवती महिला के साथ गर्भ में पल रहे शिशु पर भी नकारात्मक असर डाल सकती है। इसके अलावा यदि महिला को पेट पर खुजली की समस्या रहती है तो इस समस्या से बचाव के लिए महिला घर पर ही कुछ आसान टिप्स का इस्तेमाल कर सकती है, तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें

मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करने से स्किन की कोमलता बरकरार रहती है, साथ ही स्किन शुष्क नहीं होती है। और आपको खुजली की समस्या से बचाव करने में मदद मिलती है, आप इसे पूरी बॉडी के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। नियमित नहाने के बाद प्रेगनेंसी के दौरान इसका इस्तेमाल करें, आपको खुजली की समस्या से बचाव करने में मदद मिलेगी।

धूप में न रहें

प्रेगनेंसी के दौरान खुजली की समस्या से बचने के लिए आपको धूप में भी ज्यादा नहीं रहना चाहिए। क्योंकि धूप में अधिक रहने के कारण स्किन अपनी नमी को खोने लगती है जिसके कारण आपको खुजली की समस्या हो सकती है।

ऑयल का इस्तेमाल करें

स्किन पर ऑयल लगाने से भी स्किन नमीयुक्त हो जाती है, जिससे स्किन को पोषण मिलता है, ऐसे में नियमित रूप से रात को सोने से पहले या नहाने के बाद अपने पेट पर ऑयल लगाएं इससे आपकी स्किन पोषण से भरपूर मिलता है। और ऐसा करने से भी आपको खुजली की समस्या से आपको निजात मिलता है।

पोषण युक्त आहार लें

आपका खान पान भी आपकी स्किन को पोषण देता है तो ऐसे में यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान स्वस्थ संतुलित, पोषक तत्वों से भरपूर आहार का सेवन करती हैं, तो भी आपको इस परेशानी से निजात पाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनका इस्तेमाल करने से आपको प्रेगनेंसी के दौरान पेट पर होने वाली खुजली की समस्या से निजात पाने में मदद मिलती है। और यदि आपको ज्यादा खुजली की समस्या है तो आपको एक बार डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। साथ ही यदि आप खुजली करें तो ज्यादा तेजी से नहीं करनी चाहिए आराम से सहलाना चाहिए।

यूट्यूब विडिओ –

गर्भावस्था में पेट की खुजली की समस्या