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प्रेगनेंसी में यदि आप ज्यादा गुस्सा करती हैं तो आपका शिशु ऐसा होगा?

गर्भावस्था महिला के लिए बहुत ही उत्साह से भरा हुआ समय होता है लेकिन फिर भी इस दौरान कुछ महिलाएं तनाव, गुस्सा, इर्रिटेशन, आदि महसूस कर सकती है। प्रेगनेंसी के दौरान ऐसा होना बहुत ही आम बात होती है क्योंकि बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला को मूड स्विंग्स होते हैं जिसकी वजह से महिला को यह समस्या हो सकती है।

लेकिन एक हद तक यह सब सामान्य होता है और उसके बाद जब महिला को ज्यादा तनाव होता है, गुस्सा आता है तो यह नुकसानदायक हो सकता है। साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु का जुड़ाव भी माँ से इस तरीके का होता है की महिला जो भी करती है उसका प्रभाव शिशु पर भी पड़ता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको गर्भावस्था के दौरान यदि महिला ज्यादा गुस्सा करती है तो शिशु पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है उसके बारे में बताने जा रहे हैं। लेकिन उससे पहले जानते हैं की प्रेगनेंसी में गुस्सा क्यों आता है।

प्रेगनेंसी में गुस्सा आने के कारण

हार्मोनल बदलाव: प्रेगनेंसी के दौरान महिला के शरीर में हार्मोनल बदलाव हो रहे होते हैं जिसकी वजह से महिला को मूड स्विंग्स होते हैं और मूड स्विंग्स होने के कारण महिला को कभी कभार गुस्सा आ जाता है।

तनाव: गर्भावस्था के दौरान महिला के मन में इतने सवाल चल रहे होते हैं जैसे की क्या होगा कैसे होगा, आदि। जिसकी वजह से महिला तनाव में आ जाती है और तनाव होने के कारण महिला को गुस्सा आने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

डर: पहली बार माँ बन रही महिलाओं के मन में शिशु के विकास, प्रेगनेंसी के नौ महीनें, प्रसव आदि को लेकर डर होता है और कई बार डर गुस्से के रूप में बाहर आता है।

शारीरिक परेशानियां: प्रेगनेंसी के दौरान कुछ महिलाओं को शारीरिक परेशानियां अधिक हो सकती है जिसकी वजह से महिला परेशान रहती है और महिला को गुस्सा अधिक आ सकता है।

गर्भवती महिला को गुस्सा आने पर शिशु पर क्या प्रभाव पड़ता है?

जब महिला के खान पान रहन सहन आदि का असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है तो महिला प्रेगनेंसी के दौरान जब गुस्सा करती है तो उसका असर भी शिशु पर पड़ता हैं। जैसे की:

आपका शिशु पैदा होने के बाद बहुत रोता है

ऐसा माना जाता है की प्रेगनेंसी के दौरान जो महिलाएं बहुत अधिक गुस्सा करती है उसकी वजह से उनका होने वाला शिशु जन्म के बाद बहुत रोता है। और यह उसकी आदत के रूप में बाहर आती है यानी की हर छोटी छोटी बात पर वो रोना शुरू कर देते हैं।

शिशु चिड़चिड़ा होता है

जिन गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान बहुत अधिक गुस्सा आता है उनका होने वाला शिशु बहुत चिड़चिड़ा भी होता है। ऐसे बच्चे खाने पीने सोने आदि में बहुत ज्यादा तंग करते हैं।

शिशु का विकास कम होता है

प्रेगनेंसी के दौरान जिन महिलाओं को बहुत गुस्सा आता है तो उसका असर गर्भ में पल रहे शिशु के विकास को भी कई बार प्रभावित करता है। खासकर इसकी वजह से शिशु का दिमागी विकास बुरी तरह प्रभावित हो सकता है जिसका असर आपको बाद में शिशु में देखने को मिल सकता है साथ ही इससे शिशु के शारीरिक विकास पर भी असर देखने को मिल सकता है।

गर्भवती महिला गुस्से को कण्ट्रोल करने के लिए अपनाएँ यह टिप्स

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को गुस्सा अधिक आता है तो कुछ आसान टिप्स को ट्राई करने से महिला अपनी इस समस्या से निजात भी पा सकती है जिससे महिला को अपने गुस्से को कण्ट्रोल करने में मदद मिलती है। जैसे की:

  • खान पान अच्छा रखें इससे आपको एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है जिससे आपका मूड अच्छा रहता है।
  • रोजाना थोड़ी देर वॉक, व्यायाम, मैडिटेशन, योगा आदि जरूर करें इससे आपको शारीरिक व् मानसिक रूप से फिट रहने में मदद मिलती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान अपने आप को खुश रखने के लिए वो काम जरूर करें जिससे आपको ख़ुशी मिलती है जैसे की पेंटिंग, किताबें पड़ना, पौधों के साथ समय बिताना आदि।
  • गर्भावस्था के दौरान अपने शरीर की हलकी मालिश करवाएं इससे आपको शारीरिक व् मानसिक रूप से फिट रहने में मदद मिल सकेगी।
  • ऐसे माहौल में न रहने से बचे जहां आपको तनाव महसूस होता है या आपकी बहस हो सकती है।
  • अपनी दिनचर्या का सही से पालन करें।
  • भरपूर आराम करें इससे भी आपको अपने आप को दिमागी रूप से रिलैक्स रखने में मदद मिलेगी।
  • अपने मन में चल रही बातों को मन में ही न रखें बल्कि उन्हें व्यक्त करें। ऐसा करने से आपको अपने मन को हल्का करने में मदद मिलेगी।
  • गुस्सा यदि ज्यादा आता हो तो इसे अनदेखा न करते हुए एक बार डॉक्टर से मिलकर बात करें ताकि आपकी समस्या का समाधान हो सकें।
  • पॉजिटिव रहें और इसके लिए जब भी आपका मन हो आप अपने शिशु से बातें करें।

तो यह हैं गर्भावस्था में गुस्सा आने के कारण, गुस्से के कारण शिशु पर पड़ने वाला प्रभाव व् प्रेगनेंसी में गुस्से की समस्या को कम करने के टिप्स। यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो हो सकता है आपको भी यह समस्या हो ऐसे में आपको अपने गुस्से को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए और जितना हो सके इस समस्या से कैसे बचा जाए इसके बारे में सोचना चाहिए।

अंडा खाने से गर्भ में पल रहे शिशु को क्या फायदे मिलते हैं?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को हर वो चीज खानी चाहिए जिससे शिशु का शारीरिक व् मानसिक विकास बेहतर होने में मदद मिल सके। और अंडा एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिसका सेवन करने से गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे मिलने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास को बढ़ावा मिलने में भी मदद मिलती है। यदि आप अंडा खा लेती हैं तो आपको प्रेगनेंसी के दौरान अंडे का सेवन जरूर करना चाहिए। तो आइये अब इस आर्टिकल में जानते हैं की प्रेगनेंसी के दौरान अंडा खाने से गर्भ में पल रहे शिशु को कौन से फायदे मिलते हैं।

प्रोटीन

अंडा प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत होता है और प्रोटीन गर्भ में पल रहे शिशु की कोशिकाओं के बेहतर विकास में मदद करता है। जिससे शिशु का शारीरिक विकास और मानसिक विकास को बेहतर होने में मदद मिलती है।

Choline

choline नामक तत्व गर्भ में पल रहे शिशु के दिमागी विकास को बेहतर करने के लिए बहुत जरुरी होता है। यदि गर्भ में पल रहे शिशु को यह तत्व नहीं मिलता है तो इसके कारण शिशु के मानसिक विकास में कमी आने का खतरा रहता है। और अंडे में यह तत्व मौजूद होता है ऐसे में गर्भवती महिला यदि अंडा खाती है तो शिशु तक चोलीन नामक तत्व पहुँचता है जिससे शिशु का मानसिक विकास बेहतर होने में मदद मिलती है।

ओमेगा 3 फैटी एसिड

अंडा ओमेगा 3 फैटी एसिड से भी भरपूर होता है ऐसे में अंडे का सेवन यदि गर्भवती महिला करती है तो इससे माँ व् बच्चे दोनों को ओमेगा 3 फैटी एसिड भरपूर मिलता है। जो गर्भवती महिला को स्वस्थ रखने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु के बेहतर मानसिक व् शारीरिक विकास में मदद करता है।

कैल्शियम

अंडा कैल्शियम से भी भरपूर होता है ऐसे में गर्भवती महिला यदि अंडे का सेवन करती है तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए भरपूर कैल्शियम मिलता है। जिससे गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों व् दांतों के बेहतर विकास में मदद मिलती है।

आयोडीन

गर्भ में शिशु को पर्याप्त मात्रा में आयोडीन न मिलने के कारण शिशु के शारीरिक व् मानसिक विकास में कमी आने का खतरा रहता है। ऐसे में गर्भवती महिला यदि अंडा खाती है तो इससे शिशु तक आयोडीन पहुँचता है जिससे शिशु के विकास को सही तरीके से होने में मदद मिलती है।

आयरन

अंडे का सेवन करने से गर्भवती महिला के शरीर में खून की कमी को पूरा करने में भी मदद मिलती है जिससे शिशु का विकास बेहतर तरीके से होता है और समय पूर्व प्रसव जैसी समस्या से महिला को बचे रहने में मदद मिलती है।

विटामिन ए

अंडे में विटामिन ए भी मौजूद होता है जो गर्भ में पल रहे शिशु की स्किन, आँखों के बेहतर विकास में मदद करने के साथ इम्युनिटी को बढ़ाने में भी मदद करता है।

तो यह हैं कुछ फायदे जो गर्भ में पल रहे शिशु को अंडे से मिलते हैं। लेकिन गर्भवती महिला को कच्चा अंडा, अच्छे से न पका हुआ अंडा नहीं खाना चाहिए क्योंकि कच्चे अंडे का सेवन करने से गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या होने का खतरा रहता है साथ ही कच्चे अंडे में मौजूद हानिकारक बैक्टेरिया शिशु तक पहुंचकर शिशु के विकास को नुकसान पहुंचा सकता है।

Egg benefits for baby in womb

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने के क्या-क्या फायदे होते हैं?

प्रेगनेंसी के दौरान महिला अपने और शिशु के स्वास्थ्य का अच्छे से ध्यान रखती है और हर वो काम करने से बचती है जिसे लेकर उन्हें लगता है इससे बच्चे को नुकसान होगा। इसीलिए अधिकतर गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के समय सम्बन्ध बनाने से परहेज भी करती है। क्योंकि महिलाओं को ऐसा लगता है की प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने से गर्भपात हो सकता है, शिशु के विकास में कमी आ सकती है, शिशु को दिक्कत होने का खतरा होता है, आदि। लेकिन ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है की प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने से ऐसी दिक्कतें होती है।

क्योंकि डॉक्टर्स के अनुसार स्वस्थ प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाना बिल्कुल सेफ होता है और प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी के समय सम्बन्ध बनाने से कौन कौन से फायदे मिलते हैं उसके बारे में बताने जा रहे हैं। लेकिन उससे पहले इस बात के बारे में जानते हैं की प्रेगनेंसी में सम्बन्ध कब बनाना चाहिए और कब नहीं बनाना चाहिए।

गर्भवती महिला को कब सम्बन्ध बनाना चाहिए और कब नहीं?

प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला अपने पार्टनर के साथ सुखद समय बिताना चाहती है तो महिला सम्बन्ध बना सकती है लेकिन महिला को इस बात का ध्यान रखना चाहिए की प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत यानी की कोई कम्प्लीकेशन नहीं हो। साथ ही पूरी सावधानी का ध्यान रखते हुए महिला को सम्बन्ध बनाना चाहिए। इसके अलावा महिला को कब सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए आइये उसके बारे में जानते हैं।

  • यदि महिला का पहले गर्भपात हुआ हो।
  • यदि महिला की समय से पहले डिलीवरी हुई हो।
  • आपके पार्टनर को यदि यौन संचारित रोग हो।
  • ब्लीडिंग, सफ़ेद पानी जैसी समस्या हो।
  • पानी की थैली फट गई हो।
  • गर्भावस्था में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स हो।
  • यदि महिला का मन नहीं हो तो भी उनके पार्टनर को महिला के साथ जबरदस्ती सम्बन्ध बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे माँ व् बच्चे को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

गर्भावस्था में सम्बन्ध बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें

  • प्रेग्नेंट महिला को सम्बन्ध बनाते समय ध्यान रखना चाहिए की महिला के पेट पर दबाव नहीं पड़ें।
  • जोश में होश नहीं खोएं यानी की प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाते समय बिल्कुल भी तेजी नहीं करनी चाहिए।
  • किसी भी तरह का नया एक्सपेरिमेंट नहीं करना चाहिए।
  • सम्बन्ध बनाते समय सुरक्षा का इस्तेमाल जरूर करें।

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने के फायदे

यदि प्रेगनेंसी में किसी तरह की कॉम्प्लीकेशन्स नहीं हो तो गर्भवती महिला प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बना सकती है और इससे महिला को बहुत से फायदे मिलते हैं। जैसे की:

ब्लड प्रैशर

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला सम्बन्ध बनाती है तो इससे गर्भवती महिला के ब्लड प्रैशर को नोर्मल रहने में मदद मिलती है। जो की गर्भवती महिला के लिए और शिशु के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

बेहतर नींद

गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के दौरान बढ़ते वजन, शारीरिक परेशानियों, बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण अनिंद्रा की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन यदि प्रेग्नेंट महिला सम्बन्ध बनाती है तो इससे महिला को बेहतर नींद लेने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को फिट व् स्वस्थ रहने में मदद मिलती है साथ ही महिला हमेशा एक्टिव और एनर्जी से भरपूर महसूस करती है।

इम्युनिटी मजबूत होती है

ऐसा माना जाता है की प्रेगनेंसी के दौरान यदि महिला सम्बन्ध बनाती है तो इससे महिला की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। क्योंकि ऐसा करने से शरीर में एंटीबॉडीज़ के स्तर में सुधार आता है। और जब महिला की इम्युनिटी मजबूत होती है तो इससे गर्भवती महिला को संक्रमण व् बिमारियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

ब्लड फ्लो

प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में ब्लड फ्लो का अच्छे तरीके से होना बहुत जरुरी होता है क्योंकि यदि शरीर में ब्लड फ्लो अच्छे से नहीं होता है तो इसके कारण माँ और बच्चे दोनों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यदि महिला सम्बन्ध बनाती है तो इससे शरीर में ब्लड फ्लो को तेजी से होने में मदद मिलती है जिससे गर्भवती महिला और शिशु दोनों को फायदा मिलता है।

स्ट्रैस से राहत

गर्भावस्था के दौरान बहुत सी महिलाएं तनाव से ग्रसित हो जाती है और तनाव माँ और बच्चे दोनों पर नकारात्मक असर डालता है। ऐसे में महिला को इस बात की सलाह दी जाती है की महिला बिल्कुल भी स्ट्रैस नहीं ले। और यदि गर्भवती महिला सम्बन्ध बनाती है तो इससे भी महिला को स्ट्रैस से बचे रहने में मदद मिलती है क्योंकि सम्बन्ध बनाने से शरीर में ऑक्सीटॉसिन हार्मोन का निर्माण होता है जो तनाव को दूर करने में मदद करता है।

वजन

सम्बन्ध बनाने से गर्भवती महिला को जरुरत से ज्यादा वजन बढ़ने की समस्या से भी बचे रहने में मदद मिलती है। क्योंकि सम्बन्ध बनाने से शरीर में मौजूद एक्स्ट्रा कैलोरी बर्न हो जाती है।

पति पत्नी के सम्बन्ध अच्छे होते हैं

प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाते रहने से पति पत्नी के बीच के प्यार और और बढ़ाने में मदद मिलती है। जिससे महिला हमेशा खुश भी रहती है जो की माँ और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है।

प्रसव में आसानी

प्रेगनेंसी में सम्बन्ध बनाने से पेल्विक एरिया की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है जिससे महिला की प्रसव पीड़ा को कम करके प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान सम्बन्ध बनाने से जुड़े टिप्स, ऐसे में बिना सोचें समझें प्रेगनेंसी में सम्बन्ध से बचने की बजाय इसके बारे में आपको पूरी जानकारी लेनी चाहिए। ताकि प्रेगनेंसी के दौरान भी आप अपनी शादीशुदा लाइफ को एन्जॉय कर सकें और सम्बन्ध बनाने के बेहतरीन फायदे महिला और बच्चे को मिलें।

प्रेगनेंसी में कीवी कब, कितना, कैसे और क्यों खाएं?

गर्भावस्था के दौरान महिला को अलग अलग फलों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि फलों का स्वाद बेहतरीन होने के साथ इनमे पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। ऐसे में यदि महिला फलों का सेवन करती है तो इससे प्रेगनेंसी के दौरान माँ व् बच्चे के लिए जरुरी पोषक तत्व शरीर में पहुँचते हैं जिससे माँ व् बच्चे दोनों को फायदा मिलता है।

साथ ही महिला को प्रेगनेंसी के दौरान अलग अलग किस्म के फलों को खाने की इच्छा भी हो सकती है। ऐसे में किसी भी फल के सेवन से पहले उसकी पूरी जानकारी (जैसे की वह फल महिला को कब, कितना, कैसे, क्यों खाना चाहिए, आदि) महिला को इक्कठी करनी चाहिए ताकि उसे खाने से माँ या बच्चे को कोई दिक्कत नहीं हो। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान कीवी का सेवन करने के बारे में बात करने जा रहे हैं।

प्रेगनेंसी में कीवी का सेवन करें या नहीं?

गर्भावस्था के दौरान महिला की यदि कीवी खाने की इच्छा होती है तो महिला बिना किसी डर के कीवी का सेवन कर सकती है। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान कीवी का सेवन करने से माँ या बच्चे को कोई दिक्कत नहीं होती है।

गर्भवती महिला को कीवी का सेवन क्यों करना चाहिए?

कीवी में फोलेट, विटामिन सी प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है और यह दोनों पोषक तत्व ही गर्भवती महिला और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। इसके अलावा कीवी में डाइट्री फाइबर, विटामिन के, आयरन जैसे अन्य पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं जो माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं। ऐसे में इन सभी जरुरी पोषक तत्वों की कमी गर्भवती महिला के शरीर में नहीं हो इसके लिए प्रेग्नेंट महिला को कीवी का सेवन करना चाहिए।

प्रेग्नेंट महिला को कीवी का सेवन कब करना चाहिए?

गर्भावस्था में कीवी खाने के लिए कोई समय निर्धारित नहीं है बल्कि प्रेगनेंसी की शुरुआत से लेकर आखिर तक महिला किसी भी तिमाही में कीवी का सेवन कर सकती है। लेकिन यदि महिला को कीवी खाने से किसी तरह की एलर्जी होती है या प्रेगनेंसी में कीवी खाने से कोई समस्या हो रही है तो महिला को कीवी का सेवन नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में कीवी का सेवन कितना करना चाहिए?

गर्भवती महिला एक दिन में एक छोटी कटोरी या फिर आप कह सकते हैं की एक या डेढ़ कीवी का सेवन महिला कर सकती है। इतना कीवी खाने से महिला को कोई नुकसान नहीं होता है। लेकिन यदि महिला यदि जरुरत से ज्यादा कीवी का सेवन करती है तो इसके कारण गले में खराश, दस्त जैसी परेशानी महिला को हो सकती है। ऐसे में कीवी के बेहतरीन फायदे के लिए प्रेगनेंसी में होने वाली दिक्कतों से बचे रहने के लिए महिला को सिमित मात्रा में कीवी का सेवन करना चाहिए।

गर्भवती महिला को कीवी का सेवन क्यों करना चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान महिला को हर उस चीज का सेवन करना चाहिए जिससे माँ व् बच्चे को सेहत सम्बन्धी फायदे मिल सके। और कीवी एक ऐसा फल है जिसका सेवन करने से प्रेग्नेंट महिला व् बच्चे दोनों को सेहत सम्बन्धी फायदे मिलते हैं इसीलिए गर्भवती महिला को कीवी का सेवन करना चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी में कीवी खाने से कौन से फायदे मिलते हैं।

पाचन तंत्र रहता है दुरुस्त

कीवी में डाइट्री फाइबर मौजूद होता है जो प्रेगनेंसी के दौरान महिला की पाचन क्रिया को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। जिससे गर्भवती महिला को कब्ज़, एसिडिटी, अपच जैसी परेशानी से प्रेगनेंसी के दौरान बचे रहने में मदद मिलती है।

फोलेट मिलता है

कीवी फोलेट का बेहतरीन स्त्रोत होता है और फोलेट गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए एक जरुरी पोषक तत्व होता है। ऐसे में कीवी का सेवन करने से शिशु को भरपूर फोलेट मिलता है जिससे शिशु का शारीरिक व् दिमागी विकास अच्छे से होने के साथ शिशु को जन्म दोष की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

हड्डियां होती है मजबूत

कीवी में विटामिन के भी मौजूद होता है जो हड्डियों के विकास में व् उन्हें दुरुस्त रखने में मदद करता है। ऐसे में यदि गर्भवती महिला कीवी का सेवन करती है तो इससे गर्भवती महिला की हड्डियों को मजबूती मिलने के साथ गर्भ में पल रहे शिशु की हड्डियों के बेहतर विकास में मदद मिलती है। जिससे शिशु का शारीरिक विकास बेहतर तरीके से होता है।

इम्युनिटी होती है मजबूत

विटामिन सी एक बेहतरीन एंटी ऑक्सीडेंट होता है जो इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद करता है और यह कीवी में मौजूद होता है। और प्रेगनेंसी के दौरान बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है ऐसे में महिला को ऐसी डाइट लेनी चाहिए जिससे महिला की इम्युनिटी मजबूत रहें। ताकि माँ और बच्चे को संक्रमण का खतरा नहीं हो। ऐसे में महिला इम्युनिटी मजबूत करने के लिए कीवी को अपने पसंदीदा फलों में शामिल कर सकती है।

आयरन

गर्भावस्था के दौरान शरीर में आयरन की कमी का होना माँ व् बच्चे दोनों की सेहत पर बुरा असर डाल सकता है और कीवी में आयरन की मात्रा मौजूद होती है। ऐसे में शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने के लिए महिला कीवी का सेवन कर सकती है।

ब्लड शुगर रहता है कण्ट्रोल

गर्भवती महिला यदि शुगर की समस्या से ग्रसित है तो महिला को कीवी का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि कीवी का सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल कण्ट्रोल रहता है जिससे महिला को कोई दिक्कत नहीं होती है। साथ ही कीवी का सेवन करने से गर्भवती महिला को जेस्टेशनल शुगर की समस्या से बचे रहने में भी मदद मिलती है।

ध्यान रखें: गर्भवती महिला को कीवी को धोने के बाद खाने के लिए प्रयोग में लाना चाहिए साथ ही महिला को कच्चे कीवी का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसमें एसिड की अधिकता होती है जिससे महिला को परेशानी हो सकती है ऐसे में किसी भी परेशानी से बचने के लिए अच्छे से चेक करने के बाद ही कीवी का सेवन करें।

तो यह हैं प्रेगनेंसी के दौरान कीवी का सेवन करने से जुडी जानकारी, इसके अलावा गर्भवती महिला को रोजाना फलों में बदलाव करके खाना चाहिए। ताकि शरीर में सभी पोषक तत्वों की मात्रा सही रहें।

Kiwi during Pregnancy

Cashew nuts during pregnancy

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प्रेगनेंसी में काजू खाते समय रखें इन बातों का ध्यान – cashew nuts during pregnancy.

Pregnancy Me Kaju Khana Chahiye ya Nahi, Cashew, kaju in pregnancy in hindi, क्या प्रेग्नेंसी के दौरान काजू खाना सुरक्षित? यहां जान लीजिए जरूरी बातें, cashew in pregnancy in Hindi प्रेगनेंसी में काजू कब से खाना चाहिए? और गर्भ और गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए कितना फायदेमंद है। कब से काजू का सेवन करने चाहिए।

Watch Hindi video for what are the benefits of kaju during pregnancy.

गर्भवती महिला को आठवें महीने के बाद क्या -क्या खाना चाहिए?

प्रेगनेंसी गर्भवती महिला के लिए ऐसा समय होता है जब महिला अपने गर्भ में एक नन्ही जान को एक वरदान के रूप में पाल रही होती है। और पूरी प्रेगनेंसी के दौरान महिला खुद से ज्यादा अपने शिशु के लिए सोचती है, उसके स्वास्थ्य को बेहतर रखने की तरफ सबसे ज्यादा ध्यान देती है। साथ ही हर कोई प्रेगनेंसी का पूरा समय यानी की पूरे नौ महीने तक महिला को अपना अच्छे से ध्यान रखने की सलाह देता है। और प्रेगनेंसी के आखिरी महीने में तो महिला को अपना ध्यान भी रखना होता है, अपने शरीर को प्रसव के लिए तैयार भी करना होता है, आदि।

क्योंकि प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में महिला जितना ज्यादा अपने ध्यान रखती है उतना ही बच्चे के तेजी से विकास होने में मदद मिलती है, प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है। ऐसे में महिला को सबसे ज्यादा अपने खान पान का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है क्योंकि बेहतर खान पान माँ व् बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद होता है। तो आइये अब इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं की प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को क्या-क्या खाना चाहिए।

देसी घी

गर्भावस्था के नौवें महीने में महिला को देसी घी जरूर खाना चाहिए क्योंकि इससे गर्भ में पल रहे शिशु को भरपूर पोषण मिलता है। साथ ही देसी घी में मौजूद पोषक तत्व गर्भ गर्भवती महिला के शरीर को प्रसव के लिए ऊर्जा से भरपूर रखने में मदद करते हैं।

हरी सब्जियां

आठवें महीने के बाद महिला को हरी सब्जियों का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए क्योंकि हरी सब्जियां आयरन, फोलेट, विटामिन्स से भरपूर होती है। जो माँ व् बच्चे को पोषण पहुंचाने के साथ डिलीवरी के समय खून की कमी को पूरा रखने, बच्चे को जन्म दोष से सुरक्षित रखने में मदद करते है।

ड्राई फ्रूट्स

ड्राई फ्रूट्स का सेवन भी महिला को नौवें महीने में जरूर करना चाहिए क्योंकि ड्राई फ्रूट्स पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। जो गर्भवती महिला को एनर्जी से भरपूर रखने में मदद करते हैं, शरीर में पोषक तत्वों की कमी को पूरा करते हैं, बच्चे के बेहतर विकास में मदद करते हैं, आदि। साथ ही ड्राई फ्रूट्स की तासीर गर्म होती है जिससे प्रसव पीड़ा को उत्तेजित करने में मदद मिलती है।

दूध व् अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स

प्रसव का समय आने पर महिला को ऊर्जा की बहुत ज्यादा जरुरत होती है। और डेयरी प्रोक्ट्स कैल्शियम, प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत होते हैं जो गर्भवती महिला के शरीर को भरपूर पोषण पहुंचाने में मदद करते हैं। साथ ही शिशु के बेहतर विकास में भी मदद करते हैं। ऐसे में गर्भवती महिला को प्रेगनेंसी के नौवें महीने में डेयरी प्रोडक्ट्स खासकर एक दिन में दो से तीन गिलास दूध का सेवन जरूर करना चाहिए।

अनानास

गर्भावस्था के नौवें महीने में महिला चाहे तो अनानास का सेवन भी कर सकती है क्योंकि इसमें पोषक तत्वों की अधिकता होने के साथ यह प्रसव पीड़ा को उत्तेजित करने में भी मदद करता है। जिससे महिला के प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है। अनानास को काटकर खाने के साथ अनानस के जूस का सेवन भी महिला कर सकती है।

खजूर

प्रेगनेंसी के आखिरी दिनों में महिला को रोजाना सात आठ खजूर का सेवन जरूर करना चाहिए। क्योंकि खजूर का सेवन करने से माँ व् बच्चे को सेहत सम्बन्धी फायदे मिलने के साथ गर्भाशय ग्रीवा को खुलने में भी मदद मिलती है। जिससे प्रसव को आसान बनाने में मदद मिलती है।

फल खाएं भरपूर

प्रेगनेंसी के आठवें महीने के बड़ा महिला को फलों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए खासकर जिनमे पानी की मात्रा की अधिकता होती है जैसे की संतरा, किन्नू आदि। ऐसे में फलों को खाने से महिला की पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है, बॉडी में तरल पदार्थों की मात्रा भरपूर रहती है, एनर्जी मिलती है, आदि। जिससे प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला की परेशानियों को कम करने में मदद मिलती है।

दालें व् फलियां

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में महिला को दालों और फलियों का सेवन भी भरपूर मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि इनमे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं जो माँ व् बच्चे को हेल्दी रखने के साथ महिला को प्रसव के लिए एनर्जी देने में भी मदद करते हैं।

शकरकंद

यदि आपका नौवां महीना चल रहा है और शकरकंद का मौसम है तो आपको शकरकंद का सेवन करना चाहिए। क्योंकि शकरकंद का सेवन करने से आपको एनर्जी से भरपूर रहने के साथ नोर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ाने में भी मदद मिलता है।

शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेने के साथ महिला को तरल पदार्थों का सेवन भी भरपूर करना चाहिए। क्योंकि तरल पदार्थों का सेवन भरपूर मात्रा में करने से महिला को ऊर्जा से भरपूर रहने में मदद मिलती है। इसके अलावा महिला को इस दौरान दिन में तीन चार बार गुनगुना पानी पीना चाहिए क्योंकि ऐसा माना जाता है की गर्म पानी पीने से भी प्रसव पीड़ा को उत्तेजित करने में मदद मिलती है।

प्रेगनेंसी के नौवें महीने में इन बातों का ध्यान भी रखें

  • पर्याप्त नींद लें।
  • थोड़ी देर वाक जरूर करें।
  • खान पान समय से करें।
  • टेंशन नहीं लें।
  • प्रसव के बारे में लोगो की अलग अलग राय सुनकर बिल्कुल भी नहीं घबराएं क्योंकि आपका शरीर अलग है और उनका अलग है।
  • थोड़ी देर मैडिटेशन जरूर करें।
  • समय से डॉक्टर से जांच करवाएं।
  • शरीर में कोई भी असहज लक्षण के महसूस होने पर डॉक्टर से मिलें।

तो यह हैं कुछ खाद्य पदार्थ जिनका सेवन प्रेगनेंसी के आठवें महीने के बाद महिला को जरूर करना चाहिए। इसके अलावा महिला को उठने, बैठने, सोने, काम करते समय सावधानी बरतनी चाहिए ताकि माँ या बच्चे को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं हो। साथ ही महिला को प्रसव की जानकारी इक्कठी करनी चाहिए। ताकि प्रसव को आसान बनाने में मदद मिल सके।

प्रेगनेंसी में पेट में गैस की समस्या होने के कारण व् उपाय

हर महिला के जीवन के एक बार वह सुखद अहसास आता है जब वो गर्भवती होती है। और इस सुखद अहसास का हर महिला बेसब्री से इंतज़ार करती है। लेकिन साथ ही इस दौरान गर्भवती महिला को बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। जैसे की बॉडी पेन होना, पैरों में सूजन होना, भूख कम या ज्यादा लगना, उल्टियां होना, पेट से जुडी परेशानियां जैसे की कब्ज़ गैस होना, आदि। आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली पेट में गैस की समस्या के बारे में बात करने जा रहे हैं की आखिर प्रेगनेंसी में इस परेशानी के होने के क्या कारण हैं और किस तरह गर्भवती महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है।

गर्भावस्था में पेट में गैस होने के कारण

  • प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में प्रोजेस्ट्रोन हॉर्मोन का स्तर बढ़ने लगता है जिसकी वजह से पाचन क्रिया धीरे काम करने लगती है और गर्भवती महिला को पेट में गैस की समस्या हो सकती है।
  • प्रेग्नेंट महिला को खाना हज़म करने में परेशानी होने के कारण कब्ज़ हो जाती है जिसके कारण गैस की समस्या महिला को हो जाती है।
  • जरुरत से ज्यादा खाना खाने, मसालेदार व् ज्यादा तला भुना खाने के कारण भी महिला को पेट में गैस की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
  • लम्बे समय तक भूखे रहने के कारण भी महिला को यह समस्या हो सकती है।
  • बढ़ता वजन भी इस समस्या का कारण हो सकता है क्योंकि वजन ज्यादा होने के कारण पाचन क्रिया धीमी होती है जिसकी वजह से यह समस्या हो सकती है।
  • शरीर में हार्मोनल असंतुलन होने के कारण भी इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • जो खाद्य पदार्थ गैस बनाते हैं जैसे की गोभी, पत्ता गोभी, बीन्स, मटर आदि का सेवन करने के कारण भी महिला को यह समस्या हो सकती है।
  • रात के समय दही का सेवन करने के कारण भी कुछ गर्भवती महिलाओं को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
  • यदि गर्भवती महिला धूम्रपान करती है तो भी महिला को इस परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

प्रेगनेंसी में गैस की समस्या से निजात पाने के टिप्स

गर्भावस्था के दौरान यदि महिला को गैस की समस्या हो जाती है तो इसे लेकर महिला को ज्यादा परेशान होने की जरुरत नहीं है। क्योंकि कुछ आसान टिप्स को फॉलो करने से गर्भवती महिला इस परेशानी से निजात पा सकती है जैसे की:

थोड़ा थोड़ा करके खाएं

गर्भवती महिला को एक ही बार में ज्यादा भोजन नहीं करना चाहिए बल्कि थोड़ा थोड़ा करके खाना चाहिए। इससे भोजन को आसानी से पचाने में मदद मिलती है जिससे गैस की समस्या से बचाव होता है।

चबाकर खाएं

खाना खाते समय गर्भवती महिला को बिलकुल भी तेजी नहीं करनी चाहिए बल्कि धीरे धीरे चबा चबाकर भोजन खाना चाहिए। ऐसा करने से खाना आसानी से हज़म हो जाता है जिससे महिला को कब्ज़ नहीं होती है और गैस की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

फाइबर से भरपूर डाइट लें

प्रेगनेंसी के दौरान पेट से जुडी सभी परेशानी से बचे रहने के लिए गर्भवती महिला को अपनी डाइट में फाइबर युक्त चीजों को शामिल करना चाहिए। फाइबर युक्त चीजों का सेवन करने से पाचन क्रिया को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है जिससे पेट सम्बन्धी परेशानी से महिला बची रहती है।

उन खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें जिनसे गैस बनती है

गर्भवती महिला को उन खाद्य पदार्थों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए जिनका सेवन करने से गर्भवती महिला को गैस बनती है। जैसे की तला भुना आहार, बासी खाना, मसालेदार खाना, गोभी व् अन्य सब्जियां आदि। यदि महिला इन खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करती है तो महिला को इन परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करें

प्रेग्नेंट महिला को पानी व् अन्य तरल पदार्थों का भी भरपूर सेवन करना चाहिए क्योंकि तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करने से पेट अच्छे से साफ़ होता है साथ ही पाचन क्रिया को भी अच्छे से काम करने में मदद मिलती है। जिससे गर्भवती महिला को इन सभी परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है।

वाक करें

गर्भवती महिला को पेट में गैस व् अन्य परेशानियों से बचे रहने के लिए एक बात का खास ध्यान रखना चाहिए की महिला को खाना खाने के तुरंत बाद सोना नहीं चाहिए। या बैठे नहीं रहना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से खाना अच्छे से हज़म नहीं होता है जिसकी वजह से महिला को यह समस्या अधिक होती है। ऐसे में महिला को इस परेशानी से बचे रहने के लिए खाना खाने के बाद थोड़ा वाक जरूर करना चाहिए।

तो यह हैं कुछ टिप्स जिनकी मदद से प्रेग्नेंट महिला को पेट में गैस की समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है। यदि आप भी गर्भावस्था के दौरान इस परेशानी का सामना कर रहे हैं तो इन टिप्स को फॉलो करें आपको जरूर फायदा मिलेगा।

Causes and remedies of gas problem during Pregnancy

प्रेगनेंसी में लूज़मोशन की समस्या

माँ बनना महिलाओं के लिए बहुत ही सुखद अनुभव होता है लेकिन साथ ही कई बार महिलाओं को ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है जिससे महिला के साथ शिशु की सेहत पर भी असर पड़ सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला को पाचन सम्बन्धी समस्या होना जैसे की कब्ज़, दस्त, एसिडिटी का होना आम बात होती है।

लेकिन यदि यह समस्या बढ़ जाये तो इसकी वजह से माँ व् बच्चे दोनों को सेहत सम्बन्धी समस्या अधिक हो सकती है। तो आज इस आर्टिकल में हम आपसे प्रेग्नेंट महिला को लूज़मोशन होने के कारण होते हैं, महिला को इससे क्या दिक्कत हो सकती है और किस तरह महिला इस परेशानी से राहत पा सकती है इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

गर्भावस्था में लूज़मोशन होने के कारण

  • शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण यह दिक्कत हो सकती है क्योंकि हार्मोनल बदलाव के कारनपाचं तंत्र पर प्रभाव पड़ता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान महिला का चटपटा मसालेदार खाने का मन अधिक करता है लेकिन यदि महिला ज्यादा मसालेदार या चटपटा अधिक खाती है तो इसकी वजह से पाचन तंत्र प्रभावित होता है जिसकी वजह से महिला को लूज़मोशन हो सकते हैं।
  • स्ट्रेस भी इस परेशानी का एक कारण होता है।
  • जरुरत से ज्यादा अंडे या नॉनवेज खाने के कारण या फिर कच्चे अंडे या नॉन वेज खाने के कारण भी पेट खराब हो सकता है जिसकी वजह से लूज़मोशन की समस्या हो सकती है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान पाचन तंत्र थोड़ा धीमे काम करता है ऐसे में यदि महिला जरुरत से ज्यादा खा लेती है तो इससे महिला को खाना पचाने में दिक्कत हो सकती है जिसकी वजह से महिला को यह दिक्कत हो सकती है।
  • शरीर में पानी की कमी होने के कारण भी यह दिक्कत हो सकती है या फिर दूषित पानी पीने के कारण भी ये दिकत हो सकती है।
  • दवाइयों का सेवन करने के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
  • यदि महिला अपने खाने पीने की चीजों की साफ सफाई का ध्यान नहीं रखती है तो इसकी वजह से बैक्टेरियल इन्फेक्शन हो जाता है जिसकी वजह से यह दिक्कत हो सकती है।
  • डाइट में होने वाले बदलाव के कारण भी महिला को यह दिक्कत हो सकती है।

लूज़मोशन होने के कारण क्या दिक्कत हो सकती है?

  • यदि प्रेग्नेंट महिला को लूज़मोशन की समस्या प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में अधिक होती है तो इसकी वजह से महिला का गर्भपात तक हो सकता है।
  • गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में यह समस्या होने पर शिशु के विकास में कमी, महिला को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या का अधिक होने जैसी समस्या हो सकती है।
  • लूज़मोशन की समस्या होने पर गर्भवती महिला के शरीर में पानी की कमी हो सकती है और महिला के शरीर में पानी की कमी होने के कारण महिला को कमजोरी, थकान, चक्कर व् अन्य शारीरिक परेशानियां बढ़ सकती है।
  • प्रेगनेंसी की आखिरी तिमाही में लूज़मोशन का होना समय से पहले डिलीवरी होने जैसी समस्या के खतरे को बढ़ा सकता है।

प्रेग्नेंट महिला लूज़मोशन की समस्या से बचाव के लिए अपनाएँ यह टिप्स

गर्भवती महिला को यदि लूज़मोशन की समस्या हो जाती है तो कुछ आसान टिप्स को फॉलो करने से महिला इस समस्या से निजात पा सकती है। तो आइये अब जानते हैं की वो टिप्स कौन से हैं।

पानी को उबाल कर पीएं

गर्भवती महिला को पाने को उबालकर ठंडा करके उसका सेवन करना चाहिए ऐसा करने से पानी में मौजूद विषैले बैक्टेरिया को खत्म करने में मदद मिलती है। जिससे पानी के द्वारा होने वाली लूज़मोशन की समस्या से बचाव होता है।

साफ़ सफाई का ध्यान रखें

गर्भवती महिला को अपने हाथों पैरों, अपने आस पास्की, अपने खान पान की चीजों में साफ़ सफाई का बहुत अधिक ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि साफ़ सफाई का ध्यान न रखने के कारण ही बैड बैक्टेरिया शरीर में प्रवेश कर जाता है। जिसकी वजह से लूज़मोशन हो जाते है ऐसे में महिला यदि साफ़ सफाई का ध्यान रखती है तो इस परेशानी से बचे रहने में मदद मिलती है।

जरुरत से ज्यादा नहीं खाएं

महिला को थोड़ा थोड़ा करके खाना चाहिए ताकि आपके द्वारा खाए गए भोजन को हज़म होने में मदद मिल सकें। यदि महिला थोड़ा थोड़ा करके और अच्छे से चबा चबा कर खाती है तो इससे महिला को पेट सम्बन्धी समस्या से बचे रहने में मदद मिलती है।

हेल्दी डाइट लें

ज्यादा मसालेदार, तेलीय आहार, जंक फ़ूड, स्ट्रीट फ़ूड आदि का सेवन करने की वजह से महिला को लूज़मोशन की समस्या अधिक हो सकती है। ऐसे में महिला को इन सभी चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए और हेल्दी डाइट लेनी चाहिए खासकर फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए। यदि महिला ऐसा करती है तो इससे गर्भवती महिला के पाचन तंत्र को दुरुस्त रहने में मदद मिलती है जिससे लूज़मोशन की समस्या से बचा जा सकता है।

मीठी चीजों का सेवन कम करें

जरुरत से ज्यादा मीठा खाने के कारण भी दस्त की समस्या हो सकती है ऐसे में महिला को इस परेशानी से बचाव के लिए मीठे के सेवन से परहेज करना चाहिए।

निम्बू नमक का घोल पीएं

यदि प्रेग्नेंट महिला को लूज़मोशन की समस्या हो रही है तो महिला को नमक, चीनी और निम्बू का घोल पीना चाहिए लूज़मोशन की समस्या से बचाव के लिए यह आसान व् असरदार उपाय है।

डेयरी प्रोडक्ट न लें

लूज़मोशन की समस्या होने पर महिला को डेयरी प्रोडक्ट जैसे की दूध, पनीर आदि का सेवन बंद कर देना चाहिए क्योंकि इन्हे खाने से महिला की यह दिक्कत बढ़ सकती है।

आसानी से पचने वाले भोजन खाएं

लूज़मोशन की समस्या से बचाव के लिए महिला को खिचड़ी, उबले चावल और दही जैसे हलके भोजन का सेवन करना चाहिए। ताकि महिला को इस समस्या से बचे रहने में मदद मिल सकें।

दस्त की समस्या होने पर डॉक्टर से कब मिलें?

यदि महिला को दस्त की समस्या ज्यादा बढ़ जाए, उल्टियां अधिक होने लगे, बुखार आएं, ऊपर बताए गए टिप्स ट्राई करने के बाद भी दिक्कत हो, दवाई का सेवन करने के बाद यह परेशानी आएं, तो गर्भवती महिला को बिना देरी किये डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान किसी भी समस्या को यदि ज्यादा देर के लिए अनदेखा किया जाए तो आपकी दिक्कत ज्यादा बढ़ सकती है।

तो यह है प्रेगनेंसी में लूज़मोशन की समस्या से जुडी जानकारी, यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं तो आपको भी इन बातों के बारे में जरूर पता होना चाहिए। ताकि यदि आपको ऐसी कोई दिक्कत हो तो आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं इसके बारे में आपको पता हो और आप इस परेशानी से बच सकें।

Loose Motions during Pregnancy

बिना टेस्ट के ऐसे जानिए प्रेगनेंसी है या नहीं?

आज कल प्रेगनेंसी का पता लगाना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है क्योंकि आप घर बैठे आसानी से यह जान सकती हैं की आप माँ बनने वाली है या नहीं। और इसके लिए आपको पीरियड्स मिस होने पर बाजार से एक प्रेगनेंसी टेस्ट किट लानी है और उसमे यूरिन सैंपल डालकर आप यह जान सकती है की आप माँ बनने वाली हैं या नहीं। लेकिन क्या आप जानती है की बिना टेस्ट किये भी आपको यह अंदाजा लगा सकती है की आप माँ बनने वाली हैं या नहीं? यदि नहीं, तो आज इस आर्टिकल में हम आपको बिना टेस्ट के कैसे पता चलता है की प्रेगनेंसी है या नहीं इसके बारे में बताने जा रहे हैं।

बिना टेस्ट के कैसे पता चलती है प्रेगनेंसी?

जब महिला का गर्भधारण होता है तो महिला को शरीर में बहुत से बदलाव महसूस होते हैं। जैसे की महिला को शारीरिक परेशानियां हो सकती है, शरीर में अलग सा महसूस होता है, मूड में बदलाव आ सकता है, टेस्ट में चेंज आ सकता है, आदि। और यह बदलाव शरीर में तभी से होने शुरू हो जाते हैं जब निषेचन की प्रक्रिया होती है। यदि आपको भी पीरियड्स मिस होने से पहले ही यह बदलाव यह शरीर में महसूस होते हैं। तो यह बदलाव इस बात की और इशारा करते हैं की आपका गर्भधारण हो गया हैं। तो आइये अब उन बदलावों के बारे में विस्तार से जानते हैं जो यह जानने में मदद करते हैं की महिला का गर्भ ठहर गया है।

गर्भधारण के लक्षण

जब महिला गर्भधारण करती है तो महिला के शरीर में एक नहीं बल्कि कई अलग अलग लक्षण महसूस हो सकते हैं। और इन सभी का कारण बॉडी में हो रहे हार्मोनल बदलाव होते हैं। तो आइये अब जानते हैं की गर्भधारण के क्या क्या लक्षण होते हैं।

क्रेविंग होना

यदि आपका किसी एक चीज को खाने का बहुत मन हो रहा है तो इसे क्रेविंग कहते हैं। ऐसे में यदि महिला को भी क्रेविंग हो रही है तो यह महिला के प्रेग्नेंट होने का लक्षण होता है।

उल्टी या जी मिचलाने की समस्या होना

महिला का यदि उल्टी आने का मन हो रहा हो या उल्टी आ रही हो और जी मिचलाने की समस्या हो तो यह लक्षण भी इस बात की और इशारा करता है की महिला का गर्भ ठहर गया है।

कब्ज़

शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण पाचन क्रिया प्रभावित होती है। जिसके कारण महिला को कब्ज़ की समस्या हो सकती है ऐसे में यदि महिला को कब्ज़ की समस्या अधिक हो तो यह लक्षण भी प्रेगनेंसी का ही लक्षण होता है।

तापमान

यदि महिला का गर्भ ठहर गया है तो इस कारण महिला को शरीर के तापमान में भी उतार चढ़ाव महसूस हो सकता है।

यूरिन पास करने की इच्छा में बढ़ोतरी

गर्भावस्था के शुरूआती समय में किडनी का काम बढ़ जाता है ऐसे में महिला की यूरिन पास करने की इच्छा में बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में यदि महिला की बार बार यूरिन पास करने की इच्छा को तो यह भी महिला के प्रेग्नेंट होने का लक्षण होता है।

सिर दर्द

यदि महिला का गर्भ ठहर गया हैं तो बॉडी में होने वाले हार्मोनल के कारण और शरीर में ब्लड फ्लो तेजी से होने के कारण महिला को सिर दर्द की समस्या भी हो सकती है।

ब्रेस्ट में पेन

यदि महिला को स्तनों में कड़ापन या थोड़ा थोड़ा दर्द महसूस हो रहा है तो ऐसा महसूस होना भी प्रेगनेंसी का ही लक्षण होता है। ब्रेस्ट में दर्द होने के साथ महिला को निप्पल के रंग में भी बदलाव नज़र आ सकता है।

मूड स्विंग्स

यदि महिला का गर्भधारण हो गया है तो बॉडी में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण महिला के मूड में बदलाव महसूस हो सकता है।

स्पॉटिंग

यदि महिला को ब्लीडिंग नहीं हो लेकिन हल्के खून के धब्बे महसूस हो तो यह इस बात की और इशारा करता है की निषेचन की प्रक्रिया हो चुकी है और महिला का गर्भ ठहर गया है।

थकावट

यदि महिला शरीर को बहुत थका हुआ सा महसूस करे तो यह लक्षण भी इस बात की और इशारा करता है की महिला का गर्भ ठहर गया है।

तो यह हैं कुछ लक्षण जिन्हे देखकर यह अंदाजा लगाने में मदद मिलती है की महिला का गर्भ ठहर गया है। यदि आप भी पीरियड्स मिस होने से पहले इन लक्षणों को महसूस करते हैं तो समझ जाइए की शायद आपका गर्भ भी ठहर गया है। उसके बाद पीरियड्स मिस होने के पर आप प्रेगनेंसी टेस्ट करके इस न्यूज़ को कन्फर्म कर सकते हैं।

Pregnancy symptoms

प्रेग्नेंट महिला को नवरात्रि के दिनों में इन चीजों से बचना जरुरी होता है?

नवरात्रि नौ दिन की होती है और यह नौ दिन किसी त्यौहार से कम नहीं होते है। नवरात्रि के दिनों में माता रानी के अलग अलग नौ रूपों की पूजा की जाती है। कई लोग नवरात्रि के दिनों में माता रानी के नाम का उपवास करते हैं। कुछ लोग जोड़ा यानी की दो दिन व्रत करते हैं तो कुछ लोग पूरे नौ दिन तक उपवास करते हैं और फिर अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करने के बाद व्रत को खोलते हैं।

कुछ गर्भवती महिलाएं भी नवरात्रि का व्रत करती है ऐसे में महिला के लिए इन दिनों में सावधानी वरतना जरुरी होता है ताकि महिला या शिशु को किसी भी तरह की परेशानी नहीं हो। तो आइये अब इस आर्टिकल में हम गर्भवती महिला को नवरात्रि व्रत के दौरान किन किन चीजों से बचना चाहिए उसके बारे में विस्तार से बताने जा रहें हैं।

पूरा दिन भूखी न रहें

प्रेगनेंसी के दौरान महिला को अपनी सेहत के साथ शिशु की सेहत का ध्यान रखना भी जरुरी होता है। ऐसे में गर्भवती महिला इस बात का ध्यान रखें की महिला पूरे दिन भूखी न रहें बल्कि हर दो घंटे में कुछ न कुछ खाती रहें। साथ ही महिला जो भी खाएं वो पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए। ऐसा करने से महिला की व्रत करने की इच्छा भी पूरी हो जाती है और महिला को भी एनर्जी से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

निर्जला व्रत नहीं करें

प्रेग्नेंट महिला व्रत के दिन पानी व् अन्य तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करें और प्यासी न रहें। क्योंकि यदि महिला के शरीर में पानी की कमी हो जाती है तो इसके कारण भी महिला को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में शरीर में तरल पदार्थों की कमी को पूरा करने के लिए महिला जूस, नारियल पानी, निम्बू पानी, पानी, छाछ आदि का सेवन करती रहें।

अपने आप को नहीं थकाएं

गर्भवती महिला को आराम करते रहना चाहिए ताकि महिला को थकान व् कमजोरी नहीं हो और इसके लिए महिला को जरुरत से ज्यादा काम करने से बचना चाहिए। साथ ही महिला काम करते समय यदि थकावट महसूस हो तो काम नहीं करना चाहिए और आराम से बैठ जाना चाहिए।

दिक्कत होने पर व्रत नहीं करें

यदि महिला पूरी तरह से स्वस्थ है और व्रत कर रही है लेकिन व्रत के दौरान खान पान में आये बदलाव के कारण महिला को सेहत सम्बन्धी परेशानियां अधिक हो रही है। तो ऐसे में महिला को व्रत को आगे नहीं रखना चाहिए और व्रत खोल लेना चाहिए। क्योंकि दिक्कत होने पर व्रत रखने से महिला की दिक्केतिं बढ़ सकती है जिसके कारण शिशु को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

वजन बढ़ाने वाली चीजें नहीं खाएं

आलू ज्यादा खाने, तले हुए चिप्स का ज्यादा सेवन, पूरी ज्यादा खाने, मीठी चीजों का अधिक सेवन करने आदि की वजह से महिला का वजन जरुरत से ज्यादा बढ़ सकता है साथ ही ब्लड में शुगर लेवल भी बढ़ सकता है। जिसकी वजह से महिला को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है ऐसे में महिला को उन चीजों का सेवन करना चाहिए जो फायदेमंद होने के साथ वजन को नियंत्रित रखने में भी आपकी मदद करें।

ज्यादा बाहर नहीं जाएँ

नवरात्रि के दिनों में कुछ लोग टोने टोटके भी करते हैं ऐसे में गर्भवती महिला को ज्यादा घर से बाहर नहीं जाना चाहिए, चौराहा नहीं तापना चाहिए आदि। क्योंकि ऐसा माना जाता है की टोना टोटका आपके ऊपर गलत असर डाल सकता है।

तो यह हैं कुछ चीजें जिनसे गर्भवती महिला को नवरात्रि के दिनों में बचना चाहिए। ऐसे में यदि आप भी प्रेग्नेंट हैं और आप भी नवरात्रि के उपवास करने जा रही हैं तो आपको भी इन चीजों से बचना चाहिए।